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Chattisgarh Gazette - Extraordinary · Government of Chattisgarh

छत्तीसगढ़ भू-जल (प्रबंधन और विनियमन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 14 सन् 2022) संबंधी

Published 22 July 2022

Department
छ.ग. विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
464
Notification no.
क्रमांक - 8207/वि.स./विधान/2022
Identifier
in.gazette.chhattisgarh.eo.2022-07-22.464
Languages
English, Hindi

00000000000

छत्तीसगढ शासन

पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़/दुर्ग/ 09 / 2013-2015. "

सत्यमेव जयते

"बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान (बिना डाक टिकट) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22- छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई. दिनांक 30-05-2001 . "

छत्तीसगढ़ राजपत्र

(असाधारण)

प्राधिकार से प्रकाशित

आषाढ़ 31 , शक 1944

क्रमांक464]

रायपुर, शुक्रवार , दिनांक 22 जुलाई 2022-

छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय

रायपुर, शुक्रवार, दिनांक 22 जुलाई, 2022 (आषाढ़ 31 , 1944)

क्रमांक 8207/वि.स. /विधान / 2022. छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ भू- जल (प्रबंधन और विनियमन) विधेयक , 2022 (क्रमांक 14 सन् 2022) जो शुक्रवार, दिनांक 22 जुलाई, 2022 को पुरःस्थापित हुआ है, को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है .

हस्ता./- (दिनेश शर्मा) सचिव.

927 928

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 22 जुलाई 2022

छत्तीसगढ़ विधेयक

(क्रमांक 14 सन् 2022)

छत्तीसगढ़ भू- जल (प्रबंधन और विनियमन) विधेयक, 2022

विवरण

खण्ड

अध्याय-एक प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम , विस्तार, प्रारंभ एवं लागू होना.

2. परिभाषाएं.

अध्याय-दों संस्थागत ढांचा

3. राज्य भू-जल प्रबंधन और नियामक प्राधिकरण.

4. जिला भू- जल प्रबंधन परिषद्.

5. विकासखंड स्तरीय भू- जल उपयोगकर्ता पंजीकरण समिति

अध्याय-तीन कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व

6. भू- जल विंग के कर्तव्य.

अध्याय-चार शक्तियां और कृत्य.

7. शक्तियों और कर्तव्यों का प्रत्यायोजन

8. भू-जल संसाधनों के प्रबंधन और विनियमन के लिये क्षेत्रों को अधिसूचित करने की शक्त्तियां.

9. अधिसूचित और गैर अधिसूचित क्षेत्रों में विद्यमान वाणिज्यिक, औद्योगिक, अवसंरचनात्मक और थोक भू- जल उपयोगकर्ताओं का रजिस्ट्रीकरण.

10. अधिसूचित क्षेत्रों में नवीन कूप निर्माण पर प्रतिबंध.

928(1)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 22 जुलाई 2022

11 अधिसूचित क्षेत्रों में भूगर्भ जल सुरक्षा योजनाओं का तैयार किया जाना और उनका क्रियान्वयन.

12. गैर अधिसूचित क्षेत्रों में भू- जल निकालने के प्राधिकार को स्वीकृत किया जाना.

13. वाणिज्यिक , औद्योगिक, अवसंरचनात्मक, खनन, थोक भू- जल उपयोगकर्ताओं हेतु भू- जल निकालने की सीमा नियत किया जाना तथा आदेशों या निर्देशों इत्यादि की तामिली.

14. भू- जल निकासी / निष्कर्षण पर शुल्क.

15. प्राधिकरण के कर्मचारी लोक सेवक होंगे.

16. सद्भावनापूर्वक की गई कार्यवाही का संरक्षण.

17. समाधात निर्धारण

अध्याय-पांच

उल्लंघन , अपराध एवं शस्तियां

18. वेधन अभिकरणों का रजिस्ट्रीकरण

19. विधि विरुद्ध खनन , भू- जल निकासी, आपूर्ति, विक्रय, उपयोग आदि के लिये अपराध एवं शास्ति.

20. अपराधों का संज्ञान .

21. अपराधों का प्रशमन.

22. कंपनियों द्वारा अपराध.

23. भू- जल शिकायत निवारण अधिकारी.

अध्याय-छः

प्रकीर्ण

24. समुचित निकाय को सूचना मांगने की शक्ति.

25. स्वतः विनियमन.

928 ( 2 )

छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 22 जुलाई 2022

26. पूर्व विद्यमान अधिकार.

27. भू-जल संवर्धन कोष.

28. राज्य सरकार को नियम बनाने की शक्ति.

29. राज्य सरकार को छूट प्रदान करने की शक्ति.

30. अधिनियम का अन्य नियमों पर प्रभाव.

928 (3 )

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 22 जुलाई 2022

छत्तीसगढ़ विधेयक

(क्रमांक 14 सन् 2022)

छत्तीसगढ़ भू-जल (प्रबंधन और विनियमन) विधेयक,2022

राज्य के विशेप रूप से संकटग्रस्त ग्रामीण तथा नगरीय क्षेत्रों में, परिणात्मक एवं गुणात्मक दोनों रूप में, भू- जल का अविरत प्रबंधन सुनिश्चित करने हेतु भू- जल की सुरक्षा, संरक्षा, नियंत्रण तथा विनियमन और उससे सम्बन्धित या आनुषंगिक विषयों का उपबन्ध करने हेतु विधेयक;

यतः , भू-जल के अनियंत्रित और तीव्र निष्कर्षण के फलस्वरूप भू-जल के स्तरों में आई गिरावट से भयप्रद स्थिति उत्पन्न हो गयी है और राज्य के अनेक भागों के ग्रामीण एवं नगरीय दोनों क्षेत्रों में, भू- जल के स्त्रोतों में कमी आ गयी है;

और यतः , भू- जल, घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपयोगों हेतु एकल सर्वाधिक महत्वपूर्ण जल स्त्रोत होने के कारण ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में पेय जल, खाद्य तथा जीविका सुरक्षा का मेरूदण्ड है;

और यतः, अतिशय भू- जल निष्कर्षण और भू- जल संदूषण के कारण गम्भीर भू-जल संकट विद्यमान है;

और यतः, भू-जल का विकास राज्य की आवश्यकता है, इसलिए विशेष रूप से अतिदोहित तथा संकटग्रस्त क्षेत्रों में इसका प्रबंधन , नियंत्रण और विनियमन किया जाना भी इस बहुमूल्य संसाधन की सुरक्षा एवं संरक्षण हेतु समय की माँग है;

और यतः, संकटग्रस्त क्षेत्रों में भू- जल की समुचित वृद्धि / पुनर्भरण के प्रयोजनार्थ भूगर्भ जल संसाधनों के संरक्षण, सुरक्षा तथा विकास के लिए , और राज्य में भूगर्भ जल की पूर्णकालिक गुणवत्ता को अनुरक्षित या पुनर्स्थापित करते हुए भू- जल प्रदूषण निवारण के लिए उपबन्ध करना भी समीचीन है;

928 (4)

छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 22 जुलाई 2022

और यतः, भू-जल के साम्यपूर्ण तथा पर्यावरणीय रूप से ठोस भू- जल विनियमन से वर्तमान समय की जलवायु परिवर्तन सहित कतिपय सर्वाधिक महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करने में सहायता प्राप्त हो सकेगी;

और यतः, जल एकिक प्रकृति का होता है, जिसके लिए भू- पृष्ठ जल तथा भू- गर्भ जल का एकीकृत रूप में होना अपेक्षित है, जो भूमि और वनस्पति से अभिन्न रूप में संयोजित होता है और उसका वर्षा जल (प्राकृतिक पुनर्भरण के माध्यम से ) से जटिल रूप में जुड़ाव होता है;

और यतः, भू- जल लोगों की सार्वजनिक विरासत है, यह अपने सभी रूपों में जीवन को बनाये रखने के लिये आवश्यक है , यह परिस्थितिक तन्त्र का एक अभिन्न अंग है;

