छत्तीसगढ़ शासन
पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़/दुर्ग/ 09/ 2013-2015 . " "बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान ( बिना डाक टिकट ) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22-छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई, दिनांक 30-05-2001 . "
सत्यमेव जयते
छत्तीसगढ़ राजपत्र
(असाधारण)
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 549 ]
रायपुर, मंगलवार, दिनांक 27 अक्टूबर 2020- •कार्तिक 5 , शक 1942
छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय
रायपुर, मंगलवार, दिनांक 27 अक्टूबर, 2020 (कार्तिक 5 , 1942)
क्रमांक-11126/वि.स./विधान/ 2020. छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी( संशोधन) विधेयक, 2020 (क्रमांक 29 सन् 2020 ) जो मंगलवार , दिनांक 27 अक्टूबर , 2020 को पुरःस्थापित हुआ है, कोजनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है.
हस्ता./- (चन्द्र शेखर गंगराड़े ) प्रमुख सचिव.
1097 1098
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 27 अक्टूबर 2020
छत्तीसगढ़ विधेयक (क्रमांक 29 सन् 2020)
छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक, 2020
विधेयक। छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1972 (क. 24 सन् 1973) को और संशोधित करने हेतु भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधान मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो:-
1. (1) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी (संशोधन) अधिनियम, 2020 कहलायेगा ।
संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारंभ.
इसका विस्तार संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में होगा । (2)
(3) यह दिनांक 5 जून, 2020 से भूतलक्षी प्रभाव से प्रवृत्त होगा ।
2.
धारा 2 का संशोधन.
छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी अधिनियम, 1972 (कः 24 सन् 1973 ) (जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है) की धारा 2 की उप- धारा (1) में,-
(एक) खण्ड (क) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्,-
"(क) "कृषि उपज" से अभिप्रेत है कृषि, उद्यान कृषि, पशु-पालन, मधुमक्खीपालन, मत्स्यपालन या वन संबंधी समस्त उत्पादन , चाहे वह प्रसंस्कृत या विनिर्मित हो या न हो, जो कि अनुसूची में विनिर्दिष्ट है;" :
(दो) खण्ड (छ) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्ः-
"(छ) "मण्डी/ डीम्ड मंडी से अभिप्रेत है धारा 4 के अधीन स्थापित की गई मण्डी/ डीम्ड मंडी;"
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धारा 4 का संशोधन 3. मूल अधिनियम की धारा 4 के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्ः-
"4. मण्डी/डीम्ड मंडी की स्थापना तथा उसमें अधिसूचित कृषि उपज के विपणन का विनियम. (1 ) धारा 3 के अधीन जारी की गई अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की गई कालावधि का अवसान होने के पश्चात् और ऐसी आपत्तियों तथा सुझावों पर, जो ऐसे अवसान के पूर्व प्राप्त हुए हों , विचार करने के पश्चात् तथा ऐसी जांच, यदि कोई हो, जो आवश्यक हो, करने के पश्चात्, राज्य सरकार , अन्य अधिसूचना द्वारा , धारा 3 के अधीन अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किये गये क्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए , इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए , अनुसूची में विनिर्दिष्ट की गई कृषि उपज के संबंध में मण्डी स्थापित कर सकेगी और इस प्रकार स्थापित की गई मण्डी ऐसे नाम से जानी जायेगी , जो कि उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाये ।
(2) राज्य सरकार, अन्य अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए , अनुसूची में विनिर्दिष्ट की गई कृषि उपज के कय-विक्रय , प्रसंस्करण या विनिर्माण , कोल्ड स्टोरेज, साइलोज , भण्डागार, इलेक्ट्रानिक ट्रेडिंग तथा लेन - देन प्लेटफार्म और ऐसे अन्य स्थान अथवा संरचनाओं को, डीम्ड मंडी घोषित / स्थापित कर सकेगी , जो कि उप-धारा (1 ) के अधीन स्थापित मंडी की डीम्ड मंडी के नाम से जानी जाएगी । डीम्ड मंडी स्थापित किये जाने हेतु धारा 3 की उप- धारा (1 ) एवं (2) के प्रावधान लागू नहीं होंगे । "
धारा 19 का संशोधन.
