सहकारिता विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर
अटल नगर, दिनांक 14 सितम्बर 2021
लाख उत्पादक कृषकों/कृषक समूहों को लाख उत्पादन हेतु अल्पकालीन ऋण वितरण कराने हेतु योजना, 2021
क्रमांक/एफ 15-9/15-2/2021/3014.⸺
प्रस्तावना : -
छत्तीसगढ़ राज्य में लाख पालन की अपार संभावना है। लाख पालन हेतु कुसुम, पलाष एवं बेर प्रमुख पोषक वृक्ष है जिनकी संख्या राज्य में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। लाख की फसल में अन्य फसलों की अपेक्षा कम मेहनत में अधिक आय प्राप्त होती है। राज्य में, राज्य वनोपज संघ द्वारा 164 लाख उत्पादन क्लस्टर चयनित है। इन क्लस्टर में लगभग 36000 कृषक परिवार है। जिनके पास लगभग 2.00 लाख कुसुम 10.00 लाख पलाष एवं 55000 बेर के वृक्ष है। छत्तीसगढ़ राज्य में लाख उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु राज्य शासन द्वारा लाख पालक किसानों को ऋण उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। छत्तीसगढ़ शासन कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग के परिपत्र क्रं. 241/ एफ-3/24/विविध/2020/14-2 दिनांक 18.01.2021 के माध्यम से प्रदेष में कुसुम, पलास एवं बेर आदि वृक्षों पर लाख उत्पादन एवं प्राथमिक प्रसंस्करण हेतु कृषकों/कृषकों के समूह को कृषि फसलों के अनुरूप अल्पकालीन कृषि ऋण निर्धारित ऋणमान पर प्रदाय करने के निर्देष प्रसारित किये गए है। अत्एव लाख उत्पादन हेतु कृषि फसलों के अनुरूप शून्य प्रतिषत ब्याज दर पर सहकारी समितियों के माध्यम से ऋण वितरण का निर्णय लिया गया है। शासन के उक्त निर्णय के क्रियान्वयन हेतु लाख के उत्पादन हेतु कार्ययोजना निम्नानुसार है-
01. संक्षिप्त नाम, प्रारंभ तथा विस्तार :-
(एक) यह योजना ''लाख उत्पादक कृषकों/कृषक समूहों को लाख उत्पादन हेतु अल्पकालीन ऋण वितरण कराने हेतु योजना, 2021'' कहलाएगी।
(दो) यह योजना 1 जुलाई, 2021 से प्रभावशील रहेगा।
(तीन) इसका विस्तार संपूर्ण छत्तीसगढ राज्य में होगा। 02. परिभाषाएं :-
(एक) लाख उत्पादक कृषक -''लाख उत्पादक कृषक'' से अभिप्राय ऐसे लघु एवं सीमांत कृषक जो स्वयं के भूमि पर खडे़ पोषक वृक्ष/पौधे जैसे कुसमु, पलाश एवं बेर आदि पर स्वयं लाख पालन करता हो। (दो) लाख उत्पादक कृषक समूह-''लाख उत्पादक कृषक समूह'' से अभिप्राय लाख उत्पादक कृषकों के स्व सहायता समूह/संयुक्त देयता समूह से है।
(तीन) स्व-सहायता समूह - ''स्व सहायता समूह'' से अभिप्राय ऐस समूह से है जो लाख पालन का कार्य करता हो एवं समूह का गठन ऋण आवेदन की तिथि से कम से कम एक वर्ष पूर्व का हो।
(चार) संयुक्त देयता समूह - ''संयुक्त देयता समूह'' से अभिप्राय ऐसे समूह से है, जो लाख पालन करता हो एवं किसी भी बैंक (सहकारी, सार्वजनिक, ग्रामीण एवं नीजि बैंक) से पूर्व में क्रेडिट लिंक किया गया हो। (पाँच) स्व-सहायता समूह की सीड मनी - ''स्व-सहायता समूह की सीड मनी'' से अभिप्राय स्व-सहायता समूह के पास स्वयं की बचत की राशि अथवा प्राप्त अनुदान से है।
(छः) बैंक-''बैंक'' से अभिप्राय राज्य सहकारी बैंक, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक से है। जिसे आगे क्रमशः शीर्ष बैंक, जिला बैंक, के नाम से उल्लेखित किया गया है।
(सात) संस्था-''संस्था'' से अभिप्राय ''प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था'' से है।
