संस्कृति विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर
अटल नगर, दिनांक 27 अक्टूबर 2020
अधिसूचना
क्रमांक.एफ-1-03/2020/30/सं. .⸺ विषयः- संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालित सभी इकाइयों को एकरूप करने ''छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद'' के गठन बाबत्।
01 प्रस्तावना
1.1 छत्तीसगढ़ में सांस्कृतिक धरोहर, वन्य एवं ग्राम्य जीवन पद्धति की विशिष्टताएं, पौराणिक कथानकों एवं जननायकों/संतों से जुड़े स्थल, नदियाँं एवं पर्वतमालायें, पारम्परिक उत्सव, पर्व तथा मेला, आंचलिक भाषा-बोलियाँ, आदिम उपासना पद्धतियाँ इत्यादि वर्तमान हैं, जो परस्पर समाजिक संगठन के अनिवार्य घटकों से निर्मित हैं। छत्तीसगढ़ की प्राचीन संस्कृति में विविध धर्म-सम्प्रदायों के व्यापक अवशेष उपलब्ध हैं जो नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों के मूल स्रोत हैं। धार्मिक उदारता तथा समन्वय छत्तीसगढ़ की संस्कृति का कलेवर है। अत्यन्त प्राचीन काल से छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक संबंध देश के विभिन्न क्षेत्रों से रहा है। यह देश की विभिन्न संस्कृतियों का संगम स्थल रहा है। इस समग्र क्षेत्र में हिन्दी, छत्तीसगढ़ी, कुड़ुख, गोंड़ी, हल्बी, भतरी, सरगुजिया, सादरी तथा सीमावर्ती राज्यों से प्रभावित और अन्य प्रांतों के छत्तीसगढ़ निवासियों की भाषा-बोलियां प्रचलित हैं।
छत्तीसगढ़ में संस्कृति के संरक्षण, प्रदर्शन, संवर्द्धन के लिये अनेक उद्यम विगत 20 वर्षों में किये गए। संस्कृति के पोषक तत्वों का मूल स्वरूप में समग्र विकास के लिये अभिनव प्रयास और गतिविधियां की जा रही हैं, जिनमें- छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग, छत्तीसगढ़ सिंधी अकादमी, बख्शी सृजन पीठ, चक्रधर कथक केन्द्र, नाचा केन्द्र, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम जैसी इकाइयां हैं।
राज्य में संस्कृति विभाग के अंतर्गत राज्य गठन के पूर्व की स्थिति में पुरातत्त्व एवं संग्रहालय विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित रहे हैं। इन्हें छोड़कर सांस्कृतिक गतिविधियों के क्रियान्वयन के लिये पृथक से ऐसा कोई संस्थान निर्मित नहीं है, जैसा कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में भारत भवन, रवीन्द्र भवन, मध्यप्रदेश कला परिषद, मध्यप्रदेश साहित्य परिषद, मध्यप्रदेश आदिवासी लोक कला परिषद आदि हैं। अतः छत्तीसगढ़ राज्य के सांस्कृतिक धरोहर, साहित्य, लोक भाषा एवं बोलियाँं, संगीत, नृत्य-नाटक, रंगमंच, चित्र एवं मूर्तिकला, सिनेमा, रंगमंच और आदिवासी एवं लोककलाओं, लोकोत्सव आदि के आयोजन, प्रस्तुति; विविध विधाओं से संबंधित शीर्षस्थ विद्वानों के सम्मान एवं प्रोत्साहन के लिये एक सृजनात्मक शासकीय परिषद का गठन आवश्यक है। उपरोक्त दृष्टि से संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालित/गठन या स्थापना हेतु प्रस्तावित सभी इकाइयों को एकरूप करने ''छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद'' का गठन प्रस्तावित है, जिस पर राज्य शासन एतद् द्वारा किया जाता है।
02 उद्देश्य
'छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद' का प्रमुख उद्देश्य राज्य में साहित्य, संगीत, नृत्य, रंगमंच, चित्र एवं मूर्तिकला, सिनेमा और आदिवासी एवं लोककलाओं एवं उनकी सौंदर्यपरकता आदि का शासन की नीतियों के अनुरूप समस्त संभव उपायों द्वारा सम्मान, विस्तार, प्रोत्साहन और संरक्षण करना होगा। इस व्यापक उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए 'छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद' निम्नलिखित प्रयत्न करेगाः-
2.1 सांस्—तिक विरासतों की पहचान एवं उनका संरक्षण, संवर्धन और विकास।
2.2 प्रदेश के सृजनशील संस्—ति के लिए मंचों, कला संग्रहालयों एवं वीथिकाओं का विकास।
2.3 प्रदेश में राष्ट्रीय स्तर के मंचों की स्थापना और आयोजन।
2.4 संस्—ति के क्षेत्र के अनुशासनों, आदिवासी एवं लोककलाओं और साहित्य के अन्तर्सम्बंधों की पहचान एवं विस्तार के प्रयास।
2.5 विभिन्न सांस्—तिक कलाओं एवं साहित्य रूपों के स्वतंत्र और मिले-जुले कार्यक्रम का आयोजन।
2.6 राज्य के विभिन्न सांस्—तिक संस्थाओं/समूहों को सहयोग और प्रोत्साहन।
2.7 उल्लेखनीय सृजनात्मक उपलब्धियों के लिए सृजनकर्मियों को सम्मान एवं प्रोत्साहन।
2.8 उत्—ष्ट सिनेमा के निर्माण एवं प्रचार संबंधी गतिविधियाँ।
2.9 परिषद के प्रयोजनों के लिए, यथास्थिति, किसी व्यक्ति या शासन से किसी भूमि या भवन का अर्जन, क्रय या उसकी पट्टे पर अभिप्राप्ति।
2.10 परिषद के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अनुदान प्राप्त करना, कार्यक्रमों के लिए प्रायोजकों से सहायता प्राप्त करना और परिषद की गतिविधियों के लिए अन्य सभी संभव उपाय।
2.11 प्रदेश और देश भर के विश्वविद्यालयों और दूसरी सांस्—तिक व शिक्षण संस्थाओं जैसे- राष्ट्रीय नाट््य विद्यालय, फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इण्डिया, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला, केन्द्र साहित्य अकादमी, ललित कला अकादमी, संगीत-नाटक अकादमी, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, विभिन्न क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र आदि से जीवंत संबंध स्थापित करना और उनकी गतिविधियों से संबद्ध होना।
2.12 प्रदेश की सांस्—तिक नीति के अनुरूप स्कूली, उच्च शिक्षा सहित अन्य शासकीय विभागों के साथ सामंजस्य कर संस्—ति को बढ़ावा देना।
2.13 साहित्यिक, सामाजिक व अन्य सामयिक विषयों पर सृजन व शोध कार्यों में सहयोग एवं प्रोत्साहन। 2.14 समाज में सांस्—तिक गतिविधियों यथा- रचनात्मकता, सृजनशीलता, अधिमूल्यन और समालोचना को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देना।
2.15 संस्—तिकर्मियों व संस्थाओं को विभिन्न विधाओं के लिए दिए जाने वाले फैलोशिप, पुरस्कारों व सम्मान का संयोजन।
03 छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद
3.1 'छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद' परिषद की रूपरेखा, सदस्य और पदाधिकारीः- कंडिका-02 में उल्लेखित उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु राज्य की संस्कृति नीति (संलग्नक-क) के अनुरूप राज्य शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत गठन हेतु प्रस्तावित 'छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद' की रूपरेखा, परिषद के सदस्य और पदाधिकारी इस प्रकार होंगेः-
| 1 | मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ | - अध्यक्ष |