4. मूल अधिनियम की धारा 19 की उप- धारा (1 ) के खण्ड (दो) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये, अर्थात्ः-
"(तीन) अधिसूचित कृषि उपज, चाहे वे राज्य के भीतर से या राज्य के बाहर से किसी मंडी प्रांगण या उप - मंडी प्रांगण या विशेष वस्तु मंडी प्रांगण या टर्मिनल मार्केट कॉम्प्लेक्स या डीम्ड मंडी में विक्रय के लिये लाई गई हो, के विक्रय या वितरण और 1098 ( 2)
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प्रसंस्करण तथा विनिर्माण में उपयोग में लाये जाने पर या प्रसंस्करण तथा विनिर्माण के पश्चात् विक्रय किये जाने पर। " नवीन धारा 20-क 5. मूल अधिनियम की धारा 20 के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाये, का अन्तःस्थापन.
अर्थात्ः-
"20-क. कृषक /विक्रेता हित संरक्षण की दृष्टि से लेखे पेश करने हेतु आदेश
देने की शक्ति और प्रवेश, निरीक्षण तथा अभिग्रहण की शक्तियां (1 ) मण्डी समिति का सचिव या बोर्ड या मण्डी समिति का कोई भी अधिकारी या सेवक, जो सक्षम प्राधिकारी द्वारा सशक्त किया गया हो तथा इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित अधिकारी या सेवक , किसी ऐसे व्यक्ति से, जो किसी भी किस्म की अधिसूचित कृषि उपज का व्यापार करता हो, विक्रेता / कृषक से , क्रय कृषि उपज के संबंध में, यह अपेक्षा कर सकेगा कि अधिसूचित कृषि उपज के क्रय विक्रय से संबंधित लेखे , तथा अन्य दस्तावेज या प्रारूप, जैसा कि अधिसूचना द्वारा विहित किया जाये, संधारित करे और कोई ऐसी जानकारी दे, जो ऐसी कृषि उपज के क्रय , विक्रय तथा परिदान से संबंधित हो ।
(2) किसी अधिसूचित कृषि उपज के व्यापार के संबंध में अधिसूचना के अनुसार संधारित समस्त लेखे तथा रजिस्टर और ऐसी कृषि उपज के क्रयों, विक्रयों तथा परिदानों से संबंधित दस्तावेज , प्रारूप , जो उसके कब्जे में. हो , और ऐसे व्यक्ति के कार्यालय , व्यापार के स्थान, भण्डागार, स्थापना, प्रसंस्करण या विनिर्माण ईकाई या वाहनों का निरीक्षण , मण्डी समिति या बोर्ड के सचिव या मंडी समिति के किसी अधिकारी या सेवक तथा राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में अधिसूचित अधिकारी या सेवक के द्वारा किया जा सकेगा ।
(3) यदि किसी ऐसे अधिकारी या सेवक के पास यह संदेह करने का कारण हो कि कोई व्यक्ति निर्धारित प्रारूप में लेखे एवं दस्तावेज, छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 27 अक्टूबर 2020
1098(3) प्रारूप संधारित नहीं करता या मिथ्या लेखे संधारित कर रहा है, तो वह, कारणों को लेखबद्ध करते हुये, ऐसे व्यक्ति के ऐसे लेखे, रजिस्टर या दस्तावेज, प्रारूप तथा अधिसूचित कृषि उपज जैसा कि आवश्यक हो, अभिग्रहित कर सकेगा तथा उनके लिए एक रसीद देगा और उन्हें तब तक रखे रहेगा, जब तक कि वे उनकी परीक्षा के लिए या अभियोजन के लिए आवश्यक हो ।
(4) उप-धारा (2) या उप- धारा (3 ) के प्रयोजनों के लिए ऐसा अधिकारी
या सेवक किसी भी व्यापार के स्थान , भण्डागार, कार्यालय , स्थापना, गोदाम , प्रसंस्करण या विनिर्माण ईकाई या वाहन में, जिसके संबंध में ऐसे अधिकारी या सेवक के पास यह विश्वास करने का कारण हो कि उनमें ऐसा व्यक्ति अपने व्यापार के लेखे, रजिस्टर या दस्तावेज , प्रारूप या अपने व्यापार के संबंध में अधिसूचित कृषि उपज के स्टॉक रखता है या तत्समय रखा है, प्रवेश कर सकेगा या तलाशी ले सकेगा ।
