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छत्तीसगढ शासन
पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़ / दुर्ग/09/ 2013-2015 ." "बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान (बिना डाक टिकट) के प्रेषण हेतुअनुमत. क्रमांक जी.2-22- छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई . दिनांक 30-05-2001 ."
सत्यमेव जयते
छत्तीसगढ़ राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक63]
रायपुर, बुधवार, दिनांक 21 फरवरी 2024- फाल्गुन 2, शक 1945
छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय
रायपुर, बुधवार, दिनांक 21 फरवरी 2024 (फाल्गुन 2, 1945)
क्रमांक-2993 /वि.स./विधान/ 2024. छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर ( संशोधन) विधेयक , 2024 (क्रमांक 3 सन् 2024) जो बुधवार, दिनांक 21 फरवरी , 2024 को पुरःस्थापित हुआ है, को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।
हस्ता./-
(दिनेश शर्मा) सचिव.
125 126
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 फरवरी 2024
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्रमांक 3 सन् 2024)
छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2024.
छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (क्र. 7 सन् 2017) में अग्रतर संशोधन करने हेतु विधेयक ।
भारत गणराज्य के पचहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधान मण्डल द्वारा निम्नलिखित रुप में यह अधिनियमित होः-
1.
(1 ) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर (संशोधन) अधिनियम, 2024 कहलायेगा।
संक्षिप्त नाम एवं प्रारंभ.
(2) यह उस तारीख की प्रवृत्त होगा, जिसे राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करेः
परंतु इस अधिनियम के विभिन्न उपबंधों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और ऐसे उपबंध में इस अधिनियम के प्रारंभ के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जायेंगा कि वह उस उपबंध के प्रवृत्त होने के प्रतिनिर्देश है ।
धारा 2 का
2
संशोधन.
छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (क. 7. सन् 2017) (जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है) की धारा 2 में-
(1 ) खंड (80) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाये , अर्थात्:-
"(80क). "ऑनलाइन गेम खेलना" से अभिप्रेत है इंटरनेट या इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क पर गेम की प्रस्थापना और इसमें ऑनलाइन धन संबंधी गेम खेलना भी शामिल है;
(80ख) "ऑनलाईन धन संबंधी गेम खेलना" से अभिप्रेत है ऐसा ऑनलाइन गेम खेलना, जिसमें खिलाड़ी किसी आयोजन सहित गेम, स्कीम, प्रतिस्पर्धा या कोई अन्य क्रियाकलाप या प्रक्रिया में, धन या धन के मूल्य, जिसके अंतर्गत आभासी डिजिटल आस्तियां भी है, को जीतने की प्रत्याशा में , धन या धन के मूल्य, जिसके अंतर्गत आभासी डिजिटल स्तियां भी है, का संदाय छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 फरवरी 2024
126(1 ) या जमा करता है , चाहे इसका परिणाम या निष्पादन कौशल, अवसर या दोनों पर आधारित हो या नहीं, तथा चाहे वह तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन अनुज्ञेय हो या नहीं;"
(2) खंड (102) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाये,
अर्थात्:-
"(102क) "विनिर्दिष्ट अनुयोज्य दावे " से अभिप्रेत है-
दांव लगाने;
(i)
कैसिनो;
(ii )
द्यूतक्रीड़ा;
(iii)
घुड़दौड़;
(iv)
लाटरी; या
(v)
ऑनलाइन धन संबंधी गेम
(vi)
खेलना,
में अंतर्वलित या उनके माध्यम से अनुयोज्य दावा; "
(3) खंड (105) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाये ,
अर्थात्:-
"परंतु कोई व्यक्ति, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से , विनिर्दिष्ट अनुयोज्य दावों की पूर्ति की व्यवस्था या प्रबंध करता है , जिसमें वह व्यक्ति भी शामिल है , जो ऐसे प्रदाय के लिए डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म का स्वामी है या उसका प्रचालन या प्रबंधन करता है, को ऐसे अनुयोज्य दावों का प्रदायकर्ता समझा जाएगा , चाहे ऐसे अनुयोज्य दावें, उसके द्वारा या उसके माध्यम से प्रदाय किए जाते हों और चाहे ऐसे अनुयोज्य दावों के प्रदाय के लिए धन या धन के मूल्य , जिसके अंतर्गत आभासी डिजिटल आस्तियां भी है , में प्रतिफल उसको या उसके माध्यम से संदत्त या सूचित किए जाते हैं या किसी भी रीति में उसके निवर्तन छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 फरवरी 2024
126 (2)
के लिये रखे जाते हैं, और इस अधिनियम के सभी उपबंध विनिर्दिष्ट अनुयोज्य दावों के ऐसे प्रदायकर्ता को लागू होंगे, मानों वह ऐसे अनुयोज्य दावों का प्रदाय करने के संबंध में कर का संदाय करने के लिए दायी प्रदायकर्ता हो । "
(4) खंड (117) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाये , अर्थात्: -
"(117क) " आभासी डिजिटल आस्ति" का वही अर्थ होगा, जैसा कि आय- कर अधिनियम , 1961 ( 1961 का 43) की धारा 2 के खंड (47 क) में उसके लिये समनुदेशित है;"
धारा 10 का
3. मूल अधिनियम की धारा 10 में,-
संशोधन.
(1 ) उपधारा (2) के खंड (घ) में, शब्द " माल या " का लोप किया जाये; और
(2) उपधारा (2क) के खंड (ग) में, शब्द "माल या " का लोप किया जाये । धारा 16 का
4. मूल अधिनियम की धारा 16 की उपधारा (2) में,-
संशोधन.
(1 ) द्वित्तीय परन्तुक में, वाक्यांश "उस पर ब्याज के साथ, ऐसी रीति में , जो विहित की जाए , उसके आउटपुट कर दायित्व में जोड़ दिया जाएगा" के स्थान पर, वाक्यांश " धारा 50 के अधीन संदेय ब्याज के साथ, ऐसी रीति में, जो विहित की जाए , उसके द्वारा संदत्त किया जाएगा " प्रतिस्थापित किया जाये; और
(2) तृतीय परन्तुक में, वाक्यांश "उसके द्वारा किए गए संदाय" के स्थान पर, वाक्यांश "उसके द्वारा आपूर्तिकर्ता को किए गए संदाय" प्रतिस्थापित किए जाएंगे ।
5. मूल अधिनियम की धारा 17 में,-
धारा 17 का
संशोधन.
(1 ) उपधारा (3) के स्पष्टीकरण के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्:-
"स्पष्टीकरण- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिये अभिव्यक्ति "छूट-प्राप्त प्रदाय का मूल्य" में , छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 फरवरी 2024
126(3 ) (i ) अनुसूची 3 के पैरा 5 में विनिर्दिष्ट कार्य- कलापों या संव्यवहारों का मूल्य; और
(ii) अनुसूची 3 के पैरा 8 के खण्ड (क) में विनिर्दिष्ट ऐसे कार्य -कलापों या संव्यवहारों का मूल्य, जो विहित की जाए , के सिवाय अनुसूची 3 में विनिर्दिष्ट कार्यकलापों या संव्यवहारों का मूल्य संम्मिलित नहीं होगा । "
(2) उपधारा (5) के खंड (च) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाये, अर्थात्:-
"(च क) कंराधेय व्यक्ति द्वारा प्राप्त किये गये माल या सेवाओं या दोनों का, कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 135 में निर्दिष्ट निगम सामाजिक उत्तरदायित्व के अंधीन उसकी बाध्यताओं से संबंधित कार्यकलापों के लिए उपयोग किया जाता है या उपयोग किया जाना आशयित है;"
6.
धारा 23 का संशोधन, मूल अधिनियम की धारा 23 की उपधारा (2) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये , अर्थात् :-
"(2) धारा 22 की उपधारा (1 ) या धारा 24 में अंतर्विष्ट किसी तत्प्रतिकूल बात के होते हुए भी, सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा , ऐसी शर्तों और निबंधनों के अध्यधीन , जो उसमें विनिर्दिष्ट किये जाए , उन व्यक्तियों, जिन्हें इस अधिनियम के तहत्त रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करने से छूट दिया जा सकता हो, की श्रेणी विनिर्दिष्ट कर सकेगी ।
टीप- उपरोक्त उपधारा (2) को 1 जुलाई, 2017 से प्रवृत्त किया गया समझा जायेगा ।"
7.
धारा 24 का संशोधन.
मूल अधिनियम की धारा 24 के खंड (xi) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये , अर्थात्ः-
" (xi ) रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति से भिन्न, प्रत्येक व्यक्ति , जो भारत से बाहर के स्थान से भारत के व्यक्तियों को ऑनलाईन छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 फरवरी 2024
126 (4)
सूचना और डाटा आधारित पहुंच या सुधार सेवायें , प्रदान करता हो;
(xiक) भारत से बाहर किसी स्थान से , भारत में किसी व्यक्ति को ऑनलाइन धन संबंधी गेम खेलने की पूर्ति करने वाला प्रत्येक व्यक्ति; और"
8.
धारा 30 का
मूल अधिनियम की धारा 30 की उपधारा (1 ) में,-
संशोधन.