| 2 | संस्कृति मंत्री, छत्तीसगढ़ | - उपाध्यक्ष |
| 3 | राज्य के साहित्य और कला जगत से संबंधित व्यक्ति (साहित्य-1, आदिवासी/लोककला-1, चित्रकला/मूर्तिकला-1, नाटक-1, शास्त्रीय अथवा लोक संगीत/नृत्य-2) | - 6 सदस्य |
| 4 | छत्तीसगढ़ विधान सभा के निर्वाचित सदस्य (कला-साहित्य में रूचि रखने वाले) | - 1 सदस्य |
| 5 | भारतीय संसद में छत्तीसगढ़ से निर्वाचित सदस्य (कला-साहित्य में रूचि रखने वाले) | - 1 सदस्य |
| 6 | संचालक, संस्कृति एवं पुरातत्त्व | - 1 सदस्य (संयुक्त सचिव) |
| 7 | प्रभागों (आयोग/निगम/अकादमी) के अध्यक्ष/निदेशक (परिषद के अंतर्गत अग्रलिखित कुल 06 प्रभाग हैं, जिनमें क्रमांक 1 साहित्य अकादमी में पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी पीठ, श्रीकांत वर्मा पीठ तथा गुरू घासीदास शोध पीठ होंगे। साहित्य अकादमी के इन तीनों पीठों के अध्यक्ष सदस्य होंगे, शेष अन्य 05 प्रभागों के प्रमुख सदस्य होंगे। इस प्रकार सदस्यों की संख्या 08 होगी।) | - 8 सदस्य |
| 8 | शासकीय विभागों के प्रतिनिधि (प्रमुख सचिव/सचिव वित्त, आदिम जाति कल्याण, अनुसूचित जाति कल्याण, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण, पर्यटन, उच्च शिक्षा, स्कूल शिक्षा और ग्रामोद्योग विभाग) | - 8 सदस्य |
| 9 | प्रमुख सचिव/सचिव, संस्कृति विभाग | - 1 सदस्य (सचिव) |
| 10 | इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय के पदेन कुलपति | - 1 सदस्य |
| 11 | अध्यक्ष द्वारा मनोनीत | - 2 सदस्य |
पदेन सदस्यों के अतिरिक्त विधानसभा के निर्वाचित सदस्य, भारतीय संसद में छत्तीसगढ़ से निर्वाचित सदस्य, कला संस्कृति से संबद्ध व्यक्तियों/अशासकीय सदस्यों (प्रभागों के निदेशक/अध्यक्ष) का चयन अध्यक्ष के द्वारा मनोनयन के माध्यम से किया जाएगा एवं मनोनीत सदस्यों का कार्यकाल दो वर्ष निर्धारित होगा जो कि अध्यक्ष के द्वारा पुनः वृद्धि किया जा सकेगा। पदाधिकारियों के दायित्व तथा मनोनीत अशासकीय सदस्यों की योग्यता आदि तथा समिति के रूप में पंजीयन हेतु आवश्यक नियमावली एवं संविधान (संलग्नक-क) संलग्न है। 3.2 'छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद' परिषद के अंतर्गत प्रभागों का स्वरूपः- परिषद के अन्तर्गत सांस्—तिक गतिविधियां संचालित करने के लिए निम्नलिखित प्रभाग (आयोग/निगम/अकादमी) होंगे, जो उनके नाम के सम्मुख अंकित कार्य सम्पादित करेंगे।
3.2.1 साहित्य अकादमी - राज्य शासन की संस्कृति नीति एवं छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद के उद्देश्यों के अनुरूप मुख्यतः हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में कार्य करने हेतु पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी पीठ एवं श्रीकांत वर्मा पीठ की स्थापना की जावेगी। पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी पीठ का उद्देश्य/अपेक्षाएं मुख्यतः हिन्दी साहित्य के सृजन तथा इससे संबंधित क्रियाकलाप होंगे। श्रीकांत वर्मा पीठ उद्देश्य/अपेक्षाएं मुख्यतः साहित्य एवं मानविकी के क्षेत्र में शोध, अध्ययन एवं इससे संबंधित क्रियाकलाप होंगे। गुरू घासीदास शोध पीठ का उद्देश्य/अपेक्षाएं मुख्यतः अनुसूचित जाति तथा उनसे संबंधित परंपरा, कला संस्कृति एवं साहित्य पर शोध, अध्ययन से संबंधित होंगे। उक्त पीठों द्वारा प्रतिवर्ष किये गए कार्यों का प्रतिवेदन परिषद को प्रस्तुत करना होगा। उक्त पीठों के लिए अध्यक्ष की नियुक्ति राज्य शासन द्वारा की जावेगी। उक्त तिनों पीठों के अध्यक्षों के लिए पृथक-पृथक मानदेय रू. 