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Chattisgarh Gazette - Extraordinary · Government of Chattisgarh

“अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण" को पुनर्गठित करने संबंधी

Published 24 June 2024

Department
सामान्य प्रशासन विभाग
Type
Extraordinary
Gazette no.
247
Notification no.
क्रं. एफ 4-7/2024/एक-6
Identifier
in.gazette.chhattisgarh.eo.2024-06-24.247
Languages
English, Hindi

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 सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर

अटल नगर, दिनांक 24 जून 2024

अधिसूचना

क्रं. एफ 4-7/2024/एक-6.— इस विभाग के आदेश क्रमांक एफ 4-3/2020/एक-6 दिनांक 26.08.2020 द्वारा अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण पुनर्गठन किया गया था। उक्त आदेश को अधिक्रमित करते हुए राज्य शासन एतद्‌द्वारा "अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण" को निम्नानुसार पुनर्गठित करता हैः-

1- प्राधिकरण के उद्‌देश्य-

प्राधिकरण के उद्‌देश्य निम्नानुसार है :-

(1) प्राधिकरण के क्षेत्रांतर्गत निवासरत्‌ अनुसूचित जाति के लोगों के सामाजिक-सांस्—तिक तथा आर्थिक उन्नयन के लिए अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक योजनाओं के निर्माण के लिए आवश्यक कदम उठाना तथा योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा और अनुश्रवण सुनिश्चित करना।

(2) प्राधिकरण क्षेत्रांतर्गत सघन अनुसूचित जाति जनसंख्या वाले गांवों का क्षेत्रीय एवं ढॉचागत विकास करना अर्थात्‌ अनुसूचित जाति बस्तियों/ग्रामों का विकास करना।

(3) प्राधिकरण क्षेत्र में निवासरत्‌ अनुसूचित जातियों के हितों के संवैधानिक संरक्षण हेतु उपाय सुझाना। (4) राज्य शासन की अनुसूचित जाति विकास से संबंधित नीतियों एवं प्राथमिकताओं के अनुसार क्षेत्रीय विकास कार्यक्रमों की समीक्षा करना और आवश्यक सुधारात्मक सुझाव देना।

(5) प्राधिकरण क्षेत्र के अनुसूचित जाति समुदायों की आवश्यकताओं को पहचान कर, राज्य के विकास कार्यक्रमों में सम्मिलित करवाने की पहल करना।

(6) क्षेत्रीय विकास के लिए जन आकांक्षाओं के अनुरूप छोटे-छोटे विकास कार्यो की त्वरित स्वी—ति प्रदान करना।

2- प्राधिकरण का कार्यक्षेत्र-

प्राधिकरण के कार्यक्षेत्र में निम्नानुसार जिले होंगे :-

प्राधिकरण का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण राज्य है। जिसमें अनुसूचित जाति बाहुल्य जिले जांजगीर-चांपा, सक्ती, बिलासपुर, मुंगेली, रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, गरियाबंद, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, कबीरधाम, महासमुन्द, राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई, धमतरी शामिल है। इसके अतिरिक्त अन्य जिलों के अनुसूचित जाति बाहुल्य ग्राम/बस्तियों के मजरा, टोला, पारा, मोहल्ला एवं नगरीय क्षेत्र के वार्ड में स्थित पारा-मोहल्ला जहॉं अनुसूचित जाति की जनसंख्या 25 प्रतिशत से अधिक हो सम्मिलित होंगे।

3- प्राधिकरण का गठन-

प्राधिकरण का गठन निम्नानुसार होगा-

1- माननीय मुख्यमंत्री अध्यक्ष

2- माननीय विधायक (अ.जा आरक्षित) उपाध्यक्ष

3- माननीय मंत्री, अनुसूचित जाति विकास विभाग सदस्य

4- माननीय मंत्री, वित्त विभाग सदस्य

5- माननीय विधायक विधानसभा क्षेत्र- सदस्य

17 सारंगढ़ 27 मुंगेली 32 मस्तुरी

38 पामगढ़ 39 सराईपाली 43 बिलाईगढ़

52 आरंग 67 अहिवारा 70 नवागढ

74 डोंगरगढ़

6- अनुसूचित जाति विकास से जुडे अधिकतम 02 समाजसेवी सदस्य व विशेषज्ञ (राज्य शासन द्वारा मनोनीत)

