L. A. BILL No. XLVIII OF 2026.
A BILL
TO PROVIDE FOR RECOGNITION OF WOMEN FARMERS AND
ISSUANCE OF WOMAN FARMER CERTIFICATES, IN ORDER
TO ENABLE THEIR ACCESS TO VARIOUS WELFARE POLICIES,
PROGRAMMES, SCHEMES AND CREDIT, TO ESTABLISH A WOMEN
FARMERS DATABASE, A MAHARASHTRA STATE FUND FOR WOMEN
FARMERS, A WOMEN FARMERS EMPOWERMENT CELL, WOMEN
FARMERS EMPOWERMENT COUNCIL AND STATE MONITORING
COMMITTEE, AND FOR MATTERS CONNECTED THEREWITH OR
INCIDENTAL THERETO.
वि¦िधाानसभाा काा वि¦िधेेयक क्रमांंsक ४८ सन् २०२६।
महिªिलाा किििसाानाेंंɞ काेे¸ मान्यताा देेनेे और उन्हेे महिªिलाा किििसाान प्रमाणपत्र जाारी करनाा आवश्यक हैै तााकििि
वह वि�िभिििन्न क
ल्याणकारी नीीति�ियाेंंɞ, कायटक्रमाेंंɞ याेे¸जनााओं और ऋण का लााभ उठाा सकेे, महिªिलाा किििसाानाेंंɞ का
डेेटााबेेस, महिªिलाा किििसाानाेंंɞ केे लि�िए महाराष्ट्र राज्य काेे¸ष, महिªिलाा किििसाान सशक्तिòि�करण कक्ष, महिªिलाा किििसाान
सशक्तिòि�करण परि�िषद और राज्य नि�िगरानी समि�िति�ि की स्थाापनाा करनेे तथाा तत्संंबंंधीी या उससेे
आनुुषंंगि�िक
मामलाेंंɞ केे लि�िए उपबंंध क
रनेे संंबंंधीी वि�िधेेयक।
क्याेंंɞकि�ि राज्य केे ग्राामीण क्षेेत्रोंं मेंं बड़ीी संंख्या मेंं महििªलााएंं कृृषि� क्षेेत्र मेंं का
ाययरत हैंं;
RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाारााष्ट्र शाासन रााजपत्र
असाधाारण भााग सात
वर्षष १२, अंंक २७ (२)]
बुुधवाार, जुुलैै १, २०२६/आषााढ १०, शकेे १९४८
[पृृष्ठेे 16, किं�ंमत : रुपयेे ४७.००
असाधाारण क्रमांंsक ५०
प्रााधि�कृृत प्रकााशन
अध्यादेेश, विि¦धेेयकेे व अधि�नि�यम यांंsचाा हिं�ंदीी अनुुवाद (देेवनागरी लि�पीी).
महाारााष्ट्र विि¦धाानमंंडळ सचि�वाालय
महाराष्ट्र वि�धाानसभा
ा मेंं दि�नांं�क १ जुुलाइɓ, २०२६ ई.को. पुुर:स्थाापि�त नि�म्न वि�धेे
यक महाराष्ट्र वि�धाानसभा
ा नि�यम ११७ केे अधीीन
प्रकाशि�ित कििया जााताा हैै :-
भाग सात-५०–१
(१)
2
महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात, जुलै १, २०२६/आषषाढ १०, शके १९४८
और क्याेंंɞकि�ि कृृषि� मेंं महििªलााओं की बढ़ती भागीदारी को देेखतेे हुुए, कृृषि� केे भवि�ष्य मेंं वि�कास और
स्थि�िरताा केे लि�ए, जलवाायुु परि�वर्तन केे
युुग मेंं खा
ाद्य सुुरक्षा की रक्षा केे लि�ए और महििªलाा कििसाानोंंं और उनकेे
परि�वाारोंं केे कल्यााण केे लि�ए महििªलाा कििसाानोंंं की मान्यताा और सशक्तििòिकरण करनाा आवश्यक हैै;
और क्याेंंɞकि�ि महििªलाा कििसाानोंंं को मान्यताा देेनाा और उन्हेंं महििªलाा कििसाान प्रमाण पत्र जाारी करनाा
आवश्यक हैै तााकिि वह वि�भििन्न कल्या
ाणकारी नीीति�योंं, काययक्रमोंं, योजनााओं और ऋण का लााभ उठाा सकेंं,
महििªलाा कििसाानोंंं का डेेटााबेेस स्थाापि�त क
रनेे, महििªलाा कििसाानोंंं केे लि�ए, महाराष्ट्र राज्य कोष, महििªलाा कििसाान
सशक्तििòिकरण कक्ष, महििªलाा कििसाान सशक्तििòिकरण परि�षद और राज्य नि�गरानी समि�ति� कीी स्थाापनाा करनेे और
इससेे तत्संंबंंधि�त याा उसकेे आनुुषंंगि�क माामलोंं केे लि�ए उपबंंध क
रनाा इष्टकर हैै, अत: भारत गणराज्य केे
सतह
त्तरवेंं वर्षष मेंं, यह अधि�िनि�ियम अधि�नि�यमि�त कििया जााताा हैै,—
१. यह अधि�नि�यम महाराष्ट्र महििªलाा कििसाान सशक्तििòिकरण अधि�नि�यम, २०२६ कहलााए।
२. इस अधि�नि�यम मेंं, जब तक की
ी संंदर्भ सेे अन्यथाा अपेेक्षि�त न होो,—
(क) “कृृषि�” का ताात्पय सभीी गति�िवि�ि�धि�ियाँँr सम्मि�ि�लि�ित हैै जि�िसमेंं पारि�श्रमि�क केे सााथ याा बि�नाा
पारि�श्रमि�क केे, फसलोंं की खेेतीी, बीीज उत्पाादन, पशुुपालन, मुुर्गीी पालन, दुुग्ध उत्पाादन, पशुुपालन,
मधुुमक्खीी पालन, चाारा उत्पाादन, मछली पालन, मत्स्य पालन, जलीीय संंवधन, रेेशम उत्पाादन, कृृमि�ि
पालन, बाागवानी, पुुष्प उत्पाादन, मशरूम की खेेतीी, कृृषि�-वानि�कीी, चरााई या खाद केे लि�ए कििसी भी भूूमि�
या उसकेे भाग का उपयोग, सभीी प्रकार की खाद बनाानाा या स्वरोजगाार, पट्टेेदारी खेेतीी, बटााईदारी या अन्य
प्रकार की खेेतीी सहििªत स्थाानांं�तरि�त खेेती
ी, स्वाामि�त्व अधि�काारोंं या उपयोग अधि�काारोंं केे आधार पर लघुु
या गैैर-इमारती वन उत्पाादोंं का संंग्रह, उपयोग और बि�क्रीी सेे संंबंंधि�त सभी
ी गति�वि�धि�याँँ
r शामि�ल हैै, सेे हैै;
(ख) “अपीलीय अधि�काारी” का ताात्पयय, राज्य सरकार द्वाारा अधि�नि�यम की धाारा ४ केे अधीीन
नि�युुक्त अधि�काारी सेे हैै ;
(ग) “नाामि�त अधि�काारी” का ताात्पयय, राज्य सरकार द्वाारा अधि�नि�यम की धाारा ४ केे अधीीन;
नाामि�त अधि�काारी सेे हैै;
(घ) “कििसाान” का ताात्पयय महाराष्ट्र की कििसी नि�वाासी महििªलाा सेे हैै, जोो व्यक्तििòिगत रूप सेे या
कििसी अन्य व्यक्तििòि केे सााथ संंयुुक्त रूप सेे, नि�म्नलि�खि�त का
ायय करती हैै,—
(एक) कृृषि� मेंं जुुड़ेे हुुए लोोग;
(दाेे¸न) वि�भििन्न प्रकार केे कृृषि� बीीजोंं, वि�भििन्न प्रकार केे पशुुओं और मछलि�योंं केे नवााचाार, संंरक्षण,
परि�रक्षण या प्रसाार मेंं योोगदान देेनाा, जलवाायुु परि�वर्तन केे
प्रति� अनुुकूूलनशीीलताा केे लि�ए खेेतीी केे तरीीकेे
अपनाानाा, एकीकृृत कृृषि� प्रणाली का अध्ययन क
रनाा;
(तीन) प्राथमि�क
प्रसंंस्करण मेंं संं
लग्न होोकर प्राथमि�क
उपज याा कच्चेे कृृषि� और पशुु उत्पाादोंं मेंं
मूूल्यवर्धन क
रनाा; और इसमेंं नि�िम्न शाामि�ल हैै,-
(क) कृृषि� परि�चाालन धाारक, मौखि�क याा लि�खि�त ठेे
का या समझौौतेे केे अधीीन पट्टेेदार कििसाान, भूूमि�हीीन
