(१)

L. A. BILL No. III OF 2026.

A BILL

FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA SETTLEMENT OF

ARREARS OF TAX, INTEREST, PENALTY OR LATE FEE ACT, 2025.

व‍ि¦िधाानसभाा काा व‍ि¦िधेयक क्रमांंsक ३ सन् २०२६।

महाारााष्ट्र कर, ब्याज, शाास्तिĒि या व‍ि¦िलंंबिित फ़ीीस केे बकाायों काा नि�पटाान अधि�नि�यम, २०२५ मेंं

अधि�कतर संंशोोधन करनेे संबंंधि� व‍ि¦िधेयक।

क्‍‍याेंं�क‍‍ि�ि� इसमेंं आगेे दर्शि§ित प्रयोोजनोंं केे लिि£ए, महाारााष्ट्र कर, ब्याज, शास्तिĒि या विि¦लंबिित फीीस केे

बकाायों का नि�पटाान अधिि˜नि�यम

, २०२५ मेंं अधिि˜कतर संशोधन करनेे केे लिि£ए सद्य कार्यवााही करनाा आवश्यक

हुआ है ; अत: भाारत गणरााज्‍‍य केे सतहत्‍‍तर वे वषि मेंं, एतद् द्वााराा, न‍ि�िम्‍‍न अध‍िि˜िन‍ि�ियम‍ अध‍िि˜िन‍ि�ियम‍ि�ित क‍‍ि�ि�याा है:—

१.  (१) यह अध‍िि˜िन‍ि�ियम‍ महाारााष्ट्र कर, ब्याज, शास्तिĒि या विि¦लंबिित फ़ीीस केे बकाायों का नि�पटाान

(संशोधन और व‍िि¦िध‍िि˜िमाान्‍‍यकरण) अध‍िि˜िन‍ि�ियम‍ , २०२६ कहलााए।

सन् २०२५

का महाा.१७।

संक्षििȦप्त नाम ।

भााग सात ६–१

RNI No. MAHBIL /2009/31730

महाारााष्ट्र शाासन रााजपत्र

असाधाारण भााग सात

वर्षष १२, अंक ३]

बुधवाार, फेेब्रुुवारी २५, २०२६/फाल्‍‍गुन ६, शकेे १९४७

[पृष्ठेे ५, किं�ंमत : रुपये ४७.००

असाधाारण क्रमांंsक ६

प्रााधि�कृृत प्रकााशन

अध्यादेेश, विि¦धेयके व अधि�नि�यम यांंsचाा हिं�ंदीी अनुवाद (देेवनागरी लि�पीी).

महाारााष्ट्र विि¦धाानमंंडळ सचि�वाालय

महाारााष्ट्र विि¦धानसभाा मेंं दि�नांं�क २५ फरवरीी, २०२६ ई. को. पुर:स्थाापि�त नि�म्न विि¦धेयक

महाारााष्ट्र विि¦धानसभाा नि�यम

११७ केे अधीन प्रकाशिशि§त कि�याा जाता है :-

2

महाराष्ट्रõ शासन रा

असाधारण भाग सात, फेेब्रुुवारी २५, २०२६/फाल्‍‍गुन ६, शकेे १९४७

२.  महाारााष्ट्र कर, ब्याज, शास्तिĒि या विि¦लंबिित फ़ीीस केे बकाायों का नि�पटाान अधिि˜नि�यम

, २०२५(जि�सेे

इसमेंं आगेे, “मूल अधिि˜नि�यम

” कहाा गयाा है) की धाराा १० की सारणीी केे स्तंभ ४ मेंं, “३१ दि�सम्बर २०२५”

अंक और अक्षरों केे स्थाान मेंं, “३१ मार्चच २०२६” अंक और अक्षर रखेे जायेंगेे।

३.  मूूल अधिि˜नि�यम

की धाराा ११ की, उप-धाराा (१) केे पश्चाात् न‍ि�िम्न परंतुक जोडाा जाएगा,

अथाा�त् :-

“परंतु, जहाँँr एक ही सांं�विि¦धिि˜क आदेश केे संबंध मेंं एक से अधिि˜क अपीलें दायर की गई हाेे� और ऐसे

अपील भि�न्न और अलग कि�ए जा सकनेेवाले मद्द अंतर्विि¦िष्ट है तो आवेदक, इस अधिि˜नि�यम

