L. A. BILL No. XXX OF 2026.

A BILL

TO AMEND THE BHARTIYA NYAYA SANHITA, 2023, IN ITS

APPLICATION TO THE STATE OF MAHARASHTRA.

वि¦धाानसभाा काा वि¦धेयक क्रमांंsक ३० सन् २०२६।

महाारााष्ट्र रााज्य को उसकी प्रयुक्तिòि मेंं यथाा लाागूू, भाारतीीय न्याय संहि�ता, २०२३, मेंं

संंशोोधन करनेे संंबंंधीी वि¦धेयक।

क्योंकि� इसमेंं आगेे दर्शि§ित प्रयोोजनोंं केे लिि£ये, महाारााष्ट्र रााज्य मेंं उसकी प्रयुक्तिòि मेंं यथाा लागू भाारतीीय

न्याय संहि�ताा, २०२३ मेंं संशोधन करनाा इष्टकर है ; अतः भाारत गणरााज्य केे सतहत्तरवेंं वर्षष मेंं, एतद् द्वााराा,

नि�म्न अधि�नि�यम

अधि�नि�यमि�

त कि�याा जाता है :—

१.  यह अधि�नि�यम

भाारतीीय न्याय संहि�ताा (महाारााष्ट्र संशोधन) अधि�नि�यम

, २०२६ कहलााए।

सन् २०२३

का ४५।

संक्षििȦप्त नाम।

(१)

भााग सात–२८-१

RNI No. MAHBIL /2009/31730

महाारााष्ट्रट शासन रााजपत्र

असाधाारण भााग सात

वर्षष १२, अंक १७ (२)]

बुधवाार, माार्चच २५, २०२६/चैैत्र ४, शकेे १९४८

[पृष्ठेे 3, किं�ंमत : रुपये ४७.००

असाधाारण क्रमांंsक २८

प्राधि�कृृत प्रकााशन

अध्यादेेश, वि¦धेयके व अधि�नि�यम यांंsचाा हिं�ंदीी अनुवाद (देेवनागरीी लि�पीी)

महाारााष्ट्र वि¦धाानमंंडळ सचि�वाालय

महाारााष्ट्र वि�धाानसभाा मेंं दि�नांं�क २५ माार्चच, २०२६ ई. को. पुुर:स्थाापि�त नि�म्न वि�धेेयक महाारााष्ट्र

वि�धाानसभाा नि�यम

११७ केे अधीन प्रकाशिशि§त कि�याा जाता है :–

2

महाराष्ट्रõ शासन रा

असाधारण भाग सात, मार्च २५, २०२६/चैत्र

४, शके १

२.  महाारााष्ट्र रााज्य को उसकी प्रयुक्तिòि मेंं यथाा लागू, भाारतीीय न्याय संहि�ताा, २०२३ (जि�सेे इसमेंं

आगेे, “उक्त संहि�ताा” कहाा गयाा है) की, धाराा ७२ की, उप-धाराा (१) मेंं, “ धाराा ७१ ” शब्द और अंकों केे

पश्चाात् “ या धाराा १२४ ” शब्द और अंक नि�वि�ष्ट कि�ए जायेंगेे ;

३.  उक्त संहि�ताा की धाराा ७५ की,—

(१)  उप-धाराा (१) केे,–

(एक)  खंंड (चाार) मेंं, “टि�प्पणि�याँँr ” शब्द केे पश्चाात्, “या” शब्द नि�वि�ष्ट कि�याा जाएगा;

(दो)  खंंड (चाार) केे पश्चाात्, नि�म्न खंंड जोड़ेे जाएंगेे, अथाा�त् :–

“(पाँँrच)  टेलीफोोन, ईमेेल, सोशल मीडि�याा प्लेटफॉर्मम या कि�सीी अन्य इलेक्ट्रॉनि�क

या

डि�जि�टल संचाार माध्यम से इस प्रकार का आपत्ति�जनक संचाार करनाा जो कामुक या अश्लील

प्रकृति� का हो ; या

(छह)  कि�सीी महि�ला

ा केे शरीीर केे कि�सीी भी अंग का वास्तवि�क

या मनग

ढ़ंंत चि�त्रण करनेे

सहि�त, जि�समेंं उस महि�ला

ा की कि�सीी भी सहमति�पू

ूर्वव या बििना सहमति�पू

ूर्वव यौन क्रििĸया मेंं संलिि£प्तता

दर्शा�नेे वाली कोई भी तस्वीर, ध्वनि� या वीडि�योो फाइल इलेक्ट्रॉनि�क

या कि�सीी अन्य प्रकार केे

मीडि�याा केे माध्यम से अपलोोड करनेे या प्रसारि�त करनेे की धमकीी देना ; या

(सात)  उस महि�ला

ा को बदनाम करनेे या उसकी प्रति�ष्ठाा को ठेस पहुंं�चााने केे लिि£ए कि�सीी

भी रूप मेंं सोशल इलेक्ट्रॉनि�क

मीडि�याा या कि�सीी अन्य मीडि�याा का उपयोोग करनाा ; या

(आठ)  उस महि�ला

ा केे नाम, वि�वरण, फोोटो या पहचाान केे कि�सीी अन्य साधन का प्रत्यक्ष

या अप्रत्यक्ष रूप से उसकी गरि�माा को ठेस पहुँँrचााने या उसकी नि�जता का उल्लंघन करनेे केे लिि£ए

