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छत्तीसगढ़शासन
पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़/दुर्ग/ 09 / 2013-2015 . "
सत्यमेव जयते
"बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान (बिना डाक टिकट) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22- छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई. दिनांक 30-05-2001 . "
छत्तीसगढ़ राजपत्र
(असाधारण)
प्राधिकार से प्रकाशित
-चैत्र 11 , शक 1942
क्रमांक 182]
रायपुर, मंगलवार, दिनांक 31 मार्च 2020-
छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय
रायपुर, गुरूवार, दिनांक 26 मार्च, 2020 (चैत्र 6, 1942)
क्रमांक-5039/ वि.स./विधान /2019. छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ आबकारी (संशोधन) विधेयक, 2020 (क्रमांक 5 सन् 2020) जो गुरूवार , दिनांक 26 मार्च, 2020 को पुरःस्थापित हुआ है , को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।
हस्ता./-
(चन्द्र शेखर गंगराड़े ) प्रमुख सचिव.
363 364
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्र. 5 सन् 2020)
छत्तीसगढ़ आबकारी (संशोधन) विधेयक, 2020 .
करने हेतु विधेयक । छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम , 1915 (क्र. 2 सन् 1915) को और संशोधित भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
1 . (1 ) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ आबकारी (संशोधन) अधिनियम, 2020
कहलायेगा ।
संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारंभ.
(2) इसका विस्तार संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में होगा ।
(3 ) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा । 2.
धारा 2 का संशोधन.
छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम , 1915 (क्र. 2 सन् 1915) (जो इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है) में, धारा 2में,-
(एक) खण्ड (1 ) को (1 - क) के रूप में पुनः क्रमांकित किया जाये; तथा
(दो) खण्ड (1 - क) के पूर्व , निम्नलिखित अन्तःस्थापित किया जाये , अर्थात्ः-
" (1 ) "एजेंसी" से अभिप्रेत है कम्पनी अधिनियम , 2013 (2013 का 18) , भागीदारी अधिनियम, 1932 (1932 का 9 ) 'के अंतर्गत पंजीकृत छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
364( 1) फर्म (संस्थायें) तथा प्रोप्राइटरशिप फर्म (संस्थायें);"
3. मूल अधिनियम में, धारा 17 में, उप- धारा (3 ) में,-
धारा 17 का संशोधन.
(एक) खण्ड (क) में, अर्ध विराम चिन्ह " ; " के स्थान पर, कोलन चिन्ह " : " प्रतिस्थापित किया जाये; तथा
(दो) खण्ड (क) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाये, अर्थात्ः-
"परन्तु यह कि उपरोक्त प्रावधान , उन राष्ट्रीय / राज्य राजमार्गों को लागू नही होंगे , जो किसी नगरीय क्षेत्र में से होकर गुजरते है ।"
4. मूल अधिनियम में,-
धारा 38 - क का संशोधन.
(क) धारा 38- क में, शब्द "तीन सौ रूपये " तथा " दो हजार रूपये" के स्थान पर, क्रमशः शब्द " दस हजार रूपये " तथा " पचास हजार रूपये " प्रतिस्थापित किया जाये;
(ख) धारा 38- क के पश्चात्, पूर्ण विराम चिन्ह " । " के स्थान पर, कोलन चिन्ह ": " प्रतिस्थापित किया जाये; तथा
(ग) धारा 38- क के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये , अर्थात्ः-
"परन्तु राज्य शासन या राज्य शासन के पूर्ण स्वामित्व एवं नियंत्रणाधीन निगम द्वारा संचालित 364( 2)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
अनुज्ञप्तियों के मामले में , नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी द्वारा नियुक्त कर्मचारी , विधिविरूद्ध कृत्य के लिये उत्तरदायी होंगे । उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा , जिस पर अपराध अधिरोपित किया गया है । "
5.
धारा 39का संशोधन.
