8087 GI/2022

(1)

रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99

REGD. No. D. L.-33004/99

xxxGIDHxxx

xxxGIDExxx

असाधारण

EXTRAORDINARY

भाग II—अनुभाग 3क

PART II—Section 3A

प्राजधकार से प्रकाजित

PUBLISHED BY AUTHORITY

जिजध और न्याय मंत्रालय

(जिधायी जिभाग)

रािभाषा खण्ड

नई दिल्ली, 25 निम् बर, 2022

दि लक्षद्वीप को-ऑपरेटिि सोसाइिीि रेगुलेिन, 2022 का जिन्िी अनुिाि, राष्ट्रपजत के प्राजधकार से, प्रकाजित दकया िाता िै

और रािभाषा अजधजनयम, 1963 (1963 का 19 ) की धारा 5 की उपधारा (1) के खण्ड (ख) के अधीन, यि जिन्िी में उसका प्राजधकृत

पाठ समझा िाएगा :—

MINISTRY OF LAW AND JUSTICE

(LEGISLATIVE DEPARTMENT)

OFFICIAL LANGUAGES WING

New Delhi, the 25th November, 2022

The translation in Hindi of the Lakshadweep Co-operative Societies Regulation, 2022 is hereby published

under the authority of the President and shall be deemed to be the authoritative text thereof in Hindi under clause (b)

of sub-section (1) of section 5 of the Official Languages Act, 1963 (19 of 1963):—

सं. 04]

नई दिल्ली, मंगलिार, दिसम् बर 6, 2022/अग्रिायण 15, 1944

[खण्ड. XLV

No. 04]

NEW DELHI, TUESDAY, DECEMBER 6, 2022/AGRAHAYANA 15, 1944

[Vol. XLV

सी.जी.-डी.एल.-अ.-06122022-240826

CG-DL-E-06122022-240826

सी.जी.-डी.एल.-अ.-06122022-240826

CG-DL-E-06122022-240826

2

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

लक्षद्वीप सिकारी सोसाइिी जिजनयम, 2022

(2022 का जिजनयम संखयांक 4)

भारत गणराज्य के जतित्तरिें िषष में राष्ट्रपजत द्वारा प्रखयाजपत ।

लक्षद्वीप संघ राज्यक्षेत्र में सिकारी सोसाइटियों के रजिस्ट्रीकरण, जनगमन

और प्रबंधन के जलए और लक् कािीि, जमनीकोय और अमीनिीिी

आइसलैंड को-ऑपरेटिि सोसायिी जिजनयम, 1960

का जनरसन करने और उससे संबंजधत

या आनुषंजगक जिषयों

के मामले के जलए

जिजनयम

राष्ट्रपजत, संजिधान के अनुच्छेि 240 द्वारा प्रित्त िजियों

का प्रयोग करते हुए उनके द्वारा बनाए गए जनम् नजलजखत

जिजनयम को प्रखयाजपत करते िै:—

अध्याय 1

प्रारंजभक

1. संजक्षप्त नाम, जिस्ट्तार और प्रारम्भ— (1) इस

अजधजनयम का संजक्षप्त नाम लक्षद्वीप सिकारी सोसायिी

जिजनयम, 2022 िै ।

(2) इसका जिस्ट्तार संपूणष लक्षद्वीप संघ राज्यक्षेत्र पर

िोगा।

(3) यि उस तारीख को प्रिृत्त िोगा, िो प्रिासक,

रािपत्र में अजधसूचना द्वारा, जनयत करे ।

2. पटरभाषाएं— इस जिजनयम में, िब तक दक संिभष से

अन्यथा अपेजक्षत न िो –

(1) ''प्रिासन" से लक्षद्वीप संघ राज्यक्षेत्र का प्रिासन

अजभप्रेत िै ;

(2) "प्रिासक" से राष्ट्रपजत द्वारा संजिधान के

अनुच्छेि 239 के अधीन जनयुि दकया गया लक्षद्वीप संघ

राज्यक्षेत्र का प्रिासक अजभप्रेत िै ;

(3) "लेखापरीक्षक" से एक प्रमाजणत लेखापरीक्षक

अजभप्रेत िै, िो अजधकृत िै और सोसाइिी के खातों की

लेखा परीक्षा के जलए रजिस्ट्रार से अपील करता िै ;

स्ट्पष्टीकरण-- इस खंड के प्रयोिनों के जलए,

अजभव्यजि "प्रमाजणत लेखा परीक्षा’’ से एक ऐसा व्यजि

अजभप्रेत िै िो जिजित अिषता रखता िै और धारा 84 के

अधीन लेखापरीक्षक के रूप में अजधकृत रजिस्ट्रार िै ;

(4) "अजधकृत व्यजि" से इस जिजनयम के उपबंधों के

अधीन कारषिाई करने के जलए रजिस्ट्रार द्वारा जिजधित

अजधकृत कोई भी व्यजि अजभप्रेत िै ;

(5) "बोडष" से जनिेिक-मंडल या दकसी सिकारी

सोसाइिी का िासी जनकाय अजभप्रेत िै, जिसे दकसी भी

नाम से िाना िाता िै, जिसे दकसी सोसायिी के मामलों

के प्रबंधन का जनिेि और जनयंत्रण सौंपा िाता िै ;

(6) "उप-जिजधयों" से तत्समय प्रिृत्त रजिस्ट्रीकृत

उप-जिजधयां अजभप्रेत िैं और इसमें ऐसी उप-जिजधयों का

एक रजिस्ट्रीकृत संिोधन सजम्मजलत िै ;

(7) "केंद्रीय बैंक" से एक सिकारी बैंक अजभप्रेत िै,

जिसके उद्देश्यों में अन्य सोसाइटियों को ऋण िेने के जलए

जनजध का सृिन सजम्मजलत िै, दकन्तु इसमें ििरी

सिकारी बैंक सजम्मजलत निीं िै ;

(8) "सोसाइिी" से दकसी सोसाइिी की प्रबंध

सोसाइिी या अन्य िासी जनकाय अजभप्रेत िै, जिसे

दकसी सोसाइिी के मामलों के प्रबंधन का जनिेि और

जनयंत्रण सौंपा गया िै ;

(9) "कंपनी" से कंपनी अजधजनयम, 2013 (2013

का 18) में पटरभाजषत कंपनी अजभप्रेत िै और इसमें

दकसी भी संगठन का जिकास के प्रयोिन के जलए दकसी

केंद्रीय, राज्य या प्रांतीय अजधजनयम द्वारा गटठत या

स्ट्थाजपत एक बैंककंग कंपनी, कोई बोडष, जनगम या अन्य

कॉपोरेि जनकाय सजम्मजलत िै ;

(10) "सिकारी बैंक" से इस जिजनयम के अधीन

रजिस्ट्रीकृत सोसाइिी अजभप्रेत िै और बैंककंग का

व्यिसाय करना अजभप्रेत िै, िैसा दक बैंककंग जिजनयमन

अजधजनयम, 1949 (1949 का 10) की धारा 5 की

उपधारा (1) के खंड (बी) में पटरभाजषत दकया गया िै ;

(11) "सिकारी जनिाषचन प्राजधकरण" से धारा 68

के अधीन प्रिासक द्वारा गटठत एक प्राजधकरण अजभप्रेत

िै ;

(12) "सिकारी सोसाइिी " से लक्षद्वीप के संघ

राज्यक्षेत्र में तत्समय प्रिृत्त सिकारी सोसाइटियों से

संबंजधत जिजिजधयों और जिजधयों या दकसी अन्य जिजध

के अधीन रजिस्ट्रीकृत या रजिस्ट्रीकृत मानी गई

सोसाइिी अजभप्रेत िै ;

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

3

(13) "िमा बीमा जनगम" से िमा बीमा और ऋण

गारंिी जनगम अजधजनयम, 1961 (1961 का 47) की

धारा 3 के अधीन स्ट्थाजपत िमा बीमा ऋण गारंिी

जनगम अजभप्रेत िै;

(14) "लाभांि" से दकसी सोसाइिी के लाभ में से

दकसी सिस्ट्य को ऐसे सिस्ट्य द्वारा धाटरत िेयरों के

अनुपात में भुगतान की गई राजि अजभप्रेत िै ;

(15) "संघीय सोसाइिी " से एक सोसाइिी, िो--

(क) कम से कम पांच सिस्ट्य जिनमें से स्ट्ियं

सोसाइिी िैं; और

(ख) जिसमें मतिान के अजधकार इस प्रकार

जिजनयजमत िोते िैं दक सिस्ट्य सोसाइटियों के पास

ऐसी सोसाइिी की साधारण बैठक की िोिों की कुल

संखया का कम से कम चार-पााँचिां जिस्ट्सा िो ;

(16) "फमष" से भारतीय भागीिारी अजधजनयम,

1932 (1932 का 9) के अधीन रजिस्ट्रीकृत एक फमष

अजभप्रेत िै ;

(17) “साधारण जनकाय” से संबंजधत सोसाइटियों

की सिस्ट्यता को प्राप्त करने िाले व्यजष्ट या संस्ट्थान

अजभप्रेत िै;

(18) “द्वीप समूि” से लक्षद्वीप संघ राज्य क्षेत्र

अजभप्रेत िै;

(19) “पटरसमापक” से धारा 108 के अधीन जनयुि

दकया गया व्यजि अजभप्रेत िै;

(20)

''सिस्ट् य

से

सिकारी

सोसाइिी

के

रजिस्ट्रीकरण के जलए आिेिन करने िाला िि व् यजि

अजभप्रेत िै िो रजिस्ट् रेिन के पश् चात पश् चात् िती रूप में

रजिस्ट्रीकृत िै या सिस्ट् यता के जलए जिसमें सम् यक रूप

से स्ट् िीकृत व् यजि िै और नाजमत संगम या सिानुभूजत

रखने िाला व् यजि सजम्मजलत िै ;

(21) “राष्ट्रीय बैंक” से राष्ट्रीय कृजष और ग्रामीण

जिकास बैंक अजधजनयम, 1981 (1981 का 61) की

धारा 3 के अधीन स्ट्थाजपत राष्ट्रीय कृजष और ग्रामीण

जिकास बैंक अजभप्रेत िै;

(22) “अजधकारी” से उसके ऊपर जिजधयों के

अनुसार ऐसी सोसाइिी के दकसी कायाषलय के जलए

सोसाइिी द्वारा जनिाषजचत या जनयुि दकया गया व्यजि

अजभप्रेत िै जिसके अंतगषत इस जिजनयम,जनयम या

उपजनयम के अधीन जनिाषजचत या जनयुि दकया गया

ऐसी सोसाइिी के कारोबार के संबंध में जनिेि िेने के

जलए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सभापजत, उपसभापजत, प्रबंध

जनिेिक, मिाजनिेिक, प्रबंधक, सजचि, रोकज़िया,

सजमजत का सिस्ट्य और कोई व्यजि अजभप्रेत िै;

(23) "कायषिािक’’ से सिकारी सोसाइिी के एक

अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सजचि और रोकज़िया अजभप्रेत िैं और

इसमें सिकारी सोसाइिी के बोडष द्वारा चुने िाने िाले

दकसी भी अन्य व्यजि को सजम्मजलत करता िै ;

(24) "िासकीय समनुिेजिती’’ से धारा 22 की

उपधारा (2) के अधीन कोई व्यजि या व्यजियों का

जनकाय अजभप्रेत िै ;

(25) ‘‘रािपत्र’’ से लक्षद्वीप संघ राज्यक्षेत्र का

रािपत्र अजभप्रेत िै ;

(26) ‘‘जिजित’’ से इस जिजनयम के अधीन बनाए

गए जनयम द्वारा जिजित दकया गया अजभप्रेत िै ;

(27) "छूि" से दकसी सोसाइिी के लाभ में से दकसी

सिस्ट्य या दकसी अन्य व्यजि को, सोसाइिी के कारबार

में उसके योगिान के आधार पर नकि या िस्ट्तु के रूप में

दकया गया कोई भुगतान अजभप्रेत िै ;

(28) "रजिस्ट्रार" से इस जिजनयम के अधीन

सिकारी सोसाइटियों के रजिस्ट्रार के रूप में जनयुि

व्यजि अजभप्रेत िै और इसमें एक अजतटरि रजिस्ट्रार,

संयुि रजिस्ट्रार, उप रजिस्ट्रार और सिायक रजिस्ट्रार

सजम्मजलत िैं ;

(29) "टरज़िष बैंक" से भारतीय टरज़िष बैंक

अजधजनयम, 1934 (1934 का 2) की धारा 3 की

उपधारा (1) के अधीन गटठत भारतीय टरज़िष बैंक

अजभप्रेत िै ;

(30) "जनयम'’ से इस जिजनयम के अधीन बनाए

गए जनयम अजभप्रेत िैं ;

(31) "सोसाइिी’’ से इस जिजनयम के अधीन

रजिस्ट्रीकृत या रजिस्ट्रीकृत समझी िाने िाली सिकारी

सोसाइिी अजभप्रेत िै ;

(32) "सीजमत िाजयत्ि िाला सोसाइिी " से एक

ऐसी सोसाइिी अजभप्रेत िै जिसके सिस्ट्यों की िेयता

उसकी उप-जिजधयों द्वारा सीजमत िै ;

(33) "अजधकरण" से संघ राज्यक्षेत्र सिकारी

अजधकरण की धारा 123 के अधीन गटठत दकया गया

संघ राज्यक्षेत्र सिकारी अजधकरण अजभप्रेत िै ;

(34) "संघ राज्यक्षेत्र’’ से लक्षद्वीप संघ राज्यक्षेत्र

अजभप्रेत िै ।

अध्याय 2

रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रीकरण

3. रजिस्ट्रार और अजधकारी और उनकी िजियां—(1)

इस जिजनयम के प्रयोिनों को पूरा करने के जलए, प्रिासक, संघ

राज्यक्षेत्र के जलए सिकारी सोसाइटियों के रजिस्ट्रार नाम से

ज्ञात एक व्यजि को जनयुि करेगा ।

(2) इस अजधजनयम के अधीन रजिस्ट्रार कृत्यों में

सिायता करने के जलए प्रिासक, ऐसे अजतटरि रजिस्ट्रारों,

संयुि रजिस्ट्रारों, उप रजिस्ट्रारों, सिायक रजिस्ट्रारों और ऐसे

पि के साथ अन्य व्यजियों को जनयुि कर सकता िै िो िि

उजचत समझे।

(3) प्रिासक, जिजनयम के अधीन रजिस्ट्रार के सभी या

दकन् िीं िजियों से उपजनयम (2) के अधीन साधारण या जििेष

आिेि द्वारा ऐसे व्यजि या व्यजियों को जनयुि कर सकता िै।

4

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(4) उपधारा (2) के अधीन जनयुि दकया गया प्रत्येक

व्यजि रजिस्ट्रार के साधारण दििाजनिेिों और अधीक्षण और

जनयंत्रण के अधीन कायष करेगा।

4. सोसाइिी जिसे रजिस्ट्रीकृत दकया िा सकता िै—एक

सोसाइिी जनम्नजलजखत कारणों से स्ट्थाजपत की िाएगी : —

(i) सरकारी जसद्ांतों के अनुसार उसके सिस्ट्यों या

िनजित में आर्थषक जितों या साधारण कल्याण का

संिधषन करना ; या

(ii) दकसी ऐसी सोसाइिी के प्रचालन को सुकर

बनाने के जलए इस जिजनयम के अधीन रजिस्ट्रीकृत दकया

िा सकता िै :

परंतु कोई भी सोसाइिी रजिस्ट्रीकृत निीं की िाएगी

यदि उसके आर्थषक रूप से कमिोर िोने की संभािना िै या

उसका रजिस्ट्रीकरण दकसी अन्य सोसाइिी पर प्रजतकूल प्रभाि

डाल सकता िै, जिरोध दकया गया िै या कायष करना सािषिजनक

नीजत के उल्लंघन में िोने की संभािना िै या िो िो सकता िै

सिकारी आंिोलन के जिकास पर या जिसका रजिस्ट्रीकरण

नीजत जनिेिों के जिपरीत िो सकता िै, िो संघ राज्यक्षेत्र

प्रिासन से िो सकता िै ।

5. सीजमत अथिा असीजमत िाजयत्ि के साथ

रजिस्ट्रीकरण—दकसी सोसाइिी को सीजमत अथिा असीजमत

िाजयत्ि के साथ रजिस्ट्रीकृत दकया िा सकता िै ।

6. रजिस्ट्रीकरण की ितें—(1) कोई भी सोसाइिी,

संघीय सोसाइिी से जभन्न, इस जिजनयम के अधीन रजिस्ट्रीकृत

निीं िोगी, जिसमें कम से कम िस व्यजि या ऐसे उच्च व्यजि

सजम्मजलत िोते िैं, िो रजिस्ट्रार दकसी सोसाइिी के उद्देश्यों

और आर्थषक िाजयत्ि का ध्यान रखते हुए और सिकारी

आंिोलन के जिकास के संबंध में िो सकते िैं। सोसाइटियों (ऐसे

प्रत्येक व्यजि एक अलग पटरिार के सिस्ट्य की मांग करते िैं) के

एक िगष के जलए समय-समय पर अिधाटरत करें िो जिजनयम के

अधीन सिस्ट्य बनने के जलए अर्िषत िैं और िो ऐसी सोसाइिी

के संचालन के क्षेत्र में रिते िैं :

परंतु रजिस्ट्रार सोसाइिी या सोसाइटियों के िगष के

रजिस्ट्रीकरण के जलए मानिंडों और ितों को जिजनर्िष्ट कर

सकता िै।

(2) असीजमत िाजयत्ि िाली कोई भी सोसाइिी तब तक

रजिस्ट्रीकृत निीं िोगी िब तक दक सोसाइिी के सभी व्यजि

एक िी द्वीप या द्वीपों के एक िी समूि में जनिास न करें।

स्ट्पष्टीकरण-- इस उपधारा के प्रयोिनों के जलए

अजभव्यजि ‘‘असीजमत िाजयत्ि के साथ सोसाइिी’’ से एक

सोसाइिी, जिसके सिस्ट्य इसके पटरसमाप्त िोने की जस्ट्थजत में िैं,

इसके िाजयत्िों के संबंध में और सोसाइिी की आजस्ट्तयों में ऐसी

कमी में योगिान करने के जलए संयुि रूप से और गंभीर रूप से

उत्तरिायी िैं ।

(3) कोई भी संघीय सोसाइिी तब तक रजिस्ट्रीकृत निीं

िोगी िब तक दक उसमें उसके सिस्ट्यों के रूप में कम से कम

पांच सोसाइटियां न िों ।

(4) इस जिजनयम में दकसी बात के िोते हुए भी, इस

जिजनयम के प्रारंभ से पूिष दकए गए दकसी भी सोसाइिी के

रजिस्ट्रीकरण को प्रभाजित करने के जलए निीं समझा िाएगा ।

(5) िब्ि "सीजमत’’ या ‘‘असीजमत’’, सीजमत या

असीजमत िेयता िाली सोसाइिी के नाम पर अंजतम िब्ि िोगा,

यथाजस्ट्थजत, िो इस जिजनयमन के अधीन रजिस्ट्रीकृत या

रजिस्ट्रीकृत माना िाता िै।

स्ट्पष्टीकरण-- इस धारा के प्रयोिनों के जलए “कुिुंब के

सिस्ट्य” से पत्नी, पजत, जपता, माता, िािा-िािी, सौतेले जपता,

सौतेली माता, पुत्र,पुत्री,सौतेला पुत्र-पुत्री, पुत्री, पोता-पोती,

भाई-बिन, छोिा भाई, छोिी बिन और भाई की पत्नी या छोिा

भाई अजभप्रेत िै ।

7. रजिस्ट्रेिन के रूप में ितों से सोसाइटियों को छूि

प्रिान करने की िजि—इस जिजनयम में दकसी भी बात के िोते

हुए भी, प्रिासक, प्रत्येक मामले में जििेष आिेि कर सकेगा

और अजभजलजखत दकए िाने िाले कारणों के जलए, रजिस्ट्रेिन

के रूप में इस जिजनयम की दकन् िीं अपेक्षाओं से कोई सोसाइिी,

यदि कोई िो िैसा दक उसे अजधरोजपत दकया गया िै ऐसी ितों

के अधीन छूि प्राप्त कर सकता िै।

8. रजिस्ट्रीकरण के जलए आिेिन—(1) रजिस्ट्रीकरण के

प्रयोिनों के जलए जिजित प्रपत्र प्रस्ट्ताजित उप-जिजधयों की चार

प्रजतयों के साथ िोगा और उसके साथ सोसाइिी और िि व्यजि

जिसके द्वारा या जिसकी ओर से, ऐसा आिेिन दकया गया िै,

सोसाइिी के संबंध में ऐसी िानकारी प्रस्ट्तुत करेगा, िैसा दक

रजिस्ट्रार को आिश्यकता िो सकती िै ।

(2) आिेिन पर िस्ट्ताक्षर दकए िाएंगे--

(क) एक संघीय सोसाइिी के अजतटरि दकसी अन्य

सोसाइिी के मामले में, कम से कम िस व्यजियों द्वारा

(ऐसे प्रत्येक व्यजि एक अलग कुिुंब के सिस्ट्य िोने के

नाते) िो इस जिजनयमन के अधीन योग्य िैं ; और

(ख) एक संघीय सोसाइिी के मामले में, कम से कम

पांच सोसाइटियों द्वारा ।

(3) दकसी सोसाइिी की ओर से दकसी आिेिन पर कोई

िस्ट्ताक्षर तब तक िैध निीं िोगा िब तक दक उस पर िस्ट्ताक्षर

करने िाला व्यजि ऐसी सोसाइिी का सिस्ट्य न िो और

सोसाइिी और उसके उपजनयम रजिस्ट्रीकरण के जलए आिेिन

पर उसकी ओर से िस्ट्ताक्षर करने के जलए संकल्प द्वारा अजधकृत

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

5

ऐसी सोसाइिी द्वारा निीं दकया िाता िै; और ऐसे संकल्प की

एक प्रजत आिेिन के साथ संलग्न िै ।

9. अनंजतम रजिस्ट्रीकरण—(1) दकसी सोसाइिी से

रजिस्ट्रीकरण के जलए आिेिन प्राप्त िोने पर,--

(क) यदि रजिस्ट्रार का समाधान िोता िै दक

सोसाइिी ने रजिस्ट्रीकरण के रूप में इस जिजनयम और

जनयम के उपबंधों का पालन दकया िै और इसके उप-

जनयम इस जिजनयम और जिजधयों के जिपरीत निीं िैं,

िि सोसाइिी और उसके उपजनयम को रजिस्ट्रीकृत

करेगा ; तथा

(ख) यदि रजिस्ट्रार की राय िै दक आिेिन धारा 8

की अपेक्षाओं का अनुपालन करता िै, दकन्तु इसके उप-

जनयम इस जिजनयम के उपबंधों और इसके अधीन

बनाए गए जिजधयों के अनुरूप निीं िैं, िि अनंजतम रूप

से सोसाइिी को रजिस्ट्रीकृत कर सकता िै और जलजखत

में एक आिेि द्वारा सोसाइिी को ऐसी ितों के अधीन

ऐसे कायों को करने की अनुमजत िेता िै िो िि आिेि में

जनर्िष्ट कर सकते िैं और जलजखत आिेि द्वारा भी

सोसाइिी को इस संबंध में जिजित अिजध के भीतर,

इसकी उपजिजधयों में संिोधन करने का जनिेि िे सकते

िैं। जिससे उन्िें इस जिजनयम और उसके अधीन बनाए

गए जिजधयों के अनुरूप लाया िा सके ।

(2) िब दकसी सोसाइिी को अनंजतम रूप से रजिस्ट्रीकृत

दकया गया िै, रजिस्ट्रार, उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन

दकए गए आिेि के अनुपालन पर, इसे और इसकी उपजिजधयों

को अंजतम रूप से रजिस्ट्रीकृत करेगा; और आिेि का पालन

करने में इसकी जिफलता पर इसके अनंजतम रजिस्ट्रीकरण को

रद्द कर िेगा :

परंतु दकसी सोसाइिी का अनंजतम रजिस्ट्रीकरण तब तक

रद्द निीं दकया िाएगा िब तक दक ऐसी सोसाइिी को मामले में

सुनिाई का अिसर न दिया गया िो ।

(3) एक अनंजतम रूप से रजिस्ट्रीकृत सोसाइिी को इस

जिजनयम के अधीन रजिस्ट्रीकृत सोसाइिी निीं माना िाएगा ।

(4) दकसी सोसाइिी के रजिस्ट्रीकरण पर, रजिस्ट्रार उसे

रजिस्ट्रीकरण की तारीख से पंद्रि दिनों की अिजध के भीतर

अपने द्वारा िस्ट्ताक्षटरत रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र िारी करेगा ।

(5) उपधारा (4) के अधीन िारी रजिस्ट्रीकरण का

प्रमाणपत्र इस बात का जनणाषयक साक्ष्य िोगा दक उसमें

उजल्लजखत सोसाइिी सम्यक

त: रजिस्ट्रीकृत िै, िब तक दक यि

साजबत निीं िो िाता िै दक रजिस्ट्रीकरण रद्द कर दिया गया िै।

(6) यदि रजिस्ट्रार सोसाइिी को रजिस्ट्रीकृत करने से

इनकार करता िै, तो िि तुरंत अपने जिजनश् चय को कारणों के

साथ उस व्यजि को सूजचत करेगा, जिसने आिेिन पर पिले

िस्ट्ताक्षर दकए िैं ।

10. सोसाइटियों का रजिस्ट्रीकरण—रजिस्ट्रार इस

जिजनयम के अधीन रजिस्ट्रीकृत या रजिस्ट्रीकृत समझी िाने

िाली सभी सोसाइटियों के जिजित प्ररूप में एक रजिस्ट्िर

रखेगा ।

11. कजतपय प्रश् नों पर जिजनश् चय लेने की रजिस्ट्रार

की िजि—िब कोई प्रश् न उठता िै दक क्या इस जिजनयम के

अधीन दकसी सोसाइिी के गठन या रजिस्ट्रीकरण या िारी

रखने या दकसी व्यजि के एक सोसाइिी के सिस्ट्य के रूप में

प्रिेि के प्रयोिन से, एक व्यजि एक कृषक या गैर-कृषक िै, या

क्या कोई िै व्यजि एक िै, एक द्वीप या द्वीपों के समूि में

जनिासी, या िो या िो से अजधक द्वीपों को एक समूि बनाने के

जलए माना िाएगा, या क्या कोई व्यजि दकसी जििेष

िनिाजत, िगष या व्यिसाय से संबंजधत िै, प्रश् न का जिजनश् चय

रजिस्ट्रार द्वारा दकया िाएगा ।

12. सोसाइटियों का िगीकरण—रजिस्ट्रार सभी

सोसाइटियों को ऐसी रीजत से और ऐसे िगों में िगीकृत कर

सकता िै, िैसे . िि ठीक समझे ; और रजिस्ट्रार द्वारा

िगीकरण के दकसी भी िीषष के अधीन अंजतम और सजमजतयों

पर बाध्यकारी िोगा ।

13. उपजिजध सोसाइिी का संिोधन—(1) इस जिजनयम

के अधीन रजिस्ट्रीकृत िोने तक दकसी सोसाइिी की उपजिजधयों

का कोई भी संिोधन मान्य निीं िोगा ।

(2) उपजिजधयों के संिोधन के रजिस्ट्रीकरण के प्रयोिन

के जलए, पाटरत संिोधन की एक प्रजत, सजमजत की एक

साधारण बैठक में, जिजित रीजत में, रजिस्ट्रार को अग्रेजषत की

िाएगी ।

(3) यदि रजिस्ट्रार का समाधान िै दक इस प्रकार

अग्रेजषत संिोधन इस जिजनयम या जिजधयों के प्रजतकूल निीं िै,

तो िि संिोधन को रजिस्ट्रीकृत कर सकता िै:

परन्तु संिोधन को रजिस्ट्रीकृत करने से इंकार करने

िाला कोई भी आिेि सजमजत को सुनिाई का अिसर दिए िाने

के पश् चात पाटरत निीं दकया िाएगा:

परन्तु यि और दक दकसी सोसाइिी की उपजिजधयों के

संिोधन के रजिस्ट् रीकरण के आिेिन का जनस्ट्तारण उसकी प्राजप्त

की तारीख से िो माि के भीतर दकया िाएगा ।

(4) िब रजिस्ट्रार दकसी सोसाइिी की उपजिजधयों में

संिोधन को रजिस्ट्रीकृत करता िै, िि संिोधन के रजिस्ट्रीकरण

की तारीख से पंद्रि दिनों की अिजध के भीतर सोसाइिी को

अपने द्वारा प्रमाजणत संिोधन की प्रजत िारी करेगा, िो दक

इसके रजिस्ट्रीकरण का जनणाषयक साक्ष्य िोगा ।

6

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(5) ििां रजिस्ट्रार दकसी सोसाइिी की उपजिजधयों में

संिोधन को रजिस्ट्िर करने से इंकार करता िै, िि इंकार के

आिेि को उसके कारणों के साथ सोसाइिी के जलए पंद्रि दिनों

की अिजध के भीतर संसूजचत करेगा ।

14. उपजिजधयों में संिोधन को जनिेजित करने की

िजि—(1) यदि रजिस्ट्रार को यि प्रतीत िोता िै दक दकसी

सोसाइिी की उपजिजधयों के संिोधन ऐसी सोसाइिी या

सोसाइिी के जित में आिश्यक या िांछनीय िै इस जिजनयम या

इसके अधीन बनाए गए जिजधयों के उपबंधों से असंगत िैं, और

ऐसी उपजिजधयों में संिोधन आिश्यक िैं, िि जिजित रीजत से

सोसाइिी को ऐसे समय के भीतर संिोधन करने के जलए कि

सकता िै िो िि जिजनर्िष्ट कर सकता िै ।

(2) यदि सोसाइिी इस प्रकार जिजनर्िष्ट समय के भीतर

संिोधन करने में जिफल रिती िै, तो रजिस्ट्रार सोसाइिी को

सुनिाई का अिसर िेने के पश् चात और प्रिासक के पूिष

अनुमोिन से संिोधन को रजिस्ट्रीकृत कर सकता िै और उसके

पश् चात सोसाइिी को उसके द्वारा एक प्रमाजणत प्रजत िारी

करेगा ।

(3) पूिोि रीजत से संिोधन के रजिस्ट्रीकरण की

तारीख से, उपजिजधयों को तिनुसार सम्यक रूप से संिोजधत

माना िाएगा और संिोजधत उपजिजधयां सोसाइिी और उसके

सिस्ट्यों के जलए बाध्यकारी िोंगी ।

15. नाम का पटरितषन—(1) इस जिजनयम के अधीन

बनाई गए जिजधयों के उपबंधों के अधीन, एक सोसाइिी, एक

साधारण बैठक में पाटरत प्रस्ट्ताि द्वारा और रजिस्ट्रार के

अनुमोिन से, अपना नाम पटरिर्तषत कर सकती िै, दकन्तु ऐसे

पटरितषन से दकसी भी अजधकार या िाजयत्ि को प्रभाजित निीं

करेगा। सोसाइिी या इसके दकसी भी सिस्ट्य या ऐसे व्यजियों,

िो सिस्ट्य निीं रि गए िैं, और दकसी भी व्यजि, प्राजधकरण या

न्यायालय के समक्ष लंजबत जिजधक कायषिािी सोसाइिी द्वारा

या उसके जिरुद्, उसके नए नाम के अधीन िारी रखी िा

सकती िै ।

(2) िब कोई सोसाइिी अपना नाम पटरिर्तषत करती िै,

तो रजिस्ट्रार सोसाइिी के रजिस्ट्िर में उसके स्ट्थान पर नया

नाम प्रजिष्ट करेगा, और तिनुसार रजिस्ट्रीकरण के प्रमाणपत्र में

भी संिोधन करेगा ।

16. िाजयत्ि का पटरितषन—(1) इस जिजनयम और इसके

अधीन बनाए गए जिजधयों के उपबंधों के अधीन, सोसाइिी एक

संकल्प पाटरत करके और अपनी उपजिजधयों में संिोधन करके,

अपने िाजयत्ि के प्ररूप या सीमा को बिल सकता िै ।

(2) िब दकसी सोसाइिी ने अपने िाजयत्ि के प्ररूप या

सीमा को बिलने का संकल्प पाटरत दकया िो, िि अपने सभी

सिस्ट्यों और लेनिारों को जलजखत रूप में नोटिस िेगा और इसके

जिपरीत दकसी भी उपजिजध या संजििा में दकसी भी बात के

िोते हुए भी, कोई भी सिस्ट्य या लेनिार, उस पर ऐसे नोटिस

की तामील की तारीख से तीस दिनों की अिजध के िौरान िोगा,

अपने िेयरों, और अपनी िमाराजियों और ऋणों में अपने

जनिेि को िापस लेने का जिकल्प िै और अपनी अन्य बकाया

राजि, यदि कोई िो, के भुगतान की मांग करने के जलए िै ।

(3) कोई भी सिस्ट्य या लेनिार िो उपधारा (2) में

जिजनर्िष्ट अिजध के भीतर अपने जिकल्प का प्रयोग निीं करता

िै, को पटरितषन के जलए सिमजत िी गई समझी िाएगी ।

(4) दकसी सोसाइिी की उपजिजधयों में संिोधन, उसके

िाजयत्ि के प्ररूप या सीमा को पटरिर्तषत करते हुए, रजिस्ट्रीकृत

निीं दकया िाएगा या तब तक प्रभािी निीं िोगा, िब तक या

तो —

(क) सभी सिस्ट्यों और लेनिारों ने पूिोि रूप से

सिमजत िी िै, या सिमजत िी गई समझी गई िै ; या

(ख) उपधारा (2) के अधीन जिकल्प का प्रयोग करने

िाले सिस्ट्यों और लेनिारों के सभी िािों का पूरी तरि

से पालन दकया गया िै।

17. सोसाइटियों का समामेलन, अंतरण, प्रभाग या

संपटरितषन—(1) इस जिजनयम के अधीन बनाए गए जिजधयों के

उपबंधों के अधीन और रजिस्ट्रार की पूिष मंिूरी, एक सोसाइिी

िो-जतिाई बहुमत से पाटरत संकल्प द्वारा प्रयोिन के जलए

उपजस्ट्थत सिस्ट्यों के और एक जििेष साधारण सभा में मतिान

कर सकती िै, यि जिजनश् चय करेगा दक--

(क) बहुराज्य सिकारी सजमजतयां अजधजनयम, 2002 के

अधीन दकसी अन्य सोसाइिी या रजिस्ट्रीकृत सोसाइिी के साथ

समामेलन करने के जलए ;

(ख) अपनी आजस्ट्तयों और िेनिाटरयों को पूणषरूप से या

आंजिक रूप से दकसी अन्य सोसाइिी में स्ट्थानांतटरत करने के

जलए ;

(ग) स्ट्ियं को िो या िो से अजधक सोसाइटियों में

जिभाजित करने के जलए ;

(घ) स्ट्ियं को िूसरे िगष में बिलने के जलए ; या

(ड.) अपनी िस्ट्तुओं को बिलने के जलए ।

(2) ििां उपधारा (1) में जनर्िष्ट समामेलन,

स्ट्थानांतरण, जिभािन या संपटरितषन में दकसी सोसाइिी की

िेनिाटरयों का दकसी अन्य सोसाइिी को िस्ट्तांतरण सजम्मजलत

िै, रजिस्ट्रार सोसाइिी के संकल्प को तब तक मंिूरी निीं िेगा

िब तक दक िि संतुष्ट न िो दक--

(i) सोसाइिी ने ऐसे संकल्प को पाटरत करने के

पश् चात , अपने सभी सिस्ट्यों, लेनिारों और अन्य

व्यजियों को जलजखत रूप में नोटिस दिया िै जिनके जित

प्रभाजित िोने की संभािना िै (इसे इसमें इसके पश् चात

इस धारा में "अन्य इच्छुक व्यजि" के रूप में किा गया

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

7

िै) उन्िें ऐसे नोटिस की प्राजप्त की तारीख से एक मिीने

के भीतर, दकसी भी नई सोसाइिी के सिस्ट्य बनने, या

समामेजलत या संपटरिर्तषत सोसाइिी में अपनी सिस्ट्यता

िारी रखने या इसके िेयरों में अपने जनिेि को िापस

लेने, अपनी िमा राजि को िापस लेने और ऋण और

उनके अन्य िेय राजि के भुगतान की मांग, यदि कोई िो,

का जिकल्प चुनने का जिकल्प िै ;

(ii) सभी सिस्ट्यों और लेनिारों और अन्य इच्छुक

व्यजियों ने जिजनश् चय के जलए सिमजत िी िै या खंड (i)

में जिजनर्िष्ट अिजध के भीतर जिकल्प का प्रयोग करने में

जिफल रिने के कारण इसके जलए सिमजत िी गई िै;

और

(iii) जनर्िष्ट अिजध के भीतर जिकल्प का प्रयोग

करने िाले सिस्ट्यों और लेनिारों और अन्य इच्छुक

व्यजियों के सभी िािों का पूणष रूप से अनुपालन दकया

गया िै ।

(3) संपजत्त िस्ट्तांतरण अजधजनयम, 1882, (1882

का 4) या भारतीय रजिस्ट्रीकरण अजधजनयम, 1908

(1908 का 16) में अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए भी,

जिभािन या संपटरितषन की जस्ट्थजत में, नई सजमजतयों का

रजिस्ट्रीकरण या, यथाजस्ट्थजत, पटरिर्तषत सोसाइिी का

और समामेलन की जस्ट्थजत में, समामेलन पर, समामेलन

से संबंजधत सोसाइटियों का संकल्प, मूल सोसाइिी या

समामेलन सोसाइटियों की आजस्ट्तयों और िाजयत्िों को

यथाजस्ट्थजत, नई सोसाइटियों या पटरिर्तषत या

समामेजलत सोसाइिी में जनजित करने के जलए पयाषप्त

संप्रेषण िोगा ।

(4) इस धारा के अधीन दकए गए समामेलन,

स्ट्थानांतरण, जिभािन या संपटरितषन से इस प्रकार समामेजलत

सोसाइटियों या जिभाजित या पटरिर्तषत या िस्ट्तांतरण, या

िोषपूणष, दकसी भी जिजधक कायषिािी को िारी रखा या आरंभ

दकया िा सकता िै िो दक समामेजलत या जिभाजित या

पटरिर्तषत िो गई िै और तिनुसार ऐसी जिजधक कायषिािी

िारी रखी िा सकती िै या आरंभ की िा सकती िै या

यथाजस्ट्थजत, समामेजलत सोसाइिी, संपटरिर्तषत सोसाइिी, नई

सजमजतयों या अंतटरती के जिरुद् सोसाइिी के दकसी भी

अजधकार या िाजयत्ि पर कोई प्रभाि निीं प़िेगा ।

18. समामेलन और पुन: संगठन को लोकजित, आदि में

सोसाइटियों को जनिेजित करने की िजि—(1) ििां रजिस्ट्रार

का समाधान िो दक िनजित में या सिकारी आंिोलन के जित

में, या दकसी भी सोसाइिी के उजचत प्रबंधन को िाजसल करने के

प्रयोिन से यि आिश्यक िै दक िो या िो से अजधक सोसाइटियों

को समामेजलत दकया िाना चाजिए या दक दकसी भी सोसाइिी

को दफर से संगटठत दकया िाना चाजिए, दफर, धारा 17 में

अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए भी ककंतु इस धारा के उपबंधों

में सोसाइटियों के अधीन, रजिस्ट्रार, ऐसी संघीय सोसाइिी से

परामिष करने के पश् चात , िो सािषिजनक जित िो सकता िै, इस

संबंध में रािपत्र में प्रकाजित आिेि प्रिासक द्वारा अजधसूजचत

दकया िा सकता िै, यथाजस्ट्थजत, इन सोसाइटियों के एकल

सोसाइिी में समामेलन के जलए या उस सोसाइिी के पुनगषठन के

जलए, ऐसे संजिधान, संपजत्त के अजधकार, जितों और प्राजधकरणों

और ऐसी िेनिाटरयों के साथ प्रिान करता िै, कतषव्यों और

िाजयत्िों के रूप में िो आिेि में जिजनर्िष्ट दकया िा सकता िै ।

(2) उपधारा (1) में जनर्िष्ट आिेि नए समामेजलत या

पुनगषटठत सोसाइिी की प्रबंधन सजमजत या दकसी अन्य सजमजत

के गठन के जलए भी उपबंध कर सकता िै, िो व्यजि िोंगे, या

बने रिेंगे, ऐसी सजमजत के अजधकारी और िि अिजध जिसके

पश् चात ऐसी सजमजत या सजमजतयों का पुनगषठन दकया िा

सकता िै ।

(3) इस धारा के अधीन कोई आिेि तब तक निीं दिया

िाएगा िब तक, —

(क) प्रस्ट्ताजित आिेि के प्रारूप की एक प्रजत सोसाइिी

या प्रत्येक संबंजधत सोसाइिी को भेि िी गई िै ; और

(ख) रजिस्ट्रार ने ऐसी अिजध (जिस तारीख से एक

मिीने से कम निीं िो सकता िै िैसा दक पूिोि आिेि की प्रजत

सोसाइिी को प्राप्त हुई थी) के भीतर सोसाइिी या दकसी सिस्ट्य

या उसके सिस्ट्यों के िगष से या दकसी लेनिार या लेनिारों के

िगष से प्राप्त सुझािों और आपजत्तयों पर जिचार दकया िै िैसा

दक रजिस्ट्रार उस संबंध में जनयत कर सकता िै, और यदि

आिश्यक िो, तो ऐसे सुझािों और आक्षेपों को ध्यान में रखते

हुए उसमें संिोधन दकया िै ।

(4) उपधारा (1) में जनर्िष्ट आिेि में ऐसे आकजस्ट्मक,

पटरणामी और पूरक उपबंध अंतर्िष्ट िो सकते िैं, िो रजिस्ट्रार

की राय में समामेलन या पुनसंगठन को प्रभािी बनाने के जलए

आिश्यक िो सकते िैं ।

(5) इस प्रकार समामेजलत प्रत्येक सोसाइिी के प्रत्येक

सिस्ट्य को नई समामेजलत सोसाइिी का सिस्ट्य माना िाएगा

और इस प्रकार पुनगषटठत सोसाइिी के प्रत्येक सिस्ट्य को नई

पुनगषटठत सोसाइिी का सिस्ट्य माना िाएगा और ऐसे सभी

सिस्ट्यों के पास संबंजधत नई सोसाइटियों के सिस्ट्यों के सभी

अजधकार, जििेषाजधकार और िाजयत्ि िोंगे:

परन्तु इस प्रकार समामेजलत या पुनगषटठत नई सोसाइिी

का कोई भी सिस्ट्य, ऐसी अिजध के भीतर और ऐसी रीजत से,

िो जिजित की िाए, नई सोसाइिी की सिस्ट्यता से त्यागपत्र िे

सकता िै और ऐसे त्यागपत्र पर िि सोसाइिी में अपना जिस्ट्सा

िापस लेने और कोई भी अन्य बकाया और जित का िकिार

िोगा ।

8

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(6) दकसी भी सोसाइिी या सोसाइटियों के संबंध में

उपधारा (1) के अधीन एक आिेि िारी करने पर, तत्समय

प्रिृत्त दकसी भी जिजध में अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए,

यथाजस्ट्थजत, समामेलन सजमजतयों की सभी संपजत्त, अजधकार

और िेनिाटरयां, या, यथाजस्ट्थजत, मूल सोसाइिी जिसे पुनगषटठत

दकया गया िै, और नई समेदकत सोसाइिी में जनजित िोगी, या,

यथाजस्ट्थजत, नई पुनगषटठत सोसाइिी को स्ट्थानांतटरत िो

िाएगी ।

(7) धारा 17 की उपधारा (3) और (4) के उपबंध और

धारा 19 के उपबंध इस धारा के अधीन सजमजतयों के एकीकरण

या पुनगषठन के संबंध में इस प्रकार लागू िोंगे िैसे दक,--

(क) समामेलन का आिेि समामेलन से संबंजधत

सोसाइटियों का एक संकल्प था ; और

(ख) मूल सोसाइिी को धारा 17 के अधीन

पुनगषटठत दकया गया था ।

19.

