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Weekly Gazette of India · Government of India

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Published 11 November 2006

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Identifier
in.gazette.central.w.2006-11-11.18361
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English, Hindi
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रजिस्ट्रीसं. डीएल( एन ) -04/0007/2003--05

सत्यमेव जयते

REGISTERED No. DL( N) -04/0007/2003-05 भारत का राजपत्र The Gazette of India

साप्ताहिक/WEEKLY

प्राधिकार से प्रकाशित

PUBLISHED BY AUTHORITY

सं० 45]

नई दिल्ली, शनिवार, नवम्बर 11 नवम्बर 17, 2006 ( कार्तिक 20, 1928 )..

No. 45 ] NEW DELHI , SATURDAY, NOVEMBER 11 - NOVEMBER 17 , 2006 (KARTIKΑ 20 , 1928 ) इस भाग में भिन्न पृष्ठ संख्या दी जाती है जिससे कि यह अलग संकलन के रूप में रखा जा सके । (Separate paging is given to this Part in order that it may be filed as a separate compilation )

विषय-सूची

पृष्ठसं.

885 भाग I-- खण्ड- 1-- ( रक्षा मंत्रालय को छोड़कर) भारत सरकार के मंत्रालयों और उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी की गई विधितर नियमों , विनियमों , आदेशों तथा संकल्पों से सम्बन्धित अधिसूचनाएं

1149 भाग I--खण्ड- 2--( रक्षा मंत्रालय को छोड़कर ) भारत सरकार के मंत्रालयों और उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी की गई सरकारी अधिकारियों की नियुक्तियों, पदोन्नतियों, छुट्टियों आदि के सम्बन्ध में अधिसूचनाएं

9 भाग I--खण्ड- 3- रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किए गए संकल्पयों और असांविधिक आदेशों के सम्बन्ध में अधि- सूचनाएं

1615 भाग I--खण्ड- 4- रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी की गई सरकारी अधिकारियों की नियुक्तियों , पदोन्नतियों , छुट्टियों आदि के सम्बन्ध में अधिसूचनाएं

* भाग II-- खण्ड- 1 --अधिनियम, अध्यादेश और विनियम भाग II-- खण्ड-1 क-अधिनियमों , अध्यादेशों और विनियमों का हिन्दी भाषा में प्राधिकृत पाठ

भाग II-- खण्ड- 2--विधेयक तथा विधेयकों पर प्रवर समितियों के बिल तथा रिपोर्ट

* भाग II--खण्ड- 3 - उप खण्ड ( 1) भारत सरकार के मंत्रालयों (रक्षा मंत्रालय को छोड़कर ) और केन्द्रीय प्राधिकरणों ( संघ शासित क्षेत्रों के प्रशासनों को छोड़कर ) द्वारा जारी किए गए सामान्य सांविधिक नियम ( जिनमें सामान्य स्वरूप के आदेश और उपविधियां आदि भी शामिल है)

* भाग II--खण्ड- 3--उप खण्ड ( ii ) भारत सरकार के मंत्रालयों (रक्षा मंत्रालय को छोड़कर) और केन्द्रीय प्राधिकरणों ( संघ शासित क्षेत्रों के प्रशासनों को छोड़कर ) द्वारा जारी किए गए सांविधिक आदेश और अधिसूचनाएं ।

*आंकड़े प्राप्त नहीं हुए ।

1-321G1/ 2006

पृष्ठसं...

* भाग II--खण्ड- 3-- उप खण्ड ( iii ) भारत सरकार के मंत्रालयों (जिसमें रक्षा मंत्रालय भी शामिल है ) और केन्द्रीय प्राधिकरणों ( संघ शासित क्षेत्रों के प्रशासनों को छोड़कर ) द्वारा जारी किए. गए सामान्य सांविधिक नियमों और सांविधिक आदेशों (जिनमें सामान्य स्वरूप की उपविधियां भी शामिल हैं) के हिन्दी प्राधिकृत पाठ (ऐसे पाठों को छोड़कर जो भारत के राजपत्र के खण्ड 3. या खण्ड 4 में प्रकाशित होते हैं ) भाग II-- खण्ड-4- रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किए गए सांविधिक नियम और आदेश

3447 भाग III--खण्ड -1--उच्च न्यायालयों, नियंत्रक और महालेखा- परीक्षक, संघलोक सेवा आयोग, रेल विभाग और भारत सरकार से सम्बद्ध और अधीनस्थ कार्यालयों द्वारा जारी की गई अधिसूचनाएं

721 भाग III--खण्ड- 2- पेटेंट कार्यालय द्वारा जारी की गई पेटेन्ों और डिजाइनों से सम्बन्धित अधिसूचनाएं और नोटिस

* भाग III-- खण्ड- 3--मुख्य आयुक्तों के प्राधिकार के अधीन अथवा द्वारा जारी की गई अधिसूचनाएं

10841 भाग III--खण्ड- 4--विधिक अधिसूचनाएं जिनमें सांविधिक निकायों द्वारा जारी की गई अधिसूचनाएं, आदेश , विज्ञापन और नौटिस शामिल है

709 IV--गैर-सरकारी व्यक्तियों और गैर-सरकारी निकायों द्वारा जारी किए गए विज्ञापन और नोटिस भाय

V--अंग्रेजी और हिन्दी दोनों में जन्म और मृत्यु के आंकड़ों को दर्शाने वाला सम्पूरक भाग

(885) 886

THE GAZETTE OF INDIA, NOVEMBER 11 , 2006 ( KARTIKA 20, 1928)

CONTENTS

Page No.

885 PART I -SECTION 1 --Notifications relating to Non- Statutory Rules , Regulations , Orders and Resolutions issued by the Ministries of the Government of India ( other than the Ministry of Defence ) and by the Supreme Court

1149 PART I- SECTION 2-Notifications regarding Appointments , Promotions , Leave etc: of Government Officers issued by the Ministries of the Government of India (other than the Ministry of Defence) and by the Supreme Court

9 PART I- SECTION 3 - Notifications relating to Resolutions and Non-Statutory Orders issued by the Ministry of Defence

1615 PART I- SECTION 4- Notifications regarding Appointments , Promotions , Leave etc. of Government Officers issued by the Ministry of Defence .

PART II - SECTION 1- Acts , Ordinances and Regulations

PART II- SECTION 1A- Authoritative texts in Hindi languages of Acts , Ordinances and Regulations

PART II- SECTION 2- Bills and Reports of the Select Committee on Bills

* PART II- SECTION 3 -SUB - SECTION ( 1 ) General Statutory Rules including Orders , Bye- laws , etc. ofgeneral character issued by the Ministry of the Government of India (other than the Ministry of Defence ) and by the Central Authorities (other than the Administration of Union Territories)

* PART II - SECTION 3- SUB- SECTION ( ii ) -Statutory Orders and Notifications issued by the Ministries of the Government of India (other than the Ministry of Defence ) and by the Central Authorities ( other than the Administration of Union Territories )

[PART I-SE . 1

Page No. PART II - SECTION 3- SUB- SECTION ( iii) - Authoritative texts in Hindi (other than such texts , published in Section 3 or Section 4 of the Gazette of India) of General Statutory Rules & Statutory Orders ( including Bye - laws of a general character ) issuedby the Ministries of the Government of India (including the Ministry of Defence) and by Central Authorities ( other than Adininistration ofUnion Territories)

PART II- SECTION 4 -Statutory Rules and Orders issued by the Ministry of Defence

3447 PART III-SECTION 1- Notifications issued by the High Courts , the Comptroller and Auditor General , Union Public Service Commission , the Indian Government Railways and by Attached and Subordinate Offices of the Government of India .

721 PART III- SECTION 2-Notifications and Notices issued by the Patent Office , relating to Patents and Designs .

PART III-SECTION 3- Notifications issued by or under authority of Chief the Commissioners .

10841 PART III- SECTION 4- Miscellaneous Notifications including Notifications , Orders , Advertisements and Notices issued by StatutoryBodies

709 PART IV -Advertisements and Notices issued by Private Individuals and Private Bodies.

PART V-Supplement showing Statistics of Births and Deaths etc. both in English and Hindi 887 भाग 1 -- खण्ड । ]

भारत का राजपत्र, नवम्बर 11 , 2006 ( कार्तिक 20. 1928 )

भाग I-खण्ड 1

[ PART I- SECTION 1 ]

[(रक्षा मंत्रालय को छोड़कर ) भारत सरकार के मंत्रालयों और उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी की गई विधितर नियमों, विनियमों तथा आदेशों और संकल्पों से संबंधित अधिसूचनाएं] [ Notifications relating to Non - Statutory Rules , Regulations , Orders and Resolutions issued by the Ministries of the Government of India ( other than the Ministry of Defence) and by the Supreme Court ]

राष्ट्रपति सचिवालय

नई दिल्ली, दिनांक 15 अगस्त 2006

सं. 99 - प्रेज/2006 -- राष्ट्रपति निम्नलिखित अफसरों को उनके असाधारण वीरतापूर्ण कार्यों के लिए " कीर्ति चक्र " प्रदान करने का अनुमोदन करते हैं: --

1.

एसएस 39680 मेजर जेम्स थॉमस

10 सिख लाइट इन्फैंट्री ( मरणोपरांत )

(पुरस्कारकी प्रभावी तारीख : 28 जनवरी , 2006 ) कम्पनी कमांडर, मेजर जेम्स थॉमस को नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ रोकने का कार्य सौंपा गया था । 27 जनवरी , 2006 को उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के जनरल एरिया में घात लगाई । 28 जनवरी को 0230 बजे, उन्होंने घात क्षेत्र के छोर पर पहुंचने तथा दाईं तरफ से घुसपैठ का प्रयास कर रहे एक आतंकवादी दल को देखा । अपने ग्रुप पर पीछे की ओर से खतरे को महसूस करते हुए वे आतंकवादियों को रोकने के लिए सुनिश्चित ढंग से आगे बढ़े, उन पर हथगोले फेंके तथा भयंकर गोलीबारी कर दी । दृढ़ निश्चय, अडिग साहस तथा अपनी जान की परवाह न करते हुए वे अकेले ही चार आतंकवादियों को मार गिराने में सफल हुए । ऐसा करते हुए, उन्हें भी छरों से गंभीर घाव हो गए । इस बीच, उन्होंने दूसरी ओर से दो आतंकवादियों को आते हुए देखा । वे रेंगकर आतंकवादियों के नजदीक गए, उन पर हथगोले फेंके तथा निजी हथियार से गोलीबारी की । घावों के कारण वीरगति को प्राप्त होने से पूर्व वे प्रतिभा का परिचय देते हुए दो आतंकवादियों को मारने में सफल हुए ।

मेजर जेम्स थॉमस ने आतंकवादियों के साथ लड़ाई में भारतीय सेना की उच्च परम्पराओं का अनुसरण किया तथा असार्धारण वीरता, सामरिक कौशल का प्रदर्शन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया । :

888

भारत का राजपत्र, नवम्बर 11 , 2006 ( कार्तिक 20, 1928 )

[भाग I-खण्ड 1 2.

श्रीविजय पाल सिंह

उत्तर प्रदेश (मरणोपरांत)

(पुरस्कार की प्रभावी तारीख : 10 अप्रैल , 2006 ) 10 अप्रैल , 2006 की शाम को विक्टोरिया पार्क मेरठ में आयोजित उपभोक्ता प्रदर्शनी 'ब्रांड इंडिया' में अचानक भयंकर आग लग गई । सूचना प्राप्त होने पर , अग्नि शमन सेवा दल घटना स्थल पर पहुंचा जिसमें श्री विजय पाल सिंह शामिल थे ।

श्री सिंह ने जलते हुए पंडाल में प्रवेश किया तथा एक- एक करके लोगों को पंडाल से बाहर निकालने लगे । जल कर टपकते हुए पोलिमर तथा फटते हुए सिलेंडरों और एसी कम्प्रेसरों की परवाह न करते हुए श्री सिंह आगे बढ़ते रहे तथा पूर्ण संकल्प तथा समर्पण के साथ उन्होंने अपना काम जारी रखा । उन्होंने जलते हुए पंडाल से पच्चीस से अधिक लोगों को बचाया। इसी बीच , उनका पैर लकड़ी के फर्श में फंस गया । उन्होंने संघर्ष किया और अपने को निकाल लिया परंतु तब तक उन्हें जलने से गंभीर घाव हो गए । तेरह दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद , वे घावों के कारण वीरगति को प्राप्त हो गए ।

श्री विजय पाल सिंह ने विपरीत परिस्थतियों में सराहनीय साहस को प्रदर्शन किया तथा ड्यूटी करने में बहादुरी की मिसाल कायम करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए ।

बरुण मित्रा निदेशक भाग I-खण्ड 1 ]

889 भारत का राजपत्र, नवम्बर 11 , 2006 ( कार्तिक 20, 1928 )

संख्या 100-प्रेज/2006 - राष्ट्रपति निम्नलिखित कार्मिकों को उनके वीरतापूर्ण कार्यों के लिए "शौर्य चक्र" प्रदान करने का अनुमोदन करते हैं: -

1.