(आठ) प्राथमिक लघु वनोपज समिति-''प्राथमिक लघु वनोपज समिति'' से अभिप्राय प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समिति मर्यादित से है।
(नौ) जिला लघु वनोपज संघ - ''जिला लघु वनोपज संघ'' से अभिप्राय जिला लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित से है।
(दस) राज्य लघु वनोपज संघ - ''राज्य लघु वनोपज संघ'' से अभिप्राय छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित, रायपुर से है।
(ग्यारह) ऋण- ''ऋण'' से अभिप्राय लाख उत्पादक कृषकों/कृषक समूहों को नियम 2(छः) में वर्णित बैंक एवं नियम 2(सात) में वर्णित संस्था द्वारा लाख उत्पादन हेतु अल्पकालीन ऋण से है।
(बारह) पंजीयक -''पंजीयक'' से अभिप्राय सहकारी संस्थाओं के पंजीयक से है और उसमें सम्मिलित है सहकारी संस्थाओं के अपर पंजीयक, संयुक्त पंजीयक, उप पंजीयक, सहायक पंजीयक अथवा ऐसा कोई अधिकारी जो नियम 2 (छः) में वर्णित बैंक एवं नियम 2(सात), में वर्णित संस्था के लिए रजिस्ट्रार की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए सक्षम हो।
03. ऋण वितरण की प्रक्रिया :-
(एक) लाख उत्पादन हेतु प्रति ईकाई ऋणमान का निर्धारण :- राज्य वनोपज संघ की अनुषंसा के आधार पर कुसुम, पलाष एवं बेर आदि के वृक्ष पर लाख उत्पादन हेतु प्रति ईकाई ऋणमान का निर्धारण प्रतिवर्ष ऋणमान निर्धारण हेतु गठित जिला स्तरीय तकनीकि समिति (डी.एल.टी.सी) द्वारा किया जावेगा जिसका अनुमोदन कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में ऋणमान निर्धारण हेतु गठित राज्य स्तरीय तकनीकी समिति (एस.एल.टी.सी) द्वारा किया जावेगा।
(दो) स्वयं सहायता समूह हेतु सीड मनी का निर्धारण :- स्व सहायता समूह के ऋण प्रकरण तैयार करने हेतु उनके पास सीड मनी के रूप में कम से कम रुपये 50000/- होना अनिवार्य है।
(तीन) ऋण अनुपात का निर्धारण :- लाख उत्पादन हेतु ऋण अनुपात का निर्धारण वर्तमान में कृषि ऋण हेतु निर्धारित अनुपात 60ः40 नगद एवं वस्तु ऋण हेतु जारी रहेगा। इस अनुपात में पंजीयक सहकारी संस्थाएं द्वारा समय-समय पर किया गया परिवर्तन मान्य होगा। परंतु लाख उत्पादन में वस्तु ऋण की आवष्यकता निर्धारित अनुपात से अधिक होने की स्थिति में वस्तु ऋण अनुपात नगद ऋण को कम कर बढाया जा सकेगा। किसी भी दषा में 60% से अधिक नगद ऋण प्रदान नही किया जावेगा।
(चार) ऋण की अवधि :- लाख पोषक वृक्ष के अनुसार लाख दो प्रकार की होती है। कुसमी लाख तथा रंगीनी लाख, कुसमी एवं बेर वृक्ष पर रंगीनी लाख को पलाष एवं बेर वृक्ष पर उत्पादन किया जाता है। प्रत्येक प्रजातिवार लिये जाने वाले लाख फसल तथा अवधि निम्नानुसार निर्धारित की जाती है :-
| क्रं. | प्रजाति | मौसम | ऋण वितरण की अवधि | देय तिथि | फसल अवधि |
| 1 | कुसुम | अगहनी (षीतकालीन) | 01 जून से 30 जून (पु्रनिंग के 18 माह बाद ) | 28 फरवरी | 06 माह |
| जैठवी (ग्रीष्मकालीन) | 01 दिसम्बर से 31 दिसम्बर (पु्रनिंग के 18 माह बाद ) | 30 सितम्बर | 06 माह | ||
| 2 | पलाश | कतकी (वर्षाकालीन) | 01 जून से 30 जून (पु्रनिंग के 06 माह बाद) | 31 दिसम्बर | 04 माह |
| बैषाखी(ग्रीष्मकालीन) | 30 सितम्बर से 31 अक्टूबर (पु्रनिंग के 06 माह बाद) | 31 जुलाई | 08 माह | ||
| 3 | बेर | अगहनी (षीतकालीन) | 01 जून से 30 जून (पु्रनिंग के 06माह बाद ) | 28 फरवरी | 06 माह |