(1 ) वाक्यांश "तीस दिन के भीतर ऐसे अधिकारी को विहित रीति से" के स्थान पर, वाक्यांश " ऐसे तरीके एवं ऐसे समय और निर्बंधनों एवं शर्तों, जैसा कि विहित किया जाये, के अध्यधीन रहते हुये , ऐसे अधिकारी को" प्रतिस्थापित किया जाएगा ।
(2) परंतुक का लोप किया जाये ।
9.
धारा 37 का
मूल अधिनियम की धारा 37 की उपधारा (4) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाये , अर्थात्ः-
संशोधन.
" (5 ) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति को उपधारा (1 ) के अधीन किसी कर अवधि के लिए जावक पूर्तियों के ब्यौरे, उक्त ब्यौरे प्रस्तुत करने की नियत तारीख से तीन वर्ष के अवसान के पश्चात्, प्रस्तुत करने के लिए अनुज्ञात नहीं किया जाएगाः
परंतु सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा , ऐसे निर्बंधनों और शर्तों के अध्यधीन रहते हुए , जैसा कि उसमें विनिर्दिष्ट किया जाये, किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति या रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के वर्ग को उपधारा (1 ) के अधीन किसी कर अवधि के लिए जावक पूर्तियों के ब्यौरे प्रस्तुत करने के लिए उक्त ब्यौरों को प्रस्तुत करने की नियत तारीख से तीन वर्ष के अवसान के पश्चात् भी, अनुज्ञात कर सकेंगी । "
10.
धारा 39 का
मूल अधिनियम की धारा 39 की उपधारा (10 ) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये, अर्थात्:-
संशोधन.
"(11 ) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति को, किसी कर अबधि के लिए , विवरणी प्रस्तुत करने की नियत तारीख से तीन वर्ष के अवसान के छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 फरवरी 2024
126(5) पश्चात्, उक्तं विवरणी प्रस्तुत करने के लिए अनुज्ञात नहीं किया जाएगाः
परंतु सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा, ऐसे निर्बंधनों और शर्तों के अध्यधीन रहते हुए , जैसा कि उसमें विनिर्दिष्ट किया जाये , किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति या रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के वर्ग को, किसी कर अवधि के लिए विवरणी प्रस्तुत करने के लिए, उक्त विवरणी को प्रस्तुत करने की नियत तारीख से तीन वर्ष के अवसान के पश्चात् भी, अनुज्ञात कर सकेगी । "
धारा 44 का 11. मूल अधिनियम की धारा 44 में,-
संशोधन.
(1 ) वाक्यांश "किसी इनपुट सेवा वितरक से भिन्न" के पूर्व, अंक एवं चिन्ह "(1 )" अन्तःस्थापित किया जाये; और
(2) उपधारा (1 ) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये, अर्थात्:-
"(2) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति को उपधारा (1 ) के अधीन किसी वित्तीय वर्ष के लिए वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने की नियत तारीख से तीन वर्ष के अबसान के पश्चात्, उक्त वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने के लिए अनुज्ञात नहीं किया जाएगाः
परंतु सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा ऐसे निबंधनों और शर्तों के अध्यधीन रहते हुए , जैसा कि उसमें विनिर्दिष्ट किया जाये , किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति या रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के वर्ग को, उपधारा (1 ) के अधीन वित्तीय वर्ष के लिए वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने के लिये, उक्त वार्षिक विवरणी को प्रस्तुत करने की नियत तारीख से तीन वर्ष के अवसान के पश्चात् भी, अनुज्ञात कर सकेगी । "
धारा 52 का संशोधन.
12. मूल अधिनियम की धारा 52 की उपधारा (14) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाये, अर्थात्:-
" (15) किसी प्रचालक को, उपधारा (4 ) के अधीन विवरण प्रस्तुत करने छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 फरवरी 2024
126(6)
की नियत तारीख से तीन वर्ष के अवसान के पश्चात्, उक्त विवरण प्रस्तुत करने के लिए अनुज्ञात नहीं किया जाएगाः
परंतु सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा , ऐसे निर्बंधनों और शर्तों के अध्यधीन रहते हुए , जैसा कि उसमें विनिर्दिष्ट किया जाये, किसी प्रचालक या प्रचालकों के वर्ग को उपधारा (4 ) के अधीन विवरण प्रस्तुत करने के लिये , उक्त विवरणी को प्रस्तुत करने की नियत तारीख से तीन वर्ष की अवधि के अवसान के पश्चात् भी, अनुज्ञात कर सकेगी । " ১
13.
धारा 54 का
संशोधन.
मूल अधिनियम की धारा 54 की उपधारा (6) में, वाक्यांश "जिसके अंतर्गत अनंतिम स्वीकृत इनपुट कर प्रत्यंय की रकम नहीं है," का लोप किया जाये ।
14.
धारा 56 का
संशोधन.
मूल अधिनियम की धारा 56 में, वाक्यांश "आवेदन की प्राप्ति की तारीख से साठ दिन के अवसान के पश्चात् की तारीख से ऐसे कर का प्रतिदाय करने की तारीख तक" के स्थान पर, वाक्यांश "आवेदन की प्राप्ति की तारीख से साठ दिनों के पश्चात् ऐसे कर के प्रतिदाय की तारीख तक हुए विलम्ब की अवधि के लिए , ऐसी रीति से एवं ऐसे निर्बंधनों एवं शर्तों के अध्यधीन संगणना करते हुए , जैसा कि विहित किया जाये, " प्रतिस्थापित किया जाये ।
15.
मूल अधिनियम की धारा 62, -
धारा 62 का
संशोधन.
(1) उपधारा (2) में, शब्द "तीस दिन " के स्थान पर, शब्द " साठ दिन" प्रतिस्थापित किया जाये; और
(2) उपधारा (2) के पश्चात्, निम्नलिखित जोड़ा जाये, अर्थात्:-
"परंतु जहाँ रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, उपधारा (1 ) के अधीन निर्धारण आदेश की तामिली के साठ दिनों के अन्दर वैध विवरणी दाखिल करने में विफल रहता हो, वहाँ वह उक्त विवरणी, उक्त निर्धारण आदेश की तामिली के साठ दिनों के पश्चात्, अगले साठ दिनों की अवधि के भीतर, ऐसे विलम्ब की अवधि हेतु एक सौ रूपये प्रतिदिन के अतिरिक्त विलम्ब शुल्क का भुगतान करते हुए... दाखिल कर सकेगा एवं यदि वह इस विस्तारित अवधि के भीतर वैध विवरणी दाखिल कर देता है तो उक्त निर्धारण आदेश को छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 फरवरी 2024
126 (7) वापस लिया जाना माना जाएगा, किन्तु अधिनियम की धारा 50 की उपधारा (1 ) के अधीन ब्याज का भुगतान करने अथवा अधिनियम की धारा 47 के अधीन विलम्ब शुल्क का भुगतान करने का दायित्व निरन्तर बना रहेगा । "
16.
धारा 109 का संशोधन.
मूल अधिनियम की धारा 109 के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्ः-
"109. अपीलीय अधिकरणों और उनकी पीठों का गठन. इस अध्याय के प्रावधानों के अध्यधीन, केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम , 2017 (क्र. 12 सन् 2017) के अंतर्गत गठित " माल और सेवा कर अधिकरण" , इस अधिनियम के तहत अपीलीय प्राधिकरण या पुनरीक्षण प्राधिकरण द्वारा पारित आदेशों के विरूद्ध अपीलों की सुनवाई के लिये अपीलीय अधिकरण होगा । "
17.
मूल अधिनियम की धारा 110 एवं 114 का लोप किया जाये ।
धारा 110 एवं 114का लोप.
18. मूल अधिनियम की धारा 117 में,-
धारा 117 का संशोधन.
(1 ) उपधारा (1 ) में, वाक्यांश "राज्य पीठ या अपीलीय अधिकरण की क्षेत्रीय पीठों के स्थान पर , वाक्यांश "अपीलीय अधिकरण की राज्य पीठों" प्रतिस्थापित किया जायें ।
(2) उपधारा (5) के खंड (क) एवं (ख) में, वाक्यांश "राज्य पीठ या क्षेत्रीय पीठ" के स्थान पर, शब्द "राज्य पीठों " प्रतिस्थापित किया जाये ।
19.
धारा 118 का संशोधन.
मूल अधिनियम की धारा 118 की उपधारा (1 ) के खंड़ (क) में, वाक्यांश "राष्ट्रीय पीठ या अपीलीय अधिकरण की प्रांतीय पीठों के स्थान पर, वाक्यांश "अपीलीय अधिकरण की प्रधान पीठ" प्रतिस्थापित की जाये । :
20. मूल अधिनियम की धारा 119 में,-
धारा 119 का
संशोधन.
(1 ) वाक्यांश "राष्ट्रीय या प्रांतीय पीठों " के स्थान पर, शब्द "प्रधान प्रीठ " प्रतिस्थापित की जाये ।
(2) चाक्यांश "राज्य पीठों या क्षेत्रीय पीठों" के स्थान पर, शब्द "राज्य छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 फरवरी 2024
126(8)
पीठों" शब्द प्रतिस्थापित किया जाये ।
21.
