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Chattisgarh Gazette - Extraordinary · Government of Chattisgarh

‘‘कृषकों के सहकारी ऋणों पर ब्याज अनुदान नियम 2021’’ संबंधी

Published 11 February 2022

Department
सहकारिता विभाग
Type
Extraordinary
Gazette no.
69
Notification no.
क्रमांक/एफ 15-17/15-2/2021/1
Identifier
in.gazette.chhattisgarh.eo.2022-02-11.69
Languages
English, Hindi

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 सहकारिता विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर

अटल नगर, दिनांक 4 फरवरी 2022

अधिसूचना

राज्य के कृषकों को सहकारी कृषि ऋणों पर ब्याज अनुदान नियम

क्रमांक/एफ 15-17/15-2/2021/1.⸺

प्रस्तावना : -

प्रदेश के कृषकों के व्यापक हितों को दृष्टिगत रखते हुए राज्य शासन द्वारा सहकारी समितियों/बैंको से संबंद्ध कृषकों को कृषि कार्य हेतु राज्य शासन द्वारा दिनांक 01-04-2014 से ब्याज मुक्त अल्पकालीन कृषि ऋण एवं परम्परागत गौ-पालक एवं उद्यानिकी कृृषकों को अल्प ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि, मछली पालन को कृषि के समान संस्थागत ऋण सहायता प्रदान किया जावेगा। मछली पालन विभाग के आदेश दिनांक 02-08-2021 अनुसार मत्स्य पालन हेतु मत्स्य पालकों/मत्स्य समूह व समितियों को अल्पकालीन ऋण पर ब्याज अनुदान देय होगा।

बैंक द्वारा आंकलित प्राईम लेंडिंग रेट एवं पंजीयक द्वारा निर्धारित संस्था के मार्जिन के आधार पर कृषकों को प्रभारित ब्याज दर में से प्रभावशील ब्याज दर घटाने के पश्चात्‌ शेष राशि की प्रतिपूर्ति ब्याज अनुदान के रूप में शासन द्वारा सहकारी बैंकों/ समितियों को की जावेगी। इसके क्रियान्वयन के लिये निम्नानुसार नियम एवं प्रक्रिया निर्धारित की जाती है :-

01. संक्षिप्त नाम, प्रारंभ तथा विस्तार :-

(एक) यह नियम ''कृषकों के सहकारी ऋणों पर ब्याज अनुदान नियम 2021'' कहलाएगा।

(दो) यह नियम दिनांक 01 अक्टूबर, 2021 से, प्रभावशील होगा।

(तीन) इसका विस्तार सम्पूर्ण छत्तीसगढ राज्य की सीमा तक होगा। 02. परिभाषाएं :-

(एक) कृषक-''कृषक'' का अभिप्राय ऐसे व्यक्ति से है जो भूस्वामी, मौरूसी कृषक, शासकीय पट्‌टेदार या सेवा भूमि के स्वत्व में कृषि भूमि धारण करता हो या अन्य किसी व्यक्ति की कृषि भूमि पर खेती करता हो।

(दो) सीमांत कृषक- ''सीमांत कृषक'' से अभिप्राय ऐसे कृषक से है जो अधिकतम 2.5 एकड़ तक कृषि भूमि धारण करता हो ।

(तीन) लघु कृषक- ''लघु कृषक'' से अभिप्राय ऐसे कृषक से है जो 2.5 एकड़ से अधिक तथा 5 एकड़ तक कृषि भूमि धारण करता हो।

(चार) बैंक-''बैंक'' का अभिप्राय राज्य सहकारी बैंक, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक से है। जिसे आगे क्रमशः शीर्ष बैंक, जिला बैंक, के नाम से उल्लेखित किया गया है।