श्री एल . सुब्रमण्यन्

केरल (मरणोपरांत)

(पुरस्कार की प्रभावी तारीख : 26 दिसंबर , 2004) 26 दिसंबर , 2004 को केरल के आराटुपुझा गांव के समुद्र तट के क्षेत्र में सुनामी लहरें टकराईं । सूचना प्राप्त होने पर , सब इंस्पेक्टर श्री एल . सुब्रमण्यन् बचाव ऑपरेशन के लिए अपने दल के साथ समुद्री तट की ओर दौड़ पड़े । जब वे वहां पहुंचे तो समुद्र तट पर दूसरी लहर आ गई और चारों तरफ अफरा- तफरी मच गई ।

जब बचाव ऑपरेशन चल रहा था , एक अत्यधिक भयंकर तीसरी लहर आ टकराई । सम्पूर्ण क्षेत्र दस फीट गहरे पानी में डूब गया । लोग तथा उनका सामान बह गया । श्री सुब्रमण्यन् तथा उसका दल भी पानी के तेज बहाव में बह गए । जब हर चीज़ पानी के भंवर में फंसी थी तो श्री सुब्रमण्यन् ने एक लड़के तथा एक आदमी को थाम लिया । पानी के बहाव का दबाव इतना अधिक था कि पानी ने उन्हें एक भवन की ओर फेंक दिया जिससे श्री सुब्रमण्यन् को गंभीर चोटें आईं । परंतु उन्होंने अपने हाथों से उन व्यक्तियों को नहीं छोड़ा तथा उनका जीवन बचाया । उन्हें अस्पताल ले जाया गया परंतु उन्हें बचाया नहीं जा सका । श्री सुब्रमण्यन् ने अपने जीवन को जोखिम में डालकर प्रतिकूल परिस्थितियों में दो व्यक्तियों का जीवन बचाने में असाधारण साहस तथा वीरता का परिचय दिया ।

2.

9104223 राइफलमैन रियाज़ अहमद भट्ट

असम रेजिमेंट/35 राष्ट्रीय राइफल

(पुरस्कार की प्रभावी तारीख 14 अप्रैल , 2005) 14 अप्रैल , 2005 को एक संदिग्ध ओवर ग्राउंड कार्मिक से कुशलतापूर्वक पूछताछ करने पर उत्तरी सेक्टर में दो गुप्त ठिकानों में चार आतंकवादियों के होने की उपस्थिति की 890

भाग ।---खण्ड ।

भारत का राजपत्र, नवम्बर 11 , 2006 ( कार्तिक 20 , 1928)

पुष्टि हुई : घर में दो कमरे थे और प्रत्येक में छिपने का ठिकाना था / कमरों में तत्क्षण प्रवेश करने का निर्णय लिया । राइफलमैन रियाज़ अहमद भट्ट घर को खाली कराने वाले दल में शामिल थे । ज्यों ही राइफलमैन रियाज़ अहमद भट्ट ने कमरे में प्रवेश किया उसी समय एक आतंकवादी अचानक पृथक निकास द्वार से गोलीबारी करते हुए आया । बिना हिचके तथा बिना डरे उन्होंने उस, आतंकवादी को नज़दीक की लड़ाई में गोली से उड़ा दिया । दूसरे कमरे से भी भारी गोलीबारी शुरू हो गई तथा राइफलमैन भट्ट ने निकास द्वार के निकट रणनीतिक ढंग से आड़ ली । घिरे हुए आतंकवादियों ने छोटे हथियारों से अंधाधुंध गोलियों की बौछार की तथा हथगोले फेंके । एक अन्य सिपाही . जो तलाशी दल में शामिल था , को एक छर्रा लगा तथा वह एकदम खुले में फंस गया । बहादुरी के इस अद्वितीय कार्य में अपने घायल साथी को निकालने के लिए राइफलमैन भट्ट आड़ से बाहर आया । ऐसा करते समय वह फिर से दूसरे आतंकवादी के सामने आ गए जो गोलीबारी कर रहा था । परंतु अत्याधक संकल्प तथा नियंत्रण का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने आतंकवादी को मार गिराया तथा घायल सिपाही को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया ।

इस प्रकार राइफलमैन रियाज़ अहमद भट्ट ने आतंकवादियों के विरुद्ध लड़ाई में अद्वितीय सूझबूझ तथा सखाभाव के साथ असाधारण साहस का प्रदर्शन किया ।

3.

जेसी 468990 सूबेदार गुमान सिंह

राजपूताना राइफल/43 राष्ट्रीय राइफल (मरणोपरांत)

(पुरस्कार की प्रभावी तारीख : 11 जून , 2005) सूबेदार गुमान सिंह जब 11 जून , 2005 को उत्तरी सेक्टर के जनरल एरिया में तलाशी तथा सफाया ऑपरेशन चला रहे थे तो उन्हें जंगल में छिपे दो आतंकवादियों का पता चला । चार व्यक्तियों के एक छोटे से दल का नेतृत्व करते हुए उन्होंने तुरंत अपने सैनिकों को रणनीतिक ढंग से तैनात किया ताकि आतंकवादियों के बच निकलने के मार्ग को काटा जा सके तथा उनके नजदीक पहुंचा जा सके । आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी करके सूबेदार गुमान सिंह को गंभीर रूप से घायल कर दिया । घायल होने के बावजूद , सूबेदार गुमान सिंह ने सुरक्षित स्थान पर जाने से इनकार कर दिया तथा दृढ़ निश्चय , अडिगता तथा रणक्षेत्र कौशल का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए आतंकवादियों की ओर आगे बढ़ना जारी रखा । जिसके फलस्वरूप बहुत निकट से भयंकर गोलीबारी शुरू हो गई । सूबेदार गुमान सिंह ने तब हथगोले फेंके तथा छिपे हुए आतंकवादियों पर उग्रता से गोलीबारी की जिससे एक कट्टर आतंकवादी ढेर हो गया जिसकी पहचान बाद में एक विदेशी आतंकवादी के/ रूप में हुई । उनके सिंर में एक गोली लगी जिसके बावजूद सूबेदार गुमान सिंह ने सैन्य टुकड़ी के पहुंचने तक दूसरे छिपे आतंकवादी को घेरे रखा । उन्होंने कंपनी कमांडर को छुपे हुए आतंकवादी की जगह की ओर संकेत किया । सूबेदार गुमान सिंह को सुरक्षित स्थान /पर ले जाया गया । किंतु 02 जुलाई , 2005 को वे अपने घावों के कारण वीरगति को प्राप्त हो भाग ।---खण्ड 1 ]

891 भारत का राजपत्र, नवम्बर 11 , 2006 ( कार्तिक 20 , 1928 )

सूबेदार गुमान सिंह ने आतंकवादियों के विरुद्ध लड़ाई में वीरता, उच्च चरित्र तथा दृढ़ निश्चय का प्रदर्शन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया ।

4.

3389870 नायक गुरजंट सिंह

13 सिख रेजिमेंट ( मरणोपरांत)

(पुरस्कार की प्रभावी तारीख : 07 जुलाई , 2005) नायक गुरजंट सिंह , जम्मू- कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर तैनात बटा‌लियन में शामिल थे ।

07 जुलाई , 2005 को , 2330 बजे नियंत्रण रेखा की बाड़ के पास एक घात स्थल पर कुछ आतंकवादियों ने सीमा से बाहर जाने का प्रयास किया । एक दल ने जिसमें नायक गुरजंट सिंह शामिल थे, भागते हुए आतंकवादियों को रोका तथा भयंकर गोलीबारी शुरू हो गई । जब दल के कमांडर गंभीर रूप से घायल हो गए तो नायक गुरजंट सिंह ने नेतृत्व संभाला और शेष आतंकवादियों से भीड़े रहे । सीमा पार शत्रु क्षेत्र के ग्रामिणों ने इस दल परं कारगर ढंग से गोलीबारी की जिसमें नायक गुरजंट सिंह घायल हो गया । गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद नायक गुरजंट सिंह अडिग साहस का परिचय देते हुए रेंगकर आगे बढ़े , हथगोले फेंके तथा भारी गोलीबारी करके एक आतंकवादी को मार गिराया । सुरक्षित स्थान पर ले जाए जाने तक शेष आतंकवादियों पर गोलीबारी करते रहे और गंभीर घावों के फलस्वरूप सर्वोच्च बलिदान कर दिया ।

नायक गुरजंट सिंह ने आतंकवादियों के विरुद्ध लड़ाई में गंभीर खतरे का सामना करते हुए तथा उच्च कोटि के साहस का परिचय देते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया ।

5 .

जेसी 529322 सूबेदार देवी प्रसाद

8 गढ़वाल राइफल

(पुरस्कार की प्रभावी तारीख : 15 जुलाई , 2005) सूबेदार देवी प्रसाद घातक प्लाटून के कमांडर थे । 15 जुलाई , 2005 को उत्तरी कश्मीर के केरान सेक्टर में आतंकवादी होने की संभावना के बारे में किसी स्रोत से सूचना प्राप्त होने पर , सूबेदार देवी प्रसाद ने उपयुक्त घात स्थल का चयन करने के लिए उस क्षेत्र का जायजा लिया तथा तुरंत एक रणनीतिक योजना तैयार की । उन्होंने 2100 बजे दल को तैनात कर दिया और चुपचाप इंतजार करते रहे । उनके दल ने आतंकवादियों के एक दल की हलचल देखी । उन्होंने आतंकवादियों को 15 मीटर तक नजदीक आने दिया और फिर उनपर भारी गोलीबारी की बौछार कर दी । इस गोलीबारी की लड़ाई में तीन आतंकवादियों ने बच निकलने का निष्फल प्रयास करते हुए उनपर स्वचालित हथियारों से भारी गोलीबारी की । व्यक्तिगत सुरक्षा की परवाह किए बिना सूबेदार देवी प्रसाद अदम्य साहस का प्रदर्शन करते हुए उनके साथ भिड़ गए तथा उन्होंने स्वयं नजदीक की लड़ाई में तीन आतंकवादियों 892

[भाग I-खण्ड 1 भारत का राजपत्र, नवम्बर 11 , 2006 ( कार्तिक 20, 1928 )

को मार गिराया । उनकी इस कार्रवाई से प्रेरित होकर उनके दल ने चार आतंकवादियों के पूरे दल का सफाया कर दिया ।

सूबेदार देवी प्रसाद ने विदेशी आतंकवादियों का सफाया करने में उच्च कोटि के नेतृत्व, कुशल रणनीतिक योजना तथा अदम्य साहस का प्रदर्शन किया ।

6.

2986970 हवलदार मोहम्मद मारूफ

23 राजपूत रेजिमेंट

(पुरस्कार की प्रभावी तारीख 16 जुलाई , 2005) 16 जुलाई , 2005 को उड़ी सेक्टर में नियंत्रण रेखा के निकट के एक गांव में एक घुसपैठी दस्ते का पता लगाया । उस घर को चारों ओर से घेर लिया गया जिसमें आतंकवादी छुपे हुए थे । हवलदार मोहम्मद मारूफ, घातक टीम का नेतृत्व करते हुए आतंकवादियों की गोली के बीच रंगकर उस घर के निकट गए । वीरता का प्रदर्शन करते हए वे स्वयं उस घर के बहुत नजदीक पहुंचे तथा घर से बाहर निकल रहे आतंकवादियों पर निशाना साधते हुए कारगर ढंग से गोलीबारी करके बिलकुल नजदीक से तीन आतंकवादियों को मार गिराया । स्थान की बेहतरीन जानकारी होने तथा व्यक्तिगत सुरक्षा की बिलकुल भी परवाह न करते हुए हवलदार मोहम्मद मारूफ ने आतंकवादियों के बच निकलने के संभावित रास्ते को बंद कर दिया , जिससे नौ कट्टर आतंकवादियों का सफाया करने में सहायता मिली तथा बड़ी मात्रा में हथियार और गोलाबारूद बरामद हुआ ।

हवलदार मोहम्मद मारूफ ने आतंकवादियों के साथ लड़ाई में अदम्य साहस , रणनीतिक कौशल तथा अनुकरणीय नेतृत्व का प्रदर्शन किया ।

7 .