और यतः, भू- जल. अपनी प्राकृतिक अवस्था में सामान्य रूप से एक सामूहिक्र संसाधन है और भारत के उच्चतम न्यायालय ने भू- गर्भ जल लोक न्यास सिद्धांत को इस मान्यता के साथ लागू किया है कि भू- जल में निजी संपत्ति अधिकार भू- जल की उभरती स्थिति, संघर्ष एवं परिवर्तनशील को देखते हुये अनुपयुक्त है;

और यतः, राज्य सरकार ने समस्त सम्बन्धित पहलुओं पर सावधानीपूर्वक परीक्षण करने के पश्चात् यह विनिश्चय किया है कि भू- जल का किसी भी रूप में न्यायसंगत निष्कर्षण और उपयोग का प्रबंधन तथा विनियमन करना और राज्य के संकटग्रस्त क्षेत्रों में भू- जल का संरक्षण तथा उसकी सुरक्षा करना भी लोकहित में समीचीन तथा आवश्यक है और उसे नियोजन तथा प्रबंधन में सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की जायेगी;

और यतः , भू- जल संसाधनों की गुणात्मक एवं परिमाणात्मक अविरतता और भू- जल उपयोग में साम्या को सुनिश्चित करने के लिए एक नया विधिक ढांचा (सन्नियमों, सिद्धान्तों, प्रक्रियाओं और समकालीन तथा आसन्न चुनौतियों को इंगित करने वाली उपयुक्त संस्थाओं सहित ) अपेक्षित है;

928( 5)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 22 जुलाई 2022

और यतः, राज्य सरकार ने समस्त संबंधित पहलुओं पर सावधानी पूर्वक परीक्षण करने के पश्चात् यह विनिश्चय किया है कि लोकहित में भू- जल उपयोग का प्रथम अधिकार पीने के लिए , घरेलू तथा पशु उपयोग हेतु होगा ।

भारत गणराज्य के तिहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधानमंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

अध्याय - एक

प्रारंभिक

संक्षिप्त नाम , 1. (1 ) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ भूजल (प्रबंधन एवं विनियमन) अधिनियम , 2022 कहलायेगा ।

विस्तार, प्रारंभ एवं लागू होना.

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में होगा ।

(3) यह ऐसी तारीख से प्रवृत्त होगा, जैसा कि राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे तथा विभिन्न प्रावधानों के लिये विभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी ।

(4) इस अधिनियम के अधीन निर्मित किये गये दण्डात्मक प्रावधान , भू- जल के घरेलू तथा कृषि उपयोगकर्ताओं पर लागू नहीं होंगे ।

परिभाषाएं.

2. (1 ) इस अधिनियम में , जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) "समुचित निकाय " से अभिप्रेत है प्रासंगिक संदर्भ में जहां कहीं भी यह उल्लिखित है, राज्य भू- जल प्रबंधन और नियामक प्राधिकरण , जिला भू- जल प्रबंधन परिषद और विकासखंड स्तरीय भू- जल उपयोगकर्ता पंजीकरण समितिः 928( 6)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 22 जुलाई 2022

(ख) " जलभृत" से अभिप्रेत है खण्डित चट्टानों , रेत , बजरी तथा तद्द्ममान तलछटों से समाविष्ट भौगोलिक संरचना, संरचना समूह या आंशिक संरचना समूह की भूमिगत सतह, जो पर्याप्त सरंध्र , पारगम्य और जल से संतृप्त है और जो किसी कूप या जल स्त्रोत को पर्याप्त मात्रा में जल प्रेषित करता है / प्रतिगृहीत करता है / प्रदान करता है;

(ग) "भूजल समिति" से अभिप्रेत है छत्तीसगढ़ के प्रत्येक जिले में भूगर्भ जल जागरूकता कार्यक्रम क्रियान्वित करने हेतु गठित व्यक्ति समूह;

(घ) "सामूहिक उपयोगकर्ता" से अभिप्रेत है किसी अधिष्ठान यथा होटलों / लॉज /हॉस्टल / निजी आवासीय भवनों/आवासीय कालोनियों/ रिजार्टों / निजी चिकित्सालयों / परिचर्या गृहों / कारबार प्रक्षेत्रों / मॉल्स / वाटर पार्क सहित कोई व्यक्तिं या कोई व्यक्ति समूह, जो अपनी क्रियात्मक जल आवश्यकताओं के प्रयोजनार्थ भू- जल का. निष्कर्षण और उपयोग करते हैं;

(ङ) " केन्द्रीय भू- जल बोर्ड" से अभिप्रेत है केन्द्रीय भू-जल बोर्ड , भारत शासन;

(च) "वाणिज्यिक उपयोगकर्ता" से अभिप्रेत है ऐसी कोई संस्था या कोई अभिकरण या कोई अधिष्ठान, जो उक्त प्रयोजनार्थ भू- जल का निष्कर्षण और उपयोग करता है , सहित ऐसे किसी व्यक्ति 928 (7)

छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 22 जुलाई 2022

या व्यक्ति समूह, जो वित्तीय उपलब्धिया लाभ हेतु अपने कारोबार या व्यापार के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लाभ प्राप्त करता है;

(ज) "जिला भू- जल प्रबंधन परिषद्" से अभिप्रेत है धारा 4 के अधीन गठित जिला भू- जल प्रबंधन परिषद्;

(झ) " वेधन अभिकरण" से अभिप्रेत ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग या किसी संस्था से है , जो किसी प्रयोजन यथा घरेलू/ पीने हेतु / वाणिज्यिक / औद्योगिक /सामूहिक / अवसंरचनात्मक उपयोग के लिए भूगर्भ जल का निष्कर्षण और उपयोग करने हेतु कूपों / नलकूपों का वेधन करने के व्यवसाय के भाग के रूप में संलग्न हैं;

(ञ) "पर्यावरणीय प्रवाह" से अभिप्रेत है लोगों को वस्तुएं और सेवाएं प्रदान करने वाले जलीय पारिस्थितिकीय तंत्रों के संघटकों, कृत्यों, प्रक्रियाओं तथा नम्यता को अनुरक्षित करने के लिए अपेक्षित जल प्रवाहों की गुणवत्ता, परिमाण तथा समय निर्धारण को निर्दिष्ट करने वाले प्रवाह;

(ट) "भू- जल विभाग " से अभिप्रेत है छत्तीसगढ़ शासन के अधीन जल संसाधन विभाग जो भू- जल से संबंधित गतिविधियों के लिये भी कार्यरत है;

(ठ) " भू- जल गुणवत्ता संवेदनशील परिक्षेत्र" से अभिप्रेत इस प्रकार के किसी क्षेत्र से है, जहाँ भू- जल गुणवत्ता , भूजनित या मानव जनित कारणों के 928 (8)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 22 जुलाई 2022

फलस्वरूप रासायनिक तत्वों, भौतिक - रासायनिक संघटकों, भारी धातुओं और जीवाण्विक संदूषण के उच्च स्तरीय / अतिशय संकेन्द्रण से प्रभावित है;

(ड) "भू- जल संसाधन प्राक्कलन रिपोर्ट" से अभिप्रेत है खण्डों का अतिदोहित, संकटग्रस्त, अर्द्ध संकटग्रस्त और सुरक्षित श्रेणियों में श्रेणीकरण सहित भू- जल संसाधन खण्डवार निर्धारण के लिए भू- जल विभाग (जल संसाधन विभाग) , छत्तीसगढ़ और केन्द्रीय भू- जल बोर्ड द्वारा तैयार की गयी भूगर्भ जल प्राक्कलन समिति की पद्धति तंत्र पर आधारित नवीनतम अनुमोदित रिपोर्ट;

(ढ) "भूगर्भ जल सुरक्षा योजना" से अभिप्रेत है उपलब्ध जल भूगर्भीय सूचनाओं पर क्रमिक रूप से आधारित कोई योजना और उसमें ऐसे उपाय/ मध्यक्षेप सम्मिलित हैं, जो विनिर्दिष्ट क्षेत्र के रूप में तथा जल भूगर्भीय रूप में संभाव्य है;

