(१)

L. C. BILL No. XV OF 2025.

A BILL

FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA PREVENTION OF

BEGGING ACT.

वि¦धाानसभाा काा वि¦धेयक क्रमांंsक १५ सन् २०२५।

महाारााष्ट्र भि�क्षाावृत्तििƫ नि�वारण अधि�नि�यम मेंं अधि�कतर संंशोोधन करनेे संंबंंधि� वि¦धेयक।

क्योंकि� इसमेंं आगेे दर्शि§ित प्रयोोजनोंं केे लिि£ए, महाारााष्ट्र भििžक्षाावृृत्तििƫ नि�वाारण अधिि˜नि�यम

मेंं अधिि˜कतर

संशोधन करनाा इष्टकर है ; अत: भारत गणरााज्य केे छििŒहत्तरवें वर्षष मेंं, एतद् द्वााराा, नि�म्न अधिि˜नि�यम

अधिि˜नि�यमि�

त कि�याा जाता है :—

१.  यह अधिि˜नि�यम

महाारााष्ट्र भििžक्षाावृृत्तििƫ नि�वाारण (संशोधन) अधिि˜नि�यम

, २०२५ कहलााए ।

२.  महाारााष्ट्र भििžक्षाावृृत्तििƫ नि�वाारण अधिि˜नि�यम

(जि�सेे इसमेंं आगेे, “ मूल अधिि˜नि�यम

” कहाा गयाा है)

की, धाराा २ की, उप-धाराा (१) केे,—

सन् १९६०

का १०।

संक्षि�प्त नाम।

सन् १९६०

का १०।

सन् १९६० का

१० की धाराा २ मेंं

संशोधन।

भाग सात-४९–१

एचबीी २४४३–१

RNI No. MAHBIL /2009/31730

महाारााष्ट्रट शासन रााजपत्र

असाधाारण भााग सात

वर्षष ११, अंक २७]

मंंगळवार, डिि’सेंबर ९, २०२५/अग्रहाायण १८, शकेे १९४७

[पृष्ठेे 4, किं�ंमत : रुपये ४७.००

असाधाारण क्रमांंsक ४९

प्रााधि�कृृत प्रकााशन

अध्यादेेश, वि¦धेयके व अधि�नि�यम यांंsचाा हिं�ंदीी अनुवाद (देेवनागरी लिि£पी)

महाारााष्ट्र वि¦धाानमंंडळ सचि�वाालय

महाारााष्ट्र वि�धाानपरि�षषद मेंं दि�नांं�क ८ दि�संंबर, २०२५ ई.को. पुर:स्थाापि�त नि�म्न वि�धेेयक महाारााष्ट्र वि�धाानपरि�षषद नि�यम

११३ केे

अधीन प्रकाशिशि§त कि�याा जाता है :-

2

महाराष्ट्रõ शासन रा

असाधारण भाग सात, डिसेंबर ९, २०२५/अग्रहायण १८, शके १

(क) खण्ड (चार) मेंं, “बॉम्बे बालक अधिि˜नि�यम

, १९४८” शब्दों और अंकों केे स्थाान मेंं,

“कि�शोोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिि˜नि�यम

, २०१५” शब्द और अंक रखेे जायेंगेे ;

(ख) खण्ड (चार) केे पश्चात्, नि�म्न खण्ड नि�वि�ष्ट कि�याा जायेगा, अथाा�त् : -

“(चार-क) “ बालक कल्याण समि�ति�” का तात्पर्यय, कि�शोोर न्याय (बालकों की देखरेख

और संरक्षण) अधिि˜नि�यम

, २०१५ की धाराा २७ केे अधीन गठिि‘त बालक कल्याण समि�ति�

से है।”;

(ग) खण्ड (छ) अपमार्जि�ित कि�याा जाएगा।

३.  मूल अधिि˜नि�यम

की धाराा ३ मेंं, “ कि�शोोर न्यायालय” शब्द अपमार्जि�ित कि�ए जायेंगेे ।

४. 

