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छत्तीसगढ़शासन
पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़/ दुर्ग/ 09 / 2013-2015 . "
सत्यमेव जयते
"बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान (बिना डाक टिकट) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22- छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई . दिनांक 30-05-2001 . "
छत्तीसगढ़ राजपत्र
(असाधारण)
प्राधिकार से प्रकाशित
श्रावण 3 , शक 1946
क्रमांक 315]
रायपुर, गुरुवार, दिनांक 25 जुलाई 2024-
छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय
रायपुर, गुरूवार, दिनांक 25 जुलाई 2024 (श्रावण 3 , 1946)
क्रमांक-9197/ वि.स./विधान/ 2024. छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी (संशोधन) विधेयक, 2024 (क्रमांक 6 सन् 2024) जो बुधवार, दिनांक 24 जुलाई , 2024 को पुरःस्थापित हुआ है, को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।
हस्ता./-
(दिनेश शर्मा) सचिव.
629 630
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 25 जुलाई 2024
छत्तीसगढ़ विधेयक (क्रमांक 6 सन् 2024)
छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी (संशोधन) विधेयक, 2024
विधेयक । छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी अधिनियम, 1972 (क. 24 सन् 1973) के अग्रतर संशोधन करने हेतु भारत गणराज्य के पचहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधान मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो:-
1. (1) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी (संशोधन) अधिनियम, 2024 कहलायेगा ।
संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारंभ.
(2) इसका विस्तार संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में होगा ।
(3) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा ।
धारा 2 का संशोधन.
2. छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी अधिनियम , 1972 (क. 24 सन् 1973 ) (जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है) की धारा 2 की उप- धारा (1 ) के खण्ड (चचचच) के पश्चात्, निम्नलिखित खण्डः अन्तःस्थापित किया जाये, अर्थात्:-
"(चचचचच) "ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार)" से अभिप्रेत है कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय , भारत सरकार द्वारा संचालित एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रानिक (ऑनलाईन) कृषि व्यापार पोर्टल, जो मौजूदा कृषि उपज मण्डी समितियों को अधिसूचित कृषि उपज के कय एवं विक्रय के लिए एकीकृत करते हुये , राष्ट्रीय बाजार से जोड़ता है । "
धारा 19 का संशोधन.
3. मूल अधिनियम की धारा 19 की उप-धारा (2) , (3) एवं (4) में, जहां कहीं भी शब्द "मण्डी फीस" आये हों के पश्चात्, शब्द "तथा कृषक कल्याण शुल्क" अन्तःस्थापित किया जाए । 630(1)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 25 जुलाई 2024
धारा 19-ख का संशोधन.
4. मूल अधिनियम की धारा 19 - ख में, जहां कहीं भी शब्द " मण्डी फीस" आये हों के पश्चात्, शब्द "तथा कृषक कल्याण शुल्क" अन्तःस्थापित किया जाए ।
धारा 20 का संशोधन.
5. मूल अधिनियम की धारा 20 की उप- धारा (3 ) में, शब्द " मण्डी फीस " के पश्चात्, शब्द "तथा कृषक कल्याण शुल्क" अन्तःस्थापित किया जाए ।
धारा 23 का संशोधन.
6. मूल अधिनियम की धारा 23 की उप- धारा (3 ) में, शब्द "मण्डी फीस " के पश्चात्, शब्द "तथा कृषक कल्याण शुल्क" अन्तःस्थापित किया जाए ।
7.
धारा 32 का संशोधन.
(एक) मूल अधिनियम की धारा 32 की उप- धारा (1 ) में, पूर्ण विराम चिन्ह " । " के स्थान पर, कोलन चिन्ह ":" प्रतिस्थापित किया जाये; और
(दो) मूल अधिनियम की धारा 32 की उप - धारा (1 ) के पश्चात्, निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाये, अर्थात्ः-
"परन्तु अन्य प्रदेश के मंडी बोर्ड/ मंडी समिति के एकल पंजीयन/ अनुज्ञप्तिधारी व्यापारी / प्रसंस्करणकर्ता / विनिर्माताओं को भारत सरकार द्वारा संचालित ई- नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) पोर्टल के माध्यम से अधिसूचित कृषि उपज का कयण तथा कय अधिसूचित कृषि उपज की कीमत, मंडी शुल्क, कृष्क कल्याण शुल्क तथा अन्य देय राशियों का भुगतान इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार करने पर , अनुज्ञप्ति/ पंजीयन की आवश्यकता नहीं होगी और इस अधिनियम के शेष प्रावधान यथावत प्रभावी होंगे । "
8.
