(१)
साामाान्य प्रशाासन वि¦भााग
मंंत्राालय, मादााम काामा मार्गग, हुुताात्मा रााजगुुरु चौौक
मुं�बई ४०० ०३२, दि�नांं�कि�त २७ मई २०२६।
MAHARASHTRA ORDINANCE No. V OF 2026.
AN ORDINANCE
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA GOVERNMENT
SERVANTS REGULATION OF TRANSFER AND PREVENTION OF
DELAY IN DISCHARGE OF OFFICIAL DUTIES ACT, 2005.
महाारााष्ट्र अध्यादेेश क्रमांंsक ५ सन् २०२६।
महाारााष्ट्र सरकाारी कर्मचाारि�यों के स्थाानांंsतरण का वि¦नि�यमन और पदीय कर्ततव्यों के नि�र्ववहन में
वि¦लंंब की रोकथााम अधििनि�यम, २००५ में अधििकतर संंशोधन करनेे संंबंधीी अध्यादेेश।
क्योंकि� रााज्य विि¦धाानमंंडल के दोनोंं सदनोंंं काा सत्र नहींं चल रहाा है ;
RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाारााष्ट्रट शाासन रााजपत्र
असााधारण भााग साात
वर्षष १२, अंंक १९]
मंंगळवार, जून २, २०२६/ज्येष्ठ १२, शकेे १९४८
[पृष्ठे 3, किं�ंमत : रुपये ४७.००
असााधारण क्रमांंsक ३२
प्राधििकृत प्रकाशन
अध्यादेेश, वि¦धेयके व अधििनि�यम यांंsचाा हिं�ंदीी अनुवाद (देेवनागरी लि�पीी).
भागग सात-३२–१
2
महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात, जून २, २०२६/ज्येष्ठ १२, शके १९
और क्योंकि� महाारााष्ट्र के रााज्यपााल काा समाधाान हो चुकाा है कि�, ऐसी परि�स्थिĒिति�याँँr विि¦द्यमान
हैं जि�नकेे काारण उन्हें इसमेंं आगेे दर्शिि§ित प्रयोजनोंं के लि�ए, महाारााष्ट्र सरकाारी कर्ममचारि�यों के स्थानांं�तरण
काा विि¦नि�यमन और पदीीय कर्ततव्यों के नि�र्ववहन मेंं विि¦लंब की रोकथााम अधि�नि�यम, २००५ मेंं अधि�कतर संशोधन
करनेे के लि�ए सद्य काार्ययवाही करनाा आवश्यक हुुआ है ;
अब, इसलि�ए, भारत के संविि¦धाान के अनुच्छेेद २१३ के खण्ड (१) द्वााराा प्रदत्त शक्तििòियों काा प्रयोगग
करतेे हुुए, महाारााष्ट्र के रााज्यपााल, एतद् द्वााराा, नि�म्न अध्यादेश प्रख्यापि�त करतेे है, अर्था�त् :—
१. (१) यह अध्यादेश महाारााष्ट्र सरकाारी कर्ममचारि�यों के स्थानांं�तरण काा विि¦नि�यमन और पदीीय
कर्ततव्यों के नि�र्ववहन मेंं विि¦लंब की रोकथााम (संशोधन) अध्यादेश, २०२६ कहलााए।
(२) यह तुरन्त प्रवृत्त होगाा ।
२. महाारााष्ट्र सरकाारी कर्ममचारि�यों के स्थानांं�तरण काा विि¦नि�यमन और पदीीय कर्ततव्यों के नि�र्ववहन मेंं विि¦लंब
की रोकथााम अधि�नि�यम, २००५ की धााराा ४ की,—
(क) उप-धााराा (४) के,—
(एक) विि¦द्यमान परन्तुक के पूर्वव नि�म्न परन्तुक नि�विि¦ष्ट कि�याा जायेगाा, अर्था�त् :—
“ परन्तु जनगगणनाा २०२७ से संबंधि�त चल रहेे काार्यों के काारण वर्षष २०२६ मेंं कि�येे जानेवाले
सरकाारी कर्ममचारि�यों के आम स्थानांं�तरण ३० जून २०२६ को या के पूर्वव कि�येे जाएँगेे। ”;
