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छत्तीसगढ शासन
पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़/दुर्ग/ 09 / 2013-2015 . "
सत्यमेव जयते
"बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान (बिना डाक टिकट) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22- छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई. दिनांक 30-05-2001 . "
छत्तीसगढ़ राजपत्र
(असाधारण)
प्राधिकार से प्रकाशित
-चैत्र 11 , शक 1942
क्रमांक 193]
रायपुर, मंगलवार, दिनांक 31 मार्च 2020-
छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय
रायपुर, गुरूवार, दिनांक 26 मार्च, 2020 (चैत्र 6, 1942)
क्रमांक-5061 /वि.स./विधान / 2019. छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2020 (क्रमांक 16 सन् 2020) जो गुरूवार , दिनांक 26 मार्च, 2020 को पुरःस्थापित हुआ है, को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।
हस्ता./-
(चन्द्र शेखर गंगराड़े ) प्रमुख सचिव.
385 386
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्र. 16 सन् 2020)
छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक , 2020
छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (क्र. 7 सन् 2017 ) को संशोधित करने हेतु विधेयक ।
भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधान मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
संक्षिप्त नाम 1.
एवं प्रारंभ.
(1 ) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर (संशोधन ) अधिनियम, 2020 कहलायेगा ।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में होगा ।
(2 ) यह ऐसी तारीख से प्रवृत्त होगा, जिसे राज्य सरकार , राजपत्र में अधिसूचना द्वारा , नियत करेः परंतु इस अधिनियम के भिन्न- भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न- भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और ऐसे किसी उपबंध में इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जायेगा कि वह उस उपबंध के प्रवृत्त होने के प्रतिनिर्देश है ।
धारा 2 का
2.
संशोधन.
छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (क्र. 7 सन् 2017) ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है) में, धारा 2 में, खंड (4) में, शब्द "अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकारी , " के पश्चात्, शब्द "राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकारी, " अन्तःस्थापित किया जाये । छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
386( 1)
धारा 10 का 3. मूल अधिनियम में, धारा 10 में,-
संशोधन.
(क) उपधारा (1 ) में, द्वितीय परंतुक के पश्चात्, निम्नलिखित अर्थात्ः- अन्तःस्थापित किया जाये ,
"स्पष्टीकरण - द्वितीय परंतुक के प्रयोजन के लिए, जहां तक प्रतिफल को ब्याज या बट्टे के रूप में प्रदर्शित किया जाता है, निक्षेपों, ऋणों या अग्रिमों के रूप में दी गई छूट प्राप्त सेवाओं के प्रदाय के मूल्य को, राज्य में आवर्त के मूल्य के अवधारण के लिए गणना में नहीं लिया जायेगा । "
(ख) उपधारा (2) में,-
(
एक) खंड (ङ) में, शब्द " अधिसूचित किया जायेः " के स्थान पर, शब्द "अधिसूचित किया जाये; और " प्रतिस्थापित किया जाये;
(दो) खंड (ङ) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाये , अर्थात्ः-
" (च) वह न तो कोई नैमित्तिक कराधेय व्यक्ति है और न ही कोई अनिवासी कराधेय व्यक्ति है: "
(ग) उपधारा (2) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये , अर्थात्ः- 386 ( 2)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
" (2क) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, किन्तु धारा 9 की उपधारा (3) और (4) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए , कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जो उपधारा ( 1 ) और (2) के अधीन कर के संदाय का विकल्प लेने के लिए पात्र नहीं है और जिसकी पूर्व वित्तीय वर्ष में सकल आवर्त पचास लाख रुपये से अधिक नहीं है , उसके द्वारा धारा 9 की उपधारा (1 ) के अधीन संदेय कर के स्थान पर, यथा विहित दर पर, किन्तु जो राज्य में उसके आवर्त के तीन प्रतिशत से अधिक नहीं होगी , संगणित कर की रकम का संदाय करने का विकल्प ले सकेगा, यदि वह,-
(क) किन्हीं ऐसे मालों या सेवाओं के प्रदाय में नहीं लगा है, जिन पर इस अधिनियम के अधीन कर उग्रहणीय नहीं है;
(ख) माल या सेवाओं के अंतर्राज्यीय जावक प्रदाय करने में नहीं लगा है;
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
386( 3)
(ग) किसी ऐसे इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्यिक प्रचालक के माध्यम से माल या सेवाओं के ऐसी प्रदाय में नहीं लगा है , जिससे धारा 52 के अधीन स्त्रोत पर कर का संग्रहण करना अपेक्षित है;
(घ) ऐसे माल का विनिर्माता या ऐसी सेवाओं का प्रदायकर्ता नही है, जो सरकार द्वारा परिषद् की सिफारिशों पर अधिसूचित की जायें; और
(ङ) न तो कोई नैमित्तिक कराधेय व्यक्ति है और न ही कोई अनिवासी कराधेय व्यक्ति है :
परंतु जहां एक से अधिक रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों का, आयकर अधिनियम , 1961 (क. 43 सन् 1961 ) के अधीन जारी स्थायी खाता संख्यांक एक ही है, वहां ऐसा रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, इस उपधारा के अधीन तब तक स्कीम के लिए विकल्प का चुनाव करने का पात्र नहीं होगा , जब तक ऐसे सभी रजिस्ट्रीकृत 386(4)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
व्यक्ति, इस उपधारा के अधीन कर का संदाय करने के विकल्प का चुनाव नहीं करते हैं । " ;
(घ) उपधारा (3 ) में, शब्द, कोष्ठक एवं अंक "उपधारा (1 ) के अधीन " जहां कहीं भी आये हों के स्थान पर, शब्द, कोष्ठक एवं अंक " यथास्थिति, उपधारा ( 1 ) या उपधारा (2क) के अधीन " प्रतिस्थापित किया जाये ।
(ङ) उपधारा (4) में, शब्द, कोष्ठक एवं अंक " उपधारा (1 ) " के स्थान पर, शब्द, कोष्ठक एवं अंक "यथास्थिति , उपधारा (1 ) या उपधारा (2क) " प्रतिस्थापित किया जाये ।
(च) उपधारा (5 ) में, शब्द, कोष्ठक एवं अंक " उपधारा ( 1 ) के अधीन " के स्थान पर , शब्द, कोष्ठक एवं अंक " यथास्थिति, उपधारा ( 1 ) या उपधारा (2 क ) के अधीन" प्रतिस्थापित किया जाये ।
(छ) उपधारा (5) के पश्चात्, निम्नलिखित अन्तःस्थापित किया जाये , अर्थात्ः-
"स्पष्टीकरण 1- इस धारा के अधीन किसी व्यक्ति की कर संदाय करने की पात्रता का अवधारण करने के लिए इसके सकल आवर्त की संगणना करने के छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
386( 5)
प्रयोजनों के लिए , शब्द "सकल आवर्त" के अंतर्गत किसी वित्तीय वर्ष के 1 अप्रैल से उस तारीख तक के प्रदाय सम्मिलित होंगे , जिसको वह इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण का दायी बन जाता है , किन्तु जहां तक प्रतिफल को ब्याज या बट्टे के रूप में प्रदर्शित किया जाता है, निक्षेपों, ऋणों या अग्रिमों के रूप में दिए गए छूट प्राप्त सेवाओं के प्रदाय का मूल्य सम्मिलित नहीं होगा ।
स्पष्टीकरण 2- इस धारा के अधीन
किसी व्यक्ति द्वारा संदेय कर का अवधारण करने के प्रयोजनों के लिए , शब्द "राज्य में आवर्त " में निम्नलिखित प्रदायों का मूल्य सम्मिलित नहीं होगा, अर्थात्ः-
(एक) किसी वित्तीय वर्ष के 1 अप्रैल से उस तारीख तक की प्रदायों, जिसको ऐसा व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन 386( 6)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
रजिस्ट्रीकरण का दायी बन जाता है ; और
(दो) जहां तक प्रतिफल को ब्याज या बट्टे' के रूप में प्रदर्शित किया जाता है , निक्षेपों, ऋणों या अग्रिमों के रूप में दिए गए छूट प्राप्त सेवाओं का प्रदाय । "
4.
