REGISTERED NO . D.- 221
रजिस्ट्री सं० डी०-221
भारत का राजपत्र The Gazette ofIndia
असाधारण
EXTRAORDINARY
भाग 2 - अनुभाग 1क
PART II- Section 1A
प्राधिकार से प्रकाशित
PUBLISHED BY AUTHORITY
खंड LIII
दिल्ली, गुरुवार, 12 जनवरी, 2017/22 पौष , 1938 ( शक )
सं० 1 No. ]
VOL . LIII [ v
नई NEW DELHI , THURSDAY, JANUARY 12 , 2017/PAUSA 22, 1938 ( SAKA)
इस भाग में भिन्न पृष्ठ संख्या दी जाती है जिससे कि यह अलग संकलन के रूप में रखा जा सके ।
Separate paging is given to this Part in order that it may be filed as a separate compilation.
विधि और न्याय मंत्रालय
(विधायी विभाग)
नई दिल्ली, 12 जनवरी , 2017/22 पौष, 1938 ( शक )
दि फाइनेंस ऐक्ट, 2016 ; ( 2 ) दि एंटी- हाईजैकिंग ऐक्ट, 2016 ; और ( 3 ) दि डेंटिस्ट ( अमेंडमेंट) ऐक्ट, 2016 के निम्नलिखित हिन्दी अनुवाद राष्ट्रपति के प्राधिकार से प्रकाशित किए जाते हैं और ये राजभाषा अधिनियम, 1963 ( 1963 का 19 ) की धारा 5 की उपधारा ( 1 ) के खंड ( क ) के अधीन उनके हिन्दी में प्राधिकृत पाठ समझे जाएंगे:-
MINISTRY OF LAW AND JUSTICE
( LEGISLATIVE DEPARTMENT)
New Delhi, January 12, 2017/Pausa 22, 1938 (Saka)
The translation in Hindi of the following , namely :- The Finance Act , 2016 ; (2) The Anti -Hijacking Act , 2016; and (3) The Dentists (Amendment) Act, 2016 are hereby published under the authority of the President and shall be deemed to be the authoritative texts thereof in Hindi under clause ( a) of sub- section ( 1 ) of section 5 of the Official Languages Act , 1963 ( 19 of 1963 ) :-
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भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
वित्त अधिनियम , 2016 ( 2016 का अधिनियम संख्यांक 28 ) 03
The Finance Act , 2016
यान- हरण अधिनियम, 2016 ( 2016 का अधिनियम संख्यांक 30 ) 223
The Anti - Hijacking Act , 2016
दन्त- चिकित्सक ( संशोधन ) अधिनियम, 2016 ( 2016 का अधिनियम संख्यांक 40 ) ...... 231
The Dentists (Amendment ) Act , 2016 भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
वित्त अधिनियम , 2016
(2016 का अधिनियम संख्यांक 28)
[14मई, 2016]
वित्तीय वर्ष 2016-2017 के लिए केन्द्रीय सरकार कीवित्तीय प्रस्थापनाओं को प्रभावी करने के लिए अधिनियम
भारत गणराज्य के सड़सठवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो
अध्याय 1
प्रारंभिक
संक्षिप्त नाम और 1. (1 ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम वित्त अधिनियम, 2016 है ।
प्रारंभ ।
(2) इस अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय , धारा 2 से धारा 112 तक 1 अप्रैल, 2016 को प्रवृत्त हुई समझी जाएंगी ।
अध्याय 2
आय-कर की दरें
आय-कर ।
2. (1 ) उपधारा (2) और उपधारा (3 ) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, 1 अप्रैल, 2016 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए आय- कर, पहली अनुसूची के भाग 1 में विनिर्दिष्ट दरों से प्रभारित किया जाएगा और ऐसे कर में , प्रत्येक दशा में , उसमें उपबंधित रीति से , परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा ।
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भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(2) उन दशाओं में, जिनमें पहली अनुसूची के भाग 1 का पैरा क लागू होता है , जहां निर्धारिती की , पूर्ववर्ष में , कुल आय के अतिरिक्त, पांच हजार रुपए से अधिक कोई शुद्ध कृषि- आय है, और कुल आय दो लाख पचास हजार रुपए से अधिक हो जाती है वहां ,-
(क) शुद्ध कृषि-आय को, कुल आय के संबंध में केवल आय- कर प्रभारित करने के प्रयोजन के लिए , खंड (ख ) में उपबंधित रीति से हिसाब में लिया जाएगा [ अर्थात् मानो शुद्ध कृषि-आय कुल आय के प्रथम दो लाख पचास हजार रुपए के पश्चात् कुल आय में समाविष्ट हो, किंतु कर के दायित्वाधीन न हो] ; और
(ख) प्रभार्य आय- कर निम्नलिखित रीति से परिकलित किया जाएगा , अर्थात्: -
(i) कुल आय और शुद्ध कृषि-आय को संकलित कर दिया जाएगा और संकलित आय के संबंध में आय- कर की रकम , उक्त पैरा क में विनिर्दिष्ट दरों से ऐसे अवधारित की जाएगी मानो ऐसी संकलित आय कुल आय हो ;
( ii) शुद्ध कृषि-आय में दो लाख पचास हजार रुपए की राशि बढ़ा दी जाएगी और इस प्रकार बढ़ाई गई शुद्ध कृषि-आय के संबंध में आय- कर की रकम, उक्त पैरा क में विनिर्दिष्ट दरों से ऐसे अवधारित की जाएगी , मानो इस प्रकार बढ़ाई गई शुद्ध कृषि-आय कुल आय हो;
( iii) उपखंड ( i) के अनुसार अवधारित आय- कर की रकम में से उपखंड ( ii ) के अनुसार अवधारित आय- कर की रकम घटा दी जाएगी और इस प्रकार प्राप्त राशि, कुल आय के संबंध में आय- कर होगी :
परंतु पहली अनुसूची के भाग 1 के पैरा क की मद ( ii ) में निर्दिष्ट प्रत्येक व्यष्टि की दशा में, जो भारत में निवासी है और पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय साठ वर्ष का या उससे अधिक, किंतु अस्सी वर्ष से कम आयु का है, इस धारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "दो लाख पचास हजार रुपए " शब्दों के स्थान पर, "तीन लाख रुपए " शब्द रखे गए हों :
परंतु यह और कि पहली अनुसूची के भाग 1 के पैरा क की मद ( iii) में निर्दिष्ट प्रत्येक व्यष्टि की दशा में , जो भारत में निवासी है और पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय अस्सी वर्ष या अधिक आयु का है , इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "दो लाख पचास हजार रुपए " शब्दों के स्थान पर, " पांच लाख रुपए" शब्द रखे गए हों ।
1961 का 43 (3) उन दशाओं में , जिनमें आय- कर अधिनियम , 1961 (जिसे इसमें इसके पश्चात् आय- कर अधिनियम कहा गया है) के अध्याय 12 या अध्याय 12 क या धारा 115 ञख या धारा 115 ञग या अध्याय 12चक, अध्याय 12चख या धारा 161 की उपधारा ( 1 क) या धारा 164 या धारा 164 क या धारा 167 ख के उपबंध लागू होते हैं, प्रभार्य कर का अवधारण , उस अध्याय या उस धारा में यथा उपबंधित रीति से, और, यथास्थिति, उपधारा (1 ) द्वारा अधिरोपित दरों के या उस अध्याय या उस धारा में विनिर्दिष्ट दरों के प्रति निर्देश से किया जाएगा :
परंतु आय -कर अधिनियम की धारा 111 क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में , पहली अनुसूची के भाग 1 के, यथास्थिति, पैरा क , पैरा ख , पैरा ग , पैरा घ या पैरा ङ में यथा उपबंधित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा :
परंतु यह और कि किसी ऐसी आय के संबंध में, जो आय- कर अधिनियम की धारा 115क, धारा 115कख , धारा 115 कग , धारा 115 कगक , धारा 115 कघ , धारा 115 ख , धारा 115 खख , धारा 115 खखक , धारा 115 खखग , धारा 115 खखघ, धारा 115 खखङ, धारा 115ङ, धारा 115 ञख या धारा 115 ञग के अधीन कर से प्रभार्य है , इस उपधारा के अधीन संगणित आय- कर की रकम में,-
(क) प्रत्येक व्यष्टि, हिंदू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि- निकाय , चाहे निगमित हो या न हो, या आय- कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31 ) के उपखंड (vii ) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति या सहकारी सोसाइटी या फर्म या स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है , ऐसे आय- कर के बारह प्रतिशत की दर से;
(ख) प्रत्येक देशी कंपनी की दशा में,- भारत का राजपत्र असाधारण
5 अनुभाग 1क]
(i) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय- कर के सात प्रतिशत की दर से;
(ii) जहां कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है , ऐसे आय- कर के बारह प्रतिशत की
दर से;
(ग) देशी कंपनी से भिन्न प्रत्येक कंपनी की दशा में,-
(i ) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय- कर के दो प्रतिशत की दर से;
(ii) जहां कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय- कर के पांच प्रतिशत की दरसे,
परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा :
परंतु यह भी कि उपरोक्त (क) में वर्णित व्यक्तियों की दशा में, जिनकी कुल आय , आय- कर अधिनियम की धारा 115 ञग के अधीन कर से प्रभार्य है और ऐसी आय एक करोड़ रुपए से अधिक है , ऐसी आय पर आय- करें और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आय- कर के रूप में संदेय उस रकम से अधिक नहीं होगी , जो एक करोड़ रुपए से अधिक है :
परंतु यह भी कि प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय , आय- कर अधिनियम की धारा 115 ञख के अधीन कर से प्रभार्य है और ऐसी आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय - कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आय-कर के रूप में संदेय उस रकम से अधिक नहीं होगी , जो एक करोड़ रुपए से अधिक है :
परंतु यह भी कि प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में , जिसकी कुल आय , आय- कर अधिनियम की धारा 115 ञख के अधीन कर से प्रभार्य है और ऐसी आय दस करोड़ रुपए से अधिक है , ऐसी आय पर आय- कर और उस पर अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम दस करोड़ रुपए की कुल आय पर आय- कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी , जो दस करोड़ रुपए से अधिक है ।
(4) उन दशाओं में, जिनमें कर, आय- कर अधिनियम की धारा 115ण या धारा 115 थक या धारा 115 द की उपधारा (2 ) या धारा 115 नक या धारा 115 नघ के अधीन प्रभारित और संदत्त किया जाना है, उन धाराओं में यथा विनिर्दिष्ट दर से प्रभारित और संदत्त किया जाएगा और उसमें ऐसे कर के बारह प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार , संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा ।
(5) उन दशाओं में , जिनमें कर, आय- कर अधिनियम की धारा 193 , धारा 194, धारा 194क, धारा 194ख , धारा 194 खख , धारा 194 घ, धारा 194 ठखक, धारा 194ठखख , धारा 194 ठखग और धारा 195 के अधीन, प्रवृत्त दरों से काटा जाना है, उनमें कटौतियां पहली अनुसूची के भाग 2 में विनिर्दिष्ट दरों से की जाएंगी और उन मामलों में, जहां कहीं विहित किया गया हो , उसमें उपबंधित रीति से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा ।
(6) उन दशाओं में , जिनमें कर, आय- कर अधिनियम की धारा 192 क, धारा 194 ग , धारा 194 घक, धारा 194ङ, धारा 194डङ, धारा 194च , धारा 194छ, धारा 194ज, धारा 194झ , धारा 194झक, धारा 194ञ, धारा 194ठक , धारा 194 ठख , धारा 194 ठखक , धारा 194 ठखख , धारा 194 ठखग , धारा 194ठग , धारा 194 ठघ, धारा 196 ख , धारा 196 ग और धारा 196 घ के अधीन काटा जाना है, कटौतियां उन धाराओं में विनिर्दिष्ट दरों से की जाएंगी और उसमें,-
(क) प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति- संगम या व्यष्टि- निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं , या आय- कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31 ) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति जो अनिवासी है, की दशा में , जहां संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित आय या ऐसी आय का योग और कटौतियों के अधीन रहते हुए एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के पंद्रह प्रतिशत की दर से;
(ख) प्रत्येक सहकारी सोसाइटी या फर्म , जो अनिवासी है, की दशा में, जहां संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित आय या ऐसी आय का योग और कटौतियों के अधीन रहते हुए एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के बारह प्रतिशत की दर से;
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भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(ग) देशी कंपनी से भिन्न प्रत्येक कंपनी की दशा में ,-
(i ) जहां संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित आय या ऐसी आय का योग और कटौतियों के अधीन रहते हुए एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है , ऐसे कर के दो प्रतिशत की दर से;
(ii ) जहां संदत्त या संदत्त किए जाने के लिए संभावित आय या ऐसी आय का योग और कटौतियों के अधीन रहते हुए दस करोड़ रुपए से अधिक है , ऐसे कर के पांच प्रतिशत की दर से,
परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा ।
(7) उन दशाओं में, जिनमें कर का संग्रहण , आय- कर अधिनियम की धारा 194 ख के परंतुक के अधीन किया जाना है, ऐसा संग्रहण , पहली अनुसूची के भाग 2 में विनिर्दिष्ट दरों से किया जाएगा और उन दशाओं में, जहां कहीं विहित किया गया हो , उसमें उपबंधित रीति से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा ।
(8) उन दशाओं में , जिनमें कर का संग्रहण , आय- कर अधिनियम की धारा 206 ग के अधीन किया जाना है, ऐसा संग्रहण , उस धारा में विनिर्दिष्ट दरों से किया जाएगा और उसमें,-
(क) प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति- संगम या व्यष्टि- निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं , या आय - कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31 ) के उपखंड (vii ) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जहां संगृहीत और संग्रहण के अधीन रकम या ऐसी रकमों का योग एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के पंद्रह प्रतिशत की दर से;
(ख) प्रत्येक सहकारी सोसाइटी या फर्म , जो अनिवासी है , की दशा में, जहां संगृहीत और संग्रहण के अधीन रकम या ऐसी रकमों का योग एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के बारह प्रतिशत की दर से;
(ग) देशी कंपनी से भिन्न प्रत्येक कंपनी की दशा में,-
(i) जहां संगृहीत और संग्रहण के अधीन रकम या ऐसी रकमों का योग एक करोड़ रुपए से अधिक है , किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे कर के दो प्रतिशत की दर से;
(ii) जहां संगृहीत और संग्रहण के अधीन रकम या ऐसी रकमों का योग दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे कर के पांच प्रतिशत की दर से,
परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा ।
(9) उपधारा ( 10 ) के उपबंधों के अधीन रहते हुए , उन दशाओं में, जिनमें आय- कर, प्रवृत्त दर या दरों से, आय-कर अधिनियम की धारा 172 की उपधारा (4) या धारा 174 की उपधारा (2) या धारा 174क या धारा 175 या धारा 176 की उपधारा (2) के अधीन प्रभारित किया जाना है या उक्त अधिनियम की धारा 192 के अधीन " वेतन " शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय में से काटा जाना है, या उस पर संदत्त किया जाना है अथवा उक्त अधिनियम के अध्याय 17 ग के अधीन संदेय "अग्रिम कर " की संगणना की जानी है, यथास्थिति, ऐसा आय - कर या " अग्रिम कर" , पहली अनुसूची के भाग 3 में विनिर्दिष्ट दर या दरों से प्रभारित किया जाएगा, काटा जाएगा या संगणित किया जाएगा और ऐसे कर में, ऐसी दशाओं में, और उसमें उपबंधित रीति से , परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा :
परंतु उन दशाओं में, जिनमें आय- कर अधिनियम के अध्याय 12 या अध्याय 12 क या धारा 115 ञख या धारा 115ञग या अध्याय 12चक या अध्याय 12 चख या धारा 161 की उपधारा ( 1 क) या धारा 164 या धारा 164क या धारा 167 ख के उपबंध लागू होते हैं, "अग्रिम कर" की संगणना , यथास्थिति, इस उपधारा द्वारा अधिरोपित दरों के या उस अध्याय या धारा में विनिर्दिष्ट दरों के प्रति निर्देश से की जाएगी:
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भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
परंतु यह और कि आय- कर अधिनियम की धारा 111 क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित "अग्रिम कर" की रकम में, पहली अनुसूची के भाग 3 के, यथास्थिति, पैरा क, पैरा ख , पैरा ग , पैरा घ और पैरा ङ में यथा उपबंधित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा:
परंतु यह भी कि आय- कर अधिनियम की धारा 115 क, धारा 115 कख , धारा 115कग , धारा 115कगक, धारा 115कघ , धारा 115ख , धारा 115 खक, धारा 115 खख , धारा 115 खखक , धारा 115 खखग , धारा 115 खखघ , धारा 115 खखघक, धारा 115 खखङ, धारा 115 खखच, धारा 115 ङ, धारा 115 ञख और धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य किसी आय के संबंध में पहले परंतुक के अधीन संगणित " अग्रिम कर" में,-
(क) प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति- संगम या व्यष्टि-निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या आय- कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31 ) के उपखंड ( vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसें अग्रिम कर के पंद्रह प्रतिशत की दर से;
(ख) प्रत्येक सहकारी सोसाइटी या फर्म या स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे " अग्रिम कर " के बारह प्रतिशत की दर से;
(ग) प्रत्येक देशी कंपनी की दशा में,-
(i) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे " अग्रिम कर " के सात प्रतिशत की दर से;
(ii) जहां कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे " अग्रिम कर" के बारह प्रतिशत की दर से;
(घ) देशी कंपनी से भिन्न प्रत्येक कंपनी की दशा में,-
(i) जहां कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे "अग्रिम कर " के दो प्रतिशत की दर से;
( ii) जहां कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे " अग्रिम कर " के पांच प्रतिशत
की दर से,
परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा :
परंतु यह भी कि उपरोक्त ( क) और ( ख) में वर्णित व्यक्तियों की दशा में, जिनकी आय- कर अधिनियम की धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य कुल आय है और ऐसी आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर " अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम और उस पर अधिभार की रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर " अग्रिम कर" के रूप में संदेय कुल रकम पर आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी , जो एक करोड़ रुपए से अधिक है :
परंतु यह भी कि ऐसी प्रत्येक कंपनी की दशा में, जिसकी आय- कर अधिनियम की धारा 115 ञख के अधीन कर से प्रभार्य कुल आय है और ऐसी आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर " अग्रिम कर " के रूप में संदेय कुल रकम और उस पर अधिभार की रकम एक करोड़ रुपए की कुल आय पर "अग्रिम कर " के रूप में संदेय कुल रकम पर आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी , जो एक करोड़ रुपए से अधिक है :
परंतु यह भी कि ऐसी प्रत्येक कंपनी की दशा में, जिसकी आय-कर अधिनियम की धारा 115 ञख के अधीन कर से प्रभार्य कुल आय है और ऐसी आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर " अग्रिम कर " के रूप में संदेय कुल रकम और उस पर अधिभार की रकम दस करोड़ रुपए की कुल आय पर "अग्रिम कर " के रूप में संदेय कुल रकम पर आय की उस रकम से अधिक नहीं होगी , जो दस करोड़ रुपए से अधिक है ।
(10) उन दशाओं में, जिनमें पहली अनुसूची के भाग 3 का पैरा क लागू होता है, जहां निर्धारिती की पूर्ववर्ष में या , यदि आय- कर अधिनियम के किसी उपबंध के आधार पर आय- कर पूर्ववर्ष से भिन्न किसी अवधि की आय के संबंध में प्रभारित किया जाना है , ऐसी अन्य अवधि में कुल आय के अतिरिक्त पांच हजार रुपए से अधिक कोई शुद्ध कृषि-आय भी है और कुल आय दो लाख पचास हजार रुपए से अधिक है, वहां प्रवृत्त दर या दरों से, उक्त अधिनियम की धारा 174 की उपधारा (2 ) या धारा 174क या धारा 175 या धारा 176 की उपधारा (2) के अधीन आय- कर प्रभारित करने में अथवा उक्त अधिनियम के अध्याय 17 ग के अधीन संदेय "अग्रिम कर" की संगणना करने में ,-
(क) शुद्ध कृषि-आय को , कुल आय के संबंध में, केवल, यथास्थिति , ऐसा आय - कर या "अग्रिम कर" प्रभारित या संगणित करने के प्रयोजन के लिए, खंड (ख) में उपबंधित रीति से हिसाब में लिया 8
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[भाग 2-
जाएगा [ अर्थात्, मानो शुद्ध कृषि-आय कुल आय के प्रथम दो लाख पचास हजार रुपए के पश्चात् कुल आय में समाविष्ट हो , किंतु कर के दायित्वाधीन न हो ] ; और
(ख) यथास्थिति, ऐसा आय- कर या " अग्रिम कर " निम्नलिखित रीति से प्रभारित या संगणित किया जाएगा, अर्थात्ः-
(i) कुल आय और शुद्ध कृषि-आय को संकलित किया जाएगा और संकलित आय के संबंध में आय- कर या " अग्रिम कर " की रकम , उक्त पैरा क में विनिर्दिष्ट दरों से ऐसे अवधारित की जाएगी मानो ऐसी संकलित आय कुल आय हो;
( ii ) शुद्ध कृषि-आय में दो लाख पचास हजार रुपए की राशि बढ़ा दी जाएगी और इस प्रकार बढ़ाई गई शुद्ध कृषि-आय के संबंध में आय- कर या " अग्रिम कर" की रकम , उक्त पैरा क में विनिर्दिष्ट दरों से ऐसे अवधारित की जाएगी , मानो शुद्ध कृषि-आय कुल आय हो;
(iii) उपखंड ( i) के अनुसार अवधारित आय- कर या " अग्रिम कर" की रकम में से उपखंड ( ii ) के अनुसार अवधारित , यथास्थिति, आय- कर या " अग्रिम कर " की रकम घटा दी जाएगी और इस प्रकार प्राप्त राशि, कुल आय के संबंध में, यथास्थिति, आय- कर या "अग्रिम कर" होगी :
परंतु ऐसे प्रत्येक व्यष्टि की दशा में , जो पहली अनुसूची के भाग 3 के पैरा क की मद ( II) में निर्दिष्ट भारत में निवासी है और पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय साठ वर्ष या उससे अधिक, किंतु अस्सी वर्ष से कम की आयु का है, इस उपधारा के उपबंध ऐसे प्रभावी होंगे मानो "दो लाख पचास हजार रुपए " शब्दों के स्थान पर , " तीन लाख रुपए " शब्द रखे गए हों :
परंतु यह और कि ऐसे प्रत्येक व्यष्टि की दशा में , जो पहली अनुसूची के भाग 3 के पैरा क की मद ( III) में निर्दिष्ट भारत में निवासी है और पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय अस्सी वर्ष या उससे अधिक की आयु का है, इस उपधारा के उपबंध ऐसे प्रभावी होंगे मानो "दो लाख पचास हजार रुपए" शब्दों के स्थान पर, " पांच लाख रुपए" शब्द रखे गए हों:
परंतु यह भी कि इस प्रकार संकलित आय- कर या " अग्रिम कर" की रकम पर, प्रत्येक दशा में परिकलित अधिभार, उसमें उपबंधित रीति में , संघ के प्रयोजनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा ।
(11 ) उपधारा ( 1 ) से उपधारा ( 10) में यथा विनिर्दिष्ट और उसमें उपबंधित रीति से परिकलित , संघ के प्रयोजनों के लिए , अधिभार द्वारा बढ़ाई गई आय - कर की रकम को, ऐसे आय- कर और अधिभार पर दो प्रतिशत की दर से परिकलित " आय- कर पर शिक्षा उपकर" नाम से ज्ञात , अतिरिक्त अधिभार द्वारा संघ के प्रयोजनों के लिए और बढ़ा दिया जाएगा , जिससे सार्वत्रिक स्तर की क्वालिटी की प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने और उसका वित्तपोषण करने की सरकार की प्रतिबद्धता को पूरा किया जा सके :
परंतु इस उपधारा की कोई बात उन दशाओं में लागू नहीं होगी जिनमें उपधारा (5 ) , उपधारा (6) , उपधारा (7) और उपधारा ( 8 ) में उल्लिखित आय- कर अधिनियम की धाराओं के अधीन कर की कटौती या संग्रहण किया जाना है, यदि स्रोत पर कर की कटौती या स्रोत पर कर के संग्रहण के अधीन रहते हुए आय को देशी कंपनी और किसी अन्य व्यक्ति को, जो भारत में निवासी है, संदत्त किया जाता है ।
(12) उपधारा (1 ) से उपधारा (10) में यथा विनिर्दिष्ट और उसमें उपबंधित रीति से परिकलित , संघ के प्रयोजनों के लिए , अधिभार द्वारा बढ़ाई गई आय- कर की रकम को , ऐसे आय- कर और अधिभार पर एक प्रतिशत की दर से परिकलित " आय- कर पर माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा उपकर" नाम से ज्ञात , अतिरिक्त अधिभार द्वारा संघ के प्रयोजनों के लिए और बढ़ा दिया जाएगा , जिससे सार्वत्रिक स्तर की क्वालिटी की माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा उपलब्ध कराने और उसका वित्तपोषण करने की सरकार की प्रतिबद्धता को पूरा किया जा सके :
परंतु इस उपधारा की कोई बात उन दशाओं में लागू नहीं होगी जिनमें उपधारा (5) , उपधारा (6) , उपधारा (7 ) और उपधारा (8 ) में उल्लिखित आय- कर अधिनियम की धाराओं के अधीन कर की कटौती या संग्रहण किया जाना है , यदि स्रोत पर कर की कटौती या स्रोत पर कर के संग्रहण के अधीन रहते हुए आय को देशी कंपनी और किसी अन्य व्यक्ति को, जो भारत में निवासी है, संदत्त किया जाता है ।
(13) इस धारा और पहली अनुसूची के प्रयोजनों के लिए ,-
(क) "देशी कंपनी" से कोई भारतीय कंपनी या कोई अन्य ऐसी कंपनी अभिप्रेत है, जिसने 1 अप्रैल, 2016 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए, आय- कर अधिनियम के अधीन आय-कर
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भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
के दायित्वाधीन अपनी आय के संबंध में ऐसी आय में से संदेय लाभांशों ( जिनके अंतर्गत अधिमानी शेयरों पर लाभांश भी है) की घोषणा और भारत में उनके संदाय के लिए इंतजाम कर लिए हैं;
(ख) " बीमा कमीशन" से बीमा कारबार की याचना करने या उसे उपाप्त करने के लिए (जिसके अन्तर्गत बीमा पालिसियों को जारी रखने , उनका नवीकरण या उन्हें पुनरुज्जीवित करने से संबंधित कारबार है) कमीशन के रूप में या अन्यथा कोई पारिश्रमिक या इनाम अभिप्रेत है;
(ग) किसी व्यक्ति के संबंध में, "शुद्ध कृषि-आय " से, पहली अनूसूची के भाग 4 में अंतर्विष्ट नियमों के अनुसार संगणित, उस व्यक्ति की किसी भी स्रोत से व्युत्पन्न कृषि-आय की कुल रकम अभिप्रेत है;
(घ) अन्य सभी शब्दों या पदों के, जो इंस धारा में या पहली अनुसूची में प्रयुक्त हैं, किन्तु इस उपधारा में परिभाषित नहीं हैं और आय- कर अधिनियम में परिभाषित हैं , वही अर्थ होंगे , जो उनके उस अधिनियम में हैं ।
अध्याय 3
प्रत्यक्ष कर
आय-कर
3. आय- कर अधिनियम की धारा 2 में,-
धारा 2 का संशोधन ।
(क) खंड ( 14) की मद (vi) में , "स्वर्ण निक्षेप स्कीम , 1999 " शब्दों के पश्चात् " या स्वर्ण मुद्रीकरण स्कीम , 2015 के अधीन जारी निक्षेप प्रमाणपत्र " शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे;
(ख) खंड (23ख) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड 1 जून , 2016 से अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
' (23ग) " सुनवाई" में इलैक्ट्रानिक पद्धति के माध्यम से आंकड़ों और दस्तावेजों की संसूचना सम्मिलित है; ' ;
(ग) खंड (24) के उपखंड (xviii ) में, "ऐसी सहायिकी या अनुदान प्रतिपूर्ति से भिन्न, जिसे धारा 43 के खंड (1 ) के स्पष्टीकरण 10 के उपबंधों के अनुसार आस्ति की वास्तविक लागत के अवधारण के लिए हिसाब में लिया जाना है, नकद या वस्तु रूप में सहायता " शब्दों के स्थान पर निम्नलिखित 1 अप्रैल , 2017 से रखा जाएगा, अर्थात् : -
"ऐसी सहायिकी या अनुदान,-
(क) या प्रतिपूर्ति से भिन्न जिसे धारा 43 के खंड ( 1 ) के स्पष्टीकरण 10 के उपबंधों के अनुसार आस्ति की वास्तविक लागत के अवधारण के लिए हिसाब में लिया जाता है; या
(ख) से भिन्न, जो , यथास्थिति, केंद्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा स्थापित किसी न्यास या संस्था के निकाय के प्रयोजन के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा दी जाती है ,
नकद या वस्तु रूप में सहायता; " ;
(घ) खंड (37 क) के उपखंड ( iii ) में , " धारा 194 ठखक या " शब्द, अंकों और अक्षरों के पश्चात्, "धारा 194 ठखख या धारा 194 ठखग या " शब्द, अंक और अक्षर 1 जून, 2016 से अंतःस्थापित किए जाएंगे ;
(ङ) खंड (42क) में दूसरे परंतुक के पश्चात् और स्पष्टीकरण 1 से पहले निम्नलिखित परंतुक 1 अप्रैल , 2017 से अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्ः-
'परंतु यह भी कि किसी कंपनी के किसी शेयर के मामले में , (जो भारत में किसी मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध शेयर नहीं है ) इस खंड के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "छत्तीस मास" शब्दों के स्थान पर , " चौबीस मास " शब्द रख दिए गए हों । ' ।
भारत का राजपत्र असाधारण
10
[भाग 2-
धारा 6 का संशोधन ।
4. आय- कर अधिनियम की धारा 6 के खंड (3) के स्थान पर निम्नलिखित खंड, 1 अप्रैल , 2017 से रखा जाएगा, अर्थात्:-
' (3) कोई कंपनी किसी पूर्ववर्ष में भारत में निवासी कही जाती है, यदि,-
(i ) वह कोई भारतीय कंपनी है; या
(ii) उसके प्रभावी प्रबंध का स्थान उस वर्ष में भारत में है ।
स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजन के लिए , " प्रभावी प्रबंध का स्थान " से ऐसा स्थान अभिप्रेत है जहां किसी अस्तित्व के संपूर्ण कारबार के संचालन के लिए आवश्यक प्रमुख प्रबंधन और वाणिज्यिक विनिश्चय , सारवान् रूप से किए जाते हैं । ' ।
धारा 9 का संशोधन ।
5. आय- कर अधिनियम की धारा 9 की उपधारा ( 1 ) के खंड (i ) में स्पष्टीकरण (1 ) के खंड (घ) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
" (ङ) हीरों के खनन के कारबार में लगी किसी विदेशी कंपनी की दशा में कोई आय ऐसे क्रियाकलापों के माध्यम से या क्रियाकलापों से जो केंद्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में इस निमित्त अधिसूचित किसीविशेष जोन में बिना कटे और बिना छंटे हीरे के प्रदर्शन तक सीमित हैं , भारत में प्रोद्भुत या उद्भूत हुई नहीं समझी जाएगी । " ।
6. आय- कर अधिनियम की धारा 9 क की उपधारा ( 3) में , 1 अप्रैल, 2017 से ,-
धारा 9 क का संशोधन ।
(i) खंड (ख) में, " करार किया गया है " शब्दों के पश्चात, " या जिसे इस निमित्त केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किसी देश या विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में स्थापित या निगमित या रजिस्ट्रीकृत किया गया है" शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे;
(ii) खंड (ट) में, "या भारत से " शब्दों का लोप किया जाएगा ।
7. आय- कर अधिनियम की धारा 10 में,-
धारा 10 का संशोधन।
(अ) 1 अप्रैल , 2017 से,-
(i ) खंड (12 ) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
"(12क) धारा 80 गगघ में निर्दिष्ट पेंशन स्कीम से अपना खाता बंद करने या उससे बाहर निकलने का विकल्प देने पर किसी कर्मचारी को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली न्यास से कोई भी संदाय उस परिमाण तक, जहां तक यह उसके खाता बंद करने या स्कीम छोड़ने के विकल्प के समय उसे संदेय कुल रकम के चालीस प्रतिशत से अधिक नहीं है;";
(ii) खंड (13) में,-
(1) उपखंड ( iv) में " ब्याज से अधिक नहीं होता है " शब्दों के स्थान पर "ब्याज से अधिक नहीं होता है; अथवा " शब्द रखे जाएंगे;
(II) उपखंड (iv) के पश्चात् निम्नलिखित उपखंड अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
" (v) धारा 80 गगघ में विनिर्दिष्ट और केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित राष्ट्रीय पेंशन स्कीम के अधीन कर्मचारी के खाते में अंतरण के माध्यम से किया गया हो;" ;
(आ) खंड (15) के उपखंड (vi) में , "स्वर्ण निक्षेप स्कीम , 1999 " शब्दों के पश्चात् "या स्वर्ण मुद्रीकरण स्कीम , 2015 के अधीन जारी निक्षेप प्रमाणपत्र " शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे ;
(इ) 1 अप्रैल, 2017 से ,-
(1) खंड (23 घक) के स्पष्टीकरण में,-
(1) खंड (क) में उपखंड (i ) के पश्चात्, निम्नलिखित उपखंड अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
भारत का राजपत्र असाधारण
11 अनुभाग 1 क]
2002का 54
" ( iक) वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन अधिनियम , 2002 की धारा 2 की उपधारा (1 ) के खंड (य) में उसका है; या" ;
(2) खंड (ख) में, " धारा 115 नग " शब्द, अंकों और अक्षरों के स्थान पर, " धारा 115 नगक" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे ;
( II ) खंड (23 चग) में, "किसी विशेष प्रयोजन एकक से प्राप्त या प्राप्य ब्याज के रूप में" शब्दों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
" (क) किसी विशेष प्रयोजन एकक से प्राप्तं या प्राप्य ब्याज;
(ख) धारा 115ण की उपधारा (7) में निर्दिष्ट लाभांश ,
के रूप में";
(III) खंड (23 चघ) में, " खंड (23 चग ) में" शब्दों, कोष्ठकों, अंकों और अक्षरों के स्थान पर, "खंड (23चग ) के उपखंड (क) में " शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर रखे जाएंगे ;
(IV) खंड (34) में , निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
" परंतु इस खंड की कोई बात धारा 115 खखघक के उपबंधों के अनुसार कर से प्रभार्य लाभांश द्वारा किसी आय को लागू नहीं होगी ;" ;
(V) खंड (35 क) में,-
(क) स्पष्टीकरण से पूर्व निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-
"परंतु इस खंड में अंतर्विष्ट कोई बात , उक्त धारा में निर्दिष्ट वितरित आय के माध्यम से , 1 जून , 2016 को या उसके पश्चात्, प्राप्त किसी आय को लागू नहीं होगी । ";
(ख) स्पष्टीकरण में , " धारा 115 नग " शब्द, अंकों और अक्षरों के स्थान पर, "धारा 115 नगक" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे ;
(VI) खंड (38) में,-
(i) दूसरे परंतुक के पश्चात्, निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"परंतु यह भी कि उपखंड ( ख ) में अंतर्विष्ट कोई बात किसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र में अवस्थित किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में किए गए संव्यवहार को और जहां ऐसे संव्यवहार के लिए प्रतिफल विदेशी मुद्रा में संदत्त किया जाता है या संदेय है, लागू नहीं होगी ।" ;
(ii) स्पष्टीकरण के स्थान पर निम्नलिखित स्पष्टीकरण रखा जाएगा , अर्थात्ः--
' स्पष्टीकरण- इस खंड के प्रयोजनों के लिए ,-
(क) "साधारण शेयरोन्मुख निधि" से कोई निधि अभिप्रेत है-
(i ) जहां विनिधानीय निधियों में देशी कंपनियों के साधारण शेयरों के माध्यम से ऐसी निधि के कुल आगमों के पैंसठ प्रतिशत से अधिक के विस्तार तक विनिधान किया गया है; और
(ii) जिसकी स्थापना खंड (23 घ) के अधीन विनिर्दिष्ट पारस्परिक निधि की स्कीम के अधीन की गई है:
12
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
परंतु निधि की साधारण शेयरधृति की प्रतिशतता की संगणना आरंभिक और अंतिम संख्या के मासिक औसत की वार्षिक औसत के प्रति निर्देश से की जाएगी;
2005 का 28
(ख) "अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र" का वही अर्थ होगा जो उसका विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (थ) में है;
(ग) " मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज " का वही अर्थ होगा जो उसका धारा 43 की उपधारा (5) के स्पष्टीकरण 1 के खंड (ii ) में है ।' ;
(ई) खंड (48) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
" (48क) भारत में किसी सुविधा में अपरिष्कृत तेल के भंडारण या भारत में किसी निवासी व्यक्ति को उससे परिष्कृत तेल के विक्रय के मद्दे किसी विदेशी कंपनी को प्रोद्भुत या उद्भूत होने वाली कोई आय :
परंतु यह तब जब,-
(i ) विदेशी कंपनी द्वारा भंडारण और विक्रय केंद्रीय सरकार द्वारा किए गए या केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित करार या ठहराव के अनुसरण में हैं; और
(ii) राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए , विदेशी कंपनी और करार या ठहराव केंद्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अधिसूचित किए जाते हैं ; " ;
(उ) खंड (49) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड 1 जून , 2016 से अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
' (50) उस तारीख को या उसके पश्चात् जिसको वित्त अधिनियम , 2016 के अध्याय 8 के उपबंध प्रवृत होते हैं , किसी दी गई विनिर्दिष्ट सेवा से उद्भुत और उस अध्याय के अधीन समकरण उद्ग्रहण से प्रभार्य कोई आय।
स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजनों के लिए , "विनिर्दिष्ट सेवा " का वही अर्थ होगा जो उसका वित्त अधिनियम, 2016 के अध्याय 8 की धारा 161 के खंड (i ) में है ।' ।
धारा 10 कक का संशोधन।
8. आय- कर अधिनियम की धारा 10 कक की उपधारा (1 ) में , " 1 अप्रैल, 2006 को या उसके पश्चात्" अंकों और शब्दों के स्थान पर, " 1 अप्रैल , 2006 को या उसके पश्चात्, किंतु 1 अप्रैल , 2021 के पूर्व" अंक और शब्द, 1 अप्रैल , 2017 से रखे जाएंगे ।
धारा 17 का संशोधन ।
9. आय- कर अधिनियम की धारा 17 की उपधारा (2 ) के खंड (vii ) में " एक लाख रुपए " शब्दों के स्थान पर " एक लाख पचास हजार रुपए " शब्द 1 अप्रैल, 2017 से रखे जाएंगे ।
धारा 24 का संशोधन ।
10. आय- कर अधिनियम की धारा 24 के खंड (ख) के दूसरे परंतुक में " तीन वर्ष " शब्दों के स्थान पर, "पांच वर्ष " शब्द 1 अप्रैल , 2017 से रखे जाएंगे ।
11. आय-कर अधिनियम की धारा 25 क, धारा 25 कक और धारा 25 ख के स्थान पर निम्नलिखित धारा , 1 अप्रैल , 2017 से रखी जाएगी , अर्थात्:-
धारा 25 क, धारा 25कक और धारा 25ख के स्थान पर नई धारा का प्रतिस्थापन।
'25क. (1 ) किसी निर्धारिती द्वारा , यथास्थिति, किसी किराएदार से प्राप्त किराए के बकाया या किसी किराएदार से वसूल न किए गए किराए की पश्चात्वर्ती वसूल की गई रकम को उस वित्तीय वर्ष की बाबत जिसमें ऐसा किराया प्राप्त या वसूल किया गया है, गृह संपत्ति से आय समझी जाएगी और निर्धारिती की " गृह संपत्ति से आय " शीर्ष के अधीन कुल आय में सम्मिलित की जाएगी , चाहे निर्धारिती उस वित्तीय वर्ष में संपत्ति का स्वामी हो या न हो ।
किराए के बकाया और वसूल न किए गए किराए के पश्चात्वर्ती प्राप्त होने के संबंध में विशेष उपबंध ।
13
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
(2) उपधारा (1 ) में निर्दिष्ट किराए की बकाया या वसूल न किए गए किराए की तीस प्रतिशत के बराबर राशि, कटौती के रूप में अनुज्ञात की जाएगी ।' ।
12. आय- कर अधिनियम की धारा 28. के खंड ( क) में , 1 अप्रैल , 2017 से,-
धारा 28 का संशोधन।
(अ) उपखंड (क) में, "किसी कारबार " शब्दों के पश्चात, " या वृत्ति" शब्द अंतःस्थापित किए
जाएंगे;
(आ) परंतुक के खंड ( i ) में, "किसी कारबार" शब्दों के पश्चात्, " या वृत्ति " शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे ।
धारा 32 का 13. आय-कर अधिनियम की धारा 32 में , उपधारा (1 ) में , खंड ( iiक) में, " या विद्युत के उत्पादन या
संशोधन।
उत्पादन और वितरण के कारबार में " शब्दों के स्थान पर "या विद्युत के उत्पादन, पारेषण या वितरण के कारबार में " शब्द 1 अप्रैल , 2017 से, रखे जाएंगे ।
14. आय- कर अधिनियम की धारा 32 कग की उपधारा (1 क) में,-
धारा 32 कग का संशोधन।
(i) "किसी पूर्ववर्ष के दौरान अर्जित और प्रतिष्ठापित ऐसी नई आस्तियों की वास्तविक लागत की रकम पच्चीस करोड़ रुपए से अधिक है " शब्दों के स्थान पर , "किसी पूर्ववर्ष के दौरान अर्जित ऐसी नई आस्तियों की वास्तविक लागत पच्चीस करोड़ रुपए से अधिक है और ऐसी आस्ति 31 मार्च , 2017 को या उसके पूर्व प्रतिष्ठापित की जाती है" शब्द और अंक रखे जाएंगे ;
(ii ) परंतुक से पूर्व , निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् : -
"परंतु जहां नई आस्तियों का प्रतिष्ठापन , अर्जन के वर्ष से भिन्न किसी अन्य वर्ष में
किया जाता है , वहां इस उपधारा के अधीन कटौती उस वर्ष में अनुज्ञात की जाएगी , जिसमें नई
आस्तियां प्रतिष्ठापित की जाती हैं :" ;
(iii) विद्यमान परंतुक में , "परंतु " शब्द के स्थान पर, " परंतु यह और कि" शब्द रखे जाएंगे ।
15. आय- कर अधिनियम की धारा 35 में , 1 अप्रैल, 2018 से,-
धारा 35 का संशोधन ।
(i ) उपधारा (1 ) में,-
(क) खंड ( ii) में,-
(I) "एक सही तीन बटा चार " शब्दों के स्थान पर, " एक सही एक बटा दो " शब्द रखे जाएंगे;
(II) परंतुक के पश्चात् निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्ः-
"परंतु यह और कि जहां ऐसे संगम , विश्वविद्यालय , महाविद्यालय या अन्य संस्था को किसी रकम का संदाय , 1 अप्रैल , 2021 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में किया जाता है वहां इस खंड के अधीन कटौती इस प्रकार संदत्त रकम के बराबर होगी;
(ख) खंड ( iiक) में " किसी ऐसी राशि के एक सही एक बटा चार गुणा बराबर कोई ऐसी रकम" शब्दों का लोप किया जाएगा;
(ग) खंड ( iii ) में "किसी ऐसी राशि के एक सही एक बटा चार गुणा के बराबर कोई ऐसी रकम " शब्दों का लोप किया जाएगा;
(ii) उपधारा (2कक) में,-
जाएंगे; (अ) खंड (क) में " दुगुना " शब्द के स्थान पर " एक सही एक बटा दो गुणा " शब्द रखे 14
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(आ) परंतुक के पश्चात् और स्पष्टीकरण 1 से पूर्व निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात् : -
" परंतु यह और कि जहां ऐसी राष्ट्रीय प्रयोगशाला , विश्वविद्यालय , भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान या विनिर्दिष्ट व्यक्ति को किसी रकम का संदाय , 1 अप्रैल , 2021 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में किया जाता है, वहां इस उपधारा के अधीन कटौती इस प्रकार संदत्त रकम के बराबर होगी ।" ;
(iii) उपधारा (2कख) में,-
(क) खंड ( 1 ) में, "दो गुणा के बराबर" शब्दों के स्थान पर, " एक सही एक बटा दो गुणा के बराबर" शब्द रखे जाएंगे;
(ख) खंड (1 ) के पश्चात् और स्पष्टीकरण से पूर्व निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात् :-
"परंतु जहां वैज्ञानिक अनुसंधान (जो किसी भूमि या भवन की लागत की प्रकृति का व्यय नहीं है) या आंतरिक अनुसंधान या विकास सुविधा पर कोई व्यय 1 अप्रैल, 2021 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में उपगत किया जाता है, वहां इस खंड के अधीन कटौती इस प्रकार उपगत व्यय के बराबर होगी।" ;
(ग) खंड (5) का लोप किया जाएगा ।
16. आय- कर अधिनियम की धारा 35 कख के पश्चात् निम्नलिखित धारा , 1 अप्रैल , 2017 से अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात्:-
नई धारा 35कखक का अन्तःस्थापन ।
दूर-संचार सेवाओं के लिए स्पैक्ट्रम के उपयोग का अधिकार अभिप्राप्त करने के लिए व्यय ।
"35कखक. ( 1 ) किसी व्यय के संबंध में , जो दूर- संचार सेवाओं के लिए स्पैक्ट्रम के उपयोग का कोई अधिकार अर्जित करने से पूर्व या तो कारबार के आरंभ से पूर्व या तत्पश्चात् किसी पूर्ववर्ष में किसी समय किया गया है और जिसके लिए स्पैक्ट्रम के उपयोग के अधिकार को अभिप्राप्त करने के लिए वास्तव में संदाय किया गया है , इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए और उसके अनुसरण में प्रत्येक सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए , ऐसे व्यय की रकम के समुचित भिन्नांश के बराबर कटौती अनुज्ञात की जाएगी ।
(2) धारा 35कखख की उपधारा (2) से उपधारा (8 ) में अंतर्विष्ट उपबंध इस प्रकार लागू होंगे , मानो " अनुज्ञप्ति" शब्द के स्थान पर, "स्पैक्ट्रम" शब्द प्रतिस्थापित किया गया हो ।
(3) जहां किसी पूर्ववर्ष में उपधारा ( 1 ) के अधीन निर्धारिती ने किसी कटौती का दावा किया है और उसे मंजूर किया गया है तथा तत्पश्चात् इस धारा के किन्हीं उपबंधों के अनुपालन में असफलता हुई है, वहां,-
(क) ऐसी कटौती को गलत तौर पर मंजूर किया गया समझा जाएगा;
(ख) निर्धारण अधिकारी , इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, उक्त पूर्ववर्ष के लिए निर्धारिती की कुल आय को पुनःसंगणित कर सकेगा और आवश्यक परिशुद्धि कर सकेगा;
(ग) धारा 154 के उपबंध यथाशोध्य लागू होंगे और उस धारा की उपधारा (7) में विनिर्दिष्ट चार वर्ष की अवधि की गणना, उस पूर्ववर्ष के अंत से, जिसमें उपधारा ( 1 ) में निर्दिष्ट शर्त की अनुपालना में असफलता हुई है , की जाएगी ।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए , -
(i) " सुसंगत पूर्ववर्ष " से अभिप्रेत है,-
(अ) किसी ऐसी दशा में, जिसमें दूर- संचार सेवाओं का प्रचालन करने के कारबार के प्रारंभ से पूर्व स्पैक्ट्रम फीस का वास्तव में संदाय किया जाता है , उस पूर्ववर्ष से जिसमें ऐसा कारबार प्रारंभ किया गया, आरंभ होने वाले पूर्ववर्ष;
15
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
(आ) किसी अन्य दशा में , उस पूर्ववर्ष से , जिसमें स्पैक्ट्रम फीस का वास्तव में संदाय किया जाता है , आरंभ होने वाले पूर्ववर्ष,
और पश्चात्वर्ती पूर्ववर्ष या वह वर्ष जिनके दौरान ऐसा स्पैक्ट्रम, जिसके लिए फीस का संदाय किया जाता है, प्रवृत्त रहेगी;
(ii) "समुचित भिन्नांश" से वह भिन्नांश अभिप्रेत है जिसका अंश एक है और जिसका हर सुसंगत पूर्ववर्षों की कुल संख्या है;
( iii ) "संदाय वास्तव में किया गया है " से उस पूर्ववर्ष का ध्यान रखे बिना जिसमें व्यय के लिए दायित्व निर्धारिती द्वारा नियमित रूप से अपनाई गई लेखा पद्धति के अनुसार उपगत किया गया था या ऐसी रीति में जो विहित की जाए , संदेय व्यय का वास्तविक संदाय अभिप्रेत है । ' ।
धारा 35कग का
(6) के पश्चात् और स्पष्टीकरण से पूर्व,
संशोधन।
17. आय- कर अधिनियम की धारा 35कग में, उपधारा निम्नलिखित उपधारा 1 अप्रैल , 2017 से , अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात्:-
" (7) इस धारा के अधीन 1 अप्रैल , 2018 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में कोई कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी । " ।
18. आय-कर अधिनियम की धारा 35 कघ में 1 अप्रैल , 2018 से,-
धारा 35 कघ का संशोधन ।
(क) उपधारा ( 1 क) का लोप किया जाएगा;
(ख) उपधारा (2) में खंड ( iii) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-
" ( iv) जहां कारबार उपधारा (8) के खंड (ग) के उपखंड (xiv) में निर्दिष्ट प्रकृति का है, वहां ऐसा कारबार,-
(अ) भारत में रजिस्ट्रीकृत किसी कंपनी के या ऐसी कंपनियों के किसी संघ के या किसी केंद्रीय या राज्य अधिनियम के अधीन स्थापित या गठित किसी प्राधिकरण या किसी बोर्ड या निगम या किसी अन्य निकाय के स्वामित्वाधीन है;
(आ) उपखंड (अ) में निर्दिष्ट अस्तित्व ने विकास या प्रचालन और अनुरक्षण के लिए या किसी नई अवसंरचना सुविधा के विकास , प्रचालन और अनुरक्षण के लिए केंद्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकरण या किसी अन्य कानूनी निकाय के साथ करार किया है ।" ;
(ग) उपधारा (5) में ,
(1) खंड (कञ) के अंत में आने वाले शब्द " और " का लोप किया जाएगा;
(II) खंड (कञ) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"(कट) 1 अप्रैल, 2017 को या उसके पश्चात्, जहां विनिर्दिष्ट कारबार विकास या प्रचालन और अनुरक्षण अथवा किसी अवसंरचना सुविधा के विकास , प्रचालन और अनुरक्षण की प्रकृति का है; और";
(घ) उपधारा (8) में,-
(I) खंड (ख) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
'(खक) "अवसंरचना सुविधा" से,-
(i ) कोई सड़क जिसके अंतर्गत पथकर सड़क भी है, कोई पुल या कोई रेल प्रणाली;
(ii) कोई राजमार्ग परियोजना , जिसके अंतर्गत ऐसी आवासन या अन्य ऐसे क्रियाकलाप , जो राजमार्ग परियोजना का अभिन्न भाग है;
16
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
( iii) कोई जल प्रदाय परियोजना, जल उपचार प्रणाली , सिंचाई परियोजना , स्वच्छता और मलवाही प्रणाली या ठोस अपशिष्ट प्रबंध प्रणाली;
( iv) कोई पत्तन, विमानपत्तन, भूमिगत जलमार्ग, भूमिगत पत्तन या समुद्र
में नौपरिवहन संबंधी चैनल,
अभिप्रेत है; ' ;
( II ) खंड (ग) में उपखंड (xiii) के पश्चात् निम्नलिखित उपखंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"(xiv) विकास का अनुरक्षण और प्रचालन या किसी नई अवसंरचना सुविधा का विकास , अनुरक्षण और प्रचालन ।" ।
धारा 35 गगग का संशोधन।
19. आय - कर अधिनियम की धारा 35 गगग की उपधारा ( 1 ) में निम्नलिखित परंतुक 1 अप्रैल, 2017 से अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्ः-
'परंतु 1 अप्रैल , 2021 को या उसके पश्चात् आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "डेढ़ गुना के बराबर राशि" शब्दों के स्थान पर " बराबर राशि" शब्द रख दिए गए हों ।।
धारा 35 गगध का संशोधन ।
20. आय-कर अधिनियम की धारा 35गगघ की उपधारा (1 ) में , निम्नलिखित परंतुक 1 अप्रैल , 2017 से अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
' परंतु 1 अप्रैल , 2021 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार ही प्रभावी होंगे , मानो "डेढ़ गुणा के बराबर राशि" शब्दों के स्थान पर , " बराबर राशि" शब्द रख दिए गए हों । ' ।
21. आय- कर अधिनियम की धारा 36 की उपधारा (1 ) के खंड (viiक) में, 1 अप्रैल, 2017 से ,-
धारा 36 का संशोधन ।
(i) उपखंड (ग) के पश्चात् और स्पष्टीकरण से पहले , निम्नलिखित उपखंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-
" (घ ) जहां ऐसी व्यवस्था, किसी गैर- बैंककारी वित्तीय कंपनी द्वारा की जाती है , वहां (इस खंड और अध्याय 6 क के अधीन कटौती करने से पूर्व संगणित) कुल आय के पांच प्रतिशत से अनधिक रकम १" ;
(ii) स्पष्टीकरण में , खंड ( vi ) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
1934का 2 ' (vii) " गैर- बैंककारी वित्तीय कंपनी " का वही अर्थ है , जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45 झ के खंड (च) में उसका है; ' ।
धारा 40 का संशोधन।
22. आय-कर अधिनियम की धारा 40 के खंड (क) में उपखंड ( क) के पश्चात् निम्नलिखित उपखंड 1 जून , 2016 से अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
" (iख ) किसी विनिर्दिष्ट सेवा के लिए किसी अनिवासी को संदत्त या संदेय कोई प्रतिफल जिस पर वित्त अधिनियम , 2016 के अध्याय 8 के उपबन्ध के अधीन समकरण उद्ग्रहण की कटौती की जानी है और ऐसे उद्ग्रहण की कटौती नहीं की गई है या कटौती करने के पश्चात् उसका धारा 139 की उपधारा ( 1 ) में यथाविनिर्दिष्ट नियत तारीख को या उससे पूर्व संदाय नहीं किया गया है :
परंतु जहां ऐसे किसी प्रतिफल के संबंध में किसी पश्चात्वर्ती वर्ष में समकरण उद्ग्रहण की कटौती की गई है या पूर्ववर्ष के दौरान कटौती की गई है किंतु धारा 139 की उपधारा (1 ) में विनिर्दिष्ट नियत तारीख के पश्चात् उसका संदाय किया गया है तो ऐसी राशि को पूर्ववर्ष जिसमें ऐसे उद्ग्रहण का संदाय किया गया है की आय की संगणना में कटौती के रूप में अनुज्ञात किया जाएगा ; " ।
17
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
23. आय-कर अधिनियम की धारा 43 ख में, 1 अप्रैल , 2017 से ,-
धारा 43 ख का संशोधन।
(i ) खंड (च ) में " कर्मचारी के जमा खाते में की किसी छुट्टी के बदले में संदेय है " शब्दों के स्थान पर, " कर्मचारी के जमा खाते में की किसी छुट्टी के बदले में संदेय है, या " शब्द रखे जाएंगे;
(ii) खंड (च) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
" (छ) निर्धारिती द्वारा भारतीय रेल को रेल आस्तियों के उपयोग के लिए संदेय कोई राशि, " ।
धारा 44 कक का संशोधन ।
24. आय-कर अधिनियम की धारा 44कक की उपधारा (2) के खंड ( iv) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड 1 अप्रैल , 2017 से , रखा जाएगा , अर्थात्: -
" (iv) जहां धारा 44 कघ की उपधारा (4) के उपबंध उसके मामले में लागू होते हैं और उसकी आय उस अधिकतम रकम से अधिक हो जाती है जो किसी पूर्ववर्ष में आय - कर से प्रभार्य नहीं है ; " ।
25. आय- कर अधिनियम की धारा 44 कख में 1 अप्रैल , 2017 से ,-
धारा 44कख का संशोधन।
(i ) खंड (ख) में, "पच्चीस लाख रुपए " शब्दों के स्थान पर " पचास लाख रुपए " शब्द रखे
जाएंगे;
(ii) खंड (घ) में,-
(क) "कारबार" शब्द के स्थान पर, जहां कहीं यह आता है, "वृत्ति" शब्द रखा जाएगा;
(ख) "धारा 44कघ के अधीन " शब्दों, अंकों और अक्षरों के स्थान पर, " धारा 44 कघक " शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे ;
(ग) "पूर्ववर्ष" शब्द के स्थान पर " पूर्ववर्ष; या " शब्द रखे जाएंगे ;
(iii) खंड (घ) के पश्चात् और दीर्घ पंक्ति से पूर्व निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
" (ङ) कारबार करना यदि उसके मामले में धारा 44 कघ की उपधारा (4) के उपबंध लागू होते हैं और उसकी आय उस अधिकतम रकम से अधिक हो जाती है जो किसी पूर्ववर्ष में आय-कर से प्रभार्य नहीं है ।" ।
26. आय- कर अधिनियम की धारा 44 कघ में, 1 अप्रैल , 2017 से ,-
धारा 44कघ का संशोधन ।
(क) उपधारा (2) में परंतुक का लोप किया जाएगा;
(ख) उपधारा (4) और उपधारा (5 ) के स्थान पर निम्नलिखित उपधाराएं रखी जाएंगी , अर्थात्:-
" (4) जहां कोई पात्र निर्धारिती , इस धारा के उपबंधों के अनुसरण में किसी पूर्ववर्ष के लिए लाभ की घोषणा करता है और वह ऐसे पूर्ववर्ष के उत्तरवर्ती पूर्ववर्ष के सुसंगत पांच निर्धारण वर्षों में से किसी के लिए लाभ की घोषणा करता है, जो उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार नहीं है वह ऐसे पूर्ववर्ष के सुसंगत निर्धारण वर्ष के पश्चात्वर्ती पांच निर्धारण वर्षों के लिए इस धारा के उपबंधों के फायदों का दावा करने का पात्र नहीं होगा जिसमें लाभ की घोषणा उपधारा (1 ) के उपबंधों के अनुसार नहीं की गई है ।
(5) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी ऐसा कोई पात्र निर्धारिती से, जिसे उपधारा (4) के उपबंध लागू होते हैं और जिसकी कुल आय ऐसी अधिकतम रकम से अधिक है जो आय- कर से प्रभार्य नहीं है, धारा 44 कक की उपधारा (2) की अपेक्षानुसार लेखा पुस्तकें और अन्य दस्तावेज का रखा जाना और बनाए रखना अपेक्षित होगा और वह उनकी लेखा परीक्षा कराएगा तथा धारा 44 कख की अपेक्षानुसार ऐसी लेखा परीक्षा की रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा ।" ;
18
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(ग) स्पष्टीकरण में , खंड (ख) के उपखंड ( ii) में , " एक करोड़ रुपए " शब्दों के स्थान पर "दो करोड़ रुपए" शब्द रखे जाएंगे ।
27. आय-कर अधिनियम की धारा 44 कघ के पश्चात्, निम्नलिखित धारा , 1 अप्रैल, 2017 से अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात्:-
नईधारा 44कघक का अन्तःस्थापन।
लाभ और अभिलाभों का उपधारणात्मक आधार पर संगणित करने के लिएविशेष उपबंध।
'44कघक. (1 ) धारा 28 से धारा 43 ग में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी ऐसे निर्धारिती के मामले में , जो भारत में कोई निवासी है और धारा 44 कक की उपधारा ( 1 ) में निर्दिष्ट किसी वृत्ति में लगा हुआ है और जिसकी सकल प्राप्तियां किसी पूर्ववर्ष में पचास लाख रुपए से अधिक नहीं हैं, यथास्थिति , ऐसी वृत्ति के परिणामस्वरूप पूर्ववर्ष में निर्धारिती की सकल प्राप्तियों के पचास प्रतिशत के समतुल्य कोई राशि या निर्धारिती द्वारा अर्जित की गई पूर्वोक्त दावाकृत राशि से उच्चतर कोई राशि "कारबार या वृत्ति से लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन ऐसी वृत्ति के कर से प्रभार्य लाभ और अभिलाभ समझे जाएंगे ।
(2) उपधारा (1 ) के प्रयोजनों के लिए धारा 30 से धारा 38 के उपबंधों के अधीन अनुज्ञेय किसी कटौती को पहले ही पूर्ण प्रभाव दिया गया समझा जाएगा और उन धाराओं के अधीन कोई और कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी ।
(3) वृत्ति के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त किसी आस्ति का अवलिखित मूल्य इस प्रकार संगणित किया गया समझा जाएगा मानो निर्धारिती ने दावा किया था और वस्तुतः सुसंगत प्रत्येक निर्धारण वर्षों के लिए अवक्षयण के संबंध में कटौती अनुज्ञात की गई थी ।
(4) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी निर्धारिती से जो दावा करता है कि वृत्ति से उसके लाभ और अभिलाभ , उपधारा (1 ) में विनिर्दिष्ट लाभ और अभिलाभों से निम्नतर हैं और जिसकी कुल आय ऐसी अधिकतम रकम से अधिक है जो आय- कर से प्रभार्य नहीं है, यह अपेक्षित होगा कि वह लेखा बहियां और दस्तावेज रखे और बनाए रखे जैसा कि धारा 44कक की उपधारा (2) के अधीन अपेक्षित है तथा उन्हें संपरीक्षित कराए और धारा 44 कख के अधीन यथा अपेक्षित ऐसी लेखा परीक्षा की एक रिपोर्ट प्रस्तुत करे । ' ।
28. आय- कर अधिनियम की धारा 47 में , 1 अप्रैल , 2017 से ,-
धारा 47 का संशोधन ।
(अ) खंड (viiख) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
" (vii ग) किसी निर्धारिती , जो कोई व्यष्टि है, द्वारा मोचन के माध्यम से प्रभुत्वसंपन्न स्वर्ण बंधपत्र स्कीम , 2015 के अधीन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी प्रभुत्वसंपन्न स्वर्ण बंधपत्र का कोई अंतरण;";
(आ) खंड ( xiii ख) के परंतुक में,-
(1 ) खंड (ङ) में, अंत में आने वाले " और " शब्द का लोप किया जाएगा ;
(II) खंड (ङ) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
" (डक) उस पूर्ववर्ष के, जिसमें संपरिवर्तन हुआ है, पूर्ववर्ती तीन पूर्ववर्षों में से किसी में कंपनी की लेखा बहियों में आने वाली आस्तियों का कुल मूल्य पांच करोड़ रुपए से अनधिक होता है; और" ;
(इ) खंड (xviii ) के पश्चात् निम्नलिखित खंड 1 अप्रैल , 2017 से अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
'(xix) किसी यूनिट धारक द्वारा ऐसी पूंजी आस्ति का, जो किसी पारस्परिक निधि स्कीम की समेकित योजना में उसके द्वारा धारित कोई यूनिट है या यूनिटें हैं, उस पारस्परिक निधि की स्कीम की समेकित योजना में उसे किसी ऐसी पूंजी आस्ति के जो कोई यूनिट है या यूनिटें हैं, आबंटन के प्रतिफलस्वरूप किया गया कोई अंतरण ।
स्पष्टीकरण- इस खंड के प्रयोजनों के लिए ,-
1992का 15 (क) "समेकन योजना " से किसी पारस्परिक निधि की स्कीम के अंतर्गत ऐसी योजना अभिप्रेत है जिसका भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के भारत का राजपत्र असाधारण
19 अनुभाग 1क]
अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ( पारस्परिक निधि) विनियम , 1996 के अनुसार पारस्परिक निधि की किसी स्कीम के अंतर्गत योजनाओं के समेकन की प्रक्रिया के अधीन विलय होता है;
(ख) "समेकित योजना" से ऐसी योजना अभिप्रेत है जिसके साथ समेकन योजना का विलय होता है या जो ऐसे विलय के परिणामस्वरूप बनती है;
(ग) " पारस्परिक निधि" से धारा 10 के खंड (23 घ) के अधीन विनिर्दिष्ट कोई पारस्परिक निधि अभिप्रेत है । ' ।
धारा 48 का संशोधन।
29. आय-कर अधिनियम की धारा 48 में, तीसरे परंतुक के स्थान पर निम्नलिखित परंतुक 1 अप्रैल , 2017 से रखे जाएंगे , अर्थात् :-
" परंतु यह भी कि दूसरे परंतुक में अंतर्विष्ट कोई बात ऐसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति, जो-
(क) सरकार द्वारा जारी किए गए पूंजी सूचांकित बंधपत्रों से भिन्न कोई बंधपत्र या डिबेंचर है ; या
(ख) प्रभुत्वसंपन्न स्वर्ण बंधपत्र स्कीम , 2015 के अधीन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी प्रभुत्वसंपन्न स्वर्ण बंधपत्र से भिन्न कोई बंधपत्र या डिबेंचर है,
के अंतरण से उद्भूत दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ को लागू नहीं होगी :
परंतु यह भी कि किसी ऐसे निर्धारिती की दशा में , जो अनिवासी है , उसके द्वारा अभिदत्त किसी भारतीय कंपनी के रुपए के अंकित बंधपत्र के मोचन के समय किसी विदेशी करेंसी के विरुद्ध रुपए के अधिमूल्यन के परिणामस्वरूप उद्भूत किसी अभिलाभ को इस धारा के अधीन प्रतिफल के पूर्ण मूल्य की संगणना के प्रयोजनों के लिए छोड़ दिया जाएगा । " ।
धारा 49 का संशोधन।
30. आय- कर अधिनियम की धारा 49 की उपधारा (4 ) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा 1 अप्रैल, 2017 से अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात्ः-
"(5) जहां पूंजी अभिलाभ आय, घोषणा स्कीम, 2016 के अधीन घोषित किसी आस्ति के अंतरण से उद्भूत होता है और स्कीम के उपबंधों के अनुसार स्कीम के आरंभ होने की तारीख पर आस्ति के उचित बाजार मूल्य पर कर, अधिभार और शास्ति का संदाय कर दिया गया है , वहां आस्ति के अर्जन की लागत को आस्ति का उचित बाजार मूल्य समझा जाएगा, जो उक्त स्कीम के प्रयोजन के लिए हिसाब में लिया गया है । " ।
धारा 50 ग का संशोधन ।
31. आय- कर अधिनियम की धारा 50 ग की उपधारा (1 ) में , निम्नलिखित परंतुक 1 अप्रैल , 2017 से अंतःस्थापित किए जाएंगे , अर्थात्: -
"परंतु जहां प्रतिफल की रकम नियत करने वाले करार की तारीख और पूंजी आस्ति के अंतरण के लिए रजिस्ट्रीकरण की तारीख एक नहीं हो , वहां स्टांप मूल्यांकन प्राधिकारी द्वारा करार की तारीख को अंगीकृत या निर्धारित या निर्धारणीय मूल्य को ऐसे अंतरण के लिए प्रतिफल के पूर्ण मूल्य की संगणना करने के प्रयोजनों के लिए लिया जा सकेगा :
परंतु यह और कि पहला परंतुक केवल उस मामले में लागू होगा, जहां प्रतिफल की रकम या उसका कोई भाग अंतरण के लिए करार की तारीख को या उससे पहले किसी पाने वाले के खाते में देय चेक या पाने वाले के खाते में देय बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से या किसी बैंक खाते की मार्फत इलैक्ट्रानिक समाशोधन प्रणाली के उपयोग द्वारा प्राप्त किया गया हो ।"।
20
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
नई धारा 54ङङ का अन्तःस्थापन।
32. आय-कर अधिनियम की धारा 54ड्घ के पश्चात्, निम्नलिखित धारा , 1 अप्रैल , 2017 से अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात्:-
पूंजी अभिलाभ, किसी विनिर्दिष्ट निधि की यूनिटों में विनिधान पर प्रभारित नहीं किया जाएगा ।
'54डङ: ( 1 ) जहां दीर्घकालिक पूंजी आस्ति ( जिसे इस धारा में मूल आस्ति कहा गया है) के अंतरण से पूंजी अभिलाभ उद्भूत होते हैं और निर्धारिती ने ऐसे अंतरण के पश्चात् छह मास की अवधि के भीतर किसी भी समय संपूर्ण पूंजी अभिलाभ या उसके किसी भाग का दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति में विनिधान किया है, वहां पूंजी अभिलाभ पर इस धारा के निम्नलिखित उपबंधों के अनुसार विचार किया जाएगा, अर्थात्:-
(क) यदि दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति की लागत मूल आस्ति के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ से कम नहीं है तो ऐसा संपूर्ण पूंजी अभिलाभ धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं किया जाएगा;
(ख) यदि दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति की लागत मूल आस्ति के अंतरण से उद्भुत पूंजी अभिलाभ से कम है, तो उसी अनुपात में उतना पूंजी अभिलाभ जैसा कि वह संपूर्ण पूंजी अभिलाभ के प्रति वहन करे जितना कि दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति की अर्जन लागत संपूर्ण पूंजी अभिलाभ के प्रति वहन करे , धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं होगा :
परंतु किसी निर्धारिती द्वारा 1 अप्रैल , 2016 को या उसके पश्चात् किसी वित्तीय वर्ष के दौरान दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति में किया गया विनिधान पचास लाख रुपए से अधिक नहीं होगा :
परंतु यह और कि किसी निर्धारिती द्वारा ऐसे वित्तीय वर्ष के दौरान जिसमें मूल आस्ति या आस्तियां अंतरित की गई थीं और पश्चात्वर्ती वर्षों में एक या अधिक मूल आस्तियों के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभों से दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति में किया गया विनिधान पचास लाख रुपए से अधिक नहीं होगा ।
(2) जहां दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति, इसके अंतरण की तारीख से तीन वर्षों की अवधि के भीतर किसी भी समय निर्धारिती द्वारा अंतरित की जाती है, वहां , यथास्थिति, उपधारा ( 1 ) के खंड (क) या खंड (ख) में यथा उपबंधित ऐसी दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति की लागत के आधार पर धारा 45 के अधीन प्रभारित न की गई मूल आस्ति के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ की रकम , उस पूर्ववर्ष की, जिसमें दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति अंतरित की जाती है, दीर्घकालिक पूंजी आस्ति से संबंधित "पूंजी अभिलाभ " शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय समझी जाएगी ।
स्पष्टीकरण 1-ऐसे मामले में जहां मूल आस्ति अंतरित होती है और निर्धारिती मूल आस्ति के अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या प्रोद्भूत संपूर्ण पूंजी अभिलाभ या उसके किसी अंश का किसी दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति में विनिधान करता है और ऐसा निर्धारिती ऐसी विनिर्दिष्ट आस्ति की प्रतिभूति पर कोई उधार या अग्रिम लेता है तो यह समझा जाएगा कि उसने ऐसी तारीख को जब ऐसा उधार या अग्रिम लिया गया है, ऐसी विनिर्दिष्ट आस्ति अंतरित कर दी है ।
स्पष्टीकरण 2- इस धारा के प्रयोजनों के लिए ,-
(क) किसी दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति के संबंध में , " लागत " से मूल आस्ति के अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या प्रोद्भूत पूंजी अभिलाभों में से ऐसी विनिर्दिष्ट आस्ति में विनिधान की गई रकम अभिप्रेत है;
(ख) "दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति" से ऐसी निधि की, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अधिसूचित की जाए 1 अप्रैल , 2019 के पूर्व जारी की गई यूनिट या यूनिटें अभिप्रेत हैं।' ।
33. आय -कर अधिनियम की धारा 54 छख में 1 अप्रैल , 2017 से, -
धारा 54छख का संशोधन।
(क) उपधारा (5) के पश्चात् निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
' परंतु पात्र स्टार्ट-अप में किसी विनिधान की दशा में इस धारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "31 मार्च , 2017 " अंकों और शब्दों के स्थान पर " 31 मार्च , 2019 " शब्द और अंक रख दिए गए हैं; ' ;
भारत का राजपत्र असाधारण
21 अनुभाग 1क]
(ख) उपधारा (6) में, -
(i) खंड (ख) में,-
(अ) उपखंड ( ii) में "विनिर्माण के कारबार में " शब्दों के पश्चात् "या किसी पात्र कारबार में " शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे;
(आ) उपखंड ( iv ) में "के लिए अर्हित है " शब्दों के पश्चात् " या कोई पात्र स्टार्ट- अप है" शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे;
(ii) खंड (ख ) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
' (खक) " पात्र स्टार्ट- अप " और "पात्र कारबार " के वही अर्थ होंगे जो इस धारा की बाबत धारा 80 झकग की उपधारा (4) के नीचे स्पष्टीकरण में क्रमशः उनके हैं । ' ;
( iii ) खंड ( घ) के पश्चात् निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:--
' परंतु किसी पात्र स्टार्ट-अप की दशा में , जो केंद्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित अंतर - मंत्रालयीय प्रमाणन बोर्ड द्वारा इस प्रकार प्रमाणित प्रौद्योगिकी चालित स्टार्ट-अप है , " नई आस्ति" के अंतर्गत कंप्यूटर या कंप्यूटर साफ्टवेयर आएंगे । ' ।
34. आय- कर अधिनियम की धारा 55 में , 1 अप्रैल , 2017 से,-
धारा 55 का संशोधन ।
(i) उपधारा ( 1 ) के खंड (ख) के उपखंड (1 ) में " अधिकार है या किसी कारबार" शब्दों के पश्चात्, "या वृत्ति" शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे;
(ii) उपधारा (2) के खंड ( क) में " कारबार " शब्द के पश्चात्, " या वृत्ति " शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे ।
धारा 56 का संशोधन।
35. आय -कर अधिनियम की धारा 56 की उपधारा (2) में , खंड ( vii ) में , उपखंड (ग) के पश्चात् आने वाले दूसरे परंतुक में, 1 अप्रैल , 2017 से ,-
(क) खंड (छ) में, " धारा 12 कक " शब्द, अंकों और अक्षरों के स्थान पर, "धारा 12कक; या " शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे;
(ख) खंड (छ) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
" (ज) धारा 47 के खंड ( vi गख) या खंड ( vi घ) या खंड ( vii) के अधीन अंतरण न माने गए संव्यवहार द्वारा। " ।
धारा 80 का संशोधन।
36. आय-कर अधिनियम की धारा 80 में , " धारा 73 की उपधारा (2) " शब्दों, अंकों और कोष्ठकों के पश्चात् " या धारा 73 क की उपधारा (2) " शब्द, अंक, अक्षर और कोष्ठक अंतःस्थापित किए जाएंगे ।
धारा 80 गगघ का संशोधन।
37. आय-कर अधिनियम की धारा 80 गगघ की उपधारा (3) में निम्नलिखित परंतुक 1 अप्रैल , 2017 से अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"परंतु खंड ( क) में निर्दिष्ट परिस्थितियों के अधीन निर्धारिती की मृत्यु पर नामनिर्देशिती द्वारा प्राप्त रकम को नामनिर्देशिती की आय नहीं समझा जाएगा ।" ।
38. आय- कर अधिनियम की धारा 80 ङ ङ के स्थान पर निम्नलिखित धारा 1 अप्रैल , 2017 से रखी जाएगी , अर्थात्:-
धारा 80 ङङ के स्थान पर नई धारा का प्रतिस्थापन ।
'80डङ. ( 1 ) किसी ऐसे निर्धारिती की, जो कोई व्यष्टि है, कुल आय की संगणना करने में, इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए , उसके द्वारा किसी आवासीय संपत्ति के अर्जन के प्रयोजन के लिए किसी वित्तीय संस्था से लिए गए उधार पर संदेय ब्याज की कटौती की जाएगी ।
आवासीय गृह संपत्ति के लिए, लिए गए उधार पर ब्याज की बाबत कटौती ।
(2) उपधारा ( 1 ) के अधीन कटौती पचास हजार रुपए से अधिक की नहीं होगी और यह व्यष्टि की 1 अप्रैल , 2017 को आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष और पश्चात्वर्ती वर्षों के लिए कुल आय की संगणना करने में अनुज्ञात की जाएगी ।
22
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(3) उपधारा (1 ) के अधीन कटौती निम्नलिखित शर्तों के अधीन होगी , अर्थात्:-
(i) उधार वित्तीय संस्था द्वारा 1 अप्रैल , 2016 को आरंभ और 31 मार्च , 2017 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान मंजूर किया गया है;
( ii) आवासीय गृह संपत्ति के अर्जन के लिए मंजूर की गई उधार की रकम पैंतीस लाख रुपए से अधिक नहीं है;
( iii) आवसीय गृह संपत्ति का मूल्य पचास लाख रुपए से अधिक नहीं है;
(iv) निर्धारिती के स्वामित्व में उधार मंजूर किए जाने की तारीख को कोई अपनी आवासीय गृह संपत्ति नहीं है ।
(4) जहां इस धारा के अधीन कोई कटौती उपधारा ( 1 ) में निर्दिष्ट किसी ब्याज के लिए अनुज्ञात की जाती है, वहां ऐसे ब्याज की बाबत कटौती इस अधिनियम के किन्हीं अन्य उपबंधों के अधीन उसी या किसी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए अनुज्ञात नहीं की जाएगी ।
(5) इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
1949 का 10 (क) "वित्तीय संस्था " से ऐसी कोई बैंककारी कंपनी अभिप्रेत है जिसको बैंककारी विनियमन अधिनियम , 1949 लागू होता है या इस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोई बैंक या बैंककारी संस्था अथवा कोई आवासीय वित्त पोषण कंपनी भी है;
(ख) " आवासीय वित्त पोषण कंपनी" से भारत में आवासीय प्रयोजनों के लिए मकानों के सन्निर्माण या क्रय के लिए दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराने का कारबार करने के मुख्य उद्देश्य से भारत में बनाई गई या रजिस्ट्रीकृत कोई पब्लिक कंपनी अभिप्रेत है । ' ।
धारा 80 छछ का संशोधन ।
39. आय-कर अधिनियम की धारा 80 छछ में , "दो हजार रुपए " शब्दों के स्थान पर, " पांच हजार रुपए " शब्द 1 अप्रैल , 2017 से रखे जाएंगे ।
धारा 80झक का संशोधन।
40. आय-कर अधिनियम की धारा 80 झक में उपधारा (4) के खंड (i ) में परंतुक के पश्चात् और स्पष्टीकरण से पहले निम्नलिखित परंतुक 1 अप्रैल , 2017 से अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"परंतु यह और कि इस धारा में अंतर्विष्ट कोई बात किसी ऐसे उद्यम को लागू नहीं होगी जो अवसंरचना सुविधा का विकास या प्रचालन और अनुरक्षण 1 अप्रैल , 2017 को या उसके पश्चात् आरंभ करता है ।" ।
धारा 80 झकख का संशोधन ।
41. आय-कर अधिनियम की धारा 80 झकख में उपधारा (1 ) में, निम्नलिखित परंतुक 1 अप्रैल , 2017 से अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"परंतु इस धारा के उपबंध ऐसे निर्धारिती को, जो कोई विकासकर्ता है, जहां विशेष आर्थिक जोन का विकास 1 अप्रैल , 2017 को या उसके पश्चात् आरंभ होता है, लागू नहीं होंगे ।" ।
नई धारा 80झकग काअंतःस्थापन ।
42. आय- कर अधिनियम की धारा 80झकख के पश्चात् निम्नलिखित धारा 1 अप्रैल , 2017 से अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात्:-
विनिर्दिष्ट कारबार के संबंध में विशेष उपबंध ।
'80झकग. (1 ) जहां निर्धारिती जो पात्र स्टार्ट-अप है, की कुल सकल आय में पात्र कारबार से उद्भुत लाभ और अभिलाभ सम्मिलित हैं, वहां इस धारा के अनुसार और उसके उपबंधों के अधीन रहते हुए , निर्धारिती की कुल आय की संगणना में ऐसे कारबार से तीन लगातार निर्धारण वर्षों के लिए ऐसे कारबार से उद्भुत लाभ और अभिलाभ के शत- प्रतिशत के बराबर रकम की कटौती अनुज्ञात की जाएगी ।
(2) उपधारा (1 ) में विनिर्दिष्ट कटौती का निर्धारिती के विकल्प पर उस वर्ष से आरंभ होने वाले पांच वर्षों में से किन्ही तीन वर्षों के लिए , जिसमें स्टार्ट-अप निगमित किया गया है , दावा किया जाएगा ।
23
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
(3) यह धारा उस स्टार्ट-अप को लागू होती है, जो निम्नलिखित शर्तों को पूरा करता है , अर्थात्ः-
(i ) इसको किसी पहले से विद्यमान कारबार का विभाजन , पुनर्गठन करके नहीं बनाया गया है :
परंतु यह शर्त किसी ऐसे स्टार्ट-अप की दशा में लागू नहीं होगी जिसको निर्धारिती द्वारा धारा 33ख में निर्दिष्ट किसी ऐसे उपक्रम के किसी कारबार की पुनर्स्थापना , पुनर्निर्माण या पुनरुत्थान द्वारा उस धारा में विनिर्दिष्ट परिस्थितियों में और अवधि के भीतर बनाया गया है;
(ii) इसको किसी प्रयोजन के लिए पूर्व में उपयोग किए गए किसी संयंत्र या मशीनरी को नए कारबार में अंतरित करके नहीं बनाया गया है ।
स्पष्टीकरण 1 - इस खंड के प्रयोजनों के लिए , कोई मशीनरी या संयंत्र जिसका भारत से बाहर निर्धारिती से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा उपयोग किया गया था, को इस प्रयोजन के लिए पूर्व में उपयोग की गई मशीनरी या संयंत्र तब नहीं माना जाएगा , यदि सभी निम्नलिखित शर्तों को पूरा किया जाता है , अर्थात्:-
(क) ऐसी मशीनरी और संयंत्र का निर्धारिती द्वारा प्रतिष्ठापन से पूर्व किसी समय भारत में उपयोग नहीं किया गया था;
(ख) ऐसी मशीनरी और संयंत्र को भारत में आयात किया गया है;
(ग) ऐसी मशीनरी या संयंत्र के संबंध में अवक्षयण के मद्दे किसी व्यक्ति की निर्धारिती द्वारा मशीनरी या संयंत्र के प्रतिष्ठापन की तारीख से पूर्व किसी अवधि के लिए कुल आय की संगणना में इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन कोई कटौती अनुज्ञात नहीं की गई है या अनुज्ञेय नहीं है ।
स्पष्टीकरण 2- जहां किसी स्टार्ट-अप की दशा में कोई मशीनरी या संयंत्र या उसके किसी भाग का किसी प्रयोजन के लिए उपयोग किया गया है, का किसी नए कारबार को अंतरण कर दिया जाता है और इस प्रकार अंतरित मशीनरी या संयंत्र या भाग का कुल मूल्य कारबार में उपयोग की गई मशीनरी या संयंत्र के कुल मूल्य के बीस प्रतिशत से अधिक नहीं होता है तो इस उपधारा के खंड (ii) के प्रयोजनों के लिए उसमें विनिर्दिष्ट शर्त का अनुपालन किया गया समझा जाएगा।
(4) धारा 80झक की उपधारा (5) और उपधारा (7) से उपधारा ( 11 ) के उपबंध उपधारा (1 ) के अधीन अनुज्ञात कटौतियों के प्रयोजन के लिए स्टार्ट-अप को लागू होंगे ।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए :-
(i ) " पात्र कारबार" से कोई कारबार अभिप्रेत है जिसमें नवप्रवर्तन, विकास , नए उत्पादों को लगाना या उनका वाणिज्यकरण , प्रौद्योगिकी या बौद्धिक संपदा द्वारा चालित प्रक्रिया या सेवाएं अंतर्वलित हैं;
(ii) "पात्र स्टार्ट-अप " से किसी पात्र कारबार में लगी हुई कम्पनी या कोई सीमित दायित्व भागीदारी अभिप्रेत है , जो निम्नलिखित शर्तों को पूरा करती है, अर्थात्:-
(क) इसको 1 अप्रैल , 2016 को या उसके पश्चात् किंतु 1 अप्रैल , 2019 के पूर्व निगमित किया गया है;
(ख) उसके कारबार का कुल आवर्त 1 अप्रैल , 2016 को आरंभ होने वाले और 31 मार्च , 2021 को समाप्त होने वाले पूर्ववर्ती वर्षों में से किसी में पच्चीस करोड़ रुपए से अनधिक है;
(ग) इसके पास केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में यथा अधिसूचित अंतर- मंत्रालयीय प्रमाणन बोर्ड से पात्र कारबार का प्रमाणपत्र है ; और
2009का 6
(iii ) "सीमित दायित्व भागीदारी " से सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम , 2008 की धारा 2 की उपधारा ( 1 ) के खंड (ढ) में निर्दिष्ट भागीदारी अभिप्रेत है ।
43. आय- कर अधिनियम की धारा 80 झख की उपधारा (9) में, 1 अप्रैल , 2017 से,-
धारा 80 झख का संशोधन ।
(क) खंड (ii) में " 1 अप्रैल , 1997 को या उसके पश्चात्" अंकों और शब्दों के पश्चात् "किंतु 31 मार्च , 2017 के अपश्चात्" शब्द और अंक अंतःस्थापित किए जाएंगे ;
(ख) खंड (iv) में " 1 अप्रैल , 2009 को या उसके पश्चात्" अंकों और शब्दों के पश्चात् "किंतु 31 मार्च, 2017 के अपश्चात्" शब्द और अंक अंतःस्थापित किए जाएंगे;
24
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(ग) खंड ( v) में " 1 अप्रैल, 2009 को या उसके पश्चात्" अंकों और शब्दों के पश्चात् "किंतु 31 मार्च , 2017 के अपश्चात्" शब्द और अंक अन्तःस्थापित किए जाएंगे ।
44. आय- कर अधिनियम की धारा 80 छख के पश्चात्, निम्नलिखित धारा 1 अप्रैल , 2017 से , अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात्:-
नईधारा 80झखक का अंतःस्थापन ।
" 80झखक. (1 ) जहां निर्धारिती की सकल कुल आय में कोई ऐसे लाभ या अभिलाभ सम्मिलित हैं जो गृह निर्माण परियोजनाओं के विकास और निर्माण के कारबार से व्युत्पन्न हुए हैं वहां इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए , ऐसे कारबार से व्युत्पन्न लाभ और अभिलाभ के सौ प्रतिशत के बराबर रकम की कटौती अनुज्ञात की जाएगी ।
गृह निर्माण परियोजनाओं से लाभों और अभिलाभों की बाबत कटौती ।
(2) उपधारा (1 ) के प्रयोजनों के लिए गृह निर्माण परियोजना ऐसी परियोजना होगी जो निम्नलिखित शर्तों को पूरा करती है , अर्थात्:-
(क) परियोजना का 1 जून , 2016 के पश्चात् किंतु 31 मार्च , 2019 को या उसके पूर्व सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदन किया गया है;
(ख) परियोजना , सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदन की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के भीतर पूरी हो गई :
परंतु
(i) जहां किसी गृह निर्माण परियोजना के संबंध में एक से अधिक बार अनुमोदन प्राप्त किया गया है वहां ऐसी आवासन परियोजना की गृह निर्माण योजना , उस तारीख को अनुमोदित हुई समझी जाएगी जिसको सक्षम प्राधिकारी द्वारा पहली बार अनुमोदित किया गया था;
(ii) परियोजना को सक्षम प्राधिकारी से लिखित में पूर्ण रूप से परियोजना पूरी होने संबंधी समापन प्रमाणपत्र अभिप्राप्त हो जाने पर परियोजना को पूरा हुआ समझा जाएगा;
(ग) गृह निर्माण परियोजना में सम्मिलित दुकानों और अन्य वाणिज्यिक स्थापनों का निर्मित क्षेत्र सकल निर्मित क्षेत्र के तीन प्रतिशत से अधिक नहीं होगा;
(घ) परियोजना निम्नलिखित से अन्यून वाले भूखंड पर है-
(i ) एक हजार वर्गमीटर, जहां परियोजना चैन्नई, दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता नगरों के भीतर या इन नगरों की नगरपालिका सीमा से पच्चीस किलोमीटर आकाशी मापित दूरी के भीतर अवस्थित है ; या
(ii ) दो हजार वर्गमीटर, जहां परियोजना किसी अन्य स्थान में अवस्थित है;
(ङ) परियोजना, खंड (घ ) में यथाविनिर्दिष्ट भूखंड पर एकमात्र आवासन परियोजना है ;
(च ) आवासन परियोजना में समाविष्ट निवासी इकाई का निर्मित क्षेत्र निम्नलिखित से अधिक नहीं है-
(i) तीस वर्गमीटर, जहां परियोजना चैन्नई, दिल्ली, कोलकाता या मुम्बई नगरों के भीतर या इन नगरों की नगरपालिका सीमा से पच्चीस किलोमीटर आकाशी मापित दूरी के भीतर अवस्थित है; या
(ii) साठ वर्गमीटर, जहां परियोजना किसी अन्य स्थान में अवस्थित है;
(छ) जहां गृह निर्माण परियोजना की कोई आवासीय इकाई किसी व्यष्टि को आबंटित की गई है वहां उस व्यष्टि या ऐसे व्यष्टि के पति या पत्नी अथवा अवयस्क बालकों को किसी गृह निर्माण परियोजना में कोई अन्य आवासीय इकाई आबंटित नहीं की जाएगी;
भारत का राजपत्र असाधारण
25 अनुभाग 1क]
(ज) परियोजना निम्नलिखित का उपयोग करती है -
(i) जहां परियोजना चैन्नई, दिल्ली, कोलकाता या मुम्बई नगर या इन नगरों की नगरपालिक सीमाओं से पच्चीस किलोमीटर की आकाशमापी दूरी के भीतर अवस्थित है, यथास्थिति , केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकारी द्वारा बनाए जाने वाले नियमों के अधीन भूखंड के संबंध में अनुज्ञेय फर्श क्षेत्र अनुपात का नब्बे प्रतिशत से अन्यून , या
(1 ) में स्थान से भिन्न किसी स्थान में अवस्थित है,
(ii ) जहां परियोजना उपखंड
ऐसे फर्श क्षेत्र अनुपात का अस्सी प्रतिशत से अन्यून; और
(झ) निर्धारिती गृह निर्माण परियोजना के संबंध में पृथक् लेखा बहियां रखता है ।
(3) इस धारा में अंतर्विष्ट कोई बात किसी ऐसे निर्धारिती को लागू नहीं होगी जो गृह निर्माण परियोजनाओं का निष्पादन किसी व्यक्ति ( जिसके अंतर्गत केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार है) द्वारा दी गई संकर्म संविदा के रूप में करता है ।
(4) जहां गृह निर्माण परियोजना को उपधारा (2) के खंड ( ख) के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर पूरा नहीं किया जाता है और जिसके संबंध में किसी कटौती का दावा किया गया है और इस धारा के अधीन अनुज्ञात की गई है , इस प्रकार दांवा की गई कटौती की कुल रकम और एक या अधिक पूर्ववर्षों में अनुज्ञात रकम को उस पूर्ववर्ष , जिसमें पूरा करने की अवधि का अवसान होता है, के लिए "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ " शीर्ष के अधीन निर्धारिती की प्रभार्य आय माना जाएगा ।
(5) जहां गृह निर्माण परियोजनाओं के विकास और निर्माण के कारबार से उद्भुत लाभ और अभिलाभ की किसी रकम का किसी निर्धारण वर्ष के लिए इस धारा के अधीन दावा किया गया है और अनुज्ञात की गई है , ऐसे लाभ और अभिलाभ की रकम को इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन अनुज्ञात नहीं किया जाएगा ।
(6) इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(क) "निर्मित क्षेत्र" से फर्श स्तर पर किसी आवासीय यूनिट का आंतरिक मापमान अभिप्रेत है जिसके अंतर्गत दीवारों की मोटाई द्वारा बढ़ाए गए छज्जे और बालकोनियां हैं किंतु इसमें इस प्रकार साझा की गई किसी खुली छत सहित अन्य आवासीय यूनिटों के साथ साझा किया गया सामान्य क्षेत्र नहीं है;
(ख) "सक्षम प्राधिकारी " से तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन भवन निर्माण योजना का अनुमोदन करने के लिए सशक्त प्राधिकारी अभिप्रेत है;
(ग) "फर्श क्षेत्र अनुपात " से सभी फर्शों पर कुर्सी क्षेत्र के कुल आच्छादित क्षेत्र का भूखंड के क्षेत्र से भाग द्वारा अभिप्राप्त भागफल अभिप्रेत है;
(घ) " गृह निर्माण परियोजना " से कोई परियोजना अभिप्रेत है जिसमें मुख्यतः निवासीय यूनिटें सम्मिलित हैं जिसमें ऐसी अन्य सुविधाएं और प्रसुविधाएं हैं जो सक्षम प्राधिकारी इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए अनुमोदित करे;
(ङ) " आवासीय यूनिट" से कोई स्वतंत्र गृह निर्माण यूनिट अभिप्रेत है जिसमें रहने , खाना बनाने और स्वच्छता अपेक्षाओं की पृथक् सुविधाएं हैं और उसी भवन में अन्य आवासीय यूनिटों से सुभिन्न रूप से पृथक् है , जो किसी बाह्य दरवाजे से या किसी आंतरिक दरवाजे के माध्यम से किसी साझा हाल द्वार और न कि अन्य गृहस्थी के रहने के स्थान से चलकर पहुंच योग्य है ।' ।
45. आय- कर अधिनियम की धारा 80 ञञकक के स्थान पर, निम्नलिखित धारा 1 अप्रैल , 2017 से रखी जाएगी , अर्थात्:-
धारा 80ञत्रकक के स्थान पर नई धारा का प्रतिस्थापन।
नए कर्मचारियों के नियोजन के संबंध में कटौती ।
'80 ञञकक. (1 ) जहां किसी निर्धारिती , जिसको धारा 44 कख लागू होती है, की सकल कुल आय में , कारबार से व्युत्पन्न कोई लाभ और अभिलाभ सम्मिलित है, वहां उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन रहते हुए किसी पूर्ववर्ष में , तीन निर्धारण वर्षों के लिए , जिसके अंतर्गत वह निर्धारण वर्ष भी है जो उस पूर्ववर्ष से सुसंगत है जिसमें ऐसा नियोजन दिया गया है , ऐसे कारबार के दौरान उपगत अतिरिक्त कर्मचारी की लागत के तीस प्रतिशत के बराबर रकम की कटौती अनुज्ञात की जाएगी ।
26
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(2) उपधारा (1 ) के अधीन कोई कटौती अनुज्ञात नहीं होगी-
(क) यदि कारबार का गठन विद्यमान कारबार के विभाजन या पुनर्निर्माण द्वारा हुआ है :
परंतु इस खंड में अंतर्विष्ट कोई बात किसी ऐसे कारबार के संबंध में लागू नहीं होगी जिसका गठन धारा 33 ख में विनिर्दिष्ट परिस्थितियों में और अवधि के भीतर निर्धारिती द्वारा कारबार के पुनःस्थापन, पुनर्निर्माण या पुनरुत्थान के परिणामस्वरूप किया गया है;
(ख) यदि कारबार निर्धारिती द्वारा किसी अन्य व्यक्ति से अंतरण के रूप में या किसी कारबार पुनर्गठन के परिणामस्वरूप अर्जित किया जाता है;
(ग) जब तक कि निर्धारिती आय की विवरणी के साथ धारा 288 के स्पष्टीकरण में यथा परिभाषित लेखापाल की रिपोर्ट उसमें ऐसी विशिष्टियां , जो विहित की जाएं , देते हुए प्रस्तुत नहीं कर देता है ।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
( i) " अतिरिक्त कर्मचारी लागत " से पूर्ववर्ष के दौरान नियोजित अतिरिक्त कर्मचारियों को संदत्त या संदेय कुल परिलब्धियां अभिप्रेत हैं :
परंतु विद्यमान कारबार की दशा में अतिरिक्त कर्मचारी लागत शून्य होगी , यदि-
(क) पूर्ववर्ती वर्ष के अंतिम दिन को नियोजित कर्मचारियों की कुल संख्या से कर्मचारियों की संख्या में कोई वृद्धि नहीं होती है;
(ख) परिलब्धियां बैंक खाते के माध्यम से पाने वाले के खाते में देय चेक या पाने वाले के खाते में बैंक ड्राफ्ट द्वारा या इलैक्ट्रानिक समाशोधन प्रणाली के उपयोग से अन्यथा संदत्त की जाती हैं :
परंतु यह और कि नए कारबार के प्रथम वर्ष में , पूर्ववर्ती वर्ष के दौरान नियोजित कर्मचारियों को संदत्त या संदेय परिलब्धियां अतिरिक्त कर्मचारी लागत समझी जाएगी;
(ii) "अतिरिक्त कर्मचारी " से ऐसा कर्मचारी अभिप्रेत है जो पूर्ववर्ष के दौरान नियोजित किया गया है और जिसके नियोजन का प्रभाव पूर्ववर्ती वर्ष के अंतिम दिन को नियोजक द्वारा नियोजित कर्मचारियों की कुल संख्या में वृद्धि है, किंतु इसके अंतर्गत निम्नलिखित सम्मिलित नहीं है,-
(क) कोई ऐसा कर्मचारी जिसकी प्रतिमास कुल परिलब्धियां पच्चीस हजार रुपए से अधिक है; या
1952का 19 (ख) ऐसा कर्मचारी जिसके लिए समस्त अंशदान कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम , 1952 के उपबंधों के अनुसार अधिसूचित कर्मचारी पेंशन स्कीम के अधीन सरकार द्वारा संदत्त किया जाता है ; या
(ग) पूर्ववर्ष के दौरान दो सौ चालीस दिन से कम की अवधि के लिए नियोजित कोई कर्मचारी; या
(घ) कोई कर्मचारी , जो मान्यताप्राप्त भविष्य निधि में भाग नहीं लेता है;
(iii ) "परिलब्धियों " से किसी कर्मचारी को उसके नियोजन , चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, के बदले में संदत्त या संदेय कोई धनराशि अभिप्रेत है किंतु इसके अंतर्गत निम्नलिखित नहीं है -
(क) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन कर्मचारी के फायदे के लिए नियोजक द्वारा किसी पेंशन या भविष्य निधि या किसी अन्य निधि में संदत्त या संदेय कोई अंशदान; और
(ख) उसकी सेवा के पर्यवसान या अधिवर्षिता या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के समय संदत्त या संदेय कोई एकमुश्त संदाय जैसे उपदान, पृथक्करण वेतन , छुट्टी नकदीकरण , स्वैच्छिक छंटनी फायदे, पेंशन का संराशीकरण और वैसे ही संदाय।
(3) इस धारा के उपबंध , जैसे कि वे वित्त अधिनियम , 2016 द्वारा उनके संशोधन से ठीक पूर्व विद्यमान थे, 1 अप्रैल , 2016 को या उससे पहले आरंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए किसी कटौती का दावा करने वाले पात्र निर्धारिती को लागू होंगे । ' ।
27
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1 क]
धारा 87 क का संशोधन ।
46. आय-कर अधिनियम की धारा 87 क में "दो हजार रुपए " शब्दों के स्थान पर, " पांच हजार रुपए " शब्द 1 अप्रैल , 2017 से रखे जाएंगे ।
धारा 92 गक का संशोधन।
47. आय- कर अधिनियम की धारा 92 गक की उपधारा (उक) में, निम्नलिखित परंतुक 1 जून, 2016 से अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
"परंतु धारा 153 के स्पष्टीकरण 1 के खंड (ii) या खंड (x) में निर्दिष्ट परिस्थितियों में, यदि आदेश करने के लिए अंतरण मूल्यांकन अधिकारी को उपलब्ध परिसीमा की अवधि साठ दिन से कम है तो ऐसी शेष अवधि साठ दिन तक बढ़ाई जाएगी और परिसीमा की पूर्वोक्त अवधि तदनुसार बढ़ाई गई समझी जाएगी ।" ।
48. आय-कर अधिनियम की धारा 92 घ में , 1 अप्रैल , 2017 से,-
धारा 92 घ का संशोधन।
(i) उपधारा ( 1 ) में निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्ः-
' परंतु ऐसा व्यक्ति, जो किसी अंतर्राष्ट्रीय समूह का कोई घटक अस्तित्व है, किसी अंतर्राष्ट्रीय समूह के संबंध में ऐसी जानकारी और दस्तावेज रखेगा और बनाए रखेगा , जो विहित किए जाएं ।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए ,-
(अ) " घटक अस्तित्व" का वही अर्थ होगा जो उसका धारा 286 की उपधारा (9)
के खंड (घ) में है ।' ;
(आ) " अंतर्राष्ट्रीय समूह" का वही अर्थ होगा जो उसका धारा 286 की उपधारा (9) के खंड (छ) में है ।' ;
(ii ) उपधारा (3) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात् :-
" (4) उपधारा (3 ) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना उपधारा ( 1 ) के परंतुक में निर्दिष्ट व्यक्ति, उक्त परंतुक में निर्दिष्ट जानकारी और दस्तावेजों को धारा 286 की उपधारा (1) के अधीन विहित प्राधिकारी को ऐसी रीति में उस तारीख को या उसके पूर्व जो विहित की जाए , प्रस्तुत करेगा ।" ।
49. आय-कर अधिनियम की धारा 111 क में 1 अप्रैल , 2017 से ,-
धारा 111 क का संशोधन ।
(i) उपधारा ( 1 ) में परंतुक के पश्चात् निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्ः-
"परंतु यह और कि खंड (ख ) में अंतर्विष्ट कोई बात किसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र में अवस्थित किसी मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में किए गए किसी संव्यवहार, और जहां ऐसे संव्यवहार का प्रतिफल विदेशी मुद्रा में संदत्त या संदेय है , को लागू नहीं होगी । " ;
(ii) उपधारा (3 ) के नीचे स्पष्टीकरण के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्ः-
'स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(क) "साधारण शेयरोन्मुखी निधि" का वही अर्थ होगा , जो धारा 10 के खंड (38) के स्पष्टीकरण में उसका है;
2005 का 28
(ख) "अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र" का वही अर्थ होगा , जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम , 2005 की धारा 2 के खंड (थ) में उसका है;
(ग) " मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज " का वही अर्थ होगा , जो धारा 43 की उपधारा ( 5) के स्पष्टीकरण 1 के खंड ( ii) में उसका है ।।
धारा112 का संशोधन।
50. आय- कर अधिनियम की धारा 112 की उपधारा (1 ) के खंड (ग) के उपखंड ( iii ) में, " असूचीबद्ध प्रतिभूतियां " शब्दों के स्थान पर " असूचीबद्ध प्रतिभूतियां या किसी कंपनी , जो ऐसी कंपनी न हो , जिसमें जनता सारवान् रूप से हितबद्ध हो , के शेयर" शब्द 1 अप्रैल, 2017 से रखे जाएंगे ।
51. आय - कर अधिनियम की धारा 115 ख के पश्चात्, निम्नलिखित धारा 1 अप्रैल , 2017 से नई धारा 115खक का अन्तःस्थापन ।
अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात्:-
कतिपय देशी कंपनियों की आय पर कर ।
" 115खक. (1 ) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी किंतु धारा 111 क और धारा 112 के उपबंधों के अधीन 1 अप्रैल , 2017 को या उसके पश्चात् आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के सुसंगत किसी पूर्ववर्ष के लिए किसी व्यक्ति, जो कोई देशी कंपनी है, की कुल आय की बाबत संदेय आय- कर ऐसे व्यक्ति के विकल्प पर पच्चीस प्रतिशत की दर से संगणित किया जाएगा, यदि उपधारा (2) में अंतर्विष्ट शर्तों का समाधान हो जाता है ।
28
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(2) उपधारा ( 1 ) के प्रयोजनों के लिए निम्नलिखित शर्तें लागू होंगी , अर्थात्: -
(क) कंपनी 1 मार्च, 2016 को या उसके पश्चात् स्थापित और रजिस्ट्रीकृत की गई है;
(ख) कंपनी किसी वस्तु या चीज के विनिर्माण या उत्पादन तथा उसके द्वारा विनिर्मित और उत्पादितं ऐसी वस्तु या चीज के संबंध में अनुसंधान या वितरण के कारबार से भिन्न किसी कारबार में नहीं लगी है ; और
(ग) कंपनी की कुल आय की संगणना,-
(i) धारा 10 कक या धारा 32 की उपधारा ( 1 ) के खंड ( ii क) या धारा 32 कग या धारा 32कघ या धारा 33 कख या धारा 33 कखक या धारा 35 की उपधारा ( 1 ) के उपखंड (ii) या उपखंड (ii क) या उपखंड ( iii) या उपधारा (2कक) या उपधारा (2कख) या धारा 35 कग या धारा 35 कघ या धारा 35 गगग या धारा 35 गगघ के उपबंधों के अधीन या धारा 80 ञञकक के उपबंधों से भिन्न अध्याय 6क के किन्हीं उपबंधों के अधीन "ग- कतिपय आयों की बाबत कटौतियां " शीर्ष के अधीन किसी कटौती के बिना की गई है;
(ii ) किसी पूर्ववर्ती निर्धारण वर्ष से अग्रनीत किसी हानि के मुजरा के बिना की गई है , यदि ऐसी हानि उपखंड (i ) में निर्दिष्ट किन्हीं कटौतियों के कारण है; और
(iii) उक्त धारा की उपधारा ( 1 ) के खंड ( ii क) से भिन्न धारा 32 के अधीन अवक्षयण ऐसी रीति में अवधारित किया जाता है , जो विहित की जाए ।
(3) उपधारा (2) के खंड ( ग) के उपखंड ( ii) में निर्दिष्ट हानि को पहले ही पूरी तरह प्रभाव दिया गया समझा जाएगा और किसी पश्चात्वर्ती वर्ष के लिए ऐसी हानि के लिए कोई अतिरिक्त कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी ।
(4) इस धारा की कोई बात तब तक लागू नहीं होगी , जब तक व्यक्ति द्वारा विकल्प का प्रयोग आय की पहली विवरणी देने के लिए धारा 139 की उपधारा ( 1 ) के अधीन विनिर्दिष्ट देय तारीख को या उससे पहले विहित रीति में नहीं किया गया है, जिसकी व्यक्ति से इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन देने की अपेक्षा की जाती है:
परंतु किसी पूर्ववर्ष के लिए एक बार विकल्प का प्रयोग कर लिए जाने पर उसे उस वर्ष या किसी अन्य पूर्ववर्ष के लिए तत्पश्चात् वापस नहीं लिया जा सकता ।
52. आय- कर अधिनियम में, धारा 115 खखघ के पश्चात् निम्नलिखित धारा 1 अप्रैल , 2017 से
अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात्:-
नई धारा 115 खखघक का अन्तःस्थापन ।
देशी कंपनियों से प्राप्त कतिपय लाभांशों पर कर ।
' 115खखघक. ( 1 ) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , जहां किसी निर्धारिती, जो कोई व्यष्टि, हिन्दू अविभक्त कुटुंब या कोई फर्म, जो भारत में निवासी है, की कुल आय में किसी देशी कंपनी या कंपनियों द्वारा घोषित, वितरित या संदत्त लाभांशों के द्वारा दस लाख रुपए से अधिक की सकल आय सम्मिलित है, तो संदेय आय कर निम्नलिखित का योग होगा-
(क) दस लाख रुपए से अधिक के ऐसे सकल लाभांशों द्वारा आय पर संगणित आय -कर की रकम पर दस प्रतिशत की दर से; और
(ख) आय-कर की रकम , जिससे निर्धारिती प्रभार्य होता यदि उसकी कुल आय में से लाभांशों द्वारा आय की पूर्वोक्त रकम को घटा दिया जाता ।
(2) उपधारा (1 ) के खंड (क) में उसके निर्दिष्ट लाभांशों द्वारा निर्धारिती की आय को संगणित करने में इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन उसके किसी खर्चे या मोक या हानि के मुजरा के संबंध में कोई कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी ।
(3) इस धारा में , "लाभांश " का वही अर्थ होगा जो " लाभांश " का धारा 2 के खंड (22 ) में है किंतु उसका उपखंड (ङ) सम्मिलित नहीं होगा । ' ।
धारा 115खखङ का संशोधन ।
53. आय- कर अधिनियम की धारा 115 खखङ में, 1 अप्रैल , 2017 से, उपधारा (2) में, "मोक" शब्द के पश्चात्, " या किसी हानि के मुजरे " शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे ।
54. आय-कर अधिनियम की धारा 115 खखङ के पश्चात, 1 अप्रैल , 2017 से निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात्:-
नई धारा 115खखच का अन्तःस्थापन।
पेटेंट से आय पर कर ।
' 115खखच. (1 ) जहां किसी पात्र निर्धारिती की कुल आय में भारत में विकसित और रजिस्ट्रीकृत पेटेंट में स्वामिस्व के रूप में कोई आय सम्मिलित है, वहां संदेय आय- कर,-
(क) पेटेंट के संबंध में स्वामिस्व के रूप में आय पर दस प्रतिशत की दर से परिकलित आय- कर की रकम; और 29
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1 क]
(ख) आय- कर की ऐसी रकम जो निर्धारिती से उस दशा में प्रभार्य होती यदि उसकी कुल आय की रकम में से खंड (क) में निर्दिष्ट आय घटा दी जाती , कायोग होगा ।
(2) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , किसी व्यय या मोक की बाबत पात्र निर्धारिती को उपधारा ( 1 ) के खंड (क) में निर्दिष्ट उसकी आय की संगणना करने में इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन कोई कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी ।
(3) पात्र निर्धारिती इस धारा के उपबंधों के अनुसार भारत में विकसित और रजिस्ट्रीकृत किसी पेटेंट की बाबत स्वामिस्व द्वारा आय के कराधान के लिए विकल्प का प्रयोग सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए आय की विवरणी देने के लिए धारा 139 की उपधारा (1 ) के अधीन विनिर्दिष्ट देय तारीख को या उससे पहले विहित रीति में कर सकेगा ।
(4) जहां कोई पात्र निर्धारिती इस धारा के उपबंधों के अनुसार किसी पूर्ववर्ष के लिए भारत में विकसित और रजिस्ट्रीकृत किसी पेटेंट की बाबत स्वामिस्व द्वारा आय के कराधान का विकल्प चुनता है और निर्धारिती ऐसे पूर्ववर्ष के उत्तरवर्ती पूर्ववर्ष के सुसंगत पांच निर्धारण वर्षों में से किसी के कराधान के लिए ऐसी आय का प्रस्ताव करता है , जो उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार नहीं है , तो निर्धारिती उस पूर्ववर्ष के सुसंगत निर्धारण वर्ष के पश्चात्वर्ती पांच निर्धारण वर्षों के लिए, जिसमें ऐसी आय पर कर का प्रस्ताव उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार नहीं किया है , इस धारा के उपबंधों के फायदे का दावा करने का पात्र नहीं होगा ।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए ,-
1970का 39
(क) "विकसित " से किसी ऐसे आविष्कार, जिसके संबंध में पेटेंट अधिनियम , 1970 (जिसे इसमें इसके पश्चात् पेटेंट अधिनियम कहा गया है) , के अधीन पेटेंट मंजूर किया गया है, के लिए पात्र निर्धारिती द्वारा भारत में उपगत व्यय का कम से कम पचहत्तर प्रतिशत अभिप्रेत है;
(ख) "पात्र निर्धारिती " से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसका भारत में निवास है और जो पेटेंटी है ;
(ग) " आविष्कार" का वही अर्थ होगा जो पेटेंट अधिनियम की धारा 2 की उपधारा (1 ) के खंड (ञ) में उसका है;
(घ) " एकमुश्त" के अंतर्गत ऐसे स्वामिस्वों के कारण कोई ऐसा अग्रिम संदाय , जो वापस करने योग्य नहीं है , आता है;
(ङ) "पेटेंट" का वही अर्थ होगा जो पेटेंट अधिनियम की धारा 2 की उपधारा (1 ) के खंड (ड) में उसका है;
(च) "पेटेंटी" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो आविष्कार का वास्तविक और प्रथम आविष्कारक है, जिसका नाम पेटेंट अधिनियम के अनुसार पेटेंटी के रूप में पेटेंट रजिस्टर में प्रविष्ट किया गया है और इसके अंतर्गत ऐसा प्रत्येक व्यक्ति भी है जो आविष्कार का वास्तविक और प्रथम आविष्कारक वहां है जहां एक व्यक्ति से अधिक व्यक्ति उस पेटेंट की बाबत उस अधिनियम के अधीन पेटेंटी के रूप में रजिस्ट्रीकृत हैं;
