8804 GI/2022 (90)

1

रजिस्ट्री सं. डी.एल.- 33004/99

REGD. No. D. L.-33004/99

xxxGIDHxxx

xxxGIDExxx

असाधारण

EXTRAORDINARY

भाग II—खण् ड 3A

PART II—Section 3A

प्राजधकार से प्रकाजित

PUBLISHED BY AUTHORITY

जिजध और न्याय मंत्रालय

(जिधायी जिभाग)

रािभाषा खण्ड

नई दिल्ली, 27 दिसम् बर, 2022

दि लक्षद्वीप िैल् यू एडेड टैक् स रेगलेिन, 2022 का जिन्िी अनलिाि, राष्ट्रपजत के प्राजधकार से, प्रकाजित दकया िाता िै और

रािभाषा अजधजनयम, 1963 (1963 का 19 ) की धारा 5 की उपधारा (1) के खण्ड (ख) के अधीन, यि जिन्िी में उसका प्राजधकृत पाठ

समझा िाएगा :—

MINISTRY OF LAW AND JUSTICE

(LEGISLATIVE DEPARTMENT)

OFFICIAL LANGUAGES WING

New Delhi, the 27th December, 2022

The translation in Hindi of the Lakshadweep Value Added Tax Regulation, 2022 is hereby published under

the authority of the President and shall be deemed to be the authoritative text thereof in Hindi under clause (b) of sub-

section (1) of section 5 of the Official Languages Act, 1963 (19 of 1963):—

सं. 5]

नई दिल्ली, िलक्रिार, दिसम् बर 30, 2022/पौष 9, 1944

No. 5]

NEW DELHI, FRIDAY, DECEMBER 30, 2022/PAUSHA 9, 1944

सी.जी.-डी.एल.-अ.-30122022-241519

CG-DL-E-30122022-241519

2

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

गृि मंत्रालय

लक्षद्वीप मूल्य िर्धित कर जिजनयम, 2022

(2022 का जिजनयम संखयांक 1)

भारत गणराज् य के जतित्तरिें िषि में राष्ट्रपजत द्वारा प्रखयाजपत ।

संघ राज्यक्षेत्र माल और सेिा कर अजधजनयम, 2017 से अपिर्िित माल पर

एक कर प्रणाली और ऐसे माल के जिक्रय पर, जिक्रय के

प्रत्येक अिसर पर, कर उद्गृिीत करके कर आधार को

बढाने, कर के उि् ग्रिण को पारििी बनाने और उससे

संबंजधत या उसके आनलषंजगक जिषयों का

उपबंध करने के जलए

जिजनयम

राष्ट्रपजत, संजिधान के अनलच्छेि 240 द्वारा प्रित्त िजियों

का प्रयोग करते हुए, उनके द्वारा बनाए गए जनम् नजलजखत

जिजनयम को प्रखयाजपत करती िैं :—

अध् याय 1

प्रारंजभक

1. संजक्षप् त नाम, जिस्ट्तार और प्रारंभ—(1) इस जिजनयम

का संजक्षप् त नाम लक्षद्वीप मूल्य िर्धित कर जिजनयम, 2022 िै ।

(2) इसका जिस्ट्तार संपूणि लक्षद्वीप संघ राज्यक्षेत्र पर िै ।

(3) इस जिजनयम के उपबंध उस तारीख को प्रिृत्त िोंगे,

िो प्रिासक, रािपत्र में अजधसूचना द्वारा, जनयत करे ।

2. पररभाषाएं—(1) इस जिजनयम में, िब तक संिभि से

अन्यथा अपेजक्षत न िो,—

(क) “अकाउंटेंट” से,—

(i) चाटिडि अकाउंटेंट अजधजनयम, 1949 (1949

का 38) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ख) में यथा

पररभाजषत कोई चाटिडि अकाउंटेंट अजभप्रेत िै ;

(ii) लागत और संकमि लेखापाल अजधजनयम,

1959 (1959 का 23) में यथा पररभाजषत कोई लागत

लेखापाल अजभप्रेत िै ;

(iii) कंपनी अजधजनयम, 2013 (2013 का 18)

की धारा 139 के अधीन जनयलि कोई संपरीक्षक अजभप्रेत

िै ;

(ख) “पयािप्त सबूत” से ऐसे िस्ट्तािेि, पररसाक्ष्य या अन्य

साक्ष्य अजभप्रेत िैं, िो जिजित दकए िाएं ;

(ग) “अपील अजधकरण” से धारा 73 के अधीन गरठत

अपील अजधकरण अजभप्रेत िै ;

(घ) “कारबार” में जनम् नजलजखत सजम्मजलत िैं,--

(i) दकन्िीं सेिाओं का उपबंध, दकन्तल कमिचारी द्वारा

प्रिान की गई सेिाओं को छोड़कर ;

(ii) कोई व्यापार, िाजणज्य या जिजनमािण ;

(iii) दकसी व्यापार, िाजणज्य या जिजनमािण की

प्रकृजत की कोई प्रोद्यम या प्रजतष्ठान ;

(iv) ऐसे व्यापार, िाजणज्य, जिजनमािण, प्रोद्यम या

प्रजतष्ठान के संबंध में या उसके आनलषंजगक या प्रासंजगक

कोई संव्यििार ; और

(v) ऐसी सेिा, व्यापार, िाजणज्य, जिजनमािण,

प्रोद्यम या प्रजतष्ठान की प्रकृजत में कभी-कभी दकए िाने

िाला संव्यििार,

चािे,—

(अ) ऐसे संव्यििार का कोई पररणाम, आिृजत्त,

जनरंतरता या जनयजमतता िो या निीं ;

(आ) ऐसी सेिा, व्यापार, िाजणज्य, जिजनमािण, प्रोद्यम

या प्रजतष्ठान को, अजभलाभ या लाभ कमाने के उद्देश्य से दकया

िा रिा िो या निीं ; और

(इ) ऐसी सेिा, व्यापार, िाजणज्य, जिजनमािण, प्रोद्यम या

प्रजतष्ठान से, कोई लाभ या अजभलाभ प्रोद्भूत िो या निीं ;

(ङ) “कारबार पररसर” में जनम् नजलजखत सजम्मजलत िैं,—

(i) आयलि के पास रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी का पता ;

(ii) दकसी व्यजि द्वारा अपने कारबार के संचालन

के जलए उपयोग की िाने िाली कोई इमारत या स्ट्थान,

इमारत या भिन के उन स्ट्थानों के जसिाय, िो मलखय रूप

से जनिास के रूप में उपयोग दकए िाते िैं ;

(iii) कोई भी स्ट्थान, ििां व्यौिारी दकसी

अजभकताि (चािे िि दकसी भी नाम से ज्ञात िो) के

माध्यम से संव्यििार करता िै, ऐसे अजभकताि के

संव्यििार का स्ट्थान और भांडागार, गोिाम या ऐसे

अन्य स्ट्थान, ििां व्यौिारी अपना माल भंडाररत करता

िै ;

(च) “पूंिी माल” से लक्षद्वीप में व्यापार या जिजनमािण की

प्रदक्रया में या संकमि संजििा के जनष्पािन के जलए, प्रत्यक्षत: या

अप्रत्यक्षत:, प्रयलि संयंत्र, तंत्र और उपस्ट्कर अजभप्रेत िै ;

(छ) “नैजमजत्तक व्यापारी” से ऐसा व् यजक् त अजभप्रेत िै,

चािे िि प्रधान, व्यौिारी या दकसी अन्य िैजसयत में कारबार

की प्रकृजत में कभी-कभी संव्यििार करता िै, जिसमें, चािे

नकि, आस्ट्थजगत संिाय, कमीिन, पाररश्रजमक या अन्य

मूल्यिान प्रजतफल के जलए, लक्षद्वीप में माल का क्रय, जिक्रय,

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

3

आपूर्ति या जितरण या कोई प्रिििनी-सि-जिक्रय आयोजित

करना सजम्मजलत िै ;

(ि) “आयलि” से धारा 66 की उपधारा (1) के अधीन

जनयलि मूल्य िर्धित कर आयलि अजभप्रेत िै ;

(झ) “व्यौिारी” से कोई ऐसा व् यजक् त अजभप्रेत िै, िो

लक्षद्वीप में, प्रत्यक्षत: या अन्यथा, अपने कारबार के प्रयोिन के

जलए या अपने िचनबंध के पररणामस्ट्िरूप या उससे संबंजधत

या उसके आनलषंजगक या उसके अनलक्रम में, चािे िि नकि या

आस्ट्थजगत संिाय से या कमीिन, पाररश्रजमक या अन्य मूल्यिान

प्रजतफल के जलए, माल का क्रय या जिक्रय करता िै और इसके

अंतगित जनम् नजलजखत सजम्मजलत िैं,—

(i) कोई फेक्टर, कमीिन अजभकताि, िलाल, प्रत्यापक

अजभकताि, या कोई अन्य िाजणजज्यक अजभकताि, चािे

दकसी भी नाम से ज्ञात िो, िो दकसी कारबार के

प्रयोिन के जलए या अपने िचनबंध के पररणामस्ट्िरूप

या उससे संबंजधत या उसके आनलषंजगक या उसके अनलक्रम

में, दकसी माजलक या दकन्िीं माजलकों के जनजमत्त, चािे िे

प्रकरटत िो या निीं, दकसी माल का क्रय या जिक्रय या

पूर्ति या जितरण करता िै ;

(ii) यथाजस्ट्थजत, कोई अजनिासी व्यौिारी या कोई

अजभकताि, िो एक अजनिासी व्यौिारी के राज्य में

जनिास करता िै, लक्षद्वीप में कारबार के प्रयोिन के

जलए या अपने िचनबंध के पररणामस्ट्िरूप या उससे

संबंजधत या उसके आनलषंजगक या उसके अनलक्रम में, दकसी

माल का क्रय या जिक्रय करता िै ;

(iii) लक्षद्वीप के बािर, दकसी फमि या कंपनी या

व्यजियों का संगम की एक ऐसी स्ट्थानीय िाखा, ििां

ऐसे संगम, कंपनी, व्यजियों का संगम इस पररभाषा के

दकसी अन्य उपखंड के अधीन एक व्यौिारी िै ;

(iv) कोई क्लब, संगम, सोसाइटी, रस्ट्ट या सिकारी

सोसाइटी, चािे िि जनगजमत िो या अजनगजमत, अपने

सिस्ट्यों से कीमत, फीस या अजभिान के जलए माल क्रय

करता िै या उनको माल जिक्रय करता िै, चािे िि

कारबार के अनलक्रम में िो या निीं ;

(v) कोई नीलामकताि, िो माल का जिक्रय करता िै

या नीलाम करता िै, चािे िि अजभकताि के रूप में काम

कर रिा िो या अन्यथा, या िो माल के जिक्रय का

आयोिन करता िै या माल की नीलामी करता िै, चािे

उसके पास दकसी माजलक के माल को जिक्रय करने का

प्राजधकार िो या निीं, चािे िि प्रकरटत िो या निीं, और

चािे आिजयत क्रेता का प्रस्ट्ताि उसके द्वारा या माजलक

द्वारा या माजलक के नामजनिेजिती द्वारा स्ट्िीकृत िो या

निीं ;

(vi) कोई नैजमजत्तक व्यापारी ;

(vii) कोई व्यजि, िो अपने कारबार के प्रयोिन के

जलए या िचनबंध के पररणामस्ट्िरूप या उससे संबंजधत

या उसके आनलषंजगक या उसके अनलक्रम में, जिक्रय दकए

िाने के जलए दकसी ऐसे माल को, िो अिािाकृत या

अजधहृत रूप में या अनलपयोगी या स्ट्क्रैप, अजधिेष,

पलराना, अप्रचजलत रूप में या व् यक् त सामग्री या अपजिष्ट

उत्पाि के रूप में िै, व्ययन करता िै ;

(viii) सीमािल्क अजधजनयम, 1962 (1962 का 52)

को प्रिाजसत करने िाला भारत सरकार का सीमािल्क

जिभाग ;

(ix) केंद्रीय सरकार, राज्य सरकारों और संघ

राज्यक्षेत्र प्रिासनों के जिभाग ;

(x) स्ट्थानीय प्राजधकारी, पंचायतें, नगरपाजलकाएं,

जिकास प्राजधकरण और छािनी बोडि ;

(xi) लोक पूत्ति न्यास ;

(xii) जनगजमत या अजनगजमत सोसाइरटयां, क्लब या

व्यजियों के अन्य संगम ;

(xiii) प्रत्येक स्ट्िायत्त या कानूनी जनकाय या जनगम

या कंपनी या सोसाइटी या कोई औद्योजगक, िाजणजज्यक,

बैंककारी, बीमा या व्यापाररक उपक्रम, जनगम, संस्ट्था या

कंपनी, चािे िे संघ सरकार या दकसी राज्य सरकार या

दकसी स्ट्थानीय प्राजधकारी की िो या निीं ;

(xiv) पोत पररििन और सजिमािण कंपजनयां, िायल

पररििन

कंपजनयां,

एयरलाइन्स

और

जिज्ञापन

अजभकरण ;

(ञ) “उजचत बािार मूल्य” से ऐसा मूल्य अजभप्रेत िै,

जिस पर लक्षद्वीप में खले बािार में समान प्रकार और क्वालिटी

का माल, असंबद्ध पक्षकारों के बीच उसी मात्रा में जिक्रय दकया

िाता िै या जिक्रय दकया िाएगा ;

(ट) “माल” से, समय-समय पर यथा संिोजधत पिली

अनलसूची में जिजनर्ििष्ट माल अजभप्रेत िै ;

(ठ) “माल यान” से माल ले िाने में प्रयलि कोई मोटर

यान, िलयान, नौका, पिल और दकसी अन्य प्रकार का िािन

अजभप्रेत िै ;

(ड) “सरकार” से संजिधान के अनलच् छेि 239 के अधीन

राष्ट्रपजत द्वारा जनयलि प्रिासक की अध्यक्षता में लक्षद्वीप संघ

राज्यक्षेत्र का प्रिासन अजभप्रेत िै ;

(ढ) “आयात” से भारत के राज्यक्षेत्र में माल के आयात के

अनलक्रम में जिक्रय या क्रय, यदि जिक्रय या क्रय, या तो ऐसे

आयात के अिसर पर दकया िाता िै या माल के स्ट्िामी के

िस्ट्तािेि के अंतरण से प्रभाजित िोता िै, इससे पिले दक माल

भारत की सीमािल्क सीमाओं को पार कर गया िो और इसमें

लक्षद्वीप के बािर से या तो क्रय के पररणामस्ट्िरूप या अन्यथा

माल का क्रय िाजमल िै ।

स्ट्पष्टीकरण—जििेि से लक्षद्वीप में सीमािल्क के माध्यम

से आने िाले माल की ििा में, लक्षद्वीप में माल का आयात उस

4

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

स्ट्थान पर िोगा, ििां घरेलू उपभोग के जलए सीमािल्क द्वारा

माल की जनकासी की िाती िै ;

(ण) “आयातकताि” में जनम् नजलजखत सजम्मजलत िोंगे,—

(i) कोई व्यजि, िो लक्षद्वीप में अपना माल लाता

िै ;

(ii) कोई व्यजि, जिसके जनजमत्त कोई अन्य व्यजि

लक्षद्वीप में माल लाता िै ;

(iii) केंद्रीय जिक्रय कर अजधजनयम, 1956 (1956

का 74) की धारा 6 की उपधारा (2) में जनर्ििष्ट

पररजस्ट्थजतयों में उद्भूत जिक्रय की ििा में, लक्षद्वीप में

िि व्यजि, जिसे माल पररिान दकया िाता िै ;

(त) माल के क्रय के संबंध में “इनपलट टैक्स” से माल के

जलए क्रेता द्वारा संित्त कीमत का अनलपात अजभप्रेत िै, िो कर

प्रस्ट्तलत करता िै, जिसके जलए जिक्रय करने िाला व्यौिारी इस

जिजनयम के अधीन िायी िै ;

(थ) “लक्षद्वीप” से लक्षद्वीप संघ राज्यक्षेत्र अजभप्रेत िै ;

(ि) व्याकरजणक रूपभेिों और इसके सिातीय पिों

सजित “जिजनमािण” पि से, दकसी माल का उत्पािन, जनमािण,

जनष्कषिण, पररितिन, अलंकरण, पररष्करण या अन्यथा

प्रसंस्ट्करण, उपचार या अनलकूलन अजभप्रेत िै, ककंतल इसमें

जिजनमािण की ऐसी कोई प्रदक्रया या रीजत सजम्मजलत निीं िै,

िो जिजित की िाए ;

(ध) “िलद्ध कर” से धारा 11 के अधीन दकसी कर अिजध

के जलए संगजणत रकम अजभप्रेत िै ;

(न) “अजनिासी” से ऐसा व्यजि अजभप्रेत िै, जिसके

कारबार या जनिास का लक्षद्वीप में कोई जनयत स्ट्थान निीं िै ;

(प) “अजधसूचना” से रािपत्र में प्रकाजित अजधसूचना

अजभप्रेत िै तथा “अजधसूजचत करना” और “अजधसूजचत” पिों का

तिनलसार अथि लगाया िाएगा ;

(फ) “रािपत्र” से लक्षद्वीप का रािपत्र अजभप्रेत िै ;

(ब) “जिजित” से इस जिजनयम के अधीन सरकार द्वारा

बनाए गए जनयम द्वारा जिजित अजभप्रेत िै ;

(भ) “रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी” से इस जिजनयम के अधीन

रजिस्ट्रीकृत कोई व्यौिारी अजभप्रेत िै ;

(म) “संबंजधत व्यजि” से ऐसा व्यजि अजभप्रेत िै, िो

दकसी अन्य व्यजि (जिसे इस पररभाषा में “व्यौिारी” किा गया

िै) से संबंजधत िै, यदि िि व्यजि,—

(i) व्यौिारी का नातेिार िै ;

(ii) भागीिारी िै, जिसका व्यौिारी एक भागीिार

िै;

(iii) एक कंपनी िै, जिसमें व्यौिारी [या तो अकेले िै

या दकसी अन्य व्यजि के साथ िै, या ऐसे व्यजि, िो

उपखंड (i), उपखंड (ii), उपखंड (iv), उपखंड (v) और

उपखंड (vi) के अधीन व्यौिारी के संबंधी िै] – प्रत्यक्ष या

अप्रत्यक्ष रूप से चालीस प्रजतित या अजधक बकाया

िोटटंग स्ट्टॉक या िेयर धारण करता िै ;

(iv) िो [या तो अकेले िै या दकसी अन्य व्यजि के

साथ िै, या ऐसे व्यजि, िो उपखंड (i), उपखंड (ii),

उपखंड (iii), उपखंड (v) और उपखंड (vi) के अधीन

व्यजि के संबंधी िै] – प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चालीस

प्रजतित या अजधक बकाया िोटटंग स्ट्टॉक या िेयरों का

माजलक िै ;

(v) कंपनी िै, जिसमें दकसी व्यजि द्वारा प्रत्यक्ष या

अप्रत्यक्ष रूप से चालीस प्रजतित या बकाया िोटटंग

स्ट्टॉक धारण दकया गया िै [या तो अकेले िै या दकसी

अन्य व्यजि के साथ िै, या ऐसे व्यजि, िो उपखंड (i),

उपखंड (ii), उपखंड (iii), उपखंड (iv) और उपखंड (vi)

के अधीन व्यजि के संबंधी िै] िि भी चालीस प्रजतित

या अजधक बकाया िोटटंग स्ट्टॉक या व्यौिारी का िेयर

धारण करता िै ; या

(vi) व्यौिारी द्वारा जनयंजत्रत दकया िाता िै या िि

व्यजि, जिसे व्यौिारी जनयंजत्रत करता िै, एक ऐसा

व्यजि िै, िो व्यौिारी को जनयंजत्रत करता िै, उसी व्यजि

द्वारा जनयंजत्रत िोता िै ;

(य) “संबंधी” से कंपनी अजधजनयम, 2013 (2013 का

18) की धारा 2 के खंड (77) में यथापररभाजषत संबंधी

अजभप्रेत िै ;

(यक) व्याकरजणक रूपभेिों और इसके सिातीय पिों

सजित “जिक्रय” से दकसी व्यजि द्वारा नकि या आस्ट्थजगत संिाय

के जलए या अन्य मूल्यिान प्रजतफल के जलए माल में संपजत्त का

कोई अंतरण अजभप्रेत िै (जिसके अंतगित एक सरकारी

अजभकरण या जिभाग द्वारा दकए गए अनलिान या आर्थिक

सिायता संिाय निीं िै, चािे िि केंद्रीय सरकार की िो या

राज्य सरकार की, दकसी और की िो) और जिसके अंतगित

जनम् नजलजखत सजम्मजलत िैं,—

(i) भाड़ा क्रय या दकस्ट्तों द्वारा संिाय की अन्य

प्रणाली द्वारा माल का अंतरण, ककंतल इसमें माल का

बंधक करना या रेिन रखना या प्रभारण या जगरिी

रखना िाजमल निीं िै ;

(ii) दकसी सोसाइटी, जिसके अंतगित सिकारी

सोसाइटी भी िै, क्लब, फमि या दकसी संगम द्वारा अपने

सिस्ट्यों को नकि या आस्ट्थजगत संिाय के जलए या

कमीिन, पाररश्रजमक या अन्य मूल्यिान प्रजतफल, चािे

िि कारबार के अनलक्रम में िो या निीं, के जलए माल की

पूर्ति ;

(iii) खंड (i) के उपखंड (v) में जनर्ििष्ट नीलामकताि

द्वारा माल में संपजत्त का अंतरण, या बैंककारी की प्रकृजत

में दकसी अन्य दक्रयाकलाप के अनलक्रम में माल का जिक्रय,

बीमा, िो उनके मलखय दक्रयाकलाप के अनलक्रम में भी

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

5

माल को पलन: िापस ले जलया या दफर से िािा दकया

िाता िै ;

(iv) नकि, आस्ट्थजगत संिाय या अन्य मूल्यिान

प्रजतफल के जलए दकसी माल में संपजत्त की संजििा के

अनलसरण के अलािा अन्यथा अंतरण ;

(v) नकि, आस्ट्थजगत संिाय या अन्य मूल्यिान

प्रजतफल के जलए दकसी भी प्रयोिन के जलए (चािे िि

जनर्ििष्ट अिजध के जलए िो या निीं) दकसी भी माल का

उपयोग करने के अजधकार का अंतरण ;

(vi) दकसी भी सेिा के साथ में या भागरूप में या

दकसी अन्य रीजत में, चािे िो भी िो, माल की, भोिन

या मानि उपभोग के जलए कोई अन्य िस्ट्तल (चािे निीली

िो या निीं), ििां ऐसी आपूर्ति या सेिा िै, नकि,

आस्ट्थजगत संिाय या अन्य मूल्यिान प्रजतफल के जलए

आपूर्ति ;

(vii) इस धारा के खंड (i) के उपखंड (vii) में जनर्ििष्ट

माल का प्रत्येक जनपटान और “जिक्रय”, “क्रय” और

“खरीिना”, िब्िों, ििां किीं भी िे सभी व्याकरजणक

रूपभेिों और सिातीय पिों सजित आते िैं, का तिनलसार

अथि लगाया िाएगा ;

(यख) “जिक्रय कीमत” से दकसी जिक्रय के जलए मूल्यिान

प्रजतफल के रूप में संित्त या संिेय रकम अजभप्रेत िै, जिसके

अंतगित जनम् नजलजखत सजम्मजलत िैं—

(i) कर की रकम, यदि कोई िो, जिसके जलए धारा 3

के अधीन व्यौिारी िायी िै ;

(ii) भाड़ा क्रय या दकस्ट्तों द्वारा संिाय की अन्य

प्रणाली द्वारा माल के अंतरण के संबंध में, ऐसे पररिान

के जलए दकसी व्यजि को संिेय मूल्यिान प्रजतफल की

रकम, जिसके अंतगित ऐसे संव्यििार के आनलषंजगक

दकराया प्रभार, ब्याि और अन्य प्रभार भी सजम्मजलत िैं;

(iii) दकसी भी प्रयोिन के जलए दकसी भी माल के

उपयोग करने के अजधकार के अंतरण के संबंध में, (चािे

िि जिजनर्ििष्ट अिजध के जलए िो या निीं) इस प्रकार के

अंतरण के जलए प्राप्त या प्राप्य मूल्यिान प्रजतफल या

भाड़ा प्रभार ;

(iv) माल के पररिान के समय, या उससे पिले, माल

के संबंध में व्यौिारी द्वारा की गई दकसी भी बात के जलए

प्रभाररत कोई राजि ;

(v) केंद्रीय उत्पाि-िल्क अजधजनयम, 1944 (1944

का 1) या सीमािल्क अजधजनयम, 1962 (1962 का

52) या लक्षद्वीप उत्पाि-िल्क जिजनयम के अधीन माल

पर उद्गृिीत या उि् ग्रिणीय िल्कों की रकम, चािे िि

जिक्रेता या दकसी अन्य व्यजि द्वारा संिेय िो ;

(vi) जिक्रेता द्वारा िमा के रूप में प्राप्त या प्राप्य रकम

(चािे िि िापसी योग्य िो या निीं), िो प्राप्त हुई िै या

प्राप्य िै, चािे िि पृथक् करार के माध्यम से िो या निीं

या माल के जिक्रय के जलए आनलषंजगक िो या सिायक;

और

(vii) संकमि संजििा के संबंध में, संकमि संजििा के

जनष्पािन के जलए दकसी व्यौिारी को संित्त या संिेय

मूल्यिान प्रजतफल की रकम जनम् नजलजखत से कम

िोगी,—

(क) छूट के रूप में अनलज्ञात कोई रकम, िो सामान्यत:

व्यापार में प्रचजलत प्रथा के अनलसार जिक्रय मूल्य को कम करेगी;

(ख) ढलाई या पररिान की लागत या संस्ट्थापन की

लागत, उन मामलों में, ििां ऐसी लागत अलग से प्रभाररत की

िाती िै और व्याकरजणक रूपभेिों और सिातीय पिों सजित

“क्रय कीमत” िब्िों का तिनलसार अथि लगाया िाएगा :

परंतल ििां व्यौिारी भारत के राज्यक्षेत्र में आयाजतत माल

का जिक्रय करता िै, ििां जिक्रय मूल्य जनम् नजलजखत में से अजधक

िोगा,—

(क) व्यौिारी द्वारा प्राप्त या प्राप्य मूल्यिान प्रजतफल ;

(ख) ऐसे माल के आयात के समय, सीमािल्क के संिाय

के जलए सीमािल्क प्राजधकाररयों द्वारा अिधाररत मूल्य ;

(यग) “अनलसूची” से इस जिजनयम से संलग् न अनलसूजचयां

अजभप्रेत िैं ;

(यघ) “कर” से इस जिजनयम के अधीन संिेय कर अजभप्रेत

िै ;

(यङ) “कराधेय मात्रा” से धारा 18 की उपधारा (2) में

जनर्ििष्ट रकम की मात्रा अजभप्रेत िै ;

(यच) “कर बीिक” से धारा 50 में जनर्ििष्ट बीिक

अजभप्रेत िै ;

(यछ) “कर अिजध” से इस जिजनयम के अधीन बनाए गए

जनयमों में जिजित अिजध अजभप्रेत िै ;

(यि) “कर भाग” से आर/(आर+100) सूत्र के अनलसार

संगजणत भाग अजभप्रेत िै, ििां ‘आर’ इस जिजनयम के अधीन

जिक्रय पर लागू कर की प्रजतित िर िै ;

(यझ) “के अनलक्रम में” पि में दक्रयाकलाप के संबंध में या

उसके आनलषंजगक प्रयोिन के जलए दकए गए और दक्रयाकलाप

की तैयारी और दक्रयाकलाप की समाजप्त के भाग के रूप में दकए

िाने िाले दक्रयाकलाप सजम्मजलत िैं ;

(यञ) “पररिािक” से कोई ऐसा व्यजि अजभप्रेत िै, िो

अपने कारबार के प्रयोिन के जलए या उससे संबंजधत या उसके

आनलषंजगक या उसके अनलक्रम में पररििन करता िै या माल

पररििन काररत करता िै और जिसमें कोई भी व्यजि

सजम्मजलत िै, जिसका रेल, पोत पररििन कंपनी, एयर कारगो

टर्मिनल, अंतिेिीय आधान जडपो, आधान ढलाई स्ट्टेिन,

कोररयर सेिा या एयरलाइन प्रचालन का कारबार िै या जिसके

कारबार में ये सजम्मजलत िै ;

6

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(यट) “आितिन” से दकसी कर अिजध में व्यजि द्वारा प्राप्त

या प्राप्य जिक्रय कीमत की कलल रकम, घटाया हुआ कोई कर

अजभप्रेत िै, जिसके जलए धारा 3 के अधीन व्यजि िायी िै ;

(यठ) “क्रय आितिन” से दकसी कर अिजध में दकसी व्यजि

द्वारा संित्त या संिेय क्रय कीमत की कलल रकम अजभप्रेत िै,

जिसमें इनपलट कर सजम्मजलत निीं िै ;

(यड) “माल की कीमत” से माल का उस समय का उजचत

बािार मूल्य अजभप्रेत िै, जिसके अंतगित बीमा प्रभार, उत्पाि-

िल्क, प्रजतिल्क, जिक्रय के संबंध में केन्द्रीय जिक्रय कर

अजधजनयम, 1956 (1956 का 74) के अधीन संित्त या संिेय

कर, पररििन प्रभार, ढलाई प्रभार और माल के संव्यििार से

आनलषंजगक सभी अन्य प्रभार भी िैं ;

(यढ) “कायि संजििा” के अंतगित नकि या आस्ट्थजगत

संिाय या मूल्यिान प्रजतफल, भिन सजिमािण, जिजनमािण,

प्रसंस्ट्करण, गढना, पररजनमािण, संस्ट्थापन, सजित करना,

समलिजत, मरम्मत या दकसी िंगम या स्ट्थािर संपजत्त को प्रितिन

में लाने के जलए दक्रयाजन्ित करने िेतल कोई करार भी िै ;

(यण) “िषि” से अप्रैल के पिले दिन से माचि के अंजतम

दिन तक का जित्तीय िषि अजभप्रेत िै ।

(2) इस जिजनयम में िब तक दक अन्यथा जिजनर्ििष्ट न

िो,—

(क) “लेखन” में जनर्ििष्ट अजभव्यजियों में मलद्रण, टंकण,

जलथोग्राफी, फोटोग्राफी और िृश्यमान रूप में िब्िों को प्रस्ट्तलत

करने या पलन:प्रस्ट्तलत करने के अन्य तरीके सजम्मजलत िोंगे ; और

(ख) दकसी ऐसे व्यजि के संिभि में, िो अपने नाम का

िस्ट्ताक्षर करने में असमथि िै, “िस्ट्ताक्षर” िब्ि में उसके अंगूठे

का जनिान या उसके िस्ट्ताक्षर संज्ञाजपत करने के जलए सम्यक्

रूप से अनलप्रमाजणत अन्य जचह्न सजम्मजलत िोगा ।

(3) उन िब्िों और पिों के, िो इस जिजनयम में

पररभाजषत निीं िैं, ककंतल भारतीय संजििा अजधजनयम, 1872

(1872 का 9) में पररभाजषत िैं, ििी अथि िोंगे, िो उि

अजधजनयम में क्रमि: उनके िैं ।

अध् याय 2

कर का उि् ग्रिण

3. कर का उि् ग्रिण— (1) इस जिजनयम के अन्य उपबंधों के

अधीन रिते हुए, प्रत्येक व्यौिारी, िो,—

(क) इस जिजनयम के अधीन रजिस्ट्रीकृत िै ; या

(ख) इस जिजनयम के अधीन रजिस्ट्रीकृत िोना अपेजक्षत

िै,

इस जिजनयम के अनलसार संगजणत कर का संिाय, इस जिजनयम

में उपबंजधत रीजत में और समय पर करने का िायी िोगा ।

(2) प्रत्येक ऐसा व्यौिारी, िो माल के जिक्रय पर, इस

जिजनयम के अधीन कर का संिाय करने का िायी िो गया िै,

तब तक इस प्रकार िायी बना रिेगा, िब तक पूििती बारि

मास, या ऐसी और अिजध, िो जिजित की िाए, के िौरान

उसका कराधेय आितिन कराधेय मात्रा से कम रिता िै और

बारि मास या ऐसी और अिजध की समाजप्त पर, कर संिाय

करने का उसका िाजयत्ि समाप्त िो िाएगा :

परंतल कोई ऐसा व्यौिारी, जिसका इस जिजनयम के

अधीन कर संिाय करने का िाजयत्ि दकसी अन्य कारण से

समाप्त िो िाता िै, िि अपना रजिस्ट्रीकरण रद्द कराने के जलए

पिले आिेिन कर सकेगा और ऐसे रद्दकरण पर, कर संिाय

करने का उसका िाजयत्ि समाप्त िो िाएगा :

परंतल यि और दक व्यौिारी, उस तारीख तक कर संिाय

करने का िायी िोगा, जिस तारीख को उसका रजिस्ट्रीकरण

समाप्त कर दिया गया िै ।

(3) प्रत्येक ऐसा व्यौिारी, जिसका इस जिजनयम के

अधीन कर संिाय करने का िाजयत्ि समाप्त िो गया िै या

जिसका रजिस्ट्रीकरण रद्द कर दिया गया िै, यदि उसके आितिन

का दकसी भी िषि के प्रारंभ से संगजणत दकया िाता िै, जिसके

अंतगित ऐसा िषि भी िै, जिसमें रजिस्ट्रीकरण रद्द कर दिया गया

िै, यदि ऐसे िषि के भीतर दकसी भी दिन कराधेय मात्रा पलन:

अजधक िो िाती िै तो, उस तारीख से और उसके पश् चात् उसके

द्वारा दकए गए सभी जिक्रय पर, उस तारीख से िी, जिसको

उसका आितिन दफर से कराधेय मात्रा से अजधक िो िाता िै,

ऐसे कर का संिाय करने के जलए िायी िोगा ।

(4) ििां यि पाया िाता िै दक व्यौिारी के रूप में

रजिस्ट्रीकृत दकसी व्यजि को इस प्रकार रजिस्ट्रीकृत निीं िोना

चाजिए था, तो इस जिजनयम में अंतर्ििष्ट दकसी बात के िोते हुए

भी, ऐसा व्यजि, उस अिजध के जलए, जिसके िौरान िि

रजिस्ट्रीकृत था, कर का संिाय करने का िायी िोगा ।

(5) यदि कोई ऐसा व्यजि, िो माल का पररििन करता

िै या दकसी व्यजि की ओर से या उसके जनजमत्त पररिान करने

के जलए माल को अजभरक्षा में रखता िै तो ऐसा करने के जलए

आयलि द्वारा अपेजक्षत िोने पर,—

(क) माल के संबंध में, अपने पास की कोई िानकारी

प्रस्ट्तलत करने में ; या

(ख) उसके जनरीक्षण की अनलमजत िेने में,

असफल रिता िै तो ऐसी दकसी अन्य कारिाई पर, िो ऐसे

व्यजि के जिरुद्ध की िा सकती िै, प्रजतकूल प्रभाि डाले जबना,

यि उपधारणा की िा सकेगी दक उस माल का, जिसके संबंध में

िि िानकारी प्रस्ट्तलत करने में या जिसके जनरीक्षण की अनलमजत

िेने में असफल रिा िै, िि स्ट्िामी िै और िि उसके द्वारा

लक्षद्वीप में जिक्रय के जलए धारण दकया गया िै और उस पर

जिजनयम के उपबंध लागू िोंगे ।

(6) यदि कोई ऐसा व्यजि, िो माजलक, अजभकताि के रूप

में या दकसी अन्य िैजसयत से लक्षद्वीप में कोई प्रिििनी-सि-

जिक्रय का आयोिन करता िै और,—

(क) प्रिििनी-सि-जिक्रय से पिले, उसके िौरान या उसके

पश् चात्, दकसी प्रजतभागी द्वारा खरीिे गए या स्ट्टॉक में रखे गए

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

7

या जिक्रय दकए गए माल के संबंध में कोई िानकारी प्रस्ट्तलत

करने ; या

(ख) यि सलजनजश् चत करने दक प्रिििनी-सि-जिक्रय में सभी

प्रजतभाजगयों ने इस जिजनयम के अधीन रजिस्ट्रीकरण अजभप्राप्त

दकया िै और िोध्य कर का संिाय कर दिया िै ; या

(ग) प्रजतभाजगयों के कारबार पररसर या माल या खाते

और अजभलेखों के जनरीक्षण की अनलमजत िेने ; या

(घ) प्रिििनी-सि-जिक्रय के संबंध में आयोिक के खाते

और अजभलेखों के जनरीक्षण की अनलमजत िेने,

में असफल रिता िै, तो ऐसी दकसी अन्य कारिाई पर, िो ऐसे

प्रजतभागी के जिरुद्ध की िा सकती िै, प्रजतकूल प्रभाि डाले

जबना, यि उपधारणा की िा सकेगी दक ऐसे प्रजतभागी, िो इस

जिजनयम के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करने में असफल रिा िै,

के माल का, या उस माल का, जिसके संबंध में प्रजतभागी

िानकारी प्रस्ट्तलत करने में या जनरीक्षण की अनलमजत िेने में

असफल रिा िै, का स्ट्िामी आयोिक िै और िि उसके द्वारा

लक्षद्वीप में जिक्रय के जलए धारण दकया गया िै और उस पर

जिजनयम के उपबंध लागू िोंगे ।

4. कर की िर— (1) ऐसे माल के संबंध में, जिसका

जििरण पिली अनलसूची में दिया गया िै, व्यौिारी के कराधेय

आितिन पर, उस अनलसूची में यथा जिजनर्ििष्ट कर की िर संिेय

िोगी ।

(2) सरकार, अजधसूचना द्वारा, यदि िि आिश्यक

समझे, पिली अनलसूची में यथा जिजनर्ििष्ट कर की िरों को

संिोजधत कर सकेगी ।

5. कराधेय आितिन—इस जिजनयम के प्रयोिनों के जलए,

“कराधेय आितिन” से कर अिजध के िौरान दकसी व्यौिारी का

आितिन अजभप्रेत िै, िो उसमें से जनम् नजलजखत की कटौती करने

के पश् चात् िेष बचता िै,—

(क) ऐसे जिक्रय का आितिन, िो धारा 7 के अधीन कर के

अध्यधीन निीं िै ; और

(ख) ऐसे माल के जिक्रय का आितिन, िो धारा 6 के

अधीन कर से छूट प्राप्त िै ।

6. कर से छूट प्राप्त जिक्रय—िूसरी अनलसूची में सूचीबद्ध

दकए िाने िाला माल, उि अनलसूची में उपिर्णित जनबंधनों

और अपिािों के अध्यधीन रिते हुए, कर से छूट प्राप्त िोगा ।

7. कजतपय जिक्रय का कर से िायी न िोना—इस

जिजनयम या इसके अधीन बनाए गए जनयमों में अंतर्ििष्ट कोई

बात, दकसी माल के जिक्रय के संबंध में कर अजधरोजपत करने

िाली या अजधरोपण के जलए प्राजधकृत करने िाली निीं समझी

िाएगी, िब ऐसा जिक्रय,—

(क) अंतर-राज्यीय व्यापार या िाजणज्य के अनलक्रम में

िोता िै ; या

(ख) लक्षद्वीप से बािर िोता िै ; या

(ग) भारत के राज्यक्षेत्र में माल के आयात के या

राज्यक्षेत्र से बािर माल के जनयाित के अनलक्रम में िोता िै ; या

(घ) जििेिी िायलयान (ईंधन पर कर और िल्क से छूट)

