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छत्तीसगढ़शासन
पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़/दुर्ग/ 09 / 2013-2015 . "
सत्यमेव जयते
"बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान (बिना डाक टिकट) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22- छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई. दिनांक 30-05-2001 . "
छत्तीसगढ़ राजपत्र
(असाधारण)
प्राधिकार से प्रकाशित
-चैत्र 11 , शक 1942
क्रमांक 184 ]
रायपुर, मंगलवार, दिनांक 31 मार्च 2020-
छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय
रायपुर, गुरूवार, दिनांक 26 मार्च, 2020 (चैत्र 6, 1942)
क्रमांक-5043/ वि.स./विधान / 2019. छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक, 2020 (क्रमांक 7 सन् 2020) जो गुरूवार, दिनांक 26 मार्च, 2020 को पुरःस्थापित हुआ है , को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।
हस्ता./-
(चन्द्र शेखर गंगराड़े ) प्रमुख सचिव.
367 368
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्र. 7 सन् 2020)
छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी ( संशोधन) विधेयक , 2020
छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी अधिनियम, 1972 (क्र. 24 सन् 1973) को और संशोधित करने हेतु विधेयक ।
भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधान मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो:-
1. (1 ) यह अधिनियम कृषि उपज मण्डी (संशोधन) अधिनियम, 2020 कहलायेगा । संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारंभ.
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में होगा ।
(3) यह दिनांक 1 दिसम्बर , 2019 से भूतलक्षी प्रभाव से प्रवृत्त होगा ।
धारा 2 का संशोधन. 2. छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी अधिनियम, 1972 (क. 24 सन् 1973 ), (जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है) , धारा 2 में, उप - धारा (1 ) में, खण्ड (डड) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाए , अर्थात्ः
" (डड) " छोटा व्यापारी " से अभिप्रेत है कोई ऐसा व्यक्ति, जो किसी एक समय पर स्टाक में विभिन्न प्रकार की अधिसूचित कृषि उपज बीस क्विंटल से या कोई एक अधिसूचित कृषि उपज दस क्विंटल से अधिक न रखता हो:
परन्तु वह किसी भी एक दिन में दस क्विंटल धान्य से या तिलहन, दाल तथा तन्तु फसलों को मिलाकर पॉच क्विंटल से अधिक का कय नहीं करेगा । "
3. मूल अधिनियम में, धारा 10 के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाए , अर्थात्: - धारा 10 का संशोधन.
" 10. प्रथम मण्डी समिति का गठन होने तक के लिए भारसाधक अधिकारी या भारसाधक समिति की नियुक्ति-
(1) जब इस अधिनियम के अधीन कोई मण्डी प्रथम बार स्थापित की जाती है तो संचालक, आदेश द्वारा ,-
(क) किसी व्यक्ति को भारसाधक अधिकारी के रूप में नियुक्त करेगा ,
या
(ख) सात से अनधिक व्यक्तियों से मिलकर बनने वाली भारसाधक समिति को , पांच वर्ष से अनधिक कालावधि के लिये नियुक्त करेगा । भारसाधक अधिकारी या भारसाधक समिति संचालक के नियंत्रण के अध्यधीन रहते हुए , इस अधिनियम के अधीन मण्डी समिति की समस्त शक्तियों का प्रयोग करेगा / करेगी तथा समस्त कर्तव्यों का निर्वहन करेगा / करेगीः