(5) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का सं. 2) की धारा 100 के उपबन्ध, यथाशक्य , उप-धारा (4) के अधीन तलाशी के लिये लागू होंगे ।
(6) जहां कोई लेखा पुस्तकें या अन्य दस्तावेज, प्रारूप किसी स्थान से अभिग्रहित की जाये और उनमें ऐसी प्रविष्टियाँ हो जो विक्रेता / कृषक से क्रय अधिसूचित कृषि उपज के परिमाण (मात्रा), क्रय करार, दरों, तौल तथा भुगतान से संबंधित हों, वहाँ ऐसी लेखा- पुस्तकें या अन्य दस्तावेज, प्रारूप उन्हें साबित करने के लिए, साक्षी के उपसंजात हुए बिना ही, साक्ष्य के रूप में ग्रहण की जायेंगी और ऐसी प्रविष्टियां, उन मामलों में, संव्यवहारों तथा लेखाओं की, जिनका कि उनमें अभिलिखित होना तात्पर्थित हैं, प्रथम दृष्टया साक्ष्य होंगी ।
(7) अधिसूचित कृषि उपज के क्रय विक्रय से संबंधित लेखा- पुस्तकें या अन्य दस्तावेज, प्रारूप मिथ्या पाये जाने पर , संबंधित व्यक्ति के 1098(4)
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विरुद्ध तथा अभिग्रहित अधिसूचित कृषि उपज के लिये मंडी समिति के सचिव या राज्य सरकार या बोर्ड या मण्डी समिति के कोई भी अधिकारी या सेवक, जिसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा इस संबंध में प्राधिकृत किया गया हो, के द्वारा वाद दायर किया जा सकेगा । " 6 . मूल अधिनियम की धारा 36 के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये, अर्थात्ः- धारा 36 का संशोधन.
" 36- क. इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफार्म. (1 ) राज्य सरकार, अधिसूचित कृषि उपज के विक्रय में कृषक / विक्रेता को अपने उत्पाद को स्थानीय मंडी के साथ - साथ प्रदेश की अन्य मंडियों तथा अन्य राज्यों के व्यापारियों को गुणवत्ता के आधार पर पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से विक्रय कर बेहतर कीमत प्राप्त करने तथा समय पर आनलाईन भुगतान हेतु इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफार्म की स्थापना कर सकेगी ।
(2) इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफार्म में अधिसूचित कृषि उपज के पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया तथा आनलाईन भुगतान राज्य सरकार द्वारा विहित प्रक्रिया के अनुसार किया जायेगा । "
धारा 49 का संशोधन.
7. मूल अधिनियम की धारा 49 की उप- धारा (4) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये, अर्थात्ः-
" (
4-क) यदि कोई व्यक्ति, जिसे अधिसूचित कृषि उपज के क्रय एवं विक्रय से संबंधित लेखा पुस्तिका या अन्य दस्तावेज , प्रारूप के संबंध में जानकारी देने के लिये धारा 20 क के अधीन अपेक्षित किया जाये-
(क) कोई जानकारी देने में जानबूझकर उपेक्षा करेगा या कोई जानकारी देने से इंकार करेगा; या
(ख) मिथ्या जानकारी या जानबूझकर मिथ्या जानकारी देगा; या
(ग) लेखा - पुस्तकें या अन्य दस्तावेज, प्रारूप में संधारित मात्रा से अधिक या कम अधिसूचित कृषि उपज रखता हो,
तो वह दोषसिद्धि पर, कारावास से, जिसकी अवधि 3 मास तक की छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 27 अक्टूबर 2020
1098( 5) हो सकेगी या जुर्माने से, जो पांच हजार रूपये तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डित किया जायेगा तथा पश्चातवर्ती उल्लंघन की दशा में, कारावास से, जो 6 मास तक का हो सकेगा या जुर्माने से, जो दस हजार रूपये तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।"