श्री सीताराम शर्मा

मध्य प्रदेश ( मरणोपरांत)

(पुरस्कार की प्रभावी तारीख : 18 अगस्त , 2005) 18 अगस्त, 2005 को मध्य प्रदेश के भिंड जिले के जौरी ब्राह्मण तहसील में चार अज्ञात शरारती तत्व दो गांव वालों का अपहरण कर उनको मारूति कार में डालकर ले जा रहे थे । जब एक स्थान पर अपहरणकर्ता रास्ता पूछने के लिए रुके तो अपहृत व्यक्तियों ने सहायता के लिए चिल्लाना शुरू कर दिया ।

उनकी चीख- पुकार सुनकर एक ग्रामीण श्री सीताराम शर्मा उनकी सहायता के लिए दौड़े । अन्य लोगों ने उन्हें जोखिम न उठाने की चेतावनी दी क्योंकि अपहरणकर्ताओं के पास हथियार थे । किन्तु व्यक्तिगत सुरक्षा की परवाह किए बिना श्री शर्मा ने अपहरणकर्ताओं को ललकारा तथा दूसरों को मदद हेतु आगे आने के लिए पुकारा । उन्होंने एक कांटेदार लकड़ी से अपहरणकर्ताओं पर आक्रमण किया । अपहृत ग्रामीणों को छोड़ अपहरणकर्ताओं ने कार में 893 भारत का राजपत्र, नवम्बर 11 , 2006 ( कार्तिक 20 , 1928 )

भाग 1 --खण्ड 1 ]

भागने की कोशिश की । किन्तु , श्री शर्मा ने शरारती तत्वों को बच निकल कर भागने नहीं दिया और उनके रास्ते में अड़े रहे । शरारती तत्वों ने उनपर गोली चला दी । एक गोली उनकी छाती में घुस गई तथा वे गिर गए । श्री शर्मा ने शरारती तत्वों के विरुद्ध लड़ाई करके अकेले ही दो व्यक्तियों की जान बचाई और आपनी जान न्यौछावर कर दी ।

श्री सीताराम शर्मा ने शरारती तत्वों को घेरने के प्रयास में अनुकरणीय साहस तथा दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया तथा सर्वोच्च बलिदान दिया ।

8 .

13750356 हवलदार जगत राम

1 जम्मू- कश्मीर राइफल

(पुरस्कार की प्रभावी तारीख : 9 सितंबर , 2005) 9 सितंबर , 2005 को जम्मू- कश्मीर के जनरल एरिया में " ऑपरेशन पीर " के दौरान हवलदार जगत राम घात दल में शामिल थे । 0200 बजे इस मार्ग के पास घुसपैठ का पता लगने पर सभी घात पार्टियों को सचेत कर दिया गया । 0315 बजे हवलदार जगत राम ने घात की तरफ आते एक आतंकवादी दस्ते को देखा । व्यक्तिगत सुरक्षा की बिलकुल भी परवाह किए बिना तथा अडिग साहस का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने आतंकवादियों के 10-15 मीटर नजदीक आने तक स्थिर रहकर इंतजार किया और बिलकुल नजदीक की दूरी से गोलीबारी शुरू कर दी जिससे आतंकवादी स्तब्ध रह गए और उन्होंने दो आतंकवादियों को मौके पर ही मार डाला । इसके बाद घुसपैठ को रोकने के लिए अपने उपदल को स्टॉपों के रूप में पुनः तैनात करने के बाद उन्होंने तीसरे आतंकवादी का पता लगाया तथा स्वेच्छा से आतंकवादी के निकट गए , जो उस क्षेत्र के शिलाखण्डों के बीच छुपा हुआ था और कमान अफसर के दल पर कारगर गोलीबारी कर रहा था । अनुकरणीय साहस तथा उत्कृष्ट नेतृत्व का प्रदर्शन करते हुए हवलदार जगत राम आतंकवादी गोलीबारी के बीच रेंगकर आगे बढ़े तथा एक चट्टान पर चढ़ आतंकवादी के बिलकुल सामने आ कर हथगोले फेंके और आतंकवादी पर टूट पड़े तथा भयंकर गोलीबारी में उसको मार डाला । हवलदार जगत राम ने आतंकवादियों के विरुद्ध लड़ाई में अदम्य साहस , पहल शक्ति तथा उत्कृष्ट नेतृत्व का प्रदर्शन किया ।

9.

9094954 हवलदार अब्राहीम

जम्मू- कश्मीर लाइट इन्फैंट्री 47 राष्ट्रीय राइफल

(पुरस्कार की प्रभावी तारीख : 29 सितंबर , 2005) 29 सितंबर , 2005 को हवलदार अब्राहीम जम्मू- कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के जंगलों में तलाशी तथा सफाया अभियान में एक छोटे दल का नेतृत्व कर रहे थे ।

2-321 GI/2006 894

[भाग I-खण्ड । भारत का राजपत्र, नवम्बर 11 , 2006 ( कार्तिक 20 , 1928 )

उत्कृष्ट युद्ध कौशल का प्रदर्शन करते हुए वे जंगल में आतंकवादियों के छिपने के ठिकाने पर सीधे ही पहुंचे । यह खुला ठिकाना था तथा जितना हो सके उतना निकट जाकर चकित करने के लिए उन्होंने रेंगकर आगे बढ़ना शुरू किया । हवलदार अब्राहीम ने आतंकी संतरी को, जो ऊंचे स्थान पर था , पकड़ लिया और गोली मारकर उसका काम तमाम कर दिया । छुपने के स्थान से आतंकवादियों ने पलटकर वार करते हुए छोटे हथियारों तथा हथगोलों से भारी गोलीबारी की । अत्यधिक दुर्लभ साहस का प्रदर्शन करते हुए हवलदार अब्राहीम बिना डरे छुपने के स्थान में आतंकवादियों पर टूट पड़े तथा एक और आतंकवादी को मौके पर ही मार डाला । इस निडर तथा साहसिक आक्रमण से घबरा कर आतंकवादियों ने छुपने के ठिकाने को छोड़ दिया और भागना शुरू कर दिया । हवलदार अब्राहीम ने भागते आतंकवादियों का पीछा किया और तीसरे आतंकवादी का सफाया कर दिया ।

हवलदार अब्राहीम ने आतंकवादियों के विरुद्ध लड़ाई में अनुकरणीय साहस , अदम्य युद्ध भावना और जीतने की इच्छा शक्ति का प्रदर्शन किया 1

10.

2489724 सिपाही रणजीत सिंह पंजाब रेजिमेंट/ 22 राष्ट्रीय राइफल ( मरणोपरांत)

(पुरस्कार की प्रभावी तारीख : 21 अक्तूबर , 2005) 21 अक्तूबर , 2005 को 1250 बजे जम्मू- कश्मीर के सोपर जिले के शॉपिंग कॉम्पलेक्स में सीमा सुरक्षा बल की बटालियन के एक कार्मिक पर आतंकवादी ने अंधाधुंध गोलीबारी की तथा सीमावर्ती दुकानों पर कब्जा कर लिया । तलाशी ऑपरेशन से लौट रहे सैनिकों ने गोली चलने की आवाज सुनी । वे दौड़कर घटना स्थल पर पहुंचे तथा शॉपिंग कॉम्पलेक्स को घेर लिया तथा बच निकलने के सभी रास्ते बंद कर दिए । अपने साथी को गोलीबारी की आड़ मुहैया करा रहे सिपाही रणजीत सिंह ने एक आतंकवादी को देखा जो एक अफसर की तरफ हथगोला फेंक गोली चलाने के लिए निशाना साध रहा था । तुरंत पलटवार करते हुए सिपाही रणजीत सिंह आतंकवादी की तरफ तेजी से दौड़ा तथा बिलकुल नजदीक से अचूक निशाना साधते हुए आतंकवादी को मार गिराया । साथ- साथ उन्होंने अपने अफसर को एक तरफ धकेल दिया और स्वयं हथगोले की चपेट में आ गए । इस प्रकार उन्होंने आतंकवादियों की गोलीबारी में असाधारण वीरता का प्रदर्शन किया ।

इस प्रकार सिपाही रणजीत सिंह ने अतुलनीय तथा असाधारण वीरता और बहादुरी का प्रदर्शन किया तथा सर्वोच्च बलिदान दिया । भाग 1-खण्ड 1 ]

भारत का राजपत्र, नवम्बर 11 , 2006 ( कार्तिक 20, 1928 )

11.

एसएस 41046 लेफ्टिनेंट अमरजीत सिंह 4 पैराशूट रेजिमेंट ( विशेष बल)

(पुरस्कार की प्रभावी तारीख : 25 अक्तूबर , 2005) लेफ्टिनेंट अमरजीत सिंह को सूचना मिली कि जम्मू- कश्मीर के बारामुल्ला जिले के एक गांव के चिन्हित घरों में तीन - चार आतंकवादियों के आने की संभावना है ।

25 अक्तूबर , 2005 को लेफ्टिनेंट अमरजीत सिंह अपनी सैन्य टुकड़ी के साथ उस गांव में पहुंचे तथा इन्होंने 0030 बजे तक लक्षित घरों के चारों ओर तैनाती कर दी । शीघ्र ही तीन आतंकवादियों ने लक्षित घर में प्रवेश किया । 0530 बजे जब आतंकवादी घर से बाहर निकले तब लेफ्टिनेंट अमरजीत सिंह ने उनको ललकारा । आतंकवादियों ने जबरदस्त गोलीबारी शुरू कर दी तथा बच निकलने के लिए वे सीधे उनकी तरफ दौड़े । व्यक्तिगत सुरक्षा की बिलकुल भी परवाह किए बिना यह अफसर वहीं खड़े रहे तथा बिलकुल नजदीक से उन में से दो को उड़ा दिया । तीसरा आतंकवादी घर के अंदर घुस गया । व्यक्तिगत सुरक्षा की बिलकुल भी परवाह किए बिना लेफ्टिनेंट अमरजीत सिंह ने एक हथगोला फेंका और घर के अंदर घुसकर तासरे आतंकवादी को गोली मार दी । उनके इस वीरतापूर्ण कार्य के परिणामस्वरूप , कट्टर आतंकवादियों के स्वयंभू जिला कमांडर के रूप में वांछित , दुर्दात आतंकवादी सहित तीन आतंकवादियों का सफाया हुआ ।

लेफ्टिनेंट अमरजीत सिंह ने कर्त्तव्यपरायणता से भी बढ़कर असाधारण वीरता , दृढ़ संकल्प तथा व्यक्तिगत बहादुरी का प्रदर्शन किया ।

12.

आईसी 51468 मेजर गोपी सिंह गढ़वाल राइफल/ 14 राष्ट्रीय राइफल (मरणोपरांत)

(पुरस्कार की प्रभावी तारीख : 10 नवंबर , 2005) मेजर गोपी सिंह को जम्मू- कश्मीर के रिज के आसपास आतंकवादियों की हलचल की सूचना मिली । उन्होंने आतंकवादियों को जंगल में दबोचने की एक योजना बनाई । 10 नवंबर , 2005 को 1645 बजे उन्होंने एक गुप्त रास्ते से गांव तक पहुंचने के लिए छोटे दल का नेतृत्व किया । घर के निकट पहुंचने पर उनका दल , दीवार के पीछे से की गई अंधाधुंध गोलीबारी की चपेट में आ गया । दल ने तुरंत पलटवार किया तथा आतंकवादियों को दबोच लिया । मेजर गोपी चंद ने आतंकवादि को निरंतर उलझाए रखा तथा दूसरे उपदल को आतंकवादियों से बच निकलने के संभावित रास्तों को बंद करने के लिए आदेश दिया । आतंकवादी एक घर में छुप गए । मेजर गोपी सिंह ने नेतृत्व प्रदान कर , व्यक्तिगत सुरक्षा की बिलकुल भी परवाह न करते हुए अद्वितीय साहस का प्रदर्शन किया तथा आगे बढ़ने के लिए क्षेत्र रण कौशल का इस्तेमाल करते हुए बिलकुल निकट की दूरी से एक आतंकवादी का सफाया कर दिया । जब वे एक अन्य आतंकवादी के निकट जाने का प्रयास कर रहे थे तो एक आतंकवादी की गोली की बौछार उनके चेहरे और गर्दन में लगी । इस बहादुर 896

[भाग -खण्ड 1 भारत का राजपत्र, नवम्बर 11 , 2006 ( कार्तिक 20, 1928 )

सैनिक ने अपने आदमियों को आतंकवादियों के साथ लड़ते रहने के लिए प्रेरित करते हुए अंतिम सांस ली ।

मेजर गोपी सिंह ने आतंकवादियों के विरुद्ध लड़ाई में उत्कृष्ट वीरता , अनुकरणीय नेतृत्व , सैनिकोचित दक्षता का प्रदर्शन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया ।

13 .