जनरस्ट्तीकरण

समामेजलत,

जिभाजित

या

संपटरिर्तषत सोसाइटियां—ििां िो या िो से अजधक

सोसाइटियों को समामेजलत दकया गया िै, या एक सोसाइिी को

जिभाजित या संपटरिर्तषत दकया गया िै, यथाजस्ट्थजत, ऐसी

सोसाइटियों या सोसाइिी का रजिस्ट्रीकरण, यथाजस्ट्थजत, नई

सोसाइिी या सोसाइटियों के रजिस्ट्रीकरण की तारीख को रद्द

कर दिया िाएगा ।

20. सोसाइिी का पटरसमापक— ििां समझौता या

व्यिस्ट्था प्रस्ट्ताजित िै--

(क) एक सोसाइिी और उसके लेनिारों के मध्य; या

(ख) एक सोसाइिी और उसके सिस्ट्यों के मध्य,

रजिस्ट्रार, सोसाइिी या दकसी सिस्ट्य या सोसाइिी के

दकसी भी लेनिार के आिेिन पर, या दकसी सोसाइिी के

मामले में, जिसे पटरसमापक का आिेि दकया िा रिा िै,

सोसाइिी को जिजित रीजत में आिेि िे सकता िै ।

21. रजिस्ट्रीकरण का जनरस्ट्तीकरण—(1) रजिस्ट्रार

दकसी सोसाइिी के रजिस्ट्रीकरण को जनरस्ट्त करने का आिेि

िेगा यदि िि अपनी संपूणष आजस्ट्तयों और िेनिाटरयों को दकसी

अन्य सोसाइिी को िस्ट्तांतटरत करता िै, या दकसी अन्य

सोसाइिी के साथ समामेजलत करता िै, या स्ट्ियं को िो या

अजधक सोसाइटियों में जिभाजित करता िै, या यदि इसके

मामले समाप्त िो गए िैं या यि अपने रजिस्ट्रीकरण के उजचत

समय के भीतर व्यिसाय िुरू निीं दकया िै या कायष करना बंि

कर दिया िै:

परंतु दकसी सोसाइिी का रजिस्ट्रीकरण तब तक जनरस्ट्त

निीं दकया िाएगा िब तक दक ऐसी सोसाइिी को मामले में

सुनिाई का अिसर निीं दिया गया िो ।

(2) उपधारा (1) के अधीन दकया गया आिेि रािपत्र में

प्रकाजित दकया िाएगा।

(3) सोसाइिी, जनरस्ट्त करने के ऐसे आिेि की तारीख से,

भंग समझी िाएगी और एक कॉपोरेि जनकाय के रूप में

अजस्ट्तत्ि में निीं रिेगी ।

22. सोसाइटियों का पुन: रजिस्ट्रीकरण करना—(1)

यदि रजिस्ट्रार इस बात से संतुष्ट िै दक आिेिकों द्वारा दकए गए

गलत प्रजतजनजधत्ि पर कोई सोसाइिी रजिस्ट्रीकृत िै, या ििां

सोसाइिी का काम पूरा िो गया िै या समाप्त िो गया िै या

जिन प्रयोिनों के जलए सोसाइिी को रजिस्ट्रीकृत दकया गया िै,

या कोई भी "बैंक", "बैंककंग", "बैंकर" या "बैंक" िब्ि के दकसी

अन्य व्युत्पन्न िब्ि का प्रयोग करते हुए प्राथजमक कृजष सिकारी

ऋण सजमजत सेिा निीं कर रिी िै, िि सोसाइिी को सुनिाई

का अिसर िेने के पश् चात सोसाइिी का रजिस्ट्रीकरण करें ।

(2) िब उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन दकसी

सोसाइिी का रजिस्ट्रीकरण रद्द िो िाता िै, तो रजिस्ट्रार,

तत्समय प्रिृत्त इस जिजनयम या दकसी अन्य जिजध में अंतर्िष्ट

दकसी बात के िोते हुए भी, ऐसे आकजस्ट्मक और पटरणामी

आिेि िे सकता िै जिसके अंतगषत िासकीय समनुिेजिती की

जनयुजि के रूप में पटरजस्ट्थजतयों की अपेक्षा िो सकती िै ।

(3) इस जिजनयम के अधीन बनाए गए जिजधयों के

अधीन, िासकीय समनुिेजिती संपजत्त, आजस्ट्तयों, पुस्ट्तकों,

अजभलेखों और अन्य िस्ट्तािेिों का प्रभार लेने की तारीख से

एक िषष की अिजध के भीतर आजस्ट्तयों का एिसास करेगा और

िेनिाटरयों को समाप्त करेगा, जिसकी अिजध, रजिस्ट्रार के

जििेक पर, समय-समय पर बढाई िा सकती िै, तथाजप, कुल

अिजध कुल जमलाकर तीन िषष से अजधक निीं िै ।

(4) िासकीय समनुिेजिती को ऐसे पाटरश्रजमक और भत्ते

का भुगतान दकया िाएगा िो जिजित दकया िाए और िि

जिजित पाटरश्रजमक या भत्तों से परे दकसी भी पाटरश्रजमक का

िकिार निीं िोगा ।

23. सोसाइटियों की भागीिारी—(1) कोई भी िो या िो

से अजधक सोसाइटियां, रजिस्ट्रार के पूिष अनुमोिन से प्रत्येक

ऐसी सोसाइिी की साधारण बैठक में उपजस्ट्थत और मतिान

करने िाले सिस्ट्यों के तीन-चौथाई बहुमत द्वारा पाटरत संकल्प

की भागीिारी द्वारा दकसी जिजिष्ट कारबार या व्यिसाय को

चलाने के जलए साझेिारी में प्रिेि करें, परंतु यि दक प्रत्येक

सोसाइिी के प्रत्येक सिस्ट्य के पास संकल्प की िस दिन की

जलजखत सूचना और बैठक की तारीख स्ट्पष्ट िो ।

(2)

भारतीय

भागीिारी

अजधजनयम,

1932

(1932का 9) और कंपनी अजधजनयम, 2013 (2013 का 18)

में दकसी बात के िोते हुए भी ऐसी भागीिारी पर लागू निीं

िोगा ।

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

9

24. सोसाइटियों द्वारा सियोग—(1) कोई भी सोसाइिी

या सोसाइटियां, प्रिासक के पूिष अनुमोिन से और ऐसे

जनबंधनों और ितों के अधीन, िो प्रिासक अजधरोजपत कर

सकता िै और ऐसी रीजत से िो जिजित की िाए, दकसी भी

उपक्रम या औद्योजगक जनिेि, जित्तीय सिायता या जिपणन और

प्रबंधन जििेषज्ञता सजित दकसी जिजिष्ट व्यिसाय या व्यिसाय

को चलाने के जलए प्रिासक द्वारा अनुमोदित दकसी उपक्रम के

साथ सियोग में प्रिेि कर सकता िै ।

(2) उपधारा (1) के अधीन दकसी भी सोसाइिी या

सोसाइिी द्वारा सियोग की ऐसी दकसी भी स्ट्कीम को मंिूरी िेने

से पूिष, प्रिासक को जनम् नजलजखत मामलों पर ध्यान िेना िोगा,

अथाषत :--

(क) यि योिना आर्थषक रूप से व्यििायष िै;

(ख) दक इसे दकसी भी तरि से सोसाइिी या संबंजधत

सजमजतयों के सिकारी चटरत्र को नष्ट दकए जबना लागू दकया िा

सकता िै; तथा

(ग) यि स्ट्कीम संबंजधत सोसाइिी या सोसाइिी के

सिस्ट्यों के जित में िै, या िनजित में िै, और साधारण रूप से

सिकारी आंिोलन के जित में िै ।

अध्याय 3

सिस्ट्य और उनके अजधकार और िाजयत्ि

25. ऐसे व्यजि िो सिस्ट्य िो सकते िैं—(1) धारा 28

के उपबंधों के अधीन, दकसी भी व्यजि को दकसी सोसाइिी के

सिस्ट्य के रूप में तब तक प्रिेि निीं दिया िाएगा िब तक दक

ऐसा व्यजि—

(क) एक व्यजि, िो भारतीय संजििा अजधजनयम, 1872

(1872 का 9) के उपबंधों के अधीन अनुबंध करने के जलए

सक्षम िै ;

(ख) एक फमष, कंपनी या कोई अन्य जनगम जनकाय िो

तत्समय प्रिृत्त दकसी भी जिजध के अधीन गटठत दकया गया िो ;

(ग) इस जिजनयम के अधीन रजिस्ट्रीकृत या रजिस्ट्रीकृत

समझी िाने िाली सोसाइिी ;

(घ) केंद्रीय सरकार ;

(ड.) प्रिासक ;

(च) एक स्ट्थानीय प्राजधकरण ;

(छ) कोई सािषिजनक न्यास िो तत्समय प्रिृत्त लागू

जिजध के अधीन रजिस्ट्रीकृत या रजिस्ट्रीकृत माना गया िो ;

(ि) िमाकताष या जित्तीय सेिा उपयोगकताष ; या

(झ) खंड (क) के अधीन पात्र व्यजियों का एक समूि,

चािे जनगजमत िो या निीं और दकसी जिजध द्वारा या उसके

अधीन स्ट्थाजपत दकया गया िो या निीं :

परंतु खंड (क) के उपबंध दकसी स्ट्कूल या कॉलेि के छात्रों

के लाभ के जलए जििेष रूप से बनाई गई सोसाइिी में प्रिेि

पाने के इच्छुक व्यजि पर लागू निीं िोंगे :

परंतु यि भी दक साधारण या जििेष आिेि द्वारा

प्रिासक द्वारा अजधकजथत ऐसे जनबंधन और ितों के अधीन,

एक फमष या कंपनी को केिल उस सोसाइिी के सिस्ट्य के रूप में

भती दकया िा सकता िै िो एक संघीय या ििरी सोसाइिी िै

या िो संचालन या करने का आिय रखता िै एक औद्योजगक

उपक्रम का संचालन करें :

परंतु यि भी दक कोई फमष या कंपनी, िो इस जिजनयम

के प्रारंभ से ठीक पूिष इस जिजनयम के अधीन रजिस्ट्रीकृत समझी

िाने िाली सोसाइिी का सिस्ट्य िै, को इस जिजनयम के अन्य

उपबंधों के अधीन ऐसे प्रारंभ पर और उसके पश् चात ऐसे सिस्ट्य

बने रिने का अजधकार िोगा ।

(2) सोसाइिी के सिस्ट्य के रूप में प्रिेि पाने िाला

प्रत्येक व्यजि, यदि इस जिजनयम के उपबंधों के अधीन ऐसी

सोसाइिी की सिस्ट्यता के जलए सम्यक रूप से अर्िषत िै, तो

सोसाइिी के जनयम और उपजिजध सिस्ट्यता के जलए सोसाइिी

को आिेिन कर सकते िैं और सोसाइिी आिेिन पर जिजनश् चय

लेगा और आिेिन प्राप्त िोने की तारीख से तीन मिीने की

अिजध के भीतर जिजनश् चय जिजनश् चय की सूचना िेगा।

(3) यदि सोसायिी ऐसे आिेिन की प्राजप्त की तारीख से

तीन मिीने के भीतर आिेिक को कोई जिजनश् चय निीं िेती िै,

तो आिेिक को सोसाइिी के सिस्ट्य के रूप में भती दकया गया

समझा िाएगा ।

(4) यदि कोई प्रश् न उठता िै दक क्या कोई व्यजि माजनत

सिस्ट्य बन गया िै या अन्यथा, उसका जिजनश् चय सभी संबंजधत

पक्षों को सुनिाई का उजचत अिसर िेने के बाि रजिस्ट्रार द्वारा

दकया िाएगा ।

(5) उपधारा (1) में अंतर्िष्ट दकसी भी बात के िोते हुए

भी, प्रिासक, इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए दक दकसी भी

व्यजि या व्यजियों के िगष के जित, िो दकसी िृजत्तक, कारबार

या रोिगार में लगे हुए िैं या चला रिे िैं, के जितों के िकराि

या िोने की संभािना िै रािपत्र में प्रकाजित साधारण या

जििेष आिेि द्वारा सोसाइिी घोषणा करता िै दक ऐसे व्यजि

या व्यजियों के ऐसे िगष को सिस्ट्य या सिस्ट्यों के रूप में भती

िोने या िारी रखने के जलए अयोग्य घोजषत दकया िाएगा या

दकसी भी सोसाइिी या सोसाइिी के िगष की केिल एक सीजमत

सीमा तक सिस्ट्यता के जलए पात्र, िब तक दक ऐसा व्यजि या

व्यजि उस िृजत्तक, कारबार या रोिगार में लगे हुए िैं या करते

िैं, और यि सिाल दक कोई व्यजि ऐसे िु़िा हुआ िै या निीं या

कोई िृजत्तक, कारबार या रोिगार कर रिा िै या कोई व्यजि

इस उपधारा के अधीन घोजषत व्यजियों के ऐसे िगष से संबंजधत

िै या निीं िै और इस उपधारा के अधीन अयोग्यता हुई िै या

10

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

निीं, धारा 11 के अधीन रजिस्ट्रार द्वारा जिजनश् चत की

िाएगी।

(6) ििां रजिस्ट्रार ने धारा 11 के अधीन जिजनश् चय

दकया िै दक एक व्यजि को धारा 11 के अधीन अनिषता के

कारण उपगत दकया गया िै, रजिस्ट्रार, िांच करने के पश् चात ,

आिेि द्वारा, ऐसे व्यजि को सोसाइिी की सिस्ट्यता से ििा

सकता िै, और ऐसे व्यजि को सोसाइिी के एक सिस्ट्य के रूप में

समाप्त माना िाएगा ।

26. कजतपय पटरजस्ट्थजतयों में सिस्ट्यता से ििाना—(1)

ििां कोई व्यजि सोसाइिी की उपजिजधयों द्वारा अपेजक्षत या

अन्यथा दकसी भी सोसाइिी का सिस्ट्य बन िाता िै और ऐसी

घोषणा झूठी पाई िाती िै, तो ऐसा व्यजि सोसाइिी के एक

सिस्ट्य के रूप में िारी रखने के जलए जनरर्िषत िोगा ।

(2) ििां कोई व्यजि धारा 25 की उपधारा (5) या

उपधारा (1) के अधीन उसके द्वारा की गई जनरिषता के जसिाय

सोसाइिी के सिस्ट्य के रूप में िारी रिता िै, उसे रजिस्ट्रार

द्वारा सोसाइिी से ििा दिया िाएगा :

परंतु रजिस्ट्रार, ििाने का आिेि िेने से पिले व्यजि को

सुनिाई का अिसर िेगा।

27. खुली सिस्ट्यता—(1) कोई भी सोसाइिी जबना

पयाषप्त कारण के इस जिजनयम और इसके उपजिजधयों के उपबंधों

के अधीन दकसी भी व्यजि को सिस्ट्यता में प्रिेि से मना निीं

करेगी।

(2) ििां कोई सोसाइिी सिस्ट्य के रूप में प्रिेि के जलए

दकसी पात्र व्यजि से सिस्ट्यता के जलए आिेिन या सिस्ट्यता के

संबंध में उसके द्वारा दकए गए भुगतान को िारी करने या

स्ट्िीकार करने से इनकार करती िै, ऐसा व्यजि ऐसे रूप में िो

जिजित की िाए, एक आिेिन प्रस्ट्तुत कर सकता िै, सिस्ट्यता के

संबंध में भुगतान के साथ, यदि कोई िो, रजिस्ट्रार को, िो

आिेिन और राजि, यदि कोई िो, संबंजधत सोसायिी को ऐसे

आिेिन और राजि की प्राजप्त की तारीख से तीस दिनों के भीतर

अग्रेजषत करेगा ; और तत्पश् चात , यदि सोसाइिी ऐसे आिेिन

की प्राजप्त की तारीख से तीन मिीने के भीतर आिेिक को दकसी

भी जिजनश् चय के बारे में सूजचत करने में जिफल रिता िै और

सोसायिी द्वारा राजि, आिेिक को ऐसी सोसाइिी का सिस्ट्य

माना िाएगा।

(3) यदि कोई प्रश् न उठता िै दक क्या कोई व्यजि माजनत

सिस्ट्य बन गया िै या अन्यथा, उसका जिजनश् चय सभी संबंजधत

पक्षों को सुनिाई का उजचत अिसर िेने के बाि रजिस्ट्रार द्वारा

दकया िाएगा।

(4) सजमजत के जिजनश् चय से व्यजथत कोई भी व्यजि,

सजमजत के जिजनश् चय की तारीख से िो मिीने की अिजध के

भीतर, उसकी सिस्ट्यता में प्रिेि से इनकार करते हुए,

रजिस्ट्रार से अपील कर सकता िै और ऐसी िर अपील, ििां

तक संभि िो, रजिस्ट्रार द्वारा इसकी प्राजप्त की तारीख से तीन

मिीने की अिजध के भीतर जनपिारा दकया िाएगा।

(5) अपील में रजिस्ट्रार का जिजनश् चय अंजतम और

पार्िषयों के जलए बाध्यकारी िोगा।

28. नामांदकत, संगम और समथषक सिस्ट्य—(1) धारा

25 में दकसी भी बात के िोते हुए भी, ऐसे िगष की एक

सोसाइिी, िो जिजित की िाए, दकसी भी व्यजि को नाममात्र,

संगम या समथषक सिस्ट्य के रूप में स्ट्िीकार कर सकती िै :

परंतु दकसी सोसायिी में सियोगी और सिानुभूजत रखने

िाले सिस्ट्यों की कुल संखया उसके सिस्ट्यों की कुल संखया के

िस प्रजतित से अजधक निीं िोगी।

(2) एक नाममात्र, सियोगी या सिानुभूजत रखने िाला

सिस्ट्य दकसी भी रूप में, सोसाइिी की आजस्ट्तयों या लाभ में

दकसी भी जिस्ट्से का िकिार निीं िोगा ।

परन् तु यि की धारा 32 की उपधारा ( ) के उपबंधों के

अधीन रिते हुए एक नाममात्र, सियोगी या सिानुभूजत रखने

िाले सिस्ट् य को एक सिस्ट् य के ऐसे अजधकार और जििेषाजधकार

और ऐसे सिस्ट् य के उत्तरिाजयत् ि के अधीन रिते हुए िोंगे, िो

सोसाइिी की उपजिजधयों में जिजनर्िष् ि दकए िाए ।

29. सिस्ट्यता की समाजप्त—परंतु कोई व्यजि दकसी

सोसाइिी की सिस्ट्यता से उसका त्यागपत्र सोसाइिी को

जलजखत रूप में दिए िाने और सोसाइिी द्वारा स्ट्िीकार दकए

िाने पर या सोसाइिी में अपने पूरे जिस्ट्से या जित को दकसी

अन्य सिस्ट्य को िस्ट्तांतटरत करने पर, या उसकी मृत्यु पर या

सोसाइिी से ििाने या जनष्कासन पर उसका सिस्ट्य निीं रिेगा :

परंतु दकसी व्यजि का दकसी सोसाइिी की सिस्ट्यता से

त्यागपत्र, यदि ऐसा सिस्ट्य सोसाइिी के किषिार निीं िै या

सोसायिी के बकाया किष के जलए प्रजतभूजत निीं िै, िब तक दक

इसे पिले स्ट्िीकार निीं दकया िाता िै, सोसाइिी को अपना

इस्ट्तीफा जलजखत रूप में िेने की तारीख से एक मिीने की

समाजप्त पर तब तक इसे स्ट्िीकार कर जलया गया समझा

िाएगा।

30. सिस्ट्यता के अजधकार का प्रयोग करने के जलए

िोध्य िेय भुगतान निीं दकया िाता िै—एक सिस्ट्य इस

जिजनयम और इसके अधीन बनाए गए जिजधयों और उपजिजधयों

में उपबंजधत दकए गए अजधकारों का प्रयोग करने का िकिार

िोगा:

परंतु कोई भी सिस्ट्य तब तक अजधकारों का प्रयोग निीं

करेगा, िब तक दक उसने सिस्ट्यता के संबंध में सोसाइिी को

ऐसा भुगतान निीं दकया िै, या सोसाइिी में ऐसा जित अर्िषत

निीं दकया िै, िैसा दक समय-समय पर सोसायिी के

उपजिजधयों के अधीन जिजित और जनर्िष्ट दकया िा सकता िै :

परंतु यि और दक सिस्ट्यता के अजधकार का प्रयोग करने

के जलए िेयर पूंिी में सिस्ट्य के न्यूनतम योगिान में िृजद् के

मामले में, सजमजत सिस्ट्यों को मांग की उजचत सूचना िेगी और

अनुपालन के जलए उजचत अिजध िेगी ।

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

11

31. सिस्ट्य के कतषव्य—यि सोसाइिी के प्रत्येक सिस्ट्य

का कतषव्य िोगा,—

(क) पांच िषष की लगातार अिजध के भीतर कम से कम

एक साधारण सभा की बैठक में भाग लेने के जलए :

परंतु इस खंड की कोई बात उस सिस्ट्य पर लागू निीं

िोगी जिसकी अनुपजस्ट्थजत को सोसाइिी के साधारण जनकाय

द्वारा माफ कर दिया गया िै ;

(ख) सोसाइिी की उपजिजधयों में जनर्िष्ट पांच लगातार

िषों की अिजध में कम से कम एक बार सेिाओं के न्यूनतम स्ट्तर

का उपयोग करने के जलए:

परंतु एक सिस्ट्य िो साधारण जनकाय की कम से कम

एक बैठक में सजम्मजलत निीं िोता िै और लगातार पांच िषों

की अिजध में कम से कम एक बार सेिाओं के न्यूनतम स्ट्तर का

उपयोग निीं करता िै, िैसा दक गैर-सदक्रय सिस्ट्य के रूप में

िगीकृत ऐसी सोसाइिी की उपजिजधयों में जनर्िष्ट दकया गया

िै :

परन्तु यि और दक िब कोई सोसायिी दकसी सिस्ट्य को

गैर-सदक्रय सिस्ट्य के रूप में िगीकृत करती िै, तो सजमजत

जित्तीय िषष की समाजप्त की तारीख से तीस दिनों की अिजध के

भीतर संबंजधत सिस्ट्य को जिजित रीजत से ऐसे िगीकरण की

सूचना िेगी :

परंतु यि भी दक एक गैर-सदक्रय सिस्ट्य िो साधारण

जनकाय की कम से कम एक बैठक में सजम्मजलत निीं िोता िै

और उपजिजधयों में जनर्िष्ट न्यूनतम स्ट्तर की सेिाओं का उपयोग

निीं करता िै, अगले पांच िषों में एक गैर-सदक्रय के रूप में

िगीकरण की तारीख से सिस्ट्य को िोि िेने का कोई अजधकार

निीं िोगा :

परंतु यि भी दक एक गैर-सदक्रय सिस्ट्य के रूप में

िगीकृत सिस्ट्य, इस धारा में यथा उपबंजधत की गई पात्रता

मानिंड को पूरा करने पर एक सदक्रय सिस्ट्य के रूप में पुन:

िगीकृत िोने का िकिार िोगा :

परंतु यि भी दक यदि दकसी सिस्ट्य के सदक्रय या गैर-

सदक्रय सिस्ट्य िोने का प्रश् न उठता िै, तो िगीकरण के संचार

की तारीख से साठ दिनों की अिजध के भीतर रजिस्ट्रार को

अपील की िाएगी ।

32. सिस्ट्य की मतिान िजियां —(1) दकसी भी

सोसाइिी का दकसी भी सिस्ट्य के पास उसके मामलों में एक से

अजधक मत निीं िोंगे और मत िेने के अजधकार की प्रत्येक िजि

का प्रयोग व्यजिगत रूप से न दक प्रॉक्सी द्वारा दकया िाएगा :

परंतु मत बराबर िोने की जस्ट्थजत में अध्यक्ष का जनणाषयक

मत िोगा ।

(2) ििां दकसी सोसाइिी का जिस्ट्सा एक से अजधक

व्यजियों द्वारा संयुि रूप से धारण दकया िाता िै, ऐसे प्रत्येक

व्यजि को, पूिषिती व्यजि या व्यजियों की अनुपजस्ट्थजत में, िोि

िेने का अजधकार िोगा :

परंतु ऐसा व्यजि उपजस्ट्थत िोगा और अियस्ट्क निीं

िोगा :

परंतु यि और दक ििां मतिान की रीजत मतपत्र द्वारा िै,

ििां िेयर के सभी संयुि धारक सोसाइिी के मामलों में अपनी

ओर से मतिान करने के जलए उनमें से दकसी एक को जनयुि कर

सकते िैं ।

(3) एक सोसाइिी जिसने अपनी जनजध का कोई जिस्ट्सा

दकसी अन्य सोसाइिी के िेयरों में जनिेि दकया िै, अपने

सिस्ट्यों में से एक को उस अन्य सोसाइिी के मामलों में अपनी

ओर से िोि िेने के जलए जनयुि कर सकता िै, और तिनुसार

पिली सोसाइिी की ओर से ऐसे सिस्ट्य को िोि िेने का

अजधकार िोगा :

परंतु पिली सोसाइिी अपने दकसी भी सिस्ट्य को जनयुि

निीं करेगी िो उसका िेतनभोगी कमषचारी भी िो ।

(4) कोई कंपनी या कोई अन्य जनगजमत जनकाय िो

तत्समय प्रिृत्त लागू दकसी जिजध के अधीन गटठत िो, जिसने

अपनी जनजध का कोई जिस्ट्सा दकसी सोसाइिी के िेयरों में

जनिेि दकया िो, अपनी ओर से मतिान करने के जलए अपने

दकसी एक जनिेिक या अजधकारी को जनयुि कर सकता िै, ऐसे

सोसाइिी के मामलों और तिनुसार ऐसे जनिेिक या अजधकारी

को, यथाजस्ट्थजत, कंपनी या जनगजमत जनकाय की ओर से मतिान

करने का अजधकार िोगा ।

(5) ििां एक फमष ने अपनी जनजध का कोई जिस्ट्सा दकसी

सोसाइिी के िेयरों में जनिेि दकया िै, फमष द्वारा जनयुि उसके

दकसी भी भागीिार को फमष की ओर से सोसाइिी के मामलों में

िोि िेने का अजधकार िोगा ।

(6) एक स्ट्थानीय प्राजधकरण या सािषिजनक न्यास

जिसने अपनी जनजध का कोई भाग दकसी सोसाइिी के िेयरों में

जनिेि दकया िै, अपने दकसी सिस्ट्य या न्यासी को उस

सोसाइिी के मामलों में अपनी ओर से मतिान करने के जलए

जनयुि कर सकता िै; और तिनुसार, ऐसे व्यजि को,

यथाजस्ट्थजत, स्ट्थानीय प्राजधकारी या लोक न्यास की ओर से

मतिान करने का अजधकार िोगा ।

(7) दकसी भी नाममात्र या समथषक सिस्ट्य को मत िेने

का अजधकार निीं िोगा और ऐसा कोई भी सिस्ट्य दकसी

सजमजत का सिस्ट्य िोने या दकसी अन्य सोसाइिी में सोसाइिी

के प्रजतजनजध के रूप में जनयुजि के जलए पात्र निीं िोगा ।

(8) जिस व्यजि ने चूक की िै और ऐसे ऋण या ब्याि या

दकस्ट्त के पुनभुषगतान की जनयत तारीख से एक िषष की अिजध के

जलए ऋण या उस पर ब्याि का भुगतान करने में चूककताष के

रूप में रिता िै, िि मतिान के अजधकार का प्रयोग करने का

12

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

िकिार निीं िोगा सोसाइिी के दकसी सिस्ट्य की तब तक की

ऐसे सभी भुगतान निीं िो िाते िैं ।

(9) कोई भी व्यजि दकसी जित्तीय िषष में दकसी सजमजत

के सिस्ट्य के जनिाषचन में िोि िेने के अजधकार का प्रयोग निीं

करेगा िब तक दक िि उस जित्तीय िषष से पिले पूरे जित्तीय िषष

के जलए सजमजत का सिस्ट्य न िो जिसमें जनिाषचन िो रिा िै :

परंतु दकसी संघीय सोसाइिी का कोई भी सिस्ट्य

सोसाइिी दकसी सजमजत के सिस्ट्य के जनिाषचन में िोि िेने के

अजधकार का प्रयोग तब तक निीं करेगा िब तक दक ऐसी

सोसाइिी के अपने अंजतम खातों की क, ख या ग श्रेणी में ऑजडि

न िो िाए ।

(10) उपधारा (9) में दकसी बात के िोते हुए सजमजत के

रजिस्ट्रीकरण के तुरंत बाि िोने िाली सजमजत के पिले जनिाषचन

पर लागू निीं िोगा ।

(11) एक संघीय सोसाइिी के व्यजिगत सिस्ट्यों के

मतिान अजधकार ऐसे िोंगे िो सोसाइिी की जिजधयों और उप-

जिजधयों द्वारा जिजनयजमत दकए िा सकते िैं ।

33. िेयरों के धारण पर प्रजतबंध—दकसी भी सोसाइिी

में, प्रिासक या सोसाइिी के अजतटरि कोई भी सिस्ट्य,

सोसाइिी की कुल िेयर पूंिी के पांचिे जिस्ट्से से अजधक के

जिस्ट्से से अजधक निीं रखेगा, िैसा दक जिजित दकया िा सकता

िै :

परंतु प्रिासक, रािपत्र में अजधसूचना द्वारा, सोसाइिी

के दकसी भी िगष के संबंध में िेयर पूंिी के एक-पांचिें से अजधक

से अजधक जनर्िष्ट कर सकता िै ।

34. िेयरों या ब्याि के िस्ट्तांतरण पर प्रजतबंध—(1)

धारा 33 और उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन, दकसी

सोसायिी की पूंिी में दकसी सिस्ट्य के िेयर या ब्याि पर

स्ट्थानांतरण, या प्रभार ऐसी ितों के अधीन िोगा िो जिजित

की िा सकती िैं ।

(2) कोई सिस्ट्य अपने द्वारा धाटरत दकसी िेयर, या

दकसी सोसाइिी की पूंिी या संपजत्त, या उसके दकसी जिस्ट्से में

अपने जित को तब तक िस्ट्तांतटरत निीं करेगा, िब तक दक,—

(क) उसने एक िषष से कम समय के जलए ऐसा िेयर या

ब्याि निीं रखा िै ;

(ख) सोसाइिी या सोसाइिी के दकसी सिस्ट्य या दकसी

ऐसे व्यजि को स्ट्थानांतरण या प्रभार दकया िाता िै जिसकी

सिस्ट्यता के जलए आिेिन सोसाइिी द्वारा स्ट्िीकार कर जलया

गया िै ; और

(ग) सजमजत ने ऐसे िस्ट्तांतरण को मंिूरी िे िी िै ।

(3) उपधारा (1) और (उपधारा) (2) में अंतर्िष्ट दकसी

बात के िोते हुए भी, ििां दकसी सिस्ट्य को पित्याग िेने की

अनुमजत िी िाती िै, या जनष्काजसत कर दिया िाता िै, या इस

जिजनयम या बनाए गए जिजधयों द्वारा अयोग्य घोजषत दकए

िाने के कारण सिस्ट्य निीं रिता िै, इसके अधीन या सोसाइिी

की उपजिजधयों द्वारा, सोसाइिी जिजित रीजत से जिजित मूल्य

पर इसके जलए भुगतान करके िेयर पूंिी में ऐसे सिस्ट्य का

जिस्ट्सा या ब्याि प्राप्त कर सकती िै :

परंतु ऐसे प्रयोिनों के जलए दकसी भी जित्तीय िषष में

दकसी सोसाइिी की िेयर पूंिी का कुल भुगतान तत्काल

पूिषिती जित्तीय िषष के अंजतम दिन सोसाइिी की प्रित्त िेयर

पूंिी के िस प्रजतित से अजधक निीं िै ।

स्ट्पष्टीकरण—इस धारा के प्रयोिनों के जलए, पि

"जित्तीय िषष" से माचष के 31 िें दिन को समाप्त िोने िाला िषष

या, दकसी भी सोसाइिी या सोसाइिी के िगष के मामले में,

जिनके खाते रजिस्ट्रार की जपछली मंिूरी के साथ संतुजलत िैं

दकसी अन्य दिन, ऐसे दिन को समाप्त िोने िाला िषष अजभप्रेत

िै।

(4) ििां प्रिासक दकसी सोसाइिी का सिस्ट्य िै, इस

धारा में अंतर्िष्ट प्रजतबंध लागू निीं िोंगे और िि प्रिासक, इस

जिजनयम में अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए भी, सोसायिी को

िेने के बाि, दकसी भी समय कम से कम तीन मिीने का नोटिस,

सोसाइिी से अपनी िेयर पूंिी िापस ले सकता िै ।

35. सिस्ट्य की मृत्यु पर ब्याि का िस्ट्तांतरण—(1)

सोसाइिी के दकसी सिस्ट्य की मृत्यु िोने पर, सोसाइिी उपधारा

(2) के उपबंधों के अधीन, जनयम के अनुसार सोसाइिी में अपना

जिस्ट्सा या जित ऐसे सिस्ट्य द्वारा जनयम या नाजमत व्यजि या

व्यजियों को िस्ट्तांतटरत करेगी, ऐसे व्यजि को ऐसे नामांकन के

भाि में िो सजमजत को ऐसे सिस्ट्य का उत्तराजधकारी या जिजधक

प्रजतजनजध प्रतीत िो ।

(2) ऐसा कोई स्ट्थानांतरण तब तक निीं दकया िाएगा

िब तक दक ऐसे नाजमत व्यजि, यथाजस्ट्थजत, उत्तराजधकारी या

जिजधक प्रजतजनजध को सोसाइिी के सिस्ट्य के रूप में जिजधित

रूप से स्ट्िीकार निीं दकया िाता िै ।

(3) उपधारा (2) में अंतर्िष्ट दकसी भी बात के िोते हुए

भी, कोई भी ऐसा नाजमत व्यजि, यथाजस्ट्थजत, उत्तराजधकारी

या जिजधक प्रजतजनजध, मृत सिस्ट्य को, ऐसी रीजत से िो जिजित

की िाए, सोसाइिी को उसके िेयर या ब्याि के मूल्य के

बराबर राजि का भुगतान करने की आिश्यकता िो सकती िै ।

(4) एक सोसाइिी सोसाइिी के मृत सिस्ट्य को िेय अन्य

सभी धन का भुगतान ऐसे नाजमत व्यजि, यथाजस्ट्थजत, िाटरस

या जिजधक प्रजतजनजध को कर सकती िै ।

(5) इस धारा के उपबंधों के अनुसार दकसी सोसायिी

द्वारा सम्यक

त: दकए गए सभी िस्ट्तांतरण और भुगतान, दकसी

अन्य व्यजि द्वारा सोसायिी पर की गई दकसी भी मांग के

जिरुद् मान्य और प्रभािी िोंगे ।

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

13

(6) इस धारा या धारा 25 के पूिषगामी उपबंधों की कोई

बात जिरासत या अन्यथा से दकसी अियस्ट्क या जिकृत दिमाग

के व्यजि को दकसी सोसाइिी के मृत सिस्ट्य के दकसी भी जिस्ट्से

या जित को प्राप्त करने से रोकने के जलए जनिाटरत निीं करेगी,

दकन्तु उसकी व्यििायषता में ऐसे अजधग्रिण का पटरणाम

सोसाइिी के िेयरों में उसके जित और अिैतजनक लाभांि के

साथ-साथ ऋण, स्ट्िॉक, बांड, यदि कोई िो, और उन पर अर्िषत

ब्याि तक सीजमत िोगा िो दक अिैतजनक िै और उसे मतिान

का अजधकार निीं िोगा ।

(7) धारा 6 में जनर्िष्ट दकसी भी तरि की के अधीन एक

व्यजि, अपनी जन:िक्त्तता समाप्त िोने पर, जन:िक् तता

सोसाइिी को सिस्ट्य बनने की अपनी इच्छा की घोषणा करेगा

और इस तरि की घोषणा की प्राजप्त पर सोसाइिी, इस धारा में

अंतर्िष् ि दकसी बात के िोते हुए घोषणा कर सकता िै, और

यदि यि एक सिकारी िाउससंग सोसाइिी िै तो ऐसी सोसाइिी

उसे सिस्ट्य के रूप में स्ट्िीकार करेगी यदि िि अन्यथा अयोग्य

निीं िै और इस प्रकार भती दकया गया व्यजि सिस्ट्य के सभी

अजधकारों और जििेषाजधकारों का िकिार िो िाएगा और

िेनिाटरयों के अधीन िो िाएगा िैसे सोसाइिी का कोई अन्य

सिस्ट्य ।

36. िेयर या ब्याि िो अिैचमेंि के जलए उत्तरिायी

निीं िोगा—दकसी सोसाइिी की पूंिी में,दकसी सिस्ट्य का िेयर

या ब्याि या िाउससंग सोसाइिी द्वारा िारी लोन स्ट्िॉक या

दकसी सोसाइिी द्वारा अपने सिस्ट्यों से बचत िमा के रूप में

िुिाई गई धनराजि दकसी न्यायालय के दकसी जडक्री या आिेि

के अधीन कुकी या जबक्री के जलए या दकसी सिस्ट्य द्वारा दकए

गए दकसी भी ऋण या िाजयत्ि के संबंध में उत्तरिायी निीं

िोगा और तिनुसार, न तो प्रांतीय दििाला अजधजनयम,1920

(1920 का 5) के अधीन एक टरसीिर, और न िी ऐसा कोई

व्यजि या प्राजधकरण, िो दकसी भी संबंजधत जिजध के अधीन

उस समय लागू िो, ऐसे िेयर या ब्याि पर कोई िािा िकिार

िोगा।

37. बजियों आदि को िेखने का सिस्ट्यों के अजधकार—

(1) सोसाइिी के प्रत्येक सिस्ट्य को कायाषलय समय के िौरान,

या सोसाइिी द्वारा इस प्रयोिन के जलए जनयत दकसी भी समय,

जिजनयमन, जिजधयों और उप-जिजधयों के जलए, अंजतम

लेखापरीजक्षत िार्षषक तुलन-पत्र, िार्षषक लेखा परीक्षा टरपोिष,

लाभ-िाजन लेखा, सजमजत के सिस्ट्यों की सूची, सिस्ट्यों का एक

रजिस्ट्िर, साधारण बैठकों के कायषिृत्त, और बजियों और

अजभलेखों के उन अंिों में जिसमें उसके लेन-िेन सोसाइिी के

साथ ििष दकया गया िै, सोसाइिी के कायाषलय में जन:िुल्क

जनरीक्षण करने का अजधकार िोगा ।

(2) सजमजत, सिस्ट्य को जलजखत में अनुरोध करने पर और

ऐसी फीस के भुगतान पर िो जिजित की िा सकती िै, उपधारा

(1) में उजल्लजखत दकसी भी िस्ट्तािेि की एक प्रजत प्रस्ट्तुत

करेगा ।

(3) एक सोसाइिी, उपधारा (1) और उपधारा (2) के

अधीन प्रिान दकए गए कायों के जनिषिन के जलए दकसी

अजधकारी या अजधकारी को, िैसा दक िि आिश्यक समझे,

अजधकृत करेगी ।

38. उस व्यजि का िाजयत्ि जिसने सिस्ट्य रिना बंि कर

दिया—(1) ििां कोई व्यजि धारा 29 के अधीन दकसी

सोसाइिी का सिस्ट्य निीं रि गया िै,--

(क) सोसाइिी के जलए उसके द्वारा िेय दकसी भी ऋण

के संबंध में और उसके द्वारा सोसाइिी के कारण दकसी भी

बकाया मांग के संबंध में उसका िाजयत्ि िारी रिेगा िैसे दक

िि सिस्ट्य निीं था, सिस्ट्य बनना बंि कर दिया ; और

(ख) सोसाइिी के ऋणों के जलए उनका िाजयत्ि, िैसे दक

िे ऐसी समाजप्त की तारीख से ठीक पूिष थे, उपधारा (2) में िैसा

अन्यथा उपबंजधत िै, उसके जसिाय, ऐसी तारीख से तीन िषष

की अिजध के जलए िारी रिेगा िैसे दक उसने निीं दकया था

सिस्ट्य निीं रिे :

परंतु िाजयत्ि ऐसे व्यजि की आजस्ट्त से िु़िा िोगा, यदि

ऐसी समाजप्त उसकी मृत्यु के कारण हुई थी या ऐसे व्यजि की

सिस्ट्य बनने के बाि मृत्यु िो िाती िै ।

(2) ििां इस जिजनयम के दकन्िीं उपबंधों के अधीन

दकसी सोसाइिी को बंि करने का आिेि दिया िाता िै, तो उस

व्यजि की उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन िाजयत्ि, िो तुरंत

तीन िषष के भीतर उसका सिस्ट्य निीं रि गया िै पटरसमापन के

आिेि की तारीख से तत्काल पूिष तक िारी रिेगा, िब तक दक

संपूणष पटरसमापन कायषिािी पूरी निीं िो िाती ।

39. सिस्ट् यों का दििाला िोना— प्रान्तीय दििाला

अजधजनयम, 1920 (1920का 5) या तत्समय प्रिृत्त दकसी

तत्स्ट्थानी जिजध में अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए भी, सिस्ट्यों

में दकसी सिस्ट्य से सजमजत का बकाया, उसके जिरुद् दििाला

कायषिािी, संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन या स्ट्थानीय प्राजधकरण को