धारा 122 का संशोधन.
मूल अधिनियम की धारा 122 की उपधारा (1 क ) के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित की जाये, अर्थात्:-
"(1 ख) कोई इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य प्रचालक, जो -
(i) इस अधिनियम के अधीन जारी अधिसूचना द्वारा रजिस्ट्रीकरण से छूट प्राप्त व्यक्ति से भिन्न किसी अरजिस्ट्रीकृत व्यक्ति को इसके माध्यम से माल या सेवाओं या दोनों की पूर्ति करने के लिए अनुज्ञात करता है;
(ii) इसके माध्यम से किसी ऐसे व्यक्ति, जो ऐसी अंतर्राज्यिक पूर्ति करने के लिए पात्र नहीं है, के द्वारा माल या सेवाओं या दोनों की अंतर्राज्यिक पूर्ति अनुज्ञात करता है; या
(iii) इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करने से छूट प्राप्त व्यक्ति द्वारा इसके माध्यम से की गई माल की किसी जावक पूर्ति के सही ब्यौरे, धारा 52 की उपधारा (4) के अधीन प्रस्तुत किए जाने वाले विवरण में, प्रस्तुत करने में विफल रहता है;
तो वह दस हजार रूपये या अंतर्वलित कर की रकम, यदि ऐसी पूर्ति धारा 10 के अधीन कर संदाय करने वाले व्यक्ति से भिन्न किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा की गई होती, के समतुल्य रकम, जो भी उच्चतर हो, की शास्ति का संदाय करने का दायी होगा । " 22. मूल अधिनियम की धारा 132 की उपधारा (1 ) में,-
धारा 132 का संशोधन.
(1) खंड (छ), (ञ) और (ट) का लोप किया जाये;
(2) खंड (ठ) में, शब्द, कोष्ठक एवं अक्षर "खंड (क) से खंड (ट) " के स्थान पर , शब्द, कोष्ठक एवं अक्षर " खंड (क) से (च) और खंड (ज) तथा (झ)" प्रतिस्थापित किया जाये;
(3) खंड (iii ) में , वाक्यांश " जहां कर अपवंचन " के स्थान पर, वाक्यांश "खंड (ख) में विनिर्दिष्ट किसी अपराध की दशा में, जहां कर अपवंचन" प्रतिस्थापित किया जाये;
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 फरवरी 2024
126(9) (4) खंड ( iv ) में, शब्द, कोष्ठक और अक्षर "या खंड (छ) या खंड (ज) " का लोप किया जाएगा ।
23. मूल अधिनियम की धारा 138 में,-
धारा 138 का संशोधन.
(1) उपधारा ( 1 ) के प्रथम परंतुक में, -
(i) खंड (क) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये , अर्थात्:-
" (क) कोई व्यक्ति , जिसे धारा 132 की उपधारा (1 ) के खंड (क) से खंड (च) , खंड (ज) , खंड (झ) तथा खंड (ठ) में विनिर्दिष्ट अपराधों में से किन्हीं के संबंध में शमन के लिए एक बार अनुज्ञात किया गया है;" ,
(ii ) खंड (ख) का लोप किया जाये;
(iii) खंड (ग) के स्थान पर , निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्:-
" (ग) कोई व्यक्ति , जो धारा 132 की उपधारा (1 ) के खंड (ख) के अधीन कोई अपराध करने का अभियुक्त रहा है;"
(iv) खंड (ङ) का लोप किया जाये;
(2) उपधारा (2) में, वाक्यांश "रकम अंतर्वलित कर के दस हजार रूपये या पचास प्रतिशत से, इनमें से जो भी उच्चतर हों, के अधीन रहते हुए और अधिकतम रकम तीस हजार रूपये से अन्यून या कर के एक सौ पचास प्रतिशत , इनमें से जो भी अधिकतम हो, " के स्थान पर, वाक्यांश "न्यूनतम रकम, अंतर्वलित कर के पच्चीस प्रतिशत से अन्यून और अधिकतम रकम , अंतर्वलित कर के सौ प्रतिशत से अनधिक" प्रतिस्थापित किया जाये ।
24.
नवीन धारा मूल अधिनियम की धारा 138 के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाये, अर्थात्ः-
138क का छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 फरवरी 2024
126 (10)
अंतःस्थापन.
" 138क. संक्रमणकालीन उपबंध. इस अधिनियम के अधीन किए गए संशोधन, दांव लगाने, कैसिनों, द्यूत क्रीड़ा , घुडदौड़, लाटरी या ऑनलाइन गेम खेलने को प्रतिषिद्ध, निर्बंधित या विनियमित करने का उपबंध करने वाली तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेंगे । "
25. मूल अधिनियम की धारा 158 के पश्चात्, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया
जाये, अर्थात्:-
नवीन धारा 158क का अंतःस्थापन.
"158क, कराधेय व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत की गई सूचना को सम्मति के आधार पर साझा करना-
(1) धारा 133 , 152 और 158 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत निम्नलिखित ब्यौरों को, उपधारा (2) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए तथा परिषद् की सिफारिशों पर , ऐसी रीति में और ऐसी शर्तों के अध्यधीन रहते हुए, जैसा कि विहित किया जाये, सामान्य पोर्टल द्वारा , ऐसी अन्य प्रणालियों के साथ , जैसा कि सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाये, साझा किया जा सकेगा, अर्थात्:-
(क) धारा 25 के अधीन रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन में या धारा 39 या 44 के अधीन दाखिल की गई विवरणी में प्रस्तुत की गई विशिष्टियाँ;
(ख) बीजक के सृजन के लिए सामान्य पोर्टल पर अपलोड की गई विशिष्टियाँ, धारा 37 के अधीन प्रस्तुत जावक पूर्तियों के ब्यौरे और धारा 68 के अधीन दस्तावेजों के सृजन के लिए सामान्य पोर्टल पर अपलोड की गई विशिष्टियाँ;
(ग) ऐसे अन्य ब्यौरे , जैसा कि विहित किया जाये ।
(2) उपधारा (1 ) के अधीन ब्यौरों के साझा करने के प्रयोजनों के लिए, ऐसे प्ररूप और रीति में, जैसा कि विहित किया जाये, छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 फरवरी 2024
126(11 ) निम्नलिखित की सहमति अभिप्राप्त की जाएगी,-
(ग) के अधीन
(क) उपधारा (1 ) के खंड (क), (ख) और
प्रस्तुत ब्यौरों के संबंध में, पूर्तिकर्ता; और
(ख) उपधारा (1 ) के खंड (ख ) एवं (ग) के अधीन प्रस्तुत
ब्यौरों के संबंध में, प्राप्तिकर्ता, केवल जहां ऐसे ब्यौरों में प्राप्तिकर्ता की पहचान संबंधी जानकारी भी शामिल हो ।
(3) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस धारा के अधीन साझा की गई जानकारी के परिणामिक उद्भूत् होने वाले किसी दायित्त्व के संबंध में सरकार या सामान्य पोर्टल के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी तथा सुसंगत पूर्ति मर या सुसंगत विवरणी के अनुसार कर संदाय करने के दायित्व पर कोई प्रभाव नहीं होगा।"
26.
मूल अधिनियम की अनुसूची 3 में,-
अनुसूची 3 का संशोधन.