धारा 32 -क का संशोधन.
(एक) मूल अधिनियम की धारा 32- क की उप-धारा (1 ) में, पूर्ण विराम चिन्ह " ।" के स्थान पर, कोलन चिन्ह " : " प्रतिस्थापित किया जाये; और
(दो) मूल अधिनियम की धारा 32- क की उप - धारा (1 ) के पश्चात्, निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाये, अर्थात्ः-
"परन्तु अन्य प्रदेश के मंडी बोर्ड / मंडी समिति के एकल पंजीयन/ अनुज्ञप्तिधारी व्यापारी / प्रसंस्करणकर्ता/विनिर्माताओं को भारत सरकार द्वारा संचालित ई- नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) पोर्टल के माध्यम 630 (2)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 25 जुलाई 2024
से अधिसूचित कृषि उपज का कयण तथा कय अधिसूचित कृषि उपज की कीमत , मंडी शुल्क, कृषक कल्याण शुल्क तथा अन्य देय राशियों का भुगतान इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार करने पर , अनुज्ञप्ति/ पंजीयन की आवश्यकता नहीं होगी और इस अधिनियम के शेष प्रावधान यथावत प्रभावी होंगे । "
9.
धारा 33 -ख का संशोधन.
मूल अधिनियम की धारा 33 - ख की उप- धारा (1 ) के खण्ड (ख) में, शब्द "मंडी शुल्क" के पश्चात्, शब्द "तथा कृषक कल्याण शुल्क" अन्तःस्थापित किया जाए । 10.
धारा 37- क का संशोधन.
मूल अधिनियम की धारा 37 - क की उप- धारा (5) में, शब्द " मंडी फीस " के पश्चात्, शब्द "तथा कृषक कल्याण शुल्क" अन्तःस्थापित किया जाए ।
11. मूल अधिनियम की धारा 43 में,-
धारा 43 का संशोधन.
(एक) उप-धारा (1 ) में, शब्द "विपणन विकास निधि" के पश्चात्, पूर्ण विराम चिन्ह " । " के स्थान पर, कोलन चिन्ह ":" प्रतिस्थापित किया जाये ; और (दो) उप- धारा (1 ) के पश्चात्, निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाए, अर्थात्ः-
"परन्तु प्रत्येक मंडी समिति, बोर्ड को कृषक कल्याण शुल्क का इतना प्रतिशत प्रतिमाह भुगतान करेगी, जैसा कि राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, समय- समय पर घोषित करे, इस प्रकार भुगतान की गई तथा संग्रह की गई राशि, छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण निधि कहलायेगी ।"
(तीन) उप-धारा (7) में, शब्द " छत्तीसगढ़ राज्य विपणन विकास निधि" के पश्चात्, शब्द " छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण निधि" अन्तःस्थापित किया जाए ।
धारा 44 का संशोधन.
12. मूल अधिनियम की धारा 44 के खण्ड (बारह) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाए , अर्थात्ः-
"(बारह) बोर्ड, भिन्न- भिन्न कृषक कल्याणोन्मुखी गतिविधियों (कृषक हित) के लिए अपने सकल वार्षिक आय की 10 प्रतिशत राशि, छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण निधि में जमा करेगा । छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण निधि का उपयोग , नियमों में विहित प्रयोजनों के लिए किया जा सकेगा । " 630( 3)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 25 जुलाई 2024
धारा 69 का संशोधन.
