छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय
रायपुर, शुक्रवार, दिनांक 2 दिसम्बर, 2022 (अग्रहायण 11, 1944)
क्रमांक- 11542/वि.स./विधान/2022.⸺ छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ लोकसेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिये आरक्षण) (संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 18 सन् 2022) जो शुक्रवार, दिनांक 2 दिसम्बर, 2022 को पुरःस्थापित हुआ है, को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है.
हस्ता./-
(दिनेश शर्मा) सचिव.
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्र. 18 सन् 2022)
छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों
और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) (संशोधन) विधेयक, 2022.
छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए
आरक्षण) अधिनियम, 1994 (क्र. 21 सन् 1994) को और संशोधित करने हेतु विधेयक ।
भारत गणराज्य के तिहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह
अधिनियमित होः-
संक्षिप्त नाम, विस्तार
तथा प्रारंभ.
1. (1) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) (संशोधन) अधिनियम, 2022 कहलाएगा।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में होगा।
(3) यह ऐसी तारीख से प्रवृत्त होगा जिसे राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत
करे।
धारा 1 का संशोधन. 2. छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 (क्र. 21 सन् 1994) (जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रुप में निर्दिष्ट है) की धारा 1 की उप-धारा (1) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्ः-
''(1) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों और आर्थिक रुप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 कहलायेगा।''
धारा 2 का संशोधन. 3. मूल अधिनियम की धारा 2 में,- ''(ख) ''स्थापन'' से अभिप्रेत है राज्य सरकार का या तत्समय प्रवृत्त राज्य के किसी अधिनियम के अधीन गठित किसी स्थानीय प्राधिकरण या कानूनी प्राधिकरण का या किसी वि"वविद्यालय का या किसी ऐसी कम्पनी या निगम, जिसमें समादत्त अं"ापूंजी का कम से कम इक्यावन प्रति"ात राज्य सरकार द्वारा धारित है या ऐसी सहकारी सोसाइटी, जहां उसकी अं"ापूंजी में राज्य सरकार ने अभिदाय किया है या कोई वित्तीय सहायता दी है या किसी संस्था का, जो राज्य सरकार से सहायता अनुदान या नगद अनुदान प्राप्त कर रही है, कोई कार्यालय और उसके अंतर्गत, ऐसा स्थापन आता है जिसमें कार्यभारित या आकस्मिकता निधि से भुगतान किया जाता है, और ऐसा स्थापन, जिसमें आकस्मिक नियुक्तियां की जाती है, किन्तु इसमें संविधान के अनुच्छेद 30 के अधीन आने वाले स्थापन सम्मिलित नहीं है।'' ''(झ) ''आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग'' से अभिप्रेत है अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण के अंतर्गत शामिल नहीं किए गए व्यक्ति, जिसके परिवार की सकल वार्षिक आय रूपये 8.00 लाख से कम है। उक्त आय में, आवेदन के वर्ष से पूर्व के वित्तीय वर्ष हेतु सभी स्त्रोतों अर्थात् वेतन, कृषि, व्यवसाय, वृत्ति आदि से होने वाली आय शामिल होगी। इसके अलावा निम्नलिखित परिसंपत्तियों में से किसी भी सम्पत्ति का मालिकाना हक अथवा स्वामित्व रखने वाले परिवार के व्यक्तियों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के रूप में चिन्हित नहीं किया जाएगा, भले ही उनकी परिवार की आय कुछ भी होः-
(एक) 5 एकड़ या उससे अधिक की कृषि भूमि;
(दो) 1000 वर्ग फीट या इससे अधिक का आवासीय फ्लैट;
(तीन) अधिसूचित नगरपालिकाओं में 100 वर्ग गज अथवा
इससे अधिक का आवासीय प्लाट;
(चार) अधिसूचित नगरपालिकाओं से भिन्न अन्य क्षेत्रों में 200
वर्ग गज अथवा इससे अधिक का आवासीय प्लाट ।
टीप- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रास्थिति (दर्जे) का निर्धारण करने के लिए भूमि अथवा सम्पत्ति के स्वामित्व का मानदण्ड लागू करते समय, ''परिवार'' द्वारा विभिन्न स्थानों अथवा विभिन्न क्षेत्रों अथवा शहरों में धारित सम्पत्ति को जोड़ा जाएगा।
इस प्रयोजन के लिए शब्द ''परिवार'' में आरक्षण का लाभ प्राप्त करने के इच्छुक व्यक्ति, उसके माता-पिता और 18 वर्ष से कम आयु के उसके भाई-बहन और उसका/उसकी पति/पत्नी और 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे शामिल होंगे।''
4. मूल अधिनियम की धारा 4 की उप-धारा (2) के खण्ड (एक) एवं (दो) धारा 4 का के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
संशोधन.
