सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर
अटल नगर, दिनांक 19 अक्टूबर 2020
अधिसूचना
क्रमांक एफ 4-4/2020/एक-6.⸺ इस विभाग के आदेश क्रमांक एफ 4-3/2020/एक-6, दिनांक 26-08-2020 द्वारा पुनर्गठित किए गए अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण में प्राधिकरण की निधि के उपयोग के लिए उक्त आदेश की कंडिका-7 के प्रावधानों के तहत राज्य सरकार एतद् द्वारा निम्नलिखित नियम बनाती है :-
1- संक्षिप्त नाम, प्रारंभ तथा विस्तार-
(1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण निधि नियम, 2020 होगा।
(2) ये नियम छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होंगे।
(3) इसका विस्तार सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा तक होगा।
2- परिभाषाएं-
इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) ''प्राधिकरण'' से अभिप्रेत राज्य सरकार द्वारा पुनर्गठित किया गया अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण से है। (ख) ''प्ररूप'' से अभिप्रेत है, वे प्रपत्र जिनमें विकास कार्यों का विवरण एवं इस पर व्यय की जाने वाली राशि आदि का अभिलेख उल्लेखित हो।
(ग) ''निधि'' से अभिपे्रत है, प्राधिकरण को आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के बजट से प्रतिवर्ष मांग संख्या-64, अनुसूचित जाति उपयोजना-0103, 5631-अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण, लेखा शीर्ष-4225, #45-पूंजीगत परिसम्पत्तियों का निर्माण, 001 पूंजीगत परिसम्पत्तियों का निर्माण एवं लेखा शीर्ष-2225 #14-सहायक अनुदान, 012-अन्य अनुदान अंतर्गत उपलब्ध कराई जाने वाली राशि जिससे प्राधिकरण अपने उद्देश्यों की पूर्ति कर सके।
3- निर्णयों का क्रियान्वयन-
(1) माननीय सदस्यों/क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के मांग के अनुरूप तात्कालिक महत्व के छोटे-छोटे कार्यो के लिए राशि प्राधिकरण/प्राधिकरण के अध्यक्ष की स्वीकृति की संसूचना प्रेषित करते हुए प्राधिकरण के सदस्य सचिव के द्वारा संबंधित जिला कलेक्टर्स को अवगत कराया जाएगा। (2) सदस्य सचिव से प्राप्त वित्तीय स्वीकृति के आधार पर कलेक्टर्स द्वारा नियत की गई निर्माण एजेंसी प्ररूप-क में विकास कार्यों का विवरण, कार्यस्थल में अनुसूचित जाति की जनसंख्या का हवाला देते हुए, तकनीकी स्वीकृति के साथ संबंधित जिला कलेक्टर्स को प्रस्तुत किया जाएगा।
(3) निर्माण एजेंसी के द्वारा प्ररूप-क में प्रस्तावमय आवश्यक दस्तावेज, ड्राईंग, साईट प्लान, भौतिक सीमा चिन्ह, नक्शा व खसरा (पांच साल) सहित जिला कलेक्टर को प्र्रस्तुत करेगा।
(4) जिला कलेक्टर निर्माण एजेंसी के द्वारा प्रस्तुत प्ररूप-क एवं संलग्न आवश्यक दस्तावेजों का पूर्ण परीक्षण करते हुए प्रमाण पत्र जारी करेगा, इसमें कार्य की सक्षमता अनुसार प्रशासनिक स्वीकृति भी सम्मिलित होगी। (5) कलेक्टर को एक करोड़ रुपये तक के कार्यो की प्रशासनिक स्वीकृति जारी करने का अधिकार होगा, इसके ऊपर की राशि संबंधित विभाग द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति जारी की जाएगी।
(6) स्वीकृत कार्यो के लिए प्ररूप-क एवं प्रशासकीय स्वीकृतियों का संधारण जिला स्तर पर जिला कलेक्टर एक सेल बनाकर करेंगे।
4- विकास प्राधिकरण के अंतर्गत लिये जाने वाले कार्य-