धारा 39 के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये , अर्थात्ः-
"39 अनुज्ञप्तिधारी आदि द्वारा अवचार के लिये शास्ति.- इस अधिनियम के अधीन मंजूर की गई अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा पत्र या पास का कोई धारक या ऐसे धारक के नियोजन में के और उसकी ओर से कार्य करने वाला कोई व्यक्ति, जो,-
(क) किसी आबकारी अधिकारी द्वारा मांग किये जाने पर या ऐसी मांग करने के लिये सम्यक् रूप से सशक्त किसी अन्य अधिकारी द्वारा मांग किये जाने पर ऐसी अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या पास साशय प्रस्तुत करने में विफल रहता है, वह कारावास से , जिसकी अवधि तीन माह तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पच्चीस हजार तक का हो सकेगा या दोनों से , दण्डनीय होगा । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
364(3) (ख) धारा 34 द्वारा उपबंधित किसी मामले में के सिवाय, धारा 62 के अधीन बनाये गये किसी नियम का उल्लंघन करता है , वह कारावास से , जिसकी अवधि तीन माह तक की हो सकेगी या जुर्माने से , जो एक लाख रूपये तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
(ग ) अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या पास की शर्तों में से किसी भी शर्त को भंग करने का कोई भी कृत्य , जो कि इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित नहीं है , करता है, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन माह तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो एक लाख रूपये तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डनीय होगाः
परन्तु राज्य शासन या राज्य शासन के पूर्ण स्वामित्व एवं नियंत्रणाधीन निगम द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में , नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी द्वारा नियुक्त कर्मचारी , विधिविरूद्ध कृत्य के लिये उत्तरदायी होंगे । उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा , जिस पर अपराध अधिरोपित किया गया है । " 364(4)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
6.
धारा 44 का
मूल अधिनियम में , धारा 44 में,-
संशोधन.
(एक) प्रथम परन्तुक में, पूर्ण विराम चिन्ह " । " के स्थान पर, कोलन चिन्ह ": " प्रतिस्थापित किया जाये ;
(दो) प्रथम परन्तुक के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये ,
अर्थात्ः-
" परन्तु यह और कि राज्य शासन या राज्य शासन के पूर्ण स्वामित्व एवं नियंत्रणाधीन निगम द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में, नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी द्वारा नियुक्त कर्मचारी , विधिविरूद्ध कृत्य के लिये उत्तरदायी होंगे । उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा , जिस पर अपराध अधिरोपित किया गया है । " छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
364 ( 5)
उद्देश्य और कारणों का कथन
यतः, छत्तीसगढ़ राज्य की समस्त देशी और विदेशी मदिरा की फुटकर दुकानों का संचालन , राज्य शासन के पूर्ण स्वामित्व की सार्वजनिक उपक्रम , छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड (सी.एस.एम.सी.एल) के द्वारा किया जा रहा है । मदिरा दुकानों के संचालन हेतु सुपरवाईजर, विक्रयकर्ता, बहुउद्देशीय कर्मचारी तथा सुरक्षा गार्ड आदि को नियम एवं प्रक्रिया के अनुसार निगम की एजेंसियों द्वारा उपलब्ध कराया गया है ;
और यतः , राज्य की आम जनता के हित में दुकानों में निर्धारित दर पर मदिरा के विक्रय तथा मिलावटी मदिरा के विक्रय तथा अन्य विभिन्न प्रकार की अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण किया जाना आवश्यक है;
और यतः, आबकारी राजस्व को सुरक्षित किये जाने तथा राज्य की आम जनता के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने की दृष्टि से, राज्य में अवैध मदिरा के परिवहन, धारण तथा विक्रय को कड़ाई से नियंत्रित किया जाना अनिवार्य हैं ;
और यतः , मदिरा दुकानों की उचित स्थापना हेतु तथा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा इस संबंध में जारी किये गये स्पष्टीकरण आदेश दिनांक 11.07.2017 के प्रकाश में , शहर एवं नगरीय सीमाओं में से गुजरने वाले राजमार्गों से दुकानों की दूरी में कमी लाया जाना आवश्यक है;
अतएव , राज्य शासन , यह सुनिश्चित करने के क्रम में , छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम , 1915 (क्र. 2 सन् 1915) में संशोधन करने का निर्णय लिया है कि राज्य की आम जनता को उचित दर पर वैध मदिरा प्राप्त हो सके तथा अवैध मदिरा के परिवहन , धारण तथा विक्रय पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके ।
