छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय
रायपुर, गुरूवार, दिनांक 26 मार्च, 2020 (चैत्र 6, 1942)
क्रमांक-5037/वि.स./विधान/2019. ― छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ स्थानीय निधि संपरीक्षा (संषोधन) विधेयक, 2020 (क्रमांक 4 सन् 2020) जो गुरूवार, दिनांक 26 मार्च, 2020 को पुरःस्थापित हुआ है, को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाषित किया जाता है।
हस्ता./-
(चन्द्र शेखर गंगराड़े) प्रमुख सचिव.
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्र. 4 सन् 2020)
छत्तीसगढ़ स्थानीय निधि संपरीक्षा (संशोधन) विधेयक, 2020
छत्तीसगढ़ स्थानीय निधि संपरीक्षा अधिनियम, 1973 (क्र. 43 सन् 1973) में और संशोधन करने हेतु विधेयक।
भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधान मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. (1) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ स्थानीय निधि संपरीक्षा (संशोधन) अधिनियम, 2020 कहलायेगा । संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारंभ;
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में होगा ।
(3) ये राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा।
2. छत्तीसगढ़ स्थानीय निधि संपरीक्षा अधिनियम, 1973 (क्र. 43 सन् 1973)(जो इसमें इसके पश्चात् मूल मूल अधिनियम का संशोधन
अधिनियम के रुप में निर्दिष्ट है) में,-
(एक) धारा 1 में, उप-धारा (1) "संक्षिप्त नाम" के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये,
अर्थात् :-
"(1) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ राज्य संपरीक्षा अधिनियम, 1973 कहलायेगा।"
(दो) शब्द "स्थानीय निधि संपरीक्षा" जहाँ कहीं भी आया हो के स्थान पर, शब्द "राज्य संपरीक्षा"
प्रतिस्थापित किया जाए।
धारा 2 का संशोधन 3. मूल अधिनियम में, धारा 2 में,-
(एक) खण्ड (क) में, शब्द तथा चिन्ह "विस्तृत संपरीक्षा" के पश्चात् शब्द तथा चिन्ह "नमूना संपरीक्षा, पूर्व
संपरीक्षा, समवर्ती संपरीक्षा, पश्चातवर्ती संपरीक्षा, फोरेंसिक संपरीक्षा, वित्तीय संपरीक्षा, अनुपालन संपरीक्षा, जोखिम आधारित संपरीक्षा, निष्पादन संपरीक्षा" अंतःस्थापित किया जाए; तथा (दो) खण्ड (ञ) के पश्चात् निम्नलिखित जोड़ा जाये, अर्थात्ः-
"(ट) "नमूना संपरीक्षा" से अभिप्रेत है चयनित माह/अवधि के लेखों और/या वित्तीय संव्यवहार
और/या किसी योजना की संपरीक्षा;
(ठ) "पूर्व संपरीक्षा" से अभिप्रेत है किसी निधि में से संदाय, आहरण या समायोजन के पूर्व की
जाने वाली संपरीक्षा;
(ड) "समवर्ती संपरीक्षा" से अभिप्रेत है किसी निधि में से संदाय, आहरण या समायोजन करने