7- मुख्य सचिव सदस्य

8- सचिव, आदिम जाति तथा अनु0जाति विकास विभाग सदस्य

9- मान.मुख्यमंत्रीजी के प्रमुख सचिव/सचिव सदस्य-सचिव

प्राधिकरण अपनी बैठकों में नियमित रूप से या विशेष रूप से किसी भी शासकीय अथवा अशासकीय व्यक्तियों को आमंत्रित कर सकेगा।

4- प्राधिकरण की बैठक-

प्राधिकरण की बैठक प्रत्येक छैमाही मेें पूर्व निर्धारित तिथि पर होगी। बैठक स्थल, दिन, समय एवं चर्चा के बिन्दुओं (एजेण्डा) की संसूचना प्राधिकरण के समस्त सदस्यों को बैठक की तिथि से कम से कम सात दिवस पूर्व दी जावेगी। बैठक में लिए गए निर्णयों/संस्तुतियों से सभी सदस्यों को बैठक की कार्रवाई विवरण के माध्यम से अवगत कराया जावेगा।

5- प्राधिकरण के कार्य एवं शक्तियॉ-

(1) प्राधिकरण, अनुसूचित जाति के विभिन्न वर्गो की सामाजिक एवं आर्थिक उन्नयन की अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक योजनाओं के निर्माण के लिए आवश्यक उठएगा तथा योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा और अनुश्रवण सुनिश्चित करेगा।

(2) प्राधिकरण, शासन की अनुसूचित जातियों के विकास से संंबंधित नीतियों एवं प्राथमिकताओं के अनुसार परिवार मूलक आर्थिक विकास कार्यक्रमों की समीक्षा करेगा और अनुसूचित जाति बस्तियों/ग्रामों की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इसके सुधार करने के सुझाव भी देगा।

(3) प्राधिकरण को शासकीय योजनाओं को क्षेत्र की आवश्यकता के अनुरूप स्वी—त करने, परिमार्जित करने, संशोधित करने अथवा निरस्त करने संबंधी सुझाव देने का अधिकार होगा।

(4) प्राधिकरण को योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करने और उनके अनुकूलतम उपयोग के लिए संबंधित विभाग को दिशा-निर्देश/मार्गदर्शन देने का अधिकार होगा। संबंधित विभाग तदनुसार योजनाओं को बजट में समावेष कर बजट आबंटन उपलब्ध कराएंगे। (5) अनुसूचित जाति के लोगों के हितों को संरक्षण दिलाने के लिए प्रचलित शासकीय नीतियों एवं विधिक प्रावधानों के अनुसरण में संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश/मार्गदर्शन देने का अधिकार होगा।

(6) प्राधिकरण, राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई अनाबद्ध राशि (अन्टाईट फण्ड) का आबंटन उन प्रयोजनों के लिए, जिसमें अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं का विस्तार, अनुसूचित जाति के लोगों का सामाजिक उन्नयन एवं आर्थिक विकास सुनिश्चित होता हो, किए जाने का निर्णय ले सकेगा।

(7) अन्य ऐसे समस्त विधिक कार्य संपादित करने की शक्ति होगी, जो प्राधिकरण के उद्‌देश्यों की पूर्ति हेतु आवश्यक हों।

6- प्राधिकरण के निर्णयों एवं वित्तीय स्वी—तियों का क्रियान्वयन-

प्राधिकरण द्वारा लिए गए निर्णयों, वित्तीय स्वी—तियों की संसूचना माननीय अध्यक्ष महोदय के अनुमोदन पश्चात्‌ प्राधिकरण के सदस्य-सचिव के हस्ताक्षर से जारी किये जावेंगे।