अतः यह विधेयक प्रस्तुत है ।
कवासी लखमा
रायपुर
वाणिज्यिक कर (आबकारी) मंत्री (भारसाधक सदस्य) दिनांक 25-3-2020
संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन माननीया राज्यपाल महोदया द्वारा अनुशंसित 364 ( 6)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 (क्रमांक 2 सन् 1915 ) (जो इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है)
प्रचलित अधिनियम
प्रस्तावित / संशोधित अधिनियम 1
2
धारा 2. परिभाषाएं के अंतर्गत खण्ड ( 19 ) के पश्चात् खण्ड (20 ) जोड़ा जावे,
( 20 ) एजेंसी से अभिप्रेत है कंपनी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत संस्था / संस्थाये पार्टनरशिप अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत तथा प्रोप्राइटरशिप संस्था/ संस्थायें संस्था/ संस्थायें
मूल अधिनियम की धारा 17 में उप- धारा (3) (क) के पश्चात् निम्न परन्तुक जोड़ा जाये
" परन्तु यह कि उपरोक्त प्रावधान, उन राष्ट्रीय / राज्य राजमार्गों को लागू नही होंगे , जो किसी नगरीय क्षेत्र में से होकर गुजरते है । "
धारा 38 - क. मादक मादक द्रव्य के अनुज्ञप्त विनिर्माता या विक्रेता पर ऐसी वस्तु में कोई अपायकर औषधि या कोई बाह्य संघटक या कोई मंदक या रंजक पदार्थ मिश्रित करने या मिश्रित करने देने के लिए शास्ति- यदि कोई अनुज्ञप्त विनिर्माता या अनुज्ञप्त विक्रेता या उसके नियोजन में का और उसकी ओर से कार्य करने वाला कोई व्यक्ति उसके द्वारा विनिर्मित किए गए , बेचे गए या विक्रय के लिए रखे गये या अभिदर्शित किए गए किसी मादक द्रव्य में अनुज्ञप्ति में, यथाविहित के अलावा कोई उपायकर औषधि या कोई बाह्य संघटक अथवा कोई मंदक या रंजक मिश्रित करेगा या मिश्रित करने देगा अथवा जिसके कब्जे में कोई ऐसा मादक द्रव्य होगा जिसमें कि ऐसा अपमिश्रण किया गया हो , वह कारावास से जिसकी अवधि एक मास से कम की नहीं होगी , किन्तु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी , तथा जुर्माने से, जो "दस हजार रूपये " से कम का नहीं होगा, किन्तु जो "पचास हजार रूपये " तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
"परन्तु राज्य शासन या राज्य शासन के पूर्ण स्वामित्व एवं नियंत्रणाधीन निगम द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में, नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी द्वारा नियुक्त कर्मचारी , विधिविरूद्ध कृत्य के लिये उत्तरदायी होंगे । उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा, जिस पर अपराध अधिरोपित किया गया है । " धारा 38 - क. मादक मादक द्रव्य के अनुज्ञप्त विनिर्माता या विक्रेता पर ऐसी वस्तु में कोई अपायकर औषधि या कोई बाह्य संघटक या कोई मंदक या रंजक पदार्थ मिश्रित करने या मिश्रित करने देने के लिए शास्ति- यदि कोई अनुज्ञप्त विनिर्माता या अनुज्ञप्त विक्रेतः या उसके नियोजन में का और उसकी ओर से कार्य करने वाला कोई व्यक्ति उसके द्वारा विनिर्मित किए गए , बेचे गए या विक्रय के लिए रखे गये या अभिदर्शित किए गए किसी मादक द्रव्य में अनुज्ञप्ति में, यथाविहित के अलावा कोई उपायकर औषधि या कोई बाह्य संघटक अथवा कोई मंदक या रंजक मिश्रित करेगा या मिश्रित करने देगा अथवा जिसके कब्जे में कोई ऐसा मादक द्रव्य होगा जिसमें कि ऐसा अपमिश्रण किया गया हो, वह कारावास से जिसकी अवधि एक मास से कम की नहीं होगी , किन्तु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी , तथा जुर्माने से, जो तीन सौ रूपये से कम का नहीं होगा, किन्तु जो दो हजार रूपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा । छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
364 ( 7) प्रचलित अधिनियम
प्रस्तावित / संशोधित अधिनियम
2
1
धारा 39 अनुज्ञप्तिधारियों आदि द्वारा अवचार किया जाने के लिए शास्ति - इस अधिनियम के अधीन मंजूर की गई अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा पत्र या पास का कोई धारक या ऐसे धारक के नियोजन में का और उसकी ओर से कार्य करने वाला कोई व्यक्ति, जो -
धारा 39 अनुज्ञप्तिधारियों आदि द्वारा अवचार किया जाने के लिए शास्ति- इस अधिनियम के अधीन मंजूर की गई अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या पास का कोई धारक या ऐसे धारक के नियोजन में का और उसकी ओर से कार्य करने वाला कोई व्यक्ति, जो -
