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छत्तीसगढ़
शासन
पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़/ दुर्ग/ 09 / 2013-2015 . " "बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान (बिना डाक टिकट) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22- छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से . भिलाई. दिनांक 30-05-2001 ."
सत्यमेव जयते
छत्तीसगढ़ राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 659 ]
रायपुर , बुधवार , दिनांक 23 दिसम्बर 2020- पौष 2 , शक 1942
छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय रायपुर, बुधवार , दिनांक 23 दिसम्बर , 2020 (पौष 2 , 1942)
क्रमांक-13477/वि.स. / विधान/ 2020.- छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ नगरपालिका ( संशोधन ) विधेयक , 2020 (क्रमांक 30 सन् 2020) जो बुधवार, दिनांक 23 दिसम्बर, 2020 को पुरःस्थापित हुआ है, को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।
हस्ता./- (चन्द्र शेखर गंगराड़े ) प्रमुख सचिव.
1317 1318
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 23 दिसम्बर 2020
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्रमांक 30 सन् 2020)
छत्तीसगढ़ नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2020
छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 (क्र. 37 सन् 1961) को और संशोधित करने हेतु विधेयक ।
भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधानमंडल द्वारा निम्नलिखित रुप में यह अधिनियमितहोः-
संक्षिप्त नाम 1.
तथा प्रारंभ.
(1 ) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम, 2020 कहलायेगा ।
(2) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तिथि से प्रवृत्त होगा ।
2. मूल अधिनियम की धारा 35 के खण्ड (च ) का लोप किया जाये । धारा 35 का संशोधन.
3.
धारा 187 का संशोधन.
मूल अधिनियम की धारा 187 की उप-धारा (7) में, शब्द " एक वर्ष" के स्थान पर, शब्द " दो वर्ष" प्रतिस्थापित किया जाये । धारा 187-क का संशोधन.
4. मूल अधिनियम की धारा 187- क की उप- धारा (1 ) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये, अर्थात्ः-
" (2) इस धारा में इसके विपरीत किसी बात के रहते हुए भी, राज्य शासन , मंत्रिपरिषद् की सहमति प्राप्त करने के पश्चात्, व्यापक जनहित में, ऐसे कारणों से, जिन्हें लिखित में दर्ज किया जायेगा, परिषद् की अनुशंसा पर, किसी विशेष प्रकरण में, आंशिक या पूर्ण रूप से, इस धारा के अधीन अपराधों के शमन पर देय शुल्क में छूट प्रदान कर सकेगाः छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 23 दिसम्बर 2020
1318(1) स्पष्टीकरण-1: इस धारा के प्रयोजन के लिये , शब्द ' व्यापक जनहित में' का आशय केवल निम्नलिखित तक सीमित होगाः--
(क) ऐसे विद्यापीठ और संस्थायें, जो विगत कम से कम पांच वर्षों से शिक्षा , जिसमें वंचित व्यक्तियों की आजीविका को बढ़ावा देने हेतु कौशल विकास प्रशिक्षण शामिल है, के क्षेत्र में सक्रिय हो, तथा जिन्हें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और / या केन्द्रीय या राज्य शासन से अनुदान प्राप्त हो;
(ख) ऐसे अस्पताल तथा स्वास्थ्य केन्द्र, जो केन्द्रीय या राज्य शासन द्वारा मान्यता प्राप्त हो, तथा मूल रूप से गरीबों और वंचित लोगों को धर्मार्थ सेवा प्रदान करती हो;