(पांच) संस्था-''संस्था'' का अभिप्राय प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था/ वृहत्ताकार प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था/कृषक सेवा सहकारी संस्था/आदिम जाति बहुउद्‌देशीय सहकारी संस्था, से है। (छः) ऋण- ''ऋण'' का अभिप्राय कृषक सदस्यों को नियम 2(चार) में वर्णित बैंक एवं नियम 2(पांच) में वर्णित संस्थाओं द्वारा वितरित कृषि प्रयोजन हेतु अल्पकालीन ऋण तथा परंपरागत गौ-पालन (डेयरी), मत्स्य पालन एवं उद्यानिकी से संबंधित ऋण से है।

(सात) अल्पकालीन कृषि ऋण ः- ''अल्पकालीन कृषि ऋण'' का अभिप्राय कृषि एवं कृषि संबद्ध प्रयोजनों संबंधी उन सभी कार्यो से है, जिनके लिए बैंक/संस्था द्वारा अल्पकालीन ऋण दिया जाता है। (आठ) परंपरागत गौ-पालक- परंपरागत गौ-पालक का अभिप्राय ''ऐसे लघु एवं सीमांत कृषक, जो पारंपरिक गौ-पालन विधि एवं रीति से गौ-पालन कर अपना जीविकोपार्जन करते हो।

(नौ) मत्स्य पालक कृषक- मत्स्य पालक कृषक का अभिप्राय ''ऐसे लघु एवं सीमांत कृषक जो स्वयं के तालाब में, या स्वयं की भूमि पर नवीन तालाब निर्माण करवा कर या पंचायतों/निकाय/निजी स्वामित्व के तालाबों को पट्‌टे पर लेकर मत्स्य पालन कर रहा हो या करना चाहता हो।

(दस) मत्स्य पालक समूह - "मत्स्य पालक समूह" से अभिप्राय ऐसे समूह से है जो, मत्स्य पालन का कार्य विगत एक वर्ष से करता हो तथा मत्स्य पालन अथवा अन्य विभाग से पंजीबद्ध हो।

(ग्यारह) प्राथमिक मत्स्य सहकारी समिति- "प्राथमिक मत्स्य सहकारी समिति" से अभिप्राय पंजीयक द्वारा पंजीकृत मत्स्य पालक सदस्यों की समिति से है।

(बारह) उद्यानिकी कृषक (हार्टिकल्चरिस्ट) - उद्यानिकी कृषक का अभिप्राय ''ऐसे लघु एवं सीमांत कृषक जो फल, फूल, सब्जी, मशरूम तथा औषधीय एवं सुगंधित फसलों की काश्त करता हो।

(तेरह) पंजीयक -''पंजीयक'' का अभिप्राय सहकारी संस्थाओं के पंजीयक से है और उसमें सम्मिलित है सहकारी संस्थाओं के अपर पंजीयक, संयुक्त पंजीयक, उप पंजीयक, सहायक पंजीयक अथवा ऐसा कोई अधिकारी जो नियम 2 (चार) में वर्णित बैंक एवं नियम 02 (पांच) में वर्णित संस्था के लिए रजिस्ट्रार की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए सक्षम हो।

(चौदह) प्राइम लेंडिंग रेट - ''प्राईम लेंडिंग रेट'' से अभिप्राय भारतीय रिजर्व बैंक के मार्गदर्शी सिद्धांतों के अनुसार कास्ट ऑफ फंड, रिस्क कास्ट, ट्रान्जेक्शन कॉस्ट एवं बैंक के मार्जिन के आधार पर बैंक द्वारा निर्धारित उधार देने की न्यूनतम दर से है।

03. पात्रता :-

(एक) ब्याज अनुदान की पात्रता नियम 02 (चार) में वर्णित बैंकोेंं एवं नियम 02 (पांच) में वर्णित संस्था को होगी।

(दो) ब्याज अनुदान की पात्रता, नियम 02 (सात) में वर्णित ऋण तथा नियम 02, (आठ), (नौ), (दस), (ग्यारह) एवं (बारह) में वर्णित कृषक, समूह एवं समिति को उनसे संबंधित कार्यो के लिए दिये जाने वाले ऋण पर होगी।