(पांच) लाख पोषक वृक्ष :- कृषक के पास उपलब्ध पोषक वृक्ष जैसे कुसुम, पलाष एवं बेर आदि का चिन्हाकन प्राथमिक लघु वनोपज समिति द्वारा किया जावेगा। कृषकों के खेत एवं मेड़ मे वृक्ष पाए जाते है। लाख उत्पादन के लिये ऋण हेतु कृषकों की स्वयं की भूमि में खडे़ वृक्षों पर ही ऋण उपलब्ध कराया जा सकेगा।
(छः) पोषक वृक्षों को राजस्व नक्षा/खसरा में इंद्राज करना :- निजी भूमि पर खडे़ समस्त वृक्षों का विवरण राजस्व रिकार्ड में इंद्राज होना आवष्यक है। सर्वप्रथम राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा अभियान चलाकर समस्त पोषक वृक्ष जैसे कुसुम पलाष एवं बेर आदि का विवरण पटवारी द्वारा संधारित विभिन्न राजस्व रिकार्ड में इंद्राज कराकर उक्त रिकार्ड की प्रति निर्धारित प्रारूप में लाख उत्पादक कृषकों को उपलब्ध कराया जाना चाहिये। राजस्व रिकार्ड को भुंइयॉ पोर्टल पर भी अपडेट किया जाना चाहिये ताकि उक्त रिकार्ड के अनुसार ऋण उपलब्ध कराया जा सके।
(सात) लाख उत्पादन हेतु सहकारी समितियों के लिये कुल ऋण सीमा का निर्धारण :- सहकारी समितियों द्वारा अपने कुल ऋण वितरण का 10% तक की अधिकतम सीमा तक लाख उत्पादन हेतु ऋण वितरण किया जा सकेगा।
(आठ) व्यक्तिगत ऋण सीमा :- लाख उत्पादन करने वाले कृषक हेतु अधिकतम व्यक्तिगत ऋण सीमा प्रथम वर्ष रुपये 50000/- निर्धारित की जाती है।
(नौ) स्व सहायता समूह हेतु अधिकतम ऋण सीमा :- स्व सहायता समूह हेतु अधिकतम ऋण सीमा 2.00 लाख निर्धारित की जाती है। ऐसे समूह को प्रथमतः अधिकतम रुपये 50000/-का ऋण स्वीकृत किया जा सकेगा। समूह का कार्य व्यवहार उपयुक्त पाए जाने पर आगामी ऋण वितरण हेतु द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ बार में क्रमषः अधिकतम रू. 1.00 लाख, रू. 1.50 लाख एवं रू. 2.00 लाख तक की सीमा तक ऋण स्वीकृत किये जा सकेंगे।
(दस) संयुक्त देयता समूह हेतु ऋण सीमा :- संयुक्त देयता समूह हेतु अधिकतम ऋण सीमा रुपये 1.00 लाख निर्धारित की जाती है।
(ग्यारह) सदस्यता :- आदिम जाति/सेवा सहकारी समितियों के कार्यक्षेत्र में निवास करने वाले भूमिधारी कृषकों को संबंधित समिति का सदस्य बनना अनिवार्य होगा। इसके लिये आधार कार्ड अन्य फोटो पहचान पत्र देना अनिवार्य होगा। स्व सहायता समूह / संयुक्त देयता समूह को नाम मात्र का सदस्य बनाना आवष्यक होगा।
04. ऋण प्रकरणों को तैयार करना :-
(एक) सामान्य साख सीमा पत्रक तैयार करना :- लाख उत्पादन हेतु स्वीकृत ऋणमान के अनुसार कृषक/समूह द्वारा किये जाने वाले लाख पोषक वृक्षों की संख्या के अनुसार साख सीमा पत्रक सहकारी समिति द्वारा निर्धारित पत्रक में तैयार करना होगा। इसके लिये राजस्व रिकार्ड से वृक्षों की संख्या लिया जाना होगा। सामान्य साख सीमा पत्रक तैयार करने के पश्चात प्राथमिक लघु वनोपज समिति के सचिव एवं समिति प्रबंधक द्वारा संयुक्त रूप से भौतिक सत्यापन करने के पश्चात सत्यापन कर प्रकरण समिति के संचालक मंडल में स्वीकृति हेतु रखा जावेगा।
समिति संचालक मंडल से साख सीमा पत्रक स्वीकृत करने के पश्चात नियमानुसार बैंक से स्वीकृति प्राप्त कर ऋण वितरण किया जावेगा।
(दो) ऋण का आहरण :- स्वीकृत नगद ऋण का आहरण बैंक शाखा में खोले गये खाता से किया जावेगा। वस्तु ऋण प्राथमिक लघु वनोपज समिति अथवा सहकारी समिति के माध्यम से प्रदाय किया जावेगा। किसी भी स्थिति में वस्तु ऋण की राषि नगद में प्रदान नही की जावेगी। वस्तु ऋण का प्रदाय संबंधित प्राथमिक लघु वनोपज समिति के माध्यम से किया जायेगा, जिसमें लाख पालन हेतु आवष्यक बीहन लाख, कीटनाषक एवं अन्य सामाग्री शामिल होगी।