15146963 गनर रंजीत सिंह तोपखाना रेजिमेंट /29 राष्ट्रीय राइफल ( मरणोपरांत)

(पुरस्कार की प्रभावी तारीख 12 नवंबर , 2005) 12 नवंबर , 2005 को जम्मू- कश्मीर के बारामुल्ला जिले के एक गांव के एक घर में आतंकवादियों के होने की सूचना मिली । त्वरित कार्रवाई दल में शामिल गनर रंजीत सिंह ने घर को तुरंत घेर लिया । जब गनर रंजीत सिंह , अपने साथी तथा कंपनी कमांडर सहित घर में घुसने ही वाले थे तो एक आतंकवादी अंधाधुंध गोलीबारी करते हुए घर से बाहर निकला जिससे गनर रंजीत सिंह घायल हो गए । उन्होंने निडरता से आतंकवादी का पीछा किया और उसे घायल कर दिया । आतंकवादी ने अचानक मुड़ कर गोली चलाई और गनर रंजीत सिंह को गंभीर रूप से घायल कर एक घर में घुस गया । अपने घावों की परवाह न करते हुए गनर रंजीत सिंह रेंगकर आगे बढ़े , घर के अंदर एक हथगोला फेंका तथा आतंकवादी को मार गिराया । अचानक , अन्य आतंकवादी ने ऊपरी मंजिल से गोलीबारी शुरू कर दी । गनर रंजीत सिंह ने गिरने तथा घावों के कारण वीरगति को प्राप्त होने से पहले गोलियों की बौछार करके दूसरे आतंकवादी को घायल कर दिया जिससे वह मजबूर होकर फिर से घर में घुस गया । आतंकवादियों से लड़ते हुए न केवल उन्होंने अदम्य साहस का प्रदर्शन किया बल्कि उन्होंने अपने कंपनी कमांडर की जान भी बचाई । इसके बाद दूसरे आतंकवादी को मार गिराया गया ।

गनर रंजीत सिंह ने खतरे के समक्ष कर्त्तव्यपरायणता से भी बढ़कर कार्य करते हुए अदम्य साहस का प्रदर्शन किया तथा भारतीय सेना की उच्च परम्पराओं के अनुरूप सर्वोच्च बलिदान दिया ।

14.

13753810 नायक सरवन कुमार जम्मू- कश्मीर राइफल/विशेष ग्रुप ( 22 विशेष बल) (मरणोपरांत)

(पुरस्कार की प्रभावी तारीख : 19 नवंबर , 2005) नायक सरवन कुमार जम्मू- कश्मीर के डोडा जिला क्षेत्र में शुरू किए गए ऑपरेशन के स्क्वाड कमांडर थे ।

19 नवंबर , 2005 को 0030 बजे सैनिकों ने घरों के एक समूह को घेरा । नायक 897 भाग 1-खण्ड 1 ]

भारत का राजपत्र, नवम्बर 11 , 2006 ( कार्तिक 20, 1928 )

सरवन ने एक दो मंजिला घर में संदिग्ध गतिविधि देखी । उन्होंने अपने कंपनी कमांडर को सूचना दी और चुपके से निकास द्वार को घेर लिया । 1130 बजे यह भांप कि वे फंस गये हैं आतंकवादियों ने हथगोले फेंक गोलीबारी करते हुए बच निकलने का हताश प्रयास किया और नायक सरवन कुमार के साथी को घायल कर दिया । भारी गोलीबारी के बावजूद उन्होंने धैर्य रखा तथा बेहतरीन प्रतिक्रिया और अडिग साहस का प्रदर्शन करते हुए एक आतंकवादी को मार गिराया तथा दूसरे को घायल कर दिया । अपने हथियार की मैगज़ीन को बदलते समय उन्होंने एके 47 से गोलीबारी करते हुए तीसरे आतंकवादी को देखा और उसके निकट गए । गोलियों की बौछार से गंभीर रूप से घायल होने पर भी , व्यक्तिगत सुरक्षा की परवाह किए बिना , उन्होंने आतंकवादी को रोका तथा गुत्थमगुत्था की भयंकर लड़ाई में अदम्य साहस का प्रदर्शन करते हुए शहीद होने से पूर्व उस आतंकवादी को मार दिया । आतंकवादी के साथ गुत्थे हुए उनके शव को बरामद किया जिसके एक हाथ में आतंकवादी तथा दूसरे में हथियार था ।

नायक सरवन कुमार ने असाधारण बहादुरी , अदम्य साहस तथा साहसिक कार्रवाई का प्रदर्शन करते हुए भारतीय सेना की उच्च परम्पराओं के अनुरूप बलिदान दिया ।

15 .

एक्स-जीएस -173840 एक्स अधीक्षक भवन/ सड़क ग्रेड-II , गनेशन एम

(मरणोपरांत)

( पुरस्कार की प्रभावी तारीख : 14 जनवरी , 2006 ) 437 सड़क रखरखाव प्लाटून के अधीक्षक भवन/ सड़क ग्रेड-II , गनेशन एम को परियोजना हीरक के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में बांदिया नदी पर 179.94 मीटर लम्बे सेतु के निर्माण हेतु अप्रैल 2005 से डिटैचमेंट एटापल्ली में तैनात किया गया था ।

छत्तीसगढ़ राज्य कुछ समय से नक्सली समस्या से जूझता रहा है तथा वे राज्य में किसी विकास कार्य तथा बुनियादी ढांचे में सुधार नहीं करने दे रहे थे । यद्यपि निर्माणाधीन सेतु स्थल नक्सली प्रभावित क्षेत्र में है किंतु श्री गनेशन एम के तकनीकी कौशल तथा कुशल प्रशासन के कारण कार्य तीव्र गति से प्रगति पर था । इसलिए वे नक्सलियों की आंखों में खटक रहे थे । सेतु पर निर्माण कार्य रोकने के लिए नक्सलियों की ओर से बार - बार धमकियों तथा भयंकर परिणाम भोगने की चेतावनी के बावजूद उन्होंने निर्माण कार्य जारी रखा ।

14 जनवरी , 2006 को लगभग 2200 बजे 70-80 सशस्त्र नक्सलियों के एक दल ने एटापल्ली में जीआरईएफ कैम्प पर आक्रमण कर दिया । उन्होंने कैंप में सहकर्मियों को पीटना शुरू कर दिया तथा चिल्ला कर पूछने लगे कि सेतु का निर्माण कौन कर रहा है । साथ ही उन्होंने निजी सामान को लूटना शुरू कर दिया और वहां पर खड़े वाहनों तथा संयंत्रों को आग लगा दी । अपने सहकर्मियों को बचाने के लिए श्री गनेशन एम आगे आए तथा उन्होंने उच्च कोटि का नेतृत्व व कर्त्तव्य परायणता का प्रदर्शन करते हुए आक्रमणकारियों को बताया कि वह इस क्षेत्र के विकास हेतु सरकार के आदेश के अनुसार वे सेतु का निर्माण [ भाग I-खण्ड 1 भारत का राजपत्र, नवम्बर 11 , 2006 ( कार्तिक 20 , 1928 )

898

कर रहा है । उस पर आक्रमणकारियों ने उनको पीटना शुरू कर दिया और अंततः उनको निर्दयता से मार दिया । श्री गनेशन एम ने सर्वोच्च बलिदान कर अपने सहायक ओवरसीयर लाला राम , चार जीआरईएफ कार्मिकों तथा दस सीपी मजदूरों सहित अन्य की जान बचाई । इस प्रकार अधीक्षक भवन/ सड़क ग्रेड-II , गनेशन एम ने अनुकरणीय साहस , दृढ़ निश्चय का प्रदर्शन करते हुए अपनी ड्यूटी निष्पादित की और सर्वोच्च बलिदान दिया । 6.

4467595 कंपनी हवलदार मेजर सरबजीत सिंह 10 सिख लाइट इन्फैंट्री ( मरणोपरांत)

(पुरस्कार की प्रभावी तारीख: 28 जनवरी , 2006) कंपनी हवलदार मेजर सरबजीत सिंह जम्मू- कश्मीर में पुंछ जिले के जनरल एरिया में घात दल में शामिल थे ।

28 जनवरी , 2006 को 0230 बजे उन्होंने घात स्थल के पास आतंकवादियों के एक दल को घूमते तथा एक छोर की ओर जाने का प्रयास करते हुए देखा । ये भांपते हुए कि घुसपैठिए आतंकवादी बच निकलेंगे तथा इससे अपने सैनिकों को खतरा उत्पन्न हो जाएगा , वे आतंकवादियों के निकल कर जा रहे दल को रोकने हेतु साहस से आगे बढ़े । कंपनी हवलदार मेजर सरबजीत सिंह तथा उनके साथी बिलकुल नजदीक की भयंकर गोलीबारी की लड़ाई में आतंकवादियों से भिड़ गए जिसमें उन्हें छर्रे के गंभीर घाव लगे । दुर्लभ साहस का प्रदर्शन करते हुए तथा गंभीर रूप से घायल होंने के बावजूद उन्होंने अपने साथी के साथ चार आतंकवादियों को असहाय कर दिया । उसी समय उन्होंने बगल से आते हुए दो और आतंकवादियों को देखा । कंपनी हवलदार मेजर सरबजीत सिंह दृढ़ निश्चय के साथ आ रहे आतंकवादियों की ओर रेंगकर आगे बढ़े , उनपर हथगोले फेंके तथा निजी हथियार से गोलीबारी की । अपने घावों के कारण वीरगति को प्राप्त होने से पहले के दो आतंकवादियों को घायल करने में कामयाब रहे ।

कंपनी हवलदार मेजर सरबजीत सिंह ने आतंकवादियों के साथ लड़ाई में अदम्य साहस , कर्त्तव्य परायणता तथा सखा - भाव का प्रदर्शन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया ।

बरुण मित्रा निदेशक भाग I-खण्ड 1 ]

भारत का राजपत्र, नवम्बर 11 , 2006 ( कार्तिक 20, 1928 )

संख्या 101 -प्रेज/2006 - राष्ट्रपति निम्नलिखित कार्मिकों को उनके असाधारण साहसिक कार्यों के लिए " सेना मेडल/आर्मी मेडल-बार " प्रदान करने का अनुमोदन करते हैं: -

1. आईसी-52752 मेजर मनीष कुकरेती, सेने 5 जाट रेजिमेंट

2. आईसी -55810 मेजर जंग बहादुर सिंह , सेमे सेना सेवा कोर / 38 राष्ट्रीय राइफल

बरुणमित्रा

निदेशक संख्या 102-प्रेज/2006- राष्ट्रपति निम्नलिखित कार्मिकों को उनके असाधारण साहसिक कार्यों के लिए " सेना मेडल/आर्मी मेडल " प्रदान किए जाने का अनुमोदन करते हैं: -

1. आईसी-46868 लेफ्टिनेंट कर्नल राजीव बख्शी , 13 डोगरा रेजिमेंट (मरणोपरांत)

2. आईसी-46914 लेफ्टिनेंट कर्नल रमेश कुमार चमेला , 15 जाट रेजिमेंट

3 . आईसी-50052 लेफ्टिनेंट कर्नल अजय कुमार रैना , तोपखाना/6 राष्ट्रीय राइफल

4. आईसी-50284 लेफ्टिनेंट कर्नल आदित्य विक्रम सिंह राठी, ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स/ 21 राष्ट्रीय राइफल

5 . आईसी-52000 मेजर गुरप्रीत सिंह , 23 राजपूत रेजिमेंट

6. आईसी-53608 मेजर प्रतीक , पंजाब रेजिमेंट/7 राष्ट्रीय राइफल

7.

आईसी-54563 मेजर राजीव घोष , 4 जाट रेजिमेंट

8. आईसी-52618 मेजर नवीन तियोतिया , सेना वायु रक्षा/ 1 असम राइफल

9. आईसी-54740 मेजर चरण देव सिंह , 12 बटालियन द जम्मू- कश्मीर राइफल

10 .

आईसी-55346 मेजर सुरेश सिन्धु , 3 पैरा ( विशेष बल)

900

[भाग-खण्ड 1 भारत का राजपत्र, नवम्बर 11 , 2006 ( कार्तिक 20 , 1928 )

11. आईसी-56608 मेजर मनीष नागपाल , राजपूताना राइफल/ 18 राष्ट्रीय राइफल

12. आईसी-57763 मेजर विक्रम कादियान, असम रेजिमेंट/35 राष्ट्रीय राइफल

13. आईसी-58701 मेजर रवि कुमार माने , असम रेजिमेंट

14.

आईसी-59519 मेजर एसजी सुधांशु शेखर ,

तोपखाना/9 राष्ट्रीय राइफल

15. आईसी-59940 मेजर अभिनव शर्मा , असम रेजिमेंट/42 राष्ट्रीय राइफल

16. आईसी-61256 मेजर दिगविजय सिंह चौहान , इंजीनियर्स/36 राष्ट्रीय राइफल

17 . आईसी-64366 मेजर विमल शर्मा , 12 जम्मू- कश्मीर राइफल

18. आईसी-64815 मेजर देवेन्द्र सिंह रोहिला , इलैक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स / 14 राष्ट्रीय राइफल

19. एसएस -38657 मेजर उदय गणपतराव जरांडे , तोपखाना/4 असम राइफल

20 .

