L. A. BILL No. LXI OF 2026.
A BILL
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA SCHEDULED CAST,
SCHEDULED TRIBES DE-NOTIFIED TRIBES (VIMUKTA JATIS)
NOMADIC TRIBES, OTHER BACKWARD CLASSES AND SPECIAL
BACLWARD CATEGORY (REGULATION OF ISSUANSE AND
VERIFICATION OF CASTE CERTIFICATE) ACT, 2000.
वि¦धाानसभाा काा वि¦धेेयक क्र. ६१ सन् २०२६।
महाारााष्ट्र अनुुसूूचिित ज़ााति�, अनुुसूूचिित ज़नज़ााति�ि, नि�रधि�सूूचिित ज़नज़ााति�ि (वि¦मुुक्त ज़ााति�ि)
खाानाबदोोश ज़नज़ााति�ि, अन्य पििछड़ेे वर्गोेंंɲ और वि¦शेेष पििछड़ेे प्रवर्गोंंं (जााति� प्रमाणपत्र जाारी
करनेे और सत्यापन काा वि¦नि�यमन) अधि�नि�यम, २००० मेंं अधि�कतर संंशोधन करनेे संंबंंधी
वि¦धेेयक।
क्योंंकि� इसमेंं आगेे दर्शि§ित प्रयोोजनोंं केे लिि£ए, महाारााष्ट्र अनुुसूूचिित ज़ााति�ि, अनुुसूूचिित ज़नज़ााति�,
नि�रधििसूूचिित ज़नज़ााति�ि (विि¦मुुक्त ज़ााति�ियांंs) खाानाबदोश ज़नज़ााति�ि, अन्य पििछड़ेे वगाेे�ेɕ और विि¦शेेष पििछड़ेे
सन् २००१ का
महाा. २३।
भााग सात–६०—१
RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाारााष्ट्रट शासन रााजपत्र
असाधाारण भााग सात
वर्षषष १२, अंंक ३१ (२)]
गुुरूवार, जुुलैै ९, २०२६/आषाढ १८, शकेे १९४८
[पृृष्ठेे 8, किं�ंमत : रुपयेे ४७.००
असाधाारण क्रमांं�क ६०
प्राधि�कृृत प्रकााशन
अध्यादेेश, वि¦धेेयकेे व अधि�नि�यम यांं�चाा हिं�ंदी अनुुवाद (देेवनागरीी लि�पीी)
महाारााष्ट्र वि¦धाानमंंडळ सचििवालय
महाारााष्ट्र विि¦धानसभाा मेंं दि�नांंsक ९ जुुलाइɓ, २०२६ ई.को. पुुर:स्थाापिित नि�म्न विि¦धेेयक महाारााष्ट्र विि¦धानसभाा नि�यम
११७ केे अधीन
प्रकाशिि§ित कि�याा जाता हैै :-
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महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात,जुुलैै ९, २०२६/आषाढ १८, शकेे १९४८
प्रवगाेे�ेɕ (जाति� प्रमाणपत्र जारी करनेे और सत्यापन का विि¦नि�यमन
) अधििनि�यम
, २००० मेंं अधििकतर संंशोोधन
करनाा इष्टकर हैै ; अत: भाारत गणरााज्य केे सतहत्तरवेंं वर्षष मेंं, एतद् द्वााराा, नि�म्न अधििनि�यम
अधििनि�यमि�
त
कि�याा जाता हैै :—
१. (१) यह अधििनि�यम
महाारााष्ट्र अनुुसूूचिित जाति�, अनुुसूूचिित जनजााति�, नि�रधििसूूचिित
ज़नजा
ाति�ि(विि¦मुुक्त जाति�) खाानाबदोश ज़नजा
ाति�, अन्य पििछड़ेे वगाेे�ेɕ और विि¦शेेष पििछड़ेे प्रवगाेे�ेɕ (ज़ााति� प्रमाणपत्र
जारी करनेे और सत्यापन का विि¦नि�यमन
) (संंशोोधन) अधििनि�यम
, २०२६ कहलााए।
(२) यह ऐसेे दि�नांंsक पर प्रवृृत्त होगा जि�सेे
