छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय
रायपुर, गुरूवार, दिनांक 26 मार्च, 2020 (चैत्र 6, 1942)
क्रमांक-5045/वि.स./विधान/2019. ― छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विष्वविद्यालय विधेयक, 2020 (क्रमांक 8 सन् 2020) जो गुरूवार, दिनांक 26 मार्च, 2020 को पुरःस्थापित हुआ है, को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाषित किया जाता है।
हस्ता./-
(चन्द्र शेखर गंगराड़े) प्रमुख सचिव.
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्र. 8 सन् 2020)
महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विष्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2020
महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विष्वविद्यालय अधिनियम, 2019 (क्र. 23 सन् 2019) में संशोधन करने हेतु विधेयक।
भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधान मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1.
(1) यह अधिनियम महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विष्वविद्यालय (संषोधन) संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारंभ.
अधिनियम, 2020 कहलायेगा।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में होगा ।
(3) यह राजपत्र में इसके प्रकाषन की तारीख से प्रवृत्त होगा।
2. महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विष्वविद्यालय अधिनियम, 2019 (क्र. 23 सन् 2019) धारा 14 का संशोधन.
(जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रुप में निर्दिष्ट है)में, धारा 14 में,- (एक) उप-धारा (1) में, शब्द ''कुलाधिपति द्वारा'' के पश्चात्, शब्द ''मंत्रि-परिषद् के
निर्णय के अनुसार'' अन्तःस्थापित किया जाये;
(दो) उप-धारा (1) में, प्रथम परन्तुक में, शब्द ''कुलाधिपति द्वारा'' के पश्चात्, शब्द
''मंत्रि-परिषद् के निर्णय के अनुसार'' अन्तःस्थापित किया जाये; तथा (तीन) उप-धारा (2) में, खण्ड (दो) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया
जाये, अर्थात् :-
''(दो) राज्य के किसी भी अन्य विश्वविद्यालय के कुलपति, और'' (चार) उप-धारा (5) में, शब्द ''तो कुलाधिपति किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जिसे वह
उचित समझे, कुलपति नियुक्त कर सकेगा'' के स्थान पर, शब्द ''तो कुलाधिपति, मंत्रि-परिषद् के निर्णय के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को कुलपति नियुक्त कर सकेगा'' प्रतिस्थापित किया जाये।
3. मूल अधिनियम में, धारा 17 में,-
धारा 17 का
संशोधन.
(क) उप-धारा (1) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात् :-
''(1) (एक) कुलपति अपने पद पर तब तक बना रहेगा, जब तक मंत्रि-परिषद्
उसकी सेवा लेना उचित समझे;
(दो) मंत्रि-परिषद् के निर्णय के अनुसार कुलाधिपति, कुलपति को किसी
भी समय उसके पद से तत्काल प्रभाव से हटा देवेंगे;
(तीन) मंत्रि-परिषद, कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया को किसी भी
समय निरस्त कर सकती है।''
(ख) उप-धारा (2) का लोप किया जाये।
(ग) उप-धारा (3) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात् :-
''(3) उप-धारा (1) के अधीन आदेश में विनिर्दिष्ट तारीख से कुलपति का पद
रिक्त हो जायेगा ।'' उद्देष्य और कारणों का कथन
