100000000000
छत्तीसगढ़
शासन
पंजीयन क्रमांक " छत्तीसगढ़/ दुर्ग/09 / 2013-2015 ."
सत्यमेव जयते
"बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान ( बिना डाक टिकट) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22- छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई. दिनांक 30-05-2001 . "
छत्तीसगढ़ राजपत्र
(असाधारण)
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 368 ]
रायपुर, बुधवार , दिनांक 26 अगस्त 2020- -भाद्रपद 4 , शक 1942
छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय
रायपुर, बुधवार, दिनांक 26 अगस्त 2020 (भाद्रपद 4, 1942)
क्रमांक-9619/वि.स. /विधान/ 2020. छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2020 (क्रमांक 20 सन् 2020) जो बुधवार , दिनांक 26 अगस्त, 2020 को पुरःस्थापित हुआ है, को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।
हस्ता./-
(चन्द्र शेखर गंगराड़े ) प्रमुख सचिव.
735 736
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 26 अगस्त 2020
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्रमांक 20 सन् 2020)
छत्तीसगढ़ सहकारी सोसाइटी (संशोधन)विधेयक, 2020
छत्तीसगढ़ सहकारी सोसाइटी अधिनियम , 1960 (क्र. 17 सन् 1961 ) को और संशोधित करने हेतु विधेयक ।
भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप से यह अधिनियमित हो:-
1. (1 ) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ सहकारी सोसाइटी ( संशोधन ) अधिनियम, 2020 कहलायेगा ।
संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारंभ.
(2 ) इसका विस्तार सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में होगा ।
(3) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा । 2.
धारा 2 का संशोधन.
छत्तीसगढ़ सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1960 (क्र 17 सन् 1961 ) (जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है) की धारा 2 में, -
(एक) खण्ड़ (ध) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाये , अर्थात्ः-
" (ध- एक) " सेवाओं का न्यूनतम स्तर ' से अभिप्रेत है सोसाइटी की उपविधियों में मूल उद्देश्यों की पूर्ति हेतु दी गई न्यूनतम सेवाएं; "
(दो ) खण्ड (म - दो) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाये , अर्थात्ः- " (म -तीन) " सेवा क्षेत्र सोसाइटी" से अभिप्रेत है ऐसी
सोसाइटी, जो अपने सदस्यों एवं अन्य के लिए विभिन्न ग्राहक सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से बनायी गई हो; "
3. मूल अधिनियम की धारा 6 की उप - धारा (1 ) में, शब्द " बीस " के स्थान पर , शब्द " दस " प्रतिस्थापित किया जाये ।
धारा 6 का संशोधन.
धारा 9 का संशोधन.
4. मूल अधिनियम की धारा 9 की उप - धारा (3 ) में, शब्द "नब्बे दिन" के स्थान पर, शब्द " पैंतालीस दिन " प्रतिस्थापित किया जाये ।
5.
मूल अधिनियम की धारा 10 की उप - धारा (1 ) में,-
धारा 10 का संशोधन.
(एक) खण्ड (बारह) में, कोलन चिन्ह ": " के स्थान पर, अल्प विराम चिन्ह " ; " प्रतिस्थापित किया जाये; तथा छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 26 अगस्त 2020
736(1) (दो) खण्ड (बारह) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये , अर्थात्ः- "(तेरह) सेवा क्षेत्र सोसाइटीः "
6.
मूल अधिनियम की धारा 11 में,-
धारा 11 का संशोधन.
(
एक) उप- धारा (1 ) में , पूर्ण विराम चिन्ह " । " के स्थान पर, कोलन चिन्ह " : " प्रतिस्थापित किया जाये; तथा
(दो) उप -धारा (1 ) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये , अर्थात्: -
"परन्तु प्रत्येक सहकारी सोसाइटी इस अधिनियम या इसके अधीन बनाये गये नियम में किये गये किसी संशोधन के दिनांक से 45 दिवस के भीतर, उक्त संशोधन के अनुपालन में उप- विधियों में संशोधन हेतु प्रस्ताव चार प्रतियों में विहित रीति में रजिस्ट्रार को प्रेषित करेगी । "
(तीन) उप-धारा (3 ) में , शब्द " पैंतालीस दिन " के स्थान पर, शब्द "तीस दिन " प्रतिस्थापित किया जाये ।
7.
धारा 12 का संशोधन.
मूल अधिनियम की धारा 12 की उप-धारा (2) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये, अर्थात्:-
" (3 ) यदि सोसाइटी, धारा 11 की उप- धारा (1 ) के प्रथम परन्तुक के प्रावधान अनुसार इस अधिनियम या इसके अधीन बनाये गये नियम में किये गये किसी संशोधन के अनुपालन में उप - विधियों में संशोधन हेतु प्रस्ताव रजिस्ट्रार को प्रेषित करने में असफल रहती है , तो रजिस्ट्रार संबंधित सोसाइटी की उप- विधियों में संशोधन करेगा । "
8.
धारा 19 का संशोधन.