रााज्य सरकाार, रााजपत्र मेंं अधििसूूचनाा द्वााराा नि�युु
क्त करेे।
२. महाारााष्ट्र अनुुसूूचिित जाति�, अनुुसूूचिित ज़नज़ााति�, नि�रधििसूूचिित ज़नज़ााति�ि (विि¦मुुक्त जाति�)
खाानाबदोश जनजााति�, अन्य पििछड़ेे वगाेे�ेɕ और विि¦शेेष पििछड़ेे प्रवगाेे�ेɕ (जाति� प्रमाणपत्र जारी करनेे और सत्यापन
का विि¦नि�यमन
अधििनि�यम
, २००० (जि�सेे
इसमेंं आगेे, “मूूल अधििनि�यम
” कहाँँr गयाा हैंं) की धाराा २ केे,
खंंड (घ) केे पश्चात्, नि�म्न खंंड नि�विि¦ष्ट कि�ए जाएंंगेे, अथाा�त् :—
(घ-१) “जाली जाति� प्रमाणपत्र” का तात्पर्यय, वह जाति� प्रमाणपत्र जो सक्षम प्राधििकारी
द्वााराा जारी कि�याा गयाा प्रतीत होता हैै, लेेकि�न
वास्तव मेंं उक्त प्राधििकारी द्वााराा जारी नहींं कि�याा
गयाा हैै ;
(घ-२) “जाली वैैधता प्रमाणपत्र” का तात्पर्यय, वह वैैधता प्रमाणपत्र जो संंवीीक्षा समि�ति�
द्वााराा जारी कि�याा गयाा प्रतीत होता हैै, लेेकि�न
वास्तव मेंं संंवीीक्षा समि�ति� द्वााराा जारी नहींं कि�याा
गयाा हैै ;
(घ-३) “जाली जाति� प्रमाणपत्र” का तात्पर्यय, गलत जानकाारी देेकर या झुुठेे बयान
दाखि�ल
करकेे या कि�सीी अन्य कपटपूूर्णण तरीकेे सेे प्राप्त कि�याा गयाा जाति� प्रमाणपत्र ;
(घ-४) “जाली वैैधता प्रमाणपत्र” का तात्पर्यय, गलत जानकाारी देेकर या झुुठेे बयान या
दस्तावेेजाेंं� काेे� दाखि�ल
करकेे या कि�सीी अन्य कपटपूूर्णण तरीकेे सेे प्राप्त कि�याा गयाा वैैधता प्रमाणपत्र ;” ।
३. मूूल अधििनि�यम
की धाराा ४ क अपमाार्जि�ित की जाएगी ।
४. मूूल अधििनि�यम
की धाराा ५ की, पार्श्व¦व टि�प्पणी मेंं, “अपील” शब्द केे स्थाान मेंं “सक्षम प्राधििकारी
केे आदेेश केे विि¦रुद्ध अपील” शब्द रखेे जाएंंगेे ।
५. मूूल अधििनि�यम
की धाराा ६ पश्चात नि�म्न धारााएंं नि�विि¦ष्ट की जाएगी, अथाा�त् :—
(६ क) (१) जहांंs,—
(एक) संंवीीक्षा समि�ति� को कि�सीी विि¦शिशि§ष्ट ज़ााति�ि, ज़नज़ााति�ि, वर्गग या श्रेेणी सेे संंबंंधिित
कि�सीी व्यक्ति�ि केे दावेे केे संंबंंध मेंं कोई प्रति�कूू
ल साक्ष्य प्राप्त हुुइट हैै ; या
(दाेे�) कि�सीी व्यक्ति�ि केे रक्त संंबंंधिियोंं नेे धोखााधड़ीी या दुुर्व्य�यपदेेशन द्वााराा या महत्त्वपूूर्णण
तथ्योंं को छि�पााकर वैैधता प्रमाणपत्र प्राप्त कि�याा हैै ; या
(तीन) संंवीीक्षा समि�ति� इस नि�ष्कर्षष पर पहुंंsची हैै कि�, कि�सीी व्यक्ति�ि या उसकेे रक्त
संंबंंधिियोंं को वैैधता प्रमाणपत्र प्रदान करतेे समय, संंवीीक्षा समि�ति� नेे महत्त्वपूूर्णण तथ्योंं, ठाेे�स या
संंक्षि�प्त नाम और
प्रारम्भण।
सन् २००१ का
महाा. २३ की धाराा
२ मेंं संंशोोधन।
सन् २००१
का महाा.