कििसाान, भूूमि�हीीन पशुुपालक, कृृषि� मजदूूर, बाागान मजदूूर, पशुुपालक;
(ख) राज्य मेंं क
म सेे कम एक वर्षष मेंं कृृषि� माैै�सम केे दाैै�रान खेेतीी करतेे हैंं और कििसी भी प्रयाेे¸जन सेे
राज्य केे बााहर या भीतर प्रवास क
रनेेवााली महििªलााएंं ;
(ड.)“ग्रााम सभाा” ताात्पयट,—
संंक्षि�िप्त नााम।
परि�ि�भाषाएँँ ।
महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात, जुलै १, २०२६/आषषाढ १०, शके १९४८
3
(एक) अनुुसूूचि�त क्षेेत्र केे संंबंंध मेंं, ग्रााम सभाा को पंंचाायत (अनुुसूूचि�त क्षेेत्रोंं तक वि�स्
ताार) अधि�नि�यम,
१९९६ केे अधी�न बना
ाए गए नि�यमोंं केे अनुुसाार परि�भााषि�त कििया गया हैै, और
(दाेे¸) अनुुसूूचि�त क्षेेत्र सेे कििसी अन्य क्षेेत्र केे संंबंंध मेंं महाराष्ट्र ग्रााम पंंचाायत अधि�िनि�ियम की धाारा ३
केे खंंड (९) मेंं यथाा परि�भााषि�त ग्रााम सभाा सेे हैै;
(च)“भूूमि�” का ताात्पयय उस भूूमि� सेे हैै जि�सकाा उपयोग कृृषि� प्रयोजनोंंं केे लि�ए कििया जााताा हैै, या कििया
जाा सकताा हैै, और इसमेंं,—
(एक) ऐसी भूूमि� पर या उससेे सटीी हुुई कृृषि� भवनोंंं केे स्थल;
(दाेे¸न) वह भूूमि� जि�स पर घाास प्रााकृृति�क
रूप सेे उगती हैै;
(तीन) ऐसी भूूमि� पर वृृक्ष और खड़ीी फसलेंं;
(चाार) कृृषि� प्रयोजन केे
लि�ए जल कीी आपूूर्ति�ि या भंंडारण केे लि�िए ऐसी भूूमि� पर संंनि�र्मि�ित याा बनााए
रखी गयी नहरेंं, चैैनल, कुुएँँ, पाइप, जलााशय या अन्य कायय; और
(पाँँrच) जल नि�का
ासी व्यवस्थाा, तटबंंध, बांं�ध या ऐसी भूूमि� सेे संंबंंधि�त कोोई अन्य कायय, या कृृषि� प्रयोजनोंंं
केे लि�ए उस पर संंनि�र्मि�ित याा बनााए रखेे गए कायय; और ऐसी भूूमि� पर सभीी संंरचनााएंं और स्थाायी जाेे¸ड़ सेे हैै;
(छ) “नि�धि�” का ताात्पयय धाारा ११ केे अधि�िन स्थाापि�त महििªलाा कििसाानोंंं केे लि�ए महाराष्ट्र राज्य
नि�धि� सेे हैै
;
(ज) “नगर पंंचाायत ” का ताात्पय महाराष्ट्र नगर परि�षद नगर पंंचाायत और औद्याेे¸गि�िक नगरी
अधि�िनि�ियम १९६५ केे अधीीन गठि�ित नगर पंंचाायत सेे हैै;
(झ) “वि�िहिªित” का ताात्पय इस अधि�नि�यम केे अधीीन नि�
यमोंं द्वाारा वि�िहिªित सेे हैै;
(त्र) “प्राथमि�क
प्रसंंस्करण” का ताात्पय कच्चेे उत्पााद याा साामग्री को उपभोग केे लि�ए या आगेे
केे प्रसंंस्करण केे लि�ए यथाेे¸चि�ित प्ररूप मेंं परि�वर्ति�ित करनाा, सेे हैै;
(ट) “अवि�वााहििªत महििªलाा” का ताात्पयय १८ वर्षष सेे अधि�क
आयुु की ऐसी महििªलाा सेे हैै जि�सकाा
पति� याा तोो मर चुुका हैै या लाापताा हैै, जि�सेे छोोड़ दि�या
ा गया हैै या कानूूनी रूप सेे अलग कर दि�याा गया
हैै, तलााकशुुदा हैै या अवि�वााहििªत महििªलाा सेे हैै;
(ठ) “राज्य नि�गरानी समि�ति�” का ताात्पयय, अधि�नि�यम की धाारा (१३) केे अधीीन गठि�त रााज्य
नि�गरानी समि�ति� सेे हैै;
(ड) “ग्रााम पंंचाायत” का ताात्पयय, महाराष्ट्र ग्रााम पंंचाायत अधि�नि�यम केे अधीीन गठि�त पंंचाायत सेे हैै;
(ढ) “महििªलाा कििसाान” का ताात्पयय, कििसी भी ऐसी महििªलाा सेे हैै जि�सकीी आयुु अठाारह वर्षष या
उससेे अधि�क हैै और जोो कििसाान हैै;
(ण) “महििªलाा कििसाान सहा
ायताा अधि�काारी” का ताात्पयय अधि�नि�यम की धाारा १५ केे अधीीन
नि�युुक्त महििªलाा कििसाान सहा
ायताा अधि�काारी सेे हैै;
(त) “महििªलाा कििसाान प्रमाणपत्र” का ताात्पयय अधि�नि�यम की धाारा ५ और ६ केे अधीीन नाामि�त
अधि�काारी द्वाारा कििसी महििªलाा को जाारी कििए गए प्रमाण पत्र सेे हैै;
(थ) “महििªलाा कििसाान स
शक्तििòिकरण कक्ष” का ताात्पयय अधि�नि�यम की धाारा १४ केे अधीीन
स्थाापि�त महििªलाा कििसाान सशक्तििòिकरण कक्ष सेे हैै;
(द) “महििªलाा कििसाान सशक्तििòिकरण परि�षद” या “परि�षद” का ताात्पयय, अधि�नि�यम की धाारा १२
केे अधीीन गठि�त महििªलाा कििसाान सशक्तििòिकरण परि�षद सेे हैै;
सन् १९५९ का
३ ।
सन् १९६५ का
४० ।
सन् १९५९ का
३ ।
सन् १९६६ का
४० ।
भाग सात-५०–१अ
4
महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात, जुलै १, २०२६/आषषाढ १०, शके १९४८
(ध) “महििªलाा कििसाान डेेटााबेेस” का ताात्पयय अधि�नि�यम की धाारा १० केे अधीीन संंग्रहीीत और
बनााए रखा गया महििªलाा कििसाान डेेटााबेेस सेे हैै।
३. प्रत्येेक
महििªलाा जि�सकीी आयुु अठाारह वर्षष हो चुुकी हैै और जोो ग्रााम पंंचाायत याा नगर पंंचाायत क्षेेत्र
मेंं रहतीी हैै और जोो भी कििसाान हैै, वह इस अधि�नि�यम केे अधीीन महििªलाा कििसाान केे रूप मेंं माान्यताा प्राप्त करनेे
केे लि�िए पात्र हाेे¸गी और उसेे इस अधि�नि�यम केे प्रयोजनोंंं केे लि�ए महििªलाा कििसाान प्रमाण पत्र दि�याा जाा सकेेगा ।
४. (१) राज्य सरकार रााजपत्र अधि�सूूचनाा द्वाारा ग्रााम पंंचाायत क्षेेत्र केे लि�ए सहाायक कृृषि� अधि�काारी
केे पद सेे अनि�िम्न श्रेेणी
ी सेे न होोनेे वाालेे और कृृषि� अधि�काारी केे पद सेे अनि�िम्न श्रेेणी
ी सेे न होोनेे वाालेे ऐसेे नामि�त
अधि�काारि�योंं की ऐसी संंख्या जाेे¸ इस अधि�नि�यम केे अधीीन कर्ततव्योंं और कार्योंं केे नि�र्ववहन केे लि�ए, वह उचि�त
समझेे जाानेेवाालेे नगर पंंचाायत क्षेेत्रोंं का उपयोग कर सकताा हैै।
(२) राज्य सरकार रााजपत्र मेंं अधि�सूूचनाा द्वाारा इस अधि�नि�यम केे अधीीन शक्तििòियोंं का प्रयोग
करनेे और कर्ततव्योंं का नि�र्ववहन क
रनेे केे
लि�ए, ऐसेे क्षेेत्रोंं केे लि�ए, जैैसाा उचि�त समझेे, ताालुुका कृृषि�
अधि�काारी केे पद सेे अनि�िम्न श्रेेणी
ी केे ऐसेे अधि�काारि�योंं की संंख्या को अपीलीय अधि�काारी केे रूप मेंं
नि�युुक्त कर सकेेगा।