मूल अधिनियम की धारा 19 की उप- धारा (2- क ) के स्थान पर , निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये , अर्थात्ः-
" (2-क) इस अधिनियम या इसके अधीन बनाये गये नियमों या उप - विधियों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, यदि कोई ऐसा व्यक्ति, जो इस अधिनियम के उपबंधों तथा उस सोसाइटी की उप- विधियों के अधीन सदस्य के रूप में स्वीकृत किये जाने के लिए सम्यक् रूप से अर्हित हो , ऐसी सोसाइटी की सदस्यता के लिए कोई आवेदन करे , तो संबंधित सोसाइटी के बोर्ड के लिये , ऐसा आवेदन प्राप्त होने की तारीख से तीस दिनों की कालावधि के भीतर , ऐसे आवेदन पर विनिश्चय करने की बाध्यता होगीः 736(2)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 26 अगस्त 2020
यदि किसी सोसाइटी का बोर्ड, पूर्वोक्त आवेदन पत्र पर उपरोक्तानुसार विहित अवधि के भीतर विनिश्चय करने में विफल रहता है , तो यह समझा जायेगा कि उसे ऐसी सोसाइटी के सदस्य के रूप में स्वीकृत कर लिया गया है :
परन्तु रजिस्ट्रार , या तो स्वप्रेरणा से किसी भी समय या सोसाइटी या किसी व्यथित व्यक्ति के द्वारा आवेदन किये जाने पर, जो कि पूर्वोक्त तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर किया गया हो , तथा सोसाइटी या संबंधित व्यक्ति को युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात्, उस तारीख से , जिस पर रजिस्ट्रार को आवेदन प्राप्त हुआ हो, पैंतालिस दिन के भीतर, आदेश द्वारा उस व्यक्ति के संबंध में यह घोषित कर सकेगा कि वह उसमें (आदेश में) वर्णित कारणों से ऐसी सोसाइटी की सदस्यता का पात्र नहीं है । " 9.
धारा 19- क का संशोधन.
मूल अधिनियम की धारा 19 - क की उप- धारा (1 ) के खण्ड (घ) एवं (ङ) का लोप किया जाये ।
10.
धारा 45 का संशोधन.
मूल अधिनियम की धारा 45 की उप-धारा (2) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये , अर्थात्:-
" (3) राज्य सरकार, ऐसी समस्त सहकारी सोसाइटी या बैंकों की अंशपूंजी में अभिदाय कर सकेगी , जो निक्षेप बीमा और साख प्रत्याभूति निगम अधिनियम , 1961 (क्र. 47 सन् 1961 ) के उपबंधों के अधीन एक बीमित बैंक है । " 11.
धारा 48 का संशोधन.
मूल अधिनियम की धारा 48 की उप - धारा (7) के खण्ड (ख) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये , अर्थात्ः-
" (ख ) किसी सहकारी सोसाइटी में, कोई भी सदस्य , बोर्ड के सदस्य, प्रत्यायुक्त या प्रतिनिधि के रुप में, निर्वाचन हेतु अर्हित नहीं होगा और न ही ऐसी सहकारी सोसाइटी के प्रत्यायुक्त या प्रतिनिधि को , बोर्ड के किसी निर्वाचन में मतदान करने का अधिकार होगा, जब तक कि उसने ऐसी सोसाइटी द्वारा दी जाने वाली सेवाओं के न्यूनतम स्तर, जैसा कि संबंधित सोसाइटी की उप- विधियों में इस संबंध में विहित हो, का उपभोग नहीं कर लिया हो । "
धारा 48 - ग का 12. संशोधन.
मूल अधिनियम की धारा 48 - ग के खण्ड (ख ) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये , अर्थात्ः- छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 26 अगस्त 2020
736(3) "(ख) सभापति, प्रतिनिधियों तथा अन्य पदाधिकारियों को निर्वाचित करनाः "
13.
धारा 49 का संशोधन.
मूल अधिनियम की धारा 49 की उप- धारा (8 ) के परन्तुक के स्थान पर , निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये , अर्थात्ः-
" परंतु यह कि रजिस्ट्रार , किसी अधिकारी अथवा किसी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों की समिति को इस उप-धारा के अधीन उसमें निहित बोर्ड / समिति की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा तथा ऐसा प्राधिकृत अधिकारी अथवा व्यक्ति अथवा व्यक्तियों की समिति ऐसे प्राधिकृत किये जाने की तारीख से रजिस्ट्रार द्वारा विनिर्दिष्ट कालावधि के लिए अथवा राज्य सहकारी निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचन कराये जाने तक, इनमें से जो भी पहले हो , ऐसी शक्ति का प्रयोग करेंगे:
परंतु यह और कि व्यक्तियों की समिति की दशा में , रजिस्ट्रार समिति में सम्मिलित एक व्यक्ति को अध्यक्ष तथा एक व्यक्ति को उपाध्यक्ष नामांकित कर सकेगा और ऐसे व्यक्ति, संबंधित समिति के सदस्यों में से नामांकित किये जा सकेंगेः
परंतु यह और भी कि अशासकीय व्यक्ति अथवा व्यक्तियों की दशा में , उनकी अर्हताएं ऐसी होगी जैसा कि विहित की जाए । "
14.
मूल अधिनियम की धारा 54 में, -
धारा 54 का संशोधन.
