भााग साात-११–१

L. A. BILL No. IX OF 2026.

A BILL

FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA STAMP ACT.

वि¦धाानसभाा काा वि¦धेयक क्रमांंsक ९ सन् २०२६।

महाारााष्ट्र स्टााम्प अधि�नि�यम मेंं अधि�कतर संंशोोधन करनेे संंबंंधीी वि¦धेयक।

क्योंकि� इसमेंं आगे दर्शि§ित प्रयोोजनोंं केे लिि£ए, महाारााष्ट्र स्टााम्प अधिि˜नि�यम

मेंं अधिि˜कतर संशोधन करनाा

इष्टकर

है ; अत: भाारत गणरााज्य केे सतहत्तरवेंं वर्षष मेंं, एतद् द्वााराा, नि�म्न अधिि˜नि�यम

अधिि˜नि�यमि�

त कि�याा जाता

है :—

१.  (१)  यह अधिि˜नि�यम

महाारााष्ट्र स्टााम्प (संशोधन) अधिि˜नि�यम

, २०२६ कहलाए।

सन् १९५८

का ६०।

संक्षििȦप्त नाम।

(१)

RNI No. MAHBIL /2009/31730

महाारााष्ट्रट शासन रााजपत्र

असाधाारण भााग सात

वर्षष १२, अंक ७]

गुरुवार, माार्चच ५, २०२६/फााल्गुन १४, शकेे १९४७

[पृष्ठेे ३, किं�ंमत : रुपये ४७.००

असाधाारण क्रमांंsक ११

प्रााधि�कृृत प्रकााशन

अध्यादेेश, वि¦धेयके व अधि�नि�यम यांंsचाा हिं�ंदीी अनुवाद (देेवनागरी लिि£पी).

महाारााष्ट्र वि¦धाानमंंडळ सचि�वाालय

महाारााष्ट्र वि�धाानसभाा मेंं दि�नांं�क ५ माार्चच, २०२६ ई. को. पुर:स्थाापि�त नि�म्न वि�धेेयक

महाारााष्ट्र वि�धाानसभाा नि�यम

११७ के अधीन प्रकाशिशि§त कि�याा जाता है :-

2

महाराष्ट्रõ शासन रा

असाधारण भाग सात, मार्च ५, २०२६/फाल्गुन १४, शके १९

२.  महाारााष्ट्र स्टााम्प अधिि˜नि�यम

(जि�सेे इसमेंं आगे, “मूल अधिि˜नि�यम

” कह गया है) की, धाराा

५२ क की,-

(क) उप-धाराा (१) मेंं,—

(एक) “पाँँrच लाख” शब्दों केे स्थाान मेंं, “बीीस लाख” शब्द रखेे जायेंगे ;

(दो) खंड (ख) मेंं “संबंधिि˜त” शब्द केे स्थाान मेंं, “रजि�स्ट्रीकरण केे संयुक्त महाानि�रीीक्षक

और स्टााम्प अधीक्षक तथाा संबंधिि˜त” शब्द रखेे जायेंगे।

(ख) उप-धाराा (२) केे स्थाान मेंं, नि�म्न उप-धाराा रखीी जायेगी, अथाा�त्:—

“(२) (क) ऐसे आवेेदन की प्राप्ति�� पर,-

(एक) स्टााम्प केे अति�रि�क्त नि�यंंत्रक, यदि� भत्ते की रााशिशि§ बीीस लाख रुपयों से अधिि˜क है तथाा

एक करोोड़ रुपयों तक हो ;

(दो) रजि�स्ट्रीकरण केे संयुक्त महाानि�रीीक्षक, और स्टााम्प केे अधीक्षक यदि�, भत्ते की रााशिशि§

पचास लाख रुपयों से अधिि˜क तथाा एक करोोड़ रुपयों तक हो ;

(तीन) संबंधिि˜त प्रभााग केे रजि�स्ट्रीकरण केे उप-महाानि�रीीक्षक तथाा स्टााम्प केे उप-नि�यंंत्रक,

यदि�, भत्ते की रााशिशि§ बीीस लाख रुपये से अधिि˜क है तथाा पचास लाख रुपये तक हो ;

उक्त आवेेदन पर वि�चाार करेंगे और यह नि�र्णणय करेंगे कि�, ऐसाा भत्ता दि�याा जाए या नहींं, तथाा

तदनुसाार उसे स्वीकृत करेंगे।

(ख) खंड (क) मेंं उल्लििčिखि�त प्राधिि˜कारी यदि�, भत्ते की रााशिशि§ एक करोोड़ रुपये से अधिि˜क

हो, तो अपने अभि�म

त सहि�त ऐसाा आवेेदन नि�र्णणय हेतु मुख्य नि�यंंत्रक रााजस्व प्राधिि˜कारी को प्रस्तुत