५. (१) कोई भी महििªलाा जोो कििसाान हैै और ग्रााम पंंचाायत केे अधि�काार क्षेेत्र मेंं रहतीी हैै जाेे¸ महििªलाा
कििसाान केे
रूप मेंं माान्यताा प्राप्त क
रनेे और महििªलाा कििसाान प्रमाण पत्र प्राप्त क
रनेे केे
लि�ए नाामि�त अधि�काारी
को वि�िहिªित प्रपत्र और जैैसाा की वि�िहिªित किििया जााए ऐसी रीत्या आवेेदन क
र सकेेगी।
(२) नाामि�त अधि�काारी ग्रााम सभाा केे पूूव उप-धारा (१) केे अधीीन प्रााप्त सभीी आवेेदनोंंं को
अगली नि�यमि�त बैैठक मेंं या इस प्रयाेेे¸जन केे
लि�ए बुुलााई गई वि�शेेष बैैठक मेंं रखेेगाा।
(३) ग्रााम सभाा उप-धारा (२) केे अधीीन उसकेे समक्ष रखेे गए आवेेदनोंंं की प्राप्ति�� पर वि�िचाार
वि�िमशट, करनेे केे
पश्चाात् अधि�िनि�ियम धाारा २ केे खंंड (क) और (घ) मेंं नि�िदि�िटष्ट प्रत्येेक
आवेेदक
खंंडोंं मेंं उल्लि�िखि�त
गति�वि�धि�योंं
मेंं सेे क
म सेे कम एक गति�वि�धि� को
ो करनाा हैै और ऐसेे आवेेदन को
ो
स्वीीकार या अस्वीीकार करनेे का
ा प्रस्तााव पारि�त करेंं
:
परन्तुु, ऐसेे कििसी आवेेदन केे अस्वीीकृृत होोनेे केे मामलेे मेंं, ग्रााम सभाा प्रस्तााव मेंं अस्वीीकृृति� केे कारणोंं
को लि�खि�त
रूप मेंं प्रस्तुुत करेेगा:
परन्तुु और यह कििि, ग्रााम सभाा संंकल्प द्वाारा भी,उसकाा प्रस्तााव अपनेे अधि�काार क्षेेत्र मेंं उन महििªलााओं
को मान्यताा देेनाा, जि�न्होंंनेे उप-धारा (१) केे अधीीन महििªलाा कििसाान प्रमाण पत्र केे लि�ए आवेेदन नहींं
कििया
हैै परन्तुु जाेे¸ कििसाान हैंं, उन्हेंं महििªलाा कििसाान केे
रूप मेंं नाामि�त अधि�काारी को नि�र्देदेेशि�त करेंं
और उन्हेंं महििªलाा
कििसाान प्रमाण पत्र जाारी करनेे का
ा नि�र्देदेेश देंं।
(४) जहाँँr ग्रााम सभाा उप-धारा (३) केे अधीीन अपनेे संंकल्प द्वाारा यदि� कोोई प्रस्तााव पारि�त होोताा
हैै और कििसी महििªलाा को महििªलाा कििसाान केे रूप मेंं माान्यताा दीी जााती हैै, तोो नाामि�त अधि�काारी ऐसेे प्रस्तााव
पारि�त होोनेे केे
पंंद्रह दि�नोंंं केे भीतर, वि�िहिªित प्ररूप और रीत्या, महििªलाा कििसाान प्रमाण पत्र जाारी करेेगाा।
(५) जहाँँr ग्रााम सभाा उप-धारा (३) केे अधीीन अपनेे संंकल्प द्वाारा यदि� कोोई संंकल्प पारि�त
होनेे केे
साात दि�नोंंं केे भीतर आवेेदक को महििªलाा कििसाान केे
रूप मेंं माान्यताा देेनेे सेे
इनकाार करताा हैै,
तो नाामि�त अधि�काारी इस संंकल्प पारि�त होोनेे केे साात दि�नोंंं की अवधि�ि भीतर आवेेदक को लि�खि�त
रूप
मेंं सूूचि�त करेे
गाा,—
(क) ग्रााम सभाा मेंं यथाा वि�िनि�िदि�िटष्ट प्रस्तााव की अस्वीीकृृति� केे
कारणोंं को नि�र्दि�िष्ट कििया गया हैै;
(ख) वह अवधि� जि�सकेे
भीतर ऐसी अस्वीीकृृति� केे
वि�रुद्ध अपील कीी जाा सकतीी हैै; और
महििªलाा कििसाान को
ो
मान्यताा।
नाामि�त अधि�काारी
और अपीलीय
अधि�काारी।
ग्रााम पंंचाायत मेंं
महििªलाा कििसाान
प्रमाण पत्र जाारी
करनाा।
महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात, जुलै १, २०२६/आषषाढ १०, शके १९४८
5
(ग) उस अपीलीय अधि�काारी का वि�वरण जि�सकेे
समक्ष अपील दाायर की जाा सकतीी हैै।
(६) कििसी भी पीड़ि�त व्यक्तििòि द्वाारा,-
(क) ग्रााम सभाा संंकल्प उप-धारा (३) केे अधीीन कििसी महििªलाा को महििªलाा कििसाान केे
रूप मेंं
मान्यताा देेनेे केे
आवेेदन को
ो अस्वीीकार करताा हैै ताेेे¸ ऐसेे संंकल्प केे दि�िनांं�क सेे एक सौौ बीीस दि�नोंंं की
अवधि� केे
भीतर, या
(ख) उप-धारा (४) केे अधीीन नि�र्दि�िष्ट स
मय अवधि� केे
भीतर नाामि�त अधि�काारी द्वाारा महििªलाा
कििसाान प्रमाण पत्र जाारी करनेे मेंं वि�फल हाेे¸नेे पर ऐसी अवधि� कीी समााप्ति�� केे
बााद और उसकेे एक सौौ
बीस दि�नोंंं की अवधि� केे
भीतर,
अपीलीय अधि�काारी केे समक्ष जैैसेे कििि वि�िहिªित किििया जााए ऐसेे वि�िहिªित प्रपत्र और रीत्या, अपील कीी
जाा सकेेगी।
(७) अपीलीय अधि�काारी काेे¸ अपील प्रााप्त होोनेे पर, अपील केे पक्षकराेंंɞ को सुुनवााई का युुक्तिòि�युुक्त
अवसर देेनेे केे
पश्चाात्, अपील पर वि�चाार करेेगाा और अपील दााखि�ल होोनेे दि�िनांं�क सेे तीीस दि�नोंंं की अवधि�
केे भीतर तर्ककसंंगत आदेेश केे सााथ उसकाा नि�पटाारा करेेगाा :
परन्तुु, अपीलीय अधि�काारी एक सौौ बीीस दि�नोंंं की अवधि� समााप्त होोनेे केे
बााद भीी अपील स्वी
ीकार
कर सकताा हैै, यदि� उसकाा यह समााधान हाेे
¸ताा हैै कििि, अपीलकर्ताताा� पर्याा�प्त काारण सेे उक्त अवधि� केे
भीतर
अपील दााखि�ल क
रनेे सेे वंंचि�त रहा हो।
(८) यदि� अपीलीय अधि�काारी अपील कीी सुुनवााई करनेे पर उसकीी यह राय हो किि, अपीलकर्ताताा�
एक महििªलाा कििसाान हैै, तोो वह नाामि�त अधि�काारी को आदेेश काेे¸ दि�िनांं�क सेे पंंद्रह दि�नोंंं की अवधि� केे
भीतर
अपीलकर्ताताा� को महििªलाा कििसाान प्रमाणपत्र जाारी करनेे का
ा नि�र्देदेेश देेगा।
६. (१) नगर पंंचाायत केे अधि�काार क्षेेत्र मेंं रहनेेवााली कोई भी महििªलाा कििसाान, महििªलाा कििसाान केे
रूप मेंं माान्यताा प्राप्त क
रनेे और महििªलाा कििसाान प्रमाणपत्र प्राप्त क
रनेे केे
लि�ए जैैसाा कििि वि�िहिªित किििया जााए,
ऐसेे प्रपत्र और रीत्या, सेे नाामि�त अधि�काारी को आवेेदन क
र सकतीी हैै।
(२) नगर पंंचाायत कीी अपनी अगली आम बैैठक केे सक्षम नाामि�त अधि�काारी उप-धारा (१)
केे अधीीन प्रााप्त सभीी आवेेदनोंंं को रखेेगाा।
(३) नगर पंंचाायत कीी उप-धारा (२) केे अंंतर्गत उसकेे समक्ष रखेे गए आवेेदनोंंं की प्राप्ति�� पर
यह वि�चाार करनेे केे
बााद किि क्याा अधि�िनि�ियम की धाारा (२) केे खंंड (क) और (घ) मेंं तथाा नि�िदि�िटष्ट
प्रत्येेक
आवेेदक खंंडोंं मेंं उल्लि�िखि�त
