आवास एवं पर्यावरण विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर
अटल नगर, दिनांक 24 मई 2022
क्रमांक एफ 3-01/2020/32.⸺मंत्रि-परिषद आदेश दिनांक 1 मई, 2022 द्वारा छत्तीसगढ़ प्रदेश में विभिन्न विभागों/निगम/मंडल/कम्पनी/बोर्ड के अधीन स्वामित्व की अनुपयोगी शासकीय भूमि का व्यवस्थित विकास एवं सदुपयोग हेतु ''रिडेव्हलपमेंट कार्ययोजना'' का अनुमोदन प्राप्त है।
2/ अतः प्रदेश में विभिन्न विभागों/निगम/मंडल/कम्पनी/बोर्ड के अधीन स्वामित्व की अनुपयोगी शासकीय भूमि का व्यवस्थित विकास एवं सदुपयोग हेतु ''रिडेव्हलपमेंट कार्ययोजना'' के क्रियान्वयन हेतु विस्तृत कार्ययोजना निम्नानुसार हैः-
1. प्रस्तावना :-
पुराने शासकीय भवन/परिसर जो कि विभागीय गतिविधियों के लिए अपर्याप्त हो जाने, विशेष मरम्मत व्यवहारिक न होने या नगर विकास से सुसंगत न होने की स्थिति में हो ऐसे भवनों/परिसरों का पुनर्घनत्वीकरण एवं पुनर्विकास किया जाना है। साथ ही साथ निगम मण्डल या सहकारी संस्था के ऐसे परिसर जो कि अनुपयोगी या समय के साथ नगर विकास के चलते असंगत हो चुकी है, उनका भी पुनर्घनत्वीकरण या पुनर्विकास किया जाना आवश्यक है। अतः शासकीय भवन/परिसर एवं निगम मण्डल की भूमि का भूमि विकास नियम 1984 या संबंधित नगर विकास योजना के अनुसार आवश्यक शासकीय संरचनाएॅ नवनिर्मित करने या अन्य भूखण्डों पर शासकीय संरचनाएॅ निर्मित करते हुए भूखण्डों का नगरीकरण कर शासन के संसाधनों में उचित वृद्धि की कार्यवाही आवश्यक हो जाती है। इसके लिए शासकीय कोष का उपयोग न करते हुए शासकीय भवन या निगम, मण्डलों की भूमि का स्वयं संसाधन के रूप में समुचित उपयोग करते हुए शासकीय सम्पत्तियों के निर्माण या नगदीकरण किया जाना है। शहरी क्षेत्र के उक्त भूखण्डों का सुसंगत एवं योग्य घनत्व से विकास सुनिश्चित करने के लिए पुनर्घनत्वीकरण सिद्धांत पर रिडव्हलपमेंट योजना के मार्गदर्शी सिद्धांत निम्नानुसार होंगे :-
2. योजना का विस्तार :-
2.1 यह योजना सामान्यतः नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा-13 के अंतर्गत घोषित किये गये निवेश क्षेत्र (Planning Area) में मुख्यतः लागू होगी। किन्तु नोडल विभाग द्वारा अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह के अनुमति पश्चात पृथक से किसी परियोजना विशेष हेतु उपरोक्तानुसार घोषित निवेश क्षेत्र (Planning Area) के बाहर भी परियोजना क्रियान्वित करने की स्वीकृति दी जा सकेगी।
2.2 राज्य शासन के किसी भी विभाग अथवा उसके उपक्रमों (निगम/मण्डल या उससे संबंधित सहकारी समिति) के भवन/परिसरों की भूमि का रिडव्हलपमेंट किया जा सकेगा। 2.3 इस योजना के अंतर्गत चिन्हित परिसरों/भवनों के निर्माण या एवं नगदीकरण के लिए आवश्यकतानुसार आवासीय, व्यावसायिक एवं समुचित परिसरों का निर्माण अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह के अनुमति अनुरूप किया जा सकेगा। 3. रिडव्हलपमेंट (पुर्नविकास) :-
रिडव्हलपमेंट का तात्पर्य निम्नलिखित कार्यो से है :-
क) चिन्हित भवन एवं परिसरों का, जो भी जर्जर घोषित करने योग्य हो, या जिनकी मरम्मत या तो संभव नहीं हो या मरम्मत किया जाना वित्तीय दृष्टि से लाभकारी नहीं है, ऐसे भूखण्ड पर या अन्य शासकीय भूमि पर, नवनिर्माण। ख) किसी भी चिन्हित भवन/परिसर, जिसमें कर्मचारियों की संख्या बढ़ने अथवा विभागीय गतिविधियों में वृद्धि होने के कारण वर्तमान उपलब्ध स्थान सर्वथा अपर्याप्त हो गया हो, उस भवन/ परिसर के भूखण्ड पर या अन्य शासकीय भूखण्ड पर नवनिर्माण अथवा विस्तार।
ग) वर्तमान चिन्हित भवन/परिसर के आसपास व्यावसायिक गतिविधियां या अन्य संस्थागत क्षेत्र विकसित होने के कारण या सघन निर्माण हो जाने के कारण चिन्हित भवन/परिसरों में कार्य संचालित करना पर्यावरण एवं आवागमन की दृष्टि से उचित नहीं होने या इन भवनों/ परिसरों की भूमियां असंगत भूमि उपयोग की श्रेणी में आ जाने से ऐसे भवन/ परिसरों का अन्य शासकीय भूखण्ड पर नवनिर्माण।
घ) पुराने चिन्हित भवन/परिसर में अवस्थित संरचनाएं जीर्णशीर्ण होने के कारण एवं उक्त जीर्णशीर्ण संरचनाओं की आवश्यकता नहीं होने के कारण उक्त भूमि के संगत एवं अनुमत घनत्व के भूमि उपयोग के माध्यम से सृजित वित्तीय संसाधनों से नगरीय क्षेत्र की आवश्यकतानुसार अन्य शासकीय विभाग या उनके उपक्रम (निगम/मण्डल/ सहकारी समिति) संरचनाओं का अन्यत्र निर्माण।
ड) चिन्हित भवन/परिसरों की भूमि पर समान अथवा अन्य समुचित शासकीय परिसम्पत्ति का नवनिर्माण एवं उक्त नवनिर्माण के लिए आवश्यक संसाधन हेतु उसकी निवेश क्षेत्र (Planning Area) में अन्य रिक्त शासकीय भूमि/भूखण्ड का निर्माण एजेंसी को व्ययन। ऐसे व्ययन हेतु भूमि का विकल्प न होने पर भूमि मूल्य की गणना कर आधारभूत मूल्य निर्धारण कर नगदीकरण।