धारा 22 का
मूल अधिनियम में, धारा 22 में, उपधारा ( 1 ) में,-
संशोधन.
(एक) द्वितीय परंतुक में, पूर्ण विराम चिन्ह " । " के स्थान पर , कोलन चिन्ह " : " प्रतिस्थापित किया जाये, और
(दो) द्वितीय परंतुक के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये, अर्थात्ः-
"परंतु यह भी कि सरकार , परिषद् की सिफारिशों पर बीस लाख रुपये के सकल आवर्त को ऐसी रकम तक बढ़ा सकेगी , जो किसी ऐसे प्रदायकर्ता की दशा में , जो माल के अनन्य प्रदाय में लगा है , चालीस लाख रुपये से अधिक नहीं होगी और यह ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के अध्यधीन रहते हुए किया जाएगा, जैसा कि अधिसूचित की जाये ।
स्पष्टीकरण - इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए , किसी व्यक्ति के बारे में तब भी यह समझा जायेगा छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
386( 7) कि वह माल के अनन्य प्रदाय में लगा है, यदि वह निक्षेपों, ऋणों या अग्रिमों के रूप में दिए गए छूट प्राप्त सेवाओं के प्रदाय में लगा हुआ है , जहां तक प्रतिफल को ब्याज या बट्टे के रूप में प्रदर्शित किया जाता है । "
5.
धारा 25 का
संशोधन.
मूल अधिनियम में , धारा 25 में, उपधारा (6) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये, अर्थात्ः-
" (6 क) प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, ऐसे प्ररूप और रीति में तथा ऐसे समय के भीतर , जैसा कि विहित किया जाये, सत्यापन कराएगा या आधार संख्यांक को धारित करने का सबूत प्रस्तुत करेगाः
परंतु यदि किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति को आधार संख्यांक समनुदेशित नहीं किया गया है , तो ऐसे व्यक्ति को, ऐसी रीति में , पहचान का कोई ऐसा वैकल्पिक और व्यवहार्य साधन प्रस्थापित किया जायेगा , जैसा कि परिषद् की सिफारिशों पर, सरकार द्वारा विहित की जाये:
परंतु यह और कि सत्यापन
कराने या आधार संख्यांक को
386( 8)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
धारित करने का सबूत प्रस्तुत करने या पहचान का कोई वैकल्पिक और व्यवहार्य साधन प्रस्तुत करने में विफल रहने की दशा में, ऐसे व्यक्ति को आबंटित रजिस्ट्रीकरण अविधिमान्य समझा जाएगा और इस अधिनियम के अन्य उपबंध इस प्रकार लागू होंगे , मानो कि ऐसे व्यक्ति के पास रजिस्ट्रीकरण नहीं है ।
(6
ख) अधिसूचना की तारीख को ही प्रत्येक व्यष्टि, रजिस्ट्रीकरण की मंजूरी के लिए पात्र बनने हेतु, ऐसी रीति में, जैसा कि परिषद् की सिफारिशों पर सरकार द्वारा उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाये , सत्यापन कराएगा या आधार संख्यांक को धारित करने का सबूत प्रस्तुत करेगाः
परंतु जहां किसी व्यष्टि को आधार संख्यांक समनुदेशित नहीं किया गया है, वहां ऐसे व्यष्टि को, ऐसी रीति में , पहचान का कोई ऐसा वैकल्पिक और व्यवहार्य साधन प्रस्थापित किया जाएगा , जैसा कि 386( 9)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
परिषद् की सिफारिशों पर, सरकार द्वारा उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाये ।
(6 ग) अधिसूचना की तारीख को ही, व्यष्टि से भिन्न प्रत्येक व्यक्ति, रजिस्ट्रीकरण की मंजूरी के लिए पात्र बनने हेतु, ऐसी रीति में , जैसा कि परिषद् की सिफारिशों पर , सरकार द्वारा उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाये , सत्यापन करायेंगे या कर्ता, प्रबंध निदेशक , पूर्णकालिक निदेशक, ऐसी भागीदारों , यथास्थिति, संगम की प्रबंध समिति, न्यासी बोर्ड के सदस्यों, प्राधिकृत प्रतिनिधियों, प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और व्यक्तियों के ऐसे अन्य वर्गों के द्वारा आधार संख्यांक को धारित करने का सबूत प्रस्तुत करेंगे :
परंतु जहां ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के ऐसे अन्य वर्ग , जिन्हें आधार संख्यांक समनुदेशित नहीं किया गया है, ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के ऐसे अन्य वर्ग को, ऐसी रीति में, पहचान का कोई ऐसा 386 ( 10)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
वैकल्पिक और व्यवहार्य साधन प्रस्थापित किया जाएगा, जैसा कि परिषद् की सिफारिशों पर, सरकार द्वारा उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाये ,
(6घ) उपधारा (6 क) या उपधारा (6 ख) या उपधारा (6 ग) के उपबंध , ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के ऐसे वर्ग या किसी राज्य या राज्य के किसी ऐसे भाग को लागू नहीं होंगे , जिसे परिषद् की सिफारिश पर सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाये ।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए शब्द " आधार संख्यांक" का वही अर्थ होगा, जो आधार (वित्तीय और अन्य सहायिकियों, फायदों तथा सेवाओं का लक्ष्यित परिदान) अधिनियम , 2016 (क्र. 18 सन् 2016 ) की धारा 2 के खंड (क) में उनके लिए समनुदेशित है । "
6.
मूल अधिनियम में, धारा 31 के पश्चात्, निम्नलिखित अन्तःस्थापित किया जाये, अर्थात्ः-
नवीन धारा 31क का अन्तःस्थापन.
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
386( 11) "31 क. प्राप्तिकर्ता को डिजिटल संदाय की सुविधा. - सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर , रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के ऐसे वर्ग को विहित कर सकेगी, जो उसके द्वारा की गई माल या सेवाओं या दोनों के प्रदाय के प्राप्तिकर्ता को इलेक्ट्रॉनिक संदाय का विहित तरीका उपलब्ध कराएगा और ऐसे प्राप्तिकर्ता को, ऐसी रीति में और ऐसी शर्तों तथा निर्बंधनों के अध्यधीन रहते हुए , जैसा कि विहित किए जाएं , तदनुसार, संदाय करने का विकल्प उपलब्ध करायेगा । "
7. मूल अधिनियम में, धारा 39 में,-
धारा 39 का संशोधन.