(क) किसी आबकारी अधिकारी द्वारा मांग किये जाने पर या ऐसी मांग करने के लिये सम्यक् रूप से सशक्त किसी अन्य अधिकारी द्वारा मांग किये जाने पर ऐसी अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या पास साशय प्रस्तुत करने में विफल रहता है, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन माह तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पच्चीस हजार तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डनीय होगा । (क) किसी आबकारी अधिकारी द्वारा मांग की जाने पर या ऐसी मांग करने के लिए सम्यक् रूप से सशक्त किसी अन्य अधिकारी द्वारा मांग की जाने पर ऐसी अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या पास साशय पेश नहीं करेगा, या
(ख) धारा 34 द्वारा उपबंधित किसी मामले में के सिवाय धारा 62 के अधीन बनाए गए किसी नियम का साशय उल्लंघन करेगा, या
(ख) धारा 34 द्वारा उपबंधित किसी मामले में के सिवाय, धारा 62 के अधीन बनाये गये किसी नियम का उल्लंघन करता है , वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन माह तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो एक लाख रूपये तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डनीय होगा । (ग ) अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या पास की शर्तों में से किसी भी शर्त को भंग करते हुए कोई भी ऐसा कार्य , जो इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित नहीं है , साशय करेगा,
(ग) अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या पास की शर्तों में से किसी भी शर्त को भंग करने का कोई भी कृत्य , जो कि इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित नहीं है , करता है, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन माह तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो एक लाख रूपये तक का हो सकेगा या दोनों से , दण्डनीय होगाः
वह (क) के मामले में जुर्माने से, जो चार सौ रूपये तक का हो सकेगा तथा (ख) या (ग) के मामले में जुर्माने से जो दस हजार रूपये तक का हो सकेगा, दण्डनीय हो ।
परन्तु राज्य शासन या राज्य शासन के पूर्ण स्वामित्व एवं नियंत्रणाधीन निगम द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में, नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी द्वारा नियुक्त कर्मचारी , विधिविरूद्ध कृत्य के लिये उत्तरदायी होंगे । उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा , जिस पर अपराध अधिरोपित किया गया है । "
धारा 44. सेवकों के कार्यों के लिये धारा 44. सेवकों के कार्यों के लिये अनुज्ञप्तिधारी का आपराधिक दायित्व जहां इस अधिनियम के अधीन मंजूर की गई किसी अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या पास के धारक के नियोजन में के और उसकी ओर से कार्य करने वाले कसी व्यक्ति के द्वारा धारा 34 , धारा 35, धारा 36 ए या धारा 39 के अधीन कोई अपराध किया जाता है, वहां ऐसा धारक भी उसी प्रकार दण्डनीय होगा मानो उसने स्वयं वह अपराध किया है , जब तक वह यह सिद्ध न कर दे कि उसके द्वारा ऐसे अपराध को रोकने के लिए सभी सम्यक् और युक्तियुक्त पूर्वावधानियां बरती गई थी । अनुज्ञप्तिधारी का आपराधिक दायित्व- जहां इस अधिनियम के अधीन मंजूर की गई किसी अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या पास के धारक के नियोजन में के और उसकी ओर से कार्य करने वाले कसी व्यक्ति के द्वारा धारा 34 , धारा 35 , धारा 36 ए या धारा 39 के अधीन कोई अपराध किया जाता है , वहां ऐसा धारक भी उसी प्रकार दण्डनीय होगा मानो उसने स्वयं वह अपराध किया है , जब तक वह यह सिद्ध न कर दे कि उसके द्वारा ऐसे अपराध को रोकने के लिए सभी 364(8)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
सम्यक् और युक्तियुक्त पूर्वावधानियों बरती गई थी ।
परन्तु वास्तविक अपराधी से भिन्न कोई भी व्यक्ति जुर्माने के संदाय में व्यतिक्रम करने पर ही कारावास से दण्डनीय होगा , अन्यथा नहीं ।
(एक) प्रथम परन्तुक में , पूर्ण विराम चिन्ह " । " के स्थान पर, कोलन चिन्ह ": " प्रतिस्थापित किया जाये;
परन्तु वास्तविक अपराधी से भिन्न कोई भी व्यक्ति जुर्माने के संदाय में व्यतिक्रम करने पर ही कारावास से दण्डनीय होगा, अन्यथा नहीं ।
(दो) प्रथम परन्तुक के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये , अर्थात्ः-
"परन्तु यह और कि राज्य शासन या राज्य शासन के पूर्ण स्वामित्व एवं नियंत्रणाधीन निगम द्वारा संचालित अनुज्ञप्तियों के मामले में, नियत क्रम में उनके द्वारा अधिकृत एजेंसी द्वारा नियुक्त कर्मचारी , विधिविरूद्ध कृत्य के लिये उत्तरदायी होंगे । उक्त अवैधानिक कृत्य का भार ऐसे व्यक्ति पर होगा , जिस पर अपराध अधिरोपित किया गया है । "
चन्द्र शेखर गंगराड़े
प्रमुख सचिव छत्तीसगढ़ विधान सभा .
संचालक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री , छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय , रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2020 .