च) चिन्हित भवन/परिसर से तात्पर्य शासन के समस्त विभाग, संचालनालय, निगम/ मण्डल/कंपनी/बोर्ड या समिति जो कि शासन के नियंत्रण, नियमन में है, तथा अर्द्धशासकीय निकाय की श्रेणी में आते हैं या सहकारी समिति, इनके अधिपत्य या स्वामित्व की भूमि का कोई उपयोग नहीं हो रहा है, आंशिक उपयोग हो रहा है अथवा निर्मित भवन जर्जर होने के कारण उपयोग योग्य नहीं है। इन परिसरों में निरंतर अतिक्रमण हो रहा है, जिससे नगरों के अव्यवस्थित विकास को बढ़ावा मिल रहा है।
छ) चिन्हित भवन/परिसरों की भूमि पर प्रचलित नगर विकास योजना (Master Plan) अथवा यदि नगर विकास योजना, प्रचलित न हो तो छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 2012 के प्रावधानित FAR (Floor Area Ratio) या अतिरिक्त FAR के अनुसार निर्माण। अतिरिक्त FAR आवश्यक हो तो इन नियमों के अधीन प्रक्रियानुसार उपलब्ध किया जाएगा। 4. रिडव्हलपमेंट योजना के अंतर्गत परियोजनाएं (Projects) :-
रिडव्हलपमेंट योजना के अंतर्गत निर्मित किये जाने वाली परियोजनाओं (Projects) में निम्न घटक शामिल किये जायेंगे :-
क) चिन्हित भूखण्ड या भूखण्डों का रिडव्हलपमेंट किया जाना है उनका स्थल विवरण, क्षेत्रफल एवं पंजीयन विभाग द्वारा जारी गाईडलाईन के अनुसार भूखण्ड का मूल्य।
ख) उक्त भूखण्ड या भूखण्डों पर निर्मित वर्तमान शासकीय संरचनाओं का विवरण, स्थिति एवं अनुमानित अपलेखित मूल्य।
ग) यदि भूमि मूल्य के विरूद्ध शासकीय संरचनाएं जिसे उसकी स्वरूप में अथवा विस्तारित रूप से जहां नवनिर्माण किया जाना हो या निर्मित संपत्ति के साथ व्यवस्थापन किया जाना हो, का विवरण एवं उक्त संरचना अगर अन्य भूखण्ड में निर्मित किया जाना है तो उक्त भूखण्ड/भूखण्डों का पूर्ण विवरण।
घ) जिन चिन्हित भूखण्डों पर निर्मित शासकीय संरचनाओं के पुनर्निमाण, विस्तार एवं अन्य शासकीय निर्माण प्रस्तावित हो, को लोक निर्माण विभाग के वर्तमान दर सूची अनुसार अनुमानित लागत (परियोजना अंतर्गत शासकीय निर्माण लागत) एवं कार्य पूर्ण करने की समयावधि।
ड) उन भूखण्ड या भूखण्डों का, जो चयनित निर्माण एजेंसी को दिया जाना है, उसका पूर्ण विवरण एवं योजना अनुसार न्यूनतम निर्धारित मूल्य। उक्त भूखण्ड/भूखण्डों के निवर्तन के चरण (Phase)।
च) शासकीय कोष में जमा की जाने वाली अनुमानित राशि एवं इसके चरण (Phase)।
छ) परियोजना स्ववित्त (Self Financing) आधार पर हो का प्रयास। ज) क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा अपेक्षित Viability Gap (VG) की अनुमानित विवरण।
5. प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन एवं विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन :-
क) प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन (PPR) :-
सर्वप्रथम क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन (PPR) तैयार किया जाए जिसका नोडल विभाग के माध्यम से अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह से अनुमोदन प्राप्त किया जाएगा। प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन (PPR) मूल रूप से परियोजना में शामिल विभिन्न भूखण्डों, उसमें निर्मित अपलेखन योग्य संपत्ति एवं भूमि मूल्य, परियोजना के अंतर्गत निर्मित की जाने वाली शासकीय संरचना, शासकीय कोष में जमा की जाने वाली राशि का अनुमान (Estimation) एवं शहर के विकास में परियोजना के संभावित योगदान का विश्लेषण शामिल किया जाएगा। ख) विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) :-
प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन (PPR) के अनुमोदन के पश्चात विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार किया जाए जिसमें वास्तुविद एवं अन्य परामर्शदाता के माध्यम से विस्तृत प्राक्कलन, वास्तुविदीय अकल्पना, निविदा शर्ते एवं अन्य समस्त विस्तृत विश्लेषण शामिल किया जाएगा। पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप के अंतर्गत विकास प्रस्तावित है तो दायित्वो, भार, योजना से लाभ-हानि का विवरण डी.पी.आर. में प्रस्तुत किया जायेगा।
6. नोडल विभाग -
आवास एवं पर्यावरण विभाग रिडव्हलपमेंट परियोजनाओं हेतु नोडल विभाग होगा एवं इस योजना में उसका दायित्व निम्नानुसार होगा :-
क) रिडव्हलपमेंट योजना के अंतर्गत निर्मित परियोजनाओं हेतु आवश्यक विभिन्न स्वीकृतियां सक्षम प्राधिकारी से समयावधि में जारी हो, यह सुनिश्चित करना।
ख) ऐसी परियोजनाओं का क्रियान्वयन PPP Mode या जिनका क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा स्वयं किया जाएगा। इसका निर्धारण अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह से कराना।
