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छत्तीसगढ शासन
पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़/ दुर्ग/ 09 / 2013-2015 . "
सत्यमेव जयते
"बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान (बिना डाक टिकट) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22- छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई. दिनांक 30-05-2001 ."
छत्तीसगढ़ राजपत्र
(असाधारण)
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 375 ]
रायपुर, बुधवार , दिनांक 26 अगस्त 2020- -भाद्रपद 4 , शक 1942
छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय
रायपुर, बुधवार , दिनांक 26 अगस्त 2020 (भाद्रपद 4, 1942)
क्रमांक-9646/ वि.स./विधान/ 2020. छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2020 (क्रमांक 26 सन् 2020) जो बुधवार , दिनांक 26 अगस्त, 2020 को पुरःस्थापित हुआ है, को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।
हस्ता./-
(चन्द्र शेखर गंगराड़े ) प्रमुख सचिव.
749 750
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 26 अगस्त 2020
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्रमांक 26 सन् 2020)
छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2020
छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर अधिनियम , 2017 (क्र. 7 सन् 2017) को और संशोधित करने हेतु विधेयक ।
भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधानमंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
1.
संक्षिप्त नाम तथा प्रारंभ.
(1) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर (संशोधन) अधिनियम , 2020 कहलायेगा ।
(2) यह ऐसी तारीख से प्रवृत्त होगा, जिसे राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा , नियत करे : परंतु इस अधिनियम के भिन्न भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और ऐसे किसी उपबंध में इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जायेगा कि वह उस उपबंध के प्रवृत्त होने के प्रति निर्देश है ।
धारा 2 का संशोधन.
2. छत्तीसगढ़ माल एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 (क्र. 7 सन् 2017) (जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है ) , मूल अधिनियम की धारा 2 के खण्ड (114 ) के उप - खण्ड (ग ) एवं (घ ) के स्थान पर , निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्ः- " (ग) दादरा और नागर हवेली तथा दमन और दीव ;
(घ) लद्दाख; " छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 26 अगस्त 2020
750(1)
धारा 10 का संशोधन.
3. मूल अधिनियम की धारा 10 की उपधारा (2) के खंड (ख) , ( ग ) तथा ( घ ) में , शब्द " माल " के पश्चात्, शब्द " या सेवाओं " अंतःस्थापित किया जाये ।
धारा 16 का संशोधन.
4. मूल अधिनियम की धारा 16 की उपधारा (4 ) में , शब्द " से संबंधित बीजक" का लोप किया जाये ।
धारा 29 का संशोधन.
5. मूल अधिनियम की धारा 29 की उपधारा (1 ) के खंड (ग ) के स्थान पर , निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्ः-
" (ग ) कराधेय व्यक्ति, धारा 22 या धारा 24 के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए अब दायी न रहा हो या धारा 25 की उपधारा (3 ) के अधीन स्वेच्छ्या रजिस्ट्रीकरण का त्याग करना चाहता हो । "
धारा 30 का संशोधन.
6. मूल अधिनियम की धारा 30 की उपधारा ( 1 ) के पश्चात्, निम्नलिखित अन्तःस्थापित किया जाये , अर्थात्ः-
"परंतु ऐसी अवधि, पर्याप्त कारण दर्शाने पर और कारणों को लेखबद्ध करते हुए, -
(क) यथास्थिति, अपर आयुक्त या संयुक्त आयुक्त के द्वारा , तीस दिवस से अनधिक अवधि के लिये;
(ख) आयुक्त द्वारा , खण्ड (क) में विनिर्दिष्ट अवधि से परे, आगे तीस दिवस से अनधिक अवधि के लिये ,
बढ़ायी जा सकेगी । "
धारा 31 का संशोधन.
7. मूल अधिनियम की धारा 31 की उपधारा (2 ) के परंतुक के स्थान पर , निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये; अर्थात्ः-
" परंतु सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा, -
(क) ऐसे समय में और ऐसी रीति में, जो कि विहित की जाये, सेवाओं या प्रदाय के प्रवर्गों को, जिनके संबंध में 750 ( 2)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 26 अगस्त 2020
कर बीजक जारी किया जायेगा , विनिर्दिष्ट कर सकेगी;
(ख) उसमें यथा उल्लिखित शर्तों के अध्यधीन , सेवाओं के प्रवर्गों को विनिर्दिष्ट कर सकेगी, जिनके संबंध में- (एक) प्रदाय के संबंध में जारी किया गया कोई अन्य दस्तावेज, कर बीजक समझा जायेगा; या (दो) कर बीजक जारी किया जाना अपेक्षित न हो । " 8. मूल अधिनियम की धारा 51 में,-
धारा 51 का संशोधन.