गति�वि�धि�योंं
मेंं सेे क
म सेे कम एक गति�वि�धि� को
ो करनाा हैै और
ऐसेे आवेेदन को
ो स्वीीकार या अस्वीीकार करनेे का
ा संंकल्प पारि�त क
र सकेे:
परन्तुु, ऐसेे कििसी आवेेदन केे अस्वीीकृृत होोनेे केे मामलेे मेंं,नगर पंंचाायत प्रस्तााव मेंं अस्वीीकृृति� केे कारणोंं
को लि�खि�त
रूप मेंं प्रस्तुुत कििया जााएगा।
(४) जहाँँr नगर पंंचाायत, उप-धारा (३) केे अधीीन अपनेे संंकल्प द्वाारा यदि� कोोई प्रस्तााव पारि�त
होताा हैै और आवेेदक को महििªलाा कििसाान केे
रूप मेंं माान्यताा दीी जााती हैै, तोो नाामि�त अधि�काारी ऐसेे
प्रस्तााव पारि�त होोनेे केे
पंंद्रह दि�नोंंं की अवधि�िकेे भीतर, जैैसाा कििि वि�िहिªित किििया जाा सकेे, ऐसेे प्ररूप और
रीत्या, महििªलाा कििसाान प्रमाण पत्र जाारी करेेगाा।
(५) जहाँँr नगर पंंचाायत, उप-धारा (३) केे अधीीन अपनेे संंकल्प द्वाारा यदि� कोोई नाामि�त अधि�काारी
कििसी आवेेदक को महििªलाा कििसाान केे
रूप मेंं माान्यताा देेनेे सेे
इनकाार करताा हैै, तोो वह संंकल्प पारि�त
होनेे केे
साात दि�नोंंं केे भीतर आवेेदक को लि�खि�त
रूप मेंं नि�म्नलि�खि�त सूू
चनाा देेगा,—
नगर पंंचाायत क्षेेे¸त्र
मेंं महिªिलाा किििसाान
प्रमाणपत्र जाारी
करनाा ।
6
महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात, जुलै १, २०२६/आषषाढ १०, शके १९४८
(क) नगर पंंचाायत मेंं यथाा वि�िनि�िदि�िष्ट संंकल्प की ऐसी अस्वीीकृृति� केे
कारणोंं को नि�र्दि�िष्ट कििया
गया हैै;
(ख) वह अवधि� जि�सकेे
भीतर ऐसी अस्वीीकृृति� केे
वि�रुद्ध अपील कीी जाा सकेेगी; और
(ग) जि�सकेे
समक्ष अपील दाायर की जाा सकेेगी उस अपीलीय अधि�काारी का वि�वरण ।
(६) कििसी भी पीड़ि�त व्यक्तििòि द्वाारा,-
(क) नगर पंंचाायत काा संंकल्प उप-धारा (३) केे अधीीन महििªलाा कििसाान को
ो मान्यताा देेनेे केे
आवेेदन को
ो अस्वीीकार करनाेे¸ पर ऐसेे संंकल्प सेे एक सौौ बीीस दि�नोंंं की अवधि� केे
भीतर, या
(ख)उप-धारा (४) केे अधीीन नि�र्दि�िष्ट स
मयावधि� केे
भीतर नाामि�त अधि�काारी द्वाारा महििªलाा
कििसाान प्रमाण पत्र जाारी करनेे मेंं वि�फल हाेे¸ताा हैै ताेे¸ ऐसी अवधि� कीी समााप्ति�� केे
बााद और उसकेे एक
सौ बीीस दि�नोंंं की अवधि� केे
भीतर,अपीलीय अधि�काारी केे समक्ष, जैैसाा की वि�ि�हिªित किििया जााए ऐसेे
प्रपत्र और रीत्या, अपील कीी जाा सकेेगी,
जैैसाा कििि वि�िहिªित किििया जाा सकेे ऐसेे प्ररूप और रीति�ि सेे अपि�िल अधि�िकारी काेे¸ अपील कर सकेेगा ।
(७) अपीलीय अधि�काारी, अपील प्रााप्त होोनेे पर, अपील केे पक्षकाराेंंɞ को सुुनवााई का युुक्तिòि�युुक्त अवसर
देेनेे केे
पश्चाात्, अपील पर वि�चाार करेेगाा और अपील दााखि�ल होोनेे केे
दि�िनांं�क सेे तीीस दि�नोंंं की अवधि� केे
भीतर तर्ककसंंगत आदेेश केे सााथ उसकाा नि�पटाान करेे
गाा:
परन्तुु, अपीलीय अधि�काारी एक सौौ बीीस दि�नोंंं की, अवधि� समााप्त होोनेे केे बााद भीी अपील स्वीीकार कर
सकताा हैै, यदि� वह संंतुुष्ट होेेे¸ताा हैै किि, अपीलकर्ताताा� पर्याा�प्त काारण सेे उक्त अवधि� केे
भीतर अपील दााखि�ल
करनेे सेे वंंचि�त रहा हो।
(८) यदि� अपीलीय अधि�काारी अपील कीी सुुनवााई करनेे पर उसकीी यह राय हो किि, अपीलकर्ताताा�
एक महििªलाा कििसाान हैै, तोो वह नाामि�त अधि�काारी को आदेेश केे दि�िनांं�क सेे पंंद्रह दि�नोंंं की अवधि� केे
भीतर
अपीलकर्ताताा� को महििªलाा कििसाान प्रमाण पत्र जाारी करनेे का
ा नि�र्देदेेश देेगा।
७. महििªलाा कििसाान का
ा प्रमाण पत्र तब तक वैै
ध रहेेगाा जब तक
महििªलाा कििसाान बनी
ी रहतीी हैै। यदि�
कोई महििªलाा कििसाान नहींं
रहतीी हैै, तोो वह इस अधि�नि�यम केे अधीीन ऐसेे प्रमाण पत्रोंं केे लााभोंं की हकदाार
नहींं होंंगी और उसकाा प्रमाण पत्र अमान्य मानाा जााएगा।
८. (१) इस अधि�नि�यम केे प्रयोजनोंंं केे लि�ए कििसी महििªलाा किििसाान कीी पहचाान महििªलाा कििसाान केे
रूप मेंं स्थाापि�त क
रनेे केे
प्रयाेे¸जन सेे
महििªलाा कििसाान प्रमाणपत्र नि�र्णाा�यक सबूूत होोगा।
(२) महििªलाा कििसाान प्रमाणपत्र धाारक महििªलाा, किििसाान रााज्य सरकार द्वाारा समय-समय पर,
अधि�सूूचि�त नीीति�योंं, काययक्रमोंं और योजनााओं केे अधीीन पत्रताा, मि�लनेे वा
ालेे लााभोंं, आथि�िक मदद
और सेेवाओं को प्राप्त क
रनेे की
ी हकदाार होगी, जैैसाा कििि वि�िनि�िदि�िटष्ट कीी जाा सकेे ऐसी, उनमेंं नि�र्दि�िष्ट
शर्तेंं लाागूू होंंगी।
(३) राज्य सरकार समय-समय पर महििªलाा कििसाानोंंं और उनकेे समूूहोंं केे कल्यााण केे लि�ए
नि�म्नलि�खि�त मा
ामलोंं सेे संंबंंधि�त उपयुुक्त नीीति�याँँr, काययक्रम और योजनााएंं बनाा सकेेगी,—
(क) कृृषि� संंबंंधीी आथि�िक सहाायताा;
(ख) बीीज, उर्ववरक और अन्य कृृषि� साामग्री का वि�तरण;
(ग) कृृषि� ऋण, फसल बीीमा और वि�स्ताार सेेवाएंं;
(घ) कृृषि� उत्पाादोंं की बााजाार पहुंं�च, परि�वहन, भंंडारण और खरीद कोो सुुगम बनाानाा;
(ड.) एकल महििªलाा कििसाानोंंं केे लि�ए वि�शेेष सहाायताा काययक्रम, कौशल वि�का
ास और
लक्षि�त सहा
ायताा;
(च) राज्य सरकार द्वाारा नि�र्धाा�रि�त कििियेे जााए ऐसेे किििसी अन्य मामलेे।
महििªलाा कििसाान
प्रमाणपत्र की
समााप्ति��।
महििªलाा कििसाान
प्रमाणपत्र की
उपयोगि�ताा।
महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात, जुलै १, २०२६/आषषाढ १०, शके १९४८
7
९. महििªलाा कििसाान प्रमाण पत्र रखनेे वााली महििªलाा कििसाान रााज्य सरकार द्वाारा समय-समय पर
अधि�सूूचि�त ऋण नीीति�योंं, काययक्रमोंं और योजनााओं केे अधीीन यथाेे¸चि�ित प्रकार केे ऋण प्राप्त क
रनेे की
ी
हकदाार होगी।