उद्देश्य एवं कारणों का कथन
यतः, राज्य सरकार का दृष्टिकोण है कि प्रदेश में 80 प्रतिशत लघु एवं सीमांत कृषक हैं, लघु एवं सीमांत कृषकों की कृषि उपज भण्डारण तथा मोल भाव की क्षमता नहीं होने से, बाजार मूल्य के उतार- चढ़ाव तथा भुगतान की जोखिम को दृष्टिगत रखते हुए, उनकी उपज की गुणवत्ता के आधार पर सही कीमत, सही तौल तथा समय पर भुगतान सुनिश्चित कराने हेतु डीम्ड मंडी तथा इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफार्म की स्थोषना किया जाना कृषक हित में आवश्यक हो गया है;
अतएव, छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 (क. 24 सन 1973) में संशोधन किये जाने का विनिश्चय किया गया है ।
अतः यह विधेयक प्रस्तुत है ।
रविन्द्र चौबे रायपुर,
कृषि मंत्री, दिनांक 23 अक्टूबर, 2020
(भारसाधक सदस्य) 1098 ( 6)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 27 अक्टूबर 2020
उपाबंध
छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 (क्रमांक 24 सन् 1973 ) की धारा 2 की उपधारा (1) के खण्ड (क) एवं (छ) , धारा 4, धारा 19 की उपधारा (1 ) , धारा 20, धारा 36, धारा 49 की उपधारा (4) के संबंध में सुसंगत उद्धरण
धारा 2 उपधारा (1 ) के खण्ड (क)
"कृषि उपज" से अभिप्रेत है कृषि, उद्यान- कृषि, पशुपालन, मधुमक्खी पालन , मत्स्य पालन या व्न संबंधी समस्त उत्पादन जो कि अनुसूची में विनिर्दिष्ट है ।
(छ) "मण्डी" से अभिप्रेत है धारा 4 के अधीन स्थापित की गई मण्डी;
धारा 4 मण्डी की स्थापना तथा उसमें अधिसूचित कृषि उपज के विपणन का विनियम धारा 3 के अधीन जारी की गई अधिसूचना मे विनिर्दिष्ट की गई कालावधि का अवसान होने के पश्चात् और ऐसी आपत्तियों तथा सुझावों पर, जो ऐसे अवसान के पूर्ण प्राप्त हुए हो, विचार करने के पश्चात् तथा ऐसी जांच, यदि कोई हो, जो आवश्यक हो, करने के पश्चात् राज्य सरकार, अन्य अधिसूचना द्वारा धारा 3 के अधीन अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किये गये क्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए अनुसूची में विनिर्दिष्ट की गई कृषि उपज के संबंध में मण्डी स्थापित कर सकेगी; और इस प्रकार स्थापित की गई मण्डी ऐसे नाम से जानी जायेगी जो कि उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाय ।
धारा 19 मण्डी फीस के उद्ग्रहण की शक्ति
(1 ) प्रत्येक मंडी समिति
(एक) अधिसूचित कृषि उपज, चाहे वह राज्य के भीतर से या राज्य के बाहर से किसी मण्डीक्षेत्र में लाई गई हो, के विकय पर, और
(दो) अधिसूचित कृषि उपज, चाहे वह राज्य के भीतर से या राज्य के बाहर से किसी मण्डी क्षेत्र में लाई गई हो और प्रसंस्करण तथा विनिर्माण में उपयोग के लिए लाई गई हो ।
ऐसी दरों से, जो कि राज्य सरकार द्वारा समय - समय पर, कीमत के प्रत्येक एक सौ रूपये पर न्यूनतम पचास पैसे की दर के और अधिकतम दो रूपये की दर के अध्यधीन रहते हुए , नियत की जाए , विहित रीति में मण्डी फीस का उद्ग्रहण करेगीः छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 27 अक्टूबर 2020