(एक) उप- धारा (2) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये , अर्थात्ः-
" (2-क) रजिस्ट्रार , अधिकारियों तथा अन्य सेवकों के ऐसे संवर्ग बनायेगा , जैसा कि राज्य सरकार , आदेश द्वारा , निर्देश दे ।
( दो) उप-धारा (3 ) के खण्ड (ख ) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये , अर्थात्: -
" (ख ) यदि राज्य सहकारी बैंक , पात्रता मानदण्ड के अनुसार, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी की नियुक्ति, ऐसे पदं रिक्त होने के दिनांक से पन्द्रह दिवस के भीतर करने में विफल रहता है , तो ऐसी दशा में रजिस्ट्रार , उक्त बैंक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी की नियुक्ति करेगा। " 736(4)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 26 अगस्त 2020
15. मूल अधिनियम की धारा 58 की उप- धारा (4 ) के खण्ड धारा 58 का संशोधन.
(चार) में,-
(एक) कोलन चिन्ह ": " के स्थान पर, पूर्ण विराम चिन्ह " । " प्रतिस्थापित किया जाये; तथा
(दो) प्रथम परन्तुक के पूर्व , निम्नलिखित अन्तःस्थापित किया जाये, अर्थात्ः-
" यदि किसी सहकारी सोसाइटी का साधारण निकाय अपने लेखाओं की संपरीक्षा हेतु संपरीक्षक अथवा संपरीक्षा फर्म की नियुक्ति, वित्तीय वर्ष की समाप्ति की तारीख से छः माह की कालावधि के भीतर करने में विफल रहता हो तो, ऐसी दशा में रजिस्ट्रार ऐसी सोसाइटी को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् संबंधित सोसाइटी के संपरीक्षक अथवा संपरीक्षा फर्म की नियुक्ति कर सकेगा और ऐसी सहकारी सोसाइटी के लेखाओं की संपरीक्षा करवायेगाः "
धारा 58-ख का 16. संशोधन.
मूल अधिनियम की धारा 58 - ख की उप - धारा (2 ) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये, अर्थात्ः- " (2-क) इस धारा के अधीन कोई भी अधिकारी या पदाधिकारी , जिसे सोसाइटी को हुए नुकसान के लिए उत्तरदायी ठहराया गया हो, वह ऐसे आदेश संसूचित किये जाने की तारीख से आगामी छः वर्षों की कालावधि के लिए बोर्ड के सदस्य या किसी सोसाइटी के प्रतिनिधि के रूप में चुनाव लड़ने हेतु पात्र नहीं होगा तथा उस रूप में वह अपना पदधारित करने से परिविरत हो जायेगा । किसी वेतनभोगी अधिकारी के सोसाइटी को नुकसान पहुंचाने हेतु उत्तरदायी ठहराये जाने की दशा में, कोई भी अन्य कार्रवाई , जो उसके विरूद्ध की जा सकती हो , पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना , ऐसे अधिकारी पर लागू सेवा नियम के उपबंधों के अधीन भी कार्रवाई की जायेगी । "
17.
मूल अधिनियम की धारा 77 की उप- धारा (14) का लोप किया जाये ।
धारा 77 का संशोधन.
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 26 अगस्त 2020
736( 5)
नवीन धारा 18.
77-कक का मूल अधिनियम की धारा 77 - क के पश्चात्, निम्नलिखित अन्तःस्थापित किया जाये , अर्थात्ः-
अंतःस्थापन.
"77-कक. पुनरीक्षण.-
(1) अधिकरण , स्वप्रेरणा से या किसी पक्षकार द्वारा आवेदन किये जाने पर, किसी भी समय , रजिस्ट्रार द्वारा इस अधिनियम की धारा 55 की उप - धारा (2) या धारा 64 के अधीन पारित किये गये किसी आदेश की वैधता या औचित्य के संबंध में, अपना समाधान करने के प्रयोजन के लिए, ऐसा आदेश पारित कर सकेगा, जैसा कि वह उचित समझे ।
(2) रजिस्ट्रार, स्वप्रेरणा से या किसी पक्षकार द्वारा आवेदन किये जाने पर , किसी भी समय , उसके किसी अधीनस्थ अधिकारी द्वारा इस अधिनियम की धारा 55 की उप-धारा (2) या धारा 64 के अधीन पारित किये गये किसी आदेश की वैधता या औचित्य के संबंध में , अपना समाधान करने के प्रयोजन के लिए , ऐसा आदेश पारित कर सकेगा, जैसा कि वह उचित समझेः
परन्तु यह कि इस धारा के अधीन रजिस्ट्रार को प्रदत्त शक्तियाँ, अपर रजिस्ट्रार की श्रेणी से निम्न के किसी अधिकारी को प्रत्यायोजित नहीं की जायेगी ।
(3) उप- धारा (1 ) एवं (2) के अधीन कोई आदेश , पुनरीक्षण में तब तक परिवर्तित नहीं किया जायेगा या उल्टा नहीं जायेगा , जब तक कि हितबद्ध पक्षकारों पर सूचना की तामील न कर दी गई हो और उन्हें सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो ।
(4) अधिकरण या रजिस्ट्रार द्वारा ऐसा आवेदन ग्रहण नहीं किया जायेगा, जब तक कि वह आदेश की तारीख से तीस दिन के भीतर प्रस्तुत नं किया गया हो तथा पूर्वोक्त कालावधि की संगणना करने में, उक्त आदेश की प्रतिलिपि अभिप्राप्त करने के लिए , अपेक्षित समय को छोड़ दिया जायेगा । "
धारा 78 का 19.
मूल अधिनियम की धारा 78 में,-
संशोधन.