१०. (१) राज्य सरकार इस अधि�नि�यम केे प्रयोजनोंंं केे लि�ए महििªलाा कििसाानोंंं का डेेटाा नि�र्धाा�रि�त
तरीीकेे सेे एकत्र और बनााए रखेेगीी।
(२) महििªलाा कििसाान डेेटााबेेस मेंं
उन सभी
ी महििªलाा कििसाानोंंं की जाानकाारी होगी जि�न्हेंं इस
अधि�नि�यम केे अधीीन महििªलाा कििसाान प्रमाण पत्र जाारी कििया गया हैै।
११. (१) राज्य सरकार महििªलाा कििसाानोंंं केे लि�ए महाराष्ट्र राज्य कोष का गठन करेेगीी और उसमेंं
नि�म्नलि�खि�त धनरा
ाशि� जमाा की जााएगी:—
(क) केंंद्र सरकार या राज्य सरकार सेे प्राप्त कोोई भी अनुुदान;
(ख)अन्य संंस्थाानोंंं और व्यक्तििòियोंं सेे प्राप्त कोोई भी अनुुदान, दाान, उपहार, परोपकार; और
(ग) राज्य सरकार द्वाारा समय-समय पर, अधि�सूूचि�त की
ी जाानेे वााली कोई अन्य राशि�।
(२) यह नि�धि� रा
ाज्य सरकार केे नि�यंंत्रण और प्रबंंधन केे
अधीीन रहेेगीी और इसकाा उपयोग
नि�म्नलि�खि�त
प्रयाेे¸जनाेंंɞ केे लि�ए कििया जााएगा:-
(क) महििªलाा कििसाानोंंं केे कल्यााण और वि�काास केे लि�ए काययक्रम लाागूू करनाा और सहाायताा
प्रदान क
रनाा;
(ख) महििªलाा कििसाानोंंं केे सशक्तििòिकरण केे लि�ए वि�त्तपोषण उपाय;
(ग) महििªलाा कििसाानोंंं केे कल्यााण को समर्थन और बढ़ाावा देेनेे केे लि�ए सुुवि�धााएंं प्रदान करनाा; और
(घ) जैैसाा कििि वि�िहिªित कििया जाा सकेे ऐसेे अन्य मामलेे।
१२. (१) राज्य सरकार रााजपत्र मेंं प्रकाशि�त अधि�िसूूचनाा द्वाारा महििªलाा कििसाान स
शक्तििòिकरण
परि�षद कीी स्थाापनाा करेेगीी।
(२) महििªलाा कििसाान स
शक्तििòिकरण परि�षद मेंं नि�म्नलि�खि�त
पदेेन सद
स्याेंंɞ सेे मि�िलकर बनेेगी
ी,
अथाा�त् :-
(क) मुुख्यमंंत्रीिि
ि
ि
अध्यक्ष;
(ख) उपमुुख्यमंंत्रीसद
स्
य;
(ग) कृृषि� मंंत्रीस
द
स्
य;
(घ)महििªलाा और बााल वि�िकास मंंत्रीसद
स्
य;
(ङ) ग्राामीण वि�काास मंंत्रीस
दस्य;
(च) सहकाारि�ताा मंंत्रीस
दस्य;
(छ) पशुुपालन, दुुग्धउद्योग, वि�काास और मत्स्य पालन मंंत्री
सदस्य;
(ज) वि�त्त मंंत्रीस
दस्य;
(झ) वन मंंत्रीस
दस्य;
(ञ) राजस्व मंंत्रीस
दस्य;
(ट) नगरवि�काास मंंत्रीस
दस्य;
(ठ) कृृषि� रााज्य मंंत्रीस
दस्य;
महििªलाा कििसाान
प्रमाणपत्र केे जरि�िए
लााभ पानाा।
महििªलाा कििसाान
डाटााबेेस कीी
स्थाापनाा।
महििªलाा कििसाान
केे लि�िए महाराष्ट्र
राज्य नि�ि�धि�ि।
महििªलाा कििसाान
सशक्तििòि��करण
परि�िषद कीी
स्थाापनाा।
8
महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात, जुलै १, २०२६/आषषाढ १०, शके १९४८
(ड़) सचि�व, कृृषि� वि�भाागस
दस्य सचि�व।
(३) महििªलाा कििसाान सशक्तििòिकरण परि�षद कीी बैैठक
वर्षष मेंं कम सेे कम एक बाार होगी और
आवश्यकताानुुसाार अन्य बैैठकोंं की भी बैैठक होो सकतीी हैै।
(४) महििªलाा कििसाान सशक्तििòिकरण परि�षद नि�म्नलि�खि�त
शक्तििòियोंं और कार्योंं का प्रयोग और
नि�ष्पाादन करेेगीी, अथाा�त्:-
(क) अधि�नि�यम केे कार्याा�न्वयन केे
लि�ए समग्र नीीति�गत दि�शा
ा-नि�र्देदेेश प्रदान क
रनाा;
(ख) महाराष्ट्र मेंं महििªलाा कििसाानोंंं की स्थि�िति� की
ी समीीक्षा करनाा और नीीति�गत सुुधारोंं की
सि�फाारि�श करनाा;
(ग) महििªलाा कििसाानोंंं केे कल्यााण केे लि�ए वि�भििन्न वि�भा
ागोंं केे बीीच समन्वय सुुनि�श्चि�ित
करनाा;
(घ) महििªलाा कििसाानोंंं की ऋण, बााजाारोंं, बीीमा, प्रौद्योगि�कीी और वि�स्ताार सेेवाओं तक
पहुंं�च बढ़ानेे केे
लि�ए रणनीति�योंं को मंंजूूरी देेनाा।
१३. (१) राज्य सरकार इस अधि�नि�यम केे कार्याा�न्वयन की
ी नि�गरानी केे लि�ए एक राज्य नि�गरानी
समि�ति� का
ा गठन करेेगीी।
(२) राज्य नि�गरानी समि�ति� मेंं नि�म्नलि�खि�त सदस्
य शामि�ल होंंगेे, अथाा�त् :-
(क) मुुख्य सचि�वि
अध्यक्ष;
(ख) सचि�व, कृृषि� वि�भाागस
दस्य;
(ग) सचि�व, वि�त्त वि�भाागस
दस्य;
(घ) सचि�व, महििªलाा तथाा बााल वि�का
ास वि�भा
ाग स
दस्य;
(ङ) सचि�व, ग्रााम वि�काास वि�भा
ागस
दस्य;
(च) सचि�व, वन वि�भा
ागस
दस्य;
(छ) सचि�व, राजस्व वि�भाागस
दस्य;
(ज) सचि�व, नगरवि�काास वि�भा
ागस
दस्य;
(झ) सचि�व, सहकाारि�ताा वि�भाागस
दस्य;
(ञ) सचि�व, पशुुपालन, दुुग्धउद्योग वि�काास तथाा मत्स्य वि�भाागसदस्य;
(ट) कृृषि� आयुुक्तस
दस्य-सचि�व।
(३) समि�ति� कृृ
षि�, बााजाार, बैंंकिंंग, जल संंरक्षण, लिं�ंग अध्ययन, कानूून, अर्थशाास्त्र और संंबंंधि�त
क्षेेत्रोंं केे वि�शेेषज्ञोंं को अपनी बैैठकोंं मेंं सहायताा या सलााह केे लि�ए आमंंत्रि�त क
र सकेेगी।
(४) समि�ति� की
ी बैैठक
वर्षष मेंं कम सेे कम दोो बाार होगी, और दोो लगााताार बैैठकोंं केे बीीच छह महीनेे
सेे अधि�क काा अंंतरााल नहींं होगा, और वह अपनी बैैठकोंं मेंं ऐसी काययप्रणाली का पालन करेेगीी जैैसाा वह
वि�हििªत करेे।
(५) इस अधि�नि�यम केे प्रयोजनोंंं केे लि�ए समि�ति� केे
नि�म्नलि�खि�त कर्तत
व्य और कायय होंंगेे, अथाा�त्-
(क) अधि�नि�यम केे कार्याा�न्वयन की
ी नि�गरानी केे लि�ए संंकेेतक
और मानदंंड वि�कसि�त क
रनाा;
(ख) महििªलाा कििसाान प्रमाणपत्रोंं की मान्यताा और प्रमाणपत्र नवीीनीकरण की प्रक्रि�याा की नि�गरानी
राज्य नि�गरानी
समि�ति� की
ी
स्थाापनाा।
महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात, जुलै १, २०२६/आषषाढ १०, शके १९४८
9
करनाा;
(ग) राज्य और केंंद्र सरकार की वि�भििन्न योोजनााओं केे अधीीन महििªलाा कििसाानोंंं को मि�लनेे वा
ालेे
लााभोंं, आर्थि�िक सहाायताा, ऋण, बीीमा और सेेवाओं की नि�गरानी करनाा; और
(घ) कार्याा�न्वयन मेंं
आनेे वााली शि�काायतोंं, बााधाओं और देेरी की जांं�च करनाा और सुुधारात्मक
उपायोंं की सि�फाारि�श करनाा।
१४.