(ण) "भू जल" से अभिप्रेल ऐसे जल से है, जो किसी संतृप्त परिक्षेत्र में जलभृत या भूमि की सतह के नीचे पाया जाता है और जिसे कूपों या किन्हीं अन्य साधनों से निकाला जा सकता है अथवा धाराओं और नदियों में झरनों तथा मुख्य प्रवाहों के रूप में निकलता है;

(त) "उद्योग" से अभिप्रेत है किसी ऐसे कारबार , व्यापार, उपक्रम , विनिर्माण या नियोजकों की आजीविका, जो 928 (9)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 22 जुलाई 2022

किसी अभिलाभ या लाभ हेतु चलाया जाता हो और उसके अन्तर्गत कोई आजीविका सम्बन्धी सेवा नियोजन, हस्तशिल्प या औद्योगिक व्यवसाय या श्रमिक का उप व्यवसाय या माल के उत्पादन के लिये किसी नियोजक और उसके श्रमिक (चाहे ऐसा श्रमिक उक्त नियोजक द्वारा सीधे नियोजित किया गया हो या किसी अभिकरण , जिसके अन्तर्गत ठेकेदार भी हैं, के द्वारा अथवा उसके माध्यम से) के मध्य सहयोग द्वारा चलाया जाने वाला क्रमबद्ध क्रियाकलाप भी सम्मिलित है ;

(थ) "अवसंरचनात्मक उपयोगकर्ता" से अभिप्रेत ऐसी कोई फर्म या कंपनी सहित व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह से है , जो अवसंरचनात्मक विकास से सीधे संबंधित क्रियाकलापों / परियोजनाओं को क्रियान्वित करने के प्रयोजनार्थ भू- जल का निष्कर्षण और उपयोग करता है;

(द) "जिला पंचायत " से अभिप्रेत है छत्तीसगढ़ राज्य के जिले के जिला पंचायतः

(ध) " अधिसूचित क्षेत्र" से अभिप्रेत है धारा 6 के अधीन अधिसूचित क्षेत्र , जिसमें अति - दोहित , जटिल खंड और संकटग्रस्त नगरीय क्षेत्र सम्मिलित है ;

(न) "प्रदूषण " से अभिप्रेत है भू- जल या भू- पृष्ठ जल या ऐसे संदूषण या जल के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में परिवर्तन या किसी मल , प्लास्टिक, 928(10)

छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 22 जुलाई 2022

थर्मोकोल या व्यापारिक वहिःस्त्राव या गैसीय या ठोस पदार्थ युक्त किसी अन्य तरल पदार्थ का भू- जल में (प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में) निस्सारण , जिससे उपताप हो सकता है या उपताप उत्पन्न होना सम्भावित हो या ऐसे भू- जल , जो लोक स्वास्थ्य या सुरक्षा हेतु या घरेलू, वाणिज्यिक , औद्योगिक, कृषिगत या अन्य विधिसम्मत उपयोगों के लिए या पशुओं या पौधों या जलीय जीवों के जीवन एवं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक या क्षतिकारक हो सकता है;

(प) " वर्षा जल संचयन" से अभिप्रेत है भू- जल भण्डारण या उसके पुनर्भरण हेतु छत के ऊपर संचयता सहित सूक्ष्म जल विभाजक पैमाने पर वर्षा जल संग्रहण और भण्डारण तकनीक या प्रणाली;

(फ) "ग्रामीण क्षेत्रों" से अभिप्रेत उन क्षेत्रों से है , जो नगरीय क्षेत्रों के रूप में वर्गीकृत नहीं है;

(ब) "राज्य भू- जल प्रबंधन और नियामक प्राधिकरण' से अभिप्रेत है धारा 3 के अधीन गठित छत्तीसगढ़ राज्य भू- जल प्रबंधन और नियामक प्राधिकरण;

(भ) " नगरीय क्षेत्रों" से अभिप्रेत ऐसे क्षेत्रों से है, जो यथास्थिति, किसी सक्षम प्राधिकरण या किसी नगर पालिका या किसी नियामक निकाय द्वारा अधिसूचित किये जायें, जिनमें ऐसे क्षेत्र / भूमि सम्मिलित नहीं है , जो किसी विकास प्राधिकरण या किसी नगर 928 (11)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 22 जुलाई 2022

पालिका या किसी विनियमित क्षेत्र की मुख्य योजना में कृषि उपयोग हेतु वर्गीकृत किये गये हों;

(म) "भू- जल " उपयोगकर्ता" से अभिप्रेत किसी ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग या संस्था से है, जो व्यक्तिगत या सामुदायिक आधार पर किये जाने वाले घरेलू उपयोग सहित किसी प्रयोजन के लिए भू- जल का स्वामित्व रखते हैं, उसका प्रयोग करते हैं या विक्रय करता है / करते हैं और उसमें/ उनमें कोई सरकारी या गैर सरकारी उद्योग , वाणिज्यिक उपयोक्ता/ उपयोगकर्ता सामूहिक उपयोक्ता/ उपयोगकर्ता कंपनी का कोई प्रतिष्ठान सम्मिलित है, किन्तु उसमें/ उनमें ऐसा कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का वर्ग या संस्था सम्मिलित नहीं है, जो हस्तचालित या पशुचालित युक्तियों यथा हैण्डपम्प, रस्सी तथा बाल्टी और रहट आदि द्वारा कूप से निकाले गये भूगर्भ जल का प्रयोग करता है / करते हैं;

(य) " जल और स्वच्छता समिति" से अभिप्रेत है जल और स्वच्छता योजनाओं के नियोजन, अनुश्रवण , क्रियान्वयन और अनुरक्षण हेतु प्रत्येक ग्राम पंचायत / नगर पंचायत/ पालिका/ निगम में गठित कोई समितिः

(२) " जल उपभोक्ता संस्था" से अभिप्रेत है तालाबों / नलकूप या नलकूपों के समूह के अनुरक्षण 928 ( 12)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 22 जुलाई 2022

और संरक्षण के लिए तालाब / नलकूप स्तरं या नलकूपों के समूह स्तर पर गठित कोई व्यक्ति-समूह;

(कक) " कूप" से अभिप्रेत हैं भू- जल के खोज या निष्कर्षण या पुनर्भरण के लिए निर्मित किसी संरचना और उसके अन्तर्गत खुला कूप, डगबेल, बोरबेल , डग कम बोरबेल , नलकूप , अन्तः स्पन्दन गैलरी पुनर्भरण कूप अथवा उनमें से किसी का संयोजन या रूपान्तरण भी है , जिसका उपयोग भू- जल निष्कर्षण तथा भू- जल पुनर्भरण के लिए किया जा सकता है ।

(2) शब्द और अभिव्यक्तियाँ, जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं, किन्तु परिभाषित नहीं है, के वही अर्थ होंगे , जो इस संबंध में प्रवृत्त किसी अन्य विधि में उनके लिये, यथास्थिति, समनुदेशित हैं ।

अध्याय-दो

संस्थागत ढांचा

3.

राज्य भू-जल

प्रबंधन और

नियामक

प्राधिकरण, जिला

(1 ) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा , अधिसूचना में विनिर्दिष्ट दिनांक से छत्तीसगढ राज्य भू- जल प्रबंधन तथा नियामक प्राधिकरण, जिला भू- जल प्रबंधन परिषद् एवं विकास खण्ड स्तरीय भू- जल उपयोगकर्ता पंजीकरण समिति का गठन करेगी ।

भू-जल प्रबंधन

परिषद् एवं

विकास खण्ड

(2) राज्य भू- जल प्रबंधन और नियामक प्राधिकरण में निम्नलिखित सम्मिलित होंगे-

स्तरीयं भू-जल

अध्यक्ष

(1) मुख्य सचिव,

उपयोगकर्ता 928 (13)

छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 22 जुलाई 2022

पंजीकरण समिति.