परन्तु यह कि संचालक, किसी भी समय भारसाधक समिति के स्थान पर भारसाधक अधिकारी तथा भारसाधक अधिकारी के स्थान पर भारसाधक समिति नियुक्त कर सकेगा और इस प्रकार नियुक्त भारसाधक अधिकारी या भारसाधक समिति, जैसी भी स्थिति हो, अपने पूर्वाधिकारी को उपलब्ध शेष कालावधि तक पद धारण करेगा / करेगीः
परन्तु यह और कि भारसाधक अधिकारी की मृत्यु हो जाने, उसके पद त्याग कर देने , छुट्टी पर होने या उसके निलंबित होने की दशा में यह समझा जायेगा कि ऐसे पद की आकस्मिक रिक्ति हुई है और ऐसी रिक्ति संचालक द्वारा , यथाशक्य शीघ्र, उस पद को किसी व्यक्ति की नियुक्ति करके भरी जाएगी और जब तक छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
368( 1) ऐसी नियुक्ति नहीं कर दी जाती है तब तक, कलेक्टर द्वारा नामनिर्दिष्ट व्यक्ति, भारसाधक अधिकारी के रूप में कार्य करेगाः
परन्तु यह और भी कि यदि मण्डी समिति का गठन पूर्वोक्त कालावधि के अवसान होने के पूर्व हो जाता है तो ऐसा भारसाधक अधिकारी या भारसाधक समिति , नवीन रूप से गठित मण्डी समिति के प्रथम साधारण सम्मिलन के लिए नियत की गई तारीख से अपने पद पर नहीं रहेगा / रहेगी ।
(2) उप-धारा (1 ) के अधीन नियुक्त किसी भी भारसाधक अधिकारी को या उप - धारा (1 ) के खण्ड (ख ) के अधीन भारसाधक समिति में नियुक्त किए गए किसी भी व्यक्ति या समस्त व्यक्ति को , किसी भी समय, संचालक द्वारा हटाया जा सकेगा , जिसे उसके स्थान पर , यथास्थिति , किसी अन्य व्यक्ति या किसी अन्य व्यक्तियों को नियुक्त करने की शक्ति होगी ।
(3) उप-धारा (1 ) के अधीन भारसाधक अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया कोई भी व्यक्ति, अपनी सेवाओं के लिए ऐसा मानदेय, जो कि शासन द्वारा नियत किया जाये , मण्डी समिति निधि से प्राप्त करेगा तथा भारसाधक समिति का प्रत्येक सदस्य मण्डी समिति निधि से ऐसी दर से भत्ते प्राप्त करने का हकदार होगा, जिस दर से मण्डी समिति के सदस्यों को भत्ते देय हों ।
(4) उप-धारा (1 ) के अधीन नियुक्त भारसाधक अधिकारी या भारसाधक समिति, उस उप - धारा के अधीन अपनी अवधि का अवसान हो जाने पर भी, उस तारीख तक पदधारण किए रहेगा, जिस पर नवीन रूप से गठित मण्डी समिति के प्रथम साधारण सम्मिलन के लिए धारा 13 की उप- धारा (1 ) के अधीन नियत की गई है । "
धारा 17 का संशोधन .
4. मूल अधिनियम में, धारा 17 में, उप - धारा (2) में , खण्ड (उन्नीस) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाए , अर्थात्ः-
" (उन्नीस) मण्डी- प्रागंण में किये गये संव्यवहारों के संबंध में माल के तौलने तथा उसके परिवहन के लिए तुलैयों तथा हम्मालों का बारी - बारी से नियोजन करने की व्यवस्था तथा उनके पारिश्रमिक के निर्धारण की व्यवस्था करेगीः
परन्तु यह कि राज्य सरकार , इस उप - धारा के अंतर्गत तौल तथा अन्य कार्य हेतु न्यूनतम पारिश्रमिक दर अधिसूचित कर सकेगी , जिसका अनुपालन करने हेतु मण्डी समितियाँ आबद्ध होंगीः
परन्तु यह और कि इस खण्ड की कोई भी बात उन हम्मालों के नियोजित किये जाने के लिए लागू नहीं होगी , जो कि व्यापारियों
द्वारा मण्डी प्रांगण से अपने गोदामों तक अपने माल के परिवहन के
लिए नियोजित किये जायें । "
धारा 56 का संशोधन .