यतः, महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विष्वविद्यालय अधिनियम, 2019 (क्र. 23 सन् 2019) के प्रावधानों में, विश्वविद्यालय के प्रशासन के लिये बेहतर प्रावधानों का उपबंध करने के प्रयोजन हेतु, संशोधन किया जा रहा है। और यतः, राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय के कार्यों को सुगम बनाने एवं एकरुपता लाने को दृष्टिगत रखते हुये, महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विष्वविद्यालय अधिनियम, 2019 (क्र. 23 सन् 2019) में संशोधन करने का निर्णय लिया है ।
अतएव, उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति की दृष्टिगत रखते हुये, महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विष्वविद्यालय अधिनियम, 2019 (क्र. 23 सन् 2019) मेंं संशोधन करना आवश्यक है ।
अतः यह विधेयक प्रस्तुत है।
रायपुर दिनांक- 25-03-2020
रविन्द्र चौबे कृषि मंत्री (भारसाधक सदस्य)
उपाबंध
महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 (क्र. 23 सन् 2019) की धारा 14 की
उपधारा (1), उपधारा (2) के खण्ड (दो) तथा उपधारा (5) एवं धारा 17 की उप-धारा (1), उपधारा (2) तथा
उपधारा (3) के संबंध में सुसंगत उद्धरण
धारा 14 की उपधारा (1), (2) के खण्ड (दो) तथा (5)
उपधारा (1)ः कुलपति की नियुक्ति, उप-धारा (2) के अधीन गठित समिति द्वारा सिफारिश किये गये कम से कम तीन व्यक्तियों की तालिका (पैनल) में से कुलाधिपति द्वारा की जायेगीः
परन्तु यह कि प्रथम कुलपति, कुलाधिपति द्वारा सीधे ही नियुक्त किया जायेगाः
उपधारा (2) के खण्ड (दो)ः-कुलाधिपति, निम्नलिखित व्यक्तियों को मिलाकर समिति गठित करेगा, अर्थात्ः- (एक) उन व्यक्तियों में से, जो विश्वविद्यालय या किसी महाविद्यालय द्वारा या उसकी ओर से नियोजित न किये गये हों, बोर्ड द्वारा निर्वाचित एक व्यक्ति,
(दो) कुलाधिपति द्वारा नामनिर्दिष्ट एक व्यक्ति, और
(तीन) राज्य शासन द्वारा नामनिर्दिष्ट एक व्यक्ति।
कुलाधिपति, इन तीन व्यक्तियों में से एक को समिति का अध्यक्ष नियुक्त करेगा।
उपधारा (5)ः-यदि समिति, उप-धारा (4) में विनिर्दिष्ट की गई कालावधि के भीतर तालिका (पैनल) प्रस्तुत करने में असफल रहती है, तो कुलाधिपति, किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जिसे वह उचित समझे, कुलपति नियुक्त कर सकेगा।
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धारा 17 की उप-धारा (1) (2) (3)ः-
उप-धारा (1)ः-यदि, किसी भी समय, अभ्यावेदन किये जाने पर या अन्यथा तथा ऐसी जांच करने के पश्चात्, जैसा कि आवश्यक समझा जाए, कुलाधिपति को यह प्रतीत होता है कि-
(एक) कुलपति ने इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उस पर अधिरोपित कर्तव्य का पालन करने में चूक की है; या
(दो) कुलपति ने किसी ऐसी रीति में कार्य किया है जो विश्वविद्यालय के हित के प्रतिकूल है; या (तीन) कुलपति विश्वविद्यालय के कार्यकलापों का प्रबंन्ध करने में असमर्थ है,
तो कुलाधिपति, इस तथ्य के होते हुए भी कि कुलपति की पदावधि का अवसान नहीं हुआ है, लिखित आदेश द्वारा, जिसमें कारण कथित किये जायेंगे, कुलपति से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह ऐसी तारीख से, जो कि उस आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, अपना पद त्याग दे। उपधारा (2) उप-धारा (1) के अधीन कोई भी आदेश तक तक पारित नहीं किया जायेगा, जब तक कि उन आधारों, जिन पर ऐसी कार्रवाई करना प्रस्तावित है, की विशिष्टियां कुलपति को संसूचित नहीं कर दी जाती और प्रस्तावित आदेश के विरूद्ध हेतुक दर्शित करने का युक्तियुक्त अवसर उसे नहीं दे दिया जाता।
उपधारा (3)ः-उप-धारा (1) के अधीन आदेश में विनिर्दिष्ट तारीख से कुलपति के संंबंध में यह समझा जायेगा कि उसने पद त्याग दिया है और कुलपति का पद रिक्त हो जायेगा।
चन्द्र शेखर गंगराड़े प्रमुख सचिव छत्तीसगढ़ विधान सभा.