वाणिज्य एवं उद्योग विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर
अटल नगर, दिनांक 4 नवम्बर 2024
अधिसूचना क्रमांक एफ 20-28/2024/11/6. - चूंकि, राज्य सरकार को यह समाधान हो गया है कि लोकहित में ऐसा करना आवश्यक है,
अतएव् राज्य शासन, एतद्द्वारा ''औद्योगिक विकास नीति 2024-30'' संलग्न पुस्तिका अनुसार दिनांक 01 नवम्बर, 2024 से 31 मार्च, 2030 तक के लिए प्रभावशील करता है।
यह अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू होगी।
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
रजत कुमार, सचिव.
औद्योगिक विकास नीति 2024-30
(1) दृष्टि (Vision)
''अमृतकाल : छत्तीसगढ़ विजन @ 2047'' - की परिकल्पना को साकार करने के लिए इस नीति के प्रावधानों को प्रस्तुत किया जा रहा है, इससे प्रदेश मेें औद्योगिक विकास नये आयाम स्थापित होंगे, ऐसी आशा के साथ राज्य के समग्र विकास के दृष्टिकोण से इस नीति के प्रावधान किये जा रहे हैं। (2) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 की समयावधि एवं समीक्षा :-
2. राज्य सरकार को यह अधिकार होगा कि वह औद्योगिक नीति 2024-30 के प्रावधानों की यथा आवश्यकता विकास की समीक्षा कर इस नीति के प्रावधानों को संशोधित/संवर्धित कर सकेगी।୧୩୬୦ (୧) (3) पृष्ठभूमि :-
(3.1) राज्य के औद्योगिक विकास को गति प्रदान करने के लिए राज्य में औद्योगिक नीतियों की परिकल्पना राज्य गठन के उपरान्त से लगातार की जा रही है। राज्य में अब तक पांच औद्योगिक नीतियां क्रमशः - 2001-06 (यह औद्योगिक नीति दिनांक 31 अक्टूबर, 2006 की मूलतः निर्धारित तिथि से पूर्व दिनांक 31 अक्टूबर, 2004 को समाप्त की गई), 2004-09, 2009-14, 2014-19 तथा 2019-24 लागू की गयी है।
(3.2) उपरोक्त औद्योगिक नीतियों को लागू किये जाने के साथ ही इन नीतियों में तत्कालीन आवश्यकताओं को तथा औद्योगिक विकास के निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए नीतियों में यथा आवश्यकता विभिन्न प्रकार के औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन यथा- ब्याज अनुदान, राज्य लागत पूंजी अनुदान (अधोसंरचना लागत पूंजी अनुदान), स्टाम्प शुल्क छूट, विद्युत शुल्क छूट, प्रवेश कर छूट, मूल्य संवर्धित कर प्रतिपूर्ति, मंडी शुल्क छूट, परियोजना लागत पूंजी अनुदान इत्यादि प्रदान की जाती रही है।
(3.3) नीतियों में और अधिक प्रभावी क्रियान्वयन तथा विविधता एवं विशेष क्षेत्र अथवा वर्ग को अधिक प्रोत्साहन प्रदान करने के उद्देश्य से नीति में समय-समय पर अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के लिए विशेष पैकेज, स्टार्ट-अप पैकेज, लघु एवं कुटीर उद्यम नीति, लाजिस्टिक पार्क नीति इत्यादि का भी समावेश किया गया था।
(3.4) इन नीतियों के अंतर्गत राज्य के युवाओं को वैकल्पिक रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए विशेष रूप से स्व-रोजगार मूलक योजनाओं का भी प्रावधान किया गया है। (3.5) उपरोक्त पृष्ठभूमि में तथा राज्य की भौगोलिक विशेषताओं, लागू नीतियों तथा वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दिनांक 01 नवम्बर, 2024 से आगामी नीति लागू किया जाना अपेक्षित है। इस पृष्ठभूमि में औद्योगिक विकास नीति 2024-30 की परिकल्पना की जा रही है।
------00------
୧୩୬୦ (୨)(4) प्रस्तावना (Introduction) ः-
(4.1) ''अमृतकाल : छत्तीसगढ़ विजन @ 2047'' - की परिकल्पना को साकार करने के लिए प्रदेश की आंतरिक क्षमताओं एवं प्राकृतिक संसाधनों का पूर्ण सदुपयोग करते हुए औद्योगिक दृष्टि से नवाचार तकनीकों के साथ तालमेल द्वारा समृद्व राष्ट्र्र की परिकल्पना को साकार करने के लिए ''औद्योगिक विकास नीति 2024-30'' को तैयार किया गया है। इस नीति का उद्धेश्य औद्योगिक दृष्टि से प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों की पहचान कर उन जिलों एवं विकासखंडों में अधिकतम आर्थिक एवं औद्योगिक विकास के माध्यम से अधोसंरचनात्मक व्यवस्था, प्रोत्साहन एवं सुविधायें उपलब्ध कराना है, ताकि उन क्षेत्रों में औद्योगिक विकास का माहौल निर्मित हो सके एवं अधिक से अधिक रोजगार के अवसरों का सृजन हो सके।
(4.2) राज्य में उपलब्ध कृषि उत्पादों, खनिज एवं अन्य संसाधन आधारित कोर सेक्टर उद्यमों को सभी विकासखंडों में औद्योगिक निवेश हेतु प्रोत्साहन देने के साथ-साथ संपूर्ण प्रदेश में फार्मा, टेक्सटाईल, नवीनतम सूचना प्रौद्यागिकी आधारित उद्यम, इंजीनियरिंग, रक्षा उत्पाद, खाद्य एवं कृषि जिंसों के उत्पादन पर आधारित खाद्य प्रसंस्करण उद्यम तथा लघु वनोपज, वनौषधि आधारित उद्यमों, स्थानीय संसाधन के स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण को प्राथमिकता देने के लिए प्रावधानों का समावेश किया गया है, ताकि जन सामान्य, राज्य के युवा, कृषकों एवं लघु वनोपज के संग्रहण एवं व्यवसाय से वनांचल में निवासरत् जन सामान्य की आय में वृद्धि हो सके। साथ ही राज्य की आवश्यकता को घ्यान में रखकर सेवा क्षेत्र को भी प्रोत्साहित करने के प्रावधान किये गये है।
(4.3) समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रकार के निवेश प्रोत्साहन के लिए स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता देने की अनिवार्यता एवं समाज के कमजोर वर्गों के लिए विशेष प्रावधान किये गये है, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति को इस नीति के माध्यम से उपलब्ध कराया जा सकेगा। राज्य की भौगोलिक स्थिति राष्ट्र के लगभग आधी आबादी से सीधे संपर्क उपलब्ध कराती है। राज्य के कुल भू-भाग का लगभग 44 प्रतिशत वन आच्छादित है। राज्य की सुरम्य, वनप्रांतर नदी-घाटियों, वादियों में लगभग सभी प्रकार खनिज, जैव विविध वनस्पति एवं आयुर्वेद के लिए आवश्यक सभी जड़ी-बूटियां उपलब्ध हैं।
(4.4) प्रदेश में उद्योेग स्थापना के लिए रूचि रखने वाले निवेशकों/उद्यमियों के संपर्क में आने वाले समस्त शासकीय विभागों की प्रक्रियाओं के सरलीकरण हेतु EASE OF DOING BUSINESS (EoDB) की योजना को अत्याधुनिक सूचना संचार क्रांति का उपयोग कर, विभिन्न प्रकार की अनुमति, सम्मति, सहमति, अनुज्ञा एवं पंजीकरण की प्रक्रियाओं को ऑनलाइन कर सरलीकरण किया गया है। सभी प्रक्रियाओं को निर्धारित समयावधि में निराकरण की व्यवस्था की गई है।୧୩୬୦ (୩) (4.5) राज्य के औद्योगिक जगत की आंतरिक शक्ति का राज्य के हित औचित्यपूर्ण उपयोग में करने के लिए परम्परागत रूप से राज्य में विद्यमान/स्थापित उद्यमों द्वारा अपने उद्यमों के किए जा रहे विस्तार/प्रतिस्थापन/शवलीकरण (DIVERSIFICATION) को अभिस्वीकृत करने एवं प्रोत्साहित करने का प्रावधान किया गया है। ऐसे उद्यम जो अंतरिक्ष, रक्षा, रेल, परमाणु विज्ञान के विकास में आवश्यक विभिन्न उत्पादों का उत्पादन कर रहे हैं उन्हें देश की आवश्यकता को ध्यान में रख कर ऐसे उद्यमों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने हेतु प्रावधान किये गये है। नवीन उद्यमों की स्थापना के साथ ही विद्यमान उद्यमों के विस्तार एवं शवलीकरण, प्रतिस्थापन, करने में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने का निर्णय उद्यमों की प्रतिनिधि संस्थाओं की सलाह से लिया गया है।
(4.6) लॉजिस्टिक सुविधाओं के विकास हेतु राज्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रख कर भंडारण क्षमता एवं क्षेत्रफल में वृद्वि करने के प्रयासों के अतिरिक्त, संबंधित उपकरणों तथा मशीनीकृत सुविधाओं के विस्तार के अलावा, उन्नत शीतगृहों, रिफर-व्हीकल, यातायात के साधन एवं प्रदेश में संपर्क की गति बढ़ाने एवं आवागमन को सुचारू बनाने हेतु भूतल परिवहन के माध्यम, सड़कों एवं रेल संपर्क को बढ़ाने तथा हवाई यात्रा नेटवर्क को विस्तार करने के लिए वर्तमान परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने हेतु राज्य सरकार कटिबद्ध है ताकि राज्य के प्रत्येक हिस्से में सुलभ आवागमन सुनिश्चित हो सकें।
(4.7) सर्वाधिक महत्वपूर्ण है राज्य की नीति निर्माण में आमजन की भागीदारी, अतः इस नीति की रूपरेखा के निर्धारण हेतु जन सामान्य, औद्योगिक एवं व्यापारिक संघों, शैक्षणिक संस्थानों, निवेश से संबंधित विभिन्न शासकीय विभागों के अधिकारियों, श्रम संघों के प्रतिनिधियों जैसे लगभग सभी हितधारकों (Stake Holders) से विस्तृत विचार-विमर्श किया गया है। इस नीति के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन से जहां एक ओर निवेशकों का राज्य सरकार पर विश्वास बढ़ेगा वहीं दूसरी ओर राज्य का सर्वांगीण एवं समन्वित विकास होगा एवं राष्ट्र के समग्र आय में राज्य का योगदान भी बढ़ेगा एवं छत्तीसगढ़ राज्य समृद्व हो सकेगा।
------00------
୧୩୬୦ (୪)(5) उद्देश्य (Objective) ः-
(5.1) ''अमृतकाल : छत्तीसगढ़ विजन @ 2047'' - इस औद्योगिक विकास नीति 2024-30 का उद्धेश्य यह है कि इसके माध्यम से राज्य के सभी विकासखण्डों, जिलों एवं संभाग के स्तर पर औद्योगिक विकास के लिए इस प्रकार नीति का क्रियान्वयन किया जाना है कि सभी क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों यथा उत्पादन इकाइयों, सेवा इकाइयों एवं इनसे जुड़े हुए अनुषांगिक व्यापार, व्यवसाय का सुनियोजित एवं दीर्धकालिक विकास हो सके। (5.2) राज्य के सभी जन-सामान्य एवं इच्छुक उद्यमियों को अनुकूल व सहयोगी प्रशासनिक वातावरण उपलब्ध कराना, जिससे राज्य में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना का मार्ग सुगम हो सके। राज्य की सिंगल विण्डो प्रणाली को देश की सिंगल विण्डो प्रणाली के साथ एकीकृत करते हुए राज्य को एक आकर्षक निवेश केन्द्र के रूप में विकसित किया जाने का लक्ष्य है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विभागों द्वारा दी जाने वाली अनुमति, सम्मति को ऑनलाइन पोर्टल प्रणाली के माध्यम से उपलब्ध कराये जाने के लिए प्रक्रिया को इस प्रकार से सुविधाजनक बनाये जाने की योजना है, जिससे उपरोक्त सभी प्रकार के अभिलेख सुनिश्चित न्यूनतम समयावधि में उद्यमी को उपलब्ध हो सके।