5. मूल अधिनियम में , धारा 56 में, उप- धारा (3) , (4) एवं (5 ) के स्थान पर , निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये , अर्थात्ः-
"(3) जहां कोई मण्डी समिति अतिष्ठित कर दी गई हो , तो संचालक , आदेश द्वारा , मण्डी समिति के कृत्यों को कार्यान्वित करने के लिए तथा उसकी शक्तियों का प्रयोग करने के लिए-
(क) किसी व्यक्ति को नियुक्त कर सकेगा, जो भारसाधक अधिकारी के नाम से जाना जायेगा, या
(ख) सात से अनधिक व्यक्तियों से मिलकर बनने वाली एक समिति नियुक्त कर सकेगा , जो भारसाधक समिति के नाम से जानी जायेगी, 368 ( 2)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
और अतिष्ठित की गई मण्डी समिति की ऐसी आस्तियाँ तथा दायित्व , जो कि ऐसे अंतरण की तारीख को हो , ऐसे भारसाधक अधिकारी या ऐसी भारसाधक समिति को अंतरित कर सकेगाः
परन्तु यह कि संचालक, किसी भी समय भारसाधक समिति के स्थान पर भारसाधक अधिकारी और भारसाधक अधिकारी के स्थान पर भारसाधक समिति नियुक्त कर सकेगाः
परन्तु यह और कि भारसाधक अधिकारी की मृत्यु हो जाने, उसके पद त्याग कर देने, उसके छुट्टी पर होने या उसके निलंबित होने की दशा में यह समझा जाएगा कि ऐसे पद की आकस्मिक रिक्ति हुई है और ऐसी रिक्ति, संचालक द्वारा , यथाशक्य शीघ्र , उस पद पर किसी व्यक्ति की नियुक्ति करके भरी जाएगी और जब तक ऐसी नियुक्ति नहीं कर दी जाती है , तब तक कलेक्टर द्वारा नामनिर्दिश्ट व्यक्ति, भारसाधक अधिकारी के रूप में कार्य करेगा । (4) किसी भी भारसाधक अधिकारी को या उप -धारा ( 3 ) के खण्ड (ख) के अधीन भारसाधक समिति में नियुक्त किए गए किसी व्यक्ति या समस्त व्यक्तियों को, किसी भी समय संचालक द्वारा हटाया जा सकेगा , जिसे उसके स्थान पर , यथास्थिति, किसी अन्य व्यक्ति या किन्हीं अन्य व्यक्तियों को नियुक्त करने की शक्तिहोगी ।
(5) उप-धारा (3) के अधीन भारसाधक अधिकारी के रुप में नियुक्त किया गया कोई भी व्यक्ति, अपनी सेवाओं के लिए ऐसा मानदेय , जो कि शासन द्वारा नियत किया जाये , मण्डी समिति निधि से प्राप्त करेगा तथा भारसाधक समिति का प्रत्येक सदस्य, मण्डी समिति निधि से ऐसी दर से भत्ते प्राप्त करने का हकदार होगा, जिस दर से मण्डी समिति के सदस्यों को भत्ते देय हों । "
धारा 57 का संशोधन. 6. मूल अधिनियम में, धारा 57 के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाए , अर्थात्: - " 57. धारा 13 के अधीन विघटन के परिणाम.-(1) जहां कोई मण्डी समिति धारा 13की उप-धारा (2) के अधीन विघटित हो जाती है, वहां निम्नलिखित परिणाम होंगे , अर्थात्: -
(क) मण्डी समिति के समस्त सदस्यों और उसके अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष के संबंध में यह समझा जाएगा कि उन्होंने उक्त उप-धारा के अधीन ऐसी मण्डी समिति के विघटित होने की तारीख से अपने पद रिक्त कर दिये हैं;
( ख) इस अधिनियम के अधीन मण्डी समिति की समस्त शक्तियों का प्रयोग तथा समस्त कर्तव्यों का निर्वहन, संचालक के नियंत्रण के अध्यधीन रहते हुए-
(एक) किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाएगा, जो भारसाधक अधिकारी के नाम से जाना जायेगा और जिसे संचालक , आदेश द्वारा , इस निमित्त नियुक्त करे;
या
(दो) सात से अनधिक व्यक्तियों से मिलकर बनने वाली एक समिति द्वारा किया जाएगा, जो भारसाधक समिति के नाम से जानी जायेगी और जिसे संचालक, आदेश द्वारा , इस निमित्त नियुक्त करेः