प्राधिकरण के अंतर्गत सघन अनुसूचित जाति जनसंख्या वाले गांवों/ बस्तियों/पारा/ मोहल्लों के बुनियादी विकास के लिए सभी आवश्यक कार्य लिये जा सकेंगे, जो प्राधिकरण के उद्देश्यों की पूर्ति करते हो। प्राधिकरण अंतर्गत प्राथमिकता में लिए जाने वाले कार्यो का विवरण निम्नानुसार है :-
(1) प्राधिकरण के अंतर्गत सघन अनुसूचित जाति जनसंख्या वाले गांवों/बस्तियों का क्षेत्रीय तथा ढॉंचागत विकास। (2) परिवार मूलक आर्थिक विकास कार्यक्रमों का संचालन जिससे रोजगार के नये अवसर सृजित हो तथा आर्थिक स्तर में गुणात्मक सुधार हो।
(3) आर्थिक विकास के लिए अल्पकालिक तथा दीर्घकालिक योजनाओं का संचालन।
(4) सामाजिक तथा सांस्कृतिक उन्नयन से संबंधित कार्यक्रम।
(5) स्वास्थ्य सेवाएं- अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र/अनुसूचित जाति हितग्राहियों का पोषण (व्यक्तिगत एवं सामुदायिक), एम्बुलेंस क्रय, दवाईयों का क्रय, एम्बुलेंस के परिचालन एवं रख-रखाव का कार्य, अस्पताल में रखे उपयोगी उपकरण/मशीनों का रख-रखाव, स्वास्थ्य भवन मरम्मत/रख-रखाव, अस्पताल हेतु फर्नीचर क्रय, फर्नीचर मरम्मत, अस्पताल की सफाई व्यवस्था।
(6) शिक्षा- अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र की संस्थाओं में अतिरिक्त कक्ष निर्माण, शाला भवनों का रख-रखाव, फर्नीचर एवं अन्य उपकरणों का क्रय/रख-रखाव/लैब उपकरणों का क्रय, खेल-सामग्री का क्रय, पुस्तक क्रय, अनुसूचित जाति छात्रावासों/आश्रमों का रख-रखाव/समस्त आवश्यक सामग्रियों का क्रय, कम्प्यूटर क्रय एवं रख-रखाव, ई-लर्निंग हेतु व्यवस्था/विशेषज्ञ शिक्षकों के संविदा वेतन का भुगतान।
(7) अनुसूचित जाति बस्ती/पारा/मोहल्ला में पेय जल व्यवस्था।
(8) अनुसूचित जाति बस्ती/पारा/मोहल्ला में जल संरक्षण-लघु एवं सूक्ष्म सिंचाई योजनाएं/परंपरागत जल स्त्रोतों का संरक्षण।
(9) पशु सेवाएं- अनुसूचित जाति हितग्राहियों के पशुधन के लिए चारा उत्पादन, पशुओं का टीकाकरण/गोबर खाद निर्माण/नस्ल सुधार कार्यक्रम/कांजी हाउस निर्माण/ रख-रखाव।
(10) अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्रों में जैविक खाद का उत्पादन एवं उपयोग को बढ़ावा।
(11) अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्रों शासकीय शालाओं एवं अन्य भवनों में शौचालय निर्माण एवं जीर्णोद्धार, रखरखाव। (12) गरीबी उन्मूलन(आय वृद्धि)- हितग्राही एवं स्वरोजगार मूलक योजनाओं का क्रियान्वयन।
(13) कौशल उन्नयन- (अन्य योजनाओं में राशि अनुपलब्धता की स्थिति में)
(14) अनुसूचित जाति हितग्राहियों/कृषकाें के लिए सौर उपकरणों का क्रय (व्यक्तिगत/सामुदायिक)।
(15) अनुसूचित जाति की सामाजिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों का रख-रखाव, जीर्णोद्धार, आवश्यक विकास कार्य।
इसके अतिरिक्त भी यदि स्थानीय अनुसूचित जाति समुदाय की मांग अनुसार अन्य कार्य लिया जाना हो तो उसका अनुमोदन शासन से कराया जा सकता है। किसी भी एक कार्य में व्यय की अधिकतम सीमा रुपये 10 लाख होगी। यदि कोई ऐसा अत्यावश्यक कार्य हो, जिसकी लागत रुपये 10 लाख से अधिक हो तो उसकी पूर्व अनुमति शासन से अनिवार्य रूप से प्राप्त की जाये। ऐसे कार्य जो किसी धर्म विशेष के प्रोत्साहन अथवा प्रचार में सहायक होते हैं, को प्राधिकरण द्वारा प्रश्रय नहीं दिया जाएगा।