सदस्य

भारसाधक सचिव, जल संसाधन विभाग

(2)

सदस्य

भारसाधक सचिव, वित्त विभाग

(3)

सदस्य

भारसाधक सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी

(4)

विभाग

सदस्य

भारसाधक सचिव , कृषि विभाग

(5)

सदस्य

भारसाधक सचिव , उद्योग विभाग

(6)

भारसाधक सचिव , खनिज संसाधन विभाग सदस्य

(7)

सदस्य

भारसाधक सचिव, नगरीय प्रशासन एवं

(8)

विकास

सदस्य-

प्रमुख अभियन्ता, जल संसाधन विभाग

(9 )

सचिव

सदस्य

(10) प्रमुख अभियन्ता, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग

सदस्य

( 11 ) सदस्य सचिव , राज्य पर्यावरण संरक्षण मंडल

सदस्य

(12

सचिव

) क्षेत्रीय निदेशक , केन्द्रीय भू- जल बोर्ड (एनसीसीआर) रायपुर

सदस्य

प्रधान मुख्य वन संरक्षकं

(13)

(14)

सदस्य

छत्तीसगढ राज्य में भू- जल प्रबंधन का दीर्घकालिक कार्य करने का अनुभव रखने वाले तीन विषय विशेषज्ञ (राज्य सरकार द्वारा नाम निर्दिष्ट किये जायेंगे )

सदस्य

(15

) भू- जल के क्षेत्र में कार्य करने वाला सार्वजनिक / गैर सरकारी संगठन / 928(14)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 22 जुलाई 2022

सामाजिक क्षेत्र का एक प्रख्यात व्यक्ति (राज्य सरकार द्वारा नाम निर्दिष्ट किये जायेंगे)

(3) विषय विशेषज्ञ और सार्वजनिक/ गैर सरकारी संगठन/ सामाजिक क्षेत्र के प्रख्यात व्यक्ति की पदावधि और रिक्तियों को भरने की रीति तथा सेवा की अन्य शर्तें ऐसी होंगी, जैसा कि विहित किया जाये ।

(4) प्रमुख अभियन्ता , जल संसाधन विभाग , छत्तीसगढ़ राज्य भू- जल प्रबंधन और नियामक प्राधिकरण की ओर से नोडल कार्यपालिक अधिकारी होगा ।

(5) प्रमुख अभियन्ता, जल संसाधन विभाग , छत्तीागढ़ , कार्यालय , शिवनाथ भवन, नवा रायपुर, राज्य भू- जल प्रबंधन और नियामक प्राधिकरण के सचिवालय के रूप में कार्य करेगा ।

(6) राज्य भू-जल प्रबंधन और नियामक प्राधिकरण के कृत्य निम्नलिखित होंगे ,-

(क) धारा 8 के अधीन यथा उपबंधित भू- जल संसाधनों के प्रबंधन और विनियमन हेतु क्षेत्रों को अधिसूचित करना;

(ख) धारा 10 के अधीन यथा उपबंधित भू- जल संसाधनों के प्रबंधन और विनियमन हेतु क्षेत्रों को गैर- अधिसूचित करना ;

(ग ) धारा 13 के अधीन यथा उपबंधित भू- जल निष्कर्षण 928 ( 15)

छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 22 जुलाई 2022

की सीमाओं को नियत करना;

(घ) गैर- अधिसूचित / अधिसूचित क्षेत्रों में औद्योगिक / वाणिज्यिक /खनन उद्देश्य हेतु भू- जल निष्कर्षण हेतु अनुमति देना;

(ड.) भू- जल निष्कर्षण हेतु कर एकत्र करना; तथा

(च) भू- जल उपयोग की निगरानी और प्रबंधन हेतु तकनीक विकसित करना एवं नवीनतम तकनीक अपनाना;

(छ) राज्य भू- जल प्रबंधन और नियामक प्राधिकरण के वर्ष में कम से कम दो बैठकें आयोजित की जायेंगी किन्तु आवश्यक होने पर अधिक बैठकों का आयोजन भी किया जा सकेगा ।

(7) राज्य भू- जल प्रबंधन और नियामक प्राधिकरण के कर्मचारीगण,-

(क) राज्य भू- जल प्रबंधन और नियामक प्राधिकरण को अपने कृत्यों का समुचित निष्पादन करने या इस अधिनियम के अधींन शक्तियों का प्रयोग करने योग्य बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार उतनी संख्या में प्राविधिक कार्मिकों तथा अन्य कर्मचारीगण की नियुक्ति कर सकती है, जैसा कि वह संस्थागत सहायता, सुविधाओं तथा बजट सहित आवश्यक समझे;

(ख) ऐसे कर्मचारियों के कृत्य, सेवा के निबंधन एवं शर्तें ऐसी होंगी , जैसा कि विहित किया जाये;

928(16)

छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 22 जुलाई 2022

(ग) राज्य भू-जल प्रबंधन और नियामक प्राधिकरण राज्य सरकार के समग्र नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन कार्य करेगा;

(8) अन्य समुचित निकायों के लिए सहायताः- जिला परिषद् को निर्विघ्न और सम्यक् रूप से कार्य करने के लिए कर्मचारी वर्ग तथा कार्यालय के साथ ही साथ समस्त संस्थागत सहायता तथा कार्य सुविधाओं, बजट सबंधी अपेक्षाओं के लिए भी उपबंध किये जायेंगे ।

4.

जिला भू-जल प्रबंधन परिषद्‌

(1 ) जिला भू- जल प्रबंधन परिषद् का गठन किया जायेगा, जो जिला स्तर पर भू- जल संसाधनों के प्रबंधन के लिए एक समग्र इकाई होगी , जिसमें निम्नलिखित सदस्य होंगे-

(क) अध्यक्ष- कलेक्टर;

(ख) उपाध्यक्ष पंचायत; मुख्य कार्यपालन अधिकारी , जिला

(ग) सदस्य सचिव- कार्यपालन अभियंता, जल संसाधन संभाग , जिला मुख्यालय;

(घ) भू- जल के क्षेत्र में दीर्घकालीन कार्य करने का अनुभव/ ज्ञान रखने वाले विषय विशेषज्ञ के रूप में दो सदस्य, जो अध्यक्ष द्वारा नाम निर्दिष्ट किया जायेगा;

(ड.) अन्य सदस्य, जिला स्तरीय प्रतिनिधि होंगे यथा संभागीय वन अधिकारी , वन सहायक भू- जलविद, 928 ( 17)

छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 22 जुलाई 2022

जिला भू- जल सर्वेक्षण इकाई, क्षेत्रीय अधिकारी , छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल , उप संचालक, कृषि विभाग , आयुक्त/ मुख्य नगरपालिका अधिकारी , जिला मुख्यालय (स्थानीय निकाय ) के नगर निगम / नगरपालिका, महाप्रबंधक / उप निदेशक, जिला उद्योग केन्द्र, कार्यपालन अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग , (प्रत्येक में से एक) ।

(2) भू-जल के नामित विषय विशेषज्ञ सदस्यों की सेवा की शर्तें एवं निबंधन ऐसी होंगी, जैसा कि विहित किया जाये ।

(3) जिला भू- जल प्रबंधन परिषद के कृत्य निम्नलिखित होंगे ,-

(क) सूक्ष्म जल विभाजक पद्धति पर आधारित और यथा विहित मार्गदर्शन के अनुसार जिला स्तरीय भू- जल सुरक्षा योजना का समेकन करना;

(ख) जिला भू- जल सुरक्षा योजना का क्रियान्वयन;

(ग) जिला भू- जल सुरक्षा योजना के क्रियान्वयन का अनुश्रवण करना;

(घ) जल जागरूकता कार्यक्रम संचालित करना;

(ङ) अधिसूचित और गैर-अधिसूचित क्षेत्रों में समस्त विद्यमान वाणिज्यिक , औद्योगिक , अवसरंचनात्मक तथा थोक उपयोगकर्ता को पंजीकृत करना;

(च) अधिसूचित / गैर अधिसूचित क्षेत्रों में भू- जल निष्कर्षण हेतु अनुमति की अनुशंसा करना;

928(18)

छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 22 जुलाई 2022

(छ) वेधन अभिकरणों/ वेधन रीग मशीन को पंजीकृत करना;

(ज) ऐसे कृत्यों को क्रियान्वित करना , जैसा कि राज्य भू-जल प्रबंधन और नियामक प्राधिकरण द्वारा विहित किया जाये या समनुदेशित किया जाये;

(झ) राज्य भू- जल प्रबंधन और नियामक प्राधिकरण के साथ समन्वय स्थापित करना;

(ञ) जिला भू- जल प्रबंधन परिषद् की बैठके आवश्कतानुसार आयोजित की जायेंगी ।

5.