(5.3) राज्य में सभी विकासखण्डों को औद्योगिक क्षेत्रों के माध्यम से नेटवर्क के रूप में विकसित किया जाना है। जिन क्षेत्रों में अधिक संभावना होगी, उन क्षेत्रों में औद्योगिक क्षेत्रों/पार्क की स्थापना पहले करायी जायेगी। इस हेतु छत्तीसगढ़ शासन, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग द्वारा भारत सरकार एवं राज्य शासन की सहायता से एवं विभाग के उपक्रम सीएसआईडीसी के द्वारा वित्तीय संस्थाओं से यथा आवश्यकता ऋण प्राप्त कर या राज्य शासन से अंशदान की सहायता लेते हुये अथवा स्वयं की वित्तीय सहायता से पिछड़े क्षेत्रों का विकास कराया जायेगा, जिससे सुगमता के साथ औद्योगिक इकाइयों, सेवा इकाइयों एवं अन्य औद्योगिक अनुषांगिक गतिविधियों के लिए विकसित भूमि, भूखण्ड, औद्योगिक भवन, शेड फ्लैटेड फैक्टरी कॉम्प्लेक्स, ''प्लग-एंड-प्ले'' अधोसंरचना उपलब्ध करायी जा सकें। (5.4) राज्य में आवश्यकता के अनुसार नवीनतम तकनीक पर आधारित उद्यमों विकास के लिए विशेष प्रावधान किये जायेंगे, यथा- टेक्सटाईल, फार्मास्यूटिकल्स, फार्मा-मेडिकल डिवाइस, फूड प्रोसेसिंग-कृषि उत्पाद संरक्षण संरचना, स्टील सेक्टर के डाउन स्ट्रीम उत्पादों पर आधारित उद्यमों का विकास एवं रक्षा क्षेत्र, आईटी एवं इलेक्ट्रानिक्स हार्डवेयर निर्माण इकाइयों जैसे क्षेत्रों को अधिक औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान करते हुए राज्य में उपलब्ध नैसर्गिक संसाधनों के साथ-साथ कृषि एवं खाद्य उत्पाद, मानव संसाधन, प्राकृतिक संसाधन का राज्य में ही मूल्य संवर्धन करते हुए आर्थिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया जावेगा।୧୩୬୦ (୫) (5.5) कोर सेक्टर पर आधारित अन्य उत्पादों यथा स्टील, सीमेंट, थर्मल पॉवर, एल्युमिनियम, तथा —षि एवं खाद्य उत्पाद, वनोपज उत्पादों को स्थानीय स्तर पर प्रसंस्कृत किये जाने से जुड़े कार्य सम्मिलित है । इनको श्रृंखलाबद्ध तरीके से विकसित किये जाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही राज्य के प्रत्येक अंचल की अपनी स्वाभाविक विशेषताओं को स्थानीय निवासियों की उद्यमिता के साथ जोड़कर नवीन उत्पादों को विकसित किये जाने का उद्देश्य है।
(5.6) राज्य में उपलब्ध मानव संसाधन को कौशल विकास एवं अन्य प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार योग्य तैयार किये जाने पर विशेष प्रावधान किये गये है। इस हेतु राज्य में स्थापित होने वाली इकाईयों में कार्य करने वाले/नियोजित होने वाले कर्मचारियों को कौशल विकास प्रशिक्षण हेतु मानदेय/प्रशिक्षण वृत्ति प्रदान किये जाने का प्रावधान किया गया है । साथ ही भारत सरकार की ''उद्यमिता विकास संस्थान केन्द्र'' की स्थापना की जा रही है। (5.7) कोर सेक्टर उद्यमों के अतिरिक्त विभिन्न सेक्टरों में नये निवेश को आकर्षित करना एवं इसके माध्यम से भौगोलिक स्थिति का अधिकतम लाभ लेकर उपभोक्ता वस्तुओं का किफायती दरों पर उत्पादन करने का भी लक्ष्य रखा गया है।
(5.8) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक एवं रोबोटिक्स तकनीक के उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी के उद्यम एवं सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवा उद्यम तथा जैव प्रौद्योगिकी जैसे आधुनिक युग के उद्यम के क्षेत्र में अधिकाधिक निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा जा रहा है, जिससे राज्य में स्थापित उच्च स्तरीय शैक्षणिक संस्थाओं यथा - आईआईटी, ट्रिपल आईटी, एनआईटी, आईआईएम एवं बड़ी संख्या में विद्यमान इंजीनियरिंग कालेजों से शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं को राज्य में ही कार्य करने का अवसर प्राप्त हो सके। नीति का प्रारुप उपरोक्त सभी उद्देश्यों को लक्षित करते हुए तैयार किया गया है।
------00------
୧୩୬୦ (୬)(6) रणनीति (Strategy) :-
''अमृतकाल ः छत्तीसगढ़ विजन @ 2047'' - के लक्ष्य की प्राप्ति निम्नांकित अनुसार रणनीतिक प्रावधान किये गये है :-
(6.1) प्रदेश के वर्तमान औद्योगिक विकास को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश के विकासखण्डों का तीन श्रेणियों में यथा- समूह-1, समूह-2 एवं समूह-3 विकासखण्डों की श्रेणी में वर्गीकरण किया गया है।
(6.2) राज्य में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों में स्थानीय स्तर पर, राज्य में मूल्य संवर्धन किये जाने हेतु राज्य में ही इन संसाधनों का प्रसंस्करण किये जाने को प्रोत्साहित किये जाने की योजना है। इसी उद्देश्य से राज्य की जैव विविधता, वनोपज, हर्बल एवं खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों पर आधारित उद्यमों की उन्हीं जिलों में स्थापना को अधिक प्रोत्साहन की रणनीति है।
(6.3) राज्य में वर्तमान में जिस प्रकार के उद्यमों की राज्य में आवश्यकता महसूस होती है एवं जिन उत्पादों को राज्य के बाहर से बहुतायत में राज्य में लाया जाता है, ऐसे उत्पादों को राज्य में निर्मित किये जाने तथा ऐसी क्षमता विकसित किये जाने की योजना है ताकि छत्तीसगढ़ राज्य के भौगोलिक रूप से सात राज्यों से जुड़े राज्यों एवं देश विदेश को छत्तीसगढ़ में निर्मित उत्पादों का निर्यात हो सके।
(6.4) राज्य के आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान में कमजोर वर्ग, अनुसूचित जाति/जनजाति, महिला उद्यमियों, तृतीय लिंग एवं भूतपूर्व सैनिकों (जिनमें Paramilitary Force भीे शामिल हैं), सेवानिवृत्त अग्निवीर एवं नक्सल प्रभावितों, आत्मसमर्पित नक्सलियों की सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु अधिक प्रोत्साहन दिये जाने की योजना है, जिससे इन वर्गों का आर्थिक उत्थान भी हो सके।
(6.5) राज्य में उपलब्ध तकनीकी संस्थानों के माध्यम से शिक्षित/प्रशिक्षित हो रहे युवाओं को मानव संसाधन के रूप में राज्य में ही रोजगार प्राप्त हो सकें यह सुनिश्चित करने के लिए व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में राज्य के उद्यमों की आवश्यकतानुसार मानव संसाधन उपलब्ध कराने हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रमों को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में सम्मलित किया जायेगा। इस हेतु राज्य के उद्यमों से समन्वय स्थापित कर उनकी आवश्यकता के अनुरूप शैक्षणिक पाठ्यक्रमों को समन्वित करते हुए आवश्यकतानुसार विद्यमान एवं नये आईटीआई, पॉलिटेक्निक की स्थापना की जाकर कौशल उन्नयन एवं राज्य में ही रोजगार उपलब्ध कराने हेतु शासन के अन्य विभागों एवं राज्य में स्थापित उद्यमों के लिए उपयोगी बनाया जावेगा ।
(6.6) राज्य में नवोन्मेष को प्रोत्साहित करने के लिए स्टार्ट-अप उद्यमों एवं नवाचार हेतु अधिकाधिक इन्क्यूबेशन केन्द्रों की स्थापना हेतु प्रयास किये जायेंगे। तकनीकी शिक्षा संस्थानों को स्वयं का इन्क्यूबेटर स्थापित करने हेतु प्रोत्साहित किया जायेगा।୧୩୬୦ (୭) (6.7) राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों एवं सभी विकासखण्डों को राज्य एवं राष्ट्र के औद्योगिक मानचित्र में स्थान बनाने के लिए इन क्षेत्रों में विभाग के पास उपलब्ध भूमि पर आवश्यकता के अनुरूप नये औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना का कार्य किया जा रहा है। राज्य के सर्वांगीण विकास में उद्यम के योगदान के लिए ग्रामीण औद्योगिकीकरण को प्रोत्साहित करने हेतु ग्रामीण अंचल में औद्योगिक अधोसंरचनाओं का विकास किया जावेगा।
(6.8) इस ''औद्योगिक विकास नीति 2024-30'' के माध्यम से नवा रायपुर, अटल नगर में केवल कम प्रदूषणकारी थ्रस्ट एवं विशिष्ट श्रेणी के उद्योगों एवं सेवा उद्यमों को उद्यम स्थापित करने हेतु भूमि उपलब्ध कराई जायेगी।
------00------
୧୩୬୦ (୮)(7) बेहतर प्रशासनिक प्रबंधन
(Improved Administrative Management) ः-
''अमृतकाल : छत्तीसगढ़ विजन @ 2047'' - के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य के प्रशासनिक प्रबंधन में निम्नानुसार कार्यवाही की जायेगी :-
(7.1) राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड को और अधिक सशक्त बनाकर सिंगल विण्डो प्रणाली को सुदृढ़ करते हुए नेशनल सिंगल विण्डो प्रणाली के साथ जोड़ा जायेगा। इस हेतु राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र एवं राज्य की सूचना प्रोद्यौगिकी संस्था ''चिप्स'' के माध्यम से इंटीग्रेशन का कार्य आरंभ कर दिया गया है।
(7.2) वृहद एवं मध्यम परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित विभागों को सिंगल विण्डो प्रणाली के माध्यम से औद्योगिक निवेश हेतु आवश्यक स्वीकृतियों, अनुमति एवं सहमति (अनुमोदन) उपलब्ध कराये जाने की प्रक्रिया को समय-सीमा में उपलब्ध कराने के लिए नीति/नियमों में आवश्यक प्रावधान किये जा रहे है।
(7.3) एकीकृत आवेदन पत्रों तथा ''सिंगल साईन-ऑन'' व्यवस्था के माध्यम से उद्यमों के लिए आवेदन किये जाने की प्रक्रिया को आसान बनाया जायेगा। यथा आवश्यकता सरलीकरण एवं आवश्यक दस्तावेजों के स्व-प्रमाणीकरण को मान्य किया जावेगा।
(7.4) उद्यम स्थापना के लिए आवश्यक प्रत्येक अनुमति, सहमति, स्वीकृतियों के लिए निर्धारित समय-सीमा में ही निष्पादन हेतु राज्य स्तर पर विभाग प्रमुख द्वारा एवं प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में नियमित अंतराल में समीक्षा की व्यवस्था बनाई गई है। यथा आवश्यकता उद्योग विभाग की मैदानी संरचना को पुर्नसंयोजित किया जावेगा। (7.5) निवेश के प्रस्तावों के क्रियान्वयन सुनिश्चित कराने के लिए राज्य स्तर पर नियमित अंतराल में समीक्षा की जावेगी। नवीन उद्यमों की स्थापना के अतिरिक्त स्थापित कार्यरत् उद्यमों को निरंतर उत्पादन बनाए रखने में आने वाली समस्याओं के निराकरण हेतु विभागीय वेबसाइट पर पृथक से व्यवस्था की जा रही है।
(7.6) प्रदेश में उद्यमियों एवं युवाओं को प्रशिक्षण हेतु निरंतर कार्यशालाओं एवं अल्पकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
(7.7) प्रदेश के सूक्ष्म, लघु उद्यमों के उत्पादों के विपणन में राज्य सरकार के विभागों में लगने वाले उत्पादों के निर्माण एवं विपणन हेतु राज्य सरकार के विभागों में क्रय नियमों को प्रभावी रूप से क्रियान्वयन की व्यवस्था की जायेगी।
------00------
୧୩୬୦ (୯)(8) अधोसंरचना विकास एवं औद्योगिक भूमि प्रबंधन :-
''अमृतकाल : छत्तीसगढ़ विजन @ 2047'' - के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन तथा औद्योगिक अधोसंरचना के विकास के संबंध में निम्नांकित बिंदुओं पर कार्यवाही की जायेगी :-