(क) उपधारा (1 ) और (2) के स्थान पर,
निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्ः-
" (1 ) किसी इनपुट सेवा वितरक या अनिवासी कराधेय व्यक्ति या धारा 10 या 51 या 52 के उपबंधों के अधीन कर का संदाय करने वाले व्यक्ति से भिन्न प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति , प्रत्येक कलैंडर मास या उसके किसी भाग के लिए , माल या सेवाओं या दोनों की आवक और जावक प्रदायों, प्राप्त किए गए इनपुट कर 386( 12)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
प्रत्यय , संदेय योग्य कर, संदत्त कर और ऐसी अन्य विशिष्टियों को ध्यान में रखते हुए , ऐसे प्ररूप एवं रीति में और ऐसे समय के भीतर, जैसा कि विहित किया जाए , इलेक्ट्रॉनिक रूप से विवरणी प्रस्तुत करेगा:
परंतु सरकार, परिषद् की सिफारिश पर , रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के कतिपय वर्ग को अधिसूचित कर सकेगी , जो ऐसी शर्तों और निर्बंधनों, जो कि उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, के अध्यधीन रहते हुए , प्रत्येक तिमाही या उसके किसी भाग के लिए विवरणी प्रस्तुत करेगा ।
(2) धारा 10 के उपबंधों के अधीन कर का संदाय करने वाला कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, प्रत्येक वित्तीय वर्ष या उसके किसी भाग के लिए , माल या सेवाओं या दोनों की आवक प्रदायों, संदेय योग्य कर, संदत्त कर और ऐसी अन्य विशिष्टयों को ध्यान में रखते हुए , ऐसे प्ररूप एवं रीति में और ऐसे समय के भीतर, जैसा कि विहित किया जाये , इलेक्ट्रॉनिक रूप से राज्य में आवर्त की विवरणी प्रस्तुत करेगा । " छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
386( 13) (ख) उपधारा (7) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्ः-
" (7) प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जिससे उपधारा ( 1 ) के अधीन विवरणी प्रस्तुत किया जाना अपेक्षित है और जो ऐसे व्यक्ति से भिन्न है , जिसे उसके परंतुक या उपधारा (3 ) या (5) में निर्दिष्ट किया गया है, सरकार को, ऐसी विवरणी के अनुसार शोध्य कर का संदाय उस अंतिम तारीख के पूर्व करेगा , जिस पर उसके द्वारा ऐसी विवरणी प्रस्तुत किया जाना अपेक्षित है :
परंतु उपधारा ( 1 ) के परंतुक के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने वाला प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, किसी मास के दौरान, माल या सेवाओं या दोनों की आवक और जावक प्रदायों, प्राप्त किए गए इनपुट कर प्रत्यय , संदेय कर और ऐसी अन्य विशिष्टियों को ध्यान में रखते हुए , ऐसे प्ररूप एवं रीति में और ऐसे समय के भीतर, जैसा कि विहित किया जाए , सरकार को शोध्य कर का संदाय करेगा :
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
386(14)
परंतु यह और कि उपधारा (2) के परंतुक के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने वाला प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, किसी तिमाही के दौरान , राज्य में आवर्त , माल या सेवाओं या दोंनों की आवक प्रदायों, संदेय कर और ऐसी अन्य विशिष्टियों को ध्यान में रखते हुए, ऐसे प्ररूप एवं रीति में और ऐसे समय के भीतर, जैसा कि विहित किया जाए , सरकार को शोध्य कर का संदाय करेगा । "
8.
धारा 44 का
मूल अधिनियम में , धारा 44 में, -
संशोधन.
(एक) उपधारा (1 ) में, पूर्ण विराम चिन्ह " । " के स्थान पर , कोलन चिन्ह " : " प्रतिस्थापित किया जाये; और
(दो) उपधारा ( 1 ) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये, अर्थात्ः-
" परंतु आयुक्त, परिषद् की सिफारिशों पर और लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से , अधिसूचना द्वारा , रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के ऐसे वर्ग , जो कि उसमें विनिर्दिष्ट किया जाए, के लिए वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने की समय - सीमा को विस्तारित कर सकेगा:
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
386 ( 15) परंतु यह और कि केन्द्रीय कर आयुक्त के द्वारा अधिसूचित समय - सीमा के किसी विस्तारण को आयुक्त द्वारा अधिसूचित किया गया समझा जाएगा । "
9.
मूल अधिनियम में, धारा 49 में, उपधारा (9 ) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये, अर्थात्:-
धारा 49 का संशोधन.
" (10 ) कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, ऐसे प्ररूप और रीति में तथा ऐसी शर्तों और निर्बंधनों के अध्यधीन रहते हुए , जैसा कि विहित किए जाएं, सामान्य पोर्टल पर, इस अधिनियम के अधीन इलेक्ट्रॉनिक नकद खाते में उपलब्ध किसी कर , ब्याज , शास्ति, फीस की किसी रकम या किसी अन्य रकम को एकीकृत कर, केन्द्रीय कर, राज्य कर या उपकर संबंधी इलेक्ट्रॉनिक नकद खाते में अंतरित कर सकेगा और ऐसे अंतरण को इस अधिनियम के अधीन इलेक्ट्रॉनिक नकद खाते से प्रतिसंदाय के रूप में समझा जाएगा ।
(11 ) जहां किसी रकम को इस अधिनियम के अधीन इलेक्ट्रॉनिक नकद खाते में अंतरित किया गया है, वहां उसे उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार उक्त खाते में जमा किया गया समझा जाएगा । "
10.
धारा 50 का संशोधन.
मूल अधिनियम में , धारा 50 में, उपधारा (1 ) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये , अर्थात्: - छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
386( 16)
" परंतु किसी कर अवधि के दौरान की गई प्रदायों के संबंध में संदेय कर पर ब्याज को, जिसे धारा 39 के उपबंधों के अनुसार नियत तारीख के पश्चात् उक्त अवधि के लिए प्रस्तुत की गई विवरणी में घोषित किया गया है , सिवाय वहां के, जहां ऐसी विवरणी को उक्त अवधि के संबंध में धारा 73 या 74 के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों के प्रारंभ के पश्चात् प्रस्तुत किया जाता है, कर के उस भाग पर उद्गृहीत किया जाएगा, जिसका संदाय इलेक्ट्रॉनिक नकद खाते से राशि को निकाल कर किया गया है ।"
11.
धारा 52 का
मूल अधिनियम में , धारा 52 में,-
संशोधन.
(क) उपधारा (4 ) में, पूर्ण विराम चिन्ह " । " के स्थान पर , कोलन चिन्ह " : " प्रतिस्थापित किया जाये ; और
(ख) उपधारा (4) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये , अर्थात्:-
" परंतु आयुक्त, लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, अधिसूचना द्वारा , रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के ऐसे वर्ग के लिए , जो कि उसमें विनिर्दिष्ट किया जाए, विवरण प्रस्तुत करने की समय - सीमा को विस्तारित कर सकेगा :
परंतु यह और कि केन्द्रीय कर आयुक्त द्वारा अधिसूचित समय- सीमा के किसी विस्तारण को छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
386 ( 17 ) आयुक्त द्वारा अधिसूचित किया गया समझा जाएगा। "
(ग) उपधारा (5) में , पूर्ण विराम चिन्ह " । " के स्थान पर, कोलन चिन्ह " : " प्रतिस्थापित किया जाये; और
(घ) उपधारा (5) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये , अर्थात्:-
" परंतु आयुक्त, परिषद् की सिफारिशों पर और लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, अधिसूचना द्वारा , रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के ऐसे वर्ग के लिए , जो कि उसमें विनिर्दिष्ट किया जाए , वार्षिक विवरण प्रस्तुत करने की समय - सीमा को विस्तारित कर सकेगा :
परंतु यह और कि केन्द्रीय कर आयुक्त द्वारा अधिसूचित समय - सीमा के किसी विस्तारण को आयुक्त द्वारा अधिसूचित किया गया समझा जाएगा ।"
12.
नवीन धारा
53क का मूल अधिनियम में , धारा 53 के पश्चात्, निम्नलिखित अन्तःस्थापित किया जाये , अर्थात्: -
अन्तःस्थापन, " 53 क. कतिपय रकमों का अन्तरण.- जहां किसी रकम को इस अधिनियम के अधीन इलेक्ट्रॉनिक नकद खाते से, केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम या एकीकृत माल और सेवा कर अधिनियम अथवा माल और सेवा कर (राज्यों को क्षतिपूर्ति) अधिनियम 386(18)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
के अधीन इलेक्ट्रॉनिक नकद खाते में अंतरित किया जाता है, वहां सरकार केन्द्रीय कर खाते या एकीकृत कर खाते या उपकर खाते को, इलेक्ट्रॉनिक नकद खाते से अंतरित की गई रकम के बराबर रकम का, ऐसी रीति और ऐसे समय के भीतर , जैसा कि विहित किया जाए, अंतरण करेगी । "
13.
धारा 54 का
संशोधन.