ग) योजना के क्रियान्वयन के लिए प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन, निविदा प्रारूप का सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन प्राप्त करना।
घ) अनुबंध एवं अन्य वैधानिक दस्तावेजों का सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन प्राप्त करना।
ड़) क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा जारी निविदाओं की जानकारी अधिकार सम्पन्न समिति के समक्ष रखना।
च) प्राधिकार समिति के अधिकार क्षेत्र के मामलों को परीक्षण कर अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह के आदेश हेतु प्रस्तुत करना।
छ) ऐसी परियोजनाएं, जिनमें Viability Gap (VG) की आवश्यकता हो, सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन प्राप्त करना। ज) योजना के क्रियान्वयन के लिए परियोजना में आने वाली कठिनाईयों को दूर करने के लिए अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह से निर्देश प्राप्त करना तथा आवश्यक होने पर मंत्रि-परिषद से आदेश प्राप्त करना।
7. क्रियान्वयन एजेंसी :-
7.1 क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में राज्य शासन के निम्न अधिकरण क्रियान्वयन एजेंसी का कार्य कर सकेंगे :-
क) छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मण्डल,
ख) छत्तीसगढ़ अधोसंरचना विकास निगम,
ग) छत्तीसगढ़ स्टेट रोड डव्हलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड
घ) नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 के अंतर्गत गठित प्राधिकरण।
ड) किसी विशेष योजना हेतु कोई अन्य एजेंसी जिसके पास पर्याप्त अमला उपलब्ध हो उसे संबंधित विभाग की अनुशंसा पर अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह द्वारा अनुमोदित किया जा सकेगा।
7.2 क्रियान्वयन एजेंसी के दायित्व निम्नानुसार होंगे :-
क) प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन, भूमि के विकास की योजना तैयार करना, निविदा प्रपत्र एवं अन्य वैधानिक दस्तावेजों के प्रारूप तैयार करना।
ख) निविदा आमंत्रित करना। प्राप्त निविदा का अनुमोदन हेतु सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तुत करना।
ग) स्वीकृत निविदा के अनुसार समय मर्यादा में कार्य पूर्ण कराना एवं आवश्यकता हो तो संबंधित शासकीय विभाग/उपक्रमों (निगम/मण्डल) को हस्तांतरित करना या संबंधित विकासक को हस्तांरित करना। घ) Viability Gap (VG) की आवश्यकता का आकलन क्रियान्वयन एजेंसी करेगा एवं अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह से अनुमोदन प्राप्त करेगा, जो की राशि नोडल विभाग से प्राप्त कर निर्माण एजेंसी को निविदा शर्तो के अनुसार उपलब्ध कराना या Viability Gap को भूमि मूल्य के विरूद्ध समायोजित करना।
ड) जर्जर संपत्ति हटाने को या शासकीय निर्माण कार्यो के संबंध में आवश्यक अनुमतियां, यथासंभव पूर्व में ही प्राप्त करना। इन अनुमतियों पर किया जाने वाला व्यय परियोजना पर भारित करना।
च) आवश्यक अनुमतियां नगर तथा ग्राम निवेश विभाग, नगरीय निकाय आदि से प्राप्त करना होगा।
छ) पुर्नविकास योजना अंतर्गत अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह द्वारा स्वीकृत योजना में यदि भूमि उपयोग परिवर्तन की आवश्यकता की स्थिति में संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश विभाग द्वारा धारा-23(क) अंतर्गत 90 दिवस के अंदर भू-उपातंरण की कार्यवाही सुनिश्चित की जावे।
7.3 क्रियान्वयन एजेंसी की निम्नानुसार पर्यवेक्षण शुल्क (Supervision Charge) देय होगा :-
| क्र. | घटक | प्रतिशत |
| 1. | निर्माण परियोजना में प्रस्तावित कार्य को लोक निर्माण विभाग की वर्तमान दर सूची अनुसार लागत के आधार पर /PPP परियोजना में भूमि मूल्य पर | 8% |
| 2. | वास्तुविद या परामर्शदाता शुल्क | |
| क) बाह्य वास्तुविद या परामर्शदाता नियुक्त किया गया हो तो | अधिकतम 3% | |
| ख) आंतरिक वास्तुविद या परामर्शदाता की स्थिति में | 1% |
किसी PPP आधारित परियोजना विशेष के लिए अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह द्वारा अधिकतम 15 प्रतिशत तक पर्यवेक्षण शुल्क निर्धारित किया जा सकेगा
7.4 क्रियान्वयन एजेंसी को पर्यवेक्षण शुल्क रिडव्हलपमेंट हेतु निविदा स्वीकृति के उपरांत चयनित निर्माण एजेंसी (विकासक) के माध्यम से योजना की प्रगति अनुसार निर्धारित किश्तों में प्राप्त होगा।
8. विकासक/निर्माण एजेंसी :-
8.1 रिडव्हलपमेंट योजना के अंतर्गत परियोजना PPP के माध्यम से भी संचालित की जा सकेगी, कियान्वयन हेतु निर्धारित निविदा प्रक्रिया के माध्यम से अधिकतम दर के आधार पर चयनित अभिकरण चयनित निर्माण एजेंसी (विकासक) कहलाएगी।