२३ की
धाराा
४ क का
अपमाार्जजन।
सन् २००१ का
महाा. २३ की धाराा
५ मेंं संंशोोधन।
सन् २००१ का
महाा. २३ मेंं नई
धाराा ६क और
६ख का नि�वेे
शन।
पूूनरीीक्षण।
महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात, जुुलैै ९, २०२६/आषाढ १८, शकेे १९४८
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आवश्यक साक्ष्योंं को नजरअंंदाज कि�याा हैै, या अभि�िलेेख मेंं स्पष्ट त्रुुटि� की हैै या उचिित जाँँrच
नहींं की हैै, या इसकेे लिि£ए कारणोंं को अभि�लिि£खि�त नहींं कि�याा हैंं, या विि¦धिि की सम्यक प्रक्रििĸया
का पालन नहींं कि�याा हैै,
तो संंवीीक्षा समि�ति�, स्वत: सज्ञाान लेेकर कि�सीी भी व्यक्ति�ि या उसकेे रक्त संंबंंधिियोंं या
ऐसेे व्यक्ति�ि केे परि�वाार केे सदस्योंं को प्रदान कि�ए गए वैैधता प्रमाणपत्र केे आदेेशोंं का पूूनरीीक्षण
कर सकेेगी :
परंंतुु, संंवीीक्षा समि�ति�, पूूनरीीक्षण मेंं कोई आदेेश पारि�त नहींं करेेगी, जब तक कि� प्रभााविि¦त
व्यक्ति�ि को सुुनवााई का युुक्ति�ि�युुक्त अवसर न दि�याा जाए।
(२) संंवीीक्षा समि�ति� पूूनरीीक्षण केे पश्चात् इसकेे कारणोंं को अभि�लिि£खि�त करतेे हुुए, या तो
वैैधता प्रमाणपत्र और जाति� प्रमाण पत्र को रद्द कर सकेेगी या जब्त कर सकेेगी और संंबंंधिित व्यक्ति�ि
को तथाा संंबंंधिित नि�युु
क्ति�ि प्राधििकारी या शैैक्षणि�क
संंस्थाान या संंबंंधिित प्राधििकरण को सूूचिित कर
सकेेगी ।
“६ ख (१) संंवीीक्षा समि�ति� केे कि�सीी आदेेश सेे व्यथि�त कोई भी व्यक्ति�ि धाराा ६, ६ क या
७ केे अधीन ऐसेे आदेेश की प्राप्ति�� केे दि�नांंsक सेे नब्बेे दि�नोंं केे भीतर, सरकाार द्वााराा रााजपत्र मेंं
अधििसूूचिित अपीलीय प्राधििकारी केे समक्ष अपील दायर कर सकेेगा।
(२) अपीलीय प्राधििकारी तीन महीीनेे की अवधिि केे भीतर अपील का नि�पटा
ाराा करेेगा
और अपीलकर्ताा� को सुुनवााई का अवसर देेनेे केे पश्चात ऐसेे आदेेश पारि�त करेेगा जैैसा कि�ि
वह उचिित समझेे।
(३) अपीलीय प्राधििकारी द्वााराा पारि�त आदेेश अंंति�म
होगा और भाारत केे संंविि¦धान केे
अनुुच्छेेद २२६ केे अधीन उच्च न्यायालय को छोडकर कि�सीी भी प्राधििकरण या न्यायालय
केे समक्ष चुुनौती नहींं दी जाएगी।
६. मूूल अधििनि�यम
की धाराा ७ की ,—
(१) उप-धाराा (१) मेंं “प्रमाणपत्र धोख़ााधड़ी सेे प्राप्त कि�याा गयाा थाा” शब्दाेंं� केे स्थाान मेंं
“प्रमाणपत्र जाली या गलत हैै” शब्द रखेे जायेंंगेे;
(२) उप-धाराा (२) अपमाार्जि�ित की जाएगी ;
(३) पार्श्व¦व टि�प्पणी मेंं “जाली जाति� प्रमाणपत्र” शब्दोंं केे पश्चात् “या झूूठा जाति� प्रमाणपत्र”
शब्द जोडेे जायेंंगेे।