(तीन) बैंक खाता खोलना - लाख खरीदी की प्रक्रिया एवं ऋण प्रदाय करने से संबंधित समस्त गतिविधियों हेतु लाख पालक उत्पादक एवं प्राथमिक लघु वनोपज समिति को निकटतम सहकारी बैंक की शाखा में बचत खाता खोलना अनिवार्य होगा। जिला वनोपज संघ द्वारा जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक में खाता खोला जावेगा तथा राज्य सहकारी बैंक में राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा खाता खोला जाएगा, जिससे समस्त प्रक्रिया का सुव्यवस्थित ढंग से संचालन एवं पर्यवेक्षण हो सकेगा व सुविधापूर्ण ढंग से राषि अंतरित हो सकेगी।
(चार) ब्याज दर ः- लाख उत्पादन हेतु अल्पकालीन कृषि ऋण की ब्याज दर वर्तमान में दिये जा रहे अल्पकालीन कृषि ऋण के समान शून्य प्रतिषत होगी।
(पाँच) ब्याज अनुदान :- राज्य शासन द्वारा लाख उत्पादन हेतु ऋण शून्य प्रतिषत ब्याज दर पर देने का निर्णय लिया गया है। ब्याज दावा की राषि प्राप्त करने हेतु प्रत्येक छः माह में ब्याज अनुदान की गणना कर अंकेक्षक से अंकेक्षित कराकर बैंक के माध्यम से जिले के उप/सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं को दावा प्रस्ताव प्रस्तुत किया जावेगा जिसे उप/सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं द्वारा स्वीकृत किया जावेगा। स्वीकृत ब्याज अनुदान की राषि का दावा जिला बैंक के माध्यम से शीर्ष बैंक को प्रेषित किया जावेगा। शीर्ष बैंक, पंजीयक के माध्यम से, शासन से ब्याज अनुदान की राषि प्राप्त कर जिला बैंकों को भुगतान करेगी जिसे संबंधित समिति को भुगतान किया जावेगा।
(छः) मौसम आधारित बीमा की व्यवस्था :- उद्यानिकी फसलों के अनुरूप लाख पालन हेतु फसल बीमा किया जावेगा। यथा सम्भव लाख उत्पादन हेतु ईकाई लागत अनुसार बीमा प्रीमियम की राषि ऋण के अंतर्गत सम्मिलित होगी। बीमा से कव्हर होने पर किसानों के जोखिम को कम किया जा सकेगा तथा ऋणों की वसूली हो सकेगी। इस हेतु बीमा एजेंसी का निर्धारण राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा किया जावेगा। (सात) विपणन एवं लिंकिंग व्यवस्था :- लाख की कटाई उपरांत फसल उत्पाद को न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना अंतर्गत क्रय करने की जिम्मेदारी राज्य लघु वनोपज संघ के माध्यम से प्राथमिक लघु वनोपज समिति की होगी। लाख की राषि का भुगतान करते समय पहले कृषक द्वारा लिये गए ऋण की कटौती कर शेष राषि कृषक के बचत खाते में अंतरित करनी होगी। प्राथमिक लघु वनोपज समिति द्वारा काटी गई ऋण की राषि सूची सहित संबंधित बैंक/समिति को उपलब्ध कराई जावेगी, जिसे समिति द्वारा संबंधित सदस्य के ऋण खाते में जमा किया जावेगा। यदि कृषक द्वारा ऋण राषि का पूर्ण भुगतान नही किया जाता है एवं कृषक द्वारा भी धान हेतु पंजीयन कराकर धान का विक्रय समिति के उपार्जन केन्द्र में किया जाता है तो लाख उत्पादन ऋण की बकाया राषि की वसूली कृषक द्वारा बेची गई धान की राषि से भी लिंकिंग में समायोजित की जा सकेगी।
(आठ) प्रशिक्षण :- लाख उत्पादन हेतु तकनीकी प्रषिक्षण कृषकों एवंं कृषक समूहों को निषुल्क रूप से राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा दिया जाएगा। केवल प्रषिक्षित कृषक/कृषक समूहों को ही ऋण का लाभ दिया जावेगा।