(तीन) बैंक के प्राइम लेन्डिन्ग रेट में संस्था के मार्जिन को जोड़ने के बाद, निर्धारित ब्याज दर में से कृृषकों को प्रभावशील ब्याज दर घटाने के पश्चात्‌्‌ शेष ब्याज दर के अनुसार ब्याज अनुदान की पात्रता होगी।(चार) बैंक के प्राइम लेंडिन्ग रेट की गणना भारतीय रिजर्व बैंक के मार्गदर्शी सिद्धांतों के तहत किया जावेगा। (पांच) बैंक के प्राइम लेंंन्डिन्ग रेट में परिवर्तन होने पर ब्याज दर का पुनः निर्धारण बैंक द्वारा किया जा सकेगा। 04. प्रभावशील ब्याज दरें :- राज्य शासन के निर्णय अनुसार कृृषकों को अल्पकालीन कृषि ऋण, गौ-पालन, मत्स्य पालन एवं उद्याानिकी कार्यों हेतु सहकारी समितियों/बैंकों के माध्यम से दिये जाने वाले ऋणों पर प्रभावशील ब्याज दरे निम्नानुसार होगी :-

(एक) अल्पकालीन कृषि ऋण - कृषकों को अल्पकालीन कृृषि प्रयोजन हेतु दिये जाने वाला ऋण ब्याज मुक्त (0% ब्याज दर) होगा।

(दो) गौ-पालन हेतु ऋण - परंपरागत गौ-पालक कृषकों को रूपये 2.00 लाख तक का ऋण 1% ब्याज दर पर एवं रूपये 2.00 लाख से अधिक एवं रूपये 3.00 लाख तक के ऋण 3% ब्याज दर पर दिया जावेगा।

(तीन) मत्स्य पालन हेतु ऋण - मत्स्य पालक, मत्स्य पालक समूह एवं प्राथमिक मत्स्य सहकारी समितियों को रुपये 3.00 लाख तक दिये जाने वाला ऋण, अल्पकालीन कृषि ऋण के समान ब्याज मुक्त (0% ब्याज दर) होगा।

(चार) उद्यानिकी कार्यों हेतु ऋण - उद्यानिकी कृषकों को रूपये 1.00 लाख तक का ऋण 1% ब्याज दर पर एवं रूपये 1.00 लाख से अधिक एवं रूपये 3.00 लाख तक के ऋण 3% ब्याज दर पर दिया जावेगा।"

05. ब्याज अनुदान का आंकलन :-

(एक) कृषि प्रयोजन, पशुपालन, मत्स्यपालन एवं उद्यानिकी ऋण में यदि प्रशासकीय विभाग/केन्द्र शासन का कोई अनुदान प्राप्त हो तो अनुदान राशि कृषक की ऋण राशि में समायोजन पश्चात्‌ शेष ऋण पर ब्याज अनुदान का निर्धारण किया जावेगा।

(दो) वितरित ऋणों पर केन्द्र शासन से कोई ब्याज अनुदान प्राप्त होगा तो उस राशि को ब्याज अनुदान की गणना में देय ब्याज अनुदान में से कम किया जावेगा।

(तीन) बैंक द्वारा आंकलित प्राईम लेंडिंग रेट एवं पंजीयक द्वारा संस्था के लिये निर्धारित मार्जिन के आधार पर, कृषक स्तर पर ब्याज दर का निर्धारण करने के फलस्वरूप कृषकों के लिए नियम 04 के अनुसार प्रभावशील ब्याज दर घटाने के पश्चात्‌्‌ अंतर की राशि की प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा ब्याज अनुदान के रूप में की जावेगी। ब्याज अनुदान आंकलन निम्नानुसार किया जावेगा :-