७. मूूल अधििनि�यम
की धाराा ७ केे पश्चात् नि�म्न धाराा नि�विि¦ष्ट की जाएगी, अथाा�त् :—
“७ क (१) जहाँँr संंवीीक्षा समि�ति� नेे यह आदेेश पारि�त कि�याा हैै कि�, जाति� प्रमाणपत्र जाली हैै, तो
वह संंबंंधिित सक्षम प्राधििकारी को नि�र्देेश देेगी कि�, वह उस व्यक्ति�ि केे विि¦रुद्ध प्रथम सूूचनाा रि�पोोटट दर्जज
करेेगी जि�सनेे ऐसा जाली या गलत जाति� प्रमाणपत्र प्रस्तुुत कि�याा हैै।
(२) सक्षम प्राधििकारी या इस नि�मि�त्त उनकेे द्वााराा प्राधििकृृत अधििकारी जाली जाति� प्रमाणपत्र
धारक या जाली वैैधता प्रमाणपत्र धारक केे विि¦रुद्ध संंबंंधििित पुुलिि£िस स्टेेशन मेंं प्रथम सूूचनाा रि�पोोटट दर्जज
करेेगा।
(३) संंवीीक्षा समि�िति�ि का सदस्य-सचिििव या उसकेे द्वााराा प्रधिििकृृत अधिििकाारी जाली जाति�ि
प्रमाणपत्र या जाली वैैधता प्रमाणपत्र धारक केे विि¦िरूद्ध प्रथम सूूचनाा रि�िपाेे�टट दजट करेेगा ।
संंवीीक्षा, समि�िति�ि केे
आदेेश केे विि¦िरुध्द
अपील।
सन् २००१ का
महाा. २३ की धाराा
७ मेंं संंशाेे�धन
।
सन् २००१ का
महाा. २३ मेंं
धाराा ७क का
नि�वेे
शन।
भााग सात–६०—१अ
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महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात,जुुलैै ९, २०२६/आषाढ १८, शकेे १९४८
८. मूूल अधििनि�यम
की धाराा ९ केे खंंड (ड़) केे पश्चात् नि�म्न खंंड जोडेे जाएंंगेे, अथाा�त् :—
(च) कि�सीी अन्य कार्या�लय या अन्य रााज्य केे प्राधििकरण सेे कि�सीी भी दस्तावेेज की खोज
और उत्पादन की मांंsग करनाा ;
(छ) कोई अन्य मामलाा जैैसा नि�र्धा
ा�रि�त कि�याा जा सकेेगा।”।
९. मूूल अधििनि�यम
की धाराा १० की ,—
(१) उप-धाराा (१) मेंं, “जाली जाति� प्रमाणपत्र” शब्द केे स्थाान मेंं, “फर्जीी जाति�ि प्रमाणपत्र या
जाली जाति�ि प्रमाणपत्र” शब्द रखेे जाएंंगेे ;
(२) उप-धाराा (३) मेंं “झूूठा” शब्द केे स्थाान मेंं “जाली या गलत” शब्द रखेे जायेंंगेे;
(३) उप-धाराा (४) मेंं, “जाली जाति�ि प्रमाणपत्र” शब्द दोनोंं स्थाानोंं पर जहाँँr कहीी वेे आए
हाेंं�, केे स्थाान मेंं “जाली जाति� प्रमाणपत्र या झूूठा जाति� प्रमाणपत्र” शब्द रखेे जाएंंगेे;
(४) उप-धाराा (४) केे पश्चात्, नि�म्न उप-धाराा जोड़ी जाएगी, अथाा�त्:-
“(५) संंवीीक्षा समि�ति� द्वााराा जाति� प्रमाणपत्र रद्द कि�ए जानेे और ज़ब्त कि�ए जानेे केे पश्चाात्,
संंबंंधिित नि�युु
क्ति�ि प्राधििकारी, स्थाानीय प्राधििकरण, सरकाार, शैैक्षणि�क
संंस्थाान, सांंsविि¦धििक नि�कााय या
एजेंंसी, ऐसेे व्यक्ति�ि को दि�ए गए लाभोंं को वापस लेेनेे केे लिि£ए कार्रवााई करेेगी,—