(1 ) पैरा 6 में, वाक्यांश " लाटरी , दांव और जुआ " के स्थान पर, वाक्यांश "विनिर्दिष्ट अनुयोज्य दावों" प्रतिस्थापित किया जाये; और
(2) स्पष्टीकरण 2 के पश्चात्, निम्नलिखित टीप जोड़ा जाये, अर्थात्ः-
"टीप- (1 ) उपरोक्त पैरा 7, 8 तथा स्पष्टीकरण 2 को 1 जुलाई, 2017 से प्रवृत्त किया गया समझा जायेगा ।
(2) ऐसे सभी कर का कोई प्रतिदाय नहीं किया जाएगा, जिसे संग्रहित किया गया है, किन्तु जिसे संग्रहित नहीं किया गया होता , यदि उपरोक्त टीप के उपबंध, सभी तात्विक समयों परं प्रवृत्त हुई होती । :
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 फरवरी 2024
126 (12)
उद्देश्यों और कारणों का कथन
यतः, छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर अधिनियम , 2017 को, राज्य सरकार द्वारा माल या सेवा या दोनो के अंतर्राज्यीय प्रदाय पर कर के उद्ग्रहण और संग्रहण करने हेतु उपबंध करने के विचार से अधिनियमित किया गया था ।
और यतः , कैसिनों, घुडदौड़ और ऑनलाइन गेम खेलने की कराधेयता के प्रावधानों को स्पष्ट करने के लिए , इलेक्ट्रानिक कामर्स ऑपरेटर के माध्यम से माल का प्रदान करने वाले छोटे व्यवसायियों को प्रशमन उद्ग्रहण के विकल्प चुनने पर अधिरोपित निर्बंधन को हटाने एवं आगत कर प्रत्यय की उपलब्धता पर कतिपय निर्बंधन का प्रावधान करने के लिए अधिनियम के प्रावधानों में परिवर्तन की आवश्यकता है । इसके अतिरिक्त , जीएसटी अपील अधिकरण और राज्य पीठों के गठन, इलेक्ट्रानिक कामर्स ऑपरेटर्स पर शास्ति के प्रावधान उपबंधित करने, कतिपय अपराधों के निरपराधीकरण , रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों द्वारा शासन के विभिन्न विभागों के मध्य कॉमन पोर्टल पर प्रदत्त सूचनाओं को साझा करने की रीति एवं शर्तें प्रावधानित करने के लिए , अधिनियम के कतिपय प्रावधानों में संशोधन किया जाना आवश्यक है ।
अतएव , उक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए और केन्द्र सरकार द्वारा वित्त अधिनियम, 2023 के माध्यम से पूर्व में किए गए संशोधनों के अनुक्रम में , छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 में संशोधन किया जाना प्रस्तावित है ।
प्रस्तावित छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर ( संशोधन) विधेयक , 2024 में, अन्य बातों के साथ-साथ , निम्नलिखित के लिए उपबंध है , अर्थात्:-
(i ) "ऑनलाइन गेम" पर कराधान के प्रावधानों को स्पष्ट करने के लिए धारा 2 के उपधाराओं में नवीन परिभाषायें अंतःस्थापित किया जाना है;
( ii ) वर्तमान रिटर्न फाइलिंग प्रणाली के साथ संरेखित करने के लिए धारा 16 की उपधारा (2) में संशोधन किया जाना है;
(iii ) अधिनियम की धारा 22 और 24 पर अधिभावी प्रभाव प्रदान करने के उद्देश्य से अधिनियम की धारा 23 की उपधारा (2) में संशोधन किया जाना है;
( iv) रजिस्ट्रेशन के रद्दकरण के प्रतिसंहण के संबंध में आवेदन करने हेतु समय-सीमा के संबंध में उपबंध करने के लिए अधिनियम की धारा 30 की उपधारा (1 ) में संशोधन किया जाना है ;
(v ) विवरणी / ब्यौरे प्रस्तुत करने की अधिकतम समय- सीमा को नियत समय- सीमा से तीन वर्ष निर्धारित करने हेतु अधिनियम की धारा 37, 39, 44 और 52 में नवीन उप धाराएं अंतःस्थापित किया जाना है;
( vi ) रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा कॉमन पोर्टल पर प्रदत्त सूचनाओं को साझा करने की रीति व शर्तें उपबंधित करने हेतु अधिनियम में नवीन धारा 158क अंतःस्थापित किया जाना है;
अतः यह विधेयक प्रस्तुत है ।
ओ. पी. चौधरी
वाणिज्यिक कर मंत्री रायपुर,
(भारसाधक सदस्य) दिनांक 6 फरवरी , 2024 छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 फरवरी 2024
126(13 ) प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में ज्ञापन
छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2023 के खंड- 4 , 6 , 8 , 9, 10, 11 , 12, 14 एवं 25 में विधायनी शक्ति के प्रत्यायोजन की संस्थापनायें है , जो सामान्य स्वरूप की है ।
"संविधान के अनुच्छेद 207 (1 ) के अधीन राज्यपाल द्वारा अनुशंसित " छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 फरवरी 2024
126 (14)
उपाबंध
छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर अधिनियम , 2017 (क्रमांक 7 सन् 2017 ) से उद्धरण
अध्याय 1
प्रारंभिक
2.
परिभाषाएं
(80) "अधिसूचना" से अभिप्रेत है राजपत्र में प्रकाशित कोई अधिसूचना और शब्द " अधिसूचित करना " और "अधिसूचित " का तद्नुसार अर्थ लगया जाएगा ;
(102) "सेवाओं" से अभिप्रेत है माल, धन और प्रतिभूतियों से भिन्न कुछ भी, किंतु इसमें धन का उपयोग या नकद या किसी अन्य रीति से एक करेंसी या अंकित मूल्य का किसी अन्य रूप, करेंसी या अंकित मूल्य में उसका ऐसा संपरिवर्तन , जिसके लिए पृथक् प्रतिफल प्रभारित हों, से संबंधित क्रियाकलाप सम्मिलित है ;
(105) माल या सेवाओं या दोनों के संबंध में "प्रदायकर्ता" से अभिप्रेत होगा उक्त माल या सेवाओं या दोनों का प्रदाय करने वाला व्यक्ति और इसमें प्रदाय किए गए माल या सेवाओं या दोनों के संबंध में ऐसे प्रदायकर्ता की ओर से उस रूप में कार्य करने वाला कोई अभिकर्ता सम्मिलित होगा ;
"स्पष्टीकरण- शंकाओं के निवारण के लिए , एतद्वारा यह स्पष्ट किया जाता है कि अभिव्यक्ति "सेवा " में प्रतिभूतियों में संव्यवहारों को सरल बनाना या प्रबंध करना सम्मिलित है ; "
(117) "विधिमान्य विवरणी " से अभिप्रेत है धारा 39 की उपधारा (1 ) के अधीन दी गई विवरणी, जिस पर स्वतः निर्धारित कर का पूर्ण रूप से संदाय किया गया है;
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अध्याय 3
कर का उद्ग्रहण और संग्रहण
10.
प्रशमन उग्रहण
(2) रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति , उपधारा (1 ) के अधीन विकल्प चुनने का पात्र होगा, यदि,-
(क) उप-धारा ( 1 ) में यथा उपबंधित के सिवाय , वह सेवा की प्रदाय में नहीं लगा हुआ है;
(ख) वह ऐसे किसी माल या सेवाओं का प्रदाय करने में नहीं लगा हुआ है, जिस पर इस अधिनियम के अधीन कर उद्ग्रहणीय नहीं है ;
(ग) वह माल या सेवाओं के किसी अन्तर्राज्यिक जावक प्रदाय करने में नहीं लगा है ;
(घ) वह किसी ऐसे इलैक्ट्रानिक वाणिज्य प्रचालक के माध्यम से, जिससे धारा 52 के अधीन स्रोत पर कर के संग्रहण की अपेक्षा है, किसी माल या सेवाओं का प्रदाय करने में नहीं लगा है ;
(ङ) वह ऐसे माल का विनिर्माता नहीं है, जिसे सरकार द्वारा , परिषद् छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 फरवरी 2024
126(15) की सिफारिशों पर , अधिसूचित किया जाये; और
(च) वह न तो कोई नैमित्तिक कराधेय व्यक्ति है और न ही कोई अनिवासी कराधेय व्यक्ति हैः
परंतु जहां एक से अधिक रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों का (आय -कर अधिनियम, 1961 के अधीन जारी) स्थायी खाता संख्यांक एक ही है, वहां ऐसा रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, उपधारा ( 1 ) के अधीन तब तक स्कीम के लिए विकल्प का चुनाव करने का पात्र नहीं होगा जब तक ऐसे सभी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति उस उपधारा के अधीन कर के संदाय के विकल्प का चुनाव नहीं करते हैं ।
(2क) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, किन्तु धारा 9 की उपधारा (3 ) और (4) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए , कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जो उपधारा (1) और (2) के अधीन कर के संदाय का विकल्प लेने के लिए पात्र नहीं है और जिसकी पूर्व वित्तीय वर्ष में सकल आवर्त पचास लाख रुपए से अधिक नहीं है , उसके द्वारा धारा 9 की उपधारा (1 ) के अधीन संदेय कर के स्थान पर, यथा विहित दर पर, किन्तु जो राज्य में उसके आवर्त के तीन प्रतिशत से अधिक नहीं होगी , संगणित कर की रकम का संदाय करने का विकल्प ले सकेगा, यदि वह,-
(क) किन्हीं ऐसे मालों या सेवाओं के प्रदाय में नहीं लगा है, जिन पर इस अधिनियम के अधीन कर उद्ग्रहणीय नहीं है ;
(ख ) माल या सेवाओं के अंतर्राज्यीय जावक प्रदाय करने में नहीं लगा है;
(ग ) किसी ऐसे इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्यिक प्रचालक के माध्यम से माल या सेवाओं के ऐसी प्रदाय में नहीं लगा है , जिससे धारा 52 के अधीन स्त्रोत पर कर का संग्रहण करना अपेक्षित है;
(घ) ऐसे माल का विनिर्माता या ऐसी सेवाओं का प्रदायकर्ता नही है, जो सरकार द्वारा परिषद् की सिफारिशों पर अधिसूचित की जायें; और
(ङ) न तो कोई नैमित्तिक कराधेय व्यक्ति है और न ही कोई अनिवासी कराधेय व्यक्ति है :
परंतु जहां एक से अधिक रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों का आयकर अधिनियम, 1961 (क. 43 सन् 1961 ) के अधीन जारी स्थायी खाता संख्यांक एक ही है , वहां ऐसा रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति , इस उपधारा के अधीन तब तक स्कीम के लिए विकल्प का चुनाव करने का पात्र नहीं होगा, जब तक ऐसे सभी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति इस उपधारा के अधीन कर का संदाय करने के विकल्प का चुनाव नहीं करते हैं । " ;
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* छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 फरवरी 2024
126 (16)
अध्याय 5
इनपुट कर प्रत्यय
इनपुट कर 16.