7- प्राधिकरण की निधि का नियम-

(1) प्राधिकरण निधि का उपयोग प्राधिकरण के निधि नियम के अनुरूप किया जाएगा।

(2) राज्य शासन द्वारा प्राधिकरण को आदिम जाति तथा अनुसूचित विकास विभाग के के बजट में मांग संख्या-64, अनुसूचित जाति उपयोजना, लेखा शीर्ष-4225 व 2225, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण-5631, 11111 अनुसूचित जातियों का कल्याण, #45-पूंजीगत परिसम्पत्तियों का निर्माण एवं #14-सहायक अनुदान के अंतर्गत प्रतिवर्ष कम से कम रुपये 50 करोड़ राशि उपलब्ध कराई जावेगी। (3) प्राधिकरण के अध्यक्ष को, प्राधिकरण की निधि से क्षेत्रीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए छोटे-छोटे निर्माण कार्यो की स्वी—ति का अधिकार होगा। विकास कार्यो की स्वी—तियॉं प्राधिकरण के माननीय सदस्यों, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों तथा अनुसूचित जाति बाहुल्य ग्राम, पारा, टोलों की आवश्यकताओं की तात्कालिक मांग को दृष्टिगत रखते हुए दी जाएगी।

(4) प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के वेतन भत्ते, कार्यालयीन व्यय एवं अन्य प्रासंगिक व्यय के भुगतान तथा सामान्य प्रशासनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए स्थापना अनुदान में रुपये 50.00 लाख का प्रावधान होगा।

(5) प्राधिकरण से स्वी—त राशि का लेखा परीक्षण जिला स्तर पर विभागीय बजट से पुनराबंटित राशि की प्रकिया तथा कोष एवं लेखा के निर्देशों के अनुरूप महालेखाकार, छत्तीसगढ़ से कराया जाएगा। मुख्यालय स्तर पर लेखा संधारण आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास के द्वारा कोष एवं लेखा के निर्देशों के अनुरूप किया जाएगा।

8- प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को सुविधाएं-

प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होगा। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के निजी कार्यालय के लिए स्टाफ की व्यवस्था राज्य शासन द्वारा निर्धारित सुविधाओं के अनुरूप होगी। यह सुविधाएं प्रशासकीय विभाग (आदिम जाति तथा अनु0जाति विकास विभाग) द्वारा की जाएगी।

9- प्राधिकरण प्रकोष्ठ-

प्राधिकरण से संबंधित समस्त मंत्रालयीन कार्यो के निष्पादन के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर में एक ''प्रकोष्ठ'' का गठन किया जावेगा। ''प्रकोष्ठ'' में एक प्रथम श्रेणी राजपत्रित अधिकारी तथा उसके अधीनस्थ कार्यालयीन स्टाफ होगा। इन कर्मचारियों के वेतन, भत्तों की व्यवस्था संबंधित विभाग/कार्यालय द्वारा की जाएगी। प्राधिकरण प्रकोष्ठ का दायित्व होगा कि-

1- प्राधिकरण की बैठकों की संसूचना जारी करना।

2- प्राधिकरण की बैठक में लिए गए निर्णयों का कार्रवाई विवरण तैयार करना तथा माननीय अध्यक्ष महोदय के अनुमोदन पश्चात्‌ यह कार्रवाई विवरण सदस्य-सचिव के हस्ताक्षर से जारी किया जाएगा। 3- संबंधित विभाग/एजेंसियों से कार्रवाई विवरण के अनुसार प्राधिकरण के निर्णयों का पालन सुनिश्चित करवाकर पालन प्रतिवेदन प्राधिकरण की आगामी बैठक में प्रस्तुत करना।

4- प्राधिकरण की निधि से स्वी—त हुए कार्यो की कार्य स्वी—ति आदेश सदस्य-सचिव के हस्ताक्षर से आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास के लिए जारी करना।

5- प्राधिकरण की स्वी—तियों की जानकारी अद्यतन रखना तथा आयुक्त आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास द्वारा दी गई पुनराबंटन स्वी—तियों का मिलान कर यह सुनिश्चित करना कि प्राधिकरण से कार्य स्वी—ति पश्चात्‌ 15 दिवस की समयावधि में आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास के द्वारा पुनराबंटन स्वी—ति जारी कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि कोष एवं लेखा के निर्देशों के अनुरूप लेखा का संधारण प्रशासकीय विभाग आयुक्त आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास के द्वारा ही किया जाएगा।