केे अध‍िि˜िन

लाभ लेने केे लिि£ए, शेष अपील या अपीलों केे कायम रहनेे पर प्रति�कूूल प्रभााव डााले बििना ऐसे भि�न्न और

अलग मद्दाेंं� से संबंध‍िि˜ित अपील पूरी तरह और ब‍िििनाा शतɓ वापस ले सकेेगा :

परंतु यह और भी क‍ि�ि, इस अध‍िि˜िन‍ि�ियम

केे प्रारम्भण केे द‍ि�िनांं�क पर या केे पूव, जहााȻ सां�व‍िि¦िध‍िि˜िक आदेश

केे संबंध मेंं काेे�ई अदायगीी, चााहे अपील मेंं या अन्‍‍यथाा मेंं की गई है, और

(क)  जहााȻ ऐसी अदायगीी मद्दवार पहचाान याेे�ग्‍‍य है ताेे� वह तत्‍‍स्थाानी मद्द या मद्दाेंं� से संबंध‍िि˜ित

दाय‍ि�ित्‍‍व केे रूप मेंं समायाेे�ज‍ि�ित की जाएगी ;

(ख)  जहााȻ ऐसी अदायगीी मद्दवार पहचाान याेे�ग्‍‍य नहींं है, ताेे� वह इस धाराा केे अधीन अपील

या अपीलों को वापस लेने से उद्भूत दायि�त्व केे अनुपात केे रूप मेंं समायोोजि�त की जाएगी और

अपील या अपीलें जो शेष विि¦लंबिित है, पदाभि�ह‍ि�ित प्राधिि˜कारी द्वााराा जैसा की नि�र्धाा�रि�त कि�याा जाए

ऐसी रीत्याा, होगी।”।

४.  महाारााष्ट्र कर, ब्याज, शास्तिĒि या विि¦लंबिित फ़ीीस केे बकाायों का नि�पटाान अधिि˜नि�यम

, २०२५

(जि�सेे इसमेंं आगेे, “उक्त अधिि˜नि�यम

” कहाा गयाा है) मेंं या कि�सीी न्याायालय केे कि�न्‍‍हीी न्याायनि�र्णणय

, डि�क्रीी

या आदेश मेंं अंतर्विि¦िष्ट कि�सीी बात केे होते हुए भी, उक्त अधिि˜नि�यम

केे अधीन यथाा परि�भााषि�त सुसंगत

अधिि˜नि�यम

केे अधीन कर, ब्याज, शास्तिĒि या विि¦लंबिित फ़ीीस की आवश्यक रकम

की कोई अदायगीी ३१

दि�सम्बर २०२५ केे पश्चाात, महाारााष्ट्र कर, ब्याज, शास्तिĒि या विि¦लंबिित फ़ीीस केे बकाायों का नि�पटाान (संशोधन

और व‍िि¦िध‍िि˜िमाान्‍‍यकरण) अध‍िि˜िन‍ि�ियम‍ , २०२६ केे प्रारम्भण तक कि�सीी आवेदक से उक्त अधिि˜नि�य

म केे अधीन

अदा की गई और संग्रहीत की गई है तो, वह विि¦ध‍िि˜ि केे अनुसरण मेंं सम्‍‍यक और वैध रूप से अदा की गई

और हमेेशा केे लिि£ए अदा की गई तथाा संग्रहीत की गई समझीी जाएगी मानोंं कि�, इस अध‍िि˜िन‍ि�ियम‍ द्वााराा यथाा

संशोधिि˜त उक्‍‍त अध‍िि˜िन‍ि�ियम

केे उपबंध सभी तात्वि�¦क समयोंं पर नि�रंंतर प्रवर्ततन मेंं थे और तद्नुसार,—

(क)  अपेक्षििȦत रक़म केे द्वााराा प्राप्त उत्पन्न कि�सीी रकम

केे प्रति�दााय केे लिि£ए कि�सीी न्याायालय

या कि�सीी प्राधिि˜करण मेंं या केे समक्ष कोई वाद या कार्यवााहि�यॉंं� बनााई या संस्थििĒित नहींं की जाएगी;

(ख)  कोई न्याायालय या कोई अन्य प्राधिि˜करण ऐसे आवश्यक रक़म केे ज़रि�ए प्राप्त या

उत्पन्न कि�सीी रकम

का प्रति�दााय करनेे केे नि�देेश देनेवाले कोई डि�क्रीी या आदेश प्रवृत्त नहीी करेंगेे।