प्रत्यय लेने
के लिए
पात्रता
(2) इस धारा में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, उसको किए गए किसी माल या सेवाओं या दोनों के प्रदाय के संबंध में कोई इनपुट कर का प्रत्यय प्राप्त करने का तब तक हकदार नहीं होगा , जब तक,-
और शर्ते
(क) उसके कब्जे में इस अधिनियम के अधीन किसी रजिस्ट्रीकृत प्रदायकर्ता द्वारा जारी कोई कर बीजक या नाम नोट (डेबिट नोट) या कोई अन्य ऐसा कर संदाय दस्तावेज , जो विहित किया जाए , न हो ;
(कक) खंड (क) में निर्दिष्ट बीजक या नामे नोट के ब्यौरे पूर्तिकार द्वारा बर्हिगामी पूर्ति के विवरण में प्रस्तुत किए गए हैं और ऐसे ब्यौरे , धारा 37 के अधीन विनिर्दिष्ट रीति में ऐसे बीजक या नामे नोट के प्राप्तिकर्ता को संसूचित किए गए है ।
(ख) वह माल या सेवाओं या दोनों प्राप्त नहीं कर लेता है ।
स्पष्टीकरण- इस खंड के प्रयोजनों के लिए , यह समझा जाएगा कि रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति ने , यथास्थिति, माल या सेवा को प्राप्त किया है- (एक) जहां माल का प्रदाय किसी प्रदायकर्ता द्वारा किसी प्राप्तिकर्ता या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति के निर्देश पर किया गया है, चाहे वह अभिकर्ता के रूप में या अन्यथा, माल के संचलन से पूर्व या दौरान , माल के मालिकाना दस्तावेजों के अंतरण के माध्यम से या अन्यथा कार्य कर रहा हो ,
(दो) जहां सेवा का प्रदाय, प्रदायकर्ता द्वारा किसी व्यक्ति को ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति के निर्देश पर और उसके मद्दे किया जाता है ।
(खक) धारा 38 के अधीन ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति को संसूचित उक्त आपूर्ति के संबंध में इनपुट कर प्रत्यय के ब्यौरे निर्बंधित नहीं किए गए हो ;
(ग) धारा 41 के उपंधों के अधीन रहते हुए , ऐसे प्रदाय के संबंध में प्रभारित कर का, नकद में या उक्त प्रदाय के संबंध में अनुज्ञेय इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग करके वास्तविक रूप से सरकार को संदाय न कर दिया गया हो और
(घ) उसने धारा 39 के अधीन विवरणी नदी हो ;
परंतु जहां माल किसी बीजक के विरूद्ध, लाट या किस्तों में प्राप्त होता है, वहां रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति अंतिम लाट या किश्त की प्राप्ति पर प्रत्यय लेने का हकदार होगा:
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 फरवरी 2024
126(17)
परंतु यह और कि जहां कोई प्राप्तिकर्ता, ऐसे प्रदायों से भिन्न, जिन पर विपरीत प्रभार के आधार पर कर संदेय है, माल या सेवाओं या दोनों के प्रदायकर्ता को प्रदाय के मूल्य के साथ उस पर संदेय कर के मद्दे रकम का, प्रदायकर्ता द्वारा बीजक जारी करने की तारीख से एक सौ अस्सी दिन की अवधि के भीतर संदाय करने मे असफल रहता है , वहां प्राप्तिकर्ता द्वारा उपभोग किए गए इनपुट कर प्रत्यय के बराबर रकम को, उस पर ब्याज के साथ , ऐसी रीति में, जो विहित की जाए , उसके आउटपुट कर दायित्व में जोड़ दिया जाएगा :
परंतु यह भी कि प्राप्तिकर्ता माल या सेवाओं या दोनों के प्रदाय मूल्य के साथ उस पर संदेय कर के मद्दे रकम का उसके द्वारा किए गए संदाय पर इनपुट कर प्रत्यय का उपभोग करने का हकदार होगा । प्रत्यय और 17. निरूद्र प्रत्ययों का प्रभाजन.
(3) उपधारा (2) के अधीन छूट प्राप्त प्रदाय का मूल्य वह होगा , जो विहित किया जाए , और उसमें ऐसे प्रदाय , जिस पर प्राप्तिकर्ता विपरीत प्रभार के आधार पर कर संदाय का दायी है , प्रतिभूति संव्यवहारों, भूमि विक्रय और अनुसूची 2 के पैरा 5 के खंड (ख ) के अधीन रहते हुए भवन का विक्रय सम्मिलित होंगे । स्पष्टीकरण - इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए , अभिव्यक्ति "छूट- प्राप्त प्रदाय का मूल्य" में अनुसूची 3 के पैरा 5 में विनिर्दिश्ट के सिवाय , उक्त अनुसूची में विनिर्दिष्ट कार्यकलापों या संव्यवहारों का मूल्य सम्मिलित नहीं होगा ।
(5) (च) किसी अनिवासी कराधेय व्यक्ति द्वारा , उसके द्वारा आयातित माल पर के सिवाय, प्राप्त माल या सेवाएं या दोनों ;
*
अध्याय 6 रजिस्ट्रीकरण
(2) सरकार, परिषद् की सिफारिषों पर, अधिसूचना द्वारा , ऐसे व्यक्तियों का प्रवर्ग जिन्हें इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करने से छूट दी जा सकती है, विनिर्दिष्ट कर सकती है ।
व्यक्ति जो 23. रजिस्ट्रीकरण के लिए दायी नहीं हैं.
24. धारा 22 की उपधारा (1 ) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, व्यक्तियों के निम्नलिखित प्रवर्गों को इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत किया जाना अपेक्षित होगा,-
व्यक्ति जो अंतरराज्यिक कराधेय प्रदाय करते है ;
(i)
(ii) कराधेय प्रदाय करने वाले नैमित्तिक कराधेय व्यक्ति :
(iii ) व्यक्ति जिससे विपरीत प्रभार के अधीन कर अदा करना अपेक्षित है ;
( iv) व्यक्ति जिससे धारा 9 की उपधारा (5) के अधीन कर अदा करना अपेक्षित है ;
कराधेय प्रदाय करने वाले अनिवासी कराधेय व्यक्ति ;
(v) छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 फरवरी 2024
126 (18)
(vi ) व्यक्ति जिससे धारा 51 के अधीन कर की कटौती करना अपेक्षित है चाहे इस अधिनियम के अधीन पृथक रूप से रजिस्ट्रीकृत हो या नहीं ;
(vii) व्यक्ति जो, चाहे अभिकर्ता के रूप में या अन्यथा, अन्य कराधेय व्यक्तियों की ओर से कराधेय मालों या सेवाओं अथवा दोनों का प्रदाय करते है ;
(viii) इनपुट सेवा वितरक, चाहे इस अधिनियम के अधीन पृथक रूप से रजिस्ट्रीकृत है या नहीं ;
(ix) व्यक्ति जो धारा 9 की उपधारा (5) के अधीन विनिर्दिष्ट प्रदाय से भिन्न मालों या सेवाओं अथवा दोनों की ऐसे इलैक्ट्रानिक वाणिज्य ऑपरेटर जिससे धारा 52 के अधीन स्त्रोत पर कर एकत्र करना अपेक्षित है, के माध्यम से प्रदाय करता है ;
(x) प्रत्येक इलैक्ट्रानिक वाणिज्य ऑपरेटर जिससे धारा 52 के अधीन कर का संग्रहण करने की अपेक्षा है ;
(xi ) रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति से भिन्न , प्रत्येक व्यक्ति जो भारत से बाहर के स्थान से भारत के व्यक्तियों को ऑन लाइन सूचना और डाटा आधारित पहुंच या सुधार सेवाएँ, प्रदाय करता हो ;
(xii ) ऐसे अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों का वर्ग जैसे कि सरकार द्वारा परिषद् की सिफारिशों पर अधिसूचित किया जाए ।
रजिस्ट्रीकरण 30. के रद्दकरण का प्रतिसंहरण.
(1 ) ऐसी शर्तों, जो विहित की जाएं, के अध्यधीन रहते हुए , कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति , जिसका रजिस्ट्रीकरण समुचित अधिकारी द्वारा स्वयं के प्रस्ताव पर रद्द किया जाता है , रद्दकरण आदेश की तामील की तारीख से तीस दिन के भीतर ऐसे अधिकारी को विहित रीति से रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण के प्रतिसंहरण के लिए आवेदन कर सकेगा ।
परंतु ऐसी अवधि , र्याप्त कारण दर्षाने पर, और कारणों को लेखबद्ध करते हुए,-
(क) यथास्थिति, अपर आयुक्त या संयुक्त आयुक्त के द्वारा , तीस दिवस से अनधिक अवधि के लिए ;
(ख) आयुक्त द्वारा , खण्ड (क ) में विनिर्दिष्ट अवधि से परे , आगे तीस दिवस से अनधिक अवधि के लिए ,
बढ़ायी जा सकेगी ।
*
अध्याय 9
विवरणियां
37.
जावक प्रदायों के ब्यौरें देना.