परन्तु यह कि संचालक, किसी भी समय , भारसाधक समिति के स्थान पर भारसाधक अधिकारी और भारसाधक अधिकारी के स्थान पर भारसाधक समिति नियुक्त कर सकेगाः
परन्तु यह और कि भारसाधक अधिकारी की मृत्यु हो जाने, उसके पद त्याग कर देने , छुट्टी पर होने या उसके निलंबित होने की दशा में यह समझा जाएगा कि ऐसे पद की आकस्मिक रिक्ति हुई है और ऐसी रिक्ति, संचालक द्वारा , यथाशक्य शीघ्र, उस पद पर किसी व्यक्ति की नियुक्ति करके भरी जाएगी और जब तक ऐसी नियुक्त नहीं कर दी 368 ( 3)
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जाती है, तब तक कलेक्टर द्वारा नामनिर्दिष्ट व्यक्ति, भारसाधक अधिकारी के रूप में कार्य करेगा;
(ग) मण्डी समिति में निहित समस्त संपत्ति , इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए भारसाधक अधिकारी या भारसाधक समिति में न्यासतः निहित हो जाएगी ।
(2) किसी भी भारसाधक अधिकारी को या उप- धारा (1 ) के खण्ड (ख) के उप- खण्ड (दो) के अधीन भारसाधक समिति में नियुक्त किए गए किसी व्यक्ति या समस्त व्यक्तियों को किसी भी समय संचालक द्वारा हटाया जा सकेगा, जिसे उसके स्थान पर, यथास्थिति, किसी अन्य व्यक्ति या किन्हीं अन्य व्यक्तियों को नियुक्त करने की शक्ति होगी ।
(3) उप-धारा (1 ) के अधीन भारसाधक अधिकारी के रुप में नियुक्त किया
गया कोई भी व्यक्ति, अपनी सेवाओं के लिए ऐसा मानदेय , जो कि शासन द्वारा नियत किया जाये , मण्डी समिति निधि से प्राप्त करेगा तथा भारसाधक समिति का प्रत्येक सदस्य, मण्डी समिति निधि से ऐसे दर से भत्ते प्राप्त करने का हकदार होगा, जिस दर से मण्डी समिति के सदस्यों को भत्ते देय हों ।
(4) यथा पुनर्गठित मण्डी समिति के प्रथम साधारण सम्मिलन के लिए नियत की गई तारीख से भारसाधक अधिकारी या भारसाधक समिति अपने पद पर नहीं रहेगा / रहेगी । "
उद्देश्य और कारणों का कथन
यतः, राज्य सरकार का दृष्टिकोण है कि उत्पादन क्षमता तथा मार्केटिंग सरप्लस में सामान्य वृद्धि होने और स्थानीय स्तर पर विक्रेताओं को सुविधा देने से, छोटे व्यापारी की स्टाक क्षमता तथा प्रतिदिन की कय क्षमता में वृद्धि हो सकेगी, मण्डी अधिनियम के अधीन सशक्त किये गये अधिकारियों को, अवैध व्यापार पर प्रभावी नियंत्रण तथा प्रभावी कार्यवाही के लिये, अधिसूचित कृषि उपज के साथ साथ वाहन को भी अभिग्रहण करने की शक्ति होगी तथा प्रदेश की मण्डियों में तुलैया एवं हम्मालों की प्रचलित पारिश्रमिक दरों में समरूपता लाने के लिये न्यूनतम पारिश्रमिक दर को अधिसूचित करना अपेक्षित है एवं मण्डी समितियों में मण्डी अधिनियम के उद्देश्य के अनुसार कृषकों के हितों के संरक्षण और उनको उचित प्रतिनिधित्व दिये जाने हेतु, भारसाधक अधिकारी या भारसाधक समिति का गठन करना आवश्यक है । अतएव , छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी अधिनियम, 1972 (क्र. 24 सन् 1973) में संशोधन करने का विनिश्चय किया गया है ।
अतः यह विधेयक प्रस्तुत है ।
रायपुर
दिनांक- 25-03-2020
रविन्द्र चौबे कृषि मंत्री (भारसाधक सदस्य) छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
368(4)
उपाबंध
छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 (क्रमांक 24 सन् 1973 ) की धारा 2 की उपधारा (1 ) के खण्ड (डड) , धारा 10 , धारा 17 की उप - धारा (2 ) के खण्ड (उन्नीस ) , धारा 56 की उपधारा (3 ) , (4) , (5) तथा धारा 57 के संबंध में सुसंगत उद्धरण धारा 2 की उपधारा (1 ) के खण्ड (डड) – " छोटा व्यापारी " से अभ्रिपेत है कोई ऐसा व्यक्ति जो किसी एक समय पर स्टाक में विभिन्न प्रकार की अधिसूचित कृषि उपज दस क्विंटल से या कोई एक अधिसूचित कृषि उपज चार क्विंटल से अधिक न रखता हो :