अजधजनयम, 2002 (2002 का 36) की धारा 3 के अधीन

अपनी िजियों का प्रयोग करते हुए, केंद्रीय सरकार द्वारा िारी

अजधसूचना के अनलसार ईंधन और स्नेिक तेलों के जिक्रय पर कोई

कर निीं लगाया िाएगा, िो भारत से जभि अन्य िेि में

रजिस्ट्रीकृत दकसी भी िायलयान का भाग बनने िाले ररसेप्टकल्स

में भरे िाते िैं, यदि,—

(i) उि िेि अंतरराष्ट्रीय और नागररक उड्डयन पर

कन्िेंिन, 1944 का एक पक्षकार िै ;

(ii) उि िेि ने भारत के साथ एक िायल सेिा करार

दकया िै ; और

(iii) िायलयान भारत के जलए या भारत से दकसी

अनलसूजचत या गैर-अनलसूजचत सेिा पर प्रचाजलत िै ।

8. कर का समायोिन—(1) ऐसी ितों के अधीन रिते

हुए, िो जिजित की िाए, यि धारा ििां लागू िोगी, ििां दकसी

व्यौिारी द्वारा माल के जिक्रय के संबंध में,—

(क) िि जिक्रय रद्द कर दिया गया िै ;

(ख) उस जिक्रय की प्रकृजत को मौजलक रूप से फेरफार या

पररिर्तित कर दिया गया िै ;

(ग) उस जिक्रय के जलए पिले से सिमत प्रजतफल में,

प्राप्तकताि के साथ करार द्वारा, या तो छूट के प्रस्ट्ताि या दकसी

अन्य कारण से, पररिर्तित कर दिया गया िै ;

(घ) जिक्रय दकया गया माल या माल का भाग, जिक्रय

की तारीख से छि मास के भीतर व्यौिारी को िापस कर दिया

गया िै ; या

(ङ) माल के क्रय के जलए क्रेता द्वारा िेय संपूणि कीमत या

उसका कलछ भाग व्यौिारी द्वारा डूबंत ऋण के रूप में दिखा

दिया गया िै ;

और व्यौिारी ने,--

(i) उस क्रय के संबंध में कर बीिक प्रिान कर दिया िै

और उस जिक्रय पर कर के रूप में भाररत उसमें िर्िित रकम,

उस जिक्रय पर उजचत रूप से कर प्रभायि निीं िै ; या

(ii) कर अिजध के संबंध में जििरणी प्रस्ट्तलत कर िी िै,

जिसके संबंध में उस जिक्रय पर कर आरोप्य माना िा सका िै

और उस जिक्रय पर कर की रकम के जलए संगजणत दकया गया िै

दक उस जिक्रय पर उजचत रूप से रकम प्रभायि निीं िै ।

(2) ििां दकसी व्यौिारी ने उपधारा (1) में अनलध्यात

रूप से कर की गलत रकम का जिसाब लगाया िै, िि व्यौिारी

उस कर अिजध के जलए जििरणी में उस व्यौिारी द्वारा िेय कर

की गणना का समायोिन करेगा, जिसके िौरान यि प्रकट िै दक

कर गलत िै और यदि,—

(क) उस जिक्रय के संबंध में संिेय कर िास्ट्ति में व्यौिारी

द्वारा संगजणत दकए गए कर से अजधक िै, उस अजतररि रकम

8

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

को उस कर अिजध में, जिसमें समायोिन दकया गया िै, उत्पि

हुआ माना िाएगा और दकसी पूिि कर अिजध के जलए निीं

माना िाएगा ; या

(ख) कर िास्ट्ति में जिक्रय के संबंध में िेय कर से अजधक

िै, उस कमी की रकम को उस कर अिजध में, जिसमें समायोिन

दकया गया िै, व्यौिारी द्वारा िेय कर से घटाया िाएगा और

दकसी पूिि कर अिजध के जलए निीं माना िाएगा ।

(3) ििां व्यौिारी माल जिक्रय करता िै, जिसका

उपयोग,—

(क) ऐसा जिक्रय, िो इस जिजनयम के अधीन कर के

अध्यधीन िै या ऐसा जिक्रय, िो धारा 7 के अधीन कर के जलए

िायी निीं िै, का भाग बनाने के जलए दकया गया िै ; और

(ख) अन्य प्रयोिनों का भाग बनाने के जलए दकया गया

िै, माल के जिक्रय पर कर की रकम, जनम् न में से अजधक

िोगी,—

(i) ए—(ए x बी/सी) ; या

(ii) ए— बी ;

ििां ए = िि कर, जिसके जलए व्यौिारी इस धारा के

अजतररि जिक्रय के संबंध में िायी िोगा ;

बी = िि रकम, जिसके द्वारा धारा 9 की उपधारा (4)

के अधीन माल के संबंध में व्यौिारी का प्रजतिेय कर कम दकया

गया था ;

सी = धारा 9 की उपधारा (4) के अधीन कटौती से पिले

कर प्रत्यय की रकम ।

9. कर प्रत्यय— (1) कोई कर प्रत्यय—

(क) दकसी ऐसे व्यजि से, िो रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी निीं

िै, क्रय दकए गए माल के बिले माल के क्रय की ििा में अनलज्ञात

निीं दकया िाएगा;

(ख) गैर-जिश् िसनीय माल के क्रय के जलए तीसरी

अनलसूची में यथा सूचीबद्ध िै;

(ग) ऐसे माल के क्रय के जलए अनलज्ञात निीं दकया िाना

िै जिसे व्यजि द्वारा स्ट्िाजमत्ि या अजधकृत भिन के संजिमािण में

सम्मजलत दकए िाने िैं ;

(घ) ऐसे व्यौिारी से क्रय दकए गए माल के जलए िो

धारा 16 के अधीन कर संित्त करने के जलए चलने गए िैं,

अनलज्ञात निीं दकया िाएगा ;

(ड.) नैजमजत्तक व्यापारी से क्रय दकए गए माल के जलए

अनलज्ञात निीं दकया िाएगा;

(च) व्यौिारी या व्यौिाररयों के िगि को, तब तक

अनलज्ञात निीं दकया िाएगा िब तक क्रय करने िाले व्यौिारी

द्वारा संित्त कर िास्ट्ति में जिक्रय करने िाले व्यौिारी द्वारा

सरकार के पास िमा न करा दिया गया िो या आउटपलट कर

िेयता के प्रजत जिजधपूणि समायोिन न करा दिया गया िो और

सम्बजधत कर अिजध के जलए फाइल की गई जििरणी में ठीक से

परािर्तित न कर दिया गया िो ।

(2) कर प्रत्यय की रकम, जिसके जलए व्यौिारी माल के

क्रय के संबंध में िकिार िै उपधारा (3), उपधारा (5) और

उपधारा (7) में जिजित रीजत में कम की गई कर अिजध में िोने

िाले इनपलट कर की रकम िोगी ।

(3) ििां दकसी व्यौिारी ने माल क्रय दकया िै और माल

भागत: उपधारा (1) में जनर्ििष् ट जिक्रय के प्रयोिन के जलए औऱ

भागत: अन् य प्रयोिन के जलए प्रयलक् त दकया िाना िै, ििां

प्रत्यय कर की रकम अनलपाततः कम कर िी िाएगी ।

(4) व्यौिारी द्वारा उस जिस्ट्तार तक, जिसके जलए माल

धारा 10 की उपधारा (4) में जिजनर्ििष् ट रीजत में प्रयलक् त दकया

िाता िै, अिधाररत करने की पद्धजत उन पररजस्ट्थजतयो में ऋिल

और यलजक् तयलक् त िोगी :

परन्तल आयलि—

(क) कारणों को अजभजलजखत करने के पश् चात्, व्यौिारी

द्वारा अपनाई गई पद्धजत को अस्ट्िीकार कर सकेगा और कर

प्रत्यय की रकम की गणना कर सकेगा ; और

(ख) कजतपय मामलों में कर प्रत्यय की रकम या दकसी

समायोिन या कर प्रत्यय की रकम की कमी की सगंणना करने

के जलए जिजित कर सकेगा ।

(5) उपधारा (1) में अन् तर्ििष् ट दकसी बात के िोते हुए

भी, ििााँ—

(क) व्यौिारी ने ऐसा माल (पूंिी माल से जभि) क्रय

दकया िै जिसके जलए उपधारा (1) के अधीन कर प्रत्यय उत् पन् न

िोता िै ;

(ख) ऐसे माल में से जिजनर्मित माल या मालों को—

(i) अजनिासी परेषण अजभकताि; या

(ii) व्यौिारी की अजनिासी िाखा के जलए अन् तरण के

मद्दे लक्षद्वीप से जनयाित दकया िाना िै ; और

(ग) अन् तरण लक्षद्वीप में दकए गए जिक्रय के रूप में निीं

िोगा ; कर प्रत्यय की रकम जिजित दकए गए प्रजतित द्वारा कम

कर िी िाएगी ।

स्ट् पष् टीकरण—िंकाओं को िूर करने के जलए यि स्ट् पष् ट

दकया िाता िै दक अरजिस्ट् रीकृत व्यौिारी से माल के क्रय के

जलए कोई कर प्रत्यय अनलज्ञात निीं की िाएगी ।

(6) कर प्रत्यय का दकसी व्यौिारी द्वारा केिल तभी िािा

दकया िा सकेगा यदि िि उस समय कर बीिक धारण करता िै

िब कर अिजध के जलए जिजित की गई जििरणी प्रस्ट्तलत करता

िै।

(7) उपधारा (1) में अन् तर्ििष् ट दकसी बात के िोते हुए

भी, ििां—

(क) व्यौिारी ने ऐसा माल (पूंिी माल से जभि) क्रय

दकया िै जिसके जलए उपधारा (1) के अधीन कर प्रत्यय हुआ िै;

और

(ख) ऐसे माल में से जिजनर्मित मालों को केन्द्रीय जिक्रय

कर अजधजनयम, 1956 (1956 का 74) की धारा 8 की

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

9

उपधारा (1) के अधीन दकए गए जिक्रय के रूप में लक्षद्वीप से

जनयाित दकए िाने िैं, तो कर प्रत्यय की रकम जिजित दकए गए

प्रजतित से कम कर िी िाएगी।

(8) उपधारा (1) और उपधारा (2) के उपबंधों के

अध्यधीन, जिक्रय के जलए उपयोग दकए िाने िाले माल का कर

प्रत्यय, धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (यख) के उपखंड (v) में

यथा पररभाजषत िै िो जनम् नानलसार अनलज्ञात दकया िाएगा :—

(क) कर अिजध में उत्पि हुए ऐसे माल के इनपलट कर का

¼ िां जिस्ट्सा उसी कर अिजध में;

(ख) तीन ठीक जित्तीय िषों में, तत् स्ट् थानी कर अिजध में

समान अनलपात में, ऐसे इनपलट कर का िेष ¾िां जिस्ट्सा ।

10. कर प्रत्यय का समायोिन—(1) ििां दकसी क्रेता

को धारा 51 के जनबंधनानलसार साख पत्र या नामे नोट िारी

दकया गया िै या यदि िि क्रय दकए गए माल को िापस

लौटाता िै या उसे अस्ट्िीकृत कर िेता िै जिसके पररणामस्ट्िरूप

उसके द्वारा दकसी ऐसी कर अिजध के संबंध में कर प्रत्यय का

िािा दकया िाता िै िो माल को क्रय करने से संबंजधत िै, या

अजधक िो िाता िै, ििां िि ऐसे कर अिजध की बाबत जिसमें

साख पत्र या नामे नोट िारी दकया गया या माल िापस जलया

िाता िै उसे अनलज्ञात कर प्रत्यय की रकम को समायोजित करके

ऐसी कम या अजधक की प्रजतपूर्ति करेगा ।

(2) यदि माल—

(क) धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन जिजनर्ििष्ट

प्रयोिनों के जलए उपयोग दकए िाने के आिय से क्रय दकया

गया था और तत्पश् चात् उन प्रयोिनों से जभि िो उि उपधारा

के अधीन जिजनर्ििष्ट िै, पूणित: या भागत: उपयोग दकया गया िै;

या

(ख) उक् त धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन उन

जिजनर्ििष् ट प्रयोिनों से जभि प्रयोिन से क्रय करना आिजयत

था, और तत् पश् चात् उन प्रयोिनों से जभि िो उि उपधारा में

जिजनर्ििष्ट प्रयोिनों के जलए पूणित: या भागत: उपयोग दकया

गया िै, ऐसे क्रय में जिजनर्ििष्ट प्रयोिनों के जलए िािा दकए गए,

कर प्रत्यय उस कर अिजध के जलए घटाया या बढाया िाएगा

(यथाजस्ट्थजत) जिसके िौरान उि उपयोग अन्यथा हुआ था ।

(3) ििां—

(क) माल व्यौिारी द्वारा क्रय दकया गया था;

(ख) व्यौिारी ने माल की बाबत कर प्रत्यय का िािा

दकया और जिजित प्रजतित कर से प्रत्यय में कम निीं दकया

िाता ; और

(ग) माल लक्षद्वीप से जनयाित दकया िै—

(i) केन्द्रीय जिक्रय कर अजधजनयम, 1956 (1956 का

74) की धारा 8 की उपधारा (1) के उपबंधों के अनलसार दकए

गए जिक्रय के माध्यम से ; या

(ii) जिक्रय रूप से जभि, रजिस्ट् रीकृत व्यौिारी की िाखा

के जलए या परेषण अजभकताि व्यौिारी,

जिजित अनलपात द्वारा िास्ट्तजिक रूप से िािा दकए गए

कर प्रत्यय की रकम को कम करेगा ।

(4) यदि माल िो व्यौिारी द्वारा क्रय दकया गया था—

(क) धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन जिजनर्ििष्ट

प्रयोिनों के जलए प्रयोग दकए िाने के जलए आिजयत था ; और

(ख) तत् पश् चात् व्यजि द्वारा स्ट्िाजमत्िाधीन या अजधभोग

भिन के संजनमािण में सजम्मजलत दकया गया िै,

तो ऐसे क्रय की बाबत िािा दकए गए कर प्रत्यय ऐसी

कर अिजध में कम दकया िाएगा जिसके िौरान ऐसा जनगमन

िोता िै ।

(5) ििां माल िो व्यौिारी द्वारा क्रय दकया गया िै ऐसे

मूल्य से कम मूल्य पर जिक्रय दकया िाता िै जिस पर इसे

व्यौिारी द्वारा क्रय दकया गया था तो ऐसे क्रय पर कर प्रत्यय

उस कर अिजध, जिसके िौरान माल जिक्रय दकया िाता िै,

आनलपाजतक रूप से कम िो िाएगा ।

11. िलद्ध कर—(1) कर अिजध के जलए दकसी व्यौिारी

द्वारा संिेय िलद्ध कर को जनम् नजलजखत सूत्र द्वारा अिधाररत

दकया िाएगा—

िलद्ध कर = ओ—आई—सी

ििां—

ओ = कर अिजध में उत्पि िोने िाले कराधेय आितिन

की बाबत धारा 4 में जनयत िरों पर व् यजक् त द्वारा संिेय कर की

रकम धारा 8 द्वारा अपेजक्षत संिेय कर को दकसी समायोिन को

ध्यान में रखते हुए समायोजित की िाएगी ।

आई = कर अिजध में उत्पि िोने िाले कर प्रत्यय की

रकम जिसके जलए व्यजि धारा 9 के अधीन िकिार िै, धारा

10 द्वारा अपेजक्षत कर प्रत्यय को दकसी समायोिन को ध्यान में

रखते हुए समायोजित की िाएगी ।

सी = रकम, यदि कोई िो, उपधारा (2) के अधीन पूिि

कर अिजध से अग्रेजषत की िाएगी ।

(2) ििां व्यौिारी का िलद्ध कर उपधारा (1) के अधीन

ऋणात्मक मूल्य के बराबर िै ििां व्यौिारी—

(क) केन्द्रीय जिक्रय कर अजधजनयम, 1956 (1956 का

74) के अधीन उसके द्वारा संिेय कर को, यदि कोई िो, के

जिरुद्ध उसी कर अिजध में उि रकम, समायोजित करेगा; और

(ख) उपधारा (2) के खण्ड (क) के अधीन आिेिन के

पश् चात् िेष रकम को, यथाजस्ट्थजत, अगले कलैण्डर मास या कर

अिजध के जलए, उसी िषि में अग्रनीत करने का िकिार िोगा या

उसी िषि की कर अिजध के अन्त में उपधारा (2) के खण्ड (क) के

अधीन आिेिन करने के पश् चात् िापसी का िािा करने का

िकिार िोगा और आयलि धारा 38 और धारा 39 में िर्णित

रीजत से िािे िापस करेगा ।

(3) इस जिजनयम के अधीन दकसी संजििाकार द्वारा

संकमि संजििा के जनष्पािन में संजििाकार को संजििा द्वारा

आपूर्ति दकए गए माल के मूल्य का प्रजतजनजधत्ि करने िाली

10

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

रकम पर कोई कर संिेय निीं िोगा, जिसमें संजििा के ितों के

अधीन ऐसे माल का स्ट्िाजमत्ि संजििी के पास रिता िै और

संजििाकार को संजििी द्वारा आपूर्ति दकए गए माल के मूल्य का

प्रजतजनजधत्ि करने िाली रकम में संजििी का जिस्ट्सा निीं िै और

संकमि संजििा के जनष्पािन के जलए संजििी द्वारा संजििाकार को

संिेय रकम से कटौती योग्य निीं िै ।

12. िि समय, जिस पर आितिन की रकम, क्रयों के

आितिन और समायोिन उद्भूत िोता िै— (1) उपधारा (2),

उपधारा (3) और उपधारा (4) के उपबंधों के अधीन रिते हुए,

दकसी व्यौिारी के आितिन और क्रयों के आितिन िो दकसी कर

अिजध के िौरान उत्पि िोती िै, की रकम ऐसे व्यौिारी के

लेखाओं में अजभजलजखत रकम ििां िोगी ििां उन लेखाओं को

जनयजमत रूप से और सलजनयोजित रूप से तैयार दकया िाता िै

और बनाए रखा िाता िै, उनके व्यापार का सिी अिलोकन

दकया िाता िै औऱ व्यौिारी द्वारा िाजणजज्यक या आय-कर के

प्रयोिनों के जलए व्यौिारी के कारबार के आितिन का अिधारण

करने में जनयोजित दकया िाता िै ।

(2) आयलि अजधसूचना द्वारा—

(क) व्यौिारी के कजतपय िगों को संित्त या रकम के

आधार पर आितिन ररकाडि करने के जलए अनलज्ञात कर सकेगा ;

और

(ख) िेय या प्राप्य रकम के आधार पर व्यौिारी के

कजतपय िगों को आितिन ररकाडि करने के जलए अपेक्षा कर

सकेगा ।

(3) ििां कोई व्यौिारी क्रयों के आितिन और आिति को

अिधाररत करने िाली पद्धजत को पररितिन करने की इच्छा

रखता िै तो िि केिल आयलि की सिमजत से और जनबंधनों और

ितों पर िो आयलि अजधरोजपत करे, पररितिन कर सकेगा ।

(4) सरकार िि समय जिजित कर सकेगी जिस पर

व्यौिारी :—

(क) आितिन ;

(ख) क्रयों के आितिन ; और

(ग) कर का समायोिन या कर प्रत्यय का समायोिन

को, संव्यििारों के दकसी िगि के जलए उत्पि िोने के रूप में

मानेगा ।

अध्याय 3

जििेष व्यिस्ट्थाएं

13. पूर्ििकता—ििां इस अध्याय के उपबंध अध्याय 2

के उपबंध से असंगत िै, ििां इस अध्याय के उपबंध असंगजत की

मात्रा तक अजभभािी िोंगे।

14.

संक्रमण

के

िौरान

अग्रनीत

स्ट् टाक

का

उपचार—(1) इस जिजनयम के प्रारम्भ से चार मास की अिजध

के भीतर उपधारा (2) में जनर्ििष्ट प्रत्यय के िािे की इच्छा करने

िाले सभी रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी, व्यापार संबंधी स्ट्टाक (जिसे

इस धारा में आरजम्भक स्ट्टाक किा गया िै) के जलए अपने

व् यापार संबंधी स्ट् टाक, कच्ची सामग्री औऱ पैककंग सामग्री के

जििरण आयलि को प्रस्ट्तलत करेगा ।

(2) िंका को िूर करने के जलए उपधारा (2) के अधीन

दकसी कर प्रत्यय का—

(क) कच्ची सामग्री या पूंिी माल पर संित्त कर के जबना

जिजनर्मित दकए गए तैयार माल ;

(ख) प्रारम् भ के पश् चात् चार मास से अजधक पर प्रस्ट् तलत

दकए गए जििरण ; या

(ग) आरजम्भक स्ट्टाक िो लक्षद्वीप के बािर दकए िैं, के

जलए िािा निीं दकया िा सकेगा।

(3) आरंजभक स्ट्टाक पर एक लाख रुपये से अजधक कर

प्रत्यय का िािा करने की िांछा रखने िाला प्रत्येक व्यौिारी

जिजित प्रारूप में, जििरण के साथ लेखाकार द्वारा िस्ट्ताक्षररत

प्रमाणपत्र प्रस्ट्तलत करेगा जिसमें प्रमाजणत दकया गया िो दक िलद्ध

प्रत्यय िािा सत्य और सिी िै ।

15. उपयोग दकया हुआ माल—(1) इस धारा के उपबंध

लागू िोंगे ििां—

(क) एक रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी उपयोग दकया हुआ माल

जिक्रय करता िै ;

(ख) एक रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी ऐसे जनिासी जिक्रेता से

माल खरीिता िै, िो इस जिजनयम के अधीन रजिस्ट्रीकृत निीं

था ;

(ग) माल या तो गैर-उपांतररत प्ररूप में पलन: जिक्रय के

जलए व्यापार स्ट् टाक के रूप में या अन्यथा या व्यापार संबंधी

स्ट्टाक में सजम्मजलत करने पर प्रभाग के जलए कच्ची सामग्री के

रूप में खरीिा गया था ;

(घ) रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी, यथाजस्ट् थजत, माल या माल के

जिक्रय पर जिसमें िे सजम्मजलत थे धारा 3 के अधीन कर के

जलए िायी िोगा ; और

(ड.) रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी मालों के जलए संित्त रकम का

पयािप्त सबूत रखेगा ।

(2) उपधारा (1) में उजल्लजखत पररजस्ट्थजतयों में

रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी—

(क) जनिासी जिक्रेता द्वारा उत्पि इनपलट कर िब उसने

माल क्रय दकया िो;

(ख) जनिासी जिक्रेता के जलए माल की िास्ट्तजिक लागत

का कर भाग ;

(ग) रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी द्वारा अपने क्रय के समय पर

माल की उजचत बािार मूल्य का कर भाग ; या

(घ) माल के जलए रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी द्वारा संित्त

प्रजतफल के कर भाग का धारा 9 के प्रयोिन के जलए कर प्रत्यय

का िकिार िोगा ।

(3) ििां िो ििार रुपए से अजधक के माल के जलए

रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी द्वारा संित्त रकम, कर प्रत्यय, कर अिजध

में अनलज्ञात की िाएगी िब माल रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी द्वारा

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

11

जिक्रय दकया गया िै या माल जिसमें िे सजम्मजलत दकए िैं

रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी द्वारा जिक्रय कर दिया गया िै ।

16. जिजनर्ििष्ट व्यौिारी के जलए स्ट्कीम की सरंचना—

(1) इस जिजनयम में प्रजतकूल दकसी बात के िोते हुए भी, प्रत्येक

व्यौिारी जिसका—

(क) प्रारम्भ से पूििषि में आितिन ; या

(ख) ितिमान िषि में आितिन पांच लाख या ऐसी अन्य

रकम िो सरकार द्वारा रािपत्र में अजधसूचना द्वारा जिजनर्ििष्ट

की िाए, से अजधक निीं िै, उसे इस धारा के अधीन कर संिाय

करने का जिकल्प िोगा :

परन्तल यि उपधारा उस व्यौिारी पर लागू निीं िोगी िो

िषि के िौरान दकसी समय पर जिसमें उसे इस उपधारा के

अधीन का सिांय करने का जिकल्प िै या यदि िि केन्द्रीय

जिक्रय कर अजधजनयम, 1956 (1956 का 74) के अधीन

लक्षद्वीप में रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी िै, लक्षद्वीप के बािर दकसी

स्ट्थान से माल उत् पात कर रिा िै या लक्षद्वीप के बािर दकसी

स्ट्थान से माल जिक्रय या प्रिान कर रिा िै :

परन्तल यि और दक उस मामले में, जिसमें सरकार ने

उपधारा (12) के अधीन व्यौिाररयों के िगि के जलए स्ट्कीम

सरंचना अजधसूजचत की िै, ऐसे व्यौिारी को इस उपधारा के

अधीन कर सिाय करने का जिकल्प निीं िोगा ।

(2) इस अजधजनयम की धारा 19 के अधीन रजिस्ट्रीकरण

के जलए आिेिन करते समय उपधारा (1) के अधीन आने िाले

व्यौिारी के जलए यि जिजनर्ििष्ट करना अपेजक्षत िोगा दक िि

इस धारा के अधीन कर संिाय करने का आिय रखता िै :

परन्तल यदि एक बार व्यौिारी इस धारा के अधीन कर

संिाय करने का चलनाि करता िै तो जिकल्प केिल उस िषि के

अन्त के पश् चात् िापस जलया िा सकेगा जिसमें जिकल्प आिेिन

द्वारा ऐसे समय के भीतर और ऐसी रीजत में, िो जिजित की

िाए, आयलि को दकया गया था :

परन्तल यि और दक ििां व्यौिारी इस धारा के अधीन कर

संिाय करने के अपने जिकल्प को िापस लेने का चलनाि करता िै

तो िि उस तारीख पर, िब ऐसा िापस लेना धारा 20 में

अन्तर्ििष्ट पररजस्ट्थजतयों में प्रभाििील िोता िै ििां तक ये लागू

िो, लक्षद्वीप में उसके द्वारा दकए गए व्यापार संबंधी स्ट्टाक,

कच् च ी सामग्री और पैककंग सामग्री पर इस जिजनयम के अधीन

संित्त कर के प्रत्यय का िािा करने के जलए पात्र िोगा ।

(3) उस ििा में, ििां कोई व्यजि इस धारा के अधीन

कर संिाय करने के जलए चलनाि करता िै, जिसका इस जिजनयम

के प्रारम्भ के पूिि िषि में आितिन पांच लाख या ऐसी अन्य रकम

िो सरकार द्वारा रािपत्र में अजधसूचना द्वारा जिजनर्ििष्ट की

िाए से अजधक निीं िै, तो उसी के जलए इस धारा के अधीन

ऐसे समय के भीतर, ऐसी रीजत में, िो जिजित की िाए, कर

संिाय करने का चलनाि जिजनर्ििष्ट करना अपेजक्षत िोगा।

(4) ििां कोई व्यौिारी इस धारा के अधीन कर संिाय

करने का चलनाि करता िै, तो व्यौिारी का िलद्ध कर व्यौिारी के

आितिन के रुपए में एक पैसा की िर पर जिजनजश् चत की गई

रकम िोगी ।

(5) एक व्यौिारी िो इस धारा के अधीन कर संिाय

करने के जलए चलना हुआ िै—

(क) ऐसे व्यजि से, िो इस जिजनयम के अधीन

रजिस्ट्रीकृत निीं िै माल क्रय निीं करेगा;

(ख) धारा 11 के अधीन अपना िलद्ध कर संगजणत निीं

करेगा ;

(ग) धारा 9, धारा 14 और धारा 15 के अधीन प्रत्यय

िािा करने के जलए अनलज्ञात निीं िोगा;

(घ) कर बीिक िारी करने का िकिार निीं िोगा;

(ङ) इस जिजनयम के अधीन कर के माध्यम से दकसी

धनराजि का संग्रिण करना अनलज्ञात निीं िोगा ; और

(च) धारा 48 के अधीन यथा अपेजक्षत उसके सभी क्रयों

के जलए कर बीिक और खलिरा बीिक को िारी रखेगा ।

(6) ऐसे व्यजि के मामले में—

(क) जिसका आितिन इस जिजनयम के प्रारम्भ के पूिि िषि

में पांच लाख या ऐसी अन्य रकम, िो सरकार द्वारा रािपत्र में

अजधसूचना द्वारा जिजनर्ििष्ट की िाए, से अजधक निी िैं ; और

(ख) िो इस धारा की उपधारा (3) के जनबंधनों में इस

धारा के अधीन कर का संिाय करने का जिकल्प रखता िै,

उसके जलए ऐसे मालों के उजचत बािार मूल्य पर, धारा

4 में जिजनर्ििष्ट िरों पर इस जिजनयम के प्रारम्भ की तारीख पर

धाररत मालों पर कर संिाय करना अपेजक्षत िै ििां ऐसे माल

पर लक्षद्वीप के अधीन कोई कर निीं िोता िै ।

(7) उपधारा (6) के अधीन िेय कर का संिाय दकसी भी

समय व् यजक् त द्वारा इस धारा के अधीन कर संिाय करने के

अपने आिय को जिजनर्ििष् ट करने से पिले दकया िाएगा ।

(8) आरंजभक स्ट् टाक और तैयार माल के जििरण के साथ

उपधारा (6) में जनर्ििष् ट कर के संिाय का सबूत ऐसे प्रारूप में,

िो जिजित दकया िाए, आयलक् त को, दकसी भी समय िब

व् यजक् त इस धारा के अधीन संिान करने के अपने आिय को

जिजनर्ििष् ट करता िै, प्रस्ट् तलत दकया िाएगा ।

(9) अन् य उपबंधों के अध् यधीन, ििां कोई रजिस्ट् रीकृत

व् यौिारी धारा 4 में जनर्ििष् ट की गई िर पर कर संिाय करता िै

ििां िि आगामी िषों के प्रारंभ से इस धारा के अधीन कर

संिाय करने का चलनाि कर सकेगा :

परंतल ऐसा रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी के जलए उक् त आगामी

िषि के प्रथम दिन पर उसके द्वारा धाररत मालों पर धारा 4 में

जनर्ििष् ट िर पर कर संिाय करना अपेजक्षत िोगा ।

(10) यदि कोई व् यौिारी, िो इस धारा के अधीन कर

संिाय करने के जलए चलनाि करता िै, पांच लाख रुपए या ऐसी

धनराजि, िो रािपत्र में अजधसूचना द्वारा सरकार द्वारा

जिजनर्ििष् ट की िाए, से अजधक िै तो िि उस दिन को और उस

दिन से पांच लाख रुपए या ऐसी अन् य धनराजि, िो रािपत्र में

12

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

अजधसूचना द्वारा सरकार द्वारा जनर्ििष् ट की िाए, से अजधक

अपने कराधेय आितिन पर धारा 3 के अधीन कर संिाय करने के

जलए िायी िोगा और ऐसे दिन को लक्षद्वीप में उसके द्वारा

धाररत मालों पर इस जिजनयम के अधीन संित्त इनपलट कर के

प्रत् यय का िािा करने का िकिार िोगा :

परंतल ऐसा व् यौिारी धारा 3 के अधीन कर संिाय करने के

जलए िायी िो िाने के दिन से सात दिन के भीतर आयलक् त को

जिजित प्रारूप में सूजचत करेगा और ऐसी अन् य िानकारी, िो

जिजित की िाए, आयलक् त को प्रस्ट् तलत करेगा ।

(11) आयलक् त, ऐसे व् यौिाररयों या व् यौिाररयों के िगि

को, िो इस धारा के अधीन कर का संिाय करने के जलए चलनाि

करने िेतल िकिार निीं िै, अजधसूजचत कर सकेगा ।

(12) इस जिजनयम में अंतर्ििष् ट प्रजतकूल दकसी बात के

िोते हुए भी सरकार—

(क) रािपत्र में अजधसूचना द्वारा स्ट् कीमों की संरचना

ऐसी ितों और जनबंधनों के अध् यधीन, िो इसमें जिजनर्ििष् ट की

िाएं, व् यौिाररयों के िगि या व् यौिाररयों के िगों द्वारा कर

संिाय के जलए अजधसूजचत कर सकेगी और स्ट् कीमों के जिजभन् न

प्रकार व् यौिाररयों के जिजभन् न िगों के जलए अजधसूजचत दकए िा

सकेंगे ;

(ख) व्यौिाररयों के िगि या व्यौिाररयों के िगों द्वारा िेय

कर की संरचना की दकसी स्ट्कीम में, व्यौिाररयों के जिजभि िगि

या िगों के जलए करों की जिजभि िरें जिजनर्ििष्ट कर सकेगी

दकन्तल ऐसी स्ट्कीम में ति् धीन कर संिाय के जलए जिकल्प चलनने

िाला व्यौिारी का िलद्ध कर िाजयत्ि, व्यौिारी के आितिन के

रुपए में आठ पैसे से अजधक निीं िोगा ।

(13) (क) इस जिजनयम में अन् तर्ििष् ट प्रजतकूल दकसी

बात के िोते हुए भी नैजमजत्तक व्यापारी—

(i) लक्षद्वीप में कारबार आरम्भ करने से कम से कम तीन

दिन पिले अपने कारबार की ऐसी जिजिजष् टयों की सूचना, ऐसे

प्ररूप और रीजत में, िो जिजित की िाए, आयलि को िेगा;

(ii) ऐसी प्रजतभूजत िो आयलक् त द्वारा जनयत की िाए,

नकि में या बैंक ड्राफ्ट प्ररूप में, िो कर संिाय करने के जलए

प्राकजल् लत िाजयत् ि से अजधक न िोगी, सात दिन या ऐसी कम

अिजध जिसमें नैजमजत्तक व् यापारी लक्षद्वीप में कारबार संचाजलत

कर रिा िै, िमा करेगा ;

(iii) पूििती दििस के िौरान दकए गए जिक्रय पर िैजनक

कर संिाय करेगा;

(iv) लक्षद्वीप में अपने कारबार के समापन के पश् चात्

तत्काल एक जििरणी जिजित प्ररूप और रीजत में आयलि को

प्रस्ट्तलत करेगा; और

(v) कोई कर बीिक िारी निीं करेगा।

(ख) आयलि, उपधारा (1) में खंड (क) के अधीन उसे

प्रस्ट्तलत की गई सूचना के सत्यापन के पश् चात् और उस उपधारा

के खंड (ख) के अधीन प्रजतपूर्ति प्राप्त करने के पश् चात् नैजमजत्तक

व्यापारी को रजिस्ट्रर करेगा।

(ग) नैजमजत्तक व्यापारी के रजिस्ट्रीकरण पर आयलि

लक्षद्वीप में जिक्रय के माल को लाने और लक्षद्वीप से अजिदक्रत

माल को प्राप्त करने के जलए धारा 61 की उपधारा (4) में

जनर्ििष्ट उि् घोषणा के रूप में प्रयलि करने के जलए उसे अपेजक्षत

प्ररूप िारी कर सकेगा और नैजमजत्तक व्यापारी धारा 26 में

जनर्ििष्ट जििरणी के साथ प्रयलि दकए प्ररूप का पूणि लेखा िोखा

िेगा और उपयलिक् त प्ररूपों को लौटाएगा ।

(घ) आयलि नैजमजत्तक व्यापारी द्वारा प्रस्ट्तलत की गई

जििरणी की परीक्षा के पश् चात् िारी दकए गए खलिरा बीिकों

सजित उसके द्वारा रखे गए प्ररूपों और लेखाओं तक पांच दिन

के भीतर कर के जलए उसका जनधािरण करेगा और जनधािरण का

नोरटस उस पर तामील करेगा और इस जिजनयम के अधीन

दकसी कर और िेय दकसी अन् य बकाया का समायोिन करने के

पश् चात् उस प्रजतपूर्ति के मामले में िो नकि िमा के प्ररूप में

िमा की गई िै, प्रजतभूजत की बकाया रकम उसे िापस करेगा।

(ङ) नैजमजत्तक व्यापारी जनधािरण के नोरटस में उजल्लजखत

धन राजि तत्काल संिाय करेगा।

(च) यि समाधान िो िाने पर दक िेय रकम संित्त कर

िी गई िै, आयलि यथाजस्ट् थजत, प्रजतभूजत या बकाया प्रजतभूजत से

जनमलिक् त करेगा।

(छ) उस जिजनयम में अन्तर्ििष् ट दकसी बात के िोते हुए

भी, नैजमजत्तक व्यापारी के संबंध में कराधेय मात्रा िून्य िोगी ।

17. संबंजधत पक्षकारों के बीच संव् यििार— यदि—

(क) एक रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी संबंजधत व्यजि को माल

जिक्रय करता िै या िेता िै;

(ख) संव्यििार के जनबंधन या ितें संबंधों से प्रभाजित

हुई िैं ; और

(ग) संबंजधत व्यजि ने माल खरीिा था, संबजधत व्यजि

क्रय के जलए कर प्रत्यय का िकिार निीं िोगा या कर प्रत्यय की

रकम में धारा 9 की उपधारा (3) के अधीन छूट िी िाएगी,

रजिस्ट्रीकरत व्यौिारी द्वारा दकया गया संव्यििार जिक्रय

समझा िाएगा और माल का जिक्रय मूल्य उसका उजचत बािार

मूल्य समझा िाएगा।

अध्याय 4

रजिस्ट्रीकरण और प्रजतभूजत

18. आज्ञापक और स्ट् िैजच् छक रजिस्ट् रीकरण—(1) प्रत् येक

व् यौिारी के जलए इस जिजनयम के अधीन रजिस्ट् रीकरण के जलए

आिेिन करना अपेजक्षत िै, यदि—

(क) यदि व् यौिारी का आितिन प्रारंभ के पूिि िषि में

कराधेय मात्रा से अजधक िै ; या

(ख) यदि व् यौिारी का आितिन ितिमान िषि में कराधेय

मात्रा से अजधक िै ; या

(ग) व् यौिारी केंद्रीय जिक्रय कर अजधजनयम, 1956

(1956 का 74) के अधीन रजिस्ट् रीकृत िै या रजिस्ट् रीकृत िोना

अपेजक्षत िै, कर संिाय करने के जलए िायी िै :

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

13

परंतल व् यौिारी प्रथम अनलसूची में उजल् लजखत मालों में

अनन् य रूप से व् यििार करता िै तो रजिस्ट् रीकरण करना

अपेजक्षत निीं िोगा ।

(2) इस जिजनयम के प्रयोिन के जलए व् यौिारी की

“कराधेय मात्रा” िो लाख रुपए या ऐसी अन् य धनराजि, िो

सरकार द्वारा रािपत्र में अजधसूचना द्वारा अजधसूजचत की िाए,

िोगी :

परंतल कोई व् यौिारी, िो लक्षद्वीप में कोई माल जिक्रय के

जलए आयात करता िै, तो कराधेय मात्रा “िून् य” या ऐसी अन् य

धनराजि, िो सरकार द्वारा अजधसूजचत की िाए, िोगी ।

(3) व् यौिारी की कराधेय मात्रा में,—

(क) पूंिी आजस्ट् तयों के जिक्रय से ;