एसएस-39551 मेजर अरूणदेव सिंह जसरोटिया ,

12 जम्मू- कश्मीर राइफल

21. आईसी-60250 कैप्टन हरप्रीत सन्धु, 4 पैरा ( विशेष बल)

22. आईसी-60459 कैप्टन अशोक कुमार शर्मा, कुमाऊं रजिमेंट/ 13 राष्ट्रीय राइफल

23. आईसी-61862 कैप्टन राजेन्दरा सिंह , पंजाब रेजिमेंट/22 राष्ट्रीय राइफल 24. आईसी-62661 कैप्टन अनिल कुमार , सिगनल कोर/ 15 राष्ट्रीय राइफल 901 भाग I-खण्ड 1 ]

भारत का राजपत्र, नवम्बर 11 , 2006 ( कार्तिक 20 , 1928 )

25. एसएस-39824 कैप्टन आशुतोष शर्मा, 15 जाट रेजिमेंट

26. एसएस -39921 कैप्टन रोहन साहनी , तोपखाना/34 राष्ट्रीय राइफल

27. एसएस -40082 कैप्टन गौरव ग्रेवाल , 5 जाट रेजिमेंट

28. एमएस -15071 कैप्टन विजय कुमार कृष्णा मोरे , सेना चिकित्सा कोर/ कमान अस्पताल दक्षिण कमान

29. आईसी-63413 लेफ्टिनेंट रूपिंदर सिंह , 12 बटालियन द जम्मू- कश्मीर राइफल

30. आईसी-63459 लेफ्टिनेंट अमर महादेव भोसले , 20 जम्मू- कश्मीर राइफल 31. आईसी-63969 लेफ्टिनेंट जे नार्हायानान , 21 पैराशूट रेजिमेंट ( विशेष बल) 32. आईसी-64079 लेफ्टिनेंट मनीश पंत , 13 डोगरा रेजिमेंट

33. एसएस -40580 लेफ्टिनेंट सागर छेत्री , 18 पंजाब रेजिमेंट

34. एसएस-41342 लेफ्टिनेंट आनन्द कुमार , 20 जम्मू- कश्मीर राइफल

35. जेसी-412701 नायब सूबेदार खोत मधुकर नारायण , 21 पैराशूट रेजिमेंट (विशेष बल )

जेसी -412760 नायब सूबेदार योगम्बर सिंह , 36. 4 पैराशूट रेजिमेंट (विशेष बल)

37. जेसी-499333 नायब सूबेदार अवतार सिंह , 13 सिख रेजिमेंट (मरणोपरांत)

2782279 कंपनी हवलदार मेजर मोहम्मद अश्रफ शैख , 38. 22 मराठा लाइट इन्फैंट्री

39. 2788931 हवलदार मुशी गुरप्पा तम्मा 21 पैराशूट रेजिमेंट (विशेष बल)

3-321 GI/2006 902

भारत का राजपत्र, नवम्बर 11 , 2006 ( कार्तिक 20 , 1928 )

[भाग I-खण्ड 1 40. 4360512 हवलदार थनसिंग कैथांग सिमते , असम रेजिमेंट/42 राष्ट्रीय राइफल ( मरणोपरांत)

41. 4558682 हवलदार हिम्मतराव पाण्डुरंग पैठाने , 1 महार रेजिमेंट

42. 13751198 हवलदार राजिन्द्र कुमार , 1 जम्मू- कश्मीर राइफल

43. 13754365 हवलदार हरदीप सिंह , 17 जम्मू- कश्मीर राइफल

44. 14493409 हवलदार सुभाष चन्द, तोपखाना/57 राष्ट्रीय राइफल (मरणोपरांत)

45. 4361162 लासं हवलदार हितेस्वर रे , 8 असम रेजिमेंट

46. 2487,592 नायक दलजीत सिंह , 26 पंजाब रेजिमेंट

47. 3185323 नायक सरवन राम , 14 जाट रेजिमेंट

48. 3994499 नायक सतीश कुमार , पैराशूट रेजिमेंट/ 31 राष्ट्रीय राइफल ( कमांडो)

49. 4071524 नायक विजय कुमार धसमाना , गढ़वाल राइफल/36 राष्ट्रीय राइफल

50. 4073535 नायक सत्य पाल सिंह , गढ़वाल राइफल/ 14 राष्ट्रीय राइफल

51. 4074597. नायक दिगविजय सिंह , गढ़वाल राइफल/36 राष्ट्रीय राइफल

52. 4076365 नायक राजेश कुमार बहुगुणा , गढ़वाल राइफल/36 राष्ट्रीय राइफल

53. 9095971 नायक ओम राज , जम्मू- कश्मीर लाइट इन्फैंट्री/ 31 राष्ट्रीय राइफल ( कमांडो) ( मरणोपरांत)

54. 13759208 नायक सुभाष चंद , 8 जम्मू- कश्मीर राइफल 903 भाग I-खण्ड ।1 ]

भारत का राजपत्र, नवम्बर 11 , 2006 ( कार्तिक 20, 1928 )

55. 14702902 नायक धुर्बा राय , 1 नागा रेजिमेंट

56. 14416825 नायक हरी राम , तोपखाना/36 राष्ट्रीय राइफल

57. 2485844 लांस नायक मोहन लाल , 25 पंजाब रेजिमेंट

58. 2996924 लांस नायक कुलदीप सिंह , 13 सिख रेजिमेंट (मरणोपरांत)

59. 2997080 लांस नायक कपिल देव , 23 राजपूत रेजिमेंट

60. 4075383 लांस नायक विनोद सिंह , गढवाल राइफल/ 14 राष्ट्रीय राइफल (मरणोपरांत)

61. 4077945 लांस नायक राजेन्द्र सिंह , गढ़वाल राइफल/36 राष्ट्रीय राइफल

62. 4078931 लांस नायक राजेन्द्र प्रसाद , 2 गढ़वाल राइफल ( मरणोपरांत)

63. 4078950 लांस नायक राजेन्द्र सिंह बिष्ट , 8 गढ़वाल राइफल ( मरणोपरांत) 64. 13758872 लांस नायक फारूक अहमद राथर , 20 जम्मू- कश्मीर राइफल 65. 13759848 लांस नायक रजनीश कुमार शर्मा , 5 जम्मू- कश्मीर राइफल (मरणोपरांत)

66. 14429640 लांस नायक धर्मेन्द्र कुमार रंजन, तोपखाना/32 राष्ट्रीय राइफल (मरणोपरांत)

67. 15138801 लांस नायक सुर्य मनी बेहरा , तोपखाना/32 राष्ट्रीय राइफल ( मरणोपरांत)

68. 15611723 लांस नायक हेम सिंह यादव , ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स/21 राष्ट्रीय राइफल (मरणोपरांत)

69. 2492857 सिपाही अशोक सिंह सलाथिया , पंजाब रेजिमेंट/22 राष्ट्रीय राइफल 904

[भाग -खण्ड । भारत का राजपत्र, नवम्बर 11 , 2006 ( कार्तिक 20 , 1928 )

70. 3004501 सिपाही विक्रम सिंह , राजपूत रेजिमेंट/58 राष्ट्रीय राइफल

71. 4003614 सिपाही केशव दत्त , डोगरा रेजिमेंट/31 राष्ट्रीय राइफल ( कमांडो)

72. 4191239 सिपाही दिपक ओझा , कुमाऊं/ 50 राष्ट्रीय राइफल

73. 14703925 सिपाही के एस थेन्रयी , 1 नागा रजिमेंट

74. 4083146 राइफलमैन दिपक चौहान , गढ़वाल राइफल/36 राष्ट्रीय राइफल

75. 4085855 राइफलमैन नीलम सिंह राणा , 2 गढ़वाल राइफल

76. 13768298 राइफलमैन उत्तम मुखिया , 17 जम्मू- कश्मीर राइफल (मरणोपरांत)

77. 13771588 राइफलमैन सुरिन्द्र कुमार , 1 जम्मू- कश्मीर राइफल

78. 15776416 गनर राजानेकर रेड्डी सल्लाराम सेना वायु रक्षा/23 राष्ट्रीय राइफल ( मरणोपरांत )

79. 4371737 पैराद्रूपर डेविड खिंग , 21 पैराशूट रेजिमेंट ( विशेष बल)

80. 2696025 ग्रेनेडियर सुमेर सिंह शेखावत , 16 ग्रेनेडियर्स

81. 15614467 गार्ड्समैन संदीप कुमार , ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स/ 21 राष्ट्रीय राइफल (मरणोपरांत)

बरुण मित्रा निदेशक 905 भाग I-खण्ड 1 ]

भारत का राजपत्र , नवम्बर 11 , 2006 ( कार्तिक 20 , 1928 )

संख्या 103 - प्रेज/2006- राष्ट्रपति निम्नलिखित कार्मिकों को उनके असाधारण कर्त्तव्यपरायणतापूर्ण कार्यों के लिए " नौसेना मेडल/नेवी मेडल " प्रदान करने का अनुमोदन करते हैं: -

1. लेफ्टिनेंट सुप्रदीप चेन्नुपाटि , (05207-एच)

2. राम मेहर , पीओ सीडी 1 , ( 172508 - आर)

3. अमरजीत, एसटीडी 1 ( 155992-बी)

4. रविन्दर कुमार , पीओ सीडी 1 ( 115081 -जेड)

5. अनूप सिंह, एसईए 1 सीडी II ( 121680 -वाई)

6. अजय कुमार , एलएस सीडी 1 ( 116383 -एच)

बरुण मित्रा निदेशक संख्या 104- प्रेज/ 2006--राष्ट्रपति, स्क्वाड्रन लीडर गुरजोत सिंह भुल्लर (22901 ) , फ्लाइंग (पायलट) को उनके असाधारण साहसिक कार्यों के लिए " वायुसेना मेडल/एयर फोर्स मेडल " प्रदान किए जाने का अनुमोदन करते हैं ।

बरुण मित्रा निदेशक

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय

(वाणिज्यविभाग)

नई दिल्ली, दिनांक 1 नवम्बर 2006

सं. 14/2/2006- ई ओ यू-- केन्द्र सरकार, दिनांक 22 मार्च, 2006 को भारत के राजपत्र, असाधारण , भाग 1 , खंड 1 मैं प्रकाशित भारत सरकार, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ( वाणिज्य विभाग ) की अधिसूचना सं. 14/2/2006- ई ओ यूमें एतद्वारा निम्नलिखित संशोधन करती है:

उक्त अधिसूचना में , क्र. सं. 1 के सामने उल्लिखित प्रविष्ट में " विशेष सचिव, वाणिज्य विभाग " शब्दों के स्थान पर " सचिव, वाणिज्य विभाग " शब्दों को प्रतिस्थापित किया जाएगा ।

अनिल मुकीम संयुक्तसचिव 906

[भाग -खण भारत का राजपत्र , नवम्बर 11 , 2006 ( कार्तिक 20, 1928 )

कोयला मंत्रालय

नई दिल्ली, दिनांक 2 अक्तूबर 2005

संकल्प

सं. 23011 /42/2005-सीपीडी इस्पात मंत्रालय, भारत सरकार के दिनांक 21.2.1986 के आदेश सं. पी.वी. - 4 (5) / 85 का अधिक्रमण करते हुए, स्पाँज आयरन यूनिटों के लिए दीर्घावधि कोयला लिंकेज का निर्णय लेने के लिए अपर सचिव(कोयला) की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है ।

स्पॉज आयरन यूनिटों के लिए स्थायी लिंकेज समिति का गठन नीचे दिए अनुसार होगाः-

अध्यक्ष 1. अपर सचिव (कोयला)

सदस्य

सदस्य 2. सलाहकार (ऊर्जा) योजना आयोग 3. संयुक्त सचिव, कोयला मंत्रालय

(दीर्घावधि कोयला लिंकेज के कार्य से सम्बद्ध )

सदस्य 4. संयुक्त सचिव, इस्पात मंत्रालय

सदस्य 5. कार्यकारी निदेशक, यातायात परिवहन (इस्पात) , रेल मंत्रालय

सदस्य 6. अध्यक्ष, कोल इंडिया लिमिटेड

सदस्य 7. कोयला उत्पादक कंपनियों के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक

सदस्य 3. अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, सिंगरेनी कोलियरीज़ कंपनी लि.

आदेश

आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की एक- एक प्रति भारत सरकार के मंत्रालयों एवं विभागों, राष्ट्रपति सचिवालय , प्रधानमंत्री कार्यालय, लोक सभा/राज्य सभा सचिवालय, राज्य सरकारों, अध्यक्ष, सीआईएल, अध्यक्ष- सह-प्रबंध निदेशक, बीसीसीएल, सीसीएल, ईसीएल , डब्ल्यूसीएल, एसईसीएल, एमसीएल, एनसीएल, सीएमपीडीआईएल, ' एससीसीएल को भेजी जाए ।

यह भी आदेश दिया जाता है कि आम सूचना के लिए इस संकल्प को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया जाए ।

रिंचन टेम्पो निदेशक 907 PART I-SEC . 1

THE GAZETTE OF INDIA, NOVEMBER 11 , 2006 (KARTIKA 20, 1928)

PRESIDENT SECRETARIAT

New Delhi , the 15th August 2006

No.99 Pres/2006 The President is pleased to approve the award of the " Kirti -Chakra" to the undermentioned personnel for the acts of conspicuous gallantry : - SS-39680 MAJOR JAMES THOMAS 10 SIKH LIGHT INFANTRY ( POSTHUMOUS)

(Effectivedateof the award: 28 January 2006) Major James Thomas, Company Commander , was entrusted the task to prevent infiltration across the line of control . On 27 January 2006, he established an ambush in general area in district Poonch in Jammu & Kashmir . On 28 January at 0230 hours, he observed a group of terrorists attempting to skirt the ambush and infiltrate towards the right flank . Realising the impending danger to own troops in the rear, he decisively moved forward to intercept the infiltrating terrorists, lobbed grenades and engaged them in a fierce firefight . With great determination , unflinching courage and unmindful of personal danger , he succeeded in killing four terrorists singlehandedly. In doing so, he also sustained grave splinter injuries . Meanwhile , he observed two more terrorists closing in from the other flank . He crawled towards the terrorists to lob grenades and fired at them with his personal weapon . With presence of mind , he succeeded in killing the two terrorists, before succumbing to his injuries.