(छ) " पेटेंटीकृत वस्तु" और "पेटेंटकृत प्रक्रिया " के वही अर्थ होंगे जो पेटेंट अधिनियम की धारा 2 की उपधारा (1 ) के खंड (ण ) में क्रमशः उनके हैं;
(ज) पेटेंट के संबंध में "स्वामिस्व " से निम्नलिखित के लिए ऐसा प्रतिफल (जिसके अंतर्गत एकमुश्त प्रतिफल है किंतु कोई ऐसा प्रतिफल नहीं है जो "पूंजी अभिलाभ " शीर्ष के अधीन प्रभार्य प्राप्तिकर्ता की आय या पेटेंटीकृत प्रक्रिया के उपयोग या वाणिज्यिक उपयोग के लिए पेटेंटीकृत वस्तु के साथ विनिर्मित उत्पाद के विक्रय के लिए प्रतिफल होगा) अभिप्रेत है,-
(i) पेटेंट के संबंध में सभी या किन्हीं अधिकारों (जिनमें अनुज्ञप्ति का मंजूर किया जाना भी है) का अंतरण; या
(ii ) पेटेंट के कार्यकरण या उसके उपयोग से संबंधित कोई सूचना प्रदान करना; या
(iii) किसी पेटेंट का उपयोग; या
(iv) उपखंड ( i ) से उपखंड ( iii ) में निर्दिष्ट क्रियाकलापों के संबंध में कोई सेवा प्रदान करना;
30
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(झ) "वास्तविक और प्रथम आविष्कारक " के वही अर्थ होंगे जो पेटेंट अधिनियम की धारा 2 की उपधारा ( 1) के खंड (म) में उनके हैं । ' ।
55. आय- कर अधिनियम की धारा 115 ञख में,-
धारा 115ञख का संशोधन ।
(1) उपधारा (2) के पश्चात,-
(क) स्पष्टीकरण 1 में , 1 अप्रैल , 2017 से,-
(i) खंड (चग) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-
" (चघ) धारा 115 खखच के अधीन कर से प्रभार्य पेटेंट के संबंध में स्वामिस्व के तौर पर आय से संबंधनीय व्यय की रकम; या " ;
(ii) दीर्घ पंक्ति में,-
(अ) खंड ( iiच) के अंत में आने वाले "रकम " शब्द के स्थान पर , "रकम; या" शब्द रखे जाएंगे ;
(आ) खंड ( iiच) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा ,
अर्थात्:-
"(iiछ) धारा 115 खखच के अधीन कर से प्रभार्य पेटेंट के संबंध में स्वामिस्व के तौर पर आय की रकम; " ;
(ख) स्पष्टीकरण 4 को उसके स्पष्टीकरण 5 के रूप में पुनः संख्यांकित किया जाएगा और इस प्रकार पुनःसंख्यांकित स्पष्टीकरण 5 के पहले निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा और उसे 1 अप्रैल , 2001 से अंतःस्थापित किया गया समझा जाएगा, अर्थात्:-
"स्पष्टीकरण 4- शंकाओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि इस धारा के उपबंध किसी निर्धारिती को , जो कोई विदेशी कंपनी है , लागू नहीं होंगे और कभी भी लागू हुए नहीं समझे जाएंगे , यदि
(i ) निर्धारिती किसी ऐसे देश या विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र का निवासी है , जिसके साथ भारत ने धारा 90 की उपधारा (1 ) के अधीन करार किया हुआ है या केंद्रीय सरकार ने धारा 90 क की उपधारा (1 ) के अधीन किसी करार को अंगीकार किया है और निर्धारिती के पास ऐसे करार के उपबंध के अनुसरण में भारत में कोई स्थायी स्थापन नहीं है; या
(ii) निर्धारिती किसी ऐसे देश का निवासी है , जिसके साथ भारत ने खंड ( i ) में निर्दिष्ट प्रकृति का कोई करार नहीं किया है और निर्धारिती से तत्समय प्रवृत्त कंपनियों से संबंधित किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकरण की ईप्सा करना अपेक्षित नहीं है ।" ;
( II ) उपधारा (6) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा 1 अप्रैल , 2017 से अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:-
" (7) उपधारा (1 ) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां इसमें निर्दिष्ट निर्धारिती, किसी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र में अवस्थित कोई इकाई है और अपनी आय पूर्ण रूप से संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में प्राप्त करती है, वहां उपधारा ( 1 ) के उपबंध ऐसे प्रभावी होंगे मानो " साढ़े अठारह प्रतिशत" शब्द जहां कहीं वे उस उपधारा में आते हैं, के स्थान पर "नौ प्रतिशत" शब्द रख दिए गए हों ।
स्पष्टीकरण- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,-
2005 का 28 (क) " अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र" का वही अर्थ होगा जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (थ ) में उसका है;
(ख) "इकाई " से किसी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र में स्थापित कोई इकाई अभिप्रेत है;
1999 का 42 (ग) " संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा " से ऐसी विदेशी मुद्रा अभिप्रेत है जिसे विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम , 1999 और उसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रयोजनों के लिए तत्समय भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा के रूप में समझा गया है ।' ।
31
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
नए अध्याय 56. आय- कर अधिनियम के अध्याय 12 खख के पश्चात्, निम्नलिखित अध्याय 1 अप्रैल, 2017 से अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
12खग का अन्तःस्थापन ।
"अध्याय 12खग
भारत में निवासी के रूप में कथित विदेशी कंपनी से संबंधित विशेष उपबंध
भारत में निवासी के रूप में कथित विदेशी कंपनी ।
115ञज . (1 ) जहां किसी विदेशी कंपनी का किसी पूर्ववर्ष में भारत में निवासी होना कथित है और ऐसी विदेशी कंपनी उक्त पूर्ववर्ष से पहले के पूर्ववर्ती किसी पूर्ववर्ष में भारत में निवासी नहीं रही है, तब इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो केंद्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अधिसूचित की जाएं , कुल आय की संगणना, अनामेलित अवक्षयण , के उपचार मुजरे या अग्रनयन और हानियों के मुजरे , संग्रहण और वसूली से संबंधित इस अधिनियम के उपबंध और कर के परिवर्जन से संबंधित विशेष उपबंध , ऐसे अपवादों, उपांतरणों और अनुकूलनों सहित , जो उक्त पूर्ववर्ष के लिए उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं , लागू होंगे :
परंतु जब विदेशी कंपनी का भारत में निवासी होने के बारे में अवधारण किसी पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण कार्यवाहियों में किया गया है तब इस उपधारा के उपबंध ऐसे पूर्ववर्ष से अगले किसी अन्य पूर्ववर्ष के संबंध में भी लागू होंगे यदि विदेशी कंपनी उस पूर्ववर्ष में भारत में निवासी है और पूर्ववर्ष उस तारीख को या उससे पूर्व जिसको ऐसी निर्धारण कार्यवाही पूरी हो जाती है, समाप्त होता है ।
(2) जहां उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार किसी पूर्ववर्ष में किसी फायदा , छूट या राहत का दावा किया गया है और वह विदेशी कंपनी को अनुदत्त की गई और तत्पश्चात् उपधारा (1 ) के अधीन जारी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट शर्तों में से किसी शर्त का पालन करने में असफलता होती है, तो ,-
(i) ऐसा फायदा, छूट या राहत गलत तौर पर अनुज्ञात की गई समझी जाएगी;
(ii) निर्धारण अधिकारी , इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी उक्त पूर्ववर्ष के लिए निर्धारिती की कुल आय की पुनः संगणना और आवश्यक समाशोधन ऐसे कर सकेगा मानो उपधारा (1 ) में निर्दिष्ट अपवाद, उपांतरण और अनुकूलन लागू नहीं हुए हों; और
(iii) धारा 154 के उपबंध , जहां तक हो सके , उसके संबंध में लागू होंगे और इस धारा की उपधारा (7) में विनिर्दिष्ट चार वर्ष की अवधि की संगणना उस पूर्ववर्ष के जिसमें उपधारा (1 ) में निर्दिष्ट शर्त का पालन करने में असफलता होती है, के अंत से की जाएगी ।
(3) इस धारा के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी ।" ।
57. आय-कर अधिनियम की धारा 115 ण में,-
धारा 115 ण का संशोधन।
(क) उपधारा (6) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा 1 जून , 2016 से अंतःस्थापित की जाएगी ,
अर्थात्:-
' (7) विनिर्दिष्ट देशी कंपनी द्वारा विनिर्दिष्ट तारीख को या उसके पश्चात्, चालू आय में से किसी कारबार न्यास को लाभांशों (चाहे अंतरिम हों या अन्यथा) के रूप में घोषित , वितरित या संदत्त किसी रकम के संबंध में इस धारा के अधीन वितरित लाभों पर कोई कर प्रभार्य नहीं होगा:
परंतु इस उपधारा में अंतर्विष्ट कोई बात विनिर्दिष्ट देशी कंपनी द्वारा विनिर्दिष्ट तारीख तक संचित लाभों और चालू लाभों में से लाभांशों (चाहे अंतरिम हों या अन्यथा) के रूप में किसी भी समय घोषित, वितरित या संदत्त किसी रकम के संबंध में लागू नहीं होगी ।
स्पष्टीकरण- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए ,-
(क) "विनिर्दिष्ट देशी कंपनी " से ऐसी कोई देशी कंपनी अभिप्रेत है जिसमें कोई कारबार न्यास , कंपनी की साधारण अंश पूंजी के पूर्ण अभिहित मूल्य का धारक हो जाता है (तत्समय प्रवृत्त किसी विधि या सरकार अथवा किसी विनियामक प्राधिकारी के किसी अनुदेश के अनुसरण में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा आवश्यक रूप से धारित किए जाने के 32
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
लिए अपेक्षित साधारण अंश पूंजी या सरकार या किसी सरकारी निकाय द्वारा धारित साधारण अंश पूंजी को अपवर्जित करते हुए ) ;
(ख) "विनिर्दिष्ट तारीख " से ऐसी धृति के कारबार न्यास द्वारा अर्जन की तारीख अभिप्रेत है जो खंड (क) में निर्दिष्ट है । ' ;
(ख) इस प्रकार अंतःस्थापित उपधारा (7) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा , 1 अप्रैल , 2017 से अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात्:-
' (8) इस धारा में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , किसी ऐसी कंपनी द्वारा , जो किसी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र की इकाई है , संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में व्युत्पन्न एकमात्र आय के रूप में ऐसे लाभांश को प्राप्त करने वाली कंपनी या व्यक्ति के हाथों में वर्तमान आय में से 1 अप्रैल , 2017 को या उसके पश्चात् लाभांश के रूप में (चाहे अंतरिम हो या अन्यथा) ऐसी कंपनी द्वारा घोषित वितरित या संदत्त किसी रकम पर किसी निर्धारण वर्ष के लिए संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में एकमात्र आय से व्युत्पन्न कुल आय की बाबत वितरित लाभ पर कोई कर प्रभार्य नहीं होगा ।
स्पष्टीकरण- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,-
2005 का 28 (क) "अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र" का वही अर्थ होगा जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड ( थ) में उसका है;
(ख) "इकाई" से 1 अप्रैल , 2016 को या उसके पश्चात् किसी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र में स्थापित कोई इकाई अभिप्रेत है;
1999का 42 (ग) " संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा " से ऐसी विदेशी मुद्रा अभिप्रेत है जिसे विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 और उसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रयोजनों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तत्समय संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा के रूप में माना गया है । ' ।
धारा 115थक का
58. आय- कर अधिनियम की धारा 115 थक की उपधारा (1 ) में, स्पष्टीकरण में 1 जून, 2016 से,-
संशोधन ।
1956 का 1 (क) खंड ( i) में, " कंपनी अधिनियम , 1956 की धारा 77 क " शब्दों, अंकों और अक्षर के स्थान पर, "कंपनियों से संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी विधि " शब्द रखे जाएंगे;
(ख) खंड ( ii) में , "ऐसे शेयरों के निर्गमन के लिए प्राप्त रकम " शब्दों के स्थान पर , "ऐसी रीति में, जो विहित की जाए , अवधारित ऐसे शेयरों के निर्गमन के लिए प्राप्त रकम" शब्द रखे जाएंगे ।
धारा 115नक का
संशोधन ।
59. आय- कर अधिनियम की धारा 115 नक में उपधारा (4) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा 1 जून , 2016 से अंतःस्थापित की जाएगी :-
" (5) इस धारा में अंतर्विष्ट कोई बात 1 जून , 2016 को या उसके पश्चात् प्रतिभूतिकरण न्यास द्वारा उसके विनिधानकर्ताओं को वितरित किसी आय के संबंध में लागू नहीं होगी ।" ।
धारा 115 नग का
60. आय-कर अधिनियम की धारा 115 नग में , स्पष्टीकरण में 1 जून , 2016 से,-
संशोधन ।
(अ) खंड (क) में "या प्रतिभूतियों " शब्दों के पश्चात् "या प्रतिभूति प्राप्ति" शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे ;
(आ) खंड (घ) में,-
(1) उपखंड ( ii ) में " भारतीय रिजर्व बैंक " शब्दों के पश्चात् "या " शब्द अंतःस्थापित किया जाएगा;
(II) उपखंड ( ii ) के पश्चात् और दीर्घ पंक्ति से पहले निम्नलिखित उपखंड अंतःस्थापित
किया जाएगा, अर्थात्: -
2002 का 54 " ( iii ) वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन अधिनियम, 2002 के प्रयोजनों के लिए बनाई गई प्रतिभूतिकरण कंपनियों और भारत का राजपत्र असाधारण
33 अनुभाग 1क]
पुनर्गठन कंपनियों द्वारा स्थापित न्यास या भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा उस प्रयोजन के लिए जारी मार्गदर्शक सिद्धांत या निदेशों के अनुसरण में है, " ;
(इ) खंड ( घ) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
2002का 54
' (ङ) " प्रतिभूति प्राप्ति" का वही अर्थ होगा जो उसका वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन अधिनियम , 2002 की धारा 2 की उपधारा (1 ) के खंड ( यछ) में है । ' ।
61. आय- कर अधिनियम की धारा 115 नग के पश्चात् और उक्त धारा के पश्चात् आने वाले स्पष्टीकरण के पूर्व , निम्नलिखित धारा 1 अप्रैल , 2017 से अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात् :-
नई धारा 115नगक का अन्तःस्थापन । प्रतिभूतिकरण न्यासों से आय परकर ।
" 115 नगक. (1 ) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , किसी व्यक्ति को, जो किसी प्रतिभूतिकरण का कोई विनिधानकर्ता है , प्रतिभूतिकरण में किए गए विनिधान से प्रोद्भुत या उदभूत या उसके द्वारा प्राप्त कोई आय , उसी रीति में आय- कर से प्रभार्य होगी मानो वह ऐसे व्यक्ति को प्रोद्भूत या उद्भूत या उसके द्वारा प्राप्त आय होती , यदि प्रतिभूतिकरण न्यास द्वारा विनिधान उसके द्वारा प्रत्यक्षतः किया गया होता ।
(2) प्रतिभूतिकरण न्यास द्वारा संदत्त या जमा की गई आय उपधारा (1 ) में निर्दिष्ट व्यक्ति के हाथ में उसी प्रकृति और उसी अनुपात में समझी जाएगी मानो वह पूर्ववर्ष के दौरान प्रतिभूतिकरण द्वारा प्राप्त की गई हो या उसको प्रोद्भुत अथवा उद्भुत हुई हो ।
(3) किसी पूर्ववर्ष के दौरान प्रतिभूतिकरण न्यास को प्रोद्भुत या उद्भूत होने वाली या उसके द्वारा प्राप्त की जाने वाली आय , यदि वह उपधारा ( 1 ) में निर्दिष्ट व्यक्ति को संदत्त या जमा न की गई हो, पूर्ववर्ष के अंतिम दिन पर उक्त व्यक्ति के खाते में उसी अनुपात में जमा समझी जाएगी जिसमें ऐसा व्यक्ति आय प्राप्त करने के लिए हकदार होता यदि उसे पूर्ववर्ष में संदत्त किया गया होता ।
(4) प्रतिभूतिकरण न्यास की ओर से आय को जमा करने या संदाय करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति और प्रतिभूतिकरण न्यास ऐसी अवधि के भीतर, जो विहित की जाए , ऐसे व्यक्ति को, जो ऐसी आय के संबंध में कर के लिए दायी है और विहित आय- कर प्राधिकारी को ऐसे रूप में तथा ऐसी रीति में सत्यापित एक विवरण, जिसमें पूर्ववर्ष के दौरान संदत्त या जमा आय के ब्यौरे और ऐसे अन्य सुसंगत ब्यौरे, जो विहित किए जाएं , दिए जाएंगे , प्रस्तुत करेगा ।
(5) उक्त पूर्ववर्ष के दौरान प्रोद्भुत या उद्भूत होने के कारण कोई आय , जिसे उपधारा ( 1 ) में निर्दिष्टव्यक्ति की कुल आय में सम्मिलित किया गया है, ऐसे व्यक्ति की उस पूर्ववर्ष में कुल आय में सम्मिलित नहीं की जाएगी जिसमें ऐसी आय प्रतिभूतिकरण न्यास द्वारा वस्तुतः उसे संदत्त की गई हो ।" ।
62. आय- कर अधिनियम के अध्याय 12 डक के पश्चात् निम्नलिखित अध्याय 1 जून , 2016 से अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
नए अध्याय 12डख का अन्तःस्थापन ।
'अध्याय 12डख
कतिपय न्यासों और संस्थाओं की अनुवर्धित आय पर कर से संबंधित विशेष उपबंध
अनुवर्धित आय परकर ।
115नघ. (1 ) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां धारा 12 कक के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई न्यास या संस्था किसी पूर्ववर्ष में-
(क) किसी ऐसे रूप में संपरिवर्तित हो गई है, जो धारा 12 कक के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रदान किए जाने के लिए पात्र नहीं है;
(ख) किसी ऐसे अस्तित्व , जो कोई न्यास या संस्था है, से भिन्न किसी अन्य अस्तित्व में विलय हो गई है जिसके उद्देश्य उसके समान हैं और वह धारा 12 कक के अधीन रजिस्ट्रीकृत है; या
(ग ) जो विघटन पर अपनी आस्तियां किसी न्यास या संस्था अथवा धारा 12 कक के अधीन रजिस्ट्रीकृत धारा 10 के खंड (23 ग) के उपखंड ( iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट किसी निधि या संस्था या न्यास या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य चिकित्सीय संस्था को उस मास के , जिसमें विघटन होता है , अंत से बारह मास की अवधि के भीतर, सभी आस्तियां अंतरित करने में असफल रहती है, 34
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
ऐसे न्यास या संस्था की कुल आय की बाबत प्रभार्य आय- कर के अतिरिक्त, विनिर्दिष्ट तारीख को, यथास्थिति, न्यास या संस्था की अनुवर्धित आय पर कर प्रभार्य किया जाएगा और ऐसा न्यास या संस्था अतिरिक्त आय - कर ( जिसे इसमें इसके पश्चात् अनुवर्धित आय पर कर कहा गया है) , अनुवर्धित आय पर अधिकतम मार्जिन की दर पर संदाय करने के लिए दायी होगा ।
(2) उपधारा ( 1 ) के प्रयोजनों के लिए अनुवर्धित आय से ऐसी रकम अभिप्रेत है, जिसके द्वारा , विनिर्दिष्ट तारीख को न्यास या संस्था की कुल आस्तियों का सकल उचित बाजार मूल्य मूल्यांकन की ऐसी रीति जो विहित की जाए , के अनुसार संगणित ऐसे न्यास या संस्था के कुल दायित्व से अधिक हो जाता है :
परंतु ऐसी आस्ति से संबंधित इतनी अनुवर्धित आय को , जो निम्नलिखित आस्ति और दायित्व के कारण है, यदि कोई हो, उपधारा (1 ) के प्रयोजनों के लिए छोड़ दिया जाएगा अर्थात्ः-
( i) कोई ऐसी आस्ति, जिसका न्यास या संस्था द्वारा धारा 10 के खंड (1 ) में निर्दिष्ट प्रकृति की उसकी आय में से प्रत्यक्षतः अर्जित किया जाना सिद्ध कर दिया गया है;
(ii ) न्यास या संस्था द्वारा उसके सृजन या स्थापना की तारीख से आरंभ होकर उस तारीख को , जिससे धारा 12 कक के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रभावी होता है , समाप्त होने वाली अवधि के दौरान अर्जित ऐसी आस्ति, यदि न्यास या संस्था को उक्त अवधि के दौरान धारा 11 और धारा 12 का कोई फायदा मंजूर नहीं किया गया हैः
परंतु यह और कि जहां न्यास या संस्था को उस तारीख से पूर्व, जिससे धारा 12कक के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रभावी होता है, प्रारंभ होने वाले किसी पूर्ववर्ष या वर्षों की बाबत धारा 11 और धारा 12 का फायदा धारा 12क की उपधारा (2) के प्रथम परंतुक के कारण मंजूर किया गया है , वहां प्रथम परंतुक के खंड (ii) के प्रयोजनों के लिए रजिस्ट्रीकरण को पूर्वतम पूर्ववर्ष के प्रथम दिन से प्रभावी हुआ समझा जाएगा ।
परंतु यह भी कि उपधारा (1 ) के खंड ( ग) में निर्दिष्ट किसी मामले के संबंध में अनुवर्धित आय की संगणना करते समय ऐसी आस्तियों और दायित्वों , यदि कोई हों , जो ऐसी आस्ति से संबंधित है और जिन्हें उक्त खंड में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर धारा 12 कक के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी अन्य न्यास या संस्था को या धारा 10 के खंड (23 ग) के उपखंड ( iv) या उपखंड ( v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट किसी अन्य निधि या संस्था या न्यास या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्थान को अंतरित कर दिया गया है, की अनदेखी कर दी जाएगी ।
(3) उपधारा (1 ) के प्रयोजनों के लिए कोई न्यास या संस्था किसी पूर्ववर्ष में ऐसे रूप में संपरिवर्तित समझे जाएंगे , जो धारा 12 कक के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए पात्र न हों, यदि
(i) धारा 12कक के अधीन इसे प्रदान किया गया रजिस्ट्रीकरण रद्द कर दिया गया है, या
(ii) इसने अपने उद्देश्यों के उपांतरण को अंगीकार किया है या हाथ में लिया है, जो रजिस्ट्रीकरण की शर्तों के अनुरूप नहीं हैं और-
(क) इसने उक्त पूर्ववर्ष में धारा 12 कक के अधीन नए रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन नहीं किया है; या
(ख) धारा 12कक के अधीन नए रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन पत्र फाइल किया है किंतु वह अस्वीकार कर दिया गया है ।
(4) इस बात के होते हुए भी कि इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार संगणित किसी न्यास या संस्था की कुल आय पर उसके द्वारा कोई आय- कर संदेय नहीं है, उपधारा (1 ) के अधीन अनुवर्धित आय पर ऐसे न्यास या संस्था द्वारा कर संदेय होगा ।
(5) यथास्थिति, न्यास या संस्था का प्रधान अधिकारी , या न्यासी और न्यास या संस्था भी निम्नलिखित तारीख से चौदह दिनों के भीतर अनुवर्धित आय पर कर का संदाय केंद्रीय सरकार के पास जमा करने के लिए दायी होंगे,-
(i ) उस तारीख से, जिसको,-
(क) रजिस्ट्रीकरण को रद्द करने वाले आदेश के विरुद्ध धारा 253 के अधीन अपील फाइल करने की अवधि समाप्त हो जाती है और न्यास या संस्था द्वारा कोई अपील फाइल नहीं की गई है ; या भारत का राजपत्र असाधारण
35 अनुभाग 1 क]
(ख) किसी अपील में रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण की पुष्टि करने वाला आदेश न्यास या संस्था द्वारा प्राप्त किया जाता है ,
उपधारा ( 3 ) के खंड ( i ) में निर्दिष्ट मामले में;
(ii ) उपधारा (3) के खंड ( ii ) के उपखंड (क) में निर्दिष्ट मामले में ; पूर्ववर्ष के अंत से,
(iii ) उस तारीख से, जिसको,-
(क) आवेदन को नामंजूर करने वाले आदेश के विरुद्ध धारा 253 के अधीन अपील करने की अवधि समाप्त हो जाती है और न्यास या संस्था द्वारा कोई अपील फाइल नहीं की गई है; या
(ख ) किसी अपील में आवेदन के रद्दकरण की पुष्टि करने वाला आदेश न्यास या संस्थाद्वारा प्राप्त किया जाता है,
उपधारा (3 ) के खंड ( ii ) के उपखंड (ख ) में निर्दिष्ट मामले में;
(iv) उपधारा (1 ) के खंड ( ख) में निर्दिष्ट मामले में विलयन की तारीख से;
(v) उस तारीख से जिसको उपधारा (1 ) के खंड (ग) में निर्दिष्ट बारह मास की अवधि समाप्त हो जाती ।
(6) किसी न्यास या संस्था द्वारा अनुवर्धित आय पर कर उक्त आय की बाबत कर का अंतिम रूप से संदाय समझा जाएगा और न्यास या संस्था या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इस संबंध में किसी और प्रत्यय का दावा इस प्रकार संदत्त कर की रकम की बाबत नहीं किया जाएगा ।
(7) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन न्यास या संस्था या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसी आय जिस पर उपधारा (1 ) के अधीन कर प्रभारित किया गया हो या उस पर कर की बाबत कोई कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
(i ) "संपरिवर्तन की तारीख " से अभिप्रेत है-
(क) उपधारा (3) के खंड (i ) में निर्दिष्ट मामले में धारा 12 कक के अधीन रजिस्ट्रीकरण रद्द करने वाले आदेश की तारीख; या
(ख) उपधारा (3 ) के खंड (ii ) में निर्दिष्ट मामले में किसी उद्देश्य को अंगीकार करने या उपांतरित करने की तारीख;
(ii) "निर्दिष्ट तारीख " से अभिप्रेत है-
(क) उपधारा (1 ) के खंड (क) के अधीन आने वाले किसी मामले में संपरिवर्तन कीतारीख;
(ख) उपधारा (1 ) के खंड (ख) के अधीन आने वाले किसी मामले में विलयन की तारीख; और
(ग) उपधारा (1 ) के खंड (ग) के अधीन आने वाले किसी मामले में विघटन की तारीख ।
1996 का 33
(iii) धारा 12कक के अधीन रजिस्ट्रीकरण में , धारा 12 क के अधीन अभिप्राप्त कोई रजिस्ट्रीकरण , जैसा कि वह वित्त (सं. 2) अधिनियम , 1996 द्वारा इसके संशोधन के पूर्व विद्यमान था, सम्मिलित होगा ।
न्यास या संस्था द्वारा कर के असंदाय के लिए संदेय ब्याज ।
115 नङ. जहां न्यास या संस्था का प्रधान अधिकारी या न्यासी और न्यास या संस्था , धारा 115 नघ की उपधारा (1 ) में निर्दिष्ट अनुवर्धित आय पर संपूर्ण कर या उसके किसी भाग को , उस धारा की उपधारा (5 ) के अधीन अनुज्ञात समय के भीतर संदत्त करने में असफल रहता या रहती है, वहां वह अंतिम तारीख के, जिसको ऐसा कर संदेय था , ठीक पश्चात् की तारीख को आरंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको कर वस्तुतः संदत्त किया गया था, समाप्त होने वाली अवधि के लिए ऐसे कर की रकम पर प्रत्येक मास या उसके भाग के लिए एक प्रतिशत की दर पर साधारण ब्याज का संदाय करने के लिए वास्तविक रूप से दायी होगा या होगी ।
115नच. (1 ) यदि न्यास या संस्था का कोई प्रधान अधिकारी या न्यासी और न्यास या संस्था, धारा 115 नघ के उपबंधों के अनुसार अनुवर्धित आय पर कर संदत्त नहीं करता या करती है, तो उसे उसके द्वारा संदेय कर की रकम की बाबत व्यतिक्रमी निर्धारिती समझा जाएगा और इस अधिनियम के आय - कर के संग्रहण और उसकी वसूली से संबंधित सभी उपबंध लागू होंगे ।
न्यास या संस्था को कब व्यतिक्रमी निर्धारिती माना जाएगा ।
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2 36
(2) उपधारा (1 ) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , ऐसे किसी मामले में , जहां अनुवर्धित आय पर कर धारा 11.5 नघ की उपधारा (1 ) के खंड ( ग ) में निर्दिष्ट परिस्थितियों के अधीन संदेय है, ऐसे व्यक्ति को जिसे इसकी उपधारा ( 2) के अधीन अनुवर्धित आय की संगणना का भाग बनने वाली कोई आस्ति अंतरित हुई है , ऐसे कर और उस पर ब्याज की बाबत व्यतिक्रमी निर्धारिती समझा जाएगा और आय- कर के संग्रहण और वसूली के लिए इस अधिनियम के सभी उपबंध लागू होंगे :
परंतु इस उपधारा में निर्दिष्ट व्यक्ति का दायित्व उस परिमाण तक सीमित होगा जिस तक उसके द्वारा प्राप्त आस्ति दायित्व को पूरा करने के लिए सक्षम है । ' ।
धारा 115 पक का संशोधन ।
63. आय-कर अधिनियम की धारा 115 पक की उपधारा (3) में , " खंड (23 चग) में" शब्दों, कोष्ठकों, अंकों और अक्षरों के स्थान पर "खंड (23 चग) के उपखंड (क) में " शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर 1 अप्रैल , 2017 से रखे जाएंगे ।
धारा 119 का संशोधन।
64. आय- कर अधिनियम की धारा 119 की उपधारा (2) के खंड (क) में, " 234ङ" अंकों और अक्षर के पश्चात्, " 270 क" अंक और अक्षर 1 अप्रैल , 2017 से अंतःस्थापित किए जाएंगे ।
धारा 124 का संशोधन।
65. आय- कर अधिनियम की धारा 124 की उपधारा (3) के खंड (ख) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड 1 जून, 2016 से अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
" (ग) जहां उस तारीख से, जिस तारीख को उस पर धारा 153 क की उपधारा ( 1 ) या धारा 153 ग की उपधारा (2) के अधीन सूचना तामील की गई थी, एक मास की समाप्ति के पश्चात् या निर्धारण पूरा होने के पश्चात्, इनमें से जो भी पूर्वतर हो , धारा 132 या धारा 132 क के अधीन कोई कार्रवाई की गई है ।" ।
धारा 133 ग का संशोधन ।
66. आय- कर अधिनियम की धारा 133 ग को उसकी उपधारा (1 ) के रूप में पुनः संख्यांकित किया जाएगा और इस प्रकार पुनः संख्यांकित उपधारा ( 1 ) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा , 1 जून , 2016 से अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात्: -
" (2) जहां कोई जानकारी या दस्तावेज उपधारा (1 ) के अधीन जारी सूचना के उत्तर में प्राप्त हुई है, वहां विहित आय- कर प्राधिकारी ऐसी जानकारी या दस्तावेज पर कार्रवाई कर सकेगा और निर्धारण अधिकारी को ऐसी कार्यवाही करने का परिणाम उपलब्ध करवा सकेगा ।" ।
67. आय- कर अधिनियम की धारा 139 में, -
धारा 139 का संशोधन।
(i) उपधारा (1 ) के छठे परंतुक में " धारा 10 क " शब्द, अंकों और अक्षर के स्थान पर " धारा 10 के खंड (38 ) या धारा 10 क" शब्द , अंक , कोष्ठक और अक्षर 1 अप्रैल , 2017 से रखे जाएंगे ;
(ii ) उपधारा (3) में, " धारा 73 की उपधारा (2) " शब्दों, कोष्ठकों और अंकों के पश्चात् "या धारा 73 क की उपधारा (2) " शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर अंतःस्थापित किए जाएंगे;
(iii) 1 अप्रैल , 2017 से ,-
(क) उपधारा (4) के स्थान पर , निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी , अर्थात्: -
"(4) कोई व्यक्ति जिसने उपधारा (1 ) के अधीन उसे अनुज्ञात समय के भीतर कोई विवरणी नहीं दी है, किसी पूर्ववर्ष के लिए विवरणी सुसंगत निर्धारण वर्ष के अंत के पूर्व या निर्धारण पूरा होने के पूर्व , इनमें से जो भी पूर्वतर हो, किसी समय दे सकेगा ।";
(ख) उपधारा (5) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी , अर्थात्:-
" (5) यदि किसी व्यक्ति को , उपधारा ( 1 ) या उपधारा (4) के अधीन विवरणी देने के पश्चात् इसमें किसी लोप या किसी गलत कथन का पता लगता है, तो वह सुसंगत निर्धारण वर्ष के अंत से एक वर्ष की समाप्ति के पूर्व या निर्धारण पूरा होने के पूर्व, इनमें से जो भी पूर्वतर हो , किसी भी समय संशोधित विवरणी दे सकेगा।" ;
(ग) उपधारा (9 ) में, स्पष्टीकरण के खंड (कक) का लोप किया जाएगा ।
68. आय-कर अधिनियम की धारा 143 में,-
धारा 143 का संशोधन ।
(क) 1 अप्रैल , 2017 से ,-
(1) उपधारा (1 ) के खंड (क) में,-
(अ) उपखंड (i ) में अंत में आने वाले " या " शब्द का लोप किया जाएगा;
भारत का राजपत्र असाधारण
37 अनुभाग 1क]
(आ) उपखंड ( ii) के पश्चात् निम्नलिखित उपखंड अंतःस्थापित किए जाएंगे ,
अर्थात्:-
" (iii ) दावा की गई हानि की नामंजूरी , यदि पूर्ववर्ष की विवरणी जिसके लिए हानि के मुजरे का दावा किया गया था धारा 139 की उपधारा (1 ) के अधीन विनिर्दिष्ट नियत तारीख से परे प्रस्तुत की गई थी;
(iv) लेखापरीक्षा रिपोर्ट में उपदर्शित व्यय की नामंजूरी किंतु जिसे विवरणी में कुल आय की संगणना के लिए हिसाब में नहीं लिया गया है;
(v) धारा 10कक, धारा 80 झक, धारा 80 झकख , धारा 80 झख , धारा 80 झग , धारा 80 झघ या धारा 80 झङ के अधीन दावा की गई कटौती की नामंजूरी यदि विवरणी धारा 139 की उपधारा ( 1 ) के अधीन विनिर्दिष्ट नियत तारीख से परे प्रस्तुत की गई है; या
(vi) प्ररूप 26कध या प्ररूप 16 क या प्ररूप 16 में आने वाली आय में वर्धन जिसे विवरणी में कुल आय की संगणना में सम्मिलित नहीं किया गया है :
परंतु ऐसा कोई समायोजन निर्धारिती को लिखित या किसी इलैक्ट्रानिकी ढंग के संसूचना देने के सिवाय नहीं किया जाएगा :
परंतु यह और कि निर्धारिती से प्राप्त प्रत्युत्तर, यदि कोई हो , पर कोई समायोजन करने से पूर्व विचार किया जाएगा और उस दशा में, जहां ऐसी संसूचना जारी करने से तीस दिन के भीतर कोई प्रत्युत्तर प्राप्त नहीं होता है, ऐसा समायोजन किया जाएगा; ";
(II) उपधारा (1 घ) में के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी , अर्थात्:-
"(1 घ) उपधारा ( 1 ) में किसी बात के होते हुए भी किसी विवरणी की प्रक्रिया, उपधारा ( 1 ) के दूसरे परंतुक में विनिर्दिष्ट अवधि के अवसान के पूर्व आवश्यक नहीं होगी , जहां उपधारा (2) के अधीन निर्धारिती को कोई नोटिस जारी किया गया हैः
परंतु ऐसी विवरणी को उपधारा (3 ) के अधीन किसी आदेश के जारी किए जाने के पूर्वप्रक्रियागत किया जाएगा । " ;
( ख) उपधारा (2) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा , 1 जून , 2016 से रखी जाएगी , अर्थात्: -
"(2) जहां धारा 139 के अधीन या धारा 142 की उपधारा (1 ) के अधीन किसी सूचना के उत्तर में कोई विवरणी दी गई है, वहां , यदि, यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी या विहित आय- कर प्राधिकारी यह सुनिश्चित करना आवश्यक या समीचीन समझता है कि निर्धारिती ने कम आय का विवरण नहीं दिया है या आधिक्य हानि संगणित नहीं की है या किसी रीति में कम कर संदत्त नहीं किया गया है, निर्धारिती को उससे यह अपेक्षा करते हुए एक सूचना की तामील की जाएगी कि वह उसमें विनिर्दिष्ट की जाने वाली तारीख को निर्धारण अधिकारी के कार्यालय में या तो उपस्थित हो या निर्धारण प्राधिकारी के समक्ष ऐसे साक्ष्य को, जिस पर निर्धारिती उस विवरणी के समर्थन में निर्भर करता है , पेश करे या करवाए :
परंतु इस उपधारा के अधीन निर्धारिती पर किसी सूचना की तामील उस वित्तीय वर्ष के अंत से जिसमें विवरणी दी जाती है , छह मास के अवसान के पश्चात् नहीं की जाएगी ।" ।
धारा 147 का संशोधन ।
69. आय- कर अधिनियम की धारा 147 के स्पष्टीकरण 2 में खंड (ग) के पश्चात् निम्नलिखित खंड 1 जून , 2016 से, अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
" (गक) जहां निर्धारिती ने आय की कोई विवरणी नहीं दी है या उसने आय की विवरणी दी है और धारा 133 ग की उपधारा (2) के अधीन विहित आय - कर प्राधिकारी से प्राप्त जानकारी या दस्तावेज के आधार पर निर्धारण अधिकारी द्वारा यह पाया जाता है कि निर्धारिती की आय उस अधिकतम रकम से अधिक है जो कर से प्रभार्य नहीं है या , यथास्थिति, निर्धारिती ने कम आय का कथन किया है या विवरणी में अत्यधिक हानि, कटौती , मोक या राहत का दावा किया है; "।
विद्यमान धारा 153 70. आय- कर अधिनियम की धारा 153 के स्थान पर निम्नलिखित धारा 1 जून, 2016 से रखी जाएगी :-
के स्थान पर नई धारा 153 का प्रतिस्थापन।
" 153. (1 ) उस निर्धारण वर्ष के अंत से , जिसमें आय पहली बार निर्धारणीय थी , इक्कीस मास की समाप्ति के पश्चात् किसी भी समय धारा 143 या धारा 144 के अधीन निर्धारण का कोई आदेश नहीं किया जाएगा ।
निर्धारण, पुनः निर्धारण और पुनः संगणना को पूरा करने के लिए समय- सीमा ।
(2) उस वित्तीय वर्ष के अंत से , जिसमें धारा 148 के अधीन सूचना की तामील की गई थी, नौ मास की समाप्ति के पश्चात् धारा 147 के अधीन निर्धारण, पुनः निर्धारण और पुनः संगणना का कोई आदेश नहीं किया जाएगा ।
38
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(3) उपधारा (1 ) और उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से, जिसमें धारा 254 के अधीन किसी निर्धारण को अपास्त या रद्द करने वाला आदेश , यथास्थिति, प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त किया गया था या प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा धारा 263 या धारा 264 के अधीन आदेश पारित किया गया था , से पहले किसी भी समय धारा 254 या धारा 263 या धारा 264 के अधीन किसी आदेश के अनुसरण में नए निर्धारण का आदेश किया जा सकेगा ।
(4) उपधारा (1 ) , उपधारा (2) और उपधारा (3) में किसी बात के होते हुए भी उस दशा में जहां निर्धारण या पुनः निर्धारण के लिए कार्यवाहियों के प्रकरण के दौरान धारा 92 गक की उपधारा ( 1 ) के अधीन कोई निर्देश किया गया है वहां उक्त उपधारा (1 ) , उपधारा (2) और उपधारा (3) के अधीन , यथास्थिति, निर्धारण या पुनः निर्धारण को पूरा करने के लिए उपलब्ध समयावधि को बारह मास के लिए बढ़ा दिया जाएगा ।
(5) उस दशा में जहां निर्धारण अधिकारी द्वारा कोई नया निर्धारण या पुनः निर्धारण करने से भिन्न धारा 250 या धारा 254 या धारा 260 या धारा 262 या धारा 263 या धारा 264 के अधीन आदेश को पूर्णतः या भागतः प्रभावी बनाया जाना है वहां ऐसे आदेश को उस मास के अंत से जिसमें, यथास्थिति, प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा धारा 250 या धारा 254 या धारा 260 या धारा 262 के अधीन आदेश प्राप्त किया गया था या प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा धारा 263 या धारा 264 के अधीन आदेश पारित किया गया था, तीन मास की अवधि के भीतर प्रभावी बनाया जाएगा :
परंतु उस दशा में जहां निर्धारण अधिकारी के लिए , उसके नियंत्रण से परे कारणों से , पूर्वोक्त समय के भीतर ऐसे आदेश को प्रभावी बनाना संभव नहीं है वहां प्रधान आयुक्त या आयुक्त, यदि उसका समाधान हो जाता है तो निर्धारण अधिकारी से लिखित में ऐसे कारणों की प्राप्ति पर ऐसे आदेश को प्रभावी बनाने के लिए छह मास का अतिरिक्त समय अनुज्ञात कर सकेगा ।
(6) उपधारा (1 ) और उपधारा (2) की कोई बात निम्नलिखित वर्गों के निर्धारणों , पुनः निर्धारणों और पुनः संगणना को लागू नहीं होगी जो उपधारा (3) और उपधारा (5) के उपबंधों के अध्यधीन-
(i) जहां धारा 250 , धारा 254 , धारा 260 , धारा 262, धारा 263 और धारा 264 के अधीन किसी आदेश या इस अधिनियम के अधीन अपील या निर्देश के रूप में किए जाने से भिन्न कार्यवाही में किसी न्यायालय के किसी आदेश के अनुसरण में या उसमें अंतर्विष्ट किसी निष्कर्ष या निदेश को प्रभावी बनाने के लिए किसी निर्धारिती या किसी व्यक्ति पर निर्धारण , पुनः निर्धारण और पुनः संगणना की जाती है, उस मास के अंत से, जिसमें ऐसा आदेश , यथास्थिति, प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त या पारित किया जाता है, बारह मास की समाप्ति पर या उससे पहले पूरा किया जा सकेगा ।
(ii) उस फर्म की दशा में, जहां धारा 147 के अधीन फर्म पर किए गए किसी निर्धारण के परिणामस्वरूप फर्म के किसी भागीदार पर निर्धारण किया जाता है वहां उस मास के अंत से, जिसमें फर्म के मामले में निर्धारण आदेश पारित किया गया है , बारह मास की समाप्ति पर या उससे पहले पूरा किया जा सकेगा ।
(7) जहां उपधारा (5) या उपधारा (6) में निर्दिष्ट किसी आदेश , निष्कर्ष या निदेश को निर्धारण अधिकारी द्वारा उक्त उपधाराओं में विनिर्दिष्ट समय के भीतर प्रभावी बनाया जाना है और ऐसा आदेश उसमें विनिर्दिष्ट आय- कर प्राधिकारी द्वारा 1 जून, 2016 से पहले, यथास्थिति, प्राप्त या पारित किया गया है , वहां निर्धारण अधिकारी , 31 मार्च , 2017 को या उससे पहले ऐसे आदेश , निष्कर्ष या निदेश को प्रभावी बनाएगा या निर्धारिती की आय का निर्धारण , पुनः निर्धारण या पुनः संगणना करेगा ।
(8 ) इस धारा , धारा 153 क की उपधारा (2 ) और धारा 153 ख की उपधारा (1 ) के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी किसी भी निर्धारण वर्ष के संबंध में निर्धारण या पुनः निर्धारण का कोई ऐसा आदेश , जो धारा 153 क की उपधारा (2 ) के अधीन प्रवर्तित हो गया है, ऐसे प्रवर्तित होने के मास के अंत से एक वर्ष के भीतर या इस धारा अथवा धारा 153 ख की उपधारा (1 ) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर, इसमें जो भी पश्चात्वर्ती हो , पूरा किया जाएगा ।
(9) इस धारा के उपबंध , जैसे ये वित्त अधिनियम , 2016 द्वारा उनके संशोधन से ठीक पूर्व थे , 1 जून , 2016 से पहले निर्धारण, पुनः निर्धारण या पुनः संगणना को या उनके संबंध में लागू होंगे ।
स्पष्टीकरण 1- इस धारा के प्रयोजनों के लिए परिसीमा की अवधि की संगणना में निम्नलिखित को अपवर्जित कर दिया जाएगा- भारत का राजपत्र असाधारण
39 अनुभाग 1क]
(i ) पूरी कार्यवाहियों या उसके किसी भाग को पुनः आरंभ करने या धारा 129 के परंतुक के अधीन निर्धारिती को सुनवाई का अवसर देने में लगा समय , या
(ii) वह कालावधि, जिसके दौरान निर्धारण कार्यवाही किसी न्यायालय के किसी आदेश या व्यादेश द्वारा रोक दी गई है , या
(iii) उस तारीख से , जिसको निर्धारण अधिकारी, केंद्रीय सरकार या विहित प्राधिकारी को, धारा 143 की उपधारा (3 ) के परंतुक के खंड ( i) के अधीन धारा 10 के खंड (21 ) या खंड (22ख) या खंड (23 क) या खंड (23 ख ) या खंड (23 ग) के उपखंड ( iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) के उपबंधों के उल्लंघन की सूचना देता है , प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको उन खंडों के अधीन , यथास्थिति, अनुमोदन को वापस लेने के आदेश या अधिसूचना के विखंडन के प्रति निर्धारण अधिकारी द्वारा प्राप्त की जाती है, समाप्त होने वाली कालावधि , या
(iv) उस तारीख को, जिसको निर्धारण अधिकारी निर्धारिती को अपने लेखाओं की संपरीक्षा धारा 142 की उपधारा (2क) के अधीन कराने का निदेश देता है, प्रारंभ होने वाली और,-
(क) उस अंतिम तारीख को , जिसको निर्धारिती से ऐसी संपरीक्षा की रिपोर्ट उस उपधारा के अधीन प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाती है समाप्त होने वाली अवधि; या
(ख) जहां ऐसे निदेश को किसी न्यायालय के समक्ष चुनौती दी जाती है, उस तारीख को, जिसको ऐसे निदेश को अपास्त किए जाने संबंधी आदेश प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि; या
(v) उस तारीख से, जिसको निर्धारण अधिकारी धारा 142क की उपधारा (1 ) के अधीन मूल्यांकन अधिकारी को कोई निर्देश करता है , प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको निर्धारण अधिकारी द्वारा मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट प्राप्त की जाती है , समाप्त होने वाली कालावधि; या
(vi) उस तारीख , जिसको निर्धारण अधिकारी धारा 158 क की उपधारा ( 1 ) के अधीन घोषणा प्राप्त करता है , प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको उस धारा की उपधारा (3) के अधीन उसके द्वारा आदेश किया जाता है, समाप्त होने वाली (साठ दिन से अनधिक की) कालावधि, या
(vii) उस दशा में जहां आय- कर समझौता आयोग के समक्ष किया गया आवेदन उसके द्वारा नामंजूर कर दिया गया है या उसके समक्ष कार्यवाही किए जाने के लिए उसके द्वारा अनुज्ञात नहीं किया है , वहां उस तारीख से जिसको धारा 245 ग के अधीन समझौता आयोग के समक्ष आवेदन किया जाता है , आरंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको उस धारा की उपधारा (2) के अधीन प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा धारा 245 घ की उपधारा ( 1 ) के अधीन आदेश प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली कालावधि, या
(viii) उस तारीख से, जिसको धारा 245 थ की उपधारा (1 ) के अधीन अग्रिम विनिर्णय के लिए प्राधिकरण के समक्ष कोई आवेदन किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको धारा 245द की उपधारा (3) के अधीन आवेदन को खारिज करने वाला आदेश प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली कालावधि, या
(ix) उस तारीख से, जिसको धारा 245 थ की उपधारा (1 ) के अधीन अग्रिम विनिर्णय के लिए प्राधिकरण के समक्ष कोई आवेदन किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको धारा 245द की उपधारा (7 ) के अधीन उसके द्वारा घोषित अग्रिम विनिर्णय आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली कालावधि, या
(x) उस तारीख से, जिसको धारा 90 या धारा 90 क में निर्दिष्ट किसी करार के अधीन किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा सूचना के आदान-प्रदान के लिए कोई निर्देश या निर्देशों में से प्रथम निर्देश किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को , जिसको अनुरोध की गई सूचना अंतिम रूप से प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त की जाती है, समाप्त होने वाली अवधि या एक वर्ष की कालावधि, इनमें से जो भी कम हो , या 40
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(xi) उस तारीख से, जिसको धारा 144खक की उपधारा ( 1 ) के अधीन प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा किसी ठहराव को अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव घोषित किए जाने के लिए कोई निर्देश प्राप्त किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को , जिसको निर्धारण अधिकारी द्वारा उक्त धारा की उपधारा (3) या उपधारा (6) के अधीन कोई निदेश या उपधारा (5) के अधीन कोई आदेश प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली कालावधि :
परंतु जहां पूर्वोक्त समय या अवधि के अपवर्जन के पश्चात् उपधारा (1 ) , उपधारा (2) , उपधारा (3 ) और उपधारा (7) के अधीन निर्दिष्ट वह परिसीमाकाल , जो निर्धारण अधिकारी को, यथास्थिति, निर्धारण , पुनः निर्धारण , पुनः संगणना का आदेश करने के लिए उपलब्ध है , साठ दिन से कम है , वहां ऐसी अवशिष्ट अवधि साठ दिन तक विस्तारित की जाएगी और पूर्वोक्त परिसीमा काल तद्नुसार विस्तारित किया गया समझा जाएगा :
परंतु यह और कि जहां धारा 92 गक की उपधारा (उक) के परंतुक के अनुसार अंतरण मूल्यांकन अधिकारी को उपलब्ध समयावधि साठ दिन बढ़ा दी जाती है, और, यथास्थिति, निर्धारण , पुनः निर्धारण या पुनः संगणना का आदेश करने के लिए निर्धारण अधिकारी को उपलब्ध परिसीमा की अवधि साठ दिन से कम है , वहां ऐसी अवशिष्ट अवधि साठ दिन तक विस्तारित की जाएगी और पूर्वोक्त परिसीमाकाल तनुसार विस्तारित किया गया समझा जाएगा:
परंतु यह भी कि जहां समझौता आयोग के समक्ष किसी कार्यवाही का धारा 245 जक के अधीन उपशमन हो जाता है वहां, यथास्थिति, निर्धारण , पुनः निर्धारण या पुनः संगणना का आदेश करने के लिए निर्धारण अधिकारी को उपलब्ध परिसीमा की अवधि धारा 245जक की उपधारा (4) के अधीन अवधि के अपवर्जन के पश्चात् एक वर्ष से कम की नहीं होगी; और जहां परिसीमा की ऐसी अवधि एक वर्ष से कम है, वहां वह एक वर्ष के लिए बढ़ाई गई समझी जाएगी; और धारा 149 , धारा 153 ख , धारा 154 , धारा 155 और धारा 158 खङ के अधीन परिसीमा की अवधि का अवधारण करने के प्रयोजनों के लिए और धारा 244 क के अधीन ब्याज के संदाय के प्रयोजनों के लिए यह परंतुक भी तनुसार लागू होगा ।
स्पष्टीकरण 2- इस धारा के प्रयोजनों के लिए , जहां उपधारा (6) के खंड ( i) में निर्दिष्ट किसी आदेश द्वारा ,-
(क) किसी निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारिती की कुल आय में से किसी आय को अपवर्जित किया जाता है, वहां किसी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए ऐसी आय का निर्धारण धारा 150 और इस धारा के प्रयोजनों के लिए उक्त आदेश में अंतर्विष्ट किसी निष्कर्ष या निदेश के परिणामस्वरूप या उसको प्रभावी करने के लिए किया गया निर्धारण समझा जाएगा; या
(ख) कोई आय किसी एक व्यक्ति की कुल आय में से अपवर्जित की जाती है और अन्य व्यक्ति की आय मानी जाती है वहां ऐसे अन्य व्यक्ति पर ऐसी आय का निर्धारण धारा 150 और इस धारा के प्रयोजनों के लिए उक्त आदेश में अंतर्विष्ट किसी निष्कर्ष या निदेश के परिणामस्वरूप या उसको प्रभावी करने के लिए किया गया निर्धारण समझा जाएगा यदि उक्त आदेश के पारित किए जाने के पूर्व ऐसे अन्य व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिया गया था ।" ।
71. आय- कर अधिनियम की धारा 153 ख के स्थान पर निम्नलिखित धारा 1 जून, 2016 से रखी जाएगी , अर्थात्:-
धारा 153ख के स्थान पर नई धारा का प्रतिस्थापन।
" 153ख. ( 1 ) धारा 153 में किसी बात के होते हुए भी निर्धारण अधिकारी ,-
धारा 153क के अधीन निर्धारण पूरा करने के लिए समय सीमा ।
(क) धारा 153 क की उपधारा (1 ) के खंड (ख) में निर्दिष्ट छह निर्धारण वर्षों के भीतर आने वाले प्रत्येक निर्धारण वर्ष की बाबत उस वित्तीय वर्ष के अंत से इक्कीस मास की अवधि के भीतर, जिसमें धारा 132 के अधीन तलाशी के लिए या धारा 132 क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए प्राधिकारों में से अंतिम को निष्पादित किया गया है , निर्धारण या पुनर्निर्धारण का आदेश करेगा;
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41 अनुभाग 1क]
(ख) उस पूर्ववर्ष के सुसंगत निर्धारण वर्ष की बाबत जिसमें धारा 132 के अधीन तलाशी ली जाती है या धारा 132 क के अधीन अध्यपेक्षा की जाती है, उस वित्तीय वर्ष के अंत से इक्कीस मास की अवधि के भीतर जिसमें धारा 132 के अधीन तलाशी के लिए या धारा 132 क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए प्राधिकारी में से अंतिम का निष्पादन किया गया था, निर्धारण या पुनर्निर्धारण का आदेश करेगा :
परंतु धारा 153 ग में निर्दिष्ट अन्य व्यक्ति की दशा में निर्धारण या पुनः निर्धारण करने के लिए परिसीमा अवधि इस उपधारा के खंड ( क) या खंड ( ख) में यथा निर्दिष्ट अवधि या उस वित्तीय वर्ष के जिसमें अभिगृहीत या अध्यपेक्षित लेखा बहियां या दस्तावेज या आस्तियां धारा 153 ग के अधीन ऐसे अन्य व्यक्ति पर अधिकारिता रखने वाले निर्धारण अधिकारी को सौंपी जाती हैं, अंत से नौ मास , इसमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो, होगी :
परंतु यह और कि उस दशा में जहां धारा 132 के अधीन तलाशी के लिए या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए अंतिम प्राधिकार निष्पादित किया गया था और कुल आय के निर्धारण या पुनर्निर्धारण के लिए कार्यवाहियों के प्रक्रम के दौरान धारा 92 गक की उपधारा ( 1 ) के अधीन निर्देश किया जाता है, वहां इस धारा के खंड (क) और खंड (ख) के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो " इक्कीस मास " शब्दों के स्थान पर "तैंतीस मास " शब्द रख दिए गए हों :
परंतु यह भी कि उस दशा में जहां धारा 153 ग में निर्दिष्ट अन्य व्यक्ति की दशा में कुल आय के निर्धारण या पुनर्निर्धारण के लिए कार्यवाहियों के प्रक्रम के दौरान धारा 92गक की उपधारा (1 ) के अधीन निर्देश किया जाता है वहां ऐसे अन्य व्यक्ति की दशा में निर्धारण या पुनर्निर्धारण करने के लिए परिसीमा अवधि उस वित्तीय वर्ष के अंत से जिसमें धारा 132क के अधीन तलाशी के लिए या धारा 132 क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए अंतिम प्राधिकार निष्पादित किया गया था , तैंतीस मास या उस वित्तीय वर्ष के अंत से जिसमें ऐसे अन्य व्यक्ति पर अधिकारिता रखने वाले निर्धारण अधिकारी को धारा 153 ग के अधीन अभिगृहीत या अध्यपेक्षित लेखा बही या दस्तावेज या आस्तियां सौंपी गई हैं, इक्कीस मास , इसमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो , होगी ।
(2) उपधारा (1 ) के खंड (क) और खंड (ख) में निर्दिष्ट प्राधिकार को,-
(क) तलाशी की दशा में किसी ऐसे व्यक्ति की बाबत जिसके मामले में प्राधिकार का वारंट जारी किया गया है, बनाए गए अंतिम पंचनामे में यथा अभिलिखित तलाशी पूरी होने पर, या
(ख) धारा 132 क के अधीन अध्यपेक्षा की दशा में , प्राधिकृत अधिकारी द्वारा लेखाबहियों या अन्य दस्तावेजों या आस्तियों की वास्तविक प्राप्ति पर,
निष्पादित किया गया समझा जाएगा ।
(3) इस धारा के उपबंध जैसे वे वित्त अधिनियम, 2016 के प्रारंभ से ठीक पहले थे , 1 जून , 2016 से पहले किए गए निर्धारण या पुनर्निर्धारण के किसी आदेश को या उसके संबंध में लागू होंगे ।
स्पष्टीकरण- इस धारा के अधीन परिसीमा अवधि की संगणना करने में,-
(i) वह अवधि, जिसके दौरान निर्धारण की कार्यवाही पर किसी न्यायालय के आदेश या व्यादेश द्वारा रोक लगा दी जाती है; या
(ii) उस तारीख से, जिसको निर्धारण अधिकारी निर्धारिती को धारा 142 की उपधारा (2क) के अधीन अपने लेखाओं की संपरीक्षा कराने का निदेश देता है, प्रारंभ होने वाली और
(क) उस अंतिम तारीख को जिसको निर्धारिती से ऐसी संपरीक्षा की रिपोर्ट उस उपधारा के अधीन प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाती है, समाप्त होने वाली अवधि ; या
(ख) जहां ऐसे निदेश को किसी न्यायालय के समक्ष चुनौती दी जाती है उस तारीख को जिसको ऐसे निदेश को अपास्त किए जाने संबंधी आदेश प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि; या 42
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[भाग 2-
(iii) उस तारीख से जिसको निर्धारण अधिकारी धारा 142 क की उपधारा ( 1 ) के अधीन मूल्यांकन अधिकारी को कोई निर्देश करता है प्रारंभ होने वाली , और उस तारीख को, जिसको निर्धारण अधिकारी द्वारा मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट प्राप्त की जाती है , समाप्त होने वाली अवधि; या
(iv) पूरी कार्रवाई या उसके किसी भाग को पुनः आरंभ करने में या निर्धारिती को धारा 129 के परन्तुक के अधीन पुनः सुनवाई का अवसर देने में लगा समय; या
(v) उस दशा में जहां आय-कर समझौता आयोग के समक्ष किया गया आवेदन उसके द्वारा नामंजूर कर दिया गया है या उसके समक्ष कार्यवाही करने के लिए उसके द्वारा अनुज्ञात नहीं किया गया है, वहां उस तारीख को जिसको धारा 245 ग के अधीन समझौता आयोग के समक्ष आवेदन किया गया, आरंभ होने वाली और उस तारीख को जिसको धारा 245घ की उपधारा (1 ) के अधीन आदेश , प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा उक्त धारा की उपधारा ( 2) के अधीन प्राप्त किया जाता है , समाप्त होने वाली अवधि; या
(vi) उस तारीख से, जिसको धारा 245 थ की उपधारा ( 1 ) के अधीन अग्रिम विनिर्णय के लिए प्राधिकरण के समक्ष कोई आवेदन किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को जिसको धारा 245द की उपधारा (3 ) के अधीन आवेदन को खारिज करने वाला आदेश प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि; या
(vii) उस तारीख से, जिसको धारा 245 थ की उपधारा (1 ) के अधीन अग्रिम विनिर्णय के लिए प्राधिकरण के समक्ष कोई आवेदन किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को जिसको धारा 245द की उपधारा (7) के अधीन उसके द्वारा घोषित अग्रिम विनिर्णय प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि; या
(viii) धारा 153 क की उपधारा (2) में निर्दिष्ट निर्धारण या पुनर्निर्धारण की किसी कार्यवाही या आदेश के बातिलीकरण की तारीख से प्रारंभ होने वाली और ऐसी तारीख तक की अवधि जिसको प्रधान आयुक्त या आयुक्त को ऐसे बातिलीकरण के आदेश को अपास्त करने वाला आदेश प्राप्त होता है; या
(ix) उस तारीख से, जिसको धारा 90 या धारा 90 क में निर्दिष्ट किसी करार के अधीन किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा सूचना के आदान - प्रदान के लिए कोई निर्देश या निर्देशों में से प्रथम निर्देश किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को जिसको अनुरोध की गई सूचना अंतिम रूप से प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त की जाती है , समाप्त होने वाली अवधि या एक वर्ष की अवधि, इसमें से जो भी कम हो; या
(x) उस तारीख से जिसको धारा 144खक की उपधारा (1 ) के अधीन प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा किसी ठहराव को अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव घोषित किए जाने के लिए निर्देश प्राप्त किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को जिसको निर्धारण अधिकारी द्वारा उक्त धारा की उपधारा (3 ) या उपधारा (6) के अधीन कोई निदेश या उपधारा (5) के अधीन कोई आदेश प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि,
अपवर्जित की जाएगी:
परंतु जहां पूर्वोक्त अवधि के अपवर्जन के ठीक पश्चात् इस उपधारा के खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट परिसीमा की उपलब्ध अवधि, यथास्थिति, निर्धारण या पुनर्निर्धारण का आदेश करने के लिए निर्धारण अधिकारी के पास साठ दिनों से कम है, वहां ऐसी शेष अवधि को साठ दिन तक विस्तारित किया जाएगा और परिसीमा की पूर्वोक्त अवधि को तद्नुसार विस्तारित किया गया समझा जाएगा :
परंतु यह और कि जहां धारा 92 गक की उपधारा (उक) के परंतुक के अनुसार कीमत अंतरण अधिकारी को उपलब्ध अवधि साठ दिन तक बढ़ा दी जाती है वहां यदि निर्धारण अधिकारी को, यथास्थिति, निर्धारण या पुनर्निर्धारण का आदेश करने के लिए उपलब्ध परिसीमा अवधि साठ दिन से कम है, तो ऐसी शेष अवधि को साठ दिन तक बढ़ा दिया जाएगा और पूर्वोक्त परिसीमा अवधि को तद्नुसार बढ़ा हुआ समझा जाएगा । ' ।
भारत का राजपत्र असाधारण
43 अनुभाग 1क]
धारा 192 क का
संशोधन ।
72. आय -कर अधिनियम की धारा 192 क में, पहले परंतुक में " तीस हजार रुपए " शब्दों के स्थान पर, " पचास हजार रुपए " शब्द, 1 जून, 2016 से रखे जाएंगे ।
धारा 194 खख का
संशोधन।
73. आय-कर अधिनियम की धारा 194 खख में , पहले परंतुक में " पांच हजार रुपए " शब्दों के स्थान पर, "दस हजार रुपए " शब्द, 1 जून, 2016 से रखे जाएंगे ।
धारा 194 ग का संशोधन ।
74. आय- कर अधिनियम की धारा 194 ग की उपधारा (5) में , परंतुक में " पचहत्तर हजार रुपए " शब्दों के स्थान पर, " एक लाख रुपए " शब्द, 1 जून, 2016 से रखे जाएंगे ।
धारा 194घ का संशोधन ।
75. आय-कर अधिनियम की धारा 194 घ के दूसरे परंतुक में , " बीस हजार रुपए " शब्दों के स्थान पर, "पन्द्रह हजार रुपए " शब्द, 1 जून, 2016 से रखे जाएंगे ।
धारा 194 घक का संशोधन।
76. आय- कर अधिनियम की धारा 194 घक में , "दो प्रतिशत " शब्दों के स्थान पर , " एक प्रतिशत" शब्द, 1 जून , 2016 से रखे जाएंगे ।
धारा 194ङङ का संशोधन ।
77. आय-कर अधिनियम की धारा 194 डङ में , " बीस प्रतिशत " शब्दों के स्थान पर, " दस प्रतिशत " शब्द, 1 जून, 2016 से रखे जाएंगे ।
78. आय- कर अधिनियम की धारा 194 छ की उपधारा (1 ) में, 1 जून , 2016 से,-
धारा 194छ का संशोधन ।
(i ) " एक हजार रुपए " शब्दों के स्थान पर, " पन्द्रह हजार रुपए " शब्द रखे जाएंगे ;
(ii ) दूसरे परंतुक में " दस प्रतिशत " शब्दों के स्थान पर, " पांच प्रतिशत " शब्द रखे जाएंगे ।
79. आय- कर अधिनियम की धारा 194 ज में , 1 जून , 2016 से,-
धारा 194ज का संशोधन।
(i) " दस प्रतिशत " शब्दों के स्थान पर , " पांच प्रतिशत " शब्द, रखे जाएंगे;
जाएंगे । (ii) पहले परंतुक में " पांच हजार रुपए " शब्दों के स्थान पर, "पन्द्रह हजार रुपए" शब्द रखे
80. आय- कर अधिनियम की धारा 194 ट और धारा 194 ठ का, 1 जून , 2016 से लोप किया जाएगा । धारा 194ट और धारा 194 ठ का लोप।
धारा 194ठक का संशोधन ।
81. आय- कर अधिनियम की धारा 194 ठक में , परंतुक में "दो लाख रुपए " शब्दों के स्थान पर, "दो लाख पचास हजार रुपए " शब्द, 1 जून , 2016 से रखे जाएंगे ।
82. आय-कर अधिनियम की धारा 194 ठखक में, 1 जून, 2016 से,-
धारा 194 ठखक का संशोधन ।
(i) उपधारा (1 ) में , "खंड (23 चग ) में " शब्दों, कोष्ठकों, अंकों और अक्षरों के स्थान पर, "खंड (23 चग) के उपखंड ( क) में " शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर रखे जाएंगे ;
(ii) उपधारा (2) में, " खंड (23 चग ) में " " शब्दों, कोष्ठकों, अंकों" और अक्षरों के स्थान पर, "खंड (23 चग) के उपखंड (क) में" शब्द, कोष्ठक , अंक और अक्षर रखे जाएंगे ।
धारा 194 ठखख का संशोधन ।
83. आय- कर अधिनियम की धारा 194 ठखख में " उस पर दस प्रतिशत की दर से आय- कर की कटौती करेगा" शब्दों के स्थान पर निम्नलिखित 1 जून, 2016 से रखा जाएगा , अर्थात्:-
"उस पर आय- कर की कटौती,-
(i) जहां पाने वाला निवासी है, दस प्रतिशत की दर से की जाएगी;
(ii) जहां पाने वाला अनिवासी (जो कंपनी नहीं है) या कोई विदेशी कंपनी है, प्रवृत्त दरों पर की जाएगी:
44
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
परंतु जहां पाने वाला कोई अनिवासी (जो कंपनी नहीं है) या कोई विदेशी कंपनी है, ऐसी आय के संबंध में , जो अधिनियम के उपबंधों के अधीन कर से प्रभार्य नहीं है, कोई कटौती नहीं की जाएगी ।
84. आय-कर अधिनियम की धारा 194 ठखख के पश्चात्, निम्नलिखित धारा 1 जून , 2016 से अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात्:-
नई धारा 194ठखग का अन्तःस्थापन ।
प्रतिभूतिकरण न्यास में विनिधान के संबंध में आय ।
' 194ठखग. (1 ) जहां कोई आय धारा 115 नगक के नीचे स्पष्टीकरण के खंड (घ) में विनिर्दिष्ट प्रतिभूतिकरण न्यास में विनिधान के संबंध में विनिधानकर्ता को, जो निवासी है , संदेय है वहां संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति ऐसी आय को पाने वाले के खाते में जमा करते समय या उसका नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट देकर या किसी अन्य ढंग से संदाय करते समय इनमें से जो भी पूर्वतर हो , उस पर-
से; (i ) यदि पाने वाला व्यष्टि या कोई हिन्दू अविभक्त कुटुंब है, तो दस प्रतिशत की दर
( ii) यदि पाने वाला कोई अन्य व्यक्ति है तब तीस प्रतिशत की दर से ,
आय- कर की कटौती करेगा ।
(2) जहां कोई आय धारा 115 नगक के नीचे स्पष्टीकरण के खंड ( घ ) में विनिर्दिष्ट प्रतिभूतिकरण न्यास में किसी विनिधान के संबंध में किसी विनिधानकर्ता को, जो अनिवासी (जो 'कंपनी नहीं है) या कोई विदेशी कंपनी है, संदेय है, वहां संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति, पाने वाले के खाते में ऐसी आय को जमा करते समय या उसका नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट देकर या किसी अन्य ढंग से संदाय करते समय इनमें से जो भी पूर्वतर हो , उस पर प्रवृत्त दरों पर आय- कर की कटौती करेगा ।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(क) "विनिधानकर्ता" का वही अर्थ होगा जो धारा 115 नगक के नीचे स्पष्टीकरण के खंड (क) में उसका है;
(ख) जहां यथापूर्वोक्त किसी आय को ऐसे किसी खाते में , चाहे वह " उचंत खाते " के नाम से या किसी अन्य नाम से ज्ञात हो , ऐसी आय का संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति की लेखा बहियों में जमा किया जाता है वहां ऐसे जमा किए जाने को पाने वाले के खाते में उस आय का जमा किया जाना समझा जाएगा और इस धारा के उपबंध तद्नुसार लागू होंगे । '।
धारा 197 का संशोधन।
85. आय- कर अधिनियम की धारा 197 की उपधारा (1 ) में, " धारा 194ठक" शब्द, अंकों और अक्षरों के पश्चात्, "धारा 194 ठखख , धारा 194 ठखग " शब्द, अंक और अक्षर 1 जून, 2016 से अंतःस्थापित किए जाएंगे ।
86. आय-कर अधिनियम की धारा 197 क में , 1 जून , 2016 से,-
धारा 197 क का संशोधन ।
(क) उपधारा ( 1 क) में , " धारा 194 घक " शब्द, अंकों और अक्षरों के पश्चात्, दोनों स्थानों पर, जहां वे आते हैं, " या धारा 194 झ " शब्द, अंक और अक्षर अंतःस्थापित किए जाएंगे;
(ख) उपधारा (1 ग) में , " धारा 194 डङ " शब्द, अंकों और अक्षरों के पश्चात्, दोनों स्थानों पर, जहां वे आते हैं, "या धारा 194 झ " शब्द, अंक और अक्षर अंतःस्थापित किए जाएंगे ।
धारा 206 कक का संशोधन ।
87. आय- कर अधिनियम की धारा 206 कक की उपधारा (7) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा 1 जून , 2016 से रखी जाएगी , अर्थात्:-
" (7) इस धारा के उपबंध ,-
(i ) धारा 194ठग में यथानिर्दिष्ट दीर्घकालिक बंधपत्रों पर ब्याज के संदाय; और
(ii) ऐसी शर्तों के अधीन , जो विहित की जाएं , किसी अन्य संदाय ,
की बाबत किसी अनिवासी , जो कंपनी नहीं है, या किसी विदेशी कंपनी को लागू नहीं होंगे ।" ।
45
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1 क]
88. आय- कर अधिनियम की धारा 206 ग में , 1 जून , 2016 से ,-
धारा 206 ग का संशोधन ।
(i ) उपधारा (1 घ) में, -
(अ) "या आभूषण" शब्दों के पश्चात् " या किसी अन्य माल ( सोना- चांदी या आभूषण से भिन्न) या उपलब्ध कराई गई किसी सेवा " शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे;
(आ) खंड ( ii) में , " रुपए " शब्दों के स्थान पर, " रुपए से अधिक होता है; या " शब्द रखे
जाएंगे;
(इ) खंड ( ii ) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
" ( iii) ऐसे माल से भिन्न कोई माल , जो खंड ( i) और खंड ( ii ) में निर्दिष्ट है या किसी सेवा के लिए, जो दो लाख रुपए से अधिक है :
परंतु इस उपधारा के अधीन किसी ऐसी रकम पर स्रोत पर कर का संग्रहण नहीं किया जाएगा, जिस पर अध्याय 17 ख के अधीन संदायकर्ता द्वारा कर की कटौती की गई है ।";
(ii) उपधारा ( 1 घ) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधाराएं अंतःस्थापित की जांएगी, अर्थात्:
" (1 ङ) किन्हीं माल (सोना- चांदी और आभूषण से भिन्न) के विक्रय या उपलब्ध कराई गई किसी सेवा के संबंध में उपधारा (1 घ) में अंतर्विष्ट कोई बात ऐसे क्रेताओं के किसी वर्ग को लागू नहीं होगी जो ऐसी शर्तों को पूरा करते हैं जो विहित की जाएं ।
(1 च) प्रत्येक व्यक्ति, जो विक्रेता होते हुए दस लाख रुपए से अधिक मूल्य के किसी मोटर यान के विक्रय के लिए प्रतिफल के रूप में कोई रकम प्राप्त करता है , ऐसी रकम की प्राप्ति के समय , विक्रय प्रतिफल के एक प्रतिशत की राशि के बराबर क्रेता से ऐसी रकम का आय-कर के रूप में संग्रहण करेगा । " ;
(iii) उपधारा ( 11 ) के पश्चात् स्पष्टीकरण में ,-
(अ) खंड (कक) के उपखंड (ii) में, " उपधारा ( 1 घ) " शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर के पश्चात् "या उपधारा ( 1 च) " शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर अंतःस्थापित किए जाएंगे;
(आ) खंड (ग) में , " विक्रय किया जाता है" शब्दों के पश्चात् "या उपधारा ( 1 घ) में निर्दिष्ट सेवाएं प्रदान की जाती हैं " शब्द, कोष्ठक और अक्षर रखे जाएंगे ।
धारा 211 का संशोधन।
89. आय-कर अधिनियम की धारा 211 में, उपधारा (1 ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा 1 जून , 2016 से रखी जाएगी , अर्थात्: -
" (1 ) चालू आय पर ऐसा अग्रिम कर जो धारा 209 में अधिकथित रीति से परिकलित किया जाता है-
(क) खंड (ख) में निर्दिष्ट निर्धारिती से भिन्न उन सभी निर्धारितियों द्वारा जो उसका संदाय करने के लिए दायी हैं, प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान चार किस्तों में संदेय होगा और प्रत्येक किस्त की नियत तारीख और ऐसी किस्त की रकम वह होगी जो नीचे की सारणी में विनिर्दिष्ट है:
सारणी
संदेय रकम
किस्त की नियत तारीख
ऐसे अग्रिम कर के पंद्रह प्रतिशत से अन्यून ।
15 जून को या उसके पूर्व
15 सितंबर को या उसके पूर्व ऐसे अग्रिम कर के पैंतालीस प्रतिशत से अन्यून, जो पूर्वतर किस्त में संदत्त रकम को, यदि कोई हो , घटाकर आए ।
15 दिसंबर को या उसके पूर्व अग्रिम कर के पचहत्तर प्रतिशत से अन्यून , जो पूर्वतर किस्त या किस्तों में संदत्त रकम को , यदि कोई हो , घटाकर आए ।
15 मार्च को या उसके पूर्व
ऐसे अग्रिम कर की संपूर्ण रकम , जो पूर्वतर किस्त या किस्तों में संदत्त रकम को, यदि कोई हो , घटाकर आए;
46
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(ख) धारा 44कघ में निर्दिष्ट किसी पात्र कारबार के संबंध में किसी पात्र निर्धारिती द्वारा प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान , 15 मार्च या उसके पूर्व , ऐसे अग्रिम कर की संपूर्ण सीमा तक संदेय होगा :
परंतु इस अधिनियम के सभी प्रयोजनों के लिए 31 मार्च को या उसके पूर्व अग्रिम कर के रूप में संदत्त किसी रकम को भी उस दिन को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के दौरान संदत्त अग्रिम कर माना जाएगा। " ।
धारा 220 का संशोधन ।
90. आय- कर अधिनियम की धारा 220 की उपधारा (2 क) में, खंड ( iii) के पश्चात्, निम्नलिखित परंतुक 1 जून , 2016 से अंतःस्थापित किए जाएंगे , अर्थात्:-
" परंतु निर्धारिती के आवेदन को पूर्णतः या भागतः मंजूर या नामंजूर करने वाला आदेश उस मास के अंत से, जिसमें आवेदन प्राप्त हुआ है, बारह मास की अवधि के भीतर पारित किया जाएगा :
परंतु यह और कि आवेदन को पूर्णतः या भागतः नामंजूर करने वाला कोई भी आदेश तब तक पारित नहीं किया जाएगा , जब तक निर्धारिती को सुनवाई का कोई अवसर न दे दिया गया हो :
परंतु यह भी कि जहां कोई आवेदन 1 जून , 2016 को लंबित है, वहां आदेश 31 मई , 2017 को या उससे पहले पारित किया जाएगा ।" ।
91. आय- कर अधिनियम की धारा 234 ग की उपधारा ( 1) में, 1 जून , 2016 से ,-
धारा 234 ग का संशोधन।
(i ) खंड (क) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड रखा जाएगा , अर्थात्:-
" (क) धारा 44कघ में निर्दिष्ट पात्र कारबार के संबंध में किसी पात्र निर्धारिती से भिन्न कोई निर्धारिती जो धारा 208 के अधीन अग्रिम कर का संदाय करने का दायी है ऐसे कर का संदाय करने में असफल रहता है, या-
(i) निर्धारिती द्वारा अपनी चालू आय पर 15 जून को या उसके पूर्व संदत्त अग्रिम कर, विवरणी में दी गई आय पर देय कर के पन्द्रह प्रतिशत से कम है अथवा 15 सितंबर को या उसके पूर्व संदत्त ऐसे अग्रिम कर की रकम , विवरणी में दी गई आय पर देय कर के पैंतालीस प्रतिशत से कम है अथवा 15 दिसंबर को या उसके पूर्व संदत्त ऐसे अग्रिम कर की रकम विवरणी में दी गई आय पर देय कर के पचहत्तर प्रतिशत से कम है वहां निर्धारिती, विवरणी में दी गई आय पर देय कर के , यथास्थिति , पन्द्रह प्रतिशत या पैंतालीस प्रतिशत या पचहत्तर प्रतिशत से कम पड़ने वाली रकम पर तीन मास की अवधि के लिए एक प्रतिशत प्रतिमास की दर से साधारण ब्याज का संदाय करने का दायी होगा;
(ii ) निर्धारिती द्वारा अपनी चालू आय पर 15 मार्च को या उसके पूर्व संदत्त अग्रिम कर, विवरणी में दी गई आय पर देय कर से कम है वहां निर्धारिती विवरणी में दी गई आय पर देय कर की कम पड़ने वाली रकम पर एक प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज का संदाय करने का दायी होगा :
परंतु यदि निर्धारिती द्वारा अपनी चालू आय पर 15 जून या 15 सितंबर को या उसके पूर्व संदत्त अग्रिम कर विवरणी में दी गई आय पर देय कर से , यथास्थिति, बारह प्रतिशत या छत्तीस प्रतिशत से कम नहीं है तो वह उन तारीखों को कम पड़ने वाली रकम पर किसी ब्याज का संदाय करने का दायी नहीं होगा ; " ;
(ii) खंड (ख ) में, " कंपनी से भिन्न, ऐसा निर्धारिती " शब्दों से आरंभ होने वाले और "कम पड़ने वाली रकम पर एक प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज का संदाय करने का दायी होगा " शब्दों पर समाप्त होने वाले भाग के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्: -
"धारा 44 कघ में निर्दिष्ट पात्र कारबार के संबंध में ऐसा कोई पात्र निर्धारिती, जो धारा 208 के अधीन अग्रिम कर का संदाय करने का दायी है ऐसे कर का संदाय करने में असफल रहता है या निर्धारिती द्वारा अपनी चालू आय पर 15 मार्च को या उसके पूर्व संदत्त अग्रिम कर , विवरणी में दी गई आय पर देय कर से कम है वहां निर्धारिती विवरणी में दी गई भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
47
आय पर देय कर की कम पड़ने वाली रकम पर एक प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज का संदाय करने का दायी होगा : ";
(iii) खण्ड (ख) के नीचे पहले परंतुक में,-
(1) खंड (ख) में , " धारा 2 " शब्द और अंक के स्थान पर, " धारा 2 ; या " शब्द और अंक रखे जाएंगे;
(II) खंड (ख) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
'(ग) "कारबार या वृत्ति से लाभ और अभिलाभ " शीर्ष के अधीन उन मामलों में आय जहां आय उक्त शीर्ष के अधीन पहली बार प्रोद्भूत या उद्भूत होती है, ' ;
( III ) दीर्घ पंक्ति में " या खंड ( ख) " शब्दों, कोष्ठकों और अक्षर के स्थान पर, "या खंड (ख) या खंड ( ग) " शब्द, कोष्ठक और अक्षर रखे जाएंगे ।
92. आय-कर अधिनियम की धारा 244 क में , 1 जून, 2016 से ,-
धारा 244क का संशोधन।
(अ) उपधारा (1 ) के खंड (क) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड रखे जाएंगे , अर्थात्:-
" (क) जहां प्रतिदाय , निर्धारण वर्ष के ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान धारा 206 ग के अधीन स्रोत पर संगृहीत किया जाता है या धारा 199 के अधीन अग्रिम कर के रूप में संदत्त या संदत्त किया गया समझा जाता है , वहां ऐसा ब्याज निम्नलिखित अवधि में सम्मिलित प्रत्येक मास या उसके किसी भाग के लिए आधे प्रतिशत की दर से परिकलित किया जाएगाः-
(i ) यदि आय की विवरणी धारा 139 की उपधारा ( 1 ) के अधीन विनिर्दिष्ट तारीख को या उसके पूर्व प्रस्तुत की जाती है तो निर्धारण वर्ष के 1 अप्रैल से उस तारीख
तक जब प्रतिदाय अनुदत्त किया जाता है ; या
(ii ) उपखंड (1) के अंतर्गत न आने वाले मामले में आय की विवरणी प्रस्तुत किए जाने की तारीख से उस तारीख तक जब प्रतिदाय अनुदत्त किया जाता है;
(कक) जहां प्रतिदाय धारा 140 क के अधीन संदत्त किसी कर में से है, वहां ऐसा ब्याज, आय की विवरणी देने या कर के संदाय की तारीख , जो भी पश्चात्वर्ती हो , से उस तारीख तक, जिसको प्रतिदाय मंजूर किया गया है, अवधि में समाविष्ट प्रत्येक मास या मास के किसी भाग के लिए , आधे प्रतिशत की दर से परिकलित किया जाएगा:
परंतु यदि प्रतिदाय की रकम धारा 143 की उपधारा (1 ) के अधीन या नियमित निर्धारण पर यथा अवधारित कर के दस प्रतिशत से कम है तो खंड (क) या खंड ( कक) के अधीन कोई ब्याज संदेय नहीं होगा;" ;
(आ) उपधारा (1 ) के पश्चात्, 1 जून , 2016 से निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:-
" (1 क) उस दशा में जहां प्रतिदाय नया निर्धारण या पुनर्निर्धारण करने से अन्यथा पूर्णतः या भागतः धारा 250 या धारा 254 या धारा 260 या धारा 262 या धारा 263 या धारा 264 के अधीन किसी आदेश को प्रभावी करने के परिणामस्वरूप उद्भूत होता है, वहां निर्धारिती उपधारा (1 ) के अधीन संदेय ब्याज के अतिरिक्त , धारा 153 की उपधारा (5) के अधीन अनुज्ञात अवधि के अवसान की तारीख की पश्चात्वर्ती तारीख से , उस तारीख तक जिसको प्रतिदाय मंजूर किया जाता है , आरंभ होने वाली अवधि के लिए तीन प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर पर परिकलित ऐसे प्रतिदाय की रकम पर अतिरिक्त ब्याज प्राप्त करने का हकदार होगा ।";
(इ) उपधारा (2 ) में , "ब्याज संदेय है" शब्दों से पहले , "उपधारा (1 ) या उपधारा (1 क) के अधीन" शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर अंतःस्थापित किए जाएंगे ।
93. आय- कर अधिनियम की धारा 249 की उपधारा (2) के खंड (ख) में, 1 अप्रैल, 2017 से , धारा 249 का संशोधन ।
(i ) परंतुक के अंत में " अपवर्जित की जाएगी; अथवा " शब्दों के स्थान पर, "अपवर्जित की जाएगी" शब्द रखे जाएंगे ;
48
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
( ii) परंतुक के पश्चात, निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:
"परंतु यह और कि जहां आवेदन धारा 270 कक की उपधारा ( 1 ) के अधीन किया गया है वहां उस तारीख से, जिसको आवेदन किया जाता है , से आरंभ होकर, उस तारीख तक जिसको आवेदन नामंजूर किया जाने वाला आदेश निर्धारिती पर तामील किया जाता है, की अवधि अपवर्जित की जाएगी , या " ।
94. आय-कर अधिनियम की धारा 252 में, 1 जून , 2016 से,-
धारा 252 का संशोधन।
(क) उपधारा (3) के खंड (ख) में , "ज्येष्ठ उपाध्यक्ष को या " शब्दों का लोप किया जाएगा;
(ख) उपधारा (4क) का लोप किया जाएगा;
(ग) उपधारा (5) में, "ज्येष्ठ उपाध्यक्ष को या" शब्दों का लोप किया जाएगा।
95. आय- कर अधिनियम की धारा 253 में,-
धारा 253 का संशोधन ।
(अ) उपधारा (1 ) में, 1 अप्रैल , 2017 से ,-
(i ) खंड (क) में , "धारा 250 " शब्द और अंकों के पश्चात् " धारा 270 क" शब्द, अंक और अक्षर अंतःस्थापित किए जाएंगे ;
(ii) खंड (ग) में , " या धारा 263 के अधीन " शब्दों और अंकों के पश्चात् "या धारा 270क के अधीन " शब्द, अंक और अक्षर अंतःस्थापित किए जाएंगे ;
(आ) 1 जून, 2016 से,-
(क) उपधारा (2क) और उपधारा (उक) का लोप किया जाएगा ;
(ख) उपधारा (4) के स्थान पर , निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी, अर्थात्:-
" (4) यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी या निर्धारिती , यह सूचना प्राप्त होने पर कि, आयुक्त (अपील) के आदेश के विरुद्ध उपधारा (1 ) या उपधारा (2) के अधीन अपील दूसरे पक्षकार द्वारा की गई है , इस बात के होते हुए भी कि उसके द्वारा ऐसे आदेश या उसके किसी भाग के विरुद्ध अपील न की गई हो , सूचना की प्राप्ति के तीस दिन के भीतर, आयुक्त (अपील ) के आदेश के किसी भाग के विरुद्ध विहित रीति में सत्यापित प्रत्याक्षेपों का एक ज्ञापन फाइल कर सकेगा और ऐसे ज्ञापन का निपटारा अपील अधिकरण द्वारा इस प्रकार किया जाएगा मानो वह उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट समय के भीतर प्रस्तुत की गई अपील हो ।" ;
(इ) उपधारा (6) में परंतुक के स्थान पर, निम्नलिखित परंतुक रखा जाएगा और इसे 1 जुलाई , 2012 से रखा गया समझा जाएगा , अर्थात्:-
"परंतु उपधारा (2) या उपधारा (2 क) में निर्दिष्ट किसी अपील जैसा कि वित्त अधिनियम , 2016 द्वारा इसके संशोधन के पूर्व था या उपधारा (4) में निर्दिष्ट प्रत्याक्षेपों के किसी ज्ञापन के मामले में कोई फीस संदेय नहीं होगी ।" ।
96. आय-कर अधिनियम की धारा 254 में, 1 जून, 2016 से,-
धारा 254 का संशोधन ।
(क) उपधारा (2) में " आदेश की तारीख से चार वर्ष " शब्दों के स्थान पर "उस मास के, जिसमें आदेश पारित किया गया था , अंत से छह मास " शब्द रखे जाएंगे ;
(ख) उपधारा (2क) में , " या उपधारा (2क) " शब्दों, कोष्ठकों, अंक और अक्षर का लोप किया जाएगा ।
धारा 255 का संशोधन ।
97. आय - कर अधिनियम की धारा 255 की उपधारा (3 ) में " पन्द्रह लाख रुपए " शब्दों के स्थान पर "पचास लाख रुपए " शब्द 1 जून , 2016 से रखे जाएंगे ।
भारत का राजपत्र असाधारण
49 अनुभाग 1क]
1988 का 4
नई धारा 270 क का अन्तःस्थापन ।
98. आय- कर अधिनियम की धारा 270 [ जैसी वह प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 की धारा 105 द्वारा उसके लोप से ठीक पूर्व विद्यमान थी] के पश्चात्, निम्नलिखित धारा 1 अप्रैल , 2017 से अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:-
आय की कम रिपोर्ट करने और मिथ्यारिपोर्ट करने के लिए शास्ति ।
'270क. (1 ) निर्धारण अधिकारी या आयुक्त (अपील) या प्रधान आयुक्त या आयुक्त इस अधिनियम के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों के दौरान यह निदेश दे सकेगा कि ऐसा कोई व्यक्ति, जिसने अपनी आय की न्यून रिपोर्ट की है, कम रिपोर्ट की गई आय पर, कर के लिए अतिरिक्त शास्ति, यदि कोई हो , का संदाय करने का दायी होगा ।
(2) किसी व्यक्ति के बारे में उसकी आय को कम रिपोर्ट किया गया तब समझा जाएगा जब-
(क) निर्धारित की गई आय धारा 143 की उपधारा ( 1 ) के खंड (क) के अधीन
प्रक्रियागत विवरणी में अवधारित आय से अधिक है;
(ख) जहां आय की विवरणी प्रस्तुत नहीं की गई है, वहां निर्धारित आय , उस अधिकतम रकम से, जो कर से प्रभार्य नहीं है , से अधिक है;
(ग) पुनर्निर्धारित की गई आय , ऐसे पुनः निर्धारण से ठीक पूर्व निर्धारित या पुनर्निर्धारित आय से अधिक है;
(घ) यथास्थिति, धारा 115 ञख या धारा 115 ञग के उपबंधों के अनुसार निर्धारित या पुनर्निर्धारित समझी गई कुल आय की रकम, धारा 143 की उपधारा (1 ) के खंड (क) के अधीन प्रक्रियागत विवरणी में अवधारित समझी गई कुल आय से अधिक है;
(ङ) जहां आय की कोई विवरणी फाइल नहीं की गई है , वहां धारा 115 ञख या धारा 115ञग के उपबंधों के अनुसार निर्धारित समझी गई कुल आय की रकम, उस अधिकतम रकम से, जो कर से प्रभार्य नहीं है , अधिक है;
(च) यथास्थिति, धारा 115 ञख या धारा 115ञग के उपबंधों के अनुसार पुनर्निर्धारित समझी गई कुल आय की रकम , ऐसे पुनर्निर्धारण के ठीक पूर्व निर्धारित या पुनर्निर्धारित समझी गई कुल आय से अधिक है;
(छ) निर्धारित या पुनर्निर्धारित आय का प्रभाव हानि कम करने या ऐसी हानि को आय में संपरिवर्तित करने का है ।
(3) कम रिपोर्ट की गई आय की रकम,-
(i) उस दशा में जहां आय का निर्धारण पहली बार किया गया है,-
(क) यदि विवरणी दे दी गई है, तो निर्धारित आय की रकम और धारा 143 की उपधारा (1 ) के खंड (क) के अधीन अवधारित आय की रकम का अन्तर;
(ख) उस दशा में जहां कोई विवरणी नहीं दी गई है,-
(अ) किसी कंपनी , फर्म या स्थानीय प्राधिकारी की दशा में निर्धारित आय की रकम; और
(आ) मद (अ) के अन्तर्गत नहीं होने की दशा में, निर्धारित आय की रकम और ऐसी अधिकतम रकम जो कर से प्रभार्य नहीं है , का अन्तर;
(ii) किसी अन्य दशा में पुनः निर्धारित या पुनः संगणित आय की रकम और किसी पूर्ववर्ती आदेश में निर्धारित , पुनः निर्धारित या पुनः संगणित आय की रकम का अन्तर,
होगी
परंतु उस दशा में , जहां कम रिपोर्ट की गई आय धारा 115 ञख या धारा 115ञग के उपबंधों के अनुसार समझी गई कुल आय के अवधारण से उद्भूत होती है, वहां कुल कम रिपोर्ट की गई आय की रकम निम्नलिखित सूत्र के अनुसार अवधारित की जाएगी- 50
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[भाग 2-
(क-ख) + (ग -घ)
जहां,-
क = धारा 115ञख या धारा 115ञग ( जिसे इसमें साधारण उपबंध कहा गया है) में अंतर्विष्ट उपबंधों से भिन्न उपबंधों के अनुसार कुल निर्धारित आय;
ख = कुल आय , जो कर से तब प्रभार्य होती यदि साधारण उपबंधों के अनुसार निर्धारित कुल आय में से ऐसी कम रिपोर्ट की गई आय की रकम को घटा दिया जाता;
ग = धारा 115 ञख या धारा 115 ञग में अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसार निर्धारित
कुल आय;
घ = कुल आय , जो कर से तब प्रभार्य होती यदि धारा 115ञख या धारा 115 ञग में अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसार निर्धारित कुल आय में से कम रिपोर्ट की गई आय की रकम को घटा दिया जाता :
परंतु यह और कि जहां किसी मुद्दे पर कम रिपोर्ट की गई आय की रकम को धारा 115 ञख या धारा 115ञग में अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन तथा साधारण उपबंधों, दोनों के अधीन माना गया है , वहां ऐसी रकम को मद घ के अधीन रकम का अवधारण करते समय निर्धारित कुल आय में से नहीं घटाया जाएगा ।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(क) " पूर्ववर्ती आदेश " से उस आदेश के तुरंत पूर्व का ऐसा आदेश अभिप्रेत है जिसके अनुक्रम के दौरान , उपधारा ( 1 ) के अधीन शास्ति आंरभ की गई है;
(ख) ऐसे किसी मामले में जहां निर्धारण या पुनर्निर्धारण का प्रभाव विवरणी में घोषित हानि कम करने या उस हानि को आय में संपरिवर्तित करने का हो , तो कम रिपोर्ट की गई आय की रकम, दावा की गई हानि और निर्धारित या पुनर्निर्धारित , यथास्थिति, आय या हानि के बीच का अंतर होगी ।
(4) उपधारा (6) के उपबंधों के अधीन रहते हुए , जहां किसी निर्धारण वर्ष में किसी प्राप्ति, निक्षेप या विनिधान के स्रोत का, उस निर्धारण वर्ष , जिसमें ऐसी प्राप्ति, निक्षेप या विनिधान (जिसे इसमें इसके पश्चात् " पूर्ववर्ती वर्ष " कहा गया है) होता है, से पूर्व के किसी वर्ष में ऐसे व्यक्ति के निर्धारण में यथास्थिति, आय में जोड़ी जाने वाली या हानि की संगणना करते हुए घटाई जाने वाली रकम का दावा किया जाता है और ऐसे पूर्ववर्ती वर्ष के लिए कोई शास्ति उद्गृहीत नहीं की गई थी , तब कम रिपोर्ट की गई आय में, ऐसी रकम , जो ऐसी प्राप्ति , निक्षेप या विनिधान को पूरा करने के लिए पर्याप्त है, सम्मिलित होगी ।
(5) उपधारा (4) में निर्दिष्ट रकम , निम्नलिखित क्रम में पूर्ववर्ती वर्ष के लिए कम रिपोर्ट की गई आय की रकम समझी जाएगी-
(क) उस वर्ष से ठीक पूर्व पूर्ववर्ती वर्ष, जो प्रथम पूर्ववर्ती वर्ष है, जिसमें प्राप्ति, निक्षेप या विनिधान होता है; और
(ख) जहां प्रथम पूर्ववर्ती वर्ष में जोड़ी गई या घटाई गई रकम प्राप्ति, निक्षेप या विनिधान को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है वहां प्रथम पूर्ववर्ती वर्ष से ठीक पूर्ववर्ती वर्ष और इसी प्रकार से ।
(6) इस धारा के प्रयोजनों के लिए न्यून रिपोर्ट की गई आय में , निम्नलिखित को सम्मिलित नहीं किया जाएगा , अर्थात्ः-
(क) आय की ऐसी रकम , जिसके संबंध में निर्धारिती स्पष्टीकरण देता है और, यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी या आयुक्त (अपील) या आयुक्त या प्रधान आयुक्त का यह समाधान हो जाता है कि स्पष्टीकरण सद्भावी है और निर्धारिती ने दिए गए स्पष्टीकरण को साबित करने के लिए सभी तात्त्विक तथ्यों को प्रकट किया है;
51
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
(ख) किसी प्राक्कलन के आधार पर अवधारित कम रिपोर्ट की गई आय की रकम, यदि लेखे , यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी या आयुक्त (अपील) या आयुक्त या प्रधान आयुक्त के समाधानप्रद रूप में सही और पूर्ण है किंतु नियोजित की गई पद्धति ऐसी है कि आय की उसमें से समुचित रूप से कटौती नहीं की जा सकती;
(ग) किसी प्राक्कलन के आधार पर अवधारित कम रिपोर्ट की गई आय की रकम, यदि निर्धारिती ने , स्वप्रेरणा से उसी मुद्दे पर परिवर्धन या मोक न करने की कम रकम का प्राक्कलन किया है , अपनी आय की संगणना में ऐसी आय को सम्मिलित किया है और परिवर्धन या मोक न करने के सभी तात्त्विक तथ्यों का प्रकटन किया है ;
(घ) जहां निर्धारिती ने धारा 92 घ के अधीन यथा विहित जानकारी और दस्तावेजों को बनाए रखा था , वहां कीमत अंतरण निर्धारण अधिकारी द्वारा अवधारित सन्निकट कीमत के अनुरूप किए गए किसी परिवर्धन द्वारा व्यपदिष्ट कम रिपोर्ट की गई आय की रकम को अध्याय 10के अधीन अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार घोषित किया है और संव्यवहार से संबंधित सभी तात्त्विक तथ्यों को प्रकट किया है ; और
(ङ) धारा 271 ककख में निर्दिष्ट अप्रकटित आय की रकम ।
(7) उपधारा ( 1 ) में निर्दिष्ट शास्ति, कम रिपोर्ट की गई आय पर संदेय कर की रकम का पचास प्रतिशत के बराबर राशि होगी ।
(8) उपधारा (6) या उपधारा (7) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , जहां किसी व्यक्ति द्वारा आय की किसी मिथ्या रिपोर्ट किए जाने के परिणामस्वरूप आय कम रिपोर्ट की जाती है, वहां उपधारा ( 1 ) में निर्दिष्ट शास्ति कम रिपोर्ट की गई आय पर संदेय कर की रकम के दो सौ प्रतिशत के बराबर होगी ।
(9) उपधारा (8) में निर्दिष्ट आय की मिथ्या रिपोर्ट करने के मामले निम्नलिखित होंगे :-
(क) तथ्यों का दुर्व्यपदेशन या छिपाना;
(ख) लेखा बहियों में विनिधानों को अभिलिखित करने में असफलता;
(ग) ऐसे व्यय का दावा , जो किसी साक्ष्य द्वारा साबित नहीं है;
(घ) लेखा बहियों में किसी मिथ्या प्रविष्टि का अभिलेखन;
(ङ) लेखा बहियों में किसी ऐसी प्राप्ति को अभिलिखित न करना जिसका कुल आय पर प्रभाव है; और
(च) किसी अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार के रूप में समझे गए किसी संव्यवहार या किसी विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार, जिसको अध्याय 10 के उपबंध लागू होते हैं, की रिपोर्ट करने में असफलता ।
(10) कम रिपोर्ट की गई आय के संबंध में संदेय कर निम्नानुसार होगा-
(क) जहां आय की कोई विवरणी प्रस्तुत नहीं की गई है और आय का निर्धारण प्रथम बार किया गया है , कम रिपोर्ट की गई आय पर संगणित कर की रकम, जोकि ऐसी अधिकतम रकम, जो कर से प्रभार्य न हो , से अधिक है, मानो वह कुल आय थी;
(ख) जहां धारा 143 की उपधारा ( 1 ) के खंड (क) के अधीन अवधारित या पूर्ववर्ती आदेश में निर्धारित, पुनर्निर्धारित या पुनःसंगणित कुल आय कोई हानि है, कम रिपोर्ट की गई आय पर संगणित कर की रकम मानो वह कुल आय थी;
(ग) किसी अन्य मामले में निम्नलिखित सूत्र के अनुसार अवधारित
(एक्स-वाई)
जहां,-
एक्स = कम रिपोर्ट की गई आय पर संगणित कर की रकम , जो कि धारा 143 की उपधारा ( 1 ) के खंड (क) के अधीन अवधारित कुल आय या किसी पूर्ववर्ती आदेश में निर्धारित , पुनर्निर्धारित या पुनःसंगणित कुल आय से अधिक है मानो वह कुल आय थी; और
वाई = धारा 143 की उपधारा ( 1 ) के खंड (क) के अधीन अवधारित कुल आय या किसी पूर्ववर्ती आदेश में निर्धारित , पुननिर्धारित या पुनःसंगणित कुल आय पर संगणित कर की रकम ।
(11 ) रकम का कोई परिवर्धन या मोक न किया जाना शास्ति के अधिरोपण के लिए आधार होगा, यदि ऐसे परिवर्धन या मोक न किए जाने से उसी या किसी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए व्यक्ति के मामले में शास्ति के अधिरोपण का आधार बनाया गया है ।
52
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(12) उपधारा ( 1 ) में निर्दिष्ट शास्ति, यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी , आयुक्त (अपील), आयुक्त या प्रधान आयुक्त द्वारा लिखित में आदेश द्वारा अधिरोपित की जाएगी । ' ।
नई धारा 270कक का अन्तःस्थापन ।
99. आय-कर अधिनियम की इस प्रकार अंतःस्थापित धारा 270 क के पश्चात् निम्नलिखित धारा 1 अप्रैल , 2017 से अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात्:-
शास्तिआदि के अधिरोपण से उन्मुक्ति।
" 270कक. (1 ) कोई निर्धारिती धारा 270 क के अधीन शास्ति के अधिरोपण और धारा 276ग या धारा 276 गग के अधीन कार्यवाहियों के आरंभ किए जाने से उन्मुक्ति अनुदत्त करने के लिए निर्धारण अधिकारी को आवेदन कर सकेगा , यदि वह निम्नलिखित शर्तों को पूरा करता है, अर्थात्ः-
(क) यथास्थिति, धारा 143 की उपधारा (3) या धारा 147 के अधीन निर्धारण या पुनः निर्धारण के अनुसार संदेय कर और ब्याज का ऐसी मांग की सूचना में विनिर्दिष्ट समय के भीतर संदाय कर दिया गया है; और
(ख) उपधारा (1 ) में निर्दिष्ट आदेश के विरुद्ध कोई अपील फाइल नहीं की गई है ।
(2) उपधारा (1 ) में निर्दिष्ट कोई आवेदन उस मास की समाप्ति से एक मास के भीतर किया जाएगा जिसमें उपधारा (1 ) के खंड (क) में निर्दिष्ट आदेश प्राप्त किया गया था और आवेदन ऐसे प्ररूप में किया जाएगा तथा ऐसी रीति में सत्यापित किया जाएगा, जो विहित की जाए ।
(3) निर्धारण अधिकारी , उपधारा (1 ) में विनिर्दिष्ट शर्तों को पूरा करने के अधीन रहते हुए और धारा 249 की उपधारा (2) के खंड (ख ) में यथाविनिर्दिष्ट, अपील फाइल करने की अवधि के अवसान के पश्चात् धारा 270 क के अधीन शास्ति के अधिरोपण और कार्यवाहियों के आरंभ करने से धारा 276ग या धारा 276 गग के अधीन उन्मुक्ति वहां अनुदत्त करेगा , जहां शास्ति की कार्यवाहियां उक्त धारा 270 क की उपधारा (9) के अधीन आरम्भ न की गई हो ।
(4) निर्धारण अधिकारी उस मास की समाप्ति से जिसमें उपधारा ( 1 ) के अधीन आवेदन प्राप्त किया गया था, एक मास की अवधि के भीतर ऐसे आवेदन को स्वीकार या अस्वीकार करने का आदेश पारित करेगा :
परंतु आवेदन को अस्वीकार करने का कोई आदेश निर्धारिती को सुने जाने का अवसर प्रदान किए बिना, पारित नहीं किया जाएगा ।
(5) उपधारा (4) के अधीन किया गया आदेश अंतिम होगा ।
(6) उन मामलों में , जहां उपधारा (4) के अधीन कोई आदेश आवेदन को स्वीकार करने के लिए किया गया है, वहां धारा 246 क के अधीन कोई अपील या धारा 264 के अधीन पुनरीक्षण के लिए कोई आवेदन उपधारा ( 1 ) के खंड (क) में निर्दिष्ट निर्धारण या पुनर्निर्धारण के आदेश के विरुद्ध ग्राह्य नहीं होगा १" ।
धारा 271 का संशोधन ।
100. आय - कर अधिनियम की धारा 271 की उपधारा (6) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा , 1 अप्रैल ,. 2017 से, अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात्: -
" (7) इस धारा के उपबंध , 1 अप्रैल, 2017 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए किसी निर्धारण को या उसके संबंध में लागू नहीं होंगे । " ।
धारा 271 क का संशोधन।
101. आय- कर अधिनियम की धारा 271 क में, " धारा 271 " शब्द और अंकों के पूर्व, " धारा 270 क या" शब्द, अंक और अक्षर, 1 अप्रैल, 2017 से, अंतःस्थापित किए जाएंगे ।
धारा 271 कक का संशोधन ।
102. आय - कर अधिनियम में , 1 अप्रैल , 2017 से धारा 271 कक को उसकी उपधारा (1 ) के रूप में पुनः संख्यांकित किया जाएगा , और-
(क) इस प्रकार पुनः संख्यांकित उपधारा (1 ) के आरंभिक भाग में " धारा 271 " शब्द और अंकों के पूर्व, " धारा 270 क या " शब्द, अंक और अक्षर अंतःस्थापित किए जाएंगे ;
(ख) इस प्रकार पुनः संख्यांकित उपधारा (1 ) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:-
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53 अनुभाग 1क]
" (2 ) यदि कोई व्यक्ति धारा 92 घ की उपधारा (4) के अधीन यथा अपेक्षित जानकारी और दस्तावेज देने में असफल रहता है तो उक्त उपधारा में निर्दिष्ट विहित आय- कर प्राधिकारी यह निदेश दे सकेगा कि ऐसा व्यक्ति शास्ति के रूप में पांच लाख रुपए की राशि का संदाय करेगा " ।
103. आय- कर अधिनियम की धारा 271 ककख में 1 अप्रैल , 2017 से ,-
धारा 271 ककख का संशोधन ।
(क) उपधारा (1 ) के खंड (ग) में, " तीस प्रतिशत से कम नहीं होगी किंतु नब्बे प्रतिशत से अधिक नहीं " शब्दों के स्थान पर, " साठ प्रतिशत की दर से संगणित " शब्द रखे जाएंगे;
(ख) उपधारा (2 ) में , " धारा 271 " शब्द और अंकों के पूर्व , "धारा 270 क या " शब्द, अक्षर और अंक, अंतःस्थापित किए जाएंगे ।
104. आय- कर अधिनियम की धारा 271 छक के पश्चात् निम्नलिखित धारा 1 अप्रैल , 2017 से नई धारा 271 छख का अन्तःस्थापन।
अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात् :-
"271 छख. (1 ) यदि धारा 286 में निर्दिष्ट कोई रिपोर्ट करने वाला अस्तित्व , जिससे रिपोर्ट किए धारा 286 के अधीन रिपोर्ट देने में असफलता या गलत रिपोर्ट देने के लिए शास्ति ।
जाने वाले लेखांकन वर्ष के संबंध में उक्त धारा की उपधारा (2) में निर्दिष्ट रिपोर्ट दिया जाना अपेक्षित है, ऐसा करने में असफल रहता है , तो उस धारा के अधीन विहित प्राधिकारी ( जिसे इसमें इसके पश्चात् विहित प्राधिकारी कहा गया है) , यह निदेश दे सकेगा कि ऐसा अस्तित्व शास्ति के रूप में निम्नलिखित राशि का संदाय करेगा,
(क) प्रत्येक दिन, जिसके दौरान असफलता बनी रहती है, के लिए पांच हजार रुपए ,
यदि असफलता की अवधि एक मास से अधिक नहीं है; या
(ख) प्रत्येक दिन के लिए पन्द्रह हजार रुपए जब असफलता एक मास की अवधि के आगे बनी रहती है ।
(2) यदि धारा 286 में निर्दिष्ट कोई रिपोर्टिंग अस्तित्व, उक्त धारा की उपधारा (6) के अधीन अनुज्ञात अवधि के भीतर सूचना और दस्तावेज प्रस्तुत करने में असफल रहता है, तो विहित प्राधिकारी , निदेश दे सकेगा कि ऐसा अस्तित्व प्रत्येक दिन के लिए , जिसके दौरान असफलता बनी रहती है , जो उस दिन से जब सूचना और दस्तावेज प्रस्तुत करने की अवधि समाप्त हो , के तुरंत पश्चात् के दिन से प्रारंभ होगी , शास्ति के रूप में पांच हजार रुपए की राशि का संदाय करेगा ।
(3) यदि उपधारा (1) या उपधारा (2) में निर्दिष्ट असफलता, यथास्थिति , उपधारा ( 1 ) या
उपधारा (2) के अधीन शास्ति का संदाय करने के लिए आदेश के अस्तित्व पर तामील होने के पश्चात् जारी रहती है, तो उपधारा (1 ) या उपधारा (2) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी विहित प्राधिकारी निदेश दे सकेगा कि ऐसा अस्तित्व प्रत्येक दिन के लिए जब ऐसे आदेश की तामील की तारीख से आंरभ होने वाली, ऐसी असफलता बनी रहती है, शास्ति के रूप में पचास हजार रुपए की राशि का संदाय करेगा ।
(4) जहां धारा 286 में निर्दिष्ट कोई रिपोर्टिंग अस्तित्व , उक्त धारा की उपधारा (2 ) के अनुसार दी गई रिपोर्ट में गलत सूचना उपलब्ध कराता है और जहां-
(क) अस्तित्व के पास रिपोर्ट फाइल करते समय गलती का ज्ञान हो किंतु वह विहित
प्राधिकारी को सूचित करने में असफल रहता है ; या
(ख) अस्तित्व को रिपोर्ट प्रस्तुत कर दिए जाने के पश्चात् गलती का पता लगे और वह विहित प्राधिकारी को सूचित करने में और ऐसा पता चलने के पन्द्रह दिनों के भीतर सही रिपोर्ट फाइल करने में असफल रहता है; या
(ग) अस्तित्व , धारा 286 की उपधारा (6) के अधीन जारी की गई किसी सूचना के उत्तर में गलत सूचना या दस्तावेज प्रस्तुत करता है, 54
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
तो विहित प्राधिकारी , आदेश द्वारा , यह निदेश दे सकेगा कि ऐसा व्यक्ति शास्ति के रूप में पांच लाख रुपए की राशि का संदाय करेगा ।" ।
105. आय- कर अधिनियम की धारा 272 क में 1 अप्रैल , 2017 से ,-
धारा 272 क का संशोधन ।
(i) उपधारा (1 ) में,-
(क) खंड (ग) में , "लोप करेगा " शब्दों के स्थान पर, "लोप करेगा; या " शब्द रखे जाएंगे;
(ख) खंड ( ग) के पश्चात्, और दीर्घ पंक्ति से पूर्व निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
" (घ ) धारा 142 की उपधारा ( 1 ) या धारा 143 की उपधारा (2 ) के अधीन किसी सूचना का अनुपालन करने में असफल रहता है या धारा 142 की उपधारा (2क) के अधीन जारी किए गए किसी निदेश का अनुपालन करने में असफल रहता है, " ;
( ii) उपधारा ( 3) में खंड (क) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:- " (कक) उपधारा ( 1 ) के खंड ( घ) के अधीन आने वाले मामले की दशा में, आय-कर प्राधिकारी द्वारा जिसने उसमें निर्दिष्ट सूचना या निदेश जारी किया था; " ।
106. आय- कर अधिनियम की धारा 273 क में ,-
धारा 273 क का संशोधन।
(i) 1 अप्रैल, 2017 से ,
(क) उपधारा (1 ) में,
(I) खंड ( ii ) में, "धारा 271 " शब्द और अंकों के पूर्व , " धारा 270 क या " शब्द, अंक और अक्षर अंतःस्थापित किए जाएंगे;
(II) स्पष्टीकरण में " धारा 271 " शब्दों और अंकों के पूर्व " धारा 270 क या" शब्द, अंक और अक्षर अंतःस्थापित किए जाएंगे;
(ख) उपधारा (2) के खंड (ख) में " धारा 271 " शब्द और अंकों के पूर्व " धारा 270क या " शब्द, अंक और अक्षर अंतःस्थापित किए जाएंगे ;
(ii) उपधारा (4) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधारा 1 जून , 2016 से अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात्:-
" (4क) आवेदन को पूर्णतः या भागतः मंजूर या नामंजूर करने वाला उपधारा (4) के अधीन आदेश , उस मास के अंत से , जिसमें प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा उक्त उपधारा के अधीन आवेदन प्राप्त किया गया है , बारह मास की अवधि के भीतर पारित किया जाएगा :
परंतु आवेदन को पूर्णतः या भागतः नामंजूर करने वाला कोई भी आदेश तब तक पारित नहीं किया जाएगा, जब तक निर्धारिती को सुनवाई का कोई अवसर न दे दिया गया हो :
परंतु यह और कि जहां कोई आवेदन 1 जून , 2016 को लंबित है , वहां आदेश 31 मई, 2017 को या उससे पूर्व पारित किया जाएगा ।"।
धारा 273 कक का संशोधन।
107. आय-कर अधिनियम की धारा 273 कक की उपधारा (3 ) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधारा 1 जून, 2016 से अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:-
"(3क) आवेदन को पूर्णतः या भागतः मंजूर या नामंजूर करने वाला उपधारा (3) के अधीन आदेश , उस मास के अंत से, जिसमें प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा उक्त उपधारा के अधीन आवेदन प्राप्त किया गया है, बारह मास की अवधि के भीतर पारित किया जाएगा :
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55 अनुभाग 1क]
परंतु आवेदन को पूर्णतः या भागतः नामंजूर करने वाला कोई भी आदेश तब तक पारित नहीं किया जाएगा, जब तक निर्धारिती को सुनवाई का कोई अवसर न दे दिया गया हो :
परंतु यह और कि जहां कोई आवेदन 1 जून, 2016 को लंबित है , वहां आदेश 31 मई , 2017 को या उससे पहले पारित किया जाएगा ।" ।
धारा 273ख का संशोधन ।
108. आय- कर अधिनियम की धारा 273 ख में , " धारा 271 छक " शब्द, अंकों और अक्षरों के पश्चात्, " धारा 271 छख " शब्द, अंक और अक्षर 1 अप्रैल, 2017 से रखे जाएंगे ।
109. आय- कर अधिनियम की धारा 276 ग में, 1 अप्रैल , 2017 से उपधारा ( 1 ) में,-
धारा 276 ग का संशोधन ।
(क) आरंभिक भाग में , "अपवंचन करने का प्रयास करेगा " शब्दों के पश्चात् "या अपनी आय की कम रिपोर्ट करता है " शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे;
(ख) खंड ( i ) में, "जहां वह रकम " शब्दों के पश्चात् " या कम रिपोर्ट की गई आय पर कर"
शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे ।
धारा 279 का संशोधन ।
110. आय- कर अधिनियम की धारा 279 की उपधारा ( 1 क) में, " धारा 271 " शब्द और अंकों के पूर्व " धारा 270क या " शब्द, अंक और अक्षर 1 अप्रैल , 2017 से अंतःस्थापित किए जाएंगे ।
111. आय- कर अधिनियम की धारा 281 ख में , 1 जून, 2016 से,-
धारा 281 ख का संशोधन।
(क) उपधारा ( 1 ) में, स्पष्टीकरण का लोप किया जाएगा;
(ख) उपधारा (2) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधाराएं अंतःस्थापित की जाएंगी , अर्थात्:-
' (3) जहां निर्धारिती उपधारा ( 1 ) के अधीन अनंतिम रूप से कुर्क की गई किसी संपत्ति के उचित बाजार मूल्य से अन्यून किसी रकम के लिए किसी अनुसूचित बैंक की गारंटी देता है, वहां निर्धारण अधिकारी , लिखित आदेश द्वारा , ऐसी कुर्की का प्रतिसंहरण कर सकेगा :
परंतु जहां निर्धारण अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि संपत्ति के उचित बाजार मूल्य से निम्न किसी रकम के लिए किसी अनुसूचित बैंक की गारन्टी राजस्व के हितों के संरक्षण के लिए पर्याप्त है, तो वह ऐसी गारंटी को स्वीकार कर सकेगा और कुर्की का प्रतिसंहरण कर देगा ।