(ख) व् यौिारी के दक्रयाकलापों के पररसमापन के अनलक्रम

में दकए गए जिक्रय से ; और

(ग) व् यौिारी के दक्रयाकलापों के अस्ट् थायी कमी के भाग

के रूप में दकए गए जिक्रय से,

आितिन सजम् मजलत निीं िोगा ।

(4) कोई व् यजक् त, िो रजिस्ट् रीकृत िोने के जलए उपधारा

(1) द्वारा अपेजक्षत निीं िै, ककंतल िो—

(क) एक व् यौिारी िै ; या

(ख) ऐसे दक्रयाकलापों को करने के जलए जिजिष् ट तारीख

से आिय रखता िै, िो उसे एक व् यौिारी बनाती िै,

रजिस्ट् रीकरण के जलए आिेिन कर सकेगा ।

19. रजिस्ट् रीकरण—(1) रजिस्ट् रीकरण के जलए कोई

आिेिन ऐसे प्ररूप में, ऐसे समय में, ऐसी जिजिजष् टयों और

िानकारी को अंतर्ििष् ट करते हुए तथा ऐसी फीस, प्रजतभूजत

और अन् य िस्ट् तािेि, िो जिजित दकए िाएं, के साथ दकया

िाएगा ।

(2) ििां—

(क) कोई आिेिक जिजित प्ररूप में और जिजित धनराजि

के जलए प्रजतभूजत प्रस्ट्तलत करता िै ; और

(ख) इस जिजनयम के द्वारा अपेजक्षत दकए गए और

जिजित दकए गए सभी अन् य प्ररूप और साक्ष् य पूणि िै तथा

अनलक्रम में िै, आयलक् त आिेिक को रजिस्ट् रीकृत करेगा ।

(3) ििां आयलक् त ने, उस तारीख से, जिस को आिेिन

दकया गया था, पन् द्रि दिन के भीतर व् यजक् त को रजिस्ट् रीकृत

निीं दकया िै, आयलक् त ऐसी िांच संचाजलत करने के पश् चात्,

जिसे िि उजचत समझे या तो—

(क) रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी के रूप में तत् काल व् यजक् त को

रजिस्ट् रीकृत करेगा ; या

(ख) आिेिक को, स्ट् पष् ट रूप से उन आधारों को कजथत

करते हुए दक उसका आिेिन अस्ट् िीकृत दकया िाना प्रस्ट् ताजित िै

और अजतररक् त पन् द्रि दिन के भीतर जलजखत में उसे कारण

िर्िित करना अनलज्ञात करेगा दक क् यों न उसका आिेिन

अस्ट्िीकृत दकया िाए, नोरटस िारी करेगा :

परंतल ििां आयलक् त ने व् यजक् त को रजिस्ट् रीकृत या अपेजक्षत

की गई तारीख द्वारा नोरटस िारी निीं दकया िै, ििां आिेिक

इस प्रयोिन के जलए रजिस्ट् रीकृत समझा िाएगा और आयलक् त

ऐसे व् यजक् त के जलए रजिस्ट् रीकरण का प्रमाणपत्र िारी करेगा ।

(4) ििां उपधारा (3) के खंड (ख) के अनलसरण में

आिेिक नोरटस का प्रत्यलत्तर प्रस्ट् तलत करता िै, आयलक् त या तो

आिेिन को स्ट् िीकार करेगा और व् यजक् त को रजिस्ट् रीकृत करेगा

या जलजखत में कारणों को जलखते हुए आिेिन को अस्ट् िीकृत

करेगा ।

(5) यदि आिेिक दिए गए समय के भीतर उपधारा (3)

के खंड (ख) के अधीन िारी दकए गए नोरटस का प्रत्यलत्तर िेने में

असफल िोता िै तो रजिस्ट् रीकरण का आिेिन अस्ट् िीकृत माना

िाएगा ।

(6) ििां एक रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी ने रजिस्ट् रीकरण की

िति के रूप में कोई प्रजतभूजत प्रस्ट्तलत की िै तो ऐसी प्रजतभूजत

रजिस्ट् रीकरण के िारी रिने के जलए अपेजक्षत िोगी िब तक दक

आयलक् त द्वारा अन् यथा उपबंजधत न दकया िाए ।

20. रजिस्ट् रीकरण का प्रभाि—(1) यदि ऐसे समय पर,

जिस को कोई अरजिस्ट् रीकृत व् यौिारी का रजिस्ट् रीकरण प्रारंभ

के पश् चात् प्रभािी िोता िै और—

(क) व्यौिारी जिक्रय के प्रयोिन के जलए या समाप्त हुए

माल के उत्पािन के जलए कच्ची सामग्री के रूप में उपयोग के

जलए व्यापारी स्ट्टाक धाररत करता िै;

(ख) व्यौिारी ने व्यापारी स्ट्टाक या कच्ची सामग्री के क्रय

पर इनपलट कर उत्पि दकया िै;

(ग) व्यौिारी जिजित दकए गए प्रारूप में व्यापारी स्ट्टाक

और कच्ची सामग्री का जििरण आयलि को प्रस्ट्तलत करता िै; और

(घ) व्यौिारी क्रयों के संबंध में इनपलट कर की धनराजि

का पयािप्त सबूत धारण करता िैं;

व्यौिारी उस तारीख को, जिस को व्यौिारी का

रजिस्ट्रीकरण प्रभािी िोता िै व्यौिारी द्वारा धाररत व्यापारी

स्ट्टाक या कच्ची सामग्री के जलए कर प्रत्यय का िकिार िोगा:

परन्तल व्यौिारी को ऐसे कर प्रत्यय की संपूणि रकम का

िािा करना चाजिए जिसके जलए िि एकल िािे का िकिार िै,

और जिसके साथ इस जिजनयम के अधीन व्यौिारी द्वारा प्रस्ट्तलत

जििरणी संग्लन िै ।

(2) धारा 9 की उपधारा (3) के प्रयोिन के जलए कर

प्रत्यय की रकम कम से कम—

(क) उपधारा (1) के खंड (घ) में जनर्ििष्ट सबूत में िर्िित

इनपलट कर की रकम िोगी ; या

(ख) माल की लागत कर भाग िोगी ; या

(ग) रजिस्ट्रीकरण के समय पर माल के उजचत बािार

मूल्य की कर भाग िोगी ; या

(घ) ऐसी रकम िोगी, िो जिजित की िाए ।

14

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(3) ििां रजिस्ट्रीकरण व्यौिारी प्राप्त रकमों और संित्त

रकमों के आधार पर आितिन के जलए जिम्मेिार िै ििां िि—

(क) उस समय, िब िि अरजिस्ट्रीकृत था, दकए गए

जिक्रयों के संबंध में उसके रजिस्ट्रीकृत दकए िाने के पश् चात्

प्राप्त कोई रकम ; और

(ख) उस समय, िब िि अरजिस्ट्रीकृत या दकए गए क्रयों

के संबंध में उसके रजिस्ट्रीकृत दकए िाने के पश् चात् संित्त कोई

रकम ,

उसकी आितिन से अपिर्िित िोगी ।

21. रजिस्ट्रीकरण का संिोधन—(1) रजिस्ट्रीकृत

व्यौिारी एक माि के भीतर जिजित रीजत में आयलि को सूचना

िेगा, यदि िि—

(क) अपने कारबार या अपने कारबार के दकसी भाग या

कारबार के दकसी स्ट्थान का जिक्रय करता या अन्यथा व्ययन

करता िै या कारबार के स्ट् िाजम त् ि में दकसी अन्य पररितिन को

करता िै या उसकी िानकारी में आता िै ; या

(ख) एक मास से अजधक की अिजध के जलए अपने

कारबार को बंि करता िै या कारबार या गोिाम के अपने

स्ट्थानों में पररितिन करता िै या कारबार के नए स्ट्थान खोलता

िै या कारबारों को बंि करता िै ; या

(ग) अपने कारबार के नाम, स्ट्टाइल, गठन या प्रकृजत में

पररितिन करता िै; या

(घ) अपने कारबार के संबंध में भागीिारी या अन्य संगम

में प्रिेि करता िै कारबार में जित रखने िाले व्यजियों की

जिजिजष् टयां िोड़ता िै, िटाता िै या उनमें पररितिन करता िै

और यदि कोई ऐसा रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी मर िाता िै तो

उसका जिजधक प्रजतजनजध उस रीजत में उि प्राजधकारी को

सूजचत करेगा ।

(2) आयलि इस जिजनयम के अधीन प्रस्ट्तलत की गई

िानकारी या अन्यथा प्राप्त की गई िानकारी पर जिचार करने

के पश् चात् और ऐसी िांच करने के पश् चात् जिसे िि उजचत

समझे, समय-समय पर रजिस्ट्रीकरण में संिोधन कर सकेगा ।

(3) उपधारा (2) के अधीन दकया गया रजिस्ट्रीकरण का

संिोधन ऐसी आकजस्ट्मकता की तारीख से प्रभािी िोगा िो

संिोधन को इस बारे में आिश्यक बनाती िै दक क् या सूचना

उपधारा (1) के अधीन जिजित समय के भीतर प्रस्ट्तलत की गई िै

या निीं ।

(4) इस धारा के अधीन रजिस्ट् रीकरण का कोई संिोधन,

इस जिजनयम के अधीन कर के जलए दकसी िाजयत् ि या

अजधरोपणीय दकसी िाजस्ट् त या दकसी अपराध के जलए

अजभयोिन पर प्रजतकूल प्रभाि निीं डालेगा ।

(5) करठनाइयों को िूर करने के जलए यि स्ट् पष् ट दकया

िाता िै दक ििां कोई रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी—

(क) मूल रूप से जिक्रीत माल की प्रकृजत में कोई

पररितिन करता िै ; या

(ख) कोई फमि िै और फमि के जिघटन के जबना उसके

गठन में कोई पररितिन दकया िाता िै ; या

(ग) दकसी न् यास का न् यासी िै और उसके न् याजसयों में

पररितिन दकया िाता िै ; या

(घ) कोई फमि या कंपनी या न् यास या कोई अन् य संगठन

िै और संगठन के प्रबंधन में कोई पररितिन घरटत िोता िै,

तब केिल उपरोक् त पररजस्ट् थजतयों के कारण रजिस्ट् रीकृत

व् यौिारी के जलए रजिस्ट् रीकरण के नए प्रमाणपत्र के जलए

आिेिन करना आिश् यक निीं िोगा और रजिस्ट् रीकरण के जलए

सूचना दिए िाने पर संिोधन दकया िाएगा ।

22. रजिस्ट् रीकरण का रद्द दकया िाना— (1) ििां—

(क) रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी, जिससे इन उपबंधों के अधीन

प्रजतभूजत प्रस्ट् तलत दकया िाना अपेजक्षत िै, ऐसी प्रजतभूजत प्रस्ट् तलत

करने में या उसका अनलरक्षण करने में असफल रिता िै ;

(ख) रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी ने कोई दक्रयाकलाप, िो इस

जिजनयम के उपबंधों के अधीन व् यौिारी के रूप में उसे

रजिस्ट् रीकृत िोने के जलए िकिार बनाता िै, िारी रखना बंि

कर दिया िै ;

(ग) जनगजमत जनकाय, बंि िो गया िै या अन्यथा

अजस्ट्तत्ि समाप्त िो गया िै ;

(घ) स्ट् िाजमत् ि कारबार का स्ट् िामी और कारबार को

चलाने के जलए दकसी उत् तराजधकारी के जबना मर िाता िै ;

(ङ) दकसी फमि या व् यजक् तयों के संगम की ििा में, उसका

जिघटन िो िाता िै ;

(च) एक रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी इन जिजनयमों के अधीन

कर का संिाय करने के जलए िायी निीं रि िाता िै ;

(छ) रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी िानबूझकर ऐसी जििरणी

प्रस्ट् तलत करता िै, िो ताजविक जिजिजष् टयों में भ्रम पैिा करती िै

या प्रिंचक िै ; या

(ि) रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी ने एक या अजधक अपराध

काररत दकया िै या इन जिजनयमों के उपबंधों का अजतक्रमण

दकया िै और ऐसा अपराध या अजतक्रमण आयलक् त की राय में

ऐसे पररमाप का िै, जिससे ऐसा करना आिश् यक िो िाता िै,

आयलक् त उजचत िांच संचाजलत करने के पश् चात् और जिजित

प्ररूप में सूचना की तामील दकए िाने के पश् चात् तथा व् यौिारी

को सलनिाई का अिसर दिए िाने के पश् चात् सूचना में अपने

द्वारा जिजनर्ििष् ट तारीख से व् यौिारी के रजिस्ट् रीकरण को रद्द कर

सकेगा ।

(2) ििां—

(क) रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी ऐसे दक्रयाकलाप करने से

प्रजिरत िो िाता िै, िो उसे इस जिजनयम के अधीन व् यौिारी के

रूप में रजिस्ट् रीकृत करने के जलए िकिार बनाता िै ;

(ख) जनगजमत जनकाय बंि िो िाता िै या अन् यथा

जिद्यमान निीं रि िाता िै ;

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

15

(ग) स्ट् िाजमत् ि कारबार का स्ट् िामी कारबार को चलाने के

जलए दकसी उत् तराजधकारी को छोड़े जबना मर िाता िै ;

(घ) दकसी फमि या व् यजक् तयों के संगम की ििा में, िि

जिघरटत िो िाना िै ; या

(ङ) रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी इस जिजनयम के अधीन कर

िेने के जलए उत् तरिायी निीं रि िाता िै,

रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी या खंड (ग) की ििा में व् यौिारी का

जिजधक प्रजतजनजध, आयलक् त को ऐसी रीजत में और ऐसे समय के

भीतर, िो जिजित दकया िाए, रजिस्ट् रीकरण के रद्दकरण के

जलए आिेिन करेगा ।

(3) ऐसे आिेिन की प्राजप् त पर, यदि आयलक् त का यि

समाधान िो िाता िै दक व् यौिारी रजिस्ट् रीकृत दकए िाने के

जलए िकिार निीं रिा िै, िि जिजनर्ििष् ट तारीख से

रजिस्ट् रीकरण को रद्द कर सकेगा ।

(4) यदि व् यौिारी का रजिस्ट् रीकरण, िो इस धारा के

अधीन रद्द दकया िा चलका िै, अपील या इस जिजनयम के अधीन

दकसी अन् य कायिािी के पररणामस्ट् िरूप पलन: स्ट् थाजपत दकया

िाता िै, तो व् यौिारी का रजिस्ट् रीकरण प्रत् यािर्तित दकया

िाएगा और िि कर िेने का उत् तरिायी िोगा, िैसे दक उसका

रजिस्ट् रीकरण रद्द निीं दकया गया िो ।

(5)

यदि

कोई

रजिस्ट् रीकृत

व् यौिारी,

जिसका

रजिस्ट् रीकरण उपधारा (4) के अधीन पलन: स्ट् थाजपत दकया गया

िै, आयलक् त का यि समाधान िो िाने पर दक उसके द्वारा अपने

रजिस्ट् रीकरण के अप्रभािी रिने की अिजध के िौरान आजधक् य

कर का संिाय कर दिया गया िै, ककंतल अपने रजिस्ट् रीकरण के

रद्दकरण के जलए उसका संिाय निीं दकया गया िै, तब ऐसे कर

की रकम व् यौिारी को ऐसी रीजत में, िो जिजित की िाए,

समायोजित या प्रजतिाय दकया िाएगा ।

(6) प्रत् येक रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी, िो अपने रजिस्ट् रीकरण

के रद्द दकए िाने के जलए आिेिन करता िै, िि अपने आिेिन

के साथ उसे प्रिान दकया गया रजिस्ट् रीकरण का प्रमाणपत्र

अभ् यर्पित करेगा और प्रत् येक रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी, जिसका

रजिस्ट् रीकरण उसके द्वारा दकए गए आिेिन के आधार से जभन् न

रद्द दकया िाता िै, िि रजिस्ट् रीकरण के रद्दकरण की संसूचना

की तारीख से सात दिन के भीतर रजिस्ट् रीकरण के प्रमाणपत्र को

अभ् यर्पित करेगा ।

(7) आयलक् त तीन मास से अनजधक के अंतरालों पर

रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी की, जिसका रजिस्ट् रीकरण रद्द दकया गया

िै, ऐसी जिजिजष् टयां, िो जिजित की िाए, जिभागीय िेबसाइट

पर डालेगा ।

(8) रजिस्ट् रीकरण का रद्दकरण, दकसी व् यजक् त के दकसी

अिजध के जलए िोध् य कर के और ऐसे रद्दकरण की तारीख पर

असंित्त कर के या जिसे उसके पश् चात् जनधािररत दकया िाता िै,

इस बात के िोते हुए भी दक िि इस जिजनयम के अधीन कर का

संिाय करने के जलए अन् यथा िायी निीं िै, प्रभाि निीं डालेगा ।

23. जिरजिस्ट् रीकरण का प्रभाि—(1) प्रत् येक रजिस्ट् रीकृत

व् यौिारी, जिसका रजिस्ट् रीकरण रद्द कर दिया गया िै, रद्दकरण

की तारीख को धाररत सभी मालों की बाबत—

(क) िि कर, िो उन मालों की बाबत संिाय िोगा, यदि

उस तारीख को माल उजचत बािार मूल् य पर जिक्रीत दकए गए

िोते; या

(ख) उन मालों की बाबत पूिि में िािाकृत कर प्रत् यय,

से अजधक की समतल् य रकम संित्त करेगा ।

(2) ििां व् यौिारी प्राप् त की गई रकमों और संित्त की

गई रकमों के आधार पर आितिन के जलए उत् तरिायी िै, िि

अपनी अंजतम जििरणी के आितिन में—

(क) उस जिक्रय की बाबत अभी तक प्राप् त निीं की गई

कोई रकम, िब िि रजिस्ट् रीकृत था ; और

(ख) उस क्रय की बाबत अभी तक संित्त निीं की गई

कोई रकम, िब िि रजिस्ट् रीकृत था, सजम् मजलत करेगा ।

24. संक्रमण के िौरान रजिस्ट् रीकरण—प्रत् येक व् यौिारी,

िो प्रथम अनलसूची में सूचीबद्ध मालों का व् यौिार करता िै,

केंद्रीय जिक्रय-कर अजधजनयम, 1975 (1975 का 43) के

उपबंधों के अधीन रजिस्ट् रीकृत दकया िाएगा और ऐसे मालों की

बाबत कर की िर िि िोगी, िो पिली अनलसूची के तीसरे स्ट् तंभ

में यथा उजल् लजखत िै ।

25. व् यौिाररयों और अन् य व् यजक् तयों के कजतपय प्रिगों

से प्रजतभूजत—(1) आयलक् त, रजिस्ट् रीकरण का प्रमाणपत्र िारी

रखने के जलए, इस जिजनयम के अधीन संिेय कर, सजम्मश्रण धन

या अन् य िोध् य की उजचत िसूली के जलए या व् यौिारी के रूप में

दकसी व् यजक् त को रजिस्ट् रीकृत करने की िति के रूप में या धारा

38 के अधीन प्रजतिाय करने की िति के रूप में या धारा 60 की

उपधारा (4) के अधीन जिमलदद्रत करने या जनमलिजक् त की िति के

रूप में, यदि ऐसा करना आिश् यक प्रतीत िो, तो दकसी व् यजक् त

या ऐसे िगि के व् यजक् तयों से, िो जिजित दकए िाएं, इस

जिजनयम के अधीन या केंद्रीय जिक्रय कर अजधजनयम, 1956

(1956 का 74) के अधीन उनके िाजयत् िों के उजचत पालन के

जलए ऐसी रकम के संिाय पर ऐसी रीजत में और ऐसे समय में,

िो जिजित दकया िाए, प्रजतभूजत प्रस्ट् तलत दकया िाना अपेजक्षत

कर सकेगा ।

(2) उपधारा (1) में अंतर्ििष् ट दकसी बात के िोते हुए भी,

आयलक् त—

(क) व् यजक् त के कारबार दक्रयाकलापों की प्रकृजत और

आकार ;

(ख) दकसी कर, ब् याि या िाजस्ट् त की रकम, जिसके जलए

व् यजक् त इस जिजनयम के अधीन दकसी भी समय िायी िो सकेगा

या उसका िायी िोना संभाव् य िै ;

(ग) व् यजक् त की प्रत् यय योग् यता ;

(घ) प्रजतभूजत की प्रकृजत ; और

(ङ) कोई अन् य जिषय, िो आयलक् त सलसंगत समझे,

16

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

को ध् यान में रखते हुए प्रजतभूजत की रकम में िृजद्ध, फेरफार,

कमी या अजधत् याग कर सकेगा ।

(3) ििां व् यजक् त द्वारा प्रस्ट् तलत की गई प्रजतभूजत, प्रजतभूजत

बंधपत्र के रूप में िै और प्रजतभूजत मर िाता िै या दििाला िो

िाता िै, तो िि व् यजक् त ऐसी घटना घटने के एक मास के भीतर

आयलक् त को सूचना िेगा और ऐसी घटना से तीन मास के भीतर

नया प्रजतभूजत बंधपत्र जनष् पादित करेगा ।

(4) ििां प्रजतभूजत बंधपत्र दकसी अन् य रजिस्ट् रीकृत

व् यौिारी द्वारा जनष् पादित दकया गया िै और व् यौिारी के

रजिस्ट् रीकरण को या तो रद्द कर दिया िाता िै या उसने अपने

कारबार को बंि कर दिया िै, तो िि व् यजक् त एक नई प्रजतभूजत,

िो जिजित की िाए और उपधारा (3) में यथा कजथत रीजत में

प्रस्ट् तलत करेगा ।

(5) आयलक् त, आिेि द्वारा अच् छे और पयािप् त कारण से

व् यजक् त द्वारा प्रस्ट् तलत की गई प्रजतभूजत को पूणित: या भागत:

समपहृत कर सकेगा ।

(6) ििां दकसी व् यजक् त द्वारा प्रस्ट् तलत की गई प्रजतभूजत

पूणितया समपहृत कर ली िाती िै या अपयािप् त प्रजतभूजत िी

िाती िै, िि यथाजस्ट् थजत, अध् यपेजक्षत रकम की नई प्रजतभूजत

प्रस्ट् तलत करेगा या ऐसी कमी को ऐसी रीजत में और ऐसी अिजध

के भीतर, िो जिजनर्ििष् ट की िाए, पूरी करेगा ।

अध् याय 5

जििरणी

26. करों का काजलक संिाय और जििरजणयों का प्रस्ट् तलत

दकया िाना— प्रत् येक रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी, िो इस जिजनयम

के अधीन कर के संिाय के जलए िायी िै, आयलक् त को प्रत् येक कर

अिजध के जलए और ऐसी तारीख तक तथा ऐसे प्ररूप और रीजत

में, िो जिजित दकए िाएं, जििरजणयां प्रस्ट् तलत करेगा ।

27. अन् य जििरजणयां अपेजक्षत करने की िजक् त—

आयलक् त, धारा 26 में जिजनर्ििष् ट जििरजणयों के अजतररक् त दकसी

व् यजक् त से, चािे िि रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी िो या निीं िो, (चािे

उस व् यजक् त की ओर से या अजभकताि या न् यासी के रूप में) ऐसी

अन् य जििरजणयां, ऐसे प्ररूप में, िो जिजित दकया िाए, प्रस्ट् तलत

करना अपेजक्षत कर सकेगा ।

28. कजमयों में सलधार—यदि कोई व् यजक् त इस जिजनयम

के अधीन दकसी कर अिजध के जलए अपने द्वारा प्रस्ट् तलत जििरणी

में कमी पाता िै, तो िि ऐसी कमी को िूर करेगा और ऐसी कर

अिजध के आगामी एक िषि के भीतर पलनरीजक्षत जििरणी प्रस्ट् तलत

करेगा :

परंतल यदि कमी के पररणामस्ट् िरूप दकसी व् यक् जत ने, इस

जिजनयम के अधीन िोध् य कर से कम कर संित्त दकया िै, तो िि

अपना कर और उस पर ब् याि संित्त करेगा ।

29. जििरजणयों पर िस्ट् ताक्षररत दकया िाना—इस

अध् याय के अधीन प्रत् येक जििरणी पर —

(क) दकसी व् यजष् ट की ििा में, व् यजष् ट के स्ट् ियं के द्वारा

और उस व् यजष् ट के भारत से अनलपजस्ट् थत रिने की ििा में, इस

संबंध में उसके द्वारा प्राजधकृत दकसी अन् य व् यजक् त द्वारा और

ििां व् यजष् ट अपने कायि को करने में मानजसक रूप से अक्षम िै

ििां उसके संरक्षक या उसकी ओर से कायि करने के जलए दकसी

अन् य सक्षम व् यजि द्वारा ;

(ख) कंपनी या स्ट् थानीय प्राजधकरण की ििा में, उसके

प्रधान अजधकारी द्वारा ;

(ग) फमि की ििा में उसके भागीिार द्वारा, िो अियस्ट् क

निीं िै ;

(घ) दकसी अन् य संगम की ििा में, संगम के दकसी अन् य

सिस्ट् य या व् यजक् तयों द्वारा ;

(ङ) न् यास की ििा में, न् याजसयों या दकसी अन्य न् यासी

द्वारा ; और

(च) दकसी अन् य व् यजक् त की ििा में, उसकी ओर से कायि

करने िाले दकसी अन् य सक्षम व् यजक् त द्वारा,

िस्ट् ताक्षररत और सत् याजपत की िाएगी ।

अध् याय 6

कर, ब् याि और िाजस्ट् तयों का जनधािरण और संिाय तथा

प्रजतिाय करना

30. कर ब्याि या िजस्ट्त का जनधािरण—आयलक् त द्वारा

दकसी व् यजक् त द्वारा इस जिजनयम के अधीन िोध् य कर की रकम,

ब् याि या िाजस्ट् त या कर की प्रकृजत की अन् य रकम, ब् याि या

िाजस्ट् त के जलए उस रकम के जलए जनधािरण करने के जसिाय

िािे के जलए कोई संिाय निीं दकया िा सकेगा ।

31. स्ट् ित: जनधािरण— (1) ििां दकसी व् यजक् त द्वारा

धारा 26 या धारा 27 के अधीन यथा अपेजक्षत जििरणी प्रस्ट् तलत

की िाती िै और उसमें ऐसी सूचना अंतर्ििष् ट िोती िै, िो

जिजित की िाए तथा इस जिजनयम और जनयमों की अपेक्षाओं के

अनलपालन में िोती िै—

(क) आयलक् त उस दिन िब जििरणी प्रस्ट् तलत की िाती िै,

जििरणी में जिजनर्ििष् ट रकम के संिाय कर का जनधािरण करने के

जलए जिसाब में लेगा ;

(ख) जििरणी जनधािरण की सूचना हुई समझी िाएगी

और आयलक् त के अधीन िोगी ; और

(ग) खंड (ख) के अधीन जनर्ििष् ट सूचना, उस व् यजक् त पर

उस दिन, जिसको आयलक् त द्वारा जनधािरण दकया गया समझा

िाता िै, तामील की गई समझी िाएगी ।

(2) उपधारा (1) के अधीन कोई जनधािरण उद्भूत निीं िोगा,

यदि आयलक् त ने इस जिजनयम के दकन् िीं अन् य उपबंधों के अधीन

समान कर अिजध की बाबत पिले से िी कर का जनधािरण कर

दिया िै ।

32. संिेय कर के जनधािरण में चूक—(1) यदि दकसी

व् यजक् त ने—

(क) इस जिजनयम की धारा 26 के अधीन अपेजक्षत

तारीख तक जििरणी प्रस्ट् तलत निीं की िै ;

(ख) अपूणि या गलत जििरणी प्रस्ट् तलत की िै ;

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

17

(ग) ऐसी जििरणी प्रस्ट् तलत की िै, िो इस जिजनयम की

अपेक्षाओं का अनलपालन निीं करती िै ; या

(घ) दकसी अन् य कारण से आयलक् त दकसी व् यजक् त द्वारा

प्रस्ट् तलत की गई जििरणी से संतलष् ट निीं िै,

आयलक् त ऐसे कारणों से, िो अजभजलजखत दकए िाएं,

दकसी कर अिजध के जलए या एक से अजधक कर अिजध के जलए,

िो इतनी िो दक ऐसी सभी कर अिजधयां एक िषि में समाजिष् ट

िो िाती िो, िोध् य सकल कर की रकम का एकल आिेि द्वारा

जनधािरण या पलन: जनधािरण कर सकेगा ।

(2) यदि आयलक् त का ऐसी सूचना, िो उसके कब् िे में

आई िै, प्राप् त िोने पर यि समाधान िो िाता िै दक कोई

व् यजक् त िो इस जिजनयम के अधीन दकसी अिजध की बाबत कर

संिाय के जलए िायी िो गया िै, स्ट्ियं को रजिस्ट् रीकृत कराने में

असफल िो िाता िै, आयलक् त ऐसे कारणों से, िो अजभजलजखत

दकए िाएं, ऐसी अिजध और सभी पश् चात्िती अिजधयों के जलए

िोध् य सकल कर की रकम का अिधारण कर सकेगा और उस

व् यजक् त को उस कर अिजध के जलए िोध् य दकसी अजतररक् त कर

की रकम के जनधािरण की सूचना की तामील कराएगा ।

(3) ििां आयलक् त ने इस धारा के अधीन जनधािरण दकया

था और अजतररक् त कर बकाया के रूप में जनधािररत दकया िाता

िै, अजतररक् त कर की जनधािररत रकम उस तारीख को िोध् य

और संिेय िोगी, जिसको कर अिजध के जलए सकल कर िोध् य

था।

33. िाजस्ट् त का जनधािरण—(1) ििां आयलक् त के पास

जिश् िास करने का कारण िै दक कोई व् यजक् त इस जिजनयम के

अधीन िाजस्ट् त संित्त करने के जलए िायी िै तो िि कारण

अजभजलजखत करने के पश् चात्, उस व् यजक् त को इस जिजनयम के

अधीन िोध् य िाजस्ट् त के जनधािरण की सूचना िेगा और तामील

कराएगा ।

(2) इस धारा के अधीन जनधािररत दकसी िाजस्ट् त की

रकम, उस तारीख को िोध् य और संिेय िोगी, जिसको आयलक् त

द्वारा जनधािरण की सूचना की तामील की िाती िै ।

(3) इस धारा के अधीन दकया गया कोई जनधािरण, इस

जिजनयम के अधीन दकसी अपराध के जलए अजभयोिन पर

प्रजतकूल प्रभाि निीं डालेगा ।

34. जनधािरण और पलन:जनधािरण की पररसीमा—(1)

आयलक् त द्वारा—

(क) एक या अजधक कर अिजधयों, जिसके जलए दकसी

व् यजक् त ने धारा 26 या धारा 27 के अधीन जििरणी प्रस्ट् तलत की

िै, को समाजिष् ट करने िाले िषि की समाजप् त ; या

(ख) िि तारीख, जिसको आयलक् त ने कर अिजध के जलए

जनधािरण दकया था, इनमें से िो भी पिले िो,

से चार िषि के अिसान के पश् चात् कोई जनधािरण या पलन:

जनधािरण निीं दकया िाएगा :

परंतल ििां आयलक् त के पास जिश् िास करने का कारण िै

दक दकसी व् यजक् त की ओर से जछपाि, लोप या ताजविक

जिजिजष् टयों के पूणि प्रकटन में असफलता के कारण, कर संित्त

निीं दकया गया था, तो उक् त अिजध छि िषि तक बढा िी

िाएगी ।

(2) उपधारा (1) में अंतर्ििष् ट दकसी बात के िोते हुए भी,

आयलक् त, अपील अजधकरण या न् यायालय के दकसी जिजनश् चय

की तारीख के पश् चात् एक िषि के भीतर कर का जनधािरण कर

सकेगा, ििां जनधािरण अपील अजधकरण या न् यायालय, िो

दकसी व् यजक् त के पलन:जनधािरण की अपेक्षा करते िैं, के जिजनश् चय

के पररणामस्ट् िरूप या उसे प्रभािी करने के जलए दकया िाना

अपेजक्षत िै ।

35. जनधािररत कर का एकत्रीकरण और िाजस्ट्त—(1)

उपधारा (2) और उपधारा (4) के उपबंधों के अध् यधीन रिते

हुए, ििां धारा 32 या धारा 33 के अधीन कर की रकम या

िाजस्ट् त जनधािररत की गई िै, आयलक् त जनधािरण की सूचना की

तामील की तारीख के पश् चात् िो मास तक जनधािररत रकम के

संिाय का प्रितिन प्रारंभ निीं कर सकेगा ।

(2) ििां दकसी व् यजक् त ने जनधािरण या जनधािरण के दकसी

भाग पर आक्षेप दकया िै और धारा 74 में उपबंजधत रीजत में

ऐसे आक्षेप को ग्रिण करने के जलए िति, यदि कोई िो, का

अनलपालन दकया िै, आयलक् त उस जनधािरण के अधीन जििाि की

अजतिेष रकम के संिाय का प्रितिन तब तक निीं कर सकेगा

िब तक दक आयलक् त द्वारा आक्षेप का समाधान निीं दकया िाता

िै ।

(3) इस धारा में अंतर्ििष् ट कोई बात—

(क) इस जिजनयम के अधीन िोध् य कोई रकम, िो

आयलक् त के समक्ष जििाि की जिषय-िस्ट् तल निीं िै ; या

(ख) इस जिजनयम के अधीन िोध् य कोई रकम, ििां

दकसी व् यजक् त ने अपील अजधकरण को अपील की िै,

की िसूली के जलए आयलक् त द्वारा या न् यायालय के समक्ष दकसी

कारिाई पर रोक निीं लगाएगी ।

(4) उपधारा (1) में अंतर्ििष् ट दकसी बात के िोते हुए भी,

ििां आयलक् त द्वारा कर की रकम या िाजस्ट् त का जनधािरण दकया

गया िै और उसका समाधान िो िाता िै दक यि संभािना िै

दक यदि एकत्रण में जिलंब दकया िाता िै तो जनधािररत रकम की

िसूली संभाव् य निीं िो सकेगी, तो आयलक् त जनधािरण की सूचना

में दकसी तारीख को उस तारीख के रूप में, जिसको िोध् य और

संिेय रकम का एकत्रण प्रारंभ दकया िा सकेगा, िो जनधािरण

की सूचना की तामील की तारीख के पश् चात् िो मास से पूिि

िोगी, जिजनर्ििष् ट कर सकेगा ।

36. कर, िाजस्ट् तयों और ब् याि के संिाय की रीजत—इस

जिजनयम के अधीन कर, ब् याि, िाजस्ट् त और दकसी अन् य रकम के

जलए िायी प्रत् येक व् यजक् त इन जनयमों के अधीन जिजित लक्षद्वीप

बैंक की दकसी िाखा में या ऐसे अन् य स्ट् थान पर या ऐसी अन् य

रीजत में, िो जिजित की िाए, रकम संित्त करेगा ।

37. संिायों के उपयोिन का आिेि—ििां दकसी व् यजक् त

से आयलक् त को कर, ब् याि या िाजस्ट् त बकाया िै और िि व् यजक् त

18

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

आयलक् त को उसका संिाय करता िै या आयलक् त उस व् यजक् त द्वारा

बकाया कलछ रकम ककंतल पूणि रकम निीं, िसूल करता िै, तो

रकम—

(क) इस जिजनयम के अधीन बकाया ब् याि, िाजस्ट् त और

कर ; और

(ख) केंद्रीय जिक्रय कर अजधजनयम, 1956 (1956 का

74) के अधीन बकाया ब् याि, िाजस्ट् त और कर,

संित्त करने के दकसी व् यजक् त के िाजयत् ि को उपरोक् त आिेि में

कम करने के रूप में मानी िाएगी ।

38. प्रजतिाय—(1) इस जिजनयम और जनयमों के अन् य

उपबंधों के अध् यधीन रिते हुए, आयलक् त दकसी व् यजक् त को उससे

िोध् य रकम के आजधक् य में ऐसे व् यजक् त द्वारा कर की रकम,

िाजस्ट् त और ब् याि, यदि कोई िो, का प्रजतिाय संित्त करेगा ।

(2) प्रजतिाय करने से पिले, आयलक् त, इस जिजनयम के

अधीन या केन् द्रीय जिक्रय कर अजधजनयम, 1956 (1956 का

74) के अधीन िोध् य दकसी रकम की िसूली के जलए ऐसे

आजधक् य को पिले उपयोजित दकया िाएगा ।

(3) उपधारा (4) और उपधारा (5) के उपबंधों के

अध् यधीन रिते हुए, उपधारा (2) में जनर्ििष् ट उपयोिन के

पश् चात् िेष रकम व् यौिारी के जनिािचन पर या तो—

(क) दकसी व् यजक् त को, —

(i) उस तारीख से, जिसको जििरणी प्रस्ट् तलत की गई थी

या प्रजतिाय के जलए िािा दकया गया था एक मास के पश् चात्

दकसी व् यजक् त को प्रजतिाय दकया िाएगा, यदि व् यजक् त द्वारा

प्रजतिाय का िािा करने के जलए कर अिजध एक मास िै; या

(ii) उस तारीख से, जिसको जििरणी प्रस्ट् तलत की गई थी

या प्रजतिाय के जलए िािा दकया गया था िो मास के भीतर

दकसी व् यजक् त को प्रजतिाय दकया िाएगा, यदि व् यजक् त द्वारा

प्रजतिाय का िािा करने के जलए कर अिजध तीन मास िै; या

(ख) या उस अिजध में कर प्रत् यय के रूप में अगली कर

अिजध के जलए अग्रेजषत दकया िाएगा ।

(4) ििां आयलक् त ने दकसी व् यजक् त को धारा 58 के

अधीन यि सलाि िेते हुए सूचना िारी की िै दक उसके

कारबारी दक्रयाकलापों में संपरीक्षा, अन् िेषण या िांच की

िाएगी या उसमें इस जिजनयम की धारा 59 के अधीन

अजतररक् त सूचना मांगी गई िै, तो रकम को उस अिजध में कर

प्रत् यय के रूप में अगली कर अिजध के जलए अग्रेजषत दकया

िाएगा ।

(5) आयलक् त, प्रजतिाय के संिाय की िति के रूप में, उस

तारीख को, जिसको जििरणी प्रस्ट् तलत की गई थी या प्रजतिाय के

जलए िािा दकया गया था, से पंद्रि दिन के भीतर धारा 25 में

प्रित्त िजक् तयों के अनलसरण में दकसी व् यजक् त से प्रजतभूजत की

मांग कर सकेगा ।

(6) आयलक् त, उपधारा (5) के अधीन अपने समाधान के

जलए व् यौिारी द्वारा प्रजतभूजत प्रस्ट् तलत दकए िाने की तारीख से

पंद्रि दिन के भीतर प्रजतिाय करेगा ।

(7) उपधारा (3) के खंड (क) में जिजित अिजध की

गणना करने के जलए—

(क) आयलक् त के समाधान के जलए उपधारा (5) के अधीन

प्रजतभूजत प्रस्ट् तलत करने; या

(ख) धारा 59 के अधीन मांगी गई अजतररक् त सूचना

प्रस्ट् तलत करने; या

(ग) धारा 26 और धारा 27 के अधीन जििरजणयां

प्रस्ट् तलत करने; या

(घ) केन् द्रीय जिक्रय कर अजधजनयम, 1956 (1956 का

74) के अधीन यथापेजक्षत घोषणा या प्रमाणपत्र प्ररूप प्रस्ट् तलत

करने में लगे समय को अपिर्िित दकया िाएगा ।

(8) इस धारा में अंतर्ििष् ट दकसी बात के िोते हुए भी,

ििां—

(क) दकसी रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी ने अरजिस्ट् रीकृत व् यजक् त

को माल का जिक्रय दकया िै;

(ख) इस जिजनयम के अधीन संिेय कर की रकम के रूप

में सजम् मजलत माल के जलए कीमत प्रभाररत की िै ; और

(ग) व् यौिारी इस रकम का प्रजतिाय या इस रकम का

उपधारा (3) के खंड (ख) के अधीन उपयोिन चाि रिा िै,

तो दकसी रकम का व् यौिारी को प्रजतिाय निीं दकया िाएगा या

व् यौिारी द्वारा उपधारा (3) के खंड (ख) के अधीन उसका

उपयोिन निीं दकया िा सकेगा, िब तक दक आयलक् त का यि

समाधान निीं िो िाता िै दक व् यौिारी ने क्रेता को रकम का

प्रजतिाय कर दिया िै ।

(9) ििां—

(क) दकसी रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी ने िूसरे रजिस्ट् रीकृत