उसके अगले बकाया के आगे प्राथजमकता के क्रम में िोगी ।

40. सिस्ट्यों का जनष्कासन —(1) सोसाइिी, इस

प्रयोिन के जलए आयोजित सिस्ट्यों की एक साधारण बैठक में

उपजस्ट्थत और मतिान करने िाले सभी सिस्ट्यों के तीन-चौथाई

बहुमत से पाटरत संकल्प द्वारा ऐसे कायष िो सोसाइिी के

समुजचत कायष के जलए िाजनकारक िैं, सिस्ट्यों के जलए एक

सिस्ट्य को जनष्काजसत कर सकती िै :

परंतु, कोई संकल्प निीं िोगा,--

(i) िैध, िब तक संबंजधत सिस्ट्य को अपने मामले को

साधारण जनकाय में प्रजतजनजधत्ि करने का अिसर निीं दिया

िाता िै ; और

14

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(ii) प्रभािी िब तक दक यि रजिस्ट्रार को उनके

अनुमोिन के जलए प्रस्ट्तुत निीं दकया िाता िै और उनके द्वारा

अनुमोदित निीं दकया िाता िै :

परंतु यि भी दक रजिस्ट्रार के अनुमोिन या अस्ट्िीकृजत

की सूचना ऐसे िमा करने की तारीख से तीन मिीने की अिजध

के भीतर सोसाइिी को िी िाएगी ।

(2) दकसी सोसाइिी का कोई भी सिस्ट्य जिसे उपधारा

(1) के अधीन जनष्काजसत कर दिया गया िै, िो िषष की अिजध

के जलए उस सोसाइिी के सिस्ट्य के रूप में या दकसी अन्य

सोसाइिी के सिस्ट्य के रूप में ऐसे जनष्कासन की तारीख से

प्रिेि के जलए पात्र निीं िोगा :

परंतु रजिस्ट्रार, जििेष पटरजस्ट्थजतयों में, उि अिजध के

भीतर, दकसी भी सिस्ट्य को, यथाजस्ट्थजत, उि सोसाइिी या

दकसी अन्य सोसाइिी के सिस्ट्य के रूप में, पुन: प्रिेि या प्रिेि

की मंिूरी िे सकता िै ।

अध्याय 4

सोसाइटियों का जनगमन, कतषव्य और जििेषाजधकार

41. सोसाइटियों का जनगजमत जनकाय िोना—एक

सोसाइिी अपने रजिस्ट्रीकरण पर उस नाम के अधीन एक

जनगजमत जनकाय िोगी, जिसके नाम से िि िाश् ित

उत्तराजधकार और एक साधारण मुिर के साथ रजिस्ट्रीकृत िै,

और संपजत्त के अजधग्रिण, धारण और जनपिान, अनुबंधों में

प्रिेि करने, मुकिमा संजस्ट्थत करने और बचाि करने की िजि

के साथ और अन्य जिजधक कायषिािी, और ऐसी सभी चीिें

करना िो उस प्रयोिन के जलए आिश्यक िैं जिसके जलए इसे

जनगजमत दकया गया िै ।

42. सोसाइटियों का पता—प्रत्येक सोसाइिी के पास

जनयमों के अनुसार रजिस्ट्रीकृत एक पता िोगा, जिस पर सभी

नोटिस और संचार भेिे िा सकते िैं; और सोसाइिी उि पते में

दकसी भी पटरितषन की सूचना उसके तीस दिनों के भीतर

रजिस्ट्रार को जलजखत रूप में भेिेगी।

43. सिस्ट्यों का रजिस्ट्िर—(1) प्रत्येक सोसाइिी अपने

सिस्ट्यों का एक रजिस्ट्िर रखेगी और उसमें जनम्नजलजखत जििरण

ििष करेगी, अथाषत :--

(क) प्रत्येक सिस्ट्य का नाम, पता और व्यिसाय ;

(ख) िेयर पूंिी िाली सोसाइिी के मामले में, प्रत्येक

सिस्ट्य द्वारा धाटरत जिस्ट्सा;

(ग) जिस तारीख को प्रत्येक व्यजि को सिस्ट्य के रूप में

प्रिेि दिया गया था;

(घ) जिस तारीख को कोई व्यजि सिस्ट्य निीं रिा ; और

(ड.) ऐसे अन्य जििरण िो जिजित दकए िा सकते िैं :

परंतु ििां दकसी सोसाइिी ने इस जिजनयम के अधीन या

उसके अधीन दकसी सिस्ट्य की दकसी व्यजि की मृत्यु पर अपना

जिस्ट्सा या ब्याि िस्ट्तांतटरत करने की अनुमजत िी िो, सिस्ट्य के

िेयर या जित का िकिार व्यजि और जिस तारीख को नामांकन

ििष दकया गया था, रजिस्ट्िर में संबंजधत सिस्ट्य के नाम को भी

दिखाया िाएगा ।

(2) रजिस्ट्िर उस तारीख का प्रथम िृष्टया साक्ष्य िोगा

जिस दिन दकसी व्यजि को सिस्ट्यता में प्रिेि दिया गया था,

और जिस तारीख को िि सिस्ट्य निीं रिा था ।

44. साक्ष्य के रूप में प्रजिजष्ट की प्रजत की स्ट्िीकायषता—

(1) दकसी बिी, रजिस्ट्िर या सूची में दकसी प्रजिजष्ट की एक

प्रजत, िो जनयजमत रूप से कारबार के िौरान और दकसी

सोसाइिी के कब्िे में रखी िाती िै, यदि उस रीजत में, िो

जिजित की िाए, सम्यकत: प्रमाजणत की िाए तो ऐसे साक्ष्य के

रूप में स्ट्िीकायष िोगी प्रजिजष्ट का अजस्ट्तत्ि, और प्रत्येक मामले

में ििष दकए गए मामलों और लेनिेन के साक्ष्य के रूप में

स्ट्िीकार दकया िाएगा, और उसी सीमा तक, ििां तक मूल

प्रजिजष्ट, यदि प्रस्ट्तुत की िाती िै, तो ऐसे मामले को साजबत

करने के जलए स्ट्िीकायष िोती िै ।

(2) ऐसी सोसाइटियों के मामले में, िैसा प्रिासक

साधारण या जििेष आिेि द्वारा जनिेजित करे, दकसी सोसाइिी

का कोई भी अजधकारी दकसी भी जिजधक कायषिािी में, जिसमें

सोसाइिी एक पक्ष निीं िै, सोसाइिी की दकसी भी बिी को

प्रस्ट्तुत करने के जलए बाध्य निीं दकया िाएगा, जिसकी सामग्री

को उपधारा (1) के अधीन साजबत दकया िा सकता िै या

न्यायालय या जििेष मामले के जलए दकए गए न्यायाधीि के

आिेि को छो़िकर, ििष दकए गए मामलों, लेनिेन और खातों

को साजबत करने के जलए साक्ष्य के रूप में प्रस्ट्तुत दकया िा

सकता िै ।

45. सोसाइिी के िेयरों और जडबेंचर से संबंजधत जलखतों के

अजनिायष रजिस्ट्रीकरण से छूि—भारतीय रजिस्ट्रीकरण अजधजनयम,

1908 (1908 का 16) की धारा 17 की उपधारा (1) के खंड (ख)

और खंड (ग) की कोई बात जनम्नजलजखत पर लागू िोना--

(क) सोसाइिी में िेयरों से संबंजधत दकसी भी जलखत के

जलए, िो िाउससंग सोसाइिी न िोने पर भी सोसाइिी की

संपजत्त अचल संपजत्त में पूणष रूप से या आंजिक रूप से िो, या

(ख) दकसी भी सोसाइिी द्वारा िारी दकए गए दकसी भी

जडबेंचर के जलए और अचल संपजत्त पर या अचल संपजत्त में

दकसी अजधकार, िक या जित को सृजित न करने, घोजषत न

करने, असाइन करने, सीजमत न करना या समाप्त न करना,

जसिाय इसके दक ििां तक धारक को एक रजिस्ट्रीकृत जलखत

द्वारा ििन की िाने िाली सुरक्षा का अजधकार िेता िै, जिसके

अधीन सोसाइिी ने अपनी पूरी या आंजिक अचल संपजत्त या

ऐसे जडबेंचर के धारकों के लाभ के जलए रस्ट्ि पर रजस्ट्ियों के

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

15

जलए दकसी जित को जगरिी, संप्रेजषत या अन्यथा स्ट्थानांतटरत

कर दिया िै ; या

(ग) दकसी सोसाइिी द्वारा िारी दकसी भी जडबेंचर पर

दकसी भी समथषन, या िस्ट्तांतरण के जलए लागू िोगी ।

46. कराधान से छूि िेने की िजि—प्रिासक, दकसी भी

सोसाइिी या सोसाइिी के िगष के मामले में, रािपत्र में

अजधसूचना द्वारा छूि िे सकता िै--

(क) स्ट्िाम्प िुल्क जिसके साथ, तत्समय प्रिृत्त स्ट्िाम्प

िुल्क से संबंजधत दकसी भी जिजध के अधीन , दकसी सोसाइिी

या उसकी ओर से या उसके दकसी अजधकारी या सिस्ट्य द्वारा

जनष्पादित जलखत, और सोसाइिी के कारबार से संबंजधत, या

इस जिजनयम के अधीन ऐसे जलखतों का कोई िगष, या रजिस्ट्रार

या उनके नाजमती या नाजमतों के बोडष के पुरस्ट्कार क्रमिः प्रभायष

िैं ;

(ख) तत्समय प्रिृत्त िस्ट्तािेिों के रजिस्ट्रीकरण और

न्यायालय-फीस से संबंजधत जिजध के अधीन दकसी सोसाइिी

द्वारा या उसकी ओर से िेय कोई भी िुल्क, िो कुछ समय के

जलए लागू िै ; और

(ग) कोई अन्य कर या फीस या िुल् क (या उसका कोई

जिस्ट्सा) दकसी भी जिजध के अधीन दकसी सोसाइिी द्वारा या

उसकी ओर से िेय िो ।

47. उधार लेने पर प्रजतबंध—(1) कोई सोसाइिी

सिस्ट्यों और अन्य व्यजियों से केिल उस सीमा तक िमा और

ऋण प्राप्त करेगी, और ऐसी ितों के अधीन, िो जिजित की िाए

या सोसाइिी के उपजिजधयों द्वारा जनर्िष्ट दकया िा सकता िै ।

(2) यदि रजिस्ट्रार की राय में उपधारा (1) के अधीन

प्राप्त धन की सुरक्षा सुजनजश् चत करने के जलए ऐसा करना

आिश्यक िै, तो संबंजधत सोसाइिी या सोसाइिी के उद्देश्यों को

आगे बढाने के जलए ऐसी जनजधयों के उजचत उपयोग के जलए

उन्िें जनयमों और उपजिजधयों में जिजित उधार सीमा के भीतर

रखते हुए उनके जलए, रजिस्ट्रार, साधारण या जििेष आिेि

द्वारा, दकसी भी सोसाइिी या सोसाइिी के िगष पर अजतटरि

ितें लगा सकता िै, जिसके अधीन ऐसी सोसाइिी या ऐसे िगष

की सजमजतयां केंद्रीय बैंक के अजतटरि दकसी अन्य लेनिार से

िमा प्राप्त कर सकती िैं, जडबेंचर िारी कर सकती िैं या ऋण

ले सकती िैं ।

48. ऋण लेने पर प्रजतबंध —(1) कोई भी सोसाइिी

सिस्ट्य के जसिाए दकसी अन्य व्यजि को, या अपने स्ट्ियं के

िेयरों की प्रजतबंध सुरक्षा पर, या दकसी ऐसे व्यजि की सुरक्षा

पर ऋण निीं िेगी िो सिस्ट्य निीं िै :

परंतु ऐसे जनयमों के अधीन, िो अिधाटरत दकए िा

सकते िैं, एक सोसाइिी दकसी अन्य सोसाइिी को ऋण िे

सकती िै ।

(2) उपधारा (1) में अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए भी,

कोई सोसाइिी िमाकताष को उसकी िमा राजि की िमानत पर

ऋण िे सकती िै ।

(3) इस जिजनयम में अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए भी,

सिस्ट्य या सिस्ट्यों के जसिाए कोई भी व्यजि या व्यजियों का

समूि प्राथजमक कृजष ऋण सिकारी सजमजत से उधार लेने या

िमा करने के जलए पात्र निीं िोगा ।

(4) यदि प्रिासक की राय में, संबंजधत सोसाइिी या

सोसाइटियों के जित में ऐसा करना आिश्यक या समीचीन िै,

प्रिासक, साधारण या जििेष आिेि द्वारा, दकसी संपजत्त की

सुरक्षा पर सोसाइिी या सोसाइिी का िगष दकसी भी व्यजि

द्वारा धन उधार िेने को जनिाटरत, प्रजतबंजधत या जिजनयजमत

कर सकता िै :

परंतु रजिस्ट्रार, संबंजधत सोसाइिी या सोसाइटियों की

जनजधयों की सुरक्षा सुजनजश् चत करने के जलए, ऐसी जनजधयों के

उनके उद्देश्यों को आगे बढाने में उजचत उपयोग के जलए और

उन्िें जनयमों और उपजिजधयों में जिजित ऋण लेने की सीमा के

भीतर रखने के जलए, साधारण या जििेष आिेि, दकसी भी

सोसाइिी या सोसाइिी के िगष द्वारा अपने सिस्ट्यों या अन्य

सोसाइटियों को ऋण िेने की सीमा, ितों और रीजत को और

जिजनयजमत करते िैं ।

49. गैर-सिस्ट्यों के साथ अन्य संव्यििार पर प्रजतबंध—

इस जिजनयम में दिए गए प्रािधान के अजतटरि, सिस्ट्यों के

अजतटरि अन्य व्यजियों के साथ एक सोसाइिी के लेन-िेन ऐसे

प्रजतबंधों के अधीन िोंगे, यदि कोई िो, िो जिजित की िाए ।

50. सिस्ट्य के िेयर या जित के संबंध में प्रभार और

प्रजततुलन—दकसी सोसाइिी के दकसी सिस्ट्य द्वारा िेय दकसी

भी ऋण के संबंध में, सोसाइिी के पास सोसाइिी की पूंिी में

ऐसे सिस्ट्य के िेयर या ब्याि पर, सोसाइिी के पास ऐसे सिस्ट्य

की िमा राजि पर और दकसी भी लाभांि पर प्रभार िोगा। ,

ऐसे सिस्ट्य को िेय छूि या लाभ, और सोसाइिी ऐसे दकसी भी

ऋण के भुगतान में या उसके जलए ऐसे सिस्ट्य को िमा या िेय

दकसी भी राजि को समायोजित कर सकती िै :

परंतु दकसी भी सिकारी बैंक के पास धारा 62 में

जनर्िष्ट भजिष्य जनजध में से दकसी सोसाइिी द्वारा जनिेि की गई

दकसी राजि पर कोई प्रभार निीं िोगा, और कोई भी सिकारी

बैंक दकसी भी िेय ऋण के जलए सोसाइिी से ऐसी दकसी भी

राजि को समायोजित करने का िकिार निीं िोगा ।

51. सोसाइिी का पूिष िािा—(1) तत्समय प्रिृत्त दकसी

अन्य जिजध में अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए भी दकन्तु भू-

रािस्ट्ि या भू-रािस्ट्ि के रूप में िसूली योग्य दकसी भी धन और

जसजिल प्रदक्रया संजिता, 1908 (1908 का 5) की धारा 60

और धारा 61 के उपबंधों के संबंध में संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन के

दकसी भी पूिष िािे के अधीन--

16

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(क) दकसी भी सिस्ट्य या ऐसे व्यजि िो सिस्ट्य निीं रि

गया िै, द्वारा सोसाइिी के कारण दकसी भी ऋण या बकाया

मांग पर पिला आरोप िोगा--

(i) पूणष या आंजिक रूप से उगाई गई फसलें या

अन्य कृजष उपि, चािे उसके द्वारा सोसाइिी से जलए गए

ऋण के साथ या उसके जबना ;

(ii) मिेिी, मिेजियों के जलए चारा, कृजष या

औद्योजगक उपकरण या मिीनरी, या जनमाषण के जलए

कच् चा माल, या कायषिाला, गोिाम या व्यिसाय का

स्ट्थान, दकसी भी ऋण से, चािे िि पैसे में िो, आपूर्तष की

गई िो या खरीिी गई िो या सोसाइिी द्वारा उसे

बनाया गया सामान ; और

(iii) कोई चल संपजत्त िो उसके द्वारा सोसाइिी के

पास बंधक रखी गई िो, अजभिाक की गई िो या अन्यथा

जगरिी रखी गई िो, और उसकी अजभरक्षा में रि गई िो;

(ख) दकराए, िेयर, ऋण या खरीि धन या ऐसी

सोसाइिी को िेय दकसी अन्य अजधकार या राजि के संबंध में

दकसी भी सिस्ट्य या दकसी सिस्ट्य द्वारा सिस्ट्य निीं रिने िाले

दकसी भी बकाया मांग या बकाया राजि, सोसाइिी की अचल

संपजत्त में उसके जित पर पिला आरोप िोगा :

परंतु भू-रािस्ट्ि के जसिाए अन्य िेय राजियों के संबंध

में संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन का पूिष िािा, इस उपधारा के

प्रयोिन के जलए दकसी सिस्ट्य द्वारा उस जनजध से सृजित संपजत्त

तक सीजमत िोगा जिसके संबंध में संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन ने एक

िािा दकया िै ।

(2) दकसी भी संपजत्त या संपजत्त में जित, िो उपधारा (1)

के अधीन आरोप के अधीन िै, सोसाइिी की पूिष अनुमजत के

जबना दकसी रीजत में स्ट्थानांतटरत निीं दकया िाएगा और ऐसा

स्ट्थानांतरण ऐसी ितों के अधीन िोगा, यदि कोई िो, िो

सोसाइिी जिजित करे ।

(3) उपधारा (2) के उल्लंघन में दकया गया कोई भी

स्ट्थानांतरण िून्य िोगा ।

(4) उपधारा (2) और (उपधारा) (3) में अंतर्िष्ट दकसी

बात के िोते हुए भी एक सोसाइिी, जिसका एक उद्देश्य अपने

सिस्ट्यों के उत्पाि का जनपिान िै, अपनी उपजिजधयो में प्रिान

कर सकता िै, या इसके सिस्ट्य अन्यथा अनुबंध कर सकता िै--

(क) दक ऐसा प्रत्येक सिस्ट्य सोसाइिी के माध्यम से

अपनी उत्पाि का जनपिान करेगा ; और

(ख) दक कोई भी सिस्ट्य, िो उपजिजधयो के उल्लंघन या

ऐसे दकसी अनुबंध के जलए िोषी पाया िाता िै, दकसी भी

पटरणामी नुकसान के जलए सोसाइिी को प्रजतपूर्तष करेगा, िैसा

दक उपजिजधयो में उपबंध दकया िा सकता िै ।

52. कजतपय सोसाइटियों की अचल संपजत्त पर

प्रभार—(1) तत्समय प्रिृत्त इस जिजनयम या दकसी अन्य जिजध

में अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए भी--

(क) कोई भी व्यजि िो दकसी सोसाइिी को ऋण के जलए

आिेिन करता िै, जिसका िि सिस्ट्य िै, यदि िि दकसी भूजम

का माजलक िै या दकरायेिार के रूप में दकसी भूजम में उसका

जित िै, जिजित प्रपत्र में घोषणा, ऐसी घोषणा करेगा में कथन

दकया िाएगा दक आिेिक उसके द्वारा ऋण की राजि के

भुगतान के जलए घोषणा में जनर्िष्ट ऐसी भूजम या ब्याि पर एक

प्रभार सर्िषत करता िो, िो सोसाइिी आिेिन के अनुसरण में

सिस्ट्य को िे सकती िै, और भजिष्य के सभी अजग्रमों के जलए,

यदि कोई िो, उसके जलए अपेजक्षत िै, िो सोसाइिी उसे ऐसे

सिस्ट्य के रूप में बना सकता िै, अजधकतम राजि के अधीन,

ऋण और अजग्रम की ऐसी राजि पर ब्याि के साथ, िो दक

सोसाइिी द्वारा अिधाटरत की िाए ;

(ख) कोई भी व्यजि जिसने इस जिजनयम के तुरंत प्रिृत्त

िोने की तारीख से पूिष दकसी सोसाइिी से ऋण जलया िै, और

िो दकसी भी भूजम का माजलक िै या दकरायेिार के रूप में भूजम

में रुजच रखता िै, और जिसने ऐसी घोषणा निीं की िै पूिोि

तारीख से पूिष िी यथासंभििीघ्र तत्पश् चात प्ररूप में और खंड

(क) में जनर्िष्ट प्रभाि के जलए एक घोषणा करेगा; और ऐसा

कोई भी व्यजि, िब तक उसने ऐसी घोषणा निीं की िै,

सोसाइिी के सिस्ट्य के रूप में दकसी भी अजधकार का प्रयोग

करने का िकिार निीं िोगा ;

(ग) खंड (क) या खंड (ख) के अधीन की गई घोषणा

दकसी भी समय दकसी सिस्ट्य द्वारा उस सजमजत की सिमजत से

बिली िा सकती िै जिसके पक्ष में ऐसा आरोप बनाया गया िै ;

(घ) कोई भी सिस्ट्य खंड (क) या खंड (ख) के अधीन की

गई घोषणा में जिजनर्िष्ट भूजम या ब्याि के पूरे या दकसी जिस्ट्से

को तब तक अलग निीं करेगा िब तक दक सिस्ट्य द्वारा उधार

ली गई पूरी राजि को भरे हुए ब्याि सजित चुकाया निीं िाता

िै :

परंतु दकसी सिस्ट्य के जलए ऐसी भूजम के दकसी निर से

पानी की आपूर्तष के जलए तत्समय प्रिृत्त लागू जिजध के अधीन

ऐसी भूजम या उसके दकसी जिस्ट्से के संबंध में संघ राज्यक्षेत्र

प्रिासन के पक्ष में एक बंधक बांड जनष्पादित करना िैध िोगा:

परंतु यि और दक यदि दकसी सिस्ट्य द्वारा उधार ली गई

राजि के एक जिस्ट्से का भुगतान दकया िाता िै, तो सोसाइिी,

सिस्ट्य के आिेिन पर, सुरक्षा की घोषणा में जनर्िष्ट चल या

अचल संपजत्त खंड (क) या खंड (ख) के अधीन की गई घोषणा के

अधीन बनाए गए आरोप से, सिस्ट्य से िेय या बकाया राजि की

िेष राजि के जलए सुरक्षा की पयाषप्तता के संबंध में, िैसा िि

उजचत समझे, मुि कर सकती िै ;

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

17

(ड.) खंड (घ) के उपबंधों के उल्लंघन में दकया गया कोई

अलगाि िून्य िोगा;

(च) भू-रािस्ट्ि या भू-रािस्ट्ि के रूप में िसूली योग्य

दकसी भी धन के संबंध में संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन के पूिष िािों के

अधीन, और संघ राज्यक्षेत्र के दकसी भाग से तत्समय प्रिृत्त

दकसी भी जिस्ट्से में जिजध के अधीन दकए गए दकसी पंचाि के

अधीन बनाया गया िुल्क, यदि कोई िो :

परंतु भू-रािस्ट्ि संजिता या तत्समय प्रिृत्त दकसी जिजध

में अंतर्िष्ट दकसी भी बात के िोते हुए भी, उसके अधीन बनाए

गए अजधकारों के टरकॉडष में खंड (क) या खंड (ख) के अधीन एक

घोषणा के अधीन बनाए गए भूजम या ब्याि पर िर िुल्क का

जििरण भी सजम्मजलत िोगा ।

(2) इस धारा के प्रयोिनों के जलए, "सोसाइिी" पि से

जनम्नजलजखत अजभप्रेत िै—

(i) कोई भी सोसाइिी, जिसके अजधकांि सिस्ट्य कृषक िैं

और जिसका प्राथजमक उद्देश्य अपने सिस्ट्यों के जलए ऋण प्राप्त

करना िै ; या

(ii) दकसी साधारण या जििेष आिेि द्वारा संघ राज्यक्षेत्र

प्रिासन द्वारा इस जनजमत्त जिजनर्िष्ट कोई सोसाइिी, या

सोसाइिीयों के िगष की कोई सोसाइिी िै।

53. कजतपय मामलों में िेतन से िािे के जलए किौती—

(1) सोसाइिी का कोई सिस्ट्य सोसाइिी के पक्ष में एक करार

कर सकता िै, परंतु यि दक उसका जनयोिा, ऐसी राजि िो

करार में जनर्िष्ट की िा सकती िै, और सोसाइिी को भुगतान

करने के जलए दकसी भी ऋण या सिस्ट्य के जिरूद् सोसाइिी

की अन्य मांग की संतुजष्ट में किौती की गई राजि को जनयोिा

द्वारा उसे िेय िेतन या मििूरी से किौती करने के जलए सक्षम

िो ।

(2) ऐसे करार के जनष्पािन पर, जनयोिा यदि सोसाइिी

द्वारा इस प्रकार अपेजक्षत जलजखत में एक मांग के द्वारा और िब

तक सोसाइिी यि सूजचत निीं करता िै दक ऐसे पूणष ऋण या

मांग का भुगतान दकया गया िै, में किौती करेगा िेतन भुगतान

अजधजनयम, 1936 (1936 का 4) या तत्समय प्रिृत्त दकसी

तत्स्ट्थानी जिजध में अंतर्िष्ट प्रजतकूल दकसी बात के िोते हुए भी

और ऐसी किौती की गई राजि का भुगतान सोसाइिी को चौिि

दिनों की अिजध के भीतर करें, जिस तारीख को ऐसी किौती की

िाती िै िैसे दक यि उसके द्वारा िेय मििूरी का एक जिस्ट्सा था

िैसा दक जिस दिन िि भुगतान करता िै और ऐसी किौती और

भुगतान करने के जलए, यि खुला निीं िोगा, ऐसे ऋण या मांग

की िैधता या अन्यथा पर सिाल उठाने के जलए जनयोिा उि

अजधजनयम के अधीन अपेजक्षत िै ।

(3) यदि उपधारा (2) के अधीन की गई मांग की प्राजप्त

के पश् चात , जनयोिा दकसी भी समय संबंजधत सिस्ट्य को िेय

िेतन या मििूरी से मांग में जनर्िष्ट राजि की किौती करने में

जिफल रिता िै, या सोसाइिी के जलए किौती की गई राजि को

भेिने में चूक करता िै जनयोिा उसके भुगतान के जलए

व्यजिगत रूप से उत्तरिायी िोगा; और राजि सोसाइिी की ओर

से उससे भू-रािस्ट्ि के बकाया के रूप में, रजिस्ट्रार द्वारा िारी

दकए िा रिे प्रमाणपत्र पर ऐसी िांच करने के पश् चात , िो िि

ठीक समझे, िसूली योग्य िोगी, और ऐसी िेय राजि जनयोिा के

बकाया मििूरी के रूप में ऐसी िेयता के संबंध में और रजिस्ट्रार

द्वारा िारी दकए गए प्रमाण पत्र पर दकसी भी न्यायालय में

सिाल निीं उठाया िाएगा ।

(4) इस धारा में अंतर्िष्ट कुछ भी संजिधान के अथष के

भीतर और खानों और तेल क्षेत्रों में दकसी भी रेलिे में जनयोजित

व्यजियों पर लागू निीं िोगा।

अध्याय 5

सोसाइटियों को सिायता

54. सोसाइटियों में संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन की प्रत्यक्ष

भागीिारी—(1) संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन सीजमत िेयता िाले

सोसाइिी की िेयर पूंिी में सीधे सिस्ट्यता ले सकता िै।

(2) उपधारा (1) के अधीन संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन द्वारा

सिस्ट्यता ली गई िेयर पूंिी, संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन के पूिष

अनुमोिन के जसिाए सोसाइिी द्वारा संघ राज्यक्षेत्र को िापस

निीं की िाएगी ।

55. सोसाइटियों को सिायता के अन्य प्ररूप—तत्समय

प्रिृत्त दकसी भी जिजध में अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए ककंतु

ऐसी ितों के अधीन, िो संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन, साधारण या

जििेष आिेि द्वारा, इस संबंध में जनर्िष्ट कर सकता िै,--

(क) एक सोसाइिी को ऋण िेना ;

(ख) दकसी सोसाइिी द्वारा िारी दकए गए जडबेंचर के

मूलधन के भुगतान की गारंिी, या उस पर ब्याि, या िोनों, या

दकसी सोसाइिी की िेयर पूंिी का उसके सिस्ट्यों को

पुनभुषगतान, या उस पर लाभांि का भुगतान ऐसी िरों पर िो

सकता िै संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन द्वारा जनर्िष्ट ;

(ग) सिकारी बैंक द्वारा दकसी सोसाइिी को दिए गए

साधनों के मूलधन का पुन: संिाय करने और ब्याि के भुगतान

की गारंिी िेना ;

(घ) भारतीय टरििष बैंक, या भारतीय औद्योजगक जित्त

जनगम, या तत्समय प्रिृत्त दकसी भी जिजध के अधीन गटठत

दकसी अन्य प्राजधकरण द्वारा दिए गए ऋण और अजग्रम के

मूलधन का पुन: संिाय करने और ब्याि के भुगतान की गारंिी

िेता िै ; या

(ड.) दकसी सोसाइिी को सजब्सडी सजित दकसी अन्य रूप

में जित्तीय सिायता प्रिान करना ।

18

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

अध्याय 6

सोसाइिी की संपजत्त और जनजध

56. जिभाजित न की िाने िाली जनजध—(1) दकसी

सोसाइिी की जनजध या आजस्ट्तयों का कोई भी भाग, लाभांि

समकारी जनजध के अजतटरि, यदि कोई िो, और उसके िुद्

लाभ का भुगतान छूि या लाभांि अन्यथा जितटरत, इसके

सिस्ट्यों को या जिभाजित के रूप में दकया िाएगा :

परंतु दकसी सिस्ट्य के मामले में, िो सोसाइिी का

िेतनभोगी कमषचारी भी िै, ऐसे कमषचारी के रूप में दकए गए

कायष के जलए उसे ऐसे िेतनमान पर भुगतान दकया िा सकता िै

िो उपजिजधयो द्वारा अजधकजथत दकया िा सकता िै ।

(2) िुद् लाभ के अजतटरि दकसी सोसाइिी की जनजध

और आजस्ट्तयों से कोई मानिेय का भुगतान निीं दकया िाएगा

और ऐसा मानिेय जिजित सीमा से अजधक निीं िोगा ।

57. लाभ का जिजनयोग—(1) लाभ अर्िषत करने िाली

सोसाइिी, सभी अर्िषत ब्याि िो दक तीन मिीने, स्ट्थापना

िुल्क, योगिान, यदि कोई िो, से अजधक लाभों के जलए अजतिेय

िै, िषष के सकल लाभ को घिाकर अपने िार्षषक िुद् लाभ की

गणना करेगी । अपने कमषचाटरयों के भजिष्य जनजध और ग्रेच्युिी

जनजध के जलए, ऋण और िमा पर िेय ब्याि, ऑजडि फीस,

मरम्मत, दकराए, कर और मूल्यह्रास सजित काम करने का खचष,

और खराब ऋण और िाजनयों को लाभ से सृजित दकसी जनजध

में समायोजित निीं दकया गया िै ।

(2) तथाजप, एक सोसाइिी, िषष के जलए िुद् लाभ में,

पूिषिती िषों में अर्िषत ब्याि, दकन्तु िास्ट्ति में िषष के िौरान

िसूल दकया िा सकता िै और इस प्रकार प्राप्त िुद् लाभ जपछले

िषष से आगे लाए गए लाभ की राजि के साथ िो़िकर जिजनयोग

के जलए उपलब्ध िोगा ।

(3) कोई सोसाइिी अपने लाभ को अपनी आरजक्षत जनजध

या उसके द्वारा सृजित दकसी अन्य जनजध में सिस्ट्यों को उनके

िेयरों पर लाभांि के भुगतान के जलए, िैजक्षक जनजध में

योगिान करने के जलए जिजनयोजित कर सकती िै, िैसा दक

प्रिासक, रािपत्र में अजधसूचना द्वारा सिस्ट्यों और व्यजियों से

प्राप्त समथषन के आधार पर छूि के भुगतान के जलए िो इसके

कारबार के सिस्ट्य निीं िैं और मानिेय के भुगतान के जलए

जिजित ितों के अधीन और दकसी अन्य उद्देश्य के जलए िो

जनयमों या उपजिजधयों में जनर्िष्ट दकया िा सकता िै, जनर्िष्ट

कर सकता िै :

परंतु िार्षषक साधारण बैठक के अनुमोिन और इस

जिजनयम, जनयमों और उपजिजधयों के अनुरूप िोने के जसिाय

लाभ का कोई भी भाग जिजनयोजित निीं दकया िाएगा ।

58. आरजक्षत जनजध—(1) प्रत्येक सोसायिी िो अपने

संव्यििार से लाभ कमाती िै या प्राप्त कर सकती िै, जनजध

आरजक्षत करेगी, एक आरजक्षत जनजध बनाए रखेगी ।

(2) प्रत्येक िषष सोसाइिी के िुद् लाभ का कम से कम

एक-चौथाई, आरजक्षत जनजध में ले िाया िाएगा, और ऐसी

आरजक्षत जनजध का उपयोग सोसाइिी के कारबार में दकया िा

सकता िै या धारा 63 के उपबंधों के अधीन िो सकता िै, जनिेि

दकया िा सकता िै, िैसा दक प्रिासक साधारण या जििेष

आिेि द्वारा जनिेजित कर सकता िै, या, प्रिासक की जपछली

मंिूरी के साथ, इस जिजनयम या संघ राज्यक्षेत्र या स्ट्थानीय

जित के उद्देश्यों को बढािा िेने के जलए कुछ सािषिजनक प्रयोिन

के जलए या कुछ ऐसे प्रयोिन के जलए उपयोग दकया िा सकता

िै :

परंतु यदि रजिस्ट्रार का समाधान िो िाता िै दक

सोसाइिी की जित्तीय जस्ट्थजत ऐसी िै दक िि अपने िुद् लाभ के

एक-चौथाई की उपरोि सीमा तक अपनी आरजक्षत जनजध तक

ले िाने में असमथष िै, तो िि जलजखत आिेि द्वारा, ऐसी अिजध

के जलए, िैसा दक िि आिेि में जनर्िष्ट कर सकता िै, सोसाइिी

के जलए पूिोि सीमा से कम लेदकन उसके िुद् लाभ के िसिें

भाग से कम निीं तय कर सकता िै ।

(3) ििां दकसी सोसाइिी की आरजक्षत जनजध उसकी

अजधकृत िेयर पूंिी से अजधक िो िाती िै, तब, उपधारा (1) में

अंतर्िष्ट दकसी भी बात के िोते हुए भी, सोसाइिी रजिस्ट्रार की

पूिष अनुमजत से प्रत्येक िषष अपनी आरजक्षत जनजध में एक राजि

ले िा सकती िै िो एक-चौथाई से कम िो सकता िै लेदकन

अपने िुद् लाभ के िसिें जिस्ट्से से कम निीं िो सकता िै ।

59. लाभांि पर प्रजतबंध—कोई भी सोसाइिी रजिस्ट्रार

की पूिष मंिूरी के जबना अपने सिस्ट्यों को पन्द्रि प्रजतित से

अजधक की िर से लाभांि का भुगतान निीं करेगी ।

60. िैक्षजणक जनजध में अजभिाय— (1) प्रत्येक सोसाइिी

िो चालू िषष के लाभ में से अपने अंििान सिस्ट्यों को लाभांि

घोजषत करता िै, िैक्षजणक जनजध में उस िर पर अजभिाय करेगा

िैसा दक जिक्षा के जलए जिजित दकया िा सकता िै ।

(2) िैक्षजणक जनजध में अजभिाय करने के जलए उत्तरिायी

कोई भी सोसाइिी अपने सिस्ट्यों को तब तक लाभांि का

भुगतान निीं करेगी, िब तक दक रजिस्ट्रार को उि अजभिाय,

उस तारीख से िो मिीने के भीतर निीं दकया िाता िै, जिस

दिन उसके खातों को उसके सिस्ट्यों के िार्षषक आम बैठक के

साधारण जनकाय द्वारा अपनाया िाता िै ।

(3) कोई अजधकारी िो िानबूझकर इस धारा की

अपेक्षाओं का पालन करने में जिफल रिता िै, िि व्यजिगत रूप

से रजिस्ट्रार को राजि की भरपाई करने के जलए उत्तरिायी

िोगा ।

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

19

61. अन्य सािषिजनक प्रयोिन के जलए अजभिाय—धारा

58 में उपबंजधत की गई आरजक्षत जनजध प्रिान करने के पश् चात ,

धारा 60 में प्रिान की गई िैक्षजणक जनजध के जलए, एक

सोसाइिी अपने िुद् लाभ का बीस प्रजतित से अजधक की राजि

को अलग रख सकती िै और, रजिस्ट्रार के अनुमोिन से, ऐसी

पूरी या आंजिक राजि का उपयोग दकसी भी जिजित सिकारी

उद्देश्य में योगिान करने के जलए या चैटरिेबल बंिोबस्ट्ती

अजधजनयम, 1890 (1890 का 6) की धारा 2 के अथष के भीतर

दकसी भी धमाषथष प्रयोिन के जलए समय-समय पर उपयोग करें।

62. जनजधयों का जिजनधान—कोई सोसाइिी अपनी

जनजध का जनिेि या िमा कर सकती िै,—

(क) एक केंद्रीय बैंक, या राज्य सिकारी बैंक में;

(ख) भारतीय स्ट्िेि बैंक या दकसी राष्ट्रीयकृत बैंक में;

(ग) डाक बचत बैंक में;

(घ) भारतीय रस्ट्ि अजधजनयम, 1882 (1882 का 20)

की धारा 20 में जनर्िष्ट दकसी भी प्रजतभूजत में;.