(4) निर्धारण अधिकारी, उपधारा (1 ) के अधीन अनंतिम रूप से कुर्क की गई किसी संपत्ति के मूल्य के अवधारण के प्रयोजनों के लिए , धारा 142 क में निर्दिष्ट मूल्यांकन अधिकारी को निर्देश कर सकेगा , जो उस धारा में उपबंधित रीति में संपत्ति के उचित बाजार मूल्य का प्राक्कलन करेगा और ऐसे निर्देश की प्राप्ति की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर निर्धारण अधिकारी को प्राक्कलन की रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा ।
(5) उपधारा (3 ) के अधीन अनंतिम कुर्की का प्रतिसंहरण करने वाला कोई आदेश,-
(i) जहां उपधारा (4) के अधीन मूल्यांकन अधिकारी को निर्देश किया गया है , वहां गारंटी की प्राप्ति की तारीख से पैंतालीस दिन के भीतर ; या
(ii) किसी अन्य मामले में गारंटी की प्राप्ति की तारीख से पंद्रह दिन के भीतर,
किया जाएगा ।
(6) जहां निर्धारिती पर संदेय किसी राशि को विनिर्दिष्ट करने वाली मांग की सूचना की तामील की जाती है और निर्धारिती , मांग की सूचना में विनिर्दिष्ट समय के भीतर उस राशिका संदाय करने में असफल होता है , तो निर्धारण अधिकारी , रकम की वसूली के लिए , उपधारा (3 ) के अधीन गारंटी का पूर्णतः या भागतः अवलंब ले सकेगा ।
(7) यदि निर्धारिती उपधारा (3 ) में निर्दिष्ट गारंटी की समाप्ति से पंद्रह दिन पूर्व उपधारा (3 ) में निर्दिष्ट गारंटी के नवीकरण में असफल रहता है या किसी बराबर रकम के लिए किसी अनुसूचित बैंक की नई गारंटी देने में असफल रहता है, तो निर्धारण अधिकारी , राजस्व के हितों के संरक्षण के लिए बैंक गारंटी का अवलंब ले लेगा ।
1934 का 2
(8) उपधारा (3 ) में निर्दिष्ट गारंटी के अवलंब द्वारा वसूल की गई रकम उस विद्यमान मांग के विरुद्ध समायोजित की जाएगी , जो निर्धारिती द्वारा संदेय है और अतिशेष रकम , यदि कोई हो, भारतीय रिजर्व बैंक या भारतीय स्टेट बैंक या उसके समनुषंगी या ऐसे बैंक के, जो भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम , 1934 की धारा 45 की उपधारा (1 ) के उपबंधों के 56
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
अधीन उसके अभिकर्ता के रूप में नियत किया जाए , शाखा में प्रधान आयुक्त या आयुक्त के व्यक्तिगत जमा खाते में, ऐसे स्थान पर जमा की जाएगी , जहां प्रधान आयुक्त या आयुक्त का कार्यालय स्थित है ।
(9) जहां निर्धारण अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि राजस्व के हितों के संरक्षण के लिए उपधारा ( 3) में निर्दिष्ट गारंटी की अब और आवश्यकता नहीं है , तो वह तुरंत उस गारंटी को निर्मुक्त कर देगा ।
1934का 2 स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए , " अनुसूचित बैंक" पद से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम , 1934 की दूसरी अनुसूची में सम्मिलित कोई बैंक अभिप्रेत होगा । ' ।
धारा 282 क का संशोधन ।
112. आय- कर अधिनियम की धारा 282 क की उपधारा (1 ) में, " पर उस प्राधिकारी द्वारा हस्तलेख में हस्ताक्षर किया जाएगा" शब्दों के स्थान पर " उस प्राधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित और कागज रूप में जारी किया जाएगा जो या इलैक्ट्रानिक रूप में ऐसी प्रक्रिया द्वारा संसूचित किया जाएगा विहित की जाए " शब्द 1
जून, 2016 से रखे जाएंगे ।
नई धारा 286 का अन्तःस्थापन ।
113. आय- कर अधिनियम की धारा 285 खक के पश्चात् निम्नलिखित धारा 1 अप्रैल , 2017 से अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात्:-
अंतरराष्ट्रीय समूह के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करना ।
'286. (1 ) भारत में निवासी प्रत्येक घटक अस्तित्व , यदि वह किसी अंतरराष्ट्रीय समूह, जिसका मूल अस्तित्व भारत में निवासी नहीं है, का घटक है विहित आय - कर प्राधिकारी को (जिसे इसमें विहित प्राधिकारी कहा गया है) ऐसे प्ररूप और रीति में, ऐसी तारीख को या उससे पहले , जो विहित किए जाएं निम्नलिखित सूचित करेगा,-
(क) क्या वह अंतरराष्ट्रीय समूह का अनुकल्पी रिपोर्ट करने वाला अस्तित्व है; या
(ख) अंतरराष्ट्रीय समूह के मूल अस्तित्व या अनुकल्पी रिपोर्ट करने वाले अस्तित्व , यदि कोई हो , तथा देश या राज्यक्षेत्र , जिसके उक्त अस्तित्व निवासी हैं, के ब्यौरे ।
(2) भारत में निवासी प्रत्येक मूल अस्तित्व या अनुकल्पी रिपोर्ट करने वाला अस्तित्व ऐसे अंतरराष्ट्रीय समूह के संबंध में, जिसका वह घटक है, प्रत्येक रिपोर्ट करने वाले लेखांकन वर्ष के लिए सुसंगत लेखांकन वर्ष की आय की विवरणी के लिए धारा 139 की उपधारा (1 ) के अधीन विनिर्दिष्ट नियत तारीख को या उसके पूर्व विहित प्राधिकारी को ऐसे रूप और रीति में , जो विहित की जाए , रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा ।
(3) उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए , किसी अंतरराष्ट्रीय समूह के संबंध में रिपोर्ट में निम्नलिखित सम्मिलित होगा-
(क) प्रत्येक देश या राज्यक्षेत्र , जिसमें समूह क्रियाशील है, के संबंध में राजस्व की रकम, आय- कर के पूर्व लाभ या हानि, संदत्त आय- कर की रकम, प्रोद्भूत आय- कर की रकम , कथित पूंजी, संचित उपार्जन , कर्मचारियों की संख्या और मूर्त आस्तियों, जो नकद या नकद के समतुल्य हैं, की बाबत सूचना का संकलन;
(ख) समूह के प्रत्येक घटक अस्तित्व के ब्यौरे जिसके अंतर्गत वह देश या राज्यक्षेत्र सम्मिलित है जिसमें ऐसा घटक अस्तित्व निगमित , संगठित या स्थापित है, और देश या राज्य क्षेत्र जहां का वह निवासी है;
(ग) प्रत्येक अस्तित्व के प्रमुख कारबार क्रियाकलाप या क्रियाकलापों की प्रकृति और ब्यौरे; और
(घ) कोई अन्य जानकारी जो विहित की जाए ।
(4) उपधारा (2) में निर्दिष्ट अस्तित्व से भिन्न, भारत में निवासी किसी अंतरराष्ट्रीय समूह का घटक अस्तित्व रिपोर्ट किए जाने वाले लेखांकन वर्ष के लिए अंतरराष्ट्रीय समूह के संबंध में उक्त उपधारा में निर्दिष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा यदि मूल अस्तित्व ऐसे देश या राज्यक्षेत्र का निवासी है, भारत का राजपत्र असाधारण
57 अनुभाग 1क]
(क) जिसके साथ भारत का उपधारा (2 ) में निर्दिष्ट प्रकृति की रिपोर्ट आदान-प्रदान का उपबंध करने वाला करार नहीं है; या
(ख) उस देश या राज्यक्षेत्र में क्रमबद्ध असफलता रही है और उक्त असफलता की सूचना विहित प्राधिकारी द्वारा ऐसे घटक अस्तित्व को दे दी गई है:
परंतु जहां समूह के ऐसे घटक अस्तित्व एक से अधिक हैं जो भारत में निवासी हैं, वहां रिपोर्ट किसी भी एक घटक अस्तित्व द्वारा प्रस्तुत की जाएगी , यदि-
(क) अंतरराष्ट्रीय समूह ने, भारत में निवासी सभी घटक अस्तित्वों की ओर से उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसरण में ऐसी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए ऐसे आस्तित्व को अभिहित किया है; और
(ख) समूह की ओर से ये जानकारी लिखित रूप में विहित प्राधिकारी को भेज दी गई है ।
(5) उपधारा (4) में अंतर्विष्ट कोई बात लागू नहीं होगी , यदि अंतरराष्ट्रीय समूह के किसी अनुकल्पी अस्तित्व ने , उस देश या राज्यक्षेत्र के कर प्राधिकारी के पास जहां ऐसा अस्तित्व निवासी है, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट नियत तारीख को या उसके पूर्व उक्त उपधारा (2) में निर्दिष्ट प्रकृति की कोई रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है और निम्नलिखित शर्तों का समाधान हो गया है, अर्थात्:---
(क) उक्त देश या राज्यक्षेत्र में तत्समय प्रवृत्त विधि के अधीन रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी अपेक्षित है;
(ख) उक्त देश या राज्यक्षेत्र ने उक्त रिपोर्ट के आदान-प्रदान के लिए उपबंध करने वाला करार भारत के साथ किया है;
(ग) विहित प्राधिकारी ने समूह के किसी ऐसे घटक अस्तित्व, जो भारत में निवासी है, को उक्त देश या राज्यक्षेत्र के संबंध में कोई क्रमबद्ध असफलता सूचित नहीं की है;
(घ) उक्त देश या राज्यक्षेत्र को घटक अस्तित्व द्वारा लिखित में सूचित किया गया है कि वह अंतरराष्ट्रीय समूह की ओर से अनुकल्पी रिपोर्ट करने वाला अस्तित्व है; और
(ङ) विहित प्राधिकारी को उपधारा (1 ) के अनुसार उपधारा (4) में निर्दिष्ट अस्तित्वों द्वारा सूचित कर दिया गया है ।
(6) विहित प्राधिकारी , किसी रिपोर्ट करने वाले अस्तित्व द्वारा दी गई रिपोर्ट के सही होने का अवधारण करने के प्रयोजनों के लिए लिखित में सूचना जारी करके ऐसी जानकारी और दस्तावेज , जो सूचना में विनिर्दिष्ट की जाए , सूचना की प्राप्ति के तीस दिन के अंदर अस्तित्व से प्रस्तुत करने की अपेक्षा कर सकेगा:
परंतु विहित प्राधिकारी ऐसे अस्तित्व द्वारा किए गए आवेदन पर, तीस दिन की अवधि का विस्तार तीस दिन से अनधिक की और अवधि तक कर सकेगा ।
(7) इस धारा के उपबंध किसी लेखा वर्ष के लिए अंतरराष्ट्रीय समूह के संबंध में लागू नहीं होंगे यदि कुल समेकित समूह राजस्व जो ऐसे लेखा वर्ष के पूर्ववर्ती लेखा वर्ष के लिए समेकित वित्तीय विवरण में प्रकट हैं, ऐसी रकम , जो विहित की जाए , से अधिक नहीं है ।
(8) इस धारा के उपबंध ऐसे मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार और ऐसी शर्तों के अधीन लागू किए जाएंगे , जो विहित किए जाएं ।
(9) इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(क) "लेखा वर्ष" से निम्नलिखित अभिप्रेत है,-
(i) कोई पूर्ववर्ष , उस मामले में जहां मूल अस्तित्व या अनुकल्पी रिपोर्ट करने वाला अस्तित्व भारत में निवासी है; या 58
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(ii ) वार्षिक लेखा कालावधि जिसके संबंध में अंतरराष्ट्रीय समूह का मूल अस्तित्व तत्समय प्रवृत्त किसी विधि या किसी अन्य मामले में उस देश या राज्यक्षेत्र के, जिसमें ऐसा अस्तित्व निवासी है, लागू लेखा मानकों के अधीन अपने वित्तीय विवरण तैयार करते हों;
(ख) "करार" से धारा 90 की उपधारा ( 1 ) या धारा 90 क की उपधारा ( 1 ) में निर्दिष्ट करार या कोई ऐसा करार जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अधिसूचित किया जाए, अभिप्रेत है;
(ग) "अनुकल्पी रिपोर्ट करने वाला अस्तित्व " से अंतरराष्ट्रीय समूह का ऐसा कोई घटक अस्तित्व अभिप्रेत है जिसे समूह द्वारा उस देश या राज्यक्षेत्र , जिसमें उक्त घटक अस्तित्व ऐसे समूह की ओर से निवासी है, उपधारा (2) में निर्दिष्ट प्रकृति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए मूल अस्तित्व के स्थान पर अभिहित किया गया है;
(घ) " घटक अस्तित्व " से निम्नलिखित अभिप्रेत है,-
(i ) किसी अंतरराष्ट्रीय समूह का ऐसा कोई पृथक् अस्तित्व जो वित्तीय रिपोर्ट करने वाले प्रयोजनों के लिए उक्त समूह के समेकित वित्तीय विवरण में सम्मिलित किया है या उक्त प्रयोजन के लिए इस प्रकार सम्मिलित किया जाए , यदि अंतरराष्ट्रीय समूह के किसी अस्तित्व के साधारण शेयर स्टाक एक्सचेन्ज में सूचीबद्ध किए जाने थे ;
(ii) ऐसा कोई अस्तित्व जिसे एकमात्र आकार या तात्त्विकता के आधार पर अंतरराष्ट्रीय समूह के समेकित वित्तीय विवरण से अपवर्जित किया गया है; या
(iii) खंड ( i) या खंड ( ii ) में सम्मिलित अंतरराष्ट्रीय समूह के किसी पृथक् कारबार अस्तित्व का कोई स्थायी स्थापन, यदि ऐसी कारबार यूनिट वित्तीय रिपोर्ट करने , विनियामक, कर रिपोर्ट करने या आंतरिक प्रबंध नियंत्रण प्रयोजनों के लिए ऐसे स्थायी स्थापन के लिए पृथक् वित्तीय विवरण तैयार करता है;
(ङ) "समूह" में ऐसा मूल अस्तित्व और ऐसे सभी अस्तित्व सम्मिलित हैं जिनके संबंध में, स्वामित्व या नियंत्रण के कारण से, वित्तीय रिपोर्ट करने संबंधी प्रयोजनों के लिए समेकित वित्तीय विवरण
(i ) उस देश या राज्यक्षेत्र, जिसका मूल अस्तित्व निवासी है , में तत्समय प्रवृत्त किसी विधि या लेखांकन मानकों के अधीन तैयार करना अपेक्षित है ; या
(ii ) तैयार किया जाना अपेक्षित होता , यदि किसी उद्यम के साधारण शेयर किसी ऐसे देश या राज्यक्षेत्र में, जिसका मूल अस्तित्व निवासी है , स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होते;
(च) "समेकित वित्तीय विवरण " से ऐसे अंतरराष्ट्रीय समूह का वित्तीय विवरण अभिप्रेत है जिसमें मूल अस्तित्व और घटक अस्तित्व की आस्तियां , दायित्व , आय , खर्चे और नकद प्रवाह एकल आर्थिक अस्तित्व के रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं;
(छ) "अंतरराष्ट्रीय समूह" से कोई ऐसा समूह अभिप्रेत है जिसमें निम्नलिखित सम्मिलित हैं-
(i ) दो या अधिक उद्यम जो विभिन्न देशों या राज्यक्षेत्रों के निवासी हैं; या
(ii ) कोई उद्यम, जो एक देश या राज्यक्षेत्र का निवासी है , अन्य देशों या राज्यक्षेत्रों में किसी स्थायी स्थापन के माध्यम से कोई कारबार चलाता है;
(ज) "मूल अस्तित्व" से किसी अंतरराष्ट्रीय समूह का कोई ऐसा घटक अस्तित्व अभिप्रेत है जो अंतरराष्ट्रीय समूह के एक या अधिक अन्य घटक अस्तित्वों में कोई हित , प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः, धारित करता है , जैसे कि,-
(i ) उसके द्वारा उस देश या राज्यक्षेत्र , जिसका मूल अस्तित्व निवासी है, में भारत का राजपत्र असाधारण
59 अनुभाग 1क]
तत्समय प्रवृत्त किसी विधि या लेखांकन मानकों के अधीन समेकित वित्तीय विवरण तैयार करना अपेक्षित है; या
(ii) समेकित वित्तीय विवरण तैयार किया जाना अपेक्षित होता , यदि उसके द्वारा किसी उद्यम के साधारण शेयर किसी ऐसे देश या राज्यक्षेत्र में, जिसका मूल अस्तित्व निवासी है , स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होते;
और ऐसे समूह का कोई अन्य घटक अस्तित्व नहीं है , जिससे पहले वर्णित घटक अस्तित्व में प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः किसी हित के स्वामित्व के कारण खंड ( i) या खंड ( ii ) में निर्दिष्ट परिस्थितियों के अंतर्गत, जिसमें पहले उल्लिखित घटक अस्तित्व का पृथक् वित्तीय विवरण सम्मिलित है, समेकित वित्तीय विवरण तैयार करना अपेक्षित है;
(झ) "स्थायी स्थापन" का वही अर्थ होगा जो उसका धारा 92च के खंड ( iii क) में है;
(ञ) "रिपोर्ट किए जाने वाले लेखांकन वर्ष " से ऐसा लेखांकन वर्ष अभिप्रेत है जिसके संबंध में उपधारा (2) में निर्दिष्ट रिपोर्ट में वित्तीय और प्रचलनात्मक परिणामों का प्रकट होना अपेक्षित है;
(ट) "रिपोर्ट किए जाने वाले अस्तित्व " से घटक अस्तित्व अभिप्रेत है , जिसके अंतर्गत मूल अस्तित्व या अनुकल्पी रिपोर्ट करने वाला अस्तित्व है जिसके द्वारा उपधारा (2) में निर्दिष्ट प्रकृति की कोई रिपोर्ट प्रस्तुत करना अपेक्षित है ;
(ठ) किसी देश या राज्यक्षेत्र के संबंध में "क्रमबद्ध असफलता " से यह अभिप्रेत है कि ऐसे देश या राज्यक्षेत्र का भारत के साथ उपधारा (2) में निर्दिष्ट प्रकृति की रिपोर्ट के आदान- प्रदान करने वाला करार है , किंतु-
है; या (i) उक्त करार के अतिक्रमण में , इसने स्वतः आदान- प्रदान निलंबित कर दिया
(ii ) भारत में निवासी किसी घटक अस्तित्व वाले किसी अंतरराष्ट्रीय समूह के संबंध में अपने कब्जे में कोई रिपोर्ट भारत को स्वतः उपलब्ध कराने में लगातार असफल रहा है ।' ।
संशोधन । धारा 288 का 114. आय- कर अधिनियम की धारा 288 की उपधारा (4) के खंड ( ख) में , " की उपधारा (1 ) के खंड ( ii ) " शब्दों, अंकों और कोष्ठकों के पश्चात, " या धारा 272 क की उपधारा (1 ) के खंड (घ) " शब्द, अंक, अक्षर और कोष्ठक 1 अप्रैल, 2017 से रखे जाएंगे ।
115. आय - कर अधिनियम की चौथी अनुसूची के भाग क में 1 अप्रैल , 2017 से, नियम 8 में,- चौथी अनुसूची का संशोधन ।
(i) खंड ( iii) में, अंत में आने वाले " खाते में जमा किया जाता है" शब्दों के स्थान पर "खाते में जमा किया जाता है; अथवा" शब्द रखे जाएंगे;
(ii ) खंड ( iii) के पश्चात् और स्पष्टीकरण से पूर्व निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
" (iv) यदि कर्मचारी के खाते में संपूर्ण अतिशेष धारा 80 गगघ में निर्दिष्ट और केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित पेंशन स्कीम के अधीन उसके खाते में अंतरित किया जाता है ।" ।
60
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
अध्याय 4
अप्रत्यक्ष कर
सीमाशुल्क
1962का 52 धारा 2 का संशोधन ।
116. सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 ( जिसे इसमें इसके पश्चात् सीमाशुल्क अधिनियम कहा गया है) कीधारा 2 में,
(i ) खंड (43) के स्थान पर निम्नलिखित खंड रखा जाएगा, अर्थात्:-
' (43) " भांडागार" से धारा 57 के अधीन अनुज्ञप्त कोई सार्वजनिक भांडागार या धारा 58 के अधीन अनुज्ञप्त कोई प्राइवेट भांडागार या धारा 58 क के अधीन अनुज्ञप्त कोई विशेष भांडागार अभिप्रेत है ; ' ;
(ii) खंड (45) का लोप किया जाएगा ।
117. सीमाशुल्क अधिनियम के अध्याय 3 में, अध्याय शीर्ष के स्थान पर निम्नलिखित अध्याय शीर्ष रखा जाएगा , अर्थात् :-
अध्याय3 के अध्याय शीर्ष का संशोधन ।
"सीमाशुल्क पत्तन , विमान पत्तन , आदि का नियत किया जाना " ।
धारा 9 का लोप ।
118. सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 9 का लोप किया जाएगा ।
119. सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 25 में,-
धारा 25 का संशोधन।
(i) उपधारा (4) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी , अर्थात् :-
" (4) उपधारा (1 ) या उपधारा (2क) के अधीन जारी प्रत्येक अधिसूचना , जब तक अन्यथा उपबंधित न हो, राजपत्र में केन्द्रीय सरकार द्वारा उसके प्रकाशन के लिए जारी तारीख को प्रवृत्त होगी ।" ;
(ii ) उपधारा (5) का लोप किया जाएगा ।
120. सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 28 में ,-
धारा 28 का संशोधन।
(क) पार्श्व शीर्ष में, " उद्गृहीत नहीं किए गए या कम उद्गृहीत किए गए " शब्दों के स्थान पर, "उद्गृहीत न किए गए या संदत्त न किए गए या कम उद्गृहीत किए गए या कम संदत्त किए गए" शब्द रखे जाएंगे ;
(ख) उपधारा (1 ) में, -
(i ) आरंभिक पैरा में, "उद्गृहीत नहीं किया गया है या कम उद्गृहीत किया गया है" शब्दों के स्थान पर, " उद्गृहीत नहीं किया गया है या संदत्त नहीं किया गया है या कम उद्गृहीत किया गया है या कम संदत्त किया गया है" शब्द रखे जाएंगे ;
(ii) खंड (क) में,-
(अ) "एक वर्ष" शब्दों के स्थान पर, "दो वर्ष " शब्द रखे जाएंगे ;
(आ) "इस प्रकार उद्गृहीत " शब्दों के पश्चात्, " या संदत्त " शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे ;
(ग) उपधारा (3) में, " एक वर्ष " शब्दों के स्थान पर, "दो वर्ष " शब्द रखे जाएंगे ;
(घ) उपधारा (4) में,-
(i) "उद्गृहीत नहीं किया गया है या कम उद्गृहीत किया गया है" शब्दों के स्थान पर, "उद्गृहीत नहीं किया गया है या संदत्त नहीं किया गया है या कम उद्गृहीत किया गया है या कम संदत्त किया गया है " शब्द रखे जाएंगे ;
(ii) " इस प्रकार उद्गृहीत किया गया है " शब्दों के स्थान पर, "इस प्रकार उद्गृहीत किया गया है या संदत्त नहीं किया गया है" शब्द रखे जाएंगे ;
भारत का राजपत्र असाधारण
61 अनुभाग 1 क]
(ङ) उपधारा (5) में, "शुल्क उद्गृहीत नहीं किया गया है या कम उद्गृहीत किया गया है" शब्दों के स्थान पर, " शुल्क उद्गृहीत नहीं किया गया है या संदत्त नहीं किया गया है या कम उद्गृहीत कियां गया है या कम संदत्त किया गया है" शब्द रखे जाएंगे ;
(च) उपधारा (6) में, "एक वर्ष " शब्दों के स्थान पर, "दो वर्ष" शब्द रखे जाएंगे ;
(छ) उपधारा (7) में, " एक वर्ष " शब्दों के स्थान पर, "दो वर्ष" शब्द रखे जाएंगे ;
(ज) स्पष्टीकरण 1 के खंड (क) में, " शुल्क उद्गृहीत नहीं किया गया है" शब्दों के स्थान पर, " शुल्क उद्गृहीत नहीं किया गया है या संदत्त नहीं किया गया है या कम उद्गृहीत किया गया है या कम संदत्त किया गया है " शब्द रखे जाएंगे ।
121. सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 47 में,-
धारा 47 का संशोधन।
(क) उपधारा (1 ) में, निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: -
"परंतु केंद्रीय सरकार, राजपत्र में , अधिसूचना द्वारा, आयातकर्ताओं के कतिपय वर्ग को, उक्त शुल्क या किन्हीं प्रभारों का, ऐसी रीति में, जो नियमों द्वारा उपबंधित की जाए , आस्थगित संदाय करने के लिए अनुज्ञात कर सकेगी ।" ;
(ख) उपधारा (2) में, " जहां आयातकर्ता " शब्दों से आरंभ होने वाले और " उक्त शुल्क के संदाय" शब्दों के साथ समाप्त होने वाले भाग के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"जहां आयातकर्ता,-
(क) उस तारीख से, जिसको उसे शुल्क के संदाय के लिए प्रवेश पत्र लौटा
दिया जाता है ; या
(ख) उपधारा (1 ) के परन्तुक के अधीन आस्थगित संदाय की दशा में उस देय तारीख से, जो इस निमित्त बनाए गए नियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए ,
दो दिन के भीतर (अवकाश दिन को छोड़कर) आयात शुल्क का संदाय पूर्णतः या भागतः करने में असफल रहता है वहां , वह ऐसे शुल्क पर, जो संदत्त नहीं किया गया है या कम संदत्त किया गया है, उसके संदाय की तारीख तक ब्याज का संदाय ऐसी दर से करेगा, जो प्रतिवर्ष दस प्रतिशत से अन्यून और छत्तीस प्रतिशत से अनधिक होगी , जो केंद्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे ।" ।
धारा 51 का संशोधन ।
122. सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 51 को उसकी उपधारा (1 ) के रूप में पुनः संख्यांकित किया जाएगा ; और
(क) इस प्रकार पुनःसंख्यांकित उपधारा (1 ) में निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"परन्तु केंद्रीय सरकार राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा , निर्यातकर्ताओं के कतिपय वर्ग को, उक्त शुल्क या किन्हीं प्रभारों का, ऐसी रीति से, जो नियमों द्वारा उपबंधित की जाए,. आस्थगित संदाय करने के लिए अनुज्ञात कर सकेगा ।" ;
(ख) इस प्रकार पुनःसंख्यांकित उपधारा ( 1 ) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:-
"(2) जहां निर्यातकर्ता, उपधारा ( 1 ) के परंतुक के अधीन निर्यात शुल्क का संदाय ऐसी देय तारीख तक पूर्णतः या भागतः करने में असफल रहता है, वहां वह उक्त शुल्क पर, उसके संदाय की तारीख तक जो संदत्त नहीं किया गया है या कम संदत्त किया गया है, ब्याज का संदाय ऐसी दर से करेगा, जो प्रतिवर्ष पांच प्रतिशत से अन्यून और छत्तीस प्रतिशत से अनधिक होगी , जो केंद्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे ।" ।
123. सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 53 के स्थान पर निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्: - धारा 53 के स्थान पर नई धारा का प्रतिस्थापन ।
"53. धारा 11 के उपबंधों के अधीन रहते हुए , जहां किसी वाहन में आयातित और, यथास्थिति, आयात सूची या आयात रिपोर्ट में वर्णित उसी वाहन में भारत से बाहर किसी स्थान या
शुल्क का संदाय किए बिना कतिपय मालों अभिवहन । का 62
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
किसी सीमाशुल्क केंद्र को किसी माल का अभिवहन किया जाना है, वहां उचित अधिकारी , शुल्क का संदाय किए बिना, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो बोर्ड द्वारा विहित की जाएं, ऐसे माल और वाहन का अभिवहन अनुज्ञात कर सकेगा ।" ।
124. सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 57 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी , अर्थात्:-
धारा 57 के स्थान पर नई धारा का प्रतिस्थापन। सार्वजनिक भांडागारों का अनुज्ञापन।
" 57. सीमाशुल्क प्रधान आयुक्त या सीमाशुल्क आयुक्त ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए , जो विहित की जाएं, किसी सार्वजनिक भांडागार को अनुज्ञप्ति दे सकेगा जिसमें आयातित शुल्क्य माल का निक्षेप किया जा सकेगा । " ।
125. सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 58 के स्थान पर, निम्नलिखित धाराएं रखी जाएंगी , अर्थात्:-
धारा 58 के स्थान पर नई धारा 58, धारा 58क और धारा 58 ख का प्रतिस्थापन ।
प्राइवेट भांडागारों का अनुज्ञापन ।
"58. सीमाशुल्क प्रधान आयुक्त या सीमाशुल्क आयुक्त ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो विहित की जाएं, किसी प्राइवेट भांडागार को अनुज्ञप्ति दे सकेगा जिसमें अनुज्ञप्तिधारी द्वारा या उसकी ओर से आयातित शुल्क्य माल का निक्षेप किया जा सकेगा ।
विशेष भांडागारों का अनुज्ञापन ।
58क. (1 ) सीमाशुल्क प्रधान आयुक्त या सीमाशुल्क आयुक्त, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो विहित की जाएं , किसी विशेष भांडागार को अनुज्ञप्ति दे सकेगा जिसमें शुल्क्य माल का निक्षेप किया जा सकेगा और ऐसे भांडागार में उचित अधिकारी द्वारा ताला लगवाया जाएगा और कोई व्यक्ति, उचित अधिकारी की अनुज्ञा के बिना भांडागार में प्रवेश नहीं करेगा या वहां से कोई माल नहीं हटाएगा ।
(2) बोर्ड, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ऐसे माल के वर्ग को विनिर्दिष्ट कर सकेगा जिसका उपधारा (1 ) के अधीन अनुज्ञप्त विशेष भांडागार में निक्षेप किया जाएगा ।
अनुज्ञप्ति का रद्द किया जाना ।
58ख. (1 ) जहां कोई अनुज्ञप्तिधारी इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों के उपबंधों में से किसी उपबंध का उल्लंघन करता है या अनुज्ञप्ति की शर्तों में से किसी शर्त को भंग करता है वहां सीमाशुल्क प्रधान आयुक्त या सीमाशुल्क आयुक्त, धारा 57 या धारा 58 या धारा 58 क के अधीन अनुदत्त अनुज्ञप्ति को रद्द कर सकेगा :
परंतु किसी अनुज्ञप्ति के रद्द किए जाने के पूर्व, अनुज्ञप्तिधारी को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिया जाएगा ।
(2) सीमाशुल्क प्रधान आयुक्त या सीमाशुल्क आयुक्त, उपधारा (1 ) के अधीन किसी जांच के लंबित रहने के दौरान किसी अन्य ऐसी कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जो अनुज्ञप्तिधारी और माल के विरुद्ध इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन की जा सकेगी , भांडागार के प्रचालन को निलंबित कर सकेगा ।
(3) जहां उपधारा (2) के अधीन किसी भांडागार का प्रचालन निलंबित कर दिया जाता है वहां निलंबन की अवधि के दौरान ऐसे भांडागार में किसी माल का निक्षेप नहीं किया जाएगा :
परंतु इस अध्याय के उपबंध भांडागार में पहले से निक्षिप्त माल को लागू होते रहेंगे ।
(4) जहां धारा 57 या धारा 58 या धारा 58 क के अधीन जारी अनुज्ञप्ति रद्द कर दी जाती है वहां भांडागारित माल को उस तारीख से जिसको अनुज्ञप्तिधारी पर ऐसे रद्दकरण के आदेश की तामील की जाती है, सात दिन के भीतर या ऐसी बढ़ाई गई अवधि के भीतर, जो उचित अधिकारी अनुज्ञात करे, ऐसे भांडागार से हटाकर किसी अन्य भांडागार में ले जाया जाएगा या उसकी देशी उपभोग या निर्यात के लिए निकासी की जाएगी :
परंतु इस अध्याय के उपबंध भांडागार में पहले से निक्षिप्त माल को ऐसे भांडागार से किसी अन्य भांडागार में ले जाए जाने या देशी उपभोग या निर्यात के लिए निकासी होने तक लागू होते रहेंगे । "।
126. सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 59 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्:-
धारा 59 के स्थान पर नई धारा का प्रतिस्थापन। भांडागारण बंधपत्र ।
"59. (1 ) किसी ऐसे माल का, जिसके संबंध में धारा 46 के अधीन भांडागारण के लिए प्रवेश पत्र पेश किया गया है और धारा 17 या धारा 18 के अधीन शुल्क के लिए निर्धारित किया गया है, भारत का राजपत्र असाधारण
63 अनुभाग 1 क]
आयातकर्ता अपने को ऐसे माल पर निर्धारित शुल्क की रकम के तिगुने के बराबर राशि के लिए आबद्ध करते हुए एक बंधपत्र निष्पादित करेगा कि वह,-
(क) ऐसे माल के संबंध में इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों तथा विनियमों के सभी उपबंधों का अनुपालन करेगा;
(ख) मांग की सूचना में विनिर्दिष्ट तारीख को या उसके पहले धारा 61 की उपधारा (2) के अधीन संदेय सभी शुल्क और ब्याज का संदाय करेगा; और
(ग) ऐसे माल के संबंध में इस अधिनियम या नियमों या विनियमों के उपबंधों के उल्लंघन के कारण उपगत सभी शास्तियों और जुर्मानों का संदाय करेगा।
(2) उपधारा ( 1 ) के प्रयोजनों के लिए , सीमाशुल्क सहायक आयुक्त या सीमाशुल्क उपायुक्त किसी आयातकर्ता को, विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर उसके द्वारा आयात किए जाने वाले माल के भांडागारण के संबंध में ऐसी रकम के लिए जिसका सीमाशुल्क सहायक आयुक्त या सीमाशुल्क उपायुक्त अनुमोदन करे, एक ही बंधपत्र निष्पादित करने के लिए अनुज्ञा दे सकेगा ।
(3) निर्यातकर्ता उपधारा ( 1 ) या उपधारा (2) के अधीन बंधपत्र के निष्पादन के अतिरिक्त ऐसी प्रतिभूति भी देगा, जो विहित की जाए ।
(4) किसी माल के संबंध में किसी आयातकर्ता द्वारा इस धारा के अधीन निष्पादित बंधपत्र किसी अन्य भांडागार को माल के अंतरण पर भी प्रवृत्त बना रहेगा ।
(5) जहां सम्पूर्ण माल या उनका कोई भाग किसी अन्य व्यक्ति को अंतरित किए जाते हैं वहां अंतरिती, उपधारा ( 1 ) या उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट रीति से एक बंधपत्रं निष्पादित करेगा और उपधारा (3) के अधीन यथा विनिर्दिष्ट प्रतिभूति देगा । " ।
धारा 60 के स्थान 127. सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 60 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी , अर्थात् : -
पर नई धारा का प्रतिस्थापन।
भांडागार में निक्षेप के लिए माल हटाए जाने की अनुज्ञा ।
"60. (1 ) जब किसी माल के संबंध में धारा 59 के उपबंधों का अनुपालन किया गया हो तब उचित अधिकारी किसी भांडागार में माल के निक्षेप के प्रयोजन के लिए किसी सीमाशुल्क स्टेशन से माल के हटाए जाने को अनुज्ञात करते हुए आदेश दे सकेगा ।
(2) जहां कोई आदेश उपधारा (1 ) के अधीन किया गया है वहां किसी भांडागार में माल का निक्षेप ऐसी रीति में किया जाएगा जो विहित की जाए । " ।
धारा 61 के स्थान 128. सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 61 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्: -
पर नई धारा का प्रतिस्थापन ।
'61 . ( 1 ) कोई भांडागारित माल , उस भांडागार में, जिसमें उनका निक्षेप किया जाता है या उस भांडागार में, जिसमें उसे हटाकर ले जाया जाता है, -
वह अवधि जिसमें माल भांडागारित रह सकेगा ।
(क) किसी शत प्रतिशत निर्यातोन्मुख उपक्रम या इलैक्ट्रानिक हार्डवेयर प्रौद्योगिकी पार्क इकाई या साफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क इकाई या किसी ऐसे भांडागार में जिसमें धारा 65 के अधीन विनिर्माण या अन्य प्रचालन अनुज्ञात किया गया है, उपयोग के लिए आशयित पूंजी माल की दशा में उनके भांडागार से निकासी तक;
(ख) किसी शत प्रतिशत निर्यातोन्मुख उपक्रम या इलैक्ट्रानिक हार्डवेयर प्रौद्योगिकी पार्क इकाई या साफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क इकाई या किसी ऐसे भांडागार में जिसमें धारा 65 के अधीन विनिर्माण या अन्य प्रचालन अनुज्ञात किया गया है, उपयोग के लिए आशयित पूंजी माल से भिन्न माल की दशा में उनका उपभोग होने तक या उनके भांडागार से निकासी तक; और
(ग) किसी अन्य माल की दशा में, उस तारीख से जिसको उचित अधिकारी ने धारा 60 की उपधारा (1 ) के अधीन आदेश किया है, एक वर्ष की समाप्ति तक,
रखा जा सकेगा:
परंतु इस खंड में निर्दिष्ट किसी माल की दशा में, सीमाशुल्क प्रधान आयुक्त या सीमाशुल्क आयुक्त, पर्याप्त हेतुक दर्शाए जाने पर ऐसी अवधि को, जिसके लिए माल भांडागार में रह सकेगा, तक बढ़ा सकेगा, जो एक बार में एक वर्ष से अधिक नहीं होगी ।
64
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
परंतु यह और कि जहां ऐसे माल के क्षय होने की संभावना है वहां पहले परंतुक में निर्दिष्ट अवधि सीमाशुल्क प्रधान आयुक्त या सीमाशुल्क आयुक्त द्वारा घटाकर ऐसी लघुतर अवधि की जा सकेगी जो वह ठीक समझे ।
(2) जहां उपधारा (1 ) के खंड (ग) में विनिर्दिष्ट कोई भांडागारित माल, उस तारीख से,
जिसको उचित अधिकारी ने धारा 60 की उपधारा ( 1 ) के अधीन आदेश किया है, नब्बे दिन की अवधि से अधिक भांडागार में रहता है, वहां ऐसे भांडागारित माल पर उक्त नब्बे दिन के अवसान से शुल्क के संदाय की तारीख तक की अवधि के लिए माल की निकासी के समय संदेय शुल्क की रकम पर ब्याज ऐसी दर पर संदेय होगा, जो केंद्रीय सरकार द्वारा धारा 47 के अधीन नियत किया जाए :
परंतु यदि बोर्ड लोकहित में ऐसा करना आवश्यक समझता है तो वह, -
(क) आदेश द्वारा और ऐसी असाधारण परिस्थितियों में, जो ऐसे आदेश में विनिर्दिष्ट की जाएं, किसी भांडागारित माल के संबंध में , इस धारा के अधीन संदेय संपूर्ण ब्याज या उसके किसी भाग का अधित्यजन कर सकेगा;
(ख) राजपत्र में अधिसूचना द्वारा माल के ऐसे वर्ग को विनिर्दिष्ट कर सकेगा जिसके संबंध में , इस धारा के अधीन कोई ब्याज प्रभारित नहीं किया जाएगा;
(ग) राजपत्र में अधिसूचना द्वारा माल के ऐसे वर्ग को विनिर्दिष्ट कर सकेगा जिसके संबंध में, उस तारीख से, जिसको उचित अधिकारी ने, धारा 60 की उपधारा ( 1 ) के अधीन आदेश किया है, ब्याज प्रभार्य होगा ।
स्पष्टीकरण इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(i) " इलैक्ट्रानिक हार्डवेयर प्रौद्योगिकी पार्क इकाई " से भारत सरकार द्वारा अधिसूचित इलैक्ट्रानिक हार्डवेयर प्रौद्योगिकी पार्क स्कीम के अधीन स्थापित कोई इकाई अभिप्रेत है ;
1944 का 1 (ii) " शत प्रतिशत निर्यातोन्मुख उपक्रम " का वही अर्थ है जो केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 की धारा 3 की उपधारा (1 ) के स्पष्टीकरण 2 के खंड ( ii ) में उसका है; और
(iii) " साफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क इकाई " से भारत सरकार द्वारा अधिसूचित साफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क स्कीम के अधीन स्थापित कोई इकाई , अभिप्रेत है । ' ।
129. सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 62 और धारा 63 का लोप किया जाएगा ।
धारा 62 और धारा 63का लोप।
130. सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 64 के स्थान पर निम्नलिखित धारा रखी जाएगी , अर्थात्: -
धारा 64 के स्थान पर नई धारा का प्रतिस्थापन।
"64. किसी भांडागारित माल का स्वामी उसे भांडागारित करने के पश्चात्,-
(क) माल का निरीक्षण कर सकेगा;
भांडागारित माल का व्यवहार करने वाले स्वामी का अधिकार ।
(ख) माल की हानि या क्षय या नुकसान रोकने के लिए उनके आधानों के साथ ऐसी रीति में, जो आवश्यक हो, व्यवहार कर सकेगा ;
(ग) माल की छंटाई कर सकेगा;
(घ) माल को विक्रय के लिए दर्शित कर सकेगा । " ।
धारा 65 का संशोधन।
131. सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 65 की उपधारा (1 ) में, " सीमाशुल्क सहायक आयुक्त या सीमाशुल्क उपायुक्त की मंजूरी से और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए और ऐसी फीस का संदाय करने पर " शब्दों के स्थान पर, " सीमाशुल्क प्रधान आयुक्त या सीमाशुल्क आयुक्त की अनुज्ञा से और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए " शब्द रखे जाएंगे ।
धारा 68 का
132. सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 68 में,-
संशोधन ।
(i ) आरंभिक पैरा में " भांडागारित माल का आयातकर्ता देशी उपभोग के लिए उनकी निकासी अनुभाग 1 क]
भारत का राजपत्र असाधारण
65
कर सकता है यदि" शब्दों के स्थान पर, " किसी भांडागारित माल की देशी उपभोग के लिए भांडागार से निकासी की जा सकेगी , यदि " शब्द रखे जाएंगे;
( ii ) खंड (ख) के स्थान पर निम्नलिखित खंड रखा जाएगा, अर्थात् :-
" (ख) ऐसे माल के संबंध में संदेय आयात शुल्क, ब्याज , जुर्माने और शास्तियों का संदाय कर दिया गया है ; और";
(iii) पहले परंतुक में, " भाटक, ब्याज, अन्य प्रभारों और" शब्दों का लोप किया जाएगा ।
133. सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 69 में,
धारा 69 का संशोधन ।
(i) हिंदी पाठ में परिवर्तन की आवश्यकता नहीं है;
(ii) उपधारा ( 1) में,-
(अ) खंड (ख ) के स्थान पर निम्नलिखित खंड रखा जाएगा , अर्थात्:-
" (ख) ऐसे माल की बाबत संदेय निर्यात शुल्क, ब्याज, जुर्माने और शास्तियों का
संदाय कर दिया गया है; और" ;
(आ) हिंदी पाठ में परिवर्तन की आवश्यकता नहीं है ।
धारां 71 का संशोधन ।
जाएगा । 134. सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 71 में, " पुनः निर्यात " शब्दों के स्थान पर "निर्यात " शब्द रखा
135. सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 72 में,-
धारा 72 का संशोधन ।
(क) उपधारा (1 ) में,-
(i) खंड (ग) का लोप किया जाएगा;
(ii ) खंड (घ) में " निर्यात के लिए निकासी नहीं की गई है " शब्दों के स्थान पर, "निर्यात के लिए निकासी नहीं की गई है या " शब्द रखे जाएंगे;
(iii) दीर्घ पंक्ति में "सभी शास्तियां, भाटक, ब्याज और अन्य प्रभारों " शब्दों के स्थान
पर, "ब्याज , जुर्माने और शास्तियों " शब्द रखे जाएंगे;
(ख) उपधारा (2) में "चुने " शब्द के स्थान पर, "ठीक समझे " शब्द रखे जाएंगे ।
संशोधन। धारा 73 का 136. सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 73 में, " निर्यात कर दिया जाता है या " शब्दों के स्थान पर, " अंतरित कर दिया जाता है या " शब्द रखे जाएंगे ।
नई धारा 73 क काअंतःस्थापन ।
137. सीमाशुल्क अधिनियम में धारा 73 के पश्चात् निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्:-
भांडागारित माल की अभिरक्षा और . हटाया जाना ।
"73क. (1 ) सभी भांडागारित माल, उनके देशी उपभोग के लिए निकासी होने या किसी अन्य भांडागार को भांडागारित माल की अभिरक्षा और हटाया जाना अंतरित किए जाने या निर्यात किए जाने या इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित रूप से हटाए जाने तक ऐसे व्यक्ति की अभिरक्षा में रहेगा जिसे धारा 57 या धारा 58 या धारा 58 क के अधीन अनुज्ञप्ति अनुदत्त की गई है ।
(2) उपधारा (1 ) में निर्दिष्ट ऐसे व्यक्ति के उत्तरदायित्व जिसकी अभिरक्षा में कोई भांडागारित माल है, वे होंगे जो विहित किए जाएं ।
(3) जहां धारा 71 के उल्लंघन में कोई भांडागारित माल हटाया जाता है वहां अनुज्ञप्तिधारी , किसी अन्य ऐसी कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जो इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन उसके विरुद्ध की जाए , शुल्क, ब्याज , जुर्माना और शास्तियों का संदाय करने का दायी होगा ।
66
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
धारा 156 का संशोधन।
138. सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 156 की उपधारा (2) में, खंड (ख) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
" (ग) धारा 47 और धारा 51 के अधीन शुल्कों, करों, उपकरों या किन्ही अन्य प्रभारों का आस्थगित संदाय करने के लिए देय तारीख और रीति ।" ।
1962के अधिनियम 52 की धारा 25 के अधीन जारी कीगई अधिसूचनाओं का संशोधन ।
139. (1) सीमाशुल्क अधिनियम 1962 की धारा 25 की उपधारा ( 1 ) के अधीन जारी की गई भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) की अधिसूचना संख्या सा.का.नि. 367(अ) , तारीख 27 अप्रैल, 2000, सा.का.नि. 292 (अ) , तारीख 19 अप्रैल, 2002, सा.का. नि. 281 (अ) , तारीख 1 अप्रैल, 2003, सा.का.नि. 604(अ) , तारीख 10 सितंबर, 2004 , सा.का.नि. 606 (अ) , तारीख 10 सितंबर, 2004 और सा.का.नि. 260 (अ) , तारीख 1 मई , 2006 संशोधित हो जाएंगी और दूसरी अनुसूची के स्तंभ (3) में उनमें से प्रत्येक के सामने यथाविनिर्दिष्ट रीति में उस अनुसूची के स्तंभ (4) में उल्लिखित तत्स्थानी तारीख से ही भूतलक्षी रूप से संशोधित की गई समझी जाएंगी और तद्नुसार, किसी न्यायालय , अधिकरण या अन्य प्राधिकरण के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, उक्त अधिसूचनाओं के अधीन की गई या किए जाने के लिए तात्पर्यत कोई कार्रवाई या बात सभी प्रयोजनों के लिए विधिमान्य रूप से और प्रभावी रूप से इस प्रकार की गई और सदैव की गई समझी जाएगी मानो इस उपधारा द्वारा यथा संशोधित अधिसूचनाएं सभी तात्त्विक समयों पर प्रवर्तन में थीं ।
(2) केंद्रीय सरकार को, उपधारा ( 1 ) के प्रयोजनों के लिए , उक्त उपधारा में निर्दिष्ट उक्त अधिसूचनाओं को भूतलक्षी रूप से संशोधित करने की शक्ति होगी और उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसे उसी रूप में शक्ति प्राप्त है, मानो केंद्रीय सरकार को सीमाशुल्क अधिनियम की धारा 25 की उपधारा (1 ) के अधीन उक्त अधिसूचनाओं का भूतलक्षी रूप से संशोधन करने की शक्ति सभी तात्त्विक समयों पर प्राप्त थी ।
(3) ऐसे सभी रक्षोपाय शुल्क का प्रतिदाय किया जाएगा, जो संगृहीत किया गया है, किंतु जो इस प्रकार संगृहीत नहीं किया गया होता, यदि उपधारा (1 ) में किए गए संशोधन सभी तात्त्विक समयों पर प्रवृत्त होते और ऐसा प्रतिदाय सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 27 के उपबंधों के अधीन होगा ।
(4) सीमाशुल्क अधिनियम , 1962 की धारा 27 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (3 ) के अधीन रक्षोपाय शुल्क के प्रतिदाय के दावे के लिए कोई आवेदन उस तारीख से, जिसको वित्त विधेयक, 2016 को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त होती है, एक वर्ष की अवधि के भीतर किया जाएगा ।
सीमाशुल्क टैरिफ
1975 का 51 धारा 8 ग का लोप ।
140. सीमाशुल्क टैरिफ अधिनियम, 1975 ( जिसे इसमें इसके पश्चात् सीमाशुल्क अधिनियम कहा गया है) की धारा 8 ग का लोप किया जाएगा ।
141. सीमाशुल्क टैरिफ अधिनियम की पहली अनुसूची का,-
पहली अनुसूची कासंशोधन।
(i) तीसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट रीति में संशोधन किया जाएगा;
(ii) 1 जनवरी, 2017 से चौथी अनुसूची में विनिर्दिष्ट रीति से भी संशोधन किया जाएगा ।
उत्पाद-शुल्क
धारा 5 क का 142. केंद्रीय उत्पाद- शुल्क अधिनियम, 1944 (जिसे इसमें इसके पश्चात् केंद्रीय उत्पाद- शुल्क 1944 का 1
संशोधन। अधिनियम कहा गया है) की धारा 5 क में, -
(i) उपधारा (5) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी , अर्थात्: -
"(5) उपधारा (1 ) या उपधारा (2क) के अधीन जारी प्रत्येक अधिसूचना, जब तक
अन्यथा उपबंधित न हो, राजपत्र में केन्द्रीय सरकार द्वारा उसके प्रकाशन के लिए जारी तारीख
को प्रवृत्त होगी ।" ;
(ii) उपधारा (6) का लोप किया जाएगा ।
धारा 11 क का 143. केंद्रीय उत्पाद- शुल्क अधिनियम की धारा 11 क में , "एक वर्ष " शब्दों के स्थान पर, जहां कहीं
संशोधन। वे आते हैं, " दो वर्ष" शब्द रखे जाएंगे ।
धारा 37ख का 144. केंद्रीय उत्पाद- शुल्क अधिनियम की धारा 37 ख में , " ऐसे माल पर " शब्दों के स्थान पर, " ऐसे
संशोधन । माल पर या इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के कार्यान्वयन के लिए " शब्द रखे जाएंगे ।
भारत का राजपत्र असाधारण
67 अनुभाग 1क]
145. केंद्रीय उत्पाद- शुल्क अधिनियम की तीसरी अनुसूची का,-
तीसरी अनुसूची कासंशोधन।
(i) पांचवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट रीति से संशोधन किया जाएगा;
(ii) छठी अनुसूची में विनिर्दिष्ट रीति से 1 जनवरी , 2017 से संशोधन किया जाएगा ।
उत्पाद- शुल्क टैरिफ
1986 का 5 146. केंद्रीय उत्पाद शुल्क टैरिफ अधिनियम, 1985 (जिसे इसमें इसके पश्चात् केंद्रीय उत्पाद शुल्क पहली अनुसूची का
टैरिफ अधिनियम कहा गया है) , की पहली अनुसूची का,- संशोधन ।
(i ) सातवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट रीति से संशोधन किया जाएगा;
( ii) आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट रीति से 1 जनवरी , 2017 से संशोधन किया जाएगा ।
147. केंद्रीय उत्पाद शुल्क टैरिफ अधिनियम की दूसरी अनुसूची का नवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट रीति दूसरी अनुसूची का
से, 1 जनवरी, 2017 से संशोधन किया जाएगा । संशोधन।
अध्याय 5
सेवा कर
1994 का 32
धारा 65 ख का
संशोधन।
148. वित्त अधिनियम, 1994 (जिसे इसमें इसके पश्चात् 1994 का अधिनियम कहा गया है) की धारा 65ख में, -
(क) खंड ( 11 ) का लोप किया जाएगा ।
(ख) खंड (44) के स्पष्टीकरण 2 के उपखंड ( ii ) में, मद ( क) के स्थान पर, निम्नलिखित मद रखी जाएगी , अर्थात्ः-
1998 का 17
"(क) राज्य सरकार की ओर से लाटरी वितरक या विक्रय अभिकर्ता द्वारा लाटरी के संवर्धन, विपणन, आयोजन, विक्रय या किसी प्रकार की लाटरी के आयोजन को लाटरी (विनियमन) अधिनियम , 1998 के उपबंधों के अनुसार किसी अन्य रीति से सुकर बनाने के संबंध में किया गया क्रियाकलाप ।" ।
149. 1994 के अधिनियम की धारा 66घ में,-
धारा 66 घ का संशोधन ।
(क) खंड (ठ) का लोप किया जाएगा;
(ख) 1 जून, 2016 से-
(i) खंड (ण) के उपखंड ( i) का लोप किया जाएगा;
(ii) खंड (त) के उपखंड ( ii ) का लोप किया जाएगा ।
धारा 66 ङ का
संशोधन ।
150. 1994 के अधिनियम की धारा 66ङ में, खंड (झ) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
" (ञ ) सरकार द्वारा , रेडियो आवृत्ति स्पैक्ट्रम के उपयोग और उसके पश्चात्वर्ती अंतरण के अधिकार का समनुदेशन।" ।
धारा 67 क का
संशोधन ।
151. 1994 के अधिनियम की धारा 67 क की विद्यमान धारा को उसकी उपधारा ( 1 ) के रूप में पुनः संख्यांकित किया जाएगा और इस प्रकार पुनः संख्यांकित उपधारा (1 ) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात्ः-
" (2) सेवा कर की दर के संबंध में समय या समय बिन्दु वह होगा जो विहित किया जाए ।"।
152. वित्त अधिनियम , 1994 की धारा 73 में,-
धारा 73 का संशोधन।
(i ) उपधारा (1 ) , उपधारा ( 1 क) , उपधारा (2क) और उपधारा (3) में, " अठारह मास " शब्दों के स्थान पर जहां कहीं वे आते हैं " तीस मास " शब्द रखे जाएंगे ;
(ii) उपधारा (4ख) के खंड (क) में " जिनकी परिसीमा उपधारा ( 1 ) में अठारह मास विनिर्दिष्ट की गई है " , शब्दों के स्थान पर "जो उपधारा (1 ) के अधीन आते हैं ", शब्द रखे जाएंगे ।
68
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2--
धारा 75 का संशोधन।
153. 1994 के अधिनियम की धारा 75 में " परंतु " शब्द के स्थान पर, निम्निलिखित रखा जाएगा, अर्थात्: -
" परंतु किसी ऐसे व्यक्ति की दशा में जिसने सेवा कर के रूप में किसी रकम का संग्रहण किया है किंतु उस तारीख को या उसके पूर्व जिसको ऐसा संदाय देय है, इस प्रकार संगृहीत रकम का केंद्रीय सरकार के जमा खाते में संदाय करने में असफल रहा है , वहां केंद्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ब्याज की ऐसी अन्य दर विनिर्दिष्ट कर सकेगी , जो वह आवश्यक समझेः
परंतु यह और कि " ।
154. 1994 के अधिनियम की धारा 78 क में निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा,
धारा 78 क का संशोधन ।
अर्थात्:-
"स्पष्टीकरण-शंकाओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है जहां कोई सेवा कर उद्गृहीत नहीं किया गया है या संदत्त नहीं किया गया है या कम उद्गृहीत किया गया है या कम संदत्त किया गया है या भूलवश उसका प्रतिदाय किया गया है और धारा 73 की उपधारा ( 1 ) या धारा 73 की उपधारा ( 1 ) के परंतुक के अधीन जारी सूचना के संबंध में कार्यवाहियों को, यथास्थिति, धारा 76 के पहले परंतुक के खंड (i ) या धारा 78 के दूसरे परंतुक के खंड ( i ) के उपबंधों के अनुसार समाप्त कर दिया गया है, वहां इस धारा के अधीन किसी व्यक्ति के विरुद्ध लंबित कार्यवाहियां भी समाप्त हुई समझी जाएंगी ।" ।
धारा 89 का संशोधन।
155.1994 के अधिनियम की धारा 89 की उपधारा (1 ) में "पचास लाख रुपए " शब्दों के स्थान पर, दोनों स्थानों पर जहां वे आते हैं, "दो करोड़ रुपए " शब्द रखे जाएंगे ।
156. 1994 के अधिनियम की धारा 90 की उपधारा (2) का लोप किया जाएगा ।
धारा 90 का संशोधन ।
157. 1994 के अधिनियम की धारा 91 में,-
धारा 91 का संशोधन।
(क) उपधारा (1 ) में, "खंड ( i) या " शब्दों, कोष्ठकों और अंक का लोप किया जाएगा;
(ख) उपधारा (3) का लोप किया जाएगा ।
धारा 93 क का संशोधन ।
158. 1994 के अधिनियम की धारा 93 क में " विहित की जाए " शब्दों के स्थान पर, "विहित की जाए या राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए " शब्द रखे जाएंगे ।
159. 1994 के अधिनियम में, धारा 100 के पश्चात्, निम्नलिखित धाराएं अंतःस्थापित की जाएंगी, अर्थात्ः-
नई धारा 101 , धारा 102 और धारा 103 का अन्तःस्थापन।
नहर, बांध आदि के सन्निर्माण से संबंधित कतिपय मामलों में छूट के लिएविशेष उपबंध ।
" 101. (1 ) धारा 66 ख में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, 1 जुलाई, 2012 से प्रारंभ होने वाली और 29 जनवरी, 2014 को समाप्त होने वाली अवधि (दोनों दिन सम्मिलित है) के दौरान, संविधान के अनुच्छेद 243 ब के अधीन किसी नगरपालिका को न्यस्त नहर, बांध या अन्य सिंचन संकर्मों के सन्निर्माण, परिनिर्माण , संस्थापन, प्रतिष्ठापन, समापन, सज्जित करने , मरम्मत, अनुरक्षण, नवीकरण या परिवर्तन के लिए किसी कार्य को करने के लिए साम्य या नियंत्रण द्वारा नब्बे प्रतिशत या अधिक की भागीदारी के साथ-
(i) संसद् या राज्य विधान- मंडल के किसी अधिनियम द्वारा स्थापित ;
(ii) सरकार द्वारा स्थापित,
किसी प्राधिकरण या बोर्ड या किसी अन्य निकाय को उपलब्ध कराई गई कराधेय सेवाओं के संबंध में कोई सेवा कर उद्गृहीत या संगृहीत नहीं किया जाएगा।
(2) ऐसे समस्त सेवा कर का प्रतिदाय किया जाएगा, जो संगृहीत किया गया है किन्तु जो इस प्रकार संगृहीत नहीं किया गया होता, यदि उपधारा (1 ) सभी तात्त्विक समयों पर प्रवर्तन में रही होती ।
(3) इस अध्याय में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, सेवा कर के प्रतिदाय के दावे के लिए कोई आवेदन, उस तारीख से, जिसको वित्त विधेयक, 2016 को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त होती है, छह मास की अवधि के भीतर किया जाएगा ।
102. (1 ) धारा 66ख में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, 1 अप्रैल , 2015 से प्रारंभ होने वाली और 29 फरवरी, 2016 को समाप्त होने वाली अवधि (दोनों दिन सम्मिलित है) के दौरान
सरकारी भवनों के सन्निर्माण से संबंधित कतिपय मामलों में छूट के लिए विशेष उपबंध ।
/ भारत का राजपत्र असाधारण
69 अनुभाग 1क]
1 मार्च, 2015 के पूर्व की गई किसी संविदा के अधीन और जिस पर उस तारीख से पूर्व समुचित स्टाम्प शुल्क, जहां लागू हो , का संदाय किया गया है,-
(क) किसी सिविल संरचना या किसी अन्य मूल संकर्म के, जो प्रधानतया वाणिज्य, उद्योग अथवा किसी अन्य कारबार या वृत्ति से भिन्न उपयोग के लिए बनाई गई है या किया गया है ;
(ख) किसी संरचना के, जो प्रधानतया,-
(i) किसी शैक्षणिक संस्थापन ;
(ii) किसी नैदानिक संस्थापन ; या
(iii) किसी कला अथवा संस्कृति संबंधी संस्थापन,
के रूप में उपयोग किए जाने के लिए बनाई गई है ;
(ग) ऐसे किसी आवासिक प्रक्षेत्र के, जो प्रधानतया स्वतः उपयोग के लिए या उनके कर्मचारियों के उपयोग के लिए या उक्त अधिनियम की धारा 65 ख के खंड (44) के स्पष्टीकरण 1 में विनिर्दिष्ट अन्य व्यक्तियों के उपयोग के लिए बनाया गया है,
के सन्निर्माण, परिनिर्माण, संस्थापन, प्रतिष्ठापन, पूरा करने , सज्जित करने, मरम्मत, अनुरक्षण , नवीकरण या परिवर्तन द्वारा सरकार, किसी स्थानीय प्राधिकरण या किसी सरकारी प्राधिकरण को उपलब्ध कराई गई कराधेय सेवाओं के संबंध में कोई सेवा कर उद्गृहीत या संगृहीत नहीं किया जाएगा ।
(2) ऐसे समस्त सेवा कर का प्रतिदाय किया जाएगा, जो संगृहीत किया गया है किन्तु जो इस प्रकार संगृहीत नहीं किया गया होता, यदि उपधारा (1 ) सभी तात्त्विक समयों पर प्रवर्तन में रही होती ।
(3) इस अध्याय में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , सेवा कर के प्रतिदाय से दावे के लिए कोई आवेदन, उस तारीख से, जिसको वित्त विधेयक, 2016 को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त होती है, छह मास की अवधि के भीतर किया जाएगा ।
पत्तन के सन्निर्माण से संबंधित कतिपय मामलों में छूट के लिए विशेष उपबंध । विमानपत्तन या 103. (1 ) धारा 66ख में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, 1 अप्रैल, 2015 से प्रारंभ होने वाली और 29 फरवरी, 2016 को समाप्त होने वाली अवधि (दोनों दिन सम्मिलित है) के दौरान, कि ऐसी संविदा के अधीन, जो 1 मार्च, 2015 के पूर्व की गई थी और जिस पर, इस शर्त के अधीन रहते हुए कि भारत सरकार के, यथास्थिति, नागर विमानन मंत्रालय या पोत परिवहन मंत्रालय ने यह प्रमाणित किया है कि संविदा 1 मार्च, 2015 से पूर्व की गई थी, उस तारीख से पूर्व समुचित स्टांप शुल्क, जहां लागू हो, संदाय कर दिया गया है, किसी विमानपत्तन या पत्तन से संबंधित मौलिक संकर्मों के सन्निर्माण , परिनिर्माण , संस्थापन , या प्रतिष्ठापन द्वारा उपलब्ध कराई गई सेवाओं के संबंध में कोई सेवा कर उद्गृहीत या संगृहीत नहीं किया जाएगा ।
(2) ऐसे समस्त सेवा कर का प्रतिदाय किया जाएगा, जो संगृहीत किया गया है किन्तु जो इस प्रकार संगृहीत नहीं किया गया होता, यदि उपधारा (1 ) सभी तात्त्विक समयों पर प्रवर्तन में रही होती ।
(3) इस अध्याय में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, सेवा कर के प्रतिदाय से दावे के लिए कोई आवेदन, उस तारीख से, जिसको वित्त विधेयक, 2016 को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त होती है, छह मास की अवधि के भीतर किया जाएगा ।
1994 का 32
1994 की धारा 93क के अधीन जारी अधिसूचना का संशोधन। वित्त अधिनियम, 160. (1 ) वित्त अधिनियम , 1994 की धारा 93 क के अधीन जारी , ऐसी कराधेय सेवाओं पर जो माल के निर्यात द्वारा प्राप्त की जाती है और जिनका माल के निर्यात के लिए उपयोग किया जाता है, संदत्त सेवा कर की रिबेट देने से संबंधित भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) की अधिसूचना संख्या सा.का.नि. 519 (अ) , तारीख 29 जून, 2012 संशोधित हो जाएगी और दसवीं अनुसूची के स्तंभ (2) में विनिर्दिष्ट रीति से, अनुसूची के स्तंभ (3 ) में विनिर्दिष्ट तत्स्थानी तारीखों से ही और विनिर्दिष्ट तारीखों तक भूतलक्षी रूप से संशोधित की गई समझी जाएगी और तद्नुसार इस प्रकार यथा संशोधित उक्त अधिसूचना के अधीन की गई या की जाने के लिए तात्पर्यित कोई कार्रवाई या कोई बात सभी प्रयोजनों के लिए विधिमान्य रूप से और प्रभावी रूप से इस प्रकार की गई और सदैव की गई समझी जाएगी मानो इस उपधारा द्वारा यथा संशोधित उक्त अधिसूचना सभी तात्विक समयों पर प्रवर्तन में थी ।
70
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(2) ऐसे समस्त सेवा कर की रिबेट अनुदत्त की जाएगी जिसे अस्वीकार कर दिया गया है किंतु जिसे इस प्रकार अस्वीकार नहीं किया जाता यदि उपधारा ( 1 ) में किया गया संशोधन सभी तात्विक समयों पर प्रवर्तन में होता।
1994का 32 (3) वित्त अधिनियम, 1994 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (2) के अधीन सेवा कर की रिबेट के दावे के लिए कोई आवेदन वित्त विधेयक, 2016 के प्रारम्भ होने की तारीख से एक मास की अवधि के भीतर किया जाएगा ।
अध्याय 6
कृषि कल्याण उपकर
161. (1 ) यह अध्याय 1 जून, 2016 को प्रवृत्त होगा ।
कृषि कल्याण उपकर।
(2) कृषि संबंधी सुधार को प्रारम्भ करने के या उससे संबंधित किसी अन्य प्रयोजन के वित्तपोषण और संवर्धन के प्रयोजनों के लिए, इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार, सभी या किन्हीं कराधेय सेवाओं पर, ऐसी सेवाओं के मूल्य के 0.5 प्रतिशत की दर से, सेवा कर के रूप में कृषि कल्याण उपकर नामक उपकर उद्गृहीत और संगृहीत किया जाएगा ।
1994का 32 (3) उपधारा (2) के अधीन उद्गृहीत कृषि कल्याण उपकर, वित्त अधिनियम, 1994 के अध्याय 5 के अधीन और तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन ऐसी कराधेय सेवाओं पर उद्ग्रहणीय किसी उपकर या सेवाकर के अतिरिक्त होगा ।
(4) उपधारा (2) के अधीन उद्गृहीत कृषि कल्याण उपकर के आगमों को पहले भारत की संचित निधि में जमा किया जाएगा और केंद्रीय सरकार, संसद् द्वारा इस निमित्त विधि द्वारा किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात्, कृषि कल्याण उपकर की ऐसी धनराशियों का, उपधारा (2 ) में विनिर्दिष्ट ऐसे प्रयोजनों के लिए , जो वह आवश्यक समझे, उपयोग कर सकेगी ।
1994का 32 (5) वित्त अधिनियम , 1994 के अध्याय 5 और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंध, जिसके अंतर्गत वे उपबंध भी हैं, जो कर, ब्याज के प्रतिदाय और उससे छूट और शास्ति के अधिरोपण के संबंध में हैं, जहां तक हो सके, कराधेय सेवाओं पर कृषि कल्याण उपकर उद्ग्रहण और संग्रहण के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे , जैसे वे , यथास्थिति, उक्त अध्याय या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन ऐसी कराधेय सेवाओं पर कर के उद्ग्रहण और संग्रहण के संबंध में लागू होते हैं ।
अध्याय 7
अवसंरचनात्मक उपकर
अवसंरचनात्मक उपकर।
162. (1 ) अवसंरचनात्मक परियोजनाओं के वित्तपोषण के प्रयोजनों के लिए ग्यारहवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट ऐसे माल की दशा में , जो विनिर्मित या उत्पादित माल है, संघ के प्रयोजनों के लिए, उक्त अनुसूची में विनिर्दिष्ट दर पर अवसंरचनात्मक उपकर नामक उत्पाद शुल्क उद्गृहीत और संगृहीत किया जाएगा ।
1944 का 1 (2) ग्यारहवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट माल पर प्रभार्य , उपधारा ( 1 ) के अधीन उद्ग्रहणीय उपकर, केंद्रीय उत्पाद- शुल्क अधिनियम, 1944 या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन ऐसे माल पर प्रभार्य किन्हीं अन्य उत्पाद- शुल्क के अतिरिक्त होगा ।
1944का 1 (3) केंद्रीय उत्पाद- शुल्क अधिनियम , 1944 और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंध, जिसके अंतर्गत ऐसे नियम भी हैं, जो निर्धारण, अनुग्रहण, कम उद्ग्रहण, प्रतिदायों, ब्याज, अपीलों, अपराधों और शास्तियों से संबंधित हैं, जहां तक हो सके, ग्यारहवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट माल के संबंध में उपधारा (1 ) के अधीन उद्ग्रहणीय उपकर के उद्ग्रहण और संग्रहण के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे , जैसे वे , यथास्थिति, उक्त अधिनियम या नियमों के अधीन ऐसे माल पर उत्पाद शुल्क के उद्ग्रहण और संग्रहण के संबंध में लागू होते हैं ।
(4) उपधारा (1 ) के अधीन उद्ग्रहणीय उपकर संघ के प्रयोजनों के लिए होगा और उसके आगमों का राज्यों के बीच वितरण नहीं किया जाएगा ।
भारत का राजपत्र असाधारण
71 अनुभाग 1क]
अध्याय 8
समकरण उद्ग्रहण
163. (1 ) इस अध्याय का विस्तार जम्मू- कश्मीर राज्य के सिवाय संपूर्ण भारत पर है ।
विस्तार, प्रारंभ और लागू होना।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे ।
(3) यह इस अध्याय के प्रारंभ पर या उसके पश्चात् उपलब्ध विनिर्दिष्ट सेवाओं के लिए प्राप्त या प्राप्य प्रतिफल को लागू होगा ।
परिभाषाएं ।
164. इस अध्याय में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) "अपील अधिकरण " से आय- कर अधिनियम की धारा 252 के अधीन गठित अपील अधिकरण अभिप्रेत है;
(ख) "निर्धारण अधिकारी " से ऐसा आय- कर अधिकारी या आय- कर सहायक आयुक्त या आय- कर उपायुक्त या आय- कर संयुक्त आयुक्त या आय- कर अपर आयुक्त अभिप्रेत है जिसे बोर्ड द्वारा इस अध्याय के अधीन किसी निर्धारण अधिकारी को प्रदत्त सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने या समनुदेशित सभी या किन्हीं कृत्यों का पालन करने के लिए प्राधिकृत किया गया है ;
1963 का 54
(ग) "बोर्ड" से केंद्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1963 के अधीन गठित केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड अभिप्रेत है ;
(घ) " समकरण उद्ग्रहण " से इस अध्याय के उपबंधों के अधीन किसी विनिर्दिष्ट सेवा के लिए प्राप्त या प्राप्य प्रतिफल पर उग्रहणीय कर अभिप्रेत है;
1961 का 43
(ङ) "आय-कर अधिनियम " से आय- कर अधिनियम, 1961 अभिप्रेत है ;
(च) " आनलाइन" से कोई सुविधा या सेवा या अधिकार या फायदा या पहुंच अभिप्रेत है जो इंटरनेट या डिजिटल या दूरसंचार नेटवर्क के किसी अन्य रूप के माध्यम से अभिप्राप्त किया जाता है;
(छ) "स्थायी स्थापन " के अंतर्गत कारबार का कोई नियत स्थान भी है जिसके माध्यम से उद्यम का पूर्णतः या भागतः कारबार किया जाता है;
(ज) "विहित" से इस अध्याय के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है ;
(झ) "विनिर्दिष्ट सेवा " से आनलाइन विज्ञापन, आनलाइन विज्ञापन के प्रयोजन के लिए डिजिटल विज्ञापन स्थान या कोई अन्य सुविधा या सेवा के लिए कोई उपबंध अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत कोई अन्य सेवा भी है जिसे केंद्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अधिसूचना द्वारा विहित किया जाए ;
(ञ) उन सभी शब्दों और पदों के, जो इस अध्याय में प्रयुक्त हैं किंतु परिभाषित नहीं हैं और आय-कर अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे, जो उस अधिनियम में क्रमशः उनके हैं ।
165. (1 ) इस अध्याय के प्रारंभ की तारीख से ही, किसी व्यक्ति द्वारा जो अनिवासी है,-
समकरण उद्ग्रहण का प्रभार ।
(i ) किसी व्यक्ति से जो भारत में निवासी है और कारबार या वृत्ति कर रहा है; या
(ii) किसी अनिवासी से जिसका भारत में स्थायी स्थापन है,
प्राप्त या प्राप्य किसी विनिर्दिष्ट सेवा के लिए प्रतिफल की रकम पर छह प्रतिशत की दर से समकरण उद्ग्रहण प्रभारित किया जाएगा ।
(2) उपधारा (1 ) के अधीन समकरण उद्ग्रहण वहां प्रभारित नहीं किया जाएगा, जहां
(क) अनिवासी जो विनिर्दिष्ट सेवा प्रदान कर रहा है, का भारत में स्थायी स्थापन है और विनिर्दिष्ट सेवा ऐसे स्थायी स्थापन से प्रभावी रूप से संबद्ध है;
(ख) अनिवासी द्वारा भारत में निवासी व्यक्ति से और जो कारबार या वृत्ति कर रहा है या किसी अनिवासी से जिसका भारत में स्थायी स्थापन है, किसी पूर्व वर्ष में विनिर्दिष्ट सेवा के लिए प्राप्त या प्राप्य प्रतिफल की कुल रकम एक लाख रुपए से अधिक नहीं होती है ; या 72
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(ग) जहां भारत में निवासी व्यक्ति या भारत में स्थायी स्थापन द्वारा विनिर्दिष्ट सेवा के लिए संदाय कारबार या वृत्ति चलाने के प्रयोजनों के लिए नहीं है ।
समकरण उद्ग्रहण का संग्रहण और वसूली।
166. (1 ) प्रत्येक व्यक्ति, जो निवासी है और कारबार या वृत्ति कर रहा है या अनिवासी है जिसका भारत में स्थायी स्थापन है ( जिसे इस अध्याय में निर्धारिती कहा गया है) विनिर्दिष्ट सेवा के संबंध में किसी अनिवासी को संदत्त या संदेय रकम से धारा 165 में विनिर्दिष्ट दर पर समकरण उद्ग्रहण की कटौती करेगा यदि किसी पूर्ववर्ष में विनिर्दिष्ट सेवा के लिए प्रतिफल की कुल रकम एक लाख रुपए से अधिक हो जाती है ।
(2) उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार उक्त कलैंडर मास में इस प्रकार कटौती किए गए समकरण उद्ग्रहण का प्रत्येक निर्धारिती द्वारा उक्त कलैंडर मास के ठीक पश्चात्वर्ती मास की सात तारीख तक केंद्रीय सरकार के जमा खाते में संदाय किया जाएगा ।
(3) कोई निर्धारिती जो उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसरण में उग्रहण की कटौती करने में असफल रहता है, ऐसी असफलता के होते हुए भी उपधारा ( 2) के उपबंधों के अनुसरण में केंद्रीय सरकार के जमा खाते में उग्रहण का संदाय करने का दायी होगा ।
विवरण प्रस्तुत करना ।
167. (1 ) प्रत्येक निर्धारिती प्रत्येक वित्त वर्ष की समाप्ति के पश्चात् विहित समय के भीतर ऐसे वित्तीय वर्ष के दौरान सभी विनिर्दिष्ट सेवाओं के संबंध में ऐसे प्ररूप में, ऐसी रीति में सत्यापित और ऐसी विशिष्टियों को बताते हुए, जो विहित की जाएं, एक विवरण तैयार करेगा और उस निर्धारण अधिकारी को या बोर्ड द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य प्राधिकारी या अधिकरण को परिदत्त करेगा या परिदत्त करवाएगा ।
(2) कोई निर्धारिती जिसने उपधारा (1 ) के अधीन विहित समय के भीतर विवरण को प्रस्तुत नहीं किया है या उपधारा ( 1 ) के अधीन विवरण प्रस्तुत करने पर उसमें कोई लोप या गलत विशिष्टि उसके ध्यान में आती है, तो वह उस वित्त वर्ष के अंत से दो वर्ष के अवसान से पूर्व किसी समय जिसमें विनिर्दिष्ट सेवा प्रदान की गई थी, यथास्थिति, एक विवरण या पुनरीक्षित विवरण प्रस्तुत कर सकेगा ।
(3) जहां कोई निर्धारिती उपधारा ( 1 ) के अधीन विहित समय के भीतर विवरण प्रस्तुत करने में असफल रहता है वहां निर्धारण अधिकारी ऐसे निर्धारिती पर, उससे विहित प्ररूप में, विहित रीति से सत्यापित और ऐसी विशिष्टियां बताते हुए और ऐसे समय के भीतर जो विहित किया जाए , विवरण प्रस्तुत करने की अपेक्षा करते हुए सूचना की तामील कर सकेगा ।
विवरण पर कार्यवाही ।
168. (1 ) जहां किसी निर्धारिती द्वारा धारा 164 के अधीन कोई विवरण दिया गया है, वहां ऐसे विवरण पर निम्नलिखित रीति में कार्यवाही की जाएगी, अर्थात् :-
(क) समकरण उद्ग्रहण की संगणना विवरण में किसी अंकगणितीय गलती को समायोजित करने के पश्चात् की जाएगी;
(ख) ब्याज, यदि कोई हो, की संगणना विवरण में यथा संगणित कटौती करने योग्य राशि के आधार पर की जाएगी;
(ग) निर्धारिती द्वारा संदेय राशि या उसे देय प्रतिदाय की रकम का अवधारण खंड (ख ) के अधीन संगणित रकम का धारा 166 की उपधारा (2) के अधीन या धारा 170 के अधीन संदत्त रकम और कर या ब्याज के माध्यम से अन्यथा संदत्त रकम से समायोजन करने के पश्चात् किया जाएगा;
(घ) खंड (ग) के अधीन निर्धारिती द्वारा संदेय अवधारित राशि को या उसे देय प्रतिदाय की रकम को विनिर्दिष्ट करते हुए एक सूचना तैयार की जाएगी या सृजित की जाएगी तथा उसे निर्धारिती
को भेजा जाएगा; और
(ङ) खंड (ग) के अधीन अवधारण के अनुसरण में निर्धारिती को देय प्रतिदाय की रकम उसे अनुदत्त की जाएगी:
परंतु उस वित्तीय वर्ष , जिसमें विवरण प्रस्तुत किया गया है, के अंत से एक वर्ष की अवधि के अवसान के पश्चात् इस उपधारा के अधीन कोई सूचना नहीं भेजी जाएगी ।
(2) उपधारा (1 ) के अधीन विवरणों पर कार्यवाही करने के प्रयोजन के लिए , बोर्ड उस उपधारा की अपेक्षानुसार निर्धारिती द्वारा संदेय कर का या उसे देय प्रतिदाय का शीघ्रता से अवधारण करने के लिए ऐसे विवरणों की केंद्रीयकृत कार्यवाही के लिए एक स्कीम बना सकेगा ।
भारत का राजपत्र असाधारण
73 अनुभाग 1 क]
भूल सुधार ।
169. (1 ) अभिलेख से प्रकट किसी भूल का सुधार करने की दृष्टि से, निर्धारण अधिकारी धारा 168 के अधीन जारी किसी सूचना का, उस वित्त वर्ष की समाप्ति से, जिसमें उस सूचना को जारी किया गया था जिसका संशोधन करने की ईप्सा की गई है, एक वर्ष की अवधि के भीतर संशोधन कर सकेगा ।
(2) निर्धारण अधिकारी उपधारा (1 ) के अधीन किसी सूचना में या तो स्वप्रेरणा से या निर्धारिती द्वारा उसके ध्यान में लाई गई किसी भूल के लिए संशोधन कर सकेगा ।
(3) किसी सूचना में कोई संशोधन जिसका प्रभाव निर्धारिती के दायित्व में वृद्धि करना या प्रतिदाय को कम करना है, इस धारा के अधीन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक निर्धारण अधिकारी ने निर्धारिती को ऐसा करने के अपने आशय की सूचना न दे दी हो और निर्धारिती को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर प्रदान न कर दिया गया हो ।
(4) जहां किसी सूचना में ऐसे संशोधन का प्रभाव संदेय राशि में वृद्धि करना या पहले से ही किए गए प्रतिदाय में कमी करना है तो निर्धारण अधिकारी निर्धारिती द्वारा संदेय राशि को विनिर्दिष्ट करते हुए एक आदेश करेगा और इस अध्याय के उपबंध तद्नुसार लागू होंगे ।
समकरण उद्ग्रहण के संदाय में विलंब पर ब्याज ।
170. प्रत्येक निर्धारिती जो धारा 166 के अधीन यथा अपेक्षित समकरण उद्ग्रहण या उसके किसी भाग का केन्द्रीय सरकार के खाते में उस धारा में विनिर्दिष्ट अवधि में जमा करने में असफल रहता है तो वह प्रत्येक मास या मास के प्रत्येक भाग के लिए जिसके द्वारा ऐसे कर या उसके भाग का प्रत्यय करने में विलंब होता है, एक प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज का संदाय करेगा ।
171. कोई निर्धारिती जो
(क) धारा 166 के अधीन यथा अपेक्षित सम्पूर्ण समकरण उद्ग्रहण की या उसके किसी भाग की कटौती करने में असफल रहता है ; या
समकरण उद्ग्रहण की कटौती या संदाय करने में असफलता के लिए शास्ति।
(ख) समकरण उद्ग्रहण की कटौती करने पर ऐसे उद्ग्रहण का उस धारा की उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसरण में केन्द्रीय सरकार के जमा खाते में संदाय करने में असफल रहता है, वह
(i) खंड (क) में निर्दिष्ट मामले में, उस धारा की उपधारा ( 3 ) के उपबंधों के अनुसार उद्ग्रहण या धारा 170 के उपबंधों के अनुसार ब्याज , यदि कोई हो का संदाय करने के अतिरिक्त समकरण उद्ग्रहण की रकम जिसकी कटौती करने में वह असफल रहा था के बराबर शास्ति का दायी होगा ; और
(ii) खंड (ख) में निर्दिष्ट मामले में, उस धारा की उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसार उद्ग्रहण और धारा 170 के उपबंधों के अनुसार ब्याज के संदाय के अतिरिक्त प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान असफलता जारी रहती है एक हजार रुपए की शास्ति का दायी होगा तथापि इस खंड के अधीन शास्ति उस समकरण उद्ग्रहण की रकम से अधिक नहीं होगी जिसका संदाय करने में वह असफल रहा है ।
172. जहां कोई निर्धारिती धारा 167 की उपधारा (1 ) या उपधारा ( 3) के अधीन विहित समय के भीतर विवरण प्रस्तुत करने में असफल रहता है तो वह प्रत्येक दिन के लिए जिसके दौरान असफलता जारी रहती है एक हजार रुपए की शास्ति का संदाय करने का दायी होगा ।
विवरण प्रस्तुत करने में असफलता के लिए शास्ति।
173. (1) धारा 171 या धारा 172 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी उक्त धाराओं में निर्दिष्ट किसी असफलता के लिए कोई शास्ति अधिरोपणीय नहीं होगी यदि निर्धारिती , निर्धारण अधिकारी के समाधानप्रद रूप में यह साबित कर देता है कि उक्त सफलता के लिए युक्तियुक्त कारण था ।
कतिपय मामलों में शास्ति का अधिरोपित न किया जाना।
(2) इस अध्याय के अधीन शास्ति अधिरोपित करने का कोई आदेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक निर्धारिती को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर प्रदान न कर दिया गया हो ।
आय- कर आयुक्त (अपील ) कोअपील।
174. (1 ) इस अध्याय के अधीन शास्ति अधिरोपित करने के आदेश से व्यथित कोई निर्धारिती, निर्धारण अधिकारी के आदेश की प्राप्ति की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर आय- कर आयुक्त (अपील) को अपील कर सकेगा ।
(2) उपधारा (1 ) के अधीन अपील ऐसे रूप में और ऐसी रीति में सत्यापित होगी जैसा विहित किया जाए और उसके साथ एक हजार रुपए की फीस संलग्न होगी ।
74
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(3) जहां उपधारा ( 1 ) के अधीन कोई अपील फाइल की गई है, वहां आय- कर अधिनियम की धारा 249 से धारा 251 के उपबंध, जहां तक हो सके, ऐसी अपील को लागू होंगे ।
अपील अधिकरण को अपील।
175. (1 ) आय-कर आयुक्त (अपील) द्वारा धारा 174 के अधीन किए गए किसी आदेश से व्यथित निर्धारिती ऐसे आदेश के विरुद्ध अपील अधिकरण को अपील कर सकेगा ।
(2) आय-कर आयुक्त, यदि वह धारा 174 के अधीन आय-कर आयुक्त (अपील) द्वारा पारित किसी आदेश पर आक्षेप करता है तो वह निर्धारण अधिकारी को ऐसे आदेश के विरुद्ध अपील अधिकरण में अपील करने का निदेश दे सकेगा ।
(3) उपधारा ( 1 ) या उपधारा (2) के अधीन कोई अपील उस तारीख से जिसको वह आदेश जिसके विरुद्ध अपील करने की वांछा की गई है, यथास्थिति, निर्धारिती या आय- कर आयुक्त द्वारा प्राप्त करने की तारीख से साठ दिन के भीतर की जाएगी ।
(4) उपधारा (1 ) या उपधारा (2) के अधीन कोई अपील ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में सत्यापित की जाएगी जो विहित किया जाए तथा उपधारा ( 1 ) के अधीन फाइल की गई अपील की दशा में उसके साथ एक हजार रुपए की फीस संलग्न होगी।
(5) जहां कोई अपील, अपील अधिकरण के समक्ष उपधारा (1 ) या उपधारा (2) के अधीन फाइल की गई है तो आय- कर अधिनियम की धारा 253 से धारा 255 के उपबंध, जहां तक हो सके, ऐसी अपील को लागू होंगे ।
मिथ्याकथन के लिए दंड।
176. (1 ) यदि कोई व्यक्ति इस अध्याय या उसके तद्धीन बनाए गए किसी नियम के अधीन किसी सत्यापन में कोई मिथ्या कथन करता है या कोई ऐसा लेखा या विवरण परिदत्त करता है जो मिथ्या है और जिसके संबंध में या तो वह जानता है या विश्वास करता है कि वह मिथ्या है या उसके सत्य होने का विश्वास नहीं करता है तो वह कारावास से जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माने से दंडनीय होगा ।
1974का 2 (2) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी उपधारा ( 1 ) के अधीन दंडनीय कोई अपराध उस संहिता के अर्थ में असंज्ञेय माना जाएगा ।
अभियोजन संस्थितकरना ।
177. धारा 176 के अधीन किसी अपराध के लिए किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई अभियोजन, मुख्य आय-कर आयुक्त की पूर्व मंजूरी के सिवाय संस्थित नहीं किया जाएगा ।
आय-कर अधिनियम के कतिपय उपबंधों कालागू होना ।
178. आय-कर अधिनियम की धारा 120 , धारा 131 , धारा 133 क, धारा 138 , धारा 156, अध्याय 15 और धारा 220 से धारा 227 , धारा 229, धारा 232, धारा 260 क, धारा 261 , धारा 262, धारा 265 से धारा 269, धारा 278ख , धारा 280 क, धारा 280 ख , धारा 280 ग, धारा 280 घ, धारा 282 और धारा 288 से धारा 293 के उपबंध जहां तक हो सके समकरण उद्ग्रहण के संबंध में ऐसे लागू होंगे जैसे वह आय- कर के संबंध में लागू होते हैं ।
नियम बनाने की शक्ति।
179. (1 ) केन्द्रीय सरकार, इस अध्याय के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए , राजपत्र में अधिसूचना द्वारा , नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्ही विषयों के लिए उपबंध किया जा सकेगा , अर्थात् :-
(क) वह समय और प्ररूप तथा रीति जिसमें विवरण धारा 167 के अधीन परिदत्त किया जाएगा या उसे परिदत्त या प्रस्तुत कराया जाएगा ;
(ख) वह प्ररूप जिसमें कोई अपील फाइल की जा सकेगी तथा वह रीति जिसमें धारा 174 और धारा 175 के अधीन उसका सत्यापन किया जा सकेगा ;
(ग) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना हो या विहित किया जाए ।
(3) इस अध्याय के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के, या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि 75
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किंतु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति।
180. (1 ) यदि इस अध्याय के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केंद्रीय सरकार राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, जो इस अध्याय के उपबंधों से असंगत न हो, उस कठिनाई को दूर कर सकेगी:
परंतु ऐसा कोई आदेश , ऐसी तारीख से , जिसको इस अध्याय के उपबंध प्रवृत्त होते हैं, दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश , किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।
अध्याय 9
आय की घोषणा स्कीम , 2016
181. (1 ) इस स्कीम का संक्षिप्त नाम आय की घोषणा स्कीम , 2016 है ।
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ ।
(2) यह 1 जून, 2016 को प्रवृत्त होगी ।
182. इस स्कीम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो , -
परिभाषाएं ।
(क) "घोषणाकर्ता" से धारा 183 की उपधारा ( 1 ) के अधीन घोषणा करने वाला व्यक्ति अभिप्रेत है;
(ख) "आय-कर अधिनियम " से आय- कर अधिनियम, 1961 अभिप्रेत है;
1961 का 43
(ग) उन सभी अन्य शब्दों और पदों के जो इसमें प्रयुक्त हैं किंतु परिभाषित नहीं हैं और आय- कर अधिनियम में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे, जो उस अधिनियम में क्रमशः उनके हैं ।
अप्रकटित आय की घोषणा ।
183. (1 ) कोई व्यक्ति इस स्कीम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस स्कीम के प्रारंभ होने की तारीख को या उसके पश्चात् किंतु केंद्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित की जाने वाली तारीख को या उससे पूर्व1 अप्रैल, 2017 से आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से पूर्व किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में आय - कर अधिनियम के अधीन प्रभार्य किसी ऐसी आय के संबंध में घोषणा कर सकेगा-
(क) जिसके संबंध में वह आय- कर अधिनियम की धारा 139 के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने में असफल रहा है ;
(ख) जिसका वह इस स्कीम के प्रारंभ होने की तारीख से पूर्व आय- कर अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रस्तुत आय की विवरणी में प्रकटन करने में असफल रहा है ;
(ग) जो ऐसे व्यक्ति की ओर से, आय- कर अधिनियम के अधीन विवरणी देने में या निर्धारण के लिए या इसके अन्यथा सभी आवश्यक सारवान् तथ्यों का पूर्णतया और सत्य प्रकटन करने में लोप करने या असफल रहने के कारण निर्धारण से बच गया है ।
(2) जहां कर से प्रभार्य आय की घोषणा किसी आस्ति में विनिधान के रूप में की गई है, स्कीम के प्रारंभ की तारीख को ऐसी आस्ति का उचित बाजार मूल्य उपधारा (1 ) के प्रयोजनों के लिए अप्रकटित आय समझा जाएगा ।
जाए । (3) किसी आस्ति के उचित बाजार मूल्य का अवधारण ऐसी रीति से किया जाएगा जो विहित की
(4) ऐसी आय के विरुद्ध जिसके संबंध में इस धारा के अधीन घोषणा की गई है, किसी व्यय या मोक के सम्बन्ध में कोई कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी ।
कर प्रभार और
अधिभार।
184. (1 ) आय-कर अधिनियम या वित्त अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी धारा 183 में विनिर्दिष्ट समय के भीतर उसके अधीन घोषित अप्रकटित आय ऐसी अप्रकटित आय के तीस प्रतिशत की दर से कर से प्रभार्य होगी ।
76
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2--
(2) उपधारा (1 ) में प्रभार्य कर की रकम में, संगणित कर पर संघ के प्रयोजनों के लिए ऐसे कर के पच्चीस प्रतिशत की दर से कृषि कल्याण उपकर के नाम से ज्ञात अधिभार द्वारा वृद्धि की जाएगी जिससे कृषकों के कल्याण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को पूरा किया जा सके ।
शास्ति।
185. आय-कर अधिनियम या किसी वित्त अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी अप्रकटित आय की घोषणा करने वाला व्यक्ति धारा 184 के अधीन कर और अधिभार के अतिरिक्त ऐसे कर की पच्चीस प्रतिशत की दर पर शास्ति का दायी होगा ।
घोषणा करने की रीति।
186. (1 ) धारा 183 के अधीन घोषणा प्रधान आयुक्त या आयुक्त को की जाएगी और ऐसे प्ररूप में की जाएगी और ऐसी रीति में सत्यापित की जाएगी, जो विहित किया जाए ।
(2) ऐसी घोषणा निम्नलिखित द्वारा हस्ताक्षरित होगी,-
(क) जहां घोषणाकर्ता कोई व्यष्टि है, वहां स्वयं व्यष्टि द्वारा, जहां ऐसा व्यष्टि भारत से अनुपस्थित है, वहां संबंधित व्यष्टि द्वारा या इस निमित्त उसके द्वारा सम्यक् रूप से प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा और जहां व्यष्टि अपने कामकाज की देखभाल करने में मानसिक रूप से असमर्थ है, वहां उसके संरक्षक द्वारा या उसकी ओर से कार्य करने के लिए सक्षम किसी अन्य व्यक्ति द्वारा ;
(ख) जहां घोषणाकर्ता कोई हिन्दू अविभक्त कुटुंब है, वहां कर्ता द्वारा और जहां कर्ता भारत से अनुपस्थित है या अपने कामकाज की देखभाल करने में मानसिक रूप से असमर्थ है, वहां ऐसे कुटुंब के किसी अन्य वयस्क सदस्य द्वारा;
(ग) जहां घोषणाकर्ता कोई कंपनी है वहां उसके प्रबंध निदेशक द्वारा , या जहां किसी अपरिहार्य कारण से ऐसा प्रबंध निदेशक घोषणा पर हस्ताक्षर करने में असमर्थ है या जहां कोई प्रबंध निदेशक नहीं है, वहां उसके किसी निदेशक द्वारा;
(घ) जहां घोषणाकर्ता कोई फर्म है, वहां उसके प्रबंध भागीदार द्वारा या जहां किसी अपरिहार्य कारण से ऐसा प्रबंध भागीदार घोषणा पर हस्ताक्षर करने में असमर्थ है या जहां उस प्रकार का कोई प्रबंध भागीदार नहीं है , वहां उसके किसी ऐसे भागीदार द्वारा , जो अवयस्क न हो ;
(ङ) जहां घोषणाकर्ता कोई अन्य संगम है , वहां संगम के किसी अन्य सदस्य या उसके प्रधान अधिकारी द्वारा ; और
(च) जहां घोषणाकर्ता कोई अन्य व्यक्ति है, वहां उस व्यक्ति द्वारा या उसकी ओर से कार्य करने के लिए सक्षम किसी अन्य व्यक्ति द्वारा ।
(3) कोई व्यक्ति, जिसने धारा 183 की उपधारा (1 ) के अधीन अपनी आय के संबंध में या किसी अन्य व्यक्तिकी आय के संबंध में प्रतिनिधि निर्धारिती के रूप में घोषणा की है, वह उस उपधारा के अधीन अपनी आय या ऐसे व्यक्ति की आय के संबंध में कोई अन्य घोषणा करने का हकदार नहीं होगा, यदि ऐसी कोई भी अन्य घोषणा की जाती है तो उसे शून्य समझा जाएगा ।
187. (1 ) अप्रकटित आय के संबंध में धारा 184 के अधीन संदेय कर और अधिभार तथा धारा 185 के अधीन संदेय शास्ति केंद्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित तारीख को या उससे पूर्व संदत्त की जाएगी ।
कर का संदाय करने के लिए समय।
(2) घोषणाकर्ता उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचित तारीख को या उससे पूर्व उस प्रधान आयुक्त या आयुक्त के पास कर, जिसके समक्ष धारा 183 के अधीन घोषणा की गई थी , अधिभार और शास्ति के संदाय का सबूत फाइल करेगा।
(3) यदि घोषणाकर्ता धारा 183 के अधीन कर, अधिभार और शास्ति का उपधारा (1 ) के अधींन विनिर्दिष्ट तारीख को या उससे पूर्व संदाय करने में असफल रहता है तो उसके द्वारा की गई घोषणा, इस स्कीम के अधीन कभी नहीं की गई समझी जाएगी ।
भारत का राजपत्र असाधारण
77 अनुभाग 1क]
अप्रकट आय का
कुल आय में
सम्मिलित न
किया जाना।
188. धारा 183 के अनुसरण में घोषित की गई अप्रकटित आय की रकम को आय- कर अधिनियम के अधीन किसी निर्धारण वर्ष के लिए घोषणाकर्ता की कुल आय में सम्मिलित नहीं किया जाएगा, यदि घोषणाकर्ता धारा 184 में निर्दिष्ट कर और अधिभार तथा धारा 185 में निर्दिष्ट शास्ति का धारा 187 की उपधारा ( 1 ) में विनिर्दिष्ट तारीख तक संदाय कर देता है ।
घोषित अप्रकटित 1957 का 27
आय का संपूरित 189. इस स्कीम के अधीन घोषणाकर्ता, घोषित अप्रकटित आय या उस पर संदत्त कर और अधिभार की किसी रकम के संबंध में आय- कर अधिनियम या धन- कर अधिनियम, 1957 के अधीन किए गए किसी निर्धारण या पुनः निर्धारण को पुनः खोलने या ऐसे निर्धारण या पुनः निर्धारण के संबंध में किसी अपील , निर्देश या अन्य कार्यवाहियों में किसी मुजरे या अनुतोष का दावा करने का हकदार नहीं होगा ।
निर्धारणों की अंतिमता परकोई प्रभाव न होना।
1988 का 45
कतिपय मामलों
में घोषित अप्रकटित आय
काबेनामी 190. बेनामी संव्यवहार (प्रतिषेध) अधिनियम, 1988 के उपबंध ऐसी अप्रकटित आय की घोषणा के सम्बन्ध में लागू नहीं होंगे जो किसी आस्ति में विनिधान के रूप में की गई है, यदि किसी बेनामीदार के नाम में विद्यमान आस्ति ऐसे घोषणाकर्ता को जो ऐसा व्यक्ति है जिसनें ऐसी आस्ति के लिए प्रतिफल दिया है या उसके विधिक प्रतिनिधि को, केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित अवधि के भीतर अंतरित हो जाती है ।
संव्यवहार न
माना जाना।
स्वेच्छ्ख्या प्रकट की 191. धारा 184 के अधीन की गई घोषणा के अनुसरण में संदत्त कर और अधिभार की कोई रकम या धारा 183 के अधीन की गई घोषणा के अनुसरण में धारा 185 के अधीन संदत्त शास्ति प्रतिदेय नहीं होगी । गई आय की बाबत कर का प्रतिदेय न होना।
घोषणाकर्ता के
विरुद्ध साक्ष्य के
रूप में घोषणा का 1957 का 27
अनुज्ञेय न होना।
192. तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी धारा 183 के अधीन की गई किसी घोषणा में अंतर्विष्ट कोई बात धारा 185 के अधीन उद्ग्रहणीय शास्ति से भिन्न शास्ति के अधिरोपण से संबंधित किसी कार्यवाही के प्रयोजन के लिए या आय- कर अधिनियम या धन- कर अधिनियम , 1957 के अधीन अभियोजन के प्रयोजनों के लिए घोषणाकर्ता के विरुद्ध साक्ष्य के रूप में ग्राह्य नहीं होगी ।
तथ्यों के
दुर्व्यपदेशन द्वारा
की गई घोषणा 193. इस स्कीम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी कोई घोषणा तथ्यों के दुर्व्यपदेशन या तथ्यों को छिपाकर की जाती है तो ऐसी घोषणा शून्य होगी और इस स्कीम के अधीन कभी नहीं की गई समझी जाएगी ।
काशून्य होना ।
घोषणा में
विनिर्दिष्ट 194. (1 ) जहां अप्रकटित आय नकद (जिसके अंतर्गत बैंक जमा है) सोना- चांदी, शेयरों में विनिधान या धारा 183 के अधीन की गई घोषणा में विनिर्दिष्ट अन्य आस्तियों के रूप में है-
आस्तियों के
संबंध में धन -कर 1957 का 27
से छूट।
(क) जिसके संबंध में घोषणाकर्ता 1 अप्रैल , 2015 को या उससे पूर्व आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए आय- कर अधिनियम, 1957 की धारा 14 के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने में असफल रहा है ; या
(ख) जिसे उसके द्वारा उक्त निर्धारण वर्ष या वर्षों के लिए प्रस्तुत शुद्ध धन की विवरणी में दर्शित नहीं किया गया है ; या
(ग) जिसका उसके द्वारा उक्त निर्धारण वर्ष या वर्षों के लिए प्रस्तुत शुद्ध धन की विवरणी में कम कथन किया गया है,
1957 का 27 तब आय- कर अधिनियम, 1957 या तद्धीन बनाए गए नियमों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी,-
(i ) खंड (क) या खंड (ख ) में निर्दिष्ट आस्तियों के संबंध में घोषणाकर्ता द्वारा धन - कर संदेय नहीं होगा और ऐसी आस्तियों को उक्त निर्धारण वर्ष या वर्षों के लिए उसके शुद्ध धन में सम्मिलित नहीं किया जाएगा ;
(ii ) वह रकम, जिसका खंड (ग) में निर्दिष्ट आस्तियों के मूल्य का उक्त निर्धारण वर्ष या वर्षों के लिए शुद्ध धन की विवरणी में कम कथन किया गया है, उस सीमा तक जिस तक ऐसी रकम ऐसी आस्तियों के अर्जन के लिए उपयोग की गई आय के स्वैच्छिक प्रकटन से अधिक नहीं होती है, को घोषणाकर्ता के शुद्ध धन की संगणना करने के लिए उक्त निर्धारण वर्ष या वर्षों के लिए हिसाब में नहीं ली जाएगी ।
स्पष्टीकरण-जहां धारा 183 के अधीन कोई घोषणा किसी फर्म द्वारा की जाती है, वहां , यथास्थिति, उपखंड (i ) में निर्दिष्ट आस्तियां, या उपखंड ( ii ) में निर्दिष्ट रकम को, यथास्थिति, फर्म के किसी भागीदार के शुद्ध धन की संगणना करने में या फर्म में किसी भागीदार के हित के मूल्य का अवधारण करने में हिसाब में नहीं लिया जाएगा ।
78
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(2) उपधारा (1 ) के उपबंध तब तक लागू नहीं होंगे जब तक धारा 187 की उपधारा (1 ) और उपधारा ( 2) में विनिर्दिष्ट शर्तों को घोषणाकर्ता द्वारा पूरा नहीं किया जाता है।
1957 का 27 195. विशेष मामलों में दायित्व से संबंधित आय- कर अधिनियम के अध्याय 15 और उस अधिनियम की धारा 119, धारा 138 और धारा 189 के उपबंध या विशेष मामलों में निर्धारण संबंधी दायित्व से संबंधित धन- कर अधिनियम, 1957 के अध्याय 5 के उपबंध, जहां तक हो सके, इस स्कीम के अधीन कार्यवाहियों के संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे , यथास्थिति, आय- कर अधिनियम या धन- कर अधिनियम के अधीन कार्यवाहियों के संबंध में लागू होते हैं ।
आय-कर अधिनियम और धन-कर अधिनियम के अध्याय 5 के कतिपय उपबंधों का लागू होना ।
196. इस स्कीम के उपबंध निम्नलिखित को लागू नहीं होंगे-
कतिपय व्यक्तियों कोस्कीम कालागू न होना ।
1974 का 52 (क) किसी व्यक्ति को, जिसके संबंध में विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी निवारण अधिनियम, 1974 के अधीन निरोध का कोई आदेश किया गया है :
परंतु-
(i) निरोध का ऐसा आदेश , जो ऐसा कोई आदेश है जिसको उक्त अधिनियम की धारा 9 या धारा 12 क के उपबंध लागू नहीं होते हैं, जिसका उक्त अधिनियम की धारा 8 के अधीन सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट पर या सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट की प्राप्ति से पूर्व प्रतिसंहरण नहीं किया गया है ; या
(ii ) निरोध का ऐसा आदेश जिसको उक्त अधिनियम की धारा 9 के उपबंध लागू होते हैं, का धारा 9 की उपधारा ( 3) के अधीन पुनर्विलोकन के लिए अवधि के अवसान से पूर्व या उसके आधार पर या उक्त अधिनियम की धारा 9 की उपधारा (2) के साथ पठित धारा 8 के अधीन सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट पर प्रतिसंहरण नहीं किया गया है ; या
(iii) निरोध का ऐसा आदेश जो ऐसा कोई आदेश है जिसको उक्त अधिनियम की धारा 12क के उपबंध लागू होते हैं, का उस धारा की उपधारा ( 3 ) के अधीन पहले पुनर्विलोकन के लिए अवधि के अवसान से पूर्व या उसके आधार पर या उक्त अधिनियम की धारा 12 क की उपधारा (6) के साथ पठित धारा 8 के अधीन सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर प्रतिसंहरण नहीं किया गया है ; या
(iv) निरोध के ऐसे आदेश को सक्षम अधिकारिता वाले किसी न्यायालय द्वारा अपास्त नहीं किया गया है ;
1860का 45
1985 का 61
1967 का 37
1988 का 49 (ख) भारतीय दंड संहिता के अध्याय 9 या अध्याय 17, स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम , 1985, विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अधीन दंडनीय किसी अपराध के अभियोजन के संबंध में ;
1992का 27 (ग) विशेष न्यायालय (प्रतिभूति संव्यवहार अपराध विचारण ) अधिनियम, 1992 की धारा 3 के अधीन अधिसूचित किसी व्यक्ति को ;
2015 का 22 (घ) किसी अप्रकटित विदेशी आय और आस्ति के संबंध में, जो काला धन (अप्रकटित विदेशी आय और आस्तियां) और कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 के अधीन कर से प्रभार्य है ;
(ङ) 1 अप्रैल, 2017 से प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ती वर्ष के लिए आय- कर अधिनियम के अधीन कर से प्रभार्य किसी अप्रकटित आय के संबंध में,-
(i ) जहां आय- कर अधिनियम की धारा 142 या धारा 143 की उपधारा (2) या धारा 148 या धारा 153 क या धारा 153 ग के अधीन ऐसे निर्धारण वर्ष के संबंध में सूचना जारी की गई है और निर्धारण अधिकारी के समक्ष कार्यवाही लंबित है ; या
(ii ) जहां किसी पूर्ववर्ष में आय- कर अधिनियम की धारा 132 के अधीन तलाशी की गई है या धारा 132 क के अधीन अध्यपेक्षा की गई है या धारा 133 क के अधीन सर्वेक्षण किया गया भारत का राजपत्र असाधारण
79 अनुभाग 1क]
है और ऐसे पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए उक्त अधिनियम की धारा 143 की उपधारा (2 ) के अधीन सूचना या धारा 153 क या धारा 153 ग के अधीन ऐसे पूर्ववर्ष से पूर्व किसी पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए सूचना जारी नहीं की गई है और ऐसी सूचना के जारी करने के समय का अवसान नहीं हुआ है ; या
( iii) जहां केन्द्रीय सरकार द्वारा आय- कर अधिनियम की धारा 90 या धारा 90क के अधीन किए गए समझोते के अधीन सक्षम प्राधिकारी द्वारा ऐसी अप्रकटित आस्ति के संबंध में कोई सूचना प्राप्त की गई है ।
197. शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि
शंकाओं का दूर किया जाना।
(क) धारा 183 की उपधारा ( 1) में अभिव्यक्त रूप से यथा उपबंधित के सिवाय इस स्कीम में अंतर्विष्ट किसी बात का, इस स्कीम के अधीन घोषणा करने वाले व्यक्ति से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति कोकोई फायदा, छूट या उन्मुक्ति प्रदान करने के रूप में अर्थ नहीं लगाया जाएगा ;
(ख) जहां धारा 183 के अधीन कोई घोषणा की जाती है किंतु धारा 187 के अधीन विनिर्दिष्ट समय के भीतर धारा 184 और धारा 185 में निर्दिष्ट कर, अधिभार और शास्ति संदत नहीं की जाती है तो अप्रकटित आय उस पूर्ववर्ष में जिसमें ऐसी घोषणा की गई है, आय- कर अधिनियम के अधीन कर से प्रभार्य होगी :
(ग) जहां इस स्कीम में आरंभ होने से पूर्व ऐसी आय से ऐसी कोई आय उद्भुत हुई है, उत्पन्न हुई है, या प्राप्त की गई है या कोई आस्ति अर्जित की गई है और ऐसी आय के संबंध में इस स्कीम के अधीन कोई घोषणा नहीं की गई है, वहां उस वर्ष में जिसमें आय- कर अधिनियम की धारा 142, धारा 143 की उपधारा (2) या धारा 148 या धारा 153 क या धारा 153 ग के अधीन निर्धारण अधिकारी द्वारा सूचना जारी की गई है
(i) ऐसी आय को, यथास्थिति, उद्भुत, उत्पन्न या प्राप्त किया गया समझा जाएगा, या
(ii) ऐसी आय से अर्जित आस्ति के मूल्य को अर्जित या उत्पन्न किया गया माना जाएगा,
और तद्नुसार आय- कर अधिनियम के उपबंध लागू होंगे ।
कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति।
198. (1 ) यदि इस स्कीम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केंद्रीय सरकार, ऐसे आदेश द्वारा , जो इस स्कीम के उपबंधों से असंगत न हों , उस कठिनाई को दूर कर सकेगी :
परंतु ऐसा कोई आदेश , उस तारीख से, जिसको इस स्कीम के उपबंध प्रवृत होंगे , दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।
नियम बनाने की शक्ति।
199. (1 ) बोर्ड, इस स्कीम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए, केन्द्रीय सरकार के नियंत्रणाधीन रहते हुए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा , नियम बना सकेगा।
(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में उस प्ररूप का जिसमें धारा 183 के अधीन ऐसी घोषणा की जा सकेगी और ऐसी रीति जिसमें उसका सत्यापन किया जा सकेगा, का उपबंध किया जा सकेगा ।
(3) इस स्कीम के अधीन बनाए गए प्रत्येक नियम को बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के, या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्वदोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किंतु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
80
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
अध्याय 10
प्रत्यक्ष कर विवाद समाधान स्कीम , 2016
200. ( 1 ) इस स्कीम का संक्षिप्त नाम प्रत्यक्ष कर विवाद समाधान स्कीम , 2016 है ।
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ ।
(2) यह 1 जून, 2016 को प्रवृत्त होगी ।
परिभाषाएं ।
201. इस स्कीम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) "घोषणाकर्ता" से धारा 202 के अधीन घोषणा करने वाला व्यक्ति अभिप्रेत है;
(ख) " अभिहित प्राधिकारी " से आय - कर आयुक्त से अनिम्न पंक्ति का और प्रधान मुख्य आयुक्त द्वारा इस स्कीम के प्रयोजनों के लिए अधिसूचित कोई अधिकारी अभिप्रेत है;
(ग) किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में " विवादित आय " से कुल आय का संपूर्ण या उतना भाग अभिप्रेत है जो विवादित कर के सम्बन्ध में है ;
(घ) "विवादित कर" से, आय- कर अधिनियम और धन- कर अधिनियम के अधीन अवधारित ऐसा कर, अभिप्रेत है, जो यथास्थिति, निर्धारिती या घोषणाकर्ता द्वारा विवादित है ;
(ङ) किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में "विवादित धन " से, शुद्ध धन का संपूर्ण या उतना कोई भाग अभिप्रेत है जो विवादित कर के सम्बन्ध में है ;
1961 का 43 (च) " आय- कर अधिनियम" से आय-कर अधिनियम, 1961 अभिप्रेत है ;
(छ) "विनिर्दिष्ट कर " से ऐसा कर अभिप्रेत है
(i ) जिसका अवधारण , आय- कर अधिनियम या धन- कर अधिनियम में भूतलक्षी प्रभाव से किए गए किसी संशोधन के परिणामस्वरूप किया गया है या जिसे उसके द्वारा विधिमान्य बनाया गया है और जो उस तारीख से पूर्व की अवधि से सम्बन्धित है जिसको, यथास्थिति, आय-कर अधिनियम या धन- कर अधिनियम में संशोधन करने वाले अधिनियम को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त होती है ; और
( ii) ऐसे कर के सम्बन्ध में 29 फरवरी , 2016 को कोई विवाद लम्बित है ;
(ज) "कर बकाया" से, आय- कर अधिनियम या धन- कर अधिनियम, के अधीन अवधारित कर ब्याज या शास्ति की रकम अभिप्रेत है जिसके संबंध में आय- कर आयुक्त (अपील) या धन-कर आयुक्त (अपील) के समक्ष 29 फरवरी, 2016 को अपील लंबित है ;
1957 का 27 (झ) " धन-कर अधिनियम" से धन- कर अधिनियम, 1957 अभिप्रेत है;
(ञ) उन सभी शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं किंतु परिभाषित नहीं हैं और, यथास्थिति, आय-कर अधिनियम या धन- कर अधिनियम में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो उनके क्रमशः उन अधिनियमों में हैं ।
संदेय कर की घोषणा ।
202. इस स्कीम के उपबंधों के अधीन रहते हुए जहां कोई घोषणाकर्ता 1 जून, 2016 को या उसके पश्चात् किंतु केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित की जाने वाली तारीख को या उससे पूर्व अभिहित प्राधिकारी को धारा 203 के उपबंधों के अनुसार कर बकाया या विनिर्दिष्ट कर के संबंध में कोई घोषणा करता है तो आय- कर अधिनियम या धन - कर अधिनियम में या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में किसी अन्य उपबंध के होते हुए भी घोषणाकर्ता द्वारा इस स्कीम के अधीन संदेय रकम निम्नानुसार होगी, अर्थात्:-
(1) कर बकाया से संबंधित लंबित अपील की दशा में, जो,-
(क) कर और ब्याज हो, -
(i) उस दशा में, जहां विवादित कर दस लाख रुपए से अनधिक है, यथास्थिति, निर्धारण या पुनःनिर्धारण की तारीख तक संपूर्ण विवादित कर और विवादित कर पर ब्याज ; या भारत का राजपत्र असाधारण
81 अनुभाग 1क]
(ii ) किसी अन्य दशा में , संपूर्ण विवादित कर, उद्ग्रहणीय न्यूनतम शास्ति का पच्चीस प्रतिशत और, यथास्थिति, निर्धारण या पुनः निर्धारण की तारीख तक विवादित कर पर ब्याज ;
(ख) शास्ति से संबंधित लंबित अपील की दशा में उद्ग्रहणीय न्यूनतम शास्ति का पच्चीस प्रतिशत और अंतिम रूप से अवधारित कुल आय पर संदेय कर और ब्याज ।
( II) विनिर्दिष्ट कर की दशा में, इस प्रकार अवधारित ऐसे कर की रकम ।
प्रस्तुत की जाने वाली विशिष्टियां।
203. (1 ) धारा 202 के अधीन एक घोषणा ऐसे प्ररूप में की जाएगी और ऐसी रीति में सत्यापित की जाएगी जो विहित की जाए ।
(2) जहां घोषणा कर बकाया के संबंध में है, वहां ऐसी घोषणा के परिणामस्वरूप विवादित आय, विवादित धन और कर बकाया के संबंध में, यथास्थिति, आय- कर आयुक्त (अपील) या धन- कर आयुक्त (अपील) के समक्ष लंबित अपील वापस ली गई समझी जाएगी ।
(3) जहां घोषणा विनिर्दिष्ट कर के संबंध में हो और घोषणाकर्ता ने,-
(क) विनिर्दिष्ट कर की बाबत किसी आदेश के विरुद्ध कोई अपील, यथास्थिति, आय- कर आयुक्त (अपील) या धन- कर आयुक्त (अपील) या अपील अधिकरण या उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के समक्ष या कोई रिट याचिका उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के समक्ष फाइल की हो, तो, जहां भी अपेक्षित हो, वह ऐसी अपील या रिट याचिका न्यायालय की अनुमति से वापस लेगा और उपधारा (1 ) में निर्दिष्ट घोषणा के साथ ऐसी वापसी का प्रमाण फाइल करेगा ;
(ख) माध्यस्थम्, सुलह या मध्यकता के लिए कार्यवाहियां प्रारंभ की हैं या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन या भारत द्वारा किसी अन्य देश या भारत के बाहर राज्यक्षेत्र के साथ किए गए किसी करार के अधीन, चाहे विनिधान के संरक्षण या अन्यथा के लिए हो कोई सूचना दी है वहां घोषणा करने के पूर्व ऐसी कार्यवाहियों को, ऐसी सूचना या दावा, यदि कोई हो, वापस लेगा और उपधारा (1 ) में निर्दिष्ट घोषणा के साथ ऐसी वापसी का प्रमाण फाइल करेगा ।
(4) जहां घोषणा विनिर्दिष्ट कर के संबंध में हो, वहां घोषणाकर्ता, उपधारा (3) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में सत्यापित जो विहित की जाए , इस संबंध में कानून द्वारा या उपधारा (3 ) के खंड ( ख ) में निर्दिष्ट किसी करार के अधीन साम्या में, विनिर्दिष्ट कर के संबंध में किसी उपचार या दावे की ईप्सा या अग्रसर करने के लिए अपने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष अधिकार का अधित्यजन करते हुए , जो अन्यथा उसे तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन उपलब्ध होता, वचनबंध फाइल करेगा ।
(5) जहां,-
(क) घोषणा में दी गई कोई तात्त्विक विशिष्टि किसी प्रक्रम पर गलत पाई जाती है ; या
(ख ) घोषणाकर्ता इस स्कीम में निर्दिष्ट शर्तों में से किसी का अतिक्रमण करता है ; या
(ग) घोषणाकर्ता ऐसी रीति में कार्य करता है, जो उपधारा (4) के अधीन उसके द्वारा दिए गए वचनबंध के अनुसार नहीं है,