मूल अधिनियम में, धारा 54 में , उपधारा (8 ) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये , अर्थात् :-
" (8क) जहाँ केन्द्र सरकार द्वारा राज्य कर के प्रतिदाय का वितरण किया गया है, सरकार , इस प्रकार प्रतिदाय की गई ऐसी राशि के बराबर राशि का, केन्द्र सरकार को अन्तरण करेगी । "
14.
धारा 95 का
मूल अधिनियम में, धारा 95 में, -
संशोधन.
(एक) खंड (क) में,-
(क) शब्द "अपील प्राधिकरण " के पश्चात्, शब्द "या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण " अन्तःस्थापित किया जाये ।
(ख) शब्द, अंक एवं कोष्ठक " धारा 100 की उपधारा (1 ) " के पश्चात्, शब्द एवं अंक "या केन्द्रीय माल और सेवा कर छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
386( 19) अधिनियम की धारा 101 ग " अन्तःस्थापित किया जाये ।
(दो) खंड (ङ) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये, अर्थात्:-
" (च) "राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण' से अभिप्रेत है धारा 101 क में निर्दिष्ट राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकरण । "
15.
नवीन धारा
101क का मूल अधिनियम में, धारा 101 के पश्चात्, निम्नलिखित अन्तःस्थापित किया जाये , अर्थात्:-
अन्तःस्थापन.
" 101 क. केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम के अधीन राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकरण , इस अधिनियम के अधीन अपील प्राधिकरण होगा. - इस अध्याय के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए , इस अधिनियम के प्रयोजन के लिये केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम की धारा 101 क के अधीन गठित राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकरण , इस अधिनियम के अन्तर्गत राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकरण मानी जायेगी । "
16.
मूल अधिनियम में , धारा 103 में,-
धारा 103 का संशोधन.
(एक) उपधारा (1 ) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये, अर्थात्-
"(1 क) राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण द्वारा इस 386(20)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
अध्याय के अधीन सुनाया गया अग्रिम विनिर्णय निम्नलिखित पर आबद्धकर होगा-
(क) आवेदक, जो सुभिन्न व्यक्ति हैं , जिन्होंने केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम की धारा 101 ख की उपधारा (1 ) के अधीन विनिर्णय चाहा है और वे सभी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जिनका वही, आयकर अधिनियम , 1961 (क्र. 43 सन् 1961 ) के अधीन जारी स्थायी खाता संख्यांक है ;
(ख) खंड (क) में निर्दिष्ट आवेदकों और ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जिनका आयकर अधिनियम , 1961 (क्र. 43 सन् 1961 ) के अधीन जारी किया गया समान स्थायी खाता संख्यांक है , के संबंध में, संबंधित अधिकारी और अधिकारिता रखने वाले अधिकारी । " .
(दो) उपधारा (2) में, शब्द, अंक एवं कोष्ठक "उपधारा ( 1 ) " के पश्चात्, शब्द, अंक एवं कोष्ठक "और उपधारा ( 1 क) " अंतःस्थापित किया जाये । " 386( 21)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
17.
धारा 104 मूल अधिनियम में , धारा 104 में,-
का संशोधन.
(क) उपधारा ( 1 ) में, शब्द "प्राधिकरण या अपील प्राधिकरण " के पश्चात्, शब्द "या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण" अन्तःस्थापित किया जाये ; और
(ख) उपधारा ( 1 ) में, शब्द, अंक एवं कोष्ठक " धारा 101 की उपधारा (1 ) के अधीन" के पश्चात् शब्द एवं अंक "या केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम की धारा 101 ग के अधीन" अन्तःस्थापित किया जाये ।
18.
धारा 105 मूल अधिनियम में , धारा 105 में,-
का संशोधन.
(क) पार्श्व शीर्षक के स्थान पर , निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये , अर्थात्:- "प्राधिकरण, अपील प्राधिकरण और राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण की शक्तियां. "
(ख) उपधारा (1 ) में, शब्द "अपील प्राधिकरण " के पश्चात्, शब्द " या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण " अन्तःस्थापित किया जाये; और
(ग) उपधारा (2) में, शब्द " अपील प्राधिकरण " जहां कहीं भी आया हो के पश्चात्, शब्द " या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण" अन्तःस्थापित किया जाये ।
19.
धारा 106 मूल अधिनियम में, धारा 106 में,-
का संशोधन.
(क) पार्श्व शीर्षक के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये , अर्थात्:- "प्राधिकरण , अपील प्राधिकरण और राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण की प्रक्रिया. " 386 ( 22)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
(ख) शब्द "अपील प्राधिकरण " के पश्चात्, शब्द " या राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण " अन्तःस्थापित किया जाये ।
धारा 171
20.
का संशोधन.
मूल अधिनियम में, धारा 171 में, उपधारा (3 ) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये , अर्थात्ः-
" (3 क) जहां उक्त उपधारा की अपेक्षानुसार जांच करने के पश्चात्, उपधारा (2) में निर्दिष्ट प्राधिकरण इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति ने उपधारा ( 1 ) के अधीन मुनाफाखोरी की है , वहां ऐसा व्यक्ति इस प्रकार मुनाफाखोरी की गई रकम के दस प्रतिशत के बराबर शास्ति का संदाय करने का दायी होगा:
परंतु ऐसी कोई शास्ति, उदग्रहणीय नहीं होगी , यदि मुनाफाखोरी की रकम को प्राधिकरण द्वारा आदेश पारित किए जाने की तारीख से तीस दिन के भीतर जमा करा दिया गया है ।
स्पष्टीकरण - इस धारा के प्रयोजनों के लिए
शब्द "मुनाफाखोरी " से अभिप्रेत है ऐसी रकम, जिसे माल या सेवा या दोनों के प्रदाय पर कर की दर में कमी का फायदा या इनपुट कर प्रत्यय का फायदा, माल या सेवा या दोनों की कीमत में कमी की अनुरूपता के 386( 23)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
माध्यम से प्राप्तिकर्ता को नहीं देने के कारण अवधारित है । "
निरसन.
21.
छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर ( संशोधन) अध्यादेश, 2019 (क. 4 सन् 2019 ) एतद्वारा निरसित किया जाता है । 386 (24)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
उद्देश्यों और कारणों का कथन
छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (क. 7 सन् 2017 ) को राज्य सरकार द्वारा माल या सेवा या दोनों के, राज्यगत प्रदाय पर कर के उद्ग्रहण और संग्रहण करने हेतु उपबंध करने के दृष्टिकोण से अधिनियमित किया गया था ।
अधिनियम , विद्यमान करदाताओं से नये माल और सेवा कर व्यवस्था के सुचारू संव्यवहार हेतु कतिपय प्रावधान करने का उपबंध करता है । तथापि, जीएसटी लागू होने के पश्चात् नई कर प्रणाली में कुछ कठिनाईयाँ सामने आईं थीं । करदाताओं को विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों को हुई प्रमुख असुविधाओं में से एक असुविधा , वार्षिक विवरणी दाखिल करने की प्रक्रिया थी । इस संबंध मे , प्रस्तावित न्यू रिटर्न फाइलिंग सिस्टम , वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने की समय - सीमा में वृद्धि हेतु आयुक्त को सशक्त करने , अग्रिम विनिर्णय हेतु राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण का गठन करने के साथ ऐसे लघु एवं मध्यम उद्यमों, जो केवल माल के प्रदाय से संबद्ध हैं , के लिए सकल आवर्त की सीमा को 20 लाख से बढ़ाकर 40 लाख करने के लिये प्रावधान करने की परिकल्पना करती है ।
प्रस्तावित छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक , 2020 , अन्य बातों के साथ साथ , निम्नलिखित के लिए उपबंध करता है , अर्थात्:-
(1) अधिनियम की धारा 10 में सकल आवर्त की गणना से संबंधित कतिपय छूट प्राप्त सेवाओं के प्रदाय के मूल्य में शामिल नहीं किए जाने हेतु स्पष्टीकरण का अंतःस्थापन;
(2) ऐसे प्रदायकर्ता, जो केवल माल के प्रदाय से संबद्ध हों, पंजीयन हेतु सकल आवर्त की सीमा रु. 40 लाख करने हेतु, अधिनियम की धारा 22 में परंतुक का अंतःस्थापन;
(3 ) पंजीयन की प्रक्रिया के दौरान आधार को अनिवार्य किए जाने हेतु, अधिनियम की धारा 25 का संशोधन;
(4 ) प्राप्तिकर्ता को डिजीटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु, एक नई धारा 31 क का अंतःस्थापन;
( 5) कतिपय करदाताओं को त्रैमासिक विवरणी प्रस्तुत करने की सुविधा दिए जाने के लिये , अधिनियम की धारा 39 का संशोधन;
(6) वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने की समय - सीमा में वृद्धि हेतु आयुक्त को सशक्त करने हेतु, अधिनियम की धारा 44 में , परंतुक का अंतःस्थापन;
(7 ) कर , ब्याज , शास्ति या अन्य राशि के भुगतान के लिये एकल कैश - लेजर का प्रावधान करने हेतु, अधिनियम की धारा 49 का संशोधन;
(8 ) कर के भुगतान में विलंब करने की स्थिति में , केवल इलेक्ट्रानिक कैश - लेजर से भुगतान किये जाने वाली राशि पर ब्याज अधिरोपित किए छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
386( 25) जाने के संबंध में प्रावधान करने हेतु, अधिनियम की धारा 50 में, परंतुक काअंतःस्थापन;
( 9 ) इलेक्ट्रानिक वाणिज्य प्रचालकों द्वारा प्रस्तुत किये जाने वाली विवरणी की समय- सीमा में वृद्धि करने हेतु आयुक्त को सशक्त करने के लिए, अधिनियम की धारा 52 में , परंतुक का अंतःस्थापन;
( 10 ) केन्द्र सरकार द्वारा राज्य कर के प्रतिदाय की राशि की स्थिति में , राज्य सरकार द्वारा राशि केन्द्र सरकार के खाते में अंतरित करने का प्रावधान करने हेतु, नवीन धारा 53 क का अंतःस्थापन एवं अधिनियम की धारा 54 में संशोधन;
( 11 ) राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकरण का गठन किये जाने हेतु, अधिनियम की धारा 95 का संशोधन; ( 12) इस अधिनियम के अधीन अपीलीय प्राधिकरण के रुप में केन्द्रीय माल और
सेवा कर अधिनियम के अंतर्गत अग्रिम विनिर्णय हेतु राष्ट्रीय अपील प्राधिकरण को अपनाने हेतु, अधिनियम की नवीन धारा 101 क का अंतःस्थापन;
( 13 ) राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपीलीय प्राधिकरण के गठन के अनुक्रम में, अधिनियम की धारा 104, 105 एवं 106 का संशोधन;
( 14 ) मुनाफाखोरी की राशि में ब्याज एवं शास्ति हेतु प्रावधान उपलब्ध कराने हेतु, अधिनियम की धारा 171 का संशोधन ।
अतएव, उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति को दृष्टिगत रखते हुये , राज्य सरकार ने, छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (क. 7 सन् 2017) में संशोधन करने का विनिश्चय किया है ।
अतः यह विधेयक प्रस्तुत है ।
टी.एस. सिंहदेव
रायपुर
दिनांक 25-3-2020
वाणिज्यिक कर (जीएसटी) मंत्री (भारसाधक सदस्य)
संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन माननीया राज्यपाल महोदया द्वारा अनुशंसित 386 ( 26)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
उपाबंध
छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर अधिनियम , 2017 (क्रमांक 7 सन् 2017 ) से उद्धरण
अध्याय 1
प्रारंभिक
परिभाषाएं . 2.(4) "न्यायनिर्णायक प्राधिकारी " से अभिप्रेत है अधिनियम के अधीन कोई आदेश या विनिश्चय देने के लिए नियुक्त या प्राधिकृत कोई प्राधिकारी, किंतु इसके अंतर्गत आयुक्त, पुनरीक्षण प्राधिकारी , अग्रिम विनिर्णय प्राधिकारी , अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकारी , अपील प्राधिकारी , अपील अधिकरण और धारा 171 की उप - धारा (2 ) में निर्दिष्ट प्राधिकरण नहीं है;
अध्याय 3
कर का उद्ग्रहण और संग्रहण
प्रशमन
10. (1)
उग्रहण.
इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी तत्प्रतिकूल बात के होते हुए भी, किंतु धारा 9 की उपधारा (3 ) और उपधारा (4 ) के उपबंधों के अधीन रहते हुए , कोई ऐसा रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जिसका पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष में संकलित आवर्त पचास लाख रूपए से अधिक नहीं है , ऐसी शर्तों और निर्बंधनों के अधीन रहते हुए , जो विहित किए जाएं , धारा 9 की उप-धारा (1 ) के अधीन उसके द्वारा संदेय कर के बदले ऐसी दर पर, जो विहित की जाए, किंतु जो,-
(क) किसी विनिर्माता की दशा में , राज्य में के आवर्त के एक प्रतिशत से अधिक नहीं होगी ;
(ख) अनुसूची 2 के पैरा 6 के खंड (ख) में विनिर्दिष्ट प्रदाय करने में लगे व्यक्तियों की दशा में , राज्य में के आवर्त के ढ़ाई प्रतिशत से अधिक नहीं होगी और (ग) अन्य प्रदायकर्ताओं की दशा में, राज्य में के आवर्त के आवर्त के आधे प्रतिशत से अधिक नहीं होगी,
संगणित रकम के संदाय का विकल्प चुन सकेगा:
परंतु सरकार, अधिसूचना द्वारा, पचास लाख रूपए की उक्त सीमा को एक करोड़ पचास लाख रूपए से अनधिक की ऐसी सीमा तक बढ़ा सकेगी, जिसकी परिषद् द्वारा सिफारिश की जाए ": "
परंतु यह और कि कोई व्यक्ति जो खंड (क) या खंड (ख) या खंड (ग) के अधीन कर का संदाय करने का विकल्प . लेता है, किसी राज्य में पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष में आवर्त के दस प्रतिशत से अनधिक मूल्य की सेवा (अनुसूची 2 के पैरा 6 के खंड (ख) में निर्दिष्ट से भिन्न) या पांच लाख रूपए , जो भी अधिक हो, का प्रदाय कर सकेगा ।"
रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, उपधारा (1 ) के अधीन विकल्प चुनने का पत्र होगा, (2)
यदि,-
उप-धारा (1 ) में यथा उपबंधित के सिवाय, वह सेवा की प्रदाय में नहीं (क)
लगा हुआ है; "
(ख) वह ऐसे किसी माल का प्रदाय करने में नहीं लगा हुआ है, जिस पर इस 386( 27)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
अधिनियम के अधीन कर उद्ग्रहणीय नहीं है ;
(ग) वह माल के किसी अन्तर्राज्यिक जावक प्रदाय करने में नहीं लगा है ;
(घ) वह किसी ऐसे इलैक्ट्रानिक वाणिज्य प्रचालक के माध्यम से, जिससे धारा 52 के अधीन स्त्रोत पर कर के संग्रहण की अपेक्षा है, किसी माल का प्रदाय करने में नहीं लगा है ;
(ङ) वह ऐसे माल का विनिर्माता नहीं है , जिसे सरकार द्वारा , परिषद् की सिफारिशों पर, अधिसूचित किया जाए ;
अध्याय 6
रजिस्ट्रीकरण
राज्य में मालों या सेवाओं या दोनों के कराधेय प्रदाय करने वाला प्रत्येक प्रदाता, इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत होने का दायी होगा , यदि किसी वित्तीय वर्ष में उसका संकलित आवर्त बीस लाख रूपए से अधिक है । ( 1 )
रजिस्ट्रीकरण 22. के लिए दायी व्यक्ति.