(4) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति को उपधारा (1 ) के अधीन जावक पूर्तियों के ब्यौरे किसी कर अवधि के लिए प्रस्तुत करना अनुज्ञात नहीं किया जायेगा, यदि उसके द्वारा किन्हीं पूर्ववर्ती कर अवधियों के लिए जावक पूर्तियों के ब्यौरे प्रस्तुत नहीं किए गए हैः
परंतु सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा , ऐसी शर्तों और निर्बंधनों के अध्यधीन रहते हुए, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति या व्यक्तियों के किसी वर्ग को उपधारा (1 ) के अधीन जावक पूर्तियों के ब्यौरे प्रस्तुत करना तब भी अनुज्ञात कर सकेगी, जब उसने एक या अधिक पूर्ववर्ती कर अवधियों के लिए जावक पूर्तियों के ब्यौरे प्रस्तुत छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 फरवरी 2024
126(19) नहीं किए हैं ।
विवरणियां 39.
देना.
( 10 ) किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति को किसी कर अवधि के लिए कोई विवरणी देने के लिए अनुज्ञात नहीं किया जाएगा, यदि उसके द्वारा किसी पूर्ववर्ती कर अवधि के लिए या उक्त कर अवधि के लिए धारा 37 की उपधारा (1 ) के अधीन जावक पूर्ति के ब्यौरे उसके द्वारा प्रस्तुत नहीं किए गए है : परंतु सरकार, परिषद् की अनुशंसा पर, अधिसूचना द्वारा , ऐसी शर्तों और निबंधनों के अध्यधीन रहते हुए , जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाये, किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति या रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के किसी वर्ग को विवरणी प्रस्तुत करने के लिए अनुज्ञात कर सकेगी, यद्यपि उसने एक या अधिक पूर्व कर अवधियों के लिए विवरणियां प्रस्तुत नहीं की हों या उक्त कर अवधि के लिए धारा 37 की उपधारा (1 ) के अधीन जावक पूर्ति के ब्यौरे प्रस्तुत नहीं किए हों । 44.
वार्षिक विवरणी
किसी इनपुट सेवा वितरक से भिन्न प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, धारा 51 या धारा 52 के अधीन कर का संदाय करने वाला कोई व्यक्ति , नैमित्तिक कराधेय व्यक्ति और अनिवासी कराधेय व्यक्ति, इलेक्ट्रानिक रूप से प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए ऐसे समय के भीतर और ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति, जैसा कि विहित किया जाए , में संपरीक्षित वार्षिक वित्तीय विवरण के साथ एक वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करेगा जिसमें वित्तीय वर्ष के लिए प्रस्तुत की गई विवरणी में घोषित पूर्तियों के मूल्य के साथ सुमेलित करते हुए , एक स्वप्रमाणित सुमेलन विवरण सम्मिलित किया जा सकेगा :
परंतु आयुक्त , परिषद् की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा , रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के किसी वर्ग को इस धारा के अधीन वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने से छूट प्रदान कर सकेगा :
परंतु यह और कि इस धारा में अंतर्विष्ट कोई भी बात, केंद्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के किसी विभाग या किसी स्थानीय प्राधिकारी को, जिनकी लेखाबहियां भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक द्वारा , प्राधिकारी लेखाओं की संपरीक्षा के लिए नियुक्त किसी संपरीक्षा द्वारा , संपरीक्षा के अध्यधीन हैं, लागू नहीं होगी ।
अध्याय 10
कर संदाय
(14
कर का संग्रहण. स्त्रोत पर 52. ) कोई व्यक्ति, जो उपधारा (12) के अधीन तामील की गई सूचना द्वारा अपेक्षित जानकारी प्रस्तुत करने में असफल रहता है, धारा 122 के अधीन की जा सकने वाली किसी कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना शास्ति का दायी होगा, जो पच्चीस हजार रूपए तक हो सकेगी ।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए शब्द " संबंधित प्रदायकर्ता" से अभिप्रेत है प्रचालक के माध्यम से मालों या सेवाओं , या दोनों की प्रदाय करने वाला प्रदायकर्ता । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 फरवरी 2024
126 (20)
अध्याय 11
प्रतिदाय
54. ( 6) उपधारा (5) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी समुचित अधिकारी इस कर प्रतिदाय.
निमित्त परिषद् की सिफारिशों पर सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने वाले रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के ऐसे प्रवर्ग से भिन्न रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों द्वारा मालों या सेवाओं या दोनों के लेखे शून्य अंकित मालों या सेवाओं या दोनों के प्रतिदाय के दावे के किसी मामले में अनंतिम आधार पर दावा की गई रकम , जिसके अंतर्गत अनंतिम स्वीकृत इनपुट कर प्रत्यय की रकम नहीं है, के नब्बे प्रतिशत का प्रतिदाय ऐसी रीति में और ऐसी शर्तों, परिसीमाओं और सुरक्षापायों के अधीन रहते हुए , जैसा कि विहित किया जाए , कर सकेगा तथा तत्पश्चात् उपधारा (5) के अधीन आवेदक द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के सम्यक् सत्यापन के पश्चात् प्रतिदाय के निपटान के लिए अंतिम आदेश करेगा ।
56.
विलंबित प्रतिदाय पर ब्याज.
यदि किसी आवेदक को धारा 54 की उपधारा (5) के अधीन किसी कर के प्रतिदाय का आदेश किया गया है और उस धारा की उपधारा ( 1 ) के अधीन आवेदन की प्राप्ति की तारीख के साठ दिन के भीतर उसका प्रतिदाय नहीं किया जाता है तो सरकार द्वारा परिषद् की सिफारिशों पर जारी अधिसूचना में यथाविनिर्दिष्ट् छः प्रतिशत से अनधिक ऐसी दर पर उक्त धारा के अधीन आवेदन की प्राप्ति की तारीख से साठ दिन के अवसान के पश्चात् की तारीख से ऐसे कर का प्रतिदाय करने की तारीख तक ब्याज संदेय होगा :
परंतु जहां प्रतिदाय के लिए कोई दावा किसी न्यायनिर्णायक प्राधिकारी या अपील प्राधिकारी या अपील अधिकरण या न्यायालय द्वारा पारित किसी आदेश , जो अंतिम आदेश है , से उदभूत होता है और उसका ऐसे आदेश के परिणामस्वरूप पारित आवेदन की प्राप्ति की तारीख से साठ दिन के भीतर प्रतिदाय नहीं किया जाता है तो परिषद् की सिफारिशों पर, अधिसूचित की जाने वाली नौ प्रतिशत से अनधिक ऐसी दर पर आवेदन की प्राप्ति की तारीख से साठ दिन के अवसान के पश्चात् की तारीख से ऐसा प्रतिदाय करने की तारीख तक ब्याज संदेय होगा ।
स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए जहां किसी अपील प्राधिकारी , अपील अधिकरण या किसी न्यायालय द्वारा धारा 54 की उपधारा (5) के अधीन समुचित अधिकारी के किसी आदेश के विरुद्ध प्रतिदाय का आदेश किया जाता है तो अपील प्राधिकारी , अपील अधिकरण या न्यायालय द्वारा पारित आदेश को उक्त उपधारा (5) के अधीन पारित आदेश माना जाएगा ।
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* छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 फरवरी 2024
126(21)
अध्याय 12
निर्धारण
62.
विवरणियों को फाइल न करने वालों का निर्धारण
(2) जहां रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति उपधारा (1 ) के अधीन निर्धारण आदेश की तामीली से तीस दिन के भीतर विधिमान्य विवरणी प्रस्तुत कर देता है तो उक्त निर्धारण आदेश का प्रत्याहृत किया गया समझा जाएगा किंतु धारा 47 के अधीन विलंब फीस के संदाय या धारा 50 की उपधारा (1 ) के अधीन ब्याज का संदाय करने का दायित्व बना रहेगा ।
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अध्याय 18
अपील और पुनरीक्षण
109. (1 ) इस अध्याय के उपबंधों के अधीन रहते हुए, केंद्रीय माल और सेवाकर अधिनियम के अधीन गठित माल और सेवा कर अधिकरण, इस अधिनियम के अधीन अपीलीय प्राधिकारी या पुनरीक्षण प्राधिकारी द्वारा पारित आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई करने के लिए अपीलीय अधिकरण होगा । अपीलीय अधिकरण और उसकी न्यायपीठें.
(2) राज्य में अवस्थित राज्य न्यायपीठ और क्षेत्रीय न्यायपीठों का गठन और अधिकारिता, केंद्रीय माल और सेवाकर अधिनियम की धारा 109 या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार होगी ।
110 .
राज्य न्यायपीठ और क्षेत्रीय न्यायपीठों के अध्याक्ष और सदस्यों की अर्हताएं, नियुक्ति, वेतन और भत्ते, पदावधि, त्यागपत्र और पद से हटाया जाना केंद्रीय माल और सेवाकर अधिनियम की धारा 110 के उपबंधों के अनुसार होगा । अपीलीय अधिकरण के अध्यक्ष और सदस्य, उनकी अर्हताएं, नियुक्ति, सेवा की शर्तें आदि.