व् यौिारी को माल का जिक्रय दकया िै; और

(ख) माल के जलए प्रभाररत कीमत में अव् यक् त रूप से इस

जिजनयम के अधीन संिेय कर की रकम सजम् मजलत िै,

ििां उस रकम का क्रेता को प्रजतिाय दकया िा सकेगा या

उपधारा (3) के खंड (ख) के अधीन क्रेता द्वारा उसका उपयोिन

दकया िा सकेगा और आयलक् त ऐसे क्रेता द्वारा िािा दकए गए

तत् स्ट् थानी कर प्रत् यय की रकम से इंकार के जलए क्रेता का पलन:

जनधािरण कर सकेगा, चािे जिक्रेता ने क्रेता को रकम का

प्रजतिाय दकया िो या निीं ।

(10) ििां रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी माल का जिक्रय करता

िै और माल के जलए प्रभाररत कीमत में इस जिजनयम के अधीन

संिेय कर की रकम को सजम् मजलत निीं करना अजभव् यक् त दकया

िाता िै, तो जिक्रेता से क्रेता को रकम के प्रजतिाय की अपेक्षा

दकए जबना, ऐसी रकम का जिक्रेता को प्रजतसंिाय दकया िा

सकेगा या उपधारा (3) के खंड (ख) के अधीन क्रेता द्वारा उसका

उपयोिन दकया िा सकेगा ।

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

19

(11) उपधारा (3) में अंतर्ििष् ट दकसी प्रजतकूल बात के

िोते हुए भी, दकसी व् यौिारी को जिसने इस जिजनयम के अधीन

िोध् य कोई जििरणी फाइल निीं की िै, प्रजतिाय अनलज्ञात निीं

दकया िाएगा ।

39. कजतपय मामलों में प्रजतिाय जिधाररत करने की

िजक् त—(1) ििां कोई व् यजक् त प्रजतिाय के जलए िकिार िै और

इस जिजनयम के अधीन कायिािी उसके जिरुद्ध लंजबत िै,

जिसके अंतगित धारा 58 के अधीन संपरीक्षा भी िै और आयलक् त

की यि राय िै दक ऐसे प्रजतिाय के संिाय से रािस्ट् ि पर

प्रजतकूल प्रभाि पड़ने की संभािना िै और उस रकम को बाि में

िसूल करना संभि निीं िो सकेगा, तो आयलक् त, ऐसे कारणों से,

िो अजभजलजखत दकए िाएं या तो दकसी व् यजक् त को प्रजतिाय

दकए िाने िाली रकम के समतल् य प्रजतभूजत प्राप् त करेगा या

ऐसी कायिाजियों तक या संपरीक्षा पूणि िोने तक प्रजतिाय को

जिधाररत कर सकेगा ।

(2) ििां उक् त धारा (1) के अधीन प्रजतिाय जिधाररत

दकया िाता िै, तो िि व् यजक् त धारा 42 की उपधारा (1) के

अधीन यथा उपबंजधत ब् याि का िकिार िोगा, यदि अपील या

अजतररक् त कायिािी अथिा दकसी अन् य कायिािी के

पररणामस्ट् िरूप िि प्रजतिाय का िकिार िो िाता िै ।

40. केिल रजिस्ट् रीकृत व्यौिाररयों द्वारा कर का

एकत्रण— (1) कोई व् यजक् त िो रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी निीं िै

इस जिजनयम के अधीन कर के माध् यम से लक्षद्वीप में उसके

द्वारा जिक्रीत दकसी माल की बाबत दकसी रकम का एकत्रण

निीं करेगा और कोई रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी इस जिजनयम या

उसके अधीन बनाए गए जनयमों के अनलसार और इस जिजनयम

के अधीन जिजनर्ििष् ट िरों के जसिाय कोई ऐसा एकत्रण निीं

करेगा ।

(2) दकसी व् यजक् त द्वारा िो रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी निीं िै

एकत्र दकए गए कर का प्रजतिाय निीं दकया िाएगा और िि

समपहृत िो िाएगा ।

41. राििूतािास, पिधाररयों, अंतरािष् रीय लोक संगठनों

के जलए कर का प्रजतिाय— (1) चौथी अनलसूची में सूचीबद्ध

जनकाय ऐसे जनबंधनों और ितों, िो जिजित की िाएं, के

अध् यधीन रिते हुए लक्षद्वीप में क्रय दकए गए माल पर संित्त

कर के प्रजतिाय का िािा करने के िकिार िोंगे ।

(2) उपधारा (1) के अधीन प्रजतिाय के जलए िकिार

कोई व् यजक् त ऐसी रीजत में और जिजित समय के भीतर आयलक् त

को आिेिन कर सकेगा ।

42. ब् याि—(1) इस जिजनयम के अधीन प्रजतिाय का

िकिार कोई व् यजक् त—

(क) उस तारीख से, जिसको उस व् यजक् त को संित्त दकए

िाने के जलए प्रजतिाय िोध् य था; या

(ख) उस तारीख से, जिसको दकसी व् यजक् त द्वारा

अजतसंित्त रकम, संित्त की गई थी,

िो भी पश् चात्िती िो, केन् द्रीय सरकार द्वारा समय-समय पर

अजधसूजचत िार्षिक िर पर िैजनक आधार पर संगृजित साधारण

ब् याि, प्राप् त करने का िकिार िोगा और ऐसे ब् याि की गणना

उस तारीख को, जिसको ऐसा प्रजतिाय दकया िाता िै, से की

िाएगी:

परंतल िोध् य प्रजतिाय की रकम पर ब् याि की गणना इस

जिजनयम के अधीन उसमें से कोई कर, ब् याि, िाजस्ट् त या कोई

अन् य िोध् य घटाने के पश् चात् की िाएगी:

परंतल यि और दक, यथाजस्ट् थजत, प्रजतिाय की ऐसी रकम

को बढाया या घटाया िाता िै तो तिनलसार ऐसे ब् याि को भी

बढाया या घटाया िाएगा ।

(2) िब कोई व् यजक् त दकसी कर, िाजस्ट् त या इस

अजधजनयम के अधीन िोध् य अन् य रकम का संिाय करने में चूक

करता िै, तो िि जनधािररत रकम के अजतररक् त ऐसी चूक की

तारीख से िब तक दक िि उक् त रकम का संिाय करने में चूक

िारी रखता िै, के जलए िैजनक आधार पर केन् द्रीय सरकार द्वारा

समय-समय पर अजधसूजचत िार्षिक िर पर संगजणत साधारण

ब् याि संित्त करने में िायी िोगा ।

(3) ििां कर की रकम जिसके अंतगित िोध् य िाजस्ट् त भी

िै, को पूणितया घटा दिया िाता िै तो संित्त ब् याि की रकम

का, यदि कोई िो, प्रजतिाय दकया िाएगा या ऐसी रकम में कोई

फेरफार िो तो िोध् य ब्याि की तिनलसार संगणना की िाएगी ।

(4) ििां दकसी रकम के एकत्रण को अपील अजधकरण

या दकसी न् यायालय या दकसी अन् य प्राजधकरण के आिेि द्वारा

स्ट् थजगत कर दिया िाता िै और ऐसे आिेि को तत्पश् चात् रद्द

कर दिया िाता िै, ब् याि, दकसी ऐसी अिजध के जलए जिसके

िौरान ऐसा आिेि प्रचालन में रिा था, संिेय िोगा ।

(5) इस जिजनयम के अधीन दकसी व् यजक् त द्वारा संिेय

ब् याि इस जिजनयम के अधीन िोध् य कर के रूप में एकजत्रत

दकया िा सकेगा और ब् याि संित्त करने का िाजयत्ि उद्भूत

िोने पर िोध् य और संिेय िोगा।

अध् याय 7

कर, ब् याि और िाजस्ट् तयों की िसूली

43. कर की िसूली—(1) दकसी कर, ब् याि, िाजस्ट् त या

इस जिजनयम के अधीन िोध् य अन् य रकम धारा 36 में

जिजनर्ििष् ट रीजत में संित्त की िाएगी और ऐसी रकम के जलए

दकसी व् यजक् त पर तामील की गई जनधािरण की सूचना में जनयत

समय तक जनधािरण में िर्णित रकम के संिाय के जलए मांग का

गठन करेगी ।

(2) धारा 35 के अधीन जिजनर्ििष् ट जनयत तारीख के

अिसान से पिले दकए गए आिेिन पर, आयलक् त दकसी व् यौिारी

या दकसी व् यजक् त की बाबत, ऐसे कारणों से, िो अजभजलजखत

दकए िाएं, ऐसी ितों के अध् यधीन रिते हुए िो िि मामले की

पररजस्ट् थजतयों में अजधरोजपत करना उपयलक् त समझे, संिाय के

जलए समय को बढा सकेगा या दकश् तों द्वारा संिाय अनलज्ञात कर

सकेगा ।

20

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(3) कर की कोई रकम, ब् याि या िाजस्ट् त, संजिरचना धन

या इस जिजनयम के अधीन िोध् य अन् य रकम िो असंित्त िै,—

(क) भू-रािस्ट् ि के बकाया के रूप में, या

(ख) कजमश् नर द्वारा, उपधारा (6) के उपबंधों और कर,

ब् याि या िाजस्ट् त, संजिरचना धन या अन् य िोध् य रकम िो

जिजित की िाए, की िसूली की प्रदक्रया को जिजनयजमत करने

िाले जनयमों के अनलसार,

िसूली योग् य िोगी ।

(4) ििां इस जिजनयम के अधीन प्रजतभूजत बंधपत्र के

प्ररूप से जभन् न प्रजतभूजत प्रस्ट् तलत की गई िै, आयलक् त, ऐसे कारणों

से, िो अजभजलजखत दकए िाएं, प्रजतभूजत को पूणि रूप से या

उसके दकसी भाग के समपिरण का आिेि करते हुए, दकसी कर,

ब् याि या िाजस्ट् त, संजिरचना धन या अन् य िोध् य रकम या

उसके भाग की िसूली कर सकेगा ।

(5) ििां कोई प्रजतभूजत जिक्रय दकए िाने के प्रयोिनों के

जलए जनजिित्त की गई िै, उसे धारा 63 में जनयत रीजत से

जिक्रीत दकया िाएगा ।

(6) ििां कर की कोई रकम, ब् याि या िाजस्ट् त,

संजिरचना धन या इस जिजनयम के अधीन िोध् य अन् य रकम,

उपधारा (3) के खंड (ख) के उपबंधों के अनलसार िसूली योग् य िै,

आयलक् त व् यौिारी, आकजस्ट् मक व् यौिारी, पररिािक, िािक या

पररििन अजभकताि, स्ट् िामी या पट्टेिार या भांडागार के

अजधभोगी, दकसी माल के स्ट् िामी या दकसी अन् य व् यजक् त (जिसे

इस अध् याय में इसके पश् चात् “प्रमाणपत्र-ऋणी” किा गया िै) से

िोध् य कर की कोई रकम, ब्याि या िाजस्ट् त, संजिरचना धन या

इस जिजनयम के अधीन िोध् य अन् य रकम जिजनर्ििष् ट करते हुए

अपने िस्ट् ताक्षर के अधीन िसूली प्रमाणपत्र (जिसे इस अध् याय

में इसके पश् चात् “प्रमाणपत्र” किा गया िै) तैयार कर सकेगा

और उक् त प्रमाणपत्र की ऐसी रीजत और ऐसे प्ररूप में, िो

जिजित दकया िाए, प्रमाणपत्र-ऋणी पर तामील कराएगा और

प्रमाणपत्र-ऋणी से ऐसे जनयमों को, िो जिजित दकए िाएं, के

अनलसार जनम् नजलजखत एक या अजधक रीजत द्वारा प्रमाणपत्र में

जिजनर्ििष् ट रकम की िसूली के जलए अग्रसर िोगा—

(क) प्रमाणपत्र-ऋणी की चल संपजत्त की कलकी और

जिक्रय;

(ख) प्रमाणपत्र-ऋणी की अचल संपजत्त की कलकी और

जिक्रय;

(ग) प्रमाणपत्र-ऋणी की जगरफ्तारी और पंद्रि दिन की

अिजध के जलए उसका कारािास जनरोध;

(घ) प्रमाणपत्र-ऋणी की चल और अचल संपजत्तयों के

प्रबंध के जलए ररसीिर की जनयलजक् त ।

(7) आयलक् त, व् यजतक्रमी पर उपधारा (6) के अधीन

िसूली प्रमाणपत्र की तामील इस बात के िोते हुए भी करा

सकेगा दक ऐसे कर, ब् याि या िाजस्ट् त, संजिरचना, धन अन् य

िोध् य रकम की िसूली के जलए कायिाजियां प्रारंभ की िा चलकी

िैं या दकसी अन् य रीजत में िारी िै ।

(8) प्रमाणपत्र-ऋणी पर उपधारा (6) के अधीन

प्रमाणपत्र की तामील पर,—

(क) उसकी अचल संपजत्त या ऐसी दकसी संपजत्त में दकसी

जित का कोई जनिी अंतरण या पररिान, प्रमाणपत्र के जनष् पािन

में प्रितिनीय दकसी िािे के जिरुद्ध िून् य िोगा; और

(ख) प्रमाणपत्र की बाबत समय-समय पर िोध् य रकम

प्रमाणपत्र-ऋणी की अचल संपजत्त पर प्रभाररत िोगी, जिस पर

उक् त प्रमाणपत्र की तामील के पश् चात्िती सृजित प्रत् येक अन् य

प्रभार मल्तिी िोंगे ।

(9) प्रमाणपत्र-ऋणी, प्रमाणपत्र की तामील से तीस दिन

के भीतर अपने िाजयत् ि का पूणित: या भागत: इंकार करते हुए

आयलक् त को एक याजचका प्रस्ट् तलत कर सकेगा ।

(10) आयलक् त याजचका पर सलनिाई करेगा, यदि

आिश् यक िो साक्ष् य लेगा और यि अिधाररत करेगा दक

प्रमाणपत्र-ऋणी उस रकम जिसके जलए प्रमाणपत्र िस्ट् ताक्षररत

दकया गया था, के जलए पूणि रूप से या उसके दकसी भाग के

जलए उत् तरिायी िै ।

(11) ििां असंित्त रि गए दकसी कर, ब् याि या िाजस्ट् त,

संजिरचना धन या दकसी अन् य िोध् य रकम की िसूली के जलए

कोई कायिाजियां इस धारा के अधीन प्रारंभ की गई िै और कर,

ब् याि या िाजस्ट् त, संजिरचना धन या कोई अन् य िोध् य रकम

तत् पश् चात् इस जिजनयम के अधीन दकए गए दकसी जनधािरण या

दकसी आक्षेप, अपील, पलनरीक्षण या पलनर्ििलोकन में पाररत

आिेि के पररणामस्ट् िरूप उपांतररत, बढाई या घटाई िाती िै,

तो आयलक् त, प्रमाणपत्र-ऋणी को सूचना िे सकेगा और उसके

पश् चात् ऐसी कायिाजियां िारी रि सकेगी मानों दक इस प्रकार

उपांतररत, बढाया या घटाया कर, ब् याि या िाजस्ट् त,

संजिरचना, धन या कोई अन् य िोध् य रकम, उस कर, ब् याि या

िाजस्ट् त, संजिरचना, धन या कोई अन् य िोध् य रकम, िो

उपधारा (3) के अधीन िसूल की िानी थी, से प्रजतस्ट् थाजपत कर

िी गई िै ।

44. िसूली के प्रयोिनों के जलए लक् कािीि, जमजनकोय

और अमीनिीिी द्वीप भूजम रािस्ट् ि और दकरायेिारी जिजनयमन

1965 का लागू िोना—(1) इस जिजनयम के अधीन भू-रािस्ट् ि

के बकाया के रूप में िसूलनीय दकसी रकम की िसूली के

प्रयोिनों के जलए लक् कािीि, जमजनकोय और अमीनिीिी द्वीप

भूजम रािस्ट्ि और दकराएिारी जिजनयमन 1965, (1965 का

6) भू-रािस्ट् ि के बकाया की िसूली को, उस जिजनयम या दकसी

अन् य अजधजनयजमजत में अंतर्ििष् ट दकसी बात के िोते हुए भी,

संपूणि लक्षद्वीप में प्रिृत्त हुआ समझा िाएगा और तिनलसार

रािस्ट् ि िसूली अजधजनयम, 1890 (1890 का 1) के उपबंध

लागू िोंगे ।

(2) उपधारा (1) के प्रयोिनों के जलए,—

(क) अपर आयलक् त, मूल् य िर्धित कर और संयलक् त

आयलक् त, मूल् य िर्धित कर को लक् कािीि, जमजनकोय और

अमीनिीिी द्वीप भूजम रािस्ट्ि और दकरायेिारी जिजनयम,

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

21

1965 (1965 का 6) के अधीन उप-आयलक् त द्वारा प्रयोक् तव् य

सभी िजक् तयों का प्रयोग करेंगे और कतिव् यों का पालन करेंगे;

(ख) उपायलक् त, मूल् य िर्धित कर और सिायक आयलक् त,

मूल् य िर्धित कर, उक् त जिजनयम के अधीन सिायक आयलक् त या

सिायक आयलक् त (समझौता) के सभी कतिव् यों का जनििन करेंगे

और सभी िजक् तयों का प्रयोग करेंगे;

(ग) मूल्य िर्धित कर अजधकारी और सिायक मूल्य

िर्धित कर अजधकारी उि जिजनयम के अधीन तिसीलिार के

सभी कतिव्यों का जनििन और सभी िजियों का प्रयोग करेंगे।

45. कजतपय िसूली कायिाजियों का िारी रिना—

ििां इस जिजनयम (जिसे इस धारा में इसके पश् चात् “सरकारी

िोध् य” किा गया िै) के अधीन दकसी कर, िाजस्ट् त या अन् य संिेय

रकम के संबंध में कोई जनधािरण या मांग नोरटस दकसी व् यजक् त

पर तामील दकया िाता िै और ऐसे सरकारी िोध् य के जलए

जनधािरण या मांग के जिरुद्ध व् यजक् त द्वारा कोई आक्षेप या अपील

की िाती िै, तो—

(क) यदि आक्षेप या अपील पूणित: या भाग रूप में

अननलज्ञात िो िाती िै तो, ऐसे सरकारी िोध् य की िसूली के

जलए दकन् िीं िसूली कायिाजियों को दकसी नए जनधािरण या

मांग नोरटस के तामील के जबना ऐसी िसूली कायिाजियां उसी

स्ट् तर से िारी रिेंगी ििां से ऐसे व् यजक् त जिसने ठीक पूिि आक्षेप

या अपील की थी;

(ख) ििां ऐसे सरकारी िोध् य दकसी आक्षेप या अपील में

कटौती की िाती िै,—

(i) आयलक् त के जलए यि आिश् यक निीं िोगा दक दकसी

नए जनधािरण या मांग नोरटस की तामील व् यजक् त पर करें ;

(ii) आयलक् त ऐसी कटौती, उसे और उस व् यजक् त को,

जिसके पास िसूली कायिाजियां लंजबत िै, की सूचना उसे िेगा;

और

(iii) ऐसे आक्षेप या अपील के जनपटान से पूिि दकसी

व् यजक् त पर तामील दकए गए मांग की नोरटस या दकसी

जनधािरण के आधार प्रारंभ कोई िसूली कायिाजियां इस प्रकार

कम दकए गए स्ट् तर से जिस पर ऐसी कायिाजियां आक्षेप या

अपील करने से पूिि उस व् यजक् त के जिरुद्ध िारी थी; और

(ग) ऐसे सरकारी िोध् यों के संबंध में कोई िसूली

कायिाजियां केिल इस कारण अजिजधमान् य निीं िोंगी दक ऐसे

आक्षेप या अपील के जनपटान के पश् चात् व् यजक् त या व् यौिारी

पर दकसी नए मांग नोरटस की तामील निीं की गई या ऐसे

सरकारी िोध् यों में ऐसे आक्षेप या अपील में िृजद्ध या कटौती की

गई िै;

46. जििेष िसूली पद्धजत—(1) तत् समय प्रिृत्त दकसी

जिजध या संजििा में दकसी प्रजतकूल बात के िोते हुए भी,

आयलक् त, दकसी समय या समय-समय पर, जलजखत में नोरटस

द्वारा, जिसकी एक प्रजत उस व् यजक् त को उसके अंजतम ज्ञात पते

पर अग्रेजषत की िाएगी, जनम् नजलजखत की अपेक्षा कर

सकेगा,—

(क) कोई व् यजक् त जिससे धन की कोई रकम िोध् य िै या

िोध् य िो सकेगी, व् यजक् त (इस धारा में “करिाता” किा गया िै)

धारा 45 के अधीन कर, ब् याि या िाजस्ट् तयों के संिाय का िायी

िोगा; या

(ख) कोई व् यजक् त िो करिाता के कारण कोई धन लेता

िै या पश् चात्िती धन ले सकेगा, आयलक् त को या तो तलरंत धन

िोध् य िोने पर या धन जलए िाने पर या नोरटस में पिले

उजल् लजखत जिजनर्ििष् ट समय के भीतर (ककंतल धन िोध् य िोने से

पूिि निीं या उपरोक् त कजथत धन लेने से पूिि निीं) केिल उतना

धन जितना इस जिजनयम के अधीन कर के बकाया, ब् याि और

िाजस्ट् त के संबंध में करिाता द्वारा िोध् य रकम का संिाय करने

के जलए पयािप् त िै या संपूणि धन िब यि उस रकम के बराबर

या कम िो ।

(2) आयलक् त, ऐसा कोई नोरटस संिोजधत या िापस ले

सकेगा या नोरटस के अनलसरण में कोई संिाय करने के जलए

समय बढा सकेगा ।

(3) इस धारा के अधीन दकसी नोरटस की अनलपालना में

कोई संिाय करने िाले व् यजक् त को करिाता के प्राजधकाराधीन

संिाय दकया गया समझा िाएगा और आयलक् त द्वारा उसकी

पािती में जिजनर्ििष् ट रकम के जिस्ट् तार तक ऐसे व् यजक् त की

िेयता के उन् मोचन के जलए सिी और पयािप् त उन् मोचन हुआ

समझा िाएगा ।

(4) इस धारा में जनर्ििष् ट नोरटस की प्राजप् त के पश् चात्

करिाता की िेयता का उन् मोचन करने िाला कोई व् यजक् त

व् यजक् तगत रूप से उन् मोजचत िेयता के जिस्ट् तार तक आयलक् त के

जलए िायी िोगा या व् यौिारी के जलए कर और िाजस्ट् त की

िेयता के जिस्ट् तार तक, िोनों में से िो भी कम िो ।

(5) कोई व् यजक् त जिसे इस धारा के अधीन नोरटस भेिा

िाता िै, आयलक् त का यि समाधान िो िाता िै दक मांग की गई

राजि या उसका कोई भाग करिाता से िोध् य निीं िै या उसके

पास कोई धन निीं िै या करिाता के कारण, तो इस धारा में

अंतर्ििष् ट कोई बात, यथाजस्ट् थजत, ऐसी राजि या उसके दकसी

भाग को आयलक् त को ऐसे व् यजक् त से संिाय करना अपेजक्षत निीं

िोगा।

(6) कोई रकम जिसे पूिोक् त व् यजक् त से आयलक् त को

संिाय करना अपेजक्षत िै या िि इस धारा के अधीन आयलक् त को

व् यजक् तगत रूप से िायी िै, यदि यि असंित्त रिता िै तो यि भू-

रािस्ट् ि के रूप में िसूलनीय िोगा ।

(7) आयलक् त, उस न् यायालय को आिेिन कर सकेगा,

जिसकी अजभरक्षा में करिाता से संबंजधत धन िै, ऐसे धन की

संपूणि रकम का उसे संिाय करने के जलए या यदि यि कर,

ब् याि और िाजस्ट्त यदि कोई िै, से अजधक िै तो ऐसे कर और

िाजस्ट् त का उन् मोचन करने के जलए पयािप् त िोध् य रकम का

संिाय करने िेतल आिेिन कर सकेगा ।

(8) ििां कायिाजियों की िांच के अनलक्रम के िौरान,

जिसके अंतगित दकसी व् यजक् त या व् यौिारी के संबंध में िोध् य

22

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

दकसी रकम की िसूली के जलए कायिाजियां भी िैं या इस

जिजनयम के अधीन व्यौिारी या दकसी व् यजक् त के कारबार के

संबंध में दकसी जनरीक्षण या खोि के िौरान, यदि आयलक् त की

राय िै दक रािस्ट् ि का जित संरजक्षत करने के प्रयोिन के जलए

ऐसा करना आिश् यक िै तो िि तत् समय प्रिृत्त दकसी जिजध में

अंतर्ििष् ट दकसी बात के िोते हुए भी या दकसी संजििा में

प्रजतकूल दकसी बात के िोते हुए भी जलजखत में आिेि द्वारा, ऐसे

व् यजक् त या व् यौिारी से संबंध रखने िाली कोई चल या अचल

संपजत्त अंनजतम रूप से कलकि कर सकेगा ।

(9) उपधारा (8) में जनर्ििष् ट प्रत् येक अंनजतम कलकी,

उपधारा (1) के अधीन आिेि की तारीख से छि मास की

अिजध के अिसान के पश् चात् प्रितिन में निीं रिेगी :

परंतल आयलक् त, लेखबद्ध दकए िाने िाले कारणों के जलए

पूिोक् त अिजध को ऐसी और अिजध या अिजधयों के जलए िो

िि ठीक समझे, बढा सकेगा, तथाजप दकसी भी ििा में जिस्ट् तार

की कलल अिजध िो िषि से अजधक निीं िोगी:

परंतल यि और दक आयलक् त, आिेि द्वारा ऐसा आिेि

िाजपस ले सकेगा यदि ऐसा व् यजक् त या व् यौिारी आयलक् त को

ऐसे समय में, ऐसी अिजध के जलए, िो इस जनजमत्त आयलक् त

द्वारा जिजनर्ििष् ट की िाए, बैंक प्रत् याभूजत प्रस्ट् तलत करता िै:

परंतल यि भी दक इस धारा के अधीन िजक् त स्ट् ियं आयलक् त

द्वारा या ऐसे अपर आयलक् त द्वारा जिसे आयलक् त ने ऐसी िजक् त

प्रत् यायोजित की िै, प्रयोग की िाएगी ।

47. कायिाजियों के लंजबत रिने के िौरान आजस्ट् तयों का

अंतरण—ििां इस जिजनयम के अधीन दकसी व् यजक् त द्वारा

िोध् य दकसी रकम की िसूली के जलए कोई कायिाजियां लंजबत

िै, िि व् यजक् त जिक्रय, बंधक, जगफ्ट या जिजनयम या दकसी भी

प्रकार से दकसी अन् य पद्धजत से अंतरण द्वारा उसके कब् िे में या

उसके दकसी भाग पर भार सृिन करता िै, तो उसकी कोई

आजस्ट् त दकसी अन् य व् यजक् त के पक्ष में अंतरण करता िै तो ऐसा

प्रभार या अंतरण तो आयलक् त द्वारा िािे के जिरुद्ध िि उस रकम

के संबंध में िून् य िोगा िो कायिाजियों का जिषय िै, िब तक

दक ऐसा अन् य व् यजक् त ने,—

(क) सि् भािनापूििक और िसूली कायिाजियों की नोरटस

के जबना कायि दकया िै ; और

(ख) आजस्ट् तयों के जलए सिी बािार मूल् य संित्त दकया ।

अध् याय 8

लेखे और अजभलेख

48. लेखे और अजभलेख—(1) प्रत् येक ऐसा व् यौिारी या

व् यजक् त, जिसको धारा 27 के अधीन जििरजणयां प्रस्ट् तलत करने के

जलए नोरटस की तामील की गई िै, कारबार के मलख य स्ट् थान पर,

िो उसने अपने रजिस्ट् रीकरण प्रमाणपत्र में अजभजलजखत दकया

िै, इस जिजनयम के अधीन िेय कर की रकम और सभी

संव् यििारों, घटनाओं और उस व् यजक् त द्वारा दकए गए अन् य

कायों के जलए दकसी प्रयोिन िेतल सलसंगत सभी संव् यििारों का

स्ट् पष् टीकरण करने िेतल तलरंत अजभजनजश् चत करने के जलए

आयलक् त को अनलज्ञात करने िेतल पयािप् त अजभलेख तैयार करेगा

और उन् िें अनलरजक्षत तथा बनाए रखेगा :

परंतल आयलक् त द्वारा िब और ििां अपेजक्षत िो,

रजिस्ट् रीकरण प्रमाणपत्र में उसके अजभजलजखत कारबार के मलख य

स्ट् थान पर तलरंत उपलब् ध की िा सकने िाली अजभलेख की िाडि

या साफ्ट कापी, दकसी साफ्टिेयर के प्रयोग द्वारा कंप् यूटरीकृत

लेखाबजियां व् यौिारी द्वारा अनलरजक्षत की िानी चाजिए ।

(2) उपजनयम (1) में अंतर्ििष् ट दकसी बात के िोते हुए

भी—

(क) प्रत् येक रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी उसके द्वारा िारी सभी

कर बीिकों की प्रजत संरजक्षत करेगा;

(ख) प्रत् येक व् यौिारी उसके द्वारा प्राप् त सभी कर बीिकों

की मूलप्रजत संरजक्षत करेगा; और

(ग) प्रत् येक व् यजक् त जिसने इस जिजनयम के अधीन िोध् य

कर की रकम, ब् याि, िाजस्ट् त या अन् य िोध् य रकम संित्त की िै,

चालान की एक प्रजत संरजक्षत करेगा िो इस बात का िस्ट् तािेिी

साक्ष् य िोगी दक उसने रकम का संिाय कर दिया िै ।

(3) आयलक् त ऐसी रीजत और प्ररूप जिजित कर सकेगा,

जिसमें लेखे और अजभलेख तैयार दकए िाने िैं ।

(4) यदि आयलक् त यि समझता िै दक ऐसे अजभलेख

पयािप् त रूप से स्ट् पष् ट और इस अजधजनयम के अधीन व् यजक् त से

अपेजक्षत बाध् यताओं की उजचत िांच को समथि बनाने के जलए

पठनीय निीं िै तो िि ऐसे व् यजक् त को जलजखत में नोरटस द्वारा,

िो उसमें जिजनर्ििष् ट दकया िाए, ऐसे लेखों को (जिसके अंतगित

क्रय और जिक्रय के अजभलेख भी िै) बनाए रखने िेतल अपेक्षा कर

सकेगा ।

(5) आयलक् त, रािपत्र में अजधसूचना द्वारा व् यौिाररयों के

दकसी िगि, पररिािकों या िेयरिाउस के प्रचालकों को ऐसे लेखे

(जिसके अंतगित क्रय और जिक्रय के अजभलेख भी िै) िो

अजधसूचना में जिजनर्ििष् ट दकए िाएं, बनाए रखने के आिेि िे

सकेगा ।

(6) प्रत् येक व् यजक् त जिससे अजभलेख और लेखे तैयार

करना या संरजक्षत करना अपेजक्षत िै संव् यििारों या घटनाओं

की समाजप् त के पश् चात् कम से कम सात िषि के जलए लेखे और

अजभलेख बनाए रखना अपेजक्षत िोगा जिनका िे अजभलेख

रखते िैं, यदि ऐसे अजभलेख उस िषि के संबंध में दकन् िीं

कायिाजियों के जलए िो मामले में लंजबत िै, उन कायिाजियों

के अंजतम जिजनश् चय तक संरजक्षत रखेगा । उनके खो िाने पर,

घटना की तारीख से पन् द्रि दिन की अिजध के भीतर आयलक् त

और पलजलस को ररपोटि की िाएगी ।

49. कजतपय मामलों में लेखापरीजक्षत दकए िाने िाले

लेखा—यदि दकसी जिजिष् ट िषि के संबंध में दकसी व् यौिारी का

सकल आितिन 60 लाख रुपए या ऐसी अन् य रकम, िो जिजित

की िाए, से अजधक िै, तो ऐसा व् यौिारी ऐसी रीजत में और

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

23

ऐसे प्ररूप में तथा ऐसी अिजध में िो आयलक् त द्वारा अजधसूजचत

की िाए, एक ररपोटि प्रस्ट् तलत करेगा ।

50. कर बीिक—(1) इस जिजनयम के अधीन जिक्रयकताि

रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी क्रेता के अनलरोध पर जिक्रय के समय क्रेता

को कर बीिक, उपजनयम (2) में जिजनर्ििष् ट जिजिजष् टयां

अंतर्ििष् ट करते हुए कर बीिक क्रेता को उपलब् ध करेगा और

उसकी एक प्रजत अपने पास रखेगा :

परंतल कर बीिक दकसी व् यौिारी द्वारा िारी निीं की

िाएगी िो—

(क) धारा 16 के अधीन कर संिाय करने का जिकल् प

चलनता िै; या

(ख) अंतरराज् यीय व् यिसाय या िाजणज् य या जनयाित के

अनलक्रम में जिक्रयकताि िै:

परंतल यि और दक प्रत् येक जिक्रय के जलए एक से अजधक

कर बीिक िारी निीं दकया िाएगा :

परंतल यि भी दक यदि कोई बीिक केंद्रीय सीमािल् क

अजधजनयम, 1944 (1944 का 1) के उपबंधों के अधीन िारी

की गई िै तो यि समझा िाएगा दक कर बीिक में उपधारा (2)

में जिजनर्ििष् ट जिजिजष् टयां अंतर्ििष् ट िैं ।

(2) उपधारा (1) के अधीन िारी कर बीिक में मूल के

साथ-साथ उसकी प्रजतयों में भी जनम् नजलजखत जिजिजष् टयां

अंतर्ििष् ट िोंगी :—

(क) सिििृश् य स्ट् थान पर “कर बीिक” िब् ि ;

(ख) जिक्रय करने िाले रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी का नाम,

पता और रजिस्ट् रीकरण संख यांक;

(ग) ििां क्रेता रजिस्ट् रीकृत व् यौिारी िै ििां क्रेता का

नाम और पता तथा उसकी रजिस्ट् रीकरण संख या;

(घ) कोई व् यजष् टक पूिि मलदद्रत क्रम संख यािार संख या और

िि तारीख, जिसको कर बीिक िारी की िाती िै :

परंतल कोई व् यौिारी प्रत् येक कारबार के स्ट् थान के जलए

पिले या बाि में िोड़े िाने िाले जिजिष् ट जििेष कोडों सजित

पृथक् अंकीय श्रृंखला रख सकेगा यदि व् यौिारी का लक्षद्वीप में

कारबार एक से अजधक स्ट् थान पर िै या यदि िि एक से अजधक

या िोनों उत् पािों में कायि करता िै तो प्रत् येक उत् पाि के जलए

पृथक् अंकीय श्रृंखला रख सकेगा :

परंतल यि और दक ऐसी अंकीय श्रृंखला आयलक् त द्वारा ऐसी

रीजत और प्ररूप में तथा ऐसी तारीख से, िो उसके द्वारा

अजधसूजचत की िाए, प्रिान की िा सकेगी ;

(ड.) जिक्रय दकए गए माल का िणिन, मात्रा, संख या और

मूल् य तथा उपलब् ध कराई गई सेिाओं एिं उन पर प्रभायि कर

की रकम पृथक् रूप से िर्िित की िाएगी;

(च) जिक्रय करने िाले व् यौिारी या उसके सेिक, प्रबंधक

या अजभकताि सम्यक् रूप से उसके द्वारा प्राजधकृत, के िस्ट् ताक्षर ;

और

(छ) मलद्रक का नाम और पता और उसके द्वारा व् यौिारी

को प्रिाय की गई और मलदद्रत कर बीिकों की पिली और अंजतम

क्रम संख या ।

(3) दकसी जिक्रय के संबंध में कोई कर बीिक िो प्रजतयों

में िारी की िाएगी, मूल क्रेता को िारी की िाएगी (या

यथाजस्ट् थजत, पररिान लेने िाले व् यजक् त को) और िूसरी प्रजत

जिक्रय करने िाले व् यौिारी द्वारा रखी िाएगी ।

(4) तब के जसिाय िब कोई कर बीिक उपधारा (1) के

अधीन िारी की िाती िै, दकसी एकल संव् यििार में दकसी

व् यजक् त को यदि कोई व् यौिारी ऐसी रकम के मूल् य िो जिजित

की िाए, से अजधक माल का जिक्रय करता िै तो िि क्रेता को

एक खलिरा बीिक, उपधारा (5) में जिजनर्ििष् ट जिजिजष् टयां

अंतर्ििष् ट करते हुए, िारी करेगा और उसकी एक प्रजत रखेगा ।

(5) उपधारा (4) के अधीन िारी की गई खलिरा बीिक

में मूल के साथ-साथ उसकी प्रजतयों पर जनम् नजलजखत

जिजिजष् टयां अंतर्ििष् ट िोंगी—

(क) दकसी सिि िृश् य स्ट् थान पर “खलिरा बीिक” या

“नकि ज्ञापन” या “जबल” िब् ि ;

(ख) जिक्रय करने िाला व् यौिारी यदि रजिस्ट् रीकृत िै तो

रजिस्ट् रीकरण संख या और नाम तथा पता;

(ग) यदि जिक्रय अंतरराज् यीय व् यिसाय या िाजणज् य के

अनलक्रम में िै तो क्रय करने िाले व् यौिारी का नाम,

रजिस्ट् रीकरण संख या और पता और कानूनी प्ररूप का प्रकार,

यदि कोई िै, जिसके जलए जिक्रय दकया गया िै;

(घ) एक व् यजष् टक पूिि मलदद्रत श्रृंखलािार संख या और

तारीख जिसको खलिरा बीिक िारी की गई िै :

परंतल यदि व् यौिारी का लक्ष् यद्वीप में कारबार का एक से

अजधक स्ट् थान िै या यदि िि एक से अजधक उत् पािों में कायि

करता िै या िोनों के जलए, या तो पिले या बाि में िोड़े िाने

िाले जिजिष् ट कोड सजित पृथक् अंकीय श्रृंखला रख सकेगा :

परंतल यि और दक ऐसी अंकीय श्रृंखला आयलक् त द्वारा ऐसी

रीजत में और ऐसी तारीख से, िो उसके द्वारा अजधसूजचत की

िाए, प्रिान की िा सकेगी ।

(ड.) जिक्रीत माल तथा उपलब् ध कराई गई सेिाओं का

मूल् य और भाग, मात्रा और िणिन तथा उन पर प्रभाररत कर की

रकम पृथक् रूप से िर्िित की िाएगी; और

(च) जिक्रय करने िाले व् यौिारी या उसके सेिक सम्यक्

रूप से प्राजधकृत प्रबंधक या अजभकताि के िस्ट् ताक्षर ।

(6) खलिरा बीिक िो प्रजतयों में िारी की िाएगी, मूल

क्रेता को िारी की िाएगी और प्रजत जिक्रय करने िाले व् यौिारी

द्वारा रखी िाएगी ।

(7) आयलक् त, रािपत्र में अजधसूचना द्वारा, ऐसी रीजत

और प्ररूप जिजनर्ििष् ट कर सकेगा जिसमें दकसी कर बीिक या

खलिरा बीिक की जिजिजष् टयां अजभजलजखत की िानी िैं ।

24

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(8) यदि क्रेता यि िािा करता िै दक मूल कर बीिक खो