(क) उपधारा (3 ) के स्थान पर , निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्: - " (3 ) ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में , जो कि विहित की जाये , स्त्रोत पर की गई कर कटौती का प्रमाणपत्र जारी किया जायेगा । "
(ख) उपधारा (4 ) का लोप किया जाये ।
धारा 122 का संशोधन.
9. मूल अधिनियम की धारा 122 की उपधारा (1 ) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाये, अर्थात्ः- " (1 क) कोई व्यक्ति, जो उपधारा (1 ) के खंड (i ) , (ii), (vii) या खंड (ix) के अधीन आने वाले संव्यवहार से हुए लाभ का प्रतिधारण करता है और जिसके निर्देश पर ऐसा संव्यवहार हुआ है, अपवंचित कर या लिए गए या अग्रेषित इनपुट कर प्रत्यय के समतुल्य राशि की शास्ति का दायी होगा । " 10. मूल अधिनियम की धारा 132 की उपधारा (1 ) में, -
धारा 132 का संशोधन.
(एक) शब्द "जो निम्नलिखित में से किसी दंड को कारित करता है" के स्थान पर, शब्द "जो निम्नलिखित में से किसी अपराध को कारित करता है या कारित करवाता है और उससे छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 26 अगस्त 2020
750(3) उत्पन्न लाभ का प्रतिधारण करता है " प्रतिस्थापित किया जाये;
(दो) खंड (ग) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्ः-
"(ग) खंड (ख ) में निर्दिष्ट ऐसे बीजक या बिल का उपयोग करके इनपुट कर प्रत्यय प्राप्त करता है या कपटपूर्वक, बिना किसी बीजक या बिल के, इनपुट कर प्रत्यय प्राप्त करता है; "
(तीन) खंड (ङ) में, चिन्ह एवं शब्द " , कपट से इनपुट कर प्रत्यय की प्राप्ति " का लोप किया जाये ।
11. मूल अधिनियम की धारा 140 में,-
धारा 140 का संशोधन.
(क) उपधारा (1 ) में, शब्द " ऐसी रीति में " के पूर्व , शब्द " ऐसे समय में और " अंतःस्थापित किया जाये;
(ख ) उपधारा (2 ) में , शब्द " ऐसी रीति में " के पूर्व , शब्द " ऐसे समय में और " अंतःस्थापित किया जाये ;
(ग) उपधारा (3) में, शब्द " नियत दिन को " के पश्चात्, शब्द " ऐसे समय में और ऐसी रीति में, जो कि विहित की जाये, " अंतःस्थापित किया जाये;
(घ) उपधारा (5 ) में , शब्द " विद्यमान विधि के अधीन " के पश्चात्, शब्द " ऐसे समय में और ऐसी रीति में, जो कि विहित है, " अंतःस्थापित किया जाये ;
(ङ) उपधारा (6) में, शब्द " मूल्य संवर्धित कर का प्रत्यय " के पूर्व, शब्द "ऐसे समय में और ऐसी रीति में, जो कि विहित की जाये," अंतःस्थापित किया जाये ;
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750(4)
(च) उपधारा (7) में, शब्द " ऐसी रीति में " के पूर्व, शब्द " ऐसे समय में और" अंतःस्थापित किया जाये ।
जो कि जुलाई , 2017 के प्रथम दिवस से प्रभावी होगा ।
नवीन धारा 168क का अन्तस्थापन .