13. मूल अधिनियम की धारा 69 में, जहां कहीं भी शब्द "मण्डी फीस " आये हों के पश्चात्, शब्द "तथा कृषक कल्याण शुल्क" अन्तःस्थापित किया जाए । 630(4)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 25 जुलाई 2024
उद्देश्यों और कारणों का कथन
यतः, राज्य सरकार का दृष्टिकोण है कि छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण निधि तथा अन्य प्रदेश के मंडी बोर्ड/ मंडी समिति के एकल पंजीयन / अनुज्ञप्तिधारी व्यापारी / प्रसंस्करणकर्ता, भारत सरकार द्वारा संचालित ई- नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार ) पोर्टल के माध्यम से अधिसूचित कृषि उपज का क्रय- विक्रय बिना पंजीयन के कर सके, जिससे कि कृषकों को उनकी कृषि उपज का अधिकतम मूल्य प्राप्त हो;
अतएव, उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति एवं कृषक हित के लिए, छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी अधिनियम, 1972 (क. 24 सन 1973 ) में उपयुक्त संशोधन किया जाना आवश्यक हो गया है ।
अतः यह विधेयक प्रस्तुत है ।
रामविचार नेताम
कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री (भारसाधक सदस्य)
रायपुर, दिनांक 20 जुलाई, 2024 630(5)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 25 जुलाई 2024
उपाबंध
छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 (क्रमांक 24 सन् 1973 ) की धारा 2, धारा 19, धारा 19-ख , धारा 20, धारा 23, धारा 32, धारा 32- क, धारा 33 - ख , धारा 37- क , धारा 43, धारा 44 तथा धारा 69 के संबंध में सुसंगत उद्धरण
धारा 2 की उपधारा (1 ) के खण्ड (चचचच)
(चचचच) "निर्यात" से अभिप्रेत है, कृषि उपज , जिसमें पशुधन भी शामिल है, का भारत से बाहर भेजा जाना ;
धारा 19 की उपधारा (2)-
मण्डी फीस अधिसूचित कृषि उपज के केता द्वारा संदेय होगी और विक्रेता को संदेय कीमत में से नहीं काटी जायेगी :
परन्तु जहाँ किसी अधिसूचित कृषि उपज का केता पहचाना न जा सके, वहां समस्त फीस उस व्यक्ति द्वारा सन्देय होगी जिसने कि उपज को बेचा हो या जो उपज की मण्डीक्षेत्र में विक्रय के लिए लाया हो:
परन्तु यह और कि मण्डी क्षेत्र में व्यापारियों के बीच वाणिज्यिक संव्यवहार होने के दशा में मण्डी फीस विक्रेता द्वारा संग्रहीत की जायेगी तथा संदत्त की जायेगी ।
परन्तु यह भी कि, वाणिज्यिकं संव्यवहार के लिए या प्रसंस्करण के लिए मण्डी क्षेत्र में लाई गई कृषि उपज पर मण्डी फीस , यथास्थिति , केता या प्रसंस्करणकर्ता द्वारा , उस दशा में मण्डी समिति के कार्यालय में चौदह दिन के भीतर जमा की जाएगी , यदि केता या प्रसंस्करणकर्ता ने धारा 19 की उपधारा (6 ) के अधीन जारी किया गया अनुज्ञानपत्र प्रस्तुत नहीं किया है ।
धारा 19 की उपधारा (3)-
उपधारा (1 ) में निर्दिष्ट मण्डी फीस किसी अधिसूचित कृषि उपज पर
( एक) राज्य में के एक से अधिक मण्डी क्षेत्र में
या (दो) उसी मण्डी क्षेत्र में एक से अधिक बारं उस दशा में उद्गृहीत नहीं की जाएगी जब कि उसका पुनर्विक्रय-
(क) ऊपर (एक) की दशा में, उस मण्डी क्षेत्र से, जिसमें वह यथास्थिति किसी कृषक या व्यापारी द्वारा प्रथम बार विक्रय हेतु लाई गई थीया कय की गई थी या बेची गई थी तथा उस पर उस मण्डी क्षेत्र में फीस लग चुकी है, भिन्न मण्डी क्षेत्र में; या
(ख) ऊपर (दो) की दशा में, उस मण्डी क्षेत्र में-