114.
राज्य अध्यक्ष, किसी राज्य में अपीलीय अधिकरण की राज्य न्यायपीठ और क्षेत्रीय पीठों पर ऐसी वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों का प्रयोग करेगा , जैसा विहित किया जाए :
राज्य अध्यक्ष की वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां.
परंतु राज्य अध्यक्ष के पास अपनी ऐसी वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों को, जैसा वह ठीक समझे , राज्य न्यायपीठ और क्षेत्रीय पीठों के किसी अन्यं सदस्य या अन्य अधिकारी को , इस शर्त के अध्यधीन रहते हुए प्रत्यायोजित करने का प्राधिकार होगा कि ऐसा सदस्य या अधिकारी ऐसी प्रत्यायोजित शक्तियों को प्रयोग करते हुए राज्य अध्याक्ष के निदेश, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन कार्य करेगा ।
117.
उच्च न्यायालय को अपील.
(1 ) राज्य पीठ या अपीलीय अधिकरण की क्षेत्रीय पीठों द्वारा पारित किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति उच्च न्यायालय में अपील फाइल कर सकेगा और उच्च न्यायालय ऐसी अपील को स्वीकार कर सकेगा यदि उसका यह समाधान हो छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 फरवरी 2024
126(22)
जाए कि मामले में विधि का कोई सारवान प्रश्न अंतर्वलित है ।
(5) उच्च न्यायालय किसी ऐसे वाद को अवधारित कर सकेगा, जो-
(क) राज्य पीठ या क्षेत्रीय पीठ द्वारा अवधारित न किया गया हो ; या (
ख) उपधारा (3) में यथानिर्दिष्ट ऐसे विधि के प्रश्न पर विनिश्चय के कारण राज्य पीठ या क्षेत्रीय पीठ द्वारा त्रुटिपूर्ण अवधारण किया गया हो ।
118. (1 ) ऐसी अपील जो उच्चतम न्यायालय में होगी-
उच्चतम न्यायालय को अपील.
(क) राष्ट्रीय पीठ या अपीलीय अधिकरण की प्रांतीय पीठों द्वारा पारित किसी आदेश के विरुद्ध ; या
(ख) किसी मामले में धारा 117 के अधीन की गई अपील में उच्च न्यायालय द्वारा पारित किसी निर्णय या आदेश के विरुद्ध, जो स्वतः या व्यथित पक्षकार द्वारा या उसके ओर से किए गए आवेदन पर निर्णय या आदेश के पारित होने के तुरंत बाद, उच्च न्यायालय द्वारा प्रमाणित किया गया हो कि उच्चतम न्यायालय को अपील करने के लिए उचित मामला है ।
राशि जो 119.
अपील
आदि के
होने के
बाद भी
संदत्त की
जानी हैं.
किसी बात के होते हुए भी कि उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में अपील की गई है , धारा 113 की उपधारा (1 ) के अधीन अपीलीय अधिकरण की राष्ट्रीय या प्रांतीय पीठों या धारा 113 की उपधारा (1 ) के अधीन अपीलीय अधिकरण के ' राज्य पीठों या क्षेत्रीय पीठों या धारा 117 के अधीन उच्च न्यायालय द्वारा यथास्थिति पारित किसी आदेश के परिणामस्वरूप सरकार को दिए जाने वाली राशि इस प्रकार पारित आदेश के अनुसरण में संदेय की जाएगी ।
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अध्याय 19 अपराध और शास्तियां
122.
कतिपय अपराधों के लिए शास्ति.
( 1 क ) कोई व्यक्ति, जो उप- धारा (1 ) के खंड ( i) , (ii ) , (vii ) और खंड ( ix ) के अधीन आने वाले संव्यवहार से हुए लाभ का प्रतिधारण करता है और जिसके निर्देश पर ऐसा संव्यवहार हुआ है, अपवंचित कर या लिए गए या अग्रेषित इनपुट कर प्रत्यय के समतुल्य राशि की शास्ति का दायी होगा ।
132. (1 ) जो निम्नलिखित में से किसी अपराध को कारित करता है या कारित करवाता है और उससे उत्पन्न लाभ का प्रतिधारण करता है अर्थात् :-
कतिपय अपराधों के लिए दंड.
(क) इस अधिनियम या इसके अधीन निर्मित नियमों के उल्लंघन में किसी बीजक को जारी किए बिना किसी माल या सेवाओं या दोनों का प्रदाय अपवंचन के आशय से करता है;
(ख) इस अधिनियम या इसके अधीन निर्मित नियमों के उल्लंघन में गलत प्राप्ति या निक्षेप कर प्रत्यय के प्रयोग या कर की वापसी के लिए माल या सेवा या दोनों का प्रदाय बिना बीजक या बिल के जारी करना;
(ग) खंड (ख) में निर्दिष्ट ऐसे बीजक या बिल का उपयोग करके इनपुट कर प्रत्यय प्राप्त करता है या कपटपूर्वक, बिना किसी छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 फरवरी 2024
126(23 ) बीजक या बिल के , इनपुट कर प्रत्यय प्राप्त करता है । "
(घ) कोई रकम कर के रूप में संग्रहित करता है किन्तु उसे उस तारीख से जिसको ऐसा संदाय देय हो जाता है , तीन मास की अवधि के पश्चात् तक सरकार को संदाय करने में असफल होता है ;
(ङ) कर अपवंचन या कपट से वापसी प्राप्त करना और जहां ऐसा अपराध खंड (क ) से (घ) में नहीं आता;
(च) इस अधिनियम के अधीन शोध्य कर के संदाय से अपवंचन के आशय से या तो वित्तीय अभिलेखों को बदलता है या झूठलाता है या झूठे लेखा या दस्तावेज प्रस्तुत करता है या किसी झूठी सूचना को प्रस्त्तुत प्रस्तुत करता है ;
(छ) इस अधिनियम के अधीन किसी अधिकारी को उसके कर्तव्यों के निर्वहन से रोकता है या प्रवारित करता है ;
(ज) किसी माल जिसे वह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह इस अधिनियम या इसके अधीन निर्मित नियमों को जब्त करने के लिए दायी है, उसका कब्जा अर्जित करता है या परिवहन में स्वयं को किसी माध्यम से संबद्ध करता है , हटाता है या जमा करता है , रखता है , छिपाता है , प्रदाय करता है या क्रय करता है या किसी अन्य रीति में निपटारा करता है;
(झ) किसी माल को प्राप्त करता है या किसी अन्य प्रकार से उसके प्रदाय से संबद्ध रहता है या किसी अन्य रीति में सेवा प्रदाय में लगा रहता है जिसको वह जानते हुए करता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि इस अधिनियम या इसके अधीन निर्मित नियमों के उपबंधों के उल्लंघन में है ;
(ञ) किसी सारभूत साक्ष्य या दस्तावेज से छेड़छाड़ करता है या नष्ट करता है ;
(ट) किसी सूचना का प्रदाय करने में असफल रहता है जिसे उसे इस अधिनियम में या इसके अधीन निर्मित नियमों के उपबंधों के अधीन प्रदाय के लिए वह अपेक्षित है (बिना युक्तियुक्त विश्वास सहित , सिद्ध करने का भार जो उस पर है कि उसके द्वारा प्रदाय की गई सूचना सत्य है) या झूठी सूचना देता है, या
(ठ) इस धारा के खंड (क) से खंड (ट) में निर्दिष्ट अपराधों में से किसी के कारित करने का प्रयास करता है या दुष्प्रेरण करता है ,
दंडनीय होगा-
(i) जहां कर अपवंचन की रकम या गलत रूप से ली गई इनपुट कर प्रत्यय की रकम या प्रयोग की जा चुकी या वापस प्राप्त की गई रकम पांच सौ लाख रूपए से अधिक है , ऐसे कारावास से जो पांच वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माने से;
( ii ) जहां कर अपवंचन की रकम या गलत रूप से ली गई इनपुट कर प्रत्यय की रकम या प्रयोग की जा चुकी या वापस प्राप्त की छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 फरवरी 2024
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गई रकम दो सौ लाख रूपए से अधिक है लेकिन पांच सौ लाख रूपए से अनधिक है तो ऐसे कारावास से जो तीन वर्ष तक हो सकेगा और जुर्माने से;
(iii) जहां कर अपवंचन की रकम या गलत रूप से ली गई इनपुट कर प्रत्यय की रकम या प्रयोग की जा चुकी या वापस प्राप्त की गई रकम एक सौ लाख रूपए से अधिक लेकिन दो सौ लाख रूपए से अनधिक है तो ऐसे कारावास से जो एक वर्ष तक हो सकेगा और जुर्माने से;
( iv) खंड (च) या खंड (छ) या खंड (ज) में विनिर्दिष्ट किसी अपराध
को करता है या अपराध को करने के लिए दुष्प्रेरण करता है तो वह ऐसे कारावास से जो छः मास तक हो सकेगा या जुर्माने से या दोनों से दंडनीय होगा ।
अपराधों का प्रशमन.