(एक) उप -धारा (1 ) के स्थान पर , निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्:-
736 (6)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 26 अगस्त 2020
" (1 ) जहाँ इसके संबंध में अन्यथा उपबन्धित है के सिवाय , इस अधिनियम या उसके अन्तर्गत निर्मित नियमों के अधीन पारित किये गये प्रत्येक मूल आदेश की अपीलः-
(क) संयुक्त रजिस्ट्रार को तब की जायेगी , जब ऐसा आदेश रजिस्ट्रार के अधीनस्थ किसी अधिकारी , जो अपर रजिस्ट्रार या संयुक्त रजिस्ट्रार से भिन्न हो, के द्वारा पारित किया गया हो, चाहे ऐसे आदेश पारित करने वाले अधिकारी में रजिस्ट्रार शक्तियाँ निहित हो या न हो । की
(ख ) रजिस्ट्रार को अथवा रजिस्ट्रार द्वारा इस निमित्त सम्यक् रूप से प्राधिकृत अपर रजिस्ट्रार को तब की जायेगी , जब ऐसा आदेश संयुक्त रजिस्ट्रार द्वारा पारित किया गया हो ।
(ग) अधिकरण को तब की जायेगी , जब ऐसा आदेश रजिस्ट्रार अथवा अपर रजिस्ट्रार द्वारा पारित किया गया हो । "
(दो) उप -धारा (2) में , शब्द " प्रथम अपील में रजिस्ट्रार द्वारा पारित " के स्थान पर , शब्द "प्रथम अपील में संयुक्त रजिस्ट्रार , अपर रजिस्ट्रार या रजिस्ट्रार द्वारा पारित " प्रतिस्थापित किया जाये ।
20.
धारा 87 का संशोधन.
मूल अधिनियम की धारा 87 के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये, अर्थात्:-
"इस धारा के अंतर्गत , सहकारी सोसाइटी के ऐसे अधिकारी या पदाधिकारी के विरूद्ध एंटी करप्शन ब्यूरो या आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो अथवा तत्समय प्रवृत्त विधि के अंतर्गत गठित किसी अन्य अधिकरण द्वारा जांच या कार्यवाही संस्थित किये जाने के लिये यदि कोई अनुमति मांगी गई है, तब राज्य सरकार उपरोक्त प्राधिकारियों को ऐसी अनुमति देने के लिये सक्षम प्राधिकारी होगी । " छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 26 अगस्त 2020
736 ( 7) उद्देश्य और कारणों का कथन
सहकारी सोसाइटियों के रजिस्ट्रीकरण , सोसाइटियों की उप - विधियों में संशोधन, सोसाइटियों में सदस्यों के प्रवेश, प्रकरणों में प्रथम अपील तथा सोसाइटियों की लेखा पुस्तकों की समय पर संपरीक्षा करने तथा सोसाइटियों को हानि पहुँचाने के लिए उत्तरदायी ठहराये गये व्यक्तियों को दण्डित करने की प्रक्रिया को सरलीकृत करने की दृष्टि से, राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1960 (क्र. 17 सन् 1961 ) की धारा 2, 6, 9 , 10 , 11 , 12, 19, 19- क , 45 , 48 , 48 - ग , 49, 54 , 58 , 58-ख , 77, 78 एवं 87 में आवश्यक संशोधन तथा प्रकरणों के पुनरीक्षण के प्रयोजन से नवीन धारा 77 - कक अन्तःस्थापित करने का विनिश्चय किया है ।
अतः यह विधेयक प्रस्तुत है ।
रायपुर,
दिनांक 20 अगस्त, 2020
डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम सहकारिता मंत्री, (भारसाधक सदस्य) 736(8)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 26 अगस्त 2020
उपाबंध
छत्तीसगढ़ सहकारी सोसाइटी अधिनियम , 1960 की धारा 2 , 6 , 9, 10, 11 , 12, 19, 19-क, 45,48 , 48- ग , 49, 54, 58, 58-ख , 77, 78 , 87 , का सुसंगत उद्धहरण.
