L. A. BILL No. LVI OF 2026.

A BILL

FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA STAMP ACT.

वि¦धाानसभाा काा वि¦धेेयक क्रमांंsक ५६ सन् २०२६।

महाारााष्ट्र स्टााम्प अधि�नि�यम मेंंं अधि�कतर संंशोोधन करनेे संंबंंधीी वि¦धेेयक।

क्योंंकि� इसमेंं आगेे दर्शि§ित प्रयोोजनोंं केे लिि£ए, महाारााष्ट्र स्टााम्प अधिि˜नि�यम

मेंं अधिि˜कतर संंशोधन करनाा

इष्टकर

हैै; अतः भाारत गणरााज्य केे सतहत्तरवेंं वर्षष मेंं, एतद् द्वााराा, नि�म्न अधिि˜नि�यम

अधिि˜नि�यमि�

त कि�याा जाता

हैै :—

१.  यह अधिि˜नि�यम

महाारााष्ट्र स्टााम्प (चतुुर्थथ संंशोधन)अधिि˜नि�यम

, २०२६ कहलााए।

२.  महाारााष्ट्र स्टााम्प अधिि˜नि�यम

की अनुुसूूची-एक मेंं, —

(एक) अनुुच्छेेद ३४ केे पश्चात्, नि�म्न अनुुच्छेेद नि�वि�ष्ट कि�याा जाएगा, अर्था�त् :—

३४क.  गाारंंटी—

सन् १९५८

का ६०।

संंक्षििȦप्त नाम।

सन् १९५८ का

६० की अनुुसूूची

एक मेंं संंशोधन।

सन् १९५८

का ६०।

RNI No. MAHBIL /2009/31730

महाारााष्ट्रट शासन रााजपत्र

असाधाारण भााग सात

वर्षष १२, अंंक २९(४)]

मंंगळवार, जुुलैै ७, २०२६/आषााढ १६, शकेे १९४८

[पृृष्ठेे 5, किं�ंमत : रुपयेे ४७.००

असाधाारण क्रमांंsक ५७

प्रााधि�कृृत प्रकााशन

अध्यादेेश, वि¦धेेयकेे व अधि�नि�यम यांंsचाा हिं�ंदीी अनुुवाद (देेवनागरी लि�पीी).

महाारााष्ट्र वि¦धाानमंंडळ सचि�वाालय

महाारााष्ट्र वि�धाानसभाा मेंं दि�नांं�क ७ जुुलाई, २०२६ ई.को. पुुर:स्थाापि�त नि�म्न वि�धेे

यक महाारााष्ट्र वि�धाानसभाा नि�यम

११७ केे अधीन

प्रकाशिशि§त कि�याा जाता हैै :-

भााग सात-५७-१

(1)

2

महाराष्ट्रõ शासन रा

असाधारण भाग सात, जुलै ७, २०२६/आषषाढ १६, शके १९४८

(क) वि�त्ती

ीय या बँँक गारंंटी, —

(एक) यदि� ऐसेे वि�लेे

ख द्वााराा सुुरक्षििȦत गारंंटी रााशिशि§ पाँँ�च

लाख रुपयेे सेे अधिि˜क नहींं हैै ;

ऐसेे वि�लेे

ख द्वााराा सुुरक्षििȦत रााशिशि§ का ०.१

प्रति�श

त, जो न्यूूनतम पाँँ�च सौ रूपए केे

अधीन होगा;

(दो)

कि�सीी अन्य मामलेे मेंं,

ऐसेे वि�लेे

ख द्वााराा सुुरक्षििȦत रााशिशि§ का ०.३

प्रति�श

त, जो अधिि˜कतम बीस लाख

रूपए केे अधीन होगा ;