(१) राज्य सरकार इस अधि�नि�यम केे उपबंंधोंं को लाागूू करनेे केे
लि�ए महििªलाा कििसाान
सशक्तििòिकरण कक्ष की स्थाापनाा करेेगीी।
(२) महििªलाा कििसाान सशक्तििòिकरण कक्ष मेंं नि�म्नलि�खि�त
पदेेन सदस्
य शामि�ल होंंगेे अथाा�त् :—
(क) सचि�व, कृृषि� वि�भाागि
अध्यक्ष;
(ख) कृृषि� आयुुक्तस
दस्य;
(ग) कृृषि� वि�भााग केे उप सचि�वस
दस्य;
(घ) कृृषि� वि�भााग केे अधीीन नि�
देेशकस
दस्य;
(च) कृृषि� नि�देेशक (वि�स्ताार एवंं प्रशि�क्षण)स
दस्य-सचि�व।
(३) महििªलाा कििसाान स
शक्तििòिकरण कक्ष, कृृषि�, बााजाार, बैंंकिंंग, जल, लैंंगि�क अध्ययन, कानूून,
अर्थशाास्त्र और संंबंंधि�त क्षेेत्रोंं केे वि�शेेषज्ञोंं को उनकीी सहाायताा या सलााह केे लि�ए अपनी बैैठकोंं मेंं आमंंत्रि�त
कर सकेेगी।
(४) महििªलाा कििसाान सशक्तििòिकरण कक्ष केे कर्ततव्य और कायय नि�म्नलि�खि�त हैंं
:-
(क) अधि�नि�यम केे उपबंंधोंं केे कार्याा�न्वयन केे
लि�ए नोोडल एजेंंसीी केे रूप मेंं का
ायय करनाा;
(ख) महििªलाा कििसाानोंंं को लााभ और सेेवाएंं प्रदान करनेे केे लि�ए सभीी संंबंंधि�त वि�भा
ागोंं केे सााथ
समन्वय करनाा;
(ग) महििªलाा कििसाान स
शक्तििòिकरण परि�षद और राज्य नि�गरानी समि�ति� को
ो तकनीीकी और
सचि�वा
ालयीीन सहा
ायताा देेनाा;
(घ) अधि�नि�यम केे उपबंंधोंं केे कार्याा�न्वयन केे
संंबंंध मेंं
राज्य सरकार केे लि�ए नीीति�,
वि�श्लेे
षणात्मक रि�पोोर्ट और सि�फाारि�शेंं तैैयार करनाा;
(ङ) महििªलाा कििसाानोंंं केे लि�ए आवधि�क
अध्ययन और स्थि�िति�जन्
य वि�श्लेे
षण करनाा;
(च) लिं�ंग-संंवेेदनशीील कृृषि� प्रौौद्योगि�किियोंं, मशीनीकरण और नवााचाार को बढ़ाावा देेनाा;
(छ) अनुुसंंधान संंस्थाानोंंं, वि�श्ववि�द्याालयोंं, वि�त्तीीय संंस्थाानोंंं, कििसाान उत्पाादक संंगठनोंंं, स्वयंं सहाायताा
समूूहोंं और गैैर-सरकारी संंगठनोंंं केे सााथ समन्वय स्थाापि�त क
रनाा;
(ज) अधि�नि�यम केे कार्याा�न्वयन पर वार्षि�िक रि�पोर्ट तैैयार करनाा और उसेे राज्य सरकार को प्रस्तुुत करनाा।
१५. (१) राज्य सरकार साामान्य या वि�शेेष आदेेश द्वाारा नि�म्नलि�खि�त को
ो नाामि�त करेे
गीी :—
(क) ब्लॉक स्तर पर महििªलाा कििसाान सहा
ायताा अधि�काारी केे रूप मेंं कृृषि� अधि�काारी सेे कम श्रेेणीी
का अधि�काारी नि�युुक्त कििया जााएगा, और
(ख) जि�लाा स्तर पर महििªलाा कििसाान सहा
ायताा अधि�काारी केे रूप मेंं कृृ
षि� उप नि�देेशक सेे कम
श्रेेणीी केे अधि�काारी की नि�युुक्तििòि करनाा।
महििªलाा कििसाानोंंं
का सशक्तििòिकरण
कक्ष।
महििªलाा कििसाान
सहाायताा
अधि�काारी ।
भाग सात-५०–२
10
महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात, जुलै १, २०२६/आषषाढ १०, शके १९४८
(२) महििªलाा कििसाान सहा
ायताा अधि�काारी नि�म्नलि�खि�त कर्तत
व्योंं और कायाेे¸ काा नि�र्ववहन करेंंगीी, अथाा�त् :-
(क) महििªलाा कििसाानोंंं को महििªलाा कििसाान प्रमाणपत्र प्राप्त क
रनेे मेंं सहाायताा करनाा;
(ख) ग्रााम सभाा और नगर पंंचाायत महििªलाा कििसाानोंंं को मान्यताा देेनेे और महििªलाा कििसाान प्रमाण
पत्र जाारी करनेे मेंं सहाायताा करनाा ;
(ग) इस अधि�नि�यम केे अधीीन महििªलाा कििसाानोंंं केे अधि�काारोंं केे संंबंंध मेंं व्यक्तििòियोंं या समूूहोंं
को जाानकाारी देेनाा ; और
(घ) राज्य सरकार को लिं�ंग-संंवेेदनशीील वि�स्
ताार सेेवाओं को कार्याा�न्वि��त क
रनेे मेंं सहाायताा
करनाा।
१६. इस अधि�नि�यम या इसकेे अधीीन बना
ाए गए नि�यमोंं केे उपबंंधोंं केे अनुुसरण मेंं, सद्भावनाापूूर्ववक
कृृत याा कीए जाानेे का
ा प्रयास कििए गए कििसी भी कायय केे लि�ए राज्य सरकार केे कििसी भी अधि�काारी या
कर्ममचाारी या महििªलाा कििसाान सशक्तििòिकरण कक्ष केे कििसी भी सदस्य केे वि�रुद्ध कोई वाद, अभिियोजन याा अन्य
कानूूनी काययवाही नहींं की जाा सकेेगी।
१७. इस अधि�नि�यम मेंं अन्यथाा उपबंंधोंं केे सि�वााय, इस अधि�नि�यम केे उपबंंध कििसी अन्य कानूून
केे उपबंंधोंं केे अति�रि�क्त होंं
गेे, न किि उनकाा उल्लंंघन क
रनेे वाालेेहाेे¸ ।
१८. (१) राज्य सरकार रााजपत्र मेंं अधि�सूूचनाा द्वाारा अधि�नि�यम केे सभीी या कििन्हीी प्रयोजनोंंं केे
लि�ए नि�यम बनाायेेगीी।
(२) वि�शेेष रूप सेे और पूूर्ववगामी शक्तििòियोंं की व्यापकताा पर प्रति�कूूल प्रभाव डाालेे बि�नाा, ऐसेे नि�यम
नि�म्नलि�खि�त सभी
ी या कििन्हीी मामलाेंंɞ केे लि�ए उपबंंध क
र सकतेे हैंं, अथाा�त्:-
(क) धाारा ५ की उप-धारा (१) केे अधीीन नाामि�त अधि�काारी कोई महििªलाा कििसाान द्वाारा
आवेेदन प्रस्तुुत क
रनेे केे
प्ररुप और रीति�ि ;
(ख) प्ररूप और सेे रीति�ि नाामि�ित अधि�ि�कारी धाारा ५ की उप-धारा (१) केे अधीीन महिªिलाा
किििसाान प्रमाणपत्र जाारी करेेगाा ; जि�िसमेंं
(ग) धाारा ५ की उप-धारा (६) केे अधीीन अपीलीय अधि�िकारी केे सक्षम अपील प्रस्तुुत क
रनेे
का प्रपत्र और रीति�ि ;
(घ) वह प्ररूप और रीति�ि जि�ससेे को
ोई महििªलाा कििसाान धाारा ६ की उप-धारा (१) केे अधीीन
नाामि�त अधि�काारी को आवेेदन प्रस्तुुत क
र सकेेगी ;
(ङ) वह प्ररूप और रीति�ि जि�ससेे नाामि�त अधि�काारी धाारा ६ की उप-धारा (४) केे अधीीन
महििªलाा कििसाान प्रमाण पत्र जाारी करेेगाा ;
(च) धाारा ६ की उप-धारा (६) केे अधीीन अपीलीय अधि�काारी केे समक्ष अपील प्रस्तुुत
करनेे का
ा प्ररूप और रीति� ;
(छ) जि�स रीीति� सेे
धाारा १० की उप-धारा केे अधीीन महििªलाा कििसाान डेेटााबेेस कोो संंग्रहीीत
बनााए रखा जाानाा हैै ;
(ज) ऐसेे अन्य मामलेे जि�नकेे
लि�ए धाारा ११ की उप-धारा (२) केे अधीीन रााज्य नि�धि� का
ा
उपयोग कििया जााएगा ;
सद्भावनाापूूर्ववक
की गयी काययवाही
का संंरक्षण।
यह अधि�नि�यम
कििसी अन्य वि�धि�
का उल्लंंघन नहींं
करताा हैै।
नि�ियम बनाानेे कीी
शक्तिòि�।
महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात, जुलै १, २०२६/आषषाढ १०, शके १९४८
11
(झ) कििसी अन्य मामलेे जि�सकेे
लि�ए इस अधि�नि�यम केे अधीीन नि�
यम बनाानाा आवश्यक हैै।
(३) इस अधि�नि�यम केे अधीीन बना
ाया गया प्रत्येेक नि�यम, उसकेे बनााए जाानेे केे
तुुरंंत पश्चाात्, राज्य
वि�धाानमंंडल केे प्रत्येेक सदन केे
समक्ष, जब वह सत्र मेंं होो, कुुल तीीस दि�नोंंं की अवधि� केे लि�ए रखा जााएगा,
जो एक सत्र या दोो या दोो सेे अधि�क
अनुुक्रमि�क सत्रोंं मेंं समाहििªत होो सकतीी हैै, और यदि�, जि�स सत्र मेंं इसेे
रखा गया हैै या उसकेे तुुरंंत बााद वाालेे सत्र की समााप्ति�� सेे पहलेे, दोोनोंंं सदन कििसी नि�यम मेंं को
ोई संंशोधन
करनेे पर सहमत हाेे¸तेे हैंं या दोोनोंंं सदन इस बाात पर सहमत हाेे¸तेे हैंं किि नि�यम नहींं बनााया जााए, और इस संंबंंध
मेंं अपनेे नि�र्णणय की सूूचनाा देंं, तोो रााजपत्र मेंं इस नि�यम केे ऐसेे नि�र्णणय की अधि�सूूचनाा केे प्रकाशन केे
दि�नांं�क
सेे केेवल संंशोधि�त रूप मेंं हीी प्रभाव होगा या कोई प्रभावी नहींं होगा, जैैसाा भी मामलाा हो, हालांं�किि, ऐसाा कोई
भी संंशोधन याा नि�रस्तीीकरण उस नि�यम केे अधीीन पहलेे कििए गए या न कििए गए कििसी भी कायय की वैैधताा
पर प्रति�कूूल प्रभाव नहींं डाालेेगा।
१९. (१) इस अधि�नि�यम केे उपबंंधोंं को प्रभावी करनेे मेंं
यदि� कोोई कठि�नााई उत्पन्न होोती हैै, तोो
राज्य सरकार, आदेेश द्वाारा, रााजपत्र मेंं इस अधि�नि�यम केे उपबंंधोंं केे अनुुरूप, ऐसेे उपबंंध कििए जााएंं जोो
कठि�नााई को दूूर करनेे केे
लि�ए आवश्यक या इष्टकर प्रतीत होंं :
परन्तुु, इस अधि�नि�यम केे प्रारंंभन केे दि�नांं�क सेे दोो वर्षोंं की अवधि� समााप्त होोनेे केे पश्चाात इस उप-धारा
केे अधीीन ऐसाा कोई आदेेश नहींं बनााया जााएगा।
(२) उप-धारा (१) अधीीन बना
ाया गया प्रत्येेक
आदेेश उसकेे बनााए जाानेे केे
पश्चाात् यथाा संंभव
शीघ्र राज्य वि�धाानमंंडल केे
प्रत्येेक सदन केे
समक्ष, रखा जाायेेगाा।
कठि�नााइयोंं केे
नि�िराकरण करनेे
की शक्तििòि।
भाग सात-५०–२अ
12
महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात, जुलै १, २०२६/आषषाढ १०, शके १९४८
उद्देेश्योंं और काारणोंं काा वक्तव्य
भारत केे संंवि�धाान केे
अनुुच्छेेद ३९ और ४३ मेंं नि�हििªत रााज्य नीीति� केे
नि�र्देदेेशक सि�द्धांं�त रााज्य सेे यह
अपेेक्षाा करतेे हैंं किि वह सभीी नाागरि�कोंं केे लि�ए आजीवि�काा केे पर्याा�प्त सााधन सुुनि�श्चि�ित क
रनेे, साामाजि�क
और आर्थि�िक न्यााय को बढ़ाावा देेनेे और संंसााधनोंंं और अवसरोंं केे समाान और लिं�ंग-संंवेेदनशीील वि�त
रण
की दि�शाा मेंं अपनी नीीति�योंं का नि�र्देदेेशन क
रतेे हैै।
२. अधि�कांं�श कृृषि� नीीति�यांं�, योजनााएँँ और वि�स्ताार प्रणालि�याँँr लैंंगि�क समाानताा को ध्याान मेंं रखतेे हुुए
बनााई गई हैंं, तथाापि�ि, अधि�कांं�श कृृषि� योोजनााओं और संंबंंधि�त अधि�काारोंं तक पहुंं�च केे लि�ए भूूमि� स्वाामि�त्व की
अनि�वााययताा नेे कई महििªलाा कििसाानोंंं केे लि�ए ऐसी योजनााओं को दुुर्गगम बनाा दि�याा हैै, क्योंंकिि इनमेंं सेे बहुुत कम
प्रति�शत महििªलााओं केे पास हीी कृृषि� भूूमि� हैै। ऐसेे मेंं, जोो महििªलााएंं औपचाारि�क स्वा
ामि�त्व केे बि�नाा पारि�वाारि�क
या साामुुदायि�क भूूमि� पर खेेतीी करती हैंं, उन्हेंं अक्सर कििसाान केे बजााय कृृषि� मजदूूर मानाा जााताा हैै। इसी प्रकार,
जो महििªलााएंं मछली पकड़नाा, लघुु वन उपज संंग्रहण, मुुर्गीी पालन, पशुुपालन आदि� ; जैैसी खेेतीी सेे इतर
गति�वि�धि�योंं
मेंं लगी हैंं, उन्हेंं भी कििसाान केे
रूप मेंं माान्यताा नहींं दीी जााती हैै। महििªलाा कििसाानोंंं और उनकेे कृृषि�
श्रम की यह व्यवस्थाागत उपेेक्षाा गंंभीर हैै और इससेे कई प्रकार केे बहििªष्काार उत्पन्न होोतेे हैंं, जि�नमेंं योोजनााओं,
ऋण और बााजाारोंं तक पहुंं�च मेंं भेेदभााव शामि�ल हैै।
३. इसलि�ए, सरकार कृृषि� और संंबद्ध गति�वि�धि�योंं
मेंं
लगी महििªलााओं को महििªलाा कििसाान केे
रूप
मेंं माान्यताा देेनेे और उन्हेंं महििªलाा कििसाान प्रमाण पत्र देेनेे केे
लि�ए एक नयाा कानूून बना
ानाा इष्टक
र समझतीी
हैै, जि�ससेे वेे अधि�काारोंं, लााभोंं, आर्थि�िक सहाायताा, सेेवाओं और ऋण तक पहुंं�च सकेंं। प्रस्ताावि�त काानूून मेंं
महििªलाा कििसाान सशक्तििòिकरण परि�षद और कक्ष राज्य नि�गरानी समि�ति� कीी स्थाापनाा और महििªलाा कििसाान नि�धि�
और उनकेे डेेटााबेेस और तत्संंबंंधीी मामलाेंंɞ काेे¸ संंग्रहीीत और बनााए रखनेे का
ा भी उपबंंध हैै।
४. प्रस्तुुत वि�धेे
यक का आशय उपर्युु�क्त उद्देेश्योंं को प्राप्त क
रनाा हैै।
मुंं�बई,
दत्तात्रय भरणेे,
दि�नांं�किित ३० जूून, २०२६ ।कृृ
षि� मंंत्री।
महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात, जुलै १, २०२६/आषषाढ १०, शके १९४८
13
प्रत्याायोजि�त विि¦धाान केे संंबंंध
मेंं ज्ञाापन
प्रस्तुुत वि�धेे
यक मेंं वि�धायी शक्तििòियोंं केे प्रत्याायोजन केे लि�ए नि�म्नलि�खि�त
प्रस्तााव अन्तग्र ि�िस्त हैंं, अथाा�त्:-
खंंड ४.- इस खंंड केे अंंतर्गत, राज्य सरकार को शक्तििòि प्रदान की
ी गयी हैै,-
(क) उप-खंंड केे (१) अधीीन रााजपत्रमेंं, अधि�सूूचनाा द्वाारा नाामि�त क
रनेे केे
लि�ए अधि�काारी,
नाामि�त अधि�काारी केे रूप मेंं, नि�म्नतम श्रेेणीी केेे� नीीचेे का न होो,-
(एक) ग्रााम पंंचाायत क्षेेत्र केे लि�ए सहाायक कृृषि� अधि�काारी; और
(दाेे¸) नगर पंंचाायत केे क्षेेत्राेंंɞ केे लि�िए कृृषि� अधि�काारी ।
(ख) उप-खंंड (२) केे अधीीन रााजपत्र मेंं अधि�सूूचनाा द्वाारा ऐसेे क्षेेत्रोंं केे लि�ए अपीलीय
अधि�काारी केे रूप मेंं ताालुुका कृृषि� अधि�काारी सेे कम श्रेेणीी केे अधि�काारि�योंं की इतनीी संंख्या