(8.1) राज्य में के सर्वांगीण विकास के लिए प्रदेश के विकासखण्डों में आवश्यकता के अनुरूप स्थानीय युवाओं को रोजगार प्रदान करने के उद्देश्य से संभावित मांग को ध्यान में रखते हुए औद्योगिक क्षेत्र/पार्क की स्थापना की जायेगी।
(8.2) वर्तमान में राज्य में लगभग 56 औद्योगिक क्षेत्र स्थापित हैं। राज्य में नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना के लिए विभाग के अधीन उपलब्ध भूमि पर आवश्यकता के अनुरूप नये औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना करायी जायेगी एवं भूमि बैंक हेतु सीएसआईडीसी को उचित दरों पर निजी भूमि क्रय करने हेतु अधिक अधिकार सम्पन्न बनाने की व्यवस्था का निर्माण किया जावेगा। (8.3) राज्य में इण्डस्ट्रीयल कॉरीडोर की स्थापना कराने हेतु प्रयास किये जायेंगे। इस हेतु ''राष्ट्रीय इण्डस्ट्रीयल कॉरीडोर विकास निगम'' एवं राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं के साथ अनुबंध कर संभावित इण्डस्ट्रीयल कॉरीडोर यथा - कोरबा-बिलासपुर-रायपुर-नागपुर अथवा कोरबा-बिलासपुर-रायपुर-विशाखापट्टनम मार्ग में इण्डस्ट्रीयल कॉरीडोर के विकास हेतु की सहायता ली जावेगी।
(8.4) राज्य में निजी निवेशकों के माध्यम से निजी औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए इस नीति में विशेष प्रावधान किये गये है।
(8.5) आवश्यकतानुसार पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से औद्योगिक क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, Water & Effluent Treatment plant की PPP मॉडल पर स्थापना की व्यवस्था की जावेगी। औद्योगिक क्षेत्रों में वृक्षारोपण अनिवार्य किया जाकर समूह आधारित उद्योगोें के लिए PPP मॉडल में Common Facility Centre की स्थापना का प्रावधान किया जायेगा। इस हेतु निजी क्षेत्र को Common Facility Centre की स्थापना हेतु विशेष प्रोत्साहन के प्रावधान लागू किये जायेगें।
(8.6) प्रदेश में भण्डारण क्षमता को बढ़ाने हेतु लॉजिस्टिक पार्क के विकास हेतु आबंटित की जाने वाली भूमि की दरों का युक्तियुक्तकरण सुविधाजनक बनाया जावेगा।
(8.7) औद्योगिक क्षेत्रों में सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए CSIDC द्वारा बहुमंजिला औद्योगिक भवन एवं शेड का निर्माण किया जायेगा ।
(8.8) नये औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना के लिए निजी भूमि के अधिग्रहण हेतु आपसी सहमति से भूमि क्रय की कार्यवाही को प्रभावी किया जायेगा, साथ ही यथा आवश्यकता ''लैण्ड पूलिंग की व्यवस्था'' को अपनाया जायेगा।୧୩୬୦ (୧୦) (8.9) नवा रायपुर में वर्तमान में स्थापित इलेक्टानिक मेन्यूफेक्चरिंग क्लस्टर - ईएमसी के अतिरिक्त फार्मास्युटिकल पार्क एवं अन्य सेेक्टर संबंधी औद्योगिक पार्को की स्थापना के प्रयास किये जायेंगे ।
(8.10) राज्य में औद्योगिक पार्को एवं लैण्ड बैंकों के स्थापना के लिये आवश्यकता अनुसार भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु औद्योगिक पार्क एवं औद्योगिक लैण्ड बैंक स्थापना नीति बनाई जायेगी। इस नीति के तहत शासकीय भूमि के अतिरिक्त निजी भूमि को भी आपसी सहमति से क्रय/भूमि अधिग्रहण/लैण्ड पूलिंग इत्यादी प्रक्रियों के माध्यम से प्राप्त किया जा सकेगा।
------00------
୧୩୬୦ (୧୧)(9) विविध सुविधाएं :-
''अमृतकाल : छत्तीसगढ़ विजन @ 2047'' - के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कई अन्य बिंदुओं पर कार्यवाही की आवश्यकता होगी, ताकि राज्य में उद्यमों के समक्ष उत्पन्न होने वाली अन्य चुनौतियों का भी सामना करने में राज्य के विद्यमान उद्यम एवं आगामी स्थापित होने वाले स्वयं सक्षम हो सकें इस हेतु आगामी बिंदुओं पर सूक्ष्म, लघु, मघ्यम एवं वृहद उद्यमों के विकास के लिए औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन के प्रावधान विभिन्न वर्ग, श्रेणियों एवं विशिष्ट प्रकार के उद्यमों में विभाजित करते हुए सुव्यवस्थित तरीके से विविध प्रावधान किये जा रहे हैं। इसी अनुक्रम में आवश्यक प्रशासनिक दक्षता की वृद्वि हेतु गैर वित्तीय सुविधाएं भी इस नीति में प्रवाधानित की गई हैं।
(10) विपणन सहायता :-
10.1 राज्य के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इकाइयों से खरीदी हेतु राज्य में स्थित केन्द्र शासन के सार्वजनिक उपक्रमों में प्रभावशील MSME Public Procurement Policy के सफल क्रियान्वयन हेतु सभी सार्वजनिक उपक्रमों के साथ संवाद करके उनके द्वारा उपक्रम के संचालन के लिए क्रय की जाने वाली सामग्रियों को सूचीबद्व करके राज्य के उद्यमों के माध्यम से इन सामग्रियों की आपूर्ति के लिए राज्य में नई इकाईयों की स्थापना हेतु प्रयास किये जावेंगे। इस हेतु केन्द्र शासन के सार्वजनिक उपक्रमों के स्थापना वाले जिलाें में जिला प्रशासन एवं संबंधित जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र के माध्यम से नियमित अंतराल में सभी संबंधित पक्षों के साथ क्रय होने वाली सामग्रियों एवं उनके प्रदायकर्ताओं के विवरण प्राप्त करके स्थानीय स्तर, राज्य स्तर पर ऐसी सामग्रियों की राज्य से आपूर्ति हेतु प्रयास किये जावेंगे।
10.2 राज्य के सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों से खरीदी के मामलों में विलंब से भुगतान के प्रकरणों के समाधान हेतु MSE Facilitation Council को प्राप्त प्रकरणों केे समयबद्ध निराकरण के लिए आवश्यक कार्यवाही की जायेगी।
10.3 राज्य के उद्यमों को उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने हेतु उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले व्यापारिक मेलों, प्रदर्शनी में Participation हेतु प्रावधान किया जाएगा।
10.4 स्टार्ट अप योजना एवं राज्य के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इकाइयों के अंतर्गत स्थापित होने वाली राज्य की इकाईयों से खरीदी हेतु भारत सरकार द्वारा संचालित GeM पोर्टल एवं भण्डार क्रय नियम के माध्यम से शासकीय खरीदी में प्रोत्साहित करने का प्रावधान किया जावेगा।୧୩୬୦ (୧୨) (11) निर्यात प्रोत्साहन (Export Facilitation) :-
11.1 राज्य से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए रायपुर में विदेश व्यापार सहायता केन्द्र की स्थापना आईआईएफटी, कोलकाता जैसी राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं के सहयोग से की जायेगी। इस केन्द्र के माध्यम से राज्य से निर्यात व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नये उत्पादों का चयन, निर्यात के लिए किये जाने वाले औपचारिक कार्यों के लिए सहायता केन्द्र के माध्यम से निर्यातकों को मदद की जायेगी।
11.2 नवा रायपुर में स्थित ड्राईपोर्ट/कंटेनर डिपो को प्रभावी कार्यवाही करने के लिए विभिन्न संस्थाओं/भारत सरकार के विभागों के साथ बेहतर समन्वय कर निर्यात व्यापार को बढ़ावा देने के प्रयास किये जायेंगे।
11.3 राज्य की औद्योगिक इकाइयों को उनके उत्पादों को प्रतिस्पर्धा में लाने के लिए निर्यात किए जाने वाले उत्पादों के इकाई स्थल से बंदरगाह तक परिवहन लागत पर अनुदान का प्रावधान किया गया है साथ ही राज्य में निर्यात हेतु उत्पादों का चयन एवं उनकी गुणवत्ता निर्धारण हेतु आवश्यक कदम उठाये जा रहे है। । 11.4 निर्यात व्यापार को दृष्टिगत रखकर राज्य में निर्यात से जुड़े हुए व्यापारियों, संस्थाओं आदि के मध्य Buyer-Seller -Meet (क्रेता-विक्रेता सम्मेलन) का आयोजन किया जायेगा।
------00------
୧୩୬୦ (୧୩)(12) औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन हेतु प्रावधान - (Provisions for Industrial Investment Incentives) :-
(12.1) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के उद्ेश्यों की पूर्ति के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2020 में ''एमएसएमईडी एक्ट - 2006'' में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की परिभाषा में किये गये संशोधन को अपनाते हुए राज्य में संतुलित औद्योगिक विकास हेतु सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी तथा वृहद उद्यमों की श्रेणी की प्रकृति, आवश्यकता तथा श्रेणी विशेष के लिए पृथक-पृथक प्रकार एवं मात्रा में आवश्यकता पूर्ति हेतु ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' प्रदान करने के लिए प्रावधान किए गए हैं। औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की अधिकतम सीमा में शासन द्वारा दिए जाने वाले अनुदान एवं प्रतिपूर्ति को समावेशित किया जावेगा। साथ ही छूट के प्रकरणों की राशि आर्थिक निवेश प्रोत्साहन के अतिरिक्त होगी। नीति में निम्नानुसार पृथक-पृथक अध्याय रखे जा रहे हैं :-
| अघ्याय | विवरण |
| (अ) | सूक्ष्म, लघु, एवं मध्यम उद्यम के लिए प्रावधान |
| (ब) | वृहद उद्यमो के लिए प्रावधान ं |
| (स) | विशिष्ट श्रेणी के उद्यमो के लिए विशेष प्रावधान ं |
| (द) | विशेष वर्गों/समूहों के उद्यमों के लिए विशेष प्रावधान |
(12.2) (अ) नीति के उद्ेश्यों की पूर्ति के लिए राज्य में ''नवीन उद्यमों की स्थापना, विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण (डायवर्सिफिकेशन)/प्रतिस्थापन एवं आधुनिकीकरण'' के लिए ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' प्रदान किये जावेंगे। (ब) राज्य के सभी क्षेत्रों में सर्वागींण औद्योगिक विकास के लिए नीति में राज्य के सभी जिलों के विकासखंडों को तीन श्रेणियों यथा - समूह (एक), (दो) एवं (तीन) में विभजित करके दिये जाने वाले औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की मात्रा का निर्धारण किया जा रहा है।
(12.3) (अ) नीति के माघ्यम से सभी प्रकार के उद्यमों का विकास हो सके इस विचार को ध्यान में रख कर राज्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रख कर ''सामान्य एवं थ्रस्ट उद्यमों की श्रेणी'' में विभाजित किया गया है।
