L. C. BILL No. VII OF 2026.
A BILL
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA STAMP ACT.
वि¦धाानपरि¡षद काा वि¦धेयक क्रमांंsक ७ सन् २०२६।
महााराष्ट्र स्टााम्प अधि�नि�यम मेंं अधि�कतर संंशोोधन करनेे संंबंंधीी वि¦धेयक।
क्योंकि� इसमेंं आगेे दर्शि§ित प्रयोोजनोंं केे लिि£ए, महाारााष्ट्र स्टााम्प अधििनि�यम
मेंं अधििकतर संशोधन करनाा
इष्टकर
है ; अत: भाारत गणरााज्य केे सतहत्तरवेंं वर्षष मेंं, एतद् द्वााराा, नि�म्न अधििनि�यम
अधििनि�यमि�
त कि�याा जाता
है :—
१. (१) यह अधििनि�यम
महाारााष्ट्र स्टााम्प (द्वि�तीीय संशोधन) अधििनि�यम
, २०२६ कहलाए।
सन् १९५८
का ६०।
संक्षििȦप्त नाम।
(१)
RNI No. MAHBIL /2009/31730
महााराष्ट्रट शासन राजपत्र
असाधाारण भााग सात
वर्षष १२, अंक १४(२)]
बुधवाार, माार्चच १८, २०२६/फााल्गुन २७, शकेे १९४७
[पृष्ठेे ३, किं�ंमत : रुपये ४७.००
असाधाारण क्रमांंsक २३
प्रााधि�कृृत प्रकााशन
अध्यादेश, वि¦धेयके व अधि�नि�यम यांंsचाा हिं�ंदी अनुवाद (देवनागरी लिि£पी)
महााराष्ट्र वि¦धाानमंंडल सचि�वाालय
महाारााष्ट्र वि�धाानपरि�षषद मेंं दि�नांं�क १८ माार्चच, २०२६ ई. को. पुर:स्थाापि�त नि�म्न वि�धेेयक महाारााष्ट्र वि�धाानपरि�षषद नि�यम
११३ केे अधीन
प्रकाशिशि§त कि�याा जाता है :—
भााग सात-२३–१
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महाराष्ट्रõ शासन रा असाधारण भाग सात, मार्च १८, २०२६/फाल्गुन २७, शके १९
२. महाारााष्ट्र स्टााम्प अधििनि�यम
की धाराा ५३क, की उप-धाराा (१) को, नि�म्न परंतुक जोड़ाा जाएगा,
अथाा�त्:—
“ परंतु जहाँँr कार्यवााही शुरू करनेे की सूचना छह वर्षष की उपरोल्लिčिखिित अवधिि केे भीतर जारी की
गई है, तब ऐसी कार्यवााही उक्त अवधिि केे अवसि�त होने केे कारणों द्वााराा समाप्त नहींं होगी और ऐसी
कार्यवााहीयाँँr मेंं मुख्य नि�यंंत्रक रााजस्व प्राधििकरण द्वााराा अंति�म
आदेश पारि�त कि�याा है तब तक जारी रहेेगी ।”।
सन् १९५८ का
६० की धाराा
५३क मेंं संशोधन।
सन् १९५८
का ६०।
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महाराष्ट्रõ शासन रा असाधारण भाग सात, मार्च १८, २०२६/फाल्गुन २७, शके १९
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उद्देेश्यों और काारणों काा वक्तव्य।
महाारााष्ट्र स्टााम्प अधििनि�यम
, (सन् १९५८ का ६०) की धाराा ५३क केे अधीन मुख्य नि�यंंत्रक रााजस्व
प्राधििकरण जि�लााधििकारी केे प्रमाणपत्र केे दि�नांं�क से छह वर्षष की अवधिि केे भीतर घााटे वाले स्टााम्प शुल्क
की वसूूली केे लिि£ए कार्यवााही शुरू कर सकताा है और यदि� कोई हो, तो ऐसे घााटे वाले शुल्क की वसूूली का
आदेश दे सकताा है।
२. लेखा परीक्षक महाानि�रीीक्षक और पंजीकरण महाानि�रीीक्षक और स्टााम्प नि�यंंत्रक केे कार्यलयों द्वााराा
कि�ए गए नि�रीीक्षण मेंं ऐसे लिि£खत पाए जाते हैं जि�न
पर सम्यक रूप से स्टााम्प नहींं लगाा है । स्टााम्प कलेेक्टर
ऐसे लिि£खतों की रि�पोोर्ट मुख्य नि�यंंत्रक रााजस्व प्राधििक़रण को भी करताा है जि�न