6- यह सुनिश्चित करना कि आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास के द्वारा दी गई पुराबंटन स्वी—ति पश्चात्‌ संबंधित विभाग/जिला कलेक्टर्स के द्वारा एक माह की समयावधि में वित्त विभाग एवं भंडार क्रय नियमों का पालन करत हुए कार्य प्रारंभ कर दिया जाए।

7- प्राधिकरण से स्वी—त कार्यो की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, संबंधित विभाग/जिला कलेक्टर्स से त्रैमासिक आधार पर प्राप्त कर प्रगति की जानकारी, सदस्य सचिव के अवलोकनार्थ प्रस्तुत करना। 8- माननीय अध्यक्ष महोदय एवं सदस्य सचिव, प्राधिकरण के निर्देशानुसार समस्त दायित्वों का निर्वहन करना।

हस्ता./-

(डी.डी. सिंह) सचिव.

अटल नगर, दिनांक 24 जून 2024

अधिसूचना

क्रं. एफ 4-12/2024/एक-6.— इस विभाग के अधिसूचना क्रमांक एफ 4-3/2020/एक/6 दिनांक 26.08. 2020 द्वारा अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण निधि नियम, 2020 अधिसूचित किया गया था। उक्त अधिसूचना को अधिक्रमित करते हुए राज्य शासन एतद्‌द्वारा निम्नलिखित नियम बनाती हैः-

1- संक्षिप्त नाम, प्रारंभ तथा विस्तार-

(1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण निधि नियम, 2024 होगा। (2) ये नियम छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होंगे।

(3) इसका विस्तार संबंधित प्राधिकरण की सीमा तक होगा।

2- परिभाषाएं-

इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) ''प्राधिकरण'' से अभिप्रेत है, राज्य सरकार द्वारा गठित किया गया अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण है।

(ख) ''प्ररूप'' से अभिप्रेत है, वे प्रपत्र जिनमें विकास कार्यो का विवरण एवं इस पर व्यय की जाने वाली राशि आदि का अभिलेख उल्लेखित हो।

(ग) ''निधि'' से अभिपे्रत है, प्राधिकरण को आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के बजट से प्रतिवर्ष मांग संख्या-64, अनुसूचित जाति उपयोजना, लेखा शीर्ष-4225 व 2225, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण-5631, 11111 अनुसूचित जातियों का कल्याण #45-पूंजीगत परिसम्पत्तियों का निर्माण एवं #14-सहायक अनुदान के अंतर्गत उपलब्ध कराई जाने वाली राशि जिससे प्राधिकरण अपने उद्‌देश्यों की पूर्ति कर सके।

3- निर्णयों का क्रियान्वयन-

(1) प्राधिकरण क्षेत्रांतर्गत अधोसंरचनाओं के विकास तथा हितग्राही मूलक कार्यो के लिए माननीय सदस्य, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, संबंधित विभाग/जिला कलेक्टर्स के मांग-पत्र प्रस्ताव के आधार पर प्राधिकरण की स्वीकृति/प्राधिकरण के अध्यक्ष द्वारा प्राधिकरण के अनुमोदन की प्रत्याशा में दी जाएगी। (2) प्राधिकरण/प्राधिकरण के अध्यक्ष द्वारा दी गई स्वीकृति की संसूचना सदस्य-सचिव, प्राधिकरण द्वारा जारी की जाएगी। वित्तीय स्वीकृति की संसूचना आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास को प्रेषित करते हुए, संबंधित विकास विभाग/जिला कलेक्टर्स को अवगत कराया जाएगा। (3) सदस्य सचिव, प्राधिकरण से प्राप्त वित्तीय स्वीकृति के आधार पर जिला कलेक्टर द्वारा नियत की गई निर्माण एजेंसी प्ररूप-''क'' में विकास कार्यो का विवरण देते हुए, तकनीकी स्वीकृति जारी की जाएगी। (4) निर्माण एजेंसी के द्वारा प्ररूप-''क'' में प्रस्ताव मय आवश्यक दस्तावेज, ड्राईंग, साईट प्लान, भौतिक सीमा चिन्ह, नक्शा व खसरा (पांच साल) सहित जिला कलेक्टर को प्रस्तुत करेगा। (5) जिला कलेक्टर निर्माण एजेंसी के द्वारा प्रस्तुत प्ररूप-''क'' एवं संलग्न आवश्यक दस्तावेंजों का पूर्ण परीक्षण करते हुए प्रमाण पत्र जारी करेगा, इसमें कार्य की सक्षमता अनुसार प्रशासनिक स्वीकृति भी सम्मिलित होगी।