(ब) राज्य के वर्तमान औद्योगिक उत्पादों को और अधिक सशक्त करने एवं इन उत्पादों के उत्पादन में राज्य को अग्रणी बनानें के लिए कोर सेक्टर के उत्पादों यथा - स्टील कोर सेक्टर एवं स्टील को छोडकर अन्य कोर सेक्टर हेतु यथा - सीमेंट, ताप विद्युत एवं एल्यूमिनियम आदि के लिए पृथक पृथक प्रावधान किये गये है। (स) राज्य में वर्तमान आवश्यकताओं एवं राज्य में हो रही खपत की स्थिति को ध्यान में रखकर ''विशिष्ट उत्पाद उद्योग/सेक्टर यथा - फॉर्मास्युटिकल, टेक्सटाईल, फूड प्रोसेसिंग, कृषि उत्पाद प्रसंस्करण, एनटीएफपी उत्पाद प्रसंस्करण, इलेक्ट्रिकल एवं୧୩୬୦ (୧୪) इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद, आई टी/आईटी, एवं आईटीईएस'' आदि के लिए पृथक आर्कषक औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की नीति को अपनाया जा रहा है जिससे इन उत्पाद/उद्योग/सेक्टर विशेष के उद्यमों में निवेश को राज्य में आकर्षित किया जा सके। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि इन सेक्टरों में प्रथम पांच एंकर निवेशकों को अतिरिक्त निवेश प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।
(12.4) (अ) उपरोक्त प्रावधानित ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' के अतिरिक्त राज्य के महिला उद्यमी, भारतीय सेना से सेवानिवृत्त राज्य के सैनिक, सेवानिवृत राज्य के अग्निवीर सैनिक एवं नक्सलवाद से प्रभावित व्यक्ति/परिवार एवं निःशक्तजनों, अप्रवासी भारतीय, प्रत्यक्ष विदेशी निवेशकों (एफ.डी.आई), निर्यातक उद्यमों तथा विदेशी तकनीक के साथ परियोजनाएं स्थापित को सामान्य सेक्टर के उद्यमों को उपलब्ध कराये जा रहे मान्य अनुदान से 10 प्रतिशत अधिक अनुदान एवं अधिकतम सीमा भी 10 प्रतिशत अधिक रहेगी तथा छूट से संबंधित प्रकरणों में एक वर्ष अधिक की छूट दी जावेगी।
(ब) ंिकंतु यदि कोई निवेशक एक से अधिक श्रेणी अथवा अन्य किसी प्रावधान में अतिरिक्त लाभ हेतु पात्र होता है तो उसे इस नीति में प्रावधानित किसी एक ही श्रेणी के अतिरिक्त लाभ की पा़त्रता होगी।
(12.5) उपरोक्त बिंदुओं में दर्शित अनुसार पात्र उद्यमों को सामान्य, थ्रस्ट एवं अन्य श्रेणी के उद्यमों को विभिन्न निवेश प्रोत्साहन अनुदान, छूट, रियायतें दी जावेंगी :-
| क्रमांक सुविधा का विवरण | |
| 1 | नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) प्रतिपूर्ति |
| 2 | स्थायी पूंजी लागत अनुदान |
| 3 | ब्याज अनुदान |
| 4 | विद्युत शुल्क छूट |
| 5 | स्टाम्प शुल्क से छूट |
| 6 | मंडी शुल्क व्यय से छूट (केवल एमएसएमई एवं कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोपज प्रसंस्करण एवं बॉयो एथेनॉल/कम्प्रेस्ड बॉयो गैस सेक्टर के वृहद उद्यम हेतु) |
| 7 | भू-उपयोग में परिवर्तन शुल्क में छूट |
| 8 | औद्योगिक क्षेत्रों से बाहर (भूमि बैंक) भू-आबंटन हेतु सीएसआईडीसी को देय सेवा शुल्क में रियायत |
| 9 | परियोजना प्रतिवेदन अनुदान |
| 10 | गुणवत्ता प्रमाणीकरण अनुदान |
| 11 | तकनीकी पेटेन्ट अनुदान |
| 12 | प्रौद्योगिकी क्रय अनुदान |
| क्रमांक सुविधा का विवरण | |
| 13 | मार्जिन मनी अनुदान |
| 14 | दिव्यांग (निःशक्त), सेवानिवृत्त अग्निवीर व आत्मसमर्पित नक्सली व्यक्ति रोजगार अनुदान |
| 15 | इनवायरमेंट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट अनुदान (पर्यावरणीय प्रोजेक्ट अनुदान) |
| 16 | जल एवं उर्जा दक्षता (एनर्जी ऑडिट) व्यय प्रतिपूर्ति |
| 17 | परिवहन अनुदान (निर्यातक उद्योगाें हेतु) |
| 18 | औद्योगिक क्षेत्रों/औद्योगिक पार्कों में भू-आबंटन पर भू-प्रीमियम में छूट/रियायत'' |
| 19 | नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के साथ सूचीबद्ध होने के लिए प्रोत्साहन के रूप में व्यय प्रतिपूर्ति की जायेगी। |
| 20 | एम.एस..एम.ई. थ्रस्ट सेक्टर एवं सूचना प्रौद्योगिकी उद्यमों हेतु कर्मचारियों के प्रशिक्षण हेतु किये गये व्यय की प्रतिपूर्ति |
| 21 | अनुसूचित जनजाति/जाति वर्ग के उद्यमियों को औद्योगिक क्षेत्रों मे भू-आबंटन पर ं भू-प्रीमियम में छूट/रियायत (सूक्ष्म, लघु, मध्यम श्रेणी के उद्योगों/उद्यमों के लिए) |
| 22 | पंजीयन शुल्क व्यय प्रतिपूर्ति |
| औद्योगिक नीति, 2024-30 के अंतर्गत प्रावधानित पैकेज :- | |
| 23 | एमएसएमई सेवा श्रेणी उद्यमों को उपलब्ध औद्यागिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज |
| 24 | सेवा श्रेणी के वृहद उद्यम हेतु औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज |
| 25 | सामान्य श्रेणी एवं थ्रस्ट सेक्टर के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के उद्यमो हेतु औद्योगिक ं निवेश प्रोत्साहन पैकेज |
| 26 | सामान्य श्रेणी एवं थ्रस्ट सेक्टर के वृहद उद्यमों हेतु औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज |
| 27 | कोर (स्टील) सेक्टर के वृहद उद्यम हेतु औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज |
| 28 | कोर सेक्टर के अन्य वृहद उद्यम (स्टील छोड़कर) एवं सौर उर्जा संयंत्र के लघु, मध्यम एवं वृहद उर्जा संयंत्र हेतु औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज |
| 29 | राज्य मे फार्मास्युटिकल सेक्टर के वृहद उद्यम हेतु औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज ं |
| 30 | टेक्सटाईल सेक्टर के वृहद उद्यम हेतु औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज |
| 31 | कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोंपज प्रसंस्करण एवं ग्रीन हाइड्रोजन/कम्प्रेस्ड बॉयो गैस सेक्टर के वृहद उद्यम हेतु औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज |
| 32 | इलेिक्ट्रकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की इकाई के वृहद उद्यम हेतु औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज |
| 33 | आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई), रोबोटिक्स एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी.यू) से संबंधित क्षेत्र के वृहद उद्यम हेतु औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज |
| 34 | सूचना प्रोद्यौगिकी (आई.टी.) से संबंधित क्षेत्र के वृहद उद्यम हेतु औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज |
| क्रमांक सुविधा का विवरण | |
| 35 | आई.टी. इनेबल्ड सर्विसेज (आई.टी.ई.एस.)/डेटा सेंटर से संबंधित क्षेत्र के वृहद उद्यम हेतु औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज |
| 36 | अनुसूचित जनजाति/जाति वर्ग हेतु विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज |
| 37 | छत्तीसगढ़ राज्य स्टार्ट अप पैकेज |
| 38 | छत्तीसगढ़ राज्य लॉजिस्टिक्स पैकेज |
| 39 | छत्तीसगढ़ राज्य बंद एवं बीमार उद्योगो हेतु विशेष प्रोत्साहन पैकेज |
(12.6) राज्य में राइस मिल/पारबाइलिंग इकाईयों के वर्तमान घनत्व को ध्यान में रखकर इन्हें नवीन उद्यम की स्थापना एवं विस्तार/शवलीकरण /प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के अंतर्गत घोषित सुविधाओं की केवल समूह-3 के विकासखंडों में स्थापना पश्चात सामान्य उद्यम श्रेणी हेतु घोषित औद्योगिक निवेश प्रोत्साहनों की पात्रता होगी।
(12.7) इस नीति की अवधि में औद्योगिक परियोजनाओं/भूमि बैंक/औद्योगिक क्षेत्रों/औद्योगिक पार्कों/लैंड पूलिंग के अंर्तगत ली जाने वाली भूमि/भवन के भू-अर्जन से प्रभावित होने वाले कृषकों/भूमि स्वामियों/भू-विस्थापितों से इस प्रावधान के अंर्तगत ली जाने वाली भूमि/भवन के भू-अर्जन से प्रभावित होने वाले कृषकों/भूमि स्वामियों/भू-विस्थापितों हेतु एवं भूमि/भवन क्रय के अन्य मामलों में निम्नानुसार स्टॉम्प ड्यूटी छूट प्रदान की जावेगी :-
(1) औद्योगिक क्षेत्रों/औद्योगिक प्रयोजन हेतु भू-खण्डों/औद्योगिक प्रयोजन तथा भूमि बैंक हेतु क्रय की गई/अधिग्रहित परिसंपत्तियों, भूमि/भवन से प्रभावित भू-स्वामियों द्वारा भू-अर्जन क्षतिपूर्ति मुआवजा से प्राप्त होने वाली राशि की सीमा तक भू-अर्जन क्षतिपूर्ति मुआवजा राशि प्राप्ति के 02 वर्ष के भीतर कृषि भूमि/भवन क्रय करने पर, (माइनिंग लीज की भूमि को छोड़कर) लगने वाले स्टाम्प शुल्क में पूर्ण छूट दी जायेगी । (2) भारत सरकार/राज्य शासन द्वारा स्वीकृत/अनुमोदित निजी निवेशकों द्वारा स्थापित किये जाने वाले औद्योगिक क्षेत्र/औद्योगिक पार्क की स्थापना हेतु क्रय की गई/अधिग्रहित परिसंपत्तियों, भूमि/भवन एवं इनमें स्थापित होने वाले उद्यम हेतु क्रय/पट्टे पर ली जाने वाली परिसंपत्तियों, भूमि/भवन के क्रय पर लगने वाले स्टाम्प शुल्क में पूर्ण छूट दी जायेगी ।
(3) राज्य में औद्योगिक क्षेत्र/औद्योगिक भू-खण्ड/औद्योगिक प्रयोजनों/भूमि बैंक एवं अधोसंरचना निर्माण हेतु छत्तीसगढ़ स्टेट इण्डस्ट्रियल डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन लि0 द्वारा क्रय/लीज पर ली जाने वाली परिसंपत्तियों, भूमि/भवन के क्रय पर लगने वाले स्टाम्प शुल्क में पूर्ण छूट दी जायेगी ।
(12.8) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अन्तर्गत राज्य में औद्योगिक/वाणिज्यिक भूमि पर कोल्ड स्टोरेज/लॉजिस्टिक हब/वेयर हाउस (गोदाम) उद्यम की स्थापना पर इस नीति୧୩୬୦ (୧୭) में अन्यथा प्रावधानित पात्रतानुसार अनुदान, छूट एवं रियायतें की ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' सुविधाएं प्राप्त होंगी।
(12.9) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अन्तर्गत सूचना प्रौद्योगिकी तथा सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाएं सहित जिन सेवा इकाईयां को इस नीति के अंतर्गत आर्थिक निवेश प्रोत्साहन की पात्रता है, ऐसी इकाईयों की स्थापना वाणिज्यिक/औद्योगिक व्यपवर्तित भूमि अथवा संबंधित सेवा हेतु व्यपवर्तित भूमि पर स्थापित हो सकेंगी।
(12.10) राज्य में "फिल्म उद्यमों" के विकास हेतु नवीन फिल्म निर्माण स्टूडियो, एडिटिंग स्टूडियो, साउन्ड रिकार्डिंग स्टूडियो की स्थापना एवं फिल्म प्रोसेसिंग से संबंधित गतिविधियों पर औद्योगिक नीति में प्रावधानित अनुसार किये गये निवेश की मात्रा के अनुसार सामान्य श्रेणी के उद्यम हेतु प्रावधानित अनुदान, छूट एवं रियायतें के बराबर पात्रतानुसार ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' सुविधाएं प्राप्त होंगी। ऐसी इकाईयाें की स्थापना वाणिज्यिक/औद्योगिक व्यपवर्तित भूमि अथवा संबंधित सेवा हेतु व्यपवर्तित भूमि पर स्थापित हो सकेंगी।
(12.11) राज्य के युवाओं में स्व-उद्यमों के अवसरों में वृद्धि हेतु इस नीति के अन्तर्गत नवीन ''उद्यम क्रांति योजना'' लागू की जावेगी, जिसमें राज्य के बेरोजगार युवाओं को उद्यम/सेवा उद्यम/व्यवसाय के लिए वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जावेगा एवं राज्य की ओर से अनुदान एवं ब्याज अनुदान प्रदान कराया जावेगा। (12.12) राज्य में सेवा उद्यमों के माध्यम से रोजगार के अवसरों में वृद्वि की जावेगी। इस हेतु चिन्हिांकित सेवा उद्यमों में होने वाले निवेश को इस नीति के अंर्तगत उद्यमों हेतु निर्धारित ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' सुविधाएं पात्रतानुसार प्रदान की जावेंगी।