मूूल अधिि˜नि�यम

की धाराा ४ की, उप-धाराा (३) मेंं “दण्ड प्रक्रििĸया संहि�ताा १८९८ की

धाराा ६१” शब्दों और अंकों केे स्थाान मेंं, “भारतीीय नागरि�क सुरक्षाा संहि�ताा, २०२३ की धाराा ५८” शब्द

और अंक रखेे जायेंगेे।

५.  मूूल अधिि˜नि�यम

की धाराा ५ की, उप-धाराा (९) अपमार्जि�ित की जाएगी।

६.  मूूल अधिि˜नि�यम

की धाराा की, ८ की, उप-धाराा (४) मेंं, “दण्ड प्रक्रििĸया संहि�ताा, १८९८ की

धाराा ४८८” शब्दों और अंकों केे स्थाान मेंं, “भारतीीय नागरि�क सुरक्षाा संहि�ताा, २०२३ की धाराा १४४” शब्द

और अंक रखेे जायेंगेे।

७.  मूूल अधिि˜नि�यम

की धाराा ९ की,—

(१) उप-धाराा (२) मेंं,—

(क) “कि�शोोर न्यायालय को” शब्दों से प्रारम्भ होनेवाले तथाा “उस धाराा केे ” शब्दों

से समाप्त होनेवाले भाग केे स्थाान मेंं, नि�म्न भाग रखाा जाएगा, अथाा�त् :—

“बालक कल्याण समि�ति� को, जो कि�शोोर न्याय (बालकों की देखरेख और

संरक्षण) अधिि˜नि�यम

, २०१५ केे उपबंधों केे अनुसार बच्चों से व्यवहाार करतीी है।”

(ख) परंतुक मेंं, “संक्रामक कुष्ठरोोगी या” शब्द अपमार्जि�ित कि�ए जायेंगेे ;

(२) उप-धाराा (३) मेंं, “दण्ड प्रक्रििĸया संहि�ताा, १८९८ की धाराा ६१” शब्दों और अंकों केे

स्थाान मेंं, “भारतीीय नागरि�क सुरक्षाा संहि�ताा, २०२३ की धाराा ५८” शब्द और अंक रखेे जायेंगेे ।

८.  मूूल अधिि˜नि�यम

की धाराा २६ की,—

(क) पार्श्व�व टि�प्पणी मेंं “कृष्ठरोोगी और” शब्द अपमार्जि�ित कि�ए जायेंगेे;

(ख) उप-धाराा (१) मेंं, “या कृष्ठरोोगी शब्द, दोनोंं स्थाानोंं पर जहाँँr कहीं वे आए हों ” “ याा कुष्ठरोोगी

आश्रयस्थाान” शब्द अपमार्जि�ित कि�ए जायेंगेे ;

(ग) उप-धाराा (२) मेंं “या कृष्ठरोोग ठीक हो गयाा है” शब्द अपमार्जि�ित कि�ए जायेंगेे;

(घ) उप-धाराा (३) केे स्थाान मेंं, नि�म्न उप-धाराा रखीी जायेगी, अथाा�त् :—

“मानसि�क

स्वास्थ्य देखभाल अधिि˜नि�यम

, २०१७ केे उपबंध, उप-धाराा (१) केे अधीन मनोोरुग्ण

अस्पताल मेंं भर्ती प्रत्येक भििžखारी को जि�स अवधिि˜ केे लिि£ए वह भर्ती कि�याा जाना आदेशिशि§त कि�याा गयाा थाा

वह अवधिि˜ अवसि�त होने केे पश्चात्, लागू होगी और वह समयाावधिि˜, जि�सकेे दौराान भििžखारी उस उप-धाराा

सन् १९४८ का

बम्बई ७१।

सन् २०१६

का २।

सन् १९६० का

१० की धाराा ३ मेंं

संशोधन ।

सन् १९६० का

१० की धाराा ४ मेंं

संशोधन ।

सन् १८९८

का ५।

सन् २०२३

का ४६।

सन् १९६० का

१० की धाराा ८ मेंं

संशोधन ।

सन् १८९८

का ५।

सन् २०२३

का ४६।

सन् १९६० का

१० की धाराा ९ मेंं

संशोधन ।

सन् २०१६

का २।

सन् १८९८

का ५।

सन् १९६० का

१० की धाराा २६ मेंं

संशोधन ।

सन् २०१७

का १०।

सन् १९६० का

१० की धाराा ५ मेंं

संशोधन ।

सन् २०१६

का २।

सन् २०२३

का ४६।

महाराष्ट्रõ शासन रा

असाधारण भाग सात, डिसेंबर ९, २०२५/अग्रहायण १८, शके १

3

केे अधीन मनोोरुग्ण अस्पताल मेंं भर्ती है, वह अवधिि˜ जि�सकेे लिि£ए वह भर्ती कि�ए जाने केे लिि£ए न्यायालय