सहकारी समिति के प्रबंधक, प्राथमिक लघु वनोपज समिति के प्रबंधक बैंक के शाखा प्रबंधक एवं पर्यवेक्षक को इस संबंध में तकनीकी प्रषिक्षण राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा निषुल्क प्रदान किया जावेगा। प्रषिक्षण के पश्चात् ही सहकारी समितियों/सहकारी बैंकों द्वारा ऋण वितरण के संबंध में प्रक्रिया प्रारंभ की जावेगी।
(नौ) त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन का निष्पादन :- राज्य लघु वनोपज संघ से संबद्व प्राथमिक लघु वनोपज समिति, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति एवं लाख पोषक कृषकों के मध्य त्रिपक्षीय समझौता निष्पादित किया जाना अनिवार्य होगा। कृषकों को लाख उत्पादन के लिये स्वीकृत साख सीमा के अंतर्गत मांग के अनुरूप वस्तु ऋण के अंतर्गत आदान सामाग्री का प्रदाय प्राथमिक लघु वनोपज समिति द्वारा किया जाएगा। जिसकी राषि की ऋण का समायोजन बैंक द्वारा सदस्य के खातें में किया जाएगा। इसी प्रकार कृषक द्वारा लाख उत्पादन के पश्चात अपने उत्पादन को प्राथमिक लघु वनोपज समिति में शासन द्वारा निर्धारित दर पर विक्रय किया जाएगा, विक्रय की राषि में से लिये गए ऋण की राषि कम कर शेष राषि ही कृषक को भुगतान संबंधित प्राथमिक लघु वनोपज समिति द्वारा की जावेगी। इस प्रकार से वसूल की गई राषि को तत्काल संबंधित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति के खातें में जमा करने की जिम्मेदारी संबंधित प्राथमिक लघु वनोपज समिति की होगी। इस आषय का समझौता ज्ञापन ऋण वितरण के पूर्व निष्पादित करना अनिवार्य होगा। समझौता ज्ञापन प्रारूप राज्य लघु वनोपज संघ के समन्वय से पृथक से तैयार किया जावेगा।
(दस) योजना का तकनीकि पर्यवेक्षण ः- लाख उत्पादन हेतु ऋण वितरण तथा उत्पाद के क्रय/विपणन का तकनीकि पर्यवेक्षण जिला वनोपज संघ के प्रबंध संचालक द्वारा किया जावेगा तथा इस संबंध में राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा आवष्यक तकनीकि मार्गदर्षन प्रदान किया जावेंगा, जिससे लाख उत्पादक कृषक लाख उत्पादन एवं विक्रय कर लाभ अर्जित कर सकेंगे।
(ग्यारह) जिला स्तर मानिटरिंग कमेटी का गठन :- जिला स्तर पर लाख उत्पादन हेतु ऋण वितरण योजना के क्रियान्वयन एवं निगरानी हेतु निम्नानुसार कमेटी का गठन किया जाता है-
• जिला कलेक्टर - अध्यक्ष • जिले के उप/सहायक पंजीयक, सहकारी संस्थाएं - सदस्य • प्रबंध संचालक जिला लघु वनोपज संघ (संबंधित जिला) - सदस्य • मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक/ नोडल अधिकारी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक (संबंधित जिला) - संयोजक यह कमेटी माह में एक बार बैठक कर योजना का क्रियांवयन में आ रही समस्याओं का निराकरण करते हुए योजना को लागू करेगी।
(बारह) सहकारी समितियों हेतु पोर्टल विकसित करना :- राज्य लघु वनोपज संघ एक ऑनलाईन पोर्टल विकसित करेगा जिसमें लाख पालक कृषकों का पंजीयन उन्हे दिए गए ऋण तथा उनसे क्रय की गई लघु वनोपज की जानकारी ऑनलाईन दर्ज करने की सुविधा प्राथमिक लघु वनोपज समिति एवं प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति को प्रदाय करेगा। ऑनलाईन पोर्टल विकसित होने पर इस योजना को तेजी से गति दी जा सकेगी तथा पूरी पारदर्षिता के साथ सभी जानकारी पोर्टल पर उपलब्घ होगी। ऑनलाईन पोर्टल पर जानकारी उपलब्ध होने से जिला एवं राज्य स्तर से इसकी बेहतर मॉनिटरिंग की जा सकेगी। योजना प्रारंभ होने के तीन माह के अंदर पोर्टल विकसित करना अनिवार्य होगा।
हस्ता./-
(पी.एस. सर्पराज) उप-सचिव.