(क) अपीलीय प्राधििकारी केे आदेेश केे दि�िनांंsक सेे तीस दि�नोंं केे भीतर यदि� अपील
दायर की जाती हैै, और इसेे अपीलीय प्राधििकारी द्वााराा खाारि�ज कर दि�याा जाता हैै ;
(ख) यदि� अपील दायर नहींं की जाती हैै तो, धाराा ६ख की, उप-धाराा (१) मेंं विि¦िनि�र्दि�िष्ट
अपील अवधिि अवसि�त होनेे केे तीस दि�नोंं केे भीतर।”;
(६) पार्श्व¦व टि�प्पणी मेंं, “जाली जाति�ि प्रमाणपत्र” शब्दोंं केे पश्चाात् “झूूठा प्रमाणपत्र” शब्द जोड़ेेे
जाएंंगेे।
१०. मूूल अधििनि�यम
की धाराा ११ की,—
(१) उप-धाराा (१) मेंं,-
(एक) खंंड (क) केे पश्चात्, नि�म्न खंंड नि�विि¦ष्ट कि�ए जाएंंगेे, अथाा�त्:-
“(क-१) गलत जानकाारी देेकर या गलत बयान या दस्तावेेज दाखि�ल
करकेे या कि�सीी अन्य धोखााधडी
केे माध्यम
सेे जाली वैैधता प्रमाणपत्र प्राप्त करताा हैै; या
(क-२) जाली जाति� प्रमाणपत्र या जालिि£ वैैधता प्रमाणपत्र प्रस्तुुत करताा हैै ; या”;
(दो) खंंड (ख) मेंं, “झूूठा जाति� प्रमाणपत्र” शब्दोंं केे स्थाान मेंं “जाली जाति� प्रमाणपत्र या झूूठा
जाति�-प्रमाणपत्र” शब्द रखेे जाएंंगेे;
(तीन) “दो हजाार रुपयेे परंंतुु जि�सेे
बीस हजाार रुपयोंं तक बढााया जा सकेेगा या दोनोंं सेे” शब्दोंं केे
स्थाान मेंं, “बीस हजाार रुपए परंंतुु जि�सेे
पचास हजाार रुपयोंं तक बढााया जा सकेेगा या दोनोंं सेे” शब्द रखेे
जाएंंगेे;
(२) उप-धाराा (२) केे स्थाान मेंं, नि�म्न उप-धारााएंं रखीी जाएगी, अथाा�त् :-
सन् २००१ का
महाा. २३ की धाराा
९ मेंं संंशोोधन।
सन् २००१ का
महाा. २३ की
धाराा १० मेंं
संंशोोधन।
सन् २००१ का
महाा. २३ की धाराा
११ मेंं संंशोोधन।
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असाधारण भाग सात, जुुलैै ९, २०२६/आषाढ १८, शकेे १९४८
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“(२) कोई भी न्यायालय इस धाराा केे अधीन दंंडनीय अपरााध का संंज्ञाान तब तक नहींं लेेगा जब
तक,—
(क) सक्षम प्राधििकारी या संंवीीक्षा समि�ति� या इस उद्देेश्य केे लिि£ए सक्षम प्राधििकारी या संंवीीक्षा समि�ति�
द्वााराा सम्य् क प्राधििकृृत कि�सीी अधििकारी द्वााराा लिि£खि�त शिशि§कायत न की जाए ; या
(ख) अपरााध गठि�त करनेे वालेे तथ्योंं की पुुलिि£स रि�पोोटट पर :
परंंतुु, ऐसी पुुलिि£स रि�पोोटट अधििकारी द्वााराा दायर प्रथम सूूचनाा रि�पोोटट पर आधारि�त हो, जो धाराा ७क
केे अधीन प्रथम सूूचनाा रि�पोोटट दायर करनेे केे लिि£ए अधििकृृत हैै।
(३) यदि� सक्षम प्राधििकारी या संंवीीक्षा समि�ति� द्वााराा सम्यक प्राधििकृृत कोई अधििकारी प्रथम सूूचनाा
रि�पोोटट दर्जज करनेे मेंं विि¦फल रहताा हैै या जानबूूझकर