करेंगे।”।

सन् १९५८ का

६० की धाराा ५२

क मेंं संशोधन।

सन् १९५८

का ६०।

महाराष्ट्रõ शासन रा

असाधारण भाग सात, मार्च ५, २०२६/फाल्गुन १४, शके १९

3

उद्देेश्यों और काारणों काा वक्तव्य।

महाारााष्ट्र स्टााम्प अधिि˜नि�यम

, १९५८ (सन् १९५८ का ६०) की धाराा ५२ क मेंं स्टााम्पों या चालान केे

अधीन अदा की गई नक़द रााशिशि§ पर स्टााम्प शुल्क केे प्रति�दााय केे उपबंध है, जो नष्ट हो गए हों, दुरुपयोोग मेंं आए

हों या उपयोोग केे लिि£ए आवश्यक न रहेे हों। उक्त धाराा ५२ क केे अधीन मुख्य नि�यंंत्रक रााजस्व प्रीधिि˜करण

( सी सी आर ए ) केे अधीन वि�भि�न्न प्राधिि˜करणोंं को बीीस लाख रुपयों से अधिि˜क न हो, की रााशिशि§ केे शुल्क

केे प्रति�दााय स्वीकृत करनेे केे लिि£ए सशक्त कि�याा गया है तथाा बीीस लाख रुपयों से अधिि˜क केे रााशिशि§ केे शुल्क

का प्रति�दााय स्वीकृत करनेे केे लिि£ए मुख्य नि�यंंत्रक रााजस्व अधिि˜करण को सशक्त कि�याा गया है।

२.  संंपत्ति�योंं केे संव्यवहाारों मेंं दि�न

-प्रति�दि�न

वृद्धििnj हो रहीी है, जि�स

केे परि�णाामस्वरुप स्टााम्प शुल्क केे

प्रति�दााय केे लिि£ए कई आवेेदन दाखि�ल

हो रहेे हैं। समयाावधिि˜ केे दौराान सम्पत्ति�योंं केे मुल्यां�कन मेंं वृद्धििnj करनेे

केे कारण , मुख्य नि�यंंत्रक रााजस्व अधिि˜करण केे अधीन वि�भि�न्न प्राधिि˜कारि�योंं केे केेवल बीीस लाख रुपयों

तक स्टााम्प शुल्क केे आर्थि�िक अधिि˜कार-सीमा होने केे कारण, मुख्य नि�यंंत्रक रााजस्व अधिि˜करण केे समक्ष

ऐसे आवेेदनोंं की संख्या मेंं वृद्धििnj हुई है। मुख्य नि�यंंत्रक रााजस्व प्राधिि˜करण केे समक्ष ऐसे आवेेदनोंं की संख्या

बढ़ जाने से ऐसे आवेेदनोंं केे नि�पटाान की प्रक्रििĸया धीमी हो गई है।

इसलिि£ए, सरकाार, मुख्यनि�यं

ंत्रक रााजस्व प्राधिि˜करण केे अधीन प्राधिि˜कारि�योंं की आर्थि�िक अधिि˜कार-सीमा

बढ़ाने और ऐसे आवेेदनोंं केे शीघ्र नि�पटाान करनेे केे लिि£ए अधिि˜कारों का वि�केंंद्रीीकरण करनाा इष्टकर

समझती

है। सााथ ही, वि�द्यमान प्राधिि˜कारि�योंं केे अति�रि�क्त, संयुक्त महाानि�रीीक्षक रजि�स्ट्रीकरण और स्टााम्प अधीक्षक

को भी ऐसाा प्रति�दााय करनेे केे अधिि˜कार देने का प्रस्ताव है। उपर्यु�क्त प्रयोोजनोंं केे लिि£ए, उक्त अधिि˜नि�यम

की

धाराा ५२ क मेंं यथोोचि�त संशोधन कि�ए जाने का प्रस्तावि�त है।

३.  प्रस्तुत वि�धेेयक का आशय उपर्यु�क्त उद्देेश्यों को प्राप्त करनाा है ।

मुंं�बई,

दि�नांं�कि�त ४ मार्चच, २०२६। च

ंंद्रशेखर बावनकुळे,

रााजस्व मंंत्री |

(यथाार्थथ अनुवाद), 

श्रीी. अरुण कमळााबाई वाळू गि�ते, 

प्रभाारी भााषाा संचालक, 

म

हाारााष्ट्र रााज्य। 

वि¦धाान भवन,

जि�तेंद्र भोळे,

मुंं�बई,स

चि�व

-१,

दि�नांं�कि�त ५ मार्चच, २०२६।म

हाारााष्ट्र वि�धाानसभाा।

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