गया िै तो जिक्रय करने िाला व् यौिारी, ऐसी ितों और

जनबंधनों के अधीन रिते हुए, िो जिजित दकए िाएं, िूसरी प्रजत

स्ट् पष् ट रूप से जचजन् ित करते हुए उपलब् ध करेगा ।

51. िमापत्र और नामे नोट—ििां कोई कर बीिक

दकसी जिक्रय के संबंध में िारी दकया गया िै और—

(क) उस कर बीिक में कर के रूप में िर्िित रकम और

जिक्रय के संबंध में संिेय कर से अजधक िै तो व् यौिारी क्रेता को

िमापत्र, ऐसी जिजिजष् टयां अंतर्ििष् ट करते हुए िो जिजित की

िाएं, प्रिान करेगा; या

(ख) कर बीिक पर कर के रूप में िर्िित रकम जिक्रय के

संबंध में संिेय कर से अजधक िै तो,

व् यौिारी क्रेता को नामे नोट, ऐसी जिजिजष् टयां अंतर्ििष् ट करते

हुए, िो जिजनर्ििष् ट की िाएं, प्रिान करेगा ।

अध् याय 9

जििेष मामलों में िाजयत् ि

52. कारबार के अंतरण की ििा में िाजयत् ि —(1) ििां

कोई व् यौिारी इस जिजनयमन के अधीन कर संिाय करने के जलए

िायी कोई व् यौिारी अपने संपूणि या भाग रूप में जिक्रय द्वारा,

उपिार पट्टा, त् याग या अनलज्ञजप् त, दकराया या दकसी भी अन् य

रीजत में अंतरण करता िै तो व् यौिारी और ऐसा व् यजक् त जिसको

इस प्रकार कारबार अंतररत दकया िै संयलक् त: और पृथकत: कर,

ब् याि या व् यौिारी से ऐसे अंतरण के समय से िेय िाजस्ट् त के

संिाय का िायी िोगा, चािे ऐसी रकम का जनधािरण अंतरण से

पूिि दकया गया िै ककंतल िो असंित्त रिी िै या उसके पश् चात्

जनधािररत की गई िै ।

(2) ििां उपधारा(1) में जनर्ििष् ट अंतररती या कारबार

का पट्टाधारी या तो अपने स्ट् ियं के नाम में या दकसी अन् य नाम

में ऐसा कारबार करता िै तो िि ऐसे अंतरण की तारीख से

उसके द्वारा मालों के जिक्रय पर कर संिाय का िायी िोगा और

यदि िि व् यौिारी के रूप में रजिस्ट् रीकृत िै तो अपने

रजिस्ट् रीकरण के संिोधन के जलए धारा 21 में जिजनर्ििष् ट समय

के भीतर आिेिन करेगा ।

53. पररसमापन में कंपनी की ििा में िाजयत् ि—(1)

प्रत् येक व् यजक् त—

(क) िो दकसी कंपनी का समापक िै जिसका पररसमापन

दकया िा रिा िै, चािे न् यायालय के आिेिों के अधीन या

अन् यथा ; या

(ख) िो दकसी कंपनी की दकन् िीं आजस्ट् तयों का प्रापक

जनयलक् त दकया गया िै (जिसे इस धारा में इसके पश् चात्

“समापक” किा गया िै),

ऐसे समापक बनने के पश् चात् एक मास के भीतर आयलक् त को

अपनी ऐसी जनयलजक् त की सूचना िेगा।

(2) आयलक् त, ऐसी िांच करने के पश् चात् या ऐसी

िानकारी मांगने के पश् चात्, िो िि ठीक समझे, उस तारीख से

तीन मास के भीतर समापक को अजधसूजचत करेगा जिसको उसे

समापक की जनयलजक् त की सूचना प्राप् त हुई िै, और ऐसी रकम

िो आयलक् त की राय में कंपनी द्वारा संिेय दकसी कर, ब् याि या

िाजस्ट् त िो तब िेय िै या उसके पश् चात् िेय िोना संभाि् य िै,

का संिाय करने िेतल पयािप् त िोगी ।

(3) समापक कंपनी की आजस्ट् तयों या उसके पास

संपजत्तयों का तब तक कोई भाग निीं िोगा िब तक उपधारा

(2) के अधीन आयलक् त द्वारा उसे अजधसूजचत निीं दकया गया िै

और इस प्रकार अजधसूजचत िोने पर समापक अजधसूजचत रकम

के बराबर रकम अलग रखेगा और िब तक िि ऐसी रकम

अलग निीं रखता िै तब तक िि कंपनी की दकन् िीं आजस्ट् तयों या

उसके िाथ में संपजत्तयों का कोई भाग निीं िोगा :

परंतल इस धारा में अंतर्ििष् ट कोई बात न् यायालय के

दकसी आिेि की अनलपालना में या कर और िाजस्ट् त, यदि कोई

िो, इस अजधजनयम के अधीन संिेय दकसी कर या िाजस्ट् त का

संिाय करने के प्रयोिन के जलए या ऐसे प्रजतभू उधार िाताओं

को कोई संिाय करने के जलए जिनका उधार पररसमापन की

तारीख पर सरकार को िेय उधारों पर जिजध के अधीन पूर्ििकता

का िकिार िै या ऐसी लागतों और व् ययों को पूरा करने के जलए

िो कंपनी के पररसमापन िेतल आयलक् त की राय में यलजक् तयलक् त िैं,

के जलए ऐसी संपजत्तयों या आजस्ट् तयों को अलग करने से समापक

को अपिर्िित निीं करेगा ।

(4) यदि समापक उपधारा (1) के अनलसार सूचना िेने में

असफल रिता िै या उपधारा (3) द्वारा यथापेजक्षत रकम को

अलग रखने में असफल रिता िै या कंपनी की दकन् िीं आजस्ट् तयों

या उसके िाथ में संपजत्तयों को उस उपधारा के उपबंधों के

उल् लंघन में अलग करता िै तो िि व् यजक् तगत रूप से ऐसे कर के

संिाय और िाजस्ट् त िेतल िायी िोगा, यदि कोई िो, जिसका

संिाय इस जिजनयम के अधीन करने िेतल कंपनी िायी िोगी :

परंतल यदि कोई कर और िाजस्ट् त की रकम, यदि कोई िो,

कंपनी द्वारा संिेय कर और िाजस्ट् त उपधारा (2) के अधीन

अजधसूजचत की िाती िै तो इस उपधारा के अधीन समापक की

व् यजक् तगत िेयता ऐसी रकम के जिस्ट् तार तक िोगी ।

(5) ििां एक से अजधक पररसमापक िैं, ििां इस धारा

के अधीन पररसमापक से संलग् न बाध्यताएं और िाजयत् ि सभी

पररसमापकों से संयलक् तत: और पृथकत: संलग् न िोंगे ।

(6) िब दकसी प्राइिेट कंपनी का पररसमापन कर दिया

िाता िै और दकसी अिजध के जलए कंपनी पर इस जिजनयम के

अधीन दकसी कर और िाजस्ट् त, यदि कोई िो, चािे िि उसके

पररसमापन से पूिि या उसके िौरान या उसके पश् चात् जनधािररत

दकया गया िो, को िसूल निीं दकया िा सकता, तब ऐसा

प्रत् येक व् यजक् त ऐसी अिजध, जिसके जलए कर िेय िै, के िौरान

दकसी भी समय प्राइिेट कंपनी का जनिेिक था, ऐसे कर और

िाजस्ट् त, यदि कोई िो, के संिाय के जलए संयलक् त रूप से और

पृथक् रूप से तब तक िायी िोगा िब तक िि आयलक् त के

समाधानप्रि रूप में यि साजबत निीं कर िेता िै दक गैरिसूली

को कंपनी के कायिकलापों के संबंध में उसकी ओर से घोर

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

25

उपेक्षा, अपकरण या कतिव् य-भंग के कारण हुआ निीं माना िा

सकता ।

(7) इस जिजनयम के उपबंध तत् समय प्रिृत्त दकसी अन् य

जिजध में अंतर्ििष् ट तत् प्रजतकूल बात के िोते हुए भी प्रभािी िोंगे।

(8) इस धारा के प्रयोिनों के जलए, “कंपनी” और

“प्राइिेट कंपनी” पिों का ििी अथि िोगा िो कंपनी अजधजनयम,

2013 (2013 का 18) की धारा 2 के खंड (20) और खंड (68)

में क्रमि: उनका िै ।

54. फमि के भागीिारों का कर का संिाय करने का

िाजयत् ि—तत् प्रजतकूल दकसी संजििा के िोते हुए भी, ििां कोई

फमि इस जिजनयम के अधीन दकसी कर, ब् याि या िाजस्ट् त का

संिाय करने की िायी िै, ििां ऐसी फमि और फमि के भागीिारों

में से प्रत् येक भागीिार ऐसे संिाय के जलए संयलक् तत: या

पृथि: िायी िोगा :

परंतल ििां कोई ऐसा भागीिार फमि से सेिाजनिृत् त िो

िाता िै, ििां िि जलजखत में इस आिय की सूचना द्वारा

आयलक् त को अपनी सेिाजनिृजत् त की तारीख के बारे में सूजचत

करेगा और अपनी सेिाजनिृजत् त के समय िेष असंित्त कर, ब् याि

या िाजस्ट् त और अपनी सेिा जनिृजत् त की तारीख तक िेय दकसी

कर, ब् याि या िाजस्ट् त भले िि उस तारीख को जनधािररत न की

गई िो, का संिाय करने का िायी िोगा :

परंतल यि और दक ऐसी कोई सूचना सेिाजनिृजत् त की

तारीख से पंद्रि दिन के भीतर िी िाती िै तो पिले परंतलक के

अधीन भागीिार का िाजयत् ि उस तारीख तक बना रिेगा

जिसको ऐसी सूचना आयलक् त द्वारा प्राप् त की िाती िै ।

55. संरक्षक, न् याजसयों, आदि का िाजयत् ि—ििां ऐसा

कारबार, जिसके संबंध में इस जिजनयम के अधीन कर संिेय िै,

दकसी संरक्षक, न् यासी द्वारा या अियस्ट् क के अजभकताि या उसकी

ओर से अन् य असमथि व् यजक् त द्वारा और ऐसे अियस्ट् क या अन् य

असमथि व् यजक् त के फायिे के जलए दकया िाता िै या उनमें के

भारसाधन में िै, ििां कर, ब् याि या िाजस्ट् त, यथाजस्ट् थजत, ऐसे

संरक्षक, न् यासी, अजभकताि से, िैसी िी रीजत में और िैसी िी

सीमा तक िैसा िि ऐसे दकसी अियस्ट् क या अन् य असमथि

व् यजक् त पर उसका इस प्रकार जनधािरण दकया गया िोता और

उससे िसूलनीय िोता मानों िि पूणि ियस्ट् क और स्ट् िस्ट् थ जचत् त

का िोता और िि मानों स्ट् ियं कारबार कर रिा िोता, पर

उि् गृिीत की िाएगी और उससे िसूलनीय िोगी तथा सभी उपबंध,

यथािक् य, तिनलसार लागू िोंगे ।

56. प्रजतपाल् य अजधकरण, आदि के िाजयत् ि—ििां ऐसे

व् यौिारी, िो ऐसे कारबार का स्ट् िामी िै, की संपिा या उसका

कोई भाग जिसके संबंध में इस जिजनयम के अधीन कर संिेय िै,

न् यायालय, अजधकरण, मिाप्रिासक, िासकीय न् यासी या दकसी

ररसीिर या प्रबंधक (जिनमें ऐसा कोई व् यजक् त, उसका

पिाजभधान िो भी िो, िो िास्ट् ति में कारबार का प्रबंध करता

िै, भी िै) जिसे न् यायालय के दकसी आिेि द्वारा या उसके

अधीन जनयलक् त दकया गया िै, के जनयंत्रणाधीन िै ििां कर,

ब् याि या िाजस्ट् त ऐसे प्रजतपाल् य अजधकरण मिाप्रिासक,

िासकीय न् यासी, ररसीिर या प्रबंधक पर िैसी िी रीजत में और

उसी जिस्ट् तार तक उद्गृिीत की िाएगी और िसूलनीय िोगी

जिस तक िि ऐसे व् यौिारी पर जनधािरणीय िोती और मानों िि

स्ट् ियं कारबार कर रिा िोता और सभी उपबंध, यथािक् य,

तिनलसार लागू िोंगे ।

57. अन् य मामलों में िाजयत् ि—(1) ििां कोई व् यौिारी

फमि िै या व् यजक् तयों का संगम िै या हिंिू अजिभक् त कलटलंब िै

और ऐसे संगम या कलटलंब ने कारबार बंि कर दिया िै, ििां—

(क) इस अजधजनयम के अधीन ऐसी फमि, संगम या कलटलंब

द्वारा ऐसे समापन की तारीख तक संिेय कर का जनधािरण इस

प्रकार दकया िा सकेगा मानों ऐसा समापन हुआ िी न िो; और

(ख) ऐसा प्रत् येक व् यजक् त, िो ऐसे समापन के समय ऐसी

फमि का भागीिार िै, या ऐसे संगम या कलटलंब का सिस्ट् य िै, ऐसे

समापन के िोते हुए भी ऐसी फमि, संगम या कलटलंब के संबंध में

जनधािररत कर और उस पर अजधरोजपत िाजस्ट् त और उसके द्वारा

संिेय कर का संिाय करने के जलए संयलक् तत: और पृथकत: िायी

िोगा चािे ऐसा कर, ब् याि या िाजस्ट् त का जनधािरण ऐसे

समापन से पिले या उसके पश् चात् दकया गया िै और पूिोक् त

के अधीन रिते हुए, ये उपबंध, यथािक् य, इस प्रकार लागू िोंगे

मानों प्रत् येक ऐसा व् यजक् त या भागीिार या सिस्ट् य स्ट् ियं िी

व् यौिारी िो :

परंतल ििां फमि का भागीिार, िो ऐसे कर, ब् याि या

िाजस्ट् त का संिाय करने का िायी िै, की मृत् यल िो िाती िै, ििां

उपधारा (4) के उपबंध, यथािक् य, लागू िोंगे ।

(2) ििां दकसी फमि या व् यक् जतयों के दकसी संगम के

गठन में कोई पररितिन हुआ िै, ििां फमि के भागीिार या संगम

के सिस्ट् य िैसा िि इसके पलनगिठन के पूिि अजस्ट् तत् ि में था और

िैसा िि इसके पलनगिठन के पश् चात् अजस्ट् तत् ि में था, धारा 54 के

उपबंधों पर प्रजतकूल प्रभाि डाले जबना, ऐसी फमि या संगम से

इसके पलनगिठन से पूिि दकसी भी अिजध के जलए, िेय कर, ब् याि

या िाजस्ट् त का संिाय करने के जलए संयलक् तत: या पृथकत: िायी

िोंगे ।

(3) उपधारा (1) के उपबंध, यथािक् य, ििां लागू िोंगे

ििां व् यौिारी िो एक फमि या व् यजक् तयों का संगम िै, जिघरटत

िो िाती िै या िो हिंिू अजिभक् त कलटलंब िै, ने उसके द्वारा दकए

गए कारबार के संबंध में जिभािन कर दिया िै और तिनलसार,

समापन की उस धारा में प्रजतजनिेिों का यि अथि लगाया

िाएगा दक िे, यथाजस्ट् थजत, जिघटन के या जिभािन के प्रजत

जनिेि िैं ।

(4) ििां इस जिजनयम के अधीन कर का संिाय करने के

जलए िायी व् यौिारी की मृत् यल िो िाती िै, तब ििां—

(क) यदि व् यौिारी द्वारा दकए गए दकसी कारबार को

उसके जिजधक प्रजतजनजध या दकसी अन् य व् यजक् त द्वारा उसकी

मृत् यल के पश् चात् भी िारी रखा िाता िै तो ऐसा जिजधक

प्रजतजनजध या अन् य व् यजक् त इस जिजनयम के अधीन व् यौिारी से

िेय कर, ब् याि या िाजस्ट् त का संिाय करने का िायी िोगा, चािे

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THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

ऐसा कर, ब् याि या िाजस्ट् त का, उसकी मृत् यल के पूिि जनधािरण

दकया गया था ककंतल िि असंित्त रि गया िै या उसकी मृत् यल के

पश् चात् उसका जनधािरण दकया गया िै;

(ख) यदि ि् यौिारी द्वारा दकया गया कारबार उसकी

मृत् यल के उपरांत बंि िो िाता िै तब उसका जिजधक प्रजतजनजध

मृतक की संपिा में से इस जिजनयम के अधीन उस जिस्ट् तार तक

जिस तक व् यौिारी से िेय भार कर, ब् याि या िाजस्ट् त को चलकाने

में संपिा समथि िै, चािे ऐसा कर, ब् याि या िाजस्ट् त का उसकी

मृत् यल के पूिि जनधािरण दकया गया िो ककंतल िि असंित्त रि गया

िै या उसकी मृत् यल के पश् चात् जनधािरण दकया गया िै,

और ये उपबंध, यथािक् य, ऐसे जिजधक प्रजतजनजधयों या अन् य

व् यजक् त को उसी प्रकार लागू िोंगे मानों िे स्ट् ियं िी व् यौिारी िों।

अध् याय 10

संपरीक्षा, अन् िेषण और प्रितिन

58. संपरीक्षा, अन् िेषण और प्रितिन—(1) आयलक् त,

दकसी व् यजक् त पर उसको यि सूचना िेते हुए जिजित रीजत में

सूचना तामील कर सकेगा दक उसके कारबार के कायिकलापों की

संपरीक्षा की िाएगी और ििां लागू िो, ििां इस जिजनयम के

अधीन पिले से िी समाप् त जनधािरण को पलन:आरंभ दकया िा

सकेगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन तामील की गई सूचना में ऐसे

व् यजक् त से, जिस पर सूचना तामील की िाती िै, अपेक्षा की िा

सकेगी दक िि उसमें जिजनर्ििष् ट तारीख को और ऐसे स्ट् थान पर,

िो उसके कारबार पररसर में या सूचना में जिजनर्ििष् ट स्ट् थान पर

उपसंिात िो और िि या तो िाजिर िो और लेखा बजियों को

तथा ऐसे सभी साक्ष् यों को पेि करे या करिाए जिन पर

व् यौिारी अपनी जििरजणयों (जिनमें कर बीिक, यदि कोई िो,

भी िैं) के समथिन में जिश् िास करता िै या िि ऐसे साक्ष् य को

पेि करे, िो सूचना में जिजनर्ििष् ट िै ।

(3) ऐसा व् यजक् त, जिस पर उपधारा (1) के अधीन

सूचना की तामील की िाती िै, आयलक् त को ऐसा पूणि सियोग

और यलजक् तयलक् त सिायता प्रिान करेगा िो उसके कारबार

पररसर में इस धारा के अधीन कायिाजियों को संचाजलत करने

के जलए अपेजक्षत िो ।

(4) आयलक् त, जििरणी, जििरजणयों के साथ प्रस्ट् तलत

साक्ष् य, यदि कोई िो, संपरीक्षा के िौरान अर्िित साक्ष् य, यदि

कोई िो, उसके पास अन् यथा उपलब् ध कोई िानकारी पर

जिचार करने के पश् चात्—

(क) या तो पलनर्ििलोकन जनधािरण की पलजष् ट करेगा, या

(ख) धारा 32 और धारा 33 के अनलसरण में कर, ब् याि

और िाजस्ट् त की रकम, यदि कोई िो, के जनधािरण या

पलन:जनधािरण की सूचना तामील करेगा ।

(5) व् यजक् त के कारबार के मामलों की संपरीक्षा के

अनलसरण में कोई जनधािरण इस जिजनयम के अधीन दकसी

अपराध के जलए अजभयोिन पर प्रजतकूल प्रभाि डाले जबना

िोगा ।

(6) (i) यदि आयलक् त की,—

(क) व् यौिारी के कारबार की प्रकृजत और िरटलता; या

(ख) रािस्ट् ि का जित; या

(ग) लेखाओं का पररमाण; या

(घ) लेखाओं के सिी िोने के बारे में िंकाएं ; या

(ड.) लेखाओं में संव् यििारों की बहुलता; या

(च) कारबार दक्रयाकलाप की जििेषीकृत प्रकृजत; या

(छ) सभी अजभलेखों और लेखाओं का पेि न दकया

िाना, या

(ि) इस जिजनयम के अधीन संपरीक्षा ररपोटि का फाइल

न दकया िाना, या

(झ) दकसी अन् य कारण को ध् यान में रखते हुए यि राय िै

दक ऐसा करना आिश् यक िै,

तो िि व् यौिारी को जलजखत में सूचना द्वारा जनिेि िे सकेगा दक

िि अपने अजभलेखों, जिनमें लेखा बजियां भी िैं, की दकसी

लेखाकार या लेखाकारों के पैनल या दकसी अन् य व् यिसायी या

आयलक् त द्वारा इस जनजमत्त नामजनिेजित व् यिसाजययों द्वारा

िांच और संपरीक्षा कराए और िि ऐसी िांच और परीक्षा की

ऐसे लेखाकार या लेखाकारों या व् यिसाजययों के पैनल या

व् यिसाजययों के पैनल द्वारा सम्यि: िस्ट् ताक्षररत और सत् याजपत

ररपोटि ऐसे रुपजिधान में प्रस्ट् तलत करे िो िि जिजनर्ििष् ट करे और

उसमें ऐसी जिजिजष् टयां उपिर्णित करे, िो जिजनर्ििष् ट की िाएं ।

(ii) उपधारा (1) के उपबंध ििी-ििी प्रभाि िोगा दक

व् यौिारी के लेखाओं की संपरीक्षा दकसी अन् य उपबंध या

तत् समय प्रिृत्त दकसी अन् य जिजध या अन् यथा के अधीन की गई

िै;

(iii) उपधारा (1) के अधीन प्रत् येक ररपोटि, व् यौिारी

द्वारा आयलक् त को ऐसी अिजध के भीतर प्रस्ट् तलत की िाएगी िो

आयलक् त द्वारा जिजनर्ििष् ट की िाए :

परंतल आयलक् त, व् यौिारी द्वारा इस जनजमत्त दकए गए

आिेिन पर और दकसी मान् य और पयािप् त कारण से उक् त अिजध

को ऐसी और अिजध या अिजधयों तक, िो िि ठीक समझे, तक

बढा सकेगा :

परंतल यि और दक मूलत: जनयत की अिजध का सकल और

इस प्रकार बढाई गई अिजध या अिजध दकसी भी जस्ट्थजत में उस

तारीख से एक सौ अस्ट्सी दिन से अजधक निीं िोगी, जिस दिन

उपधारा (1) के अधीन व्यौिारी द्वारा जनिेि प्राप्त दकया िाता

िै ;

(iv) उपधारा (1) के अधीन अजभलेखों की परीक्षा और

लेखा परीक्षा के खचि, और उसके जलए आनलषंजगक, (लेखाकार के

पाररश्रजमक या लेखाकारों के पैनल या पेिेिर या पेिेिरों के

पैनल सजित) द्वारा अिधाररत दकया िाएगा और आयलि द्वारा

भलगतान दकया िाएगा और िि अिधारण अंजतम िोगा ।

59. अजभलेखों का जनरीक्षण—(1) भांडागार के

व्यौिारी, पररिािक या प्रचालक द्वारा रखे गए सभी अजभलेख,

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

27

लेखा पलस्ट्तकें, रजिस्ट्टर और अन्य िस्ट्तािेि, सभी उजचत समय

पर, आयलि द्वारा जनरीक्षण के जलए खले रिेंगे ।

(2) आयलि, उजचत प्रिासन के जलए और ऐसी ितों के

अध् यधीन, िो जिजित की िाए—

(क) दकसी व् यौिारी; या

(ख) दकसी अन् य व् यजि, जिसके अंतगित बैंककारी

कम् पनी, डाकघर, कोई व् यजि भी िै, िो पररिान के जलए या

दकसी व् यौिारी की ओर से माल का पररििन करता िै या

पररििन के जलए अजभरक्षा में माल धारण करता िै, िो

व् यौिारी के कारबार संबंधी दकन् िीं लेखा पलस्ट् तकों, रजिस्ट् ररों या

िस्ट् तािेिों का रखरखाि करता िै या अपने अजभरक्षा में रखता

िै और दकसी व् यजि की ििा में, िो एक संगठन िै, उसका कोई

अजधकारी िै को,

उसके दक्रयाकलापों या दकसी अन् य व् यजि के दक्रयाकलापों, िो

आयलक् त आिश् यक समझे, में संबंजधत —

(i) ऐसे अजभलेख, लेखा पलस्ट् तकों, रजिस्ट्टरों और अन् य

िस्ट् तािेि अपने समक्ष प्रस्ट् तलत करने की ;

(ii) ऐसे प्रश् नों का उत्तर िेने की ; और

(iii) ऐसी अजतररक् त सूचना तैयार करने और प्रस्ट् तलत

करने की,

अपेक्षा कर सकेगा।

(3) आयलि उपधारा (2) में जनर्ििष्ट व्यजि की अपेक्षा कर

सकेगा :—

(क) कोई िस्ट्तािेि तैयार करने और प्रिान करने की

अपेक्षा कर सकेगा; और

(ख) उसके द्वारा जनर्ििष्ट रीजत से दकसी भी प्रश् न का उत्तर

सत्याजपत करने की अपेक्षा कर सकेगा ।

(4) आयलि उस व्यजि द्वारा जबना फीस के उि

अजभलेखों, लेखा पलस्ट्तकों, रजिस्ट्टरों और िस्ट्तािेिों की प्रजतयां

या नकल अपने पास रख सकेगा, िटा सकेगा, प्रजतयााँ या नकल

ले सकेगा या बना सकेगा, जिसकी अजभरक्षा में अजभलेख, लेखा

पलस्ट्तकें, रजिस्ट्टर और िस्ट्तािेि रखे िाते िैं ।

60. पररसर में प्रिेि करने और अजभलेख और माल

अजभग्रिण करने की िजि— (1) दकसी व्यौिारी, पररिािक या

भांडागार का प्रचालक द्वारा दकसी काराबार पररसर में रखे गए

सभी माल उजचत समय पर आयलि द्वारा जनरीक्षण के जलए

खला रिेगा ।

(2) ििां आयलि के पास िानकारी िोने पर या अन्यथा

यि जिश् िास करने का उजचत आधार िो दक कोई व्यजि या

व् यौिारी कर से बचने या चोरी करने का प्रयास कर रिा िै या

दकसी भी रीजत से अपनी कर िेयता और प्रिासन के प्रयोिनों

के जलए ऐसा करना अपेजक्षत िै, आयलि,—

(क) दकसी काराबर पररसर या दकसी अन्य स्ट्थान या

भिन में प्रिेि और तलािी कर सकेगा;

(ख) खंड (क) द्वारा प्रित्त िजियों का प्रयोग करने के

जलए दकसी भी िरिािे, बॉक्स, लॉकर, जतिोरी, अलमारी या

अन्य बतिन का ताला तोड़ सकेगा, ििां उसकी चाजबयां आसानी

से उपलब्ध निीं िो;

(ग) दकसी भी अजभलेख, लेखा पलस्ट्तकें, रजिस्ट्टरों, अन्य

िस्ट्तािेिों या सामानों को िब्त कर सकेगा और िटा सकेगा;

(घ) दकसी अजभलेख, लेखा पलस्ट्तकें, रजिस्ट्टरों और अन्य

िस्ट्तािेिों पर पिचान के जनिान लगा सकेगा या जबना दकसी

प्रभार के नकल या प्रजतयां बनिा सकेगा;

(ङ) ऐसे माल की पिचान पर ऐसी खोि के स्ट्थान के

जनिान के पररणामस्ट्िरूप पाए गए दकसी भी ऐसे पैसे या

सामान का एक नोट या कोई सूची बना सकेगा और

(च) कायािलय, िलकान, गोिाम, बॉक्स, जतिोरी,

अलमारी या अन्य पात्र सजित पररसर को सील कर सकेगा।

(3) ििां दकसी अजभलेख, लेखा पलस्ट् तकें, रजिस्ट्टरों, अन्य

िस्ट्तािेिों या मालों को िटाना संभि निीं िै, ििां आयलि

स्ट्िामी और दकसी भी व्यजि को तत्काल कब्िे या जनयंत्रण में

रखने के जलए आिेि िे सकेगा दक आयलि की पूिि अनलमजत के

जबना िि निीं िटाएगा या अलग निीं करेगा या अन् यथा

व्यििार निीं करेगा ।

(4) ििां दकसी पररसर को उपधारा (2) के खंड (च) या

उपधारा (3) के अधीन दिए गए आिेि के अधीन सील कर

दिया गया िै, ििां आयलि, स्ट्िामी या कब्िे िाले व्यजि द्वारा

दकए गए आिेिन पर या ऐसी िलकान, गोिाम, बॉक्स, लॉकर,

जतिोरी, अलमारी या अन्य पात्र के प्रभारी, यथाजस्ट्थजत, ऐसे

जनयमों और ितों पर, ऐसी राजि के जलए प्रजतभूजत प्रस्ट्तलत करने

सजित, ऐसे प्ररूप और रीजत में, िो जिजित की िाए,

डी-सीहलंग या िारी करने की अनलमजत िे सकेगा।

(5) आयलि दकसी भी पलजलस अजधकारी या दकसी लोक

सेिक, या िोनों की सेिाओं की अपेक्षा कर सकेगा, जिससे दक

िि उपधारा (2) में जनर्ििष्ट सभी या दकन्िीं प्रयोिनों के जलए

उसकी सिायता कर सके।

(6) इस धारा में यथा उपबंध के जसिाय, इस धारा के

अधीन की गई प्रत्येक तलािी या िब्ती ििां तक संभि िो, उस

संजिता के अधीन की गई तलािी या िब्ती संबंधीय िंड प्रदक्रया

संजिता, 1973 (1974 का 2) के उपबंधों के अनलसार की

िाएगी ।

61. माल यान को रोकने, तलािी लेने और जनरुध करने

की िजि— (1) आयलि, इस जिजनयम के उजचत प्रिासन को

समथि बनाने के जलए दकसी भी चेक पोस्ट्ट या बैररयर या दकसी

अन्य स्ट्थान पर यान को रोकने के जलए माल यान के स्ट्िामी,

चालक या प्रभारी व्यजि से रुकने की अपेक्षा कर सकेगा और

तब तक जस्ट्थर रखेगा िब तक यान की तलािी लेना अपेजक्षत

िो, उसमें सामग्री की िांच करनें और माल से संबंजधत सभी

अजभलेखों का जनरीक्षण करनें, िो ऐसे स्ट्िामी, चालक या

प्रभारी व्यजि के कब्िे में िों ।

28

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(2) लक्षद्वीप में प्रिेि करने या छोड़ने िाले माल यानों

का स्ट्िामी, चालक या प्रभारी व्यजि ऐसे अजभलेखों को साथ

रखेगा और आयलि से प्राप्त जिजित जििरण में और ऐसी रीजत

से, िो जिजित की िाए, दकसी चेक-पोस्ट्ट या बैररयर के प्रभारी

अजधकारी या पूिोि रूप में सिि अजभकताि के दकसी अन्य

अजधकारी के समक्ष ऐसे ब्यौरों से यलि एक घोषणा भी फाइल

करेगा :

परंतल ििां माल यान का स्ट्िामी, चालक या प्रभारी

व्यजि, लक्षद्वीप में प्रिेि करते समय एक घोषणा फाइल करने

के पश् चात् दक माल को लक्षद्वीप के बािर दकसी स्ट्थान पर ले

िाने के जलए िै, जबना उजचत कारण के, ऐसे माल को बािर ले

िाने में जिफल रिता िै, िि लक्षद्वीप के बािर, जिजित अिजध

के भीतर, कर के भलगतान के अलािा, यदि कोई िो, िाजस्ट्त के

जलए उत्तरिायी िोगा िो उस कर के ढाई गलना या एक ििार

रुपए, िो भी अजधक िो, से अजधक निीं िोगा।

(3) लक्षद्वीप द्वीप समूि में प्रिेि करने या छोड़ने िाले

कर माल यानों के स्ट्िामी, चालक या प्रभारी व्यजि भी दकसी

चेक पोस्ट्ट या बैररयर का या पूिोि रूप से सिि दकसी अन्य

अजधकारी या अजभकताि के समक्ष आयलि से प्राप्त जिजित प्ररूप

में ऐसे जििरण और जिजित रीजत से प्रभारी अजधकारी के समक्ष

एक घोषणा फाइल करेंगे :

परंतल ििां माल यान का स्ट्िामी, चालक या प्रभारी

व्यजि, लक्षद्वीप द्वीप समूि में प्रिेि करते समय एक घोषणा

फाइल करने के पश् चात् दक माल को लक्षद्वीप समूि के बािर

दकसी स्ट्थान पर ले िाने के जलए िै, जबना उजचत कारण के, ऐसे

माल को बािर ले िाने में जिफल रिता िै, लक्षद्वीप समूि के

बािर, जिजित अिजध के भीतर िि, कर के भलगतान के

अजतररि, यदि कोई िो, िो िाजस्ट्त के जलए उत्तरिायी िोगा

उस कर के ढाई गलना से अजधक निीं, िो लक्षद्वीप द्वीप समूि के

अंिर माल बेचे िाने पर िेय कर के ढाई गलना या एक ििार

रुपए िो भी अजधक िो, से अजधक निीं िोगा।

(4) माल यान का स्ट्िामी , चालक या प्रभारी व्यजि,

यदि अपेजक्षत िो, आयलि को सूजचत करेगा—

(क) उसका नाम और पता;

(ख) यान के स्ट्िामी का नाम और पता;

(ग) माल के प्रेषक का नाम और पता;

(घ) माल के परेजषती का नाम और पता; और

(ड.) पररिािक का नाम और पता ।

(5) यदि, दकसी माल यान की सामग्री की िांच करने

या ले िाए गए माल से संबंजधत िस्ट्तािेिों के जनरीक्षण पर,

आयलि के पास यि जिश् िास करने का कारण िै दक ऐसे माल

यान का स्ट्िामी या चालक या प्रभारी व्यजि यान निीं ले िा

रिा िै, उपधारा (2) के अनलसार अपेजक्षत िस्ट्तािेि या उजचत

और िास्ट्तजिक िस्ट्तािेि निीं ले रिा िै या इस जिजनयम के

अधीन िेय कर का भलगतान से बचने का प्रयास कर रिा िै, िि

लेखबद्ध दकए िाने िाले कारणों के जलए, जनम् नजलजखत में से

कोई एक या अजधक कर सकेगा, अथाित्:—

(क) माल या माल यान को लक्षद्वीप में प्रिेि करने या

छोड़ने की अनलमजत िेने से इंकार करना;

(ख) माल और माल से संबंजधत दकसी भी िस्ट्तािेि को

िब्त करना; और

(ग) माल यान और माल यान से संबंजधत दकसी भी

िस्ट्तािेि को िब्त करना ।

(6) ििां माल यान का स्ट्िामी, चालक या प्रभारी

व्यजि,—

(क) जनरुध करने या िब्त दकए िाने िाले सामान के

संबंध में कर के भलगतान का सबूत पेि करने के जलए समय का

अनलरोध कर सकेगा; और

(ख) आयलि की संतलजष्ट के जलए ऐसी रीजत में और ऐसी

राजि के जलए प्रजतभूजत प्रिान कर सकेगा िो जिजित दकया

िाए,

माल यान, माल और इस प्रकार िब्त दकए गए

िस्ट्तािेिों को िारी कर सकेगा:

परंतल ििां स्ट्िामी या उसका अजभकताि, चालक या माल

यान का प्रभारी व्यजि कर के साढे तीन गलना के बराबर राजि

का िलमािना िेने का जिकल्प चलनता िै, िो दक आयलि की राय से

लगाया िाएगा ऐसे माल पर उि्ग्रिणीय िोगा, यदि ऐसा माल

लक्षद्वीप में बेचा गया था, आयलि, माल या माल यान या माल

और माल यान से संबंजधत िस्ट्तािेिों को जनरुध करने या िब्त

करने के बिाय उन्िें िारी करेगा ।

(7) आयलि, उपधारा (6) के अधीन िब्त दकए गए

दकसी भी माल या माल यान को िटाने के जलए माल यान के

स्ट्िामी, चालक या प्रभारी व्यजि को एक उपक्रम के अधीन

अनलज्ञा िे सकेगा—

(क) दक माल और माल यान को कायािलय, गोिाम या

लक्षद्वीप के भीतर अन्य स्ट्थान पर, माल यान के स्ट्िामी से

संबंजधत और ऐसे स्ट्िामी की अजभरक्षा में रख सकेगा; और

(ख) दक आयलि के जलजखत अनलमोिन के जबना, माल को

प्रेषक, प्रेजषजत या दकसी अन्य व्यजि को पररित्त निीं दकया

िाएगा और इस प्रयोिन के जलए माल का प्रभारी व्यजि माल

के स्ट्िामी से एक प्राजधकार प्रस्ट्तलत करेगा िो उसे ऐसा उपक्रम

िेने के जलए अजधकृत िो।

(8) इस धारा में यथा उपबंजधत के जसिाय, इस धारा के

अधीन की गई प्रत्येक तलािी या िब्ती उस संजिता के अधीन

की गई तलािी या िब्ती से संबंजधत ििां तक संभि िो, िंड

प्रदक्रया संजिता, 1973 (1974 का 2) के उपबंधों के अनलसार

की िाएगी ।

(9) इस धारा में अंतर्ििष्ट दकसी बात के िोते हुए भी

रोहलंग स्ट्टॉक पर लागू निीं िोगा िैसा रेल अजधजनयम, 1989

(1989 का 24) में पररभाजषत िै ।

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

29

62. अजभरक्षा और अजभलेख को िारी करना—(1) ििां

आयलि दकसी लेखा पलस्ट्तकों या अन्य िस्ट्तािेिों को िब्त करता

िै, ििां यथाजस्ट्थजत, व्यौिारी या उसकी ओर से उपजस्ट्थत व्यजि

को उसकी रसीि िेगा और उसकी पािती प्राप्त करेगा :

परंतल यदि व्यौिारी या व्यजि जिसकी अजभरक्षा से लेखा

पलस्ट्तकों या अन्य िस्ट्तािेि िब्त दकए गए िैं, पािती िेने से

इंकार करते िैं, आयलि रसीि को पररसर में छोड़ सकेगा और

इस तथ्य को अजभजलजखत कर सकेगा ।

(2) आयलि एक िषि से अनजधक अिजध के जलए धारा 60

के अधीन िब्त की गई लेखा पलस्ट्तकों, रजिस्ट्टरों, अन्य

िस्ट्तािेिों को अपनी अजभरक्षा में रखेगा, और उसके पश् चात्

उसे उस व्यौिारी या व्यजि को िापस कर िेगा, जिसकी

अजभरक्षा या िजि से उन्िें िब्त दकया गया था :

परंतल आयलि, लेखा पलस्ट्तकों, रजिस्ट्टरों और अन्य

िस्ट्तािेिों को िापस करने से पिले, यथाजस्ट्थजत, व्यौिारी या

व्यजि को एक जलजखत िचनबद्धता िेने के जलए कि सकेगा दक

लेखा पलस्ट्तकें, रजिस्ट्टर और अन्य िस्ट्तािेि िब भी प्रस्ट्तलत दकए

िाए इस जिजनयम के अधीन दकसी भी कायिािी के जलए

आयलि द्वारा अपेजक्षत िोंगे :

परन्तल यि और दक आयलि, अनलरोध दकए िाने पर, उस

व्यजि को, जिसकी लेखा पलस्ट्तकों, रजिस्ट्टर और िस्ट्तािेि िब्त

कर जलए गए िैं, जनरीक्षण के प्रयोिन के जलए लेखा पलस्ट्तकों,

रजिस्ट्टरों और िस्ट्तािेिों तक उजचत पहुंच की अनलमजत िेगा

और व्यजि के स्ट्ियं के खचि पर उसकी प्रजतयों के जलए व्यजि को

ऐसा करने का अिसर िेगा :