परन्तु जहाँ कोई व्यक्ति, विशेष प्रवर्ग के राज्यों में से किसी राज्य से माल या सेवाओं या दोनों का कराधेय प्रदाय करता है , वह रजिस्ट्रीकृत किये जाने का दायी होगा, यदि किसी वित्तीय वर्ष में उसका संकलित आवर्त दस लाख रूपये से अधिक है । परंतु यह और कि जहां ऐसा व्यक्ति, विशेष प्रवर्ग के किसी राज्य से, जिसके संबंध में केन्द्र सरकार ने इस परंतुक में निर्दिष्ट समग्र आवर्त को बढ़ाया हो , माल या सेवा या दोनों का कराधेय प्रदाय करता है , वह रजिस्ट्रीकृत किये जाने का दायी होगा यदि वित्तीय वर्ष में उसका समग्र आवर्त , ऐसे बढाई गई आवर्त की समतुल्य राशि से अधिक हो ।
25. (6 ) प्रत्येक व्यक्ति, रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करने की पात्रता के लिए , आय- कर अधिनियम , 1961 के अधीन जारी स्थायी खाता संख्या रखेगा:
रजिस्ट्रीकरण के लिए प्रक्रिया.
परंतु व्यक्ति जिससे धारा 51 के अधीन कर की कटौती करना अपेक्षित है, स्थायी खाता संख्या के बजाय , रजिस्ट्रीकरण प्रदान करने के लिए पात्र होने के लिए उक्त अधिनियम के अधीन जारी कर कटौती और संग्रहण खाता संख्या रख सकेगा ।
अध्याय 7
कर बीजक , प्रत्यय और विकलन टिप्पण
कर बीजक 31. ( 1 ) कराधेय मालों की प्रदाय करने वाला रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति ऐसे समय से पहले या उस पर, -- (क) प्राप्तिकर्ता को प्रदाय , जहां प्रदाय में मालों का संचलन अंतर्वलित है , के लिए माल को हटाएगा ; या
(ख) किसी अन्य मामले में, मालों का परिदान करेगा या प्राप्तिकर्ता को उसको उपलब्ध कराएगा,
वर्णन , परिमाप और मालों के मूल्य, उस पर भारित कर और ऐसी अन्य विशिष्टियां जो विहित की जाएं , दर्शाने वाला कर बीजक जारी करेगा:
परंतु सरकार, परिषद् की सिफारिश पर, अधिसूचना द्वारा , ऐसे समय में और ऐसी रीति में जो विहित किया जाए , मालों या प्रदाय के प्रवर्गों जिनके संबंध में कर बीजक जारी किया जाएगा, को विनिर्दिष्ट कर सकेगी ।
(2) कराधेय सेवाओं की प्रदाय करने वाला रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति सेवाओं के उपबंध के पूर्व या पश्चात् किन्तु विहित अवधि के भीतर वर्णन , परिमाप और मालों के मूल्य, उस पर भारित कर और ऐसी अन्य विशिष्टियां जो विहित की जाएं , दर्शाने वाला कर बीजक जारी 386( 28)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
करेगा:
परंतु सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा और उसमें यथा उल्लिखित शर्तों के अध्यधीन रहते हुए संगठनों के प्रवर्गों को विनिर्दिष्ट करेगी , जिनके संबंध में-
(क) प्रदाय के संबंध में जारी किया गया कोई अन्य दस्तावेज कर बीजक समझा जाएगा ; या
(ख) कर बीजक जारी किया जाना अपेक्षित नहीं हो ।
3 ) उपधारा ( 1 ) और उपधारा (2 ) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, --
(
(क) रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, रजिस्ट्रीकरण का प्रमाणपत्र जारी करने की तारीख से एक मास के भीतर और ऐसी रीति में जो विहित की जाए , रजिस्ट्रीकरण की प्रभावी तारीख से, उसे रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र जारी करने की तारीख तक, प्रारंभ होने वाली अवधि के दौरान पहले से जारी बीजक के विरुद्ध पुनरावलोकित बीजक जारी कर सकेगा;
(ख) रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति , कर बीजक जारी नहीं कर सकेगा यदि ऐसी शर्तों और ऐसी रीति जो विहित की जाए के अध्यधीन रहते हुए , मालों या सेवाओं या दोनों प्रदाय का मूल्य दो सौ रूपए से कम है ;
( ग) छूट प्राप्त मालों और सेवाओं या दोनों की प्रदाय करने वाला या धारा 10 के उपबंधों के अधीन कर भुगतान करने वाला रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, कर बीजक के बजाय ऐसी विशिष्टिताएं अंतर्विष्ट करने वाला और ऐसी रीति में जो विहित की जाए , एक बिल जारी करेगा :
परन्तु रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, प्रदाय का बिल जारी नहीं करेगा, यदि प्रदाय किया गया माल या सेवाओं या दोनों का मूल्य ऐसी शर्तों के अध्यधीन रहते हुए और ऐसी रीति में जो विहित का जाए, दो सौ रूपए से कम है ;
( घ) कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति माल या सेवा या दोनों की किसी प्रदाय के संबंध में अग्रिम संदाय की प्राप्ति पर ऐसे संदाय का साक्ष्य देते हुए ऐसी विशिष्टियों से अंतर्विष्ट, जो विहित की जाए, कोई रसीद वाउचर या कोई अन्य दस्तावेज जारी करेगा ;
(ङ) जहां, माल या सेवा या दोनों की प्रदाय के संबंध में अग्रिम की प्राप्ति पर रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति कोई रसीद वाउचर जारी करता है, परंतु पश्चातवर्ती कोई प्रदाय नहीं की जाती है और उसके अनुसरण में कोई कर बीजक जारी नहीं किया जाता है , उक्त रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति उस व्यक्ति को जिसने संदाय किया है , ऐसे संदाय के विरुद्ध कोई प्रतिदाय वाउचर जारी कर सकेगा ;
(च) कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जो धारा 9 की उपधारा (3 ) या उपधारा (4) के अधीन कर संदत्त करने के लिए दायी है, उसके द्वारा किसी ऐसे प्रदाता से, जो रजिस्ट्रीकृत नहीं है, प्राप्त माल या सेवाओं या दोनों की प्राप्ति की तारीख को माल या सेवाओं या दोनों के संबंध में कोई बीजक जारी करेगा;
(छ) कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जो धारा 9 की उपधारा ( 3) या उपधारा (4) के अधीन कर संदत्त करने के लिए दायी है , प्रदायकर्ता , जो अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत नहीं है , को संदाय करते समय कोई संदाय वाउचर जारी करेगा ।
(4) माल की निरंतर प्रदाय की दशा में जहां लेखाओं के क्रमवार विवरण या क्रमवार संदाय छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
386 ( 29) अंतर्वलित हैं, वहां बीजक, प्रत्येक ऐसे विवरण के जारी करते समय या उससे पूर्व या, यथास्थिति , जब प्रत्येक ऐसा संदाय प्राप्त किया जाता है, जारी किया जाएगा । 5) उपधारा (3 ) के खंड (घ) के उपबंधों के अध्यधीन सेवाओं की निरंतर प्रदाय की दशा में, -- (
(क) जहां संदाय की नियत तारीख का संविदा से पता लगाया जा सकता है, वहां बीजक, संदाय की नियत तारीख को या उससे पूर्व जारी किया जाएगा;
(ख) जहां संदाय की नियत तारीख का संविदा से पता नहीं लगाया जा सकता है , वहां बीजक, जब सेवाओं का प्रदायकर्ता संदाय प्राप्त करता है, के समय या उससे पूर्व जारी किया जाएगा;