5- प्राधिकरण की निधि के लिए बजट का प्रावधान-
आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा प्राधिकरण के लिए बजट का प्रावधान मांग संख्या-64 केे अंतर्गत किया जाएगा। आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास प्रावधानित बजट को संभागीय आयुक्त, दुर्ग के विकल्प पर पुनराबंटित करेंगे।
6- अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष कार्यालय के लिए राशि का प्रावधान-
प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के वेतन भत्ते, कार्यालयीन एवं अन्य प्रासंगिक व्यय की पूर्ति के लिए बजट का प्रावधान आदिम जाति तथा अनु0जाति विकास विभाग के बजट से किया जावेगा। आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास प्रावधानित बजट संभागीय आयुक्त, दुर्ग के विकल्प पर पुनराबंटित करेंगे। 7- निधि से स्वीकृति जारी करना-
(1) प्राधिकरण/प्राधिकरण के अध्यक्ष के द्वारा अनुमोदित प्रस्तावों के लिए, अनुमोदन के अनुरूप, राशि जारी करने की स्वीकृति, सदस्य सचिव, प्राधिकरण द्वारा जारी किया जाएगा। जिसके आधार पर आयुक्त, दुर्ग संभाग के कार्यालय में गठित ''प्राधिकरण प्रकोष्ठ'' की लेखा शाखा के द्वारा संबंधित कलेक्टर्स को राशि पुनराबंटित की जावेगी।
(2) कलेक्टर द्वारा यथायोग्य दो अथवा तीन किश्तों में कार्यो की प्रगति के अनुसार राशि क्रियान्वयन एजेंसी को उपलब्ध कराई जाएगी।
(3) कार्य की समाप्ति उपरांत उपयोगिता प्रमाण पत्र कलेक्टर द्वारा आयुक्त, दुर्ग संभाग को प्रस्तुत किया जाएगा। जिसका संधारण प्राधिकरण के लिए गठित प्रकोष्ठ के द्वारा राज्य शासन एवं वित्त विभाग के निर्देशों के अनुरूप किया जाएगा।
8- कार्य निरीक्षण प्रतिवेदन-
संभागायुक्त नियमित रूप से स्वीकृत कार्यो का स्थल निरीक्षण करेंगे तथा प्रतिमाह के प्रथम सप्ताह में निर्धारित प्रपत्र में कार्यो की वित्तीय एवं भौतिक प्रगति की जानकारी सचिव, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास एवं सचिव, मुख्यमंत्री सचिवालय को उपलब्ध करायेंगे।
9- पर्यवेक्षण प्रभार से मुक्ति-
प्राधिकरण की निधि से स्वीकृत कार्य पर्यवेक्षण प्रभार से मुक्त रहेंगे। संबंधित निर्माण विभाग एवं क्रियान्वयन एजेंसी को केवल कार्यो की लागत के बराबर ही राशि का आबंटन किया जाएगा।
10- लेखा संधारण की रीति-
(1) समय-समय पर निधि में जमा तथा पुनराबंटन की स्वीकृति व्यय का लेखा प्राधिकरण द्वारा संधारित किया जायेगा।
(2) निधि से आबंटित राशि, व्यय एवं तत्संबंधी अन्य विषयों का लेखा, लेखा संधारण, संभागीय आयुक्त, दुर्ग के कार्यालय में गठित ''प्राधिकरण प्रकोष्ठ'' के लेखा शाखा एवं संबंधित जिला कलेक्टर कार्यालय में इस हेतु एक प्रभारी अधिकारी को नियुक्त कर, राज्य सरकार की राशि के लेखा संधारण की भांति किया जाएगा। 11- प्राधिकरण की निधि से तैयार आस्तियों का रख रखाव एवं संधारण-
प्राधिकरण की निधि से निर्मित आस्तियों का लेखा-जोखा संबंधित विभाग द्वारा संधारित किया जाएगा। इन आस्तियों के उपयोग एवं रख रखाव का उत्तरदायित्व भी संबंधित विभाग का होगा। विभाग इन आस्तियों को अपने ''बुक्स'' में लेंगे।
12- लेखाओं का पर्यवेक्षण, परीक्षण एवं अंकेक्षण-