(6) कलेक्टर को एक करोड़ रुपये तक के कार्यो की प्रशासनिक स्वीकृति जारी करने का अधिकार होगा, इसके ऊपर की राशि संबंधितविभाग द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति जारी की जाएगी।

(7) स्वीकृत कार्यो के लिए प्ररूप-''क'' तथा प्रशासकीय स्वीकृतियों का संधारण जिला स्तर पर जिला कलेक्टर एक सेल बनाकर करेंगे।

4- प्राधिकरण के अंतर्गत लिये जाने वाले कार्य-

1) आधारभूत नागरिक सुविधाओं के कार्य- सी0सी0 रोड निर्माण, पुल-पुलिया निर्माण, नाली निर्माण, पेयजल सुविधाओं का विस्तार, नलकूप खनन एवं हैण्डपम्प की स्थापना, हाट-बाजार में शौचालय निर्माण, तालाब में पचरी निर्माण।

2) सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियोंं के कार्य- मंगल भवन निर्माण, सांस्कृतिक भवन निर्माण एवं रंगमंच/कला मंच निर्माण, चबूतरा निर्माण, जैतखम्भ निर्माण, मुक्तिधाम शेड निर्माण। सभी भवनों के निर्माण कार्य में विद्युत व्यवस्था अनिवार्य रहेगी।

3) शैक्षिक वातावरण के निर्माण के लिए अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र में शाला भवन/छात्रावास भवन/आश्रम मेेंं अतिरिक्त कक्ष निर्माण, पेयजल व्यवस्था, शौचालय का निर्माण, कन्या शालाओं में बाउण्ड्रीवाल/आहता निर्माण।

4) स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार- स्वास्थ्य केन्द्रों में अतिरिक्त कक्ष निर्माण, मरीजों के परिजनों के लिए सराय निर्माण, अस्पताल में पेयजल की व्यवस्था।

इत्यादि सभी कार्य जिससे प्राधिकरण क्षेत्र के विकास तथा अनुसूचित जातियों की संस्कृति के परिरक्षण में सहायक हो, लिये जा सकेंगे। ऐसे कार्य जो किसी धर्म विशेष के प्रोत्साहन अथवा प्रचार में सहायक होते हैं, को प्राधिकरण द्वारा प्रश्रय नहीं दिया जाएगा।

5- प्राधिकरण की निधि के लिए बजट का प्रावधान-

प्राधिकरण के लिए आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के विभागीय बजट में प्रतिवर्ष 50.00 करोड़ या इससे अधिक्य राशि मांग संख्या-64, 5631-अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण, लेखा शीर्ष-4225, #45-पूंजीगत परिसम्पत्तियों का निर्माण, 001- पूंजीगत परिसम्पत्तियों का निर्माण तथा लेखा शीर्ष-2225 #14-सहायक अनुदान, 012-अन्य अनुदान अंतर्गत उपलब्ध होगी। प्राधिकरण से स्वीकृति के अनुक्रम में सदस्य सचिव, प्राधिकरण द्वारा स्वीकृति पत्र आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास, अटल नगर नवा रायपुर को प्रेषित किया जाएगा।

6- उपाध्यक्ष कार्यालय के लिए राशि का प्रावधान-

प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के वेतन भत्ते, कार्यालयीन व्यय एवं अन्य प्रासंगिक व्यय की पूर्ति के लिए बजट का प्रावधान आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के बजट से किया जावेगा। आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास प्रावधानित बजट संबंधित जिला कलेक्टर के विकल्प पर पुनराबंटित करेंगे। 7- निधि से राशि की स्वीकृति जारी करना-

(1) प्राधिकरण/प्राधिकरण के अध्यक्ष द्वारा स्वीकृत कार्यो की वित्तीय स्वीकृति सदस्य-सचिव प्राधिकरण द्वारा जारी किया जाएगा। जिसके आधार पर आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास द्वारा संबंधित जिला कलेक्टर को राशि पुनरावंटित की जावेगी।