Major James Thomas , displayed conspicuous gallantry, tactical acumen and made the supreme sacrifice in the highest traditions of the Indian Army while fighting against the terrorists .

2.

SHRI VIJAY PAL SINGH

UTTAR PRADESH ( POSTHUMOUS)

(Effectivedate of the award: 10 April 2006) In the evening of 10th April 2006, a huge fire erupted at the consumer show of 'Brand India ' organised at Victoria Park, Meerut. On receipt of the information , fire service team reached the spot . Shri Vijay Pal Singh was one of the team members .

908

PART I-SEC . 1 THE GAZETTE OF INDIA, NOVEMBER 11 , 2006 ( KARTIKA 20, 1928 )

Shri Singh entered the burning Pandal and started moving the people out of the Pandal one by one . Unmindful of the burning and dropping polymer and explosion of gas cylinders and A.C. compressors , Shri Singh kept on moving further and continued his work with missionary zeal and dedication . He saved more than 25 lives out of the burning Pandal . In the meantime, his foot got stuck in the wooden floor . He struggled and managed to free himself but by that time, he had received serious burn injuri Hesuccumbed to his injuries after 13 days of hospitalisation .

Shri Vijay Pal Singh showed commendable courage in the face of odd hours and laid down his life setting an example of bravery while performing his duties .

BARUN MITRA

Director

DIRECTOR 909 PART I - SEC . I

THE GAZETTE OF INDIA, NOVEMBER 11 , 2006 ( KARTIKA 20, 1928 )

No, 100-Pres/2006 The President is pleased to approve the award of the "Shaurya Chakra " to the undermentioned personnel for the acts of gallantry: - 1. SHRI L SUBRAMANTYAN KERALA ( POSTHUMOUS)

(EffectiveDate of the award: 26 December 2004) On 26 December 2004, Tsunami waves struck along the coastal areas of Arattupuzha village of Kerala . On receiving the information , Sub Inspector Shri L. Subramaniyan rushed to the coast along with his party for rescue operation . When they reached there , a second wave struck along the coast and there was chaos all around.

While the rescue operation was in progress , a third and most dangerous wave hit the shore . The whole area was submerged under 10 feet high water. People and their belongings were washed away. Shri Subramaniyan and his party were also swept away due to heavy flow of water . While everything was being swirled away in water , Shri Subramaniyan got hold of one boy and one man . The pressure of the water was so much that they were hurled against a building causing severe injuries to Shri Subramaniyan . But he didn't let go the persons from his hands and saved their lives . He was shiited to a hospital but could not be saved.

Shri Subramaniyan displayed extraordinary courage and bravery in saving the lives of two individuals in adverse conditions at the cost of his own life.

2. 9104223 RIFLEMAN RIYAZ AHMAD BHAT ASSAM REGIMENT / 35 RASHTRIYA RIFLES

(Effective Date of the award : 14 April 2005) On 14 April 2005, presence of four terrorists in two hideouts in the Northern Sector was confirmed after a skillful interrogation of a suspected Over Ground Worker . The house had two rooms with a hideout each . The search party decided to make 4-321 GI/2006 910

PART I-SEC.1 THE GAZETTE OF INDIA, NOVEMBER 11 , 2006 ( KARTIKA 20, 1928)

simultaneous entry into the rooms . Rifleman Riyaz Ahmad Bhat was part of the house clearing team . As Rifleman Riyaz Ahmad Bhat entered the room , one terrorist , unexpectedly came out firing from a different exit . Unflustered and undaunted he shot the terrorist down in a close quarter battle. Heavy firing broke out from the other room also and Rifleman Bhat strategically placed himself under cover near the exit . The holed up terrorists let loose a volley of indiscriminate small arms fire and lobbed grenades . Another sepoy , who was part of the search team , received a splinter and was caught in the open . In an unparallel act of bravery, Rifleman Bhat broke cover to extricate his injured buddy. While doing so , he again came face to face with a second terrorist who came out firing . But exhibiting tremendous resolve and control , he shot the terrorist down and then brought the injured Sepoy to safety.

Rifleman Riyaz Ahmad Bhat, thus , displayed exceptional courage, concern for fellow comrades and rare presence of mind in fighting against the terrorists.

3.

JC-468990 SUBEDAR GUMAN SINGH RAJPUTANA RIFLES / 43 RASHTRIYA RIFLES ( POSTHUMOUS )

(EffectiveDate of the award : 11 June 2005) Subedar Guman Singh , while carrying out search and destroy operation in a general area in Northern Sector on 11th June 2005, spotted two terrorists hiding in a jungle. Leading a small team of four men , he immediately positioned the parties tactically to cut off escape routes and closed on to the terrorists . The terrorists started firing indiscriminately injuring Subedar Guman Singh grievously . Despite being injured, Subedar Guman Singh refused to be evacuated and kept closing on to the terrorists with determination , tenacity and adroit use of fieldcraft . His movement resulted in a fierce firefight at very close quarter . Subedar Guman Singh then lobbed grenades and fired furiously on the hiding terrorists , eliminating one hardcore terrorist , later identified as a foreign terrorist . He was hit by a bullet on the head . Inspite of it , Subedar Guman Singh pinned down second hiding terrorist till the arrival of reinforcement . He then indicated the location of the hiding terrorist to the Company Commander . Subedar Guman Singh was evacuated but succumbed to his injuries on 02July 2005 .

Subedar Guman Singh displayed gallantry, grit , determination and made the supreme sacrifice while fighting the terrorists.

PART I-SEC. 1

911 THE GAZETTE OF INDIA, NOVEMBER 11 , 2006 (KARTIKA 20, 1928)

4.

3389870 ΝΑAIK GURJANT SINGH

13 SIKH REGIMENT ( POSTHUMOUS)

(EffectiveDate of the award : 07 July 2005) Naik Gurjant Singh was serving with a battalion on the Line of Control in Poonch district, Jammu and Kashmir .

On 07 July 2005 at 2330 hours , an ambush was sprung near Line of Control Fence and some terrorists attempted exfiltration . A party, with Naik Gurjant Singh as a member, intercepted the fleeing terrorists and fierce firefight ensued . When the party commander was critically wounded, Naik Gurjant Singh took charge and engaged the remaining terrorists . Enemy villagers from across brought down effective fire on this party in which Naik Gurjant Singh was injured. Inspite of being seriously injured, Naik Gurjant Singh displayed raw courage, crawled ahead , lobbed grenades and opened heavy fire eliminating one terrorist. He kept firing at the remaining terrorists till he was evacuated and made the supreme sacrifice due to critical injuries .

Naik Gurjant Singh displayed a very high standard of courage and fortitude in the face of grave danger and made the supreme sacrifice while fighting the terrorists.

5.

JC- 529322 SUBEDAR DEVI PRASAD

8 GARHWAL RIFLES

(EffectiveDateof the award: 15 July 2005) Subedar Devi Prasad was the Ghatak Platoon commander . On 15 July 2005, on receipt of information from a source about likely presence of terrorists in Keran sector in Northern Kashmir , Subedar Devi Prasad reconnoitered the area to select an appropriate ambush site and quickly formulated a tactical plan . He deployed the team by 2100 hours and stealthily lay in wait . His team observed move of a group of terrorists . He allowed the terrorists to close in up to fifteen metres and then engaged them with heavy volume of fire. In the firefight that ensued , three terrorists in a desperate bid to escape charged at him with heavy auto fire . Subedar Devi Prasad without caring for his personal safety, displayed raw courage and confronted them personally killing all three terrorists in a close quarter combat. His actions motivated his team to eliminate the entire group of four terrorists.

Subedar Devi Prasad displayed high degree of leadership , meticulous tactical planning and raw courage in eliminating foreign terrorists .

912

PART 1--SEC. 1 THE GAZETTE OF INDIA, NOVEMBER 11 , 2006 ( KARTIKA 20, 1928)

6.

2986970 HAVILDAR MOHAMMAD MAROOF

23 RAJPUT REGIMENT

(EffectiveDate of the award: 16 July 2005) On16 July 2005 , an infiltrating column was tracked to a village in Uri sector near the Line of Control . A cordon was established around the house where the terrorists were holed up . Havildar Mohammad Maroof, leading the Ghatak Team , crawled forward under terrorist fire to close in with the house . Displaying valour , he located himself very close to the house and was able to bring down aimed fire on terrorists moving out of the house, neutralising them effectively and killing three terrorists at point blank range. The sound appreciation of ground and utter disregard for personal safety displayed by Havildar Mohammad Maroof, sealed the possible escape route of the terrorists and assisted in elimination of nine hardcore terrorists and recovery of large quantity of arms and ammunitions .

Havildar Mohammad Maroof displayed indomitable courage, tactical acumen and exemplary leadership in fighting the terrorists .

7.

SHRI SITARAM SHARMA

MADHYA PRADESH ( POSTHUMOUS)

(EffectiveDate of the award: 18 August 2005) On18 August 2005, four unknown miscreants kidnapped two villagers in Jauri Brahmin Tehsil in Bhind district of Madhya Pradesh and were taking them away in a Maruti car . At one place, when the kidnappers stopped to inquire about the way, the kidnapped persons started crying for help.

On hearing their cries, Shri Sitaram Sharma, one of the villagers rushed for their help . He was warned by others not to take risk as the kidnappers were armed . However , unmindful of his own safety, Shri Sharma challenged the kidnappers and exhorted others to help him . He attacked the kidnappers with a thorny stick . The kidnappers tried to flee in the car after leaving the kidnapped villagers . However, Shri Sharma did not allow the miscreants to escape and stood in their way . The miscreants fired at him . A bullet pierced his chest and he fell down . Shri Sharma managed to save the lives of two people by single- handedly fighting the miscreants and sacrificed his life.

Shri Sitaram Sharma showed exemplary courage and resolute will power in an attempt to apprehend the miscreants and in the process made the supreme sacrifice .

913 PART I-SEC . I

THE GAZETTE OF INDIA , NOVEMBER 11 , 2006 ( KARTIKA 20 , 1928 )

8.

13750356 HAVILDAR JAGAT RAM

1 JAMMU AND KASHMIR RIFLES

(EffectiveDate of the award: 09 September 2005) On09 September 2005, during " Operation Pir" in the General Area of Jammu & Kashmir , Havildar Jagat Ram was in the ambush party . On detection of infiltration at 0200 hours along the route , all ambushes were alerted. At 0315 hours , Havildar Jagat Ram noticed movement of terrorist column coming towards the ambush . With total disregard to personal safety and displaying dauntless courage , he waited steadfastly till the leading terrorist came as close as 10-15 metres , opened fire at point blank range leaving the terrorist shell shocked and killed two terrorists on the spot . Thereafter resiting his sub group as stops to prevent infiltration , he located the third terrorist and volunteered to close in on the terrorist who was well entrenched in area boulders and bringing down effective fire on Commanding Officer's party. Displaying exemplary courage and outstanding leadership Hav Jagat Ram crawled under terrorist fire, negotiated a rock face , exposing himself closed in on the terrorist, lobbed grenade and charged the terrorist and in fierce exchange of fire killed him .

Havildar Jagat Ram displayed raw courage, initiative and outstanding leadership in fighting, the terrorists .

9. 9094954 HAVILDAR ABRAHIM JAMMU AND KASHMIR LIGHT INFANTRY/ 47 RASHTRIYA RIFLES

(EffectiveDate of the award: 29 September 2005) On29 September 2005 , Havildar Abrahim was leading a small team in a search and destroy mission in the forests of Kupwara district in Jammu & Kashmir.

Showing excellent field craft, he homed on to the terrorist hide out in the forest . Itbeing an open type of hide out, in order to maintain surprise till as close as possible, he started crawling forward . Havildar Abrahim picked up the terrorist sentry , and while still in the above position , fired and eliminated him . Other terrorists in the hide out retaliated with a heavy volume of small arms fire and grenades . In an extremely rare display of courage, Havildar Abrahim without any trepidation , sprang at the terrorists in the hide out and eliminated one more on the spot. Unnerved by this bold and audacious charge, the terrorists abandoned the hide out and started fleeing. Havildar Abrahim chased the fleeing terrorists and eliminated a third terrorist .