75000/- प्रतिमाह होगा। चूंकि उक्त तिनों पीठ सृजन, शोध, अध्ययन से संबंधित होंगे, अतएव इनके लिये पृथक से कार्यालयीन व्यवस्था, नियमित स्टॉफ आदि का औचित्य नहीं है, किन्तु अध्यक्ष के कार्यों के लिए सहयोगी MOM-माडर्न आफिस मैनेजमेंट/MTS-मल्टी टास्ंिकग स्टॉफ का होगा। स्टेशनरी, यात्रा आदि में होने वाले व्यय के लिये मानदेय के अतिरिक्त भत्ते के रूप में रूपये 15,000/- प्रतिमाह निर्धारित होगा। साथ ही परिषद द्वारा निःशुल्क/शासकीय भवन/कक्ष उपलब्ध न कराने, किन्तु परिषद द्वारा आवश्यक माने जाने की स्थिति में किराया/रखरखाव हेतु प्रतिमाह रू. 10,000/- अतिरिक्त स्वीकृत किया जा सकेगा। वर्तमान में संस्कृति विभाग के अंतर्गत पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी सृजन पीठ भिलाई में स्थापित है, जिसकी संरचना में संशोधन/अनूकूलन उक्तानुसार किया जावेगा तथा उक्त पीठ की समस्त चल-अचल संपत्ति के संबंध में परिषद निर्णय ले सकेगा।
3.2.2 कला अकादमी - राज्य शासन की संस्कृति नीति एवं छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद के उद्देश्यों के अनुरूप (क) रंगमंच, (ख) चित्र कला एवं शिल्प कला तथा (ग) संगीत एवं नृत्य के क्षेत्र में कला अकादमी प्रभाग कार्य करेगा। कला अकादमी द्वारा प्रतिवर्ष किये गए कार्यों का प्रतिवेदन परिषद को प्रस्तुत करना होगा। कला अकादमी के लिए निदेशक की नियुक्ति राज्य शासन द्वारा की जावेगी, जिसका मानदेय रू. 1,00,000/- प्रतिमाह होगा। अकादमी के लिये कार्यालयीन स्टाफ संचालनालय, संस्कृति एवं पुरातत्त्व के संबंधित स्टाफ/प्रतिनियुक्ति/संविदा नियुक्ति/आकस्मिकता निधि से होेंगे। कला अकादमी के लिए कार्यालयीन व्यय संस्कृति विभाग के स्वीकृत बजट शीर्ष 8975- छत्तीसगढ़ लोक कला एवं संगीत अकादमी एवं लोकगीतों व लोक नृत्यों का संरक्षण मद में वर्ष 2020-21 के लिए स्वीकृत राशि रू. 50.00 लाख से किया जावेगा एवं अतिरिक्त बजट की आवश्यकता होने पर अनुपूरक बजट में राशि की मांग की जावेगी। वर्तमान में संस्कृति विभाग के अंतर्गत चक्रधर कथक केन्द्र का स्वरूप तैयार किया गया है, विघटन कर उसे कला अकादमी में समाहित कर दिया जावेगा। कला अकादमी के निदेशक द्वारा आवश्यक माने जाने पर परिषद से स्वीकृति प्राप्त होने पर संगीत एवं नृत्य के क्षेत्र में कार्य के लिए चक्रधर कला केन्द्र के रूप में समय-समय पर आवश्यकतानुसार आमंत्रित विशेषज्ञों के सहयोग से प्रशिक्षण, आयोजन आदि गतिविधियां संचालित की जा सकती है। वर्तमान चक्रधर कथक केन्द्र, रायगढ़ की समस्त चल-अचल संपत्ति के संबंध में परिषद निर्णय ले सकेगा।
