नगरवि¦काास वि¦भााग

मंंत्राालय, मादााम काामा मार्गग, हुुताात्मा रााजगुुरू चौौक, मुं�बई ४०० ०३२,

दि�नांं�कि�त २६ दि�स्मबर २०२५।

MAHARASHTRA ORDINANCE No. XIII OF 2025.

AN ORDINANCE

FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA MUNICIPAL COUNCILS,

NAGAR PANCHAYATS AND INDUSTRIAL TOWNSHIP ACT, 1965.

महााराष्ट्र अध्याादेेश क्रमांंsक १३ सन् २०२५।

महााराष्ट्र नगर परि�षद, नगर पंंचाायत और औद्योोगि�क नगरी अधिि˜नि�यम, १९६५ में अधिि˜कतर

संशोोधन करने संंबंंधिि˜ अध्याादेेश ।

क्योंकि� रााज्य विि¦धाानमंंडल के दोनोंं सदनोंंं काा सत्र नहींं चल रहाा है ;

और क्योंकि� महाारााष्ट्र के रााज्यपााल काा यह समाधाान हो चुकाा थाा कि�, ऐसी परि�स्थि�िति�याँँr विि¦द्यमान

हैं, जि�नकेे काारण उन्हें इसमेंं आगेे दर्शिि§ित प्रयोजनोंं के लि�ए, महाारााष्ट्र नगर परि�षद, नगर पंंचाायत और

औद्योगि�क नगरीी अधि�नि�यम, १९६५ मेंं अधि�कतर संशोधन करनेे के लि�ए सद्य काार्ययवाही करनाा आवश्यक

हुुआ है ;

अब, इसलिि£ए, भाारत के संविि¦धाान के अनुच्छेेद २१३ के खण्ड (१) द्वााराा प्रदत्त शक्तििòियों काा प्रयोगग

करतेे हुुए, महाारााष्ट्र के रााज्यपााल, एतद् द्वााराा, नि�म्न अध्यादेश प्रख्यापि�त करतेे हैं, अथाा�त् :—

सन् १९६५

काा ४०।

(१)

RNI No. MAHBIL /2009/31730

महााराष्ट्रट शासन राजपत्र

असाधारण भााग सात

वर्षष १२, अंक १]

साेे�मवार, फेेब्रुुवारी २३, २०२६/फाल्गुन ४, शके १९४७

[पृष्ठेे 3, किं�ंमत : रुपये ४७.००

असाधारण क्रमांंsक १

प्रााधिि˜कृत प्रकााशन

अध्याादेेश, वि¦धेयकेे व अधिि˜नि�यम यांंsचाा हिं�ंदीी अनुवाद (देेवनागरी लिि£पी)

भाागग सात-१—१

2

महाराष्ट्रõ शासन रा असाधारण भाग सात, फेेब्रुुवारी २३, २०२६/फाल्गुन ४, शके १९४७

१.  (१)  यह अध्यादेश महाारााष्ट्र नगर परि�षद, नगर पंंचाायत और औद्योगि�क नगरीी (तृतीय

संशोधन) अध्यादेश, २०२५ कहलााए।

(२) यह तुरंत प्रवृत्त होगाा।

२.  महाारााष्ट्र नगर परि�षद, नगर पंंचाायत और औद्योगि�क नगरीी अधि�नि�यम, १९६५ (जि�सें इसमेंं

आगेे, “ मूल अधि�नि�यम ” कहाा गयाा है) की धााराा ५१क-१क की, उप-धााराा (३) के पश्चात् नि�म्न उप-

धााराा नि�विि¦ष्ट की जाएगीी, अथाा�त् :—

“(३क) (एक) यदि� कोई व्यक्तििòि अध्यक्ष के रूप मेंं और पाार्षषद के रूप मेंं नि�र्वा�चि�त हुुआ

है तब वह एक साथ दोनोंं पदों को धाारण कर सकेगाा ।

(दो)  एक साथ अध्यक्ष और पाार्षषद काा पद धाारण करनेेवाले व्यक्तििòि को या तो अध्यक्ष

या पाार्षषद के रूप मेंं केवल एक मत देने काा अधि�काार होगाा :

परंंतु, मतों की समानताा के मामलेे मेंं, अध्यक्ष काा मत नि�र्णा�यक होगाा। " ।

३.  मूूल अधि�नि�यम की धााराा ३४१ ख-१क, की उप-धााराा (३) के पश्चात्, नि�म्न उप-धााराा

नि�विि¦ष्ट की जाएगीी, अथाा�त् :—

“(३क) (एक) यदि� कोई व्यक्तििòि अध्यक्ष और पाार्षषद रूप मेंं नि�र्वा�चि�त हुुआ है तब वह एक

साथ दोनोंं पदों को धाारण कर सकेगाा ।

(दो)  एक साथ अध्यक्ष और पाार्षषद के रूप मेंं पद धाारण करनेेवाले व्यक्तििòि काेे� या तो

अध्यक्ष या पाार्षषद के रूप मेंं केवल एक मत देने काा अधि�काार होगाा :

परंंतु, मतों की समानताा के मामलेे मेंं अध्यक्ष काा मत नि�र्णा�यक होगाा । " ।

संक्षिप््त नाम और

प्रारम््भण।

सन् १९६५ काा

महाा. ४० की धााराा

५१क-१क मेंं

संशोधन।

सन् १९६५

काा महाा.