914

PART I-SEC . 1 THE GAZETTE OF INDIA, NOVEMBER 11 , 2006 ( KARTIKA 20, 1928 )

Havildar Abrahim displayed exemplary courage , unrelenting spirit and will to win while fighting the terrorists .

10.

2489724 SEPOY RANJIT SINGH PUNJAB REGIMENT / 22 RASHTRIYA RIFLES ( POSTHUMOUS)

(Effective Date of the award: 21 October 2005) On 21 October 2005 at 1250 hours , terrorist fired indiscriminately at personnel of a Battalion of Border Security Force at a Shopping Complex in Sopore district in Jammu & Kashmir and occupied adjacent shops . The troops returning from search operation heard gunshots . They rushed to the site, cordoned the shopping complex and cut off all escape routes . Sepoy Ranjit Singh who was providing covering fire to his buddy observed one terrorist lobbing a grenade on an officer and aiming to fire. Sepoy Ranjit Singh reacted quickly by rushing towards the terrorist and with accurate fire from very close range, killed the terrorist instantly . Simultaneously he pushed the officer aside, taking impact of grenade blast on himself thereby exhibited conspicuous bravery in the face of terrorist fire.

Sepoy Ranjit Singh , thus , displayed conspicuous valour , bravery beyond compareand made the supreme sacrifice of rare order.

11 .

SS- 41046 LIEUTENANT AMARJIT SINGH 4 PARACHUTE REGIMENT ( SPECIAL FORCES )

(EffectiveDate of the award : 25 October 2005) Lieutenant Amarjit Singh got information that three to four terrorists were likely to come to identified houses in a village in district Baramulla in Jammu & Kashmir .

On 25 October 2005, Lieutenant Amarjit Singh with his troop moved to the village and deployed around target houses by 0030 hours . Soon three terrorists entered the target house. At 0530 hours , when the terrorists got out of the house , Lieutenant Amarjit Singh challenged them . The terrorists opened heavy volume of fire and ran straight towards him to escape . The officer, unmindful of own safety, stood his ground and shot dead two of them at point blank range . The third terrorist managed to enter a house . Unmindful of personal safety , Lieutenant Amarjit Singh threw a grenade , entered the house and shot dead the third terrorist . His gallant action led to the elimination of three terrorists including most dreaded and wanted self styled district commander of a dreaded terrorist outfit.

PART I-SEC. 1

915 THE GAZETTE OF INDIA, NOVEMBER 11 , 2006 ( KARTIKA 20, 1928)

Lieutenant Amarjit Singh displayed conspicuous gallantry , indomitable resolve and personal valour beyond call ofduty.

12.

IC- 51468 MAJOR GOPI SINGH GARHWAL RIFLES / 14 RASHTRIYA RIFLES ( POSTHUMOUS) (EffectiveDate of the award : 10 November 2005) Major Gopi Singh developed intelligence about terrorists' movement across a Ridge in Jammu & Kashmir. He formulated a plan to intercept them in the forest . On 10 November 2005 at 1645 hours , he led a small team to the village through a concealed route . Close to the house his party encountered indiscriminate terrorist fire from behind a wall . The party immediately retaliated and pinned down the terrorists. WhileMajor Gopi Singh continued to engage the terrorists , he ordered the second sub party to manoeuvre to block the likely escape routes . The terrorists hid in a house . Major Gopi Singh leading from the front , displaying unparallelled courage and total disregard to his personal safety , used fieldcraft to close in and eliminated one terrorist from close range . While attempting to close in with another terrorist, a burst from the terrorist hit him on his face and neck . The brave soldier breathed his last encouraging hismen to continue engaging the terrorist.

Major Gopi Singh displayed conspicuous gallantry , exemplary leadership, professional acumen and made the supreme sacrifice in fighting the terrorists.

13 .

15146963 GUNNER RANJEET SINGH REGIMENT OF ARTILLERY/ 29 RASHTRIYA RIFLES ( POSTHUMOUS)

(EffectiveDate of the award : 12 November 2005) On12 November 2005, information was received about presence of terrorists in a house in a village in district Baramulla in Jammu & Kashmir . Gunner Ranjeet Singh as part of Quick Reaction Team immediately cordoned the house . As Gunner Ranjeet Singh alongwith his buddy and company commander was about to enter the house, a terrorist rushed out of the house firing indiscriminately injuring Gunner Ranjeet Singh . Undeterred, he chased the terrorist and injured him . The terrorist suddenly turned and fired a burst at Gunner Ranjeet Singh injuring him seriously and entered a house. Unmindful of his injuries Gunner Ranjeet Singh crawled forward , lobbed a grenade inside the house and shot dead the terrorist . Suddenly , another terrorist 916

PART I- SEC . 1 THE GAZETTE OF INDIA, NOVEMBER 11 , 2006 ( KARTIKA 20, 1928 )

opened fire from the top floor. Gunner Ranjeet Singh , before falling down and succumbing to his injuries, let off a burst injuring the second terrorist , forcing him to get back into the house . He not only showed raw courage in fighting with the terrorists but also saved the life of his company commander . The second terrorist was subsequently neutralized .

Gunner Ranjeet Singh displayed raw courage, in the face of grave danger , acting far beyond call of duty and made the supreme sacrifice in the highest traditions of the IndianArmy.

14.

13753810 NAIK SARWAN KUMAR JAMMU AND KASHMIR RIFLES /SPECIAL GROUP (22 SPECIAL FORCE) (POSTHUMOUS)

(EffectiveDate of the award : 19 November 2005) Naik Sarwan Kumar was squad commander in an operation launched in an area in district Doda in Jammu & Kashmir.

On 19 November 2005 at 0030 hours , the troops cordoned a group of houses . Naik Sarwan observed suspicious activity in a double storey house . He informed his commander and silently covered the exit. At 1130 hours , terrorists sensing being trapped, made desperate attempt to escape hurling grenades and firing , injuring his buddy. Despite heavy fire, he kept his cool and showing good reflexes and raw courage killed one terrorist and injured other . While changing the magazine of his weapon, he spotted the third terrorist firing AK- 47 and closing onto him . Grievously injured by burst of fire, disregarding his personal safety, he blocked the terrorist and in fierce hand- to-hand combat, displaying raw courage killed him before attaining martyrdom . His body was recovered interlocked with the terrorist, holding terrorist in one hand and weapon in another .

Naik Sarwan Kumar displayed conspicuous bravery, raw courage , audacious action and made the supreme sacrifice in the highest traditions of the Indian Army .

15. EX -GS - 173840X SUPDT BUILDING / ROADS GRADE- II , GANESAN M (POSTHUMOUS)

(EffectiveDate of the award: 14 January 2006 ) Supdt BR Grade- II Ganesan M of 437 Road Maintenance Platoon , GREF under Project Hirak was deployed at Dett Ettapalli since April 2005 for construction of a 179.94 metre long bridge over Bandiya River in Chattisgarh .

PART I-SEC . 1

917 THE GAZETTE OF INDIA, NOVEMBER 11 , 2006 ( KARTIKA 20, 1928)

Chattisgarh State had been bearing the brunt of Naxalites since quite some time and they were not allowing any developmental work and improvement in other instructure in the State . Though the site of the bridge under construction is in a heavily naxal infested area , but due to technical skill, and efficient administration of Shri Ganesan M , the work was progressing with tremendous speed . Therefore, he was an eyesore for Naxalites . Frequent threats and warning of dire consequences from Naxalites to stop the construction work of the said bridge did not deter himfrom progressing the work.

On 14th Jan 2006 , at about 2200 hrs , a group of 70 to 80 armed naxalites attacked the GREF Camp at Ettapalli . The miscreants started beating the fellow workers in the Camp by shouting that who is constructing the bridge . Simultaneously, thev started looting personal belongings and setting fire the vehicles and plants parked there . Shri Ganesan M came forward , showed the high quality of leadership and responsibility to save his fellow workers and told the naxalites that he was constructing the bridge as per the Government orders for development of the area . The attackers then started beating him and ultimately killed him brutally. Shri Ganesan M made the supreme sacrifice to save the lives of his assistant Overseer Lala Ram , four other GREF Personnel besides ten CP Labourers by taking the entire responsibility on him .

Supdt BR Grade- II Ganesan M , thus, displayed exceptional courage, dogged determination and made the supreme sacrifice while performing his duties.

16.

4467595 COMPANY HAVILDAR MAJOR SARBJIT SINGH 10 SIKH LIGHT INFANTRY (POSTHUMOUS)

(EffectiveDate of the award : 28 January 2006) Company Havildar Major Sarbjit Singh was part of an ambush party in general area in Poonch District in Jammu & Kashmir .

On 28 January 2006 at 0230 hours, they observed a group of terrorists skirting the ambush site and attempting to infiltrate towards a flank. Realising that the infiltrating terrorists would get away and endanger own troops , they daringly moved forward to intercept the escaping group of terrorists . Company Havildar Major Sarbjit Singh and his buddy engaged the terrorists at close quarters in a fierce firefight in which he sustained grave splinter injuries. In a rare display of courage and in spite of sustaining grave splinter injuries he alongwith his buddy neutralised four terrorists. 5-321 GI/2006 918

PART I-SEC. 1 THE GAZETTE OF INDIA, NOVEMBER 11 , 2006 (KARTIKA 20, 1928)

At this time they observed two more terrorists closing in from a flank . Company Havildar Major Sarbjit Singh , with utter determination crawled towards the advancing terrorists , lobbed grenades and fired at them with his personal weapon . He succeeded in injuring the two terrorists before succumbing to own injuries.

Company Havildar Major Sarbjit Singh displayed courage, dedication to duty, spirit of camaraderie and made the supreme sacrifice while fighting the terrorists .

BARUN MITRA Director

No.101- Pres/2006 - The President is pleased to approve the award of the " Bar to Sena Medal / Army Medal " to the undermentioned personnel for the acts of exceptional courage:-

1. IC - 52752 MAJOR MANEESH KUKRETY, SM 5 JAT REGIMENT

2. IC - 55810 MAJOR JUNG BAHADUR SINGH , SM ARMY SERVICE CORPS/ 38 RASHTRIYA RIFLES

BARUN MITRA Director 919 PART I-SEC . I

THE GAZETTE OF INDIA, NOVEMBER 11 , 2006 ( KARTIKA 20 , 1928)

No.102- Pres/2006 The President is pleased to approve the award of the " Sena Medal / Army Medal " to the undermentioned personnel for the acts of exceptional courage: -

1. IC-46868 LIEUTENANT COLONEL RAJEEV BAKHSHI 13 DOGRA REGIMENT ( POSTHUMOUS)

2. IC - 46914 LIEUTENANT COLONEL RAMESH KUMAR CHEMMALA 15 JAT REGIMENT

3. IC- 50052 LIEUTENANT COLONEL AJAY KUMAR RAINA REGIMENT OF ARTILLERY/ 6 RASHTRIYA RIFLES

4. IC - 50284 LIEUTENANT COLONEL ADITYA VIKRAM SINGH RATHEE BRIGADE OF THE GUARDS/21 RASHTRIYA RIFLES

5. IC- 52000 MAJOR GURPREET SINGH , 23 RAJPUT REGIMENT

6. IC- 53608 MAJOR PRATEEK, PUNJAB REGIMENT/7 RASHTRIYA RIFLES 7. IC- 54563 MAJOR RAJIV GHOSH , 4 JAT REGIMENT

8. IC- 52618 MAJOR NAVEEN TΕΟΤΙΑ ARMY AIR DEFENCE/ 1 ASSAM RIFLES

9. IC- 54740 MAJOR CHARAN DEV SINGH 12BATTALION THE JAMMU AND KASHMIR RIFLES

10 . IC - 55346 MAJOR SURESH SINDHU 3 PARACHUTE REGIMENT ( SPÈCIAL FORCE )

11. IC - 56608 MAJOR MANEESH NAGPAL RAJPUTANA RIFLES/ 18 RASHTRIYA RIFLES

12. IC- 57763 MAJOR VIKRAM KADIAN ASSAM REGIMENT/35 RASHTRIYA RIFLES

13. IC- 58701 MAJOR RAVI KUMAR MANEY, 6 ASSAM REGIMENT

6-321 GI/2006 920

PART I-SEC . 1 THE GAZETTE OF INDIA, NOVEMBER 11 , 2006 ( KARTIKA 20, 1928)

14. IC - 59519 MAJOR SG SUDHANSU SEKHAR REGIMENT OF ARTILLERY/ 9 RASHTRIYA RIFLES

15. IC - 59940 MAJOR ABHINAV SHARMA ASSAM REGIMENT/ 42 RASHTRIYA RIFLES

16. IC - 61256 MAJOR DIGVIJAY SINGH CHAUHAN CORPS OF ENGINEERS/ 36 RASHTRIYA RIFLES

17. IC- 64366 MAJOR VIMAL SHARMA , 12 JAMMU AND KASHMIR RIFLES 18. IC - 64815 MAJOR DEVENDER SINGH ROHILLA ELECTRONICS AND MECHANICAL ENGINEERS/ 14 RASHTRIYA RIFLES 19. SS - 38657 MAJOR UDAY GANPATRAO JARANDE REGIMENT OF ARTILLERY/ 4 ASSAM RIFLES