(ग) जहां संदाय को किसी घटना के पूरा होने से जोड़ा जाता है , वहां बीजक उस घटना के पूरा होने की तारीख को या उससे पूर्व जारी किया जाएगा ।
(6) किसी ऐसे मामले में जहां किसी संविदा के अधीन प्रदाय के पूरा होने से पूर्व सेवाओं की प्रदाय समाप्त हो जाती है, वहां बीजक ऐसे समय पर जारी किया जाएगा जब प्रदाय समाप्त होती है और ऐसा बीजक , ऐसी समाप्ति से पूर्व की गई प्रदाय की सीमा तक जारी किया जाएगा ।
(7) उपधारा ( 1 ) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां विक्रय या वापसी के लिए अनुमोदन पर भेजे जा रहा या लिया जा रहा माल प्रदाय किए जाने से पूर्व हटाया जाता है, वहां बीजक , आपूर्ति के समय या उससे पूर्व अथवा हटाए जाने की तारीख से छः मास तक, जो भी पूर्वतर हो , जारी किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण--इस धारा के प्रयोजनों के लिए शब्द "कर बीजक " के अंतर्गत पहले की गई प्रदाय के संबंध में प्रदायकर्ता द्वारा जारी कोई पुनरीक्षित बीजक सम्मिलित होगा ।
अध्याय 9
विवरणियां
विवरणियां देना ।
39. ( 1 ) किसी इनपुट सेवा वितरक या किसी अनिवासी कर योग्य व्यक्ति या धारा 10 , धारा 51 या धारा 52 के उपबंधों के अधीन कर संदत्त करने वाले किसी व्यक्ति से भिन्न प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, प्रत्येक कलैंडर मास या उसके किसी भाग के लिए इलैक्ट्रानिक रूप में माल या सेवा या दोनों की आवक और जावक पूर्तियां, प्राप्त इनपुट कर प्रत्यय, संदेय कर , संदत्त कर और अन्य विशिष्टियां और ऐसे प्ररूप और रीति में तथा ऐसे समय के भीतर, जो विहित की जाए , विवरणी देगा " : "
" परंतु सरकार परिषद् की सिफारिशों पर रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के कतिपय ऐसे वर्गों को अधिसूचित कर सकेगी , जो ऐसी शर्तों और सुरक्षोपायों के, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, अधीन रहते हुए , प्रत्येक तिमाही या उसके भाग के लिए विवरणी प्रस्तुत करेंगे । (2) धारा 10 के उपबंधों के अधीन कर संदाय करने वाला कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति प्रत्येक तिमाही या उसके किसी भाग के लिए ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में जो विहित की जाए , राज्य में आवर्त , कोई माल या सेवा या दोनों की आवक प्रदायों , संदेय कर और संदत्त कर की विवरणी, प्रत्येक तिमाही की समाप्ति के पश्चात् अठारह दिन के भीतर इलैक्ट्रानिक रूप में संदत्त करेगा ।
(7) प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जिससे उपधारा ( 1 ) या उपधारा (2) या उपधारा ( 3 ) या छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 31 मार्च 2020
386( 30)
उपधारा (5) के अधीन कोई विवरणी देने की अपेक्षा की गई है, ऐसी विवरणी के अनुसार देय कर अंतिम तारीख, जिसको उससे ऐसी विवरणी देने की अपेक्षा की जाती है, से अपश्चात् सरकार को संदत्त करेगा " : "
" परंतु सरकार परिषद् की सिफारिशों पर, रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के कतिपय ऐसे वर्गों को अधिसूचित कर सकेगी , जो ऐसी शर्तों और सुरक्षोपायों के, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं , अधीन रहते हुए , ऐसे विवरणी केके अनुसार, ऐसी विवरणी को प्रस्तुत करने के लिए उससे अपेक्षित अंतिम तारीख को या उससे पूर्व सरकार को, शोध्य कर या उसके किसी भाग का संदाय करेंगे । "
विवरणी वार्षिक
44. ( 1 ) इनपुट सेवा वितरक, धारा 51 या धारा 52 के अधीन कर संदाय करने वाले व्यक्ति, नैमित्तिक कराधेय व्यक्ति और अनिवासी कराधेय व्यक्ति से भिन्न प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए इलैक्ट्रानिकी रूप से ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में , जो विहित की जाए , ऐसे वित्त वर्ष के पश्चात् 31 दिसंबर को या उससे पूर्व एक वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करेगा ।
अध्याय 10
कर संदाय
49. (9)
कर , ब्याज , शास्तिऔर अन्य रकमों का संदाय
प्रत्येक व्यक्ति, जिसने इस अधिनियम के अधीन मालों या सेवाओं या दोनों पर कर संदत्त किया है , जब तक कि उसके द्वारा प्रतिकूल न साबित किया जाए , से यह समझा जाएगा कि उसने ऐसे कर की पूर्ण रकम को ऐसे मालों या सेवाओं या दोनों के प्राप्तिकर्ता को पारित कर दिया है ।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, --
(क) प्राधिकृत बैंक में सरकार के खाते में जमा की जाने की तारीख को इलैक्ट्रानिकी रोकड़ बही में जमा करने की तारीख समझा जाएगा ;
(ख) शब्द, --
(i ) "कर प्रत्यय" से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन संदेय कर और इसके अंतर्गत ब्याज, फीस और शास्ति सम्मिलित नहीं है ; और
(ii ) "अन्य शोध्य" से अभिप्रेत है इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन संदेय ब्याज , शास्ति, फीस या कोई अन्य रकम।
संदाय पर ब्याज विलंबित कर 50. ( 1 ) प्रत्येक व्यक्ति, जो इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसरण में कर का संदाय करने का दायी है , किंतु सरकार को विहित अवधि के भीतर कर या उसके किसी भाग का संदाय करने में असफल रहता है, उस अवधि के लिए जिसके दौरान कर या उसका कोई भाग असंदत्त रहता है, स्वयं , ऐसी दर पर ब्याज का, जो अठारह प्रतिशत से अधिक नहीं होगा , जैसा सरकार द्वारा परिषद् की सिफारिशों पर अधिसूचित किया जाए , संदाय करेगा ।
स्त्रोत पर कर का संग्रहण
52. (4) प्रत्येक प्रचालक, जो उपधारा ( 1 ) में विनिर्दिष्ट रकम का संग्रह करता है , उसके द्वारा किए जाने वाले मालो या सेवाओं या दोनों के बहिर्गामी प्रदायों , जिनके अंतर्गत उसके द्वारा वापस किये गये मालों या सेवाओं या दोनों का प्रदाय शामिल हैं तथा मास के दौरान उपधारा ( 1 ) के अधीन संगृहित रकम के ब्यौरों को अंतर्विष्ट करते हुए ऐसे प्ररूप और छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
386( 31) ऐसी रीति में, जो विहित की जाए , में ऐसे मास के अंत से दस दिन के भीतर इलैक्ट्रानिकी रूप में एक विवरण प्रस्तुत करेगा ।
(5) प्रत्येक प्रचालक, जो उपधारा ( 1 ) में विनिर्दिष्ट रकम का संग्रह करता है, उसके द्वारा किये जाने वाले मालो या सेवाओं या दोनों के बहिर्गामी प्रदायों , जिसके अंतर्गत उसके द्वारा वापस किये गये मालों या सेवाओं या दोनों का प्रदाय शामिल है तथा वित्तीय वर्ष के दौरान उक्त उपधारा के अधीन संगृहित रकम के ब्यौरों को अंतर्विष्ट करते हुए ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में , जो विहित की जाए, ऐसे वित्त वर्ष के अंत के पश्चात् 31 दिसंबर से पूर्व इलैक्ट्रानिकी रूप में एक वार्षिक विवरण प्रस्तुत करेगा ।