(तीन) जहाँँ� गारंंटी सरकाारी नि�गम

, स्थाानीय प्रााधिि˜करण,

या सांं�वि�धा

ानि�क

नि�कााय केे पक्ष मेंं सार्ववजनि�क

कार्योंं या सार्ववजनि�क

खरीद केे संंबंंध मेंं जारी

की जाती हैै,

पाँँ�च सौ रूपए।

(चार) गारंंटीकृृत रााशिशि§ मेंं वृृद्धििnj केे बि�नाा मौजूूदा वि�त्ती

ीय

या बँँक गारंंटी का नवीीनीकरण या वि�स्तार,

ऐसेे वि�लेे

ख द्वााराा सुुरक्षििȦत रााशिशि§ का

०.२५ प्रति�श

त, जो अधिि˜कतम पच्चीस

हजाार रूपए केे अधीन होगा।

(ख) गारंंटी पत्र (खण्ड (क) मेंं उल्लिčिखि�त लिि£खतोंं कोंं

छोडकर)

पाँँ�च सौ रूपए।”;

(दो) अनुुच्छेेद ३७ केे स्तंंभ (१) केे, “गारंंटी पत्र”, “देेखि�ए कराार (अनुुच्छेेद ५)” शब्द

अपमार्जि�ित कि�ए जाएंंगेे।

महाराष्ट्रõ शासन रा

असाधारण भाग सात, जुलै ७, २०२६/आषषाढ १६, शके १९४८

3

उद्देेश्योंं और काारणोंं काा वक्तव्य

महाारााष्ट्र स्टााम्प अधिि˜नि�यम

, १९५८ की धाराा ३ यह उपबंंध करतीी हैै कि�, उससेे संंलग्न अनुुसूूची - एक

मेंं वि�नि�र्दि�

िष्ट लिि£खतेंं उक्त अनुुसूूची मेंं दर्शाा�ई गई रााशिशि§ केे अनुुसार स्टााम्प शुुल्क सेे प्रभाारि�त होंंगी।

२.  बैंंक गारंंटी तथाा वि�त्ती

ीय गारंंटी की लिि£खतोंं का व्यापक रूप सेे वाणि�ज्यि�िक

संंव्यवहाार, मुुलभूूत

संंरचना परि�योोजनाओं, शासकीय संंवि�दााओं, क्रय-प्रक्रि�यााओं तथाा वि�त्ती

ीय गति�वि�धिि˜योंं मेंं उपयोोग कि�याा जाता

हैै। वर्ततमान मेंं, ऐसी गारंंटी की लिि£खतोंं को उक्त अनुुसूूची मेंं स्टााम्प शुुल्क अधिि˜रोपि�त करनेे केे लिि£ए अलग

श्रेेणी केे रूप मेंं वि�नि�र्दि�

िष्ट नहींं कि�याा गयाा हैै। ऐसी लिि£खतोंं पर वर्ततमान मेंं उक्त अनुुसूूची एक केे अनुुच्छेेद

५४ केे अधीन, जो प्रति�भूू

ति� बंंधपत्र सेे संंबंंधिि˜त हैै, वि�नि�र्दि�

िष्ट स्टााम्प शुुल्क प्रभाारि�त कि�याा जाता हैै।

गारंंटी प्रथम लिि£खत केे लिि£ए देेय स्टााम्प शुुल्क की समान रााशिशि§, उसकेे नवीीनीकरण या अवधिि˜ - वि�स्तार

केे मामलोंं मेंं भी प्रभाारि�त की जाती हैै। इसकेे परि�णाामस्वरूप, गारंंटी की रााशिशि§ अपरि�वर्ति�ित रहतीी हैै, तथाापि�,

गारंंटी की लिि£खत केे नवीीनीकरण या अवधिि˜-वि�स्तार की स्थि�िति� मेंं संंबंंधिि˜त पक्षोंं पर बार-बार स्टााम्प शुुल्क

का भाार पड़ता हैै।

३.  वााणि�ज्यि�िक

और वि�त्ती

ीय गति�वि�धिि˜योंं मेंं वि�त्ती

ीय तथाा बैंंक गारंंटी की लिि£खतोंं केे बढ़तेे उपयोोग

और महत्व को ध्यान मेंं रखतेे हुुए, सरकाार नेे यह आवश्यक समझाा हैै कि�, वि�त्ती

ीय गारंंटी अथवाा बैंंक गारंंटी

केे संंबंंध मेंं स्टााम्प शुुल्क प्रभाारि�त करनेे हेेतुु अलग अनुुच्छेेद का उपबंंध कि�याा जाए तथाा ऐसी लिि£खतोंं की