विकासखंड.

स्तरीय भू-जल उपयोगकर्ता पंजीकरण समिति.

(1 ) विकासखण्ड में भू- जल के घरेलू और कृषि के सभी वर्तमान / नवीन उपयोगकर्ताओं के पंजीकरण हेतु विकासखंड स्तरीय भू- जल उपयोगकर्ता पंजीकरण समिति का गठन किया जायेगा, जिसमें निम्नलिखित होंगे:-

(क) अध्यक्ष- मुख्य कार्यपालन अधिकारी , जनपद पंचायत संबंधित विकासखंड;

(ख) सदस्य सचिव अनुविभागीय अधिकारी , जल संसाधन, उप संभाग संबंधित विकासखंड;

(ग) अन्य सदस्य कृषि, पंचायत एवं ग्रामीण विभाग, उद्योग , लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग तथा वन विभाग के (प्रत्येक में से एक) विकासखंड स्तरीय प्रतिनिधि होंगे;

(2) विकासखंड स्तरीय भू- जल उपयोगकर्ता पंजीकरण समिति के कृत्य निम्नलिखित होंगे:-

928 ( 19)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 22 जुलाई 2022

(क) जल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना,

(ख ) विकासखंड अंतर्गत अधिसूचित एवं गैर अधिसूचित क्षेत्रों के भू- जल के घरेलू और कृषि के वर्तमान और नवीन उपयोगकर्ताओं के पंजीकरण का कार्य पंचायत स्तर पर करेगी , जैसा कि विहित किया जाये;.

(ग) ऐसे कृत्यों को क्रियान्वित करना, जैसा कि प्राधिकरण द्वारा विहित किया जाय या समनुदेशित किया जाये;

(घ) विकासखण्ड स्तरीय भू- जल उपयोगकर्ता पंजीकरण समिति की बैठके आवश्यकतानुसार आयोजित की जायेंगी ।

अध्याय-तीन

कर्तव्य और उत्तरदायित्व

6.

भू-जल विंग के कर्तव्य.

(1 ) जल संसाधन विभाग, जिला भू- जल प्रबंधन परिषद् के साथ समन्वय स्थापित करने हेतु एक क्रियाविधि विकसित करेगा ।

(2) जल संसाधन विभाग , भू- जल से संबंधित आंकडों के एकत्रीकरण , विश्लेषण एवं प्रतिवेदन का प्रकाशन का कार्य करेगा ।

(3) भू-जल के विनियमन के प्रयोजन के लिए क्षेत्रों का अभिनिर्धारणः- राज्य भू- जल प्रबंधन और नियामक प्राधिकरण के परामर्श से ऐसे क्षेत्रों, यथा जल संसाधन विभाग और केन्द्रीय भू जल बोर्ड द्वारा किये गये नवीनतम भू- जल संसाधन प्राक्कलन के अनुसार श्रेणीकृत अतिदोहित तथा संकटग्रस्त खण्डों और संकटग्रस्त नगर पालिका / नगरीय क्षेत्रों (जहाँ भू- जल स्तरों में महत्वपूर्ण हास हुआ हो ) भू-जल के समग्र प्रबंधन तथा विनियमन हेतु समुचित उपाय करने के लिए उक्त संकटग्रस्त नगर पालिका/ नगरीय क्षेत्रों को अभिनिर्धारित तथा चिन्हांकित करेगा;

(4) भू- जल सूचना /आंकड़ेः-अतिदोहित / संकटमय खण्डों और संकटग्रस्त नगरीय क्षेत्रों से सम्बंधित समस्त उपलब्ध भू- जल सूचना / आंकड़े उपलब्ध कराये जायेंगे । 928( 20)

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अध्याय-चार

शक्तियाँ और कृत्य

7

शक्तियों और कर्तव्यों का प्रत्यायोजन

(1 ) राज्य भूजल प्रबंधन एवं नियामक प्राधिकरण , लिखित रूप में सामान्य या विशेष आदेश द्वारा , ऐसे व्यक्ति, जैसा कि वह आवश्यक समझे , को समस्त शक्तियों या कर्तव्यों को प्रत्यायोजित कर सकता है ।

(2 ) अधिसूचित और गैर अधिसूचित क्षेत्रों में किसी भू- जल उपयोगकर्ता तथा बेधन अभिकरणों के लिए प्रत्येक समुचित निकाय की शक्ति वहीं होगी, जैसा कि विहित की जाये ।

8

भू-जल संसाधनों के प्रबंधन और विनियमन के लिये क्षेत्रों को अधिसूचित करने की शक्तियाँ.

(1) जहाँ (जल संसाधन विभाग की जानकारियों पर आधारित) सक्षम निकायों से परामर्श करने के पश्चात राज्य भू- जल प्रबंधन एवं नियामक प्राधिकरण की यह राय हो कि किसी क्षेत्र में किसी रूप में विभिन्न प्रयोजनार्थ भू- जल का प्रबंधन एवं विनियमन करना और वर्षा जल संचयन / भू- जल पुनर्भरण को प्रवर्तित करना तथा अतिदोहित / संकटग्रस्त खण्डों एवं संकटमय नगरीय क्षेत्रों (जल संसाधन विभाग द्वारा यथा अभिज्ञानित/ चिन्हांकित) जहाँ भू- जल स्तर संकटग्रस्त या चिन्ताजनक स्तरों तक पहुंच गये हों, में विभिन्न समुचित जल संरक्षण/जल बचत / जल दक्ष पद्धतियों को क्रियान्वित करना लोकहित में आवश्यक और समीचीन हो, वहाँ वह राज्य सरकार को ऐसी रीति से, जैसा कि विहित किया जाये, यह परामर्श देगा कि वह इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ अधिसूचना द्वारा ऐसे क्षेत्रों को अधिसूचना में यथा विनिर्दिष्ट दिनांक से अधिसूचित क्षेत्र घोषित करेः

परन्तु यह कि,

(क) इस उप - धारा के अधीन अधिसूचना में विनिर्दिष्ट दिनांक , ऐसे अवधि से पूर्वतर नहीं होगा , जैसा कि राज्य भू- जल प्रबंधन एवं नियामक प्राधिकरण द्वारा परामर्श दिया जाये ;

(ख ) इस धारा के अधीन हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं में प्रत्येक अधिसूचना को राजपत्र में प्रकाशित किये जाने के अतिरिक्त व्यापक प्रसार किया जायेगा;

(ग ) उप -धारा (1 ) में निर्दिष्ट क्षेत्रों का चिन्हांकन एवं अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया, ऐसी होगी , जैसा कि विहित किया जाये । 928 ( 21)

छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 22 जुलाई 2022

(2) उप -धारा ( 1 ) के अधीन जारी की गई अधिसूचना की, अद्यतन भू- गर्भ जल निर्धारण रिपोर्ट के अनुसार, समय- समय पर, रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुसार ऐसी रीति में , जैसा कि विहित किया जाये , समीक्षा की जायेगी ।

9 (1) विद्यमान एवं भावी वाणिज्यिक, औद्योगिक, अवसंरचनात्मक और थोक भू- जल उपयोगकर्ताओं का पंजीकरण अनिवार्य होगा तथा ऐसी रीति से किया जायेगा, जैसा कि विहित किया जाये;

अधिसूचित और गैर अधिसूचित क्षेत्रों में विद्यमान वाणिज्यिक ,

औद्योगिक, अवसंरचनात्मक और थोक भूजल उपयोगकर्ताओं का रजिस्ट्रीकरण .