**
** धारा 2 परिभाषाएँ
इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
खण्ड (घ) " बहुप्रयोजन सोसाइटी" से अभिप्रेत है कि कोई ऐसी सोसाइटी जिसके उद्देश्यों में उन प्राथमिक उद्देश्यों में से, जो कि खण्ड (छः), (ढ), (फ) तथा (म ) में से किन्ही भी दो या अधिक खण्डों में विनिर्दिष्ट किए गये हैं, कोई प्राथमिक उद्देश्य सम्मिलित हो;
खण्ड (म-दो) " अनुसूचित क्षेत्र " से अभिप्रेत है कि वह क्षेत्र जो अनुसूचित क्षेत्र (बिहार, गुजरात, मध्य प्रदेश और उडीसा राज्य) आदेश , 1977 के अधीन घोषित किया गया है;
***
धारा 6 रजिस्ट्रीकरण की शर्तें -
उप -धारा (1 ) जिस सोसाइटी की सदस्य कोई अन्य सोसाइटी हो , उस सोसाइटी से भिन्न कोई भी सोसाइटी इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत नहीं की जायेगी, यदि वह कम से कम ऐसे बीस व्यक्तियों से मिलकर न बनी हो, जो भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 (क्रमांक 9 सन् 1872) की धारा 11 के अधीन संविदा करने के लिए सक्षम हों तथा जो निकट के नातेदार न होकर बीस भिन्न-भिन्न कुटुम्बों के हों, और उस दशा में जबकि सोसाइटी के उद्देश्यों में उसके सदस्यों को उधार दी जाने वाली निधियों का सृजित किया जाना सम्मिलित हो , इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत नहीं की जायेगी यदि ऐसे व्यक्ति, उस दशा में के सिवाय जबकि रजिस्ट्रार साधारण या विशेष आदेश द्वारा अन्यथा निर्देश दे, उसी नगर या ग्राम में या ग्रामों के किसी समूह में निवास न करते होंः
परन्तु अनन्यतः विद्यार्थियों के फायदे के लिये बनाई गई कोई सोसाइटी इस बात के होते हुए भी रजिस्ट्रीकृत की जा सकेगी कि ऐसी सोसाइटी के सदस्यों ने उस विधि, जिसके कि अध्यधीन वे है, के अनुसार वयस्कता की आयु प्राप्त नहीं की है:
परन्तु यह और भी कि रजिस्ट्रार न्यूनतम सदस्यता की शर्त को, ऐसी सोसाइटी के लिए, जो किसी संगठन / स्थापना के कर्मचारियों के कल्याण के लिए संगठित की गई , शिथिल कर सकेगाः
परन्तु यह और भी कि किसी प्राथमिक सोसाइटी की दशा में रजिस्ट्रीकरण के समय कम से कम 33 प्रतिशत महिला सदस्य होंगेंः छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 26 अगस्त 2020
736(9) परन्तु यह और भी कि रजिस्ट्रार , पर्याप्त कारणों से महिला सदस्यों की विहित प्रतिशतता की शर्तों को शिथिल कर सकेगा.
*
धारा 9 रजिस्ट्रीकरण
उप -धारा (3 ) रजिस्ट्रार किसी सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन प्राप्त होने की तारीख से, नब्बे दिन के भीतर, विनिश्चय करेगा :
परन्तु यदि रजिस्ट्रार, पूर्वोक्त कालावधि के भीतर ऐसे आवेदन का निपटारा करने में असफल रहता है तो वह ऐसी कालावधि का अवसान होने की तारीख से, पन्द्रह दिन के भीतर ऐसे आवेदन को अगले उच्च अधिकारी को, और जहां रजिस्ट्रार स्वयं रजिस्ट्रीकरण अधिकारी है , वहां राज्य सरकार को निर्देशित करेगा , यथास्थिति जो या जिसके द्वारा , आवेदन प्राप्त होने की तारीख से दो मास के भीतर निपटारा किया जाएगा और यथास्थिति, ऐसे उच्च अधिकारी या राज्य सरकार द्वारा उस कालावधि के भीतर आवेदन का निपटारा करने में असफल रहने पर सोसाइटी और उसकी उपविधियां रजिस्ट्रीकृत कर दी गई समझी जाएगी ।
धारा 10 सोसाइटियों का वर्गीकरण
उप - धारा ( 1 ) रजिस्ट्रार समस्त सोसाइटियों का वर्गीकरण निम्नलिखित एक या अधिक शीर्षों के अधीन करेगा, अर्थात् :-
(एक) उपभोक्ता सोसाइटी;
(दो) कृषि कर्म सोसाइटी;
(तीन) संघीय सोसाइटी;
(चार) केन्द्रीय सोसाइटी;
(पांच ) गृह निर्माण सोसाइटी;
(छह) विपणन सोसाइटी;
(सात) बहुप्रयोजन सोसाइटी;
(आठ) उत्पादक सोसाइटी;
प्रसंस्करण सोसाइटी;
(नौ)
(दस) संसाधन सोसाइटी;
(ग्यारह) साधारण सोसाइटी;
(बारह) औद्योगिक सोसाइटीः
परन्तु किसी विशिष्ट वर्ग की सोसाइटियों की संक्रिया को सुकर बनाने के उद्देश्य से बनाई गई सोसाइटी उस वर्ग की सोसाइटी के रूप में वर्गीकृत की जायेगी.
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 26 अगस्त 2020
736(10)
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धारा 11 सोसाइटी की उपविधियों का संशोधन
उप-धारा ( 1 ) किसी सोसाइटी की उपविधियों का कोई भी संशोधन तब तक विधिमान्य नहीं होगा जब तक कि इस अधिनियम के अधीन रजिस्टर में दर्ज न किया गया हो, जिस प्रयोजन के लिये उस प्रस्तावित संशोधन की चार प्रतियां विहित रीति में रजिस्ट्रार को भेजी जाएगी.