3.2.3 आदिवासी एवं लोक कला अकादमी - राज्य शासन की संस्कृति नीति एवं छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद के उद्देश्यों के अनुरूप (क) आदिवासी एवं लोक कलाएं, (ख) आदिवासी शिल्प एवं चित्रकला, (ग) लोकशिल्प एवं चित्रकला तथा (घ) लोकनृत्य एवं संगीत के क्षेत्र में आदिवासी एवं लोक कला अकादमी प्रभाग कार्य करेगा। इस अकादमी द्वारा प्रतिवर्ष किये गए कार्यों का प्रतिवेदन परिषद को प्रस्तुत करना होगा। आदिवासी एवं लोक कला अकादमी के लिए निदेशक की नियुक्ति राज्य शासन द्वारा की जावेगी, जिसका मानदेय रू. 1,00,000/- प्रतिमाह होगा। अकादमी के लिये कार्यालयीन स्टाफ संचालनालय, संस्कृति एवं पुरातत्त्व के संबंधित स्टाफ/प्रतिनियुक्ति/संविदा नियुक्ति/आकस्मिकता निधि से होेंगे। कला अकादमी के लिए कार्यालयीन व्यय संस्कृति विभाग के स्वीकृत बजट शीर्ष 8975- छत्तीसगढ़ लोक कला एवं संगीत अकादमी एवं लोकगीतों व लोक नृत्यों का संरक्षण मद में वर्ष 2020-21 के लिए स्वीकृत राशि रू. 50.00 लाख, बजट शीर्ष 6419-मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना के लिए स्वीकृत राशि रू. 10.00 लाख, तथा अन्य अनुरूप बजट शीर्षों में उपलब्ध राशि से किया जावेगा एवं अतिरिक्त बजट की आवश्यकता होने पर अनुपूरक बजट में राशि की मांग की जावेगी।वर्तमान में संस्कृति विभाग के अंतर्गत नाचा केन्द्र का स्वरूप तैयार किया गया है, विघटन कर उसे आदिवासी एवं लोक कला अकादमी में समाहित कर दिया जावेगा। आदिवासी एवं लोक कला अकादमी के निदेशक द्वारा आवश्यक माने जाने पर परिषद से स्वीकृति प्राप्त होने पर लोकनृत्य एवं संगीत के क्षेत्र में कार्य के लिए खुमान साव लोक संगीत एवं नृत्य केन्द्र के रूप में समय-समय पर आवश्यकतानुसार आमंत्रित विशेषज्ञों के सहयोग से प्रशिक्षण, आयोजन आदि गतिविधियां संचालित की जा सकती है। वर्तमान नाचा केन्द्र, राजनांदगांव के संबंध में परिषद अन्य आवश्यक निर्णय ले सकेगा।
3.2.4 छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम - राज्य शासन की संस्कृति नीति एवं छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद के उद्देश्यों के अनुरूप छत्तीसगढ़ी भाषा तथा छत्तीसगढ़ में बोली जाने वाली अन्य भाषाएं जैसे गोड़ी, हल्बी आदि में बनायी जाने वाली (क) फीचर फिल्म तथा (ख) वृत्तचित्र एवं लघु फिल्म तथा राज्य में फिल्म निर्माण संबंधी गतिविधियों के लिए छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम कार्य करेगा। निगम द्वारा प्रतिवर्ष किये गए कार्यों का प्रतिवेदन परिषद को प्रस्तुत करना होगा। छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम के लिए अध्यक्ष की नियुक्ति राज्य शासन द्वारा की जावेगी, जिसका मानदेय रू. 1,00,000/- प्रतिमाह होगा। निगम के लिये कार्यालयीन स्टाफ संचालनालय संस्कृति एवं पुरातत्त्व के संबंधित स्टाफ/ प्रतिनियुक्ति/ संविदा नियुक्ति/आकस्मिकता निधि से होेंगे। छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम के लिए कार्यालयीन व्यय संस्कृति विभाग के स्वीकृत बजट शीर्ष 7929- फिल्म विकास निगम में वर्ष 2020-21 के लिए स्वीकृत राशि रू. 50.00 लाख से किया जावेगा एवं अतिरिक्त बजट की आवश्यकता होने पर अनुपूरक बजट में राशि की मांग की जावेगी। वर्तमान में संस्कृति विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम का गठन कर छत्तीसगढ़ राजपत्र में अधिसूचना दिनांक 14 सितम्बर 2018 को प्रकाशित हुई है तथा छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1973 में 14 फरवरी 2019 को पंजीकृत किया गया है। उक्त निगम के स्वरूप में परिषद द्वारा निर्णय लिए जाने की स्थिति में आवश्यकतानुसार संशोधन/परिवर्तन किया जा सकेगा। वर्तमान छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम के उपलब्ध बजट एवं समस्त चल-अचल संपत्ति के संबंध में परिषद निर्णय ले सकेगा।