परन्तु वह किसी भी एक दिन में चार क्विंटल धान्य से या दो क्विंटल तिलहनों , दालों तथा तन्तु फसलों से अधिक का कय नहीं करेगा य
धारा 10
10. प्रथम मंडी समिति का गठन होने तक के लिए भारसाधक अधिकारी की नियुक्ति (1 ) जब इस अधिनियम के अधीन कोई मंडी प्रथम बार स्थापित की जाती है तो (प्रबंध संचालक) आदेश द्वारा (दो वर्ष से अनधिक कालावधि के लिए ) किसी व्यक्ति को भारसाधक अधिकारी के रूप में नियुक्त करेगा । भारसाधक अधिकारी प्रबंध संचालक के नियंत्रण के अध्यधीन रहते हुए , इस अधिनियम के अधीन मंडी समिति की समस्त शक्तियों का प्रयोग करेगा तथा समस्त कर्तव्यों का पालन करेगा:
परन्तु भारसाधक अधिकारी की मृत्यु हो जाने , उसके पद त्याग कर देने , छुट्टी पर होने या उसके निलंबित होने की दशा में यह समझा जायेगा कि ऐसे पद में आकस्मिक रिक्ति हो गई है और ऐसी रिक्ति प्रबंध संचालक द्वारा यथाशक्य शीघ्र , उस पद पर किसी व्यक्ति की नियुक्ति करके भरी जायेगी और जब तक ऐसी नियुक्ति नहीं कर दी जाती है , तब तक कलेक्टर द्वारा नाम निर्दिष्ट व्यक्ति भारसाधक के रूप में कार्य करेगा :
परन्तुं यह और भी कि यदि मंडी समिति का गठन पूर्वोक्त कालावधि का अवसान होने के पूर्व हो जाता है तो ऐसा भारसाधक अधिकारी , नवीन रूप से गठित मंडी समिति प्रथम साधारण सम्मिलन के लिये नियत की गई तारीख से अपने पद पर नहीं रहेगा ।
(2) उपधारा (1 ) के अधीन नियुक्त किये गये किसी भी भारसाधक अधिकारी को किसी भी समय , प्रबंध संचालक द्वारा हटाया जा सकेगा , जिसे उसके स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को नियुक्त करने की शक्ति होगी । 368(5)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
(3) उपधारा (1 ) के अधीन भारसाधक अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया कोई भी व्यक्ति, अपनी सेवाओं के लिये ऐसा वेतन तथा भत्ते , जो कि प्रबंध संचालक द्वारा नियत किए जाएं , मंडी समिति निधि से प्राप्त करेगा ।
(4) उपधारा (1 ) के अधीन नियुक्त किया गया भारसाधक अधिकारी , उस उपधारा के अधीन अपनी अवधि का अवसान हो जाने पर भी, उस तारीख तक पद धारण किये रहेगा जो कि नवीन रूप से गठित मंडी समिति के प्रथम साधारण सम्मिलन के लिये ( धारा 13 की उपधारा (1 ) ) के अधीन नियत की गई है ।
धारा 17 की उप -धारा (2 ) के खण्ड (उन्नीस ) –
(उन्नीस ) मण्डी - प्रागंण में किये गये संव्यवहारों के संबंध में माल के तौलने तथा उसके परिवहन के लिए तुलैयों तथा हम्मालों का बारी - बारी से नियोजन करने की व्यवस्था करेगी :
परन्तु इस खण्ड की कोई भी बात उन हम्मालों के नियोजित किये जाने के लिए लागू नहीं होगी जो कि व्यापारियों द्वारा मंडी प्रांगण से अपने गोदामों तक अपने माल के परिवहन के लिए नियोजित किये जायें ।
धारा 56 की उपधारा (3) , (4) , (5) -
(3 ) जहाँ कोई मंडी समिति अतिष्ठित कर दी गयी है , तो प्रबंध संचालक मंडी समिति के कृत्यों को कार्यान्वित करने के लिए तथा उसकी शक्तियों का प्रयोग करने के लिए आदेश द्वारा किसी व्यक्ति को नियुक्त कर सकेगा जो भारसाधक अधिकारी के नाम से जाना जाएगा और प्रबंध संचालक अतिष्ठित की गई मंडी समिति की ऐसी आस्तियाँ तथा दायित्व , जो कि ऐसे अन्तरण की तारीख को हों, भारसाधक अधिकारी को अन्तरित कर सकेगा :