नि�युुक्त करनेे का
ा अधि�काार हैै, जैैसाा वह उचि�त समझेे।
खंंड ५.- इस खंंड केे अधीीन, राज्य सरकार को शक्तििòि प्रदान की
ी हैै, -
(क) उप-खंंड (१) केे अधीीन ग्रााम पंंचाायत केे क्षेेत्र मेंं महििªलाा कििसाान प्रमाण पत्र प्राप्त क
रनेे
केे लि�ए आवेेदन क
रनेे हेेतुु प्ररूप और रीी�ति�ि को नि�यमोंं द्वाारा वि�िहिªित क
रनाा;
(ख) उप-खंंड (४) केे अधीीन महििªलाा कििसाान प्रमाण पत्र जाारी करनेे केे
लि�ए नि�यमोंं द्वाारा
प्ररूप और रीी�ति�ि वि�िहिªित क
रनाा;
(ग) उप-खंंड (६) केे अधीीन अपीलीय अधि�काारी केे समक्ष अपील क
रनेे केे
लि�ए नि�यमोंं
द्वाारा प्ररूप और रीति�ि वि�िहिªित क
रनाा।
खंंड ६.- इस खंंड केे अधीीन, राज्य सरकार को शक्तििòि प्रदान की
ी जााती हैै,—
(क) उप-खंंड (१) केे अधीीन नगर पंंचाायत केे क्षेेत्र मेंं महििªलाा कििसाान प्रमाण पत्र प्राप्त क
रनेे
केे लि�ए आवेेदन क
रनेे हेेतुु प्ररूप और रीति�ि को नि�यमोंं द्वाारा वि�िहिªित क
रनाा;
(ख) उप-खंंड (४) केे अधीीन महििªलाा कििसाान प्रमाण पत्र जाारी करनेे केे
लि�ए नि�यमोंं द्वाारा
प्ररूप और रीति�ि वि�िहिªित क
रनाा;
(ग) उप-खंंड (६) केे अधीीन अपीलीय अधि�काारी केे समक्ष अपील क
रनेे केे
लि�ए नि�यमोंं
द्वाारा प्ररूप और रीति�ि वि�िहिªित क
रनाा।
खंंड ८(२).- इस खंंड केे अधीीन, राज्य सरकार को उन नीीति�योंं, काययक्रमोंं और योजनााओं को
अधि�सूूचि�त क
रनेे का
ा अधि�काार दि�याा गया हैै, जि�नकेे
लि�ए महििªलाा कििसाान प्रमाण पत्र धाारक हकदाार हैंं।
खंंड १०(१).- इस खंंड केे अधीीन, राज्य सरकार को महििªलाा कििसाानोंंं केे डेेटााबेेस केे संंकलन और
रखरखाव की रीति�ि को वि�िहिªित क
रनेे का
ा अधि�काार दि�याा गया हैै।
धााराा ११.- इस खंंड केे अधीीन, राज्य सरकार को शक्तििòि प्रदान की
ी जााती हैै,—
(क) उप-खंंड (१) (ग) केे अधीीन महििªलाा कििसाानोंंं केे लि�ए महाराष्ट्र राज्य नि�धि� मेंं जमा
ा की
जाानेे वााली कििसी अन्य राशि� कोो अधि�सूूचि�त क
रनाा;
(ख) उप-खंंड (२) केे अधीीन महाराष्ट्र राज्य की महििªलाा कििसाानोंंं केे लि�ए नि�धि� केे
उपयोग
सेे संंबंंधि�त कििसी अन्य मामलेे को नि�यमोंं द्वाारा वि�िहिªित क
रनाा।
खंंड १२(१).- इस खंंड केे अधीीन, राज्य सरकार को रााजपत्र मेंं अधि�सूूचनाा द्वाारा महिªिलाा किििसाान
सशि�िक्तिòि�करण परि�िषद स्थाापि�त क
रनेे का
ा अधि�काार दि�याा गया हैै।
14
महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात, जुलै १, २०२६/आषषाढ १०, शके १९४८
खंंड १८ (१).- इस खंंड केे अधीीन, राज्य सरकार को इस अधि�नि�यम केे प्रयाेे¸जनाेंंɞ को पूूरा करनेे केे
लि�ए राजपत्र मेंं अधि�सूूचनाा जाारी करकेे नि�यम बनाानेे का
ा अधि�काार दि�याा गया हैै।
खंंड १९ (१).- इस खंंड केे अधीीन, इस अधि�िनि�ियम केे उपबंंधाेे¸ काेे¸ लाागूू करनेे मेंं
उत्पन्न हाेे
¸नेेवााली
किििसी भी कठनााइ काेे¸ दूूर करनेे केे
लए राज्य सरकार को रााजपत्र मेंं आदेेश जाारी करनेे का
ा अधि�काार दि�याा
गया हैै।
२. वि�धाायी शक्तििòियोंं केे प्रत्याायोजन केे
लि�ए उपर्युु�क्त प्रस्तााव साामान्य स्वरूप केे हैंं।
महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात, जुलै १, २०२६/आषषाढ १०, शके १९४८
15
विि¦त्तीीय ज्ञाापन
प्रस्तुुत वि�धेे
यक केे खंंड ११ मेंं महििªलाा कििसाानोंंं केे लि�ए महाराष्ट्र राज्य नि�ि�धि�ि केे गठन का
ा उपबंंध हैै।
इस रााज्य नि�िधि�ि का उपयोग महििªलाा कििसाानोंंं केे कल्यााण और वि�काास केे लि�ए सहाायताा प्रदान क
रनेे, महििªलाा
कििसाानोंंं केे सशक्तििòिकरण केे लि�ए वि�त्तीीय उपाय करनेे, महििªलाा कििसाानोंंं केे कल्यााण को बढ़ाावा देेनेे और
सुुवि�धााएंं प्रदान क
रनेे और ऐसेे अन्य मामलोंं केे लि�ए कििया जााएगा, जैैसाा किि वि�िहिªित कििया जाा सकताा हैै।
इसकेे अति�रि�क्त
, केंंद्र सरकार या राज्य सरकार सेे प्राप्त अनुुदान, सााथ हीी दाान और अन्य स्रोोतोंं सेे प्राप्त
धनरााशि� भीी उक्त नि�िधि�ि मेंं जमा की जााएगी।
यह वि�िधेेयक राज्य वि�धाानमंंडल केे
अधि�िनि�ियम केे रूप मेंं इसकीी अधि�नि�यमि�त पर महििªलाा कििसाानोंंं केे
लि�ए महाराष्ट्र राज्य नि�धि� मेंं रााज्य सरकार द्वाारा दि�ए जाानेे वाालेे अनुुदानोंंं केे लि�ए राज्य की संंचि�त नि�धि� सेे
आवर्ती व्यय शामि�ल होोगा। तथाापि�ि, इस नि�िमि�ित्त उपगत हाेे¸नेेवाालाा व्यय इस स्तर पर इस संंबंंध मेंं होनेे वाालेे
वास्तवि�क
आवर्ती व्यय का अनुुमान लगा
ानाा संंभव नहींं हैै।
ि
(यथाार्थ अनुुवाद),
ि
श्रीी. अरुण कमळााबाई वाळूू गि�तेे,
भ
ााषा संंचाालक,
ि
महाराष्ट्र राज्य।
16
महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात, जुलै १, २०२६/आषषाढ १०, शके १९४८
भाारत संंवि¦िधाान केे अनुुच्छेेद २०७ केे अधीन रााज्यपाल कीी अनुुशंंसा
(महाराष्ट्र शासन, वि�िधि�ि व न्यााय वि�िभाग, आदेेश कििि प्रत)
भारत संंवि�िधान केे
अनुुच्छेेद २०७ केे खंंड (३) द्वाारा प्रदत्त शक्तिòि�याेंंɞ का प्रयाेे¸ग करतेे हुुए, महाराष्ट्र
महिªिलाा किििसाान सशक्तिòि�करण वि�िधेेयक, २०२६ इट. पर वि�िचाार करनेे की
ी अनुुशंंसाा करतेे हैै.
वि¦िधाान भवन :
जि�ितेंंद्र भाेे�ळेे,
मुंं�बई, स
चि�िव-१ि
दि�नांं�किित १ जुुलााइट, २०२६।ि
महाराष्ट्र वि�िधानसभा
ा।
ON BEHALF OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATION, PRINTED AND PUBLISHED BY DIRECTOR, PRINTED
AT GOVERNMENT CENTRAL PRESS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004 AND PUBLISHED AT
DIRECTORATE OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATIONS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD,
MUMBAI 400 004. EDITOR : DIRECTOR.