1098 (7) परन्तु उस मण्डी समिति को छोड़कर , जिसके मण्डी क्षेत्र में अधिसूचित कृषि- उपज , यथास्थिति, किसी कृषक या व्यापारी द्वारा प्रथम बार विक्रय या प्रसंस्करण तथा विनिर्माण हेतु लायी गयी हो, कोई मण्डी समिति ऐसी मण्डी फीस का उद्ग्रहण नहीं करेगी ।
धारा 20 शक्तियां लेखे पेश करने हेतु आदेश देने की शक्ति और प्रवेश , निरीक्षण तथा अभिग्रहण की (1 ) मंडी समिति का सचिव या राज्य सरकार या बोर्ड या संचालक का कोई भी अधिकारी या सेवक, जो राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में प्राधिकृत किया गया हो, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए किसी ऐसे व्यक्ति से , जो किसी भी किस्म की अधिसूचित कृषि- उपज का काराबार करता हो, यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह उसके समक्ष ऐसे लेखे तथा अन्य दस्तावेजें पेश करें और कोई ऐसी जानकारी दे जो ऐसी कृषि उपज के स्टॉक या ऐसे व्यक्ति द्वारा ऐसी कृषि उपज के कय , विक्रय तथा परिदान से संबंधित हो , तथा कोई ऐसी अन्य जानकारी भी दे जो कि ऐसे व्यक्ति द्वारा मण्डी फीस के संदाय से संबंधित हो ।
(2 ) किसी अधिसूचित कृषि उपज के कारबार के मामूली अनुक्रम में किसी व्यक्ति द्वारा बनाये रखे गये समस्त लेखे तथा रजिस्टर और ऐसी कृषि उपज के स्टॉकों से संबंधित या ऐसी कृषि उपज के कयों, विक्रयों तथा परिदानों से संबंधित दस्तावेजें, जो उसके कब्जे में हो और ऐसे व्यक्ति के कार्यालय, स्थापनाएं, गोदाम, जलयान या गाड़िया बोर्ड या संचालक या मण्डी समिति के ऐसे अधिकारियों या सेवको द्वारा , जो राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में प्राधिकृत किये जाये , निरीक्षण की जाने / किये जाने के लिए समस्त युक्तियुक्त समयों पर खुली रहेंगी / खुले रहेंगे ।
(3 ) यदि किसी ऐसे अधिकारी या सेवक के पास यह सन्देह करने का कारण हो कि कोई व्यक्ति धारा 19 के अधीन अपने द्वारा शोध्य किसी मण्डी-फीस के भुगतान का अपवंचन करने का प्रयत्न कर रहा है या यह कि किसी व्यक्ति ने मण्डी क्षेत्र में प्रवृत्त इस अधिनियम या नियमों के या उपविधियों के किन्हीं भी उपबन्धों के उल्लंघन में किसी अधिसूचित कृषि उपज का कय किया है, तो वह लिखित में अभिलिखित किये जाने वाले करणों से ऐसे व्यक्ति के ऐसे लेखे , रजिस्टर या दस्तावेजें, जैसे कि आवश्यक हो, अभिगृहीत कर सकेगा तथा उनके लिए एक रसीद देगा और उन्हें तब तक रखे रहेगा जब तक कि वे उनकी परीक्षा के लिए या अभियोजन के लिए आवश्यक हों ।
(4) उपधारा (2) या उपधारा (3 ) के प्रयोजनों के लिए ऐसा अधिकारी या सेवक किसी भी कारबार के स्थान , भाण्डगार, कार्यालय , स्थापना , गोदाम जलयान या गाड़ी में जिसमें कि संबंध में ऐसे अधिकारी या सेवक के पास यह विश्वास करने का कारण हो कि उनमें ऐसा 1098 (8)
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व्यक्ति अपने कारबार के लेखे , रजिस्टर या दस्तावेजें या अपने कारबार से संबंध रखने वाले अधिसूचित कृषि उपज के स्टॉक रखता है या तत्समय रखे है, प्रवेश कर सकेगा या तलाशी ले सकेगा ।
(5) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 ( क्रमांक 5 सन् 1898) की धारा 102 तथा 103 के उपबन्ध यथाशक्य उपधारा (4) के अधीन तलाशी को लागू होंगे ।