(ड.) सीजमत िेयता िाले दकसी अन्य सोसाइिी द्वारा

िारी िेयरों, या सुरक्षा बांडों, या जडबेंचर में;

(च) दकसी भूजम या भिन में;

(छ) कमषचारी भजिष्य जनजध में; या

(ि) संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन के स्ट्िाजमत्ि या जनयंत्रण

िाले दकसी भी जनगम में, प्रिासक के पूिष अनुमोिन के साथ ऐसे

जिजधयों और ितों के अधीन िो इस संबंध में जिजित की िा

सकती िैं ।

स्ट्पष्टीकरण-- इस धारा के प्रयोिनों के जलए, अजभव्यजि

"राष्ट्रीयकृत बैंक" से अथष बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अिषन

और अंतरण) अजधजनयम, 1970 (1970 का 5) और बैंककारी

कंपनी (उपक्रमों का अिषन और अंतरण) अजधजनयम, 1980

(1980 का 40) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन गटठत

एक नया बैंक अजभप्रेत िै ।

63. व्यजिगत क्षमताओं में अजधकाटरयों द्वारा या उनके

जिरुद् फाइल की गई या ली गई कजतपय कायषिाजियों के जलए

उपयोग निीं की िाने िाली जनजधयां—(1) दकसी सोसाइिी की

जनजध से कोई व्यय इस जिजनयम की दकसी भी धारा के अधीन

सोसाइिी के दकसी अजधकारी द्वारा या व्यजिगत क्षमता से

फाइल की गई या उसके जिरुद् की गई दकसी भी कायषिािी की

लागत को चुकाने के प्रयोिन से उपगत निीं दकया िाएगा ।

(2) यदि कोई प्रश् न उठता िै दक क्या कोई व्यय इस

प्रकार दकया िा सकता िै या निीं, तो ऐसा प्रश् न रजिस्ट्रार के

पास भेिा िाएगा और उस पर जिजनश् चय जलया िाएगा और

उसका जिजनश् चय अंजतम िोगा ।

(3) यदि कोई व्यजि उपधारा (1) के उल्लंघन में व्यय

उपगत करता िै, रजिस्ट्रार व्यजि को एक मिीने के भीतर

सोसाइिी को राजि चुकाने का जनिेि िेगा और ििां ऐसा

व्यजि जनिेजित राजि को चुकाने में जिफल रिता िै, ऐसी

राजि, रजिस्ट्रार द्वारा िारी प्रमाणपत्र पर, भू-रािस्ट्ि के

बकाया के रूप में िसूली योग्य िोगी ।

(4) जिस व्यजि के जिरुद् उपधारा (3) के अधीन

रजिस्ट्रार द्वारा कारषिाई की िाती िै, िि दकसी भी अगले उप-

जनिाषचन सजित दकसी भी अगले जनिाषचन में एक मिीने की

अिजध की समाजप्त के तुरंत बाि दकसी भी सोसाइिी का

अजधकारी या दकसी भी सोसाइिी का अजधकारी िोने के जलए

अयोग्य िो िाएगा, जिसके िौरान ऐसा व्यजि उपधारा (3) में

जनर्िष्ट राजि का भुगतान करने में जिफल रिा िै ।

अध्याय 7

सजमजतयों का प्रबंधन

64. सोसाइिी का अंजतम प्राजधकार—इस जिजनयम और

इसके अधीन बनाए गए जिजधयों के उपबंधों के अधीन, प्रत्येक

सोसाइिी का अंजतम प्राजधकार साधारण बैठक में सिस्ट्यों के

साधारण जनकाय में जनजित िोगा, जिसे उस रीजत से बुलाया

िाएगा जिसे उपजिजधयों में जनर्िष्ट दकया िा सकता िै :

परंतु ििां दकसी सोसाइिी की उपजिजधया ऐसे सिस्ट्यों

के प्रजतजनजधयों के जनिाषचन का उपबंध करती िैं, अंजतम

प्राजधकार ऐसे सिस्ट्यों के प्रजतजनजधयों में जनजित िो सकता िै

िो जिजित रीजत से चुने िाते िैं, और साधारण बैठक में इकट्ठे

िोते िैं ।

65. सजमजत के सिस्ट्य का अर्िषत, जनरर्िषत िोना, सजमजत

की िजियां और कृत्य—(1) प्रत्येक सोसायिी का प्रबंधन इस

जिजनयम, जनयमों और उपजिजधयों के अनुसार गटठत एक

सजमजत में जनजित िोगा, िो ऐसी िजियों का प्रयोग करेगा और

ऐसे कतषव्यों का पालन करेगा िो इसके जिजनयमन, जनयम और

उपजिजधयों द्वारा क्रमिः सुजनजश् च त या अजधरोजपत दकए िा

सकते िैं ।

(2) इसमें िैसा उपबंजधत िै उसके जसिाए, दकसी

सोसाइिी की प्रबंध सजमजत, िो एक िीषष सजमजत निीं िै, इसमें

अन्य लोगों के साथ-साथ इक्कीस से अनजधक जनिाषजचत सिस्ट्यों

की संखया सजम्मजलत िोगी ।

स्ट्पष्टीकरण-- इस उपधारा के प्रयोिनों के जलए,

अजभव्यजि "िीषष सोसाइिी" से एक सोसाइिी अजभप्रेत िै--

(क) जिसके संचालन का क्षेत्र पूरे संघ राज्यक्षेत्र लक्षद्वीप

तक फैला हुआ िै;

(ख) जिसका मुखय उद्देश्य सिस्ट्यों के रूप में इससे संबद्

सजमजतयों के प्रमुख उद्देश्यों को बढािा िेना और उन्िें सुजिधाएं

और सेिाएं प्रिान करना िै; तथा

(ग) जिसे रजिस्ट्रार द्वारा एक िीषष सोसाइिी के रूप में

िगीकृत दकया गया िै ।

20

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(3) प्रत्येक सोसाइिी की प्रबंध सजमजत में मजिलाओं के

जलए िो स्ट्थान आरजक्षत िोंगे िो सिस्ट् यों के रूप में व् यजष्टयों से

जमलकर बनेगी और ऐसे िगष या व्यजियों की श्रेणी के सिस्ट्य

िोंगे िो जिजित दकए िा सकते िैं:

परंतु एक सीि उन व्यजियों के जलए आरजक्षत िोगी िो

छोिे दकसान और सीमांत दकसान िैं ।

(4) सोसाइिी का प्रत्येक सिस्ट्य िो िोि का िकिार िै,

उसकी सजमजत के सिस्ट्य के रूप में जनयुजि के जलए पात्र

िोगा—

(क) िि लगातार कम से कम तीन िषष की अिजध के

जलए सोसाइिी का सिस्ट्य िै और ऐसा सिस्ट्य बना रिता िै और

उसके द्वारा दकसी सिकारी सजमजत, सिकारी बैंक या दकसी

अन्य जित्तीय संस्ट्थान से दकसी भी ऋण के संबंध में चूक निीं

करता िै ;

(ख) सोसाइिी के साथ दकए गए दकसी भी जिद्यमान

करार में या सोसाइिी द्वारा बेची या खरीिी गई दकसी भी

संपजत्त में या सोसाइिी के दकसी भी अन्य संव्यििार में दकसी

भी जनिेि या सोसाइिी से जलए गए दकसी भी ऋण को छो़िकर

उसका कोई जित िै ;

(ग) िि ऐसे सिस्ट्य के रूप में जनयुजि के जलए अन्यथा

अनर्िषत निीं िै ;

(घ) उसे धारा 80 के अधीन उत्तरिायी निीं ठिराया

िाता िै ;

(ड.) धारा 90 के अधीन मजिस्ट्रेि द्वारा उसके जिरुद्

लागत की िसूली का कोई आिेि निीं दिया गया िै ;

(च) उसके जिरुद् धारा 92 के अधीन कोई आिेि निीं

दिया गया िै ;

(छ) िि इस जिजनयम की धारा 120 के अधीन दकसी भी

अपराध या दकसी भी सोसाइिी की संपजत्त के संबंध में भारतीय

िंड संजिता (1860 का 45) की धारा 403 के दकसी भी

अपराध के जलए िोषी निीं पाया िाता िै ।

(5) सजमजत का कोई सिस्ट्य, िो ऊपर जिजनर्िष्ट दकसी

भी जनरिषताए को ििन करता िै, कायाषलय को खाली कर िेगा

और यदि िि ऐसे पि को खाली निीं करता िै, तो उसे

रजिस्ट्रार द्वारा ऐसे सिस्ट्य के रूप में ििा दिया िाएगा :

परंतु रजिस्ट्रार ििाने का ऐसा आिेि िेने से पिले

संबंजधत व्यजि को सुनिाई का मौका िेगा ।

(6) उपधारा (4) में अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए

भी,--

(क) ऋण िेने िाली सजमजतयों के मामले में, कोई

भी व्यजि िो उधार िेने का व्यिसाय करता िै,

सोसाइिी की प्रबंध सजमजत के सिस्ट्य के रूप में जनयुजि

के जलए पात्र निीं िोगा ; तथा

(ख) दकसी सोसाइिी का कोई सिस्ट्य, िो उस

सोसाइटियों द्वारा चलाए िा रिे दकसी प्रकार का

व्यिसाय करता िै, जिसका िि सिस्ट्य िै, रजिस्ट्रार की

मंिूरी के जबना उस सोसाइिी की दकसी भी सजमजत का

सिस्ट्य बनने का पात्र निीं िोगा ।

(7) ििां कोई व्यजि उपधारा (6) के उल्लंघन में दकसी

सोसाइिी का सिस्ट्य बन िाता िै, उसे रजिस्ट्रार द्वारा ऐसी

सजमजत के सिस्ट्य के रूप में पि से ििा दिया िाएगा :

परंतु रजिस्ट्रार ििाने का आिेि िेने से पिले संबंजधत

व्यजि को सुनिाई का अिसर िेगा ।

(8) प्रबंध सजमजत के जनिाषजचत सिस्ट्यों और उसके

पिाजधकाटरयों का कायषकाल जनिाषचन की तारीख से पांच िषष

का िोगा :

परंतु पिाजधकाटरयों का कायषकाल सिकारी बैंकों और

संघीय सजमजतयों के जलए प्रबंध सजमजत के जनिाषचन की तारीख

से ढाई िषष का िोगा :

परन्तु यि और दक प्रबंध सजमजत में एक आकजस्ट्मक टरजि

को उसी िगष या सिस्ट्यों की श्रेजणयों में से नामांकन द्वारा भरेगी

जिनके संबंध में आकजस्ट्मक टरजि ऐसी टरजि की तारीख से साठ

दिनों के भीतर उत्पन् न हुई िै, यदि िेष अिजध प्रबंध सजमजत का

कायाषलय अपने मूल कायषकाल के आधे से भी कम िै ।

(9) प्रबंध सजमजत के जनिाषजचत सिस्ट्य और उसके

पिाजधकारी अपने कायषकाल की समाजप्त की तारीख पर पि पर

बने रिेंगे ।

(10) सिकारी बैंकों और संघीय सजमजतयों की प्रबंध

सजमजत के पिाजधकारी पुनर्नषिाषचन के जलए पात्र िोंगे ।

(11) सोसाइिी द्वारा दकए गए उद्देश्यों और दक्रयाकलापों

से संबंजधत दकसी अन्य क्षेत्र में बैंककंग, प्रबंधन, जित्त या

जििेषज्ञता के क्षेत्र में अनुभि रखने िाले व्यजियों को प्रबंध

सजमजत के सिस्ट्यों के रूप में सियोजित करेगा :

परंतु उपधारा (2) में जिजनर्िष्ट इक्कीस सिस्ट्यों के

अजतटरि ऐसे सियोजित सिस्ट्यों की संखया िो से अजधक निीं

िोगी ।

(12) पूिोि सियोजित सिस्ट्यों को सजमजत के दकसी भी

जनिाषचन में ऐसे सिस्ट्यों के रूप में मतिान करने या प्रबंध

सजमजत के पिाजधकाटरयों के रूप में जनिाषजचत िोने के पात्र िोने

का अजधकार निीं िोगा ।

(13) यदि दकसी सोसायिी के कायाषत्मक जनिेिक िैं, तो

िे भी प्रबंध सजमजत के सिस्ट्य िोंगे और ऐसे सिस्ट्यों को ऐसी

प्रबंध सजमजत के सिस्ट्यों की कुल संखया की गणना के प्रयोिन से

बािर रखा िाएगा ।

स्ट्पष्टीकरण-- इस उपधारा के प्रयोिनों के जलए,

"कायाषत्मक जनिेिक" अजभव्यजि से और इसमें एक प्रबंध

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

21

जनिेिक या एक मुखय कायषकारी अजधकारी, िो भी पिनाम

किा िाता िै, या कोई पिेन सिस्ट्य या संबंजधत सोसाइिी के

जिभाग के प्रमुख सजम्मजलत िैं, सजमजत द्वारा मनोनीत सिस्ट्य

अजभप्रेत िै ।

66. कजतपय पटरजस्ट्थजतयों में संरक्षक की जनयुजि—(1)

ििां दकसी सोसाइिी के संबंध में--

(i) प्रबंधन की एक नई सजमजत, दकसी भी कारण से, ऐसी

सोसाइिी की प्रबंधन सजमजत के सिस्ट्यों के कायषकाल की

समाजप्त से पिले जनिाषजचत निीं िोती िै ;

(ii) एक नई सजमजत चुनी गई िै और पंद्रि दिनों की

अिजध के भीतर कायष निीं कर रिी िै (धारा 79 में जनर्िष्ट

सजमजत निीं िै) ;

(iii) सजमजत के गठन में गजतरोध िै और यदि ऐसी

सजमजत ने कायष करना बंि कर दिया िै और प्रबंधन में एक टरि

स्ट्थान अर्िषत िो गया िै ;

(iv) दकसी सजमजत को कायाषलय में प्रिेि करने से

जनिाटरत दकया िाता िै ;

(v) एक नई सजमजत उस तारीख को कायाषलय में प्रिेि

करने में जिफल रिी िै जिस तारीख को जिद्यमान सजमजत का

कायषकाल समाप्त िो गया था ; या

(vi) ििां एक सोसाइिी में व्यजियों के एक से अजधक

समूि सजमजत के सिस्ट्यों के रूप में जनिाषजचत िोने का िािा कर

रिे िैं और उसके संबंध में कायषिािी िायर की गई िै,

रजिस्ट्रार, यथाजस्ट्थजत, एक िषष की अिजध के जलए या

िब तक कोई नई प्रबंधन सजमजत निीं चुनी िाती िै या कायष

करना िुरू कर िेता िै, तब तक सोसाइिी के मामलों का

प्रबंधन करने के जलए सोसाइिी का संरक्षक िो जलजखत आिेि

द्वारा एक व्यजि या व्यजियों की एक सजमजत को जनयुि करेगा:

परन्तु ऐसा आिेि करने से पूिष, रजिस्ट्रार सोसाइिी के

प्रधान कायाषलय के नोटिस बोडष पर नोटिस में जिजनर्िष्ट अिजध

के भीतर प्रस्ट्ताजित आिेि के संबंध में आपजत्तयां और सुझाि

आमंजत्रत करते हुए एक नोटिस प्रकाजित करेगा और उसे उस

अिजध के भीतर प्राप्त सभी आपजत्तयों और सुझािों पर जिचार

करेगा :

परन्तु यि और दक ऐसे नोटिस को दकसी भी मामले में

प्रकाजित करना आिश्यक निीं िोगा ििां रजिस्ट्रार का

समाधान िो दक तत्काल कारषिाई की िानी अपेजक्षत िै या ऐसी

नोटिस को प्रकाजित करना उजचत रूप से व्याििाटरक निीं िै ।

(2) अजभरक्षक एक िषष की अिजध के भीतर ऐसी

सोसाइिी का जनिाषचन कराने की व्यिस्ट्था करेगा और उस

अिजध की समाजप्त से पिले सजमजत का गठन दकया िाएगा ।

(3) इस प्रकार जनयुि अजभरक्षक, रजिस्ट्रार के जनयंत्रण

और ऐसे जनिेिों के अधीन रिते हुए, िो िि समय-समय पर

िेता िै, उसे सजमजत के सभी या दकन्िीं कायों का प्रयोग करने

और ऐसी सभी कारषिाई करने का अजधकार िोगा िो दक

सोसाइिी के जित में आिश्यक िै ।

(4) उस अिजध के िौरान िब सोसाइिी के मामलों को

ऐसे संरक्षक द्वारा चलाया िाता िै, अजभरक्षक द्वारा दकए गए

या दकए िाने िाले सभी कायष, नई प्रबंधन सजमजत के जलए

बाध्यकारी िोंगे ।

67. अजिश् िास मत का प्रस्ट् ताि— (1) अध्यक्ष,

उपाध्यक्ष,

सभापजत,

उपसभापजत,

सजचि,

कोषाध्यक्ष

अजिश् िास प्रस्ट्ताि या कोई अन्य अजधकारी, चािे िि दकसी भी

पिनाम से पुकारा िाए, िो उस पि के जलए अपने जनिाषचन

संखया-सि के आधार पर पि धारण करता िै, यथाजस्ट्थजत,

अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सभापजत, उपसभापजत, सजचि, कोषाध्यक्ष

या ऐसे अजधकारी का पि समाप्त िो िाएगा, यदि सजमजत की

बैठक में और मतिान में उपजस्ट्थत सिस्ट्यों की कुल संखया का

जतिाई कम से कम िो के बहुमत से अजिश् िास प्रस्ट्ताि लाया

िाता िै, और उसके पश् चात ऐसा पि टरि माना िाएगा ।

(2) ऐसी जििेष बैठक के जलए मांग पर सजमजत के

सिस्ट्यों की कुल संखया के कम से कम एक जतिाई द्वारा िस्ट्ताक्षर

दकए िाएंगे, िो िोि िेने के िकिार िैं । रजिस्ट्रार को इसके

सिस्ट्य के रूप में और दकन्िीं अन्य मामलों में भी रजिस्ट्रार को

ऐसी सोसाइिी के संबंध में रजिस्ट्रार को सौंपे िाएंगे :

परंतु दकसी जििेष बैठक के जलए ऐसी कोई मांग उस

तारीख से छि मिीने की अिजध के भीतर निीं की िाएगी,

जिस पर उपधारा (1) में जनर्िष्ट दकसी भी अजधकारी ने अपने

कायाषलय में प्रिेि दकया िै ।

(3) रजिस्ट्रार जिस पर उपधारा (2) के अधीन मांग की

गई िै, ऐसी मांग प्राप्त िोने की तारीख से तीस दिनों की अिजध

के भीतर सजमजत की एक जििेष बैठक बुलाएगा ।

(4) बैठक की अध्यक्षता रजिस्ट्रार और अजधकारी द्वारा

अजधकृत ऐसे अजधकारी द्वारा की िाएगी, ऐसी बैठक की

अध्यक्षता करते समय अध्यक्ष या सभापजत के समान अजधकार

िोंगे, लेदकन िोि का अजधकार निीं िोगा :

परंतु मतिान गुप्त मतिान द्वारा िोगा ।

(5) इस धारा के अधीन बुलाई गई बैठक दकसी भी

कारण से स्ट्थजगत निीं की िाएगी ।

(6) यदि ऐसे अजिश् िास प्रस्ट्ताि को अस्ट्िीकृत कर दिया

िाता िै, तो प्रस्ट्ताि की अस्ट्िीकृजत की तारीख से छि मिीने की

अिजध के भीतर कोई नया अजिश् िास प्रस्ट्ताि निीं लाया

िाएगा ।

68.

सिकारी

जनिाषचन

प्राजधकरण—(1)

दकसी

सोसाइिी के सभी चुनािों के जलए जनिाषचक नामािली तैयार

करने और उसके संचालन का अधीक्षण, जनिेिन और जनयंत्रण

22

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

"सिकारी जनिाषचन प्राजधकरण" नामक प्राजधकरण में जनजित

िोगा, उस संबंध में प्रिासक द्वारा िैसा दक गटठत दकया िा

सकता िै ।

(2) सजमजत के सिस्ट्यों का प्रत्येक साधारण जनिाषचन और

दकसी भी आकजस्ट्मक टरजि सजित दकसी सोसायिी के

पिाजधकाटरयों का जनिाषचन, लागू सीमा तक, जनधाषटरत प्रदक्रया

के अनुसार आयोजित दकया िाएगा ।

(3) सिकारी जनिाषचन प्राजधकरण में एक सिकारी

जनिाषचन अजधकारी िोगा, िो प्रिासक द्वारा संघ राज्यक्षेत्र के

अजधकाटरयों में से जनयुि दकया िाएगा, िो ऐसी अिषता और

अनुभि को पूरा करता िै िो जिजित दकया िा सकता िै ।

(4) प्रिासक संघ राज्यक्षेत्र के दकसी भी कमषचारी को

सिकारी जनिाषचन प्राजधकरण के सजचि के रूप में जनयुि कर

सकता िै ।

(5) प्रिासक, सिकारी जनिाषचन अजधकारी से परामिष के

पश् चात , इस जिजनयम के अधीन अपने कायों को करने में उसकी

सिायता करने के जलए अजधकाटरयों और कमषचाटरयों को अपने

कायाषलय के जलए प्रिान कर सकता िै ।

(6) प्रिासक, िब सिकारी जनिाषचन अजधकारी द्वारा

ऐसा अनुरोध दकया िाता िै, तो सिकारी जनिाषचन प्राजधकरण

को ऐसे कमषचारी उपलब्ध करा सकते िैं िो उपधारा 1 द्वारा

सिकारी जनिाषचन प्राजधकरण को दिए गए कायों के जनिषिन के

जलए आिश्यक िो सकते िैं ।

(7) तत्समय प्रिृत्त दकसी जिजध में अंतर्िष्ट दकसी भी

बात के िोते हुए भी, प्रत्येक सोसोइिी का जनिाषचन, सिकारी

जनिाषचन प्राजधकरण द्वारा जिद्यमान सजमजत के कायषकाल की

समाजप्त से एक मिीने पिले आयोजित दकया िाएगा जिससे यि

सुजनजश् च त दकया िा सके दक सजमजत के निजनिाषजचत सिस्ट्य

जनिषतमान सजमजत के सिस्ट्यों के कायाषलय की समाजप्त पर तुरंत

पि ग्रिण करें ।

(8) सिकारी जनिाषचन प्राजधकरण निीनतम तकनीक

और जििेषज्ञता का उपयोग करने सजित, प्रदक्रया, दििा-जनिेिों

और रीजत के अनुसार सोसाइिी या सोसाइटियों के िगष के

जनिाषचन आयोजित करेगा, िो जिजित दकया िा सकता िै :

परंतु प्रिासक, सोसाइिी के उद्देश्यों, सोसाइटियों के िगष,

संचालन के क्षेत्र और व्यिसाय के मानिंडों और सिस्ट्यों के

उजचत प्रबंधन और जितों पर जिचार करते हुए, साधारण या

जििेष आिेि द्वारा, ऐसी रीजत से सोसाइटियों को िगीकृत कर

सकता िै िो जिजित दकया िा सकता िै ।

(9) सिकारी जनिाषचन प्राजधकरण सजमजत के जलए और

अध्यक्ष या सभापजत, उपाध्यक्ष या उपसभापजत के कायाषलय

और ऐसे अन्य पिाजधकाटरयों के जलए भी जनिाषचन कराएगा,

साधारण जनिाषचन के बाि सजमजत के गठन की तारीख से पंद्रि

दिनों के भीतर सोसाइिी िो उपजिजधयों के अनुसार चुने िाने

के जलए अपेजक्षत िैं ।

(10) सिकारी जनिाषचन प्राजधकरण के स्ट्तर पर एक

जनिाषचन कोष रखा िाएगा और प्रत्येक सजमजत अपने जनिाषचन

पर खचष की अनुमाजनत राजि अजग्रम रूप से िमा करेगी, िैसा

दक जनिाषचन कोष के संबंध में सिकारी जनिाषचन प्राजधकरण

द्वारा जिजित और अपेजक्षत िो। । सिकारी जनिाषचन प्राजधकरण,

सजमजतयों के जनिाषचन के संचालन के जलए, पिाजधकाटरयों के

जनिाषचन सजित, संबंजधत सजमजत द्वारा योगिान की गई उि

जनजध से आिश्यक खचष ििन करेगा ।

(11) जनिाषचन का आयोिन करने में व्यय िजियों का

प्रयोग और कतषव्यों का पालन करने के जलए जनयुि व्यजियों को

यात्रा भत्ते, िैजनक भत्ते और पाटरश्रजमक, यदि कोई िो, के

भुगतान सजित दकसी भी जनिाषचन के आयोिन का खचष, से

ििन दकया िाएगा उि जनजध एिं व्यय जिजित रीजत से दकया

िाएगा तथा रजिस्ट्रार, सिकारी जनिाषचन प्राजधकरण द्वारा

मांग दकए िाने पर, ऐसी दकसी भी सोसाइिी या सोसायटियों

के िगष से, िो जनयमों में जिजित की िाए, जनिाषचन कराने का

व्यय िसूल करेगा :

परन्तु यदि कोई सजमजत जनिाषचन व्यय का भुगतान करने

में असफल रिती िै तो रजिस्ट्रार िेय राजि की िसूली के जलए

िसूली प्रमाण पत्र िारी कर सकता िै और ऐसी राजि भू-

रािस्ट्ि के बकाया के रूप में िसूल की िाएगी ।

(12) प्रत्येक सिकारी सोसाइिी की सजमजत,--

(क) सिकारी सजमजतयों के रजिस्ट्रार को ऐसी

अिजध की समाजप्त की तारीख से कम से कम छि मिीने

पिले अपने कायषकाल की समाजप्त के बारे में सूजचत करें ;

(ख) सजमजत या उसके पिाजधकाटरयों में हुई दकसी

आकजस्ट्मक टरजि को ऐसी टरजि िोने के पन्द्रि दिनों के

भीतर सूजचत करना ;

(ग) सिकारी जनिाषचन प्राजधकरण द्वारा जनर्िष्ट

कैलेंडर के अनुसार ऐसी पुस्ट्तकों, अजभलेखों और

सूचनाओं को प्रस्ट्तुत करना ; और

(घ) जनिाषचन के संचालन के जलए जनिाषचक

नामािली को सुचारू रूप से तैयार करने के जलए सभी

आिश्यक सिायता, लाभकर और सियोग प्रिान करना ।

69. पश् च जनिाषचन के जलए प्रिासक की िजि—ििां

पटरषि या लोक सभा या स्ट्थानीय प्राजधकरण की कमी, सूखा,

बाढ, आग या दकसी अन्य प्राकृजतक आपिा या बरसात की

िजि या दकसी जनिाषचन कायषक्रम के कारण, प्रिासक दकसी भी

सोसाइिी के जनिाषचन कायषक्रम से मेल खाता िो या प्रिासक

की राय में, दकसी भी सोसाइिी या सोसाइटियों के िगष के जलए

जनिाषचन कराना िनजित में निीं िै, प्रिासक, इस जिजनयम या

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

23

इसके अधीन बनाए गए जनयमों या उप-जिजधयों या तत्समय

प्रिृत्त दकसी अन्य जिजध में अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए भी

कुछ समय के जलए बल, जलजखत रूप में ििष दकए िाने िाले

कारणों के जलए, साधारण या जििेष आिेि द्वारा, दकसी भी

सोसाइिी या सोसाइिी के िगष के जनिाषचन को एक बार में छि

मिीने से अजधक की अिजध के जलए स्ट्थजगत निीं दकया िा

सकता िै, िो अिजध आगे बढाई िा सकती िै, तथाजप दक, कुल

अिजध कुल जमलाकर एक िषष से अजधक निीं िोगी ।

70. सोसाइिी की सजमजत पर एक से अजधक सीिों के

जलए जनिाषचन—यदि कोई व्यजि सजमजत में एक से अजधक

सीिों के जलए जनिाषजचत िोता िै, िब तक दक जनिाषचन के

पटरणाम की घोषणा की तारीख से सात दिनों की अिजध के

भीतर िि अपने िस्ट्ताक्षर के अधीन जलजखत रूप से सभी सीिों

में से एक को संबोजधत करते हुए इस्ट्तीफा िे िेता िै जनिाषचन

अजधकारी, या यथाजस्ट्थजत, सिकारी जनिाषचन प्राजधकरण द्वारा

इस संबंध में प्राजधकृत अजधकारी, समस्ट्त सोसाइिी की सीिें

टरि िो िाएंगी और यथाजस्ट्थजत, ऐसा त्यागपत्र प्राप्त िोने पर

या इस प्रकार टरि िोने पर, जनिाषचन अजधकारी या इस संबंध

में सिकारी जनिाषचन प्राजधकरण द्वारा अजधकृत अजधकारी

टरजि को भरने के जलए जनिाषचन करिाएगा ।

71. कायषकाल समाप्त िोने से पूिष, जनिाषचन की व्यिस्ट्था

करने के जलए सूजचत करने के जलए और सिायता करने के जलए

सजमजत या जििेष अजधकारी या अजभरक्षक का उत्तरिाजयत्ि—

(1) सजमजत का यि कतषव्य िोगा दक िि सिकारी जनिाषचन

प्राजधकरण को उसके कायषकाल की समाजप्त से पिले उसके

जनिाषचन कराने के बारे में सूजचत करे ।

(2) ििां सजमजत के भाग पर इसके जनिाषचन के जलए

उपधारा (1) के अधीन अपेजक्षत सिकारी जनिाषचन प्राजधकरण

को, और दकसी भी कारण से सजमजत के सिस्ट्यों के जनिाषचन के

बारे में सूजचत करने में असफल रिा िै, उसका सजमजत का

कायषकाल समाप्त िोने से पूिष आयोजित निीं दकया िा सकता िै

तो उसके सिस्ट्य अपने पि पर बने रिेंगे और ऐसी जस्ट्थजत में

रजिस्ट्रार धारा 66 के अधीन जिचार के अनुसार कारषिाई

करेगा ।

(3) उपधारा (2) के अधीन ऐसी कारषिाई करने पर, इस

प्रकार जनयुि अजभरक्षक तत्काल प्रभाि से जनिाषचन कराने के

जलए सिकारी जनिाषचन प्राजधकरण को सूजचत करेगा और

जनर्िष्ट अिजध के भीतर ऐसे जनिाषचन कराने के जलए आिश्यक

व्यिस्ट्था करने में सिायता करेगा ।

72. जनिाषचन पर नए अध्यक्ष को अजभलेख और संपजत्त

सौंपना—(1) एक नई सजमजत और उसके सभापजत के जनिाषचन

पर, सेिाजनिृत्त सभापजत, जिसके स्ट्थान पर नए सभापजत का

जनिाषचन दकया िाता िै, सजमजत के कायाषलय का प्रभार और

कब्िे में सोसाइिी के सभी कागिात और संपजत्त, यदि कोई िो,

सजमजत या उसका कोई अजधकारी, सजमजत के नए सभापजत को

को सौंप िेगा ।

(2) यदि सेिाजनिृत्त िोने िाला सभापजत पूिोि के रूप

में कायषभार सौंपने या सोसाइिी के कागिात और संपजत्त को

सौंपने में जिफल रिता िै या इंकार करता िै, तो रजिस्ट्रार, या

उसके द्वारा इस संबंध में सिि कोई व्यजि, जलजखत आिेि

द्वारा उसे तत्काल जनिेि िे सकता िै इस तरि के प्रभार और

संपजत्त को सौंप िें और रजिस्ट्रार, सेिाजनिृत्त सभापजत के इस

तरि के अनुपालन में जिफलता धारा 83 में उपबंजधत की गई

रीजत पर अजभलेखों एिं सम्पजत्त को िब्त कर नए सभापजत को

सौंपने का आिेि िेना ।

73. सजमजत के सिस्ट्यों के बैठक िुल्क तथा यात्रा एिं

िैजनक भत्तों की िरों पर प्रजतबंध—दकसी सोसाइिी की

उपजिजधयों में दकसी बात के िोते हुए भी,--

(1) कोई भी सजमजत न तो जिजित निीं करेगी और न िी

उसकी सजमजत का कोई सिस्ट्य सािषिजनक व्यिसाय पर भ्रमण

करते समय ऐसी िरों से अजधक िरों पर, िो जिजित की िा

सकती िैं, बैठक िुल्क और यात्रा और िैजनक भत्ते का िकिार

निीं िोगा ; और

(2) दकसी सोसायिी की सजमजत का सिस्ट्य, सािषिजनक

व्यिसाय पर िौरे के संबंध में, ऐसी ितों और सीमाओं के

अधीन िोगा िो जिजित दकया िा सकता िै और जिजभन्न

सोसाइटियों या सोसाइटियों के िगों की सजमजतयों के सिस्ट्यों के

संबंध में अलग-अलग िरें, ितें और सीमाएं जनधाषटरत की िा

सकती िैं ।

स्ट्पष्टीकरण-- इस धारा के प्रयोिनों के जलए, "सािषिजनक

व्यिसाय पर भ्रमण" अजभव्यजि में सजम्मजलत िैं--

(क) सजमजत की दकसी बैठक में भाग लेने के जलए

एक यात्रा ;

(ख) सजमजत के दकन्िीं अन्य कृत्यों के प्रििषन के

संबंध में एक यात्रा ;

(ग) प्रायोजित दकसी भी सम्मेलन में भाग लेने के

जलए एक यात्रा---

(i) केंद्र सरकार ;

(ii) राज्य सरकार ;

(iii) संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन ;

(iv) कोई सिकारी संस्ट्था ; या

(v) इस संबंध में संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन द्वारा

मान्यता प्राप्त ऐसे अन्य संस्ट्थान ।

74. अजधकारी को ििाना—(1) यदि, रजिस्ट्रार की राय

में, कोई अजधकारी लगातार चूक करता िै या इस जिजनयम या

उसके अधीन बनाए गए जनयमों या उपजिजधयों द्वारा उस पर

24

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

लगाए गए कतषव्यों के प्रििषन में व्यजतक्रम करता िै या ऐसा कुछ

भी करता िै िो सोसाइिी के जितों के जलए प्रजतकूल िै या ििां

िि इस जिजनयम द्वारा या इसके अधीन अयोग्य ठिराया िाता

िै, रजिस्ट्रार, अजधकारी को सुनिाई का अिसर िेने के पश् चात ,

आिेि द्वारा ऐसे अजधकारी को ििा सकता िै और ऐसे पि से

ििाए िाने के कारण हुई टरजि के कारण सोसाइिी को दकसी

व्यजि या योग्य सिस्ट्य को चुनने या जनयुि करने का जनिेि िे

सकता िै और इस प्रकार जनिाषजचत या जनयुि अजधकारी केिल

तब तक पि धारण करेगा िब तक दक जिस अजधकारी के स्ट्थान

पर िि जनिाषजचत या जनयुि दकया गया िै, यदि टरजि निीं हुई

िोती तो िि पि धारण करता ।

(2) रजिस्ट्रार, आिेि द्वारा जनिेि िे सकता िै दक इस

प्रकार ििाए गए अजधकारी को उस सोसाइिी में दकसी भी पि

के जलए जनिाषचन ल़िने या जनिाषचन ल़िने के जलए जनरर्िषत

घोजषत दकया िाएगा, ििां से उसे ििाया गया िै और दकसी

भी अन्य सोसाइिी में आिेि की तारीख से छि िषष से अजधक

की अिजध के जलए निीं िोगा और ऐसा अजधकारी तद्नुसार

अयोग्य ठिराया िाएगा ।

75. िार्षषक साधारण बैठक—(1) प्रत्येक सजमजत जित्तीय

िषष की समाजप्त के छि मिीने की अिजध के भीतर अपने सिस्ट्यों

की आम बैठक बुलाएगी, तादक इस जिजनयम के अधीन

व्यिसाय का लेन-िेन दकया िा सके :

परंतु यदि सजमजत द्वारा ऐसी अिजध के भीतर ऐसी बैठक

निीं बुलाई िाती िै, तो रजिस्ट्रार या उसके द्वारा इस संबंध में

अजधकृत कोई भी व्यजि जनधाषटरत तरीके से ऐसी बैठक बुला

सकता िै, जिसे सोसाइिी द्वारा सम्यकत: बुलाई गई साधारण

बैठक समझी िाएगी ।

(2) सोसाइिी की प्रत्येक िार्षषक साधारण बैठक में,

सजमजत सोसाइिी के समक्ष िषष के जलए एक तुलनपत्र और लाभ

और िाजन खाते को रजिस्ट्रार द्वारा जिजित रीजत से दकसी भी

िगष या िगों के जलए साधारण या जििेष आिेि द्वारा सजमजत के

समक्ष रखेगी ।

स्ट्पष्टीकरण-- इस धारा के प्रयोिनों के जलए यि स्ट्पष्ट

दकया िाता िै दक लाभ के जलए व्यिसाय निीं करने िाली

सोसाइिी के मामले में, आय और व्यय का लेखा िार्षषक

साधारण बैठक में लाभ और िाजन के जसिाए खाता सोसाइिी के

समक्ष रखा िाएगा और लाभ और िाजन खाते के सभी जनिेि

और "इस जिजनयम में लाभ या िाजन, ऐसे सोसाइिी के संबंध में

क्रमिः "व्यय से अजधक आय" और "आय से अजधक व्यय" के

प्रजत जनिेि में माना िाएगा ।

(3) साधारण बैठक में सजमजत के समक्ष रखे गए प्रत्येक

तुलनपत्र के साथ उसकी सजमजत द्वारा जनम् नजलजखत के संबंध में

एक टरपोिष संलग् न की िाएगी--

(क) सोसाइिी के मामलों की जस्ट्थजत ;

(ख) राजि, यदि कोई िो, जिसे िि ऐसी तुलनपत्र या

दकसी जिजिष्ट तुलनपत्र में दकसी भी टरििष में ले िाने का

प्रस्ट्ताि करता िै ; और

(ग) मानि कमषचाटरयों को लाभांि, बोनस, या मानिेय

के रूप में भुगतान के जलए जसफाटरि की गई राजि, यदि कोई

िो ।

(4) सजमजत की टरपोिष सोसायिी के व्यिसाय की प्रकृजत

में दकसी भी बिलाि पर भी जिचार करेगी, िो उस िषष के

िौरान हुई िै जिसके जलए खाते तैयार दकए गए िैं और सजमजत

की ओर से ऐसी टरपोिष पर उसके अध्यक्ष या िस्ट्ताक्षर करने के

जलए अजधकृत दकसी अन्य सिस्ट्य द्वारा िस्ट्ताक्षर दकए िाएंगे ।

(5) प्रत्येक िार्षषक साधारण बैठक में, तुलनपत्र, लाभ

और िाजन खाता, लेखा परीक्षक की टरपोिष और सजमजत की

टरपोिष को अपनाने के जलए रखा िाएगा, और इस तरि के अन्य

व्यिसाय का लेन-िेन दकया िाएगा िैसा दक उप-जिजधयों में

अजधकजथत दकया िा सकता िै। और जिसे उजचत सूचना िे िी

गई िै ।

(6) ििां सोसाइिी का कोई अजधकारी, जिसका कतषव्य

उपधारा (1) में जनर्िष्ट अिजध के भीतर एक साधारण बैठक

बुलाना या उपधारा (2), (3) या (4) का अनुपालन करना था,

जबना उजचत बिाने से बुलाने में जिफल रिता िै ऐसी बैठक या

ऐसे उप-िगों का पालन करने के जलए, तब—

(i) यदि ऐसा अजधकारी सोसाइिी का सेिक िै, तो

रजिस्ट्रार जलजखत आिेि द्वारा उस पर िस ििार रुपए

से अनजधक राजि का िुमाषना लगा सकता िै ; और

(ii) यदि ऐसा अजधकारी सोसाइिी का सेिक निीं

िै, तो रजिस्ट्रार जलजखत आिेि द्वारा ऐसे अजधकारी को

सजमजत का अजधकारी या सिस्ट्य िोने या दकसी पि पर

जनिाषजचत या जनयुि िोने के जलए सोसाइिी की, ऐसी

अिजध के जलए िो छि साल से अजधक न िो, िैसा दक

िि आिेि में जनर्िष्ट कर सकता िै, अयोग्य घोजषत कर

सकता िै :

परन्तु इस उपधारा के अधीन आिेि करने से पूिष,

रजिस्ट्रार अजधकारी को उसके संबंध में प्रस्ट्ताजित अजधजनयम के

जिरुद् कारण बताने का युजियुि अिसर िेगा ।

76. जििेष साधारण बैठक—(1) जििेष साधारण बैठक

दकसी भी समय सजमजत, जििेष साधारण के बहुमत से बुलाई

िा सकती िै और एक मिीने के भीतर सजमजत द्वारा बुलाई

िाएगी,--

(i) सोसाइिी के सिस्ट्यों या सिस्ट्यों के एक-पांचिें

जिस्ट्से की जलजखत मांग पर, जिसकी संखया इस प्रयोिन

के जलए उप-जिजधयों में जनर्िष्ट िै, िो भी कम िो ;

(ii) रजिस्ट्रार के अनुरोध पर ; या

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

25

(iii) दकसी सोसाइिी के मामले में, िो ऐसे संघीय

सोसाइिी की सजमजत से अनुरोध पर एक संघीय

सोसाइिी का सिस्ट्य िै।

(2) ििां कोई अजधकारी या सजमजत का कोई सिस्ट्य,

जिसका कतषव्य ऐसी बैठक बुलाना था, जबना उजचत बिाने के,

ऐसी बैठक बुलाने में जिफल रिता िै, तो रजिस्ट्रार आिेि द्वारा

ऐसे अजधकारी या सिस्ट्य को सजमजत का सिस्ट्य िोने के जलए

अयोग्य घोजषत कर सकता िै, िो अिजध छि िषष से अजधक

निीं िोगी, िैसा दक िि इस तरि के आिेि में जनर्िष्ट कर

सकता िै और यदि अजधकारी सोसाइिी का कमषचारी िै, तो िि

उस पर िस ििार रुपये से अजधक का िुमाषना निीं लगा सकता

िै :

परंतु इस उपधारा के अधीन आिेि िेने से पूिष, रजिस्ट्रार

संबंजधत व्यजि को उसके संबंध में की िाने िाली प्रस्ट्ताजित

कारषिाई के जिरुध कारण बताने का एक उजचत अिसर िेगा या

दिया िाएगा ।

(3) यदि दकसी सोसाइिी की जििेष साधारण बैठक

उपधारा (1) में जनर्िष्ट अपेक्षा के अनुसार निीं बुलाई िाती िै,

तो रजिस्ट्रार या उसके द्वारा इस संबंध में अजधकृत दकसी भी

व्यजि को ऐसी बैठक बुलाने की िजि िोगी, िो सजमजत द्वारा

जिजधित बुलाई गई बैठक मानी िाएगी ।

(4) रजिस्ट्रार को यि आिेि िेने की िजि िोगी दक उप-

धारा (3) के अधीन बैठक बुलाने में दकए गए खचष का भुगतान

सोसाइिी की जनजध से या ऐसे व्यजि या व्यजियों द्वारा दकया

िाएगा, िो रजिस्ट्रार की राय में बैठक बुलाने से इंकार या

जिफलता के जलए जिम्मेिार थे ।

77. सोसाइटियों आदि कायों का कजतपय कजमयों द्वारा

अजिजधमान्य न दकया िाना—(1) सोसाइिी या सजमजत या

दकसी अजधकारी का कोई भी कायष, सोसाइिी के व्यिसाय आदि

के अनुसरण में सि भािपूिषक दकया गया, पश् चात िती सोसाइिी

के संगठन या सजमजत के संजिधान में खोिे गए या जनयुजि में या

दकसी अजधकारी के जनिाषचन में केिल कुछ िोष के अमान्य न

िोने के कारण अमान्य निीं समझा िाएगा या इस आधार पर

दक ऐसा अजधकारी िोषपूणष िै अपने पि के जलए अयोग्य

घोजषत कर दिया गया था ।

(2) इस जिजनयम के अधीन जनयुि दकसी भी व्यजि

द्वारा सि 12भािपूिषक दकया गया कोई भी कायष, इसके अधीन

बनाए गए जनयम या उपजिजधयां केिल इस तथ्य के कारण

अमान्य निीं िोंगे दक उनकी जनयुजि रद्द कर िी गई िै या इसके

अधीन बाि में पाटरत दकसी आिेि के पटरणामस्ट्िरूप रद्द कर

दिया गया िै ।

(3) रजिस्ट्रार यि जिजनश् चय करेगा दक क्या कोई कायष

सि भािपूिषक के अनुसरण में दकया गया था सोसाइिी का व्यिसाय और

उस पर उसका जिजनश् चय अंजतम िोगा ।

78. संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन के नामजनिेजिती को जनयुि

करने की िजि—(1) ििां संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन ने सोसाइिी

िेयर पूंिी की सिस्ट्यता ली िै सोसाइिी के, सीधे या दकसी

अन्य सोसाइिी के माध्यम से मूलधन और ब्याि का भुगतान के

िारी दकए गए जडबेंचर या दकसी सोसाइिी द्वारा उठाए गए

ऋण पुनभुषगतान की गारंिी िी िै, संघ राज्य क्षेत्र प्रिासन,

प्रिासन की उपजिजधयों में अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए भी,

ऐसे सोसाइिी को उस रीजत में, िो ऐसे संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन

द्वारा समय-समय पर अिधाटरत दकया िा सकता िै, सजमजत में

तीन प्रजतजनजधयों को नाजमत करने का अजधकार िोगा ।

(2) इस प्रकार नामजनिेजित सिस्ट्य संघ राज्यक्षेत्र

प्रिासन के प्रसाि पयषन्त या उतनी अिजध तक, िो उस क्रम में

जिजनर्िष्ट की िाए, जिसके द्वारा उनकी जनयुजि की िाती िै,

पि धारण करेंगे और ऐसे दकसी भी सिस्ट्य के पि ग्रिण करने

पर सभी अजधकार, कतषव्य िोंगे, उत्तरिाजयत्िों और िेनिाटरयों

के रूप में मानो िि सम्यकत: जनिाषजचत सजमजत के सिस्ट्य थे ।

स्ट्पष्टीकरण -- इस खंड के प्रयोिनों के जलए यि स्ट्पष्ट

दकया िाता िै दक ऐसी सजमजत की उपजिजधयों के अधीन दकसी

सोसाइिी की सजमजत में रजिस्ट्रार या उसके नाजमती का

नामांकन इस उपधारा के अधीन संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन के

अजधकार के प्रयोग में उस सजमजत में प्रजतजनजध के नामांकन के

रूप में निीं माना िाएगा ।

(3) ििां संघ राज्य क्षेत्र प्रिासन की राय िै दक दकसी

सोसाइिी के संचालन में सजम्मजलत िनजित को ध्यान में रखते

हुए ऐसा करना आिश्यक या समीचीन िै, िि ऐसी सजमजत की

सजमजत में अपने प्रजतजनजधयों को नाजमत कर सकता िै िैसे दक

संघ क्षेत्र प्रिासन ने सोसाइिी की िेयर पूंिी और उपधारा (1)

और उपधारा (2), ििााँ तक ऐसे नामांकन पर लागू िो सकते िैं

के उपबंधों की सिस्ट्यता ली थी ।

79. नाम जनिेजित सजमजत के पिािजध के जिस्ट्तार या

अजभरक्षक की जनयुजि—(1) ििां प्रिासक या रजिस्ट्रार द्वारा

नामजनिेजित प्रबंधन सजमजत की दकसी भी सजमजत के सिस्ट्यों के

पि की अिजध की समाजप्त पर, यथाजस्ट्थजत, प्रिासक या एक

सजमजत के रूप में रजिस्ट्रार की राय िै दक ऐसा करना आिश्यक

या समीचीन िै, िि या िि जनयुजि, रािपत्र में प्रकाजित एक

आिेि द्वारा जनम्नजलजखत करेगा,—

(क) प्रबंधन की उि सजमजत के सिस्ट्यों के कायाषलय

की अिजध का जिस्ट्तार ; या

(ख) दकसी व्यजि या व्यजियों की सजमजत को ऐसी

अिजध के जलए सोसाइिी का अजभरक्षक जनयुि करना

िो कुल जमलाकर िो िषष से अजधक न िो या िब तक दक

नई प्रबंधन सजमजत का जनिाषचन न िो िाए, िो भी

पिले िो ।

26

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(2) इस प्रकार जनयुि अजभरक्षक, रजिस्ट्रार के जनयंत्रण