के, या तो साथ ही साथ या उसके तुरन्त पश्चात् स्थल पर की जाने वाली संपरीक्षा;
(ढ) "पश्चातवर्ती संपरीक्षा" से अभिप्रेत है किसी निधि में से संदाय, आहरण या समायोजन के पश्चात् की जाने वाली संपरीक्षा, जो समवर्ती संपरीक्षा न हो, किंतु इसमें विस्तृत संपरीक्षा एवं नमूना संपरीक्षा सम्मिलित है;
(ण) "फोरेंसिक संपरीक्षा" से अभिप्रेत है किसी फर्म या प्राधिकारी या व्यक्ति के वित्तीय
अभिलेखों का ऐसा परीक्षण एवं मूल्यांकन, जिसे साक्ष्य के रूप में किसी न्यायालय अथवा विधिक कार्यवाही में प्रयोग किया जा सके;
(त) "वित्तीय संपरीक्षा" से अभिप्रेत है किसी प्राधिकारी के वित्तीय प्रतिवेदनों एवं वित्तीय
प्रतिवेदन प्रकियाओं का स्वतंत्र एवं वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन;
(थ) "अनुपालन संपरीक्षा" से अभिप्रेत है किसी प्राधिकारी के लिये विहित नियमों एवं विनियमों
के अनुपालन पर केंद्रित विस्तृत पुनर्विलोकन की प्रकिया;
(द) "जोखिम आधारित संपरीक्षा" से अभिप्रेत है संपरीक्षा की ऐसी शैली, जो किसी संस्थान
की वित्तीय अनियमितताओं के होने की जोखिम के विश्लेषण एवं प्रबंधन पर केन्द्रित हो;
(ध) "निष्पादन संपरीक्षा से अभिप्रेत है किसी निकाय के कार्यक्रम, क्रिया, संचालन, प्रबंधन
प्रणालियों और प्रक्रियाओं की उपलब्ध संसाधनों के मितव्ययिता, दक्षता और प्रभावशीलता से लक्ष्य प्राप्ति का आकलन। (न) "अनुसूची" से अभिप्रेत है इस अधिनियम से संलग्न अनुसूचियां;
(प) "अधिभार" से अभिप्रेत है किसी धन या अन्य सम्पत्ति की हानि, दुव्र्यय, दुरूपयोजन या दुर्विनियोजन की वह राशि, जिसके लिये संचालक किसी व्यक्ति को उत्तरदायी ठहराता हो कि उसके किसी अपचार या घोर उपेक्षा के कारण हानि कारित हुई है;
(फ) "लेखे" से अभिप्रेत है किसी प्राधिकारी के वित्तीय संव्यवहार एवं सभी संबंधित
अभिलेख।"
धारा 7 का संशोधन 4. मूल अधिनियम में, धारा 7 में,-
(1) उप-धारा (1) में शब्द "पांच सौ रूपये" के स्थान पर, शब्द "पच्चीस हजार रूपये"
प्रतिस्थापित किया जाए; और
(2) उप-धारा (3) में, शब्द "ऐसी मंजूरी क्यों न दे दी जाये" के पूर्व तथा शब्द "वह यह हेतुक
दर्शाये कि" के पश्चात् शब्द "तीस दिवस के भीतर" अन्तःस्थापित किया जाये।
5. मूल अधिनियम में, धारा 8-क की उपधारा (1) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया धारा 8-क का संशोधन जाये, अर्थात् :-
"(1) "उक्त अधिनियम की धारा - 4(1) एवं धारा 21(3) की अनुसूचियों में निर्दिष्ट निकायों के लेखों की संपरीक्षा के संबंध में संचालक, राज्य संपरीक्षा का वार्षिक प्रतिवेदन राज्य सरकार (वित्त विभाग) को प्रस्तुत किया जाएगा."