8.2 चयनित निर्माण एजेंसी (विकासक) प्रमुखतः निम्नानुसार निर्माण कार्य करेगी :
क) निविदा अनुसार शासकीय संरचनाओं का निर्माण या समतुल्य भवनों का युक्तीयुक्तकरण।
ख) रिडव्हलपमेंट हेतु लीज पर निर्वर्तीत भूखण्ड/भूखण्डों पर निजी निर्माण कार्य एवं व्ययन।
8.3 अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह चाहे तो क्रियान्वयन एजेंसी को ही निर्माण एजेंसी नियुक्त कर सकती है। 9. योजना के अंतर्गत विभिन्न प्राधिकृत समितियां :
योजना के अंतर्गत निम्नानुसार प्राधिकृत समितियां होगी :-
9.1 अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह :-
क) जर्जर शासकीय भवनों के रिडव्हलपमेंट तथा निगम/मंडल/कंपनी/बोर्ड आदि के अनुपयोगी भूमि के रिडव्हलपमेंट हेतु अधिकार सम्पन्न मंत्री समूहों का गठन किया गया है। सबसे वरिष्ठ मंत्री समूह के बैठक की अध्यक्षता करेंगे। आवास एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव इसके संयोजक सचिव के रूप में कार्य करेंगे।
ख) संबंधित अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह रिडव्हलपमेंट हेतु चिन्हित परियोजनाओं की स्वीकृति, क्रियान्वयन एजेंसी का निर्धारण, निर्माण एजेंसी हेतु शर्तो का निर्धारण करेंगे तथा इन निर्देशों में अंकित समुचित कार्य कर सकेगा। 9.2 राज्य स्तरीय समन्वय समिति :-
मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समन्वय समिति होगी। समिति में निम्नानुसार अधिकारी सदस्य होंगेः-
| क. | प्रमुख सचिव/भार साधक, आवास एवं पर्यावरण विभाग | संयोजक सचिव |
| ख | प्रमुख सचिव/भारसाधक, राजस्व विभाग | सदस्य |
| ग | प्रमुख सचिव/भारसाधक, वित्त विभाग | सदस्य |
| घ | प्रमुख सचिव /भारसाधक, लोक निर्माण विभाग | सदस्य |
| ड | प्रमुख सचिव/भारसाधक, विधि एवं विधायी कार्य विभाग | सदस्य |
| च | प्रमुख सचिव, संबंधित विभाग (जिनका रिडव्हलपमेंट योजना का प्रस्ताव है) | सदस्य |
| छ | आवश्यकता अनुसार संबंधित जिला कलेक्टर/ विभागाध्यक्ष | सदस्य |
क) राज्य स्तरीय समन्वय समिति राज्य एवं जिले से प्राप्त चिन्हित परियोजनाओं की समीक्षा करेगी। रिडव्हलपमेंट संबंधी स्वीकृत परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी। ऐसे प्रकरण जिसमें संबंधित विभाग एवं क्रियान्वयन एजेंसी के मध्य मतभिन्नता हो, के संबंध में निर्णय लेगी।
ख) संयोजक सचिव के माध्यम से रिडव्हलपमेंट योजना/परियोजना के प्रस्ताव राज्य स्तरीय समन्वय समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
ग) राज्य स्तरीय समन्वय समिति के कार्यवाही विवरण को संयोजक सचिव के द्वारा मुख्य सचिव के अनुमोदन से जारी किया जाएगा तथा अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
9.3 राज्य स्तरीय परियोजना समिति :-
राज्य स्तरीय परियोजना समिति संबंधित विभाग के सचिव/भारसाधक की अध्यक्षता में गठित की जाएगी जिसमें संबंधित विभागाध्यक्ष निम्नानुसार सदस्य होंगे :-
| क्र. | संबंधित विभाग के विभागाध्यक्ष/सार्वजनिक उपक्रमों (निगम/मण्डल) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी | सदस्य |
| ख | लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता | सदस्य |
| ग | क्रियान्वयन एजेंसी के मुख्य अभियंता के अनिम्न अधिकारी | संयोजक सदस्य |
| घ | नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के संयुक्त संचालक स्तर से अनिम्न अधिकारी | सदस्य |
| ड | संबंधित कलेक्टर | सदस्य |
क) राज्य स्तरीय परियोजना समिति राज्य स्तर से संबंधित कार्यालयों/परिसरों/भवनों के संबंध में रिडव्हलपमेंट योजना के अंतर्गत परियोजना के प्रस्ताव अनुमोदन एवं अग्रेषित करेगी।
ख) अधिकार सम्पन्न मंत्री समुह से स्वीकृत परियोजनाओं के प्रगति की समीक्षा करेगी।
ग) राज्य स्तरीय परियोजना समिति का कार्यवाही विवरण संबंधित विभागीय सचिव द्वारा अनुमोदित एवं हस्ताक्षरित किया जाएगा तथा इसे नोडल विभाग एवं प्रस्तावित क्रियान्यन एजेंसी को प्रेषित किया जायेगा।
9.4 शासकीय उपक्रमों (निगम, मण्डल या सहकारी समिति) के कार्यालयों/परिसरों/भवनों के संबंध में रिडव्हलपमेंट योजना के अंतर्गत परियोजना के प्रस्ताव क्रियान्वयन एजेंसी के साथ तैयार किया जायेगा जिसे अग्रेषण के पूर्व उपक्रमों (निगम/मण्डल) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा संचालक मण्डल का अनुमोदन प्राप्त किया जायेगा। 9.5 जिला स्तरीय परियोजना समिति :-
जिला स्तरीय परियोजना समिति जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित होगी, जिसमें निम्नानुसार सदस्य होंगे :-
| क्र. | लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री से अनिम्न अधिकारी | सदस्य |