परंतल यि भी दक धारा 60 के अधीन िब्त दकए गए लेखा

पलस्ट् तकों, रजिस्ट्टरों और अन्य िस्ट्तािेिों की अजभरक्षा की अिजध

एक िषि से आगे बढाई िा सकती िै यदि इस जिजनयम के

अधीन कोई कायिािी लंजबत िै या आयलि द्वारा लेखबद्ध दकए

िाने चाजिए।

63. माल, माल यान की अजभरक्षा, िापसी और

जनपटान तथा सलरक्षा— (1) ििां आयलि, दकसी माल या माल

यान को िब्त करता िै, ििां, यथाजस्ट्थजत,व्यौिारी, माल यान

के प्रभारी व्यजि या उसकी ओर से जिद्यमान व्यजि, उसके जलए

एक रसीि िेगा और उसे िी गई रसीि की पािती प्राप्त करेगा:

परंतल जिस व्यजि की अजभरक्षा से माल या माल यान

िब्त दकया गया िै, िि पािती िेने से इनकार करता िै, आयलि

उसकी उपजस्ट्थजत में रसीि को छोड़ सकेगा और इस तथ्य को

अजभजलजखत कर सकेगा ।

(2) आयलि—

(क) अपनी अजभरक्षा में धारा 61 के अधीन िब्त दकए

गए दकसी भी माल या माल यान को रखेगा;

(ख) उन्िें ऐसे समय के जलए रख सकेगा िब तक िि

उजचत समझे; और

(ग) उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन, माल या माल

यान का व्यौिारी या अन्य व्यजि को अजभरक्षा या िजि

जिसमें उन्िें िब्त कर जलया गया था िापस कर िेगा।

(3) ििां आयलि—

(क) दकसी भी माल को िब्त कर जलया िै;

(ख) एक माल यान िब्त कर जलया िै; या

(ग) इस जिजनयमन के अधीन, बाध् यताओं का पालन

करने के जलए दकसी माल को प्रजतभूजत के रूप में धारण दकया

िै,

िि सूचना की तामील के पश् चात् एक मास से पिले निीं िो

सकेगा

(i) िि व्यजि, जिससे माल िब्त दकया गया था;

(ii) िि व्यजि, जिससे माल यान िब्त दकया गया था;

(iii) िि व्यजि, जिसके जलए सलरक्षा िी गई थी; और

(iv) कोई व्यजि, जिसके जिरुद्ध सलरक्षा प्रिृत्त की िानी

िै,

माल बेचने के अपने आिय से, ऐसे माल या माल यान की

नीलामी को इस जिजनयमन के अधीन बकाया कर, ब्याि या

िलमािना को पूरा करने का जनिेि िेगा ।

(4) माल या माल यान की नीलामी आयलि द्वारा धाररत

संपजत्त की जबक्री के जलए जिजित रीजत में की िाएगी।

64. प्रकटीकरण में लंजबत िोने पर माल का जनरुद्ध

दकया िाना— (1) यदि कोई व्यजि, आयलि द्वारा अपेजक्षत

िोने पर, अपने कब्िे में दकसी भी माल के संबंध में कोई

िानकारी िेने में जिफल रिता िै या उसके जनरीक्षण की

अनलमजत िेने में जिफल रिता िै तो आयलि, दकसी भी माल को,

िो उसकी अजभरक्षा या कब्िे में िै जिसके संबंध में व्यजतक्रम

काररत की गई िै, िब्त कर सकता िै ।

(2) िब्ती तब तक प्रिृत्त रिेगी िब तक इसे िापस निीं

दकया िाता िै या संबंजधत व्यजि अपेजक्षत िानकारी प्रस्ट्तलत

निीं करता िै या माल के जनरीक्षण की, िो भी पिले िो, उजचत

व्यिस्ट्था निीं करता िै।

65. उजचत सिायता के जलए बाध् यता—प्रत्येक व्यजि

आयलक् त को जिजनयमन के अधीन आयलि के दक्रयाकलाप के

संचालन के जलए अपेजक्षत सियोग और उजचत सिायता करेगा।

अध्याय 11

मूल्य िर्धित कर प्राजधकरण और अपील अजधकरण

66. मूल् य िर्धित कर प्राजधकरण—(1) सरकार, मूल्य

िर्धित कर आयलि के रूप में िाने िाने िाले व्यजि को जनयलि

करेगी।

(2) सरकार, इस जिजनयम के प्रिासन में आयलि की

सिायता करने के जलए, मूल्य िर्धित कर के कई जििेष आयलि,

मूल्य िर्धित कर अजधकारी और ऐसे अन्य व्यजियों को ऐसे

पिनामों के साथ जनयलि कर सकेगी जिन्िें सरकार आिश्यक

30

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

समझे (यिां इस अध्याय में "मूल्य िर्धित कर प्राजधकरण" के

रूप में जनर्ििष्ट दकया गया िै)।

(3) आयलि और मूल्य िर्धित कर प्राजधकरण ऐसी

िजियों का प्रयोग और इस जिजनयम के अधीन ऐसे कतिव्यों का

पालन करेंगे िो जनर्ििष् ट की िाएं।

(4) मूल्य िर्धित कर अजधकाररयों द्वारा कर के जनधािरण,

गणना और िंड अजधरोजपत करने, िेय या बकाया ब्याि की

गणना, पात्रता की गणना और दकसी भी िापसी की राजि का

जनधािरण करने के जलए प्रयोग की िाने िाली िजियां इस

जिजनयमन के प्रयोिनों के जलए, धारा 84 के अधीन जिजिष्ट

प्रश् न के जनधािरण, धारा 85 के अधीन सामान्य जनयम बनाने,

और लेखा या अन्िेषण का संचालन, करने िेतल प्रिासजनक कृत्य

िोंगे।

67. आयलि की िजियां और उत्तरिाजयत्ि—(1) आयलि

के पास सम्यक् और उजचत प्रिासन का उत्तरिाजयत्ि िोगा

और पूरे लक्षद्वीप संघ राज्यक्षेत्र पर उसका अजधकार क्षेत्र िोगा।

(2) उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन, आयलि, समय-

समय पर, दकसी भी मूल्य िर्धित कर प्राजधकरणों को ऐसे

आिेि, अनलिेि और जनिेि िारी कर सकेगा िैसा िि सम्यक्

और उजचत प्रिासन के जलए उपयलि समझे और ऐसे सभी

व्यजि, प्रिासन में लगे आयलि के ऐसे आिेिों, अनलिेिों और

जनिेिों का सम्प्रेक्षण और पालन करेंगे।

(3) अिधाररत करने की िजि का प्रयोग करने िाले

व्यजि को आयलि द्वारा कोई आिेि, अनलिेि या जनिेि िारी

निीं दकए िा सकेंगे—

(क) धारा 74 के अधीन की गई या की िाने िाला कोई

जिजिष् ट आक्षेप; या

(ख) धारा 84 के अधीन बनाया गया एक जिजिष् ट प्रश् न,

जिससे व्यजि को दकसी जिजिष्ट रीजत से आक्षेप का

अिधाररत करने या दकसी जििेष व्यजि के प्रश्न का उत्तर िेने

की अपेक्षा िो।

(4) उपधारा (3) में दकसी बात के िोते हुए, आयलि को

दकसी भी व्यजि को साधारण आिेि, अनलिेि और जनिेि िारी

करने से निीं रोकेगा, िो धारा 74 के अधीन की गई आपजत्तयों

का अिधारण करता िै या आपजत्तयों के िगों का अिधारण या

प्रश् नों के िगों के उत्तर िेने के बारे में धारा 84 के अधीन दकए

गए प्रश् नों के उत्तर िेता िै।

68. आयलि की िजियों का प्रत्यायोिन—(1) ऐसे

जनबंधनों और ितों के अधीन, िो जिजित की िाए, आयलि इस

जिजनयम के अधीन दकसी भी मूल्य िर्धित कर प्राजधकरण को

अपनी दकसी भी िजियों का प्रत् यायोिन कर सकेगा ।

(2) ििां आयलि, अध्याय 10 के अधीन अपनी िजियों

को प्रत्यायोजित करता िै, िजियों का प्रयोग करते समय इन

िजियों के प्रत्यायोिन के जिजित रूप में मांग पर साक्ष्य िेगा

और प्रस्ट्तलत करेगा।

(3) ििां आयलि ने मूल्य िर्धित कर प्राजधकरण को िजि

प्रत्यायोजित की िै, ििां आयलि उस प्राजधकरण द्वारा दकए गए

दकसी भी जिजनश् चय या की गई कारिाई का पयिेक्षण, समीक्षा

और सलधार कर सकेगा ।

(4) तत्समय प्रिृत्त दकसी जिजध में अंतर्ििष् ट दकसी बात

के िोते हुए भी, धारा 74 के अधीन आपजत्त का अिधारण करने

के जलए आयलि द्वारा दकसी व्यजि को प्रत्यायोजित िजि का

प्रयोग उस व्यजि द्वारा दकया िा सकेगा, यद्यजप आपजत्त का

अिधारण करने िाला व्यजि उस व्यजि के रैंक के समान िै

जिसका जिजनश् चय आपजत्त के अधीन िै।

69. पिधारी का पि पररितिन—इस जिजनयम के अधीन

दकसी कायिािी की बाबत िब भी आयलि या दकसी मूल्य

िर्धित कर प्राजधकारी का उत्तराजधकारी कोई अन्य व्यजि िोता

िै—

(क) उत्तराजधकार के आधार पर पूिि पिधारी द्वारा िी

गई िजि का कोई प्रत्यायोिन िापस निीं दकया िाएगा; और

(ख) इस प्रकार उत्तराजधकार िोने िाला व्यजि उस

चरण से कायिािी िारी रख सकेगा जिस पर कायिािी उसके

पूििती द्वारा छोड़ी गई थी।

70. प्ररूप को अजधसूजचत करने की आयलि की

िजियााँ— (1) आयलि ऐसे प्ररूप को अजधसूजचत कर सकेगा िो

मूल्य िर्धित कर प्राजधकारी को सूचना िेने के जलए आिश् यक

िों।

(2) ििां आयलि ने दकसी जिजिष्ट प्रयोिन के जलए एक

प्ररूप को अजधसूजचत दकया िै, ििां सभी व्यजियों से अपेक्षा की

िाएगी दक िे प्ररूप का उपयोग करते हुए िानकारी की ऐसी

रीजत से ररपोटि करे, िो उसके द्वारा अजधसूजचत दकया िाए ।

(3) ििां उसकी राय में ऐसा करना आिश्यक या

सलजिधािनक िो, आयलि, प्रयोिनों को पूरा करने के जलए

अजधसूचना िारी कर सकेगा :

परंतल कोई भी अजधसूचना इस जिजनयम या इसके

अनलसार बनाए गए दकसी भी जनयम या जिजनयम से असंगत

निीं िोगी।

(4) जिजिष् टतया और पूििगामी िजि की व्यापकता पर

प्रजतकूल प्रभाि डाले जबना, आयलि द्वारा िारी अजधसूचना उन

सभी या दकसी भी मामले को अनलबंजधत कर सकेगी िो आयलि

की राय में उजचत प्रिासन के जलए आिश्यक या सलजिधािनक

िो।

(5) इस जिजनयम के अधीन आयलि द्वारा िारी प्रत्येक

अजधसूचना रािपत्र में प्रकाजित की िाएगी और ऐसे प्रकािन

से पूिि इसका कोई प्रभाि निीं िोगा ।

71. व्यजियों का लोक सेिक िोना— आयलि, मूल्य

िर्धित कर प्राजधकरण और अपील अजधकरण के सभी सिस्ट्यों

को भारतीय िंड संजिता की धारा 21 (1860 का 45) के

अथांतगित लोक सेिक के रूप में समझा िाएगा ।

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

31

72. जसजिल िाि से उन्मलजि—कोई िाि या कायिािी

इस जिजनयम या इसके अधीन बनाए गए जनयमों के अधीन

सि्.भािपूििक दकए गए या दकए िा चलके आिय पूणि कायि के

जलए सरकार, आयलि, कोई मूल्य िर्धित कर प्राजधकरण या

अपील अजधकरण के सिस्ट्य के जिरुद्ध कोई जसजिल िाि निीं

लाया िाएगा ।

73. अपील अजधकरण—(1) सरकार, इस जिजनयम के

प्रारंभ िोने के पश् चात् यथासंभििीघ्र अपील अजधकरण द्वारा

या उसके अधीन प्रित्त िजियों का प्रयोग करते हुए और कृत्यों

का जनििन करने के जलए एक या अजधक सिस्ट्यों से जमलकर

एक अपील अजधकरण का गठन करें, िो िि उजचत समझे या

इस जिजनयम के अधीन या प्रयोिन के जलए अपील अजधकरण

के रूप में कृत्य के जलए नििीकी राज्य के दकसी अजधकरण को

अजभजित करने के जलए केन्द्रीय सरकार से अनलरोध कर सकेगी :

परंतल अपील अजधकरण में एक सिस्ट्य िोता िै, ििां िि

सिस्ट्य िि व्यजि िोगा जिसने कम से कम पांच िषि तक

जसजिल न्याजयक पि धारण दकया िो या िो कम से कम तीन

िषि तक भारतीय जिजधक सेिा (ग्रेड III से अन् यून) का सिस्ट्य

रिा िो या िो कम से कम िस िषि से अजधििा के रूप में

व्यिसाय कर रिा िो और ििां अपील अजधकरण में एक से

अजधक सिस्ट्य िों, ििां ऐसा एक सिस्ट्य पूिोि के रूप में

अर्िित व्यजि िो ।

(2) ििां अपील अजधकरण के सिस्ट्यों की संखया एक से

अजधक िै, ििां सरकार, उन सिस्ट्यों में से एक को अपील

अजधकरण का अध्यक्ष जनयलि करेगी।

(3) उपधारा (1) के उपबंधों के अध्यधीन अपील

अजधकरण का गठन करने िाले सिस्ट्य या सिस्ट्यों की अििता

और सेिा की अन्य ितें और िि अिजध जिसके जलए ऐसे सिस्ट्य

या सिस्ट्य पि धारण करेंगे, िि ऐसी िोगी िो सरकार द्वारा

अिधाररत की िाए ।

(4) अपील अजधकरण में कोई भी ररजि सरकार द्वारा

यथासाध् यिीघ्र िी भरी िाएगी।

(5) ििां अपील अजधकरण के सिस्ट्यों की संखया एक से

अजधक िै और यदि सिस्ट्यों की राय में दकसी भी हबंिल पर

मतभेि िै, तो हबंिल बहुमत की राय के अनलसार िोगा, यदि

बहुमत िै, लेदकन यदि सिस्ट्य समान रूप से जिभाजित िैं, तो

उस पर अपील अजधकरण के अध्यक्ष का जनणिय अंजतम िोगा।

(6) सरकार की पूिि मंिूरी के अध्यधीन, अपील

अजधकरण, अपनी प्रदक्रया को जिजनयजमत करने और अपने

कारबार के जनपटान के प्रयोिन के जलए उपबंधों और उसके

अधीन बनाए गए जनयमों से संगत जिजनयम बनाएगा।

(7) उपधारा (6) के अधीन बनाए गए जिजनयमों को

रािपत्र में प्रकाजित दकया िाएगा।

(8) अपील अजधकरण के पास, अपने कृत्यों के जनििन के

प्रयोिन के जलए सभी िजियां िोंगी िो धारा 75 के अधीन

आयलि में जनजित िैं और अपील अजधकरण के समक्ष दकसी भी

कायिािी को भारतीय िंड संजिता की धारा 193 (1860 का

45) और धारा 228 के अथांतगित और धारा 196 के प्रयोिन

के जलए न्याजयक कायिािी समझा िाएगा और िंड प्रदक्रया

संजिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और अध्याय 26

के सभी प्रयोिनों के जलए जसजिल न्यायालय समझा िाएगा।

(9) इस धारा में अंतर्ििष्ट प्रजतकूल बात के िोते हुए भी

सरकार, रािपत्र में अजधसूचना द्वारा, ऐसी ितों और जिजनयमों

के अधीन, िो अजधसूचना में अजधकजथत की िाए, एक या एक

से अजधक सिस्ट्यों िाली न्यायपीठ का गठन कर सकेगी।

अध्याय 12

आपजत्तयां, अपील, जििाि और प्रश् न

74. (1) आपजत्तयां—कोई व्यजि िो असंतलष्ट िै,—

(क) इस जिजनयमन के अधीन दकया गया एक जनधािरण;

या

(ख) इस जिजनयम के अधीन, यथाजस्ट्थजत, दकया गया

कोई अन्य आिेि या जिजनश् चय,

ऐसे जनधािरण या आिेि या जिजनश् चय, के जिरुद्ध आयलि

को आपजत्त कर सकेगा :

परंतल धारा 79 में पररभाजषत गैर-अपील योग्य आिेि के

जिरुद्ध कोई आपजत्त निीं की िा सकेगी :

परंतल यि और दक दकसी जनधािरण के जिरुद्ध कोई आपजत्त

तब तक स्ट्िीकार निीं की िाएगी िब तक दक कर, ब्याि या

िलमािने की राजि का अिधारण निीं दकया िाता िै और िो

जििाि में निीं िै और उसका भलगतान दकया गया िै, जिसके

जिफल िोने पर आपजत्त ििि निीं की गई समझी िाएगी:

परंतल यि भी दक आयलि, व्यौिारी को सलनिाई का

अिसर िेने के पश् चात्, ऐसी आपजत्त पर जिचार करने से पिले,

जििािाधीन राजि में से उजचत समझी गई राजि को िमा करने

का जनिेि िे सकेगा:

परंतल यि भी दक दकसी जनधािरण, जिजनश् चय या आिेि के

जिरुद्ध व्यजि द्वारा केिल एक िी आपजत्त की िा सकेगी:

परंतल यि भी दक संिोजधत जनधािरण, आिेि या जिजनश्चय

पर आपजत्त के मामले में केिल संिोजधत भाग पर िी आपजत्त

की िा सकेगी:

परंतल यि भी दक धारा 84 या धारा 85 के अधीन दिए

गए आिेि के जिरुद्ध आयलि को कोई आपजत्त निीं की िाएगी

यदि आयलि ने उि धाराओं के अधीन अपनी िजि अन्य मूल्य

िर्धित कर अजधकाररयों को प्रत्यायोजित निीं की िै।

(2) कोई व्यजि िो इस जिजनयम के अधीन दकसी जनणिय

पर पहुंचने या कोई जनधािरण या आिेि िारी करने या दकसी

अन्य प्रदक्रया को िलरू करने में आयलि की जिफलता से व्यजथत

िै, ऐसे व्यजि द्वारा जलजखत में अनलरोध दकए िाने के पश् चात्

छि मास के भीतर ऐसी जिफलता के जिरुद्ध ऐसे प्ररूप और

ऐसी रीजत में सिायता करेगा, िो जिजित की िाए ।

(3) आपजत्त जनम् नजलजखत रूप में की िाएगी,—

32

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(क) उपधारा (1) के अधीन की गई आपजत्त के मामले में,

यथाजस्ट्थजत, जनधािरण, या आिेि या जिजनश् चय के सेिा की

तारीख से िो मास के भीतर ; या

(ख) उपधारा (2) के अधीन की गई दकसी आपजत्त के

मामले में, छि मास से पूिि निीं और व्यजि द्वारा की गई सेिा

के जलजखत में अनलरोध के आठ मास के पश् चात् निीं की िाएगी :

परन्तल ििां आयलि का यि समाधान िो िाता िै दक

व्यजि को जिजनर्ििष्ट समय के भीतर आपजत्त ििि करने से पयािप्त

कारणों से रोका गया था, िि ऐसी आपजत्त को िो मास से

अजधक की अिजध के भीतर स्ट्िीकार कर सकता िै।

(4) आयलि, आक्षेप का, यथाजस्ट्थजत, जनधािरण या आिेि

या जिजनश् चय की परीक्षा द्वारा उसकी कायिािी का संचालन

करेगा और दकसी अन्य िस्ट्तािेि या िानकारी िो सलसंगत िो :

परन्तल ििां व्यजथत व्यजि व्यजिगत रूप से सलनिाई का

अनलरोध करता िै ििां ऐसे व्यजि को व्यजिगत रूप से सलनिाई

का अिसर दिया िाएगा।

(5) ििां दकसी व्यजि ने उपधारा (4) के अधीन सलनिाई

का अनलरोध दकया िै और व्यजि जनयत समय और स्ट्थान पर

सलनिाई में सजम्मजलत िोने में जिफल रिता िै, आयलि उस

व्यजि की अनलपजस्ट्थजत में आपजत्त को आगे बढाएगा और

अिधारणा करेगा।

(6) आपजत्त प्राप्त िोने के पश् चात् तीन मास के भीतर,

आयलि या तो,—

(क) आपजत्त को पूणि या आंजिक रूप से स्ट्िीकार करे और

स्ट्िीकृजत को प्रभािी करने के जलए उजचत कारिाई करे (जिसमें

पूणि या आंजिक रूप से जनधािरण दकए गए दकसी भी िंड से छूट

भी सजम्मजलत िै) ; या

(ख) यथाजस्ट्थजत, आपजत्त या िेष आपजत्त से इंकार कर

सकेगा और दकसी ऐसे मामले में आपजत्त करने िाले व्यजि को

जिजनश् चय की जलजखत सूचना और इसके कारण, साक्ष्य के जलए

एक कथन सजित, जिस पर यि आधाररत िै, प्रस्ट्तलत करेगा :

परंतल ििां आयलि आपजत्त करने के तीन मास के भीतर

व्यजि को जलजखत रूप में सूजचत करता िै, िि िो मास से

अनजधक की और अिजध के जलए आपजत्त पर जिचार करना

िारी रख सकेगा:

परन्तल यि और दक िि व्यजि जलजखत रूप में आयलि से

अनलरोध कर सकेगा दक िि आपजत्त पर जिचार करने में तीन

मास की अिजध के जलए अपनी जस्ट्थजत की सम्यक् तैयारी के

जलए िेरी करे,जिस मामले में स्ट्थगन की अिजध की गणना उस

अिजध के जलए निीं की िाएगी जिसके द्वारा आयलि अपने

जिजनश् चय पर पहुंचेंगे।

(7) ििां आयलि ने उपधारा (6) के अधीन जिजनर्ििष्ट

समय के भीतर अपने जिजनश् चय के बारे में व्यजि को सूजचत

निीं दकया िै, ििां िि व्यजि एक जलजखत नोरटस तामील कर

सकेगा जिसमें उसे पंद्रि दिन के भीतर जनणिय लेने की अपेक्षा

िोती िै।

(8) यदि उपधारा (7) में जिजनर्ििष्ट नोरटस दिए िाने के

पश् चात् पंद्रि दिन की अिजध के अंत तक जिजनश् चय निीं दकया

गया िै, तो, उस अिजध के अंत में, आयलि के पास आपजत्त की

अनलमजत दिया िाना माना िाएगा ।

(9) (क) इस धारा के अधीन दकसी भी आिेि के

पलनर्ििलोकन के मामले में या इसके अधीन जिजनयम,जनयमों या

अजधसूचनाओं के अधीन आपजत्त में कोई जिजनश् चय पाररत

दकया िाता िै, उसके अधीनस्ट्थ दकसी अजधकारी या व्यजि

द्वारा, आयलि, अपने स्ट्ियं के प्रस्ट्ताि पर उसके द्वारा प्राप् त

सूचना, ऐसे आिेि के अजभलेख की मांग करे और िांच करे दक

क्या—

(i) जबक्री के दकसी भी आितिन पर कर निीं लगाया गया

िै या कम िर पर कर लाया गया िै, या गलत रीजत से िगीकृत

दकया गया िै, या कोई िािा गलत रीजत से दकया गया िै या

कर के िाजयत्ि को कम करके आंका गया िै; या

(ii) दकसी भी मामले में, आिेि त्रलरटपूणि िै, ििां तक यि

रािस्ट्ि के जित के प्रजतकूल िै और िांच के पश् चात्, आयलि

अपने सिोत्तम जनणिय के जलए, ििां आिश्यक िो, आिेि

पाररत कर सकेगा।

(ख) (i) परीक्षा और आिेि पाररत करने के प्रयोिन के

जलए, आयलि, नोरटस की तामील द्वारा, ि् यौिारी से अपेक्षा कर

सकेगा दक िि उसके समक्ष ऐसी लेखा पलस्ट्तकें और अन्य

िस्ट्तािेि या साक्ष्य करे िैसा िि उपरोि प्रयोिन के जलए

आिश्यक समझता िै।

(ii) धारा 34 में अन्तर्ििष्ट प्रजतकूल बात के िोते हुए भी,

इस धारा के अधीन कोई भी आिेि उस िषि के अंत से चार िषि

की समाजप्त के पश् चात् पाररत निीं दकया िाएगा, जिसमें

अधीनस्ट्थ अजधकारी द्वारा पाररत आिेि व्यौिारी को दिया गया

िै।

(iii) धारा 34 में अन्तर्ििष्ट प्रजतकूल बात के िोते हुए भी,

ििां अधीनस्ट्थ अजधकारी द्वारा पाररत दकसी आिेि या उि

आिेि के भाग के संबंध में, आपजत्त की सलनिाई करने िाले

दकसी प्राजधकारी द्वारा या अजधकरण सजित दकसी अपील

प्राजधकारी द्वारा एक आिेि पाररत दकया गया िै या ऐसा

आिेि आपजत्त में जिजनश् चय के जलए लंजबत िै या अपील िायर

की िाती िै, तो, यदि परीक्षा में िाजमल मलद्दों का जनणिय या

आपजत्त या अपील में उठाया गया िै, तो आयलि उस िषि के अंत

के पांच िषि के भीतर, जिसमें अधीनस्ट्थ अजधकारी द्वारा पाररत

उि आिेि व्यौिारी पर तामील दकया गया िै, उसकी परीक्षा

या ररपोटि या प्राप्त िानकारी के बारे में अजधकरण सजित उि

आपजत्त पर सलनिाई, प्राजधकरण या अपीलीय प्राजधकारी को

ररपोटि करेगा और अजधकरण सजित उि अपील प्राजधकारी,

व्यौिारी को सलनिाई का एक उजचत अिसर िेने के पश् चात्,

ििां आिश्यक िो, अपने सिोत्तम जनणिय के जलए एक आिेि

पाररत करेगा।

(ग) यदि आयलि ने दकसी ऐसे मलद्दे के जिरुद्ध उजचत मंच

के समक्ष कोई कायिािी आरंभ की िै िो अजधकरण के आिेि

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

33

द्वारा रािस्ट्ि के जिरुद्ध जिजनश् चय दकया गया िै, तो आयलि

दकसी भी आिेि के संबंध में, आिेि के अलािा, िो अजधकरण

के आिेि का जिषय-िस्ट् तल िै, अजभलेख के जलए कॉल कर सकेगा,

पूिोत्तर के रूप में परीक्षा आयोजित कर सकेगा अपने जनष्कषों

को अजभजलजखत कर सकेगा, खाते की उि पलस्ट्तकों और अन्य

साक्ष्यों के जलए कॉल कर सकेगा और इस धारा के अधीन

उपबंध दकए गए आिेि पाररत कर सकेगा िैसे दक मलद्दा

रािस्ट्ि के जिरुद्ध तय निीं दकया गया था, लेदकन ब्याि या

िाजस्ट्त सजित बकाया की िसूली पर रोक तब तक लगा िी

िाएगी, िब तक दक िे ऐसे मलद्दे से संबंजधत निीं िैं, समलजचत

मंच द्वारा जिजनश् चय निीं जलया िाता िै और ऐसे जनणिय के

बाि, यदि आिश्यक िो, तो पलनर्ििलोकन के आिेि को

उपांतररत कर सकेगा।

(घ) इस धारा के अधीन दकसी व्यौिारी या व्यजि द्वारा

दकए गए दकसी आिेिन पर कोई कायिािी ग्रिण निीं की

िाएगी ।

(ड.) दकसी न्यायालय के दकसी जनणिय, जडक्री या आिेि

में दकसी बात के िोते हुए भी, इस जिजनयम के उपबंध, रािपत्र

में इस जिजनयम के प्रकािन की तारीख को प्रिृत्त हुए समझे

िाएंगे ।

(10) (क) धारा 34 में, अंतर्ििष्ट दकसी प्रजतकूल बात के

िोते हुए भी, आयलि िषि के अंत जिसमें उसके द्वारा पाररत

दकसी आिेि की तामील से चार िषि के भीतर दकसी समय,

स्ट्िप्रेरणा से, अजभलेख में िृश्यमान दकसी भूल को सलधार सकता

िै और उि अिजध के भीतर या तत्पश् चात् ऐसी दकसी भूल को,

िो उि अिजध के भीतर ऐसे आिेि से प्रभाजित दकसी व्यजि

द्वारा उसके संज्ञान में लाई िाती िै, को सलधार सकेगा ।

(ख) उपधारा (1) के उपबंध, अपील प्राजधकरण या

आक्षेप सलनिाई प्राजधकरण द्वारा भूल को सलधारने को लागू िोंगे

िैसे िे आयलि द्वारा भूल के सलधारने को लागू िोते िैं :

परंतल ििां कोई मामला दकसी आिेि या आिेि के भाग

के संबंध में, आक्षेप या अपील या पलनर्ििलोकन के माध्यम से

दकसी कायिािी में जिचाररत या जिजन जश् चत दकया गया िै,

प्राजधकरण िो आक्षेप, अपील या पलनर्ििलोकन पर आिेि

पाररत कर रिी िै इस जिजनयम में अंतर्ििष्ट दकसी बात के िोते

हुए भी, मामला िो जिचाररत या जिजनजश् चत दकया गया िै, से

जभि दकसी मामले पर आिेि या आिेि के भाग को सलधार

सकेगा ।

(ग) ििां कोई ऐसा सलधार कर या िाजस्ट्त या ब्याि की

रकम को घटाने का प्रभाि रखता िै, आयलि, उपबंधों के

अनलसार ऐसे व्यजि को ऐसी िेय रकम को िाजपस करेगा ।

(घ) ििां कोई ऐसा सलधार कर या िाजस्ट्त या ब्याि की

रकम को बढाने या िापसी की रकम को घटाने का प्रभाि िै

आयलि, उपबंधों के अनलसार ऐसे व्यजि से ऐसी िेय़ रकम को

िसूल करेगा ।

(ङ) पूििगामी उपधाराओं में यथाउपबंजधत के जसिाय

और ऐसे जनयमों के अध्यधीन, िो जिजित दकए िाएं, धारा 66

के अधीन जनयलि दकए गए दकसी व्यजि द्वारा इस जिजनयम या

इसके अधीन बनाए गए जनयमों के अधीन दकया गया कोई

जनधािरण या पलनःजनधािरण या पाररत दकया गया आिेि,

स्ट्िप्रेरणा से ऐसे व्यजि द्वारा या इस बाबत दकए गए आिेिन

पर पलनर्ििलोदकत दकया िा सकेगा।

75. िपथ, आदि पर साक्ष् य लेने की आयलक् त और अन् य

प्राजधकाररयों की िजि—(1) इस जिजनयम के प्रयोिन के जलए,

धारा 74 के अधीन आक्षेपों का अिधारण करने िाला आयलि

या कोई व्यजि का िाि का जिचारण करते समय जनम् नजलजखत

मामलों के संबंध में जसजिल प्रदक्रया संजिता, 1908 (1908 का

5) के अधीन न्यायालय में जनजित ििी िजियां िोगी,

अथाित् :—

(क) दकसी व्यजि को िाजिर कराना और उसकी िपथ

पर परीक्षा या प्रजतज्ञान करना ;

(ख) लेखाओं और िस्ट्तािेिों के प्रकटीकरण के जलए बाध्य

करना; और

(ग) साजक्षयों की परीक्षा के जलए कमीिन िारी करना

और धारा 74 के अधीन आक्षेपों का अिधारण करने िाले

आयलि या दकसी व्यजि के समक्ष इस जिजनयम के अधीन कोई

कायिािी भारतीय िंड संजिता (1860 का 45) की धारा 193

और धारा 228 के अथािन्तगित और धारा 196 के प्रयोिन के

जलए न्याजयक कायिाजियां समझी िाएंगी ।

(2) इस बाबत बनाए गए दकन्िीं जनयमों के अध्यधीन,

धारा 74 के अधीन आक्षेपों का अिधारण करने िाला आयलि

या कोई व्यजि इन जिजनयमों के अधीन दकन्िीं कायिाजियों में

उसके समक्ष प्रस्ट्तलत की गई लेखा पलजस्ट्तका और अन्य िस्ट्तािेिों

को िब तक ऐसी कायिाजियां समाप् त निीं िो िाती िैं,

पररबद्ध और उसकी अजभरक्षा में अजभधाररत कर सकेगा :

परंतल धारा 74 के अधीन आक्षेपों का अिधारण करने

िाला आयलि या व्यजि लेखा पलजस्ट्तकाओं या अन्य िस्ट्तािेिों को

ऐसा करने के जलए उसके कारणों को लेखबद्ध दकए जबना

पररबद्ध निीं करेगा ।

76. अपील अजधकरण में अपील—(1) धारा 74, धारा

84, और धारा 85 के अधीन आयलि द्वारा दकए गए जिजनश् चय

से व्यजथत कोई व्यजि ऐसे जिजनश् चय के जिरुद्ध अपील

अजधकरण में अपील कर सकेगा ।

(2) धारा 77 के उपबंधों के अध्यधीन, कोई अपील ग्रिण

निीं की िाएगी िब तक यि जिजनश् चय के जिरुद्ध अपील की

तामील की तारीख से िो मास के भीतर निीं की िाती िै ।

(3) इस धारा के अधीन की गई प्रत्येक अपील ऐसे प्ररूप

में और ऐसी रीजत में सत्याजपत की िाएगी और ऐसी फीस के

साथ की िाएगी, िो जिजित की िाए ।

(4) अपील अजधकरण द्वारा जनधािरण के जिरुद्ध कोई

अपील तब तक ग्रिण निीं की िाएगी िब तक दक अपील के

34

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

साथ जििादित रकम और ऐसे व्यजि द्वारा जनधािररत अन्य िेय

रकम के संिाय के संतोषिनक सबूत संलग् न निीं िों :

परंतल अपील अजधकरण, यदि िि ठीक समझे, जलजखत में

लेखबद्ध दकए िाने िाले कारणों से, अपीलाथी ऐसी रकम िो

जनिेजित की िाए, के जलए प्रजतभूत द्वारा ऐसी रीजत में िो

जिजित की िाए, के प्रस्ट्तलत करने पर कलछ या पूरी जििादित

रकम के संबंध के जबना ऐसे आिेि के जिरुद्ध अपील ग्रिण कर

सकेगा :

परंतल यि और दक अपील अजधकरण द्वारा कोई अपील

तब तक ग्रिण निीं की िाएगी िब तक दक यि समाधान न िो

िाए दक ऐसी रकम जिसे अपीलाथी उससे िेय मानता िै, का

संिाय कर दिया गया िै ।

(5) अपील अजधकरण के समक्ष कायिाजियों में,—

(क) व्यजथत व्यजि केिल आक्षेप में कजथत दकए गए

मामलों पर जििाि करने तक िी सीजमत रिेगा;

(ख) व्यजथत व्यजि केिल आक्षेप में कजथत दकए गए

आधारों पर िी बिस करने तक िी सीजमत रिेगा; और

(ग) व्यजथत व्यजि को अच्छे और पयािप्त कारणों के जलए

आयलि के समक्ष प्रस्ट्तलत निीं दकए गए साक्ष्य को पेि करने की

अनलज्ञा िी िा सकेगी ।

(6) अपील अजधकरण—

(क) जनधािरण के मामलें में, पलजष्ट, अिनत या िार्षिक

जनधािरण करेगा (जिसमें कोई िाजस्ट्त और अजधरोजपत ब्याि भी

िै);

(ख) आयलि के दकसी अन्य जिजनश् चय के मामले में,

जिजनश् चय अजभपलष्ट या नामंिूर करेगा ;या

(ग) िािे के अिधारण के जलए ऐसा अन्य आिेि पाररत

करेगा, िो िि ठीक समझे :

परंतल अपील अजधकरण अपने जिजनश् चय के जलए

जलजखत में कारण िेगा जिसमें तथ्य के प्रश् नों पर इसका जनष्कषि

और साक्ष्य या अन्य सामग्री, जिस पर िि जनष्कषि आधाररत थे,

सजम्मजलत िोंगे ।

(7) अपील अजधकरण इसके समक्ष मामले का अंजतम

समाधान करने के जलए अपने सिोत्तम प्रयास करेगा और इस

प्रयोिन के जलए जििादित आिेि िेतल प्रजतस्ट्थापन में जिजनश् चय

कर सकेगा जिसके अंतगित दकसी जििेकाजधकार का प्रयोग या

पलनःप्रयोग या आयलि में जनजित िजि भी िै ।

(8) अपील अजधकरण जनधािरण को अपास्ट्त निीं करेगा

और अजतररि जनधािरण के जलए मामला आयलि को िापस निीं

भेिेगा, िब तक इसने पिले—

(क) प्रस्ट्ताजित आिेि से व्यजथत व्यजि को सलाि िेने ;

(ख) व्यजि को, इसके समक्ष अजतररि साक्ष्य प्रस्ट्तलत

करने का, िो अपील अजधकरण को अंजतम अिधारण तक

पहुंचने में सिायक िोता, के जलए अिसर प्रित्त निीं दकया िै ।

(9) ििां अपील अजधकरण जनधािरण को अपास्ट्त करता

िै और अजतररि जनधािरण के जलए मामला आयलि को भेिता

िै, अपील अजधकरण आयलि को उसी समय कलछ या पूरी

जििादित रकम को व्यजि को िापस करने का आिेि िेगा :

परंतल ििां कोई आिेि निीं दिया गया िै, यि उपधारणा

की िाएगी दक अपील अजधकरण ने जििादित रकम की िापसी

का आिेि दिया िै ।

(10) ििां व्यजि अनलबद्ध समय और स्ट्थान पर सलनिाई

के जलए उपजस्ट्थत िोने में असफल रिता िै अपील अजधकरण

कायिाजियों को आगे बढाने, अपील जिखजण्डत या व्यजि की

अनलपजस्ट्थजत में आक्षेप के अिधारण करने का आिेि अग्रेजषत

कर सकेगा ।

(11) धारा 81 और उपधारा (12) में यथाउपबंजधत के

जसिाय अपील अजधकरण द्वारा अपील पर पाररत आिेि अंजतम

िोगा ।

(12) अपील अजधकरण इसकी कायिाजियों के अजभलेख

से िृश्यमान कोई भूल या त्रलरट सलधार सकेगा ।

(13) अपील अजधकरण द्वारा पाररत कोई आिेि

स्ट्िप्रेरणा से या इस बाबत दकए गए आिेिन पर पलनर्ििलोदकत

दकया िा सकेगा :

परंतल कोई आिेि जिससे दकसी व्यजि को प्रजतकूल रूप से

प्रभाजित िोने की संभािना िै, पिले ऐसे व्यजि को सलने िाने

का यलजियलि अिसर दिया िाएगा ।

77. कजतपय मामलों में पररसीमा की अिजध का

जिस्ट्तार— (1) अपील अजधकरण धारा 76 के अधीन उस धारा

में अजधकजथत पररसीमा की अिजध के पश् चात् अपील स्ट्िीकार

कर सकेगी । यदि अपीलाथी अपील अजधकरण को संतलष्ट करता

िै दक ऐसी अिजध के भीतर अपील न करने के जलए पयािप्त

कारण थे ।

(2) धारा 76 और धारा 81 के अधीन अजधकजथत

अिजध की संगणना करने में, पररसीमा अजधजनयम, 1963

(1963 का 36) की धारा 4 और धारा 12 के उपबंध, ििां तक

िो सके, लागू िोंगे ।

(3) धारा 76 या धारा 81 से जभि, पररसीमा की अिजध

की संगणना करने में दकसी उपबंध या ति् धीन बनाए गए जनयमों

द्वारा जिजित या अधीन, दकसी अिजध, जिसके िौरान दकसी

न्यायालय के आिेि या आिेि द्वारा कोई कायिािी रोकी गई

िै, अपिर्िित िोगी ।

78. सबूत का भार—धारा 74 के अधीन या अपील

अजधकरण के समक्ष कायिाजियों में कोई जििाि का जिषय, िो

कर या इस जिजनयम के अधीन दकसी अन्य रकम के िेय िाजयत्ि

से संबंजधत िै, को साजबत करने का भार रकम के संिाय के िायी

अजभकजथत व्यजि पर िोगा ।

79. कजतपय आिेिों के जिरुद्ध अपील या आक्षेप —(1)