(12.13) राज्य में निजी क्षेत्र के द्वारा औद्योगिक क्षेत्रों/औद्योगिक पार्कों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जावेगा। इस हेतु निम्नानुसार विशेष प्रावधान किये जावेंगे :-
(अ) राज्य में निजी औद्योगिक क्षेत्रों/औद्योगिक पार्कों की स्थापना को प्रोत्साहित करने हेतु न्यूनतम 15 एकड़ भूमि में औद्योगिक क्षेत्र/औद्योगिक पार्क स्थापित करने पर अधोसंरचना लागत (भूमि को छोड़कर) का 30 प्रतिशत अधिकतम रू. 04 करोड़ का अनुदान तथा स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट, भूमि के पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति एवं भू-पुनर्निधारण कर (डायवर्सन शुल्क) में 100 प्रतिशत की छूट दी जावेगी। इन निजी औद्योगिक क्षेत्रों/औद्योगिक पार्कों के विकासकर्ता स्वयं के द्वारा निर्धारित नियम व शर्ताें के अनुसार उद्यमों को भूमि का आबंटन कर सकेंगे, किंतु इन क्षेत्रों की स्थापना/विकास के लिए उन्हें समस्त शासकीय नियम व शर्ताें का पालन करना होगा।
(ब) कंडिका (अ) में दर्शित अनुसार मूल क्षेत्रों के पश्चात प्रत्येक अतिरिक्त 15 एकड़ भूमि पर किये जाने वाले विस्तार पर अधोसंरचना लागत (भूमि को छोड़कर) का 30 प्रतिशत अधिकतम रू. 3 करोड तक अनुदान तथा स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट, भूमि के पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति एवं भू-पुनर्निधारण कर (डायवर्सन शुल्क) में 100୧୩୬୦ (୧୮) प्रतिशत की छूट दी जावेगी तथा इन औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित होने वाले उद्यमों को भी औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्राप्त होंगे ।
(स) उपरोक्तानुसार स्थापित होने वाले सभी निजी औद्योगिक क्षेत्रों/औद्योगिक पार्कों में स्थापित होने वाले उद्यमों को इस नीति के अंर्तगत घोषित पात्र इकाईयों को ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' प्राप्त होंगे। इन निजी क्षेत्र में स्थापित होने वाले नवीन उद्यमों को अनुदान से संबंधित प्रकरणों में विकासखंड की श्रेणी के आधार देय अनुदान से 10 प्रतिशत अधिक अनुदान एवं अधिकतम सीमा भी 10 प्रतिशत अधिक होगी जोकि संबंधित अनुदान योजना की मान्य अधिकतम योजना के अंर्तगत स्वीकृति योग्य होगी। छूट से संबंधित प्रकरणों में छूट की अवधि 1 वर्ष अधिक स्वीकृति योग्य होगी।
(12.14) (अ) जिन सूक्ष्म, लघु, मध्यम, वृृहद, मेगा अथवा अल्ट््रामेगा उद्यमों के द्वारा औद्योगिक नीति 2019-24 के अंर्तगत उद्यम की स्थापना के लिए कार्यवाही आरंभ की जा चुकी हो एवं औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में परिभाषित ''प्रभावी कदम'' के चारों चरण दिनांक 01/11/2024 से पूर्व पूर्ण किये जा चुके हों, ऐसे उद्यमों को यह अवसर उपलब्ध होगा कि वे औद्योगिक नीति 2019-24 के औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन का विकल्प चुन सकेंगे। एक बार लिया गया विकल्प अपरिवर्तनीय होगा।
(ब) विकल्प चयन न किये जाने की स्थिति में इकाई जिस नीति के कार्यकाल में इकाई उत्पादन में आएगी, उस तिथि को लागू नीति का लाभ लिए जाने की पात्रता होगी। पूर्व से स्थापनारत उद्यमों द्वारा औद्योगिक विकास नीति 2024-30 का विकल्प लिये जाने की स्थिति में अथवा कोई विकल्प न लिए जाने की स्थिति में इकाई को औद्योगिक नीति 2019-24 के अंर्तगत प्राप्त किये गये सुविधाओं के समतुल्य राशि को वापस किया जाना अनिवार्य होगा।
(स) विकल्प चयन के लिए इस नीति के लागू होने के तिथि के पश्चात् अधिकतम 90 दिवस में विकल्प चयन की सूचना संबंधित जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र/उद्योग संचालनालय, रायपुर (छत्तीसगढ़) में जमा कराया जाना अनिवार्य होगा।
(द) औद्योगिक नीति 2019-24 का विकल्प लेने की स्थिति में उद्यम को उद्यम आकांक्षा/आई.ई.एम. जारी होने की तिथि से सूक्ष्म एवं लघु उद्यम के मामले में दो वर्ष, मध्यम उद्यम के मामले में तीन वर्ष, वृहद उद्यम के मामने में चार वर्ष एवं अन्य उद्यमों के मामले में अधिकतम पांच वर्ष के भीतर प्रस्तावित परियोजना को पूर्ण करना होगा। (इ) औद्योगिक नीति 2019-24 के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा जिन निवेशकों के लिये बी-स्पोक पैकेज अधिसूचित किया जा चुका है ऐसे निवेशकों को यह विकल्प उपलब्ध होगा कि वे औद्योगिक नीति 2019-24 के अंतर्गत उनके पक्ष में अधिसूचित पैकेज के अंतर्गत दिये जाने वाले औैद्योगिक निवेश प्रोत्साहन का विकल्प, संबंधित अधिसूचिना पैकेज में वर्णित शर्तो के साथ ही/शर्ताें के अधीन यथावत प्राप्त कर सकेगें।୧୩୬୦ (୧୯) (12.15) यदि किसी निवेशक द्वारा राज्य की पूर्व नीतियों (औद्योगिक नीति 2019-24 सहित) के अंर्तगत मात्र स्टॉम्प शुल्क छूट एवं भूमि प्रब्याजी रियायत सुविधा प्राप्त की गई हो तो उसे औद्योगिक विकास नीति 2024-30 की सुविधाएं दिनांक 1 नवंबर, 2024 से प्रारंभ होकर 31 मार्च, 2030 तक उत्पादन में आने पर ही प्राप्त हाेंगी।
(12.16) यदि किसी निवेशक द्वारा औद्योगिक विकास नीति 2024-30 की अवधि में मात्र स्टॉम्प शुल्क छूट एवं भूमि प्रब्याजी रियायत सुविधा प्राप्त की गई हो तो उद्यम को औद्योगिक विकास नीति 2024-30 की सुविधाएं दिनांक 1 नवंबर, 2024 से प्रारंभ होकर 31 मार्च, 2030 तक उत्पादन में आने पर ही प्राप्त हाेंगी। 31 मार्च, 2030 तक उत्पादन में न आने पर उद्यम को आगामी औद्योगिक नीति में घोषित प्रावधानाें के अनुसार सुविधाएं प्राप्त होंगी।
(12.17) यदि किसी निवेशक द्वारा औद्योगिक विकास नीति 2024-30 की अवधि में विद्यमान उद्यम में विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण हेतु अभिस्वीकृति प्राप्त कर कार्यवाही पूर्ण कर उत्पादन प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया हो, तो उसे औद्योगिक विकास नीति 2024-30 की सुविधाएं दिनांक 1 नवंबर, 2024 से प्रारंभ होकर 31 मार्च, 2030 तक उत्पादन में आने पर ही प्राप्त हाेंगी।़़ इसके पश्चात उत्पादन प्रारंभ होने पर आगामी औद्योगिक नीति के प्रावधान लागू होंगे।
(12.18) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंर्तगत घोषित किये गये औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन इस नीति में जिन संस्थाओं को स्पष्ट रूप से पात्र घोषित किया गया हो, उन्हें छोडकर भारत शासन, राज्य शासन तथा इनके सार्वजनिक उपक्रमों (यदि विशेष रूप से अन्यथा प्रावधानित न हो) को उपलब्ध नहीं हाेंगे।
(12.19) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंर्तगत घोषित किये गये औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्राप्त करने के लिए उद्यम को राज्य के मूल निवासियों को स्थाई नियोजन में अकुशल कर्मचारियों/श्रमिक के मामले में 100 प्रतिशत, कुशल कर्मचारियों के मामले में न्यूनतम 70 प्रतिशत, तथा प्रशासकीय/प्रबंधकीय कर्मचारियों के मामले में न्यूनतम 40 प्रतिशत, रोजगार उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
(12.20) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंर्तगत घोषित किये गये औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्राप्त करने के लिए उद्यम को कंपनी अधिनियम-2013 के तहत प्रावधानित सीएसआर की राशि के व्यय हेतु प्रस्तावित गतिविधियों पर राज्य शासन के समन्वय से निर्णय लिया जाना अपेक्षित होगा।
(12.21) अनुसंधान एवं विकास के लिए प्रयोगशाला की स्थापना में रूचि रखने वाले उद्यमों को बढ़ावा दिया जायेगा तथा भूमि सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं लघु उद्यमों के समतुल्य उपलब्ध करायी जायेगी।
(12.22) उर्जा विभाग की छत्तीसगढ़ राज्य जल विद्युत परियोजना (पम्प स्टोरेज आधारित ) स्थापना नीति 2023 के कंडिका 3(3), 3(4) एवं 3(5) अंतर्गत राज्य में स्थापित होने वाले ୧୩୬୦ (୨୦) पम्प स्टोरेज आाधारित जल विद्युत परियोजाओं को, उर्जा विभाग की उक्त नीति में उल्लेखित रियायतों के अतिरिक्त इस औद्योगिक नीति के अंतर्गत सामान्य सेक्टर उद्योगों के लिये घोषित औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की पात्रता होगी । उल्लेखनीय है कि उर्जा विभाग के उक्त नीति के कंडिका 3(1), 3(2) के अंतर्गत स्थापित होने वाली परियोजनायें इस औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत अतिरिक्त निवेश प्रोत्साहन हेतु पात्र नहीं होगी।
(12.23) 25 मेगावाट क्षमता तक की छोटी एवं लघु जल विद्युत परियोजनाओं की स्थापना हेतु प्रभावशील उर्जा विभाग की नीति के अंतर्गत राज्य में स्थापित होनें वाले मिनी हाईडल ऊर्जा संयंत्रों को ऊर्जा विभाग की उक्त नीति की कंडिका 7 के स्थान पर इस औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत सामान्य सेक्टर उद्योगों के लिये घोषित औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की पात्रता होगी ।
(12.24) उर्जा विभाग की छत्तीसगढ़ राज्य सौर उर्जा नीति 2017-27 के अंतर्गत राज्य में स्थापित होने वाले सौर उर्जा परियोजाओं को, उर्जा विभाग की उक्त नीति की कंडिका 8-अ में उल्लेखित रियायतों के स्थान पर औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत कोर सेक्टर (स्टील को छोड़कर) उद्योगों के लिये घोषित औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की पात्रता होगी ।
(12.25) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंर्तगत एमएसएमई सेवा श्रेणी उद्यमों को नीति के प्रावधानों के अनुसार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्राप्त करने के लिए सेवा गतिविधि प्रमाण पत्र जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्रों द्वारा जारी किये जायेंगे ताकि उन्हें इस नीति में प्रावधानित प्रोत्साहन उपलब्ध हो सके।
(12.26) भारत सरकार द्वारा लागू की गई ''उत्पादन संबंद्व प्रोत्साहन (पीएलआई)'' की नीति अथवा योजना के तहत यदि किसी उद्योग अथवा सेवा उद्यम को भारत सरकार द्वारा रियायत अथवा अनुदान दिया जाता है, तो ऐसे उद्योग को औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत प्राप्त होने योग्य औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन भारत सरकार द्वारा पीएलआई नीति/योजना अंतर्गत देय प्रोत्साहन राशि के अतिरिक्त देय होगा।