20. SS - 39551 MAJOR ARUNDEV SINGH JASROTIΑ 12 THE JAMMU AND KASHMIR RIFLES

21. IC - 60250 CAPTAIN HARPREET SANDHU 4 PARACHUTE REGIMENT ( SPECIAL FORCES)

22. IC - 60459 CAPTAIN ASHOK KUMAR SHARMA KUMAON REGIMENT/ 13 RASHTRIYA RIFLES

23. IC - 61862 CAPTAIN RAJENDRA SINGH PUNJAB REGIMENT/ 22 RASHTRIYA RIFLES

24. IC- 62661 CAPTAIN ANIL KUMAR CORPS OF SIGNALS/ 15 RASHTRIYA RIFLES

25 . SS - 39824 CAPTAIN ASHUTOSH SHARMA , 15 JAT REGIMENT

26. SS- 39921 CAPTAIN ROHAN SAWHNEY REGIMENT OF ARTILLERY/ 34 RASHTRIYA RIFLES

27. SS -40082 CAPTAIN GAURAV GREWAL, 5 JAT REGIMENT

28. MS - 15071 CAPTAIN VIJAYKUMAR KRISHNA MORE ARMY MEDICAL CORPS/COMMAND HOSPITAL SOUTHERN COMMAND 29. IC- 63413 LIEUTENANT RUPINDER SINGH 12 BATTALION THE JAMMU AND KASHMIR RIFLES

30. IC- 63459 LIEUTENANT AMAR MAHADEV BHOSALE 20 JAMMU AND KASHMIR RIFLES PART I-SEC . 1

921 THE GAZETTE OF INDIA , NOVEMBER 11 , 2006 ( KARTIKA 20 , 1928)

31. IC - 63969 LIEUTENANT J NARHAYANAN 21 PARACHUTE REGIMENT ( SPECIAL FORCES )

32. IC- 64079 LIEUTENANT MANISH PANT , 13 DOGRA REGIMENT

33 . SS - 40580 LIEUTENANT SAGAR CHHETRI , 18 PUNJAB REGIMENT 34. SS - 41342 LIEUTENANT ANAND KUMAR 20 JAMMU AND KASHMIR RIFLES

35. JC- 412701 NAIB SUBEDAR KHOT MADHUKAR NARAYAN 21 PARACHUTE REGIMENT ( SPECIAL FORCES )

36. JC- 412760 NAIB SUBEDAR YOGAMBER SINGH 4 PARACHUTE REGIMENT ( SPECIAL FORCES)

37. JC- 499333 NAIB SUBEDAR AVTAR SINGH 13 SIKH REGIMENT ( POSTHUMOUS)

38. 2782279 COMPANY HAVILDAR MAJOR MOHD ASHRAF SHEIKH 22MARATHA LIGHT INFANTRY

39. 2788931 HAVILDAR MUDSHI GURAPPA TAMMA 21 PARACHUTE REGIMENT ( SPECIAL FORCES)

40. 4360512 HAVILDAR THANSING KAITHANG SIMTE ASSAM REGIMENT /42 RASHTRIYA RIFLES ( POSTHUMOUS) .

41. 4558682 HAVILDAR HIMMATRAO PANDURANG PAITHANE 1 MAHAR REGIMENT

42. 13751198 HAVILDAR RAJINDER KUMAR 1 JAMMU AND KASHMIR RIFLES

43. 13754365 HAVILDAR HARDIP SINGH , 17 JAMMU AND KASHMIR RIFLES 44. 14493409 HAVILDAR SUBHASH CHAND, REGIMENT OF ARTILLERY / 57 RASHTRIYA RIFLES ( POSTHUMOUS)

45. 4361162 LANCE HAVILDAR HITESWAR RAY, 8 ASSAM REGIMENT 46. 2487592 NAIK DALJIT SINGH , 26 PUNJAB REGIMENT

47. 3185323 ΝΑIK SARWAN RAM , 14 JAT REGIMENT

48. 3994499 ΝAIK SATISH KUMAR PARACHUTE REGIMENT/ 31 RASHTRIYA RIFLES ( COMMANDO) 922

PART I-SEC . 1 THE GAZETTE OF INDIA , NOVEMBER 11 , 2006 (KARTIKA 20, 1928)

49. 4071524 ΝAIK VIJAY KUMAR DHASMANA GARHWAL RIFLES/ 36 RASHTRIYA RIFLES

50 . 4073535 NAIK SATYA PAL SINGH GARHWAL RIFLES/ 14 RASHTRIYA RIFLES

51. 4074597 NAIK DIGVIJAI SINGH GARHWAL RIFLES/36 RASHTRIYA RIFLES

52. 4076365 NAIK RAJESH KUMAR BAHUGUNA GARHWAL RIFLES/36 RASHTRIYA RIFLES

53 . 9095971 ΝΑIK OM RAJ , JAMMU AND KASHMIR LIGHT INFANTRY/31 RASHTRIYA RIFLES (CDO ) ( POSTHUMOUS)

54 13759208 NAIK SUBHASH CHAND , 8 JAMMU AND KASHMIR RIFLES 55 . 14702902 ΝAIK DHURBA RAI , 1 NAGA REGIMENT

56. 14416825 NAIK HARI RAM REGIMENT OF ARTILLERY/ 36 RASHTRIYA RIFLES

57. 2485844 LANCE NAIK MOHAN LAL, 25 PUNJAB REGIMENT

58. 2996924 LANCE NAIK KULDIP SINGH 13 SIKH REGIMENT ( POSTHUMOUS )

59. 2997080 LANCE NAIK KAPIL DEV , 23 RAJPUT REGIMENT

60. 4075383 LANCE NAIK VINOD SINGH GARHWAL RIFLES/ 14 RASHTRIYA RIFLES ( POSTHUMOUS )

61. 4077945 LANCE NAIK RAJENDRA SINGH GARHWAL RIFLES/36 RASHTRIYA RIFLES

62. 4078931 LANCE NAIK RAJENDRA PRASAD 2 GARHWAL RIFLES ( POSTHUMOUS )

63. 4078950 LANCE NAIK RAJENDRA SINGH BISHT 8 GARHWAL RIFLES ( POSTHUMOUS )

64. 13758872 LANCE NAIK FAROOQ AHMAD RATHER 20 JAMMU AND KASHMIR RIFLES

65. 13759848 LANCE NAIK RAJNEESH KUMAR SHARMA 5 JAMMU AND KASHMIR RIFLES (POSTHUMOUS) PART I-SEC . 1

923 THE GAZETTE OF INDIA , NOVEMBER 11 , 2006 (KARTIKA 20, 1928)

66. 14429640 LANCE NAIK DHARMENDRA KUMAR RANJAN , REGIMENT OF ARTILLERY/ 32RASHTRIYA RIFLES ( POSTHUMOUS)

67. 15138801 LANCE NAIK SURYA MANI BEHERA REGIMENT OF ARTILLERY/ 32 RASHTRIYA RIFLES ( POSTHUMOUS)

68. 15611723 LANCE NAIK HEM SINGH YADAV BRIGADE OF THE GUARDS/21 RASHTRIYA RIFLES ( POSTHUMOUS) 69. 2492857 SEPOY ASHOK SINGH SLATHIA PUNJAB REGIMENT/22 RASHTRIYA RIFLES

70. 3004501 SEPOY VIKRAM SINGH RAJPUT REGIMENT/ 58 RASHTRIYA RIFLES

71. 4003614 SEPOY KESHAV DUTT DOGRA REGIMENT/ 31 RASHTRIYA RIFLES ( COMMANDO)

72 . 4191239 SEPOY DEEPAK OJHA , KUMAON REGT/ 50 RASHTRIYA RIFLES 73. 14703925 SEPOY KS THANREI , 1 NAGA REGIMENT

74. 4083146 RIFLEMAN DEEPAK CHAUHAN GARHWAL RIFLES/ 36 RASHTRIYA RIFLES

75. 4085855 RIFLEMAN NEELAM SINGH RANA, 2 GARHWAL RIFLES 76. 13768298 RIFLEMAN UTTAM MUKHIA 17. JAMMU AND KASHMIR RIFLES ( POSTHUMOUS)

77. 13771588 RIFLEMAN SURINDER KUMAR 1 JAMMU AND KASHMIR RIFLES

78. 15776416 GUNNER RAJANEKAR REDDY SALLARAM ARMY AIR DEFENCE/23 RASHTRIYA RIFLES ( POSTHUMOUS)

79. 4371737 PARATROOPER DAVID KHING 21 PARACHUT REGIMENT (SPECIAL FORCES)

80. 2696025 GRENADIER SUMER SINGH SHEKHAWAT, 16 GRENADIERS 81. 15614467 GUARDSMAN SANDEEP KUMAR BRIGADE OF THE GUARDS/ 21 RASHTRIYA RIFLES ( POSTHUMOUS)

- BARUN MITRA Director PART I- SER. , 924

THE GAZETTE OF INDIA, NOVEMBER 11 , 2006 ( KARTIKA 20, 1928 )

No. 103- Pres /2006 - The President is pleased to approve the award of the "Nao Sena Medal / Navy Medal " to the undermentioned personnel for the acts of exceptional courage : -

1.

LIEUTENANT SUPRADEEP CHENNUPATI ( 05207 - H )

2. RAM MEHAR , PO CD I ( 172508 - R)

3. AMARJEET , STD I ( 155992 - B )

4. RAVINDER KUMAR , PO CD I ( 115081 - Z )

5. ANOOP SINGH , SEA I CD II ( 121680 - Y)

6. AJAY KUMAR , LS CD I ( 116383 -H)

BARUN MITRA

Director No. 104- Pres / 2006 - The President is pleased to approve the award of the "Vayu Sena Medal / Air Force Medal " to Squadron Leader Gurjot Singh Bhullar ( 22901 ) , Flying (Pilot ) for the acts of exceptional courage.

BARUN MITRA

Director PART I-SEC . 1

925 THE GAZETTE OF INDIA, NOVEMBER 11 , 2006 ( KARTIKΑ 20, 1928)

MINISTRY OF COMMERCE AND INDUSTRY

(DEPARTMENT OF COMMERCE)

New Delhi , the 1st November 2006

NOTIFICATION

No. 14/2/ 2006-EOU : The Central Government hereby makes following amendment in the notification of the Govemment of India , Ministry of Commerce and Industry ( Department of Commerce) number 14/2/2006 - EOU dated the 22nd March , 2006 published in the Gazette Of India , Extraordinary , Part I Section 1 : -

In the said notification, in the entry against serial number 1 , for the words "Special Secretary, Department of Commerce " the words " Secretary , Department of Commerce" be substituted .

ANIL MUKIM

Jt. Secy.

PART I-SEC .

926

THE GAZETTE OF INDIA, NOVEMBER 11 , 2006 (KARTIKA 20, 1928)

MINISTRY OF COAL

New Delhi , the 3rd October 2005

RESOLUTION

No. 23011 /42/2005 - CPD - It has now been decided to constitute a Committee under the Chairmanship of Additional Secretary (Coal ) for deciding the long term coal linkages for Sponge Iron Units in supersession of Ministry of Steel , Government of India Order No. PV -4 (5 )/85 dated 21.02.1986.

The composition of the Standing Linkage Committee for Sponge Iron Units will be as under: -

-Chairman 1) Additional Secretary(Coal )

-Member 2) Adviser (Energy) Planning Commission .

-Member 3) Joint Secretary, Ministry of Coal (dealing with long term coal linkages)

-Member 4) Joint Secretary, Ministry of Steel

-Member 5) Executive Director , Traffic Transport ( Steel ) , Ministry of Railways

-Member 6) Chairman, Coal India Limited

-Member 7) Chairman-cum- Managing Directors of Coal Producing Companies

-Member 8) Chairman- cum- Managing Director , Singareni collieries Company Limited

ORDER

ORDERED that a copy of the resolution be communicated to the Ministries and Departments of the Government of India, President's Secretariat, Prime Minister's Office, Lok Sabha/Rajya Sabha Secretariat , State Governments, Chairman , CIL , CMDs , BCCL, CCL, ECL, WCL, SECL, MCL, NCL, CMPDIL , SCCL .

Ordered also that the Resolution be published in the Gazette of India for general information.

RINCHEN TEMP ()

Director प्रबन्धक , भारत सरकार मुद्रणालय, फरीदाबाद द्वारा मुद्रित एवं प्रकाशन नियंत्रक, दिल्ली द्वारा प्रकाशित , 2006 PRINTED BY THE MANAGER , GOVERNMENT OF INDIA PRESS , FARIDABAL , AND PUBLISHED BY THE CONTROLLER OF PUBLICATIONS , DELHI , 2006

Cite this issue. Weekly Gazette of India, Government of India, 11 November 2006. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.central.w.2006-11-11.18361/. Archive identifier in.gazette.central.w.2006-11-11.18361.