और ऐसे अनुिेिों के अधीन रिते हुए, िो िि समय-समय पर

िे सकता िै, उसके पास सभी या दकन्िीं सजमजत के कृत्यों का

प्रयोग करने की िजि िोगी और सोसाइिी के जित में आिश्यक

सभी प्रकार की कारषिाई करना ।

(3) उपधारा (1) के अधीन जनयुि अजभरक्षक द्वारा

सोसाइिी के मामलों को चलाने की अिजध के िौरान अजभरक्षक

द्वारा दकए गए या दकए िाने िाले सभी कायष नई प्रबंधन

सजमजत के जलए बाध्यकारी िोंगे ।

80. सजमजत का अजधकरण और सजमजत या जििेष

अजधकाटरयों की जनयुजि—(1) यदि, सोसाइिी की सजमजत के

बाबत, जिसका रजिस्ट्रार इसके सिस्ट्य के रूप में िै, प्रिासक

और सोसाइिी के बाबत जिसके रजिस्ट्रार इसके सिस्ट्य के रुप में

निीं िै, रजिस्ट्रार की यि राय िै दक –

(i) सजमजत बार-बार व्यजतक्रम करती िै;

(ii) सजमजत इस जिजनयम या ति धीन बनाए गए जनयमों

या उपजिजधयों द्वारा उस पर अजधरोजपत कतषव्यों के पालन में

उपेक्षा करता िै; या

(iii) सजमजत ने कोई ऐसा कृत्य दकया िै िो सोसाइिी के

या उसके सिस्ट्यों के जित पर प्रजतकूल प्रभाि डालता िै;

प्रिासक या, यथाजस्ट्थजत, रजिस्ट्रार, सजमजत को सुनिाई

का अिसर िेने के पश् चात सूचना िारी करने की तारीख से

पंद्रि दिन के भीतर, जलजखत आिेि द्वारा सजमजत को अजधक्रान्त

कर सकेगा ; और

(क) सजमजत, इस उपधारा के अधीन अजधक्रान्त सजमजत

के सिस्ट्य न िोते हुए सोसाइिी के एक या अजधक सिस्ट्यों को

गटठत कर सकेगी; या

(ख) संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन के अजधकाटरयों में से एक

जििेष अजधकारी, सोसाइिी के कायषकलापों का एक िषष से

अनजधक की ऐसी अिजध के जलए, िो आिेि में जिजनर्िष्ट की

िाए िो अिजध, यथाजस्ट्थजत, प्रिासक या रजिस्ट्रार के जििेक

पर समय समय पर बढाई िा सकेगी ककंतु सजमजत या जििेष

अजधकारी का कायषकाल योग में िो िषष िोगा, प्रबंध करने के

जलए जनयुि कर सकेगी ।

(2) उपधारा (1) के अधीन आिेि पाटरत करने के पिले,

यथाजस्ट्थजत, प्रिासक या रजिस्ट्रार सिकारी जित्तीय संस्ट्था से

परामिष करेगी, यदि ऐसी सोसाइिी इसकी ऋणी िै ।

(3) ऐसे जनयुि सजमजत या जििेष अजधकारी,

यथाजस्ट्थजत, प्रिासक या रजिस्ट्रार के ऐसे अनुिेिो और

जनयंत्रण के अध्यधीन िोंगे, सजमजत के या सोसाइिी के दकसी

अजधकारी को सभी या दकसी कृत्य को करने की िजि िोगी,

और िि ऐसी सभी कारषिाई करेगा, िो सोसाइिी के जितों में

अपेजक्षत िों ।

(4) उपधारा (1) के अधीन जनयुि सजमजत या जििेष

अजधकारी सोसाइिी की सजमजत का जनिाषचन ऐसे समय पर िो

यथाजस्ट्थजत प्रिासक या रजिस्ट्रार द्वारा जनिेजित िो, ककंतु

उपधारा (1) में यथाजिजनर्िष्ट अिजध से अपश् चात िोगी,

व्यिस्ट्था करेगा ।

(5) सजमजत या जििेष अजधकारी द्वारा उस अिजध के

िौरान दकए गए या दकए िाने के जलए तात्पर्यषत सभी कायष

जिसके िौरान सजमजत के कायषकलाप उपधारा (1) के अधीन

जनयुि सजमजत या जििेष अजधकारी द्वारा दकए िाते िै, नई

सजमजत पर बाध्यकारी िोंगे ।

(6) उपधारा (1) के अधीन जनयुि सजमजत या जििेष

अजधकारी के सिस्ट्यों का पाटरश्रजमक ऐसा िोगा िो जिजित

दकया िाए और िैसे िी सोसाइिी की जनजध से संित्त िोगा ।

(7) सजमजत के सिस्ट्य, िो उपधारा (1) के अधीन

अजधक्रांत दकए गए िैं, ऐसी सजमजत के अजधक्रमण की तारीख से

छि िषष की अिजध के जलए दकसी सोसाइिी की सजमजत के

सिस्ट्य िोने के जलए पात्र निीं िोंगे ।

81. बाध्यता के अनुपालन प्रितषन की रजिस्ट्रार की

िजि—(1) प्रत्येक सोसाइिी का यि कतषव्य िोगा दक िि

सोसाइिी द्वारा प्राप् त और व्यजनत दकए गए धन की सभी

राजियों की बाबत और जिषयों जिसके बाबत सोसाइिी द्वारा

माल का सभी क्रय और जिक्रय के जलए प्राजप्त और व्यय िोता िै

और सोसाइिी की आजस्ट्तयों और िाजयत्िों और रजिस्ट्रार को

ऐसे जििरण और जििरणी और ऐसे अजभलेख प्रस्ट्तुत करने की

िैसा रजिस्ट्रार समय समय पर आिेजित कर सकेगा जिजित

बिी पुजस्ट्तका रखेंगे, और अजधकारी या सोसाइिी के अजधकारी

इसमें जिजनर्िष्ट अिजध के भीतर आिेि के अनुपालन को बाध्य

िोंगे ।

(2) ििां दकसी सोसाइिी को इस जिजनयम, ति धीन बनाए

गए जनयमों या उपजिजधयों के अधीन या उपधारा (1) के अधीन दकए

गए आिेि के अनुपालन में कोई कारषिाई करना अपेजक्षत िोता िै और

ििां ऐसी कारषिाई निीं की िाती—

(क) यथाजस्ट्थजत, इस जिजनयम, जनयम या उपजिजधयों या

आिेि में उपबंजधत समय के भीतर ;या

(ख) ििां कोई समय उपबंजधत निीं दकया गया िै, ऐसे

समय के भीतर, कारषिाई की प्रकृजत और जिस्ट्तार को ध्यान में

रखते हुए िैसा दक रजिस्ट्रार जलजखत रूप में सूचना द्वारा

जिजनर्िष्ट कर सकेगा;

रजिस्ट्रार, स्ट्ियं उसको या उसके द्वारा प्राजधकृत दकसी

माध्यम से सोसाइिी के व्यय पर ऐसी कारषिाई कर सकेगा और

ऐसे व्यय सोसाइिी से िसूली योग्य िोंगे यदि यि भू-रािस्ट्ि की

बकाया थे ।

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

27

(3) ििां रजिस्ट्रार उपधारा (2) के अधीन कारषिाई करता िै,

िि सोसाइिी के दकसी अजधकारी को बुला सकेगा जिनको िि इस

जिजनयम, ति धीन बनाए गए जनयमों या उपजिजधयों के उपबंधों से

या उपधारा (1) के अधीन दकए गए आिेि से अनुपालन न करने के

जलए उत्तरिायी मानता िै, और उसको सुनिाई का अिसर िेने के

पश् चात संित्त व्यय सोसाइिी को या संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन को

उसके द्वारा िेय व्ययों का संिाय करने में असफलता के

पटरणामस्ट्िरुप कारषिाई करने के जलए, और सोसाइिी की आजस्ट्तयों

के संिाय के जलए ऐसी राजि प्रत्येक दिन के जलए एक सौ रुपए से

अनजधक की िब तक दक रजिस्ट्रार के जनिेिों का पालन निीं दकया

िाता िै, संिाय करना अपेजक्षत िै ।

82. लोकजित आदि में जनिेि िेने की संघ राज्यक्षेत्र

प्रिासन की िजि—(1) यदि संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन का

रजिस्ट्रार से टरपोिष की प्राजप्त पर या अन्यथा यि समाधान िो

िाता िै दक लोकजित में संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन द्वारा

अनुमोदित या िाथ में जलए गए सिकारी उत्पािन और अन्य

जिकास कायषक्रमों का समुजचत रूप से दक्रयान्ियन सुजनजश् चत

करने के प्रयोिन के जलए या साधारणतया जिजनर्िष्ट कारबार

का समुजचत प्रबंध सुजनजश् च त करने के जलए या सोसाइिी के

ऐसी रीजत से दकए िा रिे लोकजित में दक्रयाकलापों को रोकने

के जलए, िो उसके सिस्ट्यों, जनक्षेपकताषओं या लेनिारों के जितों

के जलए अजितकर िो, साधारणतया दकसी िगष की सोसाइटियों

को या दकसी भी सोसाइिी या जििेष सोसाइटियों को जनिेि

िेना आिश्यक िै, तो संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन समय-समय पर

उन्िें जनिेि िे सकेगी और यथाजस्ट्थजत, सभी सोसाइटियां या

संबंजधत सोसाइिी ऐसे जनिेिों का अनुपालन करने के जलए

आबद् िोगी या िोंगी ।

(2) संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन उपधारा (1) के अधीन िारी

दकए गए दकसी जनिेिों को उपांतटरत या रद्द कर सकेगा और

ऐसे जनिेिों को उपांतटरत या रद्द करने में, िि ऐसी ितें

अजधरोजपत कर सकेगा िो िि ठीक समझे ।

(3) ििां रजिस्ट्रार का समाधान िो िाता िै दक कोई

व्यजि उपधारा (1) और उपधारा (2) के अधीन सोसाइिी को

िारी दकए गए जनिेिों या उपांतटरत जनिेिों का अनुपालन

करने के जलए उत्तरिायी था और िि जनिेिों के अनुपालन के

जलए जबना दकसी कारण और न्यायोजचत्य के असफल हुआ,

रजिस्ट्रार को आिेि िे सकेगा, -

(क) यदि व्यजि सोसाइिी की सजमजत का सिस्ट्य िै, उसे

आिेि की तारीख के छि िषष की अिजध के जलए दकसी

सोसाइिी की सजमजत का सिस्ट्य िोने से अनिषक या बने रिना

घोजषत कर सकेगा ;

(ख) यदि व्यजि सोसाइिी का कमषचारी िै, तो तत्काल

सोसाइिी के जनयोिन से ऐसे व्यजि को ििाने को सजमजत को

जनिेि िे सकेगा और यदि सजमजत का कोई सिस्ट्य या सिस्ट्यों

इस आिेि का अनुपालन करने में जबना दकसी कारण और

न्यायोजचत्य के असफल रिता िै तो खंड (क) में यथाउपबंजधत

अनिषक घोजषत दकया िा सकेगा :

परंतु इस उपधारा के अधीन कोई आिेि करने से पिले,

रजिस्ट्रार व्यजि या संबंजधत व्यजियों को सुनिाई का उजचत

अिसर िेगा और पटरसंघीय सोसाइिी से परामिष करेगा,

जिससे सोसाइिी सिबद् िै :

परंतु यि और दक ऐसी पटरसंघीय सोसाइिी संसूचना की

प्राजप्त की तारीख से पैंतालीस दिन की अिजध के भीतर

रजिस्ट्रार को अपनी राय संसूजचत करेगा, जिसके असफल िोने

पर यि उपधाटरत दकया िाएगा दक ऐसी पटरसंघीय सोसाइिी

ने इस धारा के अधीन कारषिाई करने में कोई आक्षेप निीं दकया

िै और रजिस्ट्रार तद्नुसार कारषिाई करने को आगे और स्ट्ितंत्र

िोगा ।

(4) इस धारा के अधीन रजिस्ट्रार द्वारा दकया गया कोई

आिेि पक्षकारों के जलए अंजतम और आबद्कर िोगा ।

83. अजभलेख, आदि अजभग्रिण करने की रजिस्ट्रार की

िजि—(1) ििां रजिस्ट्रार का यि समाधान िो िाता िै दक

सोसाइिी की पुजस्ट्तका और अजभलेख को जछपाए िाने, जबगा़िे

िाने या नष्ट दकए िाने की संभािना िै या सोसाइिी की

जिजधयों और संपजत्त का िुर्िषजनयोग या िुरुपयोिन दकए िाने

की संभािना िै या अजधकारी या व्यजि अनुजचत रूप से कब्िे

में पुजस्ट्तका, अजभलेख, जनजधयों और संपजत्त का कब्िा िेने से

इंकार करता िै, रजिस्ट्रार सोसाइिी की ऐसी पुजस्ट्तका,

अजभलेख, जनजधयों और संपजत्त का अजभग्रिण करने और कब्िा

लेने के जलए जलजखत रुप में उसके द्वारा सम्यक रुप से प्राजधकृत

व्यजि को जनिेजित करते हुए आिेि िारी कर सकेगा और

सोसाइिी का अजधकारी ऐसी पुजस्ट्तका, अजभलेख, जनजधयों और

संपजत्त की अजभरक्षा के जलए उत्तरिायी िै या उसी प्रकार कब्िे

िाला व्यजि, ऐसे प्राजधकृत व्यजि को तत्काल उसका पटरिान

िेगा ।

(2) यदि सोसाइिी का अजधकारी, या कब्िे िाला व्यजि

पटरिान निीं िेता िै, तब दकसी अन्य कारषिाई पर प्रजतकूल

प्रभाि डाले जबना, इस जिजनयम के उपबंधों के अधीन ऐसे

अजधकारी, व्यजि या सोसाइिी के जिरुद् की िा सकेगी,

रजिस्ट्रार या उसके द्वारा प्राजधकृत व्यजि उस कायषपालक

मजिस्ट्रेि को जिसकी अजधकाटरता के भीतर सोसाइिी कायष कर

रिी िै, सोसाइिी की ऐसी पुजस्ट्तका, अजभलेखों, जनजधयों और

संपजत्त का कब्िा अजभग्रिण करने या लेने के जलए अपील कर

सकेगा।

(3) उपधारा (2) के अधीन आिेिन की प्राजप्त पर,

मजिस्ट्रेि दकसी पुजलस अजधकारी को िो उपजनरीक्षक से नीचे

की पंजि का न िो दकसी ऐसे स्ट्थान पर ििां पुजस्ट्तका,

अजभलेख, जनजधयां और संपजत्त रखी िाती िै या उसके रखे िाने

28

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

की संभािना िो, प्रिेि करने और तलािी लेने के जलए और

उसका अजभग्रिण करने के जलए प्राजधकृत कर सकेगा और

यथाजस्ट्थजत, रजिस्ट्रार और उसके द्वारा प्राजधकृत व्यजि को

उसका कब्िा िे दिया िाएगा ।

अध्याय 7

संपरीक्षा, िांच, जनरीक्षण और पयषिेक्षण

84. संपरीक्षा—(1) रजिस्ट्रार, प्रत्येक िषष में कम से कम

एक बार प्रत्येक सोसाइिी के लेखाओं की इस जनजमत्त जलजखत

रूप में साधारण या जििेष आिेि द्वारा जिजित अिषताएं रखने

िाले और रजिस्ट्रार द्वारा प्राजधकृत व्यजि द्वारा संपरीक्षा

कराएगा और ऐसा प्राजधकृत व्यजि इस जिजनयम के प्रयोिनों

के जलए संपरीक्षक िोगा ।

(2) संपरीक्षक की संपरीक्षा के प्रयोिन के जलए सभी

पुजस्ट्तकाओं, लेखाओं, िस्ट्तािेिों कागिों, प्रजतभूजतयों, नगि

और अन्य संपजत्तयों तक संबंजधत सोसाइिी से संबंजधत या

अजभरक्षा में रखी गई सभी समयों पर पहुंच िोगी और िि ऐसे

दकसी व्यजि के जिसके कब्िे में या सोसाइिी के मुखयालय या

उसकी िाखा पर दकसी स्ट्थान में दकसी ऐसी पुजस्ट्तका, लेखा,

िस्ट्तािेिों, कागिों, प्रजतभूजतयों, नगि और अन्य संपजत्तयां िै

या िो उसकी अजभरक्षा के जलए उत्तरिायी िै प्रस्ट्तुत करने के

जलए समन करेगा ।

(3) यदि आिेिन पर या अन्यथा रजिस्ट्रार को यि प्रतीत

िोता िै दक सोसाइिी के दकसी लेखा पुनःसंपरीक्षा के जलए यि

आिश्यक या समीचीन िै, तो रजिस्ट्रार, आिेि ििारा ऐसी

पुनः संपरीक्षा के जलए उपबंध कर सकेगा और सोसाइिी के

लेखा की संपरीक्षा को लागू इस जिजनयम के उपबंध ऐसी पुनः

संपरीक्षा को लागू िोंगे ।

(4) रजिस्ट्रार, आिेि ििारा अपने जििेक पर या

भारतीय टरििष बैंक या यथाजस्ट्थजत राष्ट्रीय बैंक की जसफाटरि

के आधार पर दकसी सोसाइिी की जििेष संपरीक्षा के जलए

उपबंध करेगा और इस धारा के अधीन बनाए गए सोसाइिी के

लेखाओं की संपरीक्षा से संबंजधत उपबंध ऐसी जििेष संपरीक्षा

को भी लागू िोंगे ।

(5) इस धारा के अधीन सोसाइिी के लेखाओं की

संपरीक्षा करने के जलए प्रत्येक सोसाइिी संपरीक्षा फीस के रूप

में ऐसी रकम िो सोसाइटिय़ों के जिजभन्न प्रिगों या िगों के

जलए जिजित की िाए, संपरीक्षक को संिाय करने के जलए िायी

िोगी ।

(6) रजिस्ट्रार, राष्ट्रीय बैंक के परामिष से प्रज्ञापूणष मानक

जिसके अंतगषत प्राथजमक कृजष प्रत्यय सिकारी सोसाइिी के

जलए पूंिी से िोजखम भाटरत आजस्ट्तयों का अनुपात भी िै, का

अिधारण कर सकेगा ।

(7) प्रिासक, जनयम द्वारा जिसमें प्ररूप और रीजत के

जलए और अिजध जिसके भीतर सोसाइिी के लेखाओं या

सोसाइिी के िगष तैयार दकए िाएंगे और आनलाइन संपरीक्षा के

प्रयोिन के जलए प्रस्ट्तुत दकए िाएंगे, उपबंध कर सकेगा ।

(8) संपरीक्षकों की टरपोिष में अंतर्िष्ट िोगा,—

(क) संपरीक्षा में संप्रेजक्षत त्रुटियों या अजनयजमताओं के

सभी जििरण और जित्तीय अजनयमताओं और िुर्िषजनयोग या

जनजधयों के गबन या कपि की ििा में, संपरीक्षक या संपरीक्षा

करने िाली फमष सौपें िाने और अंतिषजलत रकम, कायषप्रणाली

का अन्िेषण और टरपोिष िोगी ;

(ख) लेखांकन अजनयजमताओं और जित्तीय जििरणों पर

उनकी जििक्षा को जिस्ट्तार से लाभ और िाजन पर तत्स्ट्थानी

प्रभािों के साथ इंजगत दकया िाएगा ;

(ग) िांची गई सोसाइिी की सजमजत और उपसजमजत के

कायष करने की रीजत िोगी और यदि कोई अजनयजमतता या

उल्लंघन संप्रेजक्षत या टरपोिष दकए िाते िो तब ऐसी

अजनयजमताओं या उल्लंघनों के जलए उत्तरिाजयत्ि सम्यक रुप

से जनयत िोगा ।

(9) यदि रजिस्ट्रार के ध्यान में लाया िाता िै दक

संपरीक्षक द्वारा प्रस्ट्तुत की गई संपरीक्षा टरपोिष लेखाओं का सिी

और स्ट्पष्ट जचत्र प्रकि निीं करती िै तब रजिस्ट्रार या प्राजधकृत

व्यजि ऐसी सोसाइिी के लेखाओं की िांच संपरीक्षा कायाषजन्ित

कर सकेगा या कायाषजन्ित करिा सकेगा और िांच परीक्षा में

ऐसी मिों का परीक्षण सजम्मजलत िोगा िो ऐसे आिेि में

रजिस्ट्रार द्वारा जिजित और जिजनर्िष्ट दकया िाए ।

(10) यदि, दकसी सोसाइिी की संपरीक्षा के अनुक्रम के

िौरान संपरीक्षक का यि समाधान िो िाता िै दक कुछ लेखा

पुस्ट् तकों या अन्य िस्ट्तािेिों में सोसाइिी के भूतपूिष या ितषमान

अजधकारी या कमषचारी के जिरुद् कोई अपराध में फंसाने िाला

साक्ष्य अंतर्िष्ट िै, संपरीक्षक रजिस्ट्रार को मामले की तत्काल

टरपोिष करेगा और रजिस्ट्रार की पूिष अनुमजत से पुस्ट् तकों या

िस्ट्तािेिों को पटरबद् कर सकेगा और सोसाइिी को उसकी

रसीि िेगा ।

(11) संपरीक्षक, उसकी संपरीक्षा टरपोिष इसके पूणष िोने

से एक सप्ताि की अिजध के भीतर, सोसाइिी को और रजिस्ट्रार

को ऐसी रीजत में िो रजिस्ट्रार द्वारा जिजित की िाए, उसके

द्वारा परीक्षा दकए गए लेखाओं और तुलनपत्र को और लाभ

तथा िाजन लेखा िो तारीख पर और उस अिजध के जलए

जिसकों लेखा संपरीजक्षत दकया गया िै, प्रस्ट्तुत करेगा, और यि

कथन िोगा दक क्या उसकी राय में और उसकी सूचना में और

सोसाइिी द्वारा उसको दिए गए स्ट्पष्टीकरण के अनुसार उक् त

लेखाओं में इस जिजनयम द्वारा अपेजक्षत सभी िानकरी िी गई िै

और सोसाइिी के जित्तीय संव्यििार की ििा में सिी और

उजचत िृश्य उपजस्ट्थत करती िै :

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

29

परंतु ििां संपरीक्षक अपनी संपरीक्षा टरपोिष में इस

जनष्कषष पर पहुंचा िै दक कोई व्यजि खातों से सबंजधत दकसी

अपराध या दकसी अन्य अपराध का िोषी िै, िि अपनी

संपरीक्षा टरपोिष के प्रस्ट्तुत करने की तारीख से प्रद्रंि दिन की

अिजध के भीतर रजिस्ट्रार को जििेष टरपोिष फाइल करेगा और

संबंद् संपरीक्षक रजिस्ट्रार की जलजखत अनुमजत प्राप्त करने के

पश् चात अपराध की प्रथम सूचना टरपोिष फाइल करेगा और

संपरीक्षक िो प्रथम सूचना टरपोिष फाइल करने में असफल

रिता िै जनरिषता के जलए िायी िोगा और उसका नाम

संपरीक्षकों के पैनल से ििाने का िायी िोगा और िि रजिस्ट्रार

िो ठीक समझे दकसी अन्य कारषिाई के जलए भी िायी िोगा :

परंतु यि और दक िब रजिस्ट्रार के ध्यान में यि लाया

िाता िै दक संपरीक्षक कारषिाई आरंभ करने में असफल रिा िै,

रजिस्ट्रार इस बाबत उसके द्वारा प्राजधकृत व्यजि द्वारा प्रथम

सूचना टरपोिष फाइल करेगा :

परंतु यि भी दक उसकी संपरीक्षा के जनष्कषष पर, यदि

संपरीक्षक पाता िै दक सजमजत के दकसी सिस्ट्य या सोसाइिी के

दकसी अजधकारी या दकसी अन्य व्यजि द्वारा काटरत सोसाइिी

की िाजनयों के पटरणामस्ट्िरुप जित्तीय अजनयजमतताओं के

उिािरण प्रकि िोते िैं तब िि ऐसी जििेष टरपोिष तैयार करेगा

और अपनी संपरीक्षा टरपोिष के साथ रजिस्ट्रार को प्रस्ट्तुत करेगा

और ऐसी जििेष टरपोिष फाइल करने में असफलता संपरीक्षक के

कतषव्यों में लापरिािी िोगी और िि संपरीक्षक के रुप में

जनयुजि के जलए जनरिषता या दकसी अन्य कारषिाई िो रजिस्ट्रार

ठीक समझे, के जलए िायी िोगा ।

85. लेखाओं में त्रुटियों या अजनयजमतताओं की पटरिुजद्

और सोसाइिी की टरपोिष का जनरीक्षण—यदि धारा 84 के

अधीन की गई संपरीक्षा, धारा 87 और धारा 88 के अधीन

दकए गए जनरीक्षण के पटरणाम में सोसाइिी के कायषकरण में

दकसी त्रुटि का प्रकिन िोता िै, तब सोसाइिी संपरीक्षा और

जनरीक्षण टरपोिष की तारीख से िो मास की अिजध के भीतर

संपरीक्षा और जनरीक्षण टरपोिष में इस प्रकार इंजगत की गई

त्रुटियों या अजनयजमतताओं के संबंध में रजिस्ट्रार को स्ट्पष्ट

करेगी और यदि दकसी त्रुटि या अजनयजमतता के बाबत

स्ट्पष्टीकरण स्ट्िीकृत निीं दकया िाता, तब ऐसी अिजध के भीतर

िो रजिस्ट्रार द्वारा जिजनर्िष्ट की िाए त्रुटियों को िूर करने और

अजनयजमतताओं को सुधारने के जलए किम उठाएगा और

रजिस्ट्रार को टरपोिष करेगा, जिसके न िो सकने पर रजिस्ट्रार

को िस ििार रुपए से अनजधक ऐसी रकम की िाजस्ट्त

अजधरोजपत करने की िजि िोगी और ििां संबंद् सोसाइिी

पटरसंघीय सोसाइिी की सिस्ट्य िै, ऐसा आिेि पटरसंघीय

सोसाइिी से परामिष करने के पश् चात दकया िाएगा ।

86. रजिस्ट्रार द्वारा िांच—(1) रजिस्ट्रार स्ट्िप्रेरणा से

िांच कर सकेगा या,—

(क) सोसाइिी के स्ट्ियं ऐसे सिस्ट्य िोते हुए, अपने

सिस्ट्यों के बाबत ऐसा अनुरोध करने पर इस जनजमत्त बनाए गए

जनयमों द्वारा सम्यक रुप से प्राजधकृत सोसाइिी के अनुरोध पर ;

(ख) सोसाइिी की सजमजत की बहुसंखया के आिेिन पर ;

या

(ग) सोसाइिी के एक जतिाई सिस्ट्यों के आिेिन पर स्ट्ियं

उनके या इस जनजमत्त जलजखत रुप में उनके द्वारा सम्यक रूप से

प्राजधकृत व्यजि द्वारा ऐसी िांच कर सकेगा, सोसाइिी के गठन,

कायषकरण और जित्तीय जस्ट्थजत के बारे में िांच कर सकेगा ।

(2) सोसाइिी का प्रत्येक अजधकारी, सिस्ट्य और भूतपूिष

सिस्ट्य जिसके बाबत िांच की िाती िै, और कोई अन्य व्यजि

िो सोसाइिी से संबंजधत सूचना, पुस्ट्तकों और कागिपत्रों के

कब्िे में िै ऐसी अपेक्षा िोने पर ऐसी सूचना प्रस्ट्तुत करेगा िो

उसके कब्िे में िै और सोसाइिी से संबंजधत सभी पुस्ट्तकें और

कागिपत्रों को उसकी अजभरक्षा या िजि में िै, प्रस्ट्तुत करेगा

और अन्यथा िांच करने िाले अजधकारी को िांच के संबंध िो

िि युजियुि रुप से िे सकेगा, सभी सिायता िेगा ।

(3) यदि कोई ऐसा व्यजि उपधारा (1) के अधीन

रजिस्ट्रार या उसके द्वारा प्राजधकृत दकसी व्यजि को उपधारा

(2) के अधीन दकसी पुस्ट्तक या कागि को जिसको प्रस्ट्तुत करना

उसका कतषव्य िै प्रस्ट्तुत करने से या दकसी प्रश् न के उत्तर के

जलए िो उपधारा (2) के अनुसरण में रजिस्ट्रार या रजिस्ट्रार

द्वारा प्राजधकृत व्यजि द्वारा उसे रखा िाता िै, इंकार करता िै

या रजिस्ट्रार या रजिस्ट्रार द्वारा प्राजधकृत व्यजि इंकार

प्रमाजणत करता िै और रजिस्ट्रार पांच ििार रुपए से अनजधक

की रकम की िाजस्ट्त व्यजतक्रमी पर अजधरोजपत कर सकेगा ओर

ऐसी िाजस्ट्त अजधरोजपत करने के पिले, रजिस्ट्रार व्यजतक्रमी को

उसके संबंध में प्रस्ट्ताजित कारषिाई के जिरुद् कारण बताने के

जलए, युजियुि अिसर िेने का कारण िेगा ।

(4) यदि इस धारा के अधीन िांच के दकसी स्ट्तर पर,

रजिस्ट्रार का समाधान िो िाता िै दक सोसाइिी के सिस्ट्यों के

जित में यि आिश्यक िै िांच की अिजध के िौरान सोसाइिी से

संबंजधत सभी पुस्ट्तकें और कािगपत्रों को ग्रिण कर जलया िाए,

िि इस आिय का जलजखत में सोसाइिी को जनिेि करेगा दक

िि सोसाइिी से संबंजधत सभी पुस्ट्तकें और कागिपत्रों को ऐसे

अजधकारी को िो आिेि द्वारा जिजनर्िष्ट दकए िाए सौपें और

रजिस्ट्रार सोसाइिी को ऐसे कृत्यों को करने या ऐसी

कायषिाजियों में सजम्मजलत िोने िो जनिेि में जिजनर्िष्ट की िाए

से जिरत रिने के जलए जनिेि भी िारी कर सकेगा ।

(5) सोसाइिी उपधारा (4) के अधीन इसको िारी दकए

गए दकसी जनिेिों के अनुपालन को बाध्य िोगी ।

(6) उपधारा (4) के अधीन ली गई पुस्ट्तकें और

कागिपत्र िांच के पूरा िोने पर सोसाइिी को िापस दकए

िाएंगे ।

30

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(7) िब िांच इस धारा के अधीन की िाती िै तब

रजिस्ट्रार िांच के पटरणाम संसूजचत करेगा –

(क) यदि संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन ने, संघ राज्यक्षेत्र

प्रिासन या उसके द्वारा इस जनजमत्त जनयुि दकसी अजधकारी को

सोसाइिी की िेयर पूंिी में प्रत्यक्ष रूप से अजभिान दकया िै ;

(ख) संबंद् पटरसंघीय सिकारी सोसाइिी को; और

(ग) संबंद् सोसाइिी को ।

(8) रजिस्ट्रार, उस अजधकारी से िांच का उत्तरिाजयत्ि

जिसे िि सौंपा गया िै, और स्ट्ियं िांच के जलए या दकसी अन्य

व्यजि को सैंपने के जलए िो िि ठीक समझे प्रत्याह्रत कर

सकेगा।

87. ऋणी सोसाइिी की पुस्ट्तकों का जनरीक्षण—(1)

सोसाइिी के लेनिार के आिेिन पर िो,—

(क) रजिस्ट्रार का यि समाधान निीं कर िेता दक िि

एक ऋण िै िो िेय िै और उसने उसके संिाय की मांग की िै

और युजियुि समय के भीतर उसकी तुजष्ट निीं की गई िै; और

(ख) रजिस्ट्रार के पास सोसाइिी की पुस्ट्तकों के

जनरीक्षण के खचों के जलए प्रजतभूजत के रुप में ऐसी राजि का

जनक्षेप जिसकी अपेक्षा रजिस्ट्रार करे,

रजिस्ट्रार यदि िि आिश्यक या समीचीन समझे,

सोसाइिी की पुस्ट्तकों को जनरीक्षण करेगा या इस जनजमत्त

जलजखत रुप में आिेि द्वारा उनके द्वारा प्राजधकृत व्यजि को

जनरीक्षण करने का जनिेि िेगा ।

(2) रजिस्ट्रार अपीलाथी को और उस सोसाइिी को

जिसकी पुस्ट्तकों का जनरीक्षण दकया गया दकसी ऐसे जनरीक्षण के

पटरणाम संसूजचत करेगा ।

(3) रजिस्ट्रार दकसी जनरीक्षण को उस अजधकारी से

जिसको िि सौंपा गया िै और जनरीक्षण स्ट्ियं करने के जलए या

दकसी अन्य व्यजि को सौंपने के जलए िो िि ठीक समझे

प्रत्याह्रत कर सकता िै ।

88. रजिस्ट्रार या जित्तीय बैंक या पटरसंघीय सोसाइिी

द्वारा पुस्ट्तकों का जनरीक्षण—(1) रजिस्ट्रार या उसके द्वारा इस

जनजमत्त प्राजधकृत व्यजि को दकसी सोसाइिी की पुस्ट्तकों के

जनरीक्षण का अजधकार िोगा और उसकी अजभरक्षा में रखी गई

पुस्ट्तकों, लेखाओं, िस्ट्तािेिों, प्रजतभूजतयों, नगि और अन्य

संपजत्तयों तक अबाध पहुंच िोगी ।

(2) प्रत्येक व्यजि िो सोसाइिी का दकसी समय पर

अजधकारी या कमषचारी रिा िै या िै और सोसाइिी का प्रत्येक

सिस्ट्य और भूतपूिष सिस्ट्य सोसाइिी के ऐसे संव्यििारों और

कायषकरण के संबंध में ऐसी सूचना िेगा िैसा रजिस्ट्रार या

उनके द्वारा प्राजधकृत व्यजि अपेक्षा करे ।

(3) ििां सोसाइिी दकसी सिकारी जित्तीय बैंक की

ऋणी िै, ऐसे बैंक को उस सोसाइिी की पुस्ट्तकों के जनरीक्षण का

अजधकार िोगा और जनरीक्षण या तो ऐसे बैंक की सजमजत द्वारा

प्राजधकृत बैंक के दकसी अजधकारी द्वारा या रजिस्ट्रार द्वारा

प्रमाजणत िेतन पाने िाला कमषचारी िो ऐसा जनरीक्षण करने

को सक्षम िो, इसके सिस्ट्य द्वारा दकया िा सकेगा ।

(4) ऐसे जनरीक्षण करने िाले अजधकारी या सिस्ट्य की

सभी युजियुि समयों पर सोसाइिी से संबंजधत या उसकी

अजभरक्षा में रखी गई पुस्ट्तकों, लेखाओं, िस्ट्तािेिों, प्रजतभूजतयों

नकि और अन्य संपजत्तयों तक अबाध पहुंच िोगी और ऐसी

सूचना, जििरण और जििरजणयां िो आिश्यक िो, सोसाइिी

की जित्तीय जस्ट्थजत और बैंक द्वारा उसको िी गई राजि की

सुरक्षा अजभजनजश् च त करने के जलए भी बुला सकेगा ।

(5) ििां सोसाइिी धारा 95 के अधीन संघ राज्यक्षेत्र

प्रिासन द्वारा मान्यताप्राप्त पटरसंघीय सोसाइिी का सिस्ट्य िै

ऐसी पटरसंघीय सोसाइिी को उस सोसाइिी की पुस्ट्तकों के

जनरीक्षण का अजधकार िोगा और जनरीक्षण या तो ऐसी

पटरसंघीय सोसाइिी की सजमजत द्वारा प्राजधकृत पटरसंघीय

सोसाइिी के अजधकारी या पृष्ांदकती द्वारा या रजिस्ट्रार द्वारा

प्रमाजणत ऐसी पटरसंघीय सोसाइिी के िेतन पाने िाले

कमषचारी द्वारा िो ऐसा जनरीक्षण करने को सक्षम िै, दकया िा

सकेगा ।

(6) उपधारा (5) में जनर्िष्ट अजधकारी या कमषचारी की

सभी युजियुि समयों पर सोसाइिी से संबंजधत या उसकी

अजभरक्षा में रखी गई पुस्ट्तकों, लेखाओं, िस्ट्तािेिों, प्रजतभूजतयों,

नकि और अन्य संपजत्तयों तक अबाध पहुंच िोगी और ऐसी

सूचना, जििरणों और जििरजणयां िो आिश्यक िो, के जलए

बुलाया िा सकेगा ।

89. सोसाइिी के अजधकारी या सेिक का जनलंबन—(1)

ििां धारा 84 के अधीन संपरीक्षा या धारा 86 के अधीन िांच

या धारा 87 या धारा 88 के अधीन जनरीक्षण के अनुक्रम में,

रजिस्ट्रार को यि ध्यान दिलाया िाता िै दक सोसाइिी का

संिाय पाने िाले अजधकारी या सेिक सोसाइिी के संबंध में

जमथ्या िुर्िषजनयोग, आपराजधक न्यास भंग या अन्य अपराध के

जलए प्रजतबद् िै या अन्यथा उत्तरिायी दकया गया िै, रजिस्ट्रार,

यदि उसकी राय में ििां ऐसे संिाय पाने िाले अजधकारी या

सेिक के जिरुद् प्रथम िृष्टया कोई साक्ष्य िै और ऐसे संिाय पाने

िाले अजधकारी या सेिक का जनलंबन सोसाइिी के जित में

आिश्यक िै तो मामले के अन्िेषण और जनपिान लंजबत रिने

तक सोसाइिी की सजमजत को जनिेि िे सकेगा दक ऐसे संिाय

पाने िाले अजधकारी या सेिक को जनलंबन के अधीन ऐसी

तारीख से और ऐसी अिजध के जलए िो उनके द्वारा जिजनर्िष्ट

की िाए, जनलंजबत कर दिया िाए ।

(2) उपधारा (1) के अधीन रजिस्ट्रार से जनिेि की प्राजप्त

पर, सोसाइिी की सजमजत उपजिजधयों में प्रजतकूल दकन्िीं

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

31

उपबंधों के िोते हुए भी, पूिोि संिाय पाने िाले अजधकारी या

सेिक को जनलंजबत करेगा ।

(3) रजिस्ट्रार जनलंबन की अिजध के जलए समय से

जिस्ट्तार के जलए सजमजत को जनिेि िे सकेगा और जनलंजबत

संिाय पाने िाला अजधकारी या सेिक रजिस्ट्रार की पूिषिती

मंिूरी के जसिाय पुनः बिाल निीं दकया िाएगा ।

(4) यदि सजमजत उपधारा (1) के अधीन िारी दकए गए

जनिेिों के अनुपालन में असफल रिती िै तब रजिस्ट्रार ऐसे

संिाय पाने िाले अजधकारी या सेिक को ऐसी तारीख से और

ऐसी अिजध के जलए िो िि आिेि में जिजनर्िष्ट करे, जनलंजबत

करने का आिेि िे सकेगा और तत्पश् चात यथाजस्ट्थजत, संिाय

पाने िाला अजधकारी या सेिक, जनलंबन के अधीन िोगा ।

90. िांच और जनरीक्षण के खचष—(1) ििां धारा 86 के

अधीन कोई िांच की िाती िै या धारा 88 के अधीन कोई

जनरीक्षण दकया िाता िै ििां रजिस्ट्रार खचों या खचों के ऐसे

भाग को, िो िि ठीक समझे, सोसाइिी िांच या जनरीक्षण की

मांग करने िाले सिस्ट्यों और लेनिार तथा उस सोसाइिी के

अजधकाटरयों या भूतपूिष अजधकाटरयों और सिस्ट्यों या भूतपूिष

सिस्ट्यों या मृत सिस्ट्य की संपिा के बीच प्रभाजित कर सकेगा

और ऐसा आिेि िांच टरपोिष के प्रस्ट्तुत करने की तारीख से छि

मास की अिजध के भीतर पाटरत कर सकेगा :

पंरतु—

(क) खचष के प्रभािन का कोई आिेि इस धारा के अधीन

तब तक निीं दकया िाएगा िब तक दक सोसाइिी या उसके

अधीन खचों का संिाय करने के जलए िायी व्यजि या मृत व्यजि

के जिजधक प्रजतजनजध को सुना न गया िो या सुनिाई का

युजियुि अिसर न िे दिया गया िो ; और

(ख) रजिस्ट्रार, उन आधारों का जलजखत कथन करेगा

जिन पर खचष का प्रभािन दकया गया िो ;