व्यापारियों के बीच वाणिज्यिक संव्यवहारों के अनुक्रम में या उपभोक्ताओं को किया जाता है , बशर्ते संबंधित व्यक्ति द्वारा ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए , इस प्रभाव की 630(6)
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सूचना दे दी गई हो कि इस प्रकार पुनः बेची जा रही उस अधिसूचित कृषि उपज पर राज्य के अन्य मण्डी क्षेत्र में फीस पहले ही लग चुकी है ।
धारा 19 की उपधारा (4)-
यदि यह पाया जायए कि कोई अधिसूचित कृषि उपज ऐसी उपज पर देय मण्डी फीस के भुगतान के बिना प्रांगण के बाहर प्रसंस्कृत की गई है, पुनः बेच दी गई है तो मण्डी फीस, यथास्थिति, प्रसंस्कृत उपज के बाजार मूल्य या कृषि उपज के मूल्य के पॉच गुने के हिसाब से उद्गृहीत तथा वसूल की जायेगी ।
धारा 19- ख मण्डी फीस के भुगतान में व्यतिक्रम,
धारा 19-ख की उपधारा (1)-
कोई भी व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अधीन मण्डी फीस का भुगतान करने के लिए दायी है , उसका भुगतान मण्डी समिति को अधिसूचित कृषि उपज के कय करने के या. उसे प्रसंस्करण के लिए मण्डी क्षेत्र में आयात करने के चौदह दिन के भीतर करेगा और उसमें व्यतिक्रम होने पर वह मण्डी फीस तथा उसके साथ उस पर 24 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से ब्याज का भुगतान करने का दायी होगा ।
धारा 19-ख की उपधारा (2)-
यदि कोई व्यक्ति उपधारा ( 1 ) के अधीन मण्डी फीस तथा ब्याज का भुगतान एक मास के भीतर करने में असफल रहता है तो ऐसे व्यक्ति को उस मण्डी क्षेत्र में या किसी अन्य मण्डी क्षेत्र में आगे का संव्यवहार करने के लिए अनुज्ञात नहीं किया जाएगा और ब्याज सहित मण्डी फीस भू- राजस्व की बकाया की भॉति वूसल की जाएगी और ऐसे व्यक्ति की अनुज्ञप्ति रद्द किए जाने के दायित्वाधीन होगी ।
धारा 20 की उपधारा (3)-
यदि किसी ऐसे अधिकारी या सेवक के पास यह सन्देह करने का कारण हो कि कोई व्यक्ति धारा 19 के अधीन अपने द्वारा शोध्य किसी मण्डी फीस के भगुतान का अपवंचन करने का प्रयत्न कर रहा है या यह कि किसी व्यक्ति ने मण्डी क्षेत्र में प्रवृत्त इस अधिनियम या नियमों के या उपविधियों के किन्ही भी उपबन्धों के उल्लंघन में किसी अधिसूचित कृषि उपज का कय किया है, तो वह लिखित में अभिलिखित किये जाने वाले कारणों से ऐसे व्यक्ति के ऐसे लेखे , रजिस्टर या दस्तावेजें, जैसे कि आवश्यक हों, अभिगृहित कर सकेगा तथा उनके लिए एक रसीद देगा और उन्हें तब तक रखे रहेगा जब तक कि वे उनकी परीक्षा के लिए या अभियोजन के लिए आवश्यक हों ।
धारा 23 की उपधारा (3)-
यदि उपधारा (1 ) के अधीन सशक्त किये गये किसी व्यक्ति के पास यह सन्देह करने का कारण हो कि कोई व्यक्ति धारा 19 के अधीन उससे शोध्य किसी मण्डी फीस के भुगतान से बचने का प्रयत्न कर रहा है या यह कि किसी व्यक्ति ने किसी अधिसूचित कृषि 630 ( 7)
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उपज का कय भंडारण इस अधिनियम के या नियमों के या मण्डी क्षेत्र में प्रवृत्त उपविधियों के उपबन्धों में से किसी उपबंधन के उल्लंघन में किया है, तो वह किसी भी ऐसे कारबार के स्थान, भाण्डागार, कार्यालय , स्थापन या गोदाम में, जिनके बारे में उस व्यक्ति के पास , जिसे कि उपधारा (1 ) के अधीन सशक्त किया गया है, यह विश्वास करने का कारण हो कि ऐसा व्यक्ति वहाँ अधिसूचित कृषि उपज का स्टॉक रखता है या ऐसे वक्त ने अधिसूचित कृषि उपज का स्टॉक तत्समय रख रखा है, प्रवेश कर सकेगा या उसकी तलाशी ले सकेगा ।