अटल नगर, दिनांक 14 सितम्बर 2021
लाख उत्पादक कृषकों/कृषक समूहों को कृषि फसलों के अनुरूप लाख उत्पादन हेतु अल्पकालीन ऋण पर ब्याज अनुदान नियम, 2021
क्रमांक/एफ 15-9/15-2/2021/3026.⸺
प्रस्तावना : -
प्रदेश के वनांचल के बहुतायत ग्रामीण समुदाय प्राकृतिक रूप से होने वाले लाख का संग्रहण कर अर्थोपार्जन करते है। प्रदेश में लाख प्राकृतिक रूप से कुसुम, पलाश एवं बेर पेड़ पर होता है। स्वतः उपजी लाख की उत्पादकता काफी कम होने, व्यवसायिक दृष्टिकोण की कमी एवं प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध न होने से इससे जुड़े लोगो में लाख संग्रहण के प्रति रूझान कम हुआ है। कृषि फसलों की भांति लाख उत्पादन को भी प्रोत्साहित करने हेतु राज्य शासन द्वारा, लाख उत्पादक कृषकों/कृषक समूहों को जो प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों/प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों से संबंद्ध होंगे, ऐसे कृषकों को लाख उत्पादन हेतु शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पकालीन ऋण उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है, तथा इस ऋण पर भारित ब्याज के लिए राज्य शासन द्वारा, अनुदान देने का भी निर्णय लिया गया है।
बैंक द्वारा आंकलित प्राईम लेंडिंग रेट एवं पंजीयक द्वारा निर्धारित संस्था के मार्जिन के आधार पर लाख उत्पादक कृषकों को प्रभारित ब्याज दर में से प्रभावशील ब्याज दर घटाने के पश्चात् शेष राशि की प्रतिपूर्ति ब्याज अनुदान के रूप में राज्य शासन द्वारा सहकारी बैंकों/समितियों को की जावेगी। इसके क्रियान्वयन के लिये निम्नानुसार नियम एवं प्रक्रिया निर्धारित की जाती है :-
01. संक्षिप्त नाम, प्रारंभ तथा विस्तार :-
(एक) यह नियम '' लाख उत्पादक कृषकों/कृषक समूहों को कृषि फसलों के अनुरूप लाख उत्पादन हेतु अल्पकालीन ऋण पर ब्याज अनुदान नियम, 2021'' कहलाएगा।
(दो) यह नियम 1 जुलाई 2021 से प्रभावशील रहेगा।
(तीन) इसका विस्तार संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में होगा। 02. परिभाषाएं :-
(एक) लाख उत्पादक कृषक -''लाख उत्पादक कृषक'' से अभिप्राय ऐसे लघु एवं सीमांत कृषक जो स्वयं के भूमि पर खडे़ पोषक वृक्ष/पौधे जैसे कुसमु, पलाश एवं बेर आदि पर स्वयं लाख पालन करता हो। (दो) लाख उत्पादक कृषक समूह-''लाख उत्पादक कृषक समूह'' से अभिप्राय लाख उत्पादक कृषकों के स्व सहायता समूह/संयुक्त देयता समूह से है।
(तीन) स्व-सहायता समूह - ''स्व सहायता समूह'' से अभिप्राय ऐस समूह से है जो लाख पालन का कार्य करता हो एवं समूह का गठन ऋण आवेदन की तिथि से कम से कम एक वर्ष पूर्व का हो। (चार) संयुक्त देयता समूह - ''संयुक्त देयता समूह'' से अभिप्राय ऐसे समूह से है, जो लाख पालन करता हो एवं किसी भी बैंक (सहकारी, सार्वजनिक, ग्रामीण एवं नीजि बैंक) से पूर्व में क्रेडिट लिंक किया गया हो।
(पाँच) स्व-सहायता समूह की सीड मनी - ''स्व-सहायता समूह की सीड मनी'' से अभिप्राय स्व-सहायता समूह के पास स्वयं की बचत की राशि अथवा प्राप्त अनुदान से है।