४०।

सन् १९६५ काा

महाा. ४०की धााराा

३४१ ख-१क मेंं

संशोधन ।

महाराष्ट्रõ शासन रा असाधारण भाग सात, फेेब्रुुवारी २३, २०२६/फाल्गुन ४, शके १९४७

3

वक्तव्य

महाारााष्ट्र नगर परि�षद, नगर पंचायत और औद्योगि�क नगरीी अधि�नि�यम, १९६५ (सन् १९६५ काा महाा.

४०) की धााराा ५१क-१क और ३४१ ख -१क क्रमशःः नगर परि�षदों और नगर पंचायतों के सभाापति� काा

सीधाा नि�र्वा�चन करनेे के लि�ए उपबंंध करतीी है ।

२.  नगर परि�षदों और नगर पंचायतों के पाार्षषद के रूप मेंं नि�र्वा�चि�त होने के लि�ए अर्हहतााप्राप्त प्रत्येक

व्यक्तििòि उसके अध्यक्ष के रूप मेंं नि�र्वा�चि�त होने के लि�ए भी अर्हहताा प्राप्त है । इसलि�ए, यह संभव है कि�,

व्यक्तििòि एक साथ अध्यक्ष और पाार्षषद के रूप मेंं भी चुनााव लड़ सकेगाा और दोनोंं पदों पर नि�र्वा�चि�त भी

हो सकेगाा । ऐसे व्यक्तििòि को दोनो पदों के लि�ए लोगोंं काा नि�र्वा�चक जनाादेश मि�लाा है । अध्यक्ष के रूप मेंं

अप्रत्यक्ष रूप से नि�र्वा�चि�त व्यक्तििòि पाार्षषद के रूप मेंं भी नि�रंंतर रहेेगाा और अध्यक्ष और पाार्षषद के रूप मेंं एक

साथ काार्यय करेेगाा ।

इसलि�ए, सरकाार यह इष्टकर समझती है कि�, प्रत्यक्ष रूप से नि�र्वा�चि�त अध्यक्ष पाार्षषद के रूप मेंं भी

नि�रंंतर रहनेे मेंं समर्थथ बने। इसलि�ए, विि¦शेष रूप से यह उपबंंध करनेे की, प्रत्यक्ष रूप से अध्यक्ष और पाार्षषद

के रूप मेंं नि�र्वा�चि�त व्यक्तििòि एक साथ दोनोंं पदों को धाारण कर सकेगाा, उक्त अधि�नि�यम, १९६५ की धााराा

५१क-१क और ३४१ख-१क मेंं संशोधन करनाा प्रस्तााविि¦त कि�याा गयाा है। यह भी उपबंंध करनेे काा प्रस्तविि¦त

कि�याा गयाा है कि�, ऐसे व्यक्तििòि को या तो अध्यक्ष के रूप मेंं या पाार्षषद के रूप मेंं केवल एक मत होगाा और

मतों की समानताा के मामलेे मेंं अध्यक्ष काा मत नि�र्णा�यक होगाा ।

३.  चूँँrकि�, रााज्य विि¦धाानमंंडल के दोनोंं सदनोंंं काा सत्र नहींं चल रहाा है और महाारााष्ट्र के रााज्यपााल काा

यह समाधाान हो चुकाा है कि�, ऐसी परि�स्थि�िति�याँँr विि¦द्यमान हैं जि�नकेे काारण उन्हें इसमेंं उपर्यु�क्त प्रयोजनोंं के

लि�ए, महाारााष्ट्र नगर परि�षद, नगर पंचायत और औद्योगि�क नगरीी अधि�नि�यम, १९६५ मेंं अधि�कतर संशोधन

करनेे के लि�ए, सद्य काार्ययवाही करनाा आवश्यक हुुआ है, अतः यह अध्यादेश प्रख्यापि�त कि�याा जाताा है।

मुं�बई,

आचाार्यय देेवव्रत,

दि�नांं�कि�त २५ दि�स्मबर २०२५।म

हाारााष्ट्र के रााज्यपााल।

महाारााष्ट्र के रााज्यपााल के आदेश तथाा नााम से,–

डॉॉ. के. एच. गोविं¦ंद राज,

सरकाार के अप्पर मुख्य सचि�व।

(यथाार्थथ अनुवाद),

श्रीी. अरूण कमळााबाई वाळू गि�ते,

प्रभाारी भााषा संचालक,

म

हाारााष्ट्र रााज्य।

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