ऐसेे व्यक्ति�ि केे खि�लााफ प्रथम सूूचनाा रि�पोोटट दर्जज करनेे
मेंं देेरी करताा हैै, जि�सनेे फर्जीी जाति� प्रमाणपत्र या गलत जाति� प्रमाणपत्र केे आधार पर लाभ प्राप्त कि�याा हैै,
तो ऐसा अधििकारी बीस हजाार रुपयेे केे जुुर्मा�नेे केे लिि£ए उत्तरदाायी होगा और उसकेे लिि£ए लागूू सेेवा नि�यमोंंं
केे अधीन अनुुशासनात्मक कार्रवााई केे लिि£ए भी उत्तरदाायी होगा।
११ मूूल अधििनि�यम
की धाराा १२ मेंं,-
(१) “अपरााधििक प्रक्रििĸया संंहि�ताा १९७३” शब्दो और अंंकोो केे स्थाान मेंं “भाारतीीय नागरि�क सुुरक्षाा
संंहि�ताा २०२३” शब्द और अंंक रखेे जाएंंगेे।
(२) खंंड (ख) मेंं, “धाराा २६२ की, उप-धाराा (२) को छोडकर, धाराा २६५ दाेे�नाेंं�, उक्त
संंहि�ताा काेे� सम्मि�िलिि£त करकेे” शब्दोंं, अंंकोंं
और कोष्ठकोंं केे स्थाान मेंं, “(उक्त संंहि�ताा की धाराा
२८५ “उसकी उप-धाराा (२) छोडकर) २८६ सेे २८८ (दोनोंं समेेत)” शब्द, अंंक और कोष्ठक
रखेे जाएंंगेे।
१२. मूूल अधििनि�यम
की धाराा १३ की, उप-धाराा (१) मेंं, “दो हजाार रुपयेे, परंंतुु जि�सेे
बीस हजाार
रुपयोंं तक बढााया जा सकेे; या दोनोंं सेे” शब्दोंं केे स्थाान मेंं “बीस हजाार रुपयेे, परंंतुु जि�सेे
पचास हजाार
रुपयोंं तक बढााया जा सकेे, या दोनोंं सेे” शब्द रखेे जाएंंगेे।
१३. मूूल अधििनि�यम
की धाराा १६ मेंं “कि�सीी बात केे लिि£ए कोई व्यक्ति�ि” शब्दोंं केे स्थाान मेंं “कि�सीी
बात केे संंबंंध मेंं सक्षम प्राधििकारी या संंवीीक्षा समि�ति� केे कोई सदस्य सदस्य या अपील प्राधििकारी या कोई
व्यक्ति�ि” शब्द रखेे जाएंंगेे।
१४. मूूल अधििनि�यम
की धाराा १८ की उप-धाराा (१) मेंं, नि�म्न परंंतुुक जोड़ा जाएगा, अथाा�त्:-
“परंंतुु, यदि� रााज्य सरकाार की रााय मेंं कि�न्हींं नि�यमोंंं
को तत्काल लागूू कि�याा जाना चाहि�ए, तो ऐसेे
नि�यमोंंं
को पूूर्वव प्रकाशन केे बि�नाा बनाया जा सकताा हैै।”।
१५. (१) इस अधििनि�यम
द्वााराा यथाा संंशोोधिित मूूल अधििनि�यम
केे उपबंंधोंं को प्रभाावी करनेे मेंं
यादि�ि कोई कठि�ना
ाई उत्पन्न होती हैै, तो रााज्य सरकाार, यथाासंंभव
शीघ्र, रााजपत्र मेंं प्रकाशिशि§त आदेेश द्वााराा,
ऐसेे नि�र्देे
श देे सकेेगी, जो मूूल अधििनि�यम
केे उपबंंधोो केे साथ असंंगत न होंं, जैैसा कि� कठि�ना
ाइयोंं को दूूर
करनेे केे प्रयाेे�जनाेंं� केे लिि£ए आवश्यक या इष्टकर प्रतीत हो:
सन् २००१
का महाा.
२३ की
धाराा १२ मेंं
संंशोोधन।
सन् १९७४
का २।
सन् २०२३
का ४६।
सन् २००१
का महाा.
२३ की
धाराा १३ मेंं
संंशाेे�धन
।
सन् २००१
का महाा.
२३ की
धाराा १६ मेंं
संंशाेे�धन
।
सन् २००१
का महाा.