पर या तो गलतीी से या कि�सीी
और कारण से सम्य् क रूप से स्टााम्प नहींं लगाा है । नि�रीीक्षण या रि�पोोर्ट जि�लााधििकारी केे प्रमाणपत्र केे दि�नांं�क
से अलग-अलग अवधिि केे भीतर की जा सकतीी है या प्राप्त की जा सकतीी है। ऐसे नि�रीीक्षणों या रि�पोोर्टों केे
पश्चात् स्टााम्प शुल्क की वसूूली केे लिि£ए उक्त धाराा ५३क केे अधीन पुनरीीक्षण कार्यवााही छह वर्षष की अनुबद्ध
अवधिि केे दौराान अलग-अलग समय पर शुरू की जाती है ।
३. सोनी मोनी इलेक्ट्रॉनि�क्स लिि£मि�टेेड बनाम महाारााष्ट्र रााज्य (सन् २०१२ की रि�ट याचि�काा क्रमांं�क
२७५७) केे मामलेे मेंं बॉम्ब उच्च न्यायालय ने दि�नांं�क ७ अगस्त २०२५ का न्यायनि�र्णणय
देखििए, यह नि�र्णणय
दि�याा है कि� धाराा ५३क (१) मेंं उपबंधिित की गई छह वर्षष की अवधिि का अर्थथ यह होना चाहि�ए कि�, वसूूली
का आदेश उक्त समय सीमा केे भीतर पारि�त कि�याा जाना चाहि�ए।
हाालां�कि�, ऐसी अर्धध-न्यायि�क
पुनरीीक्षण कार्यवााही शुरू करनेे वाली सूचना छह वर्षष की अनुबद्ध
अवधिि केे भीतर जारी की जाती हैं, लेकि�न
कभीी-कभीी ऐसे मामलोो मेंं स्टााम्प शुल्क केे न्यायनि�र्णणयन
और सूचना जारी करनेे की प्रक्रि�याात्मक आवश्यकतााओं से संबंधिित लिि£खतों का नि�र्माा�ण, पक्षों आदि�
की व्यक्ति�िग
त सुनवााई से संबंधिित जटि�ल
मुद्दोंं केे कारण उक्त अवधिि से आगेे तक लंबि�त रहतेे हैं ।
ऐसी पुनरीीक्षण कार्यवााहि�योंं मेंं सरकाार का बड़ी मात्रा मेंं रााजस्व की रक्कम शामि�ल
होती है। यदि� ऐसे
मामलोंं को उनकेे शुरू होने केे पश्चात् अनुबद्ध अवधिि केे भीतर नि�पटााया नहींं जा सका, तो इससे
रााज्य केे रााजस्व का काफीी नुकसाान होगा ।
४. इसलिि£ए, रााज्य केे रााजस्व केे हि�त मेंं, सरकाार यह आवश्यक समझती है कि�, धाराा ५३क मेंं
संधोधन कि�याा जाए ताकि� यह उपबंध कि�याा जा सकेे कि� जहांं� धाराा ५३क(१) केे अधीन कार्यवााही शुरू
करनेे की सूचना छह साल की अवधिि केे भीतर जारी की गयीी है, तो ऐसी कार्यवााही समाप्त नहींं होगी और
अंति�म
आदेश पारि�त होने तक जारी रहेेगी ।
५. वि�धेेयक का उद्देश्य उपर्यु�क्त उद्देश्यों की प्राप्त करनाा है ।
मुंं�बई,
दि�नांं�कि�त १७ मार्चच, २०२६।
रााजस्व मंंत्री |
(यथाार्थथ अनुवाद),
श्रीी. अरुण कमळााबाई वाळू गि�ते,
प्रभाारी भााषाा संचालक,
म
हाारााष्ट्र रााज्य।
वि¦धाान भवन :
डॉ. वि¦लास आठवलेे,
मुंं�बई,
सचि�व
(३),
दि�नांं�कि�त १८ मार्चच, २०२६। म
हाारााष्ट्र वि�धाानपरि�षषद.
ON BEHALF OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATION, PRINTED AND PUBLISHED BY DIRECTOR,
RUPENDRA DINESH MORE, PRINTED AT GOVERNMENT CENTRAL PRESS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD,
MUMBAI 400 004 AND PUBLISHED AT DIRECTORATE OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATIONS,
21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004. EDITOR : DIRECTOR, RUPENDRA DINESH MORE.
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