वहां यह उपधारणा की जाएगी मानो स्कीम के अधीन कभी भी घोषणा नहीं की गई थी, और, यथास्थिति, आय-कर अधिनियम या धन- कर अधिनियम के अधीन सभी पारिणामिक परिस्थितियां, जिनके अधीन घोषणाकर्ता के विरुद्ध कार्यवाहियां लंबित हैं या थीं, पुनः प्रवर्तित हुई समझी जाएंगी ।
(6) कोई भी अपील प्राधिकारी या मध्यस्थ, सुलहकार या मध्यक घोषणा में उल्लिखित किसी भी विनिर्दिष्ट कर से संबंधित और जिसके संबंध में धारा 204 की उपधारा (1 ) के अधीन अभिहित प्राधिकारी द्वारा कोई आदेश किया गया था या उस धारा के अधीन अवधारित राशि के संदाय से संबंधित किसी विवाद्यक को विनिश्चित करने की कार्यवाही नहीं करेगा ।
संदाय का समय और रीति ।
204. (1 ) अभिहित प्राधिकारी घोषणा की प्राप्ति की तारीख से साठ दिन की अवधि के भीतर इस स्कीम के उपबंधों के अनुसार घोषणाकर्ता द्वारा संदेय रकम को अवधारित करेगा और घोषणाकर्ता को ऐसे प्ररूप में जो विहित किया जाए, एक प्रमाणपत्र, यथास्थिति, कर बकाया या विनिर्दिष्ट कर की विशिष्टियों और उसमें ऐसे अवधारण के पश्चात्, संदेय राशि को उपवर्णित करते हुए अनुदत्त करेगा ।
82
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(2) घोषणाकर्ता अभिहित प्राधिकारी द्वारा उपधारा ( 1 ) के अधीन प्रदत्त प्रमाणपत्र के अनुसार अवधारित राशि का प्रमाणपत्र के प्राप्त होने की तारीख से तीस दिन के भीतर संदाय करेगा और ऐसे संदाय का तथ्य उसके सबूत सहित अभिहित प्राधिकारी को संसूचित करेगा और तत्पश्चात् अभिहित प्राधिकारी एक आदेश यह कथन करते हुए पारित करेगा कि घोषणाकर्ता ने राशि का संदाय कर दिया है ।
(3) इस स्कीम के अधीन संदेय राशि को अवधारित करने के लिए उपधारा (2) के अधीन पारित प्रत्येक आदेश उसमें कथित विषयों के संबंध में निश्चायक होगा और ऐसे आदेश में आने वाले किसी विषय पर, यथास्थिति, आय- कर अधिनियम या धन- कर अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन भारत द्वारा किसी अन्य देश के साथ या भारत से बाहर किसी राज्यक्षेत्र के साथ किए गए करार के अधीन, कोई कार्यवाही चाहे विनिधान के संरक्षण के लिए हो या अन्यथा पुनः चालू नहीं की जाएगी ।
205. अभिहित प्राधिकारी, धारा 204 में उपबंधित शर्तों के अधीन रहते हुए ,
(क) यथास्थिति, आय- कर अधिनियम या धन- कर अधिनियम के अधीन किसी अपराध के सम्बन्ध में कार्यवाहियां संस्थित करने से उन्मुक्ति प्रदान करेगा ;
कतिपय मामलों में अपराध संबंधी कार्यवाहियां आरंभ करने और शास्तिअधिरोपित करने से उन्मुक्ति।
(ख) निम्नलिखित के संबंध में , यथास्थिति, आय- कर अधिनियम या धन- कर अधिनियम के अधीन शास्ति के, यथास्थिति, अधिरोपण या अधित्यजन से उन्मुक्ति प्रदान करेगा,-
(i ) धारा 202 के अधीन घोषणा के अंतर्गत आने वाला विनिर्दिष्ट कर ; या
(ii ) घोषणा के अंतर्गत आने वाली कर बकाया, उस सीमा तक, जहां तक शास्ति धारा 202 के खंड ( I) में निर्दिष्ट शास्ति की रकम, से अधिक है ;
(ग) निम्नलिखित के संबंध में , यथास्थिति, आय- कर अधिनियम या धन- कर अधिनियम के अधीन ब्याज का अधित्यजन करेगा,-
(i) धारा 202 के अधीन घोषणा के अंतर्गत आने वाला विनिर्दिष्ट कर ; या
(ii ) घोषणा के अंतर्गत आने वाली कर बकाया, उस सीमा तक, जहां तक ब्याज धारा 202 के खंड (I) के उपखंड (क) में निर्दिष्ट ब्याज की रकम, ब्याज के आधिक्य में है ।
206. धारा 202 के अधीन की गई घोषणा के अनुसरण में संदत्त किसी रकम का किसी भी परिस्थिति में प्रतिदाय नहीं किया जाएगा ।
स्कीम के अधीन संदत्त रकम का कोई प्रतिदाय न होना।
207. धारा 204 की उपधारा (3) और धारा 205 में अन्यथा उपबंधित के सिवाय इस स्कीम में अंतर्विष्ट किसी बात का अर्थ घोषणाकर्ता के संबंध में की जाने वाली कार्यवाहियों से भिन्न किन्हीं कार्यवाहियों में घोषणाकर्ता को कोई फायदा, रियायत या उन्मुक्ति प्रदान करने के रूप में नहीं लगाया जाएगा ।
घोषणाकर्ता को कोई अन्यफायदा, छूट या उन्मुक्ति न देना ।
208. इस स्कीम के उपबंध,-
(क) किसी कर बकाया या विनिर्दिष्ट कर के संबंध में,-
कतिपयमामलों में स्कीम कालागू न होना।
(i ) किसी निर्धारण वर्ष जिसके संबंध में आय- कर अधिनियम की धारा 153 क या धारा 153ग के अधीन कोई निर्धारण किया गया है या धन- कर अधिनियम की धारा 37 क के अधीन की गई तलाशी या धारा 37 ख के अधीन की गई अध्यपेक्षा के परिणामस्वरूप निर्धारण वर्षों में से किसी के निर्धारण या पुनः निर्धारण के संबंध में लागू नहीं होंगे यदि यह किसी कर बकाया से संबंधित है;
(ii) किसी निर्धारण या पुनः निर्धारण के संबंध में, जिनकी बाबत आय- कर अधिनियम की धारा 133 क या धन- कर अधिनियम की धारा 38 क के अधीन किए गए सर्वेक्षण का संबंध है, लागू नहीं होंगे यदि यह किसी कर बकाया से संबंधित है;
(iii) किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में , जिसमें धारा 199 के अधीन घोषणा फाइल करने की तारीख को या उससे पूर्व कोई अभियोजन संस्थित किया गया है, लागू नहीं होंगे,
(iv) भारत से बाहर अवस्थित किसी स्रोत से अप्रकटित किसी आय या भारत से बाहर स्थित आस्ति से अप्रकटित किसी आय के संबंध में लागू नहीं होंगे ;
(v) आय-कर अधिनियम की धारा 90 या धारा 90 क में निर्दिष्ट किसी करार, यदि वह किसी कर बकाया से संबंधित है, के अधीन प्राप्त सूचना के आधार पर किए गए किसी निर्धारण या पुनः निर्धारण के संबंध में लागू नहीं होंगे ;
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
83
1974 का 52
(ख) किसी व्यक्ति के संबंध में, जिस पर विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी निवारण अधिनियम, 1974 के अधीन निरोध आदेश किया गया है, के संबंध में लागू नहीं होंगे :
पंरतु यह कि-
(i) निरोध का ऐसा आदेश , जो ऐसा कोई आदेश है जिसको उक्त अधिनियम की धारा 9 या धारा 12क के उपबंध लागू नहीं होते हैं, उक्त अधिनियम की धारा 8 के अधीन सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट पर या सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट की प्राप्ति से पूर्व प्रतिसंहृत नहीं किया गया है ; या
( ii) निरोध का ऐसा आदेश, जो ऐसा कोई आदेश है जिसको उक्त अधिनियम की धारा 9 के उपबंध लागू होते हैं , का उसके लिए अवधि के अवसान से पूर्व या धारा 9 की उपधारा (3) के अधीन पुनर्विलोकन के आधार पर या उक्त अधिनियम की धारा 9 की उपधारा (2) के साथ पठित धारा 8 के अधीन सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट पर प्रतिसंहरण नहीं किया गया है ; या
(iii) निरोध का ऐसा आदेश , जो ऐसा कोई आदेश है जिसको उक्त अधिनियम की धारा 12क के उपबंध लागू होते हैं, का उस धारा की उपधारा (3) के अधीन पहले पुनर्विलोकन के लिए अवधि के अवसान से पूर्व या उसके आधार पर या उक्त अधिनियम की धारा 12क की उपधारा (6) के साथ पठित धारा 8 के अधीन सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर प्रतिसंहृत नहीं किया गया है ; या
(iv) निरोध के ऐसे आदेश को सक्षम अधिकारिता वाले किसी न्यायालय द्वारा अपास्त नहीं किया गया है ;
1860 का 45
1967 का 37
1985 का 61
1988 का 49
(ग) किसी ऐसे व्यक्ति के संबंध में , जिसका भारतीय दंड संहिता, विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967, स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम , 1985 , भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के उपबंधों के अधीन या किसी नागरिक दायित्व का प्रवर्तन करने के प्रयोजन के लिए दंडनीय किसी अपराध के लिए घोषणा फाइल करने पर या उससे पूर्व अभियोजन संस्थितकिया गया है या ऐसे व्यक्ति को किसी ऐसे अपराध के लिए, उन अधिनियमों के अधीन सिद्धदोष ठहराया गया है, के संबंध में लागू नहीं होंगे ;
1992का 27
(घ) विशेष न्यायालय (प्रतिभूति संव्यवहार अपराध विचारण) अधिनियम, 1992 की धारा 3 के अधीन अधिसूचित किसी व्यक्ति के संबंध में लागू नहीं होंगे ।
209. (1 ) केंद्रीय सरकार प्राधिकारियों को इस स्कीम के समुचित प्रशासन के लिए समय- समय पर ऐसे निदेश और आदेश, जारी कर सकेगी , जो वह ठीक समझे :
केन्द्रीय सरकार की निदेश जारी करने की शक्ति।
परंतु ऐसा कोई अनुदेश या आदेश जारी नहीं किया जाएगा, जो किसी अभिहित प्राधिकारी से किसी विशिष्ट मामले का किसी विशिष्ट रीति में निपटान करने की अपेक्षा करे ।
(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना केंद्रीय सरकार यदि स्कीम के उचित और दक्ष प्रशासन के प्रयोजन के लिए तथा राजस्व के संग्रहण के लिए ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझती है तो समय - समय पर मामलों के किसी वर्ग के संबंध में स्कीम के प्रशासन के संबंध में कार्य के लिए और राजस्व के संग्रहण के लिए प्राधिकारियों द्वारा अनुसरण किए जाने के लिए मार्गदर्शक सिद्धांतों या प्रक्रियाओं के संबंध में निदेश या अनुदेश उपवर्णित करते हुए साधारण या विशेष आदेश जारी कर सकेगी और ऐसा कोई आदेश , यदि केंद्रीय सरकार का यह मत हो कि लोकहित में ऐसा करना आवश्यक है, ऐसी रीति में जो विहित की जाए , राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा ।
कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति ।
210. (1 ) यदि इस स्कीम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केंद्रीय सरकार, ऐसे आदेश द्वारा , जो इस स्कीम के उपबंधों से असंगत न हों, उस कठिनाई को दूर कर सकेगी :
परंतु ऐसा कोई आदेश, ऐसी तारीख से, जिसको इस स्कीम के उपबंध प्रवृत्त होते हैं, दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश , किए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।
नियम बनाने की शक्ति।
211. (1 ) केंद्रीय सरकार, इस स्कीम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा , नियम बना सकेगी ।
84
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों का उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात्:-
(क) धारा 203 की उपधारा ( 1 ) के अधीन वह प्ररूप जिसमें कोई घोषणा की जा सकेगी और वह रीति जिसमें ऐसी घोषणा का सत्यापन किया जा सकेगा ;
(ख) प्रमाणपत्र का प्ररूप जिसे धारा 204 की उपधारा ( 1 ) के अधीन अनुदत्त किया जा सकेगा ;
(ग) वह रीति, जिसमें धारा 209 की उपधारा (2) के अधीन आदेश प्रकाशित किए जा सकेंगे ;
(घ) कोई अन्य विषय, जो इस स्कीम द्वारा विहित किया जाना हो या विहित किया जाए अथवा जिसके संबंध में नियमों द्वारा उपबंध किया जाना हो ।
(3) इस स्कीम के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो , कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के, या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्वदोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभावी हो जाएगा किंतु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभावी होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
अध्याय 11
अप्रत्यक्ष कर विवाद समाधान स्कीम , 2016
212. (1 ) इस स्कीम का संक्षिप्त नाम अप्रत्यक्ष कर विवाद समाधान स्कीम, 2016 है ।
(2) यह 31 दिसंबर, 2016 तक की गई घोषणाओं को लागू होगी ।
संक्षिप्त नाम, लागू होना और प्रारंभ ।
(3) यह 1 जून, 2016 से प्रवृत्त होगी ।
213. (1 ) इस स्कीम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
परिभाषाएं ।
1962का 52 (क) "अधिनियम" से, यथास्थिति, सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 या केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 या वित्त अधिनियम, 1994 का अध्याय 5 अभिप्रेत है;
1944का 1 1994का 32 (ख) "सहायक आयुक्त" से, यथास्थिति, सीमाशुल्क सहायक आयुक्त या केंद्रीय उत्पाद- शुल्क सहायक आयुक्त या सेवा कर सहायक आयुक्त अभिप्रेत है;
(ग) "आयुक्त" से, यथास्थिति, सीमाशुल्क आयुक्त या केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्त या सेवा कर आयुक्त अभिप्रेत है;
(घ ) "घोषणाकर्ता" से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो धारा 214 की उपधारा ( 1 ) के अधीन घोषणा करता है;
(ङ) " अभिहित प्राधिकारी " से सहायक आयुक्त की पंक्ति से अनिम्न पंक्ति का कोई ऐसा अधिकारी अभिप्रेत है जिसे इस स्कीम के प्रयोजनों के लिए आयुक्त द्वारा सहायक आयुक्त के रूप में कार्य करने के लिए प्राधिकृत किया गया है;
(च) " आक्षेपित आदेश " से ऐसा आदेश अभिप्रेत है, जिसे आयुक्त (अपील ) के समक्ष चुनौती दी
गई है:
(छ) " अप्रत्यक्ष कर विवाद " से अधिनियम के उपबंधों में से किसी उपबंध के संबंध में ऐसा विवाद अभिप्रेत है जो 1 मार्च , 2016 को आयुक्त (अपील ) के समक्ष, आक्षेपित आदेश के विरुद्ध अपील के रूप में लंबित है;
(ज) "विहित " से इस स्कीम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(झ) "कर " के अन्तर्गत अधिनियम के अधीन उद्गृहीत शुल्क या कर भी है ।
भारत का राजपत्र असाधारण
85 अनुभाग 1 क]
(2) उन सभी शब्दों और पदों के, जो इसमें प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं किंतु अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे जो अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों में क्रमशः उनके हैं ।
घोषणा करने की प्रक्रिया।
214. (1 ) इस स्कीम के उपबंधों के अधीन रहते हुए कोई व्यक्ति, 31 दिसंबर, 2016 को या उसके पूर्व अभिहित प्राधिकारी को, ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से जो विहित की जाए , घोषणा कर सकेगा ।
(2) अभिहित प्राधिकारी , ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से जो विहित की जाए , घोषणा को अभिस्वीकृत
करेगा ।
(3) घोषणाकर्ता, उपधारा (2) के अधीन अभिस्वीकृति प्राप्त होने के पन्द्रह दिन के भीतर, शोध्य कर
का उस पर, अधिनियम में यथा उपबंधित दर पर ब्याज के साथ और आक्षेपाधीन आदेश में अधिरोपित शास्ति के पच्चीस प्रतिशत के बराबर शास्ति का संदाय करेगा और अभिहित प्राधिकारी को ऐसा संदाय करने के सात दिन के भीतर , किए गए संदाय के ब्यौरे उसके सबूत के साथ देते हुए सूचित करेगा ।
(4) अभिहित प्राधिकारी, उपधारा (3) के अधीन कर, ब्याज और शास्ति के संदाय का सबूत प्राप्त होने पर, ऐसा सबूत प्राप्त होने के पन्द्रह दिन के भीतर, ऐसे प्ररूप में जो विहित किया जाए, उपधारा (3 ) में निर्दिष्ट शोध्यों को चुकाए जाने संबंधी आदेश पारित करेगा ।
215. इस स्कीम के उपबंध तब लागू नहीं होंगे यदि -
(क) आक्षेपित आदेश तलाशी और अभिग्रहण संबंधी कार्यवाही के संबंध में पारित किया गया है ; या
कतिपय मामलों में स्कीमका लागू न होना ।
(ख) अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का अभियोजन 1 जून, 2016 से पूर्व संस्थित किया गया है; या
(ग) आक्षेपित आदेश स्वापक ओषधियों या अन्य प्रतिषिद्ध माल के संबंध में है; या
1860 का 45
1985 का 61
1988 का 49
(घ) आक्षेपित आदेश भारतीय दंड संहिता, स्वापक ओषधि और मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 या भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अधीन दंडनीय किसी अपराध के संबंध में है; या
1974 का 52
(ङ) कोई निरोध आदेश विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी निवारण अधिनियम, 1974 के अधीन पारित किया गया है ।
अधिनियम के अधीन अन्य उन्मुक्ति। कार्यवाहियों से 216. (1 ) अधिनियम के किसी उपबंध में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, धारा 214 की उपधारा (4 ) के अधीन कोई आदेश पारित किए जाने पर आयुक्त (अपील ) के समक्ष लंबित अपील का निपटान हो जाएगा और घोषणाकर्ता, ऐसे अप्रत्यक्ष- कर विवाद के संबंध में, जिसके लिए इस स्कीम के अधीन घोषणा की गई है, अधिनियम के अधीन सभी कार्यवाहियों से उन्मुक्त हो जाएगा ।
(2) धारा 214 की उपधारा (1 ) के अधीन की गई घोषणा, धारा 214 की उपधारा (4) के अधीन कोई आदेश जारी किए जाने पर निश्चायक हो जाएगी और उसके पश्चात् किसी प्राधिकरण या न्यायालय के समक्ष अधिनियम के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों में आक्षेपित आदेश से संबंधित कोई मामला पुनः चालू नहीं किया जाएगा ।
217. (1 ) धारा 214 की उपधारा ( 1 ) के अधीन की गई घोषणा के अनुसरण में संदत्त किसी धनराशि का प्रतिदाय नहीं किया जाएगा ।
स्कीम के अधीन किए गए आदेश के परिणाम ।
(2) धारा 214 की उपधारा (4) के अधीन पारित किसी आदेश को गुणागुण पर आधारित आदेश नहीं समझा जाएगा और उसका कोई बाध्यकारी प्रभाव नहीं होगा ।
स्पष्टीकरण- शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि इस स्कीम में अंतर्विष्ट किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह घोषणाकर्ता को धारा 216 के अधीन अनुदत्त फायदे,
रियायत या उन्मुक्ति से भिन्न कोई फायदा, रियायत या उन्मुक्ति प्रदान करती है ।
नियम बनाने की शक्ति।
218. (1 ) केंद्रीय सरकार, इस स्कीम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियम बना सकेगी ।
86
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(2) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों का उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात् :-
सकेगी; (क) वह प्ररूप और रीति जिसमें धारा 214 की उपधारा ( 1 ) के अधीन कोई घोषणा की जा
(ख) धारा 214 की उपधारा (2) के अधीन घोषणा अभिस्वीकृत करने का प्रारूप और रीति;
(ग) धारा 214 की उपधारा (4 ) के अधीन चुकाए जाने संबंधी आदेश जारी करने का प्रारूप और
रीति;
(घ) कोई अन्य विषय , जो नियमों द्वारा विहित किया जाना हो या विहित किया जाए अथवा जिसके संबंध में उपबंध किया जाना हो ।
(3) इस स्कीम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो , कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के, या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किंतु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
अध्याय 12
प्रकीर्ण
भाग 1
भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम , 1934 का संशोधन
1934के
अधिनियम 2 का
219. इस भाग के उपबंध उस तारीख को प्रवृत्त होंगे , जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा , नियत करे ।
संशोधन और
प्रारंभ।
1934का 2 उद्देशिकाका संशोधन ।
220. भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (जिसे इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम कहा गया है) की उद्देशिका के पैरा 2 और पैरा 3 के स्थान पर निम्नलिखित पैरे रखे जाएंगे , अर्थात्:-
" और अधिकाधिक जटिल अर्थव्यवस्था की चुनौती का सामना करने के लिए आधुनिक मुद्रा नीति सम्बन्धी रूपरेखा का होना आवश्यक है,
और मुद्रा नीति का प्राथमिक उद्देश्य, विकास के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना है ;
और भारत में मुद्रा नीति सम्बन्धी रूपरेखा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रवर्तित की जाएगी ; " ।
221. मूल अधिनियम की धारा 2 में,-
धारा 2 का संशोधन ।
(i) खंड (ख) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
'(खक) "उपभोक्ता मूल्य सूचकांक" से भारत सरकार द्वारा समय- समय पर प्रकाशित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक समुच्चय अभिप्रेत है ;' ;
(ii) खंड (ग) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्:-
'(गi ) " मुद्रा स्फीति" से मासिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की प्रतिशतता के रूप में अभिव्यक्त वर्षवार परिवर्तन अभिप्रेत है ;
भारत का राजपत्र असाधारण
87 अनुभाग 1क]
(गii ) " मुद्रा स्फीति लक्ष्य" से धारा 45यक की उपधारा (1 ) के अनुसार अवधारित मुद्रा स्फीति लक्ष्य अभिप्रेत है ; ';
( iii) खंड (गग) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
'(गगi ) "मुद्रा नीति समिति " से धारा 45 यख की उपधारा ( 1 ) के अधीन गठित समिति अभिप्रेत है ; ';
(iv) खंड (गगगग) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
' (गगगग i) "नीति दर" से धारा 17 की उपधारा (12कख) के अधीन रेपो- संव्यवहारों के लिए दर अभिप्रेत है ; ' ।
नए अध्याय उच का अंतःस्थापन ।
222. मूल अधिनियम के अध्याय उङ के पश्चात्, निम्नलिखित अध्याय अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्
"अध्याय उच
मुद्रा नीति
45य . इस अध्याय के उपबंध इस अधिनियम के किन्हीं अन्य उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी असंगत बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे ।
इस अध्याय के उपबंधों का अधिनियम के अन्य उपबंधों पर अभिभावी होना ।
मुद्रा स्फीति लक्ष्य ।
45यक. (1 ) केंद्रीय सरकार, बैंक के परामर्श से प्रत्येक पांच वर्ष में एक बार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के निबन्धनानुसार, मुद्रा स्फीति लक्ष्य का अवधारण करेगी ।
(2) केंद्रीय सरकार ऐसे अवधारण पर राजपत्र में मुद्रा स्फीति लक्ष्य अधिसूचित करेगी ।
45यख. (1 ) केंद्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा बैंक की मुद्रा नीति समिति के नाम से एक समिति का गठन करेगी ।
मुद्रा नीति समितिका गठन।
(2) मुद्रा नीति समिति में निम्नलिखित सदस्य होंगे , अर्थात्:-
(क) बैंक का गवर्नर- अध्यक्ष, पदेन ;
(ख) मुद्रा नीति का भारसाधक बैंक का डिप्टी गवर्नर सदस्य, पदेन ;
सदस्य,
(ग) बैंक का एक अधिकारी , जो केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाएगा
पदेन ; और
(घ) तीन व्यक्ति, जिन्हें केंद्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा सदस्य ।
करेगी । (3) मुद्रा नीति समिति, मुद्रा स्फीति लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपेक्षित नीति दर अवधारित
(4) मुद्रा नीति समिति का विनिश्चय बैंक पर आबद्धकर होगा ।
केन्द्रीय सरकार 45यग. (1 ) धारा 45यख की उपधारा (2) के खंड ( घ ) में निर्दिष्ट मुद्रा नीति समिति के सदस्य अर्थशास्त्र या बैंककारी या वित्त या मुद्रा नीति के क्षेत्र में ज्ञान और अनुभव रखने वाले योग्यता, सत्यनिष्ठा और प्रतिष्ठा प्राप्त व्यक्तियों में से केंद्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे :
द्वारा नियुक्त सदस्यों की पात्रता और चयन ।
परंतु किसी व्यक्ति को सदस्य के रूप में नियुक्त नहीं किया जाएगा यदि
(i ) ऐसे व्यक्ति ने सदस्य के रूप में नियुक्ति की तारीख को सत्तर वर्ष की आयु पूरी कर
ली है ;
(ii) ऐसा व्यक्ति बैंक के किसी बोर्ड या समिति का कोई सदस्य है ;
88
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(iii) ऐसा व्यक्ति बैंक का कोई कर्मचारी है ;
1860का 45 (iv) ऐसा व्यक्ति भारतीय दंड संहिता की धारा 21 के अधीन यथापरिभाषित कोई लोक सेवक है ;
(v) ऐसा व्यक्ति संसद् या किसी राज्य विधान- मंडल का कोई सदस्य है ;
(vi ) ऐसा व्यक्ति किसी भी समय दिवालिया न्यायनिर्णीत किया गया है ;
(vii) ऐसा व्यक्ति किसी ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है , जो एक सौ अस्सी दिन या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय है ;
(viii) ऐसा व्यक्ति मुद्रा नीति समिति के सदस्य के रूप में कर्तव्यों के निर्वहन में शारीरिक रूप से या मानसिक रूप से असमर्थ है;
(ix) ऐसे व्यक्ति का बैंक से हित का तात्त्विक विरोध है और वह ऐसे विरोध का समाधान करने में असमर्थ है ।
(2) धारा 45यख की उपधारा (2) के खंड (घ) में निर्दिष्ट मुद्रा नीति समिति के सदस्यों की नियुक्ति केंद्रीय सरकार द्वारा खोजबीन- सह- चयन समिति द्वारा की गई सिफारिशों पर की जाएगी, जिसमें निम्नलिखित सदस्य होंगे , अर्थात्ः-
(क) मंत्रिमंडल सचिव अध्यक्ष ;
अनिम्न) (ख) भारतीय रिजर्व बैंक का गवर्नर या उसका प्रतिनिधि ( डिप्टी गवर्नर की पंक्ति से सदस्य ;
(ग) सचिव, आर्थिक कार्य विभाग सदस्य ;
(घ) अर्थशास्त्र या बैंककारी या वित्त या मुद्रा नीति के क्षेत्र में तीन विशेषज्ञ, जो केंद्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे सदस्य ।
(3) खोजबीन- सह- चयन समिति , सदस्यों का चयन करते समय ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करेगी, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा, विहित की जाए ।
45यघ . (1 ) धारा 45यख की उपधारा (2) के खंड (घ) के अधीन नियुक्त मुद्रा नीति समिति के सदस्य चार वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेंगे और पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं होंगे ।
(2) मुद्रा नीति समिति के सदस्यों की नियुक्ति के निबंधन और शर्तें ऐसी होंगी , जो केन्द्रीय सरकार द्वारा , विहित की जाएं और ऐसे सदस्यों को संदेय पारिश्रमिक और अन्य भत्ते ऐसे होंगे जो केंद्रीय बोर्ड द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाएं ।
मुद्रानीति समिति के सदस्यों की नियुक्ति के निबंधन और शर्तें ।
(3) कोई सदस्य, उपधारा (1 ) के अधीन उसकी पदावधि की समाप्ति से पूर्व किसी भी समय केंद्रीय सरकार को छह सप्ताह से अन्यून की लिखित सूचना देकर मुद्रा नीति समिति से त्यागपत्र दे सकेगा और केंद्रीय सरकार द्वारा त्यागपत्र स्वीकार किए जाने पर वह मुद्रा नीति समिति का सदस्य नहीं रहेगा ।
45यङः (1 ) केंद्रीय सरकार धारा 45 यख की उपधारा (2) के खंड (घ) के अधीन नियुक्त मुद्रा नीति समिति के किसी भी ऐसे सदस्य को पद से हटा सकेगी,-
(क) जो दिवालिया है या किसी भी समय न्यायनिर्णीत किया गया है ; या
मुद्रा नीति समिति के सदस्यों का हटाया जाना ।
(ख) जो सदस्य के रूप में कार्य करने के लिए शारीरिक रूप से या मानसिक रूप से असमर्थ हो गया है ; या
(ग) जो किसी ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है, जिसमें केंद्रीय सरकार की राय में नैतिक अधमता अंतर्वलित है ; या
(घ) जो अपनी नियुक्ति के समय पर किसी हित के तात्त्विक विरोध को यथोचित रूप से प्रकट करने में असफल रहा है ; या
(ङ) जो पूर्व छुट्टी अभिप्राप्त किए बिना मुद्रा नीति समिति के तीन आनुक्रमिक अधिवेशनों में उपस्थित नहीं होता है; या भारत का राजपत्र असाधारण
89 अनुभाग 1क]
(च) जिसने ऐसा वित्तीय या अन्य हित अर्जित कर लिया है, जिससे सदस्य के रूप में उसके कृत्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है ; या
(छ) जिसने धारा 45 यग की उपधारा ( 1 ) के परंतुक के खंड ( ii) , खंड (iii ) , खंड ( iv) और खंड ( v) में निर्दिष्ट कोई पद अर्जित कर लिया है ; या
(ज) जिसने केंद्रीय सरकार की राय में अपने पद का ऐसा दुरुपयोग किया है, जिससे उसका पद पर बने रहना लोक हित के लिए हानिकर है ।
(2) धारा 45यख की उपधारा (2) के खंड ( घ) के अधीन नियुक्त कोई भी सदस्य उपधारा ( 1 ) के खंड ( घ) , खंड (ङ) , खंड (च) , खंड (छ) और खंड (ज) के अधीन तब तक नहीं हटाया जाएगा जब तक कि उसे मामले की सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो ।
कि 45यच. मुद्रा नीति समिति की कोई भी कार्यवाही केवल इस कारण से अविधिमान्य नहीं होगी मुद्रा
(क) मुद्रा नीति समिति में कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई त्रुटि है ; या
नीति समिति की कार्यवाहियों का रिक्तियों आदि कारण (ख) मुद्रा नीति समिति के सदस्य के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति की नियुक्ति के में कोई त्रुटि है ; या
अविधिमान्य न होना ।
(ग) मुद्रा नीति समिति की प्रक्रिया में कोई ऐसी अनियमितता है जिससे मामले के गुणागुण पर प्रभाव नहीं पड़ता हो ।
45यछ. (1 ) उक्त समिति को सचिवीय सहायता प्रदान करने के लिए बैंक, मुद्रा नीति समिति का एक सचिव नियुक्त करेगा ।
मुद्रा नीति समिति का सचिव।
(2) सचिव ऐसे कृत्यों का पालन ऐसी रीति में करेगा, जो केंद्रीय बोर्ड द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए ।
मुद्रा नीति समिति के 45 यज. (1 ) बैंक, मुद्रा नीति समिति के सदस्यों को ऐसी सभी सूचनाएं उपलब्ध कराएगा जो मुद्रा स्फीति लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सुसंगत हों ।
सदस्यों के लिए सूचना ।
(2) उपधारा (1 ) के अधीन बैंक द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना के अतिरिक्त मुद्रा नीति समिति का कोई भी सदस्य किसी भी समय बैंक से अतिरिक्त सूचना के लिए अनुरोध कर सकेगा, जिसके अंतर्गत कोई भी डाटा, प्रतिमान या विश्लेषण भी है ।
(3) बैंक, उपधारा (2) में मुद्रा नीति समिति के सदस्य को यथा निवेदित ऐसी सूचना युक्तियुक्त समय के भीतर उपलब्ध कराएगा, जब तक कि-
(क) सूचना किसी अस्तित्व या व्यक्ति से संबंधित है और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है ; या
(ख) सूचना किसी अस्तित्व या व्यक्ति की पहचान किए जाने की अनुज्ञा देती है और सूचना सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है ।
(4) बैंक द्वारा , मुद्रा नीति समिति के किसी सदस्य को उपलब्ध कराई गई कोई भी सूचना मुद्रा नीति समिति के सभी सदस्यों को उपलब्ध कराई जाएगी ।
. (1 ) बैंक, मुद्रा नीति समिति की एक वर्ष में कम से कम चार बैठकें आयोजित करेगा ।
45यझ
नीति की
समिति बैठकें । मुद्रा (2) बैंक द्वारा, किसी वर्ष के लिए मुद्रा नीति समिति की बैठक की समय सारणी उस वर्ष की प्रथम बैठक के कम से कम एक सप्ताह पहले प्रकाशित की जाएगी ।
(3) बैठक की समय सारणी में परिवर्तन केवल-
(क) मुद्रा नीति समिति की पूर्व बैठक में किए गए विनिश्चय के माध्यम से किया जाएगा ; या
(ख) तब किया जाएगा यदि गवर्नर की राय में प्रशासनिक अत्यावश्यकताओं के कारण अतिरिक्त बैठक अपेक्षित है या बैठक का पुनः अनुसूचित किया जाना अपेक्षित है ।
90
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(4) बैठक की समय सारणी में कोई भी परिवर्तन बैंक द्वारा यथाशक्य शीघ्रता से प्रकाशित किया जाएगा ।
(5) मुद्रा नीति समिति की किसी बैठक की गणपूर्ति चार सदस्यों से होगी जिनमें से कम से कम एक गवर्नर और उसकी अनुपस्थिति में वह डिप्टी गवर्नर होगा, जो मुद्रा नीति समिति का सदस्य है ।
(6) मुद्रा नीति समिति की बैठकों की अध्यक्षता गवर्नर द्वारा और उसकी अनुपस्थिति में ऐसे डिप्टी गवर्नर द्वारा , जो मुद्रा नीति समिति का सदस्य है, की जाएगी ।
(7) मुद्रा नीति समिति के प्रत्येक सदस्य का एक मत होगा ।
(8) ऐसे सभी प्रश्नों का, जो मुद्रा नीति समिति की किसी बैठक के समक्ष आते हैं, विनिश्चय उपस्थितऔर मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत द्वारा किया जाएगा और मत बराबर होने की दशा में गवर्नर का दूसरा या निर्णायक मत होगा ।
(9) केंद्रीय सरकार, यदि आवश्यक समझे तो समय - समय पर मुद्रा नीति समिति को लिखित में अपने विचार भेज सकेगी ।
(10) किसी प्रस्तावित संकल्प के लिए मुद्रा नीति समिति के प्रत्येक सदस्य का मत ऐसे सदस्य के विरुद्ध अभिलिखित किया जाएगा ।
(11) मुद्रा नीति समिति का प्रत्येक सदस्य प्रस्तावित संकल्प के पक्ष में या उसके विरुद्ध मत देने के कारण विनिर्दिष्ट करते हुए लिखित में कथन करेगा ।
(12) मुद्रा नीति समिति के कार्यकरण की प्रक्रिया, आचरण, गोपनीयता संहिता और कोई अन्य आनुषंगिक मामला ऐसा होगा, जो केंद्रीय बोर्ड द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ।
(13) मुद्रा नीति समिति की कार्यवाही गोपनीय होगी ।
45यञ. (1 ) बैंक, मुद्रा नीति समिति के विनिश्चयों को कार्यान्वित करने के लिए , जिसके अंतर्गत उसमें कोई परिवर्तन भी है, उठाए जाने वाले कदमों को स्पष्ट करते हुए एक दस्तावेज प्रकाशित करेगा ।
(2) ऐसे दस्तावेज में सम्मिलित की जाने वाली विशिष्टियां और ऐसे दस्तावेजों के प्रकाशनों की बारंबारता ऐसी होगी जो केंद्रीय बोर्ड द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए ।
45यट. बैंक, मुद्रा नीति समिति की प्रत्येक बैठक की समाप्ति के पश्चात्, उक्त समिति द्वारा अंगीकृत संकल्प को प्रकाशित करेगा ।
मुद्रा नीति समिति के विनिश्चयों को कार्यान्वित करने के लिए उठाए जाने वाले कदम । विनिश्चयों का प्रकाशन ।
45यठ. बैंक, मुद्रा नीति समिति की प्रत्येक बैठक के पश्चात्, चौदहवें दिन बैठक की कार्यवाहियों का कार्यवृत्त प्रकाशित करेगा, जिसके अंतर्गत निम्नलिखित होंगे , अर्थात्:-
(क) मुद्रा नीति समिति की बैठक में अंगीकृत संकल्प ;
मुद्रा नीति समिति की बैठक की कार्यवाहियों का प्रकाशन ।
(ख) उक्त बैठक में अंगीकृत संकल्पों पर ऐसे सदस्य को श्रेयित मुद्रा नीति समिति के प्रत्येक सदस्य का मत;
(ग) उक्त बैठक में अंगीकृत संकल्पों पर धारा 45 यझ की उपधारा (11 ) के अधीन मुद्रा नीति समिति के प्रत्येक सदस्य का कथन ।
नीति
45यड. (1 ) बैंक, प्रत्येक छह मास में एक बार मुद्रा नीति रिपोर्ट नामक एक दस्तावेज निम्नलिखित स्पष्ट करते हुए प्रकाशित करेगा-
मुद्रा रिपोर्ट ।
(क) मुद्रा स्फीति के स्रोत ; और
(ख) दस्तावेज के प्रकाशन की तारीख से छह मास से अठारह मास के बीच की अवधि के लिए मुद्रा स्फीति का पूर्वानुमान ।
(2) मुद्रा नीति समिति का प्ररूप और अंतर्वस्तुएं ऐसी होंगी , जो केंद्रीय बोर्ड द्वारा बनाए गए विनियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं ।
45यढ. जहां बैंक, मुद्रा स्फीति लक्ष्य को पूरा करने में असफल होता है, वहां वह केंद्रीय सरकार को एक रिपोर्ट में निम्नलिखित उपवर्णित करेगा-
मुद्रास्फीति लक्ष्य को बनाए रखने में असफलता।
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1 क]
91
(क) मुद्रा स्फीति लक्ष्य प्राप्त करने में असफलता के कारण ;
(ख) बैंक द्वारा किए जाने के लिए प्रस्तावित उपचारात्मक कार्रवाई ; और
(ग) उस समयावधि का अनुमान, जिसके भीतर प्रस्तावित उपचारात्मक कार्रवाइयों का यथासमय कार्यान्वयन करके मुद्रा स्फीति लक्ष्य प्राप्त किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण •इस धारा के प्रयोजनों के लिए ऐसे कारक, जिनसे असफलता का गठन होता है, वे होंगे जो केंद्रीय सरकार द्वारा, वित्त अधिनियम, 2016 के अध्याय 12 के भाग 1 के प्रारंभ की तारीख से तीन मास के भीतर राजपत्र में अधिसूचित किए जाएं ।
नियम बनाने की शक्ति।
45यण. (1 ) केंद्रीय सरकार, इस अध्याय के उपबंधों को क्रियान्वित करने के प्रयोजनों के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियमों में निम्नलिखित के लिए उपबंध किया जा सकेगा,-
(क) धारा 45यग की उपधारा (3) के अधीन खोजबीन - सह- चयन समिति के कार्यकरण कीप्रक्रिया ;
(ख) धारा 45 यघ की उपधारा (2) के अधीन मुद्रा नीति समिति के सदस्यों की (पारिश्रमिक और अन्य भत्तों से भिन्न) नियुक्ति के निबंधन और शर्तें ; और
(ग) कोई अन्य विषय जो केंद्रीय सरकार द्वारा नियमों द्वारा विहित किया जाना है या विहित किया जाए ।'।
धारा 58 का संशोधन।
223. मूल अधिनियम की धारा 58 की उपधारा (2) में खंड ( थ) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्
" (थक) धारा 45 यघ की उपधारा (2) के अधीन मुद्रा नीति समिति के सदस्यों को संदेय पारिश्रमिक और अन्य भत्ते;
(थख) धारा 45 यछ की उपधारा (2) के अधीन सचिव के कृत्य ;
(थग) धारा 45 यझ की उपधारा ( 12) के अधीन मुद्रा नीति समिति की प्रक्रिया, अधिवेशन के संचालन की रीति और अन्य संबंधित विषय ;
(थघ) धारा 45 यञ की उपधारा (2) के अधीन दस्तावेज के प्रकाशन की विशिष्टियां और आवर्ती;
(थङ) धारा 45 यड की उपधारा (2) के अधीन प्रकाशित की जाने वाली मुद्रा नीति रिपोर्ट का प्ररूप और उनकी अंतर्वस्तुएं; " ।
भाग 2
केंद्रीय विक्रय कर अधिनियम , 1956 का संशोधन
224. केंद्रीय विक्रय कर अधिनियम, 1956 की धारा 3 के स्पष्टीकरण 2 के पश्चात् निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
1956के अधिनियम 74 का संशोधन।
"स्पष्टीकरण ३- जहां सामान्य वाहक पाइप लाइन या किसी अन्य सामान्य परिवहन या वितरण प्रणाली के माध्यम से विक्रीत या क्रय की गई या परिवहन की गई गैस , पाइप लाइन या प्रणाली में अन्य गैस के साथ आपस में मिश्रित और चिरभोग्य हो गई है और ऐसी गैस एक राज्य में पाइप लाइन या प्रणाली में समाविष्ट की जाती है और दूसरे राज्य में पाइप लाइन से निकाली जाती है , वहां गैस के ऐसे विक्रय या क्रय को एक राज्य से दूसरे राज्य में माल का संचलन समझा जाएगा । " ।
92
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
भाग 3
तेल उद्योग (विकास) अधिनियम, 1974 का संशोधन
225. तेल उद्योग (विकास) अधिनियम, 1974की अनुसूची में , कच्चे तेल से संबंधित क्रम संख्या 1 के सामने, स्तंभ (3 ) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " बीस प्रतिशत मूल्यानुसार " प्रविष्टि रखी जाएगी ।
1974के अधिनियम 47 कीअनुसूची का संशोधन।
भाग 4
तस्कर और विदेशी मुद्रा छलसाधक ( संपत्ति समपहरण) अधिनियम , 1976 का
संशोधन
226. तस्कर और विदेशी मुद्रा छलसाधक (संपत्ति समपहरण) अधिनियम, 1976 में 1 जून , 2016
से,-
1976के अधिनियम 13 कासंशोधन ।
(क) धारा 2क का लोप किया जाएगा ;
(ख) धारा 3 की उपधारा (1 ) के खंड ( क) में "समपहृत संपत्ति" शब्दों का लोप किया
जाएगा ;
(ग) धारा 12 में,-
(i) उपधारा (1 ) में,-
(अ) "समपहृत संपत्ति अपील अधिकरण के नाम से ज्ञात होने वाला" शब्दों का लोप किया जाएगा;
(आ) "और वे धारा 7, धारा 9 की उपधारा ( 1 ) या धारा 10 के अधीन किए गए आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई के लिए " शब्दों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"और वे,-
(क) धारा 7, धारा 9 की उपधारा (1 ) या धारा 10 के अधीन ;
1985 का 61
(ख) स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 की धारा 68 च, धारा 68झ , धारा 68 ट की उपधारा (1 ) या धारा 68ठ के अधीन ;
2003 का 15
(ग) धन-शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के अधीन न्यायनिर्णायक प्राधिकारी या कोई अन्य प्राधिकारी,
द्वारा किए गए आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई के लिए " शब्द रखे जाएंगे ;
( ii) उपधारा (2) में " या होने के लिए अर्हित है " शब्दों का लोप किया जाएगा ;
(iii) उपधारा (6 क) में "दो सदस्यों की एक न्यायपीठ" शब्दों के स्थान पर "एक या दो सदस्यों की एक न्यायपीठ " शब्द रखे जाएंगे ;
(iv) उपधारा (6क) के पश्चात् निम्नलिखित उपधाराएं अंतःस्थापित की जाएंगी , अर्थात्:-
" (6ख) अध्यक्ष की मृत्यु, पदत्याग या अन्य कारण से उसके पद में हुई रिक्ति की दशा में ज्येष्ठतम सदस्य, अध्यक्ष के रूप में उस तारीख तक कार्य करेगा जिस तारीख को ऐसी रिक्ति को भरने के लिए इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार नियुक्त नया अध्यक्ष अपना पदभार ग्रहण नहीं करता है ।
(6ग) जब अध्यक्ष अनुपस्थिति, बीमारी या किसी अन्य कारण से अपने कृत्यों का निर्वहन करने में असमर्थ है तो ज्येष्ठतम सदस्य अध्यक्ष के कृत्यों का उस तारीख तक 93
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1 क]
निर्वहन करेगा जिस तारीख को अध्यक्ष अपने कृत्यों का भार पुनः ग्रहण नहीं कर लेता है ।"।
भाग 5
स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम , 1985 का संशोधन
227. स्वापक ओषधि और मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 में, 1 जून, 2016 से ,-
1985 के अधिनियम 61 का संशोधन।
(क) धारा 68ख के खंड (क) में "के अधीन गठित समपहृत संपत्ति अपील अधिकरण " शब्दों के स्थान पर "में निर्दिष्ट अपील अधिकरण " शब्द रखे जाएंगे ;
(ख) धारा 68 ढ के स्थान पर निम्नलिखित धारा रखी जाएगी , अर्थात्: -
1976 का 3
68 ढ . तस्कर और विदेशी मुद्रा छलसाधक (संपत्ति समपहरण) अधिनियम, 1976 की अपील अधिकरण ।
" धारा 12 की उपधारा ( 1 ) के अधीन गठित अपील अधिकरण, धारा 68 च , धारा 68 झ , धारा 68 ट की उपधारा ( 1 ) या धारा 68 ठ के अधीन किए गए आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई के लिए अपील अधिकरण होगा ।" ;
(ग) धारा 76 की उपधारा (2) के खंड (घख) का लोप किया जाएगा ।
भाग 6
विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 का संशोधन
प्रारंभ। इस भाग का 228. इस भाग के उपबंध उस तारीख को प्रवृत्त होंगे , जो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे ।
229. विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 में, धारा 14 के पश्चात् निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः-
1999 के अधिनियम 42 का संशोधन ।
शास्ति की बकाया को वसूल करने की शक्ति ।
" 14क. (1 ) इस अधिनियम में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, न्यायनिर्णायक प्राधिकारी , लिखित आदेश द्वारा, ऐसे व्यक्ति से, जो उस तारीख से, जिसको ऐसी शास्ति के संदाय की सूचना की उस पर तामील की जाती है, नब्बे दिन की अवधि के भीतर धारा 13 के अधीन उस पर अधिरोपित शास्ति का पूरा संदाय करने में असफल रहता है, शास्ति की किसी बकाया को वसूल करने के लिए ऐसे प्रवर्तन अधिकारी को, जो सहायक निदेशक की पंक्ति से नीचे का न हो, प्राधिकृत कर सकेगा ।
1961 का 43
(2) उपधारा (1 ) में निर्दिष्ट अधिकारी ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग करेगा, जो आय- कर अधिनियम, 1961 के अधीन कर की वसूली के संबंध में आय- कर प्राधिकारी को प्रदत्त की गई हैं और उक्त अधिनियम की दूसरी अनुसूची में अधिकथित प्रक्रिया, इस अधिनियम के अधीन शास्ति के बकाया की वसूली के संबंध में यथावश्यक परिवर्तनों सहित लागू होगी ।" ।
भाग 7
केंद्रीय सड़क निधि अधिनियम , 2000 का संशोधन
230. केंद्रीय सड़क निधि अधिनियम, 2000 की धारा 10 में 1 जून, 2016 से,-
उपधारा ( 1 ) में, खंड (viii) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड रखा जाएगा, अर्थात्:-
(अ)
2000के अधिनियम 54 कासंशोधन ।
" (viii) (क) ग्रामीण सड़कों के विकास के लिए उच्च गति डीजल और पेट्रोल पर साढ़े
तैंतीस प्रतिशत उपकर का आबंटन ;
(ख) राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और अनुरक्षण के लिए उच्च गति डीजल और पेट्रोल पर साढ़े इकतालीस प्रतिशत उपकर का आबंटन ;
(ग) रेल सुरक्षा संकर्मों, जिनके अंतर्गत रेल लाइन के नीचे या उसके ऊपर पुल बनाकर सड़क का सन्निर्माण , मानव रहित रेल सड़क क्रासिंग पर सुरक्षा संकर्मों के सन्निर्माण, नई लाइनों का सन्निर्माण विद्यमान मानक लाइनों का गेज लाइनों में संपरिवर्तन और रेल लाइनों का विद्युतीकरण भी है, के लिए उच्च गति डीजल और पेट्रोल पर चौदह प्रतिशत उपकर का आबंटन:
94
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
परंतु इस उपखंड के अधीन आबंटित उपकर से मरम्मत, अनुरक्षण या नवीकरण का कोई कार्य नहीं किया जाएगा ;
(घ) अंतरराज्यिक और आर्थिक महत्व की ऐसी राज्य सड़कें, जिन्हें उस रूप में केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित किया जाए , के विकास और अनुरक्षण के लिए उच्च गति डीजल और पेट्रोल पर दस प्रतिशत उपकर का आबंटन; और
(ङ) सीमा क्षेत्रों में सड़क के विकास और अनुरक्षण के लिए उच्च गति डीजल और पेट्रोल पर एक प्रतिशत उपकर का आबंटन । " ;
(आ) उपधारा (2) का लोप किया जाएगा ।
भाग 8
वित्त अधिनियम , 2001 का संशोधन
231. वित्त अधिनियम, 2001 की सातवीं अनुसूची का,-
(i) बारहवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट रीति से;
2001 के अधिनियम 14 का संशोधन ।
(ii) तेरहवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट रीति से 1 जनवरी , 2017 से,
संशोधन किया जाएगा ।
भाग 9
धन-शोधन निवारण अधिनियम , 2002 का संशोधन
232. धन-शोधन निवारण अधिनियम, 2002 में , 1 जून, 2016 से,-
2003 के अधिनियम 15 का संशोधन।
(क) धारा 2 की उपधारा (1 ) के खंड (ख) में, " के अधीन स्थापित अपील अधिकरण " शब्दों के
स्थान पर " में निर्दिष्ट अपील अधिकरण " शब्द रखे जाएंगे ;
(ख) धारा 25 के स्थान पर निम्नलिखित धारा रखी जाएगी , अर्थात्:-
1976का 13 अपील अधिकरण ।
"25. तस्कर और विदेशी मुद्रा छलसाधक ( संपत्ति समपहरण ) अधिनियम, 1976 की धारा 12 की उपधारा (1 ) के अधीन गठित अपील अधिकरण , इस अधिनियम के अधीन न्यायनिर्णायक प्राधिकारी और अन्य प्राधिकारियों के आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई के लिए अपील अधिकरण होगा । " ;
जाएगा ; (ग) धारा 27 , धारा 28, धारा 30, धारा 31 , धारा 32, धारा 33 और धारा 34 का लोप किया
(घ) धारा 36, धारा 37 , धारा 38 और धारा 40 में, "अध्यक्ष " शब्द के स्थान पर, जहां कहीं वह आता है " अध्यक्ष " शब्द रखा जाएगा;
(ङ) धारा 73 की उपधारा (2) के खंड (ध) और खंड (न) का लोप किया जाएगा ।
भाग 10
वित्त ( संख्यांक 2 ) अधिनियम , 2004 का संशोधन
233. वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 2004 में 1 जून, 2016 से,-
2004के अधिनियम 23 का संशोधन ।
(क) धारा 98 की सारणी में, क्रम संख्यांक 4 के सामने, स्तंभ (3 ) के नीचे, मद (क) में " 0.017 प्रतिशत" प्रविष्टि के स्थान पर " 0.05 प्रतिशत" प्रविष्टि रखी जाएगी ।
(ख) धारा 113क के स्थान पर, निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात्:-
"113क. इस अध्याय में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस अध्याय के
उपबंध-
कतिपय मामलों में अध्याय 7 का लागू न होना ।
भारत का राजपत्र असाधारण
95 अनुभाग 1क]
1961 का 43
(क) आय- कर अधिनियम, 1961 की धारा 10 के खंड (44) में निर्दिष्ट नई पेंशन प्रणाली न्यास के लिए या उसकी ओर से किसी व्यक्ति द्वारा ; या
(ख) अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र में अवस्थित किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेन्ज में के किसी व्यक्ति द्वारा , जहां ऐसे संव्यवहार का प्रतिफल विदेशी करेंसी में संदत्त किया जाता है या संदेय है,
किए गए कराधेय प्रतिभूति संव्यवहारों को लागू नहीं होंगे ।
2005 का 28
स्पष्टीकरण - इस धारा के प्रयोजनों के लिए " अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र का वही अर्थ है जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (थ ) में उसका है ।" ।
भाग 11
वित्त अधिनियम , 2005 का संशोधन
234. वित्त अधिनियम, 2005 की सातवीं अनुसूची का चौदहवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट रीति में संशोधन किया जाएगा।
2005 के अधिनियम 18 का संशोधन ।
भाग 12
वित्त अधिनियम , 2010 का संशोधन
235. वित्त अधिनियम, 2010 में,-
2010के अधिनियम 14 का संशोधन।
(i) अध्याय 7 में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में, "स्वच्छ ऊर्जा उपकर" शब्दों के स्थान पर, जहां कहीं वे आते हैं, " स्वच्छ पर्यावरण उपकर " शब्द रखे जाएंगे ;
(ii) दसवीं अनुसूची में, सभी शीर्षों के सामने आने वाली, स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, "400 रुपए प्रति टन " प्रविष्टि रखी जाएगी ।
भाग 13
विदेशी अभिदाय (विनियमन) अधिनियम , 2010 का संशोधन
236. विदेशी अभिदाय (विनियमन) अधिनियम, 2010 की धारा 2 की उपधारा (1 ) के खण्ड (ञ) के उपखण्ड (vi ) में निम्नलिखित परन्तुक अन्तः स्थापित किया जाएगा और 26 सितम्बर, 2010 से अन्तःस्थापित किया गया समझा जाएगा, अर्थात्ः-
2010 के अधिनियम 42 की धारा 2 का संशोधन ।
1999का 42
"परन्तु जहां शेयर पूंजी का अभिहित मूल्य, विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम , 1999 या उसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों के अधीन विदेशी विनिधान के लिए विनिर्दिष्ट सीमाओं के भीतर है वहां किसी कम्पनी की शेयर पूंजी का अभिहित मूल्य, अभिदाय करते समय ऐसे मूल्य के आधे से अधिक होने पर भी ऐसी कम्पनी कोई विदेशी स्रोत नहीं होगी ; " ।
भाग 14
वित्त अधिनियम , 2013 का संशोधन
237. वित्त अधिनियम , 2013 में , धारा 132 के पश्चात्, निम्नलिखित धारा 1 जून, 2016 से, अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात् :-
2013 के अधिनियम 17 का संशोधन ।
' 132क. इस अध्याय में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस अध्याय के उपबंध अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र में अवस्थित किसी मान्यताप्राप्त संगम में के किसी व्यक्ति द्वारा किए गए कराधेय वस्तु संव्यवहारों को वहां लागू नहीं होंगे , जहां ऐसे संव्यवहार के लिए प्रतिफल विदेशी करेंसी में संदत्त किया जाता है या संदेय है ।
96
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
2005 का 28 स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए " अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र " का वही अर्थ होगा जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड ( थ) में उसका है ।' ।
भाग 15
वित्त अधिनियम , 2015 का संशोधन
238. वित्त अधिनियम, 2015 में,
2015 के अधिनियम 20 का संशोधन।
(क) धारा 4 के खंड ( ii) का 1 अप्रैल, 2016 से लोप किया जाएगा;
(ख) 1 जून, 2016 से
(i ) धारा 122 की उपधारा (2) में, " जमा किसी अतिशेष को " शब्दों के पश्चात्, "तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, " शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे;
(ii) धारा 124 में, उपधारा (5) का लोप किया जाएगा;
(iii) धारा 128 की उपधारा (2) के खंड ( ग) का लोप किया जाएगा ।
भाग 16
कतिपय अधिनियमितियों का निरसन और संशोधन
239. पन्द्रहवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट अधिनियमितियों का उसके चौथे स्तंभ में उल्लिखित विस्तार तक निरसन या संशोधन किया जाता है ।
कतिपय अधिनियमितियों का निरसन और संशोधन।
व्यावृत्तियां।
240. (1 ) पन्द्रहवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट अधिनियमितियों का इस अधिनियम द्वारा निरसन -
(क) का किसी अन्य ऐसी अधिनियमिति पर प्रभाव नहीं पड़ेगा जिसमें निरसित अधिनियमिति को लागू, सम्मिलित या निर्दिष्ट किया गया है;
(ख) का प्रभाव, पहले की गई या हुई किसी बात या पहले से अर्जित, प्रोद्भुत या उद्भूत किसी अधिकार, हक बाध्यता या दायित्व अथवा उसके विषय में किसी उपचार या कार्यवाही या किसी ऋण , शास्ति, बाध्यता, दायित्व, दावे या मांग से कोई निर्मोचन या उन्मोचन या पहले से अनुदत्त किसी क्षतिपूर्ति या किसी पूर्व कार्य के बात के सबूत की विधिमान्यता, अविधिमान्यता, उसके प्रभाव या परिणामों पर नहीं पड़ेगा;
(ग) का प्रभाव इस बात के होते हुए भी कि वह क्रमशः , इसके द्वारा निरसित किसी अधिनियमिति द्वारा , उसमें या उससे किसी रीति से पुष्ट, मान्य या व्युत्पन्न हुई है, विधि के किसी सिद्धांत या नियम या स्थापित अधिकारिता, अभिवचन के प्ररूप या अनुक्रम, पद्धति या प्रक्रिया , या विद्यमान प्रथा, रूढ़ि, विशेषाधिकार, निर्बन्धन, छूट, पद या नियुक्ति पर नहीं पड़ेगा;
(घ) कोई अधिकारिता, पद, रूढ़ि, दायित्व, अधिकार, हक, विशेषाधिकार, निर्बन्धन, छूट, प्रथा, पद्धति, प्रक्रिया या अन्य विषय या ऐसी बात जो अब विद्यमान या प्रवर्तन में नहीं है पुनरुज्जीवितःया प्रत्यावर्तित नहीं करेगा ।
1897 का 10 (2) उपधारा (1 ) में विशिष्ट मामलों के उल्लेख से निरसन के प्रभाव के संबंध में साधारण खंड अधिनियम, 1897 की धारा 6 के साधारण प्रयोग पर प्रतिकूल प्रभाव या प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
बकाया शुल्कोंका संग्रहण और संदाय ।
241. पन्द्रहवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट अधिनियमितियों का निरसन या संशोधन के होते हुए भी, उक्त अधिनियमितियों के अधीन उस तारीख से ठीक पहले जिसको वित्त विधेयक, 2016 को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त होती है, उद्गृहीत शुल्क के आगमों का, -
(i) यदि संग्रहण अभिकरणों द्वारा संगृहीत किए गए हैं किंतु भारतीय रिजर्व बैंक को संदत्त नहीं
किए गए हैं; या
(ii) यदि संग्रहण अभिकरणों द्वारा संगृहीत नहीं किए गए हैं,
यथास्थिति, संदाय या संग्रहण किया जाएगा और उन्हें भारत की संचित निधि में जमा किए जाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को संदाय किया जाएगा।
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
97
पहली अनुसूची
(धारा 2 देखिए)
भाग 1
आय-कर
पैरा क
(1) इस पैरा की मद ( II) और मद (III) में निर्दिष्ट व्यष्टि से भिन्न प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति- संगम या व्यष्टि- निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या आय- कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31 ) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में , जो ऐसी दशा नहीं है, जिसमें इस भाग का कोई अन्य पैरा लागू होता है,-
आय-कर की दरें
(1) जहां कुल आय 2,50,000 रु० से अधिक नहीं है
कुछ नहीं;
(2) जहां कुल आय 2,50,000 रु० से अधिक है, किंतु 5,00,000 रु० से अधिक नहीं है
उस रकम का 10 प्रतिशत, जिससे कुल आय 2,50,000 रु० से अधिक हो जाती है ;
(3) जहां कुल आय 5,00,000 रु० से अधिक है, किंतु 10,00,000 रु० से अधिक नहीं है
25,000 रु० धन उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 5,00,000 रु० से अधिक हो जाती है ;
(4) जहां कुल आय 10,00,000 रु० से अधिक है
1,25,000 रु० घन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,00,000 रु० से अधिक हो जाती है ।
(II) प्रत्येक ऐसे व्यष्टि की दशा में , जो भारत में निवासी है और जो पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय साठ वर्ष या अधिक आयु का, किंतु अस्सी वर्ष से कम आयु का है-
आय-कर की दरें
(1) जहां कुल आय 3,00,000 रु० से अधिक नहीं है
कुछ नहीं;
(2) जहां कुल आय 3,00,000 रु० से अधिक है किंतु 5,00,000 रु० से अधिक नहीं है
उस रकम का 10 प्रतिशत, जिससे कुल आय 3,00,000 रु० से अधिक हो जाती है ;
(3) जहां कुल आय 5,00,000 रु० से अधिक है किंतु 10,00,000 रु० से अधिक नहीं है
20,000 रु० धन उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 5,00,000 रु० से अधिक हो जाती है ;
(4) जहां कुल आय 10,00,000 रु० से अधिक है
1,20,000 रु० धन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,00,000 रु० से अधिक हो जाती है ।
( III) प्रत्येक ऐसे व्यष्टि की दशा में , जो भारत में निवासी है और जो पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय अस्सी वर्ष या अधिक आयु का है-
आय-कर की दरें
(1) जहां कुल आय 5,00,000 रु० से अधिक नहीं है कुछ नहीं;
(2) जहां कुल आय 5,00,000 रु० से अधिक है किंतु उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 5,00,000 रु० से
10,00,000 रु० से अधिक नहीं है अधिक हो जाती है ;
(3) जहां कुल आय 10,00,000 रु० से अधिक है 1,00,000 रु० धन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,00,000 रु०
से अधिक हो जाती है ।
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय- कर अधिनियम की धारा 111 क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय- कर की रकम में, ऐसे प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति- संगम या व्यष्टि- निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं या आय - कर अधिनियम की धारा 2 के खंड ( 31 ) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में , जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय - कर के बारह प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :
98
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
परंतु ऊपर उल्लिखित व्यक्तियों की दशा में, जिनकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय- कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आय- कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी , जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ।
पैरा ख
प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा में,-
आय-कर की दरें
(1 ) जहां कुल आय 10,000 रु० से अधिक नहीं है कुल आय का 10 प्रतिशत ;
(2) जहां कुल आय 10,000 रु० से अधिक है किंतु 20,000 रु० 1,000 रु० धन उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,000 रु०
से अधिक नहीं है से अधिक हो जाती है ;
(3) जहां कुल आय 20,000 रु0 से अधिक है 3,000 रु० धन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 20,000 रु०
से अधिक हो जाती है ।
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय-कर अधिनियम की धारा 111 क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय- कर की रकम में, ऐसी प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय - कर के बारह प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा:
परंतु ऊपर उल्लिखित सहकारी सोसाइटी की दशा में , जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है , ऐसी आय पर आय- कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल रकम पर, आय- कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी , जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ।
पैरा ग
प्रत्येक फर्म की दशा में, -
आय-कर की दर
30प्रतिशत ।
संपूर्णकुल आय पर
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय- कर अधिनियम की धारा 111 क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय - कर की रकम में, ऐसी प्रत्येक फर्म की दशा में , जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय- कर के बारह प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा:
परंतु ऊपर उल्लिखित फर्म की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय - कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम , एक करोड़ रुपए की कुल रकम पर, आय - कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी , जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ।
पैरा घ
प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, -
आय-कर की दर
30प्रतिशत ।
संपूर्ण कुल आय पर
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय- कर अधिनियम की धारा 111 क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय-कर की रकम में, ऐसे प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय- कर के बारह प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :
परंतु ऊपर उल्लिखित स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम , एक करोड़ रुपए की कुल रकम पर, आय - कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ।
भारत का राजपत्र असाधारण
99 अनुभाग 1क]
पैरा ङ
किसी कंपनी की दशा में,-
आय-कर की दरें
1. देशी कंपनी की दशा में
कुल आय का 30 प्रतिशत ;
II . देशी कंपनी से भिन्न कंपनी की दशा में,
(i) कुल आय के उतने भाग पर, जो निम्नलिखित के रूप में है,-
(क) उसके द्वारा 31 मार्च, 1961 के पश्चात्, किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व सरकार या किसी भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में उस सरकार या भारतीय समुत्थान से प्राप्त स्वामिस्व ; अथवा
(ख) उसके द्वारा 29 फरवरी , 1964 के पश्चात्, किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व सरकार या किसी भारतीय समुत्थान से किए गए किसी करार के अनुसरण में तकनीकी सेवाएं प्रदान करने के लिए उस सरकार या भारतीय समुत्थान से प्राप्त फीस,
50प्रतिशत ;
और जहां, ऐसा करार दोनों में से प्रत्येक दशा में , केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है
40प्रतिशत ।
(ii) कुल आय के अतिशेष पर, यदि कोई हो
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय - कर अधिनियम की धारा 111 क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय- कर की रकम में निम्नलिखित दर से, -
(i) प्रत्येक देशी कंपनी की दशा में,-
(क) जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय-कर के सात प्रतिशत की दर से और
(ख) जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय- कर के बारह प्रतिशत की दर से ;
(ii) देशी कंपनी से भिन्न प्रत्येक कंपनी की दशा में,-
(क) जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय कर के दो प्रतिशत की दर से ; और
(ख) जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के पांच प्रतिशत की दर से,
परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :
परंतु प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में , जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसी आय पर आय- कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आय- कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है :
परंतु यह और कि प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय- कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, दस करोड़ रुपए की कुल आय पर आय- कर और अधिभार के रूप में संदेय उस रकम से , उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी , जो आय की उस रकम के दस करोड़ रुपए से अधिक है , आधिक्य में है ।
भाग 2
कतिपय दशाओं में स्रोत पर कर की कटौती की दरें
ऐसी प्रत्येक दशा में , जिसमें आय- कर अधिनियम की धारा 193, धारा 194, धारा 194 क, धारा 194ख , धारा 194खख , धारा 194 घ , धारा 194ठखक, धारा 194 ठखख , धारा 194 ठखग और धारा 195 के उपबंधों के अधीन कर की कटौती प्रवृत्त दरों से की जानी है, आय में से कटौती निम्नलिखित दरों पर कटौती के अधीन रहते हुए की जाएगी:-
आय- कर की दर
1. कंपनी से भिन्न व्यक्ति की दशा में,-
(क) जहां व्यक्ति भारत में निवासी है,-
10 प्रतिशत ;
(i ) "प्रतिभूतियों पर ब्याज " से भिन्न ब्याज के रूप में आय पर
/ 100
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
आय-कर की दर
(ii) लाटरी, वर्ग पहेली , ताश के खेल और किसी प्रकार के अन्य खेल से जीत के रूप में आय पर 30प्रतिशत;
( iii) घुड़दौड़ से जीत के रूप में आय पर
30प्रतिशत;
( iv) बीमा कमीशन के रूप में आय पर
5 प्रतिशत;
(v) निम्नलिखित पर संदेय ब्याज के रूप में आय पर-
10प्रतिशत;
(अ) किसी केंद्रीय , राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा स्थापित किसी स्थानीय प्राधिकरण या निगम द्वारा या उसकी ओर से धन के लिए पुरोधृत किए गए कोई डिबेंचर या प्रतिभूतियां ;
(आ) किसी कंपनी द्वारा पुरोधृत किए गए कोई डिबेंचर जहां ऐसे डिबेंचर, भारत में मान्यताप्राप्त किसी स्टाक एक्सचेंज में प्रतिभूति संविदा (विनियमन ) अधिनियम, 1956 ( 1956 का 42) और उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के अनुसार सूचीबद्ध हैं ;
(इ) केंद्रीय या राज्य सरकार की कोई प्रतिभूति
(vi) किसी अन्य आय पर
10प्रतिशत ;
(ख) जहां व्यक्ति भारत में निवासी नहीं है,-
(i ) किसी अनिवासी भारतीय की दशा में,-
(अ) विनिधान से किसी आय पर
20प्रतिशत ;
(आ) धारा 115ङ या धारा 112 की उपधारा ( 1) के खंड ( ग) के उपखंड ( iii ) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक 10 प्रतिशत ; पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर
(इ) धारा 111 क में निर्दिष्ट अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर
15प्रतिशत ;
20प्रतिशत;
(ई) दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में अन्य आय पर [जो धारा 10 के खंड (33) , खंड (36) और खंड (38) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ नहीं हैं।
20प्रतिशत ;
(उ) सरकार या किसी भारतीय समुत्थान द्वारा विदेशी करेंसी में उधार लिए गए धन या उपगत ऋण पर सरकार या किसी भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय ब्याज के रूप में आय पर ( जो धारा 194 ठख या धारा 194ठग में निर्दिष्ट ब्याज के रूप में आय नहीं है)
10 प्रतिशत ;
(ऊ) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में आय पर जहां ऐसा स्वामिस्व, भारतीय समुत्थान को आय- कर अधिनियम की धारा 115क की उपधारा ( 1 क) के पहले परंतुक में निर्दिष्ट किसी विषय की किसी पुस्तक में प्रतिलिप्यधिकार के संबंध में अथवा भारत में निवासी किसी व्यक्ति को आय- कर अधिनियम की धारा 115 क की उपधारा ( 1 क) के दूसरे परंतुक में निर्दिष्ट किसी कम्प्यूटर साफ्टवेयर के संबंध में सभी या किन्हीं अधिकारों के ( जिनके अंतर्गत अनुज्ञप्ति देना है) अंतरण के प्रतिफल के रूप में है
10प्रतिशत;
(ऋ) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां वह करार केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है या जहां वह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित किसी विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में [ जो उपमद (ख) (i ) (ऊ) में निर्दिष्ट प्रकृति का स्वामिस्व नहीं है) , आय पर
10 प्रतिशत ;
(ए) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में , और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है , वहां वह करार केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है या जहां वह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित किसी विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, उस सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा तकनीकी सेवाओं के लिए संदेय फीस के रूप में आय पर
30प्रतिशत;
(ऐ) लाटरी, वर्ग पहेली, ताश के खेल और किसी प्रकार के खेल से जीत के रूप में आय पर भारत का राजपत्र असाधारण
101 अनुभाग 1क]
आय-कर की दर
30प्रतिशत;
(ओ) घुड़दौड़ से जीत के रूप में आय पर
(औ) अन्य सम्पूर्ण आय पर
30प्रतिशत;
( ii) किसी अन्य व्यक्ति की दशा में,-
20प्रतिशत ;
(अ) सरकार या किसी भारतीय समुत्थान द्वारा विदेशी करेंसी में उधार लिए गए धन या उपगत ऋण पर सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय ब्याज के रूप में आय पर ( जो धारा 194 ठख या धारा 194ठग में निर्दिष्ट ब्याज के रूप में आय नहीं है)
10 प्रतिशत ;
(आ) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, उस सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में आय पर, जहां ऐसा स्वामिस्व, भारतीय समुत्थान को आय- कर अधिनियम की धारा 115 क की उपधारा ( 1 क) के पहले परंतुक में निर्दिष्ट किसी विषय की किसी पुस्तक में प्रतिलिप्यधिकार के संबंध में अथवा भारत में निवासी किसी व्यक्ति को आय-कर अधिनियम की धारा 115 क की उपधारा ( 1 क) के दूसरे परंतुक में निर्दिष्ट किसी कम्प्यूटर साफ्टवेयर के संबंध में सभी या किन्हीं अधिकारों के ( जिनके अंतर्गत अनुज्ञप्ति देना है) अंतरण के प्रतिफल के रूप में है,
10प्रतिशत;
(इ) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां करार केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है या जहां यह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित किसी विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में [ जो उपमद (ख) (ii ) (आ) में निर्दिष्ट प्रकृति का स्वामिस्व नहीं है । , आय पर
10 प्रतिशत ;
(ई) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में , और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां वह करार केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है या जहां वह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित किसी विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, वहां उस सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा प्रत्येक तकनीकी सेवाओं के लिए संदेय फीस के रूप में आय पर
(उ) लाटरी, वर्ग पहेली, ताश के खेल और किसी प्रकार के अन्य खेल से जीत के रूप में आय पर 30 प्रतिशत ;
30प्रतिशत;
(ऊ) घुड़दौड़ से जीत के रूप में आय पर
15प्रतिशत ;
(ऋ) धारा 111 क में निर्दिष्ट अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर
10 प्रतिशत;
(ए) धारा 112 की उपधारा (1 ) के खंड (ग) के उपखंड ( iii) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर
20प्रतिशत ;
(ऐ) अन्य दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर [ जो धारा 10 के खंड (33) , खंड (36) और खंड (38) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ नहीं है]
30प्रतिशत;
(ओ) अन्य सम्पूर्ण आय पर
2. किसी कंपनी की दशा में ,-
(क) जहां कंपनी देशी कंपनी है,-
10 प्रतिशत;
(i ) "प्रतिभूतियों पर ब्याज" से भिन्न ब्याज के रूप में आय पर
30प्रतिशत :
(ii) लाटरी , वर्ग पहेली, ताश के खेल और किसी प्रकार के अन्य खेल से जीत के रूप में आय पर
30प्रतिशत ;
(iii) घुड़दौड़ से जीत के रूप में आय पर
10प्रतिशत ;
(iv) किसी अन्य आय पर
(ख) जहां कंपनी देशी कंपनी नहीं है,-
30प्रतिशत;
(i ) लाटरी , वर्ग पहेली, ताश के खेल और किसी प्रकार के अन्य खेल से जीत के रूप में आय पर 102
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
आय-कर की दर
(ii) घुड़दौड़ से जीत के रूप में आय पर
30प्रतिशत;
20प्रतिशत ;
(iii) सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा विदेशी करेंसी में उधार लिए गए धन या उपगत ऋण पर सरकार या किसी भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय ब्याज के रूप में आय पर ( जो धारा 194ठख या धारा 194 ठग में निर्दिष्ट ब्याज के रूप में आय नहीं है)
(iv) उसके द्वारा 31 मार्च, 1976 के पश्चात् सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में उस सरकार या किसी भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में आय पर जहां ऐसा स्वामिस्व, भारतीय समुत्थान को आय- कर अधिनियम की धारा 115 क की उपधारा ( 1 क) के पहले परंतुक में निर्दिष्ट विषय की किसी पुस्तक में प्रतिलिप्यधिकार के संबंध में अथवा भारत में निवासी किसी व्यक्ति को आय-कर अधिनियम की धारा 115क की उपधारा ( 1 क) के दूसरे परंतुक में निर्दिष्ट किसी कंप्यूटर साफ्टवेयर के संबंध में सभी या किन्हीं अधिकारों के ( जिनके अंतर्गत अनुज्ञप्ति देना है) अंतरण के प्रतिफल के रूप में है 10 प्रतिशत ;
(v) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में, और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है वहां वह करार केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है अथवा जहां वह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में आय पर [ जो उपमद (ख) ( iv) में निर्दिष्ट प्रकृति का स्वामिस्व नहीं है ]—
50प्रतिशत ;
(अ) जहां करार 31 मार्च, 1961 के पश्चात्, किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व किया गया है
10 प्रतिशत ;
(आ) जहां करार 31 मार्च, 1976 के पश्चात् किया गया है
(vi) उसके द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में , और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है, वहां वह करार केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है अथवा जहां वह भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित विषय से संबंधित है, वहां वह करार उस नीति के अनुसार है, उस सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा, तकनीकी सेवाओं के लिए , संदेय फीस के रूप में आय पर,-
50प्रतिशत ;
(अ) जहां करार 29 फरवरी , 1964 के पश्चात् किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व किया गया है
10 प्रतिशत;
(आ) जहां करार 31 मार्च, 1976 के पश्चात् किया गया है
15प्रतिशत;
(vii ) धारा 111 क में निर्दिष्ट अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर
(viii) धारा 112 की उपधारा (1 ) के खंड (ग) के उपखंड (iii) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर
10प्रतिशत;
20प्रतिशत;
(ix) अन्य दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर [जो धारा 10 के खंड ( 33) , खंड (36) और खंड (38) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ नहीं है]
40प्रतिशत ।
(x) किसी अन्य आय पर
स्पष्टीकरण- इस भाग की मद 1 ( ख) (i) के प्रयोजन के लिए , " विनिधान से आय " और " अनिवासी भारतीय " के वही अर्थ हैं, जो आय-कर अधिनियम के अध्याय 12 क में उनके हैं ।
आय-कर पर अधिभार
निम्नलिखित उपबंधों के अनुसार कटौती की गई आय- कर की रकम में,-
( i) इस भाग की मद 1 के उपबंधों के अनुसार, संघ के प्रयोजनों के लिए, जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य और कटौती के अधीन रहते हुए, आय अथवा ऐसी आय का योग, एक करोड़ रुपए से अधिक है, वहां,- भारत का राजपत्र असाधारण
103 अनुभाग 1क]
(क) प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति- संगम या व्यष्टि- निकाय, चाहे वह निगमित हो या नहीं या आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31 ) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, ऐसे कर के पंद्रह प्रतिशत की दर से और
(ख) प्रत्येक सहकारी सोसाइटी या फर्म , जो अनिवासी है, की दशा में, ऐसे कर के बारह प्रतिशत की दर से ;
(ii) इस भाग की मद 2 के उपबंधों के अनुसार संघ के प्रयोजनों के लिए , किसी देशी कंपनी से भिन्न प्रत्येक कंपनी की दशा में, -
(क) जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य और कटौती के अधीन रहते हुए , आय अथवा ऐसी आय का योग , एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय कर के दो प्रतिशत की दर से ;
(ख) जहां संदत्त या संदाय किए जाने के लिए संभाव्य और कटौती के अधीन रहते हुए , आय अथवा ऐसी आय का योग दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय- कर के पांच प्रतिशत की दर से ,
परिकलित अधिभार, बढ़ा दिया जाएगा ।
भाग 3
कतिपय दशाओं में आय-कर के प्रभारण , "वेतन " शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय से आय-कर की कटौती और " अग्रिम कर" की संगणना के लिए दरें
उन दशाओं में, जिनमें आय- कर, प्रवृत्त दर या दरों से, आय - कर अधिनियम की धारा 172 की उपधारा (4) या उक्त अधिनियम की धारा 174 की उपधारा (2) या धारा 174 क या धारा 175 या धारा 176 की उपधारा (2) के अधीन प्रभारित किया जाना है अथवा 'वेतन' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय में से उक्त अधिनियम की धारा 192 के अधीन काटा जाना है या उस पर संदाय किया जाना है अथवा जिसमें उक्त अधिनियम के अध्याय 17ग के अधीन संदेय ' अग्रिम कर की संगणना की जानी है, यथास्थिति, ऐसा आय- कर या ' अग्रिम कर [जो आय-कर अधिनियम के अध्याय 12 या अध्याय 12क या धारा 115ञख या धारा 115ञग या अध्याय 12चक या अध्याय 12चख या धारा 161 की उपधारा (1 क) या धारा 164 या धारा 164 क या धारा 167ख के अधीन , उस अध्याय या धारा में विनिर्दिष्ट दरों पर कर से प्रभार्य किसी आय के संबंध में 'अग्रिम कर नहीं है या धारा 115क या धारा 115कख या धारा 115कग या धारा 115 कगक या धारा 115 कघ या धारा 115 ख या धारा 115 खक या धारा 115 खख या धारा 115खखक या धारा 115खखग या धारा 115 खखघ या धारा 115 खखघक या धारा 115 खखङ या धारा 115 खखच या धारा 115 ङ या धारा 115ञख या धारा 115ञग के अधीन कर से प्रभार्य किसी आय के संबंध में ऐसे " अग्रिम कर " पर अधिभार नहीं है। निम्नलिखित दर या दरों से, प्रभारित किया जाएगा, काटा जाएगा या संगणित किया जाएगाः-
पैरा क
( 1) इस पैरा की मद ( II) और मद ( III) में निर्दिष्ट व्यष्टि से भिन्न प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति- संगम या व्यष्टि- निकाय की, चाहे वह निगमित हो या नहीं या आय- कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (31 ) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जो ऐसी दशा नहीं है, जिसे इस भाग का कोई अन्य पैरा लागू होता है,-
आय-कर की दरें
कुछ नहीं;
(1 ) जहां कुल आय 2,50,000 रु० से अधिक नहीं है
उस रकम का 10 प्रतिशत, जिससे कुल आय 2,50,000 रु० से अधिक हो जाती है ;
(2) जहां कुल आय 2,50,000 रु० से अधिक है, किंतु 5,00,000 रु० से अधिक नहीं है
25,000 रु० धन उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 5,00,000 성 से अधिक हो जाती है ;
(3) जहां कुल आय 5,00,000 रु० से अधिक है, किंतु 10,00,000 रु० से अधिक नहीं है
(4) जहां कुल आय 10,00,000 रु० से अधिक है
1,25,000 रु ० घन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,00,000 रु से अधिक हो जाती है ।
( II) प्रत्येक ऐसे व्यष्टि की दशा में , जो भारत में निवासी है और जो पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय साठ वर्ष या अधिक का, किंतु अस्सी वर्ष से कम आयु का है- 104
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
आय-कर की दरें
(1) जहां कुल आय 3,00,000 रु० से अधिक नहीं है
5,00,000 रु० से अधिक नहीं है (2) जहां कुल आय 3,00,000 रु० से अधिक है, किंतु
(3) जहां कुल आय 5,00,000 रु० से अधिक है, किंतु 10,00,000 रु० से अधिक नहीं है
(4) जहां कुल आय 10,00,000 रु० से अधिक है कुछ नहीं;
उस रकम का 10 प्रतिशत, जिससे कुल आय 3,00,000 रु० से अधिक हो जाती है ;
20,000 रु० धन उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 5,00,000 रु० से अधिक हो जाती है ;
1,20,000 रु० घन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,00,000 रु० से अधिक हो जाती है ।
( III) प्रत्येक ऐसे व्यष्टि की दशा में, जो भारत में निवासी है और जो पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय अस्सी वर्ष या अधिक आयु का है
आय-कर की दरें
(1 ) जहां कुल आय 5,00,000 रु० से अधिक नहीं है कुछ नहीं;
(2) जहां कुल आय 5,00,000 रु० से अधिक है किन्तु 10,00,000 रु० उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 5,00,000 रु० से
से अधिक नहीं है अधिक हो जाती है ;
(3) जहां कुल आय 10,00,000 रु० से अधिक है 1,00,000 रु० धन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय
10,00,000 रु० से अधिक हो जाती है ।
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय- कर अधिनियम की धारा 111 क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय- कर की रकम में, ऐसे प्रत्येक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यक्ति- संगम या व्यष्टि-निकाय, चाहे वह निगमित हो या नहीं या आय- कर अधिनियम की धारा 2 के खंड ( 31 ) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट प्रत्येक कृत्रिम विधिक व्यक्ति की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय-कर के पंद्रह प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा:
परंतु ऊपर उल्लिखित व्यक्तियों की दशा में , जिनकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय- कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम , एक करोड़ रुपए की कुल रकम पर, आय - कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी , जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ।
प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा में ,-
पैरा ख
आय-कर की दरें
(1 ) जहां कुल आय 10,000 रु० से अधिक नहीं है कुल आय का 10 प्रतिशत ;
(2) जहां कुल आय 10,000 रु० से अधिक है ,
किंतु 20,000 रु० से अधिक नहीं है
(3) जहां कुल आय 20,000 रु० से अधिक है 1,000 रु० धन उस रकम का 20 प्रतिशत, जिससे कुल आय 10,000 रु से अधिक हो जाती है ;
3,000 रु० धन उस रकम का 30 प्रतिशत, जिससे कुल आय 20,000 रू से अधिक हो जाती है ।
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय- कर अधिनियम की धारा 111 क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय- कर की रकम में , ऐसी प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा में , जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय- कर के बारह प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा:
परंतु ऊपर उल्लिखित प्रत्येक सहकारी सोसाइटी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय-कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल रकम पर आय - कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ।
भारत का राजपत्र असाधारण
105 अनुभाग 1क]
पैरा ग
प्रत्येक फर्म की दशा में,-
आय-कर की दर
30प्रतिशत ।
संपूर्ण कुल आय पर
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय- कर अधिनियम की धारा 111 क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय- कर की रकम को, ऐसी प्रत्येक फर्म की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय- कर के बारह प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा:
परंतु ऊपर उल्लिखित फर्म की दशा में , जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय - कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल रकम पर आय- कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी , जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ।
पैरा घ
प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, -
आय-कर की दर
30प्रतिशत ।
संपूर्ण कुल आय पर
आय-कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय- कर अधिनियम की धारा 111 क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय- कर की रकम में, ऐसे प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय - कर के बारह प्रतिशत की दर से परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा :
परंतु ऊपर उल्लिखित स्थानीय प्राधिकारी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है , ऐसी आय पर आय- कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल रकम पर आय- कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी , जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ।
पैरा ङ
कंपनी की दशा में, -
आय-कर की दरें
I. देशी कंपनी की दशा में ,-
(i ) जहां पूर्ववर्ष 2014-15 में उसका कुल आवृत्त या
सकल प्राप्तियां पांच करोड़ रुपए से अधिक नहीं है ।
कुल आय का 29 प्रतिशत;
कुल आय का 30 प्रतिशत ;
( ii) मद ( i ) में निर्दिष्ट से भिन्न
II . देशी कंपनी से भिन्न कंपनी की दशा में, -
(i) कुल आय के उतने भाग पर, जो निम्नलिखित के रूप में है,-
(क) उसके द्वारा 31 मार्च, 1961 के पश्चात्, किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व सरकार या
किसी भारतीय समुत्थान से किए गए किसी करार के अनुसरण में सरकार या भारतीय समुत्थान से प्राप्त स्वामिस्व ; या
(ख) उसके द्वारा 29 फरवरी, 1964 के पश्चात् किंतु 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व सरकार या किसी भारतीय समुत्थान से किए गए किसी करार के अनुसरण में तकनीकी सेवाएं प्रदान करने के लिए सरकार या भारतीय समुत्थान से प्राप्त फीस , 106
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
50 प्रतिशत;
और जहां, ऐसा करार दोनों में से प्रत्येक दशा में, केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है
40प्रतिशत ।
(ii) कुल आय के अतिशेष पर, यदि कोई हो
आय- कर पर अधिभार
इस पैरा के पूर्ववर्ती उपबंधों या आय - कर अधिनियम की धारा 111 क या धारा 112 के उपबंधों के अनुसार संगणित आय- कर की रकम में निम्नलिखित दर से, -
(i ) प्रत्येक देशी कंपनी की दशा में,-
(क) जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय- कर के सात प्रतिशत की दर से और
(ख) जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय- कर के बारह प्रतिशत की दर से ;
(ii) देशी कंपनी से भिन्न प्रत्येक कंपनी की दशा में,-
(क) जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है, ऐसे आय कर के दो प्रतिशत की दर से और
(ख) जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसे आय- कर के पांच प्रतिशत की दर से ,
परिकलित अधिभार, संघ के प्रयोजनों के लिए, बढ़ा दिया जाएगा:
परंतु प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय एक करोड़ रुपए से अधिक है, किंतु दस करोड़ रुपए से अधिक नहीं है , ऐसी आय पर आय - कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, एक करोड़ रुपए की कुल आय पर आय- कर के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी, जो आय की उस रकम के एक करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है :
परंतु यह और कि प्रत्येक ऐसी कंपनी की दशा में, जिसकी कुल आय दस करोड़ रुपए से अधिक है, ऐसी आय पर आय- कर और अधिभार के रूप में संदेय कुल रकम, दस करोड़ रुपए की कुल आय पर आय- कर और अधिभार के रूप में संदेय उस कुल रकम से अधिक नहीं होगी , जो आय की उस रकम के दस करोड़ रुपए से अधिक है, आधिक्य में है ।
भाग 4
(धारा 2 ( 13 ) (ग) देखिए ]
शुद्ध कृषि-आय की संगणना के नियम
नियम 1-आय-कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (1 क) के उपखंड (क) में निर्दिष्ट प्रकृति की कृषि-आय इस प्रकार संगणित की जाएगी मानो वह उस अधिनियम के अधीन " अन्य स्रोतों से आय " शीर्ष के अधीन आय- कर से प्रभार्य आय हो और उस अधिनियम की धारा 57 से धारा 59 के उपबंध, जहां तक हो सके, तद्नुसार लागू होंगे :
परंतु धारा 58 की उपधारा (2) इस उपांतरण के साथ लागू होगी कि उसमें धारा 40 क के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि उसके अंतर्गत धारा 40 क की उपधारा (3) और उपधारा (4) के प्रति निर्देश नहीं हैं ।
नियम 2-आय- कर अधिनियम की धारा 2 के खंड ( 1 क) के उपखंड (ख) या उपखंड (ग ) में निर्दिष्ट प्रकृति की कृषि-आय [जो ऐसी आय से भिन्न है, जो ऐसे भवन से व्युत्पन्न होती है, जिसकी उक्त उपखंड (ग) में निर्दिष्ट भाटक या आमदनी के पाने वाले को या खेतिहर को या वस्तु रूप में भाटक के पाने वाले को निवास- गृह के रूप में आवश्यकता हो ] इस प्रकार संगणित की जाएगी मानो वह उस अधिनियम के अधीन "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ " शीर्ष के अधीन आय- कर से प्रभार्य आय हो और आय- कर अधिनियम की धारा 30, धारा 31 , धारा 32, धारा 36, धारा 37, धारा 38, धारा 40, धारा 40 क [ उसकी उपधारा (3 ) और उपधारा (4) से भिन्न] धारा 41 , धारा 43, धारा 43 क, धारा 43ख और धारा 43 ग के उपबंध , जहां तक हो सके, तद्नुसार लागू होंगे ।
नियम ३ आय- कर अधिनियम की धारा 2 के खंड (1 क) के उपखंड (ग) में निर्दिष्ट प्रकृति की कृषि-आय , जो ऐसी आय है, जो ऐसे भवन से व्युत्पन्न होती है, जिसकी उक्त उपखंड (ग) में निर्दिष्ट भाटक या आमदनी के पाने वाले को या खेतिहर को या वस्तु रूप में माटक के पाने वाले को निवास - गृह के रूप में आवश्यकता हो, इस प्रकार संगणित की जाएगी मानो वह उस अधिनियम के अधीन " गृह- संपत्ति से आय " शीर्ष के अधीन आय-कर से प्रभार्य आय हो और उस अधिनियम की धारा 23 से धारा 27 के उपबंध , जहां तक हो सके , तद्नुसार लागू होंगे ।
107
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
नियम 4 इन नियमों के किन्हीं अन्य उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, उस दशा में-
(क) जहां निर्धारिती को भारत में उसके द्वारा उपजाई गई और विनिर्मित चाय के विक्रय से आय व्युत्पन्न होती है, ऐसी आय , आय-कर नियम, 1962 के नियम 8 के अनुसार संगणित की जाएगी और ऐसी आय के साठ प्रतिशत भाग को, निर्धारिती की कृषि-आय समझा जाएगा ;
(ख) जहां निर्धारिती को, भारत में उसके द्वारा उगाए गए रबड़ के पौधों से उसके द्वारा विनिर्मित या प्रसंस्कृत तकनीकी रूप से विनिर्दिष्ट ब्लाक रबड़ के सेंट्रीफ्यूज लेटेक्स या सिनेक्स या क्रेप्स पर आधारित लेटेक्स ( जैसे पेल लेटेक्स क्रेप ) या ब्राउन क्रेप (जैसे एस्टेट ब्राउन क्रेप , रिमिल्ड क्रेप , स्माक्ड ब्लेन्केट क्रेप या फ्लेट बार्क क्रेप) के विक्रय से आय व्युत्पन्न होती है, ऐसी आय , आय- कर नियम, 1962 के नियम 7क के अनुसार संगणित की जाएगी और ऐसी आय के पैंसठ प्रतिशत भाग को , निर्धारिती की कृषि -आय समझा जाएगा ;
(ग) जहां निर्धारिती को भारत में उसके द्वारा उपजाई गई और विनिर्मित कॉफी के विक्रय से आय व्युत्पन्न होती है, ऐसी आय , आय-कर नियम , 1962 के नियम 7 ख के अनुसार संगणित की जाएगी और ऐसी आय के, यथास्थिति, साठ प्रतिशत या पचहत्तर प्रतिशत भाग को , निर्धारिती की कृषि -आय समझा जाएगा ।
नियम 5-जहां निर्धारिती किसी ऐसे व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय (हिन्दू अविभक्त कुटुंब, कंपनी या फर्म से भिन्न) का सदस्य है , जिसकी पूर्ववर्ष में आय- कर अधिनियम के अधीन कर से प्रभार्य या तो कोई आय नहीं है या जिसकी कुल आय किसी व्यक्ति- संगम या व्यष्टि- निकाय ( हिंदू अविभक्त कुटुंब, कंपनी या फर्म से भिन्न) की दशा में कर से प्रभार्य न होने वाली अधिकतम रकम से अधिक नहीं है किंतु जिसकी कोई कृषि- आय भी है वहां उस संगम या निकाय की कृषि-आय या हानि, इन नियमों के अनुसार संगणित की जाएगी और इस प्रकार संगणित कृषि-आय या हानि में निर्धारिती के अंश को, निर्धारिती की कृषि-आय या हानि समझा जाएगा ।
नियम 6-जहां कृषि-आय के किसी स्रोत के संबंध में पूर्ववर्ष के लिए संगणना का परिणाम हानि है, वहां ऐसी हानि, कृषि-आय के किसी अन्य स्रोत से उस पूर्ववर्ष के लिए निर्धारिती की आय के प्रति, यदि कोई हो, मुजरा की जाएगी :
परंतु जहां निर्धारिती किसी व्यक्ति- संगम या व्यष्टि- निकाय का सदस्य है और यथास्थिति, संगम या निकाय की कृषि-आय में निर्धारिती काअंश हानि है, वहां ऐसी हानि, कृषि-आय के किसी अन्य स्रोत से निर्धारिती की किसी आय के प्रति मुजरा नहीं की जाएगी ।
नियम 7-राज्य सरकार द्वारा कृषि- आय पर उद्गृहीत किसी कर मद्धे निर्धारिती द्वारा संदेय राशि की, कृषि-आय की संगणना करने में , कटौती की जाएगी ।
नियम 8-(1 ) जहां निर्धारिती की, 2016 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में कोई कृषि-आय है और 2008 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2009 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2010 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2011 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्षों से सुसंगत पूर्ववर्षों में से किसी एक या अधिक के लिए निर्धारिती की कृषि-आय की संगणना का शुद्ध परिणाम हानि है, वहां इस अधिनियम की धारा 2 की उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए,-
(i) 2008 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 2009 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2010 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2011 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(ii) 2009 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो , जिस तक ऐसी हानि 2010 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2011 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(iii) 2010 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 2011 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि- आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(iv) 2011 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो , जिस तक ऐसी हानि 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
108
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(V) 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो , जिस तक ऐसी हानि 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(vi) 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(vii) 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो , जिस तक ऐसी हानि 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(viii) 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि,
2016 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए निर्धारिती की कृषि-आय के प्रति मुजरा कीजाएगी ।
(2) जहां निर्धारिती की, 2017 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में या , यदि आय- कर अधिनियम के किसी उपबंध के आधार पर, आय- कर उस पूर्ववर्ष से भिन्न किसी अवधि की आय के संबंध में प्रभारित किया जाना है तो , ऐसी अन्य अवधि में, कोई कृषि-आय है और 2009 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2010 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2011 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2016 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्षों से सुसंगत पूर्ववर्षों में से किसी एक या अधिक के लिए निर्धारिती की कृषि आय की संगणना का शुद्ध परिणाम हानि है, वहां इस अधिनियम की धारा 2 की उपधारा ( 10) के प्रयोजनों के लिए,-
(i) 2009 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 2010 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2011 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2016 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि -आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(ii) 2010 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 2011 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2016 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(iii) 2011 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2016 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(iv) 2012 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो , जिस तक ऐसी हानि 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2016 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(v) 2013 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2016 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(vi) 2014 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन या 2016 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
109
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
(vii) 2015 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि, उस परिमाण तक, यदि कोई हो, जिस तक ऐसी हानि 2016 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए कृषि-आय के प्रति मुजरा नहीं की गई है ;
(viii) 2016 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए इस प्रकार संगणित हानि,
2017 के अप्रैल के प्रथम दिन को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए निर्धारिती की कृषि-आय के प्रति मुजरा की जाएगी ।
(3) जहां किसी स्रोत से कृषि-आय प्राप्त करने वाले व्यक्ति का, कोई अन्य व्यक्ति, विरासत से भिन्न रीति से, उसी हैसियत में उत्तराधिकारी हो गया है, वहां उपनियम (1 ) या उपनियम (2 ) की कोई बात, हानि उठाने वाले व्यक्ति से भिन्न किसी व्यक्ति को, यथास्थिति, उपनियम ( 1 ) या उपनियम ( 2) के अधीन मुजरा कराने का हकदार नहीं बनाएगी ।
(4) इस नियम में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी हानि, जिसे निर्धारण अधिकारी द्वारा इन नियमों के या वित्त अधिनियम, 2008 (2008का 18) की पहली अनुसूची या वित्त ( संख्यांक 2) अधिनियम, 2009 (2009 का 33) की पहली अनुसूची या वित्त अधिनियम , 2010 (2010का 14) की पहली अनुसूची या वित्त अधिनियम , 2011 (2011 का 8) की पहली अनुसूची या वित्त अधिनियम, 2012 (2012 का 23) की पहली अनुसूची या वित्त अधिनियम , 2013 (2013 का 17) की पहली अनुसूची या वित्त ( संख्यांक 2) अधिनियम, 2014 (2014 का 25) की पहली अनुसूची या वित्त अधिनियम , 2015 (2015 का 20) की पहली अनुसूची में अंतर्विष्ट नियमों के उपबंधों के अधीन अवधारित नहीं किया गया है, यथास्थिति, उपनियम (1 ) या उपनियम (2 ) के अधीन मुजरा नहीं की जाएगी ।
नियम 9-जहां इन नियमों के अनुसार की गई संगणना का अंतिम परिणाम हानि है, वहां इस प्रकार संगणित हानि पर ध्यान नहीं दिया जाएगा और शुद्ध कृषि-आय को शून्य समझा जाएगा ।
नियम 10-आय-कर अधिनियम के निर्धारण की प्रक्रिया से संबंधित उपबंध (जिनके अंतर्गत आय के पूर्णांकन से संबंधित धारा 288 क के उपबंध भी है) आवश्यक उपांतरणों सहित, निर्धारिती की शुद्ध कृषि-आय की संगणना के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे, जैसे वे कुल आय के निर्धारण के संबंध में लागू होते हैं ।
नियम 11-निर्धारिती की शुद्ध कृषि आय की संगणना करने के प्रयोजनों के लिए, निर्धारण अधिकारी को वही शक्तियां होंगी, जो उसे कुल आय के निर्धारण के प्रयोजनों के लिए आय- कर अधिनियम के अधीन हैं ।
110
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2
दूसरी अनुसूची (धारा 139 देखिए)
संशोधन
क्र.सं. अधिसूचना संख्यांक औरतारीख
संशोधन के प्रभावी होने की तारीख
(1)
(2)
(3)
(4)
27 अप्रैल, 2000 1. सा.का.नि. 367(अ) , तारीख 27 अप्रैल, 2000 [51 /2000- सीमाशुल्क, तारीख 27 अप्रैल, 2000]
उक्त अधिसूचना के आरंभिक पैरा में " धारा 3 , धारा 8 और धारा 9 क के अधीन " शब्दों, अंकों और अक्षर के स्थान पर "धारा 3 , धारा 8ख और धारा 9 क के अधीन" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे ।
19अप्रैल, 2002 2. सा.का.नि. 292 (अ) , तारीख 19 अप्रैल , 2002 [43/2002 - सीमाशुल्क, तारीख 19 अप्रैल, 2002]
उक्त अधिसूचना के आरंभिक पैरा में " धारा 3 , धारा 8 और धारा 9 क के अधीन " शब्दों, अंकों और अक्षर के स्थान पर "धारा 3 , धारा ४ ख और धारा 9 क के अधीन " शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे ।
1 अप्रैल, 2003 3. सा.का.नि. 281 (अ) , तारीख 1 अप्रैल, 2003 [ 57/2003 - सीमाशुल्क, तारीख 1 अप्रैल, 2003]
उक्त अधिसूचना की सारणी के स्तंभ (3 ) में क्रम संख्या 4 के सामने " धारा 3 , धारा 8 और धारा 9 क के अधीन" शब्दों, अंकों और अक्षर के स्थान पर " धारा 3 , धारा 8ख और धारा 9 क के अधीन " शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे ।
10 सितंबर, 2004 4. सा.का.नि. 604(अ) , तारीख 10 सितंबर, 2004 [91 / 2004- सीमाशुल्क, तारीख 10 सितंबर, 2004]
उक्त अधिसूचना के पैरा 2 में " धारा 3 , धारा 8 और धारा 9 क के अधीन" शब्दों, अंकों और अक्षर के स्थान पर "धारा 3 , धारा 8 ख और धारा 9 क के अधीन" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे ।
10 सितंबर, 2004 5. सा.का.नि. 606 (अ) , तारीख 10 सितंबर, 2004 [93/2004- सीमाशुल्क, तारीख 10 सितंबर, 2004]
उक्त अधिसूचना के आरंभिक पैरा में "धारा 3 , धारा 8 और धारा 9 क के अधीन " शब्दों, अंकों और अक्षर के स्थान पर "धारा 3 , धारा 8ख और धारा 9 क के अधीन" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे ।
1 मई, 2006 6. सा.का.नि. 260 (अ) , तारीख 1 मई , 2006 [40/2006- सीमाशुल्क, तारीख 1 मई , 2006]
उक्त अधिसूचना के आरंभिक पैरा में "धारा 3, धारा 8 और धारा 9 क के अधीन" शब्दों, अंकों और अक्षर के स्थान पर "धारा 3 , धारा 8 ख और धारा 9 क के अधीन" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे ।
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
111
तीसरी अनुसूची
[धारा 141 ( i) देखिए।
सीमाशुल्क टैरिफ अधिनियम की पहली अनुसूची में,-
(1) अध्याय 27 के अनुपूरक टिप्पण में,-
(क) खंड (ङ) में, "1460: 2000" अंकों के स्थान पर, " 1460 : 2005 अंक रखे जाएंगे ;
(ख) खंड ( च) में, " 1460 " अंकों के स्थान पर, " 15770 : 2008 " अंक रखे जाएंगे ;
(2) अध्याय 40 में, -
(क) टैरिफ मद 401695 90 के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, "20%" प्रविष्टि रखी जाएगी ;
(ख) टैरिफ मद 401699 90 के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 20% " प्रविष्टि रखी जाएगी ;
(3) अध्याय 58 के शीर्ष 5801 में,-
(क) उपशीर्ष 5801 37 में, स्तंभ (2) में की प्रविष्टि " तान रोआं फैब्रिक, ' इपिंगल ' (अकर्तित) " का लोप किया जाएगा ;
(ख) टैरिफ मद 5801 37 11 और टैरिफ मद 5801 37 19 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
(1)
(2)
"5801 37 10
तान रोआं फैब्रिक, अकर्तित
(4) अध्याय 71 में,-
(4)
(3)
(5)
-":
वर्गमीटर
10% या 140 रु० प्रति वर्गमीटर, इनमें से जो भी उच्चतर हो
(क) शीर्ष 7104 में, टैरिफ मद 7104 9000 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
(2)
(1)
अन्य :
"7104 90 7104 90 10
प्रयोगशाला में निर्मित या प्रयोगशाला में विकसित या मानव निर्मित या कल्चरी या संश्लिष्ट हीरा ।
7104 90 90 अन्य
(3)
(5)
(4)
10%
सी/के
कि.ग्रा.