(1) आयुक्त, दुर्ग संभाग के द्वारा लेखा विवरण का समय-समय पर पर्यवेक्षण, परीक्षण एवं निरीक्षण किया अथवा करवाया जाएगा।
(2) आयुक्त, दुर्ग संभाग एवं जिला कलेक्टर कार्यालयों में विकास प्राधिकरण की राशि से संपादित होने वाले कार्यो से संबंधित लेखाओं का अंकेक्षण, महालेखाकार के आडिट दल के द्वारा नियमानुसार किया जाएगा। (3) प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत कार्यो का मूल्यांकन/पर्यवेक्षण आंतरिक एवं बाह्य एजेंसी से करवाने का दायित्व जिला कलेक्टर का होगा।
(4) जिला स्तर पर पर्यवेक्षण हेतु पर्यवेक्षण दल का गठन भी किया जाएगा। मूल्यांकन प्रपत्रों को जिला स्तर पर रखा जाएगा। इन प्रतिवेदनों के आधार पर संबंधित जिला के कलेक्टर द्वारा पर्यवेक्षण/मूल्यांकन का त्रैमासिक प्रतिवेदन, संभागीय आयुक्त, दुर्ग को प्रेषित किया जाएगा। (5) वित्तीय वर्ष समाप्ति के पश्चात् प्राधिकरण से स्वीकृत कार्यो की सूचना अध्यक्ष प्राधिकरण द्वारा अर्द्धशासकीय पत्र के माध्यम से प्राधिकरण के सदस्यों को सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) के लिए दी जाएगी।
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
डी.डी.सिंह, सचिव.
प्ररूप-''क''
देखें नियम-3(2)
प्रति,
कलेक्टर, जिला-..................................
महोदय,
दिनांक..................................को अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण की बैठक में अध्यक्ष द्वारा लिये गये निर्णय के बिन्दु क्रमांक......................के अनुसार विकास कार्य .............................................................................को.................................................. .................. स्थल में क्रियान्वित करने के लिए ...............................................................विभाग को क्रियान्वयन एजेंसी नियुक्त किया गया है।
2. स्थल का निरीक्षण किया गया। यह कार्य जिन ग्रामों/बस्तियों/पारा/मोहल्लों में प्रस्तावित है, वहॉ अनुसूचित जाति की जनसंख्या 25 प्रतिशत से अधिक है। कार्यस्थल का पूर्ण परीक्षण कर कार्य के परिमाण का आंकलन विभाग द्वारा किया गया। इस आंकलन में कार्य से संबंधित तकनीकी प्रतिवेदन सक्षम अधिकारी द्वारा मान्य किया गया है। तकनीकी स्वीकृति क्रमांक......................................दिनांक.....................द्वारा सक्षम अधिकारी.................................................................... .....................................................................द्वारा दी गई है।
3. इस................................................................................................विकास कार्य को पूर्ण करने में......................................रूपये की लागत आना आंकलित है।
4. कृपया इस कार्य एवं राशि का प्रशासनिक अनुमोदन सक्षमता अनुसार जारी करने का कष्ट करें।
संलग्नः-तकनीकी प्रतिवेदन।
क्रियान्वयन एजेंसी का नाम.............................................. प्रस्तावक का नाम............................................................... पदनाम................................................................................... कार्यालय की मुद्रा
स्थान : दिनांक :