| ख | क्रियान्वयन एजेंसी के कार्यपालन यंत्री से अनिम्न अधिकारी | संयोजक सदस्य |
| ग | नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के उप संचालक स्तर से अनिम्न अधिकारी | सदस्य |
| घ | जिला पुलिस अधीक्षक | सदस्य |
| ड | आयुक्त नगर निगम (जहां नगर निगम है) | सदस्य |
| च | संबंधित विभाग के जिला प्रमुख जिनकी भूमि/भवन पर रिडव्हलपमेंट योजना लिया जाना है। | सदस्य |
जिला स्तरीय परियोजना समिति संभाग/जिला स्तरीय शासकीय भवनों/परिसरों/ कार्यालयों के संबंध में रिडव्हलपमेंट योजना के अंतर्गत परियोजना के प्रस्ताव अनुमोदन एवं अग्रेषित करेगी। जिला स्तरीय समिति का कार्यवाही विवरण जिला कलेक्टर के अनुमोदन एवं हस्ताक्षर से जारी किया जायेगा। प्रस्ताव का आंकलन कर संबंधित विभाग एवं नोडल विभाग को प्रेषित किया जाएगा।
10. परियोजना स्वीकृति की प्रक्रिया :-
10.1 रिडव्हलपमेंट योजना के अंतर्गत परियोजना प्रारंभ करने हेतु प्रत्येक परियोजना हेतु अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह के माध्यम से निम्नानुसार स्वीकृतियां प्राप्त की जाएगी :-
क) जिला स्तरीय परियोजना समिति अथवा राज्य स्तरीय परियोजना समिति की अनुशंसा पश्चात प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन का अनुमोदन। ख) राज्य स्तरीय परियोजना समिति द्वारा प्रेषित विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन एवं निविदा प्रपत्र, द्विपक्षीय अनुबंध एवं अन्य वैधानिक दस्तावेजों के प्रारूप का अनुमोदन।
10.2 संभाग एवं जिला स्तरीय शासकीय भवन या उपक्रमों (निगम/मण्डल) के भवनों/ कार्यालयों/परिसरों के संबंध में रिडव्हलपमेंट योजना अंतर्गत परियोजना प्रस्ताव संंबंधित कार्यालय प्रमुख द्वारा कलेक्टर के माध्यम से क्रियान्वयन एजेंसी को प्रस्तुत किया जाएगा। क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा प्रस्ताव का परीक्षण किया जाएगा तथा राज्य शासन द्वारा निर्धारित मापदण्डों अनुसार एवं विभाग की आवश्यकतानुसार FAR (Floor Area Ratio) को ध्यान में रखते हुए प्रारंभिक अकल्पना/प्राक्लन, वित्तीय विश्लेषण एवं सर्वाधिक उपयुक्तता के विकल्प के विवरण के साथ प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन जिला स्तरीय समिति को प्रस्तुत किया जाएगा।
10.3 विभागाध्यक्ष कार्यालय/परिसरों या राज्य स्तरीय विभागीय परिसरों से संबंधित प्रस्ताव विभागाध्यक्ष द्वारा क्रियान्वयन एजेंसी को प्र्रस्तुत किया जाएगा। क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा प्रस्ताव का परीक्षण किया जाएगा तथा राज्य शासन द्वारा निर्धारित मापदण्डों अनुसार एवं विभाग की आवश्यकतानुसार FAR को ध्यान में रखते हुए प्रारंभिक अकल्पना/ प्रकल्पना, वित्तीय विश्लेषण एवं सर्वाधिक उपयुक्तता के विकल्प के विवरण के साथ प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन राज्य स्तरीय परियोजना समिति को प्रस्तुत किया जाएगा।
10.4 निगम/मण्डल/कंपनी/बोर्ड या सहकारी समिति के कार्यालय/परिसरों से संबंधित प्रस्ताव संबंधित उपक्रम के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा संस्थ के संचालक मण्डल के अनुमोदन पश्चात क्रियान्वयन एजेंसी को प्रस्तुत किया जाएगा। क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा प्रस्ताव का परीक्षण किया जाएगा तथा राज्य शासन द्वारा निर्धारित मापदण्डों अनुसार एवं विभाग की आवश्यकतानुसार FAR को ध्यान में रखते हुए प्रारंभिक अकल्पना/प्रकल्पना, वित्तीय विश्लेषण, एवं सर्वाधिक उपयुक्तता के विकल्प के विवरण के साथ प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन राज्य स्तरीय समिति को प्रस्तुुत किया जाएगा।
10.5 चिन्हित भवन/परिसर की भूमि पर प्रचलित नियमों के अधीन प्रावधानित FAR से Project Viability नहीं आने की स्थिति में Viability Gap के तौर पर प्रचलित FAR के अतिरिक्त 35 प्रतिशत FAR जो कि अधिकतम 0.5 प्रतिशत से अधिक न हो, बिना किसी शुल्क से देय होगा। अधिकार सम्पन्न मंत्री समुह से यह अनुमति लिया जावेगा। इसके अतिरिक्त FAR यदि विकासक को आवश्यकता हो, तो नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के नियम अनुसार स-शुल्क प्राप्त किया जा सकेगा।
10.6 निविदा स्वीकृति क्रियान्वयन एजेंसी के द्वारा उसके निर्धारित प्रक्रिया अंतर्गत की जाएगी। जिसकी जानकारी समय-समय पर मंत्री समूह के समक्ष रखी जायेगी।
10.7 क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत किये जाने पर यथास्थिति जिला स्तरीय परियोजना समिति अथवा राज्य स्तरीय परियोजना समिति द्वारा योजना के संबंध में प्रारंभिक प्रस्ताव पर निर्णय लिया जाएगा। विभागों की असहमति के प्रकरण राज्य स्तरीय समन्वय समिति को प्रेषित किये जायेंगे।