(12.27) (अ) राज्य में स्थापित किंतु बंद एवं बीमार उद्यमों में निवेशित राशि के राज्य हित में सदुपयोग की दृष्टि से बंद एवं बीमार उद्यम के पुर्नवास हेतु अध्याय (द-4) के अनुसार पैकेज प्रदान किया जा सकेेगा।
(ब) ऐसी इकाई जिसने उद्यम स्थापना का कार्य आरंभ किया हो किंतु, वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ नहीं कर सकी एवं यदि ऐसी इकाई द्वारा विभाग से किसी भी प्रकार का आर्थिक निवेश प्रोत्साहन प्राप्त नहीं किया गया है तो ऐसी इकाई की परिसंपत्ति को किसी अन्य उद्यमी/फर्म/कंपनी द्वारा एन.सी.एल.टी. (National Company Law Tribunal), सरफेसी एक्ट, रिजर्व बैक से मान्यता प्राप्त वित्तीय संस्थानों से नियमानुसार परिसंपत्तियों को क्रय୧୩୬୦ (୨୧) किये जाने एवं नवीन क्रेता के द्वारा उद्यम आरंभ किये जाने पर इकाई को ''नवीन इकाई'' के रूप में अनुदान की पात्रता होगी।
उपरोक्त स्थिति में निवेश की गणना में नवीन क्रेता द्वारा एन.सी.एल.टी. (National Company Law Tribunal), सरफेसी एक्ट, रिजर्व बैंक से मान्यता प्राप्त वित्तीय संस्थानों से नियमानुसार क्रय होने पर, उसके पक्ष में निष्पादित विक्रय विलेख/अनुबंध में अंकित राशि तथा अनुबंध के निष्पादन की दिनांक/आधिपत्य प्राप्त होने की दिनांक से उत्पादन प्रारंभ करने की दिनांक तक एवं उत्पादन दिनांक से सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों/सेवा उद्यमों हेतु 6 माह, मध्यम उद्यम/मध्यम सेवा उद्यम हेतु 12 माह, वृहद उद्यमों हेतु 24 माह तक किया गया निवेश मान्य होगा।
(स) ऐसी इकाई जिसने उद्यम स्थापना का कार्य आरंभ किया तथा विभाग से स्टाम्प शुल्क छूट /भू-प्रीमियम में छूट प्राप्त किया गया है किंतु, वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ नहीं कर सकी, यदि ऐसी इकाई द्वारा विभाग से किसी भी प्रकार का अन्य आर्थिक निवेश प्रोत्साहन प्राप्त नहीं किया गया है तो ऐसी इकाई की परिसंपत्ती को किसी अन्य उद्यमी/फर्म/कंपनी द्वारा एन.सी.एल.टी. (National Company Law Tribunal), सरफेसी एक्ट, रिजर्व बैंक से मान्यता प्राप्त वित्तीय संस्थानों के माध्यम से नियमानुसार क्रय किये जाने पर, नवीन क्रेता के पक्ष में पूर्व में लिए गए छूट यथा स्टाम्प शुल्क छूट/भू-प्रीमियम में छूट की अधिसूचना के शर्तों के अधीन शेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन हेतु पात्रता होगी।
(द) ऐसी इकाई जो वाणिज्यिक उत्पादन में आने के उपरांत तथा वर्तमान में उत्पादनरत/बंद है परंतु विभाग से किसी भी प्रकार के अनुदान/छूट रियायत नहीं लिया गया है। इकाई को किसी अन्य उद्यमी/फर्म/कंपनी द्वारा एन.सी.एल.टी. (National Company Law Tribunal), सरफेसी एक्ट, रिजर्व बैंक से मान्यता प्राप्त वित्तीय संस्थानों के माध्यम से नियमानुसार क्रय किए जाने पर "नवीन इकाई'' के रूप में इस नीति के तहत् औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की पात्रता होगी। निवेश की गणना में नवीन क्रेता के पक्ष में निष्पादित विक्रय विलेख/अनुबंध में अंकित राशि जो बैंक द्वारा प्रमाणित हो, मान्य की जावेगी तथा इकाई में विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आघुनिकीकरण किए जाने पर भी नियमानुसार इस नीति के तहत् औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की पात्रता होगी। (इ) ऐसी इकाई जो वाणिज्यिक उत्पादन में आ चुकी है तथा वर्तमान में उत्पादनरत है, साथ ही विभाग से अनुदान/छूट/रियायत प्राप्त कर चुकी है। ऐसी इकाई को किसी अन्य उद्यमी/फर्म/कंपनी को विक्रय करने से पूर्व विभाग से अनुमति लेना आवश्यक होगा। विधिवत् अनुमति पश्चात् इकाई को केवल प्रतिस्थापन/शवलीकरण/विस्तार की स्थिति में नियमानुसार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की पात्रता होगी।
(फ) ऐसी इकाई जो पूर्व में वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ कर चुकी हो तथा वर्तमान में बंद हो, साथ ही विभाग से अनुदान/छूट/रियायत प्राप्त कर चुकी हो। ऐसी स्थिति में क्रेता ୧୩୬୦ (୨୨) इकाई, विभाग द्वारा लागू बंद एवं बीमार उद्यम हेतु औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंर्तगत घोषित पैकेज के तहत् औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्राप्त कर सकेगी। (12.28) उद्यमों की श्रेणियां (Categories of Industries ) : -
(1) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की दृष्टि से उपरोक्त उद्यम/उद्यमों की परिभाषा वही मान्य की जायेगी जो इस नीति के परिशिष्ट-1 में वर्णित है।
(2) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' की दृष्टि से उद्यमों को सामान्य उद्यम, थ्रस्ट सेक्टर उद्यम, कोर सेक्टर उद्यम, अपात्र उद्यम, विशिष्ट श्रेणी के उद्यम के वर्गाें में वर्गीकृत किया है तथा राज्य के सभी विकासखण्डों को औद्योगिक विकास की दृष्टि से तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। विकासखण्डों की तीन श्रेणियों यथा - समूह (एक), (दो) एवं (तीन) परिशिष्ट- 4 अनुसार होंगी। (3) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत निवेश के आकार की दृष्टि से उद्यमों को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है :-
| क्रं. | उद्यम का प्रकार |
| 1 | सूक्ष्म उद्यम |
| 2 | लघु उद्यम |
| 3 | मध्यम उद्यम |
| 4 | वृहद उद्यम |
| 5 | सूक्ष्म सेवा उद्यम |
| 6 | लघु सेवा उद्यम |
| 7 | मध्यम सेवा उद्यम |
| 8 | वृहद सेवा उद्यम |
(4) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत कोर सेक्टर के उद्यम से आशय हैं स्टील संयंत्र, सीमेंट संयंत्र, एल्युमिनियम संयंत्र एवं ताप विद्युत संयंत्र (परिशिष्ट-5 अनुसार)। (5) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत सामान्य श्रेणी के उद्यम/सेवा उद्यम से आशय हैं इस नीति में अन्यथा प्रावधानित - थ्रस्ट सेक्टर उद्यम/सेवा उद्यम, कोर सेक्टर उद्यम/सेवा उद्यम, अपात्र श्रेणी, विशिष्ट श्रेणी के उद्यम आदि के उद्यम/सेवा उद्यम को छोड़कर अन्य समस्त उद्यम/सेवा उद्यम।
(6) निवेशकों का वर्गीकरण (Categories of Investors ) : -
इस नीति में ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' की दृष्टि से उद्यमी/निवेशकों को निम्नांकित अनुसार वर्गीकृत किया गया है :-
୧୩୬୦ (୨୩)| क्रं. | निवेशको ं का वर्गीकरण |
| 1 | सामान्य वर्ग के उद्यमी। |
| 2 | अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के उद्यमी। |
| 3 | अप्रवासी भारतीय, प्रत्यक्ष विदेशी निवेशको ं (एफ.डी.आई.), निर्यातक निवेशक, विदेशी तकनीक वाले उद्यम। |
| 4 | महिला उद्यमी एवं तृतीय लिंग। |
| 5 | राज्य के सेवानिवृत्त सैनिक, राज्य पुलिस एवं अर्ध सैनिक बलों के सेवानिवृत व्यक्ति, राज्य के सेवानिवृत अग्निवीर सैनिक, नक्सलवाद से प्रभावित व्यक्ति, दिव्यांग (निःशक्त) उद्यमी। |
| 6 | राज्य के महिला स्व सहायता समूह के उद्यमी। |
| 7 | राज्य के एफपीओ (Farmers Producer Organisations) के उद्यमी। |
(12.29) विशेष प्रावधान (Special Provision ) : -
1. राज्य सरकार द्वारा राज्य हित में इस नीति के तहत वृहद निवेश के लिये मंत्री मण्डलीय उप समिति का गठन करती है। इस समिति के द्वारा नीति में निर्धारित औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन के अतिरिक्त किसी विशेष उद्योग में होने वाले महत्वपूर्ण निवेश को ध्यान में रखते हुये विशेष निवेश प्रोत्साहन सुविधाओं को प्रदान किये जाने के बारे में प्रस्ताव पर विचार एवं निर्णय कर सकेगी। इस मंत्री मण्डलीय उप समिति में निम्नानुसार सदस्य होगें :-
| क्रं. | विभाग का नाम | पदनाम |
| 1 | मान. मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ | अध्यक्ष |
| 2 | मान. मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन, वित्त विभाग | सदस्य |
| 3 | मान. मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन, विधि विभाग | सदस्य |
| 4 | मान. मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन, अन्य विभाग यथा आवश्यकता सदस्य (विशेष आमंत्रित) | |
| 5 | मान. मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग | सदस्य सचिव |
2. इस नीति अंतर्गत राज्य में स्थापित होने वाले उद्योगों को स्थापना की अनुमतियां/सम्मतियां प्रदान किये जाने में विभिन्न विभागों की ओर से लागू नियम, प्रक्रियाओं को सरलीकृत किये जाने के संबंध में सभी विभागों से समन्वय कर एकीकृत अनुमति/सम्मति प्रदान किये जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जावेगी। इस हेतु राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड को सुदृढ़ किया जायेगा। इस प्रक्रिया के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जायेगा। जो कि नियमित अंतराल में निवेश के प्रस्तावों के संबंध में प्रगति की समीक्षा कर सकेगी।
3. राज्य में स्थापित होने वाले उद्योगों को इस नीति के अंतर्गत प्रदान की जाने वाली औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की प्रक्रिया को यथासंभव ''गैर संपर्ककृत'' (No Physical Contact) प्रणाली के अंतर्गत लाये जाने हेतु ऑनलाईन प्रणाली को पारदर्शी, अधिक सशक्त, ୧୩୬୦ (୨୪) समयबद्ध एवं क्रियाशील किया जायेगा। यथासंभव समस्त अनुदान/छूट/रियायतों के प्रदान की जाने की प्रक्रिया को इस प्रणाली से जोड़ा जावेगा।
4. उद्योगों को स्थापित किये जाने के लिये लगने वाले समय को न्यूनतम किये जाने के उपायों पर विचार एवं नियमों में आवश्यक प्रावधान किये जावेगें।
-------000-------
୧୩୬୦ (୨୫)परिशिष्ट-1 औद्योगिक विकास नीति 2024-30 अंतर्गत्
मान्य परिभाषाएं
( इस नीति की कंडिका 12.28(1) के संदर्भ में )
(1) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंर्तगत ''नियत दिनांक'' का आशय नीति के प्रभावी होने की अर्थात् दिनांक 01 नवंबर, 2024 से है।
(2) औद्योगिक दृष्टि से विकासखण्डों का श्रेणी परिशिष्ट-4 पर दर्शित समूह (एक), (दो) एवं (तीन), के अनुसार होगा।