(2) सोसाइिी की जनजध से कोई व्यय पूिषगामी उपधारा

के अधीन दकए गए आिेि के जिरुद् सोसाइिी से जभन् न दकसी

अन्य व्यजि द्वारा की गई दकसी अपील के समथषन में दकसी खचष

को चुकाने के प्रयोिन के जलए उपगत निीं दकया िायेगा ।

91. िाजस्ट्त के रूप में अजधरोजपत या खचष के रूप में

अजधजनणीत राजि की िसूली का ढंग—धारा 68, धारा 75,

धारा 76, धारा 81, धारा 85 या धारा 86 के अधीन िाजस्ट्त के

रूप में अजधरोजपत या धारा 90 के अधीन खचष के रूप में

अजधजनणीत कोई राजि, रजिस्ट्रार या जनजमत्त उसके द्वारा

प्राजधकृत व्यजि द्वारा आिेिन करने पर ऐसे मजिस्ट्रेि को

जिसकी अजधकाटरता में िि स्ट्थान िै ििां व्यजि जिससे िाजस्ट्त

या खचष िसूली योग्य िै, जनिास करता िै या उसका कारबार

करता िै न्याजयक मजिस्ट्रेि द्वारा िसूल दकया िाएगा िैसे दक

िि स्ट्ियं उसके द्वारा अजधरोजपत दकया गया िुमाषना था और

ऐसा मजिस्ट्रेि ऐसी रीजत में ऐसी िसूली की कायषिािी करेगा

मानो िि उसके द्वारा अजधरोजपत िुमाषना िो ।

92. रजिस्ट्रार को िांच या जनरीक्षण में प्रकि त्रुटियों के

जलए सोसाइिी की सूचना—(1) यदि धारा 86 के अधीन की

गई िांच या धारा 87 या धारा 88 के अधीन दकए गए

जनरीक्षण के पटरणामस्ट्िरूप सोसाइिी के गठन, कायषकरण या

जित्तीय जस्ट्थजत या पुस्ट्तकों में कोई त्रुटियां प्रकि िोती िैं,

रजिस्ट्रार सोसाइिी की सूचना पर ऐसे त्रुटियों पर ध्यान िेगा

और रजिस्ट्रार सोसाइिी या उसके अजधकाटरयों को इसमें

जिजनर्िष्ट समय के भीतर त्रुटियों को िूर करने के जलए िो

आिेि में जिजनर्िष्ट दकए िाएं, ऐसी कारषिाई करने का जनिेि

भी िे सकेगा ।

(2) संबद् सोसाइिी प्रिासक को सोसाइिी के आिेि की

संसूचना की तारीख से िो मास के भीतर उपधारा (1) के अधीन

रजिस्ट्रार द्वारा दकए गए आिेि के जिरुद् अपील कर सकेगी ।

(3) प्रिासक, अपील का जिजनश् चय करने में, रजिस्ट्रार

के आिेि को बाजतल करना, उलि िेना, उपांतरण करना या

पुजष्ट कर सकेगा ।

(4) ििां सोसाइिी रजिस्ट्रार द्वारा यथाजनिेजित त्रुटियों

की पटरिुजद् में असफल रिती िै और ििां उपधारा (2) के

अधीन प्रिासक को कोई अपील निीं की गई िै या प्रिासन ने

की गई ऐसी अपील पर बाजतलीकरण, उलिने या उपांतटरत

करने का आिेि निीं दकया िै रजिस्ट्रार स्ट्ियं त्रुटियों की

पटरिुजद् के जलए किम उठा सकेगा और सोसाइिी के

अजधकाटरयों िो उसकी राय में त्रुटियों की पटरिुजद् में असफल

रिते िैं, से खचष िसूल कर सकेगा ।

93. अपचारी संप्रितषक आदि के जिरुद् नुकसानी का

आकलन करने की रजिस्ट्रार की िजि—(1) ििां धारा 84 के

अधीन की गई संपरीक्षा या धारा 86 के अधीन की गई िांच या

धारा 87 या धारा 88 के अधीन, जनरीक्षण या सोसाइिी के

पटरसमापन के अनुक्रम में या पटरणामस्ट्िरूप, रजिस्ट्रार का

धारा 84 के अधीन िांच करने के जलए संपरीक्षक या प्राजधकृत

व्यजि या धारा 87 या धारा 88 के अधीन पुस्ट्तकों के जनरीक्षण

के जलए प्राजधकृत व्यजि या धारा 110 के अधीन समापक द्वारा

बनाई गई टरपोिष के आधार पर यि समाधान िो िाता िै दक

कोई व्यजि िो सोसाइिी या कोई मृत या सोसाइिी ने भूतपूिष

या ितषमान अजधकारी के संगठन या प्रबंधन में कोई भाग ले

जलया िै ऐसी संपरीक्षा प्रारंभ िोने की तारीख या िांच,

जनरीक्षण या पटरसमापन, िुरुपयोिन या प्रजतधारण के जलए या

सोसाइिी के धन या संपजत्त के जलए िायी िोना या लेखािायी

िोने के जलए या सोसाइिी के संबंध में अपकरण या आपराजधक

न्यास भंग का िोषी दकए गए आिेि की तारीख से पांच िषष की

अिजध के भीतर रजिस्ट्रार या इस जनजमत्त उसके द्वारा प्राजधकृत

व्यजि ऐसे व्यजि या व्यजियों के आचरण का अन्िेषण कर

32

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

सकेगा और ऐसे व्यजि या व्यजियों के जिरुद् आरोप जिरजचत

करने के पश् चात और संबद् व्यजि को सुनिाई का युजियुि

अिसर िेने के पश् चात और मृत व्यजि की ििा में उसके

प्रजतजनजध िो उसकी संपिा के उत्तराजधकारी िैं आरोप का उत्तर

िेने के जलए रजिस्ट्रार या इस धारा के अधीन प्राजधकृत व्यजि

अिधाटरत करेगा ऐसी िर पर ब्याि के साथ धन या संपजत्त या

उसका कोई भाग चुकाने या बिाल करने के जलए अपेजक्षत िै,

आिेि िे सकेगा, या िुरुपयोिन, प्रजतधारण, अपकरण या

आपराजधक न्यासभंग के संबंध में प्रजतकर के माध्यम से

सोसाइिी की आजस्ट्तयों की ऐसी राजि का अजभिाय करेगा, िो

िि अिधाटरत करे :

परंतु इस उपधारा के अधीन की गई कायषिाजियां,

रजिस्ट्रार द्वारा आिेि के िारी दकए िाने की तारीख से िो िषष

की अिजध के भीतर प्राजधकृत व्यजि ििारा पूरी की िाएंगी:

परंतु यि और दक रजिस्ट्रार, इसके जलए कारणों को

अजभजलजखत करने के पश् चात छि मास की अजधकतम अिजध के

जलए उि अिजध का जिस्ट्तार कर सकेगा :

परंतु यि भी दक प्रिासक, रजिस्ट्रार की टरपोिष पर या

स्ट्िप्रेरणा से जलजखत रूप में ऐसे कारणों के जलए िो लेखबद्

दकए िाएंगे, इस उपधारा के अधीन कायषिाजियां पूरी करने के

जलए समय-समय पर, उि अिजध का जिस्ट्तार, िो अपेजक्षत िो,

कर सकेगा ।

(2) रजिस्ट्रार या उपधारा (1) के अधीन प्राजधकृत व्यजि

इस धारा के अधीन कोई आिेि करने में ऐसा अन्िेषण िो िि

उजचत समझे, करने के खचष या उसके दकसी भाग का संिाय

करने के जलए उपबंध कर सकेगा, और िि जनिेि िे सकेगा दक

ऐसा खचष या उसका कोई भाग ऐसे व्यजि से िसूल दकया

िाएगा जिसके जिरुद् आिेि िारी दकया गया िै ।

(3) यि धारा, इस बात के िोते हुए भी दक कृत्य िि िै

जिसके जलए संबंद् व्यजि िांजडक रूप से उत्तरिायी दकया िा

सकेगा, लागू िोगी ।

94. उपजस्ट्थजत, आदि प्रिृत्त करने की िजि— रजिस्ट्रार

या उसके द्वारा प्राजधकृत व्यजि को, िब धारा 86, धारा 87,

धारा 88 और धारा 93 के अधीन कायष करते समय, दकसी

व्यजि को साक्ष्य िेने या दकसी िस्ट्तािेि को प्रस्ट्तुत करने के

जलए बाध्य करने या अन्य जिषयिस्ट्तु के जलए उपजस्ट्थत िोने

और िाजिर कराने की िजि िोगी और उसी प्रकार और उसी

रीजत में िो जसजिल प्रदक्रया संजिता, 1908 (1908 का 5) के

अधीन जसजिल न्यायालय के मामले में उपबंजधत की िाए ।

95. सोसाइिी के कायषकरण के पयषिेक्षण के जलए

पटरसंघीय सोसाइिी का गठन या मान्यता—(1) संघ राज्यक्षेत्र

प्रिासन सजमजतयों का गठन कर सकेगा या सोसाइिी या

सोसाइिी के िगष के पयषिेक्षण करने के जलए ऐसी रीजत में, िो

जिजित की िाए और ऐसी ितों के अध्यधीन िो संघ राज्यक्षेत्र

प्रिासन अिधाटरत करे एक या अजधक सिकारी पटरसंघीय

सोसाइिी को मान्यता िे सकेगा और दकसी ऐसी सजमजत या

पटरसंघीय सोसाइिी को अनुिान िेने के जलए जनयम बना

सकेगा ।

(2) संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन, साधारण या जििेष आिेि

द्वारा ऐसी राजि िो रजिस्ट्रार द्वारा जनयत की िाए व्यय की

प्रजतपूर्तष का अजभिाय करने के जलए सोसाइिी या सोसाइिी के

िगष को अपेजक्षत कर सकेगा, िो संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन या इस

जनजमत्त प्रजधकृत कोई व्यजि या सजमजत ने सोसाइिी के

पयषिेक्षण करने की बाबत उपगत दकया िै या उपगत दकए िाने

की संभािना िै ।

(3) सोसाइिी जिसको उपधारा (2) लागू िै, ऐसे

प्राजधकारी को युजियुि समय के भीतर, ऐसी फीस िो जिजित

की िाए का संिाय करेगा और यदि िि युजियुि समय के

भीतर ऐसी फीस का संिाय करने में असफल रिता िै,

प्राजधकारी इसे िसूल कर सकेगा यदि यि भू-रािस्ट्ि का बकाया

था ।

अध्याय 9

जििाि जिजनश् चत करने के जलए प्रदक्रया

96. जििाि—(1) तत्समय प्रिृत्त दकसी अन्य जिजध में

दकसी बात के िोते हुए भी कोई जििाि सजमजत या इसके

अजधकाटरयों या सोसाइिी की साधारण बैठकों के संचालन के

गठन, प्रबंधन, कारबार, जनिाषचन के संबंध में दकसी जििाि के

पक्षकारों के द्वारा या पटरसंघीय सोसाइिी द्वारा जिससे

सोसाइिी सिबद् िै, या सोसाइिी के लेनिार द्वारा रजिस्ट्रार

को जनर्िष्ट दकया िाएगा, यदि इसके पक्षकार जनम्नजलजखत में से

िै, अथाषत :—

(क) सोसाइिी, इसकी सजमजतयां, कोई भूतपूिष सजमजत,

कोई भूतपूिष या ितषमान अजधकारी, कोई भूतपूिष या ितषमान

अजभकताष कोई भूतपूिष या ितषमान सेिक या नामजनिेजिती,

सोसाइिी के दकसी मृत अजधकारी के िाटरस या जिजधक

प्रजतजनजध, मृत अजभकताष या मृत सेिक या सोसाइिी के

समापक;

(ख) सोसाइिी के सिस्ट्य, भूतपूिष सिस्ट्य या मृत सिस्ट्यों

के माध्यम से िािा करने िाले सिस्ट्य, भूतपूिष सिस्ट्य या व्यजि,

या सोसाइिी के सिस्ट्य िै ;

(ग) सोसाइिी के सिस्ट्यों से जभन् न व्यजि जिसे सोसाइिी

द्वारा ऋण अनुित्त दकया गया िै या जिसने सोसाइिी की धारा

49 के उपबंधों के अधीन संव्यििार दकया िै या दकया था, और

ऐसे व्यजि के माध्यम से िािा करने िाला कोई व्यजि; और

(घ) दकसी सिस्ट्य, भूतपूिष सिस्ट्य या मृत सिस्ट्य या

सिस्ट्य से जभन्न दकसी अन्य़ व्यजि की प्रजतभूजत जिसे धारा 49

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

33

के अधीन सोसाइिी द्वारा ऋण अनुित्त दकया गया िै चािे ऐसा

प्रजतभू सोसाइिी का सिस्ट्य िै या निीं ;और

(ड.) कोई अन्य सोसाइिी, िासकीय समनुिेजिती या

ऐसी सोसाइिी का समापक ।

(2) िब कोई प्रश् न उठता िै दक उपधारा (1) के प्रयोिन

के जलए, जिजनश् चय के जलए जनर्िष्ट जिषय पर जििाि िै या

निीं, प्रश् न रजिस्ट्रार द्वारा जिचारणीय िोगा जिसका जिजनश् चय

अंजतम िोगा ।

स्ट्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोिन के जलए-

(क) जििािों में अंतर्िष्ट िोगा —

(i) सोसाइिी द्वारा दकसी सिस्ट्य या भूतपूिष सिस्ट्य या

मृत सिस्ट्य के नामजनिेजिती, िाटरस या जिजधक प्रजतजनजध से

दकसी ऐसे िेय ऋण या मांग के जलए कोई िािा, चािे ऐसा

ऋण या ऐसी मांग स्ट्िीकार की गई िो या निी;

(ii) दकसी सोसाइिी द्वारा ऋण के संबंध में मूल

उधारकताष से उसको दकसी राजि या िेय मांग के जलए प्रजतभू

द्वारा िािा और मूल उधारकताष के व्यजतक्रम के कारण प्रजतभू से

िसूली, चािे ऐसी राजि या ऐसी मांग स्ट्िीकार की गई िो या

निीं ;

(iii) सिस्ट्य, भूतपूिष सिस्ट्य या मृत सिस्ट्य द्वारा, दकसी

अजधकारी, भूतपूिष अजधकारी या मृत अजधकारी द्वारा दकसी

अजभकताष, भूतपूिष अजभकताष या मृत अजभकताष द्वारा या दकसी

सेिक, भूतपूिष सेिक या मृत सेिक द्वारा या इसकी भूतपूिष या

ितषमान सजमजतयों द्वारा इसको काटरत की गई दकसी िाजन के

जलए सोसाइिी द्वारा कोई िािा, चािे ऐसी िाजन स्ट्िीकार की

गई िो या निीं; और

(iv) दकसी सिस्ट्य, भूतपूिष सिस्ट्य या मृत सिस्ट्यों के

नामजनिेजिती, िाटरस या जिजधक प्रजतजनजध द्वारा, सोसाइिी

की भूजम के या समनुिेिन की ितों के भाग के जलए इसके द्वारा

पुनरारंभ दकसी अन्य आजस्ट्त के कब्िे के पटरिान करने के जलए

इंकार या असफलता; और

(ख) पि “अजभकताष” के अंतगषत आिासन सोसाइिी की

ििा में, सोसाइिी द्वारा सजम्मजलत दकए गए िास्ट्तुजिि

इंिीजनयर या ठेकेिार भी िै —

97. पटरसीमा—(1) पटरसीमा अजधजनयम, 1963

(1963 का 36) में अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए भी, ककंतु

इस जिजनयम में दकए गए जिजनर्िष्ट उपबंधों के अधीन रिते

हुए, धारा 96 के अधीन रजिस्ट्रार को जनर्िष्ट जििाि के मामले

में पटरसीमा की अिजध—

(क) िब जििाि दकसी सोसाइिी के उसके दकसी सिस्ट्य

द्वारा सोसाइिी को िेय दकसी राजि की िसूली से संबंजधत िै

जिसके अंतगषत उस पर ब्याि भी िै, उस तारीख से संगजणत की

िाएगी जिसको ऐसे सिस्ट्य की मृत्यु िोती िै या िि सोसाइिी

का सिस्ट्य निीं रि िाता िै ;

(ख) िब जििाि सोसाइिी या इसकी सजमजत या दकसी

भूतपूिष सजमजत, दकसी भूतपूिष या ितषमान अजधकारी, या

भूतपूिष या ितषमान अजभकताष या भूतपूिष या ितषमान सेिक या

सोसाइिी के मृत अजधकारी, मृत अजभकताष या मृत सेिक के

नामजनिेजिती, िाटरस या जिजधक प्रजतजनजध या सिस्ट्य या

भूतपूिष सिस्ट्य या मृत सिस्ट्य के नामजनिेजिती, िाटरस या

जिजधक प्रजतजनजध के बीच िोता िै और िब जििाि दकसी कायष

या लोक से संबंजधत िो, िि कायष या लोप जिसके संबंध में

जििाि उत्पन् न हुआ था, उस तारीख से छि िषष िोगी ;

(ग) िब जििाि सोसाइिी के गठन, प्रबंधन या कारबार

से संबंजधत दकसी जिषय के बाबत िै िो धारा 107 के अधीन

पटरसमापन का आिेि दकया गया िै या जिसकी बाबत

नामजनर्िष्ट सजमजत या जििेष अजधकारी को धारा 81 के अधीन

जनयुि दकया गया िै, यथाजस्ट्थजत, धारा 107 या धारा 81 के

अधीन िारी दकए गए आिेि की तारीख से छि िषष िोगी ;

और

(घ) िब जििाि सोसाइिी के दकसी पिाजधकारी के

जनिषचन के संबंध में िै, तब जनिाषचन के पटरणाम की घोषणा

की तारीख से िो मास िोगी ।

(2) उपधारा (1) में िर्णषत जििािों के जभन्न, िो धारा

96 के अधीन रजिस्ट्रार को जनर्िष्ट दकया िाना अपेजक्षत िै,

दकसी जििाि के मामले में पटरसीमा की अिजध, भारतीय

पटरसीमा अजधजनयम, 1963 (1963 का 36) के उपबंधों द्वारा

इस प्रकार जिजनयजमत की िाएगी मानो दक जििाि एक िाि िो

और रजिस्ट्रार एक जसजिल न्यायालय ।

(3) उपधारा (1) और उपधारा (2) में अंतर्िष्ट दकसी

बात के िोते हुए भी, रजिस्ट्रार पटरसीमा की अिजध की समाजप्त

के पश् चात दकसी जििाि को ग्रिण कर सकेगा, यदि आिेिक

उसका समाधान कर िेता िै दक उसके पास ऐसी अिजध के

भीतर, जििाि को जनर्िष्ट न करने के पयाषप्त कारण थे, और इस

प्रकार ग्रिण दकया गया जििाि एक ऐसा जििाि िोगा िो इस

आधार पर िर्िषत निीं दकया िाएगा दक पटरसीमा की अिजध

समाप्त िो गई िै ।

98. जििािों का जनपिारा—(1) यदि रजिस्ट्रार का यि

समाधान िो िाता िै दक उसको जनर्िष्ट कोई मामला धारा 96

के अथष के भीतर जििाि िै रजिस्ट्रार इस जनजमत्त बनाए गए

जनयमों के अध्यधीन स्ट्ियं जििाि जिजनश् चत करेगा या

रजिस्ट्रार द्वारा जनयुि दकए गए नामजनिेजिती या

नामजनिेजिजतयों के बोडष को जनपिान के जलए इसे जनर्िष्ट

करेगा:

परंतु कोई व्यजि िो दकसी स्ट्तर पर दकसी जििाि या

सोसाइिी से संबंजधत िै या प्रितषन सोसाइिी को जनरीजक्षत या

34

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

इसके लेखाओं को संपरीजक्षत दकया गया िै जििाि के जनपिारे

के जलए नामजनिेजिती के रूप में या नामजनिेजिजतयों के बोडष के

सिस्ट्य के रूप में जनयुि निीं दकया िाएगा ।

(2) ििां कोई जििाि रजिस्ट्रार के नामजनिेजिती या

नामजनिेजिजतयों के बोडष के जिजनश् चय के जलए उपधारा (1) के

अधीन जनर्िष्ट दकया िाता िै, रजिस्ट्रार जलजखत रूप में कारणों

के जलए लेखबद् करते हुए, दकसी समय पर उसके

नामजनिेजिती या नामजनिेजिजतयों के बोडष से जििाि प्रत्याह्रत

कर सकेगा और स्ट्ियं जििाि जिजनजश् चत कर सकेगा या उसके

द्वारा जनयुि दकए गए दकसी अन्य नामजनिेजिती या

नामजनिेजिजतयों के बोडष को जिजनश् चय के जलए दफर से इसे

जनर्िष्ट कर सकेगा ।

(3) धारा 96 में अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए भी,

रजिस्ट्रार, यदि िि ठीक समझे दकसी जििाि के संबंध में

कायषिाजियां लंजबत कर सकेगा, यदि प्रश् न सोसाइिी और

िािेिार के बीच या जिजभन् न िािेिारों के बीच जििाद्यक पर िै,

जिजध या तथ्य का िटिल प्रश् न अंतिषजलत िो रिा िै, िब तक

प्रश् न दकसी एक पक्ष या सोसाइिी द्वारा संजस्ट्थत जनयजमत िाि

द्वारा जिचाटरत निीं दकया िाता िै और यदि कोई ऐसा िाि

कायषिाजियां जनलंजबत करने के आिेि से रजिस्ट्रार द्वारा िो

मास के भीतर संजस्ट्थत निीं दकया िाता िै, रजिस्ट्रार ऐसी

कारषिाई करेगा िो उपधारा (1) में उपबंजधत की गई िै ।

99. जििाि के जनपिान के जलए प्रदक्रया और रजिस्ट्रार

उसके नामजनिेजिती या बोडष नामजनिेजिजतयों के बोडष की

िजि—(1) धारा 96 के अधीन जििाि की सुनिाई करने िाला

रजिस्ट्रार या उसके नामजनिेजिती या बोडष के नामजनिेजिजतयों

का बोडष जिजित रीजत में जििाि की सुनिाई करेगा और उसके

पास जितबद् पक्षकारों या उनमें से कोई सजित साजक्षयों की

िाजिरी और उपजस्ट्थजत को प्रिृत्त करने की और उन्िें साक्ष्य िेने

के जलए बाध्य करने के जलए और िस्ट्तािेिों को उसी प्रकार से

पेि करने के जलए बाध्य करने की और यथासंभि िीघ्र उसी

रीजत में िो जसजिल प्रदक्रया संजिता, 1908 (1908 का 5) द्वारा

जसजिल न्यायालय के मामले में जिजित की िाए, िजि िोगी

और

(2) जसिाय ििां जिजध या तथ्य िटिल प्रश् न अंतिषजलत

िै, दकसी जिजधक व्यिसायी के रुप में उसकी क्षमता में जिजधक

व्यिसायी को या मुखतारनामा धारण करने िाले व्यजि को

जििाि की सुनिाई करने में दकसी पक्षकार की ओर से उपजस्ट्थत

िोने की अनुज्ञा निीं िी िाएगी ।

(3) यदि रजिस्ट्रार या उसके नामजनिेजिती या

नामजनिेजिजतयों के बोडष का यि समाधान कर दिया िाता िै

दक व्यजि चािे िि सोसाइिी का सिस्ट्य िो या निीं उस व्यजि

की संपजत्त में कोई जित अर्िषत करता िै, िो जििाि का पक्षकार

िै, तब िि व्यजि आिेि करेगा िो संपजत्त में जित अर्िषत करता

िै िि जििाि में एक पक्षकार के रुप में सजम्मजलत िो सकेगा

और कोई जिजनश्चय रजिस्ट्रार या उसका नामजनिेजिती या

नामजनिेजिजतयों के बोडष द्वारा संिभष पर पाटरत दकया िा

सकेगा िो इसमें सजम्मजलत पक्षकारों पर बाध्यकर िोगा, उसी

रीजत में िो यदि िि जििाि का मूल पक्षकार था ।

(4) ििां जििाि गलत व्यजि के नाम में संजस्ट्थत दकया

गया िै या ििां सभी प्रजतिािी सजम्मजलत निीं दकए िैं

रजिस्ट्रार या उसका नामजनिेजिती या नामजनिेजिजतयों के बोडष

का, जििाि की सुनिाई करने के दकसी स्ट्तर पर यदि समाधान

िो िाता िै दक गलती सि भािपूिषक थी, दकसी अन्य व्यजि को

िािी या प्रजतिािी के रुप में प्रजतस्ट्थाजपत या िो़िे िाने का

आिेि, ऐसे जनबंधनों पर िो िि उजचत समझे, कर सकेगा ।

(5)

रजिस्ट्रार

या

उनका

नामजनिेजिती

या

नामजनिेजिजतयों के बोडष, कायषिाजियों के दकसी स्ट्तर पर, चािे

पक्षकार के आिेिन पर या उसके जबना और ऐसे जनबंधनों पर

िो यथाजस्ट्थजत, रजिस्ट्रार या उनके नामजनिेजिती या

नामजनिेजिजतयों के बोडष को प्रतीत िो, न्यायपूणष िोने के जलए,

आिेि िे सकेगा दक दकसी पक्षकार का नाम उजचत रुप में

सजम्मजलत िो गया िै चािे िि िािी या प्रजतिािी के रुप में

कािा गया िो, और दक दकसी व्यजि का नाम िो चािे िािी या

प्रजतिािी के रुप में सजम्मजलत दकया िाना चाजिए था या

जिसकी उपजस्ट्थजत यथाजस्ट्थजत रजिस्ट्रार, उनके नामजनिेजिती

या नामजनिेजिजतयों के बोडष के समक्ष रजिस्ट्रार, उनके

नामजनिेजिती या बोडष के नामजनिेजिती को सिायता िेने के

जलए जििाि में अंतिषजलत सभी प्रश् नों पर जिजनणषय लेने और

जनपिान के जलए प्रभािपूणष रुप से और पूणष रुप से समथष बनाने

के जलए आिेि में आिश्यक िो सकेगा ।

(6) कोई व्यजि िो जििाि का पक्षकार िै और उसी

कारण िेतुक के बाबत एक या अजधक अनुतोष के जलए िकिार

िै ऐसे सभी या दकसी अनुतोष का िािा कर सकेगा, ककंतु यदि

िि सभी ऐसी िािों का लोप करता िै, िि रजिस्ट्रार उनके

नामजनिेजिती या नामजनिेजिजतयों के बोडष की अनुज्ञा के

जसिाय ऐसे लोप दकए गए दकसी अनुतोष के जलए अग्रनीत

निीं दकया िाएगा ।

(7) उपधारा (4) से उपधारा (6) में अंतर्िष्ट दकसी बात

के िोते हुए भी, जनम्नजलजखत जििािों या जििािों के िगष यदि

िािी की ऐसी िांछा िै, रजिस्ट्रार उनके नामजनिेजिती या

नामजनिेजिजतयों के बोडष द्वारा ऐसी रीजत में, िो जिजित की

िाए संजक्षप्त रूप से जिजनजश् चत दकया िाएगा ।

(क) िचनपत्र, हुंडी, जिजनमय पत्र या बांड पर ऋण की

िसूली के जलए कोई जििाि ब्याि सजित या जबना ब्याि चािे

ऐसी जलखत के अधीन या उपजिजधयों के अधीन सिमत िो ;

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

35

(ख) एक जलजखत संजििा पर उद्भूत िोने िाली एक

जनयत राजि या ब्याि संजित या जबना ब्याि के ऋण के प्रकृजत

की िसूली के जलए कोई जििाि;

(ग) जिक्रीत या पटरित्त माल की कीमत की िसूली के

जलए कोई जििाि, ििां िर क् िाजलिी और मात्रा जलजखत रूप में

स्ट्िीकृत िो ;या

(घ) आिासन सोसाइिी के दकसी सिस्ट्य द्वारा गृि के

संजनमाषण के जलए योगिान के जलए िेय िोध्यों की िसूली के

जलए कोई जििाि या कोई उधार, उधार पर ब्याि, भूजम का

दकराया, स्ट्थानीय प्राजधकरण कर, जनक्षेप जनजध, िल प्रभार,

जिद्युत प्रभार, रखरखाि और अनुरक्षण प्रभार और सोसाइिी

द्वारा िी गई सेिाएं और जलजखत करार के अधीन या

उपजिजधयों के अधीन संिेय ऐसे बकाया पर ब्याि के जलए

दकसी प्रभार के पुनषसंिाय के बाबत कोई जििाि ।

(8) प्रजतिािी जििाि का बचाि करने का िकिार निीं

िोगा िब तक दक िि यथाजस्ट्थजत, रजिस्ट्रार या उनका

नामजनिेजिती या नामजनिेजिजतयों के बोडष से ऐसी रीजत में,

िो जिजित की िाए, इिाित प्राप्त निीं करता ।

(9)

रजिस्ट्रार

या

उनका

नामजनिेजिती

या

नामजनिेजिजतयों के बोडष, उपधारा (8) के अधीन ऐसी ितों

पर, िो िि या उसे उजचत समझे, इिाित अनुित्त कर सकेगा ।

(10).

रजिस्ट्रार

या

उनका

नामजनिेजिती

या

नामजनिेजिजतयों के बोडष जििाि के बचाि के जलए इिाित िेने

से इंकार निीं करेगा िब तक िि या उसका समाधान निीं िो

िाता दक प्रजतिािी द्वारा प्रकटित तथ्य यि निीं इंजगत करते दक

उसने सारिान प्रजतिाि दकया िै या दक उनके द्वारा दकया गया

आिजयत प्रजतिाि तुच्छ या तंग करने िाला िै ।

(11) ििां प्रजतिािी ऐसी इिाित प्राप्त करने के जलए

असफल रिता िै या ऐसी इिाित के अनुसरण में जििाि में

उपजस्ट्थजत िोने या बचाि करने के जलए असफल रिता िै,

िािपत्र में दकए गए प्रकथन और उसके साथ प्रस्ट्तुत दकए गए

िस्ट्तािेि प्रजतिािी द्वारा स्ट्िीकार दकए गए समझे िाएंगे :

परंतु

रजिस्ट्रार

या

उनका

नामजनिेजिती

या

नामजनिेजिजतयों के बोडष अपने जििेक से ऐसे स्ट्िीकार दकए गए

दकसी तथ्य को ऐसी स्ट्िीकृजत से अन्यथा साजबत करने की

अपेक्षा कर सकेगा ।

(12). ििां ितें जिन पर बचाि की इिाित अनुित्त की

िाती िै, प्रजतिािी द्वारा अनुपाजलत निीं की िाती िै

यथाजस्ट्थजत,

रजिस्ट्रार

या

उनका

नामजनिेजिती

या

नामजनिेजिजतयों के बोडष उसके जिरुद् अजधजनणषय पाटरत कर

सकेगा, िैसा यदि ऐसी इिाित अनुित्त निीं िी गई िै ।

(13). यथाजस्ट्थजत, रजिस्ट्रार या उनका नामजनिेजिती

या नामजनिेजिजतयों के बोडष जििेष पटरजस्ट्थजतयों के अधीन

उनके द्वारा या उसे पाटरत दकए गए अजधजनणषय को अपास्ट्त कर

सकेगा और यदि आिश्यक िो, जनष्पािन को रोक या अपास्ट्त

कर सकेगा और प्रजतिािी को जििाि में उपजस्ट्थत िोने और

बचाि करने के जलए इिाित अनुित्त कर सकेगा, यदि उसे ऐसा

करना युजियुि लगता िो और ऐसे जनबंधनों पर िो िि या

उसे उजचत समझे ।

100. अजधजनणषय के पिले कुकी—(1) ििां जििाि,

धारा 98 या धारा 110 के अधीन रजिस्ट्रार या उनके

नामजनिेजिती या नामजनिेजिजतयों के बोडष को जनर्िष्ट दकया

िाता िै, या िबदक रजिस्ट्रार या धारा 93 के अधीन प्राजधकृत

व्यजि, उस व्यजि की सुनिाई करता िै जिसके जिरुद् प्रभार

उस धारा के अधीन जिरजचत दकए गए िैं, रजिस्ट्रार या उनका

नामजनिेजिती या नामजनिेजिजतयों के बोडष या यथाजस्ट्थजत धारा

93 के अधीन ऐसे प्राजधकृत व्यजि का यदि िांच या अन्यथा पर

समाधान िो िाता िै दक ऐसे जििाि का पक्षकार या जिसके

जिरुद् कायषिाजियां धारा 93 के अधीन लंजबत िै दकसी

अजधजनणषय के जनष्पािन को जिफल, जिलंब या बाधा डालने का

आश्य या दकसी आिेि को कायाषजन्ित करने में, --

(क) संपूणष संपजत्त या उसके दकसी भाग का जनपिान

करने िाला िै ;या

(ख) संपूणष संपजत्त या उसके दकसी भाग को उसकी

अजधकाटरता से ििाने िाला िै, रजिस्ट्रार, िब तक दक पयाषप्त

प्रजतभूजत न िे िी िाए, उि संपजत्त को सितष कुकष करने का

जनिेि िे सकेगा और ऐसी कुकी का ििी प्रभाि िोगा िो यदि

सक्षम जसजिल न्यायलय द्वारा की गई िोती ।

(2) ििां संपजत्त कुकष करने के जलए जनिेि उपधारा (1)

के अधीन िारी दकया िाता िै, ििां रजिस्ट्रार या उनका

नामजनिेजिती या नामजनिेजिजतयों के बोडष या धारा 93 के

अधीन प्राजधकृत व्यजि उस व्यजि को सूचना िारी करेगा

जिसकी संपजत्त ऐसी अिजध के भीतर िो सूचना में जिजनर्िष्ट

की िाए ऐसी प्रजतभूजत िेने के जलए ऐसे कुकष की िाती िै और

यदि व्यजि ऐसी मांग पर प्रजतभूजत िेने में असफल रिता िै तो

यथाजस्ट्थजत,

रजिस्ट्रार

या

उनका

नामजनिेजिती

या

नामजनिेजिजतयों के बोडष या धारा 93 के अधीन प्राजधकृत

व्यजि आिेि की पुजष्ट कर सकेगा और जििािों में जिजनश् चय

और उपधारा (1) में जनर्िष्ट कायषिाजियों के पूरा करने के

पश् चात िािे के प्रजत ऐसी कुकष संपजत्त के जनपिान के जलए

जनिेि दकया िा सकेगा, यदि यि अजधजनणीत िै ।

(3) इस धारा के अधीन की गई कुकी उन व्यजियों की

संपजत्त की कुकी से पिले जिद्यमान अजधकारों को प्रभाजित निीं

करेगी िो कुकी के संबंध में कायषिाजियों के पक्षकार निीं िै, या

ऐसी कुकी को पिले जडक्री धारण करने िाले दकसी व्यजि को

िर्िषत निीं करेंगे जिस व्यजि की संपजत्त के जिरुद् ऐसी जडक्री

36

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

के जनष्पािन में कुकी के अधीन संपजत्त के जिक्रय के जलए आिेिन

करने में ऐसी कुकी की िाती िै ।

101.

रजिस्ट्रार

या

उनका

नामजनिेजिती

या

नामजनिेजिजतयों के बोडष—(1) िब जििाि, रजिस्ट्रार को

जिजनश् चय के जलए जनर्िष्ट दकया िाता िै यथाजस्ट्थजत िि या

उनका नामजनिेजिती या नामजनिेजिजतयों के बोडष जििाि के

पक्षकारों को सुनिाई के जलए युजियुि अिसर िेने के पश् चात

यथाजस्ट्थजत,

रजिस्ट्रार

या

उनका

नामजनिेजिती

या

नामजनिेजिजतयों के बोडष जििाि पर कायषिाजियों से संबंजधत

जििाि के पक्षकारों द्वारा उपगत व्ययों और फीस और संिेय

व्ययों पर, अजधजनणषय कर सकेगा और ऐसा अजधजनणषय इस

आधार पर केिल अमान्य निीं िोगा दक यि रजिस्ट्रार द्वारा

जििाि का जिजनश् चय करने के जलए जनयत अिजध की समाजप्त के

पश् चात दकया गया था और अपील या पुनर्िषलोकन का

पुनरीक्षण के अध्यधीन जििाि के पक्षकारों पर बाध्यकर िोगा ।

(2) यथाजस्ट्थजत, रजिस्ट्रार या उनका नामजनिेजिती या

नामजनिेजिजतयों का बोडष पक्षकारों की सुनिाई करने के पिले

उसकी या उनकी राय में, फीस के संिाय सजित व्ययों के पूरा

करने के जलए युजियुि समझे िाए, ऐसी राजि के जनक्षेप के

जलए ऐसे जििाि के पक्षकार या पक्षकारों से अपेक्षा कर सकेगा,

उसकी उपधारा (1) के अधीन दकए गए अजधजनणषय के अनुसरण

में, यथाजस्ट्थजत, रजिस्ट्रार या उनके नामजनिेजिती या

नामजनिेजिजतयों का बोडष को संिाय िो सकेगा ।

(3) रजिस्ट्रार, कारषिाई के कारण की प्रकृजत और जििाि

की जिषय-िस्ट्तु को ध्यान में रखते हुए, अनुतोष की प्रकृजत िो

दक जििाि में िािा की िा सके और ऐसे अन्य जिषयों की

साधारण या जििेष आिेि द्वारा जिजनर्िष्ट कर सकेगा, फीस का

स्ट्तर और व्यय उपधारा (1) के अधीन दकए गए अजधजनणषय

द्वारा या के अधीन िो यथाजस्ट्थजत उसे या उसके नामजनिेजिती

या नामजनिेजिजतयों का बोडष को संिाय दकया िा सकेगा ।

102.

रजिस्ट्रार

या

उनके

नामजनिेजिती

या

नामजनिेजिजतयों के बोडष के जिजनश् चय के जिरुद् अपील—धारा

101 के अधीन य़ा धारा 100 के अधीन पाटरत दकए गए दकसी

आिेि से, यथाजस्ट्थजत रजिस्ट्रार या उनके नामजनिेजिती या

नामजनिेजिजतयों के बोडष के दकसी जिजनश् चय द्वारा व्यजथत कोई

पक्षकार, जिजनश् चय या आिेि की तारीख से साठ दिन के

भीतर, अजधकरण को अपील कर सकेगा :

परंतु अपील अजधकरण साठ दिन की अिजध की समाजप्त

के पश् चात कोई अपील ग्रिण कर सकेगा, यदि उसका समाधान

िो िाता िै दक उसके पास उस अिजध के भीतर इसे फाइल न

कर पाने का पयाषप्त कारण था ।

103. धन कैसे िसूला िाए—रजिस्ट्रार या धारा 93 के

अधीन उनके द्वारा प्राजधकृत व्यजि द्वारा या धारा 100 या

धारा 101 के अधीन रजिस्ट्रार, उनका नामजनिेजिती या

नामजनिेजिजतयों का बोडष द्वारा पाटरत दकया गया प्रत्येक

आिेि, धारा 110 के अधीन समापक द्वारा पाटरत दकया गया

प्रत्येक आिेि, धारा 110 के अधीन पाटरत दकए गए आिेि के

जिरुद् अपील में प्रिासक द्वारा पाटरत दकया गया प्रत्येक आिेि

और धारा 128 के अधीन पुनरीक्षण में पाटरत दकया गया

प्रत्येक आिेि, यदि कायाषजन्ित निीं दकया गया तो,-

(क) रजिस्ट्रार या समापक द्वारा िस्ट्ताक्षटरत प्रमाणपत्र

पर, जसजिल प्रदक्रया संजिता,1908 (1908 का 5) की धारा 2

के खंड (2) में यथापटरभाजषत जसजिल न्यायालय की जडक्री

समझा िाएगा और ऐसे न्यायालय की जडक्री के रूप में ऐसी

रीजत में जनष्पादित दकया िाएगा ; या

(ख) भू-रािस्ट्ि संजिता या प्रिृत्त दकसी तत्स्ट्थानी जिजध

और भू-रािस्ट्ि के बकाया की िसूली के जलए तत्समय प्रिृत्त

तद्ीन बनाए गए जनयमों के उपबंधों के अनुसार जनष्पादित

िोना :

परंतु कोई आिेिन दकसी ऐसी राजि की ऐसी रीजत में

िसूली के जलए कलेक्िर को दकया िाएगा और रजिस्ट्रार या

दकसी सिायक रजिस्ट्रार द्वारा जिसको उि िजि रजिस्ट्रार

द्वारा प्रत्यायोजित की गई िै, द्वारा िस्ट्ताक्षटरत प्रमाणपत्र द्वारा

संलग् न दकया िाएगा और ऐसा आिेिन आिेि में जनयत

तारीख से बारि िषष के भीतर और यदि कोई ऐसी तारीख

जनयत निीं िै तो आिेि की तारीख से दकया िाएगा ।

104. प्रमाणपत्र के िारी करने के पश् चात की गई संपजत्त

का प्राइिेि अंतरण सोसाइिी के जिरुद् िून्य—धारा 103 के

अधीन, यथाजस्ट्थजत रजिस्ट्रार, समापक या सिायक रजिस्ट्रार के

प्रमाणपत्र िारी करने के पश् चात बनाई गई या सृिजत की गई

संपजत्त पर कोई प्राइिेि अंतरण या पटरिान या जिल्लंगम या

प्रभार सोसाइिी के जिरुद् अकृत और िून्य िोंगे जिसके आिेिन

पर उि प्रमाणपत्र िारी दकया गया था ।

105. संपजत्त का अंतरण िो जिक्रीत निीं दकया िा

सकता—(1) िब धारा 103 के अधीन जनष्पादित दकए िाने के

जलए ईजप्सत आिेि के जनष्पािन में कोई संपजत्त क्रेता के अभाि

में जिक्रीत निीं की िा सकती, यदि ऐसी संपजत्त धारा 103 के

खंड (क) या खंड (ख) के अधीन रजिस्ट्रार, समापक या सिायक

रजिस्ट्रार के प्रमाणपत्र के िारी करने के पश् चात व्यजतक्रमी

द्वारा सृजित िक के अधीन िािा करने िाले व्यजतक्रमी, या

उसके बाबत कुछ व्यजि या कुछ व्यजि संपजत्त के अजधभोग में िै

यथाजस्ट्थजत, न्यायालय या कलक्िर या रजिस्ट्रार उि संपजत्त

या उसके भाग के जलए जनिेि िे सकेगा, सोसाइिी को अंतटरत

की िाएगी जिसे जिजित रीजत में, उि आिेि के जनष्पािन के

जलए लागू दकया गया िै ।

(2) ििां संपजत्त उपधारा (1) के अधीन सोसाइिी को

अंतटरत की िाती िै या धारा 103 के उपबंधों के अधीन

जिक्रीत की िाती िै, यथाजस्ट्थजत, न्यायालय कलेक्िर या

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

37

रजिस्ट्रार, जनयमों के अनुसार अंतटरत या जिक्री संपजत्त के कब्िे

में यथाजस्ट्थजत सोसाइिी या क्रेता रख सकेगा ।

(3) इन जनजमत्त बनाए गए जनयमों दकसी व्यजि से दकसी

अजधकार, जिल्लंगम, प्रभार या इदििी के अध्यधीन ऐसी संपजत्त

या उसका कोई भाग उपधारा (1) के अधीन उि सोसाइिी

द्वारा ऐसा जनबंधनों और ितों पर िैसा यथाजस्ट्थजत न्यायालय,

कलेक्िर या रजिस्ट्रार के बीच करार पाया िाए, धाटरत करेगा

और उि सोसाइिी प्रिासक, कलेक्िर या रजिस्ट्रार के साधारण

या जििेष, आिेि के अध्यधीन सिायक या उप-कलेक्िर या

सिायक रजिस्ट्रार की पंजि से नीचे का न िो, इस धारा के

अधीन कलेक्िर या रजिस्ट्रार द्वारा प्रयोग की िाने योग्य

िजियां िो, को प्रत्यायोजित कर सकेगा ।

106. फसल उधारों की िसूली—(1) धारा 96, धारा

98 और धारा 103 में अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए भी,

सोसाइिी द्वारा दकए गए आिेिन पर िो तत्समय प्रिृत्त दकसी

जिजध के अधीन यथापटरभाजषत फसलों का जित्तपोषण और

मौसमी जित्तपोषण का कायष करती िै, या इसके द्वारा फसलों के

जित्तपोषण, मौसमी जित्तपोषण या मध्यम अिजध जित्तपोषण के

अनुक्रम में अपने दकन्िीं सिस्ट्यों में से दकसी से दकसी राजि के

बकाया की िसूली के जलए मध्यम अिजध जित्तपोषण का कायष

करती िै, और इसके बकाया के बाबत लेखाओं का जििरण

प्रस्ट्तुत करने पर, रजिस्ट्रार ऐसी िांच करने के पश् चात , िो िि

ठीक समझे बकाया के रुप में िेय िोने िाली इसमें जििरजणत

रकम की िसूली के जलए प्रमाणपत्र अनुित्त कर सकेगा ।

स्ट्पष्टीकरण-- इस उपधारा के प्रयोिनों के जलए, “मध्यम

अिजध जित्तपोषण” पि से अजभप्रेत िै कृजष, मत्स्ट्य, पिुपालन,

मुगी पालन, िुग्ध उत्पािन और उद्योग से संबंजधत उत्पािन के

दकसी प्रयोिन के जलए उधार की अग्रसरता िै ऐसा उधार

तत्समय प्रिृत्त दकसी जिजध के अधीन “फसलों का जित्तपोषण”