उप -धारा (3 ) रजिस्ट्रार आवेदक सोसाइटी को सुनवाई का अवसर दिए बिना उपविधियों के किसी संशोधन को रजिस्टर में दर्ज करने से इंकार नहीं करेगा. यदि वह किसी संशोधन को रजिस्टर में दर्ज करने से इंकार करने का विनिश्चय करता है तो वह इंकार संबंधी आदेश उस इंकार के कारणों सहित प्रस्ताव प्राप्त होने की तारीख से पैंतालिस दिन के भीतर सोसाइटी को संसूचित करेगा:
परन्तु यदि रजिस्ट्रार, पूर्वोक्त कालावधि के भीतर ऐसे आवेदन का निपटारा करने में असफल रहता है तो वह ऐसी कालावधि का अवसान होने की तारीख से पंद्रह दिन के भीतर ऐसे आवेदन को अगले उच्च अधिकारी को, और जहां रजिस्ट्रार स्वयं रजिस्ट्रीकरण अधिकारी है, वहां राज्य सरकार को निर्देशित करेगा , यथास्थिति जो या जिसके द्वारा , आवेदन प्राप्त होने की तारीख से दो मास के भीतर निपटारा किया जाएगा और यथास्थिति ऐसे उच्च अधिकारी या राज्य सरकार द्वारा उस कालावधि के भीतर आवेदन का निपटारा करने में असफल रहने पर उपविधियों का संशोधन रजिस्ट्रीकृत कर दिया गया समझा जाएगा .
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धारा 12. उपविधियों के संशोधन के लिए निर्देश देने की शक्ति
उप -धारा (2 ) यदि वह सोसाइटी, रजिस्ट्रार द्वारा विनिर्दिष्ट समय के भीतर संशोधन करने में असफल रहती है तो रजिस्ट्रार, उस सोसाइटी को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात्और ऐसी शीर्ष / संघीय सोसाइटी की, जो राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए , राय मांगने के पश्चात्, ऐसा संषोधन रजिस्टर कर सकेगा और उसकी एक प्रमाणित प्रति ऐसी सोसाइटी को जारी कर सकेगा;
परन्तु इस धारा के उपबंध नगरीय सहकारी बैंकों के मामले में लागू नहीं होंगे .
धारा 19. व्यक्ति, जो सदस्य हो सकेंगे
उप-धारा इस अधिनियम में या उसके अधीन बनाए गए नियमों में या यथास्थिति, किसी संसाधन सोसाइटी या उपभोक्ता सोसाइटी की उपविधियों में अंतर्विष्ट किसी बात के (2-क) छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 26 अगस्त 2020
736(11) होते हुए भी, यदि कोई ऐसा व्यक्ति, जो इस अधिनियम के उपबंधों तथा उस सोसाइटी की उपविधियों के अधीन सदस्य के रूप में स्वीकृत किये जाने के लिए सम्यक रूप से अर्हित हो, ऐसी सोसाइटी की सदस्यता के लिए कोई आवेदन करे, तो उसके संबंध में यह समझा जाएगा कि उसे ऐसी सोसाइटी के कार्यालय में वह आवेदन प्राप्त होने की तारीख से ऐसी सोसाइटी के सदस्य के रूप में स्वीकृत कर लिया गया हैः
परन्तु रजिस्ट्रार या तो स्वप्रेरणा से किसी भी समय या सोसाइटी या किसी व्यथित व्यक्ति के ऐसे आवेदन पर , जो कि पूर्वोक्त तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर किया गया हो , तथा सोसाइटी या संबंधित व्यक्ति को युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात्, उस तारीख से, जिसको कि रजिस्ट्रार को आवेदन प्राप्त हुआ हो, पैंतालिस दिन के भीतर, आदेश द्वारा उस व्यक्ति के संबंध में यह घोषित कर सकेगा कि वह उसमें (आदेश में) वर्णित कारणों से ऐसी सोसाइटी की सदस्यता का पात्र नहीं है.
*
धारा 19- क. सदस्य की निर्हताएं
उप - धारा ( 1 ) कोई भी व्यक्ति किसी सोसाइटी के सदस्य के रूप में प्रवेश प्राप्त करने के लिये पात्र नहीं होगा और कोई भी सदस्य किसी सोसाइटी का सदस्य नहीं रहेगा यदि, - खण्ड (घ) (घ ) यदि वह इस अधिनियम की धारा 48- क के अधीन निरर्हित है;
खण्ड (ड ) ( ड) यदि वह ऐसा व्यक्ति है जिसे किसी सहकारी संस्था की सेवा या सरकारी सेवा से हटा दिया गया है ;
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धारा 45. सोसाइटियों को राज्य सहायता का मंजूर किया जाना -
उप-धारा (2) उपधारा (1 ) के अधीन कोई आवेदन प्राप्त होने पर या अन्यथा , रजिस्ट्रार, यदि उसका यह समाधान हो जाये कि ऐसी सहायता उस सोसाइटी के हित में आवश्यक है, ऐसी सहायता मंजूर की जाने के लिये राज्य सरकार को सिफारिश कर सकेगा. राज्य सरकार तदुपरि उस सोसाइटी को ऐसी सहायता , जैसी कि वह ठीक समझे , ऐसे निबंधनों तथा शर्तों पर मंजूर कर सकेगी जैसी कि विहित की जाय.