12. मूल अधिनियम की धारा 168 के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाये , अर्थात्ः-
" 168क. विशेष परिस्थितियों में समय सीमा में विस्तार करने की सरकार की शक्ति.- (1 ) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , सरकार , परिषद् की सिफारिशों पर , अधिसूचना द्वारा , ऐसे कार्य , जो प्राकृतिक आपदा के कारण पूरे नहीं हो सके हों या जिनका अनुपालन नहीं किया जा सका हो, के संबंध में इस अधिनियम में विनिर्दिष्ट या विहित या अधिसूचित समय - सीमा को बढ़ा सकेगी ।
(2) उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना जारी करने की शक्ति में , ऐसी अधिसूचना को भूतलक्षी प्रभाव देने की शक्ति, ऐसी तारीख से सम्मिलित होगी , जो इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तारीख से पूर्ववर्ती नहीं होगी ।
स्पष्टीकरण.- इस धारा के प्रयोजनों के लिए , शब्द "प्राकृतिक आपदा " से आशय है युद्ध, महामारी , बाढ़ , सूखा, आग , चक्रवात, भूकंप या कोई अन्य आपदा, जो प्राकृतिक या अन्य कारणों से उत्पन्न हो, जो इस अधिनियम के किन्हीं प्रावधानों के क्रियान्वयन को प्रभावित करती हो । " 750 ( 5)
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धारा 172 का संशोधन.
13. मूल अधिनियम की धारा 172 की उपधारा ( 1 ) के परंतुक में , शब्द "तीन वर्ष " के स्थान पर, शब्द " पांच वर्ष " प्रतिस्थापित किया जाये ।
अनुसूची 2 का संशोधन.
14. मूल अधिनियम की अनुसूची 2 के पैरा 4 में, जहां कहीं भी शब्द " भले ही प्रतिफल के बदले हो या नहीं " आये हों का लोप किया जाये, जो कि जुलाई , 2017 के प्रथम दिवस से प्रभावी होगा । 750( 6)
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उद्देश्यों और कारणों का कथन
यतः छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 को राज्य सरकार द्वारा माल या सेवा या दोनो के प्रदाय पर कर के उद्ग्रहण और संग्रहण करने हेतु उपबंध करने के विचार से अधिनियमित किया गया था ।
2. यतः माल और सेवा कर अधिनियम लागू होने के पश्चात् नई कर प्रणाली में कुछ कठिनाईयां सामने आयी हैं । इन कठिनाईयों को दूर करने हेतु अधिनियम के प्रावधानों को और स्पष्ट करने तथा करदाताओं को सुविधा प्रदान करने के साथ - साथ राजस्व सुरक्षित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 को संशोधित किए जाने का प्रस्ताव है ।
3. और यतः प्रस्तावित छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2020 में, अन्य बातों के साथ , निम्नलिखित के लिए उपबंध है, अर्थात्:-
(i ) धारा 10 (2) के प्रावधानों को धारा 10 (2 क) में वर्णित कम्पोजीशन स्कीम से सुसंगत बनाने हेतु धारा 10 की उपधारा (2) में कतिपय शब्दों का अंतःस्थापन;
(ii ) डेबिट नोट्स पर इनपुट कर प्रत्यय स्वीकार करने के लिए धारा 16 की उपधारा (4) में कतिपय शब्दों का विलोपन;
(iii ) स्वेच्छया रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करने वाले व्यक्ति को रजिस्ट्रीकरण रद्द करवाने में सक्षम बनाने हेतु धारा 29 की उपधारा (1 ) में खण्ड (ग) का प्रतिस्थापन;
( iv ) रजिस्ट्रीकरण के प्रतिसंहरण के लिए आवेदन की समय - सीमा में विस्तार हेतु आयुक्त और अपर आयुक्त को सशक्त करने हेतु धारा 30 की उपधारा (1 ) में परंतुक का प्रतिस्थापन;
(v ) धारा 31 (2 ) को धारा 31 (1 ) से सुसंगत बनाने के लिए धारा 31 की उपधारा (2) में परंतुक का प्रतिस्थापन;
( vi ) सिस्टम जनरेटेड टीडीएस प्रमाण पत्र जारी करने तथा जारीकर्ता अधिकारी के लिए विलंब शुल्क की अनिवार्यता को समाप्त करने के लिए धारा 51 की उपधारा (3 ) का प्रतिस्थापन एवं उपधारा (4 ) का विलोपन;
( vii ) कपटपूर्वक किए गए संव्यवहार से लाभ प्राप्त करने वाले वास्तविक व्यक्ति पर शास्ति आरोपित करने के पूर्व धारा 122 में उपधारा (1 क) का अंतःस्थापन;
