महाारााष्ट्र वि¦धाानमंडळ सचिि‹वालय

महाारााष्ट्र वि¦धाानपरि�षद में दि�नांंsक २८ फरवरीी, २०२६ ई.को. पुर:स्थाापि�त नि�म्न वि¦धेयक महाारााष्ट्र

वि¦धाानपरि�षद नि�यम ११३ के अधीन प्रकाशिि§न कि�या जााता है :-

(१)

L. C. BILL No. I OF 2026.

A BILL

FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA PUBLIC

UNIVERSITIES ACT, 2016.

वि¦धाानपरि�षद काा वि¦धेयक क्रमांं�क १ सन् २०२६।

महाारााष्ट्र लोक वि¦श्ववि¦द्याालय अधि�नि�यम, २०१६ में अधि�कतर संशोोधन करनेे संबंंधी वि¦धेयक।

क्योंकि� रााज्य वि¦धाानमंंडल दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहाा थाा ;

और क्योंकि� महाारााष्ट्र के रााज्यपाल का यह समाधाान हो चुका थाा कि�, ऐसी परि�स्थि�िति�याँँr वि¦द्यमान

थीं जि�नके कारण उन्हें इसमें आगेे दर्शिि§ित प्रयोजनों के लि�ए, महाारााष्ट्र लोक वि¦श्ववि¦द्यालय अधि�नि�यम,

२०१६ में अधि�कतर संशोोधन करनेे के सद्य कार्ययवाही करनाा आवश्यक हुआ थाा; और, इसलि�ए, महाारााष्ट्र

लोक वि¦श्ववि¦द्यालय (संशोोधन) अध्यादेश, २०२६, १८ फरवरीी २०२६ को प्रख्यापि�त कि�या गयाा थाा;

सन् २०१७

का महाा. ६

सन् २०२६

का महाा. १

भाग सात-८–१

RNI No. MAHBIL /2009/31730

महाारााष्ट्रट शासन रााजपत्र

असाधाारण भााग सात

वर्षष १२, अंक ५]

शनि�वाार, फेब्रुुवारी २८, २०२६/फाल्गुन ९, शकेे १९४७

[पृष्ठेे 3, किं�ंमत : रुपये ४७.००

असाधाारण क्रमांं�क ८

प्रााधि�कृृत प्रकााशन

अध्यादेश, वि¦धेयके व अधि�नि�यम यां�चाा हिं�ंदी अनुवाद (देवनागरी लि�पी)

2

महाराष्ट्रõ शासन रा

असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २८,

२०२६/फाल्गुन ९, शके १

और क्योंकि� उक्त अध्यादेश को रााज्य वि¦धाानमंंडल के अधि�नि�यम में बदलना इष्टकर है; अत: भारत

गणरााज्य के सतहत्तरवें वर्षष में, एत् दद्वााराा, नि�म्न अधि�नि�यम, अधि�नि�यमि�त कि�या जााता है :—

१.  (१) यह अधि�नि�यम महाारााष्ट्र लोक वि¦श्ववि¦द्यालय (संशोोधन) अधि�नि�यम, २०२६ कहलााए ।

(२) यह १८ फ़रवरीी, २०२६ को प्रवृत्त हुआ समझाा जााएगा ।

२.  महाारााष्ट्र लोक वि¦श्ववि¦द्यालय अधि�नि�यम, २०१६ (जि�सेे इसमें मागेे " मूल अधि�नि�यम " कहाा

गयाा है) की, धााराा १०९ की उप-धााराा (३) के,—

(१) खण्ड (घ) में वि¦द्यमान परंंतुक के पश्चात् , न‍ि�िम्‍‍न परंंतुक जोड़ाा जााएगा अथाा�त् :—

“परंंतु यह और भी कि�, अकादमि�क वर्षष २०२६-२७ के लि�ए रााज्य सरकाार १५ मार्चच, २०२६

पर या के पूर्वव आशय पत्र अनुदत्त कर सकेगी।” ;

(२) खण्ड (छ) का द्वि�तीीय परंंतुक और सारणीी अपमार्जि�ित की जााएगी ।

३.  (१) महाारााष्ट्र लोक वि¦श्ववि¦द्यालय (संशोोधन) अध्यादेश, २०२६, एतदद्वााराा, नि�रसि�त कि�या

जााता है।

(२) ऐसे नि�रसन के होते हुए भी, उक्त अध्याधेश द्वााराा यथाा संशोोधि�त मूल अधि�नि�यम के

तत्स्थाानी उपबंधोंं के अधीन कृत कोई बात या की गई कोई कार्ययवाही (जाारी कि�सी अधि�सूूचना या

आदेश समेत) इस अधि�नि�यम द्वााराा यथाा संशोोधि�त मूल अधि�नि�यम के तत्स्थाानी उपबंधोंं के अधीन

कृत, की गई या, यथाास्थि�िति�, जाारी की गई समझी जााएगी।

संक्ष‍ििȦिप्‍‍त नाम और

प्रारम्भण।

सन् २०१७ का

महाा. ६ की धााराा

१०९ में संशाेे�धन।

सन् २०१७

का महाा.