२३ की
धाराा १८ मेंं
संंशाेे�धन
।
कठि�ना
ाइयोंं को दूूर
करनेे की शक्ति�ि।
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महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात,जुुलैै ९, २०२६/आषाढ १८, शकेे १९४८
परंंतुु, इस अधििनि�यम
केे प्रारम्भण केे दि�नांंsक सेे दो वषाेे�ेɕ की अवधिि अवसि�त होनेे केे पश्चात् इस
धाराा केे अधीन ऐसा कोई आदेेश नहींं बनाया जाएगा।
(२) उप-धाराा (१) केे अधीन बनाया गयाा प्रत्येेक आदेेश उसकेे बनाए जानेे केे पश्चात् यथाा संंभव
शीघ्र, रााज्य विि¦धानमंंडल केे प्रत्येेक सदन केे समक्ष रखाा जाएगा ।
महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात, जुुलैै ९, २०२६/आषाढ १८, शकेे १९४८
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वक्तव्य
महाारााष्ट्र अनुुसूूचिित ज़ााति�, अनुुसूूचिित ज़नज़ााति�, नि�रधििसूूचिित जनज़ााति� (विि¦मुुक्त जाति�), खाानाबदोश
जनजााति�, अन्य पििछड़ेेे वगाेे� और विि¦शेेष पििछड़ेेे प्रवगाेे� (जाति� प्रमाण पत्र जारी करनेे और सत्यापन का
विि¦नि�यमन
) अधििनि�यम
, २००० (सन् २००१ का महाा. २३) उसमेंं उल्लििčिखि�त आरक्षि�त श्रेेणि�योंं सेे संंबंंधिित
व्यक्ति�ियोंं को जाति� प्रमाणपत्र जारी करनेे और उसकेे सत्यापन केे विि¦नि�यमन
करनेे केे उपबंंध करनेे केे लिि£ए
अधििनि�यमि�
त कि�याा गयाा हैै।
२. सरकाार केे ध्याान मेंं यह लाया गयाा हैै कि�, ज़नजा
ाति�योंं या अन्य आरक्षि�त श्रेेणीयोंं सेे संंबंंधिित
आवेेदकोंं केे दावेे केे विि¦रुध्द बडी संंख्या मेंं मामलोंं मेंं प्रति�कूू
ल साक्ष्य पाई गई हैै, जाति� प्रमाणपत्र और
वैैधता प्रमाणपत्र और उनकेे रक्तसंंबंंधिियोो द्वााराा धोखााधड़ी, गलत बयानी या अत्यावश्यक दस्तावेेजोंं को
छुुपाकर प्राप्त कि�ए गए थेे, और इसलिि£ए आरक्षि�त श्रेेणि�योंं केे वास्तविि¦क सदस्य ऐसेे छद्म या फर्जीी दावेेदारोंं
केे कारण आरक्षण लाभ प्राप्त करनेे सेे वंंचिित हैै।
३. विि¦द्यमानत: उक्त अधििनि�यम
मेंं संंवीीक्षा समि�ति� केे आदेेशोंं केे विि¦रुध्द अपील का कोई उपबंंध
नहींं हैंं, इसलिि£ए बड़ी संंख्या मेंं रि�ट याचििकाएंं उच्च न्यायालय केे समक्ष दायर की हैंं।
४. वैैधता प्रमाणपत्र जारी करनेे मेंं आनेेवाली कठि�ना
ाइयोंं की जांंsच करनेे और सरकाार को सि�फाारि�शेंं
देेनेे केे लिि£ए सरकाार नेे सेेवानि�वृृ
त्त न्यायमूूर्ति�ि श्री. पी. वी. हरदाास की अध्यक्षता मेंं एक समि�ति�ि का गठन
कि�याा हैै। उक्त समि�ति�ि नेे सरकाार को अपनीी रि�पोोटट प्रस्तुुत की हैंं, जि�सकेे द्वााराा संंवीीक्षा समि�ति�ि नेे उक्त
अधििनि�यम
और तद्धिििन बनाए गए नि�यमोंंं
मेंं कति�पय
संंशोोधनोंं का सुुझाव दि�याा हैै ताकि� यह सुुनि�श्चि�ि
त
कि�याा जा सकेे कि�, आरक्षि�त श्रेेणि�योंं केे लिि£ए जाति� प्रमाणपत्र और वैैधता प्रमाणपत्र का लाभ सुुरक्षि�त रहेंं।
५. उपर्युु�क्त को ध्याान मेंं रखतेे हुुए, यह सुुनि�श्चि�ि
त करनाा हैै कि� आरक्षि�त प्रवर्गोंं केे वास्तविि¦क सदस्योंं
को वैैधता प्रमाणपत्र मि�लेे
और छद् म या फर्जीी दावेेदारोंं को जाति� प्रमाणपत्र और वैैधता प्रमाणपत्र तथाा