10.8 जिला स्तरीय परियोजना एवं राज्य स्तरीय परियोजना समिति के निर्णय पश्चात कलेक्टर अथवा विभागाध्यक्ष अथवा सार्वजनिक उपक्रम के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा प्रारंभिक प्रस्ताव क्रियान्वयन एजेंसी को अग्रेषित किया जाएगा। क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा प्रस्ताव का परीक्षण कर अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह के निर्णय हेतु प्रारूप संक्षेपिका नोडल विभाग को अग्रेषित की जाएगी।
10.9 उपरोक्तानुसार प्राप्त प्रस्ताव की संक्षेपिका प्रमुख सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह के समक्ष निर्णय हेतु प्रस्तुत की जाएगी।
10.10 अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह की स्वीकृति के पश्चात क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा परियोजना प्रस्ताव का विस्तृत प्रतिवेदन, निविदा प्रपत्र एवं अन्य वैधानिक दस्तावेजों को तैयार करने की कार्यवाही की जाएगी। इस हेतु क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा आवश्यकतानुसार वास्तुविद परामर्शदाता या अन्य परामर्शदाता नियुक्त किया जा सकेगा। 10.11 उपरोक्तानुसार दस्तावेज तैयार होने पर क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह के अनुमोदन के लिए संक्षेपिका सहित प्रस्ताव नोडल विभाग को अग्रेषित किया जाएगा।
10.12 अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह की स्वीकृति प्राप्त होने की स्थिति में क्रियान्वयन एजेन्सी द्वारा परियोजना हेतु निविदा आमंत्रित की जाएगी।
10.13 निविदा आमंत्रित करने हेतु निविदा का आरक्षित मूल्य (अपसेट मूल्य) निम्नानुसार निर्धारित किया जाएगा :-
क) i) जब निर्माण एजेंसी को व्ययन की जाने वाली भूमि पर निर्माण के लिए भूमि विकास नियम एवं मास्टर प्लान द्वारा निर्धारित मापदण्डों के अतिरिक्त अन्य कोई बंधन नहीं लगाया जाए जो ऐसी स्थिति में - आरक्षित मूल्य = निर्माण एजेंसी को दी जाने वाली भूमि/ भूखण्ड हेतु महानिरीक्षक पंजीयन द्वारा जारी गाईड लाईन के आधार पर कुल भूमि मूल्य (M) कुल भूमि/ भूखण्ड पर पूर्व से निर्मित शासकीय अधोहसंरचना का शुद्ध साल्वेज (Salvage) मूल्य क्रियान्वयन एजेंसी का पर्यवेक्षण शुल्क (अन्य लागत जो भूखण्ड को निर्माण हेतु तैयार करने पर व्यय हुई है। ii) जहां पर निर्माण एजेंसी को दी जाने वाली भूमि/भूखण्ड हेतु भूमि विकास नियम एवं मास्टर प्लान में निर्धारित मापदण्डों के अतिरिक्त अन्य कोई बंधन लागू हो तो ऐसी स्थिति में -
आरक्षित मूल्य = (अतिरिक्त बंधन के कारण कुल उपलब्ध FAR ÷ भूमि विकास नियम एवं मास्टर प्लान अनुसार उपलब्ध FAR) x निर्माण एजेंसी को दी जाने वाली भूमि/ भूखण्ड हेतु महानिरीक्षक पंजीयन द्वारा जारी गाईड लाईन के आधार पर कुल भूमि मूल्य (M) कुल भूमि/भूखण्ड पर पूर्व से निर्मित शासकीय अधोसंरचना का शुद्ध साल्वेज (Salvage) मूल्य क्रियान्वयन एजेन्सी का पर्यवेक्षण शुल्क।
ख) परियोजना के वायबिलीटी के लिये यदि वायबिलीटी गैप की आवश्यकता है तो अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह समुचित कारणों के साथ राज्य स्तरीय परियोजना समिति के अनुशंसा पर निम्नानुसार वायबिलीटी गैप के साथ सहमति दे सकेगी जोकि संबंधित भू-उपयोग हेतु महानिरीक्षक पंजीयन द्वारा जारी प्रचलित वित्तीय वर्ष की गाईड लाईन अनुसार प्रति वर्गमीटर मूल्य अगर "B", है, "A" - क्षेत्रफल, तो बिन्दु क्रमांक 10.13 (क) के अंतर्गत वायबिलीटी गैप के प्रकरणों में "M" का मूल्य निम्नानुसार निर्धारित होगा :
1) व्यवसायिक/मिश्र प्रवृत्ति की योजनाएं :-
| क्षेत्रफल (वर्ग मीटर में) (A) | "M" का मूल्य |
| 2 एकड़ से कम | 1.0 x A x B |
| 2 से 5 एकड़ | 0.9 x A x B |
| 5 से 10 एकड़ | 0.8 x A x B |
| 10 से 20 एकड़ | 0.75 x A x B |
| 20 एकड़ से अधिक | 0.60 x A x B |
2) विशुद्ध आवासीय परियोजना :- 60% x A x B
ग) क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा निर्मित भूमि/भूखण्ड के भू-उपयोग अनुसार ही महानिरीक्षक पंजीयन द्वारा जारी गाईडलाईन का मूल्य लिया जाए एवं यह मूल्य निविदा जारी करने के वित्तीय वर्ष का मूल्य होगा।
घ) इस निर्धारित अपसेट मूल्य निविदा का एकमात्र वित्तीय बिड पैरामीटर होगा।
10.14 परियोजना में किये जाने वाले शासकीय निर्माण कार्य की तकनीकी स्वीकृति क्रियान्वयन एजेंसी की आंतरिक व्यवस्था अनुसार सक्षम तकनीकी प्राधिकारी द्वारा स्वीकृति दी जाएगी।
10.15 क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा परियोजना की निविदा एक चरण में किन्तु दो भागों (Single State Two Cover) में आमंत्रित की जाएगी :-