(2) उप- धारा (1 ) में उल्लिखित उपयोगकर्ताओं से भिन्न भू- जल के प्रत्येक विद्यमान एवं भावी उपयोगकर्ता, जिसमें भू- जल के घरेलू या कृषि उपयोगकर्ता शामिल है, का पंजीकरण ऐसी रीति से किया जायेगा, जैसा कि विहित किया जायें ।

10

अधिसूचित क्षेत्रों में नवीन कूप निर्माण पर प्रतिबंध.

अधिसूचित क्षेत्रों में, जैसा कि विहित किया जाये , पेय जलापूर्ति तथा वृक्षारोपण के सरकारी योजनाओं के सिवाय , नवीन कूप निर्माण पर प्रतिबंध होगा, ऐसा प्रतिबन्ध तब तक जारी रहेगा, जब तक कि राज्य सरकार द्वारा राज्य भू- जल प्रबंधन और नियामक प्राधिकरण के परामर्श पर उक्त क्षेत्र को गैर अधिसूचित नहीं कर दिया जाता है , जैसा कि विहित किया जाये ।

11

अधिसूचित क्षेत्रों में भू- जल संसाधनों के अविरतता को सुनिश्चित करने तथा उसे प्राप्त करने के लिए भू- जल सुरक्षा योजनाएँ ऐसी रीति से तैयार किया जायेगा , जैसा कि विहित किया जाये । ।

अधिसूचित क्षेत्रों में भूगर्भ जल सुरक्षा योजनाओं का तैयार किया जाना और उनका क्रियान्वयन.

928 ( 22)

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12

गैर अधिसूचित क्षेत्र में भू- जल निकालने के प्राधिकार की स्वीकृति ऐसी संबंधित नियमों के तहत विनियमित होंगी, जैसा कि विहित किया जाये;

गैर अधिसूचित क्षेत्रों में भू-जल निकालने के प्राधिकार को स्वीकृत किया जाना.

वाणिज्यिक, औद्योगिक

13 (1 ) राज्य भू- जल प्रबंधन और नियामक प्राधिकरण , जल संसाधन विभाग के परामर्श से भू- जल निकालने की सीमा नियत कर सकेगा ।

अवसंरचनात्मक खनन, थोक भू-जल उपयोगकर्ताओं हेतु भूजल निकालने की सीमा नियत किया जाना तथा आदेशों एवं निर्देशों इत्यादि की तामिली.

(2) उप-धारा (1 ) के अधीन जारी प्रत्येक आदेश या निर्देश को उसी रीति से तामील किया जायेगा, जैसा कि इस अधिनियम में विहित किया जाये;

14

! भूजल निकासी/ निष्कर्षण पर शुल्क.

(1 ) कोई भी वाणिज्यिक, औद्योगिक, अवसंरचनात्मक, खनन या थोक भू जल उपयोगकर्ता , जो इसमें इसके पश्चात् इस धारा में उक्त उपयोगकर्ता के रूप में निर्दिष्ट है, दोनों अधिसूचित तथा गैर अधिसूचित क्षेत्रों में भू- जल निकासी करेगा , उससे ऐसा करारोपण शुल्क उद्गृहित किया जायेगा , जैसा कि विहित किया जाये ।

(2) उप- धारा (1 ) में निर्दिष्ट करारोपण शुल्क, जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) उपकर अधिनियम , 1977 (1977 का सं. 36) के अधीन प्रभारित जल उपकर के अतिरिक्त होगी । 928 (23)

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(3) निकाले गये भूजल की मात्रा को मापने तथा उसे अभिलिखित करने के प्रयोजनार्थ उक्त प्रत्येक उपयोगकर्ता, ऐसे मीटर संस्थापित करेंगे , जैसा कि विहित किया जाये ।

प्राधिकरण के कर्मचारी, लोक सेवक होंगे.

15 राज्य भूजल प्रबंधन और नियामक प्राधिकरण के समस्त कर्मचारी , जब इस अधिनियम या इसके अधीन बनाये गये नियम के उपबंधों के अनुसरण में कार्यरत हों या उनका कार्यरत होना आशयित हो, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का सं. 45) की धारा 21 के अर्थान्तर्गत लोक सेवक समझें जायेंगे ।

16

सद्भावनापूर्वक की गई कार्यवाही का संरक्षण.

इस अधिनियम या इसके अधीन बनाये गये नियम के अधीन सद्भावनापूर्वक की गई या किये जाने हेतु आशयित किसी बात के लिये राज्य सरकार या सरकार के किसी समुचित निकाय, किसी अन्य अधिकारी या किसी समुचित निकाय के किसी सदस्य या अन्य कर्मचारी के विरूद्ध कोई अभियोजन, वाद या किसी नुकसान / मुआवजा का दावा अथवा अन्य विधिक कार्यवाही संस्थित नहीं की जायेगी ।

17

समाघात निर्धारण.

(1) इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार समुचित निकाय का यह कर्तव्य होगा कि वे अपनी अधिकारिता क्षेत्र में क्रियान्वित की जाने वाली ऐसी क्रियाकलापों के सामाजिक तथा पर्यावरणीय पहलुओं के प्रभाव को आंकलित करने का उपक्रम करें ।

(2) उप- धारा (1 ) के अधीन किये गये क्रियाकलापों के प्रभावों के आकलन संबंधी सूचनाएँ, सार्वजनिक रूप में पहुंच हेतु इंटरनेट पर रखी जाएगी ।

अध्याय-पाँच

उल्लंघन, अपराध एवं शस्तियाँ

बेधन अभिकरणों का रजिस्ट्रीकरण.

18 समुचित निकाय में रजिस्ट्रीकरण के बिना, कोई व्यक्ति या फर्म, अभिकरण या कंपनी भू- जल निकालने हेतु भूमि का न तो बेधन करेगा और न ही उस कार्य में संलग्न होगा ।

19 (1 ) जो कोई, इस अधिनियम या उसके अधीन बनाये किसी नियम या जारी की गई किसी अधिसूचना या किये गये किसी आदेश के, या इस अधिनियम के अधीन मंजूर की गई किसी अनुज्ञप्ति या अनुज्ञा- पत्र के उल्लंघन में (क) नवीन कुंआ/ नलकूप खनन करता है ; या

विधि विरुद्ध खनन, भू- जल निकासी, आपूर्ति, विक्रय, उपयोग , आदि

के लिए अपराध 928 ( 24)

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एवं शास्ति.

(ख) कच्चे असंसाधित अनुपंचारित भू- जल का निष्कर्षण, विक्रय या आपूर्ति करता है; या

(ग) भू- जल का किसी टैंकर, पात्र इत्यादि से जलापूर्ति करता है; या (घ) किसी समुचित निकाय , अथवा राज्य शासन या राज्य भू- जल प्रबंधन एवं नियामक प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति को इस अधिनियम के अधीन दी गई शक्तियों के प्रयोग करने में बाधा डालता है ; या

(ड. ) किसी असफल , अधूरे अथवा अनुपयोगी कूप , जो उसके स्वामित्व का है , को सुरक्षित करने की इस प्रकार अवहेलना करेगा, जिससे जन अथवा पशु की मृत्यु/ उपहति कारित होने की संभावना हो;

वह उप -धारा (2 ) के प्रावधानों के अध्ययीन रहते हुए , प्रत्येक ऐसे अपराध के लिए कारावास से , जिसकी अवधि तीन माह से कम नहीं होगी, किन्तु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी अथवा जुर्माने से, जो रु. 5000 / - से कम का नहीं होगा किन्तु जो रु . 10000 /- तक का हो सकेगा, से दण्डनीय होगाः

परन्तु जब कोई व्यक्ति इस धारा के अधीन किसी अपराध के लिए दूसरी बार या पश्चातवर्ती समय पर सिद्धदोष ठहराया जाता है तो वह प्रत्येक ऐसे अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि छः माह से कम की नहीं होगी किन्तु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी तथा जुर्माने से, जो रु० 10000 /- से कम नहीं होगी और जो रु0 15,000 /- तक की हो सकेगी , से दण्डनीय होगा ।