६ |

सन २०२६ का

महाा. अध्या. क्र.१

का नि�रसन और

व्यावृत्ति�।

सन् २०२६ का

महाा. अध्या.

क्र.१ |

महाराष्ट्रõ शासन रा

असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २८,

२०२६/फाल्गुन ९, शके १

3

उद्‌‌देश्यों और काारणों काा वक्तव्य

महाारााष्ट्र लोक वि¦श्ववि¦द्यालय अधि�नि�यम, २०१६ (सन् २०१७ का महाा. ६) की धााराा १०९, नए

महाावि¦द्यालय या नए पाठ् यक्रम, वि¦षय, संकााय वि¦भाग या उपग्रह केंद्र शुरू करनेे की अनुमति� माँँrगनेे की

प्रक्रि�या के लि�ए उपबंध करतीी है। उक्त धााराा १०९ की उप-धााराा (३) का खण्ड (घ) यह उपबंध करताा है

कि�, वि¦श्ववि¦द्यालय द्वााराा सि�फारि�श कि�ए गए आवेदनों में से रााज्य सरकाार, उक्त धााराा १०९ के खण्ड (ग)

के अधीन वि¦श्ववि¦द्यालय की सि�फारि�शों के पश्चात् तत्काल अनुवर्ती वर्षष के ३१ जनवरीी को या के पूर्वव

आशय पत्र अनुदत्त कर सकेगी ।

२.  स्थाानीय प्राधि�करणों के नि�र्वा�चन के लि�ए आचार संहि�ता के कारण सरकाार, वि¦हि�त अवधि� के

भीतर आशय पत्र देने के लि�ए समर्थथ नहीं थी। इसलि�ए, सरकाार धााराा १०९ की उप-धााराा (३) का खण्ड

(घ) में यथोचि�त संशोोधन करनाा इष्टकर समझतीी है, ताकि� अकादमि�क वर्षष २०२६-२०२७ के लि�ए नया

महाावि¦द्यालय या उच्चतर शिि§क्षा की संंस्थाा शुरू करनेे के लि�ए रााज्य सरकाार द्वााराा आशय पत्र अनुदत्त करनेे

का दि�नांंsक व‍िि¦िस्तारि�त कर सकेगी।

३.  चूँँrकि�, रााज्य वि¦धाानमंंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहाा थाा और महाारााष्ट्र के रााज्यपाल

का यह समाधाान हो चुका थाा कि�, ऐसी परि�स्थि�िति�याँँr वि¦द्यमान थी जि�नके कारण उन्हें इसमें उपर्यु�क्त प्रयोजनों

के लि�ए, महाारााष्ट्र लोक वि¦श्ववि¦द्यालय अधि�नि�यम, २०१६ (सन् २०१७ का महाा. ६) में अधि�कतर संशोोधन

करनेे के लि�ए, सद्य कार्ययवाही करनाा आवश्यक हुआ है, अत: महाारााष्ट्र के रााज्यपाल द्वााराा महाारााष्ट्र लोक

वि¦श्ववि¦द्यालय (संशोोधन) अध्यादेश, २०२६ (सन् २०२६ का महाा. अध्या. क्र. १) १८ फ़रवरीी, २०२६

को प्रख्यापि�त कि�या गयाा थाा ।

४.  प्रस्तुत वि¦धेयक का आशय उक्त अध्यादेश को रााज्य वि¦धाान मंंडल के अधि�नि�यम में बदलना है।

मुंंsबई,

चंद्रकांं�त (दादा) पाटीील,

दि�नांंsक‍ि�ित २७ फ़रवरीी, २०२६।

उच्चतर तथाा तकनीकी शिि§क्षा मंत्रीी।

(यथाार्थथ अनुवाद),

वि¦धाान भवन :

श्रीी. अरुण कमळाबाइɓ वाळू ग‍ि�िते,

मुंंsबई,

प्रभारी भाषा संचाालक,

दि�नांंsकि�त २८ फ़रवरीी, २०२६।

महाारााष्ट्र रााज्य।

डॉ. वि¦लास आठवलेे,

सचि�व-३,

महाारााष्ट्र वि¦धाानपरि�षद।

ON BEHALF OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATION, PRINTED AND PUBLISHED BY DIRECTOR,

RUPENDRA DINESH MORE, PRINTED AT GOVERNMENT CENTRAL PRESS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD,

MUMBAI 400 004 AND PUBLISHED AT DIRECTORATE OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATIONS,

21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004. EDITOR : DIRECTOR, RUPENDRA DINESH MORE.