द्वााराा आदेशिशि§त कि�याा जा सकेेगा, केे भाग केे रुप मेंं गि�नाा जाएगा :

परंतु, जहाँँr वि�कृृत चि�त्त केे कारण भििžखारी को तत्काल हटााया जाना आवश्यक है, ऐसी संस्थाा,

जि�समेंं भििžखारी को रखाा गयाा है, जब तक एसे मामलेे मेंं ऐसे रााज्य सरकाार का आदेश प्राप्त न हो जाए,

तब तक मनोोरुग्ण अस्पताल को तत्काल भेजने केे लिि£ए उक्त अधिि˜नि�यम

केे अधीन अधिि˜कारि�ताा होनेवाले

न्यायालय को आवेदन करनाा संभव होगा।

९.  मूूल अधिि˜नि�यम

की धाराा ३० मेंं की,—

(क) उप-धाराा (२) मेंं, “पशुओं केे प्रति� क्रुरताा की नि�वाारण अधिि˜नि�यम

, १८९० की धाराा

६ख” शब्दों और अंकों केे स्थाान मेंं, “पशुओं केे प्रति� क्रुरताा की नि�वाारण अधिि˜नि�यम

, १९६० की

धाराा ३५” शब्द और अंक रखेे जायेंगेे।

(ख) उप-धाराा (३) मेंं “पशुओं केे प्रति� क्रुरताा की नि�वाारण अधिि˜नि�यम

, १८९० की धाराा

१५” शब्दों और अंकों केे स्थाान मेंं, “पशुओं केे प्रति� क्रुरताा की नि�वाारण अधिि˜नि�यम

, १९६० की

धाराा ३८” शब्द और अंक रखेे जायेंगेे।

(ग) उप-धाराा (४) मेंं “पशुओं केे प्रति� क्रुरताा की नि�वाारण, अधिि˜नि�यम

, १८९० की धाराा

१५” शब्दों और अंकों केे स्थाान मेंं, “पशुओं केे प्रति� क्रुरताा की नि�वाारण अधिि˜नि�यम

, १९६० की

धाराा ३८” शब्द और अंक रखेे जायेंगेे ।

१०.  मूूल अधिि˜नि�यम

की धाराा ३२ मेंं “भारतीीय दण्ड संहि�ताा” शब्दों और अंकों केे स्थाान मेंं,

“भारतीीय न्याय संहि�ताा, २०२३” शब्द और अंक रखेे जायेंगेे।

११.  मूूल अधिि˜नि�यम

की धाराा ३३ मेंं “दण्ड प्रक्रििĸया की संहि�ताा, १९९८” शब्दों और अंकों केे

स्थाान मेंं, “भारतीीय नागरि�क सुरक्षाा संहि�ताा, २०२३ शब्द और अंक रखेे जायेंगेे।”

१२.  मूूल अधिि˜नि�यम

की धाराा ३४ मेंं “दण्ड प्रक्रििĸया की संहि�ताा, १८९८” शब्दों और अंक केे

स्थाान मेंं, “भारतीीय नागरि�क सुरक्षाा संहि�ताा, २०२३” शब्द और अंक रखेे जायेंगेे।

सन् १९६० का

१० की धाराा ३० मेंं

संशोधन ।

सन् १८९०

का ११।

सन् १९६०

का ५९।

सन् १८९०

का ११।

सन् १९६०

का ५९।

सन् १८९०

का ११।

सन् १८६०

का ४५

सन् १९६० का

१० की धाराा ३२ मेंं

संशोधन ।

सन् १८६०

का ४५।

सन् १८९८

का ५।

सन् १९६० का

१० की धाराा ३३ मेंं

संशोधन ।

सन् २०२३

का ४६।

सन् १८९८

का ५।

सन् १९६० का

१० की धाराा ३४ मेंं

संशोधन ।

सन् २०२३

का ४६।

सन् १९६०

का ५९।

4

महाराष्ट्रõ शासन रा

असाधारण भाग सात, डिसेंबर ९, २०२५/अग्रहायण १८, शके १

उद् देेश्यों और काारणों काा वक्तव्य

महाारााष्ट्र भििžक्षाावृृत्तििƫ नि�वाारण अधिि˜नि�यम

(सन् १९६० का १०) मेंं महाारााष्ट्र रााज्य मेंं भििžक्षाावृृत्तििƫ की

नि�वाारण करनेे से संबंधिि˜त तथाा उससे आनुषंंगि�क

मामलोंं केे लिि£ए उपबंध अंतर्वि�िष्ट है ।

२. 