(viii) बोगस इनपुट प्रत्यय प्राप्त करने वाले व्यक्ति के साथ मास्टर माइंड को भी शास्ति का दायी बनाने के लिए धारा 132 की उपधारा (1 ) में खण्ड (ग) का प्रतिस्थापन;
(ix ) संक्रमणकालीन इनपुट कर प्रत्यय के संबंध में समय- सीमा का प्रावधान करने के उद्देश्य से धारा 140 में कतिपय शब्दों का अंतःस्थापन;
(x ) वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण उत्पन्न हुई असामान्य परिस्थितियों के कारण अधिनियम के प्रावधानों की समय - सीमा में विस्तार के लिए सरकार को सशक्त करने हेतु नवीन धारा 168 क का अंतःस्थापन;
4. अतएव , उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति को दृष्टिगत रखते हुये , राज्य सरकार ने, छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (क्रं. 7 सन् 2017) में संशोधन करने का विनिश्चय किया है ।
अतः यह विधेयक प्रस्तुत है ।
टी.एस. सिंहदेव
रायपुर,
दिनांक 22 अगस्त, 2020
वाणिज्यिक कर (जीएसटी) मंत्री, (भारसाधक सदस्य) छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 26 अगस्त 2020
750 (7) " संविधान के अनुच्छेद 207 (1) के अधीन राज्यपाल द्वारा अनुशंसित "
प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में ज्ञापन
छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक , 2020 के खंड 7, 8 , 11 में विधायनी शक्ति के प्रत्यायोजन की संस्थापनाएं हैं, जो सामान्य स्वरूप की हैं । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 26 अगस्त 2020
750 (8)
उपाबंध
छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (क्रमांक 7 सन् 2017 ) की धारा- 2 , 10 , 16 , 29 , 30 , 31 , 51 , 122, 132 , 140 , 168 , 172 एवं अनुसूची 2 के सुसंगत उद्धरण
धारा
(114) "संघ राज्यक्षेत्र" से अभिप्रेत है,--
धारा 2 का खंड ( 114)
(क) अंडमान और निकोबार द्वीप ;
(ख) लक्षद्वीप ;
(ग) दादरा और नागर हवेली
(घ) दमन और दीव ;
(ङ) चंडीगढ़ ; और
(च) अन्य राज्यक्षेत्र,
का राज्यक्षेत्र;
(2) रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, उपधारा ( 1 ) के अधीन विकल्प चुनने का पात्र होगा, यदि, --
धारा 10 की उपधारा (2) के खंड ( ख ) , (ग) एवं (घ)
(ख) वह ऐसे किसी माल का प्रदाय करने में नहीं लगा हुआ है , जिस पर इस अधिनियम के अधीन कर उद्ग्रहणीय नहीं है ;
(ग) वह माल के किसी अन्तर्राज्यिक जावक प्रदाय करने में नहीं लगा है ;
(घ) वह किसी ऐसे इलैक्ट्रानिक वाणिज्य प्रचालक के माध्यम से , जिससे धारा 52के अधीन स्रोत पर कर के संग्रहण की अपेक्षा है , किसी माल का प्रदाय करने में नहीं लगा है ;
धारा 16 की उपधारा (4)
(4) कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, उस वित्तीय वर्ष के, जिससे ऐसा बीजक या ऐसे नामे नोट से संबंधित बीजक संबंधित है , अंत के अगले सितंबर मास के लिए धारा 39 के अधीन विवरणी के दिए जाने की देय तारीख या सुसंगत वार्षिक विवरणी देने के लिए, इनमें से जो भी पूर्वतर हो , के पश्चात् माल या सेवाओं या दोनों के प्रदाय के लिए किसी बीजक या नामे नोट के संबंध में, इनपुट कर प्रत्यय लेने का हकदार नहीं होगा ।
धारा 29 की उपधारा (1) का खंड (ग)
(ग) धारा 25 की उपधारा ( 3 ) के अधीन रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति से भिन्न कराधेय व्यक्ति, धारा 22 या धारा 24 के अधीन इससे अधिक रजिस्ट्रीकरण के लिए दायी नहीं होगा " :"
धारा 30 की उपधारा (1)