3.2.5 छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग - राज्य शासन की संस्कृति नीति एवं छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद के उद्देश्यों के अनुरूप राज्य के विचारों की परंपरा और राज्य की समग्र भाषायी विविधता के परिरक्षण, प्रचलन और विकास करने तथा इसके लिए भाषायी अध्ययन, अनुसंधान तथा दस्तावेज संकलन, सृजन तथा अनुवाद, संरक्षण, प्रकाशन, सुझाव तथा अनुशंसाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ी पारंपरिक भाषा को बढ़ावा देने हेतु, शासन में भाषा के उपयोग को उन्नत बनाने के लिए छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग कार्य करेगा। आयोग द्वारा प्रतिवर्ष किये गए कार्यों का प्रतिवेदन परिषद को प्रस्तुत करना होगा। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के लिए अध्यक्ष का मनोनयन राज्य शासन द्वारा किया जावेगा, जिसका मानदेय रू. 1,00,000/- प्रतिमाह होगा। आयोग के कार्यों के संपादन हेतु कार्यालयीन स्टाफ संरचना निम्नानुसार होगी-
| क्र. | पदनाम | श्रेणी- आरंभिक वेतन |
| 1 | सचिव | प्रथम- 67300 लेवल 13 |
| 2 | सहायक संचालक | द्वितीय- 43200 लेवल 10 |
| 3 | हिन्दी-छत्तीसगढ़ी अनुवादक | तृतीय- 38100 लेवल 09 |
| 4 | शोध सहायक | तृतीय- 35400 लेवल 08 |
| 5 | सहायक वर्ग-2 (01 पद) | तृतीय- 25300 लेवल 06 |
| 6 | कम्प्यूटर आपरेटर | तृतीय- 8000 (संविदा) |
| 7 | भृत्य (01 पद) | चतुर्थ- 15600 लेवल 01 |
| 8 | स्वीपर | अंशकालीन- जिलाध्यक्ष दर |
वर्ष 2020-21 में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के लिए व्यय बजट शीर्ष 7013- छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग में स्वीकृत राशि रू. 1,28,67,000/- (एक करोड़ अट्ठाईस लाख सरसठ हजार) में से किया जावेगा एवं अतिरिक्त बजट की आवश्यकता होने पर अनुपूरक बजट में राशि की मांग की जावेगी। वर्तमान में संस्कृति विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का गठन कर छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग अधिनियम 2010 के रूप में किया जाकर, छत्तीसगढ़ राजपत्र में अधिसूचना दिनांक 03 सितम्बर 2010 को प्रकाशित हुई है। आयोग के लिये स्वीकृत पद संरचना के उपरोक्त पद आयोग कार्यालय के लिए होंगे तथा इसके अतिरिक्त शेष पद जिनकी जानकारी निम्नानुसार है-
| 1 | उप सचिव | प्रथम- 56100 लेवल 12 |
| 2 | लेखा-सह-प्रशासनिक अधिकारी | द्वितीय- 43200 लेवल 10 |
| 3 | अधीक्षक | तृतीय- 35400 लेवल 08 |
| 4 | स्टेनोग्राफर (02 पद) | तृतीय- 25300 लेवल 06 |
| 5 | सहायक वर्ग-3 (02 पद) | तृतीय- 19500 लेवल 04 |
| 6 | वाहन चालक (02 पद) | तृतीय- 19500 लेवल 04 |
| 7 | भृत्य (01 पद) | चतुर्थ- 15600 लेवल 01 |
उक्त पदों/अधिकारी-कर्मचारियों को परिषद के अन्य प्रभागों अथवा संचालनालय संस्कृति एवं पुरातत्त्व के साथ संबद्ध किया जावेगा। आयोग के वर्तमान स्वरूप में परिषद द्वारा निर्णय लिए जाने की स्थिति में आवश्यकतानुसार संशोधन/परिवर्तन किया जा सकेगा तथा वर्तमान छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के उपलब्ध बजट एवं समस्त चल-अचल संपत्ति के संबंध में परिषद निर्णय ले सकेगा।