(दो)विि¦द्यमान परन्तुक मेंं, “परन्तु” शब्द के स्थान मेंं “परन्तु आगेे यह कि�” शब्द रखेे
जायेंगेे ;
(ख) उप-धााराा (४क) अपमाार्जि�ित की जायेगीी।
संक्षििȦप्त नााम
और प्रारम्भण।
सन् २००६ काा
महाा. २१।
सन् २००६ काा
महाा. २१।
सन् २००६
काा महाा. २१
की धााराा ४ मेंं
संशोधन।
महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात, जून २, २०२६/ज्येष्ठ १२, शके १९
3
वक्तव्य।
महाारााष्ट्र सरकाारी कर्ममचारि�यों के स्थानांं�तरण काा विि¦नि�यमन और पदीीय कर्ततव्यों के नि�र्ववहन मेंं विि¦लंब की
रोकथााम अधि�नि�यम, २००५, (सन् २००६ काा महाा. २१) सरकाारी कर्ममचारि�यों के स्थानांं�तरण काा विि¦नि�यमन
और पदीीय कर्ततव्यों के नि�र्ववहन मेंं विि¦लंब की रोकथााम के उपबंंध करनेे के लि�ए अधि�नि�यमि�त कि�याा गयाा है।
उक्त अधि�नि�यम की धााराा ४ यह उपबंंध करतीी है कि�, सरकाारी कर्ममचारि�यों काा स्थानांं�तरण सामान्यत: वर्षष
मेंं केवल एक बार अप्रैल या मई महीीने मेंं कि�याा जायेगाा।
२. जनगगणनाा २०२७ संपूर्णण भारत मेंं आयोजि�त की जा रहीी है। जनगगणनाा २०२७ काा पहलाा चरण
अर्था�त् मकाान सूचीकरण और आवास जनगगणनाा महाारााष्ट्र रााज्य मेंं १६ मई २०२६ से १४ जून २०२६
तक की जा रहीी है। भारत सरकाार ने सभी रााज्यों और केंद्र शासि�त प्रदेशों से जनगगणनाा २०२७ के लि�ए नि�युुक्त
जनगगणनाा पदााधि�काारि�यों काा स्थानाान्तरण न करनेे काा अनुरोध कि�याा गयाा है। अत्: जनगगणनाा २०२७ के
पहलेे चरण काा सुचारु संचालन करनेे के लि�ए उपबंंध करनाा इष्टकर समझाा गयाा है कि�, वर्षष २०२६ मेंं कि�येे
जानेवाले सरकाारी कर्ममचारि�यों के सामान्य स्थानांं�तरण उक्त अधि�नि�यम की धााराा ४ मेंं यथोचि�त संशोधन द्वााराा
३० जून २०२६ को या के पूर्वव कर दि�ए जाएं।
३. रााज्य विि¦धाानमंंडल के दोनोंं सदनोंंं काा सत्र नहींं चल रहाा है और महाारााष्ट्र के रााज्यपााल काा
यह समाधाान हो चुकाा है कि�, एसी परि�स्थिĒिति�याँँr विि¦द्यमान हैं जि�नकेे काारण उन्हे उपर्यु�क्त प्रयोजनोंं के
लि�ए, महाारााष्ट्र सरकाारी कर्ममचारि�यों के स्थानांं�तरण काा विि¦नि�यमन और पदीीय कर्ततव्यों के नि�र्ववहन मेंं विि¦लंब
की रोकथााम अधि�नि�यम, २००५ मेंं अधि�कतर संशोधन करनेे के लि�ए सद्य काार्ययवाही करनाा आवश्यक हुुआ
है, अत: यह अध्यादेश प्रख्यापि�त कि�याा जाताा है।
जि�ष्णु देेव वर्मामाा�,
मुं�बई,म
हाारााष्ट्र के रााज्यपााल।
दि�नांं�कि�त २७ मई २०२६।म
हाारााष्ट्र के रााज्यपााल के आदेश तथाा नााम से,
व्ही रााधा,
सरकाार के अपर मख्यसचि�व।
(यथार्थथ अनुवाद),
श्रीी. अरुण कमळााबाई वाळू गि�ते,
प्रभारी भाषाा संचालक,
महाारााष्ट्र रााज्य।
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