(3) ''औद्योगिक क्षेत्र'' से आशय है राज्य में राज्य शासन/छत्तीसगढ़ स्टेट इण्डस्ट्रियल डेव्हलपमेंट कार्पाेरेशन के आधिपत्य में तथा इनके द्वारा स्थापित/स्थापनाधीन, संधारित, समस्त औद्योगिक क्षेत्र, इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर, औद्योगिक संस्थान, अर्द्ध शहरीय औद्योगिक संस्थान/ग्रामीण कर्मशाला, औधोगिक विकास केन्द्र, संयुक्त उपक्रम के अंतर्गत स्थापित होने वाले औद्योगिक क्षेत्र, एकीकृत अधोसंरचना विकास केन्द्र, औद्योगिक पार्क तथा विशेष आर्थिक प्रक्षेत्र, चाहे इन्हें किसी भी नाम से संबोधित किया जाए तथा राज्य शासन/भारत सरकार से अनुमोदित/सहायता प्राप्त निजी क्षेत्र में स्थापित औद्योगिक क्षेत्र/औद्योगिक पार्क/विशेष औद्योगिक प्रक्षेत्र एवं अटल नगर विकास प्राधिकरण, नवा रायपुर द्वारा अनुमोदित औद्योगिक क्षेत्र ।
(4) "औद्योगिक इकाई"- से आशय ऐसी इकाई से है जो छत्तीसगढ़ राज्य में विनिर्माण/प्रसंस्करण/सेवा उद्यम के तहत् स्थापित/स्थापनाधीन है।
(5) "उद्यम आकांक्षा"- से आशय होगा छत्तीसगढ़ शासन, वाणिज्य एवं उद्यम विभाग के पोर्टल के माध्यम से जारी किये जाने वाले "उद्यम आकांक्षा अभिस्वीकृति" प्रमाण पत्र। इस नीति के अंर्तगत यह प्रमाण पत्र अभिस्वीकृति दिनांक से पांच वर्ष के लिए मान्य होगा। औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के पूर्व लागू व्यवस्था के अंर्तगत जारी दो वर्ष की वैधता वाले प्रमाण पत्र एवं जिनकी वैधता शेष हो उन्हें इस नीति के अंर्तगत संदर्भित किया जा कर जारी करने की दिनांक से पांच वर्ष हेतु मान्य रखा जा सकेगा। इस हेतु विभाग द्वारा विद्यमान ऑनलाईन प्रणाली में यथा आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध करायी जावेगी।
(6) ''नवीन उद्यम'' से आशय ऐसे उद्यम से है जिसके द्वारा दिनांक 1 नवम्बर, 2024 या उसके पश्चात् व्यावसायिक उत्पादन प्रारंभ किया हो एवं इस हेतु सक्षम अधिकारी द्वारा जारी वैध वाणिज्यिक उत्पादन प्रमाण पत्र/सेवा उद्यम के मामले में व्यवसायिक सेवा आरंभ करने का प्रमाण पत्र भी धारित करता हो जिसमंें वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ/सेवा उद्यम के मामले में व्यवसायिक सेवा आरंभ करने का दिनांक 01 नवम्बर, 2024 को अथवा उसके पश्चात् तथा 31 मार्च, 2030 अथवा उसके पूर्व की तिथि वर्णित हो। ୧୩୬୦ (୨୬) परंतु, सूचना प्रौद्योगिकी वर्ग के स्थापित हो रहे उद्यमों के मामले में वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्थापित हो रहे उद्यमों को औद्योगिक विकास नीति 2024-30 की अधिसूचना जारी होने की दिनांक से इस नीति अंतर्गत प्रोत्साहन की पात्रता होगी। इस के साथ ही निम्नांकित शर्तों में से एक की पूर्ति अनिवार्यतः की गई है :-
(6.1) नवीन उद्यम की पात्रता हेतु निम्नांकित शर्तो की पूर्ति आवश्यक है :-
(1) एकल स्वामित्व वाले प्रकरणों में भूमि उद्यम के स्वामी/औद्योगिक इकाई के नाम पर होंं। एकल स्वामित्व वाले प्रकरणों से भिन्न प्रकरणों में भूमि उद्यम इकाई/कंपनी के नाम से होना अनिवार्य है।
''परंतु, निजी भूमि पट्टे (किराये पर)/क्रय के प्रकरणों में पट्टे (किराये पर) की अवधि न्यूनतम 11 वर्ष के लिए इकाई के नाम पंजीकरण अनिवार्य होगा।'' (2) शेड-भवन - कंडिका 1 की भूमि पर नवीन शेड एवं भवन निर्माण किया गया हो।
''परंतु, शेड/भवन पट्टे (किराये पर) लिये जाने के प्रकरणों में पट्टे (किराये पर) की अवधि न्यूनतम 11 वर्ष के लिए उद्यम इकाई के नाम पर पट्टे (किराये पर) पंजीकरण किया जाना अनिवार्य होगा।''
(3) प्लांट एवं मशीनरी - कंडिका 1 एवं 2 की भूमि तथा शेड एवं भवन में नवीन प्लांट एवं मशीनरी स्थापित की गई हों।
(6.2) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के प्रभावी होने के पश्चात विद्यमान उद्यम के परिसर में नवीन उद्यम के मामले में निम्नांकित शर्तों की पूर्ति अपेक्षित होगी :-
(क) विद्यमान उद्यम के परिसर में नवीन उद्यम प्रस्तावित किया जावे एवं, (ख) इस हेतु सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाणपत्र धारण करते हुए, नवीन उद्यम के रूप में स्थापित होकर इस नीति की अवधि में उत्पादन/सेवा में आए, (ग) इस आशय का नियमानुसार जारी वैध उत्पादन प्रमाण पत्र भी धारण करता हो।
(घ) स्पष्ट रूप पृथक इकाई के रूप में अस्तित्व रखता हो तथा (ङ) इसे नवीन उद्यम की श्रेणी में मान्य किये जाने के लिए निम्नलिखित आवश्यक शर्तें पूर्ण करता हो : -
(1) नियत दिनांक के पश्चात् नवीन इकाई के नाम से जारी उद्यम आकांक्षा, आई.ई.एम. आशय पत्र, औद्योगिक लायसेंस धारित हो एवं उद्यम आकांक्षा, आई.ई.एम., एवं औद्योगिक लायसेंस वैध हो । (2) नवीन उद्यम के नाम से पृथक विद्युत कनेक्शन हो। (3) नवीन उद्यम के नाम से पृथक जी.एस.टी. पंजीयन हो। (4) उपरोक्त भूमि पर शेड-भवन निर्मित हो। (5) निर्मित शेड-भवन में नवीन प्लांट एवं मशीनरी स्थापित की गई हों। (6) नवीन उद्यम द्वारा पृथक से कच्चा माल क्रय एवं निर्मित उत्पादों/सेवा के विक्रय संबंधी पंजीयन पृथक से संधारित हो।୧୩୬୦ (୨୭) (7) नवीन इकाई के पक्ष में सक्षम अधिकारी द्वारा उत्पादन प्रमाण पत्र जारी किया गया हो।
(8) विद्यमान परिसर में स्थापित पूर्व से विद्यमान उद्यम को प्राप्त औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन से संबंधित किसी अनुबंध / अधिसूचना का उल्लंघन न होता हो।
(9) यह भी आवश्यक होगा कि नवीन उद्यम का कच्चामाल अथवा उत्पाद विद्यमान उद्यम के कच्चे माल अथवा उत्पाद के रूप में उपयोग न होता हो अर्थात नवीन उत्पाद बैकवर्ड अथवा फारवर्ड इंटीग्रेशन के रूप में न हो एवं नवीन उत्पाद का वर्गीकरण विद्यमान उत्पाद से भिन्न हो।
(7) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंर्तगत ''विद्यमान उद्यम'' से आशय राज्य में स्थापित ऐसे समस्त उद्यमों से है, जिन्होंने नियत दिनांक अर्थात् 01 नवंबर, 2024 के पूर्व वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ किया हो, तथा सक्षम प्राधिकारी से वैद्य प्रमाण पत्र धारित करता हों।
(8) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंर्तगत ''विद्यमान उद्यम के विस्तार'' अंर्तगत औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की पात्रता हेतु निम्नानुसार शर्त पूर्ति करना आवश्यक होगा -
(अ) राज्य में स्थापित ऐसे समस्त उद्यम जिन्होंने नियत दिनांक को अथवा उसके पश्चात् विद्यमान उद्यम में विस्तार हेतु अभिस्वीकृति दिनांक से वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक तक प्लांट एवं मशीनरी में मान्य निवेशित राशि के न्यूनतम 25 प्रतिशत राशि का अतिरिक्त निवेश किया हो,
(ब) ''विद्यमान उद्यम के विस्तार'' के अंर्तगत विभाग में पंजीकृत क्षमता या औसत उत्पादन (जो अधिक हो) में न्यूनतम 25 प्रतिशत की वृद्धि होती हो (इकाई के द्वारा पूर्व में अनुदान हेतु समाहित कराये गये 6/12/24 माह के निवेश को शामिल करते हुये) एवं कुल रोजगार में 10 प्रतिशत की वृद्धि होती हो इसके अतिरिक्त विस्तारित क्षमता अर्जित की हो।
(स) ''विद्यमान उद्यम के विस्तार'' अंर्तगत दिनांक 01 नवम्बर, 2024 अथवा इसके पश्चात् से 31 मार्च, 2030 के मध्य उत्पादन प्रारंभ किया गया हो।
(द) ''विद्यमान उद्यम के विस्तार'' की प्रक्रिया प्रारंभ करने के पूर्व विद्यमान इकाई को सक्षम अधिकारी (जिसने इकाई को उत्पादन प्रमाण पत्र जारी किया हो) से प्रस्तावित निवेश परियोजना के लिए अभिस्वी—ति प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
(इ) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के नियत दिनांक के पश्चात् स्थापित नवीन औद्योगिक/सेवा इकाईयों को उनके उद्यम में उत्पादन/सेवा प्रारंभ करने एवं सक्षम अधिकारी से वाणिज्यिक उत्पादन प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के उपरांत, उसी ''नवीन उद्यम ୧୩୬୦ (୨୮) में विस्तार'' करने पर ''उद्यम के विस्तार'' हेतु किये गये निवेश के आधार पर एवं कुल मिला कर इस नीति में घोषित अधिकतम सीमा के अधीन अनुदान, छूट एवं रियायतों की पात्रता होगी एवं इसके लिए निर्धारित शर्तों के अनुसार अतिरिक्त निवेश, रोजगार तथा उत्पादन संबंधी शर्तों की पूर्ति करना आवश्यक होगा।
(9) ''शवलीकरण'' अंर्तगत औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की पात्रता :-
इस नीति के अंर्तगत ''शवलीकरण'' योजना के अंर्तगत वर्णित औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की पात्रता हेतु निम्नानुसार शर्त पूर्ति करना आवश्यक होगा - (अ) आशय ऐसे विद्यमान उद्यम में ''शवलीकरण'' योजना के अंर्तगत इस नीति के नियत दिनांक के पश्चात् विद्यमान उद्यम में किसी नवीन उत्पाद/सेवा का समावेश करता है।
(ब) ''शवलीकरण'' योजना के अंर्तगत शवलीकरण हेतु अभिस्वीकृति दिनांक से वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक तक विद्यमान उद्यम के प्लांट एवं मशीनरी मद में मान्य पूंजी निवेश का न्यूनतम 25 प्रतिशत तथा कुल रोजगार में भी 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई हो।
(स) ''शवलीकरण'' की प्रक्रिया प्रारंभ करने के पूर्व सक्षम अधिकारी (जिसने इकाई को उत्पादन प्रमाण-पत्र जारी किया हो) को इस बाबत् सूचना देकर सक्षम अधिकारी से अभिस्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
(द) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के नियत दिनांक के पश्चात् नवीन उद्यम स्थापित करने वाले औद्योगिक इकाईयों को उनके उद्यम में उत्पादन प्रारंभ करने, सक्षम अधिकारी से वाणिज्यिक उत्पादन प्रमाण पत्र प्राप्त करने के उपरांत नवीन उद्यम में शवलीकरण करने पर, शवलीकरण उत्पाद हेतु किये गये निवेश के आधार पर अनुदान, छूट एवं रियायतों की इस नीति में घोषित अधिकतम सीमा के अधीन पात्रता होगी, इसके लिए निर्धारित शर्तों के अनुसार अतिरिक्त निवेश, रोजगार तथा उत्पादन संबंधी शर्तों की पूर्ति करना आवश्यक होगा।
(10) ''प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण'' अंर्तगत औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की पात्रता :-
इस नीति के अंर्तगत ''प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण'' योजना के अंर्तगत वर्णित औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की पात्रता हेतु निम्नानुसार शर्त पूर्ति करना आवश्यक होगा -