और “मौसमी जित्तपोषण” पि की पटरभाषाओं में जिजनर्िष्ट

रीजत से जभन्न प्रजतसंिेय िोता िै ।

(2) यदि सोसाइिी उपधारा (1) में जनर्िष्ट उस उपधारा

के अधीन आिेिन करने में असफल रिती िै, तब, यदि ऐसी

सोसाइिी दकसी सिकारी जित्तीय बैंक की सिस्ट्य िै ऐसी

सिकारी जित्तीय बैंक ऐसी कारषिाई करने के जलए ऐसी

सोसाइिी को जनिेि िे सकेगा और यदि सोसाइिी ऐसे जनिेिन

के अनुसरण में कारषिाई करने में असफल रिता िै तब सिकारी

जित्तीय बैंक सोसाइिी की ओर से उपधारा (1) के अधीन

आिेिन स्ट्ियं कर सकेगा ।

(3) ििां रजिस्ट्रार का समाधान िो िाता िै दक

सोसाइिी या सिकारी जित्तीय बैंक जिसको ऐसी सोसाइिी

संबंद् िै उपधारा (1) के अधीन आिेिन करने में असफल रिता

िै या यथाजस्ट्थजत, ऐसे बकाया के बाबत उपधारा (2) के अधीन,

रजिस्ट्रार, स्ट्िप्रेरणा से ऐसी िांच करने के पश् चात िो िि ठीक

समझे, ऐसे बकाया के रुप में िेय िोने िाली इसमें कजथत रकम

की िसूली के जलए प्रमाणपत्र अनुित्त कर सकेगा और ऐसा

प्रमाणपत्र संबंद् सोसाइिी द्वारा दकए गए आिेिन पर ऐसे

िारी दकया गया समझा िाएगा ।

(4) उपधारा (1) या उपधारा (3) के अधीन रजिस्ट्रार

द्वारा अनुित्त प्रमाणपत्र अंजतम और इसमें िेय िोने िाली बकाये

के जलए जनश् चायक सबूत िोगा िो भू-रािस्ट्ि संजिता या

तत्समय प्रिृत्त दकसी अन्य जिजध और भू-रािस्ट्ि की िसूली के

जलए तद्ीन बनाए गए जनयमों के उपबंधों के अनुसार िसूली

योग्य िोंगे ।

(5) कलेक्िर और रजिस्ट्रार के जलए यि जिजधपूणष िोगा

दक िे भू-रािस्ट्ि संजिता या तत्समय प्रिृत्त दकसी अन्य जिजध के

अधीन जिजनर्िष्ट पूिाषिधानी उपाय करें, िब तक दक सोसाइिी

को िेय बकाया ब्याि और ऐसे बकाया की िसूली में उपगत

दकसी आकजस्ट्मक प्रभार के साथ संित्त िै, या ऐसे बकाया के

संिाय के जलए प्रजतभूजत रजिस्ट्रार की तुजष्ट के जलए िी िाती िै।

अध्याय 10

पटरसमापन

107. पटरसमापन—(1) उपधारा (2) में अन्यथा

उपबंजधत के जसिाय, यदि रजिस्ट्रार,-

(क) धारा 86 के अधीन कोई िांच दकए िाने या धारा

87 या धारा 88 के उपबंधों के अधीन कोई जनरीक्षण दकए िाने

के पश् चात या सोसाइिी के लेखाओं की संपरीक्षा करने िाले

संपरीक्षक की टरपोिष पर;

(ख) इस प्रयोिन के जलए बुलायी गई जििेष साधारण

बैठक पर उपजस्ट्थत सोसाइिी के तीन-चौथाई सिस्ट्यों द्वारा

कायाषजन्ित दकए संकल्प पर दकए गए

आिेिन की प्राजप्त पर; या

(ग) स्ट्िप्रेरणा से, सोसाइिी की ििा में,जिसमें-

(i) कायष आरंभ निीं दकया िै;

(ii) कायष समाप्त दकया िै;

(iii) िेयरों या सिस्ट्यों की जनक्षेप राजि पांच ििार से

अजधक निीं िै ;या

(iv) इस जिजनयम या जनयमों या उपजिजधयों को

रजिस्ट्रीकरण और प्रबंधन के संबंध में दकसी ितष का अनुपालन

करना समाप्त कर दिया िै,

िि सोसाइिी को अभ्यािेिन करने का अिसर िेने के

पश् चात उसका पटरसमापन करने का जनिेि िेने िाला आिेि

कर सकेगा ।

(2) उपधारा (1) में अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए भी

यदि ििां सोसाइिी के सिस्ट्यों ने, सोसाइिी के ऋण और

आजस्ट्तयों में अग्रनीत िाजयत्िों का जनिषिन करने के पश् चात ,

38

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

इस प्रयोिन के जलए बुलाई गई जििेष साधारण बैठक में

उपजस्ट्थत सोसाइिी के सिस्ट्यों की तीन चौथाई बहुसंखया द्वारा

कायाषजन्ित संकल्प पर, स्ट्िप्रेरणा से सोसाइिी का पटरसमापन

के जलए संकल्प करती िै और रजिस्ट्रार के जलए संकल्प प्रिजित

करेगा और रजिस्ट्रार धारा 115 के उपबंधों के अनुसार

अजधिेष आजस्ट्तयों का जनपिान करने के पश् चात , धारा 21 के

अधीन ऐसी सोसाइिी का रजिस्ट्रीकरण रद्द करेगा ।

(3) ििां अंतटरम आिेि उपधारा (1) के खंड (क) या

खंड (ग) के उपखंड (iv) में जिजनर्िष्ट आधार पर दकया िाता िै,

उसकी प्रजत ऐसे आिेि के िारी िोने की तारीख से एक मास

की अिजध के भीतर रजिस्ट्रार को अपना स्ट्पष्टीकरण प्रस्ट्तुत

करने के जलए किते हुए सोसाइिी को जिजित रीजत में, संसूजचत

की िाएगी ।

(4) रजिस्ट्रार सोसाइिी को सुनिाई का अिसर िेने के

पश् चात , अंजतम आिेि को बाजतल करते या पुजष्ट करते हुए,

अंजतम आिेि कर सकेगा ।

108. समापक की जनयुजि—(1) िब सोसाइिी के

पटरसमापन के जलए धारा 107 के अधीन कोई अंतटरम या

अंजतम आिेि दकया िाता िै, रजिस्ट्रार इस जिजनयम के अधीन

बनाए गए जनयमों के अनुसार, सोसाइिी का समापक िोने के

जलए व्यजि की जनयुजि और उसका पाटरश्रजमक जनयत कर

सकेगा ।

(2) ििां तक अंतटरम आिेि दकया िाता िै, सोसाइिी

के अजधकारी सभी संपजत्त, चीििस्ट्तु और अनुयोज्य िािे की

जिसकी सोसाइिी िकिार िै या िकिार प्रतीत िोती िै और

सोसाइिी के कारबार से संबंध रखने िाली सभी पुस्ट्तकों

अजभलेखों और अन्य िस्ट्तािेिों की अजभरक्षा और जनयंत्रण

समापक को सौंप दिया िाएगा और उनमें से दकसी तक उनकी

पहुंच निीं िोगी ।

(3) िब अंतटरम आिेि की पुजष्ट करते हुए अंजतम आिेि

दिया िाता िै तब सोसाइिी के अजधकारी

(क) सोसाइिी के कारबार से संबंध रखने िाली सभी

संपजत्त, चीििस्ट्तु और अनुयोज्य िािे और कोई पुस्ट्तक,

अजभलेख और अन्य िस्ट्तािेिों जिसे दकसी कारण से, उस समय

पर िब अंतटरम आिेि दकया गया था उपधारा (2) के अधीन

समापक को सौंपा निीं िै की अजभरक्षा और जनयंत्रण समापक

को सौंप दिए िाएंगे ; और

(ख) अपने कायाषलय टरि कर िेंगे और पटरसमापन

आिेि प्रिृत्त रिने के िौरान सोसाइिी का साधारण जनकाय

दकसी िजि का प्रयोग निीं करेगा ।

(4) समापक, रजिस्ट्रार के साधारण जनयंत्रण के

अध्यधीन, धारा 110 में िर्णषत सभी या दकसी िजि का प्रयोग

करेगा और रजिस्ट्रार कोई कारण दिए जबना उसको उसके पि

से ििा सकेगा और उसके स्ट्थान पर अन्य को जनयुि कर

सकेगा।

(5) सोसाइिी की संपूणष आजस्ट्तयां, समापक की जनयुजि

पर उसमें जनजित िोगी और तत्समय प्रिृत्त दकसी जिजध में

अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए भी, यदि कोई अमूतष संपजत्त

सोसाइिी की ओर से उसके द्वारा धाटरत की िाती िै, िैसे िी

उसके कायाषलय के नाम का नामांतरण कर दिया िाता िै भूजम

पर िक पूरा िो िाएगा और कोई न्यायालय बेकब्िा िोना,

कब्िे का अभाि या कब्िे के भौजतक पटरिान के आधार पर िक

पर प्रश् न निीं उठाएगी ।

(6) अंतटरत आिेि टरि िोने की जस्ट्थजत में, समापक

सोसाइिी की संपजत्त, चीििस्ट्तु, अनुयोज्य िािे, पुस्ट्तकों,

अजभलेख और अन्य िस्ट्तािेिों को उन अजधकाटरयों को सौंप

िेगा, जिन्िोंने उसको और दकए गए कायों को पटरित्त दकया था

और समापक द्वारा की गई कारषिाई, सोसाइिी पर बाध्यकारी

िोगी और ऐसी कायषिाजियां, धारा 107 के अधीन अंतटरम

आिेि के टरि िोने के पश् चात , सोसाइिी के अजधकाटरयों द्वारा

िारी रखी िाएगी ।

109. पटरसमापन के आिेि के जिरुद् अपील—(1)

सजमजत या सोसाइिी का कोई सिस्ट्य पटरसमापन करने का

आिेि दिया गया िै, अपील धारा 107 के अधीन दकए गए

आिेि की सोसाइिी को संसूचना की तारीख से िो मास के

भीतर, यदि आिेि रजिस्ट्रार अपर रजिस्ट्रार या संयुि

रजिस्ट्रार द्वारा दिया िाता िै तो प्रिासक को या यदि आिेि

दकसी अन्य व्यजि द्वारा जिसको रजिस्ट्रार की िजियां प्रिान

की िाती िै तो रजिस्ट्रार को, कर सकेगी :

परंतु धारा 107 की उपधारा (1) के खंड (ग) उपखंड (i)

या उपखंड (ii) या उपखंड (iii) के अधीन िारी दकए गए दकसी

आिेि के जिरुद् कोई अपील निीं की िाएगी :

परंतु यि और दक अपील पर रजिस्ट्रार द्वारा पाटरत दकए

गए आिेि के जिरुद् कोई अपील निीं की िाएगी ।

(2) इस धारा के अधीन कोई अपील सिस्ट्य से ग्रिण निीं

की िाएगी िब तक यि अपील की सुनिाई के खचों के जलए

दकसी प्रजतभूजत के रुप में ऐसी राजि द्वारा, िो जिजित की िाए

संलग् न निीं की िाती िै ।

110. समापक की िजियां—धारा 108 के अधीन

जनयुि समापक को, जनयमों और रजिस्ट्रार के साधारण

पयषिेक्षण जनयंत्रण, और जनिेि के अध्यधीन, िजियां िोगीं,-

(क) सोसाइिी की ओर, जसजिल या आपराजधक, िािों

और अन्य कायषिाजियों को अपने पिनाम से संजस्ट्थत करना और

उनकी प्रजतरक्षा करना;

(ख) सोसाइिी का उतना कारबार करना, जितना उसके

फायिाप्रि पटरसमापन के जलए आिश्यक िो ;

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

39

(ग) दकसी व्यजि या जनगजमत जनकाय को संपूणष या

उसका भाग अंतरण करने की िजि के साथ लोक नीलामी या

प्राइिेि संजििा द्वारा सोसाइिी की अमूतष और मूतष संपजत्त और

अनुयोज्य िािों का जिक्रय करना या पासषल में उसी प्रकार से

जिक्रय करना ;

(घ) सोसाइिी की आजस्ट्तयों की प्रजतभूजत पर, कोई धन

अपेजक्षत िो, ऊंचा करना;

(ड.) सोसाइिी के जिरुद् िािों का अन्िेषण करना और

इस जिजनयम के उपबंधों के अध्यधीन रिते हुए, ऐसे िािों में

उठने िाले पूर्िषकता के प्रश् नों का जिजनश् चय करना और ऐसे

ऋण की रकम के अनुसार पूणष रुप से या अनुपाततः में लेनिार

के दकसी िगष या लेनिारों को संिाय करना, अजधिेष को

रजिस्ट्रार द्वारा अनुमोदित िर पर पटरसमापन की तारीख से,

ककंतु िो संजििा िर से अजधक न िो, ब्याि के संिाय में

उपयोजित करना;

(च) लेनिारों या लेनिार िोने का िािा करने िाले

व्यजियों या कोई ऐसा िािा, उस समय या भजिष्य में जिसके

द्वारा सोसाइिी िायी िो सकती िै, उनको रखने िाले या रखने

का अजभकथन करने िाले व्यजियों के साथ कोई समझौता या

ठिराि करना ;

(छ) सभी मांगों या मांगो और ऋणों के प्रजत िाजयत्िों

और ऋणों के पटरणामस्ट्िरूप उत्पन्न िोने िाले िाजयत्िों तथा

ितषमान या भजिष्य के जनजश् चत या आकजस्ट्मक सभी िािों से,

िो सोसाइिी और दकसी अजभिायी या अजभकजथत अजभिायी

या अन्य ऋणी या सोसाइिी के प्रजत िाजयत्ि की आिंका करने

िाले व्यजि के बीच जिद्यमान िै या जिनका जिद्यमान िोना

अनुजमत िै, और सोसाइिी की आजस्ट्तयों या उसके पटरमापन से

दकसी प्रकार संबंजधत या उस पर प्रभाि डालने िाले सभी प्रश् नों

से ऐसे जनबंधनों पर, िो तय दकए िाएं, समझौता करना और

दकसी ऐसी मांग, िाजयत्ि, ऋण या िािे के उन्मोचन के जलए

कोई प्रजतभूजत लेना और उसका पूणष रूप से उन्मोचन करना ;

(ि) िािे का उत्तर िेने के जलए अिसर िेने के पश् चात ,

समय-समय पर, सिस्ट्यों या भूतपूिष सिस्ट्यों द्वारा या मृत

सिस्ट्यों की संपिाओं या नामजनिेजिजतयों, िाटरसों या जिजधक

प्रजतजनजधयों द्वारा या दकन्िीं अजधकाटरयों या भूतपूिष

अजधकाटरयों

या

मृत

अजधकाटरयों

की

संपिाओं

या

नामजनिेजिजतयों, िाटरस या जिजधक प्रजतजनजधयों द्वारा

सोसाइिी की आजस्ट्तयों में दकए िाने िाले या दकए िाने के

जलए िेष अजभिाय का अिधारण करना, ऐसा अजभिाय ऐसे

सिस्ट्यों या अजधकाटरयों से िेय ऋणों को सजम्मजलत करके िोना

चाजिए ;

(झ) धारा 103 के अधीन आिेिन करना;

(ञ)

स्ट्ियं

से

या

उनके

नामजनिेजिती

या

नामजनिेजिजतयों के बोडष द्वारा जिजनश् चय के जलए रजिस्ट्रार को

जििाि जनर्िष्ट करना ;

(ि) यि अिधारण करना दक समापन के खचों को दकन

व्यजियों द्वारा और दकन अनुपातों में ििन दकया िाएगा;

(ठ) िि समय या समयों को जनयत करना जिसके भीतर

लेनिार, ि ऋण या िािे िो पिले साजबत दकए गए िै अपने

ऋण और िािों को दकसी जितरण के फायिों को सजम्मजलत

करते हुए साजबत करेगा ;

(ि) साजक्षयों की उपजस्ट्थजत के जलए समन और िाजिर

कराना और जसजिल प्रदक्रया संजिता, 1908 (1908 का 5) के

अधीन जसजिल न्यायालय के िाि में यथाउपबंजधत उसी अथष

और उसी रीजत द्वारा सोसाइिी से संबंजधत या उसकी अजभरक्षा

में रखी गई दकसी पुस्ट्तकों, लेखाओं, िस्ट्तािेिों नगि या अन्य

संपजत्त को प्रस्ट्तुत करने के जलए बाध्य करना ;

(ढ) सभी कृत्य करना और सोसाइिी के नाम पर और

उसकी ओर से सभी जिलेखों रसीिों और अन्य िस्ट्तािेि िो ऐसे

पटरसमापन के जलए आिश्यक िों, का जनष्पािन करना;

(ण) ऐसी कारषिाई करना िो धारा 20 के अधीन

आिश्यक िो, रजिस्ट्रार के पूिष अनुमोिन से, यदि उसके पास

यि जिश्वास करने का कारण िै दक सोसाइिी पुनर्नषजमत िो

सकती िै ।

111. पटरसमापन के आिेि का प्रभाि—(1) धारा

107 की उपधारा (3) के अधीन दकए गए आिेि के जिरुद्

धारा 109 के अधीन की गई अपील के जलए अिजध समाजप्त के

पश् चात या ििां अपील खाटरि की गई िै, पटरसमापन के जलए

आिेि प्रभािी िोगा और सभी लेनिारों और सभी अजभिाताओं

के पक्ष में िो यदि यि लेनिारों और अजभिाताओं की संयुि

याजचका पर दकया गया िै प्रिर्तषत िोगा ।

(2) िब पटरसमापन का आिेि प्रभािी िोता िै, समापक

जिक्रय या अन्य द्वारा, सोसाइिी की आजस्ट्तयों की िसूली के

जलए कायषिािी करेगा और कोई जििाि प्रारंभ निीं दकया

िाएगा या यदि आिेि पटरसमापन की तारीख पर लंजबत िै,

रजिस्ट्रार की अनुमजत के जसिाय, सोसाइिी के जिरुद्

कायषिाजियां िोगी और ऐसे जनबंधनों के अध्यधीन रिते हुए िो

रजिस्ट्रार अजधरोजपत कर सकेगा और रजिस्ट्रार तथाजप,

स्ट्िप्रेरणा से, सोसाइिी द्वारा या जिरुद् दकसी जििाि को ग्रिण

या जनपिान कर सकेगा ।

112. पटरसमापन और मामलों के जिघिन िाि का

ििषन—इस जिजनयम में अजभव्यि रूप से उपबंजधत के जसिाय,

कोई जसजिल न्यायालय इस जिजनयम के अधीन सोसाइिी के

पटरसमापन और जिघिन से संबंजधत दकसी मामले का संज्ञान

निीं लेगा और िब पटरसमापन आिेि दकया गया िै कोई िाि

40

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

या अन्य जिजधक कायषिाजियां, रजिस्ट्रार की अनुमजत के

जसिाय, और ऐसे जनबंधनों पर िो िि अजधरोजपत करे,

सोसाइिी या समापक के जिरुद् निीं की िाएगी या न

कायषिािी िोगी ।

परंतु ििां पटरसमापन आिेि रद्द दकया िाता िै, इस

धारा के उपबंध ििां तक सोसाइिी और उसके सिस्ट्यों िो िाि

चलाने के िाजयत्ि से संबंजधत िै, का प्रितषन समाप्त िो िाएगा,

ककंतु िे उस व्यजि पर लागू िोते रिेंगे िो समापक के रुप में

कृत्य करते िैं ।

113. समापकों के लेखाओं की संपरीक्षा—(1) समापक,

अपने कायषकाल के िौरान, ऐसे समयों पर, िो जिजित दकया

िाए, ककंतु प्रत्येक िषष, में िो बार से कम निीं, रजिस्ट्रार को,

समापन उसकी रसीि और संिाय के रुप में जिजित प्ररुप में

लेखा प्रस्ट्तुत करेगा और रजिस्ट्रार लेखाओं की संपरीक्षा ऐसी

रीजत में िो िि ठीक समझे करिाएगा और संपरीक्षा के प्रयोिन

के जलए समापक, रजिस्ट्रार की ऐसे िाउचर और सूचना िेगा

िो िि या उनके द्वारा जनयुि व्यजि अपेक्षा करे ।

(2) समापक संपरीजक्षत लेखाओं का सारांि तैयार

करिाएगा, और प्रत्येक अजभिाता को ऐसे सारांि की प्रजत

भेिेगा ।

(3) समापक, ऐसी फीस िो रजिस्ट्रार जिजित रीजत में

उसके द्वारा रखी गई पुस्ट्तकों के लेखाओं की संपरीक्षा के जलए

जनिेि करे, का संिाय करेगा ।

(4) समापक दकसी अजनयजमतता के जलए िायी िोगा िो

सोसाइिी के मामलों का प्रभाि उनके द्वारा लेने के पश् चात

संव्यििार के बाबत संपरीक्षा के अनुक्रम में या पटरणामस्ट्िरुप

पाई िाती िै, उसके जिरुद् कायषिािी की िा सकेगी िो यदि

िि धारा 93 के अधीन की िा सकने िाली कारषिाई के जिरुद्

कृत्य था :

परंतु कोई ऐसी कारषिाई निीं की िाएगी िब तक

अजनयजमतताओं से सोसाइिी की िाजन काटरत हुई िो या

काटरत िोने की संभािना िो, और कतषव्यों और कृत्यों को

कायाषजन्ित करने में समापक द्वारा सकल नुकसानी और लोप के

कारण िेय उपगत हुए िो ।

114. समापन कायषिाजियों का पयषिसान—(1) दकसी

सोसाइिी का समापन कायषिाजियों के समापन के आिेि की

तारीख से पांच िषष के भीतर बंि दकया िाएगा, िब तक

अिजध रजिस्ट्रार द्वारा जिस्ट्ताटरत निीं की िाती िै :

परंतु रजिस्ट्रार एक समय में एक िषष और कुल जमलाकर

पांच िषष से अजधक अिजध के जलए कोई जिस्ट्तारण अनुित्त निीं

दकया िाएगा और सोसाइिी के समापन के जलए आिेि की

तारीख से िस िषष की समाजप्त के पश्चात तत्काल यि समझा

िाएगा दक समापन कायषिािी पयषिजसत कर िी गई िै और

समापक कायषिाजियों के पयाषिसान करने के जलए आिेि पाटरत

करेगा ।

स्ट्पष्टीकरण – इस उपधारा के प्रयोिनों के जलए, यि

स्ट्पष्ट दकया िाता िै दक ऐसी सोसाइिी के मामले में िो इस

जिजनयम के प्रारंभ की तारीख पर समापन के अधीन िै,

सोसाइिी के पटरसमापन के आिेि को उि तारीख पर पाटरत

दकए गए इस धारा के प्रयोिन के जलए समझा िाएगा ।

(2) उपधारा (1) में अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए भी,

रजिस्ट्रार समापक से अंजतम टरपोिष की प्राजप्त पर समापन

कायषिाजियों का पयषिसान करेगा और समापक की अंजतम

टरपोिष कजथत करेगी दक सोसाइिी की समापन कायषिाजियां बंि

कर िी गई िैं और यि भी कजथत करेगा दक पटरसमापन कैसे

संचाजलत दकया गया िै और सोसाइिी की संपजत्त का और िािों

का जनपिान कर दिया गया िै, और समापन की लागत सजित,

रकम यदि कोई िो पटरसमापन के लेखा के सारांि दिखाने

िाला एक जििरण सजम्मजलत िोगा, सिस्ट्यों के िेयर या ब्याि

सजित अपने िाजयत्िों का संिाय करने के पश्चात सोसाइिी के

नाम िमा करेगा और सुझाि िेगा दक कैसे अजधिेष उपयोजित

दकया िाना चाजिए ।

(3) रजिस्ट्रार समापक से अंजतम टरपोिष की प्राजप्त पर,

टरपोिष को अजभजलजखत करने के जलए रजिस्ट्रार के सिस्ट्यों की

साधारण बैठक का संयोिन करने के जलए समापक को जनिेि

िेगा ।

115. अजधिेष आजस्ट्तयों का जनपिान—सोसाइिी के

समापक की अंजतम टरपोिष में ििाषयी गई कोई अजधिेष आजस्ट्त

जिसका पटरसमापन दकया गया िै, अपने सिस्ट्यों में से

जिभाजित निीं की िाएगी, ककंतु सोसाइिी की उपजिजधयों में

जिजित दकसी उद्देश्य या उद्देश्यों के जलए समर्पषत िोंगे, यदि िे

जिजनर्िष्ट करें दक ऐसा कोई अजधिेष जिजिष्ट प्रयोिन के जलए

उपयोजित दकया िाएगा और ििां सोसाइिी की, कोई ऐसी

उपजिजधयां निीं िैं, अजधिेष रजिस्ट्रार में जनजित िोगा, िो

जिसे न्यास में रखेगा और इसे नई रजिस्ट्रीकृत सोसाइिी की

आरजक्षत जनजध को अंतटरत करेगा, उसी उद्देश्य से और अजधक

और कम क्षेत्र में तामील करना जिस सोसाइिी को अजधिेष की

तामील की गई थी :

परंतु, ििां कोई ऐसी सोसाइिी जिद्यमान या सोसाइिी

के रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण के तीन िषष के भीतर रजिस्ट्रीकृत

निीं िै ििां अजधिेष रजिस्ट्रार में जनजित िै, रजिस्ट्रार अजधिेष

ऐसी रीजत में िो िि सिोत्तम समझे जनम्नजलजखत में या सभी में

जितटरत कर सकेगा, अथाषत

(क) िो धारा 114 के अधीन आयोजित साधारण बैठक

में सिस्ट्यों द्वारा जसफाटरि की िाए या ििां सोसाइिी के कृत्य

को समाप्त कर दिया िै इसके अजभलेख उपलब्ध निीं िै या

इसका कोई सिस्ट्य निीं आ रिा िै िो रजिस्ट्रार उजचत समझे

लोक उपयोजगता और स्ट्थानीय जित के उद्देश्य में;

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

41

(ख) पटरसंघीय सोसाइिी को उसी उद्देश्य से जिसको रद्द

की गई सोसाइिी की संबंद् करने के जलए पात्र थी ;और

(ग) पूतष जिन्यास अजधजनयम, 1890 (1890 का 6) या

तत्समय प्रिृत्त दकसी अन्य जिजध के अधीन दकसी पूतष प्रयोिन में

िै ।

अध्याय 11

बीमाकृत सिकारी बैंक

116. बीमाकृत सिकारी बैंक की सजमजत आदि के

पटरसमापन, पुनर्नषमाण, अजधक्रमण के जलए आिेि, टरििष बैंक

की मंिूरी या अध्यपेक्षा के जबना निीं दकया िाता िै— इस

जिजनयम में अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए भी, बीमाकृत

सिकारी बैंक की ििा में.—

(क) बैंक के समझौता या ठिराि या समामेलन या

पुनर्नषमाण (प्रभाग और पुनगषठन सजित) की स्ट्कीम के

पटरसमापन के आिेि और मंिूरी करने का आिेि केिल टरििष

बैंक की जलजखत रुप में पूिष मंिूरी से दकया िा सकेगा ;

(ख) बैंक के पटरसमापन का आिेि. रजिस्ट्रार ििारा

यदि अपेजक्षत िो जनक्षेप बीमा और प्रत्यय गांरिी जनगम

अजधजनयम 1961 (1961 का 47) की धारा 13 घ में जनर्िष्ट

पटरजस्ट्थजतयों में टरििष बैंक या तत्समय प्रिृत्त दकसी अन्य जिजध

द्वारा दकया िा सकेगा;

(ग) रजिस्ट्रार सिकारी बैंक के अजधक्रमण और

पटरसमापन सजित टरििष बैंक द्वारा दिया गया जिजनयामक

जचरभोग का कायाषन्ियन सुजनजश् चत करेगा और जििेष

अजधकारी या समापक को िो टरििष बैंक द्वारा ऐसी सलाि दिए

िाने के एक मास की अिजध के भीतर जनयुि करेगा ।

(घ) यदि टरििष बैंक द्वारा लोक जित में या बैंक के

कायषकलापों के िमाकताषओं के जित में प्रजतकूल रीजत में

संचाजलत करने का जनिारण करने के जलए या बैंक के समुजचत

प्रबंधन के जलए अपेजक्षत िो तो रजिस्ट् रार द्वारा सजमजत को

अजधक्रांत करने के जलए और उसके स्ट् थान पर कुल जमलाकर

पांच िषष से अनजधक अिजध या अिजधयों के जलए, िो टरििष

बैंक द्वारा समय-समय पर जिजनर्िष् ि की िाएं, एक जििेष

अजधकारी की जनयुजि करने के जलए आिेि दकया िाएगा और

इस प्रकार जनयुक् त अजधकारी अपनी पिािजध के अिसान पर

ऐसे बैंक की नई सजमजत की पिली बैठक की तुरंत पूिषिती

तारीख के दिन तक अपने पि पर बना रिेगा ;

(ड.) बैंक के पटरसमापन के जलए आिेि या समझौता या

ठिराि या समामेलन या पुनर्नषमाण (प्रभाग या पुनगषठन

सजित) की स्ट्कीम का मंिूरी आिेि या बैंक की सजमजत के

अजधक्रमण और जलजखत रुप में पूिष मंिूरी से की गई उसके

स्ट्थान में जििेष अजधकारी की जनयुजि के जलए आिेि या टरििष

बैंक की अध्यपेक्षा पर अंजतम िोगा और दकसी न्यायालय में

दकसी रीजत में प्रश् नगत निीं दकया िाएगा ; और

(च) यथाजस्ट्थजत, समापक या ऐसा बैंक या अंजतरती बैंक

जनक्षेप बीमा और प्रत्यय गांरिी जनगम अजधजनयम, 1961

(1961 का 4 ) के अधीन स्ट्थाजपत जनक्षेप बीमा जनगम को या

इस अजधजनयम की धारा 21 में जनर्िष्ट पटरजस्ट्थजतयों में,

पटरमाण तक और ऐसी रीजत में तत्समय प्रिृत्त दकसी अन्य

जिजध के अधीन संिाय करने के जलए बाध्यता के अधीन िोगा ;

स्ट्पष्टीकरण – इस धारा के प्रयोिनों के जलए, पि—

(क) “बीमाकृत सिकारी बैंक” से सोसाइिी अजभप्रेत िै

िो जनक्षेप बीमा और प्रत्यय गांरिी जनगम अजधजनयम, 1961

(1961 का 47) या तत्समय प्रिृत्त दकसी अन्य जिजधक के

उपबंधों के अधीन बीमाकृत बैंक िै ;

(ख) “अंतटरती बैंक” से कोई बीमाकृत सिकारी बैंक के

संबंध में सिकारी बैंक अजभप्रेत िै ;

(i) िो ऐसे बीमाकृत बैंक से समामेजलत िै;

(ii) जिसको ऐसा बीमाकृत सिकारी बैंक की आजस्ट्तयां

और िाजयत्ि अंतटरत दकए गए िै ;या

(iii) जिसमें ऐसा बीमाकृत सिकारी बैंक धारा 17 की

उपधारा (1) के अधीन जिभाजित या संपटरिर्तषत दकया िाता

िै ।

117. 1949 का अजधजनयम संखयांक 10 के उपबंधों और

इसके अध्यारोिी प्रभाि का लागू िोना—(1) बैंककारी का

कारबार, करने िाली सिकारी सजमजत की ििा में समय समय

पर यथासंिोजधत बैंककारी जिजनयम अजधजनयम, 1949

(1949 का 10) के उपबंध बैंककारी दक्रयाकलापों के संबंध में

भी लागू िोंगे ।

(2) इस जिजनयम के उपबंध और बैंककारी जिजनयम

अजधजनयम 1949 (1949 का 10) के बीच दकसी जिरोध की

ििा में, समय समय पर टरििष बैंक द्वारा ति धीन िारी दकए गए

जनयम जिजनयम, जनिेि या अनुिेि के साथ पश् चात्कजथत उपबंध

लागू िोंगे ।

118. सिकारी बैंक की सजमजत द्वारा कजतपय मामलों

को सुजनजश् चत करना—सिकारी बैंक की सजमजत सुजनजश् चत

करेगी दक:—

(क) प्रत्येक सजमजत सिस्ट्य, कुिुंब के सिस्ट्यों और

कंपजनयों जिससे िि दकसी रीजत में, सियुि िै, द्वारा बैंक से

उधार लेने के संबंध में ऐसे प्ररुप में िो जिजित की िाए

रजिस्ट्रार को प्रत्येक मास सूचना िी िाती िै ;

(ख) बैंक िो जनक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंिी जनगम

अजधजनयम 1961 (1961 का 47) या तत्समय प्रिृत्त दकसी

अन्य जिजध के अधीन बीमाकृत बैंक के रुप में रजिस्ट्रीकृत िै ;

42

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(ग) बैंक के कायषकरण में त्रुटियों को सुधारा िाता िै और

बैंक की संपरीक्षा के अनुक्रम में जित्तीय अजनयजमताएं प्रकटित

की िाती िै या अन्यता िूर दकया िाता िै ;

(घ) बैंक द्वारा दिए गए उधार की िसूली के जलए उस

तारीख से एक िषष के भीतर कारषिाई की िाती िै िब उसका

पुनषसंिाय िेय िो गया िो ;

(ड.) बैंक को कोई जित्तीय िाजन निीं हुई िै और बैंक को

िेय कोई ऋण िो िेय िोने की तारीख से एक िषष की अिजध के

भीतर िसूल निीं दकया िाता िै, उसे िसूल दकया िाएगा ;

(च) व्यजि के जिरुद् जसजिल और िांजडक कायषिाजियां

िो, सजमजत की राय में, बैंक की दकसी जनजध का िुर्िषजनयोग

करती िै, आरंभ की िाती िै ;

(छ) बैंककारी जिजनयम अजधजनयम 1949 (1949 का

10) की धारा 18 और 24 के उपबंध सिकारी सोसाइटियों पर

यथा लागू िोते िै और इस जिजनयम की धारा 63 का अनुपालन

दकया िाता िै और यदि उसकी राय में उि उपबंधों में से दकसी

का उल्लंघन दकया िाता िै, ऐसा उल्लंघन की रजिस्ट्रार को

तत्काल सूचना िी िाती िै ।

119. सरकारी सोसाइिी िब्ि के उपयोग का प्रजतषेध—

(1) कोई व्यजि, इस जिजनयम के अधीन रजिस्ट्रीकृत सोसाइिी

से जभन् न, या रजिस्ट्रीकृत निीं समझा िाएगा और दकसी व्यजि

या उसके जित उत्तरिती दकसी ऐसे नाम या संजक्षप्त नाम के,

जिससे उसने उस तारीख को, जिसको यि जिजनयम प्रिृत्त िोता

िै, व्यापार या कारबार दकया था, प्रिासक की मंिूरी के जबना

दकसी ऐसे नाम या संजक्षप्त नाम से जिसका प्ररुप भाग

“सिकारी” िब्ि िै या दकसी भारतीय भाषा में जिसके समतुल्य

िै, कायष व्यापार निीं करेगा या न िी कोई कारबार करेगा ।

(2) प्रत्येक व्यजि पूिषगामी उपधारा के उपबंधों का

उल्लंघन करने के जलए, िोषजसजद् पर, िुमाषने से िो पच् चीस

ििार रुपए तक का िो सकेगा, िंडनीय िोगा ।

120. अपराध—(1) यि इस जिजनयम के अधीन अपराध

िोगा, यदि—

(क) कोई व्यजि धारा 26 में जनर्िष्ट घोषणा करता िै िो

िि िानता या उसके पास जिश्वास करने का कारण िै दक िि

जमथ्या िै ;

(ख) यदि धारा 37 की उपधारा (3) के अधीन कोई

अजधकारी या प्राजधकृत अजधकारी उि धारा में यथाउपबंजथत

कृत्यों के जनिषिन में असफल रिता िै;

(ग) दकसी सोसाइिी का कोई सिस्ट्य धारा 51 की

उपधारा (2) के उल्लंघन में दकसी संपजत्त या संपजत्त में जित को

अंतटरत करता िै या कोई व्यजि िानबूझकर ऐसी संपजत्त

अर्िषत करता िै या अर्िषत करने का िुष्प्रेऱण करता िै;

(घ) कोई जनयोक् ता या कोई जनिेिक, प्रबंधक, सजचि

या अन् य अजधकारी या अजभकताष जबना पयाषप् त कारण के ऐसे

जनयोक् ता की ओर से कायष करने में धारा 53 की उपधारा (2)

का पालन करने में असफल रिता िै ;

(ड.) सोसाइिी की सजमजत या उसका कोई अजधकारी या

सिस्ट्य धारा 62 द्वारा अपेजक्षत रीजत में ऐसी सोसाइिी की

जनजधयां न्यस्ट्त करने में असफल रिता िै ;

(च) कोई व्यजि दकसी सोसाइिी या सूचना के जलए

िेयर धन एकत्र करते हुए युजियुि अिजध के भीतर राज्य

सिकारी बैंक या केन्द्रीय सिकारी बैंक या दकसी राष्ट्रीयकृत बैंक

या डाकपत्र बचत बैंक में िमा निीं करता िै ;

(छ) कोई व्यजि दकसी सोसाइिी या सूचना के जलए

िेयर धन एकत्र करता िै दकसी सोसाइिी के नाम पर जिसे

रजिस्ट्रीकृत या अन्यथा िोना चाजिए, कोई कारबार या व्यापार

या कारबार करने के जलए इस प्रकार िुिाई गई जनजधयों का

उपयोग करता िै;

(ि) कोई व्यजि प्रबंधन सजमजत या पिाजधकारी के

सिस्ट्यों के जनिाषचन के पिले, िौरान या पश् चात भ्रष्ट आचरण

अपनाता िै;

(झ) सेिाजनिृत्त अध्यक्ष जिनको जनिेिन धारा 72 के

उपधारा (2) के अधीन िारी दकया गया िै ऐसे जनिेिन के

अनुपालन में असफल रिता िै ;

(ञ) सोसाइिी की सजमजत या सिस्ट्य िो धारा 73 के

उपबंधों का अनुपालन करने में असफल रिता िै;

(ि) सोसाइिी की सजमजत या उसका अजधकारी या

सिस्ट्य िो धारा 75 की उपधारा (2), उपधारा (3) या उपधारा

(4) के उपबंधों का अनुपालन करने में असफल रिता िै;

(ठ) सोसाइिी का कोई अजधकारी या सिस्ट्य िो सूचना,

पुस्ट्तकों और अजभलेख के कब्िे में िै ऐसी सूचना िेने या पुस्ट्तक

और कागिपत्र प्रस्ट्तुत करने या धारा 22, धारा 66, धारा 78,

धारा 81, धारा 84, धारा 86, धारा 87, धारा 88, धारा 99

या धारा 108 के अधीन संघ राज्यक्षेत्र के प्रिासकों या

रजिस्ट्रार द्वारा जनयुि या प्राजधकृत व्यजि को सिायता िेने में

असफल रिता िै ;

(़ि) सोसाइिी का कोई अजधकारी धारा 22, धारा 66,

धारा 78, धारा 81, या धारा 108 के अधीन जनयुि व्यजि को

जिसका िि अजधकारी िै उस सोसाइिी की पुस्ट्तकों, अजभलेखों,

नकि, प्रजतभूजत और अन्य संपजत्त की अजभरक्षा सौंपने में

असफल रिता िै ;

(ढ) सोसाइिी की सजमजत या उसका कोई अजधकारी या

सिस्ट्य धारा 81 के अधीन दकए गए आिेि का अनुपालन या

कोई सूचना िेने या कोई जििरणी या िस्ट्तािेि भेिने, कुछ भी

करने या करने की अनुज्ञा िेने के जलए दकसी युजियुि कारण के

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

43

जबना असफल रिता िै जिसे सजमजत, अजधकारी या सिस्ट्य को

इस जिजनयम द्वारा िेना, भेिना, करना या करने का अनुज्ञा

िेना अपेजक्षत िै ;

(ण) सोसाइिी की सजमजत या उसका कोई अजधकारी या

सिस्ट्य िानबूझकर उपेक्षा करता िै या दकसी कायष को करने से

इंकार करता िै या इन जिजनयम के प्रयोिनों के जलए रजिस्ट् रार

या इस जनजमत्त जलजखत रूप से उसके द्वारा सम्यक रूप से

प्राजधकृत अन्य व्यजि द्वारा अपेजक्षत कोई सूचना िेने से इंकार

करता िै ;

(त) सोसाइिी की सजमजत या उसका कोई अजधकारी या

सिस्ट्य िानबूझ कर जमथ् या जििरणी िेता िै या जमथ्या सूचना

िेता िै या उजचत लेखा रखनें में असफल रिता िै;

(थ) कोई व्यजि िानबूझकर या जबना दकसी युजियुि

कारण से इस जिजनयम के उपबंधों के अधीन िारी दकए गए

समन, अध्यपेक्षा या जिजधपूणष जलजखत आिेि की अिज्ञा करता

िै ;

(ि) कोई अजधकारी या सोसाइिी धारा 83 के अधीन

रजिस्ट्रार द्वारा दकए गए आिेि का अनुपालन करने में असफल

रिता िै ;

(ध) सोसाइिी का कोई अजधकारी, सिस्ट्य अजभकताष, या

सेिक धारा 84 की उपधारा (4) की अपेक्षाओं का अनुपालन

करने में असफल रिता िै;

(न) सोसाइिी का कोई अजधकारी या सिस्ट्य िानबूझकर

धारा 98 के अधीन पाटरत जिजनश् चय अजधजनणषय या आिेि का

अनुपालन करने में असफल रिता िै ;

(प) सोसाइिी का कोई सिस्ट्य उस संपजत्त का कपिपूिषक

जनपिान करता िै जिस पर सोसाइिी का पूिष िािा िै, या कोई

सिस्ट्य या अजधकारी या कमषचारी या कोई व्यजि अपनी संपजत्त

को जिक्रय, अंतरण, बंधक िान या अन्यथा कपिपूणष आश्य से

जनपिान करता िै सोसाइिी के िेय से बचने के जलए;

(फ) सोसाइिी का कोई सिस्ट्य िानबूझकर अपने

व्यजिगत उपयोग या फायिे के जलए या दकसी ऐसे व्यजि के

उपयोग या फायिे के जलए, जिसमें िि जितबद् िै, दकसी अन्य

व्यजि के नाम पर उधार की जसफाटरि या मंिूरी िेता िै;