(ग) धार्मिक और सेवाभावी संस्थायें, जो समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हों, परंतु इस धारा के अंतर्गत उनका अपराध ऐसे भवनों के निर्माण से संबंधित हो, जो आवासीय या व्यावसायिक न हो;
(घ) ऐसी संस्थायें, जो केन्द्रीय तथा / या राज्य शासन द्वारा सम्यक् रूप से मान्यता प्राप्त हो, तथा जो विगत कम से कम पांच या इससे अधिक वर्षों से सक्रिय हो, जो अनाथाश्रम , शारीरिक या मानसिक रूप से बाधित व्यक्तियों, परित्यक्त महिलायें या वरिष्ठ नागरिकों हेतु आश्रम का संचालन करती हो ।
स्पष्टीकरण -2: उपरोक्त प्रावधान, ऐसे किसी प्रकरण पर भी लागू हो सकेगा, जो इस प्रावधान के प्रभावशील होने की तिथि. में लंबित हो । " छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 23 दिसम्बर 2020
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उद्देश्य एवं कारणों का कथन
वर्तमान प्रावधानों के अनुसार कोई व्यक्ति, जो कुष्ठ रोग से पीड़ित हो , वह नगरपालिक चुनाव में अभ्यर्थी नहीं बन सकता है । कुष्ठ रोग आज साध्य है । अतः यह प्रावधान जारी रखना अनुचित प्रतीत होता है । तद्नुसार, इसका लोप करना प्रस्तावित है । इस हेतु छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 (क्र. 37 सन् 1961 ) की धारा 35 में संशोधन आवश्यक है ।
वर्तमान प्रावधान के अनुसार, मुख्य नगरपालिका अधिकारी द्वारा प्रदत्त भवन निर्माण अनुज्ञा केवल तभी मान्य है यदि अनुमति के एक वर्ष के भीतर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया हो । यह समयावधि बहुत कम है । इसे बढ़ाकर दो वर्ष करना प्रस्तावित है । इस हेतु उक्त अधिनियम की धारा 187 में संशोधन आवश्यक है ।
यदि उक्त अधिनियम के अधीन कोई व्यक्ति भवन निर्माण से संबंधित अपराध करता है तो निर्धारित शमन शुल्क जमा कर उसका शमन करने संबंधी प्रावधान उक्त अधिनियम में है । किन्तु कभी-कभी कुछ प्रकरणों में, जहां व्यापक जनहित जुड़ा है, शमन शुल्क में आंशिक या पूर्ण छूट प्रदान करने का अधिकार राज्य शासन को प्रदान करना उचित प्रतीत होता है । इस हेतु उक्त अधिनियम की धारा 187 - क में संशोधन आवश्यक है ।
अतएव , उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति को दृष्टिगत रखते हुए , छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 (क्र. 37 सन् 1961 ) में संशोधन करना आवश्यक है । अतः यह विधेयक प्रस्तुत है ।
रायपुर,
दिनांक 07 दिसम्बर , 2020
डॉ. शिवकुमार डहरिया नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री, (भारसाधक सदस्य) छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 23 दिसम्बर 2020
1318( 3)
उपाबंध
छत्तीसगढ़ नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2020 की धारा 35 के खण्ड (च) , धारा 187 की उप-धारा (7) एवं धारा 187 -क की उप- धारा (1) का सुसंगत उद्धरण
धारा 35 अभ्यर्थियों की निरर्हताएं - कोई भी व्यक्ति [ अध्यक्ष के रूप में निर्वाचन या पार्षद के रूप में निर्वाचन या नाम निर्देशन के लिए पात्र नहीं होगा, ] यदि वह
(च) इस प्रकार के कुष्ठ रोग से पीड़ित है जो संक्रामक है; या
धारा 187- नए भवनों की सूचना
(7) कोई भी व्यक्ति जो किसी ऐसे आशयित कार्य को, जिसकी सूचना उपधारा ( 2 ) के अधीन अपेक्षित है , उपधारा (३ ) या उपधारा (6) के अधीन आगे बढ़ाने के लिए हकदार हो जाता है ऐसे कार्य को उस तारीख से, जिसको वह प्रथम बार ऐसे कार्य को आगे बढ़ाए जाने हेतु हकदार हो गया है, एक वर्ष की कालावधि के अवसान के पश्चात् तब तक आगे नहीं बढ़ाएगा जब तक वह पूर्ववर्ती उपधारा के उपबन्धों का नए सिरे से पालन करने के पश्चात् पुनः हकदार नहीं बन जाता है ।