138. (1 ) इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध या तो अभियोजन के संस्थित करने या उसके पश्चात् अपराध के अभियुक्त व्यक्ति द्वारा , यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार को ऐसे प्रशमन रकम को ऐसी रीति से संदाय पर, जो विहित की जाए , आयुक्त द्वारा प्रशमन किया जाएगा:
परंतु इस धारा की कोई बात निम्नलिखित को लागू नहीं होगी-- (क) कोई व्यक्ति जो धारा 132 की उपधारा (1 ) के खंड (क) से खंड (च) में विनिर्दिष्ट किसी अपराध के संदर्भ में प्रशमित होने के लिए अनुज्ञात किया गया था और खंड (1 ) में विनिर्दिष्ट अपराध जिससे उक्त उपधारा के खंड (क) से खंड ( च) में विनिर्दिष्ट अपराध से संबंधित है ;
(ख) कोई व्यक्ति जो इस अधिनियम के अधीन या एक करोड़ रूपए से अत्यधिक मूल्य के प्रदाय के संबंध में , किसी राज्य माल और सेवा कर अधिनियम या केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम या संघ राज्यक्षेत्र माल और सेवा कर अधिनियम या एकीकृत माल और सेवा कर अधिनियम के उपबंधों के अधीन जो खंड (क) से भिन्न किसी अपराध के संबंध में एक बार प्रशमन के लिए अनुज्ञात किया गया था ;
(ग) कोई व्यक्ति जो इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध को करने का अभियुक्त है, जिसने तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन कोई अपराध भी किया है ;
(घ) कोई व्यक्ति जो किसी न्यायालय द्वारा इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध हो चुका है ;
(ङ) कोई व्यक्ति जो धारा 132 की उपधारा (1 ) के खंड (छ) या खंड
(ञ) या खंड (ट) में विनिर्दिष्ट कोई अपराध कारित करने के लिए अभियुक्त है; और
(च) कोई अन्य व्यक्तियों या अपराधों का वर्ग जो विनिर्दिष्ट किया जाए:
परंतु यह और कि इस धारा के उपबंधों के अधीन कोई प्रशमन अनुज्ञात होगा जो किसी अन्य विधि के अधीन संस्थित छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 फरवरी 2024
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कार्रवाईयों, यदि कोई हों, पर प्रभाव नहीं डालता:
परंतु यह और भी कि ऐसे अपराधों में केवल अंतर्वलित कर, ब्याज और शास्ति का संदाय करने के पश्चात् प्रशमन अनुज्ञात होगा ।
(2) इस धारा के अधीन अपराधों के प्रशमन के लिए रकम अंतर्वलित कर के दस हजार रूपए या पचास प्रतिशत से, इनमें से जो भी उच्चतर हों , के अधीन रहते हुए और अधिकतम रकम तीस हजार रूपए से अन्यून या कर के एक सौ पचास प्रतिशत , इनमें से जो भी अधिकतम हों, विहित की जा सकेगी ।
अध्याय 21
प्रकीर्ण
लोक 158.
सेवक
द्वारा
सूचना का
प्रकट
किया
(1 ) इस अधिनियम के अनुसरण में प्रस्तुत किए गए विवरण , दी गई विवरणी या लेखा या दस्तोवेजों या इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाहियों के अनुक्रम में दिए गए साक्ष्य का कोई अभिलेख (दंड न्यायालय के समक्ष कार्यवाहियों से भिन्न) या इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाहियों के किसी अभिलेख में अंतर्विष्ट सभी विवरणों को, उपधारा (3 ) में यथा उपबंधित के सिवाय , प्रकट नहीं किया जाएगा ।
जाना ।
(2) भारतीय साक्ष्य अधिनियम , 1872 में किसी बात के अंतर्विष्ट होते हुए भी, कोई न्यायालय, उपधारा (3 ) में यथाउपबंधित के सिवाय , उपधारा (1 ) में निर्दिष्ट विवरण के संबंध में उसके समक्ष पेश किए जाने या उसके समक्ष साक्ष्य दिए जाने हेतु इस अधिनियम के अधीन नियुक्त या प्राधिकृत कोई अधिकारी से अपेक्षा नहीं करेगा ।
(3 ) इस धारा में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी,-
(क) भारतीय दंड संहिता या भ्रष्टाटचार निवारण अधिनियम, 1988 या तत्समय प्रवृत्त अन्य विधि के अधीन किसी अभियोजन के प्रयोजन के लिए किसी विवरण , विवरणी , लेखाओं , दस्तावेजों, साक्ष्य, शपथपत्र या अभिसाक्ष्य के संबंध में कोई विशिष्टियां ; या (ख) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या इस अधिनियम के उद्देश्यों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिए क्रियाशील कोई व्यक्ति को कोई विशिष्टियां ; या
(ग) कोई विशिष्टियां जहां ऐसे प्रकटन का कारण इस अधिनियम के अधीन विधिपूर्ण कार्य द्वारा किसी नोटिस की तामील या किसी मांग की वसूली के लिए कोई कार्यवाही है ; या
(घ) किसी भी वाद या कार्यवाहयों में सिविल न्यायालय को कोई विशिष्टियां जिसके लिए सरकार या इस अधिनियम के अधीन कोई प्राधिकारी , एक पक्षकार है जो कि इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त, किसी अन्य विधि के अधीन किसी कार्यवाहियों में उठने वाले किसी मामले के संबंध में, इसके अधीन किसी भी शक्ति का प्रयोग करने के लिए ऐसे किसी प्राधिकारी को प्राधिकृत करता है ; या छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 फरवरी 2024
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(ङ) इस अधिनियम द्वारा अधिरोपित कर प्राप्तिं या कर वापसी की लेखापरीक्षा के प्रयोजन के लिए नियुक्त किसी अधिकारी को कोई विशिष्टियां ; या
(च) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन जांच अधिकारी के रूप में नियुक्त किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को कोई विशिष्टियां जहां ऐसी विशिष्टियां इस अधिनियम के अधीन नियुक्त या प्राधिकृत कोई अधिकारी के आचरण की किसी जांच करने के प्रयोजन के लिए सुसंगत है; या
(छ) किसी कर या शुल्क का उदग्रहण करने के लिए सरकार को सशक्त बनाने के प्रयोजन के लिए यथा आवश्यक, केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के किसी अधिकारी को कोई ऐसी विशिष्टियां ; या
(ज) कोई विशिष्टियां जहां ऐसा प्रकटन कोई लोक सेवक या कोई अन्य वैधानिक प्राधिकारी द्वारा तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन उसकी शक्तियों के विधिपूर्ण प्रयोग के कारण हो; या
(झ ) यथास्थिति, किसी विधि व्यवसाय में व्यवसायरत सदस्यों, किसी लागत लेखाकार, चार्टर्ड अकाउंटेंट या कंपनी सचिव के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए सशक्त प्राधिकारी को विधि व्यवसाय अधिवक्ता, कर व्यवसायिक, लागत लेखाकार, चार्टर्ड अकाउंटेंट , कंपनी सचिव के व्यवसाय में लगे हुए के विरुद्ध इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाहियों के संबंध में अवचार के आरोपों की जांच से संबंधित कोई विशिष्टिया; या
(ञ) डाटा प्रविष्टि या स्वचालित प्रणाली के प्रयोजन के लिए या संचालन, उन्नत करने या किसी स्वचालित प्रणाली के अनुरक्षण के प्रयोजन के लिए नियुक्त एजेंसी , जहां ऐसी एजेंसी पूर्वोक्त प्रयोजनों के लिए को छोड़ ऐसी विशिष्टियों के प्रयोग या प्रकट नहीं करने की संविदा से आबद्ध है, को कोई विशिष्टियां ; या
(ट) तत्समय प्रवृत्त अन्य किसी विधि के प्रयोजन के लिए यथाआवश्यक सरकार के किसी अधिकारी को कोई विशिष्टियां ; और
(ठ) प्रकाशन के लिए किसी कराधेय व्यक्तियों के प्रवर्ग या संव्यवहार के वर्ग से संबंधित कोई सूचना, यदि आयुक्त की राय में ऐसी सूचना का प्रकाशन लोकहित में वांछनीय है,
को प्रकटन करने को लागू नहीं होगी ।
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* छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 फरवरी 2024
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अनुसूची 3
(6) लाटरी, दांव और जुआ के अतिरिक्त अनुयोज्य दावे ।
(7) भारत के बाहर किसी स्थान से, भारत के बाहर किसी अन्य स्थान पर माल का, ऐसे माल को भारत में प्रवेश किए बिना, प्रदाय ।
(8) (क) घरेलू उपभोग के लिए अनुमति प्रदान किए जाने से पूर्व किसी व्यक्ति को भांडागार में रखे गए माल का प्रदाय;
(ख) परेषिती द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को, माल का, भारत से बाहर अवस्थित मूल पत्तन से प्रेषण किए जाने के पश्चात्, किंतु घरेलू उपभोग के लिए अनुमति दिए जाने से पूर्व, माल के मालिकाना हक के दस्तावेज में पृष्ठांकन द्वारा, प्रदाय ।
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दिनेश शर्मा
सचिव
छत्तीसगढ़ विधान सभा
संचालक , मुद्रण तथा लेखन सामग्री, छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय , नवा रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित - 2024.