( 1 ) ऐसी शर्तों , जो विहित की जाएं , के अध्यधीन रहते हुए , कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जिसका रजिस्ट्रीकरण समुचित अधिकारी द्वारा स्वयं के प्रस्ताव पर रद्द किया जाता है, रद्दकरण आदेश की तामील की तारीख से तीस दिन के भीतर ऐसे अधिकारी को विहित रीति से रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण के प्रतिसंहरण के लिए आवेदन कर सकेगा । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 26 अगस्त 2020
750( 9) धारा 31 की उपधारा (2 ) ( 2) कराधेय सेवाओं की प्रदाय करने वाला रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति सेवाओं के उपबंध के पूर्व या पश्चात् किन्तु विहित अवधि के भीतर वर्णन, परिमाप और मालों के मूल्य, उस पर भारित कर और ऐसी अन्य विशिष्टियां जो विहित की जाएं, दर्शाने वाला कर बीजक जारी करेगा:
परंतु सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर , अधिसूचना द्वारा और उसमें यथा उल्लिखित शर्तों के अध्यधीन रहते हुए संगठनों के प्रवर्गों को विनिर्दिष्ट करेगी, जिनके संबंध में-
(क) प्रदाय के संबंध में जारी किया गया कोई अन्य दस्तावेज कर बीजक समझा जाएगा; या
(ख) कर बीजक जारी किया जाना अपेक्षित नहीं हो ।
धारा 51 की उपधारा (3) व (4)
(3 ) कटौतीकर्ता , जिससे कटौती की गई है , को संविदा मूल्य , कटौती की दर , कटौती की गई रकम , सरकार को संदत्त रकम और ऐसी अन्य विशिष्टियों को ऐसी रीति में , जो विहित की जाए , वर्णित करते हुए एक प्रमाणपत्र प्रस्तुत करेगा 1
(4) यदि कोई कटौतीकर्ता , जिससे कटौती की गई है, को स्रोत पर कर की कटौती करने के पश्चात् सरकार के लिए इस प्रकार कटौती की गई रकम का प्रत्यय करने के पांच दिन के भीतर प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने में असफल रहता है तो कटौतीकर्ता विलंब फीस के माध्यम से ऐसी पांच दिन की कालावधि के अवसान के पश्चात् प्रत्येक दिन के लिए जब तक कि ऐसी असफलता को ठीक नहीं कर लिया जाता है, पांच हजार रूपए की अधिकतम रकम के अध्यधीन रहते हुए सौ रूपए की राशि का संदाय करेगा ।
(1 ) किसी बीजक के जारी किए बिना किसी माल या सेवा या दोनों का प्रदाय करता है या ऐसे किसी प्रदाय के लिए झूठा या गलत बीजक जारी करता है ;
धारा 122 की उपधारा (1)
) जो निम्नलिखित में से किसी दंड को कारित करता है , अर्थात्: --
(1 (ग) खंड (ख) में निर्दिष्ट ऐसे बीजक या बिल को उपयोग करके इनपुट कर प्रत्यय को प्राप्त करता है;
धारा 132 की उपधारा (1 ) का खंड (ग) एवं (ड.)
(ङ) कर अपवंचन, कपट से इनपुट कर प्रत्यय की प्राप्ति या कपट से वापसी प्राप्त करना और जहां ऐसा अपराध खंड (क) से ( घ) में नहीं आता;
धारा 140 की उपधारा (1 ) , (2) , (3. ) (5) , (6 ) एवं (7)
(1 ) धारा 10 के अधीन कर संदाय का विकल्प देने वाले किसी व्यक्ति से भिन्न कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, विद्यमान विधि के अधीन उसके द्वारा प्रस्तुत किए जाने हेतु, नियत दिन से ठीक पूर्ववर्ती अवधि से संबंधित, विवरणी में अग्रनीत मूल्य संवर्धित कर के प्रत्यय की रकम , यदि कोई हो, को ऐसी रीति में, जो विहित की जाए , अपने इलैक्ट्रोनिक जमा खाते में लेने का हकदार होगाः
(2) धारा 10 के अधीन संदेय कर का विकल्प देने वाले व्यक्ति से भिन्न कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, नियत दिन के तत्काल पूर्ववर्ती दिन को समाप्त अवधि के लिए पूंजी माल के संबंध में अनुपभुक्त इनपुट कर प्रत्यय की जमा , ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, अपने इलैक्ट्रोनिक जमा खाते में लेने का हकदार होगा, जो उसके द्वारा विद्यमान विधि के अधीन प्रस्तुत विवरणी में अग्रनीत नहीं की गई है :
(3) कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति जो विद्यमान विधि के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए दायी नहीं था या जो किसी विद्रद्यमान विधि के अधीन छूट प्राप्त माल या कर मुक्त मालों, चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हों , या ऐसे मालों , जिन पर राज्य छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 26 अगस्त 2020