(ि) दकसी सोसाइिी का कोई अजधकारी या सिस्ट्य दकसी

पुस्ट्तक, कागिपत्र या प्रजतभूजतयों को नष्ट, जिकृत या छे़िछा़ि

या अन्यथा पटरिर्तषत करता िै, जमथ्याकरण या जछपाने का

संसगी िै या जिनाि, जिकृजत, पटरितषन, जमथ्याकरण या

गुप्तीकरण बनाता िै या सोसाइिी से संबंजधत दकसी रजिस्ट्िर,

लेखा पुजस्ट्तका या अजभलेख में कोई जमथ्या या कपिपूणष प्रजिजष्ट

करने का संसगी िै;

(भ) यदि सिकारी बैंक की सजमजत धारा 118 के खंड

(क) से खंड (छ) के दकन्िीं उपबंधों का अनुपालन करने में

असफल रिती िै;

(म) यदि सजमजत धारा 118 के खंड (क) के अधीन

सूचना िो सिी िै सुजनजश्चत करने में असफल रिती िै;

(य) यदि सजमजत धारा 118 के खंड (छ) के अधीन

टरपोिष िो सिी िै सुजनजश् चत करने में असफल रिती िै

(2) ििां इस जिजनयम के अधीन कोई अजधकारी

सोसाइिी की सजमजत द्वारा प्रजतबद् दकया गया िै, प्रत्येक व्यजि

िो अपराध के समय पर प्रजतबद् था, ऐसी सजमजत का सिस्ट्य

था, अपराध का िोषजसद् समझा िाएगा और उसके जिरुद्

कायषिाजियों का िायी िोगा और तिनुसार िंजडत दकया

िाएगा;

परंतु इस उपधारा में अंतर्िष्ट न िोते हुए, कोई ऐसा

व्यजि इस जिजनयम में यथाउपबंजधत दकसी अपराध के जलए

िायी निीं दकया िाएगा, यदि िि साजबत करता िै दक अपराध

उसकी सूचना के जबना दकया गया िै या उसने ऐसे अपराध के

जनिारण के जलए सम्यक तत्परता बरती िै

121. धारा 118 और धारा 120 के अधीन अपराधों के

जलए िाजस्ट्त—(1) सोसाइिी का प्रत्येक कमषचारी या

अजधकारी, सिस्ट्य, अजभकताष या सेिक या कोई अन्य व्यजि िो

धारा 118 के अधीन अपराध करता िै, िोषजसजद् पर िंजडत

दकया िाएगा —

(क) यदि यि उस धारा के खंड (क) के अधीन अपराध िै

तो िुमाषना िो पचास ििार रुपए तक िो सकेगा ;

(ख) यदि यि उस धारा के खंड (ख) के अधीन अपराध िै

तो िि कारािास से जिसकी अिजध छि मास तक की िो सकेगी

या िुमाषने से िो एक लाख रुपए तक िो सकेगा या िोनों से;

(ग) यदि यि उस धारा के खंड (ग) के अधीन अपराध िै

तो िि कारािास से जिसकी अिजध छि िषष तक की िो सकेगी

या िुमाषने से िो एक लाख रुपए तक िो सकेगा या िोनों से;

(घ) यदि यि उस धारा के खंड (घ) के अधीन अपराध िै

तो िि कारािास से जिसकी अिजध छि मास तक की िो सकेगी

या िुमाषने से िो एक लाख रुपए तक िो सकेगा या िोनों से;

(ड.) यदि यि उस धारा के खंड (ड.) के अधीन अपराध

िै तो िि कारािास से जिसकी अिजध एक िषष तक की िो

सकेगी या िुमाषने से िो एक लाख रुपए तक िो सकेगा या

िोनों से;

(च) यदि यि उस धारा के खंड (च) के अधीन अपराध िै

तो िि कारािास से जिसकी अिजध िो िषष तक की िो सकेगी

या िुमाषने से िो एक लाख रुपए तक िो सकेगा या िोनों से;

44

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(छ) यदि यि उस धारा के खंड (छ) के अधीन अपराध िै

तो िि कारािास से जिसकी अिजध एक िषष तक की िो सकेगी

या िुमाषने से िो एक लाख रुपए तक िो सकेगा या िोनों से ;

(2) सोसाइिी का प्रत्येक सिस्ट्य या अजधकारी, सिस्ट्य,

अजभकताष या सेिक या कोई व्यजि िो धारा 120 के अधीन

कोई अपराध करता िै िोषजसद्ी पर, िंजडत दकया िाएगा

(क) यदि यि उस धारा के खंड (क) के अधीन अपराध िै

िो साधारण कारािास से िो छि मास तक की िो सकेगा या

िुमाषने से िो िस ििार रुपए तक िो सकेगा या िोनों से;

(ख) यदि यि उस धारा के खंड (ख) के अधीन अपराध िै

तो िुमाषने से िो पच् चीस ििार रुपए तक िो सकेगा ;

(ग) यदि यि उस धारा के खंड (ग) के अधीन अपराध िै

तो िि कारािास से जिसकी अिजध छि मास तक की िो सकेगी

या िुमाषने से िो पांच ििार रुपए तक िो सकेगा या िोनों से;

(घ) यदि यि उस धारा के खंड (घ) के अधीन अपराध िै

तो िि कारािास से जिसकी अिजध एक मास तक की िो सकेगी

या िुमाषने से िो पचास ििार रुपए तक िो सकेगा या िोनों

से;

(ड.) यदि यि उस धारा के खंड (घ) के अधीन अपराध िै

िुमाषने से िो पचास ििार रुपए तक िो सकेगा या िोनों से;

(च) यदि यि उस धारा के खंड (च) के अधीन अपराध िै

िुमाषने से िो पचास ििार रुपए तक िो सकेगा या िोनों से;

(छ) यदि यि उस धारा के खंड (छ) के अधीन अपराध िै

तो िि कारािास से जिसकी अिजध एक िषष तक की िो सकेगी

या िुमाषने से िो पचास ििार रुपए तक िो सकेगा या िोनों

से;

(ि) यदि यि उस धारा के खंड (ि) के अधीन अपराध िै

तो िि कारािास से जिसकी अिजध छि मास तक की िो सकेगी

या िुमाषने से िो िस ििार रुपए तक िो सकेगा या िोनों से;

(झ) यदि यि उस धारा के खंड (झ) के अधीन अपराध िै

तो िि कारािास से जिसकी अिजध एक मास तक की िो सकेगी

या िुमाषने से िो पच्चीस ििार रुपए तक िो सकेगा या िोनों

से;

(ञ) यदि यि उस धारा के खंड (ञ) के अधीन अपराध िै

तो िि कारािास से जिसकी अिजध छि मास तक की िो सकेगी

या िुमाषने से िो िस ििार रुपए तक िो सकेगा या िोनों से;

(ि) यदि यि उस धारा के खंड (ि) के अधीन अपराध िै

िुमाषने से िो पच् चीस ििार पांच सौ रुपए तक िो सकेगा ;

(ठ) यदि यि उस धारा के खंड (ठ) के अधीन अपराध िै

तो िि कारािास से जिसकी अिजध तीन मास तक की िो

सकेगी या िुमाषने से िो पच् चीस ििार रुपए तक िो सकेगा

या िोनों से;

(ड) यदि यि उस धारा के खंड (ड) के अधीन अपराध िै

िुमाषने से िो पच् चीस ििार रुपए तक िो सकेगा ;

(ढ) यदि यि उस धारा के खंड (ढ) के अधीन अपराध िै

िुमाषने से िो पच् चीस ििार रुपए तक िो सकेगा ;

(ण) यदि यि उस धारा के खंड (ण) के अधीन अपराध िै

िो कारािास से िो एक मास तक का िो सकेगा या िुमाषने से

िो पच् चीस ििार रुपए तक िो सकेगा या िोनों से;

(त) यदि यि उस धारा के खंड (त) के अधीन अपराध िै

िो कारािास से एक िषष तक की िो सकेगा या िुमाषने से िो

पचास ििार रुपए तक िो सकेगा या िोनों से;

(थ) यदि यि उस धारा के खंड (थ) के अधीन अपराध िै

िो कारािास से िो छि मास तक का िो सकेगा या िुमाषने से

िो िस ििार रुपए तक िो सकेगा या िोनों से;

(ि) यदि यि उस धारा के खंड (ि) के अधीन अपराध िै

िो कारािास से िो एक िषष तक का िो सकेगा या िुमाषने से

िो पच् चीस ििार रुपए तक िो सकेगा या िोनों से;

(ध) यदि यि उस धारा के खंड (ध) के अधीन अपराध िै

िुमाषने से िो पच् चीस ििार रुपए तक िो सकेगा ;

(न) यदि यि उस धारा के खंड (न) के अधीन अपराध िै

तो िि कारािास से जिसकी अिजध छि मास तक की िो सकेगी

या िुमाषने से िो पच् चीस ििार रुपए तक िो सकेगा या िोनों

से;

(प) यदि यि उस धारा के खंड (प) के अधीन अपराध िै

तो िि कारािास से जिसकी अिजध छि मास तक की िो सकेगी

या िुमाषने से िो पचास ििार रुपए तक िो सकेगा या िोनों

से;

(फ) यदि यि उस धारा के खंड (फ) के अधीन अपराध िै

तो िि कारािास से जिसकी अिजध िो िषष तक की िो सकेगी

या िुमाषने से िो पच् चीस ििार रुपए तक िो सकेगा या िोनों

से;

(ब) यदि यि उस धारा के खंड (ब) के अधीन अपराध िै

तो िि कारािास से जिसकी अिजध तीन िषष तक की िो सकेगी

या िुमाषने से िो िस ििार रुपए तक िो सकेगा या िोनों से;

(भ) यदि यि उस धारा के खंड (भ), खंड (म) और खंड

(य) के अधीन अपराध िै तो िि कारािास से जिसकी अिजध

तीन िषष तक की िो सकेगी या िुमाषने से िो िस ििार रुपए

तक िो सकेगा या िोनों से;

(3) धारा 120 के अधीन दकसी अपराध के जलए कोई

अजभयोिन उन तथ्यों जिन पर इस जिजनयम के दकसी उपबंधों

के अधीन रजिस्ट्रार द्वारा िाजस्ट्त अजधरोजपत की गई िै, के

संबंध में संस्ट्थाजपत निीं दकया िाएगा ।

122. अपराधों का संज्ञान—(1) दकसी प्रथम िगष

न्याजयक मजिस्ट्रेि के न्यायालय से नीचे का कोई न्यायालय इस

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

45

जिजनयम के अधीन दकसी िंडनीय अपराध का जिचारण निीं

करेगा ।

(2) िंड प्रदक्रया संजिता, 1973 (1974 का 2) में

अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए भी, प्रथम िगष न्याजयक

मजिस्ट्रेि के जलए इस संजिता की धारा 32 के अधीन उसकी

िजियों के प्रयोग में धारा 121 के अधीन यथाजिजित धारा

120 के अधीन अपराध के जलए िोषजसद् दकसी व्यजि को

िंडािेि या िुमाषना िेने के जलए जिजधपूणष िोगा ।

(3) इस जिजनयम के अधीन कोई अजभयोिन रजिस्ट् रार

की पूिष मंिूरी के जसिाय िाजखल निीं दकया िाएगा।

अध् याय 12

अपील, पुनर्िषलोकन और पुनरीक्षण

123. सिकारी अजधकरण का गठन—(1) प्रिासक इस

जिजनयम द्वारा या के अधीन अजधकरण को प्रित्त कायों का

प्रयोग करने के जलए सिकारी अजधकरण नामक एक अजधकरण

का गठन करेगा ।

(2) अजधकरण अध्यक्ष और अन्य सिस्ट्यों की ऐसी संस्ट्था

से िो चार से अनजधक िोगी गटठत की िाएगी ।

(3) अध्यक्ष और अन्य सिस्ट्यों की जनयुजि के जलए

अिषताएं, अनुभि, जनबंधन और ितें िे िोगीं िो जिजित की

िाएं ।

(4) प्रिासक उसके पि की अिजध की समाजप्त के पिले

अजधकरण के दकसी सिस्ट्य की जनयुजि का पयषिसान कर सकेगा

यदि ऐसा सिस्ट्य :—

(क) दििाजलया घोजषत दकया गया िै;

(ख) यदि पि की उसकी अिजध के िौरान अपने पि के

कतषव्यों के बािर दकसी संित्त जनयोिन भी संलग्न िोता िै िब

तक दक ऐसा जनयोिन प्रिासक द्वारा प्राजधकृत निीं दकया

िाता िै ;

(ग) संघ राज्य क्षेत्र प्रिासन द्वारा या उसकी जनजमत्त

दकसी संजििा या काम में दकसी प्रकार से संबंध या जितबद् िै

या िोता िै या दकसी सिस्ट्य के रूप में या अन्यथा उसके लाभ

उससे उद्भूत िोने िाले दकसी फायिे या उपलजब्धयों में भाग

लेता िै ;

(घ) सिस्ट्य के रुप में कायष करने में िारीटरक या

मानजसक रुप से अक्षम िो गया िै :

परंतु सिस्ट्य उसकी अजधकाटरता में ऐसी रीजत में िो

जिजित की िाए, संबंद् उच् च न्यायालय के न्यायाधीि द्वारा की

गई िांच के पश् चात प्रिासक द्वारा दकए गए आिेि के जसिाय

इस उपधारा के खंड (ख) या खंड (ग) के अधीन जिजनर्िष्ट

आधार पर उसके पि से निीं ििाया िा सकेगा ।

(ड.) नैजतक अधमता से िु़िे अपराध के जलए िोषजसद्

दकया गया िै ;

(5) अजधकरण की सिस्ट्यता में कोई टरजि प्रिासक द्वारा

भरी िाएगी ।

(6) अजधकरण की िजियां और कृत्य अध्यक्ष द्वारा स्ट्ियं

सजित अजधकरण के सिस्ट्यों में से गटठत पीठों द्वारा प्रयोग या

जनिषजित की िा सकेगी ।

(7) ऐसी पीठें िो या अजधक सिस्ट्यों से गटठत िोगी ।

(8) ििां मामले तीन सिस्ट्यों द्वारा सुना िाता िै बहुमत

की राय अजभभािी िोगी और जिजनश् चय बहुमत की राय के

अनुसार दकया िाएगा और ििां मामला सिस्ट्यों की सम संखया

द्वारा सुना िाता िै और सिस्ट्य बराबर जिभाजित िोते िै, यदि

अध्यक्ष सिस्ट्यों में से एक िै, अध्यक्ष की राय अजभभािी िोगी

और अन्य मामलों में मामला अध्यक्ष की सुनिाई के जलए

जनर्िष्ट दकया िाएगा और उसके जिजनश् चय के अनुसार

जिजनजश्चत दकया िाएगा :

पंरतु अंतिषती आिेिन एक या अजधक सिस्ट्यों द्वारा िो

उपजस्ट्थत िो सकेंगे सुना िा सकेगा ।

(9) प्रिासक की पूिष मंिूरी के अध्यधीन रिते हुए

अजधकरण, अपनी कायषिाजियां जिजनयजमत करने के जलए और

अपने कारबार के जनपिान के जलए इस जिजनयम या तद्ीन

बनाए गए जनयमों के उपबंधों से संगत ऐसे जिजनयमों की

जिरचना करेगा और िे रािपत्र में प्रकाजित की िाएगी ।

(10) अजधकरण दकसी कायषिािी पाटरत दकसी

जिजनश् चय या आिेि की िैधता या औजचत्य में स्ट्ियं को संतुष्ट

करने के प्रयोिन के जलए, जिसमें इसको अपील िोती िै, का

अजभलेख मांग सकेगा और परीक्षा कर सकेगा और यदि दकसी

मामले में, अजधकरण को प्रतीत िोता िै दक ऐसा कोई

जिजनश् चय या आिेि उपांतटरत, बाजतल या उलि िेना चाजिए,

अजधकरण ऐसा आिेि िो यि न्यायसंगत समझे पाटरत कर

सकेगा ।

(11) ििां धारा 102 के अधीन अजधकरण को अपील

की िाती िै, यि न्याय के उद्देश्यों को जिफलता से रोकने के

अनुक्रम में, अपील के लंजबत जिजनश् चय में, ऐसा अंतषिती आिेि

िो इसको न्यायसंगत और सुजिधापूणष प्रतीत िो या ऐसे आिेिों

िो न्याय के उद्देश्यों के जलए यि अजधकरण की कायषिािी का

िुरुपयोग रोकने के जलए आिश्यक िों, कर सकेगा ।

(12) अजधकरण द्वारा उपधारा (10) के अधीन अपील में

या पुनरीक्षण में या धारा 124 के अधीन पुनर्िषलोकन में पाटरत

दकया गया आिेि अंजतम और जनश् चायक िोगा और दकसी

जसजिल न्यायालय या रािस्ट्ि न्यायालय में प्रश्नगत निीं दकया

िाएगा ।

46

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(13) इस जिजनयम के अधीन अपील की सुनिाई करने

िाला अजधकरण जसजिल प्रदक्रया संजिता 1908 (1908 का 5)

की प्रथम अनुसूची में धारा 97 और आिेि 41 द्वारा में अपील

न्यायालय को प्रित्त सभी िजियों का प्रयोग करेगा ।

124. अजधकरण के आिेिों का पुनर्िषलोकन—(1)

अजधकरण, रजिस्ट्रार के आिेिन पर या दकसी जितबद् पक्षकार

के आिेिन पर दकसी भी मामले में अपने आिेि का पुनर्िषलोकन

कर सकेगा और उसके संिभष में ऐसा आिेि पाटरत कर सकेगा

िैसा िि ठीक समझे :

परंतु जितबद् पक्षकार द्वारा दकए गए ऐसे दकसी आिेिन

को तब तक ग्रिण निीं दकया िाएगा िब तक दक अजधकरण का

यि समाधान िो िाता िै दक नए और मित्िपूणष साक्ष्य का पता

चला िै, िो सम्यक सािधानी बरतने के पश् चात आिेिक की

िानकारी में निीं था या उसके द्वारा उस समय प्रस्ट्तुत निीं

दकया िा सका, िब आिेि दकया गया था या अजभलेख में कुछ

स्ट्पष्ट भूल या गलती िैं या कोई अन्य पयाषप्त कारण िै :

परंतु यि और दक ऐसे दकसी आिेि में पटरितषन या

संिोधन निीं दकया िाएगा िब तक दक जितबद् पक्षकारों को

उपजस्ट्थत िोने का और ऐसे आिेि के संबंध में सुने िाने का

अिसर प्रिान निीं कर दिया िाता िै ।

(2) दकसी पक्षकार द्वारा उपधारा (1) के अधीन

पुनर्िषलोकन के जलए आिेिन अजधकरण के आिेि की संसूचना

की तारीख से नब्बे दिन के भीतर दकया िाएगा ।

125. न्यायालय को जसजिल न्यायालय की िजि

िोना—(1)अजधकरण में उसे इस जिजनयम के अधीन प्रित्त

कृत्यों का जनिषिन करते समय जनम्नजलजखत के संबंध में जसजिल

न्यायालय की िजियां जनजित िोंगी –

(क) िपथपत्र द्वारा तथ्यों का सबूत ;

(ख) दकसी व्यजि को समन करना और उसकी उपजस्ट्थजत

प्रिृत्त करना तथा िपथ पर उसकी िांच करना ;

(ग) िस्ट्तािेि प्रस्ट्तुत करने के जलए बाध्य करना ;

(घ) साक्ष्यों की िांच करने के जलए कमीिन िारी

करना; या

(ङ) कोई अन्य जिषय, िो जिजित दकया िाए ।

(2) दकसी ऐसे िपथपत्र की ििा में अजधकरण द्वारा इस

जनजमत्त जनयुि दकया गया अजधकारी अजभसाक्षी को िपथ

दिला सकेगा ।

126. अपील—(1) धारा 4, धारा 9. धारा 11, धारा

13, धारा 17, धारा 20, धारा 22, धारा 40 और धारा 81

के अधीन दकसी आिेि या जिजनश् चय के जिरुद् अपील,-

(क) यदि रजिस्ट्रार या दकसी अपर रजिस्ट्रार या संयुि

रजिस्ट्रार द्वारा की िाती िै या स्ट्िीकृत की िाती िै या

अनुमोदित की िाती िै, जिसको रजिस्ट्रार की िजियांअनुित्त

की गई िै;

(ख) यदि दकसी रजिस्ट्रार या उप रजिस्ट्रार या सिायक

रजिस्ट्रार से जभन्न दकसी व्यजि द्वारा की िाए या स्ट्िीकृत की

िाए, जिसे रजिस्ट्रार द्वारा रजिस्ट्रार की िजियां प्रित्त की गई

िों, की िाएगी ।

(2) दकसी समापक के आिेि के जिरुद् धारा 110 के

अधीन अपील-

(क) प्रिासक को की िाएगी, यदि आिेि रजिस्ट्रार

की स्ट्िीकृजत या अनुमोिन द्वारा दकया गया था ;और

(ख) दकसी अन्य ििा में रजिस्ट्रार को ।

(3) धारा 81, धारा 90, धारा 93 के अधीन दकसी

आिेि या जिजनश् चय के जिरुद् अपील और सोसाइिी को

प्रजतकर का संिाय करने के जलए रजिस्ट्रार द्वारा पाटरत दकसी

अन्य आिेि तथा दकसी अन्य आिेि, जिसके जलए इस जिजनयम

के अधीन अजधकरण को अपील का उपबंध दकया गया िै,

अजधकरण को की िाएगी ।

(4) उपधारा (1), उपधारा (2) या उपधारा (3) के

अधीन अपील आिेि या जिजनश् चय की संसूचना की तारीख से

िो मास के भीतर फाइल की िाएगी ।

(5) इस धारा के अधीन या इस जिजनयम के अन्य

उपबंधों के अधीन दकसी अपीलों को प्रस्ट्तुत करने और उनका

जनपिान करने के जलए अनुसरण की िाने िाली प्रदक्रया िि

िोगी, िो जिजित की िाए ।

(6) इस जिजनयमन में अन्यथा उपबंजधत के जसिाय, इस

जिजनयम के अनुसार दकए गए दकसी आिेि, जिजनश् चय या

पाटरत अजधजनणषय के जिरुद् कोई अपील निीं की िाएगी और

ऐसा प्रत्येक आिेि, जिजनश् चय या अजधजनणषय अंजतम िोगा

और ििां दकसी अपील के जलए उपबंध दकया गया िै, अपील

पर पाटरत दकया गया कोई आिेि अंजतम िोगा और उसके

जिरुद् कोई अपील निीं की िाएगी ।

127. कजतपय मामलों में अपील प्राजधकारी की

पटरसीमा अिजध का जिस्ट्तार—सभी मामलों में, जिनमें

जिजनयम के अधीन यि उपबंध दकया गया िै दक दकसी

जिजनश् चय या आिेि के जिरुद् जिजनर्िष्ट अिजध के भीतर

अपील फाइल की िा सकेगी, अपील प्राजधकारी ऐसी अिजध के

अिसान के पश् चात दकसी अपील को स्ट्िीकार कर सकेगा, यदि

अपीलाथी अपील प्राजधकारी का यि समाधान कर िेता िै दक

ऐसी अिजध के भीतर अपील न करने का पयाषप्त कारण था ।

128. प्रिासक और रजिस्ट्रार की आिेि पाटरत करने के

जलए अधीनस्ट्थ अजधकाटरयों की कायषिाजियों की मांग करने की

िजि—प्रिासक और रजिस्ट्रार उनसे अधीनस्ट्थ दकसी

अजधकारी की दकसी अन्य मामले में दकसी िांच या कायषिाजियों

के अजभलेख की, जसिाय धारा 123 की उपधारा (10) में

जनर्िष्ट मामलों के, स्ट्ियं का दकसी जिजनश् चय या पाटरत आिेि

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

47

की िैधता और औजचत्य का और ऐसे अजधकारी की कायषिाजियों

की जनयजमतता के संबंध में दकसी मामले में समाधान करने के

जलए मांग सकेगा और दकसी मामले में प्रिासक या रजिस्ट्रार

को यि प्रतीत िोता िै दक इस प्रकार मांग दकए गए दकसी

जिजनश् चय या आिेि या कायषिाजियों को उपांतटरत, बाजतल या

उलि िेना चाजिए, तो, यथाजस्ट्थजत, प्रिासक या रजिस्ट्रार

उनसे प्रभाजित व्यजियों को सुने िाने का अिसर प्रिान करने

के पश् चात उन पर ऐसा आिेि पाटरत करेगा िो िि उजचत

समझे ।

अध्याय 13

प्रकीणष

129. प्रिासक की ई-जनजििा प्रदक्रया के जलए जनिेि िेने

की िजि—प्रिासक, साधारण या जििेष आिेि द्वारा, जिसे

रािपत्र में प्रकाजित दकया िाएगा, दकसी सोसाइिी या

सोसाइिी के दकसी िगष को ऐसी सोसाइिी या दकसी सोसाइिी

के िगष से संबंजधत ऐसे मामलों के संबंध में संजििा निीं िेने का

और ऐसी रकम के जलए ई-जनजििा प्रदक्रया का अनुसरण करने

का जनिेि िे सकेगा ।

130. संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन को िेय राजियों की

िसूली—(1)इस जिजनयम में अन्यथा उपबंजधत के जसिाय,

दकसी सोसाइिी या सोसाइिी के दकसी अजधकारी या सिस्ट्य या

भूतपूिष सिस्ट्य या मृत सिस्ट्य से संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन को िेय

सभी राजियों की िसूली भूरािस्ट्ि के बकाया के रूप में की

िाएगी ।

(2) सोसाइिी से संघ राज्यक्षेत्र प्रिासन को िेय राजियां

और उपधारा (1) के अधीन िसूलनीय की िसूली –

(i) सोसाइिी की संपजत्त ;

(ii) ऐसी सोसाइिी की ििा में जिसके सिस्ट्यों का

िाजयत्ि सीजमत िै, के सिस्ट्यों या भूतपूिष सिस्ट्यों या

उनकी संपिा से उनके िाजयत्ि की सीमा के अध्यधीन

रिते हुए, यदि उनकी मृत्यु िो गई िै; और

(iii)असीजमत िाजयत्ि िाली सोसाइटियों की ििा

में उनके सिस्ट्यों या भूतपूिष सिस्ट्यों या उनकी संपिा से

यदि उनकी मृत्यु िो गई िै ।

(3) इस धारा के अधीन िाजयत्ि सभी मामलों में धारा

38 के उपबंधों की ितष के अध्यधीन िोगा ।

131. दकसी सिस्ट्य की भूजम या उसमें जित को सोसाइिी

को अतंटरत करने की क्षमता—संपजत्त अंतरण अजधजनयम,

1882 (1882 का 4) और भारतीय रजिस्ट्रीकरण अजधजनयम,

1908 (1908 का 16) में अंतर्िष्ट दकसी बात के िोते हुए भी,

दकसी सिकारी कृषक सोसाइिी के दकसी सिस्ट्य के जलए उसके

द्वारा धाटरत दकसी भूजम या उसमें उसके संपूणष जित में उसके

संपूणष भाग या उसके दकसी भाग को दकसी करार द्वारा और

ऐसी रीजत में िो जिजित की िाए, सोसाइिी को अंतटरत करना

जिजधपूिषक िोगा।

132. रजिस्ट्रार की कजतपय राजियों को संपजत्त की कुकी

और जिक्रय द्वारा िसूल करने की िजि—(1)रजिस्ट्रार या इस

जनजमत्त उसके द्वारा सिि अजधकारी ऐसे जनयमों के अधीन

रिते हुए िो प्रिासक द्वारा बनाए िाए, ककंतु इस जिजनयम

द्वारा या उसके अधीन िसूली के दकसी अन्य ढंग पर प्रजतकूल

प्रभाि डाले जबना,-

(क) सोसाइिी द्वारा अजभप्राप्त जसजिल न्यायालय की

दकसी जडक्री या आिेि के अधीन िेय दकसी रकम ;

(ख) रजिस्ट्रार, उसके नामजनिेजिती या नामजनिेजिती के

बोडष या समापक या अजधकरण के दकसी जिजनश् चय, अजधजनणषय

या आिेि के अधीन िेय दकसी रकम ;

(ग) इस जिजनयम के अधीन लागत के माध्यम से प्रिान

की गई दकसी राजि ;या

(घ) इस जिजनयम के अधीन सोसाइिी की आजस्ट्तयों को

अजभिाय के रूप में संगत दकए िाने के जलए आिेि की गई

दकसी रकम,

को ब्याि सजित, यदि कोई िो, िो ऐसी रकम या राजि

पर िेय िो और उसकी िसूली के जलए कुकी और जिक्रय या

व्यजि की संपजत्त के जबना दकसी जिक्रय के कुकी, जिसके जिरुद्

ऐसी जडक्री, जिजनश् चय, अजधजनणषय या आिेि अजभप्राप्त दकया

गया िै या पाटरत दकया गया िै, िसूल कर सकेगा ।

(2) रजिस्ट्रार या उसके द्वारा सिि अजधकारी को, िब

िि उपधारा (1) के अधीन िजियों का प्रयोग कर रिा िो या

िब िि उसे िसूली के जलए दकए गए दकसी आिेिन पर कोई

आिेि पाटरत कर रिा िो, जसजिल प्रदक्रया संजिता, 1908

(1908 का 5) के प्रयोिनों के जलए जसजिल न्यायालय समझा

िाएगा ।

133. सोसाइटियों को जिजनयमों के उपबंधों से छूि

प्रिान करने की िजि.—प्रिासक, रािपत्र में प्रकाजित िोने

िाले, साधारण या जििेष आिेि द्वारा,ऐसे जलजखत कारणों से

िो अजभलजखत दकए िाएंगे, इस जिजनयम के उपबंध से दकसी

सोसाइिी या सोसाइटियों के िगष को इस जिजनयम के दकन्िीं

उपबंधों से छूि िे सकेगा या जनिेि िे सकेगा दक ऐसे उपबंध के,

ऐसी सोसाइटियों पर िो दक आिेि में जिर्नषर्िष्ट दकया िाए,

ऐसे उपांतरणों के साथ, िो उनके सार को प्रभाजित न करें,

लागू िोंगे :

परंतु कोई आिेि, ऐसी सोसाइिी को अपने मामले का

प्रजतजनजधत्ि करने का अिसर दिए जबना, सोसाइिी के पूिाषग्रि

के जलए पाटरत निीं दकया िाएगा ।

134. प्रिासक को और रजिस्ट्रार को िजियों का

प्रत्यायोिन—प्रिासक, रािपत्र में अजधसूचना द्वारा और ऐसी

48

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

ितों के अधीन रिते हुए, िो अजधरोजपत करना िि ठीक

समझे—

(क) जसिाय धारा 126 की उपधारा (1) और धारा 139

के अधीन िजि के इस जिजनयम के अधीन उसके द्वारा

प्रयोगतव्य दकसी िजि को रजिस्ट्रार को ; और

(ख) इस जिजनयम के अधीन रजिस्ट्रार की सभी या

दकन्िीं िजियों को गटठत दकसी सजमजत या दकसी सिकारी

पटरसंघीय सोसाइिी को जिसे धारा 95 के अधीन मान्यता

प्रिान की गई िै या ऐसी सोसाइिी के दकसी अजधकारी या

तत्समय प्रिृत्त पंचायतों से संबंजधत दकसी जिजध के अधीन

गटठत दकसी पंचायत को, प्रत्यायोजित कर सकेगा ।

135. संघ राज्यक्षेत्र से बािर सोसाइटियों की िाखाएं

आदि—(1) कोई सोसाइिी संघ राज्यक्षेत्र से बािर कोई िाखा

या कारबार का कोई स्ट्थान निीं खोलेगी और दकसी अन्य राज्य

में दकसी जिजध के अधीन रजिस्ट्रीकृत सिकारी सोसाइिी

रजिस्ट्रार की अनुज्ञा के जबना संघ राज्यक्षेत्र में कोई िाखा या

कारबार का स्ट्थान निीं खोलेगी ।

(2) दकसी अन्य राज्य में दकसी जिजध के अधीन

रजिस्ट्रीकृत और उपधारा (1) के अधीन संघ राज्यक्षेत्र में कोई

िाखा या कारबार का स्ट्थान खोलने के जलए अनुज्ञेय प्रत्येक

सिकारी सजमजत या जिसकी इन जिजनयमों के प्रारंभ से पूिष,

संघ राज्यक्षेत्र में कोई िाखा या कारबार का कोई स्ट्थान िै, इन

जिजनयमों के प्रारंभ िोने की तारीख से, यथाजस्ट्थजत, ऐसी िाखा

या कारबार का स्ट्थान खोलने के तीन मास के भीतर रजिस्ट्रार

के पास उपजिजधयों और संिोधनों की प्रमाजणत प्रजत फाइल

करेगी और यदि िि अंग्रेिी में निीं िो तो उनका अंग्रेिी या

जिन्िी में प्रमाजणत अनुिाि प्रस्ट्तुत करेगी और उस राज्य जिसमें

ऐसी सोसाइिी रजिस्ट्रीकृत िै,रजिस्ट्रार को प्रस्ट्तुत की िाने

िाली जििरजणयों और सूचना के अजतटरि रजिस्ट्रार को ऐसी

जििरजणयां और सूचना प्रस्ट्तुत करेगी िैसा दक इस जिजनयम के

अधीन रजिस्ट्रीकृत िैसी िी सोसाइटियों द्वारा प्रस्ट्तुत दकया

िाता िै ।

(3) उपधारा (1) और उपधारा (2) के उपबंध ऐसी

सिकारी सोसाइटियों को लागू निीं िोंगे जिन्िें बहु-राज्य

सिकारी सोसाइिी अजधजनयम, 2002 (2002 का 39) के

उपबंध लागू िोते िैं ।

(4) उपधारा (1) में अंतर्िष्ट कोई बात दकसी सोसाइिी

को प्रभाजित निीं करेगी जिसकी इस जिजनयम के प्रारंभ से पूिष

संघ राज्यक्षेत्र से बािर कोई िाखा या कारबार का स्ट्थान िै ।

136. रजिस्ट्रार और अन्य अजधकाटरयों का लोकसेिक

िोना—रजिस्ट्रार, रजिस्ट्रार की िजियों का प्रयोग करने िाला

कोई व्यजि, धारा 22 के अधीन िासकीय समनुिेजिती, धारा

66 के अधीन कोई अजभरक्षक, धारा 68 के अधीन सिकारी

जनिाषचन अजधकारी, धारा 84 के अधीन सोसाइिी के लेखाओं

की संपरीक्षा करने के जलए या धारा 86 के अधीन िांच करने के

जलए धारा 87 या धारा 88 के अधीन जनरीक्षण करने के जलए

प्राजधकृत व्यजि, और धारा 81 या धारा 116 के अधीन जििेष

अजधकारी के रूप में जनयुि व्यजि या धारा 98 के अधीन

नामजनिेजिती या नामजनिेजिती के बोडष या धारा 108 के

अधीन समापक के रूप में िजियों का प्रयोग करने िाला व्यजि

और अजधकरण के सभी सिस्ट्यों को भारतीय िंड संजिता

(1860 का 45) की धारा 21 के अथाषन्तंगषत लोक सेिक समझा

िाएगा ।

137. सि भािपूिषक की गई कारषिाई के जलए संरक्षण—

इस जिजनयम या ति p6धीन बनाए गए दकसी जनयम के अनुसरण

में सि 0भािपूिषक की गई या की िाने के जलए आिजयत दकसी

बात के जलए कोई िाि, अजभयोिन या अन्य जिजधक कायषिािी

सोसाइिी के रजिस्ट्रार या दकसी अजधकारी या अपील

अजधकरण या दकसी सिस्ट्य या अजधकारी के जिरुद् निीं िोगी।

138. न्यायालयों की अजधकाटरता का ििषन—(1) इस

जिजनयम में अन्यथा यथाउपबंजधत के जसिाय दकसी जसजिल

न्यायालय या रािस्ट्ि न्यायालय को जनम्नजलजखत के संबंध में

कोई अजधकाटरता निीं िोगी–

(क) सोसाइिी के रजिस्ट्रीकरण या उसकी उपजिजधयों या

उपजिजधयों के संिोधन या सोसाइिी की सजमजत के जिघिन पर

उसके प्रबंधन ;

(ख) जिजनश् चय के जलए दकसी जििाि को रजिस्ट्रार या

उसके नामजनिेजिती या नामजनिेजिती के बोडष को जनर्िष्ट करने

की अपेक्षा ; या

(ग) दकसी सोसाइिी के पटरसमापन और जिघिन से

संबंजधत दकसी जिषय के संबंध में –

(2) िब दकसी सोसाइिी का पटरसमापन दकया िा रिा

िो, ऐसी सोसाइिी के कारबार के संबंध में कोई िाि या अन्य

जिजधक कायषिािी सोसाइिी या उसके दकसी सिस्ट्य के जिरुद्

कंपनी के कायों से संबंध रखने िाले दकसी जिषय पर जसिाय

रजिस्ट्रार की अनुमजत के और ऐसे जनबंधनों के अधीन रिते हुए,

िो िि अजधरोजपत करे, निीं की िाएगी ।

(3) इस जिजनयम या जनयम के अनुसार पाटरत सभी

आिेि, जिजनश् चय या अजधजनणषय इस जिजनयम के पुनरीक्षण या

अपील के उपबंधों के अधीन रिते हुए अंजतम िोंगे और ऐसा

कोई आिेि, जिजनश् चय या अजधजनणषय चुनौती िेने, अपास्ट्त

करने, उपांतटरत करने, उलिने या गुणागुण या दकसी अन्य

आधार पर जसिाय अजधकाटरता का अभाि के िून्य घोजषत

दकए िाने का िायी निीं िोगा ।

139. जनयम बनाने की िजि और संसि के समक्ष उनका

रखा िाना—(1)प्रिासक, रािपत्र में अजधसूचना द्वारा और पूिष

[भाग II—अनुभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

49

प्रकािन की ितष के अधीन रिते हुए इस जिजनयम के प्रयोिनों

के जलए इस जिजनयम के उपबंधों से संगत जनयम बना सकेगा ।

(2) इस जिजनयम के अधीन प्रिासक द्वारा बनाया गया

प्रत्येक जनयम उसके बनाए िाने के पश् चात था िीघ्र संसि के

प्रत्येक सिन के समक्ष, िब िि सत्र में िो, कुल तीस दिन की

अिजध के जलए रखा िाएगा । यि अिजध एक सत्र में अथिा िो

या अजधक आनुक्रजमक सत्रों में पूरी िो सकेगी। यदि उस सत्र के

या पूिोि आनुक्रजमक सत्रों के ठीक बाि के सत्र के अिसान के

पूिष िोनों सिन उस जनयम में कोई पटरितषन करने के जलए

सिमत िो िाएं तो तत्पश् चात िि ऐसे पटरिर्तषत रूप में िी

प्रभािी िोगा,यदि उि अिसान के पूिष िोनों सिन सिमत िो

िाएं दक िि जनयम निीं बनाया िाना चाजिए तो तत्पश् चात

िि जनयम जनष्प्रभाि िो िाएगा, ककंतु जनयम के इस प्रकार

पटरिर्तषत या जनष्प्रभाि िोने से उसके अधीन पिले की गई

दकसी बात की जिजधमान्यता पर प्रजतकूल प्रभाि निीं प़िेगा।

140. 2013 के अजधजनयम संखयांक 18 का लागू निीं

िोना—कंपनी अजधजनयम, 2013 (2013 का 18) के उपबंध

इस जिजनयम के अधीन रजिस्ट्रीकृत या रजिस्ट्रीकृत मानी गई

सोसाइटियों को लागू निीं िोंगे ।

141. कटठनाइयों को िूर करने की िजि—(1) यदि इस

जिजनयम के उपबंधों को प्रभािी करने में कोई कटठनाई उत्पन्न

िोती िै तो प्रिासक , रािपत्र में प्रकाजित आिेि द्वारा ऐसे

उपबंध कर सकेगा, िो इस अजधजनयम के उपबंधों से असंगत न

िो, िो उस कटठनाई को िूर करने के जलए उसे आिश्यक या

समीचीन प्रतीत िो, उस कटठनाई को िूर कर सकेगा :

परंतु इस धारा के अधीन ऐसा कोई आिेि इस जिजनयम

के प्रारंभ से एक िषष की समाजप्त के पश् चात निीं दकया िाएगा।

(2) इस धारा के अधीन दकया गया प्रत्येक आिेि, दकए

िाने के पश् चात , यथािीघ्र, संसि के प्रत्येक सिन के समक्ष रखा

िाएगा ।

142. जनरसन और व्यािृजत्त—(1) लक्षद्वीप, जमजनकोय

और अमीनिीिी द्वीप समूि सिकारी सोसाइिी जिजनयम,

1960 (1960 का 5) (जिसे इसमें इसके पश् चात इस धारा में के

रूप में जनर्िष्ट दकया गया िै) का जनरसन दकया िाता िै :

परंतु ऐसा जनरसन –

(i) इस प्रकार जनरजसत उि जिजनयम के पूिष प्रचालन या

उसके अधीन सम्यकतः की गई या कराई गई दकसी बात ;

(ii) इस प्रकार जनरजसत उि जिजनयम के अधीन दकसी

अजधकार, जििेषाजधकार, बाध्यता या अर्िषत उद्भूत या उपगत

िाजयत्ि ;

(iii) इस प्रकार जनरजसत उि जिजनयम के अधीन काटरत

दकसी अपराध के संबंध में दकसी िाजस्ट्त, समपिरण या उपगत

िंड ; या

(iv) पूिोि दकसी ऐसे अजधकार, जििेषाजधकार,

बाध्यता, िाजयत्ि, िाजस्ट्त, समपिरण या िंड के संबंध में दकसी

िांच, कायषिािी, जिजधक कायषिािी या उपचार, को प्रभाजित

निीं करेगा और ऐसी कोई िांच, कायषिािी, जिजधक कायषिािी

या उपचार संजस्ट्थत दकया िा सकेगा, लागू रखा िा सकेगा या

प्रिृत्त दकया िा सकेगा और ऐसी िाजस्ट्त, समपिरण या िंड

अजधरोजपत दकया िा सकेगा, मानो यि जिजनयम प्रखयाजपत िी

निीं दकया गया था ।

(2) उपधारा (1) में जनर्िष्ट जिजिष्ट जिषयों के िणषन को

साधारण खंड अजधजनयम, 1897 (1897 का 10) की धारा 6

के ऐसे जनरसन को साधारण रूप से लागू िोने को या प्रभाजित

करने के प्रजत प्रजतकूल रूप से प्रभाजित करने िाली निीं ठिराई

िाएगी ।

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रािेि श्रीिास्ट्ति,

सिायक जिधायी परामिी

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Date: 2022.12.06 19:25:01 +05'30'