(छः) बैंक-''बैंक'' से अभिप्राय राज्य सहकारी बैंक, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक से है। जिसे आगे क्रमशः शीर्ष बैंक, जिला बैंक, के नाम से उल्लेखित किया गया है।
(सात) संस्था-''संस्था'' से अभिप्राय ''प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था'' से है।
(आठ) प्राथमिक लघु वनोपज समिति-''प्राथमिक लघु वनोपज समिति'' से अभिप्राय प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समिति मर्यादित से है।
(नौ) जिला लघु वनोपज संघ - ''जिला लघु वनोपज संघ'' से अभिप्राय जिला लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित से है।
(दस) राज्य लघु वनोपज संघ - ''राज्य लघु वनोपज संघ'' से अभिप्राय छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित, रायपुर से है।
(ग्यारह) ऋण- ''ऋण'' से अभिप्राय लाख उत्पादक कृषकों/कृषक समूहों को नियम 2(छः) में वर्णित बैंक एवं नियम 2(सात) में वर्णित संस्था द्वारा लाख उत्पादन हेतु अल्पकालीन ऋण से है।
(बारह) पंजीयक -''पंजीयक'' से अभिप्राय सहकारी संस्थाओं के पंजीयक से है और उसमें सम्मिलित है सहकारी संस्थाओं के अपर पंजीयक, संयुक्त पंजीयक, उप पंजीयक, सहायक पंजीयक अथवा ऐसा कोई अधिकारी जो नियम 2 (छः) में वर्णित बैंक एवं नियम 2(सात), में वर्णित संस्था के लिए रजिस्ट्रार की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए सक्षम हो।
(तेरह) प्राइम लेंडिंग रेट - ''प्राईम लेंडिंग रेट'' से अभिप्राय भारतीय रिजर्व बैंक के मार्गदर्शी सिद्धांतों के अनुसार कास्ट ऑफ फंड, रिस्क कास्ट, ट्रान्जेक्शन कॉस्ट एवं बैंक के मार्जिन के आधार पर बैंक द्वारा निर्धारित उधार देने की न्यूनतम दर से है।
03. पात्रता :-
(एक) ब्याज अनुदान की पात्रता नियम 2 (छः) में वर्णित बैंकोेंं एवं नियम 2 (सात) में वर्णित संस्था को होगी।
(दो) ब्याज अनुदान की पात्रता उस ऋण पर होगी जो नियम 2 (ग्यारह) में वर्णित है।
(तीन) बैंक के प्राइम लेन्डिन्ग रेट में संस्था के मार्जिन को जोड़ने के बाद, निर्धारित ब्याज दर में से कृृषकों को प्रभावशील ब्याज दर घटाने के पश्चात्् शेष ब्याज दर के अनुसार ब्याज अनुदान की पात्रता होगी। (चार) बैंक के प्राइम लेंडिन्ग रेट की गणना भारतीय रिजर्व बैंक के मार्गदर्शी सिद्धांतों के तहत किया जावेगा।
(पांच) बैंक के प्राइम लेंंन्डिन्ग रेट में परिवर्तन होने पर ब्याज दर का पुनः निर्धारण बैंक द्वारा किया जा सकेगा।
(छः) ऋण की अधिकतम सीमा रुपये 2.00 लाख तक होगी।
(सात) ऋण का अनुपात 60 प्रतिशत नगद एवं 40 प्रतिशत वस्तु के रूप में होगी।
04. प्रभावशील ब्याज दरें :- राज्य शासन के निर्णय अनुसार लाख उत्पादक कृृषकों को सहकारी संस्था के माध्यम से दिये जाने वाले अल्पकालीन लाख उत्पादन ऋणों पर ब्याज दर शून्य प्रतिशत (0%) होगी। 05. ब्याज अनुदान का आंकलन :-
(एक) लाख उत्पादन हेतु अल्पकालीन ऋण में यदि प्रशासकीय विभाग/वन विभाग/कृषि विभाग/केन्द्र शासन का कोई अनुदान प्राप्त हो तो अनुदान राशि कृषक की ऋण राशि में समायोजन पश्चात् शेष ऋण पर ब्याज अनुदान का निर्धारण किया जावेगा।