(अ) आशय है कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम औद्योगिक/सेवा इकाईयों में औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के नियत दिनांक को अथवा उसके पश्चात् विद्यमान औद्योगिक इकाई द्वारा अपने मूल प्लांट एवं मशीनरी मद में निवेशित पूंजी का न्यूनतम 125 प्रतिशत निवेश, बैंक द्वारा वित्त पोषित परियोजना अनुसार, पूंजी निवेश कर पुरानी मशीनों को୧୩୬୦ (୨୯) प्रतिस्थापित किया जाता है। यह भी आवश्यक होगा कि प्रतिस्थापन हेतु प्रस्तावित मशीनों को न्यूनतम 5 वर्ष पुराना होना चाहिये।
(ब) ''प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण'' योजना के अंर्तगत कुल रोजगार में 10 प्रतिशत की वृद्धि होती हो तो उन्हें वर्तमान नीति की अवधि में उत्पादन होने पर स्थायी पूंजी निवेश के अंतर्गत निवेशित राशि के 50 प्रतिशत तक की सीमा में छूट की पात्रता होगी। (स) ''प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण'' योजना के अंर्तगत यह भी आवश्यक होगा कि इकाई द्वारा दिनांक 01.11.2024 के पश्चात की प्रक्रिया प्रारंभ करने के पूर्व सक्षम अधिकारी (जिसने इकाई को उत्पादन प्रमाण-पत्र जारी किया हो) को इस बाबत् सूचना देकर सक्षम अधिकारी से अभिस्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य होगा। साथ ही दिनांक 31 मार्च, 2030 तक अथवा इसके पूर्व ''प्रतिस्थापित/आधुनिकीकृत'' मशीनों/ निवेश द्वारा उत्पादन प्रारंभ करना होगा।
(11) (अ) ''सूक्ष्म उद्यम/सूक्ष्म सेवा उद्यम'' से आशय है ऐसे उद्यमाें से है, जिसमें संयंत्र और मशीनरी अथवा उपस्कर में रूपये एक करोड़ तक निवेश तथा वार्षिक टर्न ओवर रूपये पांच करोड़ तक होना अपेक्षित है। साथ ही इस हेतु ''उद्यम आकांक्षा'' धारित किया जाना एवं उत्पादन प्रारंभ होने पर सक्षम अधिकारी द्वारा जारी उत्पादन प्रमाण पत्र धारित किया जाना अपेक्षित होगा।
परंतु इस नीति के अंर्तगत औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन के लिए इकाई के श्रेणी के निर्धारण के लिए मात्र संयंत्र और मशीनरी एवं उपस्कर में निवेश राशि के आधार पर गणना की जावेगी।
(ब) ''लघु उद्यम/लघु सेवा उद्यम'' से आशय है ऐसे उद्यमाें से है, जिसमें संयंत्र और मशीनरी अथवा उपस्कर में रूपये दस करोड़ तक निवेश तथा वार्षिक टर्न ओवर रूपये पचास करोड़ तक होना अपेक्षित है। साथ ही इस हेतु ''उद्यम आकांक्षा'' धारित किया जाना एवं उत्पादन प्रारंभ होने पर सक्षम अधिकारी द्वारा जारी उत्पादन प्रमाण पत्र धारित किया जाना अपेक्षित होगा।
परंतु इस नीति के अंर्तगत औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन के लिए इकाई के स्तर के निर्धारण के लिए मात्र संयंत्र और मशीनरी एवं उपस्कर में निवेश राशि के आधार पर गणना की जावेगी।
(स) ''मध्यम उद्यम/मध्यम सेवा उद्यम'' से आशय है ऐसे उद्यमाें से है, जिसमें संयंत्र और मशीनरी अथवा उपस्कर में रूपये पचास करोड़ तक निवेश तथा वार्षिक टर्न ओवर रूपये दो सौ पचास करोड़ तक होना अपेक्षित है। साथ ही इस हेतु उद्यम आकांक्षा/आई.ई.एम./आशय पत्र अथवा औद्योगिक लाइसेंस धारित किया जाना एवं उत्पादन प्रारंभ होने पर सक्षम अधिकारी द्वारा जारी उत्पादन प्रमाण पत्र धारित किया जाना अपेक्षित होगा। ୧୩୬୦ (୩୦) परंतु इस नीति के अंर्तगत औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन के लिए इकाई के स्तर के निर्धारण के लिए मात्र संयंत्र और मशीनरी एवं उपस्कर में निवेश राशि के आधार पर गणना की जावेगी।
(12) वृहद उद्यम/वृहद सेवा उद्यम'' से आशय है ऐसे उद्यमाें से है, जिसमें संयंत्र और मशीनरी अथवा उपस्कर में रूपये पचास करोड़ से अधिक का निवेश तथा वार्षिक टर्न ओवर रूपये दो सौ पचास करोड़ से अधिक का होना अपेक्षित है। साथ ही इस हेतु उद्यम आकांक्षा/आई.ई.एम./आशय पत्र अथवा औद्योगिक लाइसेंस धारित किया जाना एवं उत्पादन प्रारंभ होने पर सक्षम अधिकारी द्वारा जारी उत्पादन प्रमाण पत्र धारित किया जाना अपेक्षित होगा।
परंतु इस नीति के अंर्तगत औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन के लिए इकाई के स्तर के निर्धारण के लिए मात्र संयंत्र और मशीनरी एवं उपस्कर में निवेश राशि के आधार पर गणना की जावेगी।
(13) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंर्तगत ''थ्रस्ट सेक्टर उद्यम'' से आशय है ऐसे उद्यम जो कि परिशिष्ट-2 में उल्लेखित हैं।
(14) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंर्तगत ''अपात्र उद्यम'' से आशय है ऐसे उद्यम जो कि परिशिष्ट-3 में उल्लेखित हैं।
(15) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंर्तगत ''कोर सेक्टर उद्यम'' से आशय है ऐसे उद्यम जो कि परिशिष्ट-5 में उल्लेखित हैं।
(16) "सामान्य उद्यम" से आशय है ऐसे उद्यम से जो कि इस नीति के ''थ्रस्ट सेक्टर उद्यम'',''अपात्र उद्यम'', ''कोर सेक्टर उद्यम'' एवं इस नीति के अंतर्गत जिन उद्यम/सेक्टर के लिये पृथक से कोई औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज निर्धारित/घोषित नहीं किया गया है।
(17) ''स्थायी पूंजी निवेश'' से आशय है कि नवीन उद्यम की स्थापना/विद्यमान उद्यमों का विस्तारीकरण/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण (जो लागू हो) हेतु भूमि/भूमि-विकास, शेड-भवन निर्माण, नवीन प्लांट एवं मशीनरी की स्थापना, विद्युत आपूर्ति, जल आपूर्ति एवं बाउन्ड्रीवाल निर्माण पर किये गये निवेश।
नवीन उद्यम के प्रकरण में उद्यम आकांक्षा की दिनांक/विद्यमान उद्यमों का विस्तारीकरण/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण प्रारंभ करने की अभिस्वीकृति दिनांक से स्थल पर परियोजना का कार्य प्रारंभ करते हुए विस्तारीकरण/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक तक किया गया पूंजी निवेश तथा वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक के पश्चात् सूक्ष्म एवं लघु उद्योग/सूक्ष्म एवं लघु सेवा उद्यमों के प्रकरणों में छः माह की कालावधि में योजना की मान्य मदों में किया गया स्थायी पूंजी निवेश एवं मध्यम उद्योग/मध्यम सेवा उद्यम के प्रकरणों में यह अवधि 12 माह तथा वृहद୧୩୬୦ (୩୧) उद्योग/वृहद सेवा उद्यम के प्रकरणों में यह अवधि 24 माह में किया गया निवेश मान्य किया जावेगा।
(18) ''वाणिज्यिक उत्पादन/सेवा प्रारंभ करने का दिनांक'' से आशय है कि - (अ) ''सूक्ष्म एवं लघु उद्यम '' - उद्यम द्वारा संसूचित परीक्षण उत्पादन/सेवा प्रारंभ दिनांक से 45 दिन पश्चात् तक का दिनांक या सक्षम अधिकारी द्वारा प्रमाणित वाणिज्यिक उत्पादन दिनांक, जो भी पहले हो।
(ब) ''मध्यम उद्यम '' - उद्यम द्वारा संसूचित परीक्षण उत्पादन/सेवा प्रारंभ दिनांक से 75 दिनाें बाद तक का दिनांक या सक्षम अधिकारी द्वारा प्रमाणित वाणिज्यिक उत्पादन का दिनांक, जो भी पहले हो।
(स) ''वृहद उद्यम '' - उद्यम द्वारा संसूचित परीक्षण उत्पादन/सेवा प्रारंभ दिनांक से 100 दिनाें बाद तक का दिनांक या सक्षम अधिकारी द्वारा प्रमाणित वाणिज्यिक उत्पादन का दिनांक, जो भी पहले हो।
(19) ''वाणिज्यिक उत्पादन प्रमाण पत्र'' :-
(अ) नवीन उद्यम की स्थापना/ विद्यमान उद्यम में विस्तारीकरण/शवलीकरण /प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के लिए उद्यम द्वारा आवेदन प्रस्तुत करने पर सक्षम अधिकारी द्वारा सत्यापन उपरांत ''वाणिज्यिक उत्पादन प्रमाण पत्र'' जारी किया जा सकेगा।
(ब) नवीन उद्यम की स्थापना एक उद्यम को एक ही मूल उत्पादन प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा एवं इसके आधार पर नीति के अंतर्गत ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' प्रदान किया जावेगा।
(स) विद्यमान उद्यम में विस्तारीकरण/शवलीकरण /प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण करने पर उत्पादन करने/सेवा आरंभ करने, तद्नुसार पूंजी निवेश, रोजगार, उत्पादों के नाम एवं उनकी वार्षिक क्षमता संबंधी प्रविष्टियां मूल उत्पादन प्रमाण में संशोधन के रूप में दर्ज की जाएगी, एवं इसके आधार पर नीति के अंतर्गत ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' प्रदान किया जावेगा। उत्पादन प्रमाण पत्र में संशोधन के लिए विभाग द्वारा ऑनलाईन/ऑफलाईन प्रणाली में उपयुक्त व्यवस्था की जावेगी।
(द) सेवा क्षेत्र के उद्यम को सेवा गतिविधि आरंभ करने, विस्तारीकरण/शवलीकरण /प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण करने पर उत्पादन करने/ सेवा गतिविधि प्रारंभ करने का प्रमाण पत्र सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किये जायेंगे।
(इ) ताप विद्युत परियोजनाओं एवं अन्य विद्युत उत्पादन करने वाली इकाईयों का वाणिज्यिक उत्पादन दिनांक का निर्धारण इस हेतु उर्जा विभाग अथवा उनके द्वारा निर्धारित सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाणपत्र के आधार पर किया जावेगा। ୧୩୬୦ (୩୨) (20) ''अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के उद्यमी'' से आशय ऐसे व्यक्ति से है जो केन्द्र सरकार द्वारा इस संबंध में लागू परिभाषा के तहत् छत्तीसगढ़ राज्य हेतु अधिसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के रूप में अधिसूचित हो, छत्तीसगढ़ राज्य का मूल निवासी हो एवं उक्त वर्ग में अधिसूचित बाबत् सक्षम अधिकारी द्वारा जारी स्थायी प्रमाण पत्र धारी हो ।
(21) ''अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग द्वारा प्रस्तावित/स्थापित उद्यम'' से आशय ऐसे उद्यमों से है जो राज्य के ''अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के उद्यमी'' द्वारा स्थापित किए गए हो अथवा प्रस्तावित हों। भागीदारी फर्म होने की स्थिति में सभी भागीदार, भारतीय कंपनी अधिनियम के अन्तर्गत गठित कम्पनी होने की स्थिति में सभी अंशधारक तथा सहकारी संस्था अथवा सोसायटी अधिनियम के तहत गठित संस्था होने की स्थिति में सभी सदस्य राज्य के अधिसूचित अनुसूचित जाति/ जनजाति वर्ग के हो। छत्तीसगढ़ राज्य के मूल निवासी हो एवं वैध उद्यम आकांक्षा/आई.ई.एम./आशय पत्र/औद्योगिक लायसेंस धारक हों एवं वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने की दशा में सक्षम अधिकारी द्वारा जारी उत्पादन प्रमाण धारण करता हो।
(22) इस नीति में प्रावधानित सुविधाओं के लिए राज्य शासन की अंश पूंजी से स्थापित सहकारी संस्था के रूप में गठित संस्था होने की स्