धारा 32 अनुज्ञप्तियाँ मंजूर करने की शक्ति (1 ) धारा 31 में विनिर्दिष्ट किया गया प्रत्येक व्यक्ति, जो मंडी क्षेत्र में कार्य करना चाहता हो, पंजीयन को मंजूरी या उसके नवीकरण के लिए मंडी समिति को ऐसी रीति में तथा ऐसी कालावधि के भीतर, जैसी कि उपविधियों द्वारा विहित की जाये , आवेदन करेगा ।
धारा 32-क. एक से अधिक मंडी क्षेत्रों के लिए पंजीयन (1 ) धारा 31 में विनिर्दिष्ट किया गया प्रत्येक व्यक्ति जो एक से अधिक मंडी क्षेत्रों में कार्य करना चाहता हो, पंजीयन की मंजूरी या उसके नवीनीकरण के लिए राज्य सरकार द्वारा यथा अधिसूचित ऐसे प्राधिकारी / अधिकारी को ऐसी रीति में तथा ऐसी कालावधि के भीतर और ऐसी शर्तों पर, जैसी की नियमों में विहित किया जाए , आवेदन करेगा ।
धारा 33-ख की उपधारा (1 ) के खण्ड (ख)-
इस प्रकार कय किए जाने की दशा में, केता, मंडी समिति को लागू दर पर मंडी शुल्क का भुगतान करने हेतु दायी होगाः
परन्तु संबंधित मंडी प्रांगण / उपमंडी प्रांगण में इस तरह की थोक खरीदी , एक माह में तीन से अधिक बार नहीं की जा सकेगी ।
धारा 37-क की उपधारा (5)-
संविदा खेती के अधीन उत्पादित कृषि उपज मंडी प्रांगण के बाहर केता को विकीत की जाएगी जैसी कि उप- विधियों द्वारा विहित किया जाए । ऐसी कृषि उपज के केता द्वारा मंडी फीस धारा-19 के अधीन विहित की गई दरों पर ऐसी रीति में देय होगी , जैसी कि उपविधियों द्वारा विहित की जाए ।
धारा 43 की उपधारा (1 )-
प्रत्येक मंडी समिति, बोर्ड को अपनी सकल प्राप्तियों के, जिसमें अनुज्ञप्ति फीस तथा मण्डी फीस समाविष्ट है , चालीस प्रतिशत से अनधिक इतने प्रतिशत का, जो कि राज्य सरकार , अधिसूचना द्वारा, समय- समय पर घोषित करे, प्रति तीन मास में भुगतान करेगी । इस प्रकार भुगतान की गई तथा संग्रह की गई रकम " छत्तीसगढ़ राज्य विपणन विकास निधि" कहलाएगी । 630(8)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 25 जुलाई 2024
धारा 43 की उपधारा (7)-
छत्तीसगढ़ राज्य विपणन विकास निधि में प्राप्त हुए समस्त धन किसी सहकारी बैंक में, जो बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 11 (1 ) के प्रावधानों का पालन कर रहे हैं अथवा डाक घर में अथवा राज्य शासन द्वारा विनिर्दिष्ट ऐसे बैंकों में से किसी में जमा किया जायेगा । धारा 44 के खण्ड (बारह)-
राज्य सरकार की पूर्वानुमति से / या निर्देश पर बोर्ड भिन्न-भिन्न कृषक कल्याणोन्मुखी गतिविधियों ( कृषक हित) के लिये अपनी सकल वार्षिक आय का अधिकतम पन्द्रह प्रतिशत तक राशि उपयोग कर सकेगा ।
धारा 69- मण्डी फीस से छूट देने की शक्ति,
धारा 69 की उपधारा (1 ) -
राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा और ऐसी शर्तों तथा निर्बन्धनों के, यदि कोई हों, जो कि ऐसी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किये जायें, अध्यधीन रहते हुए , किसी ऐसी कृषि उपज को, जो ऐसी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किये गये मण्डी क्षेत्र में विक्रय के हेतु लाई गई हो या कय की गई हो या बेची गई हो, ऐसी कालावधि के लिए , जो कि उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाय, मण्डी फीस के भुगतान से पूर्णतः या भागतः छूट दे सकेगी ।
दिनेश शर्मा सचिव
छत्तीसगढ़ विधान सभा संचालक, मुद्रण तथालेखन सामग्री , छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय , नवा रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित - 2024 .