उद्देष्य एवं कारणों का अभिकथन
स्थानीय निधि संपरीक्षा का मूल अधिनियम वर्श 1973 का है। विगत वर्शों में संपरीक्षा के मापदण्डों, प्रविधियों एवं कार्यप्रणालियों में वृहद विकास हुआ है। वर्तमान अधिनियम को नवीन विकसित परिस्थितियों में कार्य संपादन करने के योग्य बनाना, नवीनतम प्रविधियों का समावेष किया जाना आवष्यक प्रतीत होता है।
स्थानीय निकायों को संवैधानिकता प्रदान किए जाने के फलस्वरूप जहां एक ओर इन निकायों के दायित्वों में वृद्धि हुई है, वहीं इनके बजट में भी अत्यधिक वृद्धि हुई है। स्थानीय स्वायत्तषासी निकायों के माध्यम से लोक निधि के उद्देष्यों के अनुरूप व्यय को सुनिष्चिित करने के उद्देष्य से यह आवष्यक है कि इनकी संपरीक्षा की व्यवस्था में प्रक्रियागत विकास किया जावे।
वर्तमान में स्थानीय निधि संपरीक्षा विभाग द्वारा न केवल स्थानीय निकायों की संपरीक्षा कार्य किया जा रहा है, अपितु अनेक स्वायत्तषासी निकायों एवं अन्य निधियों की भी संपरीक्षा कार्य संपादित किया जा रहा है। इन परिस्थितियों में इस अधिनियम के नाम में वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप संषोधन किया जाना भी आवष्यक है।
इस प्रकार स्थानीय निधि संपरीक्षा के कार्यात्मक सुगमता, संपरीक्षा की नवीन तकनीकों के प्रयोग से विभागीय दक्षता में वृद्धि तथा राज्य की समस्त संपरीक्षाधीन निगमित एवं अनिगमित निकायों के वैधानिक संपरीक्षा संपादन की आवष्यकता के आधार पर छत्तीसगढ़ स्थानीय निधि संपरीक्षा अधिनियम, 1973 (क्रमांक 43 सन् 1973) में संषोधन की आवष्यकता है.
2. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.
रायपुर दिनांक- 24-03-2020
भूपेश बघेल मुख्यमंत्री (भारसाधक सदस्य) उपाबंध
छत्तीसगढ़ स्थानीय निधि संपरीक्षा अधिनियम, 1973 (क्र. 43 सन् 1973) संशोधन विधेयक, 2020 का सुसंगत उद्धरण :-
धारा 1 संक्षिप्त नाम - (1) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ स्थानीय निधि संपरीक्षा अधिनियम, 1973 कहलायेगा।
धारा 2 परिभाषायें -(1) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) ''संपरीक्षा'' के अन्तर्गत आते हैंं विस्तृत संपरीक्षा, विशेष संपरीक्षा, स्थानिक संपरीक्षा (Resident Audit) तथा ऐसी अन्य संपरीक्षा जिसे कि राज्य सरकार समय-समय पर विनिर्दिष्ट करें;
(ख) ''संपरीक्षक'' से अभिप्रेत है, संचालक तथा उसके अन्तर्गत वे समस्त अन्य अधिकारी आते हैं जो धारा 3 के अधीन इस प्रयोजन से नियुक्त किये गये हाें कि वे उसकी सहायता करेंगे;
(ग) ''विस्तृत संपरीक्षा'' से अभिप्रेत है, संपूर्ण वर्ष के लेखाओं की संपरीक्षा;
(घ) ''संचालक'' से अभिप्रेत है, धारा 3 के अधीन नियुक्त किया गया संचालक, स्थानीय निधि संपरीक्षा तथा उसके अन्तर्गत कोई ऐसा अधिकारी आता है, जिसे उक्त धारा की उपधारा (4) के अधीन संचालक की शक्तियां प्रदत्त की गई हों;
(डं़) ''स्थानीय प्राधिकारी'' से अभिप्रेत है, कोई नगरपालिका निगम, नगरपालिका परिषद्, नगर पंचायत, नगर सुधार न्यास, ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत, कृषि उपज-मंडी समिति या कोई अन्य प्राधिकारी जो किसी नगरपालिका या स्थानीय निधि के नियंत्रण या प्रबंध का वैध रूप से हकदार हो, या जिसे ऐसा नियंत्रण या प्रबंध राज्य सरकार द्वारा सौंपा गया हो;