उपयोोग करनाा ;”।

(२)  उप-धाराा (२) मेंं, “खंंड (तीन)” शब्द, कोष्ठक और अंक केे पश्चाात्, “खंंड (पांं�च)

या खंंड (छह) या खंंड (सात) या खंंड (आठ)” शब्द, अंक और कोष्टक नि�वि�ष्ट कि�ए जाएंगेे।

सन् २०२३ का

४५ की धाराा ७२

मेंं संशोधन।

सन् २०२३ का

४५ की धाराा ७५

मेंं संशोधन।

महाराष्ट्रõ शासन रा

असाधारण भाग सात, मार्च २५, २०२६/चैत्र

४, शके १

3

उद्देेश्यों और काारणों काा वक्तव्य

भाारतीीय न्याय संहि�ताा, २०२३ (सन् २०२३ का ४६) केे अध्याय पांं�च की धाराा ६३ से ९९ तक

महि�ला

ाओं और बच्चों केे वि�रुद्ध अपरााधों और उनकेे लिि£ए दंड का उपबंंध हैं। महाारााष्ट्र सरकाार रााज्य मेंं

महि�ला

ाओं को अति�रि�क्त सुरक्षा और संरक्षण करनेे केे लिि£ए महाारााष्ट्र रााज्य को उसकी प्रयुक्तिòि मेंं यथाा लागू,

उक्त संहि�ताा की कति�पय

धारााओं मेंं संशोधन करनाा इष्टकर समझती हैं। करनेे

२.  उक्त संहि�ताा मेंं प्रस्तावि�त संशोधन यथाा नि�म्न हैं:-

(एक) उक्त संहि�ताा की धाराा ७२ मेंं कति�पय

यौन अपरााधों केे पीड़ि�तोंं की पहचाान उजागर

करनेे केे अपरााध और उसकेे लिि£ए दंड का उपबंंध हैं। उक्त संहि�ताा की धाराा १२४ मेंं तेजाब केे

उपयोोग दादा स्वच्छापूर्ववक गंभीर चोट पहुंं�चााने केे अपरााच केे लिि£ए दंड का उपबंंध हैं, जो धाराा ७२

मेंं शामि�ल

नहींं है। इसलिि£ए, सरकाार उक्त धाराा ७२ मेंं यथोोचि�त संशोधन द्वााराा तेजाब हमलेे केे पीड़ि�त

की पहचाान उजागर करनेे केे लिि£ए दंड का उपबंंध करनाा इष्टकर समझती हैं।

(दो) उक्त संहि�ताा की धाराा ७५ मेंं वि�भि�न्न कृत्यों का वर्णणन हैं जो यौन उत्पीड़न केे अपरााध

समजेे जाते हैं। ईमेेल, सोशल मीडि�याा प्लेटफॉर्मम या कि�सीी अन्य इलेक्ट्रॉनि�क

या डि�जि�टल माध्यम से

कि�ए गए यौन उत्पीड़न केे कृत्य, जैसे आपत्ति�जनक संचाार, कि�सीी फोोटो, ऑडि�योो या वीडि�योो फाइल

को अपलोोड करनेे या प्रसारि�त करनेे की धमकीी आदि�, उक्त धाराा ७५ केे अंतर्गगत नहींं आते हैं।

महाारााष्ट्र सरकाार उक्त संहि�ताा की धाराा ७५ मेंं यथोोचि�त संशोधन द्वााराा ऐसे यौन उत्पीड़न केे कृत्यों

को शामि�ल

करनाा और उनकेे लिि£ए दंड का उपबंंध करनाा इष्टकर समझती हैं।

३.  यह संशोधन, शक्तिòि आपरााधि�क

वि�धि� (महाारााष्ट्र संशोधन) वि�धेेयक, २०२० (सन् २०२०

का वि�धाानसभाा वि�धेेयक क्रमां�क ५१) द्वााराा भाारतीीय दंड संहि�ताा, १८६० (सन् १८६० का ४५) मेंं प्रस्तावि�त

कि�ए गए थे, जि�सेे उक्त संहि�ताा द्वााराा नि�रस्त कर दि�याा गयाा है। चूं�कि�, उपर्यु�क्त नि�र्दि�िष्ट उपबंंध उक्त संहि�ताा

मेंं अंतरवि�ष्ट नहींं हैं, इसलिि£ए, यह संशोधन प्रस्तावि�त कि�ए गए हैं।

४.  प्रस्तुत वि�धेेयक का आशय उपर्यु�क्त उद्देेश्यों को प्राप्त करनाा हैं।

मुंं�बई,

देेवेंद्र फडणवीस,

दि�नांं�कि�त २४ मार्चच, २०२६।म

ुुख्यमंंंत्री।

(यथाार्थथ अनुवाद),

श्रीी. अरुण कमळााबाई वाळू गि�तेे,

प्रभाारी भााषाा संचाालक,

म

हाारााष्ट्र रााज्य,

वि¦धाान भवन : ज

ि�तेंद्र भोळे,

मुंं�बई,

सचि�व

-१,

दि�नांं�कि�त २५ मार्चच, २०२६।म

हाारााष्ट्र वि�धाानसभाा।

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