वि�भि�न्न श्रेेणि�योंं केे लिि£ए स्टााम्प शुुल्क की अलग-अलग दरेंं नि�र्धा

ा�रि�त की जाएँँ। इससेे रााज्य सरकाार केे रााजस्व

मेंं भी वृृद्धििnj होगी। यह भी प्रस्तावि�त हैै कि�, प्रथम लिि£खत केे अनुुसार यदि� गारंंटी की रााशिशि§ अपरि�वर्ति�ित रहतीी

हैै, तो ऐसी लिि£खतोंं केे नवीीनीकरण या अवधिि˜ - वि�स्तार केे मामलोंं मेंं स्टााम्प शुुल्क की कम रााशिशि§ देेय होगी।

इसलिि£ए, सरकाार महाारााष्ट्र स्टााम्प अधिि˜नि�यम

सेे संंलग्न अनुुसूूची- एक मेंं यथोोचि�त संंशोधन करनाा इष्टकर

समझााती हैै।

४.  प्रस्तुुत वि�धेे

यक का आशय उपर्युु�क्त उद्देेशोंं को प्राप्त करनाा हैै।

मुंं�बई,

चंंद्रशेेखर बावनकुुळेे,

दि�नांं�कि�त ६ जुुलाई, २०२६।

रााजस्व मंंंत्री।

भााग सात-५७-२

4

महाराष्ट्रõ शासन रा

असाधारण भाग सात, जुलै ७, २०२६/आषषाढ १६, शके १९४८

वि¦त्तीीय ज्ञाापन

प्रस्तुुत वि�धेे

यक मेंं महाारााष्ट्र स्टााम्प अधिि˜नि�यम

(सन् १९५८ का ६०) की संंलग्न अनुुसूूची एक मेंं एक

नवीीन अनुुच्छेेद ३४ क नि�वि�ष्ट करनेे का प्रस्तावि�त हैै, जि�सका उद्देेश वि�त्ती

ीय या बैंंक गारंंटी केे दस्तावेेजोंं पर

स्टााम्प शुुल्क उद्ग्रहीत करनेे की दृृष्टि�� सेे उसमेंं वि�नि�र्दि�

िष्ट दरोंं पर स्टााम्प शुुल्क लगााया जा सकेे।

यह वि�धेे

यक रााज्य वि�धाानमंंंडल केे अधिि˜नि�यम

केे रूप मेंं उसकी अधिि˜नि�यमि�ति�

होनेे पर रााज्य की

समेेकि�त नि�धिि˜ सेे आवर्ती या अनावर्ती व्यय केे संंबंंधी कोई उपबंंध अर्न्त�तग्रस्त नहींं हैै।

(यथाार्थथ अनुुवाद),

श्रीी. अरूण कमळााबाई वाळूू गि�तेे,

भााषाा संंचालक,

महाारााष्ट्र रााज्य।

महाराष्ट्रõ शासन रा

असाधारण भाग सात, जुलै ७, २०२६/आषषाढ १६, शके १९४८

5

भाारत संंवि¦धाान केे अनुुच्छेेद २०७ केे अधि�न रााज्यपाल की अनुुशंंसा

(महाारााष्ट्र शासन, वि�धिि˜ व न्याय वि�भााग, आदेेश कि� प्रत)

भाारत संंवि�धाान केे अनुुच्छेेद २०७ केे खंंड (१) व्दाराा प्रदत्त शक्ति�ियोंं का प्रयोोग करतेे हुुए, महाारााष्ट्र

रााज्यपााल महोोदय, महाारााष्ट्र स्टााम्प (चतुुर्थथ संंशोधन) वि�धेे

यक, २०२६ ई. पर पुुर:स्थाापना करनेे की अनुुशंंसा

करतेे हैै।

वि¦धाान भवन :

जि�तेंंद्र भोळेे,

मुंं�बई,

सचि�व

-१,

दि�नांं�कि�त ७ जुुलाई, २०२६।

महाारााष्ट्र वि�धाानसभाा।

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