क) तकनीकी निविदा
ख) वित्तीय निविदा
सर्वप्रथम तकनीकी निविदा खोलने के पश्चात जो निविदाकर्ता तकनीकी मापदण्ड के अनुसार योग्य पाया जाता है उसकी निविदाकर्ता की वित्तीय निविदा खोली जाएगी।
10.16 निविदा में तकनीकी मापदण्ड का प्रावधान प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट एवं विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में निर्धारित की जावेगी।
10.17 निविदा समिति : क्रियान्वयन एजेंसी की नियम अंतर्गत निविदा प्रक्रिया सम्पन्न की जायेगी।
10.18 निविदा स्वीकृति के पश्चात चयनित क्रियान्वयन एजेंसी एवं निर्माण एजेंसी के बीच अनुबंध निष्पादित होगा। I. निविदा स्वीकृति के पूर्व चयनित क्रियान्वयन एजेंसी को भूमि का आबंटन शासन/संबंधित निगम/मण्डल/कंपनी द्वारा सशर्त रू.1/- टोकन मूल्य के आधार पर किया जावेगा। शर्त निम्नानुसार है :-
1. निर्माण एजेंसी द्वारा इन निर्देशों के कंडिका 10.13 अनुसार निर्धारित भूमि का मूल्य निविदा में उल्लेखित चरण अनुसार (stagewise) क्रियान्वयन एजेंसी को भुगतान करेगा तथा प्राप्त राशि क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा 1 माह के भीतर शासन के कोष में जमा की जावेगी।
2. ऐसी योजना जिसमें क्रियान्वयन एजेंसी ही विकासक एजेंसी है उस परस्थिति में एजेंसी भूमि मुल्य राशि समयबद्ध तरीके से शासन के कोष में जमा करेगा।
3. जिस तिथी को शासन/संबंधित संस्था को निर्धारित भूमि मूल्य का भुगतान पूर्ण होगा। उसका शर्त समाप्ती आदेश जारी होगा।
10.19 भूमि जो कि किसी विभाग/निगम/मण्डल या सहकारी समिति के नाम पर राजस्व दस्तावेज में अंकित है। ऐसी भूमि को संबंधित संस्था द्वारा सशर्त रू. 1/- टोकन मुल्य के आधार पर आबंटित किया जावेगा। आबंटन की शर्त उपरोक्त बिन्दु 10.18 (I) के तहत् लागू होगी।
10.20 अपरिहार्य कारणों से निर्मित की जाने वाली शासकीय सम्पत्तियों के मापदण्डों/क्षेत्रफल में परिवर्तन होने या परियोजना में अनिवार्य अतिरिक्त शासकीय निर्माण कार्य की आवश्यकता उत्पन्न होने पर अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह ऐसी अनुमति दे सकेगी।
11. चयनित एजेंसी को दी जाने वाली शासकीय भूमि :-
क) पी.पी.पी. के प्रकरणों में क्रियान्वयन एजेंसी एवं विकासक द्विपक्षीय अनुबंध निष्पादन के पश्चात चयनित निर्माण एजेंसी को दी जाने वाली भूमि का व्ययन लाईसेंस आधार पर रजिस्ट्री के माध्यम से निविदा में निर्धारित चरणों (Phase) में किया जाएगा। भुगतान पूर्ण होने पश्चात लीज डीड/फ्री-होल्ड किया जावेगा।
ख) इस योजना के अंतर्गत क्रियान्वयन एजेंसी को भूमि का आबंटन कलेक्टर द्वारा किया जाएगा और यह मामला राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड चार क्रमांक-1 के अंतर्गत राजस्व विभाग को संदर्भित करने की आवश्यकता नहीं होगी।
1. ऐसी भूमि जो कि शासकीय विभाग के नाम पर है ऐसे प्रकरण में भूमि राजस्व विभाग के नाम पर अंकित करने हेतु अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह द्वारा प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन मान्य करने पर क्रियान्वयन एजेंसी के आवेदन पर कलेक्टर द्वारा आदेश जारी किया जाएगा तथा भूमि शासकीय भूमि मद पर अंकित होगी। इस हेतु पृथक से शासन की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
2. ऐसी भूमि जो कि किसी निगम/ मण्डल या सहकारी समिति के नाम पर राजस्व दस्तावेज में अंकित है, जो भी उनके द्वारा शासन से आबंटन के माध्यम से या भू-अर्जन या क्रय से प्राप्त की है, उन स्थितियों में विकासक एवं संबंधित निगम/ मण्डल के मध्य लीज (30 वर्ष 30 वर्ष 30 वर्ष) के आधार पर निर्धारित प्रब्याजी एवं भू-भाटक पर आबंटन होगा। इसमें राजस्व विभाग द्वारा नजूल भूमि को फ्री-होल्ड करने के आशय हेतु जारी दिशा-निर्देश के अनुरूप फ्री-होल्ड का प्रावधान होगा एवं फ्री-होल्ड रजिस्ट्री संबंधित संस्था प्रमुख द्वारा विकासक के साथ की जाएगी। विकासक निर्मित संपत्ति के व्ययन हेतु सबलीज कर सकेगा।
3. क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा कार्यादेश, निर्धारित भूमि मूल्य, निविदा स्वीकृति पत्र एवं भूमि मूल्य भुगतान के आधार पर आवेदन प्रस्तुत किया जाएगा। परियोजना स्वीकृति पश्चात शासकीय भूमि को निर्धारित भूमि मूल्य को प्रब्याजी मानकर भू-भाटक कि गणना के साथ आधार मानकर संबंधित एजेंसी द्वारा किया जाएगा। नजूल भूमि के फ्री-होल्ड के प्रावधान अनुसार फ्री-होल्ड करने का प्रावधान कंडिका-1 एवं 2 अनुसार होगा।