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धारा 48. सोसाइटी में का अन्तिम प्राधिकार -
उप-धारा (7) किसी सहकारी सोसाइटी में, कोई भी सदस्य, बोर्ड के सदस्य के रूप में, प्रत्यायुक्त या प्रतिनिधि के रूप में निर्वाचन के लिए अर्हित नहीं होगा और न ही ऐसी सहकारी खण्ड (ख) 736(12)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 26 अगस्त 2020
सोसाइटी के प्रत्यायुक्त या प्रतिनिधि को, बोर्ड के किसी निर्वाचन में मत देने का अधिकार होगा, जब तक कि वह ऐसी सहकारी सोसाइटी द्वारा दी जाने वाली सेवाओं के न्यूनतम् स्तर जैसा कि रजिस्ट्रार द्वारा सभी प्रकार की सोसाइटियों के लिए इस संबंध में समय- समय पर विहित किया जाए, का उपभोग नहीं कर लिया हो ।
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धारा 48- ग . बोर्ड की शक्तियां
किसी सोसाइटी का बोर्ड या बोर्ड को उसकी उपविधियों के अनुसार निम्नानुसार शक्तियां होगी:-
खण्ड (ख) (ख) सभापति एवं अन्य पदधारियों को निर्वाचित करना;
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धारा 49. वार्षिक साधारण सम्मेलन
उप -धारा (8 ) इस अधिनियम या इसके अधीन बनाये गये नियमों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड के कार्यकाल के अवसान के पूर्व बोर्ड का निर्वाचन कराया जायेगा । यदि बोर्ड के कार्यकाल के अवसान के पूर्व निर्वाचन नहीं कराये जाते हैं , या सहकारी सोसाइटी का बोर्ड किसी न्यायालय के आदेश के कारण या अन्यथा कार्य करने से परिविरत हो जाए , तो बोर्ड के सभी सदस्यों द्वारा अपने पद रिक्त किये गये समझे जाएंगे और बोर्ड की शक्तियां रजिस्ट्रार में निहित समझी जाएंगी और राज्य निर्वाचन आयोग, छः मास के भीतर तथा सहकारी बैंक के मामले में बारह मास के भीतर निर्वाचन करवायेगाः
परंतु यह कि रजिस्ट्रार किसी अधिकारी अथवा कोई व्यक्ति जिसे, रजिस्ट्रार की राय में किसी सहकारी बैंक या सहकारी सोसाइटी, यथा स्थिति, के प्रबंधन का अनुभव हो, को इस उपधारा के अधीन उसमें निहित बोर्ड की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा तथा ऐसा प्राधिकृत अधिकारी अथवा व्यक्ति, ऐसे प्राधिकृत किये जाने की तारीख से रजिस्ट्रार द्वारा विनिर्दिष्ट कालावधि के लिए अथवा राज्य सहकारी निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचन कराए जाने तक, इनमें से जो भी पहले हो, ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा ।
* छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 26 अगस्त 2020
736( 13) धारा 54. प्रबंधको, सचिवों तथा अन्य अधिकारियों की नियुक्ति
उप-धारा (2) शीर्ष सोसाइटियां तथा केन्द्रीय सोसाइटियां आफिसरों तथा अन्य सेवकों के ऐसे संवर्ग (काडर) बनाये रखेंगी जिसका कि राज्य सरकार , आदेश द्वारा , निर्देश दे और ऐसे संवर्ग के सदस्यों की सेवा की शर्तें ऐसी होंगी जैसी कि रजिस्ट्रार, आदेश द्वारा अवधारित करे.
उप-धारा (3 ) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा , उन सोसाइटियों के वर्ग को विनिर्दिष्ट कर सकेगी जो कि उपधारा (2 ) के अधीन शीर्ष सोसाइटियों या केन्द्रीय सोसाइटियों द्वारा बनाये गये ऐसे संवर्गों में से, जैसे कि उसमें (अधिसूचना में ) विनिर्दिष्ट किये जायें, आफिसरों को नियोजित करेंगी और उन सोसाइटियों के वर्ग के लिए यह बाध्यताकारी होगा कि वह ऐसे संवर्ग के अधिकारियों को जब कभी शीर्ष या केन्द्रीय सोसाइटियों द्वारा उन्हें प्रतिनियुक्त किया जाय , स्वीकार करे तथा उन्हें उन संवर्ग पदों पर नियुक्त करें.
(क ) किसी सहकारी बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का पद धारण करने के लिए पात्रता के मानदण्ड ऐसे होंगे , जैसा कि, इस संबंध में रिजर्व बैंक द्वारा विहित किया जाए.