(2) कलेक्टर द्वारा वित्त विभाग के निर्देशों के अनुरूप दो अथवा तीन किश्तों में कार्यो की प्रगति तथा वित्त विभाग के निर्देर्शो के अनुसार राशि क्रियान्वयन एजेंसी को उपलब्ध कराई जाएगी। (3) कार्य की समाप्ति उपरांत कार्य का पूर्णता एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र जिला कलेक्टर्स द्वारा आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास को प्रस्तुत किया जावेगा। जिसका संधारण राज्य शासन एवं वित्त विभाग के निर्देशों के अनुरूप किया जाएगा।

8- कार्य निरीक्षण प्रतिवेदन-

जिला कलेक्टरर्स प्राधिकरण से स्वीकृत कार्यो के नियमित निरीक्षण के लिए जिला स्तर पर लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, जल संसाधन को छोड़कर अन्य विभाग के सक्षम तकनीकी अधिकारियों को शामिल कर निरीक्षण समिति गठित करेंगे। यह समिति प्राधिकरण से स्वीकृत कार्यो का स्थल निरीक्षण कर निरीक्षण प्रतिवेदन जिला कलेक्टर को प्रस्तुत करेंगे। जिला कलेक्टर द्वारा निरीक्षण प्रतिवेदन के आधार पर सक्षम प्रशासकीय अधिकारी के द्वारा सेम्पल निरीक्षण करवाकर अपने अभिमत सहित सदस्य सचिव, प्राधिकरण एवं आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास को त्रैमासिक प्रतिवेदन के आधार पर अवगत कराएंगे। 9-पर्यवेक्षण प्रभार से मुक्ति-

प्राधिकरण की निधि से स्वीकृत कार्य पर्यवेक्षण प्रभार से मुक्त रहेंगे। संबंधित निर्माण विभाग एवं क्रियान्वयन एजेंसी को केवल कार्यो की प्रशासकीय स्वीकृति की सीमा में ही राशि भुगतान की जाएगी।

10- लेखा संधारण की रीति-

(1) प्रत्येक वित्तीय वर्ष में उपलब्ध बजट प्रावधान की सीमा में राशि पुनराबंटन की स्वीकृति तथा व्यय की जानकारी प्राधिकरण ''प्रकोष्ठ'' द्वारा संधारित किया जायेगा।

(2) निधि से पुनराबंटित राशि, व्यय एवं तत्संबंधी अन्य विषयों का लेखा/लेखा संधारण, आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास एवं संबंधित जिला कलेक्टर कार्यालय में इस हेतु एक प्रभारी अधिकारी को नियुक्त कर, राज्य सरकार की राशि के लेखा संधारण की भांति किया जाएगा। 11- प्राधिकरण की निधि से तैयार आस्तियों का रख रखाव एवं संधारण-

(1) प्राधिकरण की निधि से निर्मित आस्तियों का लेखा-जोखा संबंधित विभाग द्वारा संधारित किया जाएगा। इन आस्तियों के उपयोग एवं रख रखाव का उत्तरदायित्व भी संबंधित विभाग का होगा। विभाग इन आस्तियों को अपने ''बुक्स'' में लेंगे।

(2) प्राधिकरण निधि से निर्मित अधोसंरचना स्थल में सीमेंट की बनी पटि्‌टका जिसमें प्राधिकरण का नाम, स्वीकृत कार्य का विवरण, स्वीकृति वर्ष, स्वीकृत राशि इत्यादि का उल्लेख हो, लगाया जाना अनिवार्य होगा।

12- लेखाओं का पर्यवेक्षण, परीक्षण एवं अंकेक्षण-

(1) आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास द्वारा लेखा विवरण का समय-समय पर पर्यवेक्षण, परीक्षण एवं निरीक्षण किया अथवा करवाया जाएगा।

(2) आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास एवं जिला कलेक्टर कार्यालयों में विकास प्राधिकरण की राशि से संपादित होने वाले कार्यो से संबंधित लेखाओं का अंकेक्षण, महालेखाकार के आडिट दल से नियमानुसार कराया जाएगा।