परन्तु भारसाधक अधिकारी की मृत्यु हो जाने या उसके पद त्याग कर देने या उसके छुट्टी पर होने या उसके निलंबित होने की दशा में यह समझा जाएगा कि ऐसे पद में आकस्मिक रिक्ति हो गई है और ऐसी रिक्ति प्रबंध संचालक द्वारा यथाशक्य शीघ्र उस पद पर किसी व्यक्ति की नियुक्ति करके भरी जाएगी और जब तक ऐसी नियुक्ति नहीं कर दी जाती है तब तक कलेक्टर द्वारा नामनिर्दिष्ट व्यक्ति भारसाधक अधिकारी के रूप में कार्य करेगा । (4) उपधारा (3) के अधीन नियुक्त किए गये किसी भी भारसाधक अधिकारी को किसी भी समय प्रबंध संचालक द्वारा हटाया जा सकेगा जिसे उसके स्थान किसी अन्य व्यक्ति को नियुक्त करने की शक्ति होगी ।
(5) उपधारा (3 ) के अधीन भारसाधक अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया कोई भी व्यक्ति, अपनी सेवाओं के लिए ऐसा वेतन तथा भत्ते, जो कि प्रबंध संचालक द्वारा नियत किये जाएँ, मंडी समिति निधि से प्राप्त करेगा । छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
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धारा 57
57. धारा 13 के अधीन विघटन के परिणाम
(1 ) जहां कोई मंडी समिति धारा ( 13 की उपधारा (2 ) के अधीन परन्तुक) विघटित हो जाती है , वहां निम्नलिखित परिणाम होंगे, अर्थात्
(क) मंडी समिति के समस्त सदस्यों और उसके अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष के संबंध में यह समझा जाएगा कि उन्होंने उक्त उपधारा के अधीन ऐसी मंडी समिति के विघटन हो जाने की तारीख से अपना पद रिक्त कर दिया हैं,
(ख ) इस अधिनियम के अधीन मंडी समिति की समस्त शक्तियों का प्रयोग तथा उसके मंडी समिति के समस्त कर्तव्यों का पालन प्रबंध संचालक के नियंत्रण के अध्यधीन रहते हुए किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाएगा , जिसे प्रबंध संचालक , आदेश द्वारा , इस संबंध में नियुक्त करें और भारसाधक अधिकारी के नाम से जाना जाएगा :
परन्तु भारसाधक अधिकारी की मृत्यु हो जाने, उसके पद त्याग कर देने, छुट्टी पर होने या उसके निलंबित होने की दशा में यह समझा जाएगा कि ऐसे पद की आकस्मिक रिक्ति हो गई है और ऐसी रिक्ति, प्रबंध संचालक द्वारा यथाशक्य शीघ्र उस पद पर किसी व्यक्ति की नियुक्ति करके भरी जाएगी और जब तक ऐसी नियुक्त न कर दी जाती है तब तक कलेक्टर नाम निर्दिष्ट भारसाधक अधिकारी के रूप में कार्य करेगा,
(ग) मंडी समिति में निहित समस्त संपत्ति इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए भारसाधक अधिकारी में न्यासतः निहित होगी ।
(2) उपधारा (1 ) के नियुक्त किये गये किसी भी भारसाधक अधिकारी को किसी व्यक्ति, प्रबंध संचालक द्वारा हटाया जा सकेगा, जिसे उसके स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को नियुक्त करने की शक्ति होगी ।
(3) उपधारा (1 ) के अधीन भारसाधक अधिकारी नियुक्त किया गया कोई भी व्यक्ति , अपनी सेवाओं के लिए ऐसा वेतन तथा भत्ते , जो कि प्रबंध संचालक द्वारा नियत किए जाएँ , मण्डी समिति निधि से प्राप्त करेगा ।
(4) यथा पुनर्गठित मंडी समिति के प्रथम साधारण सम्मिलन के लिए नियत की गई तारीख से भारसाधक अधिकारी अपने पद पर नहीं रहेगा ।
चन्द्र शेखर गंगराड़े
प्रमुख सचिव छत्तीसगढ़ विधान सभा.
संचालक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय, रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित – 2020 .