उच्चतम न्यायालय ने रि�ट याचि�काा (सि�वि�ल

) क्र. ८३ /२०१० ( कुष्ठरोोग संघटन संघ

(एफओएलओ) और अन्य बनााम भारतीीय संघ रााज्य तथाा अन्यों (रि�ट याचि�काा (सी) क्र. ११५१ /२०१७

से संलग्न) देखि�ए दि�नांं�कि�त ७ मई २०२५ केे उनकेे आदेश मेंं सभी रााज्यों को नि�र्देेश दि�याा है कि�, वे

संवि�धाान से पहलेे या संवि�धाान केे पश्चात् रााज्य अधिि˜नि�यमोंं

ं, वि�नि�यमोंं

ं, सां�वि�धिि

˜क नि�यमोंं

ं या उप-वि�धिि˜यों

आदि�, मेंं, जि�समेंं कुष्ठरोोगी प्रभावि�त या उपचारि�त व्यक्ति�ियोंं केे संबंध मेंं पक्षपााती अभििžव्यक्ति�ियाँँr अंतर्वि�िष्ट

है, मेंं यथोोचि�त संशोधन करें।

३.  तद्‌नुुसार, नि�देेशों का पालन करतेे हुए, सरकाार ने, रााज्य वि�धिि˜यों मेंं ऐसे पक्षपााती उपबंधों की

पहचाान करनेे केे लिि£ए वि�धिि˜ और न्याय वि�भााग केे अधीन एक समि�ति� गठिि‘त की है। उक्त समि�ति� ने कुष्ठरोोग

प्रभावि�त थाा उपचारि�त व्यक्ति�ियोंं केे संबंध मेंं उपबंध अंतर्वि�िष्ट होनेवाले महाारााष्ट्र भििžक्षाावृृत्तििƫ की नि�वाारण

अधिि˜नि�यम

मेंं धारााएँँ ९ और २६ की पहचाान की है और अत: उक्त अधिि˜नि�यम

मेंं यथोोचि�त संशोधन करनेे

की सि�फाारि�श की है। इसलिि£ए, महाारााष्ट्र भििžक्षाावृृत्तििƫ नि�वाारण अधिि˜नि�यम

की धाराा ९ और २६ मेंं संशोधन

करनाा आवश्यक समझाा है।

४.  महाारााष्ट्र भििžक्षाावृृत्तििƫ नि�वाारण अधिि˜नि�यम

मेंं वि�द्यमान केंद्रििʼnय अधिि˜नि�यमोंं

ं द्वााराा नि�रसि�

त केंद्रििʼnय

और रााज्य अधिि˜नि�यमोंं

ं केे प्रति�स्थाापि�त संदर्भो का आनुषंंगि�क

संशोधन करनेे का भी अवसर मि�लाा है।

५.  इसलिि£ए, महाारााष्ट्र भििžक्षाावृृत्तििƫ नि�वाारण अधिि˜नि�यम

मेंं कुष्ठरोोग प्रभावि�त या उपचारि�त व्यक्ति�ियोंं

केे संबंध मेंं उपबंधों का वि�लोोपन करनेे द्वााराा तथाा उक्त अधिि˜नि�यम

केे उपबंधों से नि�रसि�

त वि�धिि˜-वि�धाानोंं

केे संदर्भों की प्रति�स्थाापना द्वााराा यथोोचि�त संशोधन करनाा इष्टकर समझाा गयाा है।

६.  प्रस्तुत वि�धेेयक का आशय उपर्यु�क्त उद् देश्यों का प्राप्त करनाा है।

नागपूूर,

आदि�तीी तटकरेे,

दि�नांं�कि�त ८ दि�संंबर, २०२५।म

हि�ला

ा तथाा बालवि�काास मंंत्रीी।

(यथाार्थथ अनुवाद),

वि¦धाान भवन :

श्रीी. अरूण कमळााबाई वाळू गि�ते,

नागपूूर,

प्रभारी भाषाा संचालक,

दि�नांं�कि�त ९ दि�संंबर, २०२५।म

हाारााष्ट्र रााज्य।

ड

ॉॉ. वि¦लास आठवलेे,

सचि�व

(३),

म

हाारााष्ट्र वि�धाानपरि�षषद।

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RUPENDRA DINESH MORE, PRINTED AT GOVERNMENT PRESS AND BOOK DEPOT, CIVIL LINES, NAGPUR-440 001 AND

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