(6) जहां कोई लेखा पुस्तकें या अन्य दस्तावेजों किसी स्थान से अभिगृहीत की जायें और उनमें ऐसी प्रविष्टियां हो जो परिमाण, भावों ( कुटेशन ), दरो , धन की प्राप्ति या भुगतान या माल के विक्रय या कय के प्रति निर्देश करती हो, वहां ऐसी लेखा- पुस्तकें या अन्य दस्तावेजों, उन्हे साबित करने के लिए सोक्षी के उपसंजात हुए बिना ही, साक्ष्य के रूप में ग्रहण की जायेंगी और ऐसी प्रविष्टियां उन मामलों में , संव्यवहारों तथा लेखाओं की, जिनका कि उनमें अभिलिखित होना तात्पर्यत है, प्रथम दृष्टया साक्ष्य होंगी ।
धारा 36 अधिसूचित कृषि उपज का मंडियों में विक्रय
(1 ) मूल मंडी में विक्रय के लिये लाई गई समस्त अधिसूचित कृषि उपज उप धारा (2) के उपबंधो के अध्याधिन रहते हुए , ऐसी उपज के लिए विनिर्दिष्ट किये गये मंडी प्रांगण / प्रांगणों में या उपविधियों में यथा उपबंधित ऐसे अन्य स्थान पर बेची जायेगी । " परन्तु संविदा खेती के अधीन उत्पादित की गई कृषि उपज को मंडी प्रांगण में लाना आवश्यक नही होगा तथा उसे किसी भी अन्य स्थान पर किसी ऐसे व्यक्ति को विक्रय किया जायेगा, जो करार के अधीन उसे कय करने के लिए सहमत है " (2) ऐसी अधिसूचित कृषि उपज, जो वाणिज्यिक संव्यवहार के अनुक्रम में अनुज्ञापित व्यापारियों द्वारा मंडी क्षेत्र के बाहर से कय की जाए , मंडी क्षेत्र में कंही भी उपविधियां के उपबंधों के अनुसार लायी तथा बेची जा सकेगी ।
(3) मंडी प्रांगण में विकय के लिए लाई गई अधिसूचित कृषि उपज की कीमत निविदा बोली या खुली नीलामी या दोनों द्वारा तय की जायेगी तथा तय हुए मूल्य में किसी कारण से कोई कौटती नही की जायेगी ।
"परन्तु मंडी प्रांगण में ऐसी कृषि उपज की, जिसके लिए की राज्य सरकार द्वारा समर्थन कीमत घोषित की गई है , और जिसके कय के लिए शासन द्वारा एजेंसी नियुक्त की गई हो कीमत उस कीमत से कम निर्धारित नही की जायेगी जो इस प्रकार घोषित की गई है , और मंडी प्रांगण में कोई भी बोली किस प्रकार नियत की कीमत से कम पर प्रांरभ नही होने दी जायेगी । " छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 27 अक्टूबर 2020
1098( 9) (4) इस प्रकार कय की गई समस्त अधिसूचित कृषि उपज की तौल या माप किसी अनुज्ञप्त तौलिया द्वारा और ऐसी प्रक्रिया द्वारा की जायेगी जैसे कि उपविधियों में उपबंधित की जाए या उप मंडी प्रांगण या मंडी समिति द्वारा इस प्रयोजन . लिए विनिर्दिष्ट किये गये किसी अन्य स्थान पर की जायेगी,
परन्तु यह कि केला, पपीता या किसी ऐसी अन्य विनिश्वर, कृषि उपज की, जिसे राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे, यथास्थिति तौल , माप या गणना किसी अनुज्ञप्त तुलैया द्वारा ऐसे स्थान पर की जायेगी , जहां ऐसी उपज उठाई गई हो " धारा 49 की उपधारा (4)-
(4) यदि मण्डी समिति का कोई अधिकारी , सेवक या सदस्य, जब कि वह मण्डी समिति के कार्यकलापों या कार्यवाहियों के बारें में जानकारी देने के लिए धारा 54 की उपधारा (1) के खण्ड (क) के अधीन अपेक्षित किया जाय
(क) कोई जानकारी देने में जानबूझकर उपेक्षा करेगा या कोई जानकारी देने से इन्कार करेगा, या
(ख) जानबूझकर मिथ्या जानकारी देगा, तो वह दोषसिद्धि पर, जुर्माने से , जो. पांच हजार रूपये तक का हो सकेगा, दण्डित किया जायेगा ।
चन्द्र शेखर गंगराड़े प्रमुख सचिव
छत्तीसगढ़ विधान सभा संचालक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री , छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय , नवा रायपुर अटल नगर से मुद्रित तथा प्रकाशित - 2020 .