(2) उप - धारा (1 ) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, यदि उप - धारा (1 ) के खण्ड (क) , (ख ) , (ग) अथवा (घ) के अंतर्गत आने वाले कोई अपराध किसी वाणिज्यिक उपयोगकर्ता , औद्यागिक उपयोगकर्ता, अवसंरचनात्मक उपयोगकर्ता एवं बहुउपपयोगकर्ता के द्वारा कारित किया जाता है , तो वह कारावास से, जिसकी अवधि छः माह से कम नहीं होगी , किन्तु जो दो वर्ष तक की हो सकेगी अथवा जुर्माने से, जो रु. 10000/- से कम का नहीं होगा किन्तु जो रु. 25000/- तक का हो सकेगा, से दण्डनीय होगाः

परन्तु जब कोई व्यक्ति इस धारा के अधीन किसी अपराध के लिए दूसरी बार या पश्चातवर्ति समय पर सिद्धदोष ठहराया जाता है तो वह प्रत्येक ऐसे अपराध के लिए कारावास से , जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं 928 ( 25)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 22 जुलाई 2022

होगी किन्तु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी तथा जुर्माने से, जो रु० 20000 /- से कम नहीं होगी और जो रु0 50,000 / - तक की हो सकेगी, से दण्डनीय होगा;

(3 ) जब उप- धारा (1 ) या (2) के अंतर्गत आने वाले किसी अपराध के लिए दूसरी बार या पश्चातवर्ती समय पर सिद्धदोष ठहराया जाता है, तो भू- जल निष्कर्षण हेतु जारी की गई अनुमति/ अनुज्ञप्ति, तत्काल प्रभाव से निरस्त किये जा सकेंगे ।

(4) जब यह विश्वास करने का कारण हो कि इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किया गया है तो सहायक अभियंता की श्रेणी से अनिम्न अधिकारी या इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी , इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन इस प्रकार अपराध कारित करने में प्रयुक्त मशीन , उपकरण, औजार, वाहन, पात्र या कोई अन्य वस्तु को जप्त कर सकेगा ।

(5) इस धारा के अधीन किसी सम्पति का अभिग्रहण करने वाला कोई अधिकारी , ऐसी सभी सम्पत्ति पर उपदर्शित करने वाला चिन्ह लगाएगा कि उसका इस प्रकार अभिग्रहण किया गया है और सम्पत्ति की अभिग्रहण रिपोर्ट यथाशक्य शीघ्र जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता के समक्ष प्रस्तुत करेगा ।

(6) (एक) जब कार्यपालन अभियंता के समक्ष ऐसा कोई अभिग्रहण रिपोर्ट, प्रकरण की जांच के दौरान किन्तु न्यायालय में परिवाद दाखिले के पूर्व, प्रस्तुत किया जाता है , तो कार्यपालन अभियंता, ऐसी अभिग्रहित संम्पत्ति की उचित अभिरक्षा हेतु प्रकरण की जांच अथवा विचारण की लंबित अवधि तक के लिए ऐसा समुचित आदेश कर सकेगा, जैसा कि उचित समझे । तथापि, यदि कार्यपालन अभियंता की राय हो कि ऐसी संपत्ति की अंतरिम अभिरक्षा के लिये आदेश किया जाना उपयुक्त नहीं है तो वह ऐसी संपत्ति के राजसात के आदेश के लिये कलेक्टर के समक्ष रिपोर्ट को निर्दिष्ट कर सकेगा;

(दो) यदि कार्यपालन अभियंता या इस हेतु प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी ने मजिस्ट्रेट के समक्ष लिखित परिवाद प्रस्तुत कर दिया हो तो ऐसी स्थिति में, सम्पत्ति के व्ययन के संबंध में दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 ( 1974 का 2 ) की अध्याय-चौतीस के प्रावधान लागू होंगे ।

अपराधों का संज्ञान.

20 (1 ) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 ( 1974 का सं. 2) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी

(क) इस अधिनियम के अधीन सभी अपराध असंज्ञेय एवं जमानतीय होंगे ;

(ख) इस अधिनियम के अधीन कारित किसी अपराध का, कोई भी न्यायालयः 928 ( 26)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 22 जुलाई 2022

कार्यपालन अभियंता, जल संसाधन विभाग अथवा राज्य शासन द्वारा समय- समय पर अधिसूचना के माध्यम से प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी के लिखित परिवाद के बिना, प्रसंज्ञान नहीं लेगा;

(ग) जब कोई अपराध धारा 19 के अधीन किया गया पाया जाता है, तो कार्यपालन अभियंता जल संसाधन विभाग, कार्यपालन अभियंता के समक्ष उपस्थित होने के लिये अभियुक्त को नोटिस जारी करेगा तथा इस प्रकार कारित अपराध का प्रशमन नोटिस के 30 दिनों के भीतर किया जायेगा । यदि अभियुक्त प्रशमन की प्रकिया के लिये उपस्थित नहीं होता है तो कार्यपालन अभियंता द्वारा नोटिस के तामिल होने की तिथि के एक माह के भीतर लिखित परिवाद किया जायेगा; परन्तु यह कि परिवाद का संज्ञान विहित अवधि के पश्चात् न्यायालय द्वारा लिया जा सकेगा , यदि परिवादी न्यायालय को संतुष्ट करता है कि उसके पास विहित अवधि के भीतर परिवाद प्रस्तुत न करने का पर्याप्त कारण है;

(घ) प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट से निम्न कोई न्यायालय , इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का विचारण नही करेगा ।

(1 )

प्रशमन. अपराधों का 21

इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का प्रशमन, कार्यपालन अभियंता की श्रेणी से अनिम्न अधिकारी अथवा ऐसे अधिकारियों , जिन्हें राज्य सरकार द्वारा समय - समय पर अधिसूचित किया जाए, द्वारा अभियोग संस्थित किए जाने के पूर्व या पश्चात्, अभियुक्त के आवेदन पर, प्रशमन किया जा सकेगा;

जब प्रशमन के लिये आवेदन, ऐसे प्रशमन के लिये प्राधिकृत अधिकारी द्वारा प्राप्त किया जाता है , प्रशमन शुल्क अधिरोपित करने तथा शासन के हित में जमा करने के पश्चात्, किया जा सकेगा जो रु 0 20,000 /- से कम नहीं होगा किन्तु रु. 10 लाख तथा जल कर एवं अन्य उपकर आदि सहित निर्धारित अधिकतम जुर्माने का 50 % , जैसा कि मात्रा अनुरुप लागू हो, से अधिक नहीं होगा ।

(2) धारा 21 की उप- धारा (1 ) में वर्णित प्रत्येक अधिकारी , समुचित निकाय के निर्देशन, नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण के अध्यधीन रहते हुये अपराध के प्रशमन के लिये प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करेंगे ।

(3) अपराधों के प्रशमन हेतु प्रत्येक आवेदन ऐसे प्ररुप में एवं ऐसी रीति में किया जायेगा, जैसा कि विहित किया जाये ।

(4) जहां किसी अपराध का प्रशमन अभियोजन संस्थित करने के पूर्व किया. जाता हो, वहां अपराधी , जिसके संबंध में इस प्रकार अपराध का प्रशमन किया 928 ( 27)

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गया हो , के विरुद्ध , ऐसे अपराध के संबंध में कोई भी अभियोजन संस्थित नहीं किया जायेगा ।

(5) जहाँ किसी अपराध का प्रशमन अभियोजन के संस्थित करने के पश्चात् किया जाता हो , वहाँ ऐसा प्रशमन , उप - धारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी के द्वारा न्यायालय , जिसमें अभियोजन लंबित है, के संज्ञान में, लिखित में , लाया जाएगा तथा अपराध के प्रशमन की ऐसी सूचना दिये जाने पर, व्यक्ति, जिसके विरुद्ध अपराध का इस प्रकार प्रशमन किया गया है , निर्मुक्त अथवा दोषमुक्त हो जायेगा ।

22. (1

कंपनियों द्वारा अपराध.