10%
(ख) शीर्ष 7117 में, स्तंभ (4) में, सभी टैरिफ मदों के सामने आने वाली प्रविष्टियों के स्थान पर " 15 % " प्रविष्टि रखी जाएगी;
(5) अध्याय 76 में, शीर्ष 7601 , शीर्ष 7603, शीर्ष 7604 , शीर्ष 7605 , शीर्ष 7606, शीर्ष 7607 की सभी टैरिफ मदों के सामने स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 7.5%" प्रविष्टि रखी जाएगी ;
(6) अध्याय 79 में, उपशीर्ष 7901 20 की सभी टैरिफ मदों के सामने स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, "7.5%" प्रविष्टिरखी जाएगी ;
112
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(7) अध्याय 84 में,-
(i ) शीर्ष 8402 की सभी टैरिफ मदों के सामने आने वाले स्तंभ (4 ) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 10 % " प्रविष्टि रखी जाएगी;
(ii) शीर्ष 8404 की सभी टैरिफ मदों के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 10%" प्रविष्टि रखी जाएगी;
(iii ) शीर्ष 8406 की सभी टैरिफ मदों (टैरिफ मद 840.6 1000 के सिवाय) के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टिके स्थान पर, " 10%" प्रविष्टि रखी जाएगी ;
(iv) शीर्ष 8410 की सभी टैरिफ मदों के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 10 %" प्रविष्टि रखी जाएगी ;
(v) शीर्ष 8411 की सभी टैरिफ मदों ( टैरिफ मद 8411 1100 , टैरिफ मद 8411 1200 , टैरिफ मद 8411 2100 , टैरिफ मद 8411 22 00 और टैरिफ मद 8411 9100 के सिवाय) के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 10%" प्रविष्टिरखी जाएगी ;
(vi ) शीर्ष 8412 की टैरिफ मद 8412 8019, टैरिफ मद 8412 80 20, टैरिफ मद 8412 80 30 और टैरिफ मद 8412 80 90 के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 10 %" प्रविष्टि रखी जाएगी ;
(vii ) टैरिफ मद 841919 20 के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 10%" प्रविष्टि रखी जाएगी ;
(8) अध्याय 85 में,-
(i ) शीर्ष 8501 की सभी टैरिफ मदों के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 10 %" प्रविष्टि रखी जाएगी:
( ii) शीर्ष 8502 की सभी टैरिफ मदों ( टैरिफ मद 8502 1100, टैरिफ मद 8502 2010 और टैरिफ मद 8502 4000 के सिवाय) के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 10% " प्रविष्टि रखी जाएगी ;
(iii) शीर्ष 8503 की सभी टैरिफ मदों (टैरिफ मद 8503 00 90 के सिवाय) के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 10 %" प्रविष्टि रखी जाएगी ;
(iv) शीर्ष 8504 की सभी टैरिफ मदों ( टैरिफ मद 8504 3100, टैरिफ मद 8504 32 00 , टैरिफ मद 8504 40 10, टैरिफ मद 8504 40 30, टैरिफ मद 8504 50 10 और टैरिफ मद 8504 50 90 के सिवाय ) के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 10 %" प्रविष्टि रखी जाएगी ;
(v) शीर्ष 8525 में, टैरिफ मद 8525 50 50 और उससे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा;
(vi) शीर्ष 8535 की सभी टैरिफ मदों (उपशीर्ष 8535 40 और उपशीर्ष 8535 90 में की टैरिफ मदों के सिवाय ) के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 10 %" प्रविष्टि रखी जाएगी ;
(vii) शीर्ष 8536 की सभी टैरिफ मदों (टैरिफ मद 8536 1010, टैरिफ मद 8536 41 00, टैरिफ मद 8536 61 10, टैरिफ मद 8536 6190 , टैरिफ मद 8536 69 10, टैरिफ मद 8536 6990 और टैरिफ मद 8536 7000 के सिवाय) के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 10 %" प्रविष्टि रखी जाएगी ;
(viii) शीर्ष 8537 की सभी टैरिफ मदों के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 10%" प्रविष्टि रखी जाएगी ;
(ix) शीर्ष 8544 की सभी टैरिफ मदों (टैरिफ मद 854442 91 , टैरिफ मद 854442 92, टैरिफ मद 854442 93, टैरिफ मद 854442 99, टैरिफ मद 8544 70 10 और टैरिफ मद 8544 70 90 के सिवाय) के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 10 %" प्रविष्टि रखी जाएगी
(x) शीर्ष 8546 की सभी टैरिफ मदों के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 10 %" प्रविष्टि रखी जाएगी ; और
(xi ) शीर्ष 8547 की सभी टैरिफ मदों के सामने आने वाले स्तंभ (4 ) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 10 %" प्रविष्टि रखी जाएगी ।
भारत का राजपत्र असाधारण
113 अनुभाग 1क]
(9) अध्याय 90 में, टैरिफ मद 9028 9010, टैरिफ मद 9030 3100, टैरिफ मद 9030 90 10, टैरिफ मद 9032 89 10 और टैरिफ मद 9032 8990, के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 10 %" प्रविष्टि रखी जाएगी।
(10) अध्याय 95 में,-
(क) टैरिफ मद 9503 00 90 के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, "20%" प्रविष्टि रखी जाएगी;
(ख) टैरिफ मद 9505 1000 के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, "20%" प्रविष्टि रखी जाएगी;
(ग) टैरिफ मद 9505 90 90 के सामने आने वाले स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, "20%" प्रविष्टि रखी जाएगी।
114
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2
चौथी अनुसूची
[धारा 141 (ii) देखिए ।
माल का वर्णन
टैरिफ मद
इकाई शुल्ककी दर मानक अधिमानी
(1)
(2)
(4)
(3)
(5)
सीमाशुल्क टैरिफ अधिनियम, 1975 की पहली अनुसूची में,-
(1) अध्याय 3 में,-
(i ) टिप्पण 1 के खंड (ग) , " जिनमें उनके यकृत और मीनांडक भी हैं" शब्दों के स्थान पर, " जिनमें उनके यकृत, मीनांडक और मिल्ट भी हैं " शब्द रखे जाएंगे ;
(ii ) शीर्ष 0301 में, टैरिफ मद 0301 9300 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
" 0301 93 00
कि.ग्रा. 30% - ".
कार्प(साइप्रिनस सभी जातियां, करासियस सभी जातियां , सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलियस , हाइपोफथालमिशथियस सभी जातियां, सिरेहिनस सभी जातियां, माइलोफेरिंगोडोन पाइसियस , कैटला कैटला, लेबिओ सभी जातियां, आस्टियोचाइलस हैजेल्टी , लेपटो बारबर होवेनी, मेगालो ब्रामा सभी जातियां)
(iii) शीर्ष 0302, टैरिफ मद 0302 11 00 से टैरिफ मद 0302 85 00 , उपशीर्ष 0302 89, टैरिफ मद 0302 89 10 से 0302 90 00 तक और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"0302
मछली, ताजा या शीतित, जिसके अंतर्गत शीर्ष 0304 के मछली के कतले और अन्य मछली मांस नहीं है
सालमोनिडे जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0302 91 से 0302 99 के खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं :
कि.ग्रा. 30% 0302 11 00
ट्राउट (सेलमो टूटा, ओंकोरहाइनकस मिकिस, ओंकोरहाइनकस क्लार्की, ओंकोरहाइनकस एगुआबोनीटा, ओंकोरहाइनकस गिलाई, ओंकोरहाइनकस एपाची और ओंकोरहाइनकस क्राइसोगास्टर)
कि.ग्रा. 30% 0302 13 00
प्रशांत सालमन (ओंकोरहाइनकस नेरका, ओंकोरहाइनकस गोरबस्चा, ओंकोरहाइनकस केटा, ओंकोरहाइनकस शुवेत्सका, ओंकोरहाइनकस किसुच, ओंकोरहाइनकस मासो और ओंकोरहाइनकस रोडोरस)
कि.ग्रा. 30% 0302 14 00
अटलांटिक सालमन (सैलमो सालर) और दानुबे सालमन (हुको हुको )
कि.ग्रा. 30% 0302 19 00
अन्य चपटी मछली (पलूटोनेक्टिडाई , बोथिडाई, साइनोग्लोसिडाई, सिलिडाई, स्कोपथालमिडाई और सिथारिडाई) , जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0302 91 से उपशीर्ष 0301 99 के खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं :
कि.ग्रा . 30% 0302 21 00
हैलिबट (रीनहार्डटिअस हिप्पोग्लोसीडाई, हिप्पोग्लोसस , हिप्पोग्लोसस स्टेनोलेपिस)
30%
कि.ग्रा.
0302 22 00
प्लेसे (प्लूरोनेक्टेस प्लेटेस्सा)
30%
कि.ग्रा.
030223 00
सोल (सोली सभी जातियां)
कि.ग्रा. 30% 0302 24 00 टरबोट्स (पेस्टा मैक्सिमा)
30%
कि.ग्रा.
0302 29 00 अन्य भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
माल का वर्णन टैरिफ मद
(1)
(2)
115
इकाई शुल्ककी दर
मानक अधिमानी
(3) (4) (5)
ट्यूना मछलियां (थ्युन्नस वंश की) , स्किपजैक या पट्टीदार तुंदवाली बोनिटो इयूथीनस (कातसूवोनस) पेलामिसट जिनके अंतर्गत उपशीर्ष 0302 91 से उपशीर्ष 0301 99 की खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं :
0302 31 00
कि.ग्रा. 30
ऐल्बाकोर या लंबे पंख वाली ट्यूना मछलियां (थ्युन्नस एललुंगा)
0302 32 00
पीत पंख वाली ट्यूना मछलियां (थ्युन्नस ऐस्बाकेयर)
0302 33 00
स्किपजैक या पट्टीदार तुंदवाली बोनिटो
0302 34 00
बिगेइ ट्यूना मछलियां (थ्युन्न्स ओबेसस)
0302 35 00
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30
कि.ग्रा. 30%
अटलांटिक और प्रांत ब्लूफिन ट्यूना मछलियां (थ्युन्नस थाईनस, थ्युन्नस ओरियंटलिस)
0302 36 00
दक्षिणी ब्लूफिन ट्यूना मछलियां (थ्युन्नस माकाई)
0302 39 00
अन्य
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
हेरिंग्स (क्लूपिया हैरंगस, क्लूपिया पैल्लासी) एंकोवीस ( एंग्राउलिस सभी जातियां) सारडीन ( सारडिना पिलचारडस, सर्डीनोप्स सभी जातियां) सारडीनेल्ला (सारडीनेल्ला सभी जातियां) , ब्रिसलिंग या स्प्रेट (स्प्रेटस स्प्रेटस) मेकेरल ( स्कोंबर स्कोंब्रुस , स्कोंबर औस्ट्रालसिकस , स्कोंबर जपोनिकस) , भारतीय मेकेरल (रास्ट्रेल्लीजर सभी जातियां) , सुरमई मछली (स्कोंबरमोरस सभी जातियां) जैक और अव मैकेरल (ट्राचुरस सभी जातियां) , जैक, क्रीवेल्स (केरेन्कस सभी जातियां) , कोबिया (रेचिसिंट्रान केनाडम) सिलवर पामफ्रेट्स ( पेम्पस सभी जातियां) , प्रशांत सावरी (कोलोलेबिस सायरा) , स्कैड्स (डेकाप्ट्स सभी जातियां) , केपलिन (मैलोटस विलोसस) स्वोर्डफिश ( जिफियास ग्लेडियस) , कावाकावा (यूथाइनस एफिनस ) बोनिटोस (सारडा सभी जातियां ) , मार्लिन्स , सेलफिसिस , स्पियरफिस (इस्टियोफोरिडे) , जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0302 91 से उपशीर्ष 0302 99 के खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं :
0302 41 00
हेरिंग्स (क्लूपिया हैरंगस, क्लूपिया पैल्लासी)
0302 42 00
एंकोवीस (एंग्राउलिस सभी जातियां)
0302 43 00
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
सारडीन (सारडिना पिलचारडस , सर्डीनोप्स सभी जातियां) सारडीनेल्ला (सारडीनेल्ला सभी जातियां) , ब्रिसलिंग या स्प्रेट (स्प्रेटस स्प्रेटस)
0302 44 00
कि.ग्रा. 30
मेकेरल (स्कोंबर स्कोंब्रुस , स्कोंबर ऑस्ट्रालसिकस , स्कोंबर जेपोनिकस)
0302 45 00
जैक और अश्व मैकेरल (ट्राचुरस सभी जातियां)
0302 46 00
कोबिया (रेचिसिंट्रान केनाडम)
0302 47 00
स्वोर्डफिश (जिफियास ग्लेडियस)
अन्य
0302 49 00
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
ब्रेगमासेरोटीडाई , यूक्लिचथिडाई, गेडिडाई , मेक्रयूरिडाई, मेलानोनिडाई, मरल्यूसिडाई, मोरिडाय और मुरेनोलेपिडिडाई समूह की मछली, जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0302 91 से उपशीर्ष 0302 99 के खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं :
0302 51 00
30%
कि.ग्रा.
कोड (गैडस मॉरहुआ, गैडस ओगैक, गैडस मैक्रोसैफालस)
0302 52 00
हैड्डाक (मेलनोग्रामस ऐग्लेफाइनस)
30%
कि.ग्रा.
116
भारत का राजपत्र असाधारण
टैरिफ मद माल का वर्णन
(1) (2)
0302 53 00 कोलफिश (पोलाचियसवाइरेंस)
0302 54 00
[भाग 2-
इकाई शुल्क की दर
मानक अधिमानी
(3) (4) (5)
कि.ग्रा. 30%
हेक (मलुसियस सभी जातियां, यूरोफिसिस सभी जातियां) कि.ग्रा. 30%
0302 55 00 अलास्का पोलैक (थेरोग्रा कालकोग्रामा) कि.ग्रा. 30%
0302 56 00 ब्लू व्हीटिंग्स (माइक्रोमेसिसटियस पोउटेसॉ, माइक्रोमेसिसटियस आस्ट्रलिस ) कि.ग्रा. 30%
030259 00 अन्य कि.ग्रा. 30%
टिलापियस (ओरेयोक्रोमिस सभी जातियां) , कैटफिश (पेंगासियस सभी
जातियां, सिलुरुस सभी जातियां, क्लेरियस सभी जातियां, इक्टालुरुस
सभी जातियां) , कार्प ( साइप्रिनस सभी जातियां, केरेसियस सभी जातियां,
सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस, हाइपोफाथालमिस्थिस सभी जातियां , सिरहिनस
सभी जातियां, मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस केटला केटला, लेबियो सभी
जातियां , आस्टियो चिलस हेस्सलती , लेप्टो बारबस होवेनी मेगलोब्रामा
सभी जातियां) , ईल्स (एंग्युला सभी जातियां) नील पर्च (लेट्स निलोटिसस)
और सरीसृप (चन्ना सभी जातियां) जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0302 91 से
उपशीर्ष 0302 99 के खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं :
0302 71 00 टिलापियस (ओरेयोक्रोमिस सभी जातियां) कि.ग्रा. 30%
0302 72 00 कैटफिश (पेंगासियस सभी जातियां, सिलुरुस सभी जातियां, क्लेरियस कि.ग्रा. 30%
सभी जातियां, इक्टालुरुस सभी जातियां)
0302 73 00 कार्प (साइप्रिनस कार्पियो , केरासियस सभी जातियां, सिटेनोफेरिंगोडोन कि.ग्रा. 30%
इडेलुस , हाइपोफाथालमिस्थिस सभी जातियां, सिरहिनस सभी जातियां,
मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस , केटला केटला, लेबियो सभी जातियां,
आस्टियोचिलस हेस्सलती , लेप्टो बारबस होवेनी, मेगलोब्रामा सभी जातियां)
0302 74 00 ईल्स (एंग्युला सभी जातियां) कि.ग्रा. 30%
0302 79 00 अन्य कि.ग्रा. 30%
अन्य मछली, जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0302 91 से उपशीर्ष 0302 99
के खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं :
0302 81 00 डागफिस सुरा और अन्य शार्क कि.ग्रा. 30%
0302 82 00 रेज और स्केट्स (रेजिडाई) कि.ग्रा. 30%
0302 83 00 टूथफिश (डिसोसटिकस सभी जातियां) कि.ग्रा. 30%
0302 84 00 समुद्री बास (डाइसैन्ट्रारकस सभी जातियां) कि.ग्रा. 30%
0302 85 00 सीब्रीम (स्पेरिडाई) कि.ग्रा. 30%
0302 89 अन्य:
030289 10 हिल्सा (टेनुवालोसा इलिसा) कि.ग्रा. 30%
0302 89 20 दारा कि.ग्रा. 30%
0302 89 30 पोम्फ्रेट कि.ग्रा. 30%
0302 89 90 अन्य कि.ग्रा. 30%
यकृत, मीनांडक, मत्स्यशुक्र, पंखदार मछली, सिर, पूंछ, उदर और अन्य
खाद्य मछली के मांस के टुकड़े
0302 91 यकृत, मीनांडक और मत्स्यशुक्र
0302 91 10 यकृत, मीनांडक और मत्स्यशुक्र कि.ग्रा. 30%
भारत का राजपत्र असाधारण
117 अनुभाग 1क]
माल का वर्णन
टैरिफ मद
इकाई शुल्ककी दर मानक अधिमानी
(1)
(2)
(4)
(3)
(5) 030292
शार्क फिन्स
कि.ग्रा. 30%
0302 92 10
शार्क फिन्स
कि.ग्रा. 30%
0302 99 अन्य :
0302 99 10
कि.ग्रा. 30%
पंखदार शार्क से भिन्न पंखदार मछली, सिर, पूंछ और उदर
कि.ग्रा. 30% ".
0302 99 90 अन्य खाद्य मछली के मांस के टुकड़े
(iv) शीर्ष 0303 , टैरिफ मद 0303 1100 से 0303 6900, उपशीर्ष 0303 81 , टैरिफ मद 0303 81 10 से 0303 8410, उपशीर्ष 0303 89, टैरिफ मद 0303 89 10 से 0303 89 99, उपशीर्ष 0303 90 , टैरिफ मद 0303 90 10 से 0303 90 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"0303
मछली, हिमशीतित, जिसके अंतर्गत शीर्ष सं0 0304 के मछली कतले और अन्य मछली मांस नहीं हैं साल्मेनिडाई , जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0303 91 से उपशीर्ष 0303 99 खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं :
कि.ग्रा. 30%
0303 11 00
सोकोई सालमन (लाल सालमन) (ओंकोरहाइनकस नेरका)
कि.ग्रा. 30%
0303 12 00
अन्य प्रशांत सालमन (आंकोरहाइनकस गोरबुशा, ओंकोरहाइनकस केटा, ओंकोरहाइनकस शुवेत्सका, ओंकोरहाइनकस किसुच, ओंकोरहाइनकस मासो और ओंकोरहाइनकस रोडोरस)
0303 13 00
कि.ग्रा. 30% अटलांटिक सालमन (सैलमो सालर) और दानुबे सालमन (हुको हुको)
0303 14 00
कि.ग्रा. 30% ट्राउट (सेलमो टूटा, ओंकोरहाइनकस मिकिस , ओंकोरहाइनकस क्लार्की, आंकोरहाइनकस एगुओबोनिटा, आंकोरहाइनकस गिलाई, ओंकोरहाइनकस एपाची और ओंकोरहाइनकस क्राइसेगास्टर)
कि.ग्रा. 30% 0303 19 00 अन्य
टिलापियस (ओरेयोक्रोमिस सभी जातियां) , कैटफिश (पेंगासियस सभी जातियां, सिलुरुस सभी जातियां, क्लेरियस सभी जातियां , इक्टालुरुस सभी जातियां) , कार्प ( साइप्रिनस कार्पियो, केरासियस केरासियस , सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस , हाइपोफाथालमिस्थिस सभी जातियां, सिरहिनस सभी जातियां, मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस केटला केटला, लेबियो सभी जातियां, ओस्टियोचिलस हेस्सलती, लेप्टो बारबस होवेनी मेगलोब्रोमा सभी जातियां) , ईल्स (एंग्युला सभी जातियां) नील पर्च (लेट्स निलोटिकस) और सरीसृप (चन्ना सभी जातियां) जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0303 91 से 0303 99 खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं:
कि.ग्रा. 30% 0303 23 00
टिलापियस (ओरेयोक्रोमिस सभी जातियां)
कि.ग्रा. 30% 0303 24 00
कैटफिश (पेंगासियस सभी जातियां , सिलुरुस सभी जातियां , क्लेरियस सभी जातियां , इक्टालुरुस सभी जातियां)
कि.ग्रा. 30% 0303 25 00 कार्प(साइप्रिनस कार्पियो, केरासियस केरासियस , सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस, हाइपोफाथालमिस्थिस सभी जातियां, सिरहिनस सभी जातियां, मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस, केटला केटला, लेबियो सभी जातियां, ओस्टियोचिलस हेस्सलती , लेप्टो बारबस होवेनी, मेगलोब्रोमा सभी जातियां)
/ 118
भारत का राजपत्र असाधारण
माल का वर्णन टैरिफ मद
(1)
(2)
0303 26 00
ईल्स (एंग्युला सभी जातियां)
0303 29 00
अन्य
[भाग 2-
इकाई शुल्ककी दर मानक अधिमानी
(3) (4) (5)
कि.ग्रा. 30%
30%
कि.ग्रा.
चपटी मछली (प्लूरोनेटिडाई , बोथिडाई, साइनोग्लोसिडाई, सोलेडाई, स्कोपथेलमिडाई और सिथारिडाई) जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0303 91 से उपशीर्ष 0303 99 खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं :
0303 31 00
कि.ग्रा. 30%
हैलीबट (रीनहार्डटिअस हिप्पोग्लोसाईडाई , हिप्पोग्लोसस हिप्पोग्लोसस, हिप्पोग्लोसस स्टेनोलेपिस)
0303 32 00
प्लैसे (प्लूरोनेक्टेस प्लेटेसा)
0303 33 00
सोल (सोली सभी जातियां)
0303 34 00
टरबोट्स (सेटा मैक्सिमा)
0303 39 00
अन्य
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
ट्यूना मछलियां (थ्यूनस वंश की) स्किपजैक या पट्टीदार तुदंवाली बोनिटो इयूथिनस (कातसूवूनस ) पेलोमिसट, जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0303 91 से उपशीर्ष 0303 99 के खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं :
0303 41 00
कि.ग्रा. 30%
एल्बाकोर या लंबे पंख वाली ट्यूना मछलियां (थ्यूनस एलालुंगा)
0303 42 00
पीले पंख वाली ट्यूना मछलियां (थ्यूनस एल्बाकेरस)
0303 43 00
स्किपजैक या पट्टीदार तुदंवाली बोनिटो
0303 44 00
बिगेई ट्यूना ( थुनस ओबेसस)
0303 45 00
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
अटलांटिक और प्रशांत ब्लूफिन टुनास (थुन्नुस थाईनस , थुन्नुस ओरियंटलिस )
0303 46 00
दक्षिणी ब्लूफिन ट्यूना (थुनस मकाई)
0303 49 00
अन्य
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
हेरिंग्स (क्लूपिया हैरंगस , क्लूपिया पैल्लासी) , एंकोवीस (एंग्राउलिस सभी जातियां) , सारडीन (सारडिना पिलचारडस , सर्डीनोप्स सभी जातियां) , सारडीनेल्ला (सारडीनेल्ला सभी जातियां ) , ब्रिसलिंग या स्प्रेट (स्प्रेटस स्प्रेटस) , मेकेरल (स्कोंबर स्कोंब्रुस , स्कोंबर ऑस्ट्रालसिकस, स्कोंबर जेपोनिकस ) , भारतीय मैकेरल्स (रेस्टरेलिगर सभी जातियां, सीर फिशेज (स्कोम्बेरोमस सभी जातियां) , जैक और अश्व मैकेरल (ट्राचुरस सभी जातियां) , कोबिया (रचिसिंट्रान केनाडम) , सिल्वर पोम्फ्रेट्स (पोम्पस सभी जातियां) , प्रशांत सौरी (कोलोलाबीस सायरा ) स्केडस (डीकैप्टरस्सप) , केपलीन (मैलोटस विल्लोसस ) और स्वोर्डफिश ( जिफियास ग्लेडियस) , कावाकावा (यूथीनस एफीनीस) , बोनीटोस (सार्ड सभी जातियां) मर्लिन्स सेलफिश , स्पीयरफिड़ा (लेस्टीयोफोरिडाई) जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0303 91 से उपशीर्ष 0303 99 खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं, जिसके अंतर्गत यकृत और मीनांडक नहीं है:
अनुभाग 1 क] भारत का राजपत्र असाधारण 119
टैरिफ मद माल का वर्णन इकाई शुल्क की दर
मानक अधिमानी
(1) (2) (3) (4) (5)
0303 51 00 हेरिंग्स ( क्लूपिया हैरंगस , क्लूपिया पैल्लासी) कि.ग्रा. 30%
0303 53 00 सारडीन (सारडिना पिलचारडस , सर्डीनोप्स सभी जातियां) , सारडीनेल्ला कि.ग्रा. 30%
(सारडीनेल्ला सभी जातियां) , ब्रिसलिंग या स्प्रेट (स्प्रेटस स्प्रेटस)
0303 54 00 मेकेरल (स्कोंबर स्कोंब्रुस, स्कोंबर ऑट्रालसिकस, स्कोंबर जपोनिकस) कि.ग्रा. 30%
0303 55 00 जैक और अश्व मैकेरल (ट्राचुरस सभी जातियां) कि.ग्रा. 30%
0303 56 00 कोबिया (रचिसिंट्रान केनाडम) कि.ग्रा. 30%
0303 57 00 स्वोर्डफिश (जिफियास ग्लेडियस) कि.ग्रा. 30%
0303 59 00 अन्य कि.ग्रा. 30%
ब्रेगमासेरोटाइडाई, इयूक्लिचथिडाई, गेडिडाई, मेक्रयूरिडिडाई , मेलानोनिडाई,
मरल्यूसिडाई, मोरिडाई और मुरेनोलेपिडिडाई समूह की मछली , जिसके
अंतर्गत उपशीर्ष 0303 91 से उपशीर्ष 0303 99 के खाद्य मछली के मांस
के टुकड़े नहीं हैं :
0303 63 00 कोड (गैडस मारहुआ, गैडस ओगैक, गैडस मैक्रोसैफालस) कि.ग्रा. 30%
0303 64 00 हैड्डाक (मेलनोग्रामस ऐग्लेफाइनस ) कि.ग्रा. 30%
0303 65 00 कोलफिश (पोलाचियस वाइरेंस ) कि.ग्रा. 30%
0303 66 00 हेक ( मलुसियस सभी जातियां , यूराफिसिस सभी जातियां) कि.ग्रा. 30%
0303 67 00 अलास्कापोलैक (थेरोग्रा कोलकोग्रामा) कि.ग्रा. 30%
0303 68 00 ब्लूव्हाटिंग्स (माइक्रोमेसिसटियस पोउटेसा, माइक्रोमेसिसटियस आस्ट्रलिस) कि.ग्रा. 30%
0303 69 00 अन्य कि.ग्रा. 30%
अन्य मछली, जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0303 91 से उपशीर्ष 0303 99
के खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं :
0303 81 डागफिश और अन्य शार्क :
0303 81 10 डागफिश कि.ग्रा. 30%
0303 81 90 अन्य शार्क कि.ग्रा. 30%
0303 82 00 रेज़ और स्केट्स (रेजिडाई) कि.ग्रा. 30%
0303 83 00 टूथफिश (डिसोसटिकस सभी जातियां) कि.ग्रा. 30%
0303 84 00 समुद्री बास (डाइसैन्ट्रारकस सभी जातियां) कि.ग्रा. 30%
0303 89 अन्य:
0303 89 10 हिल्सा टेनयूआलोसा ईलीशा कि.ग्रा. 30%
0303 89 20 दारा कि.ग्रा. 30%
0303 89 30 रिब्बन फिश कि.ग्रा. 30%
120
भारत का राजपत्र असाधारण
टैरिफ मद माल का वर्णन
(1) (2)
0303 89 40 सुरमई
0303 89 50 पोम्फ्रेट (सफेद या सिल्वर या काली)
0303 89 60 घोल
0303 89 70 सूत्रपख
0303 89 80 क्रोकर, ग्रुपर, फ्लाउंडर
0303 89 90 अन्य
[भाग 2-
इकाई शुल्ककी दर
मानक अधिमानी
(3) (4) (5)
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
यकृत, मीनांडक, मिल्ट, फिश फिन्स, सिर, पूंछ, उदर और अन्य खाद्य
मछली के मांस के टुकड़े
0303 91 यकृत, मीनांडक और मिल्ट
0303 91 10 मछली का अंडा और अंडे की जर्दी कि.ग्रा. 30%
0303 91 90 अन्य कि.ग्रा. 30%
0303 92 शार्क फिन्स
0303 92 10 शार्क फिन्स कि.ग्रा. 30%
0303 99 अन्य:
0303 99 10 मछली के पंख , शार्क पंख , सिर, पूंछ और उदर से भिन्न कि.ग्रा. 30%
0303 99 90 अन्य खाद्य मछली के मांस के टुकड़े कि.ग्रा. 30%
(v) शीर्ष 0304 में,—
(क) 0304 शीर्ष की प्रविष्टियों के पश्चात् स्तम्भ (2) में आने वाली प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा,
अर्थात्ः-
ताजे , द्रुतशीतित या हिमशीतित
"
टिलापियस (ओरेयोक्रोमिस सभी जातियां) , कैटफिश (पेंगासियस सभी
जातियां, सिलुरुस सभी जातियां , क्लेरियस सभी जातियां, इक्टालुरुस
सभी जातियां) , कार्प (साइप्रिनस सभी जातियां , केरासियस सभी जातियां,
सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस, हाइपोफाथालमिस्थिस सभी जातियां , सिरहिनस
सभी जातियां , मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस कैटला कैटला, लेबिओ सभी
जातियां, आस्टियोचाइलस हैजेल्टी, लेपटोबारबस होईवेनी , मेगा लो ब्रामा
सभी जातियां) , ईल्स (एंग्युला सभी जातियां) , नील पर्व (लेट्स निलोटिकस)
और सरीसृप (चन्ना सभी जातियां): " ;
(ख) टैरिफ मद 0304 46,00 से 0304 99 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा,
अर्थात्
"0304 46 00 टूथफिश (डिसोसटिकस सभी जातियां) कि.ग्रा. 30%
0304 47 00 डागफिश और अन्य शार्क कि.ग्रा. 30%
भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
टैरिफ मद माल का वर्णन
(1) (2)
0304 48 00 रेज और स्केट्स (रेजिडाई)
0304 49 अन्य:
0304 49 10 हिल्सा ( टेनुयालोसा इलिशा)
0304 49 30 सुरमई
0304 49 40 ट्यूना
0304 49 90 अन्य
अन्य, ताजा या द्रुतशीतित:
0304 51 00
121
इकाई शुल्ककी दर
मानक अधिमानी
(3) (4) (5)
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
टिलापियस (ओरेयोक्रोमिस सभी जातियां) , कैटफिश (पेंगासियस सभी कि.ग्रा. 30%
जातियां, सिलुरुस सभी जातियां , क्लेरियस सभी जातियां, इक्टालुरुस
सभी जातियां) , कार्प ( साइप्रिनस सभी जातियां , केरासियस सभी जातियां,
सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस, हाइपोफाथाइमिस्थिस सभी जातियां, सिरहिनस
सभी जातियां, मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस कैटला कैटला, लेबियो सभी
जातियां, ओस्टियोचाइलस हैसल्टी, लेप्टोबार्बस होईवेनी , मेगालोब्रामा सभी
जातियां) , ईल्स ( एंग्युला सभी जातियां) नील पर्च (लेट्स निलोटिकस)
और सरीसृप (चन्ना सभी जातियां)
0304 52 00 साल्मोनिडाई कि.ग्रा. 30%
0304 53 00 ब्रेगमासेरोटाइडाई, इयूक्लिचथिडाई, गेडिडाई, मेक्रयूरिडाई, मेलानोनिडाई, कि.ग्रा. 30%
मरल्यूसिडाई , मोरिडाई और मुरेनोलेपिडिडाई समूह की मछली
0304 54 00 स्वोर्डफिश ( जिफियास ग्लेडियस) कि.ग्रा. 30%
0304 55 00 टूथफिश (डिसोसटिकस सभी जातियां) कि.ग्रा. 30%
0304 56 00 डागफिशऔर अन्य शार्क कि.ग्रा. 30%
0304 57 00 रेज और स्केट्स (रेजिडाय) कि.ग्रा. 30%
0304 59 अन्य:
0304 59 10 हिल्सा ( टेनुवालोसा इलिशा ) कि.ग्रा. 30%
0304 59 30 सुरमई कि.ग्रा. 30%
0304 59 40 कि.ग्रा. 30%
ट्यूना
0304 59 90 अन्य कि.ग्रा.
टिलापियस (ओरेयोक्रोमिस सभी जातियां) , कैटफिश (पेंगासियस सभी जातियां, सिलुरुस सभी जातियां , क्लेरियस सभी जातियां , इक्टालुरुस सभी जातियां) , कार्प ( साइप्रिनस सभी जातियां, केरासियस सभी जातियां, सटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस , हाइपोफाथालमिस्थिस सभी जातियां, सिरहिनस सभी जातियां, मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस, कैटला कैटला, लेबियो सभी जातियां, ओस्टियोचाइलस हैसल्टी , लेप्टोबार्बस होईवेनी, मेगालोब्रामा सभी जातियां) , ईल्स ( एंग्युला सभी जातियां) नील पर्च
122 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग 2
टैरिफ मद माल का वर्णन इकाई शुल्क की दर
मानक अधिमानी
(1 ) (2) (3) (4) (5)
(लेट्स निलोटिकस) और सरीसृप (चन्ना सभी जातियां):
0304 61 00 टिलापियस ( ओरेयोक्रोमिस सभी जातियां) कि.ग्रा. 30%
0304 62 00 कैटफिश (पेंगासियस सभी जातियां, सिलुरुस सभी जातियां, क्लेरियस कि.ग्रा. 30%
सभी जातियां, इक्टालुरुस सभी जातियां) ,
0304 63 00 नील पर्च (लेट्स निलोटिसस) कि.ग्रा. 30%
0304 69 00 अन्य कि.ग्रा. 30%
ब्रेगमासेरोटाइडाई , इयूक्लिचथिडाई , गेडिडाय, मेक्रयूरिडाई, मेलानोनिडाई,
मरल्यूसिडाई , मोरिडाई और मुरेनोलेपिडिडाई समूह की हिमशीतित मछली
के कतले:
0304 71 00 कोड ( गैडस मारहुआ, गैडस ओगैक, गैडस मैक्रोसैफालस) कि.ग्रा. 30%
0304 72 00 हैड्डाक ( मेलनोग्रामस ऐग्लेफाइनस) कि.ग्रा. 30%
0304 73 00 कोलफिश (पोलाचियस वाइरेंस) कि.ग्रा. 30%
0304 74 00 हेक (मलुसियस सभी जातियां, यूराफिसिस सभी जातियां) कि.ग्रा. 30%
0304 75 00 अलास्का पोलैक (थेरोग्रा क्यालकोग्रामा) - कि.ग्रा. 30%
0304 79 00 अन्य कि.ग्रा. 30%
अन्य मछली के हिमशीतित कतले:
0304 81 00 प्रशांत सालमन (ओंकोरहाइनकस नेरका, ओंकोरहाइनकस गोरबस्चा, कि.ग्रा. 30%
ओंकोरहाइनकस केटा, ओंकोरहाइनकस शुवेत्सका, ओंकोरहाइनकस किसुच,
ओंकोरहाइनकस मासो और ओंकोरहाइनकस रोडोरस) , अटलांटिक सालमन
(सैलमो सालर) और दानुबे सालमन (हुको हुंको)
0304 82 00 ट्राउट (सेलमो टूटा, ओंकोरहाइनकस मिकिस , ओंकोरहाइनकस क्लार्की, कि.ग्रा. 30%
ओंकोरहाइनकस एगुओबोनिटा, ओंकोरहाइनकस गिलाई, ओंकोरहाइनकस
एपाची और ओंकोरहाइनकस क्राइसोगास्टर)
0304 83 00 चपटी मछली (पलूरोनेक्टिडाई, बोथिडाई, साइनोग्लोसिडाई, सोलिडाई , कि.ग्रा. 30%
स्कोपथालमिडाई और सिथारिडाई)
0304 84 00 स्वोर्डफिश (जिफियास ग्लेडियस) कि.ग्रा. 30%
0304 85 00 टूथफिश (डिसोसटिकस सभी जातियां) कि.ग्रा. 30%
0304 86 00 हेरिंग्स (क्लूपिया हैरंगस , क्लूपिया पैल्लासी) कि.ग्रा. 30%
0304 87 00 ट्यूना मछलियां (थ्युन्नस वंश की) , स्किपजैक या पट्टीदार तुंदवाली
बोनिटो [ यूथीनस (कातसूवोनस) पेलामिस] कि.ग्रा. 30%
0304 88 डागफिश , अन्य शार्क रेज और स्केट्स (रेजिडाई) : कि.ग्रा. 30
0304 88 10 डागफिश कि.ग्रा. 30%
भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
टैरिफ मद
माल का वर्णन
(1)
(2)
0304 88 20
अन्य शार्क
0304 88 30
रेज और स्केट्स (रेजिडाई)
0304 89
अन्य:
0304 89 10
हिल्सा (टेनुवालोसा इलिशा)
0304 89 30
सुरमई
0304 89 40
टूना
0304 89 90
अन्य
अन्य, हिमशीतित:
0304 91 00
स्वोर्डफिस (जिफियास ग्लैडियस)
0304 92 00
टूथफिस (डिसोसटिकस सभी जातियां)
0304 93 00
123
इकाई शुल्ककी दर मानक अधिमानी
(3)
(5)
(4)
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा . 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
किग्रा 30%
किग्रा 30%
टिलापियस (ओरेयोक्रोमिस सभी जातियां) , कैटफिश (पेंगासियस सभी जातियां, सिलुरुस सभी जातियां , क्लेरियस सभी जातियां , इक्टालुरुस सभी जातियां) , कार्प ( साइप्रिनस सभी जातियां, केरासियस सभी जातियां, सटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस, हाइपोफाथाइमिस्थिस सभी जातियां, सिरहिनस सभी जातियां, मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस , कैटला कैटला, लेबियो सभी जातियां, ओस्टियोचाइलस हैसल्टी, लेप्टोबार्बस होईवेनी , मेगालोब्रामा सभी जातियां) , ईल्स ( एंग्युला सभी जातियां) नील पर्व (लेट्स निलोटिसस) और सरीसृप (चन्ना सभी जातियां)
0304 94 00
अलास्का पोलैक (थेरोग्रा कालकोग्रामा)
0304 95 00
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
ब्रेगमासेरोटाइडाई, इयूक्लिचथिडाई, गेडिडाय, मेक्रयूरिडाई , मेलानोनिडाई , मरल्यूसिडाई, मोरिडाई और मुरेनोलेपिडिडाई समूह की मछली, अलास्का पोलैक (थेरोग्रा कोलकोग्रामा)
0304 96 00
डौगफिश और अन्य शार्क
0304 97 00
रेज और स्केट्स (रजीडाई)
0304 99 00
अन्य
(vi ) शीर्ष 0305 में, -
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30% ";
(क) टैरिफ मद 0305 20 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्
" 0305 20 00
कि.ग्रा. 30% - ".
मछली का यकृत मिनांडक और मिल्ट, शुष्कित, धूमित लवणित या लवण जल में रखे हुए
(ख) टैरिफ मद 0305 31 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"0305 31 00
कि.ग्रा. 30% - ";
टिलापियस (ओरेयोक्रोमिस सभी जातियां) , कैटफिश (पेंगासियस सभी जातियां, सिलुरुस सभी जातियां , क्लेरियस सभी जातियां, इक्टालुरुस सभी जातियां) , कार्प (साइप्रिनस सभी जातियां , केरासियस, सभी जातियां, सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस , हाइपोफाथालमिस्थिस सभी जातियां, 124
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2
टैरिफ मद
माल का वर्णन
इकाई
मानक
शुल्ककी दर अधिमानी
(1)
(2)
(3) (4) (5)
सिरहिनस सभी जातियां, मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस कैटला कैटला, लेबियो सभी जातियां , ओस्टियोचाइलस हैसल्टी, लेप्टोबार्बस होईवेनी, मेगालोब्रामा सभी जातियां) , ईल्स ( एंग्युला सभी जातियां) , नील पर्च (लेट्स निलोटिकस) और सरीसृप ( चन्ना सभी जातियां)
(ग) टैरिफ मद 0305 44 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
" 0305 44 00
कि.ग्रा. 30% ";
टिलापियस (ओरेयोक्रोमिस सभी जातियां) , कैटफिश ( पेंगासियस सभी जातियां , सिलुरुस सभी जातियां , क्लेरियस सभी जातियां, इक्टालुरुस सभी जातियां) , कार्प (साइप्रिनस सभी जातियां, केरासियस, सभी जातियां, सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस, हाइपोफाथालमिस्थिस सभी जातियां, सिरहिनस सभी जातियां, मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस) , कैटला कैटला, लेबियो सभी जातियां, ओस्टियोचाइलस हैसल्टी, लेप्टोबार्बस होईवेनी, मेगालोब्रामा सभी जातियां) , ईल्स (एंग्युला सभी जातियां) , नील पर्च (लेट्स निलोटिकस ) और सरीसृप (चन्ना सभी जातियां)
अर्थात् (घ) टैरिफ मद 0305 51 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
"0305 52 00
कि.ग्रा. 30%
टिलापियस (ओरेयोक्रोमिस सभी जातियां) , कैटफिश (पेंगासियस सभी जातियां, सिलुरुस सभी जातियां, क्लेरियस सभी जातियां , इक्टालुरुस सभी जातियां) , कार्प ( साइप्रिनस सभी जातियां, केरासियस, सभी जातियां, सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस , हाइपोफाथालमिस्थिस सभी जातियां , सिरहिनस सभी जातियां , मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस) , कैटला कैटला, लेबियो सभी जातियां, ओस्टियोचाइलस हैसल्टी, लेप्टोबार्बस होईवेनी, मेगालोब्रामा सभी जातियां) , ईल्स (एंग्युला सभी जातियां) , नील पर्व (लेट्स निलोटिसस) और सरीसृप (चन्ना सभी जातियां)
कि.ग्रा. 30%
0305 53 00
कौड (गैडस मौरहुआ, गौडस औगेक, गैडस मैक्रोसेफालस) से भिन्न ब्रेगमासेरोटाइडाई , इयूक्लिचथिडाई, गेडिडाय, मेक्रयूरिडाई, मेलानोनिडाई, मरल्यूसिडाई , मोरिडाई और मुरेनोलेपिडिडाई समूह की मछली
0305 54 00
कि.ग्रा. 30% ";
हेरिंग्स (क्लूपिया हैरंगस , क्लूपिया पैल्लासी) एंकोवीस (एंग्राउसिल सभी जातियां) सारडीन ( सारडिना पिलचारडस , सर्डीनोप्स सभी जातियां) सारडीनेल्ला ( सारडीनेल्ला सभी जातियां) , ब्रिसलिंग या स्प्रेट (स्प्रेटस स्प्रेटस) मेकेरल (स्कोंबर स्कोंब्रुस, स्कोंबर ऑस्ट्रालसियस , स्कोंबर जपोनिकस) , भारतीय मेकेरल (रास्ट्रेल्लीजर सभी जातियां) , सीयर मछली (स्कोंबरमोरस सभी जातियां) जैक और अश्व मैकेरल (ट्राचुरस सभी जातियां) , जैक, क्रीवेल्स (केरेन्क्स सभी जातियां) , कोबिया (रेचिसिंट्रान केनाडम) सिलवर पामफ्रेट्स ( पेम्पस सभी जातियां) , पेसिफइक सावरी (कोलोलेबिस सायरा) , स्कैड्स (डेकाप्ट्स सभी जातियां) , कोपेलिन (मैलोटस विलोसस) स्वोर्डफिश (जिफियास ग्लेडियस ) , कावाकावा (यूथाइनस एफिनस ) बोनिटोस ( सारडा सभी जातियां) , मार्लिन्स, सेलफिसिस , स्पियरफिस (इस्टियोफोरिडे)
(ङ) टैरिफ मद 0305 64 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्
किग्रा 30% - " ;
"0305 64 00
टिलापियस (ओरेयोक्रोमिस सभी जातियां ) , कैटफिश (पेंगासियस सभी
भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
माल का वर्णन टैरिफ मद
(1)
(2)
125
इकाई शुल्ककी दर अधिमानी मानक
(3) (4) (5)
जातियां, सिलुरुस सभी जातियां , क्लेरियस सभी जातियां, इक्टालुरुस सभी जातियां) , कार्प ( साइप्रिनस सभी जातियां, केरासियस , सभी जातियां सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस , हाइपोफाथालमिस्थिस सभी जातियां, सिरहिनस सभी जातियां, मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस कैटला कैटला, लेबियो सभी जातियां , ओस्टियोचाइलस हैसल्टी, लेप्टोबार्बस होईवेनी, मेगालोब्रामा सभी जातियां) , ईल्स (एंग्युला सभी जातियां) , नील पर्च (लेट्स निलोटिकस) और सरीसृप ( चन्ना सभी जातियां)
(vii) शीर्ष 0306 में , टैरिफ मद 0306 19 00 से 0306 29 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"0306 19 00
कि.ग्रा. 30%
अन्य, जिनके अंतर्गत क्रस्टेशिया का आटा, अवचूर्ण और गुटिका है, जो मानव उपयोग के लिए उपयुक्त है
जीवित, ताजी या द्रुतशीतित:
0306 31 00
कि.ग्रा. 30%
शैल महाचिंगट और अन्य समुद्री प्रचिंगट (पालिनुरुस सभी जातियां , जेसस सभी जातियां)
0306 32 00
महाचिंगट (होमारुस सभी जातियां)
कर्कट
0306 33 00
0306 34 00
नार्वे महाचिंगट (नेफ्रोस नार्वेजिकस)
0306 35 00
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
शीत जल झींगी और झींगा ( पांडालुस सभी जातियां, क्रॅगोन क्रॅगोन)
0306 36 00
अन्य झींगी और झींगा
0306 39 00
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
अन्य, जिनके अंतर्गत क्रस्टेशिया का आटा, अवचूर्ण और गुटिका है, जो मानव उपयोग के लिए उपयुक्त है
अन्य :
0306 91 00
कि.ग्रा. 30%
शैल महाचिंगट और अन्य समुद्री प्रचिंगट (पानुलिरस सभी जातियां, जेसस सभी जातियां)
0306 92 00
महाचिंगट (होमारुस सभी जातियां)
कर्कट
0306 93 00
0306 94 00
नार्वे महाचिंगट (नेफ्रोस नार्वेजिकस)
0306 95 00
अन्य झींगी और झींगा
0306 99 00
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30% - ";
अन्य, जिनके अंतर्गत क्रस्टेशिया का आटा, अवचूर्ण और गुटिका है, जो मानव उपयोग के लिए उपयुक्त है
(viii) शीर्ष 0307 में,-
(क) टैरिफ मद 0307 11 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, 126
भारत का राजपत्र असाधारण
टैरिफ मद
माल का वर्णन
(1)
(2)
अर्थात्:-
"0307 12 00 हिमशीतित
[भाग 2-
इकाई शुल्क की दर
मानक अधिमानी
(3) (4) (5)
कि.ग्रा. 30% - ";
(ख) टैरिफ मद 0307 21 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
"0307 22 00 हिमशीतित
कि.ग्रा. 30% - ";
(ग) टैरिफ मद 0307 31 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा ,
अर्थात्
हिमशीतित "0307 32 00
कि.ग्रा. 30% " ;
(घ) टैरिफ मद 0307 39 90 से 0307 49 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा ,
अर्थात्:-
"0307 39 90 अन्य
सुफेनक और स्कवीड :
0307 42 जीवित, ताजी या द्रुतशीतित
0307 42 10 सुफेनक
0307 42 20 स्कवीड
0307 43 हिमशीतित:
0307 43 10 सुफेनक
0307 43 20 समस्त स्कवीड
0307 43 30 स्क्वीड ट्यूबें
0307 49 अन्य :
0307 49 10 सुफेनक
0307 49 20 समस्त स्कवीड
0307 49 30 स्क्वीडट्यूबें
0307 49 40 शुष्कित स्कवीड
0307 49 90 अन्य
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30% - " ;
(ङ) टैरिफ मद 0307 51 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
" 0307 52 00 हिमशीतित
- " ; कि.ग्रा. 30%
(च) टैरिफ मद 0307 71 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा ,
अर्थात्
" 0307 72 00 हिमशीतित
कि.ग्रा. 30% - " ;
(छ) टैरिफ मद 0307 79 00 से 0307 89 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा , भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
टैरिफ मद
माल का वर्णन
(1)
(2)
अर्थात्:-
"0307 79 00
अन्य
127
इकाई शुल्क की दर मानक अधिमानी
(3) (4) (5)
कि.ग्रा. 30% ";
ऐबेलोन (हेलियोटिस सभी जातियां ) और स्ट्रामबाइड सीपियां ( स्ट्रामबस सभी जातियां):
0307 81 00
कि.ग्रा. 30%
जीवित, ताजा या द्रुतशीतित ऐबेलोन (हेलियोटिस सभी जातियां)
0307 82 00
कि.ग्रा. 30%
जीवित, ताजा या द्रुतशीतित स्ट्रामबाइड सीपियां (स्ट्रामबस सभी जातियां)
0307 83 00
हिमशीतित एबेलोन (हेलियोटिस सभी जातियां)
0307 84 00
हिमशीतित स्ट्रामबाइड सीपियां (स्ट्रामबस सभी जातियां)
0307 87 00
अन्य ऐबेलोन (हेलियोटिस सभी जातियां)
0307 88 00
अन्य स्ट्रामबाइड सीपियां (स्ट्रामबस सभी जातियां) कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30% - " ;
(ज) टैरिफ मद 0307 91 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
हिमशीतित
"0307 92 00
(ix) शीर्ष 0308 में,-
कि.ग्रा. 30% - ";
(क) स्तंभ (2) में 0308 शीर्ष की प्रविष्टि के पश्चात् आने वाली प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगाः " समुद्री
कुकुंबस्स (स्टीकोपस जैपोनिकस होलोथूरियाडई) ";
(ख) टैरिफ मद 0308 11 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-
"0308 12 00
हिमशीतित
कि.ग्रा. 30% - " ;
(ग) टैरिफ मद 0308 19 00 से 0308 21 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"0308 19 00
अन्य
कि.ग्रा. 30
समुद्री जलशाही (स्ट्रांगिलोसेंट्रोटस सभी जातियां, पैरासेंट्रोटस लिविडस, लोक्सीचिनस एल्बस , इचिचिनस एस्कुलेंटस):
0308 21 00
जीवित , ताजा या द्रुतशीतित
"0308 22 00
हिमशीतित
(2) अध्याय 4 के टिप्पण 4 में,-
(अ) खंड (क) में "या " शब्द का लोप किया जाएगा;
कि.ग्रा. 30%
कि.ग्रा. 30% - ";
(आ) खंड (क) के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
128
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
माल का वर्णन
टैरिफ मद
इकाई शुल्क की दर मानक अधिमानी
(2)
(3)
(1)
(4) (5)
" (ख) ऐसे उत्पाद जिन्हें उसके एक या अधिक प्राकृतिक घटकों (मक्खनवसा) को प्रतिस्थापित करके किसी अन्य पदार्थ (उदाहरणार्थ तैलवसा) ( शीर्ष 1901 या 2106) के साथ मिलाकर दूध से अभिप्राप्त किए जाते हैं; या"
(इ) विद्यमान खंड (ख) को खंड (ग) के रूप में पुनर्संख्यांकित किया जाएगा।
(3) अध्याय 5 में, टिप्पण 4 के स्थान पर निम्नलिखित टिप्पण रखा जाएगा , अर्थात्:
'4. समस्त अनुसूची में "अश्वरोम " पद से अश्व या गोकुलीय प्राणियों के अयालों या पूंछों के बाल अभिप्रेत हैं। अन्य बातों के साथ- साथ, शीर्ष 0511 के अंतर्गत अश्वरोम और अश्वरोम अपशिष्ट भी हैं चाहे वे सहायक सामग्री सहित या रहित पद के रूप में लगाए जाते हैं या नहीं । ' ।
(4) अध्याय 8 के शीर्ष 0805 में , टैरिफ मद 0808 20 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
" मैन्डारिन ( जिसके अंतर्गत टैन्जेरिन और सटसुमस है) ; क्लमेन्टाइन, विलकिंग और अन्य वैसे ही निम्बुकुल संकर :
कि.ग्रा. 30%
0805 21 00 मैन्डारिन (जिसके अंतर्गत टैन्जेरिन और सटसुमस है)
कि.ग्रा. 30%
0805 22 00 क्लमेन्टाइन
कि.ग्रा. 30 -".
0805 29 00 अन्य
(5) अध्याय 12 में,-
(i ) शीर्ष 1211 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्: -
"1211 इस प्रकार के पौधे और पौधों के भाग (जिसके अंतर्गत बीज और फल है) जिनका उपयोग प्रथमतः सुगंध सामग्री में, या फार्मेसी में या कीटनाशी, फफूंदी नाशी या वैसे ही प्रयोजनों के लिए किया जाता है, ताजे, द्रुतशीतित, हिमशीतित या शुष्कित, चाहे कर्तित, दलित या चूर्णित हैं या नहीं " ;
(ii) शीर्ष 1211 40 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
कि.ग्रा. 30% " "1211 50 00 एफेड्रा
(6) अध्याय 13 के शीर्ष 1302 में , टैरिफ मद 1302 13 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
कि.ग्रा. 30% - ".
"1302 14 00 एफेड्रा के
(7) अध्याय 16 में,-
(i) उपशीर्ष टिप्पण 1 के दूसरे वाक्य में " शिशु आहार " शब्दों के स्थान पर, " शिशु या तरुण बालकों के लिए उपयुक्त आहार " शब्द रखे जाएंगे;
(ii) टैरिफ मद 1604 1700 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
-". कि.ग्रा. 30%
"1604 18 00 शार्क फिन्स भारत का राजपत्र असाधारण
129 अनुभाग 1क]
माल का वर्णन
टैरिफ मद
इकाई शुल्क की दर मानक अधिमानी
(1)
(2)
(4)
(3)
(5)
(8) अध्याय 19 में, उपशीर्ष 1901 10 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"1901 10 शिशुओं या तरुण बालकों के लिए उपयुक्त निर्मितियां जो फुटकर विक्रय के लिए रखी गई हैं" ;
(9) अध्याय 20 में,-
(i ) उपशीर्ष टिप्पण 1 के दूसरे वाक्य में " शिशु आहार" शब्दों के स्थान पर, " शिशु या तरुण बालकों के लिए उपयुक्त आहार " शब्द रखे जाएंगे;
(ii) उपशीर्ष टिप्पण 2 के दूसरे वाक्य में " शिशु आहार" शब्दों के स्थान पर, " शिशु या तरुण बालकों के लिए उपयुक्त आहार" शब्द रखे जाएंगे;
(10) अध्याय 21 में, उपशीर्ष टिप्पण 3 के दूसरे वाक्य में " शिशु आहार" शब्दों के स्थान पर, "शिशु या तरुण बालकों के लिए उपयुक्त आहार" शब्द रखे जाएंगे ;
(11 ) अध्याय 22 में, -
(i ) उपशीर्ष 2202 90 में , टैरिफ मद 2202 90 10 से 2202 90 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
" अन्य:
2202 91 00 गैर-अल्कोहालिक बीयर
लि. 30%
220299 अन्य:
लि. 30%
2202 99 10 सोया दुग्ध पेय , चाहे मधुरित या सुरुचिकारक हैं या नहीं
लि. 30%
2202 99 20 फल गूदा या फल रस आधारित पेय
लि. 30%
220299 30 दूध से युक्त सुपेय
लि. 30% ";
2202 99 90 अन्य
(ii) टैरिफ मद 2204 21 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
"2204 22 2 लि. से अधिक किंतु 10 लि. से अनधिक रखने वाले आधानों में :
लि. 150% 2204 22 10 पोर्ट और अन्य रेड वाइन
लि. 150% 2204 22 20 शेरी और अन्य व्हाइट वाइन
लि. 150% . ";
2204 22 90 अन्य
(iii) टैरिफ मद 2206 00 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
लि. 150% ".
"2206 00 00 अन्य किण्वत सुपेय (उदाहरणार्थ, साइडर पैरी , मीड, सेक) ; किण्वन का सुपेय का मिश्रण तथा किण्वत सुपेय और गैर- एल्कोहाली सुपेय का मिश्रण जो अन्यत्र विनिर्दिष्ट या सम्मिलित नहीं है ;
(12) अध्याय 27 में,-
(i ) उपशीर्ष टिप्पण 4 के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
130
भारत का राजपत्र असाधारण
माल का वर्णन टैरिफ मद
(1)
(2)
[भाग 2-
इकाई शुल्ककी दर मानक अधिमानी
(3) (4) (5)
"4. उपशीर्ष 2710 12 के प्रयोजनों के लिए , "हल्के तेल और निर्मितियां " वे हैं जिनका आयतन के अनुसार आई एस ओ 3405 प्रणाली ( एएसटीएम डी 86 प्रणाली के समतुल्य) के अनुसार 210 डिग्री सेंटीग्रेड पर आसवन 90 % या उससे अधिक (जिसके अंतर्गत हानियां है) होता है। " ;
(ii) टैरिफ मद 2707 50 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"2707 50 00
लि. 10% - ";
अन्य ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन मिश्रण जिनकी 65 प्रतिशत या अधिक मात्रा का आसवन ( जिसके अंतर्गत हानि भी है) ( एएसटीएमडी 86 पद्धति के समतुल्य) आई एस ओ 3405 पद्धति द्वारा 250 डिग्री सेंटीग्रेट पर होता है
(13) अध्याय 28 में, -
(i) टिप्पण 7 के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
"7. शीर्ष 2853 के अंतर्गत ताम्र फास्फाइड (फास्फर ताम्र) जिसमें भार के आधार पर फास्फोरस 15% से अधिक है । " ;
(ii) टैरिफ मद 2811 11 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
" 2811 12 00
हाइड्रोजन साइनाइड (हाइड्रोसाइनिक अम्ल) कि.ग्रा. 10%
(iii) टैरिफ मद 2811 19 10 और उससे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा,
(iv) उपशीर्ष 2812 10 , टैरिफ मद 2812 10 10 से 2812 90 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्
66
क्लोराइड्स और क्लोराइड आक्साइड:
"2812 11 00 कार्बोनिल डाईक्लोराइड (फौसजीन)
2812 12 00
फास्फोरस आक्सीक्लोराइड
2812 13 00 फास्फोरस ट्राईक्लोराइड
2812 14 00
फास्फोरस पेंटाक्लोराइड
2812 15 00 सल्फर मोनोक्लोराइड
2812 16 00 सल्फर डाईक्लोराइड
2812 17 00 थायोनाइल क्लोराइड
अन्य:
281219
281219 10 सल्फर आक्सीक्लोराइड
2812 19 20 सिलिकोन टेट्राक्लोराइड
2812 19 30 आर्सेनस ट्राईक्लोराइड
2812 19 90 अन्य
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10% भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
माल का वर्णन टैरिफ मद
(1)
(2)
2812 90 00
अन्य
131
इकाई शुल्ककी दर मानक अधिमानी
(3) (4) (5)
कि.ग्रा. 10% - " ;
(v) शीर्ष 2848, उपशीर्ष 2848 00 , टैरिफ मद 2848 00 10 से 2848 00 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा ;
(vi) शीर्ष 2853, उपशीर्ष 285300, टैरिफ मद 2853 0010 से 2853 00 99 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
2853 फास्फाइड, चाहे रासायनिक रूप से परिभाषित है या नहीं, जिसके अंतर्गत फेरोफास्फोरस नहीं है; अन्य अकार्बनिक यौगिक (जिसके अंतर्गत आसुत या चालकता जल और समान शुद्धता का जल भी है) ; द्रव वायु (चाहे उसमें से दुर्लभ गैसें निकाल दी गई हों या नहीं) संपीडित वायु : अमलगम, बहुमूल्य धातु के अमलगम से भिन्न
2853 10 00
साएनोजन क्लोराइड (क्लोरक्यान)
2853 90 अन्य:
2853 90 10
आसुत या चालकता जल और उसी शुद्धता का जल
2853 90 20
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
द्रव वायु, चाहे उसमें से दुर्लभ गैसों का भाग निकाल दिया गया हो या नहीं
2853 90 30
संपीड़ित वायु
2853 90 40
अमलगम, बहुमूल्य धातु से भिन्न
2853 90 90
अन्य
(14) अध्याय 29 में, -
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
(i) टैरिफ मद 2903 82 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्
"2903 83 00
माइरेक्स (आईएसओ)
कि.ग्रा. 10% - ";
(ii ) टैरिफ मद 2903 92 29 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"2903 93 00
पेंटाक्लोरोबेंजीन (आईएसओ)
2903 94 00
हेक्साब्रोमो बाईफइनाइल
(iii) शीर्ष 2904 में,-
कि.ग्रा. 10%
10%
कि.ग्रा.
- " ;
(क) टैरिफ मद 2903 20 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
" परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनिक अम्ल, उसके लवण और परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनाइल फ्लूराइड:
2904 31 00
परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनिक अम्ल
2904 32 00
अमोनियम परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनेट
10
कि.ग्रा.
कि.ग्रा. 10% 132
भारत का राजपत्र असाधारण
माल का वर्णन टैरिफ मद
(1)
(2)
2904 33 00
लीथियम परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनेट
2904 34 00
पोटैशियम परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनेट
2904 35 00
परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनिक अम्ल के अन्य लवण
2904 36 00
परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनाइल फ्लूराइड
[भाग 2-
इकाई शुल्ककी दर मानक अधिमानी
(3) (4) (5)
कि.ग्रा. 10
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10% - ".
(ख) उपशीर्ष 2904 90, टैरिफ मद 2904 90 10 से 2904 90 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर
निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
" अन्य:
2904 91 00
ट्राईक्लोरोनाइट्रोमीथेन (क्लोरोपिक्रिन)
अन्य:
2904 99
2904 99 10
2, 5 डाइक्लोरो नाइट्रोबेंजीन
2904 99 20
डाइनोइड्रोक्लोरोबेंजीन
2904 99 30
मेटा नाइट्रोक्लोरोबेंजीन
2904 99 40
आर्थो नोइट्रोक्लोरोबेंजीन
2904 99 50
परा नाइट्रोक्लोरोबेंजीन
2904 99 60
2-नाइट्रोक्लोरोटोलुईन
2904 99 70
सोडियम मेटा नाइट्रोक्लोरोबेंजीन
अन्य
2904 99 90
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10% ";
(iv) टैरिफ मद 2910 40 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्ः-
"2910 50 00
एन्ड्रिन (आईएसओ ))
(v) शीर्ष 2914 में,-
कि.ग्रा. 10% ";
(क) टैरिफ मद 2914 61 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"2914 62 00
कोएन्जाइम क्यू 10 [ ( यूबिडेकारेनोन (आईएनएन) ] कि.ग्रा. 10% - ";
(ख) उपशीर्ष 2914 70, टैरिफ मद 291470 10 से 2914 70 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर
निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
हेलोजनीकृत , सल्फोनिकृत, नाइट्रेटिकृत या नाइट्रोसेटिकृत व्युत्पन्न:
2914 71 00
क्लोरोडेकान (आईएसओ)
अन्य:
2914 79
1-क्लोरो एंथ्राक्विनोन
2914 79 10
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10 भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
माल का वर्णन टैरिफ मद
(1)
(2)
मस्ककिटोन
2914 79 20
2914 79 90
अन्य
133
इकाई शुल्ककी दर मानक अधिमानी
(3) (4) (5)
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10% - " ;
(vi ) टैरिफ मद 2918 16 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
" 2918 17 00
कि.ग्रा. 10% - " ;
2,2-डाईफिनाइल- 2-हाइड्रोक्सीएसिटिक अम्ल (बेंजिलिक अम्ल)
(vii) उपशीर्ष 2920 90 , टैरिफ मद 2920 90 10 से 2920 90 44 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
" फास्फाइट एस्टर और उनके लवण ; हेलोजनीकृत, सल्फोनिकृत, नाइट्रेटिकृत या नाइट्रोसेटिकृत व्युत्पन्न:
2920 21 00
डाईमिथाइल फास्फाइट
2920 22 00
डाईइथाइल फास्फाइट
2920 23 00
ट्राईमिथाइल फास्फाइट
2920 24 00
ट्राईइथाइल फास्फाइट
2920 29 अन्य:
2920 29 10
डाईमिथाइल सल्फाइट
2920 29 20
डाईइथाइल सल्फाइट
2920 29 30
ट्रिस (2,3 डाईब्रोमोप्रोपायल) फास्फेट
2920 29 90
अन्य
2920 30 00
एंडोसल्फेन (आईएसओ)
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10% ";
(viii) उपशीर्ष 2921 19, टैरिफ मद 2921 19 11 से 2921 19 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात् :-
"2921 12 00
कि.ग्रा. 10%
2-(एन , एन-डाईमिथाइलएमीनो) इथाइलक्लोराइड हाइड्रोक्लोराइड
2921 13 00
कि.ग्रा. 10%
2-(एन, एन-डाईइथाइलएमीनो) इथाइलक्लोराइड हाइड्रोक्लोराइड
2921 14 00
कि.ग्रा. 10%
2-(एन, एन-डाईआइसोप्रोपाइलएमीनो) इथाइलक्लोराइड हाइड्रोक्लोराइड
2921 19 अन्य:
2921 19 10 2-क्लोरो एन, एन-डाईआइसोप्रोपाइल एथिलएमीन कि.ग्रा. 10%
2921 19 20 2-क्लोरो एन, एन-डाईमिथाइल एथेनामाइन कि.ग्रा. 10%
2921 19 90 अन्य कि.ग्रा. 10% - " ;
(ix) उपशीर्ष 2922 12 , टैरिफ मद 292212 10 से 2922 12 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर
निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात् :-
डाईथानोलमिन और उसके लवण कि.ग्रा. 10 % - " ;
2922 12 00
134
भारत का राजपत्र असाधारण
टैरिफ मद
माल का वर्णन
(1)
(2)
[भाग 2-
इकाई शुल्क की दर मानक अधिमानी
(3) (4) (5)
(x) उपशीर्ष 2922 13 , टैरिफ मद 2922 13 10 से 2922 13 90 टैरिफ मद 2922 1400 , उपशीर्ष 292219 , टैरिफ मद 2922 19 40 से 2922 19 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्ः-
2922 14 00
डेक्सट्रोप्रोपोक्सीफीन (आइएनएन) और उसके लवण
2922 15 00
ट्राईएथनोलामीन
2922 16 00
डाईएथनोलामोनियम परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनेट
2922 17
मिथाइलडाईएथनोलामीन और इथाइलडाईएथनोलामीन:
2922 17 10
मिथाइलडाईएथनोलामीन
292217 20
इथाइलडाईएथनोलामीन
2922 18 00
2-(एन, एन-डाईआइसोप्रोपाइलामीनो) इथानोल
292219
अन्य:
2922 19 10
2-हाइड्रोक्सी एन, एन- डाईआइसोप्रोपाइल इथाइलामीन
2922 19 90
अन्य
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10% - ".
(xi) टैरिफ मद 2923 20 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्: -
"2923 30 00
टेट्राइथाइल अमोनियम परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनेट
2923 40 00
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10% - ";
डाईडिसिल्डीमिथाइलअमोनियम परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनेट
(xii ) टैरिफ मद 2924 24 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
"2924 25 00
अलाक्लोर (आईएसओ)
कि.ग्रा. 10% - " ;
(xiii) टैरिफ मद 2926 30 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
' 2926 40 00
अल्फा-फिनाइलएसिटोएसिटोनाइट्राइल कि.ग्रा. 10% - ";
(xiv) टैरिफ मद 2930-50 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्
"2930 60 00
2-(एन, एन-डाईइथाइलामीनो) एथनेथियोल
2930 70 00
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
बिस (2- हाइड्रोक्सीइथाइल) सल्फाइड थियोडाईजायलीकोल (आईठ्ठनएन)
2930 80 00
कि.ग्रा. 10% - " ;
एल्डीकार्ब (आईएसओ) , कैप्टाफोल (आईएसओ) और मेथामिथोफोस (आईएसओ)
(xv) टैरिफ मद 2931 20 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
66 अन्य कार्बन- गंधक व्युत्पन्न:
2931 31 00
डाईमिथाइल मिथाइलफास्फोनेट
2931 32 00
डाईएथाइल प्रोपाइलफास्फोनेट कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10% भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
माल का वर्णन टैरिफ मद
(1)
(2)
2931 33 00
डाईएथाइल इथाइलफास्फोनेट
2931 34 00
135
इकाई शुल्ककी दर मानक अधिमानी
(3) (4) (5)
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
सोडियम 3- (ट्राईहाइड्रोक्सीसिलाइल) प्रोपाइल मिथाइलफास्फोनेट
2931 35 00
कि.ग्रा. 10%
2,4,6-ट्राईप्रोपाइल - 1,3,5,2,4,6- ट्राईआक्साट्राईफास्फिनेन 2,4,6-ट्राईआक्साइड
2931 36 00
कि.ग्रा. 10%
(5-इथाइल-2-मिथाइल-2-आक्सीडो- 1,3,2-डाईआक्साफास्फिनेन-5- वाईएल)
मिथाइल मिथाइल मिथाइलफास्फोनेट
2931 37 00
कि.ग्रा. 10%
बिस [ (5-इथाइल-2-मिथाइल-2-आक्सीडो-1,3,2 -डाईआक्साफास्फिनेन-5-
वाईएल) मिथाइल] मिथाइलफास्फोनेट
2931 38 00
कि.ग्रा. 10%
मिथाइलफास्फोनिक अम्ल के लवण और (अमीनोइमीनोमिथाइल)
यूरिया ( 1: 1 )
293139 00
अन्य
कि.ग्रा. 10% "
(xvi) टैरिफ मद 2932 13 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
" 2932 14 00
सुक्रालोज
कि.ग्रा. 10% - " ;
अर्थात् (xvii ) टैरिफ मद 2933 91 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा ,
" 2933 92 00
अजिनफास-मिथाइल (आईएसओ) कि.ग्रा. 10%
(xviii) शीर्ष 2935 में, उपशीर्ष 293500 , टैरिफ मद 2935 00 11 से 2935 00 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
"2935
सल्फोनामाइड
2935 10 00
एन-मिथाइलपरफ्लूरोआक्टेन सल्फोनामाइड
2935 20 00
एन- इथाइलपरफ्लूरोआक्टेन सल्फोनामाइड
2935 30 00
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
एन-इथाइल-एन- (2- हाइड्रोक्सीइथाइल) परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनामाइड
2935 40 00
कि.ग्रा. 10%
एन-(2-हाइड्रोक्सीइथाइल) -एन- मिथाइलपरफ्लूरोआक्टेन सल्फोनामाइड
2935 50 00 अन्य परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनामाइड कि.ग्रा. 10%
2935 90 अन्य:
सल्फामिथोक्साजोल, सल्फाफ्यूराजोल, सल्फाडाईजाइन , सल्फाडीमाइडाइन,
सल्फासीटामाइड:
2935 90 11 सल्फामिथोक्साजोल कि.ग्रा. 10%
सल्फाफ्यूराजोल कि.ग्रा. 10%
2935 90 12
2935 90 13 सल्फाडाइजाइन कि.ग्रा. 10%
सल्फाडीसाइडाइन कि.ग्रा. 10%
2935 90 14
136
भारत का राजपत्र असाधारण
माल का वर्णन टैरिफ मद
(1)
(2)
2935 90 15 सल्फासीटामाइड
[भाग 2-
इकाई शुल्क की दर मानक अधिमानी
(4)
(3)
(5)
कि.ग्रा. 10%
सल्फामिथोक्साइपीरीडारीन, सल्फामिथाइक्जोल, सल्फामोक्जोल, सल्फामाइड:
2935 90 21 सल्फामिथोक्साइपीडारीन
2935 90 22 सल्फामिथाइयाजोल
2935 90 23 सल्फामोक्सोल
2935 90 24 सल्फामाइड
2935 90 90 अन्य
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10% -";
(xix) टैरिफ मद 2937 31 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
"2937 90 11 इपाइनफ्रिन
कि.ग्रा. 10% 10%";
(xx) टैरिफ मद 2937 90 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् स्तम्भ (2) में की प्रविष्टि में "वनस्पति " शब्द का लोप किया जाएगा ;
(xxi ) शीर्ष 2939 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"2939
ऐलकेलाइड, प्राकृतिक या संश्लेषण द्वारा पुनरुत्पादित और उनके लवण, ईथर, एस्टर और अन्य व्युत्पन्न";
(xxii) टैरिफ मद 2939 69 00 से 2939 99 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"2939 69 00 अन्य
अन्य, वनस्पति मूल के:
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
2939 71 00 कोकीन, एक्गोनाइन, लेवोमेटामफेटामीन, मेटामफेटामीन (आईएनएन) , मेटामफेटामीन रेसमेट उसके लवण, एस्टर और अन्य व्युत्पन्न
2939 79 00 अन्य
2939 80 00
अन्य
(15) अध्याय 30 में,
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10% - " ;
(i) टिप्पण 4 के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: - "उपशीर्ष टिप्पण :
1. उपशीर्ष 3002 13 और 3002 14 के प्रयोजनों के लिए निम्नलिखित को:
(क) अमिश्रित उत्पाद, शुद्ध उत्पाद, चाहे उनमें अशुद्धियां अंतर्विष्ट हों या नहीं ;
(ख) ऐसे उत्पादों के रूप में माना जाएगा, जो:
(1 ) ऊपर (क) में उल्लिखित उत्पाद, जो जल में या अन्य विलायकों में घुले हुए हैं ;
(2) ऊपर (क) और (ख) (1 ) में उल्लिखित उत्पाद, उनके परिरक्षण या परिवहन के लिए आवश्यक संयोजित स्थिरक के साथ मिश्रित किए गए हैं ; और
हैं। (3) ऊपर (क) , (ख) (1 ) और (ख) (2) में उल्लिखित उत्पाद किसी अन्य योजक के साथ मिश्रित किए गए भारत का राजपत्र असाधारण
137 अनुभाग 1क]
माल का वर्णन
टैरिफ मद
इकाई शुल्क की दर
मानक अधिमानी
(1)
(2)
(3) (4) (5)
2. उपशीर्ष 3003 60 और 3004 60 के अंतर्गत अन्य भेषजिक सक्रिय संघटकों के साथ सम्मिलित मौखिक अंतर्ग्रहण के लिए आर्टीमिसिनिन या निम्नलिखित सक्रिय मूल तत्वों में से कोई मूल तत्वों, चाहे वह अन्य भेषजिक सक्रिय संघटकों के साथ सम्मिश्रित है या नहीं: एमोडायाक्विन (आईएनएन) ; आर्टीलिनिक अम्ल या उसके लवण; आर्टीनिमोल (आईएनएन) : आर्टीमोटिल (आईएनएन) ; आर्टीमेथर (आईएनएन ); आर्टीसुनेट (आईएनएन) ; क्लोरोक्विन (आईएनएन) ; डाईहाइड्रोआर्टीमिसिनिन (आईएनएन) ; लुमेफैनट्रिन (आईएनएन) ; मेफ्लोक्विन (आईएनएन) ; पाइप्राक्विन (आईएनएन) ; पाइरीमेथामाइन (आईएनएन) या सल्फोडाक्सिन (आईएनएन) से युक्त औषधि द्रव्य हैं । ";
(ii) उपशीर्ष 3002 10 टैरिफ मद 3002 10 11 से 3002 10 99 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
" प्रतिसीरम , अन्य रक्त प्रभाज और प्रतिरक्षात्मक उत्पाद चाहे वे रूपांतरित हैं या नहीं या उन्हें जैव प्रौद्योगिकी प्रक्रियाओं के माध्यम से प्राप्त किया गया हो या नहीं :
कि.ग्रा. 10% 10% 3002 11 00 मलेरिया नैदानिक परीक्षण किट
3002 12 प्रतिसीरम और अन्य रक्त प्रभाज :
कि.ग्रा. 10% 10% 3002 12 10 डिप्थीरिया के लिए
कि.ग्रा. 10% 10% 3002 12 20 टिटनस के लिए
कि.ग्रा. 10% 10% 3002 12 30 रेबीज के लिए
कि.ग्रा. 10% 10% 3002 12 40 सांप के जहर के लिए
कि.ग्रा. 10% 10% 3002 12 90 अन्य
कि.ग्रा. 10% 10% 3002 13 प्रतिरक्षात्मक उत्पाद, जो मिश्रित नहीं हैं किंतु जो मापित मात्राओं में या रूपों में या पैकिंगों में फुटकर विक्रय के लिए नहीं रखे गए हैं
कि.ग्रा. 10% 10% 3002 13 10 प्रतिरक्षात्मक उत्पाद मिश्रित किए गए हैं, किंतु जो मापित मात्राओं में या रूपों में या पैकिंगों में फुटकर विक्रय के लिए नहीं रखे गए हैं
3003 14 प्रतिरक्षात्मक उत्पाद, जो मिश्रित है किंतु जो मापित मात्राओं में या रूपों में या पैकिंगों में फुटकर विक्रय के लिए नहीं रखे गए हैं :
कि.ग्रा. 10% 10% 3002 14 10 प्रतिरक्षात्मक उत्पाद, जो मिश्रित है किंतु जो मापित मात्राओं में या रूपों में या पैकिंगों में फुटकर विक्रय के लिए नहीं रखे गए हैं :
कि.ग्रा. 10% 10% 300215 00 प्रतिरक्षात्मक उत्पाद, जो मापित मात्राओं में या रूपों में या पैकिंगों में फुटकर विक्रय के लिए रखे गए हैं
कि.ग्रा. 10% 10 %";
3002 19 00 अन्य
(iii) टैरिफ मद 3003 2000 से टैरिफ मद 3003 40 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
कि.ग्रा. 10% 10% " 3003 20 00 अन्य, जिसमें प्रतिजैविकी हैं
अन्य, जिसमें शीर्ष 2937 के होरमोन्स या अन्य उत्पाद हैं :
कि.ग्रा. 10% 10% 3003 31 00 जिसमें इन्सुलिन है
10% 10%
कि.ग्रा.
