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शासन
छत्तीसगढ
पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़/दुर्ग/ 09 / 2013-2015 . " "बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान ( बिना डाक टिकट ) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22- छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से . भिलाई , दिनांक 30-05-2001 . "
सत्यमेव जयते
छत्तीसगढ़ राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
अग्रहायण 24 , शक 1943
रायपुर, बुधवार, दिनांक 15 दिसम्बर 2021
क्रमांक 620 ]
छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय रायपुर, बुधवार, दिनांक 15 दिसम्बर 2021 ( अग्रहायण 24, 1943 )
क्रमांक-11987/वि.स./विधान/ 2021. छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों केपालन में छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ( संशोधन) विधेयक, 2021 (क्रमांक 14 सन् 2021 ) जो बुधवार, दिनांक 15 दिसम्बर, 2021 को पुरःस्थापित हुआ है, को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है.
हस्ता./-
(चन्द्र शेखर गंगराड़े ) प्रमुख सचिव.
1239 1240
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 15 दिसम्बर 2021
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्रमांक 14सन् 2021)
छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ( संशोधन ) विधेयक , 2021
छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम , 1995 ( क्र . 26 सन् 1995) को और संशोधित करने हेतु विधेयक.
भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधानमंडल द्वारा निम्नलिखित रुप में यह अधिनियमित हो: - 1.
संक्षिप्त नाम , एवं प्रारंभ
(1) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ( संशोधन ) अधिनियम, 2021 कहलायेगा.
यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा . (2)
2.
धारा 2 का संशोधन
छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1995 (क्र . 26 सन् 1995 ) ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है) की धारा 2 के खण्ड ( घ ) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित कियाजाये, अर्थात्: -
" (घ) " सदस्य" से अभिप्रेत है आयोग का कोई सदस्य तथा इसमें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सम्मिलित है. " 3.
धारा 3 का संशोधन
मूल अधिनियम की धारा 3 की उप - धारा ( 2 ) के खण्ड (क) में , शब्द " एक अध्यक्ष (चेयरपर्सन ) होगा" के पश्चात्, शब्द " तथा एक उपाध्यक्ष होगा " अंतःस्थापित किया जाये .
4.
धारा 4 का संशोधन
मूल अधिनियम की धारा 4 में, शब्द " अध्यक्ष" जहां कहीं भी आया हो के पश्चात्, शब्द" ,उपाध्यक्ष" अंतःस्थापित किया जाये.
5.
धारा 6 का संशोधन
मूल अधिनियम की धारा 6 में, शब्द " अध्यक्ष " के पश्चात्, शब्द " ,उपाध्यक्ष" अंतःस्थापित किया जाये.
6 .
धारा 16 का संशोधन
मूल अधिनियम की धारा 16 में , शब्द " अध्यक्ष, " के पश्चात्, शब्द " उपाध्यक्ष, " अंतःस्थापित कियाजाये. उद्देश्य और कारणों का कथन
यतः , छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1995 (क्र. 26 सन् 1995 ) यह उपबंधित करता है कि आयोग में ऐसे सात अशासकीय सदस्य शामिल होंगे, जो पिछड़ा वर्ग से संबंधित मामलों में विशिष्ट ज्ञान रखते हो तथा इनमें से एक अध्यक्ष होगा ,
और यतः , राज्य में पिछड़ा वर्गों की जनसंख्या को दृष्टिगत रखते हुए तथा उक्त अधिनियम के उद्देश्य को पूरा करने के लिए , उक्त अधिनियम में उपाध्यक्ष के लिए प्रावधान करना प्रस्तावित है .
अतएव , छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1995 ( क्र . 26 सन् 1995 ) की धारा 2,3,4 ,6 एवं 16 में संशोधन करना आवश्यक है. अतः यहविधेयक प्रस्तुत है.
डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम रायपुर,
दिनांक 13 दिसम्बर , 2021
आदिम जातिविकास मंत्री (भारसाधक सदस्य) छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 15 दिसम्बर 2021
1240 (1) छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1995
धारा 2,3,4 ,6 एवं 16 का उपाबंध
1. धारा-2 खण्ड ( घ) : -
"सदस्य" से अभिप्रेत है, आयोग का सदस्य तथा इसमें अध्यक्ष (चेयरपर्सन) सम्मिलित है.
2. धारा 3 , उपधारा ( 2 ) , खण्ड (क) : -
"सात अशासकीय सदस्य जो पिछड़े वर्गों से संबंधित मामलों में विशेष ज्ञान रखते हों जिनमें से एक अध्यक्ष (चेयरपर्सन) होगा, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा नियुक्तकिया जाएगाः परन्तु सदस्यों में से कम से कम तीन सदस्य पिछड़े वर्गों में से होंगे . "
धारा 4: - 3.
(1) आयोग का प्रत्येकअशासकीय सदस्य, उस तारीख से जिसको कि वह पद ग्रहण करता है, तीन वर्षकी अवधि के लिए पद धारण करेगा.
(2) कोई सदस्यकिसी भी समय राज्य सरकार को संबोधित स्वहस्ताक्षरित लेख द्वारा यथास्थिति अध्यक्ष या सदस्य का पद त्याग सकेगा.
(3) राज्य सरकार, सदस्य के पद से किसी व्यक्ति को हटा देगी, यदि वह व्यक्ति
(क) अनुन्मोचित दिवालिया हो जाता है
(ख) किसी ऐसे अपराध के लिए, जिसमें राज्य सरकार की राय में नैतिक अधमता अन्तर्वलित है, दोष सिद्ध हो जाता है और कारावास से दंडाविष्ट किया जाता है.
(ग ) विकृतचित्त हो जाता है तथा किसी सक्षम न्यायालय द्वारा ऐसा घोषित किया जाता है.
(घ) कार्य करने से इंकार करता है या कार्य करने में असमर्थ हो जाता है.
(ड) आयोग से अनुपस्थित रहने की अनुमति अभिप्राप्त किये बिना आयोग के लगातार तीन सम्मिलिनों से अनुपस्थित रहता है, या
(च ) राज्य सरकार की राय में अध्यक्ष या सदस्य की हैसियत का इस प्रकार दुरूपयोग करता है, जिससे कि उस व्यक्ति का पद पर बना रहना अनुसूचित जनजातियों के हित या लोकहित के लिए अपायकर हो गया है:
परंतु किसी व्यक्ति को इस खण्ड के अधीन तब तक नहीं हटाया जायेगा जब तक कि उसे उस मामले में सुनवाई काअवसर नहींदेदिया गयाहै.
(4) उपधारा (2 ) के अधीन या अन्यथा कारित रिक्ति को नया नामनिर्देशन करके भरा जायेगा तथा इस प्रकार नामनिर्दिष्ट व्यक्ति अपने पूर्ववर्ती के पद की शेष अवधि तक पद धारण करेगा.
(5) अध्यक्ष तथा सदस्यों को देय वेतन तथा भत्ते और सेवा संबंधी अन्य निबंधन तथा शर्ते ऐसी होगी जैसा कि विहित कियाजाये.
4.
धारा 6: -
अध्यक्ष तथा सदस्योंको देय वेतन और भत्तों और प्रशासनिक व्ययों, जिसके अंतर्गत धारा 5 में निर्दिष्ट सचिव , अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारियों कोदेय वेतन, भत्ते तथा पेंशन है, का भुगतान धारा 12 की उपधारा ( 1 ) में निर्दिष्ट अनुदानों में से कियाजायेगा.
5.
धारा 16: -
आयोग के अध्यक्ष , सदस्य, अधिकारी और कर्मचारी भारतीय दण्ड संहिता 1860 ( 1860 का सं. 45 ) की धारा 21 के अर्थ के अंतर्गत लोक सेवक समझे जाएंगे.
चन्द्र शेखर गंगराड़े
प्रमुख सचिव
छत्तीसगढ़ विधान सभा.
संचालक , मुद्रण तथालेखन सामग्री , छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय , रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित 2021 .