इनपुट कर
प्रत्यय का अंतरण
53. इस अधिनियम के अधीन धारा 49 की उपधारा (5) के उपबंधों के अनुसरण में एकीकृत माल और सेवा कर अधिनियम के अधीन कर शोध्य के संदाय के लिए, जैसा कि धारा 39 की उपधारा ( 1 ) के अधीन प्रस्तुत विधिमान्य विवरणी में उपदर्शित है, इनपुट कर प्रत्यय के उपयोग पर, राज्य कर के रूप में संग्रहित रकम को इस प्रकार उपयोग किए गए ऐसे प्रत्यय के बराबर रकम से घटा दिया जाएगा और राज्य सरकार राज्य कर लेखे से इस प्रकार घटाई गई रकम के समतुल्य रकम को एकीकृत कर लेखे में ऐसी रीति में और ऐसे समय के भीतर , जो विहित किया जाए, अंतरित करेगी ।
अध्याय 11
प्रतिदाय
54. (8) उपधारा (5) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी प्रतिदेय रकम का निधि में प्रत्यय किए जाने के स्थान पर आवेदक को संदाय किया जाएगा यदि ऐसी रकम निम्नलिखित से संबंधित है-
(क) निर्यात मालों या सेवाओं या दोनों या इनपुट या इनपुट सेवाओं जिनका उपयोग ऐसी निर्यातों के लिए किया गया है, पर संदत्त कर का प्रतिदाय ;
(ख) उपधारा (3 ) के अधीन इनपुट कर प्रत्यय , जिसका उपयोग नहीं किया गया है, का प्रतिदाय ;
( ग) प्रदाय पर संदत्त कर का प्रतिदाय , जिसको या तो पूर्णतः या भागतः उपलब्ध नहीं कराया गया है और जिसके लिए बीजक जारी नहीं किया गया है या जहां कोई प्रतिदाय वाउचर जारी किया गया है ;
(घ) धारा 77 के अनुसरण में कर का प्रतिदाय ;
(ङ) कर और ब्याज , यदि कोई हो, या आवेदक द्वारा संदत्त कोई रकम, यदि उसने ऐसे कर और ब्याज के भार को किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं किया हो ; या (च) आवेदकों के ऐसे अन्य वर्ग , जैसा कि सरकार परिषद् की सिफारिशों पर अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे , द्वारा चुकाया जाने वाला कर या ब्याज। 386( 32)
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अध्याय 17
अग्रिम विनिर्णय
परिभाषाएं 95. इस अध्याय में , जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, --
(क) " अग्रिम विनिर्णय " से अभिप्रेत है किसी प्राधिकरण या अपील प्राधिकरण द्वारा किसी आवेदक को धारा 97 की उपधारा (2) या धारा 100 की उपधारा ( 1 ) में मालों या सेवाओं या दोनों की प्रदाय , जिसे आवेदक द्वारा किया गया है या किए जाने का प्रस्ताव है, पर विनिर्दिष्ट विषयों या प्रश्नों पर दिया गया विनिश्चय;
(ङ) "प्राधिकरण " से अभिप्रेत है धारा 96 के अधीन गठित अग्रिम विनिर्णय प्राधिकरण;
101.
अपील प्राधिकरण के आदेश.
( 1 ) अपील प्राधिकरण अपील या प्रतिनिर्देश के पक्षकारों को सुने जाने का अवसर प्रदान करने के पश्चात् ऐसा आदेश पारित कर सकेगा जैसा वह अपील किए गए आदेश या निर्दिष्ट आदेश की पुष्टि करने के लिए या उपांतरित करने के लिए उचित समझे ।
(2) उपधारा (1 ) में निर्दिष्ट आदेश धारा 100 के अधीन अपील पारित करने या धारा 98 की उपधारा (5) के अधीन निर्देश करने की तारीख से नब्बे दिन की अवधि के भीतर पारित किया जाएगा ।
(3) जहां अपील प्राधिकरण के सदस्य उसे निर्दिष्ट किसी अपील या निर्देश में किसी बिन्दु या उन बिन्दुओं पर मतैक्य रखते है और यह समझा जाएगा कि अपील या निर्देश के अधीन प्रश्न के संबंध में कोई अग्रिम विनिर्णय जारी नहीं किया गया है ।
(4) आवेदक, संबंधित अधिकारी , अधिकारिता रखने वाले अधिकारी को उदघोषणा के पश्चात् सदस्यों द्वारा सम्यकतः हस्ताक्षरित और ऐसी रीति में प्रमाणित, जो विहित की जाए , अपील प्राधिकरण द्वारा ऐसी उदघोषित अग्रिम विनिर्णय की प्रति भेजी जाएगी । 103. ( 1 ) इस अध्याय के अधीन प्राधिकरण या अपील प्राधिकरण द्वारा उदघोषित अग्रिम विनिर्णय केवल निम्नलिखित पर बाध्यकर होगा-
अग्रिम विनिर्णय का लागू होना ।
(क) उस आवेदक पर, जिसने अग्रिम विनिर्णय के लिए धारा 97 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी विषय के संबंध में उसकी वांछा की थी ;
(ख ) आवेदक के संबंध में संबंधित अधिकारी या अधिकारिता रखने वाले अधिकारी पर । (2) उपधारा (1 ) में निर्दिष्ट अग्रिम विनिर्णय बाध्यकर होगा सिवाय तब जब मूल अग्रिम विनिर्णय की समर्थनकारी विधि, तथ्य या परिस्थितियां न बदल गई हों ।
कतिपय परिस्थितियों में अग्रिम विनिर्णय का शून्य होना ।
104. (1 ) जहां प्राधिकरण या अपील प्राधिकरण यह पाता है कि धारा 98 की उपधारा (4 ) के अधीन या धारा 101 की उपधारा ( 1 ) के अधीन उसके द्वारा उदघोषित अग्रिम विनिर्णय को आवेदक या अपीलार्थी द्वारा कपट या तात्विक तथ्यों को छिपाने या तथ्यों के दुव्यर्पदेशन द्वारा अभिप्राप्त किया गया है तो वह आदेश द्वारा ऐसे विनिर्णय को आरंभ से ही शून्य घोषित कर देगा और तत्पश्चात् इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंध आवेदक या अपीलार्थी को ऐसे लागू होंगे मानो अग्रिम विनिर्णय कभी किया ही नहीं था :
105. ( 1 ) प्राधिकरण या अपील प्राधिकरण को निम्नलिखित के संबंध में अपनी शक्तियों को प्रयोग करने के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता , 1908 के अधीन सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां होंगी, --
प्राधिकरण एवं अपील प्राधिकरण की शक्तियां
(क) खोज और निरीक्षण ;
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 31 मार्च 2020
386 ( 33)
(ख) किसी व्यक्ति की उपस्थिति का प्रवर्तन और शपथ पर उसकी परीक्षा करना ;
(ग) कमीशन जारी करना और लेखा बहियों और अन्य अभिलेखों को प्रस्तुत करनेके लिए बाध्य करना ।
(2) प्राधिकरण या अपील प्राधिकरण धारा 195 के प्रयोजनों के लिए एक सिविल न्यायालय समझा जाएगा किन्तु दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अध्याय 26 के प्रयोजनों के लिए नहीं, और प्राधिकरण या अपील प्राधिकरण के समक्ष प्रत्येक कार्यवाही धारा 193 और धारा 228 के अर्थातर्गंत और भारतीय दंड संहिता की धारा 196 के प्रयोजनों के लिए न्यायिक कार्यवाही समझी जाएगी।
106.
प्रधिकरण और अपील प्राधिकरण की प्रकिया
प्राधिकरण या अपील प्राधिकरण को इस अध्याय के उपबंधों के अध्यधीन अपनी स्वयं की प्रक्रिया विनियमित करने की शक्ति होगी ।
अध्याय 21
प्रकीर्ण
171 . (3) उपधारा (2 ) में विनिर्दिष्ट प्राधिकरण यथाविहित ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का निर्वहन कर सकेगा ।
चन्द्र शेखर गंगराड़े
प्रमुख सचिव छत्तीसगढ़ विधान सभा.
संचालक , मुद्रण तथा लेखन सामग्री , छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय , रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2020 .