3003 39 00 अन्य
अन्य, जिसमें ऐलकेलाइड या उनके व्युत्पन्न हैं:
10% 10%
कि.ग्रा.
3003 41 00 जिसमें एफेड्रिन या उसके लवण हैं 138
भारत का राजपत्र असाधारण
माल का वर्णन टैरिफ मद
(1)
(2)
3003 42 00
जिसमें सुडोदोफेड्रिन (आई.एन.एन.) या उसके लवण हैं
3003 43 00
जिसमें नोरेफड्रिन या उसके लवण हैं
3003 49 00
अन्य
3003 60 00
[भाग 2-
इकाई शुल्ककी दर मानक अधिमानी
(3) (4) (5)
10% 10% कि.ग्रा.
कि.ग्रा. 10% 10%
10% 10% कि.ग्रा.
10%";
कि.ग्रा. 10%
अन्य, जिसमें इस अध्याय के उपशीर्ष टिप्पण 2 में वर्णित मलेरियारोधी सक्रिय सिद्धांत है
(iv) शीर्ष 3004 में,-
(क) उपशीर्ष 3004 20 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्
"3004 20
अन्य, जिसमें प्रतिजैविकी हैं : " ;
(ख) टैरिफ मद 3004 20 99, उपशीर्ष 3004 31 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
अन्य
"3004 20 99
कि.ग्रा. 10% 10%
अन्य, जिसमें शीर्ष 2937 के होरमोन्स या अन्य उत्पाद हैं :
3004 31
जिसमें इन्सुलिन है:";
(ग) उपशीर्ष 3004 40, टैरिफ मद 3004 40 10 से टैरिफ मद 3004 40 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:---
अन्य, जिसमें ऐलकेलाइड या उनके व्युत्पन्न हैं :
3004 41 00
जिसमें एफेड्रिन या उसके लवण हैं
3004 42 00
जिसमें सुप्रेदोफेड्रिन (आई.एन.एन.) या उसके लवण हैं
3004 43 00
जिसमें नोरेफड्रिन या उसके लवण हैं
अन्य
3004 49
3004 49 10
ऐट्रोपीन और उसके लवण
कैफीन और उसके लवण 3004 49 20
3004 49 30
10% 10% कि.ग्रा.
कि.ग्रा. 10% 10%
कि.ग्रा. 10% 10%
10% 10% कि.ग्रा.
कि.ग्रा. 10% 10%
10% 10% कि.ग्रा.
कोडीन और उनके व्युत्पन्न, एफेड्रीन हाइड्रोक्लोराइड सहित या रहित
3004 4940
अरगॉट के उत्पाद, इरगोटेमाइन और उसके लवण
3004 49 50
पपैवरीन हाइड्रोक्लोराइड
3004 49 60
ब्रोमोहेक्सीन और सोलब्यूटामोल
3004 49 70
थियोफिलीन और एफेड्रीन
3004 49 90
अन्य
"3004 50
10% 10% कि.ग्रा.
10% 10% कि.ग्रा.
10% 10% कि.ग्रा.
कि.ग्रा. 10% 10%
कि.ग्रा.
10%";
10%
(घ) उपशीर्ष 3004 50 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:- अन्य, जिसमें शीर्ष 2936 के विटामिन और अन्य उत्पाद हैं :";
अर्थात् (ङ) टैरिफ मद 3004 50 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
" 3004 60 00
कि.ग्रा. 10% 10%";
अन्य, जिसमें इस अध्याय के उपशीर्ष टिप्पण 2 में वर्णित मलेरियारोधी
सक्रिय सिद्धांत है भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
माल का वर्णन टैरिफ मद
(1)
(2)
139
इकाई शुल्ककी दर मानक अधिमानी
(3) (4) (5) (16) अध्याय 31 के शीर्ष 3103 में, टैरिफ मद 3103 1000 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
सुपरफास्फेट्स:
3103 11 00
कि.ग्रा. 10%
जिसमें भार द्वारा 35 % या अधिक डाइफास्फोरस पेन्टाआक्साइड (P₂O₃ ) है
3103 19 00
अन्य
कि.ग्रा. 10% -";
(17) अध्याय 37 के शीर्ष 3705 में, टैरिफ मद 3705 1000 , उपशीर्ष 3705 90 , टैरिफ मद 3705 90 10 , टैरिफ मद 3705 90 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्: -
"3705 00 00
कि.ग्रा. 10% -";
फोटोचित्र प्लेटें और फिल्म, उद्भाषित और डेवेलप की गई, चलचित्रीय फिल्म से भिन्न
(18) अध्याय 38 में,-
(i) उपशीर्ष टिप्पण 1 और उपशीर्ष टिप्पण 2 के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"उपशीर्ष टिप्पण :
1. उपशीर्ष 3808 52 और उपशीर्ष 3808 59 के अंतर्गत केवल शीर्ष 3808 के माल हैं, जिनके अंतर्गत एक या अधिक निम्नलिखित पदार्थ सम्मिलित हैं एलाक्लोर (आई.एस.ओ ) ; एल्डीकार्ब (आई.एस.ओ); एल्ड्रिन (आई.एस.ओ) ; एजिनफास- मिथाइल (आई.एस.ओ ) ; बाइनापैक्राइल (आई.एस.ओ) ; कैम्फेक्लोर (आई.एस.ओ ) (टोक्साफेन); कैप्टाफोल (आई.एस.ओ) ; क्लोडेन (आई.एस.ओ) ; क्लोरडाइमेफार्म (आई.एस.ओ ); क्लोरोबेन्जिलेट (आईएसओ) ; डी.डी.टी. (आई.एस.ओ); क्लोफेनोटेन (आई.एन.एन. ), 1,1,1 - ट्राईक्लोरो -2-2- बिस (पी- क्लोरोफेनाइल ) ईथेन; डाइएल्ड्रिन (आई.एस.ओ. , आई.एन.एन.), 4,6-डाइनाइट्रो-ओ-क्रेसोल (डी.एन.ओ.सी. (आई.एस.ओ ) या उसके लवण, डाइनोसेब (आई.एस.ओ ) , उसके लवण या उसके एस्टर ; एन्डोसल्फेन (आई.एस.ओ) ; एथिलीन डाईब्रोमाइड (आई.एस.ओ.) (1,2-डाईब्रोमोएथेन) ; एथिलीन डाईक्लोराइड (आई.एस.ओ.) (1,2-डाईक्लोरोएथेन) ; फ्लूरोएसीटामाइड (आई.एस.ओ.) ; हेप्टाक्लोर (आई.एस.ओ.); हेक्साक्लोरोबेन्जीन (आई.एस.ओ.); 1,2,3,4,5,6- हेक्साक्लोरोसाइक्लोहेक्सेन [एच.सी.एच. ] (आई.एस.ओ. ) लिन्डेन (आई.एस.ओ. , आई.एन.एन. ) सहित, मर्करी यौगिक; मेथामिडोफेस (आई.एस.ओ. ); मोनोक्रोटोफोस (आई.एस.ओ. ) ; आक्सीरैन ( एथिलीन आक्साइड) ; पैराथियन (आई.एस.ओ.) ; पैराथियनमिथाइल (आई.एस.ओ. ) ; (मिथाइल- पैराथियन); पेंटा और ओक्टाब्रोमोडाईफिनाइल ईथर्स; पेंटाक्लोरोफीनोल (आई.एस.ओ.) उसके लवण या उसके एस्टर परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनिक अम्ल और उसके लवण परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनामाइड्स; परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनाइड फ्लूराइड; फास्फामिडान (आई.एस.ओ.) ; 2,4,5-टी (आई.एस.ओ.) (2,4,5- ट्राईक्लोरो-फेनौक्सीएसेटिक अम्ल) , उसके लवण और उसके एस्टर; ट्राईबुटाइलिटिन यौगिक।
शीर्ष 3808.59 के अंतर्गत चूर्णयोग्य पाउडर विनिर्मितियां, जिनके अंतर्गत बेनोमाइल (आई.एस.ओ.), कार्बोफुरान (आई.एस.ओ.) और थिराम (आई.एस.ओ. ) का मिश्रण भी है।
2. उपशीर्ष 3808 61 से उपशीर्ष 3808 69 के अंतर्गत केवल शीर्ष 38 08 के माल हैं, जिनके अंतर्गत अल्फासाइपरमेथरिन (आई.एस.ओ.) , बेंडियोकार्ब (आई.एस.ओ. ), बिफेंथ्रिन (आई.एस.ओ.) , क्लोफेनापाइल (आई.एस.ओ.) , साइफ्लूथ्रिन (आई.एस.ओ.) , बेटामिथ्रिन (आई.एन.एन. आई.एस.ओ.) , इटोफेनप्रोक्स (आई.एन.एन. ), फेनीट्रोथियोन (आई.एस.ओ.) , लेम्बड़ा- साईहालोथ्रिन (आई.एस.ओ.) , मैलाथियोन (आई.एस.ओ. ), प्राइमोफोस- मिथाइल (आई.एस.ओ.) , या प्रोपोक्सर (आई.एस.ओ. ) हैं ।
3. उपशीर्ष 3824 81 से उपशीर्ष 3824 88 के अंतर्गत केवल मिश्रण और निम्नलिखित पदार्थों की एक या अधिक निर्मितियां हैंः आक्सीरेन (इथाइलेन आक्साइड) पोलीब्रोमिनेटेड बाईफिनाइल्स (पीबीबी) , पोलीक्लोरीनेटेड (पीसीबी), पोलीक्लोरीनेटेड टेरफिनाइल (पीसीटी ) , ट्रिस (2,3- डाईब्रोमोप्रोपाइल) फास्फेट, एल्ड्रिन (आई.एस.ओ. ), कैम्फाक्लोर (आई.एस.ओ. ) (टोक्साफेन ) , 140
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
माल का वर्णन
टैरिफ मद
(1)
(2) इकाई शुल्क की दर मानक अधिमानी
(4)
(3)
(5)
क्लोरडेन (आई.एस.ओ.) , क्लोरडेकोन (आई.एस.ओ. ), डीडीटी (आई.एस.ओ.) (क्लोफेनोटेन (आई.एन.एन) , 1,1,1 -ट्रोइक्लोरो -2, बिस (क्लोरोफिनाइल ) ( इथेन) , डाइल्ड्रिन ( आई.एस.ओ. आई.एन.एन. ) , एन्डोसल्फान (आई.एस.ओ. ), एन्ड्रिन (आई.एस.ओ. ) , हेप्टाक्लोर ( आई.एस.ओ.) माइरेक्स (आई.एस.ओ. ) , 1,2,3,4,5,6- हेक्साक्लोरोसाइक्लोहेक्सेन (एच.सी.एच. (आई.एस.ओ.) , जिसमें लिन्डेन (आई.एस.ओ. , आई.एन.एन. ) है, पेंटाक्लोरोबेंजीन (आई.एस.ओ.) , हेक्साक्लोरोबेंजीन (आई.एस.ओ.) , परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनिक अम्ल, उसके लवण , परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनामाइड फ्लूराइड या टेट्रा , पेंटा , हेक्सा , हेप्टा- या आक्टा-ब्रोमोडाइफिनाइल ईथर्स हैं ।
4. टैरिफ मद 3825 4100 और टैरिफ मद 3824 4900 के प्रयोजन के लिए, ' अपशिष्ट जैविक विलायक ' अपशिष्ट हैं जिनमें मुख्यतः जैविक विलायक हैं, जो उस रूप में, आगे उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है जिसमें मुख्य उत्पादों के रूप में प्रस्तुत किया गया है, चाहे वह विलायकों की पुनः प्राप्ति के लिए आशयित है या नहीं ।;
(ii) उपशीर्ष 3808 50 , टैरिफ मद 3808 50 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्
इस अध्याय के उपशीर्ष टिप्पण 1 में विनिर्दिष्ट माल:
3808 52 00
कि.ग्रा. 10%
डीडीटी (आई.एस.ओ. ) (क्लोफेनोटेन (आई.एन.एन)), 300 ग्रा. से अनधिक शुद्ध भार के पैकों में
अन्य
3808 59 00
इस अध्याय के उपशीर्ष टिप्पण 2 में विनिर्दिष्ट माल:
3808 61 00
300 ग्रा . से अनधिक शुद्ध भार के पैकों में
3808 62 00
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
300 ग्रा. से अधिक, किंतु 7.5 कि.ग्रा. से अनधिक शुद्ध भार के पैकों में
3808 69 00
अन्य
10% -" ;
कि.ग्रा.
(iii) उपशीर्ष 3812 30, टैरिफ मद 3812 30 10 से टैरिफ मद 3812 30 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्: -
" रबड़ या प्लास्टिक के लिए आक्सीडाइजिंग प्रतिरोधी विनिर्मितियां और अन्य यौगिक स्थिरक :
3812.31 00
कि.ग्रा. 10%
2,2,4- ओलिगोमर- ट्राईमिथाइल - 1,2-डीहाईड्रोक्नोलाइन (टी.एम.क्यू.)
381239 अन्य:
381239 10 कि.ग्रा. 10%
प्रतिआक्सीकृत रोधक रबड़ के लिए ,
रबड़ के लिए मृदुलक कि.ग्रा. 10%
381239 20
रबड़ वल्कनीकारक कर्मक कि.ग्रा. 10%
381239 30
381239 90 अन्य कि.ग्रा . 10 ' ; - " ;
भारत का राजपत्र असाधारण
141 अनुभाग 1क]
माल का वर्णन
टैरिफ मद
इकाई शुल्क की दर
मानक अधिमानी
(1)
(2)
(4)
(3)
(5)
(iv) टैरिफ मद 3824 7900 से टैरिफ मद 3824 83 00 , उपशीर्ष 3824 90 , टैरिफ मद 3824 90 11 से टैरिफ मद 3824 90 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
" 3824 79 00
अन्य
कि.ग्रा. 10%
इस अध्याय के उपशीर्ष 3 में विनिर्दिष्ट माल:
3824 81 00
कि.ग्रा. 10%
जिसमें आक्सीरेन (इथाइलेन आक्साइड) है
3824 82 00
कि.ग्रा. 10%
जिसमें पोलीक्लोरीनेटेड बाईफिनाइल्स (पीसीबी) , पोलीक्लोरीनेटेड टेरफिनाइल (पीसीटी) या पोलीब्रोमिनेटेड बाईफिनाइल्स ( पीबीबी) हैं
3824 83 00
कि.ग्रा. 10%
जिसमें ट्रिस (2,3 -डाईब्रोमोप्रोपाइल) फास्फेट है
3824 84 00
कि.ग्रा. 10%
जिसमें एल्ड्रिन (आई.एस.ओ.), कैम्फाक्लोर (आई.एस.ओ.) (टोक्साफेन) , क्लोरडेन (आई.एस.ओ. ) , क्लोरडेकोन (आई.एस.ओ. ) , डीडीटी (आई.एस.ओ. ) , (क्लोफेनोटेन (आई.एन.एन) , 1,1,1 -ट्राइक्लोरो-2, 2- बिस (क्लोरोफिनाइल) इथेन, डाइल्ड्रिन ( आई.एस.ओ. , आई.एन.एन. ) , एन्डोसल्फान (आई.एस.ओ.) , एन्ड्रिन (आई.एस.ओ. ) , हेप्टाक्लोर (आई.एस.ओ. ) या माइरेक्स (आई.एस.ओ. ) हैं
कि.ग्रा. 10%
3824 85 00
जिसमें लिन्डेन (आई.एस.ओ. , आई.एन.एन.) सहित 1,2,3,4,5,6- हेक्साक्लोरोसाइक्लोहेक्सेन (एच.सी.एच. (आई.एस.ओ. )) है,
कि.ग्रा. 10%
3824 86 00
जिसमें पेंटाक्लोरोबेंजीन (आई.एस.ओ.) या हेक्साक्लोरोबेंजीन (आई.एस.ओ.) है
3824 87 00
कि.ग्रा. 10%
जिसमें परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनिक अम्ल, उसके लवण, परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनामाइड या परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनाइल फ्लूराइड हैं
कि.ग्रा. 10%
3824 88 00
जिसमें टेट्रा , पेंटा , हेक्सा , हेप्टा-या आक्टाब्रोमोडाइफिनाइल इथर्स हैं
3824 91 00
जिसमें मुख्यतः (5- ईथाइल-2-मिथाइल आक्साइडो-1,3,2- डाइआक्साफोस्फिनानन-5-इल) मिथाइल मिथाइल मिथाइलफास्फोनेट और बिस [ (5 - ईथाइल-2-मिथाइल -आक्साइडो- 1,3,2- डाइआक्साफोस्फिनानन- 5-इल) मिथाइल मिथाइलट मिथाइलफास्फोनेट के मिश्रण और विनिर्मितियां हैं
अन्य
3824 99
अमोनियामय गैस लिकर और भुक्तशेष ऑक्साइड जो कोयला गैस निर्मलीकरण में उत्पन्न होता है । पृष्ठदृढ़ीकरण यौगिक, ऊष्मा स्थानांतरण लवण : डाइफिनायल और डाइफिनायल ऑक्साइड का ऊष्मा स्थानांतरण माध्यम के रूप में मिश्रण, मिश्रित पोली एथलीन ग्लाइकोल; संसाधन या लवणीकरण के लिए लवण पृष्ठ तनाव उपचायक है :
10%
कि.ग्रा.
3824 99 11
अमोनियामय गैस लिकर और भुक्तशेष ऑक्साइड जो कोयला गैस निर्मलीकरण में उत्पन्न होता है
10%
कि.ग्रा.
3824 99 12
पृष्ठदृढ़ीकरण यौगिक 142
भारत का राजपत्र असाधारण
टैरिफ मद माल का वर्णन
(1) (2)
3824 99 13 ऊष्मा स्थानांतरण लवण
3824 99 14
[भाग 2-
इकाई शुल्क की दर
मानक अधिमानी
(3) (4) (5)
कि.ग्रा. 10%
डाइफिनायल और डाइफिनायल ऑक्साइड का ऊष्मा स्थानांतरण कि.ग्रा. 10%
माध्यम के रूप में मिश्रण
3824 99 15 मिश्रित पोली एथलीन ग्लाइकोल कि.ग्रा. 10%
3824 99 16 संसाधन या लवणीकरण के लिए लवण कि.ग्रा. 10%
3824 99 17 पृष्ठ तनाव उपचायक कि.ग्रा. 10%
विद्युत लेपन लवण; जल उपचार रसायन आयन विनियामक; संशोधक
द्रव्य ; अवक्षेपित सिलिका और सिलिका जैल तेलकूप रसायन :
3824 99 21 विद्युत लेपन लवण कि.ग्रा. 10
3824 99 22 जल उपचार रसायन, आयन विनियामक (आई एन एन) उदाहरणतया कि.ग्रा. 10%
परम्यूटिस , जियोलाइट्स
3824 99 23 ग्रामोफोन रिकार्ड बनाने की सामग्री कि.ग्रा . 10%
3824 99 24 संशोधक द्रव्य कि.ग्रा. 10%
3824 99 25 अवक्षेपित सिलिका और सिलिका जैल कि.ग्रा. 10%
3824 99 26 तेलकूप रसायन कि.ग्रा. 10%
क्लोरीन और फ्लोरीन से भिन्न दो या अधिक भिन्न हेलोजन वाला
मिश्रण, जिसमें एक्रेलिक हाईड्रोकार्बनों के परहेलोजेनेटिड व्युत्पन्न अंतर्विष्ट
हैं, फेराइड पाउडर; संधारित्र द्रव्य- पी सी बी टाइप ; अंगूरों के लिए उपचार
के लिए निमज्जी तेल ; बहु ब्रीमिनित बाइफिनायल, बहुक्लोरीनित बाइफिनायल ,
बहुक्लोरीनित टेरफिनायल, क्रोसीडोलाइट " संकटमय अपशिष्ट" के रूप
में ज्ञात प्रकार का माल; फोसफोजिप्समः
3824 99 31 क्लोरीन और फ्लोरीन से भिन्न दो या अधिक भिन्न हेलोजन वाला कि.ग्रा . 10%
मिश्रण, जिसमें एक्रेलिक हाईड्रोकार्बनों के परहेलोजेनेटिड व्युत्पन्न अंतर्विष्ट
हैं,
3824 99 32 फेराइड पाउडर कि.ग्रा. 10%
3824 99 33 संधारित्र द्रव्य-पी सी बी टाइप कि.ग्रा. 10%
3824 99 34 अंगूरों के उपचार के लिए निमज्जी तेल कि.ग्रा. 10%
बहु ब्रीमिनित बाइफिनायल, बहुक्लोरीनित बाइफिनायल, बहुक्लोरीनित कि.ग्रा. 10%
3824 99 35
टेरफिनायल, क्रोसीडोलाइट
"संकटमय अपशिष्ट" के रूप में ज्ञात प्रकार का माल कि.ग्रा. 10%
3824 99 36
फोसफोजिप्सम कि.ग्रा. 10%
3824 99 37
143
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
माल का वर्णन
टैरिफ मद
इकाई शुल्क की दर मानक अधिमानी
(1 )
(2)
(4)
(3)
(5)
3824 99 38
कि.ग्रा. 10%
फोसफोनिक अम्ल, (अमीनोमिनो मिथाइल) यूरिया के साथ मिथाइल-मिश्रण ( 1 : 1 )
3824 99 90 अन्य
कि.ग्रा. 10% -';
(19) अध्याय 39 में,-
(i ) टिप्पण 2 के खंड ( य) में, " प्रेपेलिंग पेंसिलें " शब्दों के पश्चात् " और मोनोपोड, बाईपोड या ट्राईपोड और वैसी ही वस्तुएं" शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे ;
(ii) उपशीर्ष टिप्पण 1 में , खंड ( क) के उपखंड ( 2) में, " 390130 " अंकों के पश्चात् " 390140 " अंक अन्तःस्थापित किए जाएंगे ;
( iii) शीर्ष 3901 में, टैरिफ मद 3901 3000 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्
" 3901 40 00
कि.ग्रा. 10%
ऐसे एथिलीन- एल्फा-ओलेफीन- सह- बहुलक, जिनका विनिर्दिष्ट गुरुत्व 0.94 से कम है
(iv) शीर्ष 3907 में , उपशीर्ष 3907 60 , टैरिफ मद 3907 60 10 से टैरिफ मंद 3907 60 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
" पोली ( एथिलीन टेरेफाथालेट) :
कि.ग्रा. 10%
3907 61 00 जिनकी 78 मि.ली./ग्रा . या उच्चतर श्यानता संख्या है
3907 69 अन्य
कि.ग्रा. 10%
3907 69 10 जिनकी 78 मि.ली. / ग्रा. से कम , किंतु 72 मि.ली. /ग्रा. से अन्यून श्यानता संख्या है
कि.ग्रा. 10%
3907 69 20 जिनकी 72 मि.ली./ग्रा. से कम, किंतु 64 मि.ली./ ग्रा. से अन्यून श्यानता संख्या है
कि.ग्रा. 10% -";
3907 69 90 अन्य
(v ) उपशीर्ष 3909 30 , टैरिफ मद 3909 30 10 से टैरिफ मद 3909 30 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
" अन्य एमिनोरेजिन:
कि.ग्रा. 10%
3909 31 00 पॉली (मेथाइलीन फिनाइल आइसोसाइनेट) (कच्चा एम.डी.आई. , पॉलीमेरिक एम.डी.आई.)
अन्य:
3909 39
कि.ग्रा. 10%
3909 39 10 पॉली (फिनाइलेन आक्साइड)
कि.ग्रा. 10% -" ;
3909 39 90 अन्य
(20) अध्याय 40 के शीर्ष 4011 में , टैरिफ मद 4011 50 90 से टैरिफ मद 4011 99 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
इ. 10%
"4011 50 90 अन्य 144
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
माल का वर्णन
टैरिफ मद
इकाई शुल्क की दर मानक अधिमानी
(2)
(3)
(1)
(4) (5)
4011 70 00
इस प्रकार के, जिनका उपयोग कृषि या वानिकी यानों और मशीनों में किया जाता है
4011 80 00
इ. 10%
इस प्रकार के, जिनका उपयोग सन्निर्माण , खनन या औद्योगिक उठाई- धराई यानों और मशीनों में किया जाता है
4011 90 00
अन्य
इ. 10% -";
(21) अध्याय 42 में,-
(i ) शीर्ष 4202 में,-
(क) उपशीर्ष 4202 22 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
"4202 22
प्लास्टिक की या टेक्सटाइल सामग्रियों की चादर के बाह्य पृष्ठ सहित :";
"4202 32
(ख) उपशीर्ष 4202 32 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:- प्लास्टिककी या टेक्सटाइल सामग्रियों की चादर के बाह्य पृष्ठ सहित:';
(ग) टैरिफ मद 4202 92 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्: -
"4202 92 00
इ. 10% -".
प्लास्टिक की या टेक्सटाइल सामग्रियों की चादर के बाह्य पृष्ठ सहितः
(22) अध्याय 44 में,-
(i ) टिप्पण 1 में, खंड (थ) में " पैंसिल" शब्द के स्थान पर " पैंसिल और मोनोपोड, बाइपोड, ट्राईपोड और वैसी ही वस्तुएं; " शब्द रखे जाएंगे ;
(ii) उपशीर्ष टिप्पण 2 का लोप किया जाएगा ;
(iii) शीर्ष 4401 में,-
(क) उपशीर्ष 4401 10 , टैरिफ मद 44011010 , टैरिफ मद 4401 10 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
" ईंधन काष्ठ, जो लठ्ठा, विलेट, टहनी, फैगाट या वैसी ही रूपों में है :
4401 11
शंकुधारी:
मी.ट. 5%
4401 11 10
लठ्ठों में
मी.ट. 5%
अन्य
4401 11 90
4401 12
अशंकुधारी:
मी.ट. 5%
4401 12 10
लठ्ठोंमें
मी.ट. " 5%
अन्य
4401 12 90
(ख) टैरिफ मद 4401 22 00 , टैरिफ मद 4401 31 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्
मी.ट. 5%
"4401 22 00 अशंकुधारी
बुरादा और काष्ठ अपशिष्ट और स्क्रैप , चाहे लठ्ठों, अष्टिकाओं, गुटिकाओं, पैलेटों या जो वैसे ही रूपों में संपीड़ित है :
अनुभाग 1क] भारत का राजपत्र असाधारण 145
टैरिफ मद माल का वर्णन इकाई शुल्ककी दर
मानक अधिमानी
(1) (2) (3) (4) (5)
4401 31 00 काष्ठ पैलेट मी.ट. 5% -" ;
(ग) टैरिफ मद 4401 39 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा ,
अर्थात्:-
"4401 40 00 बुरादा और काष्ठ अपशिष्ट और स्क्रैप, जो संपीड़ित नहीं है : मी.ट. 5% -" ;
(iv) शीर्ष 4403 में,-
(क) टैरिफ मद 4403 1000, उपशीर्ष 4403 20 और टैरिफ मद 4403 20 10 से टैरिफ मद 4403 41 00 और उनसे
संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्: -
पैंट, स्टैन क्रिओसोओ या अन्य परिरक्षकों से उपचारित :
4403 11 00 शंकुधारी घ.मी. 5%
4403 12 00 अशंकुधारी घ.मी. 5%
अन्य शंकुधारी:
4403 21 चीड़ का (पाइनस एसपीपी) , जिसकी कोई तिरछी विच्छेदक विमाएं
15 से.मी. या अधिक हैं ;
4403 21 10 सालाग और विनिरलाग घ.मी. 57
4403 21 20 पोल्स, पिलिंग और पोस्ट घ.मी. 5%
4403 21 90 अन्य घ.मी. 5%
4403 22 चीड़ का (पाइनस एसपीपी) , अन्य
4403 22 10 सालाग और विनिरलाग घ.मी. 5%
4403 22 20 पोल्स, पिलिंग और पोस्ट घ.मी. 5%
4403 22 90 अन्य घ.मी. 5%
4403 23 फीर का (ऐबीस एसपीपी) और स्प्रूस (पाइसिया एसपीपी) , जिसकी
कोई तिरछी विच्छेदक विमाएं 15 से.मी. या अधिक हैं :
4403 23 10 सालाग और विनिरलाग घ.मी. 5%
4403 23 20 पोल्स, पिलिंग और पोस्ट घ.मी. 5%
4403 23 90 अन्य घ.मी. 5%
4403 24 फीर का (ऐबीस एसपीपी) और स्प्रूस (पाइसिया एसपीपी) , अन्य:
सालाग और विनिरलाग घ.मी. 5%
4403 24 10
4403 24 20 पोल्स, पिलिंग और पोस्ट घ.मी. 5%
अन्य घ.मी. 5%
4403 24 90
4403 25 अन्य , जिसकी कोई तिरछी विच्छेदक विमाएं 15 से.मी. या अधिक हैं :
146
भारत का राजपत्र असाधारण
टैरिफ मद
माल का वर्णन
(1)
(2)
4403 25 10
सालाग और विनिरलाग
4403 25 20
पोल्स, पिलिंग और पोस्ट
4403 25 90
अन्य
4403 26
अन्य:
4403 26 10
सालाग और विनिरलाग
4403 26 20
पोल्स, पिलिंग और पोस्ट
अन्य
4403 26 90
अन्य, उष्ण कटिबंधी काष्ठ का
4403 41 00
[भाग 2-
इकाई शुल्क की दर
मानक अधिमानी
(3) (4) (5)
घ.मी. 5%
घ.मी. 5%
घ.मी. 5%
घ.मी. 5%
घ.मी. 5%
घ.मी. 5%
घ.मी. 5
गहरे लाल रंग के मेरांटी , हल्के लाल रंग के मेरांटी और मेरांटी बकाऊ
(ख) टैरिफ मद 4403 92 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा,
अर्थात्:-
"4403 93 00
घ.मी. 5%
बीछ का (फगस एसपीपी) , जिसकी कोई तिरछी विच्छेदक विमाएं 15 से.मी. या अधिक हैं
4403 94 00
बीछ का (फगस एसपीपी) , अन्य
4403 95 00
घ.मी. 5%
घ.मी. 5%
बिर्च का (बिटुला एसपीपी) , जिसकी कोई तिरछी विच्छेदक विमाएं 15 से.मी. या अधिक हैं
4403 96 00
बिर्च का (बिटुला एसपीपी) , अन्य
4403 97 00
पोपलर और एस्पैन का (पोपुलस एसपीपी)
4403 98 00
यूकेलिप्टस (यूकेलिप्टस एसपीपी) घ.मी. 5%
5%
घ.मी.
घ.मी. 5% -";
(ग) टैरिफ मद 4403 99 19 से टैरिफ मद 4403 99 21 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा
जाएगा, अर्थात्:-
"4403 99 19
रोज काष्ठ (डैलबरजिया लतिफोयस) घ.मी. 5%
साल (कारिआ रोबुस्ता) चन्दन काष्ठ (संतालुम अलबर) सेमुल (बसमबेक्स सिबा) अखरोट काष्ठ (जुगलन्स बिनाटा) अंजम (हार्डविकिया बिनाटा) सीसम (डैलबिर्जिया सीसम) और सफेद देवदार (डायसोजिलम):
4403 99 21
साल (कारिआ रोबुस्ता)
" 5%
घ.मी.
(घ) टैरिफ मद 4403 99 26 और उससे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा ;
(ङ) टैरिफ मद 4403 99 29 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा,
अर्थात्:-
"4403 99 90 अन्य
5%
घ.मी.
-" ;
(v) शीर्ष 4406 में, टैरिफ मद 4406 10 00 , टैरिफ मद 4406 90 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
" असंसेचितः भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
माल का वर्णन टैरिफ मद
(1)
(2)
4406 11 00
शंकुधारी
4406 12 00
अशंकुधारी
अन्य:
4406 91 00
शंकुधारी
4406 92 00
अशंकुधारी
(vi) शीर्ष 4407 में,-
147
इकाई शुल्क की दर मानक अधिमानी
(5) (3) (4)
कि.ग्रा. 10
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10% -"
(क) उपशीर्ष 4407 10 , टैरिफ मद 4407 1010 से टैरिफ मद 4407 21 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
" शंकुधारी
4407 11 00
चीड़ का (पाइनस एसपीपी)
4407 12 00
घ.मी. 10%
घ.मी. 10%
फीर का (ऐबीस एसपीपी) और स्प्रूस (पाइसिया एसपीपी)
4407 19
अन्य
4407 19 10
डॉगलस फीर (स्यूडोटसगा मैनजिसी)
4407 19 90
अन्य
ऊष्ण कटिबंधीय काष्ठ:
4407 21 00
महोगनी (स्वेटेनिया एसपीपी)
10%
घ.मी.
घ.मी. 10%
घ.मी. 10% -" ;
(ख ) टैरिफ मद 4407 9500 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्
"4407 96 00
बिर्च का (बेटुला एसपीपी)
4407 97 00
पोपलर और एस्पैन का (पोपुलस एसपीपी)
10%
घ.मी.
घ.मी. 10% -";
(ग) टैरिफ मद 4407 99 10 और उससे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा;
(vii) शीर्ष 4408 में,-
(क) टैरिफ मद 4408 10 90 से उपशीर्ष 4408 31 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा,
अर्थात्
अन्य
"4408 10 90
ऊष्ण कटिबंधीय काष्ठ:
4408 31
कि.ग्रा. 10%
गहरे लाल रंग के मेरांटी, हल्के लाल रंग के मेरांटी, मेरांटी बकाऊ: ' ;
(ख) टैरिफ मद 4409 21 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्: -
ऊष्ण कटिबंधीय काष्ठ का:
"4409 22 00
कि.ग्रा . 10% -" ;
148
भारत का राजपत्र असाधारण
माल का वर्णन टैरिफ मद
(1)
(2)
(viii ) शीर्ष 4412 में, -
[भाग 2-
इकाई शुल्क की दर मानक अधिमानी
(5) (3) (4)
(क) उपशीर्ष 4412 31 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"4412 31 ऊष्ण कटिबंधीय काष्ठ की कम से कम एक बाह्य प्लाई के साथ " ;
(ख) उपशीर्ष 4412 32, टैरिफ मद 4412 32 10 से टैरिफ मद 4412 32 90 , उपशीर्ष 4412 39, टैरिफ मद 4412 39 10 से टैरिफ मद 441239 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्
"4412 33 अन्य, एल्डर ( एलनस एसपीपी) , एस (फ्रेक्सीनस एसपीपी) , बीच (फैगस एसपीपी) , बिर्च ( बैटुला एसपीपी) , चैरी (पुनस एसपीपी) , चेस्टनेट (केस्टेनिया एसपीपी) , एल्म (उल्मस एसपीपी) , युकेलिप्टस ( युकेलिप्टस एसपीपी) , हिकोरी ( कार्या एसपीपी) , होर्स चेस्टनेट ( एसकुलस एसपीपी) , लाइम (टिलिया एसपीपी) , मेपल (ऐसर एसपीपी) , ऑक (क्यूरकर एसपीपी) , प्लेन वृक्ष (पलैटेनस एसपीपी) , पोपलर और एस्पन (पोपसल एसपीपी) , रोबिना (रोबिना एसपीपी ) , टुलिपवुड ( लिरोडेनड्रोन एसपीपी ) , या वालनट (जगलान एसपीपी) प्रजातियों की अशंकुधारी काष्ठ की कम से कम एक बाह्य प्लाई के साथः
441233 10
सजावटी प्लाईवुड
441233 20
10%
घ.मी.
घ.मी. 10%
टी चेस्ट पैनल, शुकस, चाहे सेटों में पैक किए गए हों या नहीं
4412 33 30
10%
घ.मी.
सामुद्रिक और वायुयान प्लाईवुड
441233 40 ऐसे प्लाईवुड की कटाई और छंटाई, जिसकी चौड़ाई 5 सें.मी. से घ.मी. 10%
अधिक नहीं है
441233 90 अन्य घ.मी. 10%
441234 अन्य, उपशीर्ष 4412 33 के अधीन विनिर्दिष्ट नहीं किए गए अशंकुधारी
काष्ठ की कम से कम एक बाह्य प्लाई के साथ:
4412 34 10 सजावटी प्लाईवुड घ.मी. 10%
441234 20 टी चेस्ट पैनल, शुकस , चाहे सेटों में पैक किए गए हों या नहीं घ.मी. 10%
441234 30 घ.मी. 10%
सामुद्रिक और वायुयान प्लाईवुड
441234 40 ऐसे प्लाईवुड की कटाई और छंटाई, जिसकी चौड़ाई 5 सें.मी. से घ.मी. 10%
अधिक नहीं है
441234 90 अन्य घ.मी. 10%
441239 अन्य, अशंकुधारी काष्ठ की दोनों बाह्य प्लाइयों के साथ:
सजावटी प्लाईवुड घ.मी. 10%
441239 10
टी चेस्ट पैनल, शूकस, चाहे सेटों में पैक किए गए हों या नहीं घ.मी. 10%
441239 20
घ.मी. 10%
441239 30
सामुद्रिक और वायुयान प्लाईवुड
441239 40
घ.मी. 10%
ऐसे प्लाईवुड की कटाई और छंटाई, जिसकी चौड़ाई 5 सें.मी. से अधिक नहीं है भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
टैरिफ मद
माल का वर्णन
(1)
(2)
441239 90
अन्य
149
इकाई शुल्ककी दर
मानक अधिमानी
(3)
(5)
(4)
घ.मी. 10% -" ;
(ix) शीर्ष 4418 में, टैरिफ मद 4418 7100 से टैरिफ मद 4418 9000 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्
" समवेत फर्श पैनलः
4418 73 00
कि.ग्रा. 10%
बांस या कम से कम बांस की ऊपरी परत के साथ ( वीयर परत)
4418 74 00
अन्य, मोजाइक फर्श के लिए
4418 75 00
अन्य, बहुपर्त वाली
4418 79 00 अन्य
अन्यः
4418 91 00
बांस के
4418 99 00
अन्य
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10% -";
(x) शीर्ष 4419, उपशीर्ष 441900, टैरिफ मद 4419 00 10 तथा टैरिफ मद 4419 00 20 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"4419
काष्ठ के खाने- पीने के बर्तन और रसोई के सामान
बांस के:
4419 11 00
ब्रेड बोर्ड , चोपिंग बोर्ड और वैसे ही बोर्ड
4419 12 00
चोपस्टिक
4419 19 00
अन्य
अन्यः
4419 90
4419 90 10
ब्रेड बोर्ड, चोपिंग बोर्ड और वैसे ही बोर्ड
4419 90 20 चोपस्टिक
4419 90 90
अन्य
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10% -";
(xi ) शीर्ष 4421 , उपशीर्ष 442190, टैरिफ मद 4421 90 11 से टैरिफ मद 4421 90 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
अन्य:
4421 91
बांस के :
कि.ग्रा. 10%
घुमावदार काष्ट की चरली , कुकड़ी फिरकी, सिलाई के धागे की रील और वैसे हीः
4421 91 11
सूत की मशीन के लिए
4421 91 12
जूट की मशीन के लिए
4421 91 13
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
रेशम पुनरूज्जीवित और सिंथेटिक फाइबर मशीन के लिए
4421 91 14
अन्य मशीन के लिए
कि.ग्रा. 10% 150
भारत का राजपत्र असाधारण
टैरिफ मद माल का वर्णन
(1) (2)
4421 91 19 अन्य
4421 91 20 काष्ट से तैयार ब्लाक
4421 91 30 माचिस की तीलियां
4421 91 40 पैंसिल स्लेट
4421 91 50
[भाग 2--
इकाई शुल्क की दर
मानक अधिमानी
(3) (4) (5)
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
कि.ग्रा. 10%
मशीन के लिए घुमावदार काष्ठ की चरखी, कुकड़ी, फिरकी, सिलाई कि.ग्रा. 10%
के धागे की रील और वैसे ही :
4421 91 60 खाने- पीने के बर्तन और रसोई के बर्तन के रूप में प्रयुक्त होने वाली घरेलू कि.ग्रा . 10%
सजावटी वस्तुएं
4421 91 70 संघनित काष्ठ की वस्तुएं , जो अन्यत्र सम्मिलित या विनिर्दिष्ट नहीं है कि.ग्रा. 10%
4421 91 90 अन्य कि.ग्रा. 10%
4421 99 अन्य:
घुमावदार काष्ठ की चरखी, कुकड़ी , फिरकी , सिलाई के धागे की रील
और वैसे ही:
4421 99 11 सूत की मशीन के लिए कि.ग्रा. 10%
4421 99 12 जूट की मशीन के लिए कि.ग्रा. 10%
4421 99 13 रेशम पुनरुज्जीवित और सिंथेटिक फाइबर मशीन के लिए कि.ग्रा. 10%
4421 99 14 अन्य मशीन के लिए कि.ग्रा. 10%
4421 99 19 अन्य कि.ग्रा. 10%
4421 99 20 काष्ठ से तैयार ब्लाक कि.ग्रा. 10%
4421 99 30 माचिस की तीलियां कि.ग्रा. 10%
4421 99 40 पैंसिल स्लेट कि.ग्रा. 10%
4421 99 50 काष्ठ के भाग , अर्थात् पोत, नाव और अन्य ऐसी ही तैरने वाली संरचना कि.ग्रा. 10%
के लिए डांड, पैडल और पतवार
4421 99 60 खाने-पीने के बर्तन और रसोई के बर्तन के रूप में प्रयुक्त होने वाली
घरेलू सजावटी वस्तुएं कि.ग्रा. 10%
4421 99 70 संघनित काष्ठ की वस्तुएं , जो अन्यत्र सम्मिलित या विनिर्दिष्ट नहीं हैं कि.ग्रा. 10%
4421 99 90 अन्य
(23) अध्याय 48 में, -
कि.ग्रा. 10% -".
(i ) टिप्पण 4 में , " 65 ग्राम/ वर्ग मी . से अधिक " अंकों , शब्दों और अक्षरों के पश्चात्, " और केवल ऐसे कागज को ही, जो (क) 28 से.मी. से अधिक चौड़ाई की पट्टियों या रोलों में है ; या (ख ) आयताकार (जिसके अंतर्गत वर्ग भी है) शीटों में है, जिसका एक पार्श्व बिना तह लगी स्थिति में 28 से.मी. से अधिक और दूसरा 15 से.मी. से अधिक है, लागू होगा । " शब्द, अंक और अक्षर अंतःस्थापित किए जाएंगे;
(ii) टिप्पण 8 में "4801 और " अंकों और शब्दों का लोप किया जाएगा;
भारत का राजपत्र असाधारण
151 अनुभाग 1क]
माल का वर्णन
टैरिफ मद
इकाई शुल्क की दर मानक अधिमानी
(2)
(1)
(3) (4) (5)
(24) अध्याय 54 में,-
(i ) शीर्ष 5402, शीर्ष 5402 के सामने प्रविष्टि के पश्चात् स्तंभ (2) में प्रविष्टि के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्
" नायलोन या अन्य पालीएमाइड का उच्च लगिष्णुता सूत, चाहे संव्यूतित है या नहीं" ;
"5402 20
(ii) उपशीर्ष 5402 20 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:- पालीएमाइड का उच्च लगिष्णुता सूत, चाहे संव्यूतित है या नहीं " ;
अर्थात् (iii) टैरिफ मद 5402 52 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
पॉलिप्रापायलीन का "5402 53 00
-" ; कि.ग्रा. 10%
(iv) टैरिफ मद 5402 62 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्
"5402 63 00 पॉलिप्रापायलीन का
कि.ग्रा. 10% -";
(25) अध्याय 55 में,-
(i) शीर्ष 5502, उपशीर्ष 550200 , टैरिफ मद 5502 10 00 से टैरिफ मद 5502 90 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्
"5502
कृत्रिम फिलामेंट टो
कि.ग्रा. 10%
5502 10 सैलूलोज एसिटेट के
कि.ग्रा. 10%
5502 10 10 विस्कोस रेयान टो
5502 10 90 अन्य
5502 90 अन्यः
कि.ग्रा. 10%
5502 90 10 विस्कोस रेयॉन टो
कि.ग्रा. 10% -";
5502 90 90 अन्य
अर्थात्:- (ii) टैरिफ मद 5506 30 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
कि.ग्रा. 10%
" 5506 40 00 पॉलिप्रापायलीन का
अर्थात्:- (26) अध्याय 56 में, शीर्ष 5601 , उपशीर्ष 5601 21 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा ,
"5601
टेक्सटाइल सामग्रियों की वैडिंग और उसकी वस्तुएं टेक्सटाइल फाइबर, जो 5 मी.मी. से अधिक लंबा नहीं है (फ्लाक) टेक्सटाइल धूल और मिल नेप
टेक्सटाइल सामग्रियों की वैडिंग और उसकी वस्तुएं :
5601 21 सूत के: " ;
152
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2--
टैरिफ मद
माल का वर्णन
इकाई शुल्ककी दर मानक अधिमानी
(1)
(2)
(3) (4) (5)
(27) अध्याय 57 के शीर्ष 5704 में , टैरिफ मद 5704 10 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
" 5704 20 टाइलें, जिनका अधिकतम बाहरी सतह का क्षेत्र 0.3 वर्ग मी. से अधिक, किंतु 1 वर्ग मी० से अधिक नहीं है
व.मी.
5704 20 10 सूत
10% या 35 रु प्रति वर्ग मी.जो भी उच्चतर हो
व.मी.
5704 20 20 कलात्मक से भिन्न, ऊन
10% या 35 रु प्रति वर्ग मी.जो भी उच्चतर हो
5704 20 90 अन्य
व.मी. 10% या 35 रु प्रति वर्ग मी.जो भी उच्चतर हो" ;
(28) अध्याय 60 में,-
(i ) टिप्पण 3 के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"उपशीर्ष टिप्पण :
उपशीर्ष 6005 35 में पोलीथिलीन मोनोफिलामेंट या पोलियस्टर मल्टीफिलामेंट की फैब्रिक आती है, जिसका भार 30 ग्रा. / वर्ग मी. से अन्यून और 55 ग्रा. / वर्ग मी. से अनधिक है, जिसका मेस आकार 20 छिद्र/ वर्ग से.मी. से अन्यून और 100 छिद्र वर्ग से.मी. से अनधिक है तथा उसे अल्फा- साइपरमेथ्रिन (आईएसओ) , क्लोरफेनापायर (आईएसओ ) , डेल्टामेथ्रिन (आईएनएन, आईएसओ) , लेम्बदा-साईहालोथ्रिन (आईएसओ ) , परमेथ्रिन (आईएसओ) या पिरिमिफोस-मिथाइल (आईएसओ) से संसेचित या विलेपित किया गया है।";
अर्थात् (ii) टैरिफ मद 6005 3100 से टैरिफ मद 6005 34 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा,
कि.ग्रा. 10%
"6005 35 00 इस अध्याय के उपशीर्ष टिप्पण 1 में विनिर्दिष्ट फैब्रिक
कि.ग्रा. 10%
6005 36 00 अन्य, अतिरंजित या विरंजित
कि.ग्रा. 10%
6005 37 00 अन्य, रंजित
कि.ग्रा. 10%
6005 38 00 अन्य, विभिन्न रंगों के सूतों के
6005 39 00 अन्य, छापित
कि.ग्रा. 10% -";
(29) अध्याय 63 में,-
(i ) टिप्पण 3 के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"उपशीर्ष टिप्पण :
उपशीर्ष 6304 20 में फैब्रिक आती है, जिसे अल्फा- साइपरमेथ्रिन ( आईएसओ) , क्लोरफेनापायर (आईएसओ ) , डेल्टामेथ्रिन (आईएनएन, आईएसओ) , लेम्बदा- साईहालोथ्रिन (आईएसओ) , परमेथ्रिन (आईएसओ) या पिरिमिफोसमिथाइल (आईएसओ) से संसेचित या विलेपित किया गया है।";
अर्थात् (ii) शीर्ष 6304 में, टैरिफ मद 6304 19 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
"6304 20 00
10%
इ.
-";
बेड नेट, इस अध्याय के उपशीर्ष टिप्पण 1 में विनिर्दिष्ट ताना बुनी हुई फैब्रिक के अनुभाग 1 क]
भारत का राजपत्र असाधारण
153
टैरिफ मद
माल का वर्णन
इकाई शुल्क की दर मानक अधिमानी
(1)
(2)
(3) (4) (5) (30) अध्याय 68 के टिप्पण 1 में , खंड (ड) के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात् -
" (ड) शीर्ष 9602 की वस्तुएं, यदि वे अध्याय 96 के टिप्पण 2 (ख) में विनिर्दिष्ट सामग्रियों से बनाई गई हैं या शीर्ष 9606 की वस्तुएं (उदाहरणार्थ बटन ) ; शीर्ष 9609 की वस्तुएं (उदाहरणार्थ स्लेट पैंसिलें) ; शीर्ष 9610 की वस्तुएं (उदाहरणार्थ ड्राईंग स्लेटें) ; या शीर्ष 9620 की वस्तुएं (उदाहरणार्थ मोनोपोड, बाईपोड, ट्राईपोड और वैसी ही वस्तुएं) ; या";
(31) अध्याय 69 में,-
(i) शीर्ष 6907 में, उपशीर्ष 6907 10, टैरिफ मद 6907 10 10, टैरिफ मद 6907 1090 , टैरिफ मद 6907 90 , टैरिफ मद 6907 90 10 , टैरिफ मद 6907 90 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्
" 6907
चीनी मिट्टी की पटिया और खड़ंजें, चूल्हा या भित्ति टाइलें , चीनी मिट्टी की मोजाइक क्यूबें और वैसी ही वस्तुएं, चाहे वे किसी पृष्ठक पर हैं या नहीं ; चीनी मिट्टी की फिनिशिंग
पटिया और खड़ंजें , चूल्हा या भित्ति टाइलें , उपशीर्ष 6907 30 और उपशीर्ष 6907 40 से भिन्न:
6907 21 00
वर्ग मी० 10%
भार द्वारा जल अवशोषण गुणांक 0.5% से अनधिक के
6907 22 00
वर्ग मी० 10%
भार द्वारा जल अवशोषण गुणांक 0.5 % से अन्यून, किंतु 10 % से अनधिक के
6907 23
वर्ग मी० 10%
भार द्वारा जल अवशोषण गुणांक 10% से अधिक के
6907 30
मोजाइक क्यूबें और वैसी ही , उपशीर्ष 6907 40 से भिन्न
6907 30 10
वर्ग मी० 10%
मोजाइक क्यूबें और वैसी ही, उपशीर्ष 6907 40 से भिन्न
6907 40
चीनी मिट्टी की फिनिशिंग
6907 40 10
चीनी मिट्टी की फिनिशिंग
वर्ग मी० 10% -";
(ii ) शीर्ष 6908, उपशीर्ष 6908 10, टैरिफ मद 6908 10 10 से टैरिफ मद 6908 1090 , उपशीर्ष 6908 90, टैरिफ मद 6908 90 10 से टैरिफ मद 6908 90 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा ;
(32) अनुभाग 15 के टिप्पण 1 में, खंड (ड) के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्: -
" (ड) अध्याय 96 ( प्रकीर्ण विनिर्मित वस्तुएं) की हाथ की छन्नी , बटन, लेखनी , पेंसिल होल्डर, लेखनी की निबें, मोनोपोड, बाईपोड, ट्राईपोड और वैसी ही वस्तुएं या अन्य वस्तुएं ; या";
(33) अध्याय 74 के टिप्पण 1 में, खंड (ग) के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्: -
"(ग) मास्टर मिश्रातुएं:
ऐसी मिश्रातुएं, जिनमें, अन्य तत्वों के साथ , ताम्र, भार के आधार पर, 10 प्रतिशत से अधिक है , जो उपयोगिता की दृष्टि से आधातवर्ध्य नहीं है, और सामान्यतया जिनका उपयोग अन्य मिश्रातुओं के विनिर्माण में योज्यक के रूप में या अलौह धातुओं की धात्विकी में विआक्सीकारकों, विगंधकन कर्मकों के रूप में या वैसे ही उपयोग के लिए किया जाता है । किंतु ताम्र फॉस्फाइड (फॉस्कर ताम्र) , जिसमें फॉस्फोरस भार के आधार पर, 15 प्रतिशत से अधिक है, शीर्ष 2853 के अंतर्गत आता है। " ;
(34) अध्याय 82 में, शीर्ष 8205 के सामने स्तंभ (2) में की प्रविष्टि में " मशीन औजारों " शब्दों के स्थान पर, "मशीन औजारों या वाटरजैट कटिंग मशीन " शब्द रखे जाएंगे;
154
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
टैरिफ मद
माल का वर्णन
इकाई शुल्ककी दर मानक अधिमानी
(1)
(2)
(3) (4) (5)
(35) अध्याय 83 में , शीर्ष 8308 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"8308
आधार धातु के इस प्रकार के खटके, खटकों सहित फ्रेम, बक्कल , बक्कल-खटके , हुक, आंखें , अक्षिकाएं और वैसी ही वस्तुएं , जिनका उपयोग वस्त्रों या वस्त्र उपसाधनों, जूतादि, आभूषणों , कलाई घड़ियों, पुस्तकों, सायबानों, चमड़े की वस्तुओं , यात्रा की वस्तुओं या काठी या अन्य तैयार वस्तुओं के लिए किया जाता है, आधार धातु के नलिकाकार या द्विशाखित रिवटें, आधार धातु के मनके और सलमें " ;
(36) अनुभाग 16 के टिप्पण 1 में, खंड ( थ) के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
" (थ) टाइप राइटर या उसी प्रकार के रिबन , चाहे स्पूल पर या कार्टीज में है या नहीं, (उनकी घटक सामग्री के अनुसार या शीर्ष 9612 में वर्गीकृत , यदि छाप देने के लिए स्याही से या अन्यथा तैयार की गई है) या शीर्ष 9620 की मोनोपोड, बाईपोड, ट्राईपोड और वैसी ही वस्तुएं। " ;
(37) अध्याय 84 में, -
(i) टिप्पण 1 में ,-
(अ) खंड (च) में " या " शब्द का लोप किया जाएगा ;
(आ) खंड (च) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:- " (छ) अनुभाग 17 की वस्तुओं के लिए रेडिऐटर ; या " ;
(इ) विद्यमान खंड (छ) को खंड (ज) के रूप में पुनःअक्षरांकित किया जाएगा ;
(ii) टिप्पण 2 में, खंड (ङ) में "मशीनरी या सयंत्र " शब्दों के स्थान पर, "मशीन, सयंत्र और प्रयोगशाला उपस्कर " शब्द रखे जाएंगे;
(iii) टिप्पण 9 में, खंड (अ) के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
' (अ) अध्याय 85 के टिप्पण 9 (क) और 9 ( ख) , इस टिप्पण और शीर्ष 8486 में क्रमशः उपयोग किए गए "अर्धचालक युक्तियां " और " इलैक्ट्रोनिक एकीकृत परिपथ " पदों को भी लागू होंगे । तथापि इस टिप्पण और शीर्ष 8486 के प्रयोजनों के लिए , "अर्धचालक युक्तियां " के अंतर्गत फोटो सुग्राही अर्धचालक युक्तियां और प्रकाश उत्सर्जन डायोड ( एलईडी) भी आते हैं। ' ;
(iv) उपशीर्ष टिप्पण में,-
(अ) निम्नलिखित नया उपशीर्ष टिप्पण 1 अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
' 1. उपशीर्ष 8465 20 के प्रयोजनों के लिए , " मशीनी केंद्र" पद केवल काष्ठ, कार्क, हड्डी, कठोर रबड़, कठोर प्लास्टिक या वैसी ही कठोर सामग्रियों के कर्मण के लिए लागू होता है , जो किसी मैंगजीन से स्वचालित औजार परिवर्तन द्वारा या किसी मशीनी कार्यक्रम के अनुपालन में वैसे ही विभिन्न प्रकार के मशीन प्रचालनों को कर सकता है । ' ;
(आ) विद्यमान उपशीर्ष टिप्पण 1 को उपशीर्ष टिप्पण 2 के रूप में पुनः संख्यांकित किया जाएगा ; और इस प्रकार पुनःसंख्यांकित उपशीर्ष टिप्पण 2 के पश्चात्, निम्नलिखित उपशीर्ष टिप्पण अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: -
"3. उपशीर्ष 8481 20 के प्रयोजनों के लिए , "तैल द्रवचालित या वातिल वाल्व" पद से ऐसे वाल्व अभिप्रेत हैं, जिनका विनिर्दिष्टतः किसी तैल द्रवचालित या वातिल प्रणाली में " तरल शक्ति" के पारेषण के लिए भारत का राजपत्र असाधारण
155 अनुभाग 1क
माल का वर्णन
टैरिफ मद
इकाई शुल्क की दर मानक अधिमानी
(1)
(2)
(4)
(3)
(5)
वहां उपयोग किया जाता है जहां ऊर्जा स्रोत की आपूर्ति दाबानुकूलित तरल ( तरल या गैस) के रूप में की जाती है । ये वाल्व किसी भी किस्म ( उदाहरणार्थ दाब कम करने वाली किस्म , जांच किस्म) के हो सकेंगे । उपशीर्ष 8481 20 को शीर्ष 8481 के सभी अन्य उपशीर्षों पर अधिमानता होगी। " ;
(इ) विद्यमान उपशीर्ष टिप्पण 2 को उपशीर्ष टिप्पण 4 के रूप में पुनः संख्यांकित किया जाएगा ;
(v) शीर्ष 8415 में, उपशीर्ष 8415 10 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्
"8415 10 किसी खिड़की, दीवाल , छत या फर्श में लगाए जाने के लिए , स्वतः पूर्ण या " पृथक्करण प्रणाली " के लिए डिजाइन किए गए किस्म केः " ;
(vi) शीर्ष 8424 में,-
(क) टैरिफ मद 8424 3000 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
66 कृषि या उद्यान संबंधी फुहारे:
इ. 7.5%
8424 41 00 सुबाह्य फुहारे
8424 49 00 अन्य
इ. 7.5% -" ;
(ख) टैरिफ मद 8424 81 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"8424 82 00
इ. 7.5% -" ;
कृषि या उद्यान संबंधी
(vii) शीर्ष 8432 में,-
(क) टैरिफ मद 8432 30 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:- " वपित्र, रोपित्र और प्ररोपित्र :
इ. 7.5%
843231 00 अरोपाई प्रत्यक्ष वपित्र, रोपित्र और प्ररोपित्र
इ. 7.5% -" ;
843239 00 अन्य
(ख) टैरिफ मद 8432 40 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्: -
" खाद प्रसारक और उर्वरक वितरक:
इ. 7.5%
8432 41 00 खाद प्रसारक
इ. 7.5% -";
8432 42 00 उर्वरक वितरक
(viii) उपशीर्ष 8442 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्: -
"8442 प्लेटों, मुद्रण संघटकों को तैयार करने या बनाने के लिए मशीनरी , उपकरण और उपस्कर (शीर्ष 8456 से शीर्ष 8465 की मशीनों से भिन्न); मुद्रण प्रयोजनों के लिए तैयार की गई प्लेटें, बेलन और लिथोमुद्रण प्रस्तर (उदाहरणार्थ समतल, कणित या पालिशकृत)";
156
भारत का राजपत्र असाधारण
माल का वर्णन टैरिफ मद
(2) (1)
(ix) शीर्ष 8456 में,-
[भाग 2--
इकाई शुल्क की दर मानक अधिमानी
(3) (4) (5)
(क) टैरिफ मद 8456 10 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
लेजर या अन्य प्रकाश या फोटोन किरण पुंज प्रक्रिया द्वारा प्रचालित:
8456 11 00
लेजर द्वारा प्रचालित
8456 12 00
इ. 7.5%
अन्य प्रकाश या फोटोन किरण पुंज प्रक्रिया द्वारा प्रचालित
इ. 7.5% -" ;
(ख) टैरिफ मद 8456 3000 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्
"8456 40 00
प्लाज्मा आर्क प्रक्रिया द्वारा प्रचालित
8456 50 00
वाटर-जेट कटिंग मशीन द्वारा प्रचालित इ. 7.5%
इ. 7.5% -";
(x) उपशीर्ष 8459 40, टैरिफ मद 8459 4010 से टैरिफ मद 8459 40 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:
" अन्य वेधन मशीनें :
8459 41
संख्यात्मकतः नियंत्रित
8459 41 10
जिग वेधन मशीनें, क्षितिजाकार
8459 41 20
फाइन वेधन मशीनें, क्षितिजाकार
8459 41 30
फाइन वेधन मशीनें, ऊर्ध्वाकार
8459 41 90 अन्य
8459 49
अन्य:
जिग वेधन मशीनें , क्षितिजाकार 8459 49 10
8459 49 20
फाइन वेधन मशीनें , क्षितिजाकार
8459 49 30
फाइन वेधन मशीनें, ऊर्ध्वाकार
8459 49 90 अन्य
इ. 7.5%
इ. 7.5%
इ. 7.5%
इ. 7.5%
इ. 7.5%
इ. 7.5%
इ. 7.5%
इ. 7.5% ";
(xi) शीर्ष 8460 , टैरिफ मद 8460 1100 से टैरिफ मद 8460 21 00 , उपशीर्ष 8460 29, टैरिफ मद 8460 29 10 से टैरिफ मद 8460 29 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"8460
घर्षण, प्रस्तर, अपघर्षक या पालिशकरण उत्पादों द्वारा धातु या सर्मेट के विबर्रन तीक्ष्ण, घर्षण, शाणन , प्रमार्जन, पालिशकरण या अन्यथा परिसज्जन के लिए मशीन औजार शीर्ष 8461 की गियर कर्तन, गिअर घर्षण या गिअर परिसज्जन मशीन से भिन्न सपाट सतह वाली घर्षण मशीनें
सपाट सतह वाली घर्षण मशीनें:
भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
माल का वर्णन टैरिफ मद
(1)
(2)
8460 12 00
संख्यात्मकतः नियंत्रित
8460 19 00
अन्य
अन्य घर्षण मशीनें :
8460 22 00
केन्द्र रहित घर्षण मशीनें, संख्यात्मकतः नियंत्रित
8460 23 00
अन्य बेलनाकार घर्षण मशीनें, संख्यात्मकतः नियंत्रित
8460 24 00
अन्य, संख्यात्मकतः नियंत्रित
8460 29
अन्य:
8460 29 10
बेलनाकार पेषणित्र
8460 29 20
आंतरिक पेषणित्र
8460 29 30
केन्द्र रहित घर्षण मशीन
8460 29 40
प्रोपाइल पेषणित्र
8460 29 90 अन्य
157
इकाई
शुल्ककी दर मानक अधिमानी
(3) (4) (5)
इ. 7.5%
इ. 7.5%
इ. 7.5%
इ. 7.5%
इ. 7.5%
इ. 7.5%
इ. 7.5%
इ. 7.5%
इ. 7.5%
इ. 7.5% -";
(xii) टैरिफ मद 8465 10 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
"8465 20 00
मशीनी केंद्र
(xiii) शीर्ष 8466 में,-
इ. 7.5% -";
(क) शीर्ष 8466 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"8466
शीर्ष 8456 से शीर्ष 8465 तक की मशीनों के साथ पूर्णतः या प्रधानतः उपयोग के लिए उपयुक्त पुर्जे या उपसाधन, जिनके अंतर्गत कृत्यक या औजार होल्डर, स्वतः खुलने वाले रूपदा शीर्ष, विभाजक शीर्ष और मशीन के लिए अन्य विशेष संलग्नक हैं हाथ से कार्य करने के लिए , किसी भी प्रकार के औजार के लिए औजार होल्डर " ;
(ख) उपशीर्ष 8466 30 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्
"8466 30
विभाजक शीर्ष और मशीनों के लिए अन्य विशेष संलग्नक : ";
(xiv) शीर्ष 8469, उपशीर्ष 8469 00 , टैरिफ मद 846900 10, टैरिफ मद 846900 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा ;
(xv) शीर्ष 8472 , टैरिफ मद 8472 90 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
अन्य:
8472 90 91
शब्द प्रक्रमण मशीनें
847290 92
स्वचालित टाइपराइटर
इ. शून्य
इ. 10% 158
भारत का राजपत्र असाधारण
माल का वर्णन टैरिफ मद
(1)
(2) 8472 90 93
ब्रेल टाइपराइटर, विद्युत
847290 94
ब्रेल टाइपराइटर, अविद्युत
8472 90 95
ब्रेल टाइपराइटर, विद्युत या अविद्युत
8472 90 99
अन्य:
(xvi ) शीर्ष 8473 में,-
[भाग 2-
इकाई शुल्क की दर मानक अधिमानी
(3) (4) (5) इ. 7.5%
इ. 7.5%
इ. 10%
इ. 7.5% -";
(क) शीर्ष 8473 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"8473
शीर्ष 8470 से शीर्ष 8472 तक की मशीनों के साथ पूर्णतः या प्रधानतया उपयोग के लिए उपयुक्त पुर्जे और उपसाधन (आच्छदों, वहन केसों और उसी प्रकार की वस्तुओं से भिन्न) " ;
(ख) टैरिफ मद 8473 1000 और उससे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा ;
(ग) टैरिफ मद 8473 50 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्
" 8473 50 00
निःशुल्क-";
शीर्ष 8470 से शीर्ष 8472 तक की दो या अधिक मशीनों के साथ उपयोग के लिए समान रूप से उपयुक्त पुर्जे और उपसाधन" ।
(38) अध्याय 85 में,-
(i ) टिप्पण में , टिप्पण 2 के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
" 3. शीर्ष 8507 के प्रयोजन के लिए , " वैद्युत संचायक " पद में वे हैं, जिनमें अनुषंगी संघटक हैं, जो संचायक के ऊर्जा भंडारण और आपूर्ति या उसे नुकसान से संरक्षित करने के लिए योगदान करते हैं, जैसे वैद्युत कनेक्टर, तापमान नियंत्रक युक्तियां (उदाहरणार्थ थरमिस्टर) और परिपथ संरक्षण युक्तियां हैं। उनमें मालों के संरक्षित कक्ष का कोई भाग भी सम्मिलित हो सकेगा, जिसमें उनका उपयोग किया जा रहा है ।" ;
(ii) विद्यमान टिप्पण 3 , टिप्पण 4, टिप्पण 5, टिप्पण 6, टिप्पण 7 , टिप्पण 8 और टिप्पण 9 को क्रमशः टिप्पण 4 , टिप्पण 5, टिप्पण 6, टिप्पण 7 , टिप्पण 8 , टिप्पण 9 और टिप्पण 10 के रूप में पुनःसंख्यांकित किया जाएगा ;
(iii) इस प्रकार पुनःसंख्यांकित टिप्पण 9 में, खंड (ख) के उपखंड (iii) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
" (iv) बहु संघटक एकीकृत परिपथ (एमसीओ) एक या अधिक मोनोलीथीक, संकर, या बहु- चिप एकीकृत परिपथ, जिनमें निम्नलिखित में कम से कम एक संघटक है : सिलीकान-आधारित संवेदक , प्रेरक, दोलक, संदोलक या उनका संयोजन, या शीर्ष 8532, शीर्ष 8533 , शीर्ष 8541 के अधीन वर्गीकृत वस्तुओं के कृत्य करने वाले संघटक या शीर्ष 8504 के अधीन वर्गीकृत प्रेरक, जो सभी आशयों और प्रयोजनों के लिए अविभक्त रूप से एकल निकाय में विरचित किए गए हैं; जैसे एकीकृत परिपथ, जो मुद्रित परिपथ बोर्ड ( पीसीबी) में संयोजन के लिए एक प्रकार के संघटक के रूप में इस्तेमाल किए गए हैं या, जो पिन, लीड, बाल, लैंड, बम्प या पैड द्वारा अन्य वाहक के रूप में।
इस परिभाषा के प्रयोजन के लिए:
1. " संघटक" शेष बहु संघटक एकीकृत परिपथ में संयोजित किए जाते हैं, तब, पृथक्, स्वतंत्र रूप से, विनिर्मित या अन्य संघटकों में एकीकृत किए जा सकेंगे ।
2. "सिलीकान-आधारित " से सिलीकान सबस्ट्रेट पर निर्मित, या सिलीकान सामग्रियों से बना हुआ या एकीकृत परिपथ डाई में विनिर्मित अभिप्रेत है ।
भारत का राजपत्र असाधारण
159 अनुभाग 1क]
माल का वर्णन
टैरिफ मद
इकाई शुल्क की दर मानक अधिमानी
(1)
(2)
(4)
(3)
(5)
3. (क) "सिलीकान-आधारित संवेदक " में सूक्ष्म इलैक्ट्रानिकी या यांत्रिक ढांचे हैं, जो अर्द्धचालक के द्रव्य में या उसकी सतह पर सृजित किए गए हैं और उनका कृत्य भौतिक या रासायनिक मात्राओं का पता लगाना तथा उन्हें वैद्युत संकेतों में पारकर्मी करना है, जो वैद्युत गुणधर्म में परिवर्तनों या यांत्रिक संरचना के विस्थापन के कारण कारित हुए हैं। " भौतिक या रासायनिक मात्राएं " वास्तविक विश्व परिदृश्यों, जैसे दाब, ध्वनि तरंगें , त्वरण, कंपन, संचलन, उन्मुखतता, स्ट्रेन, चुंबकीय क्षेत्र शक्ति, वैद्युत क्षेत्र शक्ति, प्रकाश , विकिरण , आर्द्रता, प्रवाह, रासायनिक संकेंद्रण आदि से संबंधित हैं ।
(ख) "सिलीकान-आधारित प्रेरक " में सूक्ष्म इलैक्ट्रानिकी और यांत्रिक ढांचे हैं, जो अर्द्धचालक के द्रव्य में या उसकी सतह पर सृजित किए गए हैं और उनका कृत्य वैद्युत संकेतों को भौतिक संचलन में परिवर्तित करना है ।
(ग) "सिलीकान-आधारित दोलक " संघटक हैं, जो सूक्ष्म इलैक्ट्रानिकी और यांत्रिक ढांचे हैं, जो अर्द्धचालक के द्रव्य में या उसकी सतह पर सृजित किए गए हैं और उनका कृत्य पूर्व निर्धारित आवृत्ति में यांत्रिक या वैद्युत संदोलन संकेतों को सृजित करना है, जो किसी बाहरी इनपुट की प्रतिक्रिया में इन ढांचों की भौतिक ज्यामिति पर निर्भर करते हैं ।
(घ) "सिलीकान-आधारित संदोलक " सक्रिय संघटक हैं, जो सूक्ष्म इलैक्ट्रानिकी और यांत्रिक ढांचे हैं, जो अर्धचालक के द्रव्य में या उसकी सतह पर सृजित किए गए हैं और उनका कृत्य पूर्व निर्धारित आवृत्ति में यांत्रिक या वैद्युत संदोलन संकेतों को सृजित करना है, जो इन ढांचों की भौतिक ज्यामिति पर निर्भर करते हैं।";
(iv) शीर्ष 8528 , टैरिफ मद 8528 41 00 से टैरिफ मद 8528 6900 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"8528 42 00
इ. 10%
शीर्ष 8471 की किसी स्वचालित डाटा प्रक्रमण मशीन से सीधे जोड़े जाने में सक्षम और उसके साथ उपयोग के लिए डिजाइन की गई
8528 49 00
अन्य
इ. 10%
अन्यमानीटर:
इ. 10%
8528 52 00
शीर्ष 8471 की किसी स्वचालित डाटा प्रक्रमण मशीन से सीधे जोड़े जाने में सक्षम और उसके साथ उपयोग के लिए डिजाइन की गई
इ. 10%
8528 59 00 अन्य
प्रक्षेपक:
8528 62 00
इ. 10%
शीर्ष 8471 की किसी स्वचलित डाटा प्रक्रमण मशीन से सीधे जोड़े जाने में सक्षम और उसके साथ उपयोग के लिए डिजाइन की गई
10%
8528 69 00 अन्य
-";
इ.
(v) टैरिफ मद 8531 20 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएंगा , अर्थात्:-
" 8531 20 00
निःशुल्क- ";
सूचक पैनल, जिनमें द्रव क्रिस्टल युक्तियां (द्रक्रि०यू०) या प्रकाश उत्सर्जन डायोड (प्र० उ०डा०) लगे हैं इ.
(vi) शीर्ष 8539 में,-
(क) शीर्ष 8539 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"8539
विद्युत फिलामेंट या विसर्जन लैंप , जिनके अंतर्गत मुहरबंद किरणपुंज लैंप यूनिटें और पराबैंगनी या अवरक्त लैंप, आर्क लैंप; प्रकाश उत्सर्जन डायोड (प्र० उ॰डा० ) लैंप हैं ";
160
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
माल का वर्णन
टैरिफ मद
इकाई शुल्क की दर मानक अधिमानी
(1)
(2)
(3) (4) (5)
(ख) टैरिफ मद 853949 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: -
" 8539 50 00
इ. 10% -" ;
प्रकाश उत्सर्जन डायोड (प्र.उ.डा.) लैंप
(vii) शीर्ष 8541 में,-
(क) शीर्ष 8541 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
"8541
डायोड, ट्रांजिस्टर और वैसी ही अर्धचालक युक्तियां; प्रकाश सुग्राही अर्धचालक युक्तियां, जिनके अंतर्गत प्रकाश वोल्टीय सेल हैं, चाहे मोडयूलों में समुच्चयित पैनलों में तैयार हैं या नहीं; प्रकाश उत्सर्जक डायोड, आरूढ़ दाब विद्युत क्रिस्टल" ;
(ख) टैरिफ मद 8541 10 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"8541 10 00
इ . निःशुल्क-";
डायोड, प्रकाश सुग्राही या प्रकाश उत्सर्जक डायोड से भिन्न
(ग) उपशीर्ष 8541 40 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
" 8541 40
प्रकाश सुग्राही अर्धचालक युक्तियां , जिनके अंतर्गत प्रकाश वोल्टीय सेल हैं, चाहे मोड्यूलों में समुच्चयित या पैनलों में तैयार हैं या नहीं; प्रकाश उत्सर्जक डायोड";
(39) अनुभाग 17 के टिप्पण 2 में खंड (ङ) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड रखा जाएगा , अर्थात्:-
" (ङ) शीर्ष 8401 से शीर्ष 8479 की मशीनें और उपकरण या उनके पुर्जे, इस अनुभाग की वस्तुओं के लिए रेडिएटरों से भिन्न, शीर्ष 8481 या शीर्ष 8482 की वस्तुएं या, उस दशा में , जब वे इंजन या मोटरों के अभिन्न पुर्जे हैं, शीर्ष 8483 की
वस्तुएं ; ";
(40) अध्याय 87 में,-
(i ) शीर्ष 8701 में,-
(क) टैरिफ मद 8701 1000 के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्
इ. 10% -" ;
"8701 10 00
एकल धुरा ट्रैक्टर
(ख) उपशीर्ष 8701 90 , टैरिफ मद 8701 90 10 और टैरिफ मद 8701 90 90 तथा उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
अन्य, इंजन शक्ति के:
इ. 10%
18 किवा से अनधिक
8701 91 00
इ. 10%
8701 92 00
18 किवा से अधिक, किंतु 37 कि॰वा से अनधिक
10%
इ.
8701 93 00
37 कि॰वा से अधिक, किंतु 75 कि॰वा से अनधिक
10%
इ.
8701 94 00
75 कि॰वा से अधिक, किंतु 130 कि॰वा॰ से अनधिक
10% -";
इ.
8701 95 00
130 कि॰वा से अधिक
अनुभाग 1क] 162 भारत का राजपत्र असाधारण भारत का राजपत्र असाधारण [भाग 2- 161
टैरिफ मद टैरिफ मद माल का वर्णन माल का वर्णन इकाई इकाई शुल्क की दर शुल्ककी दर
मानक मानक अधिमानी अधिमानी
(1) (1) (2) (2) (3) (3) (4) (4) (5) (5)
870230 18 (ii) शीर्ष 8702 , उपशीर्ष 8702 10, टैरिफ मद 8702 10 11 से टैरिफ मद 87021099 , उपशीर्ष 8702 90, टैरिफ अन्य, वातानुकूलित इ. 40%
8702 30 19 मद 8702 90 11 से टैरिफ मद 8702 90 99 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, 40%
अन्य, गैर-वातानुकूलित इ.
अर्थात्:-
अन्य:
" 8702 10 केवल संपीड़न-प्रज्वलन अंतरदहन पिस्टन इंजन (डीजल या अर्धडीजल सहित):
870230 21 एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित इ. 40%
13 व्यक्तियों से , जिसमें चालक भी है, अनधिक के परिवहन के लिए यान:
8702 30 22 एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित इ. 40%
8702 10 11 एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित इ. 40%
870230 28 अन्य, वातानुकूलित इ. 40%
8702 10 12 एकीकृत मोनोकोक यान, गैर-वातानुकूलित इ. 40%
8702 30 29 अन्य, गैर-वातानुकूलित इ. 40%
8702 10 18 अन्य, वातानुकूलित. इ. 40%
870240 नोदन के लिए केवल वैद्युत मोटर के साथ :
8702 10 19 अन्य, गैर-वातानुकूलित इ. 40%
अन्य: 13 व्यक्तियों से , जिसमें चालक भी है, अनधिक के परिवहन के लिए यान :
8702 40 11 एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित इ. 40%
870210 21 एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित इ. 40%
870240 12 एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित इ. 40%
8702 10 22 एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित इ. 40%
8702 40 18 अन्य, वातानुकूलित इ. 40%
8702 10 28 अन्य, वातानुकूलित इ. 40%
8702 40 19 अन्य, गैर-वातानुकूलित इ. 40
8702 10 29 अन्य, गैर-वातानुकूलित इ . 40%
870220 अन्य: संपीडन- प्रज्वलन अंतरदहन पिस्टन इंजन (डीजल या अर्धडीजल सहित)
8702 40 21 और नोदन के लिए मोटर के रूप में वैद्युत मोटर, दोनों के साथ : इ. 40%
एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित
13 व्यक्तियों से , जिसमें चालक भी है, अनधिक के परिवहन के लिए यान :
870240 22 एकीकृत मोनोकोक्यू यान, गैर- वातानुकूलित इ. 40%
8702 20 11 एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित इ. 40%
8702 40 28 अन्य, वातानुकूलित इ. 40%
870220 12 एकीकृत मोनोकोक यान , गैर- वातानुकूलित इ. 40%
870240 29 अन्य, गैर-वातानुकूलित इ. 40% -";
8702 20 18 अन्य, वातानुकूलित इ. 40%
870290 अन्य
8702 20 19 अन्य, गैर- वातानुकूलित इ. 40%
13 व्यक्तियों से, जिसमें चालक भी है, अनधिक के परिवहन के लिए यान:
अन्य:
8702 90 11 एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित इ. 40%
870220 21 एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित इ. 40%
8702 90 12 एकीकृत मोनोकोक यान , गैर- वातानुकूलित इ. 40%
8702 20 22 एकीकृत मोनोकोक यान, गैर-वातानुकूलित इ. 40%
8702 90 18 अन्य, वातानुकूलित इ. 40%
8702 20 28 अन्य, वातानुकूलित इ. 40%
8702 90 19 अन्य, गैर-वातानुकूलित इ. 40%
8702 20 29 अन्य, गैर-वातानुकूलित इ. 40%
अन्य:
870230 स्फुलिंग प्रज्वलन अंतरदहन प्रत्यागामी पिस्टन इंजन और नोदन के
870290 21 एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित इ. 40%
लिए मोटर के रूप में वैद्युत मोटर, दोनों के साथ:
870290 22 13 व्यक्तियों से, जिसमें चालक भी है, अनधिक के परिवहन के लिए यान: इ. 40%
एकीकृत मोनोकोक्यूयान, गैर- वातानुकूलित
इ. इ. 40 40%
870290 28 870230 11 अन्य, वातानुकूलित एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित
एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित इ. इ. 40 40% -";
870290 29 870230 12 अन्य, गैर- वातानुकूलित
भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
माल का वर्णन टैरिफ मद
(1)
(2)
(iii) शीर्ष 8703 में,-
163
इकाई
मानक
शुल्ककी दर अधिमानी
(3) (4) (5)
(क) टैरिफ मद 8703 10 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् आने वाले स्तंभ (2) में की प्रविष्टि में, "जिनमें" शब्द के पश्चात् " केवल " शब्द अंतःस्थापित किया जाएगा;
(ख) टैरिफ मद 8703 24 99 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् आने वाले स्तंभ (2) में की प्रविष्टि में , "यान" शब्द के पश्चात् " केवल " शब्द अतःस्थापित किया जाएगा;
(ग) टैरिफ मद 8703 31 20 और टैरिफ मद 8703 32 20 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा;
अर्थात् (घ) टैरिफ मद 8703 33 99 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
"8703 40
अन्य यान, जिनमें विद्युत शक्ति के बाह्य स्रोत पर डाट लगाकर चार्ज किए जाने के योग्य मोटरों से भिन्न स्फुलिंग प्रज्वलन अंतर्दहन प्रत्यागामी पिस्टन इंजन और नोदन के लिए मोटरों के रूप में विद्युत मोटर दोनों हैं :
8703 40 10
इ. 125%
सात व्यक्तियों से अधिक के जिनमें चालक भी है , परिवहन के लिए मुख्य रूप से अभिकल्पित यान
8703 40 20
125%
इ.
विशेषीकृत परिवहन यान जैसे एम्बुलेंस, कैदी यान और उसी प्रकार के यान
8703 40 30
मोटरकारें
8703 40 40
तीन पहिया यान
8703 40 90
अन्य
8703 50
125%
इ.
125%
इ.
125%
इ.
अन्य यान , जिनमें विद्युत शक्ति के बाह्य स्रोत पर डाट लगाकर चार्ज किए जाने के योग्य मोटरों से भिन्न स्फुलिंग प्रज्वलन अंतर्दहन पिस्टन इंजन (डीजल या अर्ध डीजल) और नोदन के लिए मोटरों के रूप में वैद्युत मोटर दोनों हैं :
8703 50 10
125%
इ.
सात व्यक्तियों से अधिक के, जिनमें चालक भी है, परिवहन के लिए मुख्य रूप से अभिकल्पित यान
8703 50 20
125%
इ.
विशेषीकृत परिवहन यान जैसे एम्बुलेंस , कैदी यान और उसी प्रकार के यान
मोटर कारें
8703 50 30
तीन पहिया यान
8703 50 40
8703 50.50 अन्य
8703 60
125%
इ.
125%
इ.
125%
इ.
अन्य यान, जिनमें विद्युत शक्ति के बाह्य स्रोत पर डाट लगाकर चार्ज किए जाने के योग्य मोटरों से भिन्न स्फुलिंग प्रज्वलन अंतर्दहन प्रत्यागामी पिस्टन इंजन और नोदन के लिए मोटरों के रूप में विद्युत मोटर दोनों हैं :
8703 60 10
125%
इ.
सात व्यक्तियों से अधिक के जिनमें चालक भी है, परिवहन के लिए मुख्य रूप से अभिकल्पित यान
164 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग 2-
टैरिफ मद माल का वर्णन इकाई शुल्क की दर
मानक अधिमानी
(1) (2) (3) (4) (5)
8703 60 20 विशेषीकृत परिवहन यान जैसे एम्बुलेंस , कैदी यान और उसी प्रकार के यान इ. 125%
8703 60 30 मोटर कारें इ. 125%
8703 60 40 तीन पहिया यान इ. 125%
8703 60 90 अन्य इ. 125%
8703 70 अन्य यान , जिनमें संपीड़न विद्युत शक्ति के बाह्य स्रोत पर डाट
लगाकर चार्ज किए जाने के योग्य मोटरों से भिन्न स्फुलिंग प्रज्वलन
अंतर्दहन प्रत्यागामी पिस्टन इंजन (डीजल या अर्ध डीजल) और नोदन के
लिए मोटरों के रूप में विद्युत मोटर दोनों हैं :
8703 70 10 सात व्यक्तियों से अधिक के जिनमें चालक भी है, परिवहन के लिए इ. 125%
मुख्य रूप से अभिकल्पित यान
8703 70 20 विशेषीकृत परिवहन यान जैसे एम्बुलेंस, कैदी यान और उसी प्रकार के यान इ. 125%
8703 70 30 मोटर कारें इ. 125%
8703 70 40 तीन पहिया यान इ. 125%
8703 70 90 अन्य इ. 125%
8703 80 अन्ययान, जिनमें नोदन के लिए केवल विद्युत मोटर है :
8703 80 10 सात व्यक्तियों से अधिक के, जिनमें चालक भी है, परिवहन के लिए इ. 125
मुख्य रूप से अभिकल्पित यान
8703 80 20 विशेषीकृत परिवहन यान जैसे एम्बुलेंस , कैदी यान और उसी प्रकार के यान इ. 125%
8703 80 30 मोटर कारें इ. 125%
8703 80 40 तीन पहिया यान इ. 125%
8703 80 90 अन्य इ. 125% -";
(ङ) उपशीर्ष 8703 90, टैरिफ मद 8703 3399, टैरिफ मद 8703 90 10, तथा 8703 90 90 और उनसे
संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
" 8703 90 00 अन्य इ. 125% -" ;
(iv) शीर्ष 8711 में,-
(क) टैरिफ मद 8711 5000 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्
"8711 60 नोदन के लिए विद्युत मोटर सहित इ. 100%
8711 60 10 मोटर साइकिल इ. 100%
इ. 100%
8711 60 20 स्कूटर
भारत का राजपत्र असाधारण
165 अनुभाग 1क]
माल का वर्णन
टैरिफ मद
इकाई शुल्ककी दर मानक अधिमानी
(1)
(2)
(3) (4) (5)
8711 60 30 मोपेड
इ. 100%
8711 60 90 अन्य
इ. 100% -";
(ख) उपशीर्ष 8711 90, टैरिफ मद 8711 9010 से टैरिफ मद 8711 90 99 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्
" 8711 90 अन्य
इ. 100%
8711 90 10
साइडकारें
इ. 100%
8711 90 90
अन्य
इ. 100% -";
(41 ) अध्याय 90 में,-
(i ) टिप्पण 1 में,-
(अ) खंड (छ) में, "मशीन औजारों " शब्दों के पश्चात् " या वाटर जेट कटिंग मशीन " शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे;
(आ) खंड (ट) के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"(ठ) शीर्ष 9620 के, मोनोपोड, बायोपोड, ट्राइपोड और वैसी ही वस्तुएं; " ;
वर्तमान खंड (ठ) और (ड) को क्रमशः (ड) और (ढ) के रूप में पुनः अक्षरांकित किया जाएगा ;
(इ)
(ii) शीर्ष 9006 में, टैरिफ मद 9006 1000 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा ;
(42) अध्याय 92 के टिप्पण 1 में, खंड ( घ) के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्
" (घ) संगीत वाद्ययंत्रों की सफाई के लिए ब्रुस (शीर्ष 9603) , या मोनोपोड, बायोपोड, ट्राइपोड और वैसी ही वस्तुएं (शीर्ष 9620); या" ;
(43) अध्याय 94 में, -
(i ) टिप्पण 1 में,-
(अ) खंड (ट) में, "या " शब्द का लोप किया जाएगा;
(आ) खंड (ठ) में, अंत में " या " शब्द अंतःस्थापित किया जाएगा;
(इ) खंड (ठ) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
" (ड) मोनोपोड, बायोपोड, ट्राइपोड और वैसी ही वस्तुएं (शीर्ष 9620) ; " ;
(ii) टैरिफ मद 9401 51 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
इ. 10%
"9401 52 00 बांस के
इ. 10% -";
रेटन के
9401 53 00
(iii ) टैरिफ मद 9403 81 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्: -
बांस के
"9401 82 00
इ. 10%
रेटन के
इ. 10% -".
9401 83 00 166
भारत का राजपत्र असाधारण
टैरिफ मद
माल का वर्णन
(1)
(2)
[भाग 2-
इकाई शुल्ककी दर मानक अधिमानी
(4)
(3)
(5)
(iv) शीर्ष 9406, उपशीर्ष 9406 00 , टैरिफ मद 9406 00 11 से टैरिफ मद 94060099 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
"9406
पूर्वसंविरचित निर्माण
9406 10 काष्ठ का:
9406 10 10 ग्रीन हाउस
9406 10 20 शीतागार के लिए
9406 10 30
इनसिल जल भंडारण के लिए साइलो
9406 10 90 अन्य
9406 90 अन्य:
9406 90 10
ग्रीन हाउस
9406 90 20
शीतागार के लिए
9406 90 30
इनसिल जल भंडारण के लिए साइलो
9406 90 90 अन्य
(44) अध्याय 95 में,-
(i ) टिप्पण 1 में,—
इ. 10%
इ. 10%
इ. 10
इ. 10%
इ. 10%
इ. 10%
इ. 10%
इ. 10% -".
(अ) खंड (ङ) के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
" (ङ) अध्याय 61 या अध्याय 62 की टैक्सटाइल फैंसी पोशाक; अध्याय 61 या अध्याय 62 के टैक्सटाइल के क्रीड़ा के कपड़े और परिधानों की विशेष वस्तुएं, चाहे उनमें कोहनी, घुटने या उरुसन्धि क्षेत्रों (उदाहरणार्थ तारदार पहनावा या सोसर गोलकीपर जर्सी) में पैडों या पैडिंग जैसे आनुषंगिक रूप से संरक्षणकारी संघटक समाविष्ट हैं या नहीं ;";
(आ) खंड (न) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
" (प) मोनोपोड, बायोपोड, ट्राइपोड और वैसी ही वस्तुएं (शीर्ष 9620 ); " ;
(इ) विद्यमान खंड (न) और खंड (फ) को क्रमशः खंड (फ) और खंड (ब) के रूप में पुनः अक्षरांकित किया जाएगा;
(45) अध्याय 96 में, टैरिफ मद 96190019 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्
" 9620 00 00
मोनोपोड, बायोपोड, ट्राइपोड और वैसी ही वस्तुएं
10%
इ.
भारत का राजपत्र असाधारण
167 अनुभाग 1क]
पांचवीं अनुसूची
[धारा 145 ( i) देखिए ।
केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम की तीसरी अनुसूची में,-
(क) क्रम संख्या 40 और क्रम संख्या 41 तथा उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित क्रम संख्यांक और प्रविष्टियां रखी जाएंगी, अर्थात् :-
क्र०सं०
माल का विवरण
शीर्ष , उपशीर्ष या टैरिफ मद
(1) (2) (3) "40. 3401 सभी माल 41. 3402 सभी माल";
(ख) क्रम संख्या 63 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित क्रम सं. और प्रविष्टियां अंतःस्थापित की जाएंगी, अर्थात्:-
माल का विवरण
शीर्ष , उपशीर्ष या टैरिफ मद
क्र०सं०
(1)
(2)
(3)
7607
"63क.
सभी माल";
(ग) क्रम संख्या 81 ग और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित क्रम सं. और प्रविष्टियां अंतःस्थापित की जाएंगी, अर्थात:-
माल का विवरण क्र०सं०
शीर्ष, उपशीर्ष या टैरिफ मद
(3)
(2)
(1)
8517 62
"81 घ .
कलाई पर पहनी जाने वाली युक्तियां (सामान्यतया स्मार्ट
घड़ियों के रूप में ज्ञात) " ;
(घ) क्रम संख्या 100 के सामने स्तंभ (3 ) में "पुर्जे, घटक और सहायक पुर्जे " शब्दों के स्थान पर, "पुर्जे, घटक, हिस्से पुर्जे और सहायक पुर्जे" शब्द रखे जाएंगे ;
(ङ) क्रम संख्या 100 क के सामने स्तंभ (3 ) में " पुर्जे, घटक और सहायक पुर्जे " शब्दों के स्थान पर, "पुर्जे, घटक, हिस्से पुर्जे और सहायक पुर्जे" शब्द रखे जाएंगे।
168
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
छठी अनुसूची
[धारा 145 (ii) देखिए ।
केंद्रीय उत्पाद- शुल्क अधिनियम की तीसरी अनुसूची में,-
(क) क्रम संख्या 58 के सामने स्तंभ (3) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " कांचावनित टाइलें, चाहे पालिश की हुई हों या नहीं, चमकदार टाइलें" प्रविष्टि रखी जाएगी;
(ख) क्रम संख्या 59 और उससे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा।
169
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
सातवीं अनुसूची
[धारा 146 ( i ) देखिए ।
केंद्रीय उत्पाद शुल्क टैरिफ अधिनियम की पहली अनुसूची में,-
(क) अध्याय 22 में, टैरिफ मद 22021010, टैरिफ मद 220210 20 और टैरिफ मद 2202 10 90 के सामने स्तंभ (4) में की प्रविष्टिके स्थान पर, "21 " प्रविष्टि रखी जाएगी ;
(ख) अध्याय 24 में,-
(i) टैरिफ मद 2401 10 10, टैरिफ मद 2401 10 20, टैरिफ मद 2401 10 30, टैरिफ मद 2401 10 40 , टैरिफ मद 2401 10 50 , टैरिफ मद 2401 1060, टैरिफ मद 240110 70, टैरिफ मद 24011080, टैरिफ मद 2401 10 90 , टैरिफ मद 2401 20 10, टैरिफ मद 2401 20 20, टैरिफ मद 2401 20 30, टैरिफ मद 2401 20 40, टैरिफ मद 2401 20 50, टैरिफ मद 2401 20 60 , टैरिफ मद 2401 20 70 , टैरिफ मद 2401 20 80 और टैरिफ मद 2401 20 90 के सामने स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 64 %" प्रविष्टि रखी जाएगी ;
( ii ) टैरिफ मद 24021010 और टैरिफ मद 2402 10 20 के सामने स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 12.5 % या 3755 रु. प्रति हजार, जो भी उच्चतर हो " प्रविष्टि रखी जाएगी ;
(iii) टैरिफ मद 2402 9010 के सामने स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 3755 रु. प्रति हजार" प्रविष्टि रखी जाएगी;
( iv) टैरिफ मद 2402 90 20 और टैरिफ मद 2402 90 90 के सामने स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 12.5 % या 3755 रु. प्रति हजार, जो भी उच्चतर हो " प्रविष्टि रखी जाएगी;
(v) टैरिफ मद 240319 29 के सामने स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 80 रुपए प्रति हजार" प्रविष्टि रखी जाएगी; ( vi ) टैरिफ मद 2403 9910, टैरिफ मद 2403 99 30 और टैरिफ मद 2403 99 90 के सामने स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 81 %" प्रविष्टि रखी जाएगी;
(ग) अध्याय 27 के अनुपूरक टिप्पण में,-
(i) खंड (ङ) में, " 1460 : 2000" अंकों के स्थान पर, " 1460 : 2005" अंक रखे जाएंगे ;
(i) खंड (च) में, " 1460 " अंकों के स्थान पर, " 15770 : 2008" अंक रखे जाएंगे ;
(घ) अध्याय 58 के शीर्ष 5801 में,-
(i ) उपशीर्ष 5801 37 में, स्तंभ (2) में की प्रविष्टि "- तान रोआं फैब्रिक, ' इपिंगल' (अकर्तित) " का लोप किया जाएगा;
(ii) टैरिफ मद 5801 37 11 और 5801 37 19 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
(1)
(3)
(4)
(2)
वर्ग मीटर
"5801 37 10
तान रोआं फैब्रिक, अकर्तित
12.5%";
(ङ) अध्याय 71 में, शीर्ष 7104 में, टैरिफ मद "7104 90 00" और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
(4)
(3)
(2)
(1)
"7104 90
अन्य :
12.5%
सी/के
7104 90 10
प्रयोगशाला में निर्मित या
प्रयोगशाला में विकसित या मानव निर्मित या कल्चरी या
संश्लिष्टहीरा
12.5%";
कि.ग्रा.
अन्य
7104 90 90
(च) अध्याय 85 में, शीर्ष 8525 में , टैरिफ मद 8525 50 50 और उससे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा।
भारत का राजपत्र असाधारण 170
[भाग 2-
आठवीं अनुसूची
[धारा 146( ii) देखिए ।
टैरिफ मद
माल का वर्णन
(1)
(2)
केंद्रीय उत्पाद शुल्क टैरिफ अधिनियम , 1985 की पहली अनुसूची में,-
(1) अध्याय 3 में,-
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
(i ) टिप्पण 1 के खंड (ग) "जिनमें उनके यकृत और मीनांडक भी हैं" शब्दों के स्थान पर, "जिनमें उनके यकृत, मीनांडक और मिल्ट भी हैं " शब्द रखे जाएंगे ;
(ii ) शीर्ष 0301 में, टैरिफ मद 0301 9300 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्ः-
कि.ग्रा. शून्य";
"0301 93 00 कार्प(साइप्रिनस कार्पियो , करासियस , सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलियस , हाइपोफथालमिशथियस सभी जातियां , सिरेहिनस सभी जातियां, माइलोफेरिंगोडोन पाइसियस , कैटला कैटला, आस्टियोचाइलस हैजेल्टी, लेपटो बारबर होवेनी, मेगा ब्रामा)
(iii ) शीर्ष 0302, टैरिफ मद 0302 11 00 से 0302 85 00 उपशीर्ष 0302 89, टैरिफ मद 0302 89 10 से 0302 90 00 तक और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
"0302
मछली, ताजा मछली या शीतित, जिसके अंतर्गत शीर्ष 0304 मछली के कतले और अन्य मछली मांस नहीं है
सालमोनिडे जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0302 91 से 0302 99 के खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं है :
0302 11 00
कि.ग्रा. शून्य
ट्राउट (सेलमो टूटा, आंकोरहाइनकस मिकिस , आंकोरहाइनकस क्लार्की, आंकोरहाइनकस एगुआबोनीटा, आंकोरहाइनकस गिलाई , आंकोरहाइनकस एपाची और आंकोरहाइनकस क्राइसोगास्टर)
0302 13 00
कि.ग्रा.
शून्य
प्रशांत सालमन (आंकोरहाइनकस नेरका, आंकोरहाइनकस गोरबस्चा, आंकोरहाइनकस केटा, आंकोरहाइनकस शुवेत्सका, आंकोरहाइनकस किसुच, आंकोरहाइनकस मासो और आंकोरहाइनकस रोडोरस)
0302 14 00
0302 19 00
कि.ग्रा.
शून्य कि.ग्रा.
अटलांटिक सालमन (सैलमो सालर) और दानुबे सालमन (हुको हुको) अन्य
शून्य
चपटी मछली ( पलूटोनेक्टिडाई, बोथिडाई, नोग्लोसिडाई , सिलिडाई , स्कोपथालमिडाई और सिथारिडाई) , जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0302 91 से उपशीर्ष 0301 99 के खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं :
0302 21 00
कि.ग्रा. शून्य
हैलिबट (रीनहार्डटिअस हिप्पोग्लोसाइडी, हिप्पोग्लोसस , हिप्पोग्लोसस स्टेनोलेपिस)
0302 22 00
प्लेसे ( प्लूरेकटेस प्लेटेस्सा) 0302 23 00
सोले ( सोले सभी जातियां)
0302 24 00
टरबोट्स (पेस्टा मैक्सिमा) 0302 29 00 अन्य
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा. शून्य
ट्यूना मछलियां (थ्युन्नस वंश की) , स्किपडैक या पट्टीदार तुंदवाली बोनिटो [यूथीनस (कातसूवोनस ) पेलामिस] , जिनके अंतर्गत उपशीर्ष 0302 91 से उपशीर्ष 0301 99 के खाद्य मछली नहीं है :
0302 31 00
कि.ग्रा.
शून्य
ऐस्बाकोर या लंबे पंख वाली ट्यूना मछलियां (थ्युन्नस एललुंगस)
0302 32 00
पीत पंख वाली ट्यूना मछलियां ( थ्युनस ऐस्बाकेयर)
0302 33 00
स्कपजक या पट्टीदार तुंदवाली बोनिटो
030234 00
बिगेइ ट्यूना (थ्युनस ओबेसस ) कि.ग्रा.
0302 35 00
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा. शून्य
अटलांटिक और प्रशांत ब्लूफिन टुनास (थुन्नुस थाईनस , थुन्नुस ओरियंटलिस )
0302 36 00
दक्षिणी ब्लूफिन ट्यूना (थ्युनस माकाई) कि.ग्रा. शून्य भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
टैरिफ मद
माल का वर्णन
(2) (1)
0302 39 00
अन्य
171
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
कि.ग्रा.
शून्य
हेरिंग्स (क्लूपिया हैरंगस, क्लूपिया पैल्लासी) , एंकोवीस (एंग्राउलिस सभी जातियां) , सारडीन ( सारडिना पिलचारडस, सर्डीनोप्स सभी जातियां) , सारडीनेल्ला (सारडीनेल्ला सभी जातियां) , ब्रिसलिंग या स्प्रेट (स्प्रेटस स्प्रेटस) , मेकेरल (स्कोंबर स्कोंब्रुस , स्कोंबर स्ट्रालसियस , स्कोंबर जपोनिकस ) , भारतीय मेकेरल (राष्ट्रल्लीजर सभी जातियां) , सुरमई मछली (स्कोंबरमोरस सभी जातियां) , जैक और अश्व मैकेरल ( ट्राचुरस सभी जातियां) , जैक, क्रीवेल्स ( केरानकस सभी जातियां) , कोबिया (रचिसिंट्रान केनाडम) , सिलवर पामफ्रेट्स (पेम्पस सभी जातियां) , पेसिफइक सावरी (कोलोलेबिस सायरा ) , स्कैड्स (डेकाप्टूस सभी जातियां) , कोपेलिन (मैलोटस विलोसस) , स्वोर्डफिश (जिफियास ग्लेडियस) , कावाकावा (यूथाइनस एफिनस) , बोनिटोस (सारडा सभी जातियां) , मार्लिन्स, सेलफिसिस , स्पियरफिस (इस्टियोफोरिडे) , जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0302 91 से उपशीर्ष 0302 99 के खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं :
0302 41 00
हेरिंग्स (क्लूपिया हैरंगस, क्लूपिया पैल्लासी) 0302 42 00
एंकोवीस (एंग्राउलिस सभी जातियां)
0302 43 00
कि.ग्रा. शून्य कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा. शून्य
सारडीन (सारडिना पिलचारडस, सर्डीनोप्स सभी जातियां) , सारडीनेल्ला (सारडीनेल्ला सभी जातियां) , ब्रिसलिंग या स्प्रेट (स्प्रेटस स्प्रेटस)
0302 44 00
कि.ग्रा.
शून्य
मेकेरल (स्कोंबर स्कोंब्रुस, स्कोंबर आस्ट्रालसियस , स्कोंबर जेपोनिकस)
0302 45 00
जैक और अश्व मैकेरल ( ट्राचुरस सभी जातियां) 0302 46 00
कोबिया (रचिसिंट्रान केनाडम) 0302 47 00
स्वोर्डफिश (जिफियास ग्लेडियस )
अन्य
0302 49 00
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा. शून्य कि.ग्रा.
शून्य
ब्रेगमासेरोटाइडिए, यूक्लिचथिडिए, गेडिडाय, मेक्रयूरिडिए, मेलानोनिडाय , मरल्यूसिडाए , मोरिडाय और मुरेनोलेपिडिडाए समूह की मछली , जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0302 91 से उपशीर्ष 0302 99 के खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं :
0302 51 00
कि.ग्रा.
शून्य
कोड (गैडस मॉरहुआ, गैडस ओगैक, गैडस मैक्रोसैफालस)
0302 52 00
हैड्डाक (मेलनोग्रामस ऐग्लेफाइनस )
0302 53 00
कोलफिश (पोलाचियसवाइरेंस)
0302 54 00
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा. शून्य
हेक (मलुसियस सभी जातियां, यूराफिसिस सभी जातियां)
0302 55 00
अलास्का पोलैक (थेरोग्रा कोलकोग्रामा)
0302 56 00
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा. शून्य
ब्लूव्हाटिंग्स (माइक्रोमेसिसटियस पोउटेसॉ, माइक्रोमेसिसटियस आस्ट्रेलिस )
0302 59 00
अन्य
कि.ग्रा.
शून्य
टिलापियस (ओरेक्रोमिस सभी जातियां ) , कैटफिश (पेंगासियस सभी जातियां, सिलुरुस सभी जातियां, क्लेरियस सभी जातियां, इक्टालुरुस सभी जातियां ) , कार्प (साइप्रिनस सभी जातियां , केरासियस सभी जातियां, सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस, हाइपोफाथाइमिस्थिस सभी जातियां , सिरहिनस सभी जातियां, मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस केटला केटला, लेबियो सभी जातियां, आस्टियो हेस्सलती , लेप्टो बारबस होवेनी मेगालोब्रामा सभी जातियां) , ईल्स (एंग्युला सभी जातियां) , नील पर्च (लेट्स निलोटिसस) और सरीसृप (चन्ना सभी जातियां) , जिसके 172
भारत का राजपत्र असाधारण
टैरिफ मद
माल का वर्णन
(1)
(2)
[भाग 2--
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
अंतर्गत उपशीर्ष 0302 91 से उपशीर्ष 0302 99 के खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं :
0302 71 00
टिलापियस (ओरेक्रोमिस सभी जातियां)
0302 72 00
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कैटफिश (पेंगासियस सभी जातियां , सिलुरुस सभी जातियां, क्लेरियस सभी जातियां , इक्टालुरुस सभी जातियां)
0302 73 00
कि.ग्रा.