सन् २०२५ का

महाा. १७ की धाराा

१० मेंं संशोधन।

सन् २०२५

का महाा.१७।

सन् २०२५ का

महाा. १७ की धाराा

११ मेंं संशोधन।

व‍िि¦िध‍िि˜िमाान्‍‍यकरण।

सन् २०२५

का महाा.१७।

सन् २०२६

का महाा.___।

महाराष्ट्रõ शासन रा

असाधारण भाग सात, फेेब्रुुवारी २५, २०२६/फाल्‍‍गुन ६, शकेे १९४७

3

उद्देेश्‍‍याेंं� और काारणाें� काा वक्तव्य

महाारााष्ट्र कर, ब्याज, शास्तिĒि या विि¦लंबिित फ़ीीस केे बकाायों का नि�पटाान अधिि˜नि�यम

, २०२५ (सन्

२०२५ का महाा. १७) यह अधिि˜नि�यम

कर, ब्याज, शास्तिĒि या विि¦लंबिित फ़ीीस जो, नि�गमोंं

ं, सार्ववजनि�क

क्षेत्र

बँकोंं, विि¦भाागों, ग्रामीण या शहरीी स्थाानीय नि�काायों या अन्य प्राधिि˜करणोंं, उद्यमोंं या इकाईयों जो कम्पनि�

अधिि˜नि�यम

, २०१३ (सन् २०१३ का १८) या रााज्य अधिि˜नि�यमोंं

ं या सरकाारी संकल्पों द्वााराा गठिि‘त कि�ए है

से अन्यथाा केंद्रििʼnय अधिि˜नि�यमोंं

ं केे अधीन रजि�स्ट्रीकृत है, केे द्वााराा देय महाारााष्ट्र सरकाार केे वस्तु एवं सेवा

कर विि¦भााग द्वााराा कार्या�न्वि�¦त विि¦भि�न्न अधिि˜नि�यमोंं

ं केे अधीन उद्‌‌ग्रहीत, अधिि˜रोपि�त या देय है, केे उपबंध

करनेे केे लिि£ए अधिि˜नि�यमि�

त कि�याा गयाा है।

२. उक्त अधिि˜नि�यम

की धाराा १० यह उपबंध करतीी है कि� अपेक्षििȦत रकम

की अदायगीी केे लिि£ए

अंति�म

दि�नांं�क ३१ दि�सम्बर, २०२५ है। तथाापि�, यह देखा गयाा है कि�, कई पात्र सार्ववजनि�क

क्षेत्र केे उपक्रम

और सरकाारी इकाईयाँँr जाेे� हाँँrलाकि� नि�पटाान का लाभ उठाना चााहतीी है, कई अपील अध‍िि˜िकरण मेंं अपीले

विि¦चाारााधिि˜नताा केे कारण विि¦नि�दि�ɓष्ट समय सीमा केे भीतर अपीलों को वापस लेने और आवश्यक रकम

की

अदायगीी की प्रक्रि�याा पूरी नहींं कर सकेे। रााज्य सरकाार को, अदायगीी का उक्त दि�नांं�क विि¦स्तारि�त करनेे केे

लिि£ए ऐसे इकाईयों से कई अभ्यावेदन प्राप्त हुए है। इसलिि£ए, सरकाार, उक्त दि�नांं�क को ३१ मार्चच २०२६

तक विि¦स्तारि�त करनाा इष्टकर

समझती

ी है। अतः इसलिि£ए, उक्त अधिि˜नि�यम

की धाराा १० का यथोोचि�त

संशोधन करनाा प्रस्ताविि¦त है।

३. यह ध्यान मेंं आया है कि�, कति�पय मामलोंं मेंं एक सांं�विि¦धिि˜क आदेश एक से अधिि˜क भि�न्न और

अलग कि�ए जा सकनेेवाले मद्दें अंतर्विि¦िष्ट करताा है और ऐसे मद्दो केे संबंध मेंं अलग अपील विि¦लंबिित है।

उक्त अधिि˜नि�यम

की धाराा ११ का विि¦द्यमान उपबंध नि�पटाान केे लिि£ए शर्तत केे रूप मेंं अपील को वापस