(ख ) यदि सम्बंधित सहकारी बैंक पात्रता मानदण्ड के अंतर्गत मुख्य कार्यपालन अधिकारी की नियुक्ति विर्निदिष्ट समयावधि के भीतर करने में विफल रहता है तो ऐसी दशा में रजिस्ट्रार बैंक के ऐसे पात्र अधिकारी की नियुक्ति कर सकेगा ।
धारा 58. लेखाओं की संपरीक्षा
उप-धारा (4) प्रत्येक सहकारी सोसाइटी अपने लेखाओं की संपरीक्षा प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम से कम एक बार रजिस्ट्रार द्वारा इस संबंध में प्राधिकृत संपरीक्षकों अथवा परीक्षकों के समूह द्वारा कराएगी और संपरीक्षा के लिए ऐसी फीस देय होगी जैसा कि रजिस्ट्रार द्वारा इस संबंध में विहित की जाएः
परन्तु यह कि-
खण्ड (चार) (चार ) संपरीक्षक, जिसके द्वारा उप - धारा (1 ) में निर्दिष्ट सहकारी सोसाइटी के लेखाओं का संपरीक्षण किया जाना है, की नियुक्ति इस संबंध में रजिस्ट्रार द्वारा अनुमोदित संपरीक्षकों अथवा संपरीक्षा फर्म्स के पैनल में से सहकारी सोसाइटी के साधारण निकाय द्वारा किया जाएगाः छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 26 अगस्त 2020
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परन्तु यह और कि यदि वहां संपरीक्षा रिपोर्ट पूर्ण होने या जारी होने के पश्चात्, कोई वित्तीय अनियमितता या गबन की शिकायत होती है तो रजिस्ट्रार, इस प्रयोजन के लिए विषेश संपरीक्षा हेतु आदेश दे सकेगा ।
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धारा 58- ख. किसी सोसाइटी को हुए नुकसान को पूरा करने के लिए प्रक्रिया
उप-धारा (2 ) यदि उपधारा (1 ) के अधीन की गई जांच पर, रजिस्ट्रार का यह समाधान हो जाए कि इस उपधारा के अधीन आदेश देने के लिए पर्याप्त आधार है तो वह, ऐसे व्यक्ति से या, किसी मृत व्यक्ति की दशा में, उसके विधिक प्रतिनिधि से जो कि उसकी सम्पदा विरासत में प्राप्त करे, यह अपेक्षा करते हुए आदेश कर सकेगा कि वह ऐसी दर से , जैसी कि रजिस्ट्रार न्यायसंगत तथा सम्यक् समझें, संगणित किये गये ब्याज सहित उस धन या संपत्ति या उसके किसी भाग का प्रतिसंदाय या प्रत्यावर्तन करे या अभिदाय खर्चों का प्रतिकर या भुगतान ऐसी सीमा तक करे जैसी कि रजिस्ट्रार न्यायसंगत तथा साम्यिक् समझेंः
परन्तु इस धारा के अधीन कोई भी आदेश तब तक नही दिया जाएगा जब तक कि संबंधित व्यक्ति को उस मामले में सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया जायः
परन्तु यह और भी कि मृतक के किसी विधिक प्रतिनिधि का दायित्व मृतक की उस सम्पत्ति, जो कि ऐसे विधिक प्रतिनिधि के हाथ में आई हो, की सीमा तक ही होगा.
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धारा 77. छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी अधिकरण
उप-धारा ( 14) अधिकरण स्वप्रेरणा से या किसी पक्षकार का आवेदन पत्र प्राप्त होने पर किसी ऐसी कार्यवाही के, जिसमें कि कोई अपील उसको न होती हो, अभिलेख में किए गए किसी विनिश्चिय या पारित किए गए किसी आदेश की वैधता या औचित्य के बारे में स्वयं का समाधान करने के प्रयोजन से मंगा करेगा तथा उसकी परीक्षा कर सकेगा, यदि किसी मामले में अधिकरण को यह प्रतीत हो कि कोई ऐसा विनिश्चय या आदेश उपान्तरित किया जाना चाहिए , तो अधिकरण उस पर ऐसा आदेश पारित कर सकेगा, जैसा कि वह न्याय संगत समझे ।
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736( 15) धारा 78. रजिस्ट्रार तथा अधिकरण के समक्ष अपीलें
उप-धारा (1 ) जहां इसके संबंध में अन्यथा उपबंधित है को छोड़कर, इस अधिनियम या इसके अधीन बनाये गये नियमों के अधीन पारित किये गये प्रत्येक मूल आदेश की अपीलः-
(क) रजिस्ट्रार को तब होगी जबकि ऐसा आदेश रजिस्ट्रार के अधीनस्थ किसी ऐसे अधिकारी , जो अपर रजिस्ट्रार या संयुक्त रजिस्ट्रार से भिन्न हो, के द्वारा पारित किया गया हो, चाहे ऐसा आदेश पारित करने वाला अधिकारी रजिस्ट्रार की शक्तियों से निहित हो या न हो;
(ख) अधिकरण को तब होगी जबकि ऐसा आदेश रजिस्ट्रार, अपर रजिस्ट्रार या संयुक्त रजिस्ट्रार द्वारा पारित किया गया हो ।
उप-धारा (2) प्रथम अपील में रजिस्ट्रार द्वारा पारित किये गये किसी आदेश के विरूद्व द्वितीय अपील अधिकरण को मात्र निम्नलिखित आधारों में से किसी आधार पर होगी, अर्थात्ः-
(एक) यह कि आदेश विधि के प्रतिकूल है; या
(दो) यह कि आदेश में विधि के कतिपय तात्विक विवाद्यक का अवधारण नहीं हो पाया है; या
(तीन) यह कि इस अधिनियम द्वारा यथाविहित प्रक्रिया में ऐसी सारवान गलती या त्रुटि हुई है जिससे कि गुणागुण पर मामले का विनिश्चय करने में गलती या त्रुटि हो सकती है ।
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धारा 87. रजिस्ट्रार तथा अन्य अधिकारी आदि, लोक सेवक होंगे
ऐसा प्रत्येक अधिकारी या व्यक्ति तथा साथ ही किसी सहकारी बैंक या किसी सहकारी सोसाइटी का प्रत्येक कर्मचारी या प्रत्येक प्राधिकारी जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाये गये नियमों, उपविधियों के अधीन की शक्तियों का प्रयोग कर रहा हो या उन शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत हो, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का सं. 45) की धारा 21 के अर्थ के अन्तर्गत लोक सेवक समझा जायगा.
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चन्द्रशेखर गंगराडे
प्रमुख सचिव
छत्तीसगढ़ विधानसभा संचालक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री , छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय , रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित 2020 .