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धारा 187- क की उप - धारा (1 )- अनुज्ञा के बिना, भवनों के सन्निर्माण के अपराधों का शमन
(1 ) इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों या बनाई गई उपविधियों में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , अनुज्ञा के बिना या प्रदान की गई अनुज्ञा के प्रतिकूल , भवनों का सन्निर्माण करने के अपराध का शमन किया जा सकेगा , यदि
(क) ऐसा सन्निर्माण नियमित भवन पंक्ति को प्रभावित नहीं करता है ;
(ख) खुले पार्श्व स्थानों में या विहित फर्श क्षेत्र के अनुपात से अधिक किया गया अप्राधिकृत सन्निर्माण, विहित फर्श क्षेत्र अनुपात से दस प्रतिशत से अधिक न हो;
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छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 23 दिसम्बर 2020
(ग) ऐसा सन्निर्माण राज्य सरकार द्वारा पर्वतीय स्थल के रुप में या पर्यटन महत्व के स्थल के रुप में या पारिस्थितिकी के बिन्दु से संवेदनशील रुप में अधिसूचित क्षेत्र के भीतर नहीं आता है ;
(घ) ऐसा सन्निर्माण वाहनों की पार्किंग करने के लिए विनिर्दिष्ट क्षेत्र के भीतर नहीं आता है;
(ड) ऐसा सन्निर्माण सड़क की सीमाओं के भीतर या सार्वजनिक सड़क के संरेखण को प्रभावित करने वाले क्षेत्र के भीतर नहीं आता है;
(च ) ऐसा सन्निर्माण टैंक्स (तालाबों) के लिए विनिर्दिष्ट क्षेत्र के भीतर नहीं आता है;
(छ) ऐसा सन्निर्माण नदी किनारे से तीस मीटर के भीतर या नदी किनारे से ऐसी अतिरिक्त दूरी के भीतर नहीं आता है , जो कि मास्टर प्लान क्षेत्र में विनिर्दिष्ट को जाए;
(ज ) ऐसा सन्निर्माण किसी नाले और जल धारा के क्षेत्र के भीतर नहीं आता है;
परन्तु यह कि अनाधिकृत सन्निर्माण से संबंधित मामले में, नीचे दी गई तालिका के कॉलम (1 ) में यथा उल्लिखित तत्संबंधी क्षेत्रफल के लिए , निम्नलिखित शमन शुल्क, जैसा कि उक्त तालिका के कॉलम (2 ) में उल्लिखित है, प्रभारित किया जायेगा, अर्थात् :-
तालिका
देय शमन शुल्क
अनाधिकृत सन्निर्माण वाले भूखंड का
क्षेत्रफल
(2)
(1)
100 वर्गमीटर तक
अनुज्ञा शुल्क का 15 गुणा
अनुज्ञा शुल्क का 20 गुणा 100 वर्गमीटर से अधिक किन्तु
200 वर्गमीटर से कम
अनुज्ञा शुल्क का 25 गुणा 200 वर्गमीटर से अधिक किन्तु
300 वर्गमीटर से कम
अनुज्ञा शुल्क का 30 गुणा 300 वर्गमीटर से अधिक किन्तु
400 वर्गमीटर से कम
अनुज्ञा शुल्क का 35 गुणा 400 वर्गमीटर से अधिक किन्तु
500 वर्गमीटर से कम छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 23 दिसम्बर 2020
1318 ( 5)
तालिका
देय शमन शुल्क
अनाधिकृत सन्निर्माण वाले भूखंड का क्षेत्रफल
(1)
(2)
500 वर्गमीटर से अधिक किन्तु
अनुज्ञा शुल्क का 40 गुणा 600 वर्गमीटर से कम
अनुज्ञा शुल्क का 45 गुणा 600 वर्गमीटर से अधिक किन्तु
700 वर्गमीटर से कम
700 वर्गमीटर से अधिक
अनुज्ञा शुल्क का 50 गुणा परन्तु यह और कि आवासीय सन्निर्माण की दशा में शमन, मुख्य नगरपालिका अधिकारी द्वारा और गैर आवासीय सन्निर्माण की दशा में प्रेसिडेंट- इन- काउंसिल की अनुज्ञा से किया जाएगाः परन्तु यह और कि इस धारा में अन्तर्विष्ट कोई भी बात, किसी ऐसे व्यक्ति पर लागू नहीं होगी, जिसका भवन अथवा भूमि, जिस पर ऐसा सन्निर्माण किया गया है, पर कोई अधिकार नहीं है ।
चन्द्र शेखर गंगराड़े प्रमुख सचिव छत्तीसगढ़ विधान सभा संचालक , मुद्रण तथा लेखन सामग्री , छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय , रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2020.