(3) प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत कार्यो का मूल्यांकन/पर्यवेक्षण आंतरिक एवं बाह्‌य एजेंसी से करवाने का दायित्व जिला कलेक्टर का होगा।

(4) वित्तीय वर्ष समाप्ति के पश्चात्‌ प्राधिकरण से स्वीकृत कार्यो की सूचना प्राधिकरण के अध्यक्ष के द्वारा अर्द्धशासकीय पत्र के माध्यम से प्राधिकरण के सदस्यों को सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) के लिए दी जाएगी।

हस्ता./-

(डी.डी. सिंह) सचिव.

प्रारूप-''क''

देखें नियम-3(4)

प्रति,

कलेक्टर,

जिला-.....................................

महोदय,

दिनांक.......................को अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण की बैठक में अध्यक्ष द्वारा लिये गये निर्णय के बिन्दु क्रमांक...........................के अनुसार विकास कार्य ........................................................................................................................को...

................................................................................................................स्थल में निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिस हेतु ...................

..................................................................विभाग को क्रियान्वयन एजेंसी नियुक्त किया गया है।

2. इस निर्णय के अनुसरण में कार्यस्थल का पूर्ण निरीक्षण कर कार्य के परिमाण का आंकलन विभाग द्वारा किया गया। इस आंकलन में कार्य से संबंधित तकनीकी प्रतिवेदन सक्षम अधिकारी द्वारा मान्य किया गया है। तकनीकी स्वीकृति क्रमांक..................................,,,,,,,,,,,,....दिनांक.................द्वारा सक्षम अधिकारी............................................................द्वारा दी गई है। 3. इस...............................................................................विकास कार्य को पूर्ण करने में राशि ......................रूपये शब्दो में .................................................................................की लागत आना आंकलित है।

4. कृपया इस कार्य एवं राशि का प्रशासनिक अनुमोदन सक्षमता अनुसार जारी करने का कष्ट करें। संलग्नः-तकनीकी प्रतिवेदन।

क्रियान्वयन एजेंसी का नाम............................................

प्रस्तावक का नाम..............................................................

पदनाम.................................................................................

कार्यालय की मुद्रा

स्थान : दिनांक :

प्रमाण-पत्र

देखें नियम-3(6)

दिनांक.......................को अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण की बैठक में लिये गये निर्णय के बिन्दु क्रमांक........

.........................................के अनुसरण में स्थल..............................................................................................................................में विकास कार्य ............................................................................................................को कराये जाने की स्वीकृति दी गई है, जिस हेतु .............

.................................................................................विभाग को क्रियान्वयन एजेंसी नियुक्त/नियत किया गया है।

2. क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा स्थल निरीक्षण एवं सर्वे इत्यादि कर इस विकास कार्य को संपादित करने में राशि ...

..................................रुपये (शब्दों में ..........................................................................................................) की राशि का व्यय होना आंकलित किया गया है।

3. कियान्यन एजेंसी द्वारा कार्य को पूर्ण करने में ..............................................अवधि लगने की संभावना व्यक्त की गई है।

4. क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा प्ररूप-क में कार्य की सक्षम तकनीकी स्वीकृति की सूचना दी गई है। कार्य की तकनीकी स्वीकृति सक्षम अधिकारी ................................................................................................द्वारा क्रमांक..........................................

.दिनांक ..............................द्वारा दी गई है।

5. इस विकास कार्य पर लगने वाली आंकलित राशि की तकनीकी स्वीकृति के आधर पर सक्षम प्रशासनिक स्वीकृति भी ले ली गई है। प्रशासनिक स्वीकृति सक्षम प्राधिकारी .....................................................................के क्रमांक ................

.............................दिनांक ............................द्वारा दी गइर््र है।

संलग्नः-प्ररूप-क्ं

कलेक्टर जिला-.................................

स्थान : दिनांक :

Cite this issue. Chattisgarh Gazette - Extraordinary, Government of Chattisgarh, 24 June 2024. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.chhattisgarh.eo.2024-06-24.247/. Archive identifier in.gazette.chhattisgarh.eo.2024-06-24.247.