जनम् नजलजखत के जिरुद्ध कोई आक्षेप या अपील निीं िोगी —

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

35

(क) कर या िाजस्ट्त का जनधािरण करने का आयलक् त का

जिजनश् चय ;

(ख) व् यजि को जििरणी प्रस्ट् तलत करने की अपेक्षा की

सूचना;

(ग) धारा 58 और धारा 59 के अधीन िारी सूचना;

(घ) आयलक् त का दकसी मामले को अजधसूजचत करने का

जिजनश् चय;

(ड.) व् यौिारी पर कारण बाताओ नोरटस दक क् यों न उस

पर इस जिजनयम के अधीन अपराध के जलए अजभयोजित न

दकया िाए ;

(च) लेखा पलजस्ट्तका, रजिस्ट् टरों और अन् य िस्ट् तािेिों की

िब् ती या प्रजतधारण से संबंजधत जिजनश् चय;

(छ) इस जिजनयम के अधीन अजभयोिन मंिूर करने का

जिजनश् चय;

(ि) दकन् िीं कायिाजियों के अनलक्रम में दकया गया

अन् तररम जिजनश् चय,

(झ) मूल् य िर्धित कर प्राजधकरणों के आन् तररक प्रिासन

के संबंध में आयलक् त का जिजनश् चय ,

(ञ) अपील अजधकरण या न् यायालय के आिेि को

प्रभािी करने को आयलक् त द्वारा िारी जनधािरण, या

(ट) ''गैर-अपीलीय आिेिों'' की तरि जनिेजित धारा 84

की उपधारा (10) के अधीन व् यजि पर तामील की गई सूचना,

(2) उपधारा (1) के खंड (ञ) में यथा उपबंजधत के

जसिाय, उपधारा (1) में अंतर्ििष्ट कोई बात, दकसी व्यजि को

धारा 74 के अधीन आयलि द्वारा जनधािररत दकसी रकम के या

दकसी रकम के संिाय की बाध्यता को आक्षेप करने से निीं

रोकेगी ।

80. जनधािऱण कायिाजियां, आदि का कजतपय आधारों

पर अजिजधमान् य न िोना—(1) दकन्िीं उपबंधों के अनलसरण में

या पूििगामी जिजध के अधीन दकए गए या िारी दकए गए या

जलए गए कोई जनधािरण, सूचना, समन या अन्य कायिाजियां,

ऐसे जनधािरण, सूचना, समन या अन्य कायिाजियों में दकसी

भूल, त्रलरट या लोप के कारण मात्र से अजिजधमान् य निीं िोगी या

अजिजधमान् य निीं समझी िाएंगी, यदि ऐसा जनधािरण, सूचना,

समन या अन्य कायिाजियां, आिय और प्रयोिन के अनलसार या

अन्य पूििगामी जिजध के सार और प्रभाि के अनलरूप िो ।

(2) कोई सूचना, आिेि या संसूचना की तामील प्रश् नगत

निीं की िाएगी, यदि उि सूचना, आिेि या संसूचना,

यथाजस्ट्थजत, व्यौिारी या व्यजि, जिसको यि िारी की गई िै,

द्वारा पिले से िी उस पर कृत्य दकया िा चलका िै या िो तामील

ऐसी सूचना, आिेि या संसूचना के अनलसरण में पूििगामी प्रारंभ

की गई, जनरंतर की गई, समाप्त की गई कायिाजियों पर या में

प्रश् नगत निीं की गई िै ।

(3) इस जिजनयम के अधीन दकया गया कोई जनधािरण

इस आधार मात्र से दकसी अन्य उपबंधों के अधीन दकसी अन्य

प्राजधकरण द्वारा कारिाई की िा सकती थी, अजिजधमान् य निीं

िोगा ।

81. उच् च न्यायालय में अपील—(1) इस जिजनयम के

अधीन अजधकरण द्वारा पाररत प्रत्येक आिेि के जिरुद्ध अपील

उच् च न्यायालय में िोगी, यदि उच् च न्यायालय का यि

समाधान िो िाता िै दक मामले में जिजध का सारिान् प्रश् न

अंतििजलत िै ।

(2) अपील अजधकरण द्वारा पाररत दकसी आिेि से

व्यजथत आयलि या अन्य पक्षकार उच् च न्यायालय में अपील कर

सकेगा और इस उपधारा के अधीन ऐसी अपील—

(क) उस तारीख से, जिसको अपीलगत आिेि आयलि को

प्राप्त हुआ या अन्य पक्षकार को तामील हुआ, साठ दिन की

अिजध में फाइल की िाएगी :

परंतल उच् च न्यायालय उि साठ दिन की अिजध के

अिसान के पश् चात् अपील को ग्रिण कर सकेगा यदि उसका यि

समाधान िो िाता िै दक ऐसी अिजध में इसको फाइल न कर

पाने का पयािप्त कारण था :

परंतल यि और दक उपरोि परंतलक रािपत्र में इस

जिजनयम के प्रकािन की तारीख को प्रिृत्त हुआ समझा िाएगा ;

(ख) अपील ज्ञापन, जिसमें प्रजमततः जिजध का सारिान्

प्रश् न अंतििजलत िै, का कथन िै, के प्ररूप िोगा ।

(3) ििां उच् च न्यायालय का समाधान िो िाता िै दक

दकसी मामले में जिजध का सारिान् प्रश् न अंतििजलत िै, िि उस

प्रश् न को जिरजचत करेगा ।

(4) इस प्रकार केिल जिरजचत प्रश् न पर अपील की

सलनिाई िोगी और प्रत्यथी को अपील की सलनिाई के िौरान इस

बात पर बिस करने की अनलमजत िोगी दक मामले में ऐसा प्रश् न

अंतििजलत निीं िै :

परंतल इस उपधारा की दकसी बात के बारे में यि निीं

समझा िाएगा दक िि लेखबद्ध दकए िाने िाले कारणों से

न्यायालय की दकसी अपील की, उसके द्वारा जिरजचत न दकए

गए जिजध के दकसी अन्य सारिान् प्रश् न पर सलनिाई करने की

िजि को समाप्त करने या उसका अल्पीकरण करने िाली िै,

यदि उसका यि समाधान िो िाता िै दक मामले में ऐसा प्रश् न

अंतििजलत िै ।

(5) उच् च न्यायालय इस प्रकार जिरजचत जिजध के प्रश् न

का जिजनश् चय करेगा और ऐसे जनणिय को, उन आधारों सजित,

जिन पर ऐसा जनणिय आधाररत िै, प्रिान करेगा और ऐसी

लागत लगा सकेगा, िो िि ठीक समझे ।

(6) उच् च न्यायालय दकसी ऐसे मलद्दे का अिधारण कर

सकेगा जिसे—

(क) अपील अजधकरण द्वारा अिधाररत न दकया गया िो;

(ख) उपधारा (1) में यथाजनर्ििष्ट जिजध के ऐसे प्रश् न पर

जिजनश् चय के कारण, अपील अजधकरण द्वारा त्रलरटपूणि रूप से

अिधाररत दकया गया िो ।

36

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(7) ििां उच् च न्यायालय के समक्ष कोई अपील फाइल

की गई िै, ििां यि उच् च न्यायालय के िो न्यायाधीिों से कम

की न्यायपीठ द्वारा निीं सलनी िाएगी और उसका जिजनश् चय

ऐसे न्यायाधीिों या उनके बहुमत की राय के अनलसार दकया

िाएगा।

(8) ििां ऐसा कोई बहुमत निीं िै, ििां न्यायाधीि

जिजध के उस जबिलं को बताएंगे जिस पर िे मतांतर रखते िैं और

ििां केिल उस हबंिल पर उच् च न्यायालय के एक या अजधक अन्य

न्यायाधीिों द्वारा मामले को सलना िाएगा और ऐसे

न्यायाधीिों, जिन्िोंने पिले इस मामले को सलना िै, सजित सभी

न्यायाधीिों के बहुमत की राय के अनलसार ऐसे हबंिल पर

जिजनश् चय दकया िाएगा ।

(9) इस जिजनयम में अन्यथा उपबंजधत के जसिाय,

जसजिल प्रदक्रया संजिता, 1908 (1908 का 5) के उपबंध, िो

उच् च न्यायालय को अपील से संबंजधत िै, इस धारा के अधीन

अपीलों के संबंध में, ििां तक संभि िो, लागू िोंगे ।

82. दकसी प्राजधकरण के समक्ष कायिाजियों में

िाजिरी— (1) कोई व्यजि, िो दकसी प्राजधकारी के समक्ष इस

जिजनयम के अधीन दकसी कायिािी के संबंध में िाजिर िोने के

जलए िकिार िै या अपेजक्षत िै,—

(क) इस बाबत जलजखत में उसके द्वारा प्राजधकृत व्यजि

द्वारा, ररश्तेिार या उसके द्वारा जनयजमत रूप से जनयोजित

व्यजि िोते हुए ; या

(ख) जिजध व्यिसायी या चाटिडि अकाउंटेंट, लागत

लेखापाल या कंपनी सजचि द्वारा, िो उपधारा (2) के द्वारा या

अधीन जनरर्िित निीं िै ; या

(ग) मूल्य िर्धित कर व्यिसायी द्वारा, िो सूची में जिजित

अििताएं रखता िै और सूची में ििि िै, जिसका आयलि इस

बाबत अनलरक्षण करेगा और िो उपधारा (2) के द्वारा या अधीन

जनरर्िित निीं िै, िाजिर िो सकेगा ।

(2) आयलि, ऐसे कारणों से िो जलजखत में लेखबद्ध दकए

िाए, दकसी प्राजधकारी, दकसी जिजध व्यिसायी, चाटिडि

अकाउंटेंट, लागत लेखापाल, कंपनी सजचि, या मूल्य िर्धित कर

व्यिसायी के समक्ष िाजिर िोने की अिजध के जलए जनरर्िित िो

सकेगा—

(क) िो सरकारी सेिा से बखािस्ट्त दकया गया िो; या

(ख) िो जिजध व्यिसायी या चाटिडि अकाउंटेंट या लागत

लेखापाल या कंपनी सजचि िोते हुए इस जिजनयम के अधीन

दकन्िीं कायिाजियों के संबंध में किाचार का िोषी पाया गया

िो ; या

(ग) िो मूल्य िर्धित कर व्यिसायी िोते हुए, आयलि

द्वारा ऐसे किाचार का िोषी पाया गया िो ।

(3) कोई व्यजि, िो इस धारा के अधीन जनरर्िित िै,

जनरििता की तारीख से एक मास के भीतर सरकार को ऐसी

जनरििता को रद्द करने के जलए अपील कर सकेगा।

(4) आयलि का जिजनश् चय, उसके दकए िाने के एक मास

तक या िब तक अपील प्रस्ट्तलत निीं की िाती िै या िब तक

अपील जिजनश् चत निीं िो िाती, तब तक प्रभािी निीं िोगा ।

(5) आयलि दकसी समय स्ट्िप्रेरणा से या इस बाबत उसके

द्वारा दकए गए आिेिन पर, उपधारा (2) के अधीन दकसी

व्यजि के जिरुद्ध दकए गए दकसी जिजनश् चय का प्रजतसंिरण कर

सकेगा और तत्पश् चात् ऐसा व्यजि जनरर्िित निीं रि िाएगा।

83. जसजिल न्यायालयों में िािों का िििन— कोई िाि

या कायिािी इस जिजनयम या ति् धीन बनाए गए जनयमों के

अधीन दकए गए दकसी जनधािरण या पाररत दकसी आिेि को

अपास्ट्त करने या संिोधन करने के जलए जसजिल न्यायालय में

निीं लाई िाएगी ।

84. जिजनर्ििष्ट प्रश् नों का अिधारण—(1) यदि कोई

अिधायि प्रश् न उद्भूत िोता िै तब न्यायालय के समक्ष

कायिाजियों से अन्यथा, व्यजि उस प्रश् न के अिधारण के जलए

आयलि को जिजित रीजत में आिेिन कर सकेगा ।

(2) उपधारा (3) के अध्यधीन, अिधायि प्रश् न के

अिधारण के जलए आिेिन, प्रस्ट्ताजित संव्यििार की बाबत

संव्यििार िो िो दकया िा रिा िो, या संव्यििार समाप्त िो

गया िो, दकया िा सकता िो ।

(3) अिधायि प्रश् न के अिधारण के जलए कोई आिेिन

तत्पश् चात् निीं दकया िा सकता िब—

(क) आयलि ने धारा 58 के अनलसरण में व्यजि की लेखा

परीक्षा प्रारंभ की िै; या

(ख) आयलि ने कर अिजध के जलए जनधािरण िारी दकया

िै, जिसमें संव्यििार उपजस्ट्थत अिधायि प्रश् न के अध्यधीन िै ।

(4) इस धारा के प्रयोिन के जलए जनम् नजलजखत अिधायि

प्रश् न िोगे—

(क) क्या कोई व्यजि, सोसाइटी, क्लब या संगम या कोई

फमि या कोई िाखा या दकसी फमि या जिभाग व्यौिारी िै या

िोगा ;

(ख) क्या दकसी व्यौिारी का इस जिजनयम के अधीन

रजिस्ट्रीकृत िोना अपेजक्षत िै या िोगा ;

(ग) अिजध के जलए व्यौिारी की कराधेय मात्रा की

रकम;

(घ) क्या संव्यििार जिक्रय से उद्भूत धारा 8 के अधीन

दकया गया जिक्रय या अपेजक्षत समायोिन िै या िोगा ;

(ङ) क्या संव्यििार कायि संजििा की प्रकृजत या दकसी

माल के उपयोग के अजधकार के अंतरण में िै या िोगा;

(च) क्या जिक्रय धारा 7 के अधीन कर का िायी निीं िै ;

(छ) क्या जिक्रय धारा 6 के अधीन कर से छूट प्राप्त िै ;

(ि) संव्यििार की जिक्रय कीमत ;

(झ) व्यौिारी के आितिन का अनलपात या आितिन का

क्रय, जिस कर अिजध में उद्भूत िोता िै और िि समय, जिस

पर कर या कर प्रत्यय का समायोिन उद्भूत िोता िै ;

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

37

(ञ) क्या कोई संव्यििार माल के आयात में िै या िोगा ;

(ट) लक्षद्वीप में आयाजतत दकसी माल का मूल्य ;

(ठ) कर की िर, िो अनलसूची के अधीन माल के जिक्रय

या आयात और माल के िगीकरण पर संिेय िै ;

(ड) क्या संव्यििार माल के क्रय या क्रय से उद्भूत िोने

िाली धारा 10 के अधीन समायोिन अपेजक्षत िै ;

(ढ) दकसी कर प्रत्यय की रकम, जिसका व्यौिारी माल के

क्रय या आयात की बाबत िकिार िै;

(ण) व्यौिारी द्वारा क्रय दकए गए दकसी उपयोजगता माल

की बाबत दकसी कर प्रत्यय की रकम ;

(त) दकसी जिक्रय या क्रय की अिजस्ट्थजत ;

(थ) व्यौिारी की पररजस्ट्थजतयों में स्ट्कीम संरचना का

आिेिन ; या

(ि) व्यौिारी की कर अिजध ।

5. आयलि, ऐसी अिजध के भीतर, िो जिजित की िाए

अिधारण करेगा ।

6. ििां—

(क) आयलि, उपधारा (5) के अधीन जिजित समय के

भीतर इस धारा के अधीन अिधारण करने में असफल रिता िै ;

(ख) व्यजि, तत्पश् चात्, संव्यििार कायािजन्ित करेगा, िो

आिेिन के अध्यधीन और आिेिन में िर्णित रीजत में िोता िै;

और

(ग) व्यजि ने, अिधायि प्रश् न के अिधारण के जलए

आिेिन में, अिधायि प्रश् न के उत्तर को इंजगत दकया िै, जिसे

व्यजि सिी मानता िै (इस धारा में “प्रस्ट्ताजित अिधारण” किा

गया िै),

आयलि द्वारा प्रस्ट्ताजित अिधारण के जनबंधनों में अिधायि प्रश् न

का अिधारण जिजित अिजध की समाजप्त के पश् चात् दिन पर

व्यजि को दकए गए और िारी प्रयोिन के जलए दकया गया

समझा िाएगा ।

7. आयलि—

(क) जनिेि िेता िै दक अिधारण के पूिि प्रभाजित दकसी

संव्यििार की बाबत अिधारण इस जिजनयम के अधीन दकसी

व्यजि के िाजयत्ि को प्रभाजित निीं करेगा ;

(ख) अिजध की सीमा, जिसके जलए अिधारण लागू

िोगा;

(ग) संव्यििारों की सीमा, जिसका अिधारण लागू

िोगा; और

(घ) अिधारण पर िैसा उजचत लगे, ऐसी अन्य

पररसीमाओं या जनबंधनों अजधरोपण कर सकेगा।

(8) यदि दकसी आिेि से उद्भूत कोई ऐसा प्रश् न इस

जिजनयम के अधीन पिले िी पाररत कर दिया गया िै, तब ऐसा

प्रश् न इस धारा के अधीन अिधारण के जलए ग्रिण निीं दकया

िाएगा ककंतल ऐसा प्रश् न ऐसे आिेि के जिरुद्ध आक्षेप या अपील

में समलत्थाजपत दकया िा सकता िै ।

(9) ििां—

(क) आयलि ने व्यजि को जिजिष् ट संव्यििार की बाबत

अिधारण िारी दकया िै; और

(ख) व्यजि, इस धारा के अधीन और आिेिन में िर्णित

रीजत में उसे िारी दकए अिधारण पर आधाररत संव्यििार को

कायािजन्ित करता िै,

कोई जनधािरण उस व्यजि के जिरुद्ध आयलि द्वा्रा समलत्थाजपत

निीं दकया िा सकेगा, िो अिधारण से असंगत िै और कोई

िाजस्ट्त व्यजि पर अजधरोजपत निीं की िा सकेगी, यदि

अिधारण बाि में गलत ठिराया गया िै ।

(10) आयलि, व्यजि पर सूचना की तामील द्वारा, इस

धारा के अधीन िारी दकया गया अिधारण प्रत्याहृत या अर्िित

कर सकेगा, ककंतल ऐसा प्रत्यािरण या अििता दकसी संव्यििार

या कारिाई की बाबत अिधारण पर जनभिर िोने की दकसी

व्यजि की िकिारी को प्रभाजित निीं करेगा, जिसे उसने प्रारंभ

कर दिया िै या जिसे उसने प्रत्यािरण या अििता के पूिि में पूरा

कर जलया िै।

85. साधारण प्रश् नों पर जिजनणिय—(1) आयलि, दकसी

प्रश् न पर, जिसमें व्यजियों के िगि या संव्यििारों के िगि का

जनििचन या प्रयोज्यता अंतििजलत िै, के उत्तर पर उसका

जिजनणिय रािपत्र में अजधसूचना के प्रकािन द्वारा िे सकेगा ।

(2) इस धारा के अधीन आयलि द्वारा िारी दकया गया

जिजनणिय, आयलि िैसा उजचत समझे ऐसे जनबंधनों और ितों के

अध्यधीन िारी दकया िा सकेगा ।

(3) जिजनणिय, जिजनणिय में (िो जिजनणिय के प्रकािन से

पूिि की तारीख िो सकती िै) कजथत तारीख पर या यदि

रािपत्र के प्रकािन की तारीख पर, जिजनणिय में कोई तारीख

कजथत निीं िै, प्रभािी िोना अजभदक्रजयत िोगा ।

(4) ििां—

(क) आयलि ने व्यजियों या संव्यििारों की बाबत

जिजनणिय प्रकाजित दकया िै ;

(ख) व्यजि जिजनणिय पर आधाररत संव्यििार का

कायािन्ियन या कोई कारिाई करता िै ;

(ग) जिजनणिय संव्यििार का कायािन्ियन या कारिाई के

उत्तरिाजयत्ि के समय पर, आयलि द्वारा प्रत्याह्रत निीं दकया

गया िै ; और

(घ) जिजनणियों के जनबंधनों के अनलसार, जिजनणिय का

तात्पयि व्यजि द्वारा दकए गए संव्यििार या की गई कारिाई पर

लागू िोता िै,

कोई जनधािरण, िो जिजनणिय से असंगत िै उस व्यजि के जिरुद्ध

आयलि ििारा समलत्थाजपत निीं दकया िा सकता िै और कोई

िाजस्ट्त व्यजि पर अजधरोजपत निीं की िा सकती, यदि

जिजनणिय बाि में गलत ठिराया गया िै ।

38

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(5) आयलि, रािपत्र में प्रकाजित अजधसूचना द्वारा, इस

धारा के अधीन पिले से िी िारी दकया गया जिजनणिय प्रत्याह्रत

या अर्िित कर सकेगा ककंतल ऐसा प्रत्यािरण या अििता दकसी

संव्यििार या कारिाई की बाबत जिजनणिय पर जनभिर िोने की

दकसी व्यजि की िकिारी को प्रभाजित निीं करेगा, िो उसके

द्वारा ऐसे प्रत्यािरण या अििता के पूिि में प्रारंभ या पूरा कर

जलया गया िै ।

अध्याय 13

िाजस्ट्तयां और अपराध

86. जनििचन— (1) इस अध्याय में “कर ऊनता” से इस

जिजनयम के उपबंधों के अनलसार व्यजि द्वारा उजचत रूप से कर

संिाय और कैलेण्डर मास की बाबत व्यजि द्वारा संित्त कर की

रकम के बीच अंतर अजभप्रेत िै ।

(2) ििां इस जिजनयम के अधीन उसी व्यजि की बाबत

िो या अजधक िाजस्ट्तयां उद्भूत िोती िै, ििां ऐसा व्यजि केिल

उच् चतर िाजस्ट्त का संिाय करने का िायी िोगा ।

87. अरजिस्ट्रीकरण के जलए िाजस्ट्त—ििां ऐसे व्यजि,

जिसका इस जिजनयम के अधीन रजिस्ट्रीकृत िोना अपेजक्षत िै

जिस दिन को अपेक्षा उद्भूत हुई िै, से एक मास के भीतर

रजिस्ट्रीकरण के जलए आिेिन करने में असफल रिता िै, ऐसा

व्यजि प्रजतदिन पांच सौ रुपए के बराबर की रकम की िाजस्ट्त

का संिाय करने के जलए िायी िोगा, उि अिजध की समाजप्त के

ठीक पश् चात् का दिन िब तक ऐसा व्यजि ऐसे प्ररूप में, ऐसी

जिजिजष्टयां और िानकारी अंतर्ििष्ट करने िाली और ऐसी फीस,

प्रजतभूजत और अन्य िस्ट्तािेि द्वारा, िो जिजित दकए िाएं, के

साथ रजिस्ट्रीकरण के जलए आिेिन करता िै :

परंतल इस उपधारा के अधीन संिेय िाजस्ट्त की रकम

पचास ििार रुपए की रकम से अजधक की निीं िोगी ।

88. धारा 21 के उल्लंघन के जलए िाजस्ट्त—यदि,

रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी, धारा 21 की उपधारा (1) के उपबंधों का

अनलपालन करने में असफल रिता िै तब िि अजधकतम पांच

ििार रुपए के अध्यधीन रिते हुए प्रजतदिन के व्यजतक्रम के जलए

िो सौ पचास रुपए की रकम की िाजस्ट्त का संिाय करने के

जलए िायी िोगा ।

89. धारा 22 के उल्लंघन के जलए िाजस्ट्त—यदि

रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी—

(क) धारा 22 की उपधारा (2) के उपबंधों के अनलपालन

में असफल रिता िै ;या

(ख) धारा 22 की उपधारा (7) में उपबंजधत उसके

रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र का अभ्यपिण करने में असफल रिता िै,

रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी अजधकतम पद्रंि ििार रुपए के अध्यधीन

रिते हुए प्रत्येक दिन के व्यजतक्रम के जलए पांच सौ रुपए के

बराबर की रकम की िाजस्ट्त का संिाय करने के जलए िायी

िोगा ।

90. जमथ्या व्यपिेिन के जलए िाजस्ट्त—यदि कोई व्यजि

जमथ्या व्यपिेिन करता िै दक िि इस जिजनयम के अधीन

व्यौिारी के रूप में रजिस्ट्रीकृत िै तब िि िोषपूििक संगृजित कर

की रकम के बराबर या पचास ििार रुपए, िो भी उच् चतर िो,

िाजस्ट्त का संिाय करने के जलए िायी िोगा ।

91. कजतपय ितों के अननलपालन के जलए िाजस्ट्त—ििां

कोई व्यजि—

(क) धारा 18 की उपधारा (4) के अधीन रजिस्ट्रीकरण

के जलए आिेिन कर दिया िै ;

(ख) रजिस्ट्रीकरण दकया गया िै; और या तो—

(i) दक्रयाकलापों को करने में असफल रिता िै िो व्यजि

को उसके आिेिन में जनर्ििष्ट अिजध के भीतर व्यौिारी बना

िेगा; या

(ii) दकन्िीं जनबंधनों या ितों के अनलपालन में असफल

रिा िै, जिसके अध्यधीन रिते हुए ऐसा रजिस्ट्रीकरण अनलित्त

था,

ऐसा व्यजि पांच ििार रुपए की िाजस्ट्त का संिाय करने के

जलए िायी िोगा ।

92. जििरणी िेने में असफलता के जलए िाजस्ट्त—यदि

दकसी व्यजि को अध्याय 5 के अधीन जििरणी िेना अपेजक्षत

िै—

(क) जनयत तारीख को कोई जििरणी िेने में असफल

रिता िै; या

(ख) जििरणी के साथ कोई अन्य िस्ट्तािेि, जिसका

जििरणी के साथ दिया िाना अपेजक्षत िै, िेने में असफल रिता

िै ; या

(ग) पिले से प्रस्ट्तलत जििरणी का संिोधन अपेजक्षत िोने

के कारण, जनयत तारीख तक संिोजधत जििरणी िेने में असफल

रिता िै; या

(घ) धारा 70 के अधीन िारी की गई अजधसूचना में

अपेक्षा का अनलपालन करने में असफल रिता िै,

ऐसा व्यजि जनयत तारीख के ठीक पश् चात् के दिन से लेकर

असफलता को पररिोजधत दकए िाने तक प्रजतदिन िो सौ

पचास ििार रुपए की रकम की िाजस्ट्त का संिाय करने के जलए

िायी िोगा :

परंतल इस उपधारा के अधीन िाजस्ट्त की कलल रकम

पच् चीस ििार रुपए से अजधक की निीं िोगी ।

93. जमथ्या जििरणी फाइल करने के जलए िाजस्ट्त—कोई

व्यजि िो—

(क) इस अजधजनयम के अधीन जििरणी िेता िै िो

सामग्री जििेष में जमथ्या, भ्रामक या प्रिंचक िै; या

(ख) इस जिजनयम के अधीन प्रस्ट्तलत जििरणी से दकसी

मामले या जिषय का लोप करता िै जिसके जबना जििरणी

सामग्री जििेष में जमथ्या, भ्रामक या प्रिंचक िै, पांच ििार

रुपए की रकम या कर ऊनता की रकम, िो भी उच् चतर िो,

िाजस्ट्त का संिाय करने के जलए िायी िोगा ।

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

39

94. अन्य िाजस्ट्तयां—(1) कोई व्यजि िो—

(क) धारा 14 के अधीन कर प्रत्यय का िािा करता िै,

जिसका िि िकिार निीं िै ; या

(ख) धारा 14 के अधीन अनलज्ञा से अजधकतर कर प्रत्यय

का िािा करता िै,

ऐसे िािा दकए गए कर प्रत्यय की रकम या पांच ििार रुपए,

िो भी उच् चतर िो, के बराबर की रकम की िाजस्ट्त का संिाय

करने के जलए िायी िोगा ।

(2) ििां कर ऊनता व्यजि के संबंध में उद्भूत हुई िै,

व्यजि, प्रजत सप्ताि कर ऊनता के एक प्रजतित के बराबर की

रकम या प्रजत सप्ताि पचास रुपए के बराबर की रकम,

व्यजतक्रम के अिजध के जलए, िो भी उच् चतर िो, की िाजस्ट्त का

संिाय करने के जलए िायी िोगा ।

(3) ििां जिजनयम के अधीन व्यजि से अपेजक्षत िै दक—

(क) अजभलेखों या लेखाओं को तैयार करे ; या

(ख) जिजित रीजत में अजभलेखों या लेखाओं को तैयार

करे; या

(ग) जिजित या अजधसूजचत अजभलेखों या लेखाओं को

प्रजतधाररत करे ; और ऐसा व्यजि—

(i) जिजित और अजधसूजचत अजभलेखों और लेखाओं को

तैयार करने में असफल रिता िै ; या

(ii) जिजित या अजधसूजचत अजभलेखों और लेखाओं में

जिजित रीजत में तैयार करने में असफल रिता िै ; या

(iii) जिजित या अजधसूजचत अजभलेखों और लेखाओं को

जिजित अिजध के जलए प्रजतधाररत करने में असफल रिता िै ;

या

(iv) अपने रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र में यथाअजभजलजखत

कारोबार के मूल स्ट्थान पर जिजित या अजधसूजचत अजभलेखों

को प्रजतधाररत करने या प्रस्ट्तलत करने में असफल रिता िै ; या

(v) धारा 58 की उपधारा (6) के खंड (क) के अधीन

िारी दकए गए जनिेि का अनलपालन करने में असफल रिता िै

या जिजित या अजधसूजचत अजभलेखों या लेखाओं को या उनकों

आयलि द्वारा या लेखाकार द्वारा या लेखाकार के पैनल द्वारा या

दकसी अन्य िृजत्तक या आयलि द्वारा इस बाबत नामजनर्ििष्ट

िृजत्तकों के पैनल द्वारा उन पर तामील दकसी सूचना में

जिजनर्ििष्ट तारीख को या पिले प्रस्ट्तलत करने में असफल रिता िै,

ऐसा व्यजि पच् चीस ििार रुपए या कर जनधािरण की

बीस प्रजतित की रकम, यदि कोई िो, िो भी उच् चतर िो, की

िाजस्ट्त का संिाय करने के जलए िायी िोगा ।

(4) यदि कोई व्यौिारी धारा 49 के उपबंधों की

अनलपालन करने में असफल रिता िै, तो व्यौिारी अपनी

व्यापारिति के एक प्रजतित के बराबर रकम या पचास ििार

रुपए, िो भी न्यूनतम िो, िाजस्ट्त के रूप में संिाय का िायी

िोगा ।

(5) कोई व्यजि, जिससे इस जिजनयम के अधीन अजभलेख

और लेखे तैयार करना अपेजक्षत िै, ऐसी रीजत में अजभलेख और

लेखे तैयार करता िै िो जमथ्या, भ्रामक या प्रिंचक िै, तो िि

व्यजि पचास ििार रुपए की रकम या कर की कमी की रकम,

यदि कोई िो, में से िो भी उच् चतर िो, िाजस्ट्त के रूप में संिाय

का िायी िोगा ।

(6) ििां दकसी व्यजि ने—

(क) कर बीिक या फलटकर बीिक, अपूणि या गलत

जिजिजष्टयों सजित िारी दकया िै ; या

(ख) कर बीिक या फलटकर बीिक िारी दकया िै, ककंतल

लेखा बजियों में सिी रूप से उनका गणना करने में असफल रिा

िै,

ऐसा व्यजि तीन ििार रुपए की रकम या कर की कमी का बीस

प्रजतित, यदि कोई िो, में से िो भी उच् चतर िो, िाजस्ट्त के रूप

में संिाय का िायी िोगा ।

(7) कोई व्यजि, िो इस जिजनयम के अधीन कर बीिक

िारी करने के जलए प्राजधकृत निीं िै, जिक्रय के जलए कर बीिक

िारी करता िै, ऐसा व्यजि पचास ििार रुपए की रकम या कर

की कमी, यदि कोई िो, में से िो भी उच् चतर िो, िाजस्ट्त के रूप

में संिाय का िायी िोगा ।

(8) कोई व्यजि, िो धारा 59 की उपधारा (2) या

उपधारा (3) के अधीन अपेक्षाओं की अनलपालन में असफल

रिता िै, पच् चीस ििार रुपए की रकम का िाजस्ट्त के रूप में

संिाय का िायी िोगा ।

(9) ििां माल का ििन, पररिािक द्वारा जबना

िस्ट्तािेिों या जबना कागि तथा िास्ट्तजिक िस्ट्तािेिों के या

धारा 61 की उपधारा (2) में जिजनर्ििष्ट िस्ट्तािेिों में उजचत रूप

से जिम्मेिारी जलए जबना दकया िा रिा िै, तो पररिािक ऐसे

माल के मूल्य के जलए एक रुपए में बीस पैसे के बराबर िाजस्ट्त

का िायी िोगा ।

(10) कोई व्यजि िो—

(क) आयलि को कथन करता िै, िो दक गलत, या

ताजविक जिजिजष्ट में प्रिंचक िै ; या

(ख) आयलि को दिए गए कथन में से दकसी जिषय या

चीि का लोप करता िै, जिसके जबना कथन गलत, भ्रामक या

ताजविक जिजिष्ट में प्रिंचक िै,

ऐसा व्यजि पच् चीस ििार रुपए या कर की कमी की

रकम, िो भी उच् चतर िो, िाजस्ट्त के रूप में संिाय का िायी

िोगा ।

95. कजतपय व्यजियों पर िाजस्ट्तयां—(1) कोई

अजनयजमत व्यापारी, जिसका इस जिजनयम के अधीन

रजिस्ट्रीकृत िोना अपेजक्षत िै, अनलबद्ध अिजध के भीतर

रजिस्ट्रीकरण के जलए आिेिन करने में असफल रिता िै, तो

अजनयजमत व्यापारी िेय तारीख के अिसान के तलरंत अगले दिन

से प्रजतदिन तीन ििार रुपए की िाजस्ट्त के संिाय का िायी तब

40

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

तक िोगा, िब तक दक िि व्यजि इस जिजनयम के अधीन

रजिस्ट्रीकरण के जलए आिेिन निीं कर िेता िै :

परंतल उपधारा के अधीन िाजस्ट्त की संिेय रकम पचास

ििार रुपए से अनजधक िोगी ।

(2) यदि इस जिजनयम के अधीन अजनयजमत व्यापारी से

जििरणी प्रस्ट्तलत करना अपेजक्षत िै—

(क) िेय तारीख तक कोई जििरणी प्रस्ट्तलत करने में

असफल रिता िै ; या

(ख) जििरणी के साथ कोई अन्य िस्ट्तािेि प्रस्ट्तलत करने

मे, असफल रिता िै, िो जििरण के साथ प्रस्ट्तलत करना अपेजक्षत

िै,

ऐसा व्यजि, िेय तारीख के तलरंत अगले दिन से प्रजतदिन

पांच सौ रुपए की रकम की िाजस्ट्त के संिाय का िायी तब तक

िोगा, िब तक दक असफलता का सलधार निीं दकया िाता :

परन्तल इस उपधारा के अधीन िाजस्ट्त की संिेय रकम

पंद्रि ििार रुपए से अनजधक िोगी ।

(3) कोई व्यजि िो प्रधान, अजभकताि या दकसी अन्य

िैजसयत में लक्षद्वीप में दकसी जिक्रय-सि-प्रिििनी का आयोिन

करता िै, और—

(क) दकसी भागीिार द्वारा जिक्रय-सि-प्रिििनी से पूिि या

के िौरान या पश् चात् लाए गए माल या रखे गए या जिक्रय दकए

गए स्ट्टॉक के संबंध में कोई सूचना प्रस्ट्तलत करने में असफल

रिता िै ; या

(ख) यि सलजनजश्चत करने में असफल रिता िै दक जिक्रय-

सि-प्रिििनी में सभी ऐसे भागीिारों ने इस जिजनयम के अधीन

रजिस्ट्रीकरण अजभप्राप्त दकया िै तथा िेय कर संित्त दकया िै ;

या

(ग) भागीिारों के कारबार पररसर या माल या लेखों या

अजभलेखों की िांच करने की अनलज्ञा िेने में असफल रिता ; या

(घ) जिक्रय-सि-प्रिििनी के संबंध में आयोिकों के लेखों

तथा अजभलेखों की िांच की अनलज्ञा िेने में असफल रिता िै,

तो ऐसा व्यजि पच् चीस ििार रुपए के बराबर या ऐसे माल पर

संिेय कर की रकम के बराबर की रकम, िो भी उच् चतर िो, की

िाजस्ट्त संिाय करने का िायी िोगा, यदि ऐसा माल लक्षद्वीप में

बेचा गया था ।

96. साधारण िाजस्ट्त—कोई व्यजि, िो इस जिजनयम के

दकन्िीं उपबंधों या ति् धीन बनाए गए जनयमों का उल्लंघन करता

िै, जिसके जलए अजधजनयम के अधीन पृथक् रूप से िाजस्ट्त

उपबंजधत निीं िै, पांच ििार रुपए की िाजस्ट्त के रूप में संिाय

करने का िायी िोगा ।

97. स्ट्ितः िमन तथा िाजस्ट्तयों को बढाना—(1) दकन्िीं

कायिाजियों के पररणामस्ट्िरूप, कर की रकम जिसके संबंध में

िाजस्ट्त उद्गृिीत की गई थी, पूणितः घटा िी गई िै, उद्गृिीत

िाजस्ट्त रद्द कर िी िाएगी तथा यदि िाजस्ट्त संित्त की िा चलकी

िै, िि प्रजतिाय की िाएगी ।

(2) यदि—

(क) कोई व्यजि, धारा 94 की उपधारा (2) के अधीन

िाजस्ट्त संिाय का िायी िै ; और

(ख) आयलि द्वारा यि सूचना िेने पर दक व्यजि की कर

बाध्यताओं की संपरीक्षा की िानी िै से पूिि, व्यजि जिद्यमान

कर की कमी जलजखत में आयलि को स्ट्िेच्छया से प्रकट करता िै,

तो अन्यथा िेय िाजस्ट्त की रकम, िाजस्ट्त के अस्ट्सी प्रजतित

द्वारा कम कर िी िाएगी ।

(3) यदि—

(क) कोई व्यजि, धारा 94 की उपधारा (2) के अधीन

िाजस्ट्त संिाय का िायी िै ; और

(ख) आयलि द्वारा यि सूचना िेने पर दक व्यजि की कर

बाध्यताओं की संपरीक्षा की िानी िै से पूिि, व्यजि जिद्यमान

कर की कमी जलजखत में आयलि को स्ट्िेच्छया से प्रकट करता िै,

तो िेय िाजस्ट्त की रकम, िाजस्ट्त के पचास प्रजतित से कम कर

िी िाएगी ।

(4) यदि—

(क) कोई व्यजि धारा 94 की उपधारा (2) के अधीन

िाजस्ट्त के संिाय का िायी िै ;

(ख) कर की कमी उि्1भि हुई िै, क्योंदक व्यजि ने इस

जिजनयम को एक जिजिष्ट माध्यम में व्यजि को लागू करने के

रूप में माना िै; और

(ग) व्यजि द्वारा उस व्यििार को अंगीकार करने का

जिजनश् चय, व्यजि को आयलि द्वारा धारा 84 के अधीन दिए गए

अिधारण या धारा 85 के अधीन आयलि द्वारा िारी व्यिस्ट्था,

पर जनभिर रिते हुए दकया गया िै,

अन्यथा िेय िाजस्ट्त की रकम कम करके िून्य कर िी िाएगी ।

(5) ििां—

(क) िाजस्ट्त इस जिजनयम के अधीन जनधािररत की गई िै ;