आरक्षि�त प्रवर्गोंं केे लिि£ए बनेे लाभ प्राप्त करनेे सेे रोका जा सकेे, इसलिि£िए महाारााष्ट्र सरकाार उक्त अधििनि�यम
मेंं यथोोचिित संंशोोधन करनाा इष्टकर समझती
ी हैै।
६. प्रस्ताविि¦त संंशोोधनोो की मुुख्य विि¦शेेषताएंं यथाा नि�म्न हैै :—
(क) “जालिि£ जाति� प्रमाणपत्र”, “नकली
ी जाति� प्रमाणपत्र” और “जालिि£ वैैधता प्रमाणपत्र”
शब्दोंं की परि�भााषाओं केे लिि£ए उपबंंध करनाा ;
(ख) कति�पय
मामलोंं मेंं संंवीीक्षा समि�ति�ि द्वााराा अपनेे आदेेशोंं पुुनरीीक्षण केे लिि£ए स्पष्ट उपबंंध
प्रदान करनाा;
(ग) संंवीीक्षा समि�ति� केे आदेेशोंं केे विि¦रूध्द सुुनवााई केे लिि£ए अपीलीय प्राधििकारी की नि�युु
क्ति�ि
का उपबंंध करनाा;
(घ) उक्त अधििनि�यम
केे अधीन अपरााधोंं केे लिि£ए प्रथम सूूचनाा रि�पोोटट दर्जज करनेे और न्यायालय
द्वााराा अपरााध का संंज्ञाान लेेनेे का उपबंंध करनाा ;।
(ङ) अपरााध केे लिि£ए जुुर्मा�नेे मेंं वृृध्दि�ि करनेे केे लिि£ए उपबंंध करनाा;
(च) सक्षम प्राधििकारी या संंवीीक्षा समि�ति�ि केे सदस्य या अपील प्राधििकरण द्वााराा उक्त
अधििनि�यम
या नि�यमोंंं
केे अनुुसरण मेंं विि¦शेेष रूप सेे सद्भाावनाा मेे कि�ए गए कृृत्य केे लिि£ए संंरक्षण
का उपबंंध करनाा।
७. प्रस्तुुत विि¦धेेयक का आशय उपर्युु�क्त उद्देेश्योंं को प्राप्त करनाा।
मुंंsबई,
डाॅॅ¶. अशाेे�क वुुइकेे,
दि�नांंsकि�त ८ जुुलाइट २०२६।
ज़नज़ााति� विि¦कास मंंत्रीी।
8
महाराष्ट्रõ शासन रा
असाधारण भाग सात,जुुलैै ९, २०२६/आषाढ १८, शकेे १९४८
प्रत्यायुुक्त वि¦धाान संंबंंधि� ज्ञाापन
प्रस्तुुत विि¦धेेयक मेंं, विि¦धायी शक्ति�ि केे प्रत्यायोोजन केे लिि£ए नि�म्न प्रस्ताव अंंतर्ग्ररस्त हैंं, अथाा�त्:-
खंंड १(२):- इस खंंड केे अधीन, रााज्य सरकाार को रााजपत्र मेंं अधििसूूचनाा द्वााराा वह दि�नांंsक
नि�य
त करनेे की शक्ति�ि दी गई हैै जि�स दि�नांंsक पर यह अधििनि�यम
लागूू होगा।
खंंड ५:- इस खंंड केे अधीन, मूूल अधििनि�यम
मेंं नई धारााएंं ६क, ६ख का नि�वेे
शन करनाा जि�िसका
आशय हैै, धाराा ६ख की प्रस्ताविि¦त उप-धाराा (१) मेंं, रााज्य सरकाार को रााजपत्र मेंं अधििसूूचनाा द्वााराा
अपीलीय प्राधििकारी को नि�र्दि�िष्ट करनेे की शक्ति�ि दी गई हैै।
खंंड १५:- इस खंंड केे अधीन, रााज्य सरकाार को इस अधििनि�यम
केे प्रारम्भण केे दि�नांंsक सेे दो वर्षोंं
की अवधिि केे भीतर, इस अधििनि�यम
द्वााराा यथाा संंशोोधिित, मूूल अधििनि�यम
केे उपबंंधोंं को प्रभाावी बनानेे
मेंं उद्भूूत काेे�इट भी कठि�ना
ाई को दूूर करनेे केे लिि£ए रााजपत्र मेंं प्रकाशिशि§त आदेेश जारी करनेे की शक्ति�ि दी गई
हैै।
२. विि¦धायी शक्ति�ि केे प्रत्यायोोजन केे लिि£ए उपरोोल्लििčिखि�त प्रस्ताव सामान्य स्वरूप केे हैै।
(यथाार्थथ अनुुवाद),
श्रीी. अरुण कमळाबाई वाळूू गि�तेे,
भााषा संंचाालक,
म
हाारााष्ट्र रााज्य।
विि¦िधाान भवन :
जि�ितेंंद्र भाेे�ळेे,
मुंंsबई,
सचिििव - १
दि�नांंsकि�त ९ जुुलाइट, २०२६।म
हाारााष्ट्र विि¦िधानसभाा।
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SMT. MANISHA KUMBHAR, PRINTED AT GOVERNMENT CENTRAL PRESS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD,
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