''(एक) प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के पदों में राज्य स्तर पर, किसी भर्ती के वर्ष में उद्भूत होने वाली रिक्तियों के संबंध में निम्नलिखित प्रतिशतः-
अनूसूचित जाति -13 प्रतिशत
अनुसूचित जनजाति -32 प्रतिशत
अन्य पिछड़े वर्ग -27 प्रतिशत
आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग-04 प्रतिशत
(दो) संभाग एवं जिला में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों में आरक्षणः-
(क) अनुसूचित जाति के लिए-जनसंख्या के प्रति"ात के अनुसार;
(ख) अनुसूचित जनजाति के लिए- जनसंख्या के प्रति"ात के
अनुसार;
उद्देश्यों और कारणों का कथन
यतः, छत्तीसगढ़ राज्य में अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों एवं अन्य पिछडे वर्ग के लोग बडी संख्या में निवासरत हैं। इन वर्गों के कल्याण एवं हितों का संरक्षण आवश्यक है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 16(4) एवं अनुच्छेद 335 और राज्य सूची दो की प्रविष्टि क्रमांक 41 के अंतर्गत राज्य लोक सेवाओं में आरक्षण संबंधी प्रावधान करने के लिए राज्य शासन सक्षम है। संविधान में संशोधन कर, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गाे के लिए भी 10 प्रतिशत तक आरक्षण का प्रावधान किया गया है;
और यतः, राज्य में पूर्व में प्रभावशील आरक्षण प्रावधानों को माननीय न्यायालय द्वारा निर्णय में असंवैधानिक घोषित किए जाने से अब पूर्व की स्थिति बन गई है, चूंकि छत्तीसगढ़ राज्य का पुनर्गठन होने से जनसंख्या एवं भौगोलिक क्षेत्र में भी परिवर्तन होने से पूर्व प्रावधान प्रासंगिक नहीं होने से, राज्य के अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के शासकीय सेवाओं एवं पदों में नियुक्तियां प्रभावित हो रही है;
और यतः, राज्य की लोक सेवाओं में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु, वर्तमान छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 (क. 21 सन् 1994) में संशोधन करते हुए, उपयुक्त आरक्षण निर्धारित करना आवश्यक हो गया है।
अतएव, राज्य सरकार द्वारा गठित क्वांटिफायबल डाटा आयोग की रिपोर्ट के आधार पर राज्य की लोक सेवाओं में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व एवं असाधारण स्थिति के कारण आरक्षण प्रावधान लागू करने के लिए यह विधेयक प्रस्तावित है ।
अतः यह विधेयक प्रस्तुत है।
रायपुर, दिनांक 25 नवम्बर, 2022
भूपेश बघेल
मुख्यमंत्री,
(भारसाधक सदस्य)
उपाबन्ध
छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के
लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 (क्रमांक 21 सन् 1994) का सुसंगत उध्दरण-
धारा-1
संक्षिप्त नाम
और प्रारंभ
(1) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) (संशोधन) अधिनियम, 2011 कहलायेगा
(2) यह ऐसी तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत करे.
परिभाषाएं. धारा-2 मूल अधिनियम की धारा-2 में, खण्ड (ख) ''स्थापन'' से अभिप्रेत है राज्य सरकार का या तत्समय प्रवृत्त राज्य के किसी अधिनियम के अधीन गठित किसी स्थानीय प्राधिकरण या कानूनी प्राधिकरण का या किसी विश्वविद्यालय का या किसी ऐसी कम्पनी, निगम या किसी सहकारी सोसाइटी का, जिसमें समादत्त अंश पूंजी का कम से कम इक्यावन प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा धारित है, कोई कार्यालय और उसके अन्तर्गत ऐसा स्थापन आता है जिसमें कार्यभारित या आकस्मिकता निधि से भुगतान किया जाता है;
खण्ड (ज) किसी रिक्ति के संबंध में ''भर्ती का वर्ष'' से अभिप्रेत है किसी वर्ष की पहली जनवरी को प्रारम्भ होने वाली बारह मास की कालावधि, जिसके भीतर ऐसी रिक्ति के प्रति सीधी भर्ती की प्रक्रिया आरम्भ की जाती है,
धारा-4 मूल अधिनियम की धारा-4 की उपधारा (2) के खण्ड (एक) प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के पदों में राज्य स्तर पर, किसी भर्ती के वर्ष में उद्भूत होने वाली रिक्तियों के संबंध में निम्नलिखित प्रतिशतः- पदों के आरक्षण के लिये प्रतिशतता का नियत किया जाना अनुसूचित जाति 12 प्रतिशत
अनुसूचित जनजाति 32 प्रतिशत
अन्य पिछड़े वर्ग 14 प्रतिशत
(दो) संभाग या जिला स्तर पर किसी भरती के वर्ष में किसी स्थापन में तृतीय वर्ग और चतुर्थ वर्ग पदों के ऐसे प्रवर्गों में, उद्भूत होने वाली रिक्तियों का प्रतिशत ऐसा होगा जो कि राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त अधिसूचित किया जाए हस्ता./-
(दिनेश शर्मा) सचिव, छत्तीसगढ़ विधान सभा.