(चार) ब्याज अनुदान आंकलन का सूत्र निम्नानुसार होगा :-

बैंक का प्राईम लेंडिंग रेट पंजीयक के द्वारा प्राथमिक कृृषि साख सहकारी संस्था का निर्धारित मार्जिन - केन्द्र सरकार/अन्य विभाग का अनुदान (यदि कोई हो तो) - नियम 04 के अनुसार प्रभावशील ब्याज दर = ब्याज अनुदान।

06. आहरण एवं भुगतान की प्रक्रिया :-

(एक) ब्याज अनुदान का आंकलन कर दावा प्रस्तुत करने की प्रक्रिया निम्नानुसार होगी :-

संस्था, नियम 03 की पात्रता अनुसार एवं नियम 04 एवं 05 के अनुसार ब्याज अनुदान का आंकलन कर पंजीयक द्वारा निर्धारित प्रपत्र में दावा संबंधित जिला सहकारी बैंक/राज्य सहकारी बैंक को प्रस्तुत करेगी। त्रुटि रहित दावा पत्रक प्रस्तुत करने की जवाबदारी संस्था के प्रबंधक की होगी। बैंक प्रस्तुत दावों का जिले के उप/सहायक पंजीयक द्वारा अपने अधिनस्थ निरीक्षकों से जांच (परीक्षण) कराकर अविलम्ब स्वीकृति दी जावेगी।

(दो) राज्य शासन की ओर से बैंकों को जो ब्याज अनुदान दिया जाना है, वह वर्ष के प्रारंभ से ही राज्य शासन द्वारा पंजीयक, सहकारी संस्थाएं, एवं राज्य सहकारी बैंक के माध्यम से जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक को उपलब्ध करा दिया जाएगा। यह अनुदान गत वर्षो की ऋण वितरण के आधार पर गणना की जाकर उपलब्ध कराया जाएगा। संस्था द्वारा ब्याज अनुदान का दावा निर्धारित प्रारूप में प्रत्येक छःमाही समाप्त होने के 30 दिवस के अंदर किया जावेगा। संस्था द्वारा प्रस्तुत दावा पत्रक का, जिले के उप/सहायक पंजीयक द्वारा स्वीकृति उपरांत राशि का अविलम्ब भुगतान करने की जवाबदारी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों की होगी। (तीन) उपरोक्त अग्रिम राशि में से ब्याज अनुदान प्रत्येेक छःमाही में स्वीकृत दावा के आधार पर समायोजित किया जावेगा। अग्रिम राशि के समायोजन उपरांत स्वीकृत दावा राशि शेष रहने पर शासन से पुनः राशि की मांग की जावेगी।

(चार) इन नियमों का उल्लघंन किये जाने पर ब्याज अनुदान रोकने/स्थगित करने का अधिकार पंजीयक/शासन को होगा।

(पांच) ब्याज अनुदान के लिए आवश्यक बजट प्रावधान सहकारिता विभाग द्वारा किया जावेगा । 07. उपयोगिता प्रमाण पत्र :-

ब्याज अनुदान का उपयोगिता प्रमाण पत्र जिले के उप/सहायक पंजीयक द्वारा सत्यापित कराकर जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक द्वारा राज्य सहकारी बैंक के माध्यम से पंजीयक सहकारी संस्थाएं को प्रस्तुत किया जावेगा। 08. विविध :-

(एक) राज्य शासन/पंजीयक को इस नियम के सुचारू रूप से संचालन एवं क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्रशासनिक मार्गदर्शन, निर्देश एवं स्पष्टीकरण जारी करने का अधिकार होगा।

(दो) इस नियम में संशोधन करने का अधिकार राज्य शासन को होगा ।

हस्ता./-

(पी.एस. सर्पराज) उप-सचिव.

Cite this issue. Chattisgarh Gazette - Extraordinary, Government of Chattisgarh, 11 February 2022. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.chhattisgarh.eo.2022-02-11.69/. Archive identifier in.gazette.chhattisgarh.eo.2022-02-11.69.