शून्य
कार्प (साइप्रिनस कार्पियो , केरासियस सभी जातियां, सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस, हाइपोफाथाइमिस्थिस सभी जातियां, सिरहिनस सभी जातियां, मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस केटला केटला, लेबियो सभी जातियां, आस्टियो हेस्सलती, लेप्टो बारबस होवेनी मेगालोब्रामा सभी जातियां)
0302 74 00
ईल्स ( एंग्युला सभी जातियां)
0302 79 00
अन्य
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
अन्य मछली, जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0302 91 से उपशीर्ष 0302 99 के खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं :
0302 81 00
डॉगफिस सुरा और अन्य शार्क
0302 82 00
रेज और स्केट्स (रेजिडाय)
0302 83 00
टूथफिश (डिसोसटिकस सभी जातियां)
0302 84 00
समुद्री बास (डाइसैन्ट्रारकस सभी जातियां)
0302 85 00
सीब्रीम (स्पेरिडाय)
030289
अन्य:
0302 89 10
हिल्सा ( टेनुवालोसा इलिसा)
030289 20
दारा
0302 89 30
पोम्फ्रेट
0302 89 90
अन्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा. शून्य
यकृत , मीनांडक, मत्स्यशुक्र, पंखदार मछली, सिर, पूंछ, उदर और अन्य खाद्य मछली के मांस के टुकड़े :
030291
यकृत, मीनांडक और मत्स्यशुक्र
0302 91 10
यकृत, मीनांडक और मत्स्यशुक्र
030292
शार्क फिन्स
0302 92 10
शार्क फिन्स
0302 99
अन्य :
0302 99 10
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा.
शार्क फिन्स से भिन्न फिश फिन्स, सिर, पूंछ और उदर
0302 99 90
अन्य खाद्य मछली के मांस के टुकड़े
शून्य
कि.ग्रा.
शून्य" ;
(iv) शीर्ष 0303 , टैरिफ मद 0303 11 00 से 0303 6900, उपशीर्ष 0303 81 , टैरिफ मद 030381 10 से 0303 84 00 , उपशीर्ष 030389, टैरिफ मद 0303 89 10 से 0303 89 99, उपशीर्ष 030390 , टैरिफ मद 0303 90 10 से 0303 90 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"0303
मछली, हिमशीतित , जिसके अंतर्गत शीर्ष सं० 0304 के मछली कतले और अन्य मछली मांस नहीं है
साल्मेनिडे, जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0303 91 से उपशीर्ष 0303 99 खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं :
0303 11 00
कि.ग्रा.
शून्य
सोकोई सालमन (लाल सालमन) (आंकोरहाइनकस नेरका)
0303 12 00
कि.ग्रा. शून्य
अन्य प्रशांत सालमन (आंकोरहाइनकस गोरबुशा , आंकोरहाइनकस भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
माल का वर्णन टैरिफ मद
(1)
(2)
173
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
केटा, आंकोरहाइनकस शुवेत्सका, आंकोरहाइनकस किसुच, आंकोरहाइनकस मासो और आंकोरहाइनकस रोडोरस)
0303 13 00
कि.ग्रा.
शून्य
अटलांटिक सालमन (सैलमो सालर) और दानुवे सालमन (हुको हुको )
0303 14 00
कि.ग्रा.
शून्य
ट्राउट (सेलमो टूटा, आंकोरहाइनकस मिकिस, आंकोरहाइनकस क्लार्की, आंकोरहाइनकस एगुओबोनिटा, आंकोरहाइनकस गिलाई, आंकोरहाइनकस एपाची और आंकोरहाइनकस क्राइसेगास्टर)
0303 19 00
अन्य
कि.ग्रा.
शून्य
टिलापियस (ओरेक्रोमिस सभी जातियां) , कैटफिश (पेंगासियस सभी जातियां, सिलुरुस सभी जातियां, क्लेरियस सभी जातियां, इक्टालुरुस सभी जातियां) , कार्प ( साइप्रिनस कार्पियो , केरासियस केरासियस, सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस, हाइपोफाथाइमिस्थिस सभी जातियां, सिरहिनस सभी जातियां, मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस केटला केटला, लेबियो सभी जातियां, आस्टियो हेस्सलती , लेप्टो बारबस होवेनी मेगालोब्रामा सभी जातियां) , ईल्स (एंग्युला सभी जातियां) , नील पर्च ( लेट्स निलोटिकस ) , और सरीसृप (चन्ना सभी जातियां ) , जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0303 91 से उपशीर्ष 0303 99 खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं:
0303 23 00
टिलापियस (ओरेक्रोमिस सभी जातियां)
0303 24 00
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा. शून्य
कैटफिश (पेंगासियस सभी जातियां , सिलुरुस सभी जातियां , क्लेरियस
सभी जातियां, इक्टालुरुस सभी जातियां)
0303 25 00
कि.ग्रा. शून्य
कार्प (साइप्रिनस कार्पियो, केरासियस केरासियस , सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस, हाइपोफाथाइमिस्थिस सभी जातियां , सिरहिनस सभी जातियां, मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस केटला केटला, लेबियो सभी जातियां, आस्टियो हेस्सलती, लेप्टो बारबस होवेनी मेगालोब्रामा सभी जातियां) ,
0303 26 00
ईल्स ( एंग्युला सभी जातियां)
अन्य
0303 29 00
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा. शून्य
चपटी मछली ( प्लूरोनेटिडाई , बोथिडाई , साइनोग्लोसिडाई, सोलेडाई , स्कोपथेलमिडाई और सिथारिडाई) , जिनके अंतर्गत उपशीर्ष 0303 91 से उपशीर्ष 0303 99 खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैः
0303 31 00
कि.ग्रा. शून्य
हैलीबट (रीनहार्डटिअस हिप्पोग्लोसाईडीस , हिप्पोग्लोसस हिप्पोग्लोसस, हिप्पोग्लोसस स्टेनोलेपिस)
0303 32 00
प्लैसे (प्लूरोनेक्टेस प्लेटेसा)
0303 33 00
सोल (सोलिया सभी जातियां)
0303 34 00
टरबोट्स (सेटा मैक्सिमा)
अन्य
0303 39 00
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
ट्यूना मछलियां (थ्यूनस वंश की ) स्कपजैक या पट्टीदार तुदंवाली बोनिटो इश्यूथिनस (कातसूवूनस) पेलोमिसट, जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0303 91 से उपशीर्ष 030399 खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं :
0303 41 00
कि.ग्रा. शून्य
एल्बाकोर या लंबे पंख वाली ट्यूना मछलियां (थ्यूनस एलालुंगा)
0303 42 00
पीले पंख वाली ट्यूना मछलियां (थ्यूनस एल्बाकेबर)
0303 43 00
स्कपजैक या पट्टीदार तुदंवाली बोनिटो कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा. शून्य
174 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग 2-
टैरिफ मद माल का वर्णन इकाई शुल्क की दर
(1) (2) (3) (4)
0303 44 00 बिगेई ट्यूना (थुनस ओबेसस) कि.ग्रा. शून्य
0303 45 00 अटलांटिक और प्रशांत ब्लूफिन टुनास (थुन्नुस थाईनस, थुन्नुस ओरियंटल) कि.ग्रा. शून्य
0303 46 00 दक्षिणी ब्लूफिन ट्यूना (थुनस मकाई) कि.ग्रा.
शून्य
0303 49 00 अन्य कि.ग्रा. शून्य
हेरिंग्स ( क्लूपिया हैरंगस, क्लूपिया पैल्लासी) , एंकोवीस (एंग्राउलिस
सभी जातियां) , सारडीन ( सारडिना पिलचारडस, सर्डीनोप्स सभी जातियां) ,
सारडीनेल्ला (सारडीनेल्ला सभी जातियां ) , ब्रिसलिंग या स्प्रेट (स्प्रेटस
स्प्रेटस ) , मेकेरल (स्कोंबर स्कोंब्रुस , स्कोंबर स्ट्रालसियस , स्कोंबर जेपोनिकस) ,
भारतीय मैकेरल्स (रेस्टरेलिगर सभी जातियां) , सीर फिशेज (स्कोम्बेरोमस
सभी जातियां) , जैक और अश्व मैकेरल (ट्राचुरस सभी जातियां) , जैक
क्रेवैसीस (कैरनेकरत की सभी जातियां ) , कोबिया (रेचिसिंट्रान केनाडम) ,
सिल्वर पम्फ्रेटस (पैम्पस की सभी जातियां) , पैसोफिक शय्योरी
(कोलोसेबिटेरयिरा) , स्क्रैडस (डीकैपसेस की जातियां) , कैपेलिन ( मलोटस
वैलीयस) , और स्वोर्डफिश ( जिफियास ग्लेडियस) , कावाकावा (एयूथेनस
अप्रैनिज) , जिसके उपशीर्ष 0303 91 से उपशीर्ष 0303 99 खाद्य
मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं:
0303 51 00 हेरिंग्स (क्लूपिया हैरंगस, क्लूपिया पैल्लासी) कि.ग्रा. शून्य
0303 53 00 सारडीन (सारडिना पिलचारडस , सर्डीनोप्स सभी जातियां) , सारडीनेल्ला कि.ग्रा. शून्य
(सारडीनेल्ला सभी जातियां) , ब्रिसलिंग या स्प्रेट (स्प्रेटस स्प्रेटस)
0303 54 00 मैकेरल (स्कोंबर स्कोंब्रुस , स्कोंबर स्ट्रालसियस, स्कोंबर जपोनिकस ) कि.ग्रा. शून्य
0303 55 00 जैक और अश्व मैकेरल (ट्राचुरस सभी जातियां) कि.ग्रा. शून्य
0303 56 00 कोबिया (रचिसिंट्रान केनाडम) कि.ग्रा. शून्य
0303 57 00 स्वोर्डफिश (जिफियास ग्लेडियस) कि.ग्रा. शून्य
0303 59 00 अन्य कि.ग्रा. शून्य
ब्रेगमासेरोटाइडिए, इयूक्लिचथिडिए, गेडिडाय , मेक्रयूरिडिए, मेलानोनिडाय ,
मरल्यूसिडाए , मोरिडाय और मुरेनोलेपिडिडाए समूह की मछली , जिसके
अंतर्गत उपशीर्ष 0303 91 से उपशीर्ष 0303 99 खाद्य मछली के मांस
के टुकड़े नहीं हैं :
0303 63 00 कोड (गैडस मॉरथुआ, गैडस ओगैक, गैडस मैक्रोसैफालस) कि.ग्रा. शून्य
0303 64 00 हैड्डाक (मेलनोग्रामस ऐग्लेफाइनस) कि.ग्रा. शून्य
0303 65 00 कोलफिश (पोलाचियस वाइरेंस) कि.ग्रा. शून्य
0303 66 00 हेक (मलुसियस सभी जातियां, यूराफिसिस सभी जातियां) कि.ग्रा. शून्य
0303 67 00 अलास्का पोलैक (थेरोग्रा कोलकोग्रामा) कि.ग्रा. शून्य
0303 68 00 ब्लूव्हाटिंग्स (माइक्रोमेसिसटियस पोउटेसॉ, माइक्रोमेसिसटियस आस्ट्रेलिस) कि.ग्रा. शून्य
0303 69 00 अन्य कि.ग्रा. शून्य
अन्य मछली, जिसके अंतर्गत उपशीर्ष 0303 91 से उपशीर्ष
0303 99 की खाद्य मछली के मांस के टुकड़े नहीं हैं :
0303 81 डॉगफिश और अन्य शार्क :
0303 81 10 डॉगफिश कि.ग्रा. शून्य
0303 81 90 अन्यशार्क कि.ग्रा. शून्य
0303 82 00 रेज और स्केट्स (रेजिडाय) कि.ग्रा. शून्य
0303 83 00 टूथफिश (डिसोसटिकस सभी जातियां ) कि.ग्रा. शून्य
0303 84 00 समुद्री बास (डाइसैन्ट्रारकस सभी जातियां) कि.ग्रा. शून्य
भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1 क]
टैरिफ मद
माल का वर्णन
(1)
(2)
अन्य:
0303 89
0303 89 10
हिल्सा
0303 89 20 दारा
0303 89 30
रिब्बन फिश
0303 89 40
सुरमई
0303 89 50
पोम्फ्रेट (सफेद या सिल्वर या काली)
0303 89 60
घोल
0303 89 70
सूत्रपख
0303 89 80
क्रोकर, ग्रुपर, प्लाउंडर
0303 89 90
अन्य
175
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा. शून्य
यकृत, मीनांडक, मिल्ट, फिश फिन्स, सिर, पूंछ, उदर और अन्य खाद्य मछली के मांस के टुकड़े
0303 91
यकृत, मीनांडक और मिल्ट
0303 91 10
मछली का अंडा और अंडे की जर्दी
अन्य
0303 91 90
0303 92
शार्क फिन्स
0303 92 10 शार्क फिन्स
0303 99
अन्य
0303 99 10
मछली के पंख , शार्क पंख , सिर, पूंछ और उदर से भिन्न
0303 99 90
अन्य खाद्य मछली के मांस के टुकड़े
(v) शीर्ष 0304 में,-
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा.
शून्य";
(क) शीर्ष 0304 के सामने आने वाले स्तंभ (2) में की प्रविष्टि के स्थान पर
निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"
ताजे, द्रुतशीतित या हिमशीतित टिलापियस (ओरेक्रोमिस सभी जातियां) , कैटफिश (पेंगासियस सभी जातियां , सिलुरुस सभी जातियां, क्लेरियस सभी जातियां, इक्टालुरुस सभी जातियां) , कार्प ( साइप्रिनस सभी जातियां, केरासियस सभी जातियां , सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस , हाइपोफाथाइमिस्थिस सभी जातियां , सिरहिनस सभी जातियां, मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस कैटला कैटला, लेबिओ, आस्टियोचाइलस हैजेल्टी, लेपटोबारबस होवेनी, मेगालोब्रामा सभी जातियां ) , ईल्स ( एंग्युला सभी जातियां) , नील पर्च (लेट्स निलोटिसस ) और सरीसृप ( चन्ना सभी जातियां) : ";
(ख) टैरिफ मद 0304 46 00 से 0304 99 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा
जाएगा, अर्थात् :-
0304 46 00
टूथफिश (डिसोसटिकस सभी जातियां)
डॉगफिश और अन्य शार्क 0304 47 00
0304 48 00
रेज और स्केट्स (रेजिडाय)
अन्य:
0304 49
0304 49 10
हिल्सा (टेनुवालोसा इलिशा)
0304 49 30
सुरमई
0304 49 40
ट्यूना
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा. शून्य
176 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग 2-
टैरिफ मद माल का वर्णन इकाई शुल्क की दर
(1) (2) (3) (4)
0304 49 90 अन्य कि.ग्रा. शून्य
अन्य, ताजा या द्रुतशीतित :
0304 51 00 टिलापियस (ओरेक्रोमिस सभी जातियां) , कैटफिश (पेंगासियस सभी कि.ग्रा. शून्य
जातियां, सिलुरुस सभी जातियां, क्लेरियस सभी जातियां, इक्टालुरुस
सभी जातियां) , कार्प ( साइप्रिनस सभी जातियां , केरासियस सभी जातियां ,
सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस, हाइपोफाथाइमिस्थिस सभी जातियां, सिरहिनस
सभी जातियां, मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस कैटला कैटला, लेबियो सभी
जातियां , ओस्टियोचाइलस हैसल्टी, लेप्टोबार्बस होईवेनी, मेगालोब्रामा
सभी जातियां) , ईल्स (एंग्युला सभी जातियां) , नील पर्च (लेट्स निलोटिसस)
और सरीसृप (चन्ना सभी जातियां)
0304 52 00 साल्मोनिडाई कि.ग्रा.
शून्य
0304 53 00 ब्रेगमासेरोटाइडिए , इयूक्लिचथिडिए , गेडिडिए, मेक्रयूरिडिए , मेलानोनिडिए, कि.ग्रा.
शून्य
मरल्यूसिडिए , मोरिडिए और मुरेनोलेपिडिडाए समूह की मछली
0304 54 00 स्वोर्डफिश (जिफियास ग्लेडियस) कि.ग्रा. शून्य
0304 55 00 टूथफिश (डिसोसटिकस सभी जातियां) कि.ग्रा. शून्य
0304 56 00 डागफिश और अन्य शार्क कि.ग्रा. शून्य
0304 57 00 रेज और स्केट्स (रेजिडाय ) कि.ग्रा. शून्य
0304 59 अन्य:
0304 59 10 हिल्सा (टेनुवालोसा इलिशा) कि.ग्रा. शून्य
0304 59 30 सुरमई कि.ग्रा. शून्य
0304 59 40 ट्यूना कि.ग्रा. शून्य
0304 59 90 अन्य कि.ग्रा. शून्य
टिलापियस की हिमशीतित कतले (ओरेक्रोमिस सभी जातियां) , कैटफिश
(पेंगासियस सभी जातियां, सिलुरुस सभी जातियां, क्लेरियस सभी
जातियां, इक्टालुरुस सभी जातियां) , कार्प (साइप्रिनस सभी जातियां,
केरासियस सभी जातियां , सटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस, हाइपोफाथाइमिस्थिस
सभी जातियां, सिरहिनस सभी जातियां, मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस,
कैटला कैटला, लेबियो सभी जातियां, ओस्टियोचाइलस हैसल्टी, लेप्टोबार्बस
होईवेनी, मेगालोब्रामा सभी जातियां) , ईल्स (एंग्युला सभी जातियां) ,
नील पर्व (लेट्स निलोटिसस) और सरीसृप (चन्ना सभी जातियां):
0304 61 00 टिलापियस (ओरेक्रोमिस सभी जातियां) कि.ग्रा. शून्य
0304 62 00 कैटफिश (पेंगासियस सभी जातियां, सिलुरुस सभी जातियां, क्लेरियस
सभी जातियां, इक्टालुरुस सभी जातियां) कि.ग्रा. शून्य
0304 63 00 नील पर्च (लेट्स निलोटिसस) कि.ग्रा. शून्य
0304 69 00 अन्य कि.ग्रा. शून्य
ब्रेगमासेरोटाइडिए, इयूक्लिचथिडिए , गेडिडाय , मेक्रयूरिडिए , मेलानोनिडाई ,
मरल्यूसिडाई , मोरिडाई और मुरेनोलेपिडिडाई समूह की हिमशीतित मछली
के कतले:
0304 71 00 कोड (गैडस मॉरथुआ, गैडस ओगैक, गैडस मैक्रोसैफालस) कि.ग्रा. शून्य
0304 72 00 हैड्डाक (मेलनोग्रामस ऐग्लेफाइनस ) कि.ग्रा. शून्य
0304 73 00 कोलफिश (पोलाचियस वाइरेंस) कि.ग्रा. शून्य
0304 74 00 हेक (मलुसियस सभी जातियां , यूराफिसिस सभी जातियां) कि.ग्रा. शून्य
भारत का. राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1 क]
टैरिफ मद माल का वर्णन
(1) (2)
0304 75 00 अलास्का पोलैक (थेरोग्रा कोलकोग्रामा)
0304 79 00 अन्य
अन्य मछली के हिमशीतितः कतले :
0304 81 00
177
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा. शून्य
प्रशांत सालमन (आंकोरहाइनकस नेरका, आंकोरहाइनकस गोरबस्चा, कि.ग्रा. शून्य
आंकोरहाइनकस केटा, आंकोरहाइनकस शुवेत्सका, आंकोरहाइनकस
किसुच , आंकोरहाइनकस मासो और आंकोरहाइनकस रोडोरस) , अटलांटिक
सालमन (सैलमो सालर) और दानुबे सालमन (हुको हुको)
0304 82 00 ट्राउट (सेलमो टूटा, आंकोरहाइनकस मिकिस , आंकोरहाइनकस क्लार्की, कि.ग्रा. शून्य
आंकोरहाइनकस एगुओबोनिटा, आंकोरहाइनकस गिलाई, आंकोरहाइनकस
एपाची और आंकोरहाइनकस क्राइसेगास्टर)
0304 83 00 चपटी मछली (पलूट्रोनेक्टिडाई, बोथिडाई, नोग्लोसिडाई , सोलिडाई , कि.ग्रा. शून्य
स्कोपथालमिडाई और सिथारिडाई)
0304 84 00 स्वोर्डफिश (जिफियास ग्लेडियस) कि.ग्रा. शून्य
0304 85 00 टूथफिश (डिसोसटिकस सभी जातियां) कि.ग्रा. शून्य
0304 86 00 हेरिंग्स (क्लूपिया हैरंगस , क्लूपिया पैल्लासी) कि.ग्रा. शून्य
0304 87 00 ट्यूना मछलियां (थ्युन्नस वंश की) , स्किपजैक या पट्टीदार तुंदवाली कि.ग्रा. शून्य
बोनिटो ( यूथीनस, कातसूवोनस पेलामिस)
0304 88 डागफिश , अन्य शार्क रेज और स्केट्स (रेजिडाय)
0304 88 10 डागफिश कि.ग्रा. शून्य
0304 88 20 अन्य शार्क कि.ग्रा. शून्य
0304 88 30 रेज और स्केट्स (रेजिडाय ) कि.ग्रा. शून्य
0304 89 अन्य :
0304 89 10 हिल्सा (टेनुवालोसा इलिशा) कि.ग्रा. शून्य
0304 89 30 सुरमई कि.ग्रा. शून्य
0304 89 40 टूना कि.ग्रा. शून्य
0304 89 90 अन्य कि.ग्रा. शून्य
अन्य, हिमशीतित :
0304 91 00 स्वोर्डफिस (जिफियास ग्लैडियस ) कि.ग्रा. शून्य
0304 92 00 टूथफिस (डिसोसटिकस सभी जातियां) कि.ग्रा शून्य
0304 93 00 टिलापियस (ओरेक्रोमिस सभी जातियां) , कैटफिश (पेंगासियस सभी कि.ग्रा शून्य
जातियां, सिलुरुस सभी जातियां , क्लेरियस सभी जातियां, इक्टालुरुस
सभी जातियां) , कार्प ( साइप्रिनस सभी जातियां, केरासियस सभी जातियां,
सटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस, हाइपोफाथाइमिस्थिस सभी जातियां, सिरहिनस
सभी जातियां, मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस, कैटला कैटला, लेबियो सभी
जातियां, ओस्टियोचाइलस हैसल्टी, लेप्टोबार्बस होईवेनी, मेगालोब्रामा
सभी जातियां) , ईल्स (एंग्युला सभी जातियां) , नील पर्च (लेट्स निलोटिसस)
और सरीसृप (चन्ना सभी जातियां) :
0304 94 00 अलास्का पोलैक (थेरोग्रा कोलकोग्रामा) कि.ग्रा. शून्य
0304 95 00 ब्रेगमासेरोटाइडिए , इयूक्लिचथिडिए, गेडिडाय , मेक्रयूरिडिए, मेलानोनिडाय , कि.ग्रा. शून्य
मरल्यूसिडाए , मोरिडाय और मुरेनोलेपिडिडाए समूह की मछली, अलास्का
पोलैक (थेरोग्रा कोलकोग्रामा)
0304 96 00 डागफिश और अन्य शार्क कि.ग्रा. शून्य
0304 97 00 रेज और स्केट्स (रेजीडाई) कि.ग्रा. शून्य
178
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
टैरिफ मद
माल का वर्णन
इकाई शुल्क की दर
(2)
(1)
(3) (4) 0304 99 00
अन्यः
कि.ग्रा. शून्य";
(vi) शीर्ष 0305 में,-
"0305 20 00
(क) टैरिफ मद 0305 20 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात् :- मछली का यकृत और मीनांडक, शुष्कित, धूमित, लवणित या लवण कि.ग्रा. शून्य" ; जल में रखी
अर्थात्:-
(ख) टैरिफ मद 0305 31 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा,
"0305 31 00
कि.ग्रा. शून्य";
टिलापियस (ओरेक्रोमिस सभी जातियां) , कैटफिश (पेंगासियस सभी जातियां, सिलुरुस सभी जातियां , क्लेरियस सभी जातियां , इक्टालुरुस सभी जातियां) , कार्प ( साइप्रिनस कार्पियो, केरासियस केरासियस, सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस, हाइपोफाथाइमिस्थिस सभी जातियां , सिरहिनस सभी जातियां , मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस कैटला कैटला, लेबियो सभी जातियां, ओस्टियोचाइलस हैसल्टी, लेप्टोबार्बस होईवेनी, मेगालोब्रामा सभी जातियां) , ईल्स (एंग्युला सभी जातियां) , नील पर्व (लेट्स निलोटिसस) और सरीसृप (चन्ना सभी जातियां):
"0305 44 00
कि.ग्रा. शून्य";
(ग) टैरिफ मद 0305 44 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:- टिलापियस (ओरेक्रोमिस सभी जातियां) , कैटफिश (पेंगासियस सभी जातियां, सिलुरुस सभी जातियां, क्लेरियस सभी जातियां, इक्टालुरुस सभी जातियां) , कार्प (साइप्रिनस कार्पियो , केरासियस केरासियस , सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस , हाइपोफाथाइमिस्थिस सभी जातियां , सिरहिनस सभी जातियां, मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस ) , कैटला कैटला , लेबियो सभी जातियां, ओस्टियोचाइलस हैसल्टी, लेप्टोबार्बस होईवेनी, मेगालोब्रामा सभी जातियां) , ईल्स (एंग्युला सभी जातियां) , नील पर्च (लेट्स निलोटिसस) और सरीसृप (चन्ना सभी जातियां):
(घ) टैरिफ मद 0305 51 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
" 0305 52 00
कि.ग्रा. शून्य टिलापियस (ओरेक्रोमिस सभी जातियां) , कैटफिश (पेंगासियस सभी जातियां, सिलुरुस सभी जातियां, क्लेरियस सभी जातियां, इक्टालुरुस सभी जातियां) , कार्प ( साइप्रिनस कार्पियो, केरासियस केरासियस , सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस, हाइपोफाथाइमिस्थिस सभी जातियां , सिरहिनस सभी जातियां, मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस ) , कैटला कैटला, लेबियो सभी जातियां, ओस्टियोचाइलस हैसल्टी, लेप्टोबार्बस होईवेनी, मेगालोब्रामा सभी जातियां) , ईल्स (एंग्युला सभी जातियां) , नील पर्व (लेट्स निलोटिसस) और सरीसृप (चन्ना सभी जातियां):
कि.ग्रा.
0305 53 00
शून्य कौड (गैडस मौरहुआ, गौडस औगा, गैडस मैक्रोसेफालस) से भिन्न ब्रेगमासेरोटाइडिए , इयूक्लिचथिडिए , गेडिडाय , मेक्रयूरिडिए, मेलानोनिडाय, मरल्यूसिडाए , मोरिडाय और मुरेनोलेपिडिडाए समूह की मछली
कि.ग्रा.
0305 54 00
शून्य" ;
हेरिंग्स (क्लूपिया हैरंगस , क्लूपिया पैल्लासी) एंकोवीस (एंग्राउसिल सभी जातियां) , सारडीन (सारडिना पिलचारडस , सर्डीनोप्स सभी जातियां) , सारडीनेल्ला (सारडीनेल्ला सभी जातियां ) , ब्रिसलिंग या स्प्रेट (स्प्रेटस स्प्रेटस) मैकेरल (स्कोंबर स्कोंब्रुस, स्कोंबर स्ट्रालसियस, स्कोंबर जपोनिकस) , भारतीय मेकेरल ( राष्ट्रल्लीजर सभी जातियां ) , सुरमई मछली (स्कोंबरमोरस सभी जातियां) , जैक और अश्व मैकेरल (ट्राचुरस सभी जातियां) , जैक, क्रीवेल्स ( केरानकस सभी जातियां ) , कोबिया (रेचिसिंट्रान केनाडम ) सिलवर पामफ्रेट्स (पेम्पस सभी जातियां) , भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
टैरिफ मद
माल का वर्णन
(1)
(2)
179
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
पेसिफइक सावरी (कोलोलेबिस सायरा ) , स्कैड्स (डेकाप्ट्स सभी जातियां ) , कोपेलिन (मैलोटस विलोसस ) स्वोर्डफिश (जिफियास ग्लेडियस ) , कावाकावा (यूथाइनस एफिनस) बोनिटोस ( सारडा सभी जातियां) , मार्लिन्स, सेलफिसिस, स्पियरफिस (इस्टियोफोरिडे):
(ङ) टैरिफ मद 0305 64 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात् :-
" 0305 64 00
कि.ग्रा.
शून्य";
टिलापियस ( ओरेक्रोमिस सभी जातियां ) , कैटफिश (पेंगासियस सभी जातियां, सिलुरुस सभी जातियां , क्लेरियस सभी जातियां, इक्टालुरुस सभी जातियां) , कार्प ( साइप्रिनस कार्पियो, केरासियस केरासियस, सिटेनोफेरिंगोडोन इडेलुस, हाइपोफाथाइमिस्थिस सभी जातियां, सिरहिनस सभी जातियां, मिलोफेरिंगोडोन पाइसियस कैटला कैटला, लेबियो सभी जातियां, ओस्टियोचाइलस हैसल्टी, लेप्टोबार्बस होईवेनी, मेगालोब्रामा सभी जातियां) , ईल्स ( एंग्युला सभी जातियां) नील पर्च (लेट्स निलोटिसस) और सरीसृप ( चन्ना सभी जातियां):
(vii) शीर्ष 0306 में, टैरिफ मद 0306 19 00 से 0306 29 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित
रखा जाएगा , अर्थात्:-
"0306 19 00
कि.ग्रा.
शून्य
अन्य, जिनके अंतर्गत क्रस्टेशिया का आटा, अवचूर्ण और गुटिका है, जो मानव उपयोग के लिए उपयुक्त है
जीवित, ताजी या द्रुतशीतित
0306 31 00
कि.ग्रा.
शून्य
शैल महाचिंगट और अन्य समुद्री प्रचिंगट ( पानुलिरस सभी जातियां, जेसस सभी जातियां)
0306 32 00
महाचिंगट (होमारुस सभी जातियां)
कर्कट
0306 33 00
0306 34 00
नार्वे महाचिंगट (नेफ्रोस नार्वेजिकस)
0306 35 00
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा. शून्य
शीत जल झींगी और झींगा (पांडालुस सभी जातियां , क्रॅगोन क्रॅगोन)
0306 36 00
अन्य झींगी और झींगा
0306 39 00
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा. शून्य
अन्य, जिनके अंतर्गत क्रस्टेशिया का आटा, अवचूर्ण और गुटिका है, जो मानव उपयोग के लिए उपयुक्त है
अन्य:
0306 91 00
कि.ग्रा.
शून्य
शैल महाचिंगट और अन्य समुद्री प्रचिंगट (पानुलिरस सभी जातियां , जेसस सभी जातियां)
0306 92 00
महाचिंगट (होमारुस सभी जातियां)
कर्कट
0306 93 00
0306 94 00
नार्वे, महाचिंगट (नेफ्रोस नार्वेजिकस)
0306 95 00
अन्य, झींगी और झींगा
0306 99 00
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा. शून्य
कि.ग्रा. शून्य" ;
अन्य, जिनके अंतर्गत क्रस्टेशिया का आटा , अवचूर्ण और गुटिका है, जो मानव उपयोग के लिए उपयुक्त है
(viii) शीर्ष 0307 में,-
(क) टैरिफ मद 0307 11 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
" 0307 12 00
हिमशीतित
कि.ग्रा. शून्य";
(ख) टैरिफ मद 0307 21 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा ,
अर्थात्:-
हिमशीतित
"0307 22 00
कि.ग्रा. शून्य" ;
180 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग 2-
टैरिफ मद माल का वर्णन इकाई शुल्क की दर
(1) (2) (3) (4)
(ग) टैरिफ मद 0307 3100 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
"0307 32 00 हिमशीतित कि.ग्रा. शून्य";
(घ) टैरिफ मद 030739 90 से 0307 49 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा,
अर्थात्: -
0307 39 90 अन्य कि.ग्रा. शून्य
सुफेनक और स्कवीड :
0307 42 जीवित, ताजी या द्रुतशीतित
0307 42 10 सुफेनक कि.ग्रा. शून्य
0307 42 20 स्कवीड कि.ग्रा. शून्य
0307 43 हिमशीतित
0307 43 10 सुफेनक कि.ग्रा. शून्य
0307 43 20 समस्त स्कवीड कि.ग्रा. शून्य
0307 43 30 स्क्वीड ट्यूबें कि.ग्रा. शून्य
0307 49 अन्य
0307 49 10 सुफेनक कि.ग्रा. शून्य
0307 49 20 समस्त स्कवीड कि.ग्रा. शून्य
0307 49 30 स्क्वीड ट्यूबें कि.ग्रा. शून्य
0307 49 40 शुष्कितस्क्वीड कि.ग्रा. शून्य
0307 49 90 अन्य कि.ग्रा. शून्य" ;
(ङ) टैरिफ मद 0307 51 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
"0307 52 00 हिमशीतित कि.ग्रा. शून्य" ;
(च) टैरिफ मद 0307 71 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
"0307 72 00 हिमशीतित कि.ग्रा. शून्य" ;
(छ) टैरिफ मद 0307 79 00 से 0307 89 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा,
अर्थात्:-
"0307 79 00 अन्य कि.ग्रा. शून्य
ऐबेलोन (हेलियोटिस सभी जातियां ) और स्ट्रामबाइड सीपियां ( स्ट्रामबस
सभी जातियां) :
0307 81 00 जीवित, ताजा या द्रुतशीतित ऐबेलोन (हेलियोटिस सभी जातियां) कि.ग्रा. शून्य
0307 82 00 जीवित, ताजा या द्रुतशीतित स्ट्रामबाइड सीपियां (स्ट्रामबस सभी जातियां) कि.ग्रा. शून्य
0307 83 00 हिमशीतित एबेलोन (हेलियोटिस सभी जातियां) कि.ग्रा. शून्य
0307 84 00 हिमशीतित स्ट्रामबाइड सीपियां (स्ट्रामबस सभी जातियां) कि.ग्रा. शून्य
0307 87 00 अन्य ऐबेलोन (हेलियोटिस सभी जातियां) कि.ग्रा. शून्य
0307 88 00 अन्य स्ट्रामबाइड सीपियां (स्ट्रामबस सभी जातियां) कि.ग्रा. शून्य";
(ज) टैरिफ मद 0307 91 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
"0307 92 00 हिमशीतित कि.ग्रा. शून्य" ;
(ix) शीर्ष 0308 में,-
(क) शीर्ष 0308 के सामने की प्रविष्टि के पश्चात्, स्तंभ (2) में की प्रविष्टि के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
सी कुकुम्बर (स्टीचोपस जेपोनिकस , होलोथूरियाडाई): " भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
टैरिफ मद
माल का वर्णन
(1)
(2)
181
शुल्क की दर इकाई
(3) (4)
(ख) टैरिफ मद 0308 1100 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"0308 12 00
हिमशीतित
कि.ग्रा.
शून्य";
(ग) टैरिफ मद 0308 19 00 से 0308 21 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"0308 19 00
अन्य
कि.ग्रा. शून्य
समुद्री जलशाही (स्ट्रांगिलोसेंट्रोटस सभी जातियां, पैरासेंट्रोटस लिविडस , लोक्सीचिनस एल्बस , इचिचिनस एस्कुलेंटस) 0308 21 00
जीवित , ताजा या द्रुतशीतित 0308 22 00
हिमशीतित
(2) अध्याय 4 के टिप्पण 4 में,-
(अ) खंड (क) में, "या" शब्द का लोप किया जाएगा;
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा. शून्य" ;
(आ) खंड (क) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
" (ख) ऐसे उत्पाद जिन्हें उसके एक या अधिक प्राकृतिक घटकों (मक्खनवसा) को प्रतिस्थापित करके किसी अन्य पदार्थ के साथ ( उदाहरणार्थ तैलवसा) (शीर्ष 19001 या 2106 ) के साथ मिलाकर दूध से अभिप्राप्त किए जाते हैं; या" ;
(इ) विद्यमान खंड (ख ) को खंड ( ग) के रूप में पुनर्भक्षरांकित किया जाएगा ;
(3 ) अध्याय 5 में, टिप्पण 4 के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
"4. अनुसूची में सर्वत्र "अश्वरोम" पद से आश्व या गोकुलीय प्राणियों के अयालों या पूंछों के बाल अभिप्रेत हैं । अन्य बातों के साथ- साथ, शीर्ष 0511 के अंतर्गत अश्वरोम और अश्वरोम अपशिष्ट भी हैं, चाहे वे सहायक सामग्री सहित या रहित पद के रूप में लगाए जाते हैं या नहीं । " ;
(4) अध्याय 8 के शीर्ष 0805, टैरिफ मद 0808 2000 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्ः-
मैन्डारिन (जिसके अंतर्गत टैन्जेरिन और सटसुमस है) ; क्लमेन्टाइन,
विलकिंग और अन्य वैसे ही निम्बुकुल संकर :
0805 21 00
मैन्डारिन (जिसके अंतर्गत टैन्जेरिन और सटसुमस है) 0805 22 00
क्लमेन्टाइन
अन्य
0805 29 00
(5) अध्याय 12 में,-
कि.ग्रा.
शून्य
कि.ग्रा.
शून्य कि.ग्रा.
शून्य";
(i ) शीर्ष 1211 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:--
"1211
इस प्रकार के पौधे और पौधों के भाग ( जिसके अंतर्गत बीज और
फल है) जिनका उपयोग प्रथमतः सुगंध सामग्री में या फार्मेसी में या कीटनाशी , फफूंदी नाशी या वैसे ही प्रयोजनों के लिए किया जाता है, ताजे, द्रुतशीतित , हिमशीतित या शुष्कित, चाहे कर्तित , दलित या चूर्णित हैं या नहीं;
(ii ) शीर्ष 1211 40 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"1211 50 00
एफेड्रा
कि.ग्रा. शून्य.";
(6) अध्याय 13 के शीर्ष 1302 में, टैरिफ मद 1302 13 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित
किया जाएगा, अर्थात्:-
"1302 14 00
एफेड्रा के
(7) अध्याय 16 में,-
कि.ग्रा. 12.5%";
(i) उपशीर्ष टिप्पण 1 के दूसरे वाक्य में " शिशु आहार " शब्दों के स्थान पर, "शिशु या तरुण बालकों के लिए उपयुक्त आहार" शब्द रखे जाएंगे;
(ii ) शीर्ष 1604 में टैरिफ मद 1604 1700 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
182
भारत का राजपत्र असाधारण
टैरिफ मद
[भाग 2-
माल का वर्णन
(1)
(2)
"1604 18 00
शार्क फिन्स
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
कि.ग्रा. 6%";
(8) अध्याय 19 में , उपशीर्ष 1901 10 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः- "1901 10 शिशुओं या तरुण बालकों के लिए उपयुक्त निर्मितियां जो फुटकर
विक्रय के लिए रखी गई हैं" ;
(9) अध्याय 20 में,-
( i ) उपशीर्ष टिप्पण 1 के दूसरे वाक्य में "शिशु आहार" शब्दों के स्थान पर, "शिशु या तरुण बालकों के लिए उपयुक्त आहार" शब्द रखे जाएंगे ;
( ii ) उपशीर्ष टिप्पण 2 के दूसरे वाक्य में " शिशु आहार" शब्दों के स्थान पर, "शिशु या तरुण बालकों के लिए उपयुक्त आहार" शब्द रखे जाएंगे;
(10) अध्याय 21 में, उपशीर्ष टिप्पण 3 के दूसरे वाक्य में " शिशु आहार" शब्दों के स्थान पर, " शिशु या तरुण बालकों के लिए उपयुक्त आहार" शब्द रखे जाएंगे ;
(11) अध्याय 22 में,-
(i ) उपशीर्ष 2202 90 में, टैरिफ मद 2202 90 10 से 2202 90 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
अन्य:
2202 91 00 गैर-अल्कोहाली बीयर
220299 अन्य :
220299 10
सोया दुग्ध पेय , चाहे मधुरित या सुरुचिकारक हैं या नहीं 2202 99 20 फल गूदा या फल रस आधारित पेय 2202 99 30 दूध से युक्त सुपेय
2202 99 90 अन्य
18%
लि० 18% लि
6%
लि०
12.5% लि
12.5%";
( ii ) टैरिफ मद 2204 21 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"2204 22
2204 22 10
2204 22 20
2204 22 90
-";
(iii ) टैरिफ मद 2206 00 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"2206 00 00
(12) अध्याय 27 में,-
-".
(i ) उपशीर्ष टिप्पण 4 के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"4. उपशीर्ष 2710 12 के प्रयोजनों के लिए, " हल्के तेल और निर्मितियां " वे हैं जिनका आयतन के अनुसार आई एस ओ 3405 प्रणाली (एएसटीएम डी 86 प्रणाली के समतुल्य) के अनुसार 210 डिग्री सेंटीग्रेड पर आसवन 90 % या उससे अधिक (जिसके अंतर्गत हानियां है) होता है। ";
(ii ) टैरिफ मद 2707 50 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
कि.ग्रा. 14% " ;
"2707 50 00 अन्य ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन मिश्रण जिनकी 65 प्रतिशत या अधिक मात्रा का आसवन (जिसके अंतर्गत हानि भी है) (ए एस टी एम डी 86 पद्धति के समतुल्य) आई एस ओ 3405 पद्धति द्वारा 250 सेंटीग्रेड पर होता है।";
(13) अध्याय 28 में,-
(i ) टिप्पण 7 के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"7. शीर्ष 2853 के अंतर्गत ताम्र फास्फाइड (फास्फर ताम्र) जिसमें भार के आधार पर फास्फोरस 15% से अधिक है ।" ;
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
टैरिफ मद माल का वर्णन (1) (2)
183
184 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग 2
टैरिफ मद माल का वर्णन इकाई शुल्क की दर
इकाई शुल्क की दर
(1) (2) (3) (4)
(3) (4)
2903 94 00 हेक्साब्रोमो बाईफिनाइल कि.ग्रा. 12.5%";
( ii ) टैरिफ मद 2811 11 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
(iii) शीर्ष 2904 में, -
अर्थात्:-
" 2811 12 00 (क) टैरिफ मद 2904 92 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, हाइड्रोजन साइनाइड (हाइड्रोसाइनिक अम्ल) कि.ग्रा. 12.5% ";
अर्थात्:-
(iii ) टैरिफ मद 2811 11 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा ; "
( iv) उपशीर्ष 2812 10 , टैरिफ मद 2812 10 10 से 2812 90 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनिक अम्ल, उसके लवण और परफ्लूरोआक्टेन
सल्फोनाइल फ्लूराइड :
निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
2904 31 00 परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनिक अम्ल कि.ग्रा. 12.5%
क्लोराइड्स और क्लोराइड आक्साइड :
2904 32 00 अमोनियम परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनेट कि.ग्रा. 12.5%
"2812 11 00 कार्बोनिल डाईक्लोराइड (फौसजीन) कि.ग्रा. 12.5%
2904 33 00 लीथियम परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनेट कि.ग्रा. 12.5%
2812 12 00 फास्फोरस आक्सीक्लोराइड कि.ग्रा. 12.5%
2904 34 00 पोटैशियम परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनेट कि.ग्रा. 12.5%
2812 13 00 फास्फोरस ट्राईक्लोराइड कि.ग्रा.. 12.5%
2904 35 00 परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनिक अम्ल के अन्य लवण कि.ग्रा. 12.5%
2812 14 00 फास्फोरस पेंटाक्लोराइड कि.ग्रा . 12.5%
2904 36 00 परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनाइल फ्लूराइड कि.ग्रा. 12.5%";
2812 15 00 सल्फर मोनोक्लोराइड कि.ग्रा. 12.5%
(ख ) उपशीर्ष 2904 90, टैरिफ मद 2904 90 10 से 2904 90 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर
2812 16 00 सल्फर डाईक्लोराइड कि.ग्रा. 12.5%
निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात् :-
2812 17 00 " थायोनाइल क्लोराइड कि.ग्रा. 12.5%
अन्य:
281219 अन्य :
2904 91 00 ट्राईक्लोरोनाइट्रोमीथेन (क्लोरोपिक्रिन) कि.ग्रा. 12.5%
281219 10 सल्फर आक्सीक्लोराइड कि.ग्रा. 12.5%
2904 99 अन्य कि.ग्रा. 12.5%
2812 19 20 सिलिकोन टेट्राक्लोराइड कि.ग्रा. 12.5%
2904 99 10 2, 5 डाइक्लोरो नाइट्रोबेंजीन कि.ग्रा. 12.5%
2812 19 30 आर्सेनिक ट्राईक्लोराइड कि.ग्रा. 12.5%
2904 99 20 डाइनाइट्रोक्लोरोबेंजीन कि.ग्रा. 12.5%
2812 19 90 अन्य कि.ग्रा. 12.5%
2904 99 30 मेटा नाइट्रोक्लोरोबेंजीन कि.ग्रा. 12.5%
2812 90 00 अन्य कि.ग्रा. कि.ग्रा. 12.5%";
2904 99 40 आर्थो नाइट्रोक्लोरोबेंजीन 12.5%
2904 99 50 (v) शीर्ष 2848, उपशीर्ष 2848 00, टैरिफ मद 2848 00 10 से 2848 00 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया परा नाइट्रोक्लोरोबेंजीन कि.ग्रा. 12.5%
2904 99 60 जाएगा; 2-नाइट्रोक्लोरोटोलुईन कि.ग्रा. 12.5%
2904 99 70 (vi ) शीर्ष 2853, उपशीर्ष 2853 00, टैरिफ मद 2853 00 10 से 2853 00 99 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान सोडियम मेटा नाइट्रोक्लोरोबेंजीन कि.ग्रा. 12.5%
2904 99 90 पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:- अन्य कि.ग्रा. 12.5%";
(iv) टैरिफ मद 2910 "2853 40 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्: - फास्फाइड, चाहे रासायनिक रूप से परिभाषित है या नहीं, जिसके
"2910 50 00 एन्ड्रिन (आईएसओ)) अंतर्गत फेरोफास्फोरस नहीं है ; अन्य अकार्बनिक यौगिक (जिसके कि.ग्रा. 12.5%" ;
(v) शीर्ष 2914 में,- अंतर्गत आसुत या चालकता जल और समान शुद्धता का जल भी है) ; द्रव
(क) टैरिफ मद 2914 61 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, वायु (चाहे उसमें से दुर्लभ गैसें निकाल दी गई हों या नहीं) ; संपीड़ित
अर्थात्:- वायु : अमलगम, बहुमूल्य धातु के अमलगम से भिन्न
"2914 62 00 2853 10 00 कोएन्जाइम क्यू 10 [ ( यूबिडेकारेनोन (आईएनएन) ] साएनोजन क्लोराइड (क्लोरसिया) कि.ग्रा. कि.ग्रा. 12.5%"; 12.5%
2853 90 (ख) उपशीर्ष 2914 70 , टैरिफ मद 291470 10 से टैरिफ मद 2914 70 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान अन्य कि.ग्रा. 12.5%
2853 90 10 पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात् :T आसुत या चालकता जल और उसी शुद्धता का जल कि.ग्रा. 12.5%
"
2853 90 20 हेलोजनीकृत, सल्फोनिकृत, नाइट्रेटिकृत या नाइट्रोसेटिकृत व्युत्पन्न : द्रव वायु, चाहे उसमें से दुर्लभ गैसों का भाग निकाल दिया गया हो कि.ग्रा. 12.5%
2914 71 00 क्लोरोडेकान (आईएसओ) या नहीं कि.ग्रा. 12.5%
2914 79 अन्य कि.ग्रा. कि.ग्रा. 12.5%
2853 90 30 संपीड़ित वायु शून्य
2914 79 10 1-क्लोरो एंथ्राक्विनोन कि.ग्रा. कि.ग्रा. 12.5% 12.5%
2853 90 40 अमलगम, बहुमूल्य धातु के अमलगम से भिन्न
2914 79 20 मस्ककिटोन कि.ग्रा. 12.5%
2853 90 90 अन्य कि.ग्रा. 12.5%";
2914 79 90 अन्य कि.ग्रा. 12.5%";
(14) अध्याय 29 में,-
(vi) टैरिफ मद 2918 16 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:- (i ) टैरिफ मद 2903 82 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
"2918 17 00 2,2 -डाईफिनाइल- 2- हाइड्रोक्सीएसिटिक अम्ल (बेंजिलिक अम्ल) कि.ग्रा. 12.5%";
अर्थात्:-
(vii ) "2903 83 00 उपशीर्ष 2920 90 , टैरिफ मद 2920 90 10 से टैरिफ मद 2920 90 44 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर माइरेक्स (आईएसओ) कि.ग्रा. 12.5%" ;
निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात् :- ( ii ) टैरिफ मद 2903 92 29 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
"2903 93 00 पेंटाक्लोरोबेंजीन ( आईएसओ) कि.ग्रा. 12.5%
फास्फाइट एस्टर और उनके लवण; उनके हेलोजनीकृत, सल्फोनिकृत,
नाइट्रेटिकृत या नाइट्रोसेटिकृत व्युत्पन्न:
भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1 क]
टैरिफ मद
185
माल का वर्णन
(1) (2) 2920 21 00 डाईमिथाइल फास्फाइट 2920 22 00 डाईइथाइल फास्फाइट 2920 23 00 ट्राईमिथाइल फास्फाइट 2920 24 00 ट्राईइथाइल फास्फाइट 2920 29 अन्य: 2920 29 10 डाईमिथाइल सल्फाइट 2920 29 20 डाईइथाइल सल्फाइट 2920 29 30 ट्रिस (2,3 डाईब्रोमोप्रोपायल) फास्फेट 2920 29 90 अन्य 2920 30 00 एंडोसल्फेन (आईएसओ)
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
कि.ग्रा. 12.5%
कि.ग्रा. 12.5%
कि.ग्रा. 12.5%
कि.ग्रा. 12.5%
कि.ग्रा. 12.5%
कि.ग्रा. 12.5%
कि.ग्रा. 12.5%
कि.ग्रा. 12.5%
कि.ग्रा. 12.5%";
(viii) उपशीर्ष 2921 19, टैरिफ मद 2921 19 11 से 2921 19 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित
रखा जाएगा, अर्थात्:-
"2921 12 00 कि.ग्रा. 12.5%
2-(एन, एन-डाईमिथाइलएमीनो) इथाइलक्लोराइड हाइड्रोक्लोराइड
2921 13 00
12.5% कि.ग्रा.
2-(एन, एन -डाईइथाइलएमीनो) इथाइलक्लोराइड हाइड्रोक्लोराइड
2921 14 00
कि.ग्रा. 12.5%
2-(एन , एन-डाईआइसोप्रोपाइलएमीनो) इथाइलक्लोराइड हाइड्रोक्लोराइड
2921 19 अन्य
2921 19 10 2- क्लोरो एन, एन-डाईआइसोप्रोपाइल एथिलएमीन कि.ग्रा. 12.5%
292119 20 2- क्लोरो एन , एन-डाईमिथाइल एथेनामाइन कि.ग्रा. 12.5%
2921 19 90 अन्य कि.ग्रा. 12.5%";
(ix) उपशीर्ष 2922 12, टैरिफ मद 2922 12 10 से 2922 19 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा
जाएगा, अर्थात्: -
"2922 12 00 डाइथानोलेमाइन और उसके लवण कि.ग्रा. 12.5%";
(x) उपशीर्ष 2922 12, टैरिफ मद 2922 1310 से टैरिफ मद 29221390, टैरिफ मद 2922 14 00, उपशीर्ष 2922 19, टैरिफ
मद 2922 19 40 से टैरिफ मद 292219 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा अर्थात्ः-
"2922 14 00 डेक्सट्रोप्रोपोक्सीफीन (आइएनएन) और उसके लवण कि.ग्रा. 12.5%
292215 00 ट्राईएथनोलामीन कि.ग्रा. 12.5%
2922 16 00 डाईएथनोलामोनियम परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनेट कि.ग्रा. 12.5%
292217 मिथाइलडाईएथनोलामीन और इथाइलडाईएथनोलामीन कि.ग्रा. 12.5%
2922 17 10 मिथाइलडाईएथनोलामीन कि.ग्रा. 12.5%
2922 17 20 इथाइलडाईएथनोलामीन कि.ग्रा. 12.5%
2922 18 00 2- (एन, एन-डाईआइसोप्रोपाइलामीनो) इथाइलामीन कि.ग्रा. 12.5%
292219 अन्य कि.ग्रा. 12.5%
2922 19 10 2- हाइड्रोक्सी एन , एन- डाईआइसोप्रोपाइल इथाइलामीन कि.ग्रा. 12.5%
2922 19 90 अन्य कि.ग्रा. 12.5%";
(xi ) टैरिफ मद 2923 20 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:
"2923 30 00 टेट्राइथाइल अमोनियम परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनेट कि.ग्रा. 12.5%
2923 40 00 कि.ग्रा. 12.5%" ;
डाईडिसिल्डीमिथाइलअमोनियम परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनेट
(xii) टैरिफ मद 2924 24 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"2924 25 00 अलाक्लोर (आईएसओ) कि.ग्रा. 12.5%" ;
(xiii) टैरिफ मद 2926 30 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
186
भारत का राजपत्र असाधारण
टैरिफ मद
[भाग 2-
माल का वर्णन
(1)
(2)
"2926 40 00
अल्फा-फिनाइलएसिटोएसिटोनाइट्राइल इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
कि.ग्रा. 12.5%";
(xiv) टैरिफ मद 2930 50 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात:-
"2930 60 00
2-(एन, एन -डाईइथाइलामीनो) एथनेथियोल
2930 70 00
कि.ग्रा. 12.5%
कि.ग्रा. 12.5%
बिस (2-हाइड्रोक्सीइथाइल) सल्फाइड (थियोडाईजायलीकोल (आईएनएन))
2930 80 00
कि.ग्रा. 12.5%";
एल्डीकार्ब ( आईएसओ ) , कैप्टाफोल (आईएसओ) और मेथामिथोफोस
(आईएसओ)
(xv) टैरिफ मद 2931 20 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
"
अन्य कार्बन- गंधक व्युत्पन्न :
2931 31 00 डाईमिथाइल मिथाइलफास्फोनेट कि.ग्रा. 12.5%
2931 32 00 डाईएथाइल प्रोपाइलफास्फोनेट कि.ग्रा. 12.5%
2931 33 00 डाईएथाइल इथाइलफास्फोनेट कि.ग्रा. 12.5%
2931 34 00 कि.ग्रा. 12.5%
सोडियम 3- (ट्राईहाइड्रोक्सीसिलाइल) मिथाइलफास्फोनेट
2931 35 00
कि.ग्रा. 12.5%
2,4,6- ट्राईप्रोपाइल - 1,3,5,2,4,6- ट्राईआक्साट्राईफास्फिनेन 2,4,6- ट्राईआक्साइड
2931 36 00
12.5% कि.ग्रा.
(5- इथाइल-2-मिथाइल-2-आक्सीडो- 1,3,2-डाईआक्साफास्फिनेन 5-वाईएल)
मिथाइल मिथाइल ] मिथाइलफास्फोनेट
2931 37 00 बिस [(5- इथाइल- 2-मिथाइल-2-आक्सीडो- 1,3,2-डाईआक्साफास्फिनेन-5- कि.ग्रा. 12.5%
वाईएल) मिथाइल] मिथाइलफास्फोनेट
2931 38 00 मिथाइलफास्फोनिक अम्ल के लवण और (अमीनोइमीनोमिथाइल) यूरिया ( 1 : 1 ) कि.ग्रा. 12.5%
2931 39 00 अन्य कि.ग्रा. 12.5%";
(xvi ) टैरिफ मद 2932 13 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा ,
अर्थात्:-
"2932 14 00 सुक्रालोज कि.ग्रा. 12.5%";
(xvii) टैरिफ मद 2933 91 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
"2933 92 00 अजिनफास- मिथाइल (आईएसओ) कि.ग्रा. 12.5%";
(xviii) शीर्ष 2935 में , उपशीर्ष 2935 00 , टैरिफ मद 2935 00 11 से टैरिफ मद 2935 00 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों
के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"2935 सल्फोनामाइड
2935 10 00 एन-मिथाइलपरफ्लूरोआक्टेन सल्फोनामाइड कि.ग्रा. 12.5%
2935 20 00 एन -इथाइलपरफ्लूरोआक्टेन सल्फोनामाइड कि.ग्रा. 12.5%
2935 30 00 कि.ग्रा. 12.5%
एन- इथाइल- एन- (2 -हाइड्रोक्सीइथाइल ) परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनामाइड
2935 40 00
12.5% कि.ग्रा.
एन-(2 -हाइड्रोक्सीइथाइल) -एन- मिथाइलपरफ्लूरोआक्टेन सल्फोनामाइड
2935 50 00 अन्य परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनामाइड कि.ग्रा. 12.5%
2935 90 अन्य: कि.ग्रा. 12.5%
सल्फोमेथोक्साजोल, सल्फाफ्यूराजोल, सल्फाडाइजाइन,
सल्फाडीमीडाइन , सल्फासेटामाइड
2935 90 11 सल्फामेथोक्साजोल कि.ग्रा. 12.5%
सल्फाफ्यूराजोल कि.ग्रा. 12.5%
2935 90 12
2935 90 13 सल्फाडायजाइन कि.ग्रा. 12.5%
2935 90 14 सल्फाडीमीडाइन कि.ग्रा. 12.5%
2935 90 15 सल्फासिटामाइड कि.ग्रा. 12.5%
सल्फामेथोक्सीपाइरिडेरीन, सल्फामेथीयाजोल, सल्फामोक्सोल, सल्फामाइड :
सल्फामेथोक्सीपाइरिडेरीन कि.ग्रा. 12.5%
2935 90 21
अनुभाग 1क]
भारत का राजपत्र असाधारण
187
टैरिफ मद
माल का वर्णन
इकाई शुल्क की दर
(1)
(2)
(3) (4)
2935 90 22 सल्फामेथीयाजोल
कि.ग्रा. 12.5% 2935 90 23 सल्फामोक्सोल
कि.ग्रा. 12.5% 2935 90 24 सल्फामाइड
कि.ग्रा. 12.5% 2935 90 90 अन्य
कि.ग्रा. 12.5%";
(xix) टैरिफ मद 2937 31 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"2937 31 00 इपाइनफ्रिन
कि.ग्रा. 12.5%";
(xx) टैरिफ मद 2937 90 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् आने वाले स्तंभ (2) की प्रविष्टि में " वनस्पति" शब्द का लोप किया जाएगा ;
(xxi) शीर्ष 2939 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात् :-
"2939
ऐलकेलाइड, प्राकृतिक या संश्लेषण द्वारा पुनरुत्पादित और उनके लवण , ईथर, एस्टर और अन्य व्युत्पन्न ";
(xxii ) टैरिफ मद 2939 6900 से टैरिफ मद 2939 9900 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"2939 69 00 अन्य
कि.ग्रा. 12.5%
अन्य, वनस्पति मूल के :
कि.ग्रा. 12.5% 2939 71 00 कोकीन, एक्गोनाइन, लेवोमेटामफेटामीन , मेटामफेटामीन (आईएनएन ) , मेटामफेटामीन रेसमेट ; उसके लवण, एस्टर और अन्य व्युत्पन्न
2939 79 00 अन्य
12.5%
कि.ग्रा.
2939 80 00 अन्य
कि.ग्रा. 12.5%";
(15) अध्याय 30 में, -
(i) टिप्पण 4 के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"उपशीर्ष टिप्पण :
1. उपशीर्ष 3002 13 और 3002 14 के प्रयोजनों के लिए निम्नलिखित को :
( क) अमिश्रित उत्पाद, शुद्ध उत्पाद के, चाहे उनमें अशुद्धियां अंतर्विष्ट हों या नहीं ;
( ख) ऐसे उत्पादों के, जो:
(1 ) ऊपर (क) में उल्लिखित उत्पाद, जो जल में या अन्य विलायकों में घुले हुए हैं ;
(2) ऊपर (क) और (ख) (1 ) में उल्लिखित उत्पाद, उनके परिरक्षण या परिवहन के लिए आवश्यक संयोजित
स्थिरक के साथ मिश्रित किए गए हैं ; और
(3) ऊपर (क) , (ख) , (1 ) और (ख) (2) में उल्लिखित उत्पाद किसी अन्य योजक के साथ मिश्रित किए गए हैं, रूप में माना जाएगा ।
2. उपशीर्ष 3003 60 और 3004 60 के अंतर्गत अन्य भेषजिक सक्रिय संघटकों के साथ सम्मिलित मौखिक अंतर्ग्रहण के लिए आर्टीमिसिनिन या निम्नलिखित सक्रिय मूल तत्वों में से कोई मूल तत्व, चाहे वह अन्य भेषजिक सक्रिया संघटकों के साथ सम्मिश्रित है या नहीं : एमोडायाक्विन (आईएनएन) ; आर्टीलिनिक अम्ल या उसके लवण ; आर्टीनिमोल (आईएनएन) ; आर्टीमोटिल (आईएनएन) ; आर्टीमेथर (आईएनएन) ; आर्टीसुनेट (आईएनएन) ; क्लोरोक्विन (आईएनएन) ; डाईहाइड्रोआर्टीमिसिनिन (आईएनएन) ; लुमेफैनट्रिन (आईएनएन) ; मेफ्लोक्विन (आईएनएन) ; पाइप्राक्विन (आईएनएन) ; पाइरीमेथामाइन (आईएनएन) या सल्फोडाक्सिन (आईएनएन ) से युक्त औषधि द्रव्य हैं । " ;
(ii ) उपशीर्ष 3002 10 , टैरिफ मद 3002 10 11 से 3002 10 99 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित
रखा जाएगा , अर्थात्-
प्रतिसीरम, अन्य रक्त प्रभाज और प्रतिरक्षात्मक उत्पाद चाहे वे रूपांतरित हैं या नहीं या उन्हें जैव प्रौद्योगिकी प्रक्रियाओं के माध्यम से प्राप्त किया गया हो या नहीं :
कि.ग्रा. 6 मलेरिया नैदानिक परीक्षण किट 3002 11 00
300212 प्रतिसीरम और अन्य रक्त प्रभाज :
3002 12 10 डिप्थीरिया के लिए
कि.ग्रा. शून्य 188
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
माल का वर्णन
टैरिफ मद इकाई शुल्क की दर
(1) (2) (3) (4)
300212 20 टेटनल के लिए कि.ग्रा. शून्य
3002 12 30 रेबीज के लिए कि.ग्रा. शून्य
3002 12 40 सांप के जहर के लिए कि.ग्रा. शून्य
3002 12 90 अन्य कि.ग्रा. शून्य
3002 13 प्रतिरक्षात्मक उत्पाद, जो मिश्रित नहीं हैं किंतु जो मापित मात्राओं में या
रूपों में या पैकिंगों में फुटकर विक्रय के लिए नहीं रखे गए हैं
300213 10 प्रतिरक्षात्मक उत्पाद, जो मिश्रित नहीं हैं किंतु जो मापित मात्राओं में या
रूपों में या पैकिंगों में फुटकर विक्रय के लिए नहीं रखे गए हैं कि.ग्रा. 6%
300214 प्रतिरक्षात्मक उत्पाद, जो मिश्रित नहीं हैं किंतु जो मापित मात्राओं में या
रूपों में या पैकिंगों में फुटकर विक्रय के लिए नहीं रखे गए हैं
3002 1410 प्रतिरक्षात्मक उत्पाद मिश्रित किए गए हैं, किंतु जो मापित मात्राओं में या
रूपों में या पैकिंगों में फुटकर विक्रय के लिए नहीं रखे गए हैं कि.ग्रा. 6%
3002 15 00 प्रतिरक्षात्मक उत्पाद, जो मापित मात्राओं में या रूपों में या पैकिंगों में
फुटकर विक्रय के लिए रखे गए हैं कि.ग्रा. 67%
3002 19 00 अन्य कि.ग्रा. 6%";
(iii) टैरिफ मद 3003 2000 से टैरिफ मद 3003 31 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा,
अर्थात्:-
"3003 20 00 अन्य, जिसमें प्रतिजैविकी हैं कि.ग्रा. 6%
अन्य, जिसमें शीर्ष 2937 के होरमोन्स या अन्य उत्पाद हैं :
3003 31 00 जिसमें इन्सुलिन है कि.ग्रा. 6%
3003 39 00 अन्य कि.ग्रा. 6%
अन्य, जिसमें ऐलकेलाइड या उनके व्युत्पन्न हैं :
3003 41 00 जिसमें एफेड्रिन या उसके लवण हैं कि.ग्रा. 6
3003 42 00 जिसमें पसुदोफेड्रिन (आई.एन.एन.) या उसके लवण हैं कि.ग्रा. 6%
3003 43 00 जिसमें नोरेफड्रिन या उसके लवण हैं कि.ग्रा. 6%
3003 49 00 अन्य कि.ग्रा. 6%
3003 60 00 अन्य, जिसमें इस अध्याय के उपशीर्ष टिप्पण 2 में वर्णित मलेरियारोधी
सक्रिय सिद्धांत है कि.ग्रा. 6%";
(iv) शीर्ष 3004 में,-
(क) उपशीर्ष 3004 20 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
" 3004 20 अन्य, जिसमें प्रतिजैविकी हैं : " ;
(ख) टैरिफ मद 3004 20 99, उपशीर्ष 3004 31 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा ,
अर्थातः-
"3004 20 99 अन्य कि.ग्रा. 6%
अन्य, जिसमें शीर्ष 2937 के होरमोन्स या अन्य उत्पाद हैं :
3004 31 जिसमें इन्सुलिन है : ";
(ग) उपशीर्ष 3004 40 , टैरिफ मद 3004 40 10 से टैरिफ मद 3004 40 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान
पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
" अन्य, जिसमें ऐलकेलाइड या उनके व्युत्पन्न हैं :
3004 41 00 जिसमें एफेड्रिन या उसके लवण हैं कि.ग्रा. 6%
कि.ग्रा. 67%
3004 42 00
जिसमें पसुदोफेड्रिन (आई.एन.एन. ) या उसके लवण हैं
जिसमें नोरेफड्रिन या उसके लवण हैं कि.ग्रा. 6%
3004 43 00
3004 49 अन्य
ऐट्रोपीन और उसके लवण कि.ग्रा. 6%
3004 49 10
कैफीन और उसके लवण कि.ग्रा. 67%
3004 49 20
भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
टैरिफ मद
189
माल का वर्णन
(1)
(2)
3004 49 30
इकाई शुल्क की दर
(4)
(3)
कि.ग्रा. 6%
कोडीन और उनके व्युत्पन्न, एफेड्रीन हाइड्रोक्लोराइड सहित या रहित
3004 49 40
अरगॉट के उत्पाद, इरगोटेमाइन और उसके लवण 3004 49 50
पपैवरीन हाइड्रोक्लोराइड 3004 49 60
ब्रोमोहेक्सीन और सोलब्यूटामोल 3004 49 70
थियोफिलीन और एफेड्रीन 3004 49 90
अन्य
कि.ग्रा. 6%
कि.ग्रा. 6%
6%
कि.ग्रा.
कि.ग्रा. 6
कि.ग्रा. 6%";
(घ) उपशीर्ष 3004 50 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
" 3004 50
अन्य, जिसमें शीर्ष 2936 के विटामिन और अन्य उत्पाद हैं :" ;
(ङ) टैरिफ मद 3004 50 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
"3004 60 00
अन्य, जिसमें इस अध्याय के उपशीर्ष टिप्पण 2 में वर्णित मलेरियारोधी सक्रिय सिद्धांत है
कि.ग्रा. 6%:";
(16) अध्याय 31 के शीर्ष 3103 में , टैरिफ मद 3103 1000 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
सुपरफास्फेट्स:
3103 11 00
12.5% कि.ग्रा.
जिसमें भार द्वारा 35% या अधिक डाइफास्फोरस पेन्टाआक्साइड (P₂O ) है
3103 19 00
अन्य
कि.ग्रा. 12.5%";
(17) अध्याय 37 के शीर्ष 3705 में, टैरिफ मद 3705 1000, उपशीर्ष 3705 90, टैरिफ मद 3705 9010 , और टैरिफ मद 3705
90 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
"3705 00
फोटोचित्र प्लेटें और फिल्म, उद्भाषित और डेवेलप की गई,
चलचित्रीय फिल्म से भिन्न
(18) अध्याय 38 में,-
कि.ग्रा.
शून्य " ;
(i ) उपशीर्ष टिप्पण 1 और उपशीर्ष टिप्पण 2 के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"उपशीर्ष टिप्पण :
1. उपशीर्ष 3808 52 और उपशीर्ष 3808 59 के अंतर्गत केवल शीर्ष 3808 के माल हैं, जिनके अंतर्गत एक या अधिक निम्नलिखित पदार्थ सम्मिलित हैं : एलाक्लोर (आईएसओ) ; एल्डीकार्ब (आईएसओ ) ; एल्ड्रिन (आईएसओ) ; एजिनफास- मिथाइल (आईएसओ) ; बाइनापैक्राइल (आईएसओ) ; कैम्फेक्लोर (आईएसओ ) (टोक्साफेन); कैप्टाफोल (आईएसओ) ; क्लोरडेन (आईएसओ) ; क्लोरडाइमेफार्म ( आईएसओ) ; क्लोरोबेन्जिलेट (आईएसओ ) ; डी.डी.टी. (आईएसओ ) ; क्लोफेनोटेन (आई. एन. एन. ), 1,1,1 -ट्राईक्लोरो- 2-2-बिस (पी-क्लोरोफेनाइल) ईथेन ; डाइएल्ड्रिन (आईएसओ, आई.एन.एन. ) , 4,6-डाइनाइट्रो-ओ-क्रेसोल (डी.एन.ओ.सी. (आईएसओ ) या उसके लवण , डाइनोसेब (आईएसओ) , उसके लवण या उसके एस्टर ; एन्डोसल्फेन (आईएसओ ) ; एथिलीन डाईब्रोमाइड (आई.एस.ओ.) ( 1,2-डाईब्रोमोएथेन) ; एथिलीन डाईक्लोराइड (आई.एस.ओ. ) (1,2 -डाईक्लोरोएथेन) ; फ्लूरोएसीटामाइड (आई.एस.ओ.) ; हेप्टाक्लोर (आई.एस.ओ. ) ; हेक्साक्लोरोबेन्जीन (आई.एस.ओ.) ; 1,2,3,4,5,6- हेक्साक्लोरोसाइक्लोहेक्सेन [ एच.सी.एच. ] (आई.एस.ओ. ) लिन्डेन (आई.एस.ओ. , आई.एन.एन.) सहित, मर्करी यौगिक; मेथामिडोफेस (आई.एस.ओ.) ; मोनोक्रोटोफोस (आई.एस.ओ.) ; आक्सीरैन (एथिलीन आक्साइड) ; पैराथियन (आई.एस.ओ.) ; पैराथियनमिथाइल (आई.एस.ओ.) ; (मिथाइल-पैराथियन) ; पेंटा और ओक्टाब्रोमोडाईफिनाइल ईथर्स ; पेंटाक्लोरोफीनोल (आई.एस.ओ.) उसके लवण या उसके एस्टर ; परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनिक अम्ल और उसके लवण ; परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनामाइड्स ; परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनाइड फ्लूराइड; फास्फामिडान (आई.एस.ओ.) ; 2,4,5-टी (आई.एस.ओ. ) (2,4,5-ट्राईक्लोरो-फेनौक्सीएसेटिक अम्ल) , उसके लवण और उसके एस्टर ; ट्राईबुटाइलिटिन यौगिक।
उपशीर्ष 3808 59 के अंतर्गत चूर्णयोग्य पाउडर विनिर्मितियां , जिनके अंतर्गत बेनोमाइल (आई.एस.ओ. ), कार्बोफुरान (आई.एस.ओ. )
और थिराम (आई.एस.ओ. ) का मिश्रण भी है ।" ।
2. उपशीर्ष 3808 61 से उपशीर्ष 3808 69 के अंतर्गत केवल शीर्ष 3808 के माल हैं, जिनके अंतर्गत अल्फासाइपरमेथरिन (आई.एस.ओ. ), बेंडियोकार्ब (आई.एस.ओ. ), बिफेंथ्रिन (आई.एस.ओ. ), क्लोफेना (आई.एस.ओ.) , साइफ्लूथ्रिन (आई.एस.ओ. , डेल्टामिथ्रिन (आई.एन.एन. आई.एस.ओ.) , इटोफेनप्रोक्स (आई.एन.एन. ), फेनीट्रोथियोन (आई.एस.ओ.) , लेम्बड़ा- साईहालोथ्रिन (आई.एस.ओ.) , मैलाथियोन (आई.एस.ओ.) , प्राइमोफोस- मिथाइल (आई.एस.ओ. ) , या प्रोपोक्सर (आई.एस.ओ. ) हैं।
भारत का राजपत्र असाधारण 190
[भाग 2-
माल का वर्णन
टैरिफ मद
(2) (1)
इकाई शुल्क की दर
(4)
(3)
3. उपशीर्ष 3824 81 से उपशीर्ष 3824 88 के अंतर्गत केवल मिश्रण और निम्नलिखित पदार्थों की एक या अधिक निर्मितियां हैं : आक्सीरेन ( इथाइलेन आक्साइड) , पोलीब्रोमिनेटेड बाईफिनाइल्स (पीबीबी) , पोलीक्लोरीनेटेड बाइकिनाइल (पीसीबी) , पोलीक्लोरीन्नेटेड टेरफिनाइल (पीसीटी) , ट्रिस (2,3 - डाईब्रोमोप्रोपाइल) फास्फेट, एल्ड्रिन ( आई.एस.ओ. ) , कैम्फाक्लोर (आई.एस.ओ.) (टोक्साफेन) , क्लोरडेन (आई.एस.ओ. ) , क्लोरडेकोन (आई.एस.ओ. ) , डीडीटी (आई.एस.ओ. ) (क्लोफेनोटेन (आई.एन.एन) , 1,1,1 -ट्रोइक्लोरो -2, 2-बिस (क्लोरोफिनाइल) (इथेन ) , डाइल्ड्रिन (आई.एस.ओ. आई.एन.एन. ), एन्डोसल्फान (आई.एस.ओ. ), एन्ड्रिन (आई.एस.ओ. ) , हेप्टाक्लोर (आई.एस.ओ. ) माइरेक्स (आई.एस.ओ. ) , 1,2,3,4,5,6- हेक्साक्लोरोसाइक्लोहेक्सेन (एच.सी.एच. (आई.एस.ओ. ), जिसमें लिन्डेन (आई.एस.ओ. , आई.एन.एन. ) है, पेंटाक्लोरोबेंजीन (आई.एस.ओ.) , हेक्साक्लोरोबेंजीन (आई.एस.ओ. ), परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनिक अम्ल, उसके लवण , परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनामाइड फ्लूराइड या टेट्रा , पेंटा , हेक्सा, हेप्टा-या आक्टाब्रोमोडाइफिनाइल इथर्स हैं।
4. टैरिफ मद 3825 41 00 और टैरिफ मद 38244900 के प्रयोजन के लिए, "अपशिष्ट जैविक विलायक " अपशिष्ट हैं जिनमें मुख्यतः जैविक विलायक हैं, जो उस रूप में आगे उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है जिसमें मुख्य उत्पादों के रूप में प्रस्तुत किया गया है, चाहे वह विलायकों की पुनः प्राप्ति के लिए आशयित है या नहीं । ";
(ii) उपशीर्ष 3808 50, टैरिफ मद 3808 5000 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्ः-
इस अध्याय के उपशीर्ष टिप्पण 1 में विनिर्दिष्ट माल :
3808 52 00
डीडीटी (आई.एस.ओ.) (क्लोफेनोटेन (आई.एन.एन) , 300 ग्रा. से अनधिक
शुद्ध भार के पैकों में कि.ग्रा. 12.5%
3808 59 00 अन्य कि.ग्रा. 12.5%
इस अध्याय के उपशीर्ष टिप्पण 2 में विनिर्दिष्ट माल :
3808 61 00 300 ग्रा. से अनधिक शुद्ध भार के पैकों में कि.ग्रा. 12.5%
3808 62 00 300 ग्रा. से अधिक, किंतु 7.5 कि.ग्रा. से अनधिक शुद्ध भार के पैकों में कि.ग्रा. 12.5%
3808 69 00 अन्य कि.ग्रा. 12.50" ;
(iii) उपशीर्ष 3812 30, टैरिफ मद 381230 10 से टैरिफ मद 3812 30 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर,
निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
रबड़ या प्लास्टिक के लिए आक्सीडाइजिंग प्रतिरोधी विनिर्मितियां
और अन्य यौगिक स्थिरक :
381231 00 कि.ग्रा. 12.5%
2,2,4- ओलिगोमर- ट्राईमिथाइल - 1,2 -डीहाईड्रोक्नोलाइन (टी.एम.क्यू. )
के मिश्रण
381239 अन्य:
381239 10 रबड़ के लिए आक्सीडेंट प्रतिरोधी कि.ग्रा. 12.5%
381239 20 कि.ग्रा. 12.5%
रबड़ मृदुकर
381239 30 रबड़ वल्कनीकारक कर्मक कि.ग्रा. 12.5%
381239 90 अन्य कि.ग्रा. 12.50";
(iv ) टैरिफ मद 3824 79 00 से टैरिफ मद 3824 83 00, उपशीर्ष 3824 90, टैरिफ मद 3824 90 11 से टैरिफ मद 3824 90
90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्
"3824 79 00 अन्य कि.ग्रा. 12.5%
इस अध्याय के उपशीर्ष टिप्पण 3 में विनिर्दिष्ट माल:
जिसमें आक्सीरेन (इथाइलेन आक्साइड) है कि.ग्रा. 12.5%
3824 81 00
3824 82 00 कि.ग्रा. 12.5%
जिसमें पोलीक्लोरीनेटेड बाईफिनाइल्स (पीसीबी) , पोलीक्लोरीनेटेड
टेरफिनाइल ( पीसीटी) या पोलीब्रोमिनेटेड बाईफिनाइल्स (पीबीबी) हैं
3824 83 00
जिसमें ट्रिस (2,3 -डाईब्रोमोप्रोपाइल ) फास्फेट है
12.5% कि.ग्रा.
भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग । क]
टैरिफ मद माल का वर्णन (1) (2) 3824 84 00
191
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
जिसमें एल्ड्रिन ( आई.एस.ओ.), कैम्फाक्लोर (आई.एस.ओ.) (टोक्साफेन) , कि.ग्रा. 12.5%
क्लोरडेन (आई.एस.ओ.) , क्लोरडेकोन (आई.एस.ओ.) , डीडीटी
(आई.एस.ओ.) , क्लोफेनोटेन (आई.एन.एन) , 1,1,1 -ट्राइक्लोरो -2, 2-
बिस ( क्लोरोफिनाइल) इथेन, डाइल्ड्रिन (आई.एस.ओ. आई.एन.एन.) ,
एन्डोसल्फान ( आई.एस.ओ.), एन्ड्रिन (आई.एस.ओ.), हेप्टाक्लोर
(आई.एस.ओ.) या माइरेक्स (आई.एस.ओ.) हैं
3824 85 00 जिसमें लिन्डेन ( आई.एस.ओ. , आई.एन. एन. ) सहित 1,2,3,4,5,6- कि.ग्रा. 12.5%
हेक्साक्लोरोसाइक्लोहेक्सेन (एच.सी.एच.) (आई.एस.ओ.) है,
3824 86 00 जिसमें पेंटाक्लोरोबेंजीन (आई.एस.ओ. ) या हेक्साक्लोरोबेंजीन कि.ग्रा. 12.5%
(आई.एस.ओ.) है
3824 87 00 जिसमें परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनिक अम्ल, उसके लवण, परफ्लूरोआक्टेन कि.ग्रा. 12.5%
सल्फोनामाइड या परफ्लूरोआक्टेन सल्फोनाइल फ्लूराइड हैं
3824 88 00 जिसमें टेट्रा , पेंटा , हेक्सा , हेप्टा-या आक्टाब्रोमोडाइफिनाइल ईथर्स हैं कि.ग्रा. 12.5%
3824 91 00 जिसमें मुख्यतः (5- ईथाइल-2 -मिथाइल आक्साइडो - 1,3,2-डाइआक्सा-
फोस्फिनानन-5- इल) मिथाइल मिथाइल मिथाइलफास्फोनेट और बिस
[(5) - ईथाइल-2- मिथाइल -आक्साइडो- 1,3,2-डाइआक्साफोस्फिनानन-
5- इल) मिथाइल) ] मिथाइलफास्फोनेट के मिश्रण और विनिर्मितियां हैं
3824 99 अन्य
अमोनियामय गैस लिकर और भुक्तशेष ऑक्साइड जो कोयला गैस
निर्मलीकरण में उत्पन्न होता है । पृष्ठदृढ़ीकरण यौगिक, ऊष्मा स्थानांतरण
लवण : डाइफिनायल और डाइफिनायल ऑक्साइड का ऊष्मा स्थानांतरण
माध्यम के रूप में मिश्रण , मिश्रित पोली एथलीन ग्लाइकोल संसाधन या
लवणीकरण के लिए लवण पृष्ठ तनाव उपचायक है :
3824 99 11 अमोनियामय गैस लिकर और भुक्तशेष ऑक्साइड जो कोयला गैस
निर्मलीकरण में उत्पन्न होता है कि.ग्रा. 12.5%
3824 99 12 पृष्ठदृढ़ीकरण यौगिक कि.ग्रा. 12.5%
3824 99 13 ऊष्मा स्थानांतरण लवण कि.ग्रा. 12.5%
3824 99 14 डाइफिनायल और डाइफिनायल ऑक्साइड का ऊष्मा स्थानांतरण
माध्यम के रूप में मिश्रण कि.ग्रा. 12.5%
3824 99 15 मिश्रित पोली एथलीन ग्लाइकोल कि.ग्रा. 12.5%
3824 99 16 संसाधन या लवणीकरण के लिए लवण कि.ग्रा. 12.5%
3824 99 17 पृष्ठ तनाव उपचायक कि.ग्रा. 12.5%
विद्युत लेपन लवण ; जल उपचार रसायन ; आयन विनियामक ; संशोधक
द्रव्य ; अवक्षेपित सिलिका और सिलिका जैल तेलकूप रसायन:
382499 21 विद्युत लेपन लवण कि.ग्रा. 12.5%
जल उपचार रसायन, आयन विनियामक (आई एन एन) उदाहरणतया कि.ग्रा. 12.5%
3824 99 22
परम्यूटिस , जियोलाइट्स
3824 99 23 ग्रामोफोन रिकार्ड बनाने की सामग्री कि.ग्रा. 12.5%
संशोधक द्रव्य कि.ग्रा. 12.5%
382499 24
अवक्षेपित सिलिका और सिलिका जैल कि.ग्रा. 12.5%
3824 99 25
कि.ग्रा. 12.5%
3824 99 26 तेलकूप रसायन
192
भारत का राजपत्र असाधारण
टैरिफ मद
माल का वर्णन
(1)
(2)
[भाग 2-
इकाई शुल्क की दर
(4)
(3)
क्लोरीन और फ्लोरीन से भिन्न दो या अधिक भिन्न हेलोजन वाला मिश्रण , जिसमें एक्रेलिक हाईड्रोकार्बनों के परहेलोजेनेटिड व्युत्पन्न अंतर्विष्ट हैं, फेराइड पाउडर ; संधारित्र द्रव्य -पी सी बी टाइप ; अंगूरों के लिए उपचार के लिए निमज्जी तेल; बहु ब्रीमिनित बाइफिनायल, बहुक्लोरीनित बाइफिनायल , बहुक्लोरीनित टेरफिनायल , क्रोसीडोलाइट "संकटमय अपशिष्ट के रूप में ज्ञात प्रकार का माल; फोसफोजिप्समः 3824 99 31
कि.ग्रा. 12.5%
क्लोरीन और फ्लोरीन से भिन्न दो या अधिक भिन्न हेलोजन वाला मिश्रण , जिसमें एक्रेलिक हाईड्रोकार्बनों के परहेलोजेनेटिड व्युत्पन्न अंतर्विष्ट हैं,
3824 99 32
फेराइड पाउडर
3824 99 33
संधारित्र द्रव्य-पी सी बी टाइप 382499 34
अंगूरों के लिए उपचार के लिए निमज्जी तेल 3824 99 35
कि.ग्रा. 12.5%
12.5% कि.ग्रा.
कि.ग्रा. 12.5%
12.5% कि.ग्रा.
बहु ब्रीमिनित बाइफिनायल, बहुक्लोरीनित बाइफिनायल , बहुक्लोरीनित
टेरफिनायल, क्रोसीडोलाइट
3824 99 36 "संकटमय अपशिष्ट" के रूप में ज्ञात प्रकार का माल कि.ग्रा. 12.5%
3824 99 37 फोसफोजिप्सम कि.ग्रा. 12.5%
3824 99 38 फोसफोनिक अम्ल, (अमीनोमिनो मिथाइल ) यूरिया के साथ मिथाइल- कि.ग्रा. 12.5%
मिश्रण (1 : 1 )
3824 99 90 अन्य कि.ग्रा. 12.5 ";
(19) अध्याय 39 में, -
(i) टिप्पण 2 के खंड (य) में "नोदन पेसिलें" शब्दों के पश्चात्, " मोनोपोड, बाईपोड या ट्राई पोड और वैसी ही वस्तुएं"
शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे;
(ii) उपशीर्ष टिप्पण 1 के खंड ( क) के उपखंड (2) में " 3901 30" अंकों के स्थान पर, " 3901 40 " अंक रखे जाएंगे ;
(iii) शीर्ष 3901 में, टैरिफ मद 3901 3000 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किए जाएंगे ;
"3901 40 00 ऐसे एथिलीन- एल्फा-ओलेफीन-सह- बहुलक , जिनका विनिर्दिष्ट गुरूत्व कि.ग्रा. 12.5%";
0.94से कम है
(iv) शीर्ष 3907 में , उपशीर्ष 3907 60 और टैरिफ मद 3907 60 10 से टैरिफ मद 3907 60 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों
के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
पोली (एथिलीन टेरेफाथालेट):
3907 61 00 जिनकी 78 मि.ली./ ग्रा. या उच्चतर श्यानता संख्या है कि.ग्रा. 12.5%
3907 69 अन्य
3907 69 10 जिनकी 78 मि.ली. / ग्रा. से कम, किंतु 72 मि.ली. / ग्रा . से अन्यून
श्यानता संख्या है कि.ग्रा. 12.5%
3907 69 20 जिनकी 72 मि.ली. / ग्रा. से कम , किंतु 64 मि.ली./ग्रा . से अन्यून
श्यानता संख्या है कि.ग्रा. 12.5%
3907 69 90 अन्य कि.ग्रा. 12.5%";
(v) उपशीर्ष 3909 30, टैरिफ मद 3909 30 10 से टैरिफ मद 3909 30 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर,
निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
" अन्य एमिनोरेजिन :
भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
टैरिफ मद माल का वर्णन (1) (2) 3909 31 00
193
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
पॉली (मेथाइलीन फिनाइल आइसोसाइनेट) (कच्चा एम.डी.आई. , पॉलीमेरिक कि.ग्रा. 12.5%
एम.डी.आई.)
3909 39 अन्य:
3909 39 10 पॉली (फिनाइलेन आक्साइड) कि.ग्रा. 12.5%
3909 39 90 अन्य कि.ग्रा. 12.5";
(20) अध्याय 40 के शीर्ष 4011 में, टैरिफ मद 4011 50 90 से टैरिफ मद 4011 99 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के
स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"4011 50 90 अन्य इ. 12.5%
4011 70 00 इस प्रकार के जिनका उपयोग कृषि या वानिकी यानों और मशीनों इ. 12.5%
में किया जाता है
4011 80 00 इस प्रकार के जिनका उपयोग सन्निर्माण, खनन या औद्योगिक उठाई- इ. 12.5%
धराई यानों और मशीनों में किया जाता है
4011 90 00 अन्य इ. 12.5%";
(21 ) अध्याय 42 में,-
(i ) शीर्ष 4202 में,-
(क) उपशीर्ष 4202 22 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"4202 22 प्लास्टिक की या टेक्सटाइल सामग्रियों की चादर के बाह्य पृष्ठ सहित: " ;
(ख) उपशीर्ष 4202 32 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
"4202 32 प्लास्टिक की या टेक्सटाइल सामग्रियों की चादर के बाह्य पृष्ठ सहित : " ;
(ग) टैरिफ मद 4202 92 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"4202 92 00 प्लास्टिक की या टेक्सटाइल सामग्रियों की चादर के बाह्य पृष्ठ सहित : इ. 12.5%";
(22) अध्याय 44 में,-
(i ) टिप्पण 1 के खंड ( थ) में "पैंसिल " शब्द के स्थान पर, "पैंसिल और मोनोपोड, बाइपोड, ट्राईपोड और वैसी ही वस्तुएं ",
शब्द रखे जाएंगे;
(ii ) उपशीर्ष टिप्पण 2 का लोप किया जाएगा ;
(iii) शीर्ष 4401 में,-
(क) उपशीर्ष 4401 10, टैरिफ मद 440110 10 , टैरिफ मद 44011090 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के
स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
"_ ईंधन काष्ठ, जो लठ्ठा, विलेट, टहनी , फैगाट या वैसी ही रूपों में है :
4401 11 शंकुधारी
4401 11 10 लठ्ठों में मी.ट. 12.5%
4401 11 90 अन्य मी.ट. 12.5%
4401 12 अशंकुधारी :
4401 12 10 लठ्ठोंमें मी.ट. 12.5%
4401 12 90 अन्य मी.ट. 12.5%";
(ख) टैरिफ मद 4401 22 00, टैरिफ मद 4401 31 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा
जाएगा, अर्थात्ः-
"4401 22 00 अशंकुधारी मी.ट. 12.5%
बुरादा और काष्ठ अपशिष्ट और स्क्रैप , चाहे लठ्ठों, अष्टिकाओं ,
गुटिकाओं , पैलेटों या जो वैसे ही रूपों में संपीड़ित है :
4401 31 00 काष्ठ पैलेट मी.ट. 12.5%";
(ग) टैरिफ मद 4401 39 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्ः-
"4401 40 00 बुरादा और काष्ठ अपशिष्ट और स्क्रैप , जो संपीड़ित नहीं है : मी.ट. 12.5%";
194
भारत का राजपत्र असाधारण
टैरिफ मद माल का वर्णन
(1) (2)
(iv) शीर्ष 4403 में,-
[भाग 2-
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
(क) टैरिफ मद 4403 10 00, उपशीर्ष 4403 20 और टैरिफ मद 4403 20 10 से टैरिफ मद 44034100 और
उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्
पैंट, स्टैन क्रिओसोओ या अन्य परिरक्षकों से उपचारित :
4403 11 00 शंकुधारी: घ.मी. 12.5%
4403 12 00 अशंकुधारी घ.मी. 12.5%
अन्य शंकुधारी :
4403 21 चीड़ का ( पाइनस एसपीपी) , जिसकी कोई तिरछी विमाएं 15 से.मी.
या अधिक है
4403 21 10 सालाग और विनिरलाग घ.मी. 12.5%
4403 21 20 पोल्स, पिलिंग और पोस्ट घ.मी. 12.5%
4403 21 90 अन्य घ.मी. 12.5%
4403 22 चीड़ का (पाइनस एसपीपी) , अन्य
4403 22 10 सालाग और विनिरलाग घ.मी. 12.5%
4403 22 20 पोल्स, पिलिंग और पोस्ट घ.मी. 12.5%
4403 22 90 अन्य घ.मी. 12.5%
4403 23 फीर का (ऐबीस एसपीपी) और स्प्रूस ( पाइसिया एसपीपी) , जिसकी
कोई तिरछी विमाएं 15 से.मी. या अधिक है :
4403 23 10 सालाग और विनिरलाग घ.मी. 12.5%
4403 23 20 पोल्स, पिलिंग और पोस्ट घ.मी. 12.5%
4403 23 90 अन्य घ.मी. 12.5%
4403 24 फीर का ( ऐबीस एसपीपी) और स्प्रूस ( पाइसिया एसपीपी) , अन्य :
4403 24 10 सालाग और विनिरलाग घ.मी. 12.5%
4403 24 20 पोल्स, पिलिंग और पोस्ट घ०मी. 12.5%
4403 24 90 अन्य घ.मी. 12.5%
4403 25 अन्य, जिसकी कोई तिरछी विमाएं 15 से.मी. या अधिक है :
4403 2510 सालाग और विनिरलाग घ.मी. 12.5%
4403 25 20 पोल्स, पिलिंग और पोस्ट घ.मी. 12.5%
4403 25 90 अन्य घ.मी. 12.5%
4403 26 अन्य:
4403 26 10 सालाग और विनिरलाग घ.मी. 12.5%
4403 26 20 पोल्स, पिलिंग और पोस्ट घ.मी. 12.5%
4403 26 90 अन्य घ.मी. 12.5%
अन्य, उष्ण कटिबंधी काष्ठ का
4403 41 00 गहरे लाल रंग के मेरांटी, हल्के लाल रंग के मेरांटी और मेरांटी बकाऊ घ.मी. 12.5%";
(ख) टैरिफ मद 4403 92 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"4403 93 00 बीछ का (फंगस एसपीपी) , जिसकी कोई तिरछी विमाएं 15 से.मी. घ.मी. 12.5%
या अधिक है
बीछ का (फंगस एसपीपी) , अन्य घ.मी. 12.5%
4403 94 00
4403 95 00 बिर्च का (बिटुला एसपीपी) , जिसकी कोई तिरछी विमाएं 15 से.मी.
या अधिक है घ.मी. 12.5
बिर्च का (बिटुला एसपीपी) , अन्यघ.मी. 12.5%
4403 96 00
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
टैरिफ मद माल का वर्णन (1) (2) 4403 97 00 पोपलर और एस्पैन का ( पोपुलस एसपीपी) 4403 98 00 यूकेलिप्टस ( यूकेलिप्टस एसपीपी)
195
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
घ.मी. 12.5%
घ.मी. 12.5%";
(ग) टैरिफ मद 4403 99 19 से टैरिफ मद 4403 99 21 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा
जाएगा, अर्थात्:-
"4403 99 19 रोज काष्ठ (डैलबरजिया लतिफोयस) घ.मी. 12.5%
साल (कारिआ रोबुस्ता) , चन्दन काष्ठ (संतालुम अलबर) , सेमुल ( बसमबेक्स
सिबा) , अखरोट काष्ठ (जुगलन्स बिनाटा) , अंजम (हार्डविकिया बिनाटा) ,
सीसम (डैलबिर्जिया सीसम) और सफेद देवदार (डायसोजिलम)
4403 99 21 साल (कारिआ रोबुस्ता) घ.मी. 12.5%";
(घ) टैरिफ मद 4403 99 26 और उससे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा ;
(ङ) टैरिफ मद 4403 99 29 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"4403 99 90 अन्य घ.मी. 12.5%" ;
(v) शीर्ष 4406 में, टैरिफ मद 4406 1000 , टैरिफ मद 4406 10 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर
निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
" असंपीड़ित
4406 11 00 शंकुधारी कि.ग्रा. 12.5%
4406 12 00 अशंकुधारी कि.ग्रा. 12.5%
अन्य:
4406 91 00 शंकुधारी कि.ग्रा. 12.5%
4406 92 00 अशंकुधारी कि.ग्रा. 12.5%";
(vi) शीर्ष 4407 में,-
(क) उपशीर्ष 4407 10, टैरिफ मद 44071010 से टैरिफ मद 4407 21 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के
स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
शंकुधारी
4407 11 00 चीड़ का (पाइनस एसपीपी) घ.मी. शून्य
4407 12 00 फीर ( एबीजएसपीपी) और स्प्रूस (पाइसीएएसपीपी) घ.मी. शून्य
4407 19 अन्य
4407 19 10 डागलस फीर (स्यूडोटसगा मैनजिसी) घ.मी. शून्य
4407 19 90 अन्य घ.मी. शून्य
ऊष्ण कटिबंधीय काष्ठ :
4407 21 00 महोगनी (स्वेटेनिया एसपीपी) घ.मी. शून्य";
(ख) टैरिफ मद 4407 9500 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"4407 96 00 बिर्च का (बेटुला एसपीपी) घ.मी. शून्य
4407 97 00 पोपलर और एस्पैन का (पोपुलस एसपीपी) घ.मी. शून्य";
(ग) टैरिफ मद 4407 99 10 और उससे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा;
(vii ) शीर्ष 4408 में,-
(क) टैरिफ मद 4408 10 90 से उपशीर्ष 4408 31 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा,
अर्थात्:-
"4408 10 90 अन्य कि.ग्रा. 12.5%
ऊष्ण कटिबंधीय काष्ठ:
4408 31 गहरे लाल रंग के मेरांटी, हल्के लाल रंग के मेरांटी, मेरांटी बकाऊ : ";
(ख) टैरिफ मद 4409 21 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
"4409 22 00 ऊष्ण कटिबंधीय काष्ठ का : कि.ग्रा. 12.5%";
196
भारत का राजपत्र असाधारण
टैरिफ मद माल का वर्णन
(1) (2)
(viii) शीर्ष 4412 में,-
[भाग 2-
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
(क) उपशीर्ष 4412 31 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"4412 31 ऊष्ण कटिबंधीय काष्ठ की कम से कम एक बाह्य प्लाई के साथ" ;
(ख) उपशीर्ष 4412 32, टैरिफ मद 4412 32 10 से टैरिफ मद 4412 32 90, उपशीर्ष 4412 39, टैरिफ मद
441239 10 से टैरिफ मद 4412 39 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा,
अर्थात्
"4412 33 अन्य, एल्डर ( एलनस एसपीपी) , एस (फ्रेक्सीनस एसपीपी) , बीच (फैगस
एसपीपी) , बिर्च (बैटुला एसपीपी) , चैरी (प्रुनस एसपीपी) , चेस्टनेट (केस्टेनिया
एसपीपी) , एल्म (उल्मस एसपीपी) , युकेलिप्टस (युकेलिप्टस एसपीपी) ,
हिकोरी (कार्या एसपीपी) , होर्स चेस्टनेट (एसकुलस एसपीपी) , लाइम
(टिलिया एसपीपी) , मेपल ( ऐसर एसपीपी) , आक (क्यूरकर एसपीपी) ,
प्लेन वृक्ष (पलैटेनस एसपीपी) , पोपलर और एस्पन (पोपसल एसपीपी) ,
रोबिना (रोबिना एसपीपी) , टुलिपवुड (लिरोडेनड्रोन एसपीपी) , या वालनट
(जगलान एसपीपी) प्रजातिओं की अशंकुधारी काष्ठ की कम से कम
एक बाह्य प्लाई के साथ
441233 10 सजावटी प्लाईवुड घ.मी. 12.5%
441233 20 टी चेस्ट पैनल, शुकस, चाहे सेटों में पैक किए गए हों या नहीं घ.मी. 12.5%
4412 33 30 सामुद्रिक और वायुयान प्लाईवुड घ.मी. 12.5%
441233 40 ऐसे प्लाईवुड की कटाई और छंटाई, जिसकी चौड़ाई 5 सें.मी. से घ.मी. 12.5%
अधिक नहीं है
441233 90 अन्य घ.मी. 12.5%
441234 अन्य, उपशीर्ष 4412 33 के अधीन विनिर्दिष्ट नहीं किए गए अशंकुधारी
काष्ठ की कम से कम एक बाह्य प्लाई के साथ :
441234 10 सजावटी प्लाईवुड घ.मी. 12.5%
441234 20 टी चेस्ट पैनल, शूकस, चाहे सेटों में पैक किए गए हों या नहीं घ.मी. 12.5%
441234 30 सामुद्रिक और वायुयान प्लाईवुड घ.मी. 12.5%
441234 40 ऐसे प्लाईवुड की कटाई और छंटाई , जिसकी चौड़ाई 5 सें.मी. से घ.मी. 12.5%
अधिक नहीं है
441234 90 अन्य घ.मी. 12.5%
441239 अन्य अशंकुधारी काष्ठ की दोनों बाह्य प्लाइओं के साथ :
441239 10 सजावटी प्लाईवुड घ.मी. 12.5%
441239 20 टी चेस्ट पैनल, शूकस , चाहे सेटों में पैक किए गए हों या नहीं घ.मी. 12.5%
441239 30 सामुद्रिक और वायुयान प्लाईवुड घ.मी. 12.5%
441239 40 ऐसे प्लाईवुड की कटाई और छंटाई, जिसकी चौड़ाई 5 सें.मी. से घ.मी. 12.5%
अधिक नहीं है
441239 90 अन्य घ.मी. 12.5%";
(ix) शीर्ष 4418 में, टैरिफ मद 4418 71 00 से टैरिफ मद 4418 90 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर,
निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
समवेत फर्श पैनल :
4418 73 00 बांस या कम से कम बांस की ऊपरी परत के साथ (वीयर परत) कि.ग्रा. 12.5%
4418 74 00 अन्य, मोजाइक फर्श के लिए कि.ग्रा. 12.5%
अन्य, बहुपर्त वाली कि.ग्रा. 12.5%
4418 75 00
कि.ग्रा. 12.5%
4418 79 00 अन्य
अन्य:
बांस कि.ग्रा. 12.5%
4418 91 00
भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
टैरिफ मद माल का वर्णन (1) (2) 4418 99 00 अन्य
197
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
कि.ग्रा. 12.5%";
(x) शीर्ष 4419, उपशीर्ष 4419 00, टैरिफ मद 4419 0010 तथा टैरिफ मद 4419 00 20 और उनसे संबंधित
प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"4419 काष्ठ के खाने-पीने के बर्तन और रसोई के सामान
बांस के
4419 11 00 ब्रेड बोर्ड, चोपिंग बोर्ड और वैसे ही बोर्ड कि.ग्रा. 12.5%
4419 12 00 चोपस्टिक कि.ग्रा. 12.5%
4419 19 00 अन्य कि.ग्रा. 12.5%
4419 90 अन्य:
4419 90 10 ब्रेड बोर्ड, चोपिंग बोर्ड और वैसे ही बोर्ड कि.ग्रा. 12.5%
4419 90 20 चोपस्टिक कि.ग्रा. 12.5%
4419 90 90 अन्य कि.ग्रा. 12.5%";
(xi) शीर्ष 4421 , उपशीर्ष 4421 90, टैरिफ मद 4421 90 11 से टैरिफ मद 4421 90 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों
के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
अन्य:
442191 बांस के :
घुमावदार काष्ठ की चरखी, कुकड़ी , फिरकी , सिलाई के धागे की रील
और वैसे ही :
4421 91 11 सूत की मशीन के लिए कि.ग्रा. 12.5%
4421 91 12 जूट की मशीन के लिए कि.ग्रा. 12.5%
4421 91 13 रेशम पुनरुज्जीवित और सिंथेटिक फाइबर मशीन के लिए कि.ग्रा. 12.5%
4421 91 14 अन्य मशीन के लिए कि.ग्रा. 12.5%
4421 91 19 अन्य कि.ग्रा. 12.5%
4421 91 20 काष्ठ से तैयार ब्लाक कि.ग्रा. 12.5%
4421 91 30 माचिस की तिल्लियां कि.ग्रा. 12.5%
4421 91 40 पैंसिल स्लेट कि.ग्रा. 12.5%
4421 91 50 काष्ठ के भाग , अर्थात् पोत, नाव और अन्य ऐसी ही तैरने वाली संरचना कि.ग्रा. 12.5%
के लिए डांड, पैडल और पतवार
4421 91 60 खाना खाने के बर्तन और रसोई के बर्तन के रूप में प्रयुक्त घरेलू कि.ग्रा. 12.5%
सजावटी वस्तुओं के भाग
4421 91 70 संघनित काष्ठ की वस्तुएं , जो अन्यत्र सम्मिलित या विनिर्दिष्ट नहीं हैं
4421 91 90 अन्य कि.ग्रा. 12.5%
4421 99 अन्य:
घुमावदार काष्ठ की चरखी , कुकड़ी, फिरकी , सिलाई के धागे की रील
और वैसे ही :
4421 99 11 सूत की मशीन के लिए कि.ग्रा. 12.5%
4421 99 12 जूट की मशीन के लिए कि.ग्रा. 12.5%
रेशम पुनरुज्जीवित और सिंथेटिक फाइबर मशीन के लिए कि.ग्रा. 12.5%
442199 13
अन्य मशीन के लिए कि.ग्रा. 12.5%
4421 99 14
कि.ग्रा. 12.5%
4421 99 19 अन्य
काष्ठ से तैयार ब्लाक कि.ग्रा. 12.5%
442199 20
माचिस की तिल्लियां कि.ग्रा. 12.5%
4421 99 30
198
भारत का राजपत्र असाधारण
माल का वर्णन टैरिफ मद
(1)
(2)
442199 40
पैंसिल स्लेट
4421 99 50
[भाग 2-
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
कि.ग्रा. 12.5%
कि.ग्रा. 12.5%
काष्ठ के भाग , अर्थात् पोत, नाव और अन्य ऐसी ही तैरने वाली संरचनाओं
के लिए डांड, पैडल और पतवार 4421 99 60
कि.ग्रा. 12.5%
खाना खाने के बर्तन और रसोई के बर्तन के रूप में प्रयुक्त घरेलू
सजावटी वस्तुओं के भाग 4421 99 70
कि.ग्रा. 12.5%
संघनित काष्ठ की वस्तुएं , जो अन्यत्र सम्मिलित या विनिर्दिष्ट नहीं हैं
अन्य
4421 99 90
(23) अध्याय 48 में,
कि.ग्रा. 12.5%";
(i) टिप्पण 4 , "65 ग्राम/वर्ग.मी . से अधिक" अंकों , अक्षरों और शब्दों के पश्चात् (क) " केवल ऐसे कागज को ही जो 28 से.मी. से अधिक चौड़ाई की पट्टियों या रालों में हैं; या (ख) आयताकार (जिसके अंतर्गत वर्ग भी है) शीटों में है, जिसका एक पार्श्व बिना तह लगी स्थिति 28 से.मी. से अधिक और दूसरा 15 से.मी. से अधिक हैं " शब्द अतः स्थापित किए जाएंगे;
(ii ) टिप्पण 8 में , " 4801 और" अंकों और शब्द का लोप किया जाएगा;
(24) अध्याय 54 में,-
(i) शीर्ष 5402 में , शीर्ष 5402 के सामने प्रविष्टि के पश्चात् आने वाले स्तंभ (2) में प्रविष्टि के स्थान पर निम्नलिखित
रखा जाएगा , अर्थात्:-
" नायलोन या अन्य पालीएमाइड का उच्च लगिष्णुता सूत, चाहे संव्यूतित है या नहीं "
(ii) उपशीर्ष 5402 20 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात् :-
पालीएमाइड का उच्च लगिष्णुता सूत, चाहे संव्यूतित है या नहीं" ; (iii) टैरिफ मद 5402 52 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
"5402 53 00 पालिप्रापायलीन का
कि.ग्रा. 12.5%";
(iv) टैरिफ मद 5402 62 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"5402 63 00 पालिप्रापायलीन का
(25) अध्याय 55 में,-
12.5%"; कि.ग्रा.