) जब कभी किसी कंपनी द्वारा इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध कारित किया गया हो, तब प्रत्येक व्यक्ति, जो अपराध किए जाने के समय कंपनी के कारोबार के संचालन के लिए कंपनी का प्रभारी था या उसके प्रति उत्तरदायी था, अपराध का दोषी समझा जायेगा ।

(2) उप - धारा (1 ) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध, कंपनी के निर्देशक, प्रबंधक , सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुमति से किया गया हो या उसकी ओर से किसी उपेक्षा के कारण हो गया हो, वहां ऐसा निर्देशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जायेगा ।

23.

भू-जल षिकायत निवारण अधिकारी.

जिला कलेक्टर, जिला भू- जल शिकायत निवारण अधिकारी के रूप में कार्य करेगा, जिला भू- जल शिकायत निवारण अधिकारी के द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध अपील राज्य भू- जल प्रबंधन और नियामक प्राधिकरण में, जिला भू-जल शिकायत निवारण अधिकारी द्वारा आदेश पारित होने के 60 दिन के भीतर, किया जायेगा ।

अध्याय-छः

प्रकीर्ण

24.

समुचित निकाय को सूचना मांगने की शक्ति.

राज्य भू- जल प्रबंधन तथा नियामक प्राधिकरण और जिला भू- जल प्रबंधन परिषदों के पास राज्य सरकार के किसी विभाग या किसी अन्य व्यक्ति से ऐसी कोई सूचना, जो उसके द्वारा इस अधिनियम के अधीन उनकी शक्तियों के प्रयोग तथा उनके कर्तव्यों के निर्वहन में अपेक्षित हो, मांगने की शक्ति होगी और ऐसा विभाग या व्यक्ति, ऐसी सूचना उपलब्ध कराने के लिए बाध्य होगी । 928 ( 28)

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स्वतः विनियमन. 25 (1 ) अधिसूचित क्षेत्रों (ग्रामीण) के भू-जल उपयोगकर्ताओं को स्वतः विनियमन, वर्षा जल संचयन , भू- जल पुनर्भरण, पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग , जल भराव के निवारण की प्रक्रिया को अंगीकृत करने के लिए समुचित निकाय द्वारा प्रोत्साहित किए जाएंगे ।

(2) ग्रामीण तथा नगरीय दोनों क्षेत्रों में भू- जल के प्रत्येक उपयोगकर्ता को, मितव्ययिता एवं दक्षतापूर्वक भू- जल निकालने और उसका उपयोग करने , जल अपव्यय को रोकने, पुनर्चालित किए गए जल का प्राथमिकता पर प्रयोग करने , वर्षा जल संचयन तथा पुनर्भरण पद्धतियों को अपनाने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा ।

(3) भूवैज्ञानिक शर्तों के अनुसार वर्षा जल संचयन और जलागम संरक्षण को प्रोत्साहित करेंगे , जो कि जल सुरक्षा योजनाओं का अभिन्न अंग होगा । पूर्वविद्यमान अधिकार. 26 (1 ) भू- जल उपयोगकर्ता के पूर्व- विद्यमान अधिकार, ऐसे अवधि के लिए विधिमान्य रहना जारी रहेंगे , जैसा कि विहित किया जाये ।

(2) भू-जल उपयोगकर्ता, किन्हीं विधिक या अन्य अधिकारों, जो इस अधिनियम के अधीन समाप्त हो गए हैं, के लिए किसी प्रतिकर का हकदार नहीं होगा । भू-जल संवर्धन 27 कोष.

राज्य सरकार द्वारा भू- जल संरक्षण कोष नामक एक निधि का सृजन किया गया है और शास्तियों, पंजीकरण फीस तथा भू- जल निष्कर्षण/ निकासी का शुल्क/करारोपण शुल्क आदि की समस्त लेखा प्राप्तियां, इस निधि में जमा की जाएगी । निधि का ऐसा उपयोग किया जायेगा, जैसा कि विहित किया जाए । (1 ) राज्य सरकार, इस अधिनियम के उपबंधों को क्रियान्वित करने के लिए अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगी ।

राज्य सरकार 28 की नियम बनाने की शक्ति.

(2) इस धारा के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाये गये प्रत्येक नियम इसके बनाये जाने के उपरांत, यथासंभव शीघ्र राज्य विधान - मण्डल के समक्ष रखा जायेगा । 29

राज्य सरकार को छूट प्रदान करने की शक्ति.

राज्य सरकार , राज्य भू- जल प्रबंधन एवं नियामक प्राधिकरण की अनुशंसा पर, किसी विनिर्दिष्ट क्षेत्र के उपयोगकर्ता या उपयोगकर्ता के वर्ग को इस अधिनियम के किसी उपबंध से, विनिर्दिष्ट कालावधि के लिये , छूट प्रदान कर सकेगी । 928( 29)

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30. (1 ) तत्समय प्रवृत्त राज्य के किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के उपबंध, अभिभावी होंगे ।

अधिनियम का अन्य नियमों पर प्रभाव.

(2) पेयजल परीरक्षण अधिनियम के द्वारा राज्य / जिला प्राधिकरणों को प्रदत्त प्रावधान एंव शक्तियां, इस अधिनियम के किसी प्रावधान से प्रभावित नहीं होंगी । 928( 30)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 22 जुलाई 2022

उद्देश्यो और कारणों के कथन

भूगर्भ जल घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपयोगों के लिए जल का एकल सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्त्रोत है । यह ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में पेयजल , भोजन और आजीविका का प्रधान आधार है । राज्य सरकार के संज्ञान में यह लाया गया है कि भू- जल के अनियन्त्रित और तीव्र निष्कर्षण के फलस्वरूष राज्य के अनेक क्षेत्रों में भूजल के स्तरों में गिरावट और भूजल जलाशयों में ह्रास होने की भयावह स्थिति उत्पन्न हो गयी है । राज्य में गम्भीर भू-जल संकट और भू-जल संदूषण की स्थिति से निपटने के लिए राज्य में दोनों परिमाणात्मक एवं गुणात्मक भूजल का अविरत प्रबन्धन सुनिश्चित करने हेतु भू- जल की सुरक्षा, संरक्षा, नियंत्रण तथा विनियमन करने के लिए एक विधि बनाने का विनिश्चय किया गया है ।

तद्नुसार छत्तीसगढ़ भू- जल (प्रबन्धन और विनियमन) विधेयक, 2022 पुनःस्थापित किया जाता है ।

रविन्द्र चौबे

रायपुर,

जल संसाधन मंत्री, (भारसाधक सदस्य) दिनांक 19 जुलाई , 2022

"संविधान के अनुच्छेद 207 के अधीन राज्यपाल द्वारा अनुशंसित " 928(31)

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 22 जुलाई 2022

वित्तीय ज्ञापन का प्रारूप

इस विधेयक के अध्याय 2 में प्रस्तावित प्रावधान किये जाने के परिणाम स्वरूप राज्य शासन पर प्रतिवर्ष वेतन भत्तों एवं विविध खर्चों पर प्रतिवर्ष अनुमानतः रूपये 100,00,000/-(रूपये एक करोड़) मात्र का अतिरिक्त आवर्ती वित्तीय भार आयेगा ।

विधायनी शक्ति के प्रत्यायोजन बाबत्

व्याख्यात्मक ज्ञापन

प्रस्तावित छत्तीसगढ़ भू- जल (प्रबंधन और विनियमन) विधेयक-2022 की धारा 4(2) , 5(2) , 7(2), 8 (1 ) , 9, 10, 11 , 12 , 13 (2) , 14(1 ), 21 (3) एवं 28 (1 ) में नियम बनाने की शक्ति के प्रत्यायोजन की संस्थापनायें हैं जो सामान्य स्वरूप की है ।

दिनेश शर्मा सचिव छत्तीसगढ़ विधान सभा संचालक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री , छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय , रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित - 2022.

Cite this issue. Chattisgarh Gazette - Extraordinary, Government of Chattisgarh, 22 July 2022. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.chhattisgarh.eo.2022-07-22.464/. Archive identifier in.gazette.chhattisgarh.eo.2022-07-22.464.