(ख) आक्षेप के पश् चात् िाजस्ट्त पूणितः माफ निीं की गई

िै; और

(ग) व्यजि पश् चात्िती रूप से, दकसी अन्य अिसर पर

हुई समान या सारिान् समान असफलता के संबंध में और

िाजस्ट्त के जलए जनधािररत हुआ िै (जिसे इसमें इसके पि् चात्

इस धारा में “पश् चात्िती अपराध” किा गया िै),

इस जिजनयम के अधीन अन्यथा िेय िाजस्ट्त

जनम् नजलजखत द्वारा बढा िी िाएगी—

(i) पिले पश् चात्िती अपराध की ििा में, जिजनर्ििष्ट

िाजस्ट्त का पचास प्रजतित ; और

(ii) िूसरे तथा दकसी और पश् चात्िती अपराध की ििा में

जिजनर्ििष्ट िाजस्ट्त का सौ प्रजतित ।

(6) यदि—

(क) कोई व्यजि धारा 86 के अधीन िाजस्ट्त के संिाय का

िायी िै ;

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

41

(ख) व्यजि, धारा 60 के अधीन कायिाजियों के अनलक्रम

के िौरान जिद्यमान कर की कमी के बारे में जलजखत में आयलि

को स्ट्िेच्छया से प्रकट करता िै ; और

(ग) उि कायिाजियों के जनष्कषि के तीन कायि दििस के

भीतर ऐसी कर कमी का संिाय करता िै,

तो स्ट्िीकृत कर और संित कर के जलए अन्यथा िेय

िाजस्ट्त की रकम, अस्ट्सी प्रजतित से घटा िी िाएगी ।

98. जनधािरण से संबंध और अपराधी िाजस्ट्तयों पर

समाघात—(1) इस जिजनयम के अधीन जिजनर्ििष्ट िाजस्ट्तयां इस

बात के िोते हुए भी िेय िै दक इस जिजनयम के अधीन िेय कर

का कोई जनधािरण निीं दकया गया िै ।

(2) इस जिजनयम के अधीन अजधरोजपत कोई भी िाजस्ट्त,

इस अध्याय के अधीन दकसी अपराध के जलए दकसी अजभयोिन

पर प्रजतकूल प्रभाि निीं डालेगी ।

99. कजतपय कृत्यों के जलए कारािास तथा िलमािना—

(1) िो कोई—

(क) रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी निीं िै, उस समय िब िि

माल जिक्रय या क्रय करता िै, गलत रूप से प्रजतजनजधत्ि करता

िै दक िि एक रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी िै या था ;

(ख) िानबूझकर गलत लेखे रखता िै या धारा 48 के

उल्लंघन में उसके द्वारा खरीिे या बेचे गए माल का लेखा निीं

रखता िै ; या

(ग) दकसी व्यजि को कोई गलत बीिक, जबल, नकि

ज्ञापन, िाउचर या अन्य िस्ट्तािेि िारी करता िै, िो िि

िानता िै या कारणिि जिश्वास करता िै, दक गलत िै ;

िोषजसजद्ध पर, कठोर कारािास की अिजध िो छि मास

तक की िो सकती िै, और िलमािने से िो तीन ििार रुपए तक

िो सकेगा, से िंडनीय िोगा ।

(2) िो कोई िानबूझकर—

(क) गलत जििरणी प्रस्ट्तलत करता िै ;

(ख) आयलि के समक्ष जमथ्या जबल, कैि मेमों, िाउचर,

घोषणा, प्रमाणपत्र, कर बीिक या कर प्रजतिाय पर कटौती का

िािा करने िाले अन्य िस्ट्तािेि प्रस्ट्तलत करता िै ; या

(ग) जमथ्या लेखा, रजिस्ट्टर या िस्ट्तािेि प्रस्ट्तलत करता िै

या िानते हुए भी जमथ्या सूचना िेता िै, —

उसे—

(i) ऐसे मामले में ििां कर की रकम जिसका अपिंचन

दकया िा सकता था यदि, यथाजस्ट्थजत, कर प्रत्यय, लेखाओं,

रजिस्ट्टरों या िस्ट्तािेिों या जमथ्या सूचना पर कटौती का िािा

करने के जलए जमथ्या ररटनि जबल, कैि मेमों, िाउचर, घोषणा,

प्रमाणपत्र, कर बीिक या अन्य िस्ट्तािेि सत्य के रूप में

स्ट्िीकार दकए गए थे, पचास ििार रुपये से अजधक िै तो िि

िोषजसजद्ध पर ऐसी अिजध के जलए कठोर कारािास से िो छि

मास तक की िो सकेगी, िंजडत दकया िाएगा ; और

(ii) दकसी अन्य मामले में ऐसी अिजध के जलए कठोर

कारािास से िो छि मास तक की िो सकेगी, और िलमािना से

िो तीन ििार रुपए तक का िो सकेगा, िंजडत दकया िाएगा ।

(3) िो कोई इस जिजनयम के अधीन, िानबूझकर दकसी

भी तरीके से कर संिाय, िाजस्ट्त या ब्याि या इन सभी का

अपिंचन करता िै, उसे िोषजसजद्ध—

(क) ऐसे दकसी मामले में ििां एक िषि की अिजध के

िौरान पचास ििार रुपए से अजधक की रकम अंतििजलत िै,

ऐसी अिजध से, िो छि मास तक की िो सकेगी, कठोर

कारािास और िलमािना से, िो तीन ििार रुपए तक का िो

सकेगा, िंजडत दकया िाएगा ; और

(ख) दकसी अन्य मामले में ऐसी अिजध के कठोर

कारािास िो छि मास तक की िो सकेगी, और िलमािना से िो

तीन ििार रुपए तक का िो सकेगा, िंजडत दकया िाएगा ।

(4) िो कोई—

(क) धारा 18 की उपधारा (1) का िानबूझकर उल्लंघन

करते हुए, रजिस्ट्रीकृत हुए बगैर व्यौिारी के रूप में व्यिसाय

करता िै ;

(ख) धारा 21 के अधीन अपेजक्षत दकसी सूचना के प्रस्ट्तलत

करने में, बगैर दकसी पयािप्त कारण के असफल रिता िै ;

(ग) धारा 22 की उपधारा (7) में यथा उपबंजधत अपने

रजिस्ट्रीकरण के प्रमाणपत्र का अभ्यपिण करने में असफल रिता

िै ;

(घ) धारा 27 के अधीन यथा अपेजक्षत, तारीख द्वारा या

जिजित तरीके से कोई ररटनि िेने में जबना दकसी पयािप्त कारण के

असफल िोता िै ;

(ङ) धारा 40 के दकन् िीं उपबंधों का जबना दकसी

यलजियलि कारण के उल्लंघन करता िै ;

(च) धारा 50 के अधीन यथाअपेजक्षत कर बीिक िारी

करने में जबना दकसी पयािप्त कारण के असफल िोता िै ;

(छ) िब धारा 48 के अधीन जनिेि दिए िाते िैं, तो

जनिेिों के अनलसार दकसी लेखा या ररकाडि को रखने में, जबना

दकसी पयािप्त कारण के असफल िोता िै ;

(ि) धारा 58 या धारा 59 के अधीन उसके द्वारा की गई

अपेक्षाओं का पालन करने में, जबना दकसी पयािप्त कारण के

असफल िोता िै, या धारा 60 और धारा 61 के अधीन

जनरीक्षण या तलािी या अजभग्रिण करने िाले दकसी अजधकारी

को बाजधत करता िै ;

(झ) अध्याय 10 के अधीन दकसी अजधकारी को उसका

कायि करने में बाजधत करता िै या रोकता िै ;

(ञ) माल यान का प्रभारी माजलक िोते हुए धारा 61 में

सजम्मजलत अपेक्षाओं में से दकसी भी अपेक्षा का पालन करने में

असफल िोता िै, उपेक्षा करता िै या पालन करने से इनकार

करता िै ; या

42

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(ट) आयलि या दकसी अजधकारी को, इस जिजनयम के

अधीन प्रित्त दकसी अन्य िजि का प्रयोग करने में िस्ट्तक्षेप

करता िै या बाधा उत्पन् न करता िै, तो िोषजसजद्ध पर ऐसी

अिजध का कारािास िो छि मास तक का िो सकेगा और

िलमािना से िो पांच ििार रुपए तक का िो सकेगा, िंजडत दकया

िाएगा ;

(5) िो कोई, उपधारा (1) से उपधारा (3) में

जिजनर्ििष्ट दकसी कृत्य को करने के जलए सियोग करता िै या

अिप्रेररत करता िै तो उसे िोषजसजद्ध पर ऐसी अिजध का कठोर

कारािास से िो छि मास तक का िो सकेगा, और िलमािना से,

िो पांच ििार रुपए तक का िो सकेगा, िंजडत दकया िाएगा ।

(6) िो कोई, उपधारा (1) से उपधारा (5) में

जिजनर्ििष्ट दकसी कृत्य को करता िै और उन धाराओं के दकसी

उपबंध के अधीन अपराध सतत् करता रिता िै, तो, िोषजसजद्ध

पर प्रजतदिन इस धारा के अधीन उपबंजधत िंड के अजतररि

अपराध के बने रिने की अिजध के िौरान िलमािना से िो

प्रजतदिन एक सौ रुपए से अनजधक निीं िोगा, िंडनीय िोगा ।

(7) इस धारा की उपधारा (1) से उपधारा (5) में दकसी

बात के िोते हुए भी, इन उपधाराओं के अधीन कोई कायिािी

निीं िोगी, यदि—

(क) एक िषि की अिजध के िौरान सजम्मजलत कलल राजि

िो सौ से कम िै ; या

(ख) व् यजि ने अजधजनयम के उपबंधों के अधीन स्ट्िेच्छा से

कर में कमी िोना प्रकरटत दकया िो ।

(8) ििां कोई व्यौिारी उपधारा (1), उपधारा (2) या

उपधारा (3) या उपधारा (4) के खंड (क), खंड (ख), खंड (ग),

खंड (घ), खंड (ङ), खंड (च) खंड (छ), खंड (ि) और खंड (झ)

या उपधारा (6) में जिजनर्ििष्ट दकसी अपराध में अजभयलि िै, तो,

उस व्यजि को धारा 95 के अधीन ऐसे व्यौिारी के कारबार का

प्रबंधक समझा िाएगा और ऐसे अपराध में तब तक िोषी भी

समझा िाएगा, िब तक िि यि साजबत न कर िे दक अपराध

उसकी िानकारी के जबना दकया गया था या उसने सभी सम्यक्

तत्परता से उसे रोकने का प्रयास दकया था ।

100. कम्पनी, आदि द्वारा दकए गए अपराध—(1) इन

जिजनयमों या जनयमों के अधीन िब दकसी कम्पनी द्वारा कोई

अपराध दकया िाता िै तब कम्पनी और कम्पनी के कारबार के

संचालन के जलए कम्पनी का प्रभारी िै और कम्पनी के प्रजत

उत्तरिायी प्रत्येक व्यजि को अपराध का िोषी समझा िाएगा

और उसके जिरुद्ध कायिािी की िाएगी और तद्नलसार िंजडत

दकया िाएगा :

परन्तल इस उपधारा में अंतर्ििष्ट दकसी बात के िोते हुए

भी ऐसे व्यजि को इन जिजनयमों में उपबंजधत िंड से िंजडत निीं

दकया िाएगा यदि िि यि साजबत कर िे दक अपराध उसकी

िानकारी के जबना दकया गया िै और उसने सभी सम्यक्

तत्परता से ऐसे अपराध को रोकने का प्रयास दकया िै ।

(2) उपधारा (1) में अंतर्ििष्ट दकसी बात के िोते हुए भी,

इन जिजनयमों के अधीन दकसी कम्पनी द्वारा कोई अपराध दकया

िाता िै और यि साजबत िो िाता िै दक जनिेिक, प्रबंधक,

सजचि या कम्पनी के अन्य अजधकारी की अपेक्षा के कारण या

सिमजत से या मौनानलकूलता से अपराध हुआ िै तो ऐसे

जनिेिक, प्रबंधक, सजचि या अन्य अजधकाररयों को उस अपराध

का िोषी समझा िाएगा और उनके जिरुद्ध कायिािी की

िाएगी और तद्नलसार िंजडत दकया िाएगा ।

101. अपराध का संज्ञान—(1) इन जिजनयम और इनके

अधीन बनाए गए जनयमों के अधीन कोई भी न्यायालय आयलि

की पूिि मंिूरी के जबना ऐसे अपराध का संज्ञान निीं लेगा और

प्रथम िगि न्याजयक मजिस्ट्रेट से जनम् नतर कोई न्यायालय ऐसे

अपराध पर जिचारण निीं करेगा।

(2) िंड प्रदक्रया संजिता, 1973 (1974 का 2) में

अतर्ििष्ट दकसी बात के िोते हुए भी इन जिजनयमों या इनके

अधीन बनाए गए जनयमों के अधीन सभी अपराध संज्ञेय और

िमानतीय िैं।

102. अपराधों का अन्िेषण—(1) आयलि, जिजित की

गई ऐसी ितों के अध्यधीन, साधारणतया या दकसी जिजिष्ट

मामले या मामलों के िगि के संबंध में दकसी अजधकारी या उनके

अधीनस्ट्थ दकसी व्यजि को इन जिजनयमों के अधीन िंडनीय

सभी या दकन्िीं अपराधों के अन्िेषण के जलए प्राजधकृत करेगा ।

(2) प्रत्येक अजधकारी या व्यजि जिसे प्राजधकृत दकया

गया िै, अन्िेषण के संचालन में, उन्िीं िजियों का प्रयोग करेंगे

िो िंड प्रदक्रया संजिता, 1973 (1974 का 2) द्वारा संज्ञेय

अपराध के अन्िेषण के जलए पलजलस थाना के प्रभारी अजधकारी

को प्रित्त िै ।

103. अपराधों का प्रिमन—(1) आयलि, धारा 89 की

उपधारा (4) के अधीन या इन जिजनयमों के अधीन बनाए गए

दकन्िीं जनयमों के अधीन िंडनीय दकसी अपराध के जलए

कायिािी संजस्ट्थत करने से पिले, दकसी ऐसे व्यजि से, जिस

पर अपराध के प्रिमन द्वारा ऐसे अपराध का आरोप िो, कोई

रकम, िो पचास ििार रुपए से अजधक न िो या उस कर की

रकम का, िो उनके द्वारा बचाया िा सकता था, तीन गलना

रकम, िो भी अजधक िो, प्रजतगृिीत कर सकेगा ।

(2) आयलि द्वारा उपधारा (1) के अधीन अिधाररत ऐसी

रकम का संिाय करने पर, उस अपराध के संबंध में कोई

अजतररि कायिािी निीं की िाएगी।

104. कजतपय मामलों में िंड प्रदक्रया संजिता, 1973 का

अध् याय 36 का लागू निीं िोना— िंड प्रदक्रया संजिता, 1973

के अध्याय 36 में अंतर्ििष्ट कोई बात—

(क) इन जिजनयमों के अधीन िंडनीय दकसी अपराध ;

या

(ख) उस संजिता के उपबंधों के अधीन कोई अन्य अपराध

जिस पर ऐसे अपराध के साथ जिचारण दकया िा सकेगा,

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

43

पर लागू निीं िोगा और खंड (क) या खंड (ख) में जनर्ििष्ट प्रत्येक

अपराध में इन जिजनयमों के अधीन अजधकाररता रखने िाले

न्यायालय उसी प्रकार संज्ञान ले सकेंगे, िैसे उस अध्याय के

उपबंधों को अजधजनयजमत निीं दकया गया िो ।

अध्याय 14

प्रकीणि

105. कारबार के प्रबंधक का नाम, स्ट्थायी खाता संखया

और आयात-जनयाित कोड की घोषणा— (1) प्रत्येक व्यौिारी िो

व्यजियों का संघटन या क्लब या सोसाइटी या फमि या कम्पनी

या कोई व्यजि या जनकाय िोते हुए, एक संरक्षक या न्यासी के

रूप में या अन्यथा दकसी अन्य व्यजि की ओर से कारबार में

लगा हुआ िै और िो इन जिजनयमों के अधीन कर संित्त करने

का िायी िै, उन व्यजियों के नाम िो ऐसे व्यजि के कारबार के

प्रयोिन के जलए प्रबंधक समझा/समझे िाएगा/िाएंगे, जिजित

अिजध में, जिजित रीजत से जििरण की घोषणा करेगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन की गई घोषणा समय-समय

पर यथा अपेजक्षत पलनरीजक्षत की िा सकेगी ।

(3) प्रत्येक व्यौिारी को जिजनयमों के अधीन

राजिस्ट्रीकरण के जलए आिेिन करते समय आय-कर

अजधजनयम, 1961 (1961 का 43) के अधीन प्राप्त स्ट्थायी लेखा

संखया िर्णित करेगा :

परन्तल यि दक इस अजधजनयम के अधीन पिले से

रजिस्ट्रीकृत व्यौिारी, आय-कर अजधजनयम, 1961 के अधीन

प्राप्त अपनी स्ट्थायी लेखा संखया की घोषणा, इस संिोधन की

अजधसूचना िारी िोने की तारीख से िो मास की अिजध के

भीतर जिजित प्ररूप में करेगा ।

(4) इन जिजनयमों के अधीन कर संित्त का िायी और

जििेिी व्यापार (जिकास और जिजनयमन) अजधजनयम, 1992

(1992 का 22) के उपबंधों के अधीन आयातकताि जनयाितकताि

कोड रखने िाले प्रत्येक व्यौिारी, इन जिजनयमों के अधीन

रजिस्ट्रीकरण के जलए आिेिन करते समय आयातकताि-

जनयाितकताि कोड उजल्लजखत करेगा :

परन्तल यि दक इस अजधजनयम के अधीन पिले से

रजिस्ट्रीकृत और जििेिी व्यापार (जिकास और जिजनयमन)

अजधजनयम,1992 (1992 का 22) के उपबंधों के अधीन

आयातकताि-जनयाितकताि कोड रखने िाले प्रत्येक व्यौिारी, इस

संिोधन की अजधसूचना िारी िोने की तारीख से िो मास की

अिजध के भीतर, जिजित प्ररूप में ब्यौरे की सूचना िेगा :

परन्तल यि और दक इस अजधजनयम के अधीन रजिस्ट्रीकृत

प्रत्येक व्यौिारी, िो जििेि व्यापार (जिकास और जिजनयमन)

अजधजनयम, 1992 (1992 क 22) के उपबंधों के अधीन एक

आयातकताि जनयाितकताि कोड प्राप्त करता िै, तत्पश् चात् ऐसा

कोड प्राप्त करने की तारीख के पंद्रि दिन की अिजध के भीतर,

जिजित प्ररूप में कोड के ब् यौरे प्रिान करेगा ।

(5) कोई भी व्यजि िो उपधारा (1) और उपधारा (2)

में यथाउपबंजधत कथन करने में या पलनरीजक्षत कथन करने में,

िैसे भी मामला िो, असफल रिता िै या उपधारा (3) में

यथाउपबंजधत आय-कर अजधजनयम, 1961 (1961 का 43) के

अधीन अजभप्राप्त दकये गए स्ट्थायी खाता संखया के ब् यौरे प्रिान

करने में असफल रिता िै या उपधारा (4) में यथाउपबंजधत

जििेि व्यापार (जिकास और जिजनयमन) अजधजनयम,

1992(1992 का 22) के उपबंधों के अधीन आयातकताि

जनयाितकताि कोड प्रिान करने में असफल रिता िै तो िि

व्यजतक्रम के प्रजत सप्ताि के जलए एक ििार रुपये के बराबर की

रकम, िो अजधकतम पचास ििार रुपये तक की िो सकेगी,

िाजस्ट्त के जलए िायी िोगा ।

106. कलटलंब के जिभाजित िोने पर या फमि के जिघरटत

िो िाने पर सूचना की तामील—(1) ििां एक जिन्िू अजिभि

कलटलंब का जिभािन दकया गया िै, ििां इस जिजनयम के अधीन

नोरटस उस व्यजि पर तामील दकया िाएगा िो जिन्िू अजिभि

कलटलंब का अंजतम कताि था, या यदि ऐसा व्यजि निीं जमल सकता

िै, तो उन सभी ियस्ट्कों पर, िो जिभािन से ठीक पिले जिन्िू

अजिभि कलटलंब के सिस्ट्य थे ।

(2) ििां एक फमि या व्यजियों का संगम जिघरटत िो

िाता िै, ििां इस जिजनयम के अधीन नोरटस दकसी ऐसे व्यजि

को दिया िा सकेगा िो जिघटन से ठीक पिले फमि का भागीिार

(िो अप्राप्तिय न िो) या संगम का सिस्ट्य, िैसा भी मामला िो,

रिा िो ।

107. बंि दकए गए कारबार के मामले में सूचना की

तामील— ििां बंि दकए गए कारबार के संबंध में कोई

जनधािरण दकया िाना िै, ििां इस जिजनयम के अधीन नोरटस,

फमि या व्यजियों के संगम या दकसी व्यजि के मामले में, िो बंि

दकए िाने के समय ऐसे फमि या संगम का सिस्ट्य रिा िो या

कंपनी के मामले में उसके प्रधान अजधकारी को दिया िाएगा ।

108. जििरजणयों, आदि का गोपनीय िोना—(1) इस

जिजनयम के अनलसार दिए गए दकसी कथन, जििरजणयों या

लेखाओं में या पेि दकये गए िस्ट्तािेिों में या इस जिजनयम के

अधीन िंड न्यायालय के समक्ष दकसी कायिािी से जभि दकसी

कायिािी के िौरान दिए गए साक्ष्य के दकसी अजभलेख में

जनजित सभी जिजिजष्टयां, उपधारा (3) में यथा उपबंजधत के

जसिाय गोपनीय मानी िाएगी और भारतीय साक्ष्य

अजधजनयम, 1872 (1872 का 1) में अंतर्ििष्ट दकसी बात के

िोते हुए भी, कोई भी न्यायालय, िैसा ऊपर किा गया िै उसके

जसिाय, सरकार के दकसी सेिक से ऐसे दकसी िस्ट्तािेि,

जििरजणयां, लेखा या अजभलेख या उसके दकसी भाग को अपने

समक्ष प्रस्ट्तलत करने या अपने समक्ष उसके संबंध में साक्ष्य िेने की

अपेक्षा करने का िकिार निीं िोगा ।

(2) यदि सरकार का कोई सेिक, उपधारा (3) में यथा

उपबंजधत के जसिाय, उपधारा (1) में जनर्ििष्ट दकसी भी जिजिजष्ट

को प्रकट करता िै, तो िि कारािास से िंडनीय िोगा जिसकी

अिजध छि मास तक की िो सकेगी, और िलमािने से भी िंडनीय

िोगा ।

(3) इस धारा में अंतर्ििष्ट कोई बात,—

44

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

(क) इस जिजनयम या भारतीय िंड संजिता (1860 का

45) या तत्समय प्रिृत्त दकसी अन्य अजधजनयजमजत के अधीन

अन्िेषण या अजभयोिन के प्रयोिनों के जलए उपधारा (1) में

जनर्ििष्ट दकसी जिजिजष्ट के;

(ख) केंद्रीय सरकार या दकसी राज्य सरकार के दकसी

अजधकारी को ऐसे तथ्यों के, िो ऐसे तथ्यों के सत्यापन के जलए

आिश्यक िो या उस सरकार को उसके द्वारा लगाए गए दकसी

भी कर को उि् ग्रिण करने या िसूल करने में सक्षम बनाने के

प्रयोिनों के जलए आिश्यक िो;

(ग) ऐसी दकसी जिजिजष्ट के, ििां ऐसा प्रकटीकरण,

दकसी नोरटस की तामील या दकसी मांग की िसूली के जलए

दकसी भी प्रदक्रया के इस जिजनयमन के अधीन जिजधपूणि

जनयोिन द्वारा हुआ िो;

(घ) दकसी िाि या कायिािी में जसजिल न्यायालय में

ऐसी दकसी जिजिजष्ट के, जिसमें सरकार या कोई मूल्य िर्धित

कर प्राजधकारी एक पक्षकार िै और िो मूल्य िर्धित कर

प्राजधकारी को ति् धीन दकसी िजि के प्रयोग को प्राजधकृत करने

िाले इस जिजनयमन के अधीन या तत्समय प्रिृत्त दकसी अन्य

जिजध के अधीन दकसी कायिािी से उद्भूत दकसी मामले से

संबंजधत िै;

(ङ) दकसी लोक सेिक द्वारा ऐसी दकसी जिजिजष्ट के, ििााँ

प्रकटीकरण उसके द्वारा एक अपयािप्त स्ट्टांप िस्ट्तािेज़ को

पररबद्ध करने के जलए भारतीय स्ट्टाम्प अजधजनयम, 1899

(1899 का 2) के अधीन उसकी िजियों के जिजधपूणि प्रयोग

द्वारा हुआ िै;

(च) भारतीय ररज़िि बैंक को ऐसी दकसी जिजिजष्ट के, िो

उस बैंक द्वारा उसे अंतरािष्ट्रीय जिजनधान और भलगतान संतलन

की जित्तीय सांजखयकी को संकजलत करने में सक्षम बनाने के

जलए आिश्यक िै;

(छ) कर प्राजप्तयों या प्रजतिाय की लेखापरीक्षा के प्रयोिन

के जलए भारत के जनयंत्रक-मिालेखापरीक्षक द्वारा जनयलि दकसी

अजधकारी को ऐसी दकसी जिजिजष्ट के;

(ि) दकसी जिजध व्यिसायी या चाटिडि एकाउंटेंट के जिरुद्ध

आय-कर कायिािी के संबंध में अिचार के आरोप में दकसी भी

िांच से सलसंगत ऐसी दकसी जिजिजष्ट के, उस िृजत्त, जिससे िि

संबंजधत िै, के सिस्ट्यों के जिरुद्ध अनलिासनात्मक कारिाई करने

के जलए सिि प्राजधकारी को;

(झ) केंद्रीय सरकार या दकसी राज्य सरकार के

अजधकाररयों को ऐसे अन्य प्रयोिनों के जलए ऐसी जिजिजष्ट के,

िैसा सरकार, साधारण या जििेष आिेि द्वारा, जनिेि िे; या

(ञ) व्यौिाररयों के दकसी िगि या संव्यििारों के दकसी

िगि से संबंजधत दकसी ऐसी िानकारी के, यदि आयलि की राय

में ऐसी िानकारी प्रकाजित करना लोकजित में िांछनीय िै,

प्रकटीकरण पर लागू निीं िोगी ।

109. जिक्रय और क्रय पर लागू िोना—(1) धारा 3

द्वारा अजधरोजपत दकया गया कर—

(क) इस जिजनयम के प्रारंभ िोने की तारीख को और

उसके पश् चात् दकए गए प्रत्येक जिक्रय, जिसमें माल के दकस्ट्त

जिक्रय और अिक्रय सजम्मजलत िै;

(ख) माल के उपयोग के अजधकार के अंतरण के रूप में

प्रत्येक जिक्रय, उस जिस्ट्तार तक ििााँ माल के उपयोग के

अजधकार का प्रयोग इस जिजनयम के प्रारंभ िोने की तारीख के

पश् चात् दकया गया िै;

पर लागू िोता िै ।

(2) धारा 9 के अधीन उत्पि िोने िाले प्रजतिेय—

(क) इस जिजनयम के प्रारंभ िोने की तारीख को और

उसके पश् चात् दकए गए क्रय, जिसमें माल के दकस्ट्त जिक्रय और

अिक्रय के अधीन क्रय सजम्मजलत िै; और

(ख) माल के उपयोग के अजधकार के अंतरण के रूप में

िोने िाले क्रय, उस जिस्ट्तार तक, ििां माल के उपयोग के

अजधकार का प्रयोग इस जिजनयम के प्रारंभ िोने की तारीख के

पश् चात् दकया गया िै; और

(ग) इस जिजनयम के प्रारंभ की तारीख को या उसके बाि

िाले जिक्रय या क्रय के संबंध में, ििां इस जिजनयम के प्रारंभ की

तारीख से पिले दकसी रकम का संिाय दकया िाता िै या उसको

प्राप्त दकया िाता िै, और संिाय की गई और प्राप्त की गई रकम

के आधार पर, व्यजि अपने आितिन या क्रय के आितिन की

गणना करता िै, ििााँ ऐसी रकम को उस व्यजि के आितिन या

क्रय के आितिन का, उस कर अिजध में जिसमें जिक्रय िोता िै,

भाग समझा िाएगा,

के जलए अनलज्ञात िोंगे ।

110. लोकजित में व्यौिारी और अन्य व्यजियों से

संबंजधत िानकारी का प्रकाजित और प्रकट दकया िाना—(1)

इस जिजनयम में दकसी बात के िोते हुए भी, यदि सरकार की

यि राय िै दक लोकजित में यि आिश्यक या समीचीन िै दक

दकसी भी व्यौिारी या अन्य व्यजियों के नाम और ऐसे

व्यौिाररयों तथा व्यजियों के संबंध में इस जिजनयम के अधीन

दकसी कायिािी से संबंजधत दकसी अन्य जिजिजष्ट को प्रकाजित

दकया िाए या प्रकट दकया िाए, तो िि ऐसे नामों और

जिजिजष्टयों को, ऐसे रीजत में, िो िि उजचत समझे, प्रकाजित

कर सकेगी या प्रकट कर सकेगी या प्रकाजित करिा सकेगी या

प्रकट करिा सकेगी ।

(2) इस जिजनयम के अधीन दकसी कायिािी से संसि

दकसी अपराध के जलए उद्गृिीत दकसी कर या अजधरोजपत

िाजस्ट्त या उद्गृजित ब्याि या दकसी िोषजसजद्ध के संबंध में इस

धारा के अधीन कोई प्रकािन या प्रकटीकरण तब तक निीं

दकया िाएगा, िब तक दक समलजचत अपील प्राजधकारी के समक्ष

अपील प्रस्ट्तलत करने के समय का अिसान, अपील प्रस्ट्तलत दकये

जबना न िो गया िो या यदि अपील प्रस्ट्तलत की गयी िै तो उसका

जनपटारा कर दिया गया िै।

111. आंकड़ों को एकजत्रत करने की िजि—(1) यदि

आयलि को यि प्रतीत िोता िै दक बेितर प्रिासन के प्रयोिनों

के जलए ऐसा करना आिश्यक िै, तो िि रािपत्र में अजधसूचना

द्वारा, जनिेि िे सकेगा दक इस जिजनयम से संसि, उसके द्वारा

[भाग II—अनलभाग 3क]

भारत का रािपत्र : असाधारण

45

या उसके संबंध में दकसी मामले से संबंजधत आंकड़े एकजत्रत

दकए िाएं।

(2) ऐसा जनिेि दिए िाने पर, आयलि या इस संबंध में

उसके द्वारा प्राजधकृत कोई व्यजि या व्यजियों द्वारा, सभी

व्यौिाररयों या व्यौिाररयों के दकसी िगि या व्यजियों को दकसी

मामले से संबंजधत ऐसी िानकारी या कथन प्रस्ट्तलत करने के

जलए किा िा सकेगा जिसके संबंध में आंकड़े एकजत्रत दकए िाने

िैं और ऐसे प्ररूप, जिसमें ऐसी िानकारी या जििरजणयां उन

व्यजियों या उन प्राजधकाररयों को िी िानी िै और ऐसे,

अंतराल जिसमें ऐसी िानकारी या जििरजणयां िी िानी

चाजिए, ऐसे िोंगे िैसे जिजित दकया िाए :

परन्तल यि दक िानकारी को रािपत्र में अजधसूचना द्वारा,

समाचार पत्रों में सूचना द्वारा या ऐसी अन्य रीजत से मााँगा िा

सकेगा, िैसी दक आयलि या उि व्यजि की राय में, व्यौिाररयों

और अन्य व्यजियों के ध्यान में लाने के जलए सिोत्तम प्रकजल्पत

िो ।

(3) पूििगामी उपबंधों की व्यापकता पर प्रजतकूल प्रभाि

डाले जबना, सरकार जनयमों द्वारा यि उपबंध कर सकेगी दक

प्रत्येक व्यौिारी या व्यौिारी का कोई िगि, िैसा भी मामला िो,

स्ट्ितः जनधािरण के साथ ऐसे कथन प्रस्ट्तलत करेगा िैसा दक

जिजित दकया िाए और व्यौिाररयों के जिजभन् न िगों के जलए

जभन् न-जभन् न उपबंध दकए िा सकेंगे ।

(4) (क) सरकार, रािपत्र में अजधसूचना द्वारा यि

उपबंध कर सकेगी दक समय-समय पर संिोजधत सूचना

प्रौद्योजगकी अजधजनयम, 2000 (2000 का 21) में और इस

अजधजनयम के अधीन बनाए गए जनयमों में और दिए गए

जनिेिों में अंतर्ििष्ट उपबंध, जिनमें अंकीय जचह्नक, इलैक्राजनक

जनयमन, इलैक्राजनक अजभलेख का अजधकार, अजभस्ट्िीकृजत

और प्रेषण, सलरजक्षत इलैक्राजनक अजभलेख और सलरजक्षत अंकीय

जचह्नक तथा अंकीय जचह्नक प्रमाणपत्र से संबंजधत उपबंध

सजम्मजलत िै, िैसा दक उि अजधसूचना में जिजनर्ििष्ट दकया

िाए, ििां तक िो सके, यथासाध्य, इस जिजनयम के अधीन

प्रदक्रयाओं पर लागू िोंगे ।

(ख) ििां दकसी स्ट्िचाजलत आकड़े प्रक्रमण प्रणाली पर

एक सूचना या संसूचना तैयार की िाती िै और दकसी भी

व्यौिारी या व्यजि पर उजचत रूप से तामील की िाती िै, तो

उि सूचना या संसूचना को आयलि या उससे अधीनस्ट्थ दकसी

अन्य अजधकारी द्वारा व्यजिगत रूप से िस्ट्ताक्षररत करने की

आिश्यकता निीं िोगी और उि सूचना या संसूचना को केिल

इस आधार पर अजिजधमान्य निीं माना िाएगा दक यि आयलि

द्वारा व्यजिगत रूप से िस्ट्ताक्षररत निीं िै।

112. चेक पोस्ट्ट और बेररयर का स्ट्थाजपत दकया

िाना—इस जिजनयम के अधीन िेय कर और अन्य संिेय िोध्यों

के अपिंचन को रोकने के जलए, सरकार रािपत्र में अजधसूचना

द्वारा, लक्षद्वीप में दकसी भी स्ट्थान पर चेक पोस्ट्ट या बैररयर या

िोनों स्ट्थाजपत कर सकेगी ।

113. अनलसूची का संिोधन करने की िजि—यदि

सरकार की यि राय िै दक लोक जित में ऐसा करना समीचीन

िै, तो िि रािपत्र में अजधसूचना द्वारा, पिली अनलसूची, िूसरी

अनलसूची, तीसरी अनलसूची और चौथी अनलसूची में भजिष्यलक्षी

प्रभाि से कलछ िोड़कर या लोप करके या अन्यथा संिोधन कर

सकेगी और तब उि अनलसूजचयां तिनलसार संिोजधत दकया गया

समझा िाएगा:

परंतल यि दक ऐसा कोई संिोधन भूतलक्षी प्रभाि से निीं

दकया िाएगा यदि इससे दकसी व्यौिारी के जितों पर प्रजतकूल

प्रभाि पड़ता िो।

114. जनयम बनाने की िजि—(1) सरकार, रािपत्र में

अजधसूचना द्वारा और पूिि प्रकािन की िति के अधीन रिते हुए,

इस जिजनयमन के उपबंधों और प्रयोिनों को पूरा करने

के जलए जनयम बना सकेगी िो इस जिजनयम के उपबंधों से

असंगत न िो।

(2) इस अजधजनयम के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा

बनाया गया प्रत्येक जनयम, बनाए िाने के पश् चात् यथािीघ्र,

संसि् के प्रत्येक सिन के समक्ष, िब िि सत्र में िो, कलल तीस

दिन की अिजध के जलए रखा िाएगा । यि अिजध एक सत्र में

अथिा िो या अजधक आनलक्रजमक सत्रों में पूरी िो सकेगी । यदि

उस सत्र के या पूिोि आनलक्रजमक सत्रों के ठीक बाि के सत्र के

अिसान के पूिि िोनों सिन उस जनयम में कोई पररितिन करने

के जलए सिमत िो िाएं तो तत्पश् चात् िि ऐसे पररिर्तित रूप

में िी प्रभािी िोगा । यदि उि अिसान के पूिि िोनों सिन

सिमत िो िाएं दक िि जनयम निीं बनाया िाना चाजिए तो

तत्पश् चात् िि जनष्प्रभाि िो िाएगा । दकन्तल जनयम के ऐसे

पररिर्तित या जनष्प्रभाि िोने से उसके अधीन पिले की गई

दकसी बात की जिजधमान्यता पर प्रजतकूल प्रभाि निीं पड़ेगा ।

115. करठनाइयों को िूर करने की िजियां—(1) यदि

उपबंधों को प्रभािी करने में कोई करठनाई उत्पन् न िोती िै, तो

सरकार, रािपत्र में प्रकाजित साधारण या जििेष आिेि द्वारा,

करठनाई को िूर करने के जलए ऐसे उपबंध बना सकेगी िैसे दक

इसे आिश्यक या समीचीन प्रतीत िोता िो, िो इस जिजनयम के

उपबंधों से असंगत न िों:

परन्तल इस धारा के अधीन ऐसा कोई आिेि इस जिजनयम

के प्रारंभ िोने की तारीख से िो िषि की अिजध की समाजप्त के

पश् चात् निीं दकया िाएगा ।

(2) इस धारा के अधीन दकया गया प्रत्येक आिेि, बनाए

िाने के पश् चात् यथािीघ्र, संसि् के प्रत्येक सिन के समक्ष रखा

िाएगा।

46

THE GAZETTE OF INDIA : EXTRAORDINARY

[PART II—SEC. 3A]

पिली अनलसूची

[धारा 4 िेजखए]

कर लगाने योग्य माल की सूची

क्रम सं.

मालों का जििरण

कर की िर

(1)

(2)

(3)

1.

कच् चा पेरोजलयम

10 प्रजतित

2.

उच् च गजत डीिल

10 प्रजतित

3.

उच् च गजत डीिल (पोत)

10 प्रजतित

4.

मोटर जस्ट्पररट (सामान्यतः पेरोल के नाम से ज्ञात)

10 प्रजतित

5.

प्राकृजतक गैस

10 प्रजतित

6.

जिमानन टबािइन ईंधन

10 प्रजतित

7.

भारतीय जनर्मित जििेिी मद्य

10 प्रजतित

8.

बीयर

10 प्रजतित

िूसरी अनलसूची

[धारा 6 िेजखए]

छूट प्राप्त माल की सूची

क्रम सं.

मालों का जििरण

कर की िर

(1)

(2)

(3)

िून्य

तीसरी अनलसूची

[धारा 9(1)(ख) िेजखए]

गैर-प्रत्ययनीय माल

क्रम सं.

मालों का जििरण

कर की िर

(1)

(2)

(3)

िून्य

चौथी अनलसूची

[धारा, 41(1) िेजखए]

खरीिे गए माल पर संित्त कर के प्रजतिाय का िािा करने के िकिार जनकाय

क्रम सं.

संगठन का नाम

ितें

(1)

(2)

(3)

िून्य

————

अगस्ट् तलस केरकेट् टा,

अपर जिधायी परामिी

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Date: 2022.12.30 20:18:57 +05'30'