ग) व्ययन की जाने वाली भूमि हेतु मास्टर प्लान प्रचलित न हो या मास्टर प्लान में विशिष्ट उल्लेख ना हो तो छ.ग. भूमि विकास नियम 1984 के अनुसार नियोजन मानक (Planning Norms) जैसे की क्षेत्रफल, फर्शी अनुपात क्षेत्र, आच्छादित क्षेत्र, एवं भूमि उपयोग की स्थिति पूर्व से ही स्पष्ट दर्शाई जाए। आवश्यक विकास अनुमति यथासंभव पूर्व में ही प्रदाय की जावे।
घ) समाज के कमजोर वर्गो के आवास हेतु शासन द्वारा एक रूपये में शासकीय भूमि उपलब्ध कराई जा रही है तथा ''सबके लिये आवास'' में भी अनुदान दिया जा रहा है। अतः रिडव्हलपमेंट योजनाओं में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तथा निम्न आय वर्ग के लिए भूखण्ड /मकानों की उपलब्धता कराने की अनिवार्यता से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के अधिनियमों/ नियमोें में संशोधन उपरांत छूट प्रदान की जावेगी।
12. व्ययन की गई भूमि का उपयोग :-
क) इस योजना में चयनित निर्माण एजेंसी (विकासक) को आवासीय/ व्यवसायिक भवनों के निर्माण के लिए लीज-होल्ड पर उपलब्ध कराई गई भूमि का उपयोग विकास योजना के अनुरूप किया जाएगा अन्यथा नहीं। ऐसे निर्माण हेतु समस्त वैधानिक अनुमतियां चयनित निर्माण एजेंसी द्वारा ली जाएगी।
ख) रिडव्हलपमेंट योजना के अंतर्गत निर्माण एजेंसी के पक्ष में व्ययन की गई भूमि के लिए कलेक्टर द्वारा निर्धारित भू-राजस्व देय होगा।
13. निर्मित शासकीय परिसंपत्तियों का रखरखाव :-
क) रिडव्हलपमेंट योजना के अंतर्गत निर्मित शासकीय भवन, संरचना एवं परिसर के संधारण पर आरंभिक तीन वर्ष में कोई संधारण व्यय सामान्यतः नहीं आना चाहिए। निर्माण में किसी प्रकार की त्रुटि एवं कमी होने पर उसे दूर करने/ उसकी मरम्मत करने का दायित्व निर्माण एजेंसी पर होगा। इस हेतु चयनित निर्माण एजेंसी से ली जाने वाली परफारमेंस गारंटी बैंक (गारंटी) की राशि निर्धारित प्रावधान अनुसार पांच वर्ष तक हो यह सुनिश्चित किया जाए।
ख) जिस परियोजना के तहत शासकीय भवनों एवं परिसरों का निर्माण होगा, उन्हें लोक निर्माण विभाग की पुस्तिका में या संबंधित विभाग/जिला में लिया जाएगा तथा इसके संधारण पर भविष्य में आने वाले व्यय संबंधित विभाग द्वारा
अपने बजट प्रावधान से वहन किया जाएगा। परिसर के संचालन/संधारण के लिए किसी तरह का नया अमला स्वीकृत नहीं किया जाएगा।
14. संपत्ति का संधारण :-
क) निर्माण एजेंसी द्वारा जिस आवासीय/ व्यवसायिक संपत्ति का निर्माण इस योजना के अंतर्गत किया जाएगा, उसकी एवं संबंधित परिसर के संधारण/ रखरखाव की रूपरेखा निर्माण एजेंसी द्वारा इन संपत्तियों के निवर्तन के समय ही तय की जाएगी।
ख) निर्माण के पश्चात एजेंसी को लीज पर अंतरित परिसर (भूमि एवं निर्मित क्षेत्र) के रखरखाव/ संधारण की रूपरेखा निर्माण एजेंसी द्वारा ऐसी संपत्तियों के निवर्तन के समय से लीजडीड/फ्रीहोल्ड डीड में उल्लेखित की जाएगी।
15. क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा क्रियान्वयन : -
क) अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह अगर चाहे तो क्रियान्वयन एजेंसी को निर्माण एजेंसी के रूप में नियुक्त कर सकती है।
ख) उपरोक्त स्थिति में क्रियान्वयन एजेंसी को भूमि उपलब्ध कराने पर शासकीय कोष में जमा की जाने वाली राशि प्रचलित दर अनुसार निर्धारित की जाएगी जो नियमों के अनुसार निर्धारित समय सारणी के अनुसार क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा देय होगी।
ग) प्रथम किश्त देय होने पर लीज का निष्पादन किया जा सकेगा।
16. ऐसी परियोजना जिनमें अधिकार सम्पन्न मंत्री समूह या मंत्रि-परिषद से पूर्व में ही स्वीकृति दी गई है, वह यथावत रहेगी तथा पुनः स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी।
17. विसंगति :-
रिडव्हलपमेंट के संबंधी पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों जिन बिन्दुओं पर प्रावधानों में विसंगति है, उतने ही प्रावधानों को निरसित माना जायेगा।
18. अन्य शिथिलताएॅ :-
क) जो ई.डब्ल्यू.एस. एवं एल.आई.जी. की बाध्यताएॅ है, उसका विकासक मास्टर प्लान के अंतर्गत क्षतिपूर्ति करेगा। नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के योजना भूमि से 03 किमी. का बंधन रिडेव्हलपमेंट परियोजना में लागू नहीं होगा। ख) भूमि के मूल्य का पूर्ण भुगतान कर दिये जाने के पश्चात् फ्री-होल्ड प्रावधान लागू होगा।
19. इस नीति के अंतर्गत आवश्यक आदेश एवं स्पष्टीकरण संबंधित विभागों द्वारा जारी किये जायेंगे तथा आवास एवं पर्यावरण विभाग इस हेतु आवश्यक समन्वय किया जावेगा।
3/ आदेशानुसार, कृपया योजना का क्रियान्वयन उपरोक्तानुसार किया जाना सुनिश्चित करें एवं अधिनस्थ विभागाध्यक्ष कार्यालयों/निगम/मंडल/कम्पनी एवं बोर्ड को कार्ययोजना की प्रति प्रसारित किया जाना सुनिश्चित करें।
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, सी.तिर्की, उप-सचिव.