3.2.6 छत्तीसगढ़ सिंधी अकादमी - राज्य शासन की संस्कृति नीति एवं छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद के उद्देश्यों के अनुरूप छत्तीसगढ़ में सिंधी भाषा एवं साहित्य के संरक्षण एवं विकास के लिए आवश्यक प्रयत्न एवं समस्त उपाय हेतु छत्तीसगढ़ सिंधी अकादमी कार्य करेगा। अकादमी द्वारा प्रतिवर्ष किये गए कार्यों का प्रतिवेदन परिषद को प्रस्तुत करना होगा। छत्तीसगढ़ सिंधी अकादमी के लिए निदेशक की नियुक्ति राज्य शासन द्वारा की जावेगी, जिनका मानदेय रू. 75,000/- प्रतिमाह होगा। निदेशक के कार्यों के लिए एक व्यक्ति MOM-माडर्न आफिस मैनेजमेंट तथा एक व्यक्ति MTS- मल्टी टास्ंिकग स्टॉफ का होगा। स्टेशनरी, यात्रा आदि में होने वाले व्यय के लिये मानदेय के अतिरिक्त भत्ते के रूप में रूपये 15,000/- प्रतिमाह निर्धारित होगा। साथ ही परिषद द्वारा निःशुल्क/शासकीय भवन/कक्ष उपलब्ध न कराने, किन्तु परिषद द्वारा आवश्यक माने जाने की स्थिति में किराया/रखरखाव हेतु प्रतिमाह रू. 10,000/- अतिरिक्त स्वीकृत किया जा सकेगा। छत्तीसगढ़ सिंधी अकादमी के लिए कार्यालयीन व्यय संस्कृति विभाग के स्वीकृत बजट शीर्ष 4060-विविध संस्थाओं को अनुदान में वर्ष 2020-21 के लिए स्वीकृत राशि रू. 2,25,00,000/- (दो करोड़ पच्चीस लाख) से किया जावेगा एवं अतिरिक्त बजट की आवश्यकता होने पर अनुपूरक बजट में राशि की मांग की जावेगी। वर्तमान में संस्कृति विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ सिंधी अकादमी का गठन कर छत्तीसगढ़ राजपत्र में अधिसूचना दिनांक 04 जून 2007 को प्रकाशित हुई है। उक्त अकादमी के स्वरूप में परिषद द्वारा निर्णय लिए जाने की स्थिति में आवश्यकतानुसार संशोधन/परिवर्तन किया जा सकेगा। वर्तमान छत्तीसगढ़ सिंधी अकादमी के उपलब्ध बजट एवं समस्त चल-अचल संपत्ति के संबंध में परिषद निर्णय ले सकेगा।
प्रभागों में होने वाले व्यय हेतु अनुमानिक
| क्र. | प्रभाग | मद | राशि | कुल |
| 01 | साहित्य अकादमी (क) पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी पीठ (ख) श्रीकांत वर्मा पीठ (ग) गुरु घासीदास शोध पीठ | मानदेय अतिरिक्त भत्ता किराया, रखरखाव | 75,000x12=27,00,000 15,000x12=5,40,000 10,000x12=3,60,000 | 36 लाख |
| 02 | कला अकादमी | मानदेय | 1,00,000x12=12,00,000 | 12 लाख |
| अतिरिक्त व्यय | विभागीय बजट से | (मानदेय) | ||
| 03 | आदिवासी एवं लोक कला अकादमी | मानदेय अतिरिक्त व्यय | 1,00,000x12=12,00,000 विभागीय बजट से | 12 लाख (मानदेय) |
| 04 | छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम | मानदेय अतिरिक्त व्यय | 1,00,000x12=12,00,000 विभागीय बजट से | 12 लाख (मानदेय) |
| 05 | छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग | मानदेय (अध्यक्ष) अतिरिक्त व्यय | 1,00,000x12=12,00,000 विभागीय बजट से | 12 लाख (मानदेय) |
| 06 | छत्तीसगढ़ सिंधी अकादमी | मानदेय (अध्यक्ष) अतिरिक्त भत्ता किराया रखरखाव | 75,000x12=9,00,000 15,000x2x12=3,60,000 10,000x2x12=2,40,000 विभागीय बजट से | 15 लाख |
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, अन्बलगन पी., सचिव.