(दो) वितरित ऋणों पर केन्द्र शासन से यदि कोई ब्याज अनुदान प्राप्त होगा तो उस राशि को ब्याज अनुदान की गणना में देय ब्याज अनुदान में से कम किया जावेगा।
(तीन) बैंक द्वारा आंकलित प्राईम लेंडिंग रेट एवं पंजीयक द्वारा संस्था के लिये निर्धारित मार्जिन की राशि को राज्य शासन द्वारा ब्याज अनुदान के रूप में प्रदान की जावेगी।
(चार) ब्याज अनुदान आंकलन का सूत्र निम्नानुसार होगा :- बैंक का प्राईम लेंडिंग रेट पंजीयक के द्वारा प्राथमिक कृृषि साख सहकारी संस्था का निर्धारित मार्जिन - केन्द्र सरकार/अन्य विभाग का अनुदान (यदि कोई हो तो) - नियम 04 के अनुसार प्रभावशील ब्याज दर = ब्याज अनुदान। 06. आहरण एवं भुगतान की प्रक्रिया :-
(एक) संस्था, नियम 03 की पात्रता अनुसार एवं नियम 04 एवं 05 के अनुसार ब्याज अनुदान का आंकलन कर पंजीयक द्वारा निर्धारित प्रपत्र में दावा संबंधित जिला सहकारी बैंक/राज्य सहकारी बैंक को प्रस्तुत करेगी। त्रुटि रहित दावा पत्रक प्रस्तुत करने की जवाबदारी संस्था के प्रबंधक की होगी। बैंक प्रस्तुत दावों का जिले के उप/सहायक पंजीयक द्वारा अपने अधिनस्थ अंकेक्षकों/निरीक्षकों से जांच (परीक्षण) कराकर अविलम्ब स्वीकृति दी जावेगी।
(दो) राज्य शासन की ओर से बैंकों को देय ब्याज अनुदान अग्रिम के रूप में दिया जाना होगा, वह वर्ष के प्रारंभ से ही राज्य शासन द्वारा पंजीयक, सहकारी संस्थाएं, एवं राज्य सहकारी बैंक के माध्यम से जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक को उपलब्ध करा दिया जाएगा। यह अनुदान गत वर्षो की ऋण वितरण के आधार पर गणना की जाकर उपलब्ध कराया जाएगा। संस्था द्वारा ब्याज अनुदान का दावा निर्धारित प्रारूप में प्रत्येक छःमाही समाप्त होने के 30 दिवस के अंदर किया जावेगा। बैंक/संस्था द्वारा प्रस्तुत दावा पत्रक का, जिले के उप/सहायक पंजीयक द्वारा स्वीकृति उपरांत राशि का अविलम्ब भुगतान करने की जवाबदारी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों की होगी।
(तीन) उपरोक्त अग्रिम राशि में से ब्याज अनुदान प्रत्येेक छःमाही में स्वीकृत दावा के आधार पर समायोजित किया जावेगा। अग्रिम राशि के समायोजन उपरांत स्वीकृत दावा राशि शेष रहने पर शासन से पुनः राशि की मांग की जावेगी।
(चार) इन नियमों का उल्लघंन किये जाने पर ब्याज अनुदान रोकने/स्थगित करने का अधिकार पंजीयक/शासन को होगा।
(पांच) ब्याज अनुदान के लिए आवश्यक बजट प्रावधान सहकारिता विभाग द्वारा किया जावेगा । 07. उपयोगिता प्रमाण पत्र ः- ब्याज अनुदान का उपयोगिता प्रमाण पत्र जिले के उप/सहायक पंजीयक द्वारा सत्यापित कराकर जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक द्वारा राज्य सहकारी बैंक के माध्यम से पंजीयक सहकारी संस्थाएं को प्रस्तुत किया जावेगा।
08. विविध :-
(एक) राज्य शासन/पंजीयक को इस नियम के सुचारू रूप से संचालन एवं क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्रशासनिक मार्गदर्शन, निर्देश एवं स्पष्टीकरण जारी करने का अधिकार होगा।
(दो) इस नियम में संशोधन करने का अधिकार राज्य शासन को होगा ।
हस्ता./-
(पी.एस. सर्पराज) उप-सचिव.