(च) ''स्थानीय निधि'' से अभिप्रेत है, कोई ऐसी निधि जिसके नियंत्रण तथा प्रबन्ध के लिये कोई स्थानीय प्राधिकारी वैध रूप से हकदार हो और उसके अन्तर्गत किसी ऐसे उपकर रेट, शुल्क या कर जिन्हे अधिरोपित करने के लिये ऐसा प्राधिकारी वैध रूप से हकदार हो, के आगम तथा ऐसे प्राधिकारी में निहित कोई संपत्ति आती है/आते हैं;
(छ) ''प्रधान अधिकारी'' से अभिप्रेत है :-
(एक) नगरपालिक निगम के मामले में, नगरपालिक आयुक्त;
(दो) नगरपालिका परिषद् के मामले में, अध्यक्ष;
(तीन) नगर सुधार न्यास के मामले में, सभापति;
(तीन-क) नगर पंचायत के मामले में, अध्यक्ष;
(चार) ग्राम पंचायत के मामले में, सरपंच;
(पांच) जनपद पंचायत के मामले में, अध्यक्ष;
(छः) जिला पंचायत के मामले में, अध्यक्ष;
(सात) कृषि उपज मंडी समिति के मामले में, अध्यक्ष;और
(आठ) किसी अन्य स्थानीय प्राधिकारी के मामले में, उसका ऐसा पदाधिकारी या अधिकारी जिसे राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा इस संबंध में विनिर्दिष्ट करें;
(ज) ''विशेष संपरीक्षा'' से अभिप्रेत है, किसी विनिर्दिष्ट मद या मदों के क्रमिक समूह से संबंधित ऐसे लेखाओं की, जिनकी कि पूर्ण परीक्षा की जाना अपेक्षित है, संपरीक्षा;
(झ) ''स्थानीक संपरीक्षा'' से अभिप्रेत है, व्यय की संवर्ती या पूर्व संपरीक्षा तथा प्राप्तिओं का पुनर्विलोकन;
(ञ) "वार्षिक प्रतिवेदन" से अभिप्रेत है, उक्त अधिनियम की धारा - 9 में यथा निर्दिष्ट संचालक, स्थानीय निधि संपरीक्षा द्वारा तैयार किये गये संपरीक्षा प्रतिवेदन की विषयवस्तु का समेकित प्रतिवेदन;
धारा 7 अवज्ञा के लिए शास्ति -(1) कोई भी व्यक्ति, जो धारा 6 की उपधारा (1) के ख्ांण्ड (क) या खण्ड (ख) के अधीन उसमें विधि पूर्वक की गई किसी अध्यपेक्षा का अनुपालन करने में जानबूझकर उपेक्षा करेगा या उस अध्यपेक्षा का अनुपालन करने से जानबूझकर इंकार करेगा किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष दोषसिध्दि पर ऐसे जुर्माने के दायित्वाधीन होगा जो पांच सौ रूपये तक का हो सकेगा.
(2) इस धारा के अधीन कोई भी कार्यवाही संचालक की लिखित मंजूरी के बिना संस्थित नही की जायगी.
(3) उपधारा (2) के अधीन ऐसी मंजूरी देने के पूर्व, संचालक उस व्यक्ति से, जिसके विरूध्द कार्यवाही संस्थित की जाना है, यह अपेक्षा करेगा कि वह यह हेतुक दर्शाये कि ऐसी मंजूरी क्यो न दे दी जाय.
धारा 8-क (1) संपरीक्षा रिपोर्ट -(1) उक्त अधिनियम की धारा - 4(1) की अनुसूची में निर्दिष्ट निम्नलिखित स्थानीय निकायों - 1. समस्त नगर पालिक निगमों,
2. समस्त नगर पालिका परिषदों,
3. समस्त नगर पंचायतों,
4. समस्त जिला पंचायतों,
5. समस्त जनपद पंचायतों,
6. समस्त ग्राम पंचायतों,
के लेखों की संपरीक्षा के संबंध में संचालक, स्थानीय निधि संपरीक्षा का वार्षिक प्रतिवेदन राज्य सरकार (वित्त विभाग) को प्रस्तुत किया जाएगा.
चन्द्र शेखर गंगराड़े प्रमुख सचिव. छत्तीसगढ़ विधान सभा