(i ) शीर्ष 5502, उपशीर्ष 5502 00, टैरिफ मद 5502 1000 से टैरिफ मद 5502 90 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
"5502
कृत्रिम फिलामेंट टो
5502 10
सैलूलोज एसिटेट के
विस्कोस रेयान टो
5502 10 10
अन्य
5502 10 90
550290
अन्य
विस्कोस रेयान टो
5502 90 10
अन्य
5502 90 90
कि.ग्रा. 12.5%
कि.ग्रा. 12.5%
12.5% कि.ग्रा.
कि.ग्रा. 12.5%";
(ii) टैरिफ मद 5506 30 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
पॉलिप्रापायलीन का
"5506 40 00
कि.ग्रा. 12.5%";
(26) अध्याय 56 में, शीर्ष 5601 , उपशीर्ष 5601 21 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"5601
टेक्सटाइल सामग्रियों की वैडिंग और उसकी वस्तुएं ; टेक्सटाइल फाइबर जो 5 मि.मी. से अधिक लंबा नहीं है (फ्लाक) टेक्सटाइल धूल और मिल
नेप
टेक्सटाइल सामग्रियों की वैडिंग और उसकी वस्तुएं :
5601 21
सूत के:" ;
(27) अध्याय 57 के शीर्ष 5704 में, टैरिफ मद 5704 10 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित
अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"5704 20
टाइलें, जिनकी अधिकतम बाहरी सतह का क्षेत्र 0.3 वर्ग मी. से अधिक,
किंतु 1 वर्ग मी. से अधिक नहीं है भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
टैरिफ मद
माल का वर्णन
(1)
(2)
5704 20 10 सूत
5704 20 20
कला बर्तन से भिन्न, ऊन 5704 20 90
अन्य
(28) अध्याय 60 में, -
199
इकाई शुल्क की दर
(4)
(3)
वर्ग.मी. 12.5%
वर्ग.मी. 12.5%
वर्ग.मी. 12.5%";
(i) टिप्पण 3 के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"उपशीर्ष टिप्पण :
उपशीर्ष 6005 35 में पोलीथिलीन मोनोफिलामेंट या पोलियस्टर मल्टीफिलामेंट की फैब्रिक आती है, जिसका भार 30 ग्रा./ वर्ग मी . से अन्यून और 55 ग्रा. / वर्ग मी. से अनधिक है, जिसका मेस आकार 20 छिद्र/ वर्ग से.मी. से अन्यून और 100 छिद्र/ वर्ग से.मी. से अनधिक है तथा उसे अल्फा- साइपरमेथ्रिन (आईएसओ ) , क्लोरफेनापायर (आईएसओ ) , डेल्टामेथ्रिन (आईएनएन, आईएसओ), लेम्बदा- साईहालोथ्रिन (आईएसओ) , परमेथ्रिन (आईएसओ ) या पिरिमिफोस-मिथाइल (आईएसओ) से संसेचित या विलेपित किया गया है । " ;
(ii) टैरिफ मद 6005 3100 से टैरिफ मद 6005 34 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा,
अर्थात्:-
" 6005 35 00
इस अध्याय के उपशीर्ष टिप्पण 1 में विनिर्दिष्ट फैब्रिक
6005 36 00
अन्य, अतिरंजित या विरंजित 6005 37 00
अन्य, रंजित
6005 38 00
अन्य, विभिन्न रंगों के सूतों के 6005 39 00 अन्य, छापित
(29) अध्याय 63 में,-
12.5% कि.ग्रा.
12.5% कि.ग्रा.
12.5% कि.ग्रा.
12.5% कि.ग्रा.
कि.ग्रा. 12.5%";
(i) टिप्पण 3 के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
"उपशीर्ष टिप्पण:
उपशीर्ष 6304 20 में फैब्रिक आती है, जिसे अल्फा- साइपरमेथ्रिन (आईएसओ) , क्लोरफेनापायर (आईएसओ) , डेल्टामेथ्रिन (आईएनएन, आईएसओ ) , लेम्बदा- साईहालोथ्रिन (आईएसओ ) , परमेथ्रिन (आईएसओ ) या पिरिमिफोसमिथाइल (आईएसओ ) से संसेचित या विलेपित किया गया है। ";
(ii) शीर्ष 6304 में, टैरिफ मद 6304 19 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
" 6304 20 00
इ. 12.5%";
बेड नेट, इस अध्याय के उपशीर्ष टिप्पण 1 में विनिर्दिष्ट ताना बुनी
हुई फैब्रिक के
(30) अध्याय 68 के टिप्पण 1 में, खंड (ड) के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"(ड) शीर्ष 9602 की वस्तुएं, यदि वे अध्याय 96 के टिप्पण 2 (ख ) में विनिर्दिष्ट सामग्रियों से बनाई गई हैं या शीर्ष 9606 की वस्तुएं (उदाहरणार्थ बटन) ; शीर्ष 9609 की वस्तुएं (उदाहरणार्थ स्लेट पैंसिलें) ; शीर्ष 9610 की वस्तुएं (उदाहरणार्थ ड्राईंग
स्लेटें) ; या शीर्ष 9620 की वस्तुएं ( उदाहरणार्थ मोनोपोड, बाईपोड, ट्राईपोड और वैसी ही वस्तुएं) ; या " ;
(31 ) अध्याय 69 में,-
(i ) शीर्ष 6907 में, उपशीर्ष 6907 10, टैरिफ मद 69071010 , टैरिफ मद 6907 1090, टैरिफ मद 6907 90 , टैरिफ मद 6907 90 10, तथा टैरिफ मद 6907 90 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा,
अर्थात्:-
"6907
चीनी मिट्टी की पटिया और खड़ंजें, चूल्हा या भित्ति टाइलें , चीनी मिट्टी
की मोजाइक क्यूबें और वैसी ही वस्तुएं , चाहे वे किसी पृष्ठक पर हैं या
नहीं ; चीनी मिट्टी की फिनिशिंग
पटिया और खड़ंजें, चूल्हा या भित्ति टाइलें, उपशीर्ष 6907 30 और
उपशीर्ष 6907 40 से भिन्न:
6907 21 00
भार द्वारा जल अवशोषण गुणांक 0.5 % से अनधिक के 6907 22 00
12.5% वर्ग. मी.
12.5% वर्ग. मी.
भार द्वारा जल अवशोषण गुणांक 0.5% से अन्यून, किंतु 10% से अनधिक के
6907 23 00
भार द्वारा जल अवशोषण गुणांक 10 % से अधिक के वर्ग. मी. 12.5% 200
भारत का राजपत्र असाधारण
माल का वर्णन टैरिफ मद
(1)
(2)
6907 30
[भाग 2-
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
मोजाइक क्यूबें और वैसी ही, उपशीर्ष 6907 40 से भिन्न:
6907 30 10
वर्ग. मी. 12.5%
मोजाइक क्यूबें और वैसी ही , उपशीर्ष 6907 40 से भिन्न 6907 40
चीनी मिट्टी की फिनिशिंग 6907 40 10
चीनी मिट्टी की फिनिशिंग वर्ग. मी. 12.5%";
( ii) शीर्ष 6908 , उपशीर्ष 6908 10 , टैरिफ मद 6908 10 10 से टैरिफ मद 6908 10 90, उपशीर्ष 6908 90 , टैरिफ मद 6908 90 10 से टैरिफ मद 6908 90 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा ;
(32) अनुभाग 15 के टिप्पण 1 में, खंड (ड) के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"(ड) अध्याय 96 (प्रकीर्ण विनिर्मित वस्तुएं) की हाथ की छन्नी , बटन, लेखनी , पेंसिल होल्डर, लेखनी की निबें, मोनोपोड, बाईपोड, ट्राईपोड और वैसी ही वस्तुएं या अन्य वस्तुएं ; या" ;
(33) अध्याय 74 के टिप्पण 1 में, खंड (ग) के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
" (ग) मास्टर मिश्रातुएं :
ऐसी मिश्रातुएं , जिनमें, अन्य तत्वों के साथ, ताम्र, भार के आधार पर, 10 प्रतिशत से अधिक है, जो उपयोगिता की दृष्टि से आघातवर्ध्य नहीं है, और सामान्यतया जिनका उपयोग अन्य मिश्रातुएं के विनिर्माण में योज्यक के रूप में या अलौह धातुओं की धात्विकी में विआक्सीकारकों, विगंधकन कर्मकों के रूप में या वैसे ही उपयोग के लिए किया जाता है। किंतु ताम्र फास्फाइड ( फास्कर ताम्र) , जिसमें फास्फोरस भार के आधार पर, 15 प्रतिशत से अधिक है, शीर्ष 2853 के अंतर्गत आता है ।" ;
(34) अध्याय 82 में, शीर्ष 8205 के सामने आने वाले स्तंभ (2) में की प्रविष्टि में , "मशीन औजार" शब्दों के स्थान पर " मशीन औजार या वाटर जेट कटिंग मशीन " शब्द रखे जाएंगे ;
(35) अध्याय 83 में, शीर्ष 8308 के सामने आने वाली प्रविष्टि के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"8308
आधार धातु के इस प्रकार के खटके, खटकों सहित फ्रेम, बक्कल,
बक्कल-खटके, हुक , आंखें , अक्षिकाएं और वैसी ही वस्तुएं, जिनका
उपयोग वस्त्रों या वस्त्र उपसाधनों, जूतादि, आभूषणों, कलाई घड़ियों,
पुस्तकों, सायबानों, चमड़े की वस्तुओं , यात्रा की वस्तुओं या काठी या
अन्य तैयार वस्तुओं के लिए किया जाता है, आधार धातु के नलिकाकार
या द्विशाखित रिबटें, आधार धातु के मनके और सलमें";
(36) अनुभाग 16 के टिप्पण 1 में , खंड ( थ) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड रखा जाएगा, अर्थात् : -
" (थ) टाइप राइटर या उसी प्रकार के रिबन, चाहे स्पूल पर या कार्टीज में है या नहीं , (उनकी घटक सामग्री के अनुसार या शीर्ष 9612 में वर्गीकृत , यदि छाप देने के लिए स्याही से या अन्यथा तैयार की गई है) या शीर्ष 9620 की मोनोपोड, बाईपोड, ट्राईपोड और वैसी ही वस्तुएं ।" ;
(37) अध्याय 84 में,-
(i ) टिप्पण 1 में, --
(अ) खंड (च) में " या " शब्द का लोप किया जाएगा;
(आ) खंड (च) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"(छ) अनुभाग 17 की वस्तुओं के लिए रेडिएटर ; या";
(इ) विद्यमान खंड (छ) को खंड (ज) के रूप में पुनः अक्षरांकित किया जाएगा;
(ii) टिप्पण 2 के खंड (ङ) में " मशीनरी या संयंत्र" शब्दों के स्थान पर "मशीनरी संयंत्र या प्रयोगशाला उपस्कर" , शब्द रखे जाएंगे;
(iii) टिप्पण 9 में, खंड (अ) के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"(अ) अध्याय 85 के टिप्पण 9 (क) और 9(ख) , इस टिप्पण और शीर्ष 8486 में क्रमशः उपयोग किए गए "अर्धचालक युक्तियां " और " इलैक्ट्रोनिक एकीकृत परिपथ " पदों को भी लागू होंगे। तथापि, इस टिप्पण और शीर्ष 8586 के प्रयोजनों के लिए , "अर्धचालक युक्तियां " के अंतर्गत फोटो सुग्राही अर्धचालक युक्तियां और प्रकाश उत्सर्जन डायोड (एलईडी) भी आते हैं।" ;
(iv) उपशीर्ष टिप्पण में,-
(अ) निम्नलिखित उपशीर्ष टिप्पण 1 अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
भारत का राजपत्र असाधारण
201 अनुभाग 1क]
टैरिफ मद
माल का वर्णन
इकाई शुल्क की दर
(1)
(3)
(2)
(4)
" 1. उपशीर्ष 8465 20 के प्रयोजनों के लिए , " मशीनी केंद्र" पद केवल काष्ठ, कार्क, हड्डी, कठोर रबड़, कठोर प्लास्टिक या वैसी ही कठोर सामग्रियों के कर्मण के लिए लागू होता है , जो किसी मैंगजीन से स्वचालित औजार परिवर्तन द्वारा या किसी मशीनी कार्यक्रम के अनुपालन में वैसे ही विभिन्न प्रकार के मशीन प्रचालनों को कर सकता है ।" ;
(आ) विद्यमान उपशीर्ष टिप्पण 1 को उपशीर्ष टिप्पण 2 के रूप में पुनः संख्यांकित किया जाएगा और इस प्रकार पुनःसंख्यांकित उपशीर्ष टिप्पण 2 के पश्चात्, निम्नलिखित उपशीर्ष टिप्पण अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:- " 3. उपशीर्ष 8481 20 के प्रयोजनों के लिए, "तैल द्रवचालित या वातिक वाल्व" पद से ऐसे वाल्व अभिप्रेत हैं, जिनका विनिर्दिष्टतः किसी तैल द्रवचालित या वातिक प्रणाली में " तरल शक्ति" के पारेषण के लिए वहां
उपयोग किया जाता है जहां ऊर्जा स्रोत की आपूर्ति दाबानुकूलित तरल (तरल या गैस) के रूप में की जाती है ।
ये वाल्व किसी भी किस्म (उदाहरणार्थ दाब कम करने वाली किस्म, जांच किस्म) के हो सकेंगे। उपशीर्ष 8481
20 को शीर्ष 8481 के सभी अन्य उपशीर्षों पर अधिमानता होगी । " ;
(इ) विद्यमान उपशीर्ष टिप्पण 2 को उपशीर्ष टिप्पण 4 के रूप में पुनःसंख्यांकित किया जाएगा ;
(v) शीर्ष 8415 में, उपशीर्ष 8415 10 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात् :-
किसी खिड़की, दीवाल, छत या फर्श में लगाए जाने के लिए , स्वतः '8415 10
पूर्ण या " पृथक्करण प्रणाली" के लिए डिजाइन किए गए किस्म के' ;
(vi) शीर्ष 8424 में,-
(क) टैरिफ मद 8424 3000 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
" कृषि या उद्यान संबंधी फुहारे :
इ. शून्य 8424 41 00 सुबाह्य फुहारे
8424 49 00 अन्य
इ.
शून्य" ;
"8424 82 00
(ख) टैरिफ मद 8424 81 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:- कृषि या उद्यान संबंधी इ. शून्य";
(vii ) शीर्ष 8432 में,-
(क) टैरिफ मद 8432 30 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात् :- " वापित्र, रोपित्र और प्ररोपित्र :
इ. शून्य 843231 00 अरोपाई प्रत्यक्ष वापित्र , रोपित्र और प्ररोपित्र
843239 00 अन्य
इ.
शून्य";
(ख) टैरिफ मद 8432 40 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:- " खाद प्रसारक और उर्वरक वितरक :
8432 41 00 खाद प्रसारक
इ.
शून्य
इ.
843242 00 उर्वरक वितरक
शून्य" ;
(viii) उपशीर्ष 8442 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"8442 प्लेटों, मुद्रण संघटकों को तैयार करने या बनाने के लिए मशीनरी , उपकरण और उपस्कर (शीर्ष 8456 से 8465 की मशीनों से भिन्न); मुद्रण प्रयोजनों के लिए तैयार की गई प्लेटें, बेलन और लिथोमुद्रण प्रस्तर (उदाहरणार्थ समतल, कणित या पालिशकृत) " ;
(ix) शीर्ष 8456 में,-
(क) टैरिफ मद 84561000 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
" लेजर या अन्य प्रकाश या फोटोन किरण पुंज प्रक्रिया द्वारा प्रचालित:
12.5%
इ.
8456 11 00 लेजर द्वारा प्रचालित
12.5%";
इ.
8456 12 00 अन्य प्रकाश या फोटोन किरण पुंज प्रक्रिया द्वारा प्रचालित
(ख) टैरिफ मद 8456 30 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
12.5%
इ.
"8456 40 00 प्लाज्मा आर्क प्रक्रिया द्वारा प्रचालित
12.5%";
इ.
वाटर-जेट कटिंग मशीन द्वारा प्रचालित
8456 50 00
202 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग 2-
टैरिफ मद माल का वर्णन इकाई शुल्क की दर
(1) (2) (3) (4)
(x) उपशीर्ष 8459 40, टैरिफ मद 8459 40 10 से टैरिफ मद 8459 40 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान
पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
अन्य वेधन मशीनें :
8459 41 संख्यात्मकतः नियंत्रित :
8459 41 10 जिग वेधन मशीनें, क्षितिजाकार इ. 12.5%
8459 41 20 फाइन वेधन मशीनें, क्षितिजाकार इ. 12.5%
8459 41 30 फाइन वेधन मशीनें, ऊर्ध्वाकार इ. 12.5%
8459 41 90 अन्य इ. 12.5%
845949 अन्य:
8459 49 10 जिग वेधन मशीनें, क्षितिजाकार इ. 12.5%
8459 49 20 फाइन वेधन मशीनें, क्षितिजाकार इ. 12.5%
8459 49 30 फाइन वेधन मशीनें, ऊर्ध्वाकार इ. 12.5%
8459 49 90 अन्य इ. 12.5%";
(xi ) शीर्ष 8460, टैरिफ मद 8460 1100 से टैरिफ मद 8460 21 00 , उपशीर्ष 8460 29, टैरिफ मद 8460 2910
से टैरिफ मद 8460 29 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात :-
"8460 घर्षण , प्रस्तर, अपघर्षक या पालिशकरण उत्पादों द्वारा धातु या सर्मेट
के विबर्रन, तिक्षण , घर्षण , शाणन, प्रमार्जन, पालिशकरण या अन्यथा
परिसज्जन के लिए मशीन औजार ; शीर्ष 8461 की गियर कर्तन, गिअर
घर्षण या गिअर परिसज्जन मशीन से भिन्न सपाट सतह वाली घर्षण
मशीनें
सपाट सतह वाली घर्षण मशीनें :
8460 12 00 संख्यात्मकतः नियंत्रित इ. 12.5%
8460 19 00 अन्य इ. 12.5%
अन्य घर्षण मशीनें :
8460 22 00 केन्द्र रहित घर्षण मशीनें , संख्यात्मकतः नियंत्रित इ. 12.5%
8460 23 00 अन्य बेलनाकार घर्षण मशीनें, संख्यात्मकतः नियंत्रित इ. 12.5%
8460 24 00 अन्य, संख्यात्मकतः नियंत्रित इ. 12.5%
8460 29 अन्य:
8460 29 10 बेलनाकार पेषणित्र इ. 12.5%
8460 29 20 आंतरिक पेषणित्र इ. 12.5%
8460 29 30 केन्द्र रहित घर्षण मशीन इ. 12.5%
8460 29 40 प्रोपाइल पेषणित्र इ. 12.5%
8460 29 90 अन्य इ. 12.5%";
(xii) टैरिफ मद 8465 10 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"8465 20 00 मशीनी केंद्र इ. 12.5%";
(xiii ) शीर्ष 8466 में,-
(क) शीर्ष 8466 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
शीर्ष 8456 से शीर्ष 8465 तक की मशीनों के साथ पूर्णतः या प्रधानतः
"8466 उपयोग के लिए उपयुक्त पुर्जे या उपसाधन, जिनके अंतर्गत कृत्यक या औजार होल्डर, स्वतः खुलने वाले शीर्ष, विभाजक शीर्ष और मशीन के लिए अन्य विशेष संलग्नक हैं हाथ से कार्य करने के किसी भी प्रकार के औजार के लिए औजार होल्डर" ;
भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
टैरिफ मद
माल का वर्णन
(1)
(2)
"8466 30
203
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
(ख) उपशीर्ष 8466 30 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:- विभाजक शीर्ष और मशीनों के लिए अन्य विशेष संलग्नक" ;
(xiv) शीर्ष 8469, उपशीर्ष 8469 00, टैरिफ मद 8469 00 10 से टैरिफ मद 8469 00 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा ;
(xv) शीर्ष 8472 , टैरिफ मद 8472 90 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा ,
अर्थात्:-
"--- अन्य:
847290 91
शब्द प्रक्रमण मशीनें
847290 92
स्वचालित टाइपराइटर
847290 93
ब्रेल टाइपराइटर, विद्युत 847290 94
ब्रेल टाइपराइटर, अविद्युत 847290 95
अन्य टाइपराइटर, विद्युत या अविद्युत 847290 99
अन्य
(xvi) शीर्ष 8473 में,-
"8473
इ. 12.5%
इ. 12.5%
इ. शून्य
इ. शून्य
इ. 12.5%
-" 12.5%
इ.
(क) शीर्ष 8473 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:- शीर्ष 8470 से शीर्ष 8472 तक की मशीनों के साथ पूर्णतः या प्रधानतया उपयोग के लिए उपयुक्त पुर्जे और उपसाधन (आच्छदों , वहन केसों और
उसी प्रकार की वस्तुओं से भिन्न) ";
(ख) टैरिफ मद 8473 1000 और उससे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा ;
(ग) टैरिफ मद 8473 50 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात् :-
" 8473 50 00
शीर्ष 8470 से शीर्ष 8472 तक की दो या अधिक मशीनों के साथ उपयोग के लिए समान रूप से उपयुक्त पुर्जे और उपसाधन; इ. 12.5%";
(38) अध्याय 85 में,-
(i) टिप्पणों में , टिप्पण 2 के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"3. शीर्ष 8507 के प्रयोजन के लिए , "वैद्युत संचायक " पद में वे हैं, जिनमें अनुषंगी संघटक हैं, जो संचायक के ऊर्जा भंडारण और आपूर्ति या उसे नुकसान से संरक्षित करने के लिए योगदान करते हैं, जैसे वैद्युत कनेक्टर, तापमान नियंत्रक युक्तियां ( उदाहरणार्थ थरमिस्टर) और परिपथ संरक्षण युक्तियां हैं । उनमें मालों के संरक्षित कक्ष का कोई भाग भी सम्मिलित हो सकेगा, जिसमें उनका उपयोग किया जाना है।" ;
(ii) विद्यमान टिप्पण 3 , टिप्पण 4, टिप्पण 5 , टिप्पण 6 , टिप्पण 7, टिप्पण 8 और टिप्पण 9 को क्रमशः टिप्पण 4 , टिप्पण 5, टिप्पण 6, टिप्पण 7 , टिप्पण 8 , टिप्पण 9 और टिप्पण 10 के रूप में पुनःसंख्यांकित किया जाएगा ;
(iii) इस प्रकार पुनःसंख्यांकित टिप्पण 9 के खंड (ख) में उपखंड ( iii) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
"(iv) बहु संघटक एकीकृत परिपथ (एमसीओ) एक या अधिक मोनोलीथीक, संकर, या बहु- चिप एकीकृत परिपथ, जिनमें निम्नलिखित में कम से कम एक संघटक है : सिलीकान-आधारित संवेदक, प्रेरक, दोलक, संदोलक या उनका संयोजन या शीर्ष 8532 , शीर्ष 8533 , शीर्ष 8541 के अधीन वर्गीकृत वस्तुओं के कृत्य करने वाले संघटक या शीर्ष 8504 के अधीन वर्गीकृत प्रेरक, जो सभी आशयों और प्रयोजनों के लिए अविभक्त रूप से एकल निकाय में विरचित किए गए हैं जैसे एकीकृत परिपथ , जो मुद्रित परिपथ बोर्ड (पीसीबी) में संयोजन के लिए एक प्रकार के संघटक के रूप में इस्तेमाल किए गए हैं या, जो पिन, लीड, बाल, लैंड, बम्प या पैड द्वारा अन्य वाहक के रूप में ।
इस परिभाषा के प्रयोजन के लिए
1. " संघटक" शेष बहु संघटक एकीकृत परिपथ में संयोजित किए जाते हैं, तब , पृथक्, स्वतंत्र रूप से, विनिर्मित या अन्य संघटकों में एकीकृत किए जा सकेंगे ।
204
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
टैरिफ मद
माल का वर्णन
इकाई शुल्क की दर
(1)
(2)
(3) (4)
2. "सिलीकान-आधारित " से सिलीकान सबस्ट्रेट पर निर्मित, या सिलीकान सामग्रियों से बना हुआ या एकीकृत परिपथ डाई में विनिर्मित अभिप्रेत है ।
3. (क) "सिलीकान-आधारित संवेदक" में सूक्ष्म इलैक्ट्रानिकी या यांत्रिक ढांचे हैं, जो अर्द्धचालक के द्रव्य में या उसकी सतह पर सृजित किए गए हैं और उनका कृत्य भौतिक या रासायनिक मात्राओं का पता लगाना तथा उन्हें वैद्युत संकेतों में पारकर्मी करना है, जो वैद्युत गुणधर्म में परिवर्तनों या यांत्रिक संरचना के विस्थापन के कारण कारित हुए हैं । "भौतिक या रासायनिक मात्राएं " वास्तविक विश्व परिदृश्यों, जैसे दाब, ध्वनि तंरगें, त्वरण, कंपन, संचलन, उन्मुक्तता, स्ट्रेन , चुंबकीय क्षेत्र शक्ति, वैद्युत क्षेत्र शक्ति, प्रकाश , विकिरण , आर्द्रता, प्रवाह , रासायनिक संकेंद्रण आदि से संबंधित हैं।
(ख) "सिलीकान-आधारित प्रेरक " में सूक्ष्म इलैक्ट्रानिकी और यांत्रिक ढांचे हैं, जो अर्द्धचालक के द्रव्य में या उसकी सतह पर सृजित किए गए हैं और उनका कृत्य वैद्युत संकेतों को भौतिक संचलन में परिवर्तित करना है।
(ग) "सिलीकान-आधारित दोलक" संघटक हैं, जो सूक्ष्म इलैक्ट्रानिकी और यांत्रिक ढांचे हैं, जो अर्द्धचालक के द्रव्य में या उसकी सतह पर सृजित किए गए हैं और उनका कृत्य पूर्व निर्धारित आवर्ती में यांत्रिक या वैद्युत संदोलन संकेतों को सृजित करना है, जो किसी बाहरी इनपुट की प्रतिक्रिया में इन ढ़ांचों की भौतिक ज्यामिति पर निर्भर करते हैं।
(घ) "सिलीकान-आधारित संदोलक" सक्रिय संघटक हैं, जो सूक्ष्म इलैक्ट्रानिकी और यांत्रिक ढांचे हैं, जो अर्द्धचालक के द्रव्य में या उसकी सतह पर सृजित किए गए हैं और उनका कृत्य पूर्व निर्धारित आवर्ती में यांत्रिक या वैद्युत संदोलन संकेतों को सृजित करना है, जो इन ढ़ांचों की भौतिक ज्यामिति पर निर्भर करते हैं ।" ;
(iv) शीर्ष 8528 , टैरिफ मद 8528 41 00 से टैरिफ मद 8528 6900 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर,
निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
12.5% "8528 42 00
इ.
शीर्ष 8471 की किसी डाटा प्रक्रमण मशीन से सीधे जोड़े
जाने में सक्षम और उसके साथ उपयोग के लिए डिजाइन की गई
इ. 12.5% 8528 49 00 अन्य
अन्यमानीटर :
12.5%
इ.
8528 52 00
शीर्ष 8471 की किसी स्वचालित डाटा प्रक्रमण मशीन से सीधे जोड़े जाने में सक्षम और उसके साथ उपयोग के लिए डिजाइन की गई
12.5%
इ.
8528 59 00 अन्य
प्रक्षेपक :
8528 62 00
12.5%
इ.
शीर्ष 8471 की किसी स्वचालित डाटा प्रक्रमण मशीन से सीधे जोड़े जाने में सक्षम और उसके साथ उपयोग के लिए डिजाइन की गई
12.5%";
अन्य 8528 69 00
इ.
"8531 20 00
(v) टैरिफ मद 8531 20 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:- सूचक पैनल, जिनमें द्रव क्रिस्टल युक्तियां (द्र० क्रि० यु ० ) या प्रकाश
इ. 12.5%";
उत्सर्जक डायोड (प्र ०उ ०डा०) लगे हैं
(vi ) शीर्ष 8539 में,-
"8539
(क) शीर्ष 8539 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:- विद्युत फिलामेंट या विसर्जन लैंप, जिनके अंतर्गत मुहरबंद किरणपुंज लैंप यूनिट और पराबैंगनी या अवरक्त लैंप; आर्क लैंप; प्रकाश उत्सर्जन
डायोड (प्र ०उ ०डा० ) लैंप हैं" ; (ख) टैरिफ मद 8539 49 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्वात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
12.5%";
"8539 50 00
प्रकाश उत्सर्जन डायोड (प्र० उ०डा ०) लैंप इ.
(vii) शीर्ष 8541 में,
(क) शीर्ष 8541 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
"8541
डायोड, ट्रांजिस्टर और वैसी ही अर्धचालक युक्तियां; प्रकाश सुग्राही अर्धचालक युक्तियां , जिनके अंतर्गत प्रकाश वोल्टीय सेल हैं, चाहे भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
टैरिफ मद माल का वर्णन (1) (2)
205
206 भारत का राजपत्र असाधारण [भाग 2-
टैरिफ मंद माल का वर्णन इकाई शुल्क की दर इकाई शुल्क की दर
(1) (2) (3) (3) (4) (4)
870220 18 अन्य, वातानुकूलित मोडयूलों में समुच्चयित या पैनलों में तैयार हैं या नहीं, प्रकाश उत्सर्जक इ. 27%
870220 19 डायोड, आरूढ़ दाब विद्युत क्रिस्टल" ; अन्य, गैर-वातानुकूलित इ. 27%
(ख) टैरिफ मद 8541 10 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अन्य:
870220 21 अर्थात्:- एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित इ. 12.5%
8702 20 22 "8541 10 00 एकीकृत मोनोकोक यान, गैर-वातानुकूलित डायोड, प्रकाश सुग्राही या प्रकाश उत्सर्जक डायोड से भिन्न इ. इ. 12.5%"; 12.5%
8702 20 28 (ग) उपशीर्ष 8541 40 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात् :- अन्य, वातानुकूलित इ. 12.5%
8702 20 29 " 8541 40 अन्य, गैर-वातानुकूलित प्रकाश सुग्राही अर्धचालक युक्तियां, जिनके अंतर्गत प्रकाश वोल्टीय इ. 12.5%
8702 30 सेल हैं, चाहे मोड्यूलों में समुच्चयित या पैनलों में तैयार हैं या नहीं, स्फुलिंग प्रज्वलन अंतरदहन प्रत्यागामी पिस्टन इंजन और नोदन के
प्रकाश उत्सर्जक डायोड"; लिए मोटर के रूप में वैद्युत मोटर, दोनों के साथ :
(39) अनुभाग 17 के टिप्पण 2 में खंड (ङ) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड रखा जाएगा , अर्थात् :- 13 व्यक्तियों से, जिसमें चालक भी है, अनधिक के परिवहन के लिए यान :
8702 30 11 " (ङ) शीर्ष 8401 से शीर्ष 8479 की मशीनें और उपकरण या उनके पुर्जे , जिसमें इस अनुभाग की वस्तुओं के लिए एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित इ. 27%
8702 30 12 रेडिएटरों से भिन्न, शीर्ष 8481 या शीर्ष 8482 की वस्तुएं या, उस दशा में, जब वे इंजन या मोटरों के अभिन्न पुर्जे हैं, शीर्ष एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित इ. 27%
8702 30 18 8483 की वस्तुएं; अन्य, वातानुकूलित इ. 27%
8702 30 19 (40) अध्याय 87 में,- अन्य, गैर-वातानुकूलित इ. 27%
(i) शीर्ष 8701 में,- अन्य:
870230 21 (क) टैरिफ मद 8701 1000 के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:- एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित इ. 12.5%
870230 22 "8701 10 00 एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित एकल धुरा ट्रेक्टर इ. इ. 12.5% 12.5%";
870230 28 (ख) उपशीर्ष 8701 90 , टैरिफ मद 8701 90 10 और टैरिफ मद 8701 90 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों अन्य, वातानुकूलित इ. 12.5%
870230 29 के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:- अन्य, गैर-वातानुकूलित इ. 12.5%
870240 नोदन के लिए केवल वैद्युत मोटर के साथ : अन्य, इंजन शक्ति के :
8701 91 00 13 व्यक्तियों से, जिसमें चालक भी है, अनधिक के परिवहन के लिए यान : 18 कि.वा. से अनधिक इ. 12.5%
8702 40 11 8701 92 00 एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित 18 कि.वा. से अधिक, किंतु 37 कि.वा. से अनधिक इ. इ. 12.5% 12.5%
870240 12 8701 93 00 एकीकृत मोनोकोक यान , गैर- वातानुकूलित 37 कि.वा. से अधिक, किंतु 75 कि.वा. से अनधिक इ. इ. 12.5% 12.5%
870240 18 8701 94 00 अन्य, वातानुकूलित 75 कि.वा. से अधिक, किंतु 130 कि.वा. से अनधिक इ. इ. 12.5% 12.5%
870240 19 8701 95 00 अन्य, गैर- वातानुकूलित 130 कि.वा. से अधिक इ. इ. 12.5% 12.5%";
(ii ) शीर्ष 8702 , उपशीर्ष 8702 10, टैरिफ मद 8702 10 11 से टैरिफ मद 8702 1099, उपशीर्ष 8702 90, टैरिफ अन्य:
8702 40 21 मद 8702 90 11 से टैरिफ मद 8702 90 99 के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:- एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित इ. 12.5%
8702 40 22 "8702 10 एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित केवल संपीड़न- प्रज्वलन अंतरदहन पिस्टन इंजन (डीजल या अर्धडीजल सहित) : इ. 12.5%
870240 28 अन्य, वातानुकूलित 13 व्यक्तियों से , जिसमें चालक भी है, अनधिक के परिवहन के लिए यान : इ. 12.5%
870240 29 अन्य, गैर-वातानुकूलित एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित इ. इ. 12.5% 27%
870210 11
8702 90 8702 10 12 अन्य: एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित इ. 27%
8702 10 18 अन्य, वातानुकूलित 13 व्यक्तियों से, जिसमें चालक भी है , अनधिक के परिवहन के लिए यान: इ. 27%
870290 11 8702 10 19 एकीकृत मोनोकोक यान , वातानुकूलित अन्य, गैर-वातानुकूलित इ. 27%
8702 90 12 एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित अन्य:
8702 90 18 870210 21 अन्य, वातानुकूलित एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित इ. 12.5%
8702 90 19 870210 22 अन्य, गैर-वातानुकूलित एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित इ. 12.5%
8702 10 28 अन्य: अन्य, वातानुकूलित इ. 12.5%
870290 21 अन्य, गैर-वातानुकूलित एकीकृत मोनोकोक यान , वातानुकूलित इ. 12.5%
8702 10 29
870290 22 8702 20 एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित संपीड़न- प्रज्वलन अंतरदहन पिस्टन इंजन (डीजल या अर्धडीजल)
8702 90 28 और नोदन के लिए मोटर के रूप में वैद्युत मोटर, दोनों के साथ : अन्य, वातानुकूलित
870290 29 अन्य, गैर-वातानुकूलित 13 व्यक्तियों से, जिसमें चालक भी है, अनधिक के परिवहन के लिए यान :
इ. 27%
8702 20 11 एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित
एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित इ. 27%
870220 12
(iii) शीर्ष 8703 में,-
इ. 27% इ. 27% इ. 27% इ. 27% इ. 27% इ. 27% इ. 27% इ. 27%";
(क) टैरिफ मद 8703 10 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् आने वाले स्तंभ (2) में की प्रविष्टि में, "जिनमें " शब्द के पश्चात् "केवल " शब्द अंतःस्थापित किया जाएगा;
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
टैरिफ मद माल का वर्णन (1) (2)
207
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
(ख) टैरिफ मद 8703 24 99 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् आने वाले स्तंभ (2) में की प्रविष्टि में,
" प्रज्वलन अंतर्दहन " शब्दों के स्थान पर " केवल प्रज्वलन अन्तर्दहन " शब्द रखे जाएंगे ;
(ग) टैरिफ मद 8703 31 20 और टैरिफ मद 8703 32 20 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा;
(घ) टैरिफ मद 8703 33 99 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा ,
अर्थात्ः-
"8703 40 अन्य यान, जिनमें विद्युत शक्ति के बाह्य स्रोत पर डाट लगाकर चार्ज
किए जाने के योग्य मोटरों से भिन्न स्फुलिंग प्रज्वलन अंतर्दहन प्रत्यागामी
पिस्टन इंजन और नोदन के लिए मोटरों के रूप में विद्युत मोटर दोनों हैं
:
8703 40 10 सात व्यक्तियों से अधिक के परिवहन के लिए मुख्य रूप से अभिकल्पित इ. 30%
यान, जिनमें चालक भी है
8703 40 20 विशेषीकृत परिवहन यान जैसे एम्बुलेंस, कैदी यान और उसी प्रकार के यान इ. 30%
8703 40 30 मोटरकारें इ. 30%
8703 40 40 तीन पहिया यान इ. 24%
8703 40 90 अन्य इ. 30%
8703 50 अन्य यान , जिनमें विद्युत शक्ति के बाह्य स्रोत पर डाट लगाकर चार्ज
किए जाने के योग्य मोटरों से भिन्न स्फुलिंग प्रज्वलन अंतर्दहन पिस्टन
इंजन (डीजल या अर्ध डीजल) और नोदन के लिए मोटरों के रूप में
विद्युत मोटर दोनों हैं :
8703 50 10 सात व्यक्तियों से अधिक के परिवहन के लिए मुख्य रूप से अभिकल्पित इ. 30%
यान, जिनमें चालक भी है
8703 50 20 विशेषीकृत परिवहन यान जैसे एम्बुलेंस, कैदी यान और उसी प्रकार के यान इ. 30%
8703 50 30 मोटर कारें इ. 30%
8703 50 40 तीन पहिया यान इ. 24%
8703 50 90 अन्य इ . 30%
8703 60 अन्य यान, जिनमें विद्युत शक्ति के बाह्य स्रोत पर डाट लगाकर चार्ज
किए जाने के योग्य मोटरों से भिन्न स्फुलिंग प्रज्वलन अंतर्दहन प्रत्यागामी
पिस्टन इंजन और नोदन के लिए मोटरों के रूप में विद्युत मोटर दोनों हैं:
8703 60 10 सात व्यक्तियों से अधिक परिवहन के लिए मुख्य रूप से अभिकल्पित इ. 30%
यान , जिनमें चालक भी है
8703 60 20 विशेषीकृत परिवहन यान जैसे एम्बुलेंस, कैदी यान और उसी प्रकार के यान इ. 30%
8703 60 30 मोटर कारें इ. 30%
8703 60 40 तीन पहिया यान इ. 24%
8703 60 90 अन्य इ. 30%
8703 70 अन्य यान, जिनमें संपीड़न विद्युत शक्ति के बाह्य स्रोत पर डाट
लगाकर चार्ज किए जाने के योग्य मोटरों से भिन्न स्फुलिंग प्रज्वलन
अंतर्दहन प्रत्यागामी पिस्टन इंजन (डीजल या अर्ध डीजल) और नोदन के
लिए मोटरों के रूप में विद्युत मोटर दोनों हैं :
सात व्यक्तियों से अधिक परिवहन के लिए मुख्य रूप से अभिकल्पित इ . 30%
8703 70 10
यान, जिनमें चालक भी है
विशेषीकृत परिवहन यान जैसे एम्बुलेंस, कैदी यान और उसी प्रकार के यान इ. 30%
8703 70 20
मोटर कारें इ. 30%
8703 70 30
208
भारत का राजपत्र असाधारण
टैरिफ मद
माल का वर्णन
(1)
(2)
8703 70 40 तीन पहिया यान
8703 70 90 अन्य
8703 80
अन्य यान, जिनमें नोदन के लिए केवल विद्युत मोटर है :
8703 80 10
[भाग 2
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
इ. 24
इ. 30%
इ. 12.5%
सात व्यक्तियों से अधिक के परिवहन के लिए मुख्य रूप से अभिकल्पित यान, जिनमें चालक भी है 8703 80 20
इ. 12.5%
विशेषीकृत परिवहन यान जैसे एम्बुलेंस, कैदी यान और उसी प्रकार के यान
8703 80 30 मोटर कारें
8703 80 40 तीन पहिया यान
8703 80 90 अन्य
इ. 12.5%
इ. 12.5%
इ. 30%";
(ङ) उपशीर्ष 8703 90 , टैरिफ मद 8703 90 10 और टैरिफ मद 8703 90 90 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों
के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात् :-
"8703 90 00
अन्य
(iv) शीर्ष 8711 में,-
इ. 30%";
(क) टैरिफ मद 8711 5000 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात् निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्ः-
"8711 60
नोदन के लिए विद्युत मोटर सहित 8711 60 10
मोटर साइकिल
8711 60 20 स्कूटर
8711 60 30 मोपेड
8711 60 90 अन्य
इ. 12.5% इ. 12.5%
इ. 12.5%
इ. 12.5%";
(ख) उपशीर्ष 8711 90, टैरिफ मद 87119010 से टैरिफ मद 8711 90 91 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों
के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
अन्य:
"8711 90
8711 90 10
साइडकारें
8711 90 90 अन्य
(41) अध्याय 90 में,-
(i) टिप्पण 1 में,-
इ. 12.5%
इ. 12.5%";
(अ) खंड (छ) में "मशीनी औजारों " शब्दों के पश्चात् " या जलधारा कर्तन मशीनों " शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे ;
(आ) खंड (ट) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात्:-
"(ठ) शीर्ष 9620 के मोनोपोड, बायोपोड, ट्राइपोड और वैसी ही वस्तुएं; " ;
(इ) वर्तमान खंड (ठ) और (ड) को क्रमशः (ड) और (ढ) के रूप में पुनःअक्षरांकित किया जाएगा;
( ii ) शीर्ष 9006 में , टैरिफ मद 9006 10 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों का लोप किया जाएगा;
) अध्याय 92 के टिप्पण 1 में, खंड (घ ) के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
(42
" (घ) संगीत वाद्ययंत्रों की सफाई के लिए ब्रुस ( शीर्ष 9603 ) मोनोपोड, बायोपोड, ट्राइपोड और वैसी ही वस्तुएं
(शीर्ष 9620); या" ;
(43) अध्याय 94 में,-
(i) टिप्पण 1 में,-
(अ) खंड (ट) में " या " शब्द का लोप किया जाएगा;
(आ) खंड (ठ) और अंत में " या " शब्द रखा जाएगा;
भारत का राजपत्र असाधारण
209
अनुभाग 1क]
टैरिफ मद माल का वर्णन इकाई शुल्क की दर
(1) (2) (3) (4)
(इ) खंड (ठ) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किया जाएगा , अर्थात् :-
"(ड) मोनोपोड, बायोपोड, ट्राइपोड और वैसी ही वस्तुएं ( शीर्ष 9620) ; " ;
(ii) टैरिफ मद 9401 51 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात् :-
"9401 52 00 बांस के इ. 12.5%
9401 53 00 रेटन के इ. 12.5%";
( iii) टैरिफ मद 9403 81 00 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्ः-
"9401 82 00 बांस के इ. 12.5%
9401 83 00 रेटन के इ. 12.5%";
(iv) शीर्ष 9406, उपशीर्ष 9406 00 , टैरिफ मद 9406 00 11 से टैरिफ मद 940600 99 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों
के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
"9406 पूर्वसंविरचित निर्माण
9406 10 काष्ठ का:
9406 10 10 ग्रीन हाउस इ. 12.5%
9406 10 20 शीतागार के लिए इ. 12.5%
9406 10 30 इनसिल जल भंडारण के लिए साइलो इ. 12.5%
9406 10 90 अन्य इ. 12.5%
9406 90 अन्य:
9406 90 10 ग्रीन हाउस इ. 12.5%
9406 90 20 शीतागार के लिए इ. 12.5%
9406 90 30 इनसिल जल भंडारण के लिए साइलो इ. 12.5%
9406 90 90 अन्य इ. 12.5%";
(44) अध्याय 95 में,-
(i ) टिप्पण 1 में, -
(अ) खंड (ङ) के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
" (ङ) अध्याय 61 या अध्याय 62 की टैक्सटाइल फैंसी पोशाक; अध्याय 61 या अध्याय 62 के टैक्सटाइल
के क्रीड़ा के कपड़े और परिधानों की विशेष वस्तुएं, चाहे उनमें कोहनी, घुटने या उरुसन्धि क्षेत्रों (उदाहरणार्थ
तारदार पहनावा या सोसर गोलकीपर जर्सी) में पैडों या पैडिंग जैसे आनुषंगिक रूप से संरक्षणकारी संघटक
समाविष्ट हैं या नहीं;";
(आ) खंड (न) के पश्चात्, निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
" (प) मोनोपोड, बायोपोड, ट्राइपोड और वैसी ही वस्तुए (शीर्ष 9620) ;" ;
(इ) विद्यमान खंड (प) और खंड (फ) को क्रमशः खंड (फ) और खंड (ब) के रूप में पुनः अक्षरांकित किया जाएगा;
(45) अध्याय 96 में, टैरिफ मद 961900 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा,
अर्थात्:-
मोनोपोड, बायोपोड, ट्राइपोड और वैसी ही वस्तुएं इ. 12.5%"
"9620 00 00
210
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
नवीं अनुसूची
(धारा 147 देखिए)
टैरिफ मद माल का वर्णन इकाई शुल्क की दर
(1) (2) (3) (4)
केंद्रीय उत्पाद शुल्क टैरिफ अधिनियम की दूसरी अनुसूची में,-
(i ) शीर्ष 4011 में, टैरिफ मद 4011 61 00 से टैरिफ मद 40.11 99 00 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर,
निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
"4011 50 90 अन्य इ. 8
4011 70 00 इस प्रकार के, जिनका उपयोग कृषि या वानिकी यानों और मशीनों
में किया जाता है इ. 8%
4011 80 00 इस प्रकार के जिनका उपयोग सन्निर्माण , खनन या औद्योगिक उठाई - धराई
यानों और मशीनों में किया जाता है इ. 8%
4011 90 00 अन्य इ. 8%";
( ii) उपशीर्ष 5402 20 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात्:-
"5402 20 पालिस्टर का उच्च लगिष्णुता सूत, चाहे संव्यूतित है या नहीं " ;
(iii) शीर्ष 8415, उपशीर्ष 8415 10 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा , अर्थात् :-
"8415 10 किसी खिड़की, दीवाल, छत या फर्श में लगाए जाने के लिए , स्वतः
पूर्ण या " पृथक्करण प्रणाली " के लिए डिजाइन किए गए किस्म के" ;
(iv) उपशीर्ष 870210, टैरिफ मद 8702 10 11 से टैरिफ मद 8702 1099, उपशीर्ष 8702 90 , टैरिफ मद 8702
90 11 से टैरिफ मद 8702 90 20 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:-
" 8702 10 केवल संपीडन- प्रज्वलन अंतरदहन पिस्टन इंजन (डीजल या अर्धडीजल सहित) :
13 व्यक्तियों से, जिसमें चालक भी है , अनधिक के परिवहन के लिए यान :
8702 10 11 एकीकृत मोनोकोक यान , वातानुकूलित
8702 10 12 एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित
8702 10 18 अन्य, वातानुकूलित
8702 10 19 अन्य, गैर- वातानुकूलित
अन्य:
8702 10 21 एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित
8702 10 22 एकीकृत मोनोकोक यान , गैर- वातानुकूलित
8702 10 28 अन्य, वातानुकूलित
8702 10 29 अन्य, गैर-वातानुकूलित
870220
इ. 8% इ. 8% इ. 8% इ. 8% इ. 8% इ. 8% इ. 8% इ. 8%
संपीड़न- प्रज्वलन अंतरदहन पिस्टन इंजन (डीजल या अर्धडीजल सहित)
और नोदन के लिए मोटर के रूप में वैद्युत मोटर, दोनों के साथ :
13 व्यक्तियों से, जिसमें चालक भी है, अनधिक के परिवहन के लिए यान :
8702 20 11
एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित
8702 20 12
एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित
8702 20 18
अन्य, वातानुकूलित
8702 20 19
अन्य, गैर- वातानुकूलित
अन्य:
8702 20 21
एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित
870220 22
एकीकृत मोनोकोक यान , गैर- वातानुकूलित इ. 8%
8
इ.
8% इ.
8
इ.
इ. 8%
इ. 8% भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
टैरिफ मद माल का वर्णन. (1) (2) 870220 28 अन्य, वातानुकूलित 8702 20 29 अन्य, गैर-वातानुकूलित 8702 30
211
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
इ. 8%
इ. 8%
स्फुलिंग प्रज्वलन अंतरदहन प्रत्यागामी पिस्टन इंजन और नोदन के लिए
मोटर के रूप में वैद्युत मोटर, दोनों के साथ :
13 व्यक्तियों से, जिसमें चालक भी है, अनधिक के परिवहन के लिए यान:
8702 30 11 एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित इ. 8
8702 30 12 एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित इ. 8%
870230 18 अन्य, वातानुकूलित इ. 8%
8702 30 19 अन्य, गैर-वातानुकूलित इ. 8%
अन्य:
870230 21 एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित इ. 8%
8702 30 22 एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित इ. 8%
8702 30 28 अन्य, वातानुकूलित इ. 87%
870230 29 अन्य, गैर-वातानुकूलित इ. 8%
8702 40 नोदन के लिए केवल वैद्युत मोटर के साथ :
13 व्यक्तियों से, जिसमें चालक भी है, अनधिक के परिवहन के लिए यान :
8702 40 11 एकीकृत मोनोकोक यान , वातानुकूलित इ. 8%
8702 40 12 एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित इ. 8%
8702 40 18 अन्य, वातानुकूलित इ. 8%
8702 40 19 अन्य, गैर-वातानुकूलित इ. 8%
अन्य:
870240 21 एकीकृत मोनोकोक यान , वातानुकूलित इ. 8%
8702 40 22 एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित इ. 8%
8702 40 28 अन्य, वातानुकूलित इ. 8%
8702 40 29 अन्य, गैर-वातानुकूलित इ. 8%
8702 90 अन्य:
13 व्यक्तियों से, जिसमें चालक भी है, अनधिक के परिवहन के लिए यान :
8702 90 11 एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित
8702 90 12 एकीकृत मोनोकोक यान , गैर- वातानुकूलित
8702 90 18 अन्य, वातानुकूलित
8702 90 19 अन्य, गैर-वातानुकूलित
अन्य:
870290 21 एकीकृत मोनोकोक यान , वातानुकूलित
870290 22 एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित
8702 90 28 अन्य, वातानुकूलित
8702 90 29 अन्य, गैर-वातानुकूलित
8702 90 -अन्य
(v) उपशीर्ष 8703 10 में,-
इ. 8% इ. 8% इ. 8% इ. 8% इ. 8% इ. 8% इ. 8% इ. 8%";
(क) टैरिफ मद 8703 10 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, आने वाले स्तंभ ( 2) में की प्रविष्टि में , "जिनमें" शब्द के पश्चात्, " केवल" शब्द अंतःस्थापित किया जाएगा ;
212
भारत का राजपत्र असाधारण
टैरिफ मद माल का वर्णन (1) (2)
[भाग 2-
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
(ख) टैरिफ मद 8703 24 99 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, आने वाले स्तंभ (2) में की प्रविष्टि में ,
"यान, " शब्द के पश्चात्, "केवल " शब्द अंतःस्थापित किया जाएगा ;
(ग) टैरिफ मद 8703 33 99 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा ,
अर्थात्:-
"8703 40 अन्य यान, जिनमें विद्युत शक्ति के बाह्य स्रोत पर डाट लगाकर चार्ज
किए जाने के योग्य मोटरों से भिन्न स्फुलिंग प्रज्वलन अंतर्दहन प्रत्यागामी
पिस्टन इंजन और नोदन के लिए मोटरों के रूप में विद्युत मोटर दोनों हैं:
8703 40 10 सात व्यक्तियों से अधिक परिवहन के लिए मुख्य रूप से अभिकल्पित इ. 8%
यान, जिनमें चालक भी है
8703 40 20 विशेषीकृत परिवहन यान जैसे एम्बुलेंस, कैदी यान और उसी प्रकार के यान इ. 8 %
8703 40 30 मोटर कारें इ. 8%
8703 40 40 तीन पहिया यान इ. 8%
8703 40 90 अन्य इ. 8%
8703 50 अन्य यान, जिनमें विद्युत शक्ति के बाह्य स्रोत पर डाट लगाकर चार्ज
किए जाने के योग्य मोटरों से भिन्न स्फुलिंग प्रज्वलन अंतर्दहन पिस्टन
इंजन (डीजल या अर्ध डीजल) और नोदन के लिए मोटरों के रूप में
वैद्युत मोटर दोनों हैं:
8703 50 10 सात व्यक्तियों से अधिक के परिवहन के लिए मुख्य रूप से अभिकल्पित इ. 8
यान, जिनमें चालक भी है
8703 50 20 विशेषीकृत परिवहन यान जैसे एम्बुलेंस, कैदी यान और उसी प्रकार के यान इ. 8%
8703 50 30 मोटर कारें इ. 8
8703 50 40 तीन पहिया यान इ. 8%
8703 50 90 अन्य इ. 8%
8703 60 अन्य यान , जिनमें विद्युत शक्ति के बाह्य स्रोत पर डाट लगाकर चार्ज
किए जाने के योग्य मोटरों से भिन्न स्फुलिंग प्रज्वलन अंतर्दहन प्रत्यागामी
पिस्टन इंजन और नोदन के लिए मोटरों के रूप में विद्युत मोटर दोनों हैं:
8703 60 10 सात व्यक्तियों से अधिक परिवहन के लिए मुख्य रूप से अभिकल्पित इ . 8%
यान, जिनमें चालक भी है
8703 60 20 विशेषीकृत परिवहन यान जैसे एम्बुलेंस , कैदी यान और उसी प्रकार के यान इ. 8
8703 60 30 मोटरकारें इ. 8%
8703 60 40 तीन पहिया यान इ. 8%
अन्य इ. 8%
8703 60 90
8703 70 अन्य यान, जिनमें संपीड़न विद्युत शक्ति के बाह्य स्रोत पर डाट
लगाकर चार्ज किए जाने के योग्य मोटरों से भिन्न स्पुलिंग प्रज्वलन
अंतर्दहन प्रत्यागामी पिस्टन इंजन (डीजल या अर्ध डीजल) और नोदन के
लिए मोटरों के रूप में विद्युत मोटर दोनों हैं :
8703 70 10 सात व्यक्तियों से अधिक परिवहन के लिए मुख्य रूप से अभिकल्पित
यान, जिनमें चालक भी है इ . 8
विशेषीकृत परिवहन यान जैसे एम्बुलेंस , कैदी यान और वैसी ही इ. 8%
8703 70 20
8703 70 30 मोटर कारें इ. 8%
भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1 क]
माल का वर्णन टैरिफ मद
(1)
(2)
8703 70 40
तीन पहिया यान
8703 70 90
अन्य
8703 80
213
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
8% इ.
इ. 8
अन्य यान , जिनमें केवल नोदन के लिए विद्युत मोटर है :
8703 80 10
इ. 8%
सात व्यक्तियों से अधिक परिवहन के लिए मुख्य रूप से अभिकल्पित यान, जिनमें चालक भी है
8703 80 20
इ. 8%
विशेषीकृत परिवहन यान जैसे एम्बुलेंस , कैदी यान और वैसी ही
8703 80 30
मोटर कारें
8703 80 40
तीन पहिया यान
8703 80 90
अन्य
इ. 87
इ. 8%
8%";
इ.
(vi) उपशीर्ष 870390 , टैरिफ मद 8703 90 10 और टैरिफ मद 8703 9090 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात् :-
"8703 90 00
अन्य
8" ।
इ.
214
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
दसवीं अनुसूची
(धारा 160 देखिए)
संशोधन अधिसूचना सं०
(1)
(2)
उक्त अधिसूचना के स्पष्टीकरण में,- संशोधन के प्रभावी होने की अवधि
(3)
1 जुलाई, 2012 से 2 फरवरी , 2016 (दोनों दिन सम्मिलित है) ।
(क) खंड (अ) में, उपखंड (i ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपखंड रखा जाएगा और रखा गया समझा जाएगा ,
सा.का.नि. 519(अ) , तारीख 29जून, 2012 [ सं॰ 41/ 2012-सेवा कर, तारीख 29 जून, 2012]
अर्थात्:-
"( i) शुल्क्यमाल की दशा में ऐसी कराधेय सेवाएं जिनका उक्त माल कारखाने या किसी अन्य स्थान या उत्पादन या विनिर्माण परिसर के बाहर उनके निर्यात के लिए उपयोग किया जाता है ;" ;
(ख) खंड (आ) का लोप किया जाएगा ।
214 215
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1 क]
ग्यारहवीं अनुसूची (धारा 162 देखिए)
मद स०
माल का वर्णन
दर
(1)
(2)
(3)
4% 1 1. केंद्रीय उत्पाद शुल्क टैरिफ अधिनियम, 1985 ( 1986 का 5) की पहली अनुसूची के शीर्ष के शीर्ष 8703 के अधीन आने वाले सभी माल ।
215 216
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
बारहवीं अनुसूची
[धारा 231 (i ) देखिए।
वित्त अधिनियम, 2001 की सातवीं अनुसूची में, -
(क) स्तंभ (1 ) में, टैरिफ मद " 2403 10 10 " के स्थान पर, टैरिफ मद "2403 11 10 " प्रतिस्थापित की जाएगी;
(ख) स्तंभ (1 ) में, टैरिफ मद " 2403 10 20" के स्थान पर, टैरिफ मद " 2403 19 10" प्रतिस्थापित की जाएगी;
(ग) स्तंभ (1 ) में, टैरिफ मद " 2403 10 31 " के स्थान पर, टैरिफ मद "2403 19 21 " प्रतिस्थापित की जाएगी;
(घ) स्तंभ (1 ) में, टैरिफ मद " 2403 10 39 " के स्थान पर, टैरिफ मद " 2403 19 29 " प्रतिस्थापित की जाएगी;
(ङ) स्तंभ (1 ) में , टैरिफ मद "2403 10 90 " के स्थान पर, टैरिफ मद "2403 19 90" प्रतिस्थापित की जाएगी ।
भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
217
तेरहवीं अनुसूची
[धारा 231 (ii ) देखिए।
वित्त अधिनियम, 2001 की सातवीं अनुसूची में, -
(i ) उपशीर्ष 870210, टैरिफ मद 8702 10 11 से टैरिफ मद 8702 10 19, उपशीर्ष 8702 90 , टैरिफ मद 8702 90 11 से टैरिफ मद 8702 90 20 और उनसे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्:---
टैरिफ मद माल का विवरण इकाई शुल्क की दर
"8702 10 केवल संपीड़न- प्रज्वलन अंतरदहन पिस्टन इंजन (डीजल या अर्धडीजल सहित) :
13 व्यक्तियों से , जिसमें चालक भी है, अनधिक के परिवहन के लिए यान:
8702 10 11 एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित इ. 1%
8702 10 12 एकीकृत मोनोकोक यान, गैर-वातानुकूलित इ. 1%
8702 10 18 अन्य, वातानुकूलित इ. 1%
8702 10 19 अन्य, गैर-वातानुकूलित इ . 1%
8702 20 संपीड़न- प्रज्वलन अंतरदहन पिस्टन इंजन (डीजल या अर्धडीजल सहित)
और नोदन के लिए मोटर के रूप में वैद्युत मोटर, दोनों के साथः
13 व्यक्तियों से, जिसमें चालक भी है, अनधिक के परिवहन के लिए यान :
8702 20 11 एकीकृत मोनोकोक यान , वातानुकूलित इ. 1%
8702 20 12 एकीकृत मोनोकोक यान , गैर- वातानुकूलित इ . 1%
8702 20 18 अन्य, वातानुकूलित इ. 1%
8702 20 19 अन्य, गैर-वातानुकूलित इ. 1%
8702 30 स्फुलिंग प्रज्वलन अंतरदहन प्रत्यागामी पिस्टन इंजन और नोदन के
लिए मोटर के रूप में वैद्युत मोटर, दोनों के साथ :
13 व्यक्तियों से, जिसमें चालक भी है, अनधिक के परिवहन के लिए यान :
870230 11 एकीकृत मोनोकोक यान , वातानुकूलित इ. 1%
870230 12 एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित इ. 1%
8702 30 18 अन्य, वातानुकूलित इ. 1%
8702 30 19 अन्य, गैर-वातानुकूलित इ. 1%
8702 40 नोदन के लिए केवल वैद्युत मोटर के साथ :
13 व्यक्तियों से , जिसमें चालक भी है, अनधिक के परिवहन के लिए यान :
8702 40 11 एकीकृत मोनोकोक यान , वातानुकूलित इ. 1%
870240 12 एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित इ. 1%
870240 18 अन्य, वातानुकूलित इ. 1%
8702 40 19 अन्य, गैर-वातानुकूलित इ. 1%
8702 90 अन्य:
13 व्यक्तियों से, जिसमें चालक भी है, अनधिक के परिवहन के लिए यान :
8702 90 11 एकीकृत मोनोकोक यान, वातानुकूलित इ. 1%
8702 90 12 एकीकृत मोनोकोक यान, गैर- वातानुकूलित इ. 1%
8702 90 18 अन्य, वातानुकूलित इ. 1%
870290 19 अन्य, गैर-वातानुकूलित इ . 1%";
(ii) टैरिफ मद 8703 10 90 और उससे संबंधित प्रविष्टि के पश्चात्, आने वाले स्तंभ (2) में की प्रविष्टि में, "जिनमें"
शब्द के पश्चात्, " केवल" शब्द अंतःस्थापित किया जाएगा ;
(iii) टैरिफ मद 8703 24 99 और उससे संबंधित प्रविष्टि के पश्चात्, आने वाले स्तंभ (2) में की प्रविष्टि में , "यान" शब्द के पश्चात्, "केवल" शब्द अंतःस्थापित किया जाएगा ;
218
भारत का राजपत्र असाधारण
टैरिफ मद माल का वर्णन (1) (2)
[भाग 2-
इकाई शुल्क की दर
(3) (4)
(iv) टैरिफ मद 8703 33 99 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
" 8703 40 अन्य यान, जिनमें विद्युत शक्ति के बाह्य स्रोत पर डाट लगाकर चार्ज
किए जाने के योग्य मोटरों से भिन्न स्फुलिंग प्रज्वलन अंतर्दहन
प्रत्यागामी पिस्टन इंजन और नोदन के लिए मोटरों के रूप में विद्युत
मोटर दोनों हैं :
8703 40 10 सात व्यक्तियों से अधिक परिवहन के लिए मुख्य रूप से अभिकल्पित
यान, जिनमें चालक भी है इ. 1%
8703 40 20 विशेषीकृत परिवहन यान जैसे एम्बुलेंस, कैदी यान और उसी प्रकार के यान इ. 1%
8703 40 30 मोटरकारें इ. 1%
8703 4040 तीन पहिया यान इ. 1%
8703 40 90 अन्य इ. 1%
8703 50 अन्य यान, जिनमें विद्युत शक्ति के बाह्य स्रोत पर डाट लगाकर चार्ज
किए जाने के योग्य मोटरों से भिन्न स्फुलिंग प्रज्वलन अंतर्दहन
पिस्टन इंजन (डीजल या अर्ध डीजल) और नोदन के लिए मोटरों
के रूप में विद्युत मोटर दोनों हैं :
8703 50 10 सात व्यक्तियों से अधिक के परिवहन के लिए मुख्य रूप से अभिकल्पित इ. 1%
यान, जिनमें चालक भी है
8703 50 20 विशेषीकृत परिवहन यान जैसे एम्बुलेंस, कैदी यान और उसी प्रकार के यान इ. 1%
8703 50 30 मोटरकारें इ. 1%
8703 50 40 तीन पहिया यान इ. 1%
8703 50 90 अन्य इ. 17
8703 60 अन्य यान , जिनमें विद्युत शक्ति के बाह्य स्रोत पर डाट लगाकर चार्ज
किए जाने के योग्य मोटरों से भिन्न स्फुलिंग प्रज्वलन अंतर्दहन
प्रत्यागामी पिस्टन इंजन और नोदन के लिए मोटरों के रूप में विद्युत
मोटर दोनों हैं :
8703 60 10 सात व्यक्तियों से अधिक परिवहन के लिए मुख्य रूप से अभिकल्पित इ. 1%
यान, जिनमें चालक भी है
8703 60 20 विशेषीकृत परिवहन यान जैसे एम्बुलेंस, कैदी यान और उसी प्रकार के यान इ. 1%
8703 60 30 मोटर कारें इ. 1%
8703 60 40 तीन पहिया यान इ. 1%
अन्य इ. 1%
8703 60 90
8703 70 अन्य यान, जिनमें संपीड़न विद्युत शक्ति के बाह्य स्रोत पर डाट
लगाकर चार्ज किए जाने के योग्य मोटरों से भिन्न स्फुलिंग
प्रज्वलन अंतर्दहन प्रत्यागामी पिस्टन इंजन (डीजल या अर्ध डीजल)
और नोदन के लिए मोटरों के रूप में विद्युत मोटर दोनों हैं :
सात व्यक्तियों से अधिक परिवहन के लिए मुख्य रूप से अभिकल्पित इ. 1%
8703 70 10
यान, जिनमें चालक भी है
इ. 1%
8703 70 20 विशेषीकृत परिवहन यान जैसे एम्बुलेंस, कैदी यान और वैसी ही
मोटर कारें इ. 1%
8703 70 30
तीन पहिया यान इ. 1%
8703 70 40
इ. 1%
8703 70 90 अन्य
भारत का राजपत्र असाधारण अनुभाग 1क]
टैरिफ मद
माल का वर्णन
(1)
(2)
8703 80
219
इकाई शुल्क की दर
(3)
(4)
अन्य यान, जिनमें केवल नोदन के लिए विद्युत मोटर है :
8703 80 10 सात व्यक्तियों से अधिक परिवहन के लिए मुख्य रूप से अभिकल्पित यान, जिनमें चालक भी है
8703 80 20
इ. 1%
इ. 1%
विशेषीकृत परिवहन यान जैसे एम्बुलेंस, कैदी यान और वैसी ही
8703 80 30 मोटरकारें इ. 1%
8703 80 40 तीन पहिया यान इ. 1%
8703 80 90 अन्य इ. 1%";
(v) उपशीर्ष 8703 90, टैरिफ मद 8703 90 10 और टैरिफ मद 8703 90 90 और उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान
पर, निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात् :
"8703 90 00 अन्य इ. 1%";
220
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
चौदहवीं अनुसूची
(धारा 234 देखिए)
वित्त अधिनियम, 2005 की सातवीं अनुसूची में,-
(क) टैरिफ मद 2402 2010 के सामने स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, "215 रु० प्रति हजार" प्रविष्टि रखी जाएगी;
(ख) टैरिफ मद 2402 20 20 के सामने स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 370 रु० प्रति हजार" प्रविष्टि रखी जाएगी;
(ग) टैरिफ मद 2402 20 30 के सामने स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, "215 रु० प्रति हजार" प्रविष्टि रखी जाएगी;
(घ) टैरिफ मद 2402 20 40 के सामने स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 260 रु० प्रति हजार " प्रविष्टि रखी जाएगी;
(ङ) टैरिफ मद 2402 20 50 के सामने स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, "370 रु० प्रति हजार" प्रविष्टि रखी जाएगी;
(च) टैरिफ मद 2402 20 90 के सामने स्तंभ (4) में की प्रविष्टि के स्थान पर, " 560 रु० प्रति हजार" प्रविष्टि रखी जाएगी ।
भारत का राजपत्र असाधारण
221 अनुभाग 1क]
पंद्रहवीं अनुसूची
(धारा 239 देखिए)
निरसन
वर्ष सं०
संक्षिप्त नाम
निरसन का विस्तार
(1) (2)
(3)
(4)
1946 22
धारा 2 |
अभ्रक खान श्रम कल्याण निधि अधिनियम, 1946
1953 49 नमक उपकर अधिनियम , 1953
पूर्ण ।
1958 44 वाणिज्य पोत परिवहन अधिनियम, 1958
धारा 261 , धारा 262 का खंड (म) , धारा 356ड, धारा 356ट और धारा 356ण काखंड (ङ) ।
1963 41 टेक्सटाइल समिति अधिनियम, 1963
धारा 5क, 5घ , 55, 5च, धारा 7 की उपधारा ( 1 ) का खंड ( कक) और धारा 22 की उपधारा (2) का खंड (घक)
1972 62
चूना- पत्थर और डोलोमाइट खान श्रम कल्याण निधि अधिनियम, 1972
धारा 3 , धारा 4 और धारा 16 की उपधारा (2) के खंड (क) से खंड ( च) ।
पूर्ण ।
1975 26 तंबाकू उपकर अधिनियम, 1975
1976 55
धारा 3 , धारा 4, धारा 5 और धारा 61 लौह अयस्क खान, मैगनीज अयस्क खान और क्रोम -अयस्क खान श्रम कल्याण उपकर अधिनियम, 1976
1981 30 सिनेमा कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम, 1981
धारा 3 का खंड ( क) ।
संशोधन
संशोधन
वर्ष
सं०
संक्षिप्त नाम
(4)
(3)
(2)
(1)
1972
धारा 5 की उपधारा (1 ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी, अर्थात्:-
62 चूना पत्थर और डोलोमाइट खान श्रम कल्याण निधि अधिनियम, 1972
निधि का गठन।
"(1 ) केंद्रीय सरकार चूना पत्थर और डोलोमाइट श्रम कल्याण निधि (जिसे इसमें इसके पश्चात् निधि कहा गया है) का गठन करेगी ।" ।
222
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
वर्ष
सं०
संशोधन
संक्षिप्त नाम
(1) (2)
(3)
(4)
1976 56 बीड़ी कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम, 1976
धारा 3 की उपधारा ( 1 ) में " पचास पैसे से कम नहीं या पांच रुपए से अधिक नहीं " शब्दों के स्थान पर " पांच रुपए से कम नहीं या चौबीस रुपए से अधिक नहीं" शब्द रखे जाएंगे ।
भारत का राजपत्र असाधारण
223 अनुभाग 1क]
यान - हरण निवारण अधिनियम, 2016
(2016 का अधिनियम संख्यांक 30)
[13मई, 2016]
वायुयान के विधिविरुद्ध अभिग्रहण के दमन के लिए
कन्वेंशन को प्रभावी करने और उससे
संबंधित विषयों के लिए
अधिनियम
वायुयान के विधिविरुद्ध अभिग्रहण के दमन के लिए कन्वेंशन पर 16 दिसंबर, 1970 को हेग में हस्ताक्षर किए गए थे;
1982 का 65
और भारत ने , उक्त कन्वेंशन को मान लिया था तथा कन्वेंशन के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए यान- हरण निवारण अधिनियम , 1982 अधिनियमित किया गया;
और भारत ने , 10 सितंबर, 2010 को बीजिंग में कन्वेंशन के अनुपूरक प्रोटोकाल पर हस्ताक्षर किए हैं, जो सिविल विमानन के विरुद्ध नई प्रकार की धमकियों द्वारा विधिविरुद्ध कार्यों से संबंधित है, जिसके लिए उक्त अधिनियम में व्यापक संशोधन अपेक्षित हैं;
और यह समीचीन समझा गया है कि वायुयान के अभिग्रहण या उस पर नियंत्रण करने के विधिविरुद्ध कार्य जिससे व्यक्तियों और संपत्ति की सुरक्षा संकट में पड़ जाती है, अत्यधिक चिंता का 224
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
विषय है, जिसका प्रभावी रूप से समाधान कन्वेंशन और प्रोटोकाल को प्रभावी करने के लिए तथा उनसे संबंधित विषयों के लिए उपयुक्त उपबंध करके किया जाना है ;
भारत गणराज्य के सड़सठवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
अध्याय 1
प्रारंभिक
1. ( 1 ) इस अधिनियम का संक्षित नाम यान-हरण निवारण अधिनियम , 2016 है ।
संक्षिप्त नाम, विस्तार, लागूहोना और प्रारंभ ।
(2 ) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है और जैसा कि इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित है, उसके सिवाय यह उसके अधीन किसी भी ऐसे अपराध को लागू होता है जो किसी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर किया गया है ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे ।
परिभाषाएं ।
2. इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
2008 का 34 (क) " अभिकरण " से राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अधिनियम, 2008 की धारा 3 के अधीन गठित राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अभिप्रेत है;
(ख) " वायुयान " से ऐसा वायुयान अभिप्रेत है , चाहे वह भारत में रजिस्ट्रीकृत है या नहीं, जो सैनिक वायुयान अथवा सीमाशुल्क या पुलिस सेवा में प्रयुक्त वायुयान से भिन्न है;
(ग) " भारत में रजिस्ट्रीकृत वायुयान " से ऐसा वायुयान अभिप्रेत है जो तत्समय भारत में रजिस्ट्रीकृत है ;
(घ) " कन्वेंशन देश " से ऐसा देश अभिप्रेत है जिसमें तत्समय हेग कन्वेंशन प्रवृत्त है;
(ङ) " हेग कन्वेंशन " से वायुयानों के विधिविरुद्ध अभिग्रहण के दमन के लिए ऐसा कन्वेंशन अभिप्रेत है जिस पर 16 दिसंबर , 1970 को हेग में हस्ताक्षर किए गए थे और इसके अंतर्गत कन्वेंशन का अनुपूरक प्रोटोकाल भी है जिस पर 10 सितंबर, 2010 को बीजिंग में हस्ताक्षर किए गए थे;
( च ) " बंधक व्यक्ति " से किसी वायुयान का कोई ऐसा यात्री या कर्मीदल का सदस्य या वायुयान का ऐसा कोई सुरक्षा कार्मिक या वायुयान के रखरखाव में लगा हुआ भूतलीय सहायक कर्मचारिवृंद अभिप्रेत है , जिसे किसी वायुयान के अभिवहन के दौरान या जब वह किसी विमानपत्तन पर आस्थित हो , किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के किसी समूह द्वारा की गई कोई मांग सुनिश्चित करने या किसी शर्त को पूरा करने के आशय से ऐसे किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा विधिविरुद्ध रूप से बंदी बनाया जाता है या उसकी सहमति के बिना या उसकी सहमति से, जो कपट या विबाध्यता द्वारा अभिप्राप्त की गई है, निरुद्ध किया जाता है;
(छ) " सैनिक वायुयान " से किसी देश की नौसेना, थलसेना, वायुसेना या किन्हीं अन्य सशस्त्र बलों का वायुयान अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत प्रत्येक ऐसा वायुयान भी है, जो तत्समय ऐसे किसी बल के किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा समादेशित है जिसे उस प्रयोजन के लिए लगाया गया है;
(ज ) " अधिसूचना " से राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है;
(झ ) " सुरक्षा कार्मिक " से विधिविरुद्ध हस्तक्षेप के कार्यों के विरुद्ध सिविल विमानन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा अभिनियोजित या उस सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी अभिकरण द्वारा नियुक्त सुरक्षा कार्मिक अभिप्रेत है ।
स्पष्टीकरण -इस खंड के प्रयोजनों के लिए " विधिविरुद्ध हस्तक्षेप के कार्यों " से सिविल विमानन और वायु परिवहन की सुरक्षा को जोखिम में डालने के लिए कार्य या प्रयतित कार्य अभिप्रेत हैं, जिसके अंतर्गत निम्नलिखित कार्य भी हैं-
(i) उड़ानरत वायुयान का विधिविरुद्ध अभिग्रहण;
225
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1 क]
(ii) भूमि पर वायुयान का विधिविरुद्ध अभिग्रहण;
(iii) वायुयान पर या हवाई अड्डों पर बंधक बनाना;
(iv) किसी वायुयान पर या किसी हवाई अड्डे पर या किसी वैमानिक सुविधा के परिसर में बलात्घुसपैठ;
(v) किसी वायुयान पर या किसी हवाई अड्डे पर दांडिक प्रयोजनों के आशय से कोई आयुध, विस्फोटक या अन्य परिसंकटमय युक्ति, वस्तु या पदार्थ ले जाना;
(vi) किसी हवाई अड्डे पर या किसी सिविल विमानन सुविधा परिसर में उड़ानरत या भूमि पर किसी वायुयान की, यात्रियों, कर्मीदल, भूतलीय कार्मिक या जनसाधारण की सुरक्षा को जोखिम में डालने के उद्देश्य से मिथ्या सूचना की संसूचना ।
अध्याय 2
यान- हरण और संबद्ध अपराध
यान हरण ।
3. ( 1 ) जो कोई किसी सेवारत वायुयान का, विधिविरुद्धतया और साशय, बल या उसकी धमकी द्वारा या प्रपीड़न द्वारा या किसी अन्य प्रकार के अभित्रास द्वारा या किसी प्रौद्योगिक साधनों द्वारा अभिग्रहण करता है या उस पर नियंत्रण करता है, वह यान- हरण का अपराध करता है ।
(2 ) किसी व्यक्ति के बारे में भी यह समझा जाएगा कि उसने उपधारा ( 1 ) में विनिर्दिष्ट यान- हरण का अपराध किया है, यदि ऐसा व्यक्ति, -
(क) ऐसे अपराध को करने की धमकी देता है या किसी व्यक्ति को विधिविरुद्धतया और साशय , ऐसी परिस्थितियों में जो यह उपदर्शित करती हैं कि धमकी विश्वसनीय है, ऐसी धमकी प्राप्त करवाता है; या
(ख) ऐसा अपराध करने का प्रयत्न करता है या उसको करने का दुष्प्रेरण करता है; या
(ग) ऐसा अपराध या उपरोक्त खंड ( क ) या खंड ( ख ) में विनिर्दिष्ट अपराध करने के लिए अन्य व्यक्तियों को संगठित या निदेशित करता है; या
(घ) ऐसे अपराध या उपरोक्त खंड ( क ) या खंड ( ख ) में विनिर्दिष्ट अपराध में सह- अभियुक्त के रूप में भाग लेता है ; या
(ङ) किसी अन्य व्यक्ति की, यह जानते हुए कि ऐसे व्यक्ति ने कोई ऐसा अपराध या उपरोक्त खंड ( क ) या खंड ( ख ) या खंड ( ग ) या खंड ( घ ) में विनिर्दिष्ट अपराध किया है या ऐसा व्यक्ति किसी ऐसे अपराध के लिए विधि प्रवर्तन प्राधिकारियों द्वारा दांडिक अभियोजन के लिए वांछित है या उसे ऐसे किसी अपराध के लिए दंडादिष्ट किया गया है, अन्वेषण, अभियोजन या दंड से बचने के लिए विधिविरुद्धतया और साशय सहायता करता है ।
(3) कोई यात्री यान- हरण का भी अपराध करता है, जब निम्नलिखित में से किसी एक या दोनों का, उपधारा ( 1 ) या उपधारा (2 ) के खंड ( क ) में विनिर्दिष्ट अपराधों में से कोई अपराध वस्तुतः किया जाता है या नहीं किया जाता है या उसका प्रयत्न किया जाता है या नहीं किया जाता है, साशय किया गया है:-
(क) उपधारा ( 1 ) या उपधारा ( 2 ) के खंड ( क ) में विनिर्दिष्ट किसी ऐसे अपराध को करने के लिए, जिसमें करार को अग्रसर करने में किसी एक सहभागी द्वारा किया गया कोई कार्य अंतर्वलित है, एक या अधिक व्यक्तियों की सहमति होना; या
(ख) सामान्य प्रयोजन के साथ कार्य करने वाले व्यक्तियों के समूह द्वारा उपधारा ( 1 ) में या उपधारा ( 2 ) के खंड ( क ) में विनिर्दिष्ट किसी अपराध को करने के लिए किसी रीति से योगदान देना और ऐसा योगदान,- 226
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
(i ) जहां ऐसे क्रियाकलाप या प्रयोजन में ऐसे अपराध का किया जाना अंतर्वलित है, वहां साधारण आपराधिक क्रियाकलाप या समूह के प्रयोजन को अग्रसर करने के उद्देश्य से दिया जाएगा; या
(ii) ऐसे अपराध को किए जाने के लिए समूह के आशय की जानकारी में दिया
जाएगा ।
(4) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए किसी वायुयान को , किसी विनिर्दिष्ट उड़ान के लिए भूतलीय कार्मिकों द्वारा या कर्मीदल द्वारा वायुयान की उड़ान पूर्व तैयारी के आरंभ से लेकर वायुयान के उतरने के पश्चात्चौबीस घंटे तक " सेवारत " समझा जाएगा और किसी वायुयान के विवश होकर उतरने की दशा में , उड़ान को जब तक जारी समझा जाएगा जब तक कि सक्षम प्राधिकारी उस वायुयान की और उस पर के व्यक्तियों तथा संपत्ति की जिम्मेदारी नहीं संभाल लेते हैं ।
4. जो कोई यान- हरण का अपराध करेगा, वह -
यान- हरण के लिए दंड।
(क ) जहां ऐसे अपराध से किसी बंधक व्यक्ति की या किसी सुरक्षा कार्मिक की या किसी ऐसे व्यक्ति की, जो अपराध में सम्मिलित नहीं है , यान- हरण के अपराध के प्रत्यक्ष परिणामस्वरूप मृत्यु हो जाती है , वहां मृत्यु से दंडित किया जाएगा; या
(ख) ऐसे आजीवन कारावास से जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवन का कारावास अभिप्रेत है , और जुर्माने से दंडित किया जाएगा,
और ऐसे व्यक्ति की जंगम और स्थावर संपत्ति अधिकृत किए जाने के लिए भी दायी होगी ।
यान- हरण से संबद्ध हिंसा के कार्यों के लिए दंड।
5. जो कोई ऐसा व्यक्ति होते हुए जो किसी वायुयान के हरण का अपराध कर रहा है , ऐसे अपराध के संबंध में ऐसे वायुयान के किसी यात्री या कर्मीदल के सदस्य के प्रति हिंसा का कोई कार्य करता है, उसे वही दंड दिया जाएगा जिससे वह भारत में तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन तब दंडनीय होता जब ऐसा कार्य भारत में किया जाता ।
1974का 2 अन्वेषण आदि की शक्तियों का प्रदान किया जाना ।
6. ( 1 ) दंड प्रक्रिया संहिता , 1973 में किसी बात के होते हुए भी इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, केन्द्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा , उक्त संहिता के अधीन किसी पुलिस अधिकारी द्वारा प्रयोक्तव्य गिरफ्तारी , अन्वेषण और अभियोजन की शक्तियां केन्द्रीय सरकार के किसी अधिकारी या अभिकरण के किसी अधिकारी को, प्रदान कर सकेगी ।
(2) पुलिस के सभी अधिकारियों और सरकार के सभी अधिकारियों से यह अपेक्षा की जाती है और उन्हें इस बात के लिए सशक्त किया जाता है कि वे इस अधिनियम के उपबंधों के निष्पादन में उपधारा ( 1 ) में निर्दिष्ट केन्द्रीय सरकार के अधिकारियों की सहायता करें ।
अधिकारिता ।
7. ( 1 ) उपधारा ( 2 ) के उपबंधों के अधीन रहते हुए जहां धारा 3 या धारा 5 के अधीन कोई अपराध भारत के बाहर किया गया है, वहां ऐसा अपराध करने वाले व्यक्ति के साथ उसकी बाबत वैसी हीकार्रवाई की जा सकेगी मानो ऐसा अपराध भारत में किसी ऐसे स्थान पर, जहां वह पाया जाए, किया गया है।
(2 ) कोई भी न्यायालय धारा 3 या धारा 5 के अधीन दंडनीय किसी ऐसे अपराध का, जो भारत के बाहर किया गया है, संज्ञान नहीं करेगा , जब तक कि-
(क) ऐसा अपराध भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर नहीं किया जाता है;
जाता है; (ख ) ऐसा अपराध भारत में रजिस्ट्रीकृत किसी वायुयान के विरुद्ध या उस पर नहीं किया
(ग ) ऐसा अपराध किसी ऐसे वायुयान पर नहीं किया जाता है और ऐसा वायुयान जिसमें ऐसा अपराध किया गया है, भारत में अभिकथित अपराधी के साथ जो उस वायुयान में है, नहीं उतरता है;
(घ ) ऐसा अपराध किसी ऐसे वायुयान के विरुद्ध या उस पर नहीं किया जाता है जो तत्समय ऐसे पट्टेदार को, बिना कर्मीदल के पट्टे पर दिया गया है, जिसका अपने कारबार का 227
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
मुख्य स्थान या जहां उसका ऐसा कोई कारबार का स्थान नहीं है वहां उसका स्थायी निवास स्थान भारत मेंहै;
(ङ) ऐसा अपराध भारत के किसी नागरिक द्वारा या उसके विरूद्ध नहीं किया जाता है;
(च) ऐसा अपराध ऐसे किसी राज्यविहीन व्यक्ति द्वारा नहीं किया जाता है जिसका प्रायिक निवास भारत के राज्यक्षेत्र में है;
(छ) ऐसा अपराध किसी अभिकथित अपराधी द्वारा नहीं किया जाता है जो भारत में उपस्थितहै किंतु धारा 11 के अधीन प्रत्यर्पित नहीं किया गया है ।
अभिहित न्यायालय ।
8. ( 1 ) राज्य सरकार, शीघ्र विचारण का उपाबंध करने के प्रयोजन के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति की सहमति से, अधिसूचना द्वारा ऐसे क्षेत्र या क्षेत्रों के लिए, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं किसी सेशन न्यायालय को अभिहित न्यायालय के रूप में विनिर्दिष्ट करेगी ।
2008 का 34
(2) उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के होते हुए भी, यथास्थिति राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अधिनियम, 2008 की धारा 11 या धारा 22 के अधीन गठित विशेष न्यायालय , ऐसे मामले में जहां गिरफ्तारी , अन्वेषण और अभियोजन की शक्ति धारा 6 की उपधारा ( 1 ) के अधीन अभिकरण द्वारा प्रयोग की जाती है, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अभिहित न्यायालय होगा ।
1974 का 2
(3 ) दंड प्रक्रिया संहिता , 1973 में किसी बात के होते हुए भी, अभिहित न्यायालय , यथासाध्य, दिन प्रतिदिन के आधार पर विचारण करेगा ।
1974 का 2
9. ( 1 ) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 में किसी बात के होते हुए भी,-
अभिहित न्यायालय द्वारा विचारणीय अपराध ।
(क) इस अधिनियम के अधीन सभी अपराध धारा 8 में निर्दिष्ट अभिहित न्यायालय द्वारा विचारणीय होंगे;
1974का 2
(ख) जहां ऐसा कोई व्यक्ति , जो इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का अभियुक्त है या जिसके द्वारा अपराध के किए जाने का संदेह है, दंड प्रक्रिया संहिता , 1973 की धारा 167 की उपधारा ( 2 ) या उपधारा ( 2 क ) के अधीन किसी मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाता है , वहां वह मजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्ति का ऐसी अभिरक्षा में निरोध , जैसा वह ठीक समझे, जहां ऐसा मजिस्ट्रेट न्यायिक मजिस्ट्रेट है वहां कुल मिलाकर तीस दिन से अनधिक अवधि के लिए और जहां ऐसा मजिस्ट्रेट कार्यपालक मजिस्ट्रेट है वहां कुल मिलाकर सात दिन से अनधिक अवधि के लिए प्राधिकृत कर सकेगाः
परंतु , ऐसा मजिस्ट्रेट -
(i ) जब ऐसा व्यक्ति उसके पास पूर्वोक्त रीति से भेजा जाता है ; या
(ii) उसके द्वारा प्राधिकृत निरोध की अवधि की समाप्ति पर या उससे पूर्व किसी समय,
यदि उसका विचार है कि ऐसे व्यक्ति का निरुद्ध रखना अपेक्षित नहीं है, तो वह ऐसे व्यक्ति को उस अभिहित न्यायालय को, जिसे अधिकारिता है, भेजने का आदेश करेगा;
1974 का 2
(ग) अभिहित न्यायालय, खंड ( ख ) के अधीन अपने पास भेजे गए व्यक्ति के संबंध में उसी शक्तिका प्रयोग कर सकेगा जो वह मजिस्ट्रेट, जिसे मामले के विचारण की अधिकारिता है, ऐसे मामले में दंड प्रक्रिया संहिता , 1973 की धारा 167 के अधीन अभियुक्त व्यक्ति के संबंध में, जो उस धारा के अधीन उसके पास भेजा गया है, प्रयोग करता;
(घ ) अभिहित न्यायालय , अभिकरण द्वारा फाइल की गई रिपोर्ट या इस निमित प्राधिकृत यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के किसी अधिकारी द्वारा किए गए किसी परिवाद के परिशीलन पर उस अपराध का संज्ञान अभियुक्त को विचारण के लिए सुपुर्द किए जाने के बिना कर सकेगा ।
भारत का राजपत्र असाधारण
228
[भाग 2-
1974का 2 (2) इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का विचारण करते समय अभिहित न्यायालय , इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध से भिन्न किसी ऐसे अपराध का भी जिससे अभियुक्त उसी विचारण में दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अधीन आरोपित किया जा सकता है, विचारण कर सकेगा ।
1974का 2 अभिहित न्यायालय के समक्ष कार्यवाहियों में संहिता का लागू होना ।
10. इस अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय , दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के उपबंध अभिहित न्यायालय के समक्ष कार्यवाहियों को लागू होंगे और अभिहित न्यायालय के समक्ष अभियोजन का संचालन करने वाले व्यक्ति को लोक अभियोजक समझा जाएगा ।
अध्याय 3
प्रकीर्ण
प्रत्यर्पण के बारे में उपबंध ।
11. ( 1 ) धारा 3 और धारा 5 के अधीन अपराध प्रत्यर्पणीय अपराधों के रूप में सम्मिलित किए गए और उन सभी प्रत्यर्पण संधियों में उपबंधित किए गए समझे जाएंगे जो भारत द्वारा कन्वेंशन देशों के साथ की गई हैं और जिनका विस्तार इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख को, भारत पर है और जो भारत पर आबद्धकर हैं ।
1962का 34 (2 ) इस अधिनियम के अधीन अपराधों को प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962 के लागू किए जाने के प्रयोजनों के लिए, ऐसे वायुयान के बारे में, जो किसी कन्वेंशन देश में रजिस्ट्रीकृत है, किसी भी समय जब वह वायुयान सेवारत है, यह समझा जाएगा कि वह उस देश की अधिकारिता के भीतर है चाहे वह तत्समय किसी अन्य देश की अधिकारिता के भीतर भी हो या न हो ।
( 3 ) धारा 3 में उल्लिखित किसी भी अपराध को प्रत्यर्पण या पारस्परिक विधिक सहायता के प्रयोजनों के लिए , राजनीतिक अपराध के रूप में या किसी राजनीतिक अपराध से संबद्ध अपराध के रूप में या राजनीतिक हेतुकों द्वारा प्रेरित अपराध के रूप में नहीं माना जाएगा और किसी ऐसे अपराध पर आधारित प्रत्यर्पण या पारस्परिक विधिक सहायता के लिए किसी अनुरोध को केवल इस आधार पर नामंजूर नहीं किया जाएगा कि उसका सरोकार, राजनीतिक अपराध या किसी राजनीतिक अपराध से संबद्ध अपराध या राजनीतिक हेतुकों द्वारा प्रेरित किसी अपराध से है ।
1974का 2 जमानत के बारे में उपबंध ।
12. ( 1 ) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 में किसी बात के होते हुए भी इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का अभियुक्त कोई व्यक्ति, यदि वह अभिरक्षा में है तो , जमानत पर या अपने स्वयं के बंधपत्र पर तब तक नहीं छोड़ा जाएगा जब तक कि-
(क) लोक अभियोजक को ऐसे छोड़े जाने के आवेदन का विरोध करने का अवसर न दे दिया गया हो; और
(ख) जहां लोक अभियोजक ऐसे आवेदन का विरोध करता है वहां, अभिहित न्यायालय कायह समाधान न हो जाए कि यह विश्वास करने के लिए युक्तियुक्त आधार है कि वह ऐसे अपराध का दोषी नहीं है और उससे, जब कि वह जमानत पर है, कोई अपराध किए जाने की संभावना नहीं है ।
1974का 2 (2) उपधारा ( 1 ) में विनिर्दिष्ट जमानत मंजूर किए जाने पर निर्बन्धन दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन जमानत मंजूर किए जाने पर निर्बन्धन के अतिरिक्त है ।
1974का 2 (3) इस धारा की कोई बात दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 439 के अधीन जमानत के बारे में उच्चन्यायालय की विशेष शक्तियों पर प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी ।
कन्वेंशन के संविदाकारी पक्षकार ।
13. केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा , यह प्रमाणित कर सकेगी कि हेग कन्वेंशन के संविदाकारी पक्षकार कौन-कौन हैं और उन्होंने कन्वेंशन के उपबंधों का किस विस्तार तक उपयोग किया है और ऐसी कोई भी अधिसूचना उसमें प्रमाणित विषयों के बारे में निश्चायक साक्ष्य होगी ।
कतिपय वायुयानों को कन्वेंशन देशों में रजिस्ट्रीकृत समझने की शक्ति।
14. ( 1 ) यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि किसी वायुयान के संबंध में उपधारा ( 2 ) की अपेक्षाओं की पूर्ति हो गई है तो वह, अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ऐसा वायुयान उस कन्वेंशन देश में रजिस्ट्रीकृत समझा जाएगा , जो इस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए ।
भारत का राजपत्र असाधारण
229 अनुभाग 1क]
(2) जहां कन्वेंशन देश , ऐसे संयुक्त वायु परिवहन संचालन संगठन या अंतरराष्ट्रीय संचालन अभिकरण स्थापित करते हैं , जो वायुयान चलाते हैं, जो संयुक्त या अंतरराष्ट्रीय रजिस्ट्रीकरण के अधीन हैं, प्रत्येक वायुयान के लिए समुचित उपायों द्वारा स्वयं में से ऐसा देश अभिहित करेंगे जो अधिकारिता का प्रयोग करेगा और कन्वेंशन के प्रयोजनों के लिए रजिस्ट्री का देश पर जिसे निर्धारित किया जाएगा तथा अंतरराष्ट्रीय सिविल विमानन संगठन के महासचिव को उसकी सूचना देगा जो सभी कर्वेशन देशों को वह सूचना संसूचित करेगा ।
15. इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के लिए कोई अभियोजन केन्द्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी से ही संस्थित किया जाएगा , अन्यथा नहीं ।
अभियोजन के लिए पूर्वमंजूरी का आवश्यक होना ।
16. धारा 3 या धारा 5 के अधीन किसी अपराध के अभियोजन में, यदि यह साबित कर दिया जाता है कि,-
धारा 3 और धारा 5 के अधीन अपरार्थों के बारे में उपधारणा ।
(क) अभियुक्त के कब्जे में से कोई आयुध , गोलाबारूद या विस्फोटक बरामद किए गए थे और यह विश्वास करने का कारण है कि इसी प्रकार के आयुध , गोलाबारूद या विस्फोटक ऐसे अपराध के किए जाने में उपयोग में लाए गए थे ; या
(ख) ऐसे अपराध के किए जाने के संबंध में कर्मीदल या यात्रियों पर बल के प्रयोग , बल की धमकी या किसी अन्य प्रकार का अभित्रास दिए जाने का साक्ष्य है,
तो अभिहित न्यायालय जब तक कि इसके प्रतिकूल साबित नहीं कर दिया जाता है, यह उपधारणा करेगा कि अभियुक्त ने ऐसा अपराध किया है ।
सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण ।
17. ( 1 ) इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी ।
( 2 ) इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात से हुए या हो सकने वाले किसी नुकसान के लिए कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाही केन्द्रीय सरकार के विरुद्ध नहीं होगी ।
अन्वेषण अधिकारी की संपत्ति अभिग्रहण या कुर्क करने की शक्ति ।
18. ( 1 ) जहां धारा 6 में निर्दिष्ट किसी अधिकारी को, कोई जांच या अन्वेषण करते समय यह विश्वास करने का कारण है कि कोई संपत्ति , जंगम या स्थावर या दोनों , ऐसे अपराध के किए जाने से संबंधित है जिसके सम्बंध में ऐसी जांच या अन्वेषण किया जा रहा है, किसी ऐसी रीति से छिपाई , अंतरित या निपटाई जाने की संभावना है जिसका परिणाम ऐसी संपत्ति के व्ययन में होगा वहां वह, ऐसी संपत्ति का अभिग्रहण करने के लिए कोई आदेश कर सकेगा और जहां ऐसी संपत्ति का अभिग्रहण करना व्यवहार्य नहीं है वहां वह, यह निदेश देते हुए कुर्की का आदेश कर सकेगा कि ऐसी संपत्ति को ऐसा आदेश करने वाले अधिकारी की पूर्व अनुमति के सिवाय अंतरित या अन्यथा निपटान नहीं किया जाएगा और ऐसे आदेश की एक प्रति संबद्ध व्यक्ति पर तामील की जाएगी ।
(2) उपधारा ( 1 ) के अधीन किए गए किसी आदेश का कोई प्रभाव नहीं होगा जब तक उक्त आदेश की, उसके किए जाने के अड़तालीस घंटे की अवधि के भीतर अभिहित न्यायालय के किसी आदेश द्वारा पुष्टि नहीं कर दी जाती है ।
(3 ) अभिहित न्यायालय, उपधारा ( 2 ) में निर्दिष्ट अभिग्रहण या कुर्क करने के आदेश की पुष्टि कर सकेगा और उसे प्रतिसंहृत कर सकेगा ।
(4) उपधारा ( 3 ) के अधीन अभिहित न्यायालय द्वारा आदेश के पुष्टिकरण के होते हुए भी, उपधारा ( 1 ) के अधीन किए गए कुर्की के आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, उपधारा ( 3 ) के अधीन आदेश के पुष्टिकरण की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर उक्त आदेश के प्रतिसंहरण के लिए अभिहित न्यायालय को आवेदन कर सकेगा ।
230
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
संपत्ति का अधिहरण औरसमपहरण ।
19. जहां अभिहित न्यायालय द्वारा धारा 4 के अधीन अभियुक्त की जंगम या स्थावर संपत्ति या दोनों के अधिहरण के लिए कोई आदेश किया जाता है , वहां ऐसी संपत्ति सभी विल्लंगमों से मुक्त होकर सरकार को समपहृत हो जाएगी:
परंतु अभिहित न्यायालय, ऐसे विचारण की अवधि के दौरान यह आदेश कर सकेगा कि अभियुक्त की सभी संपत्तियां या संपत्तियों में से कोई संपत्ति जंगम या स्थावर या दोनों की कुर्की की जाए और यदि ऐसे विचारण के अंत में दोषसिद्धि की जाती है तो इस प्रकार कुर्क की गई संपत्ति सभी विल्लंगमों से मुक्त होकर सरकार को समपहृत हो जाएगी ।
नियम बनाने की साधारण शक्ति।
20. ( 1 ) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम, अधिसूचना द्वारा बना सकेगी ।
( 2) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष , जब वह सत्र में हो , कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
1982का62 निरसन और व्यावृति ।
21. (1 ) यान- हरण निवारण अधिनियम , 1982 इसके द्वारा निरसित किया जाता है ।
(2) उक्त अधिनियम का निरसन,-
(क) इस प्रकार निरसित किए गए अधिनियम के पूर्व प्रवर्तन, या उसके अधीन सम्यक् रूप से की गई या सहन की गई किसी बात या की गई किसी कार्रवाई या किए जाने के लिए तात्पर्यित किसी कार्रवाई पर, जिसके अंतर्गत जारी की गई कोई अधिसूचना या किया गया आदेश या जारी की गई सूचना या की गई कोई नियुक्ति, पुष्टिकरण या घोषणा या दिया गया कोई प्राधिकार या निष्पादित किया गया कोई दस्तावेज या लिखत या दिया गया कोई निदेश भी है और जहां तक वह इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं है, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी;
(ख) उक्तअधिनियम के अधीन अर्जित प्रोद्भूत या उपगत किसी अधिकार, विशेषाधिकार या बाध्यता; या
(ग) उक्त अधिनयम के अधीन किसी अपराध के संबंध में उपगत किसी शास्ति, समपहरण या दंड; या
(घ ) यथापूर्वोक्तकिसी ऐसे अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता, दायित्व, शास्ति, समपहरण या दंड के संबंध में किसी अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार पर,
प्रभाव नहीं डालेगा और ऐसा कोई अन्वेषण , विधिक कार्यवाही या उपचार, वैसे ही संस्थित किया जा सकेगा , चालू रखा जा सकेगा या प्रवर्तित किया जा सकेगा तथा ऐसी शास्ति, समपहरण या दंड वैसे ही अधिरोपित किया जा सकेगा मानो उक्त अधिनियम निरसित नहीं किया गया हो ।
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1 क]
231
दन्त-चिकित्सक ( संशोधन ) अधिनियम , 2016
(2016 का अधिनियम संख्यांक 40)
[4अगस्त, 2016]
दन्त-चिकित्सक अधिनियम, 1948
का और संशोधन
करने के लिए
अधिनियम
भारत गणराज्य के सड़सठवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
1. ( 1 ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम दन्त चिकित्सक ( संशोधन) अधिनियम, 2016 है । संक्षिप्त नाम और प्रारंभ ।
(2) यह 24 मई, 2016 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
1948 का 16
नई धारा 10घ का अंतःस्थापन ।
2. दन्त- चिकित्सक अधिनियम, 1948 ( जिसे इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम कहा गया है) की धारा 10 ग के पश्चात् निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाएगी , अर्थात्ः-
स्नातकपूर्व और स्नातकोत्तर स्तर के लिए एकसमान प्रवेश परीक्षा।
" 10 घ. स्नातकपूर्व स्तर और स्नातकोत्तर स्तर के लिए सभी दन्त चिकित्सा शैक्षिक संस्थाओं के लिए ऐसे अभिहित प्राधिकरण के माध्यम से हिन्दी, अंग्रेजी और ऐसी अन्य भाषाओं में तथा ऐसी रीति में, जो विहित की जाएं, एक एकसमान प्रवेश परीक्षा संचालित की जाएगी तथा अभिहित प्राधिकरण पूर्वोक्त रीति में एकसमान प्रवेश परीक्षा के संचालन को सुनिश्चित करेगाः 232
भारत का राजपत्र असाधारण
[भाग 2-
परंतु किसी न्यायालय के किसी निर्णय या आदेश के होते हुए भी, इस धारा के उपबंध, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विनियमों के अनुसार शैक्षिक वर्ष 2016-17 के लिए संचालित स्नातकपूर्व स्तर पर किसी एकसमान प्रवेश परीक्षा के संबंध में राज्य सरकार के स्थानों के बारे में ( चाहे सरकारी दन्त-चिकित्सा महाविद्यालय में हों या प्राइवेट दन्त चिकित्सा महाविद्यालय में हों ) , जहां ऐसे राज्य ने ऐसी परीक्षा के लिए विकल्प नहीं दिया है, लागू नहीं होंगे ।
धारा 20का संशोधन ।
3. मूल अधिनियम की धारा 20 में खंड ( ज ) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-
" (जक ) अभिहित प्राधिकरण, अन्य भाषाएं और स्नातकपूर्व स्तर और स्नातकोत्तर स्तर पर सभी दन्त चिकित्सा शैक्षिक संस्थाओं में एकसमान प्रवेश परीक्षा संचालित करने की रीति; " ।
4. ( 1 ) दन्त- चिकित्सक ( संशोधन ) अध्यादेश , 2016 का निरसन किया जाता है ।
2016 का अध्यादेश सं 5 निरसन और व्यावृत्ति ।
1948 का 16 ( 2 ) ऐसे निरसन के होते हुए भी उक्त अध्यादेश द्वारा यथा संशेधित दन्त चिकित्सक अधिनियम , 1948 के अधीन की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई इस अधिनियम द्वारा यथा संशेधित उक्त अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जाएगी ।
233
भारत का राजपत्र असाधारण
अनुभाग 1क]
भारत का राजपत्र, असाधारण , भाग 2, अनुभाग 1 क, संख्यांक 1 , खंड LII , संख्यांक 4, तारीख 10 नवम्बर, 2016 को प्रकाशित राजपत्र का शुद्धिपत्रः-
पंक्ति
के स्थान पर
पढ़ें
धारा /अनुच्छेद
पृष्ठ सं.
1
276
देने के क्षम हो
देने में क्षम हो
45(ग)
1
किसी बात होते
276
किसी बात के होते
45(3)
329
1
धारा 14 और धारा 18
धारा 14 , धारा 18
71(1)
स्तंभ 3
339
16
विनियोग (संख्यांक 3 )
विनियोग (संख्यांक 2)
19
364
स्तंभ 3
जीवन-बीमा निगम (संशोधन) संशोधन
अधिनियम, 1957
जीवन-बीमा निगम (संशोधन) अधिनियम, 1957
डॉ. जी. नारायण राजू, सचिव, भारत सरकार ।
UPLOADED BY THE GENERAL MANAGER , GOVERNMENT OF INDIA PRESS, MINTO ROAD, NEW DELHI- 110002 AND PUBLISHED BY THE CONTROLLER OF PUBLICATIONS, DELHI -110054.
DigitallysignedbyMANOJ
KUMAR Date:2017.09.2610:28:21 GMGIPMRND- 4726GI- 25-9-2017.
MANOJ KUMAR