लेना चााहताा है। इस उपबंध केे कारण आवेदक ने अपील मेंं भि�न्न और अलग कि�ए जा सकनेेवाले मद्दों

मेंं से कई मद्दों का नि�पटाान करनाा हाँँrलां�कि� वह चााहतेे हुए भी पूर्णण अपील वापस ली है। अत: इसलिि£ए,

अपील मेंं केेवल ऐसा भि�न्न और अलग कि�ए जा सकनेेवाला मुद्दा जि�सेे आवेदक अपीलों मेंं शेष मद्दों की

नि�रंंतरताा को प्रभााविि¦त कि�ए बििना नि�पटाान चााहताा है, केे संबंध मेंं अपील वापस लेने की अनुमति� केे लिि£ए

और अदायगीीयों केे अनुपात मेंं समायोोजन करनेे केे लिि£ए उपबंध करनेे केे लिि£ए उक्त अधिि˜नि�यम

की धाराा

११ संशोधिि˜त करनाा इष्टकर

समझाा है।

४. प्रस्‍‍तुत व‍िि¦िधेयक का आशय उपयुक्‍‍त उद्देश्‍याेंं� काेे� प्राप्‍‍त करनाा है।

मुंं�बई,

देेवेंद्र फडणवीस,

दि�नांं�क २३ फरवरीी, २०२६.म

ुुख्‍‍यमंंंत्री।

4

महाराष्ट्रõ शासन रा

असाधारण भाग सात, फेेब्रुुवारी २५, २०२६/फाल्‍‍गुन ६, शकेे १९४७

व‍ि¦ित्‍‍तीय ज्ञाापन

प्रस्‍‍तुत व‍िि¦िधेयक मेंं आवश्‍यक रक़म की अदायगीी करनेे क‍ा� अंत‍ि�िम द‍ि�िनांं�क व‍िि¦िस्‍‍तार‍ि�ित करनेे और

केेवल भ‍ि�िन्‍‍न तथाा कई मद्दाेंं� केे संबंध मेंं अपील वापस लेने की अनुमत‍ि�ि देने की दृष्‍ट‍ि��ि से, अध‍िि˜िन‍ि�ियम

की

धाराा १० और ११ मेंं का संशाे�धन करनाा प्रस्‍‍ताव‍िि¦ित करताा है। प्रस्‍‍तुत व‍िि¦िधेयक मेंं, से रााज्‍‍य व‍िि¦िधानमंंंडल केे

अध‍िि˜िन‍ि�ियम

केे रूप मेंं उसकी अध‍िि˜िन‍ि�ियम‍ि�ित‍ि�ि हाेे�ने पर, रााज्‍‍य की समेेक‍ि�ित न‍ि�िध‍िि˜ि मेंं से आवतीि या अनावतीि

व्‍‍यय उपगत हाेे�नेवाला ऐसा काेे�इि प्रावधान नहींं है।

(यथाार्थथ अनुवाद),

श्रीी. अरुण कमळााबाई वाळू गि�तेे,

प्रभाारी भााषा संचाालक,

महाारााष्ट्र रााज्य ।

महाराष्ट्रõ शासन रा

असाधारण भाग सात, फेेब्रुुवारी २५, २०२६/फाल्‍‍गुन ६, शकेे १९४७

5

भाारत संंविि¦धाान केे अनुच्छेेद २०७ केे अधीन रााज्यपाल कीी अनुशंंसा

(महाारााष्ट्र शासन, विि¦धी व न्यााय विि¦भााग, आदेश कि� प्रत)

भाारत संविि¦धान केे अनुच्छेेद २०७ केे खंड (१) द्वााराा प्रदत्त शक्ति�ियोंं का प्रयोोग करतेे हुए, महाारााष्ट्र

रााज्यपा

ाल महोोदय, महाारााष्ट्र कर, ब्याज, शास्तिĒि या विि¦लंबिित फ़ीीस केे बकाायों का नि�पटाान (संशोधन और

विि¦धिि˜मान्यकर

ण) विि¦धेयक, २०२६ ई, पर पुरःस्थाापना करनेे की अनुशंसा करतेे है।

विि¦धान भवन

,

मुंं�बई,

दि�नांं�कि�त २५ फरवरीी, २०२६ ।

जि�तेंद्र भोोळे,

सचि�व

-१,

महाारााष्ट्र विि¦धानसभाा।

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