750( 10)
में उनके विक्रय के प्रथम बिन्दु पर कर लगाया गया है और जिनके पश्चातवर्ती विक्रय विधमान विधि के अधीन राज्य में कर के अध्यधीन नहीं है, के विक्रय में लगा है , किंतु जो इस अधिनियम के अधीन कर के दायी हैं या जहां व्यक्त, मालों, यदि कोई हो , के विक्रय के समय इनपुट कर प्रत्यय के लिए हकदार था, अपने इलैक्ट्रोनिक जमा खातों में स्टॉक में धारित इनपुट और स्टाक में धारित अर्ध-निर्मित माल या निर्मित मालों में अंतर्विष्ट इनपुट के संबंध में नियत दिन को मूल्य संवर्धित कर , के प्रत्यय के लिए निम्नलिखित शर्तों के अधीन रहते हुए , हकदार होगा , अर्थात्:--
(5) कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति नियत दिन को या उसके पश्चात् प्राप्त इनपुट के सबंध में अपने इलैक्ट्रोनिक जमा खाते में मूल्य संवर्धित कर , यदि कोई हो , की जमा को लेने का हकदार होगा, किंतु जिसके संबंध में कर का संदाय विद्यमान विधि के अधीन प्रदाता द्वारा किया गया है, इस शर्त के अधीन रहते हुए कि उसके बीजक या किसी अन्य कर संदाय संबंधी दस्तावेज को, नियत दिन से तीस दिन की अवधि के भीतर ऐसे व्यक्ति की लेखा बहियों में लेखबद्ध किया गया था :
(6) कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति जो विद्यमान विधि के अधीन या तो किसी नियत दर पर कर का संदाय करता था या संदाय योग्य कर के बदले में नियत रकम का संदाय करता था, निम्नलिखित शर्तों के अधीन रहते हुए नियत दिन को अपने स्टाक में धारित इनपुट , स्टाक में धारित अर्ध- निर्मित या निर्मित मालों में अंतर्विष्ट इनपुट के संबंध में मूल्य संवर्धित कर का प्रत्यय अपने इलैक्ट्रोनिक प्रत्यय खाते में लेने का हकदार होगा, अर्थात्:--
(7) उपधारा (3 ) , उपधारा (4 ) और उपधारा ( 6) के अधीन प्रत्यय की रकम ऐसी रीति में प्रगणित होगी, जो विहित की जाए ।
धारा 168
आयुक्त, यदि इस अधिनियम के कार्यान्वयन में समरूपता के प्रयोजन के लिए ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझे , राज्य कर अधिकारियों को जो उचित समझे ऐसा आदेश , अनुदेश या निदेश जारी कर सकेगा और इस अधिनियम के कार्यान्वयन में नियोजित सभी ऐसे अधिकारी और सभी अन्य व्यक्ति ऐसे आदेशों, अनुदेशों या निदेशों का संप्रेक्षण और पालन करेंगे ।
धारा 172 की उपधारा (1)
(1 ) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो सरकार परिषद् की सिफारिशों पर , किसी साधारण या किसी विशेष आदेश शासकीय राजपत्र में प्रकाशित कर , ऐसे उपबंध कर सकेगी , जो इस अधिनियम के उपबंधों या उसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों से असंगत न हो और जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत होः
परंतु ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से तीन वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा ।
(4) कारबार आस्तियों का अंतरण--
अनुसूची 2 के पैरा (4)
का पद (क)
(क) जहां माल जो कारबार की संपत्ति का भाग है , को व्यक्ति जो कारबार चला रहा है के निदेशों के अधीन या द्वारा अंतरित या व्ययनित किया जा रहा है जिससे कि वह उन आस्तियों का और हिस्सा न रहें; भले ही प्रतिफल के बदले हो या नहीं , ऐसा अंतरण या व्ययन , व्यक्तिद्वारा माल का प्रदाय है;
चन्द्र शेखर गंगराड़े प्रमुख सचिव छत्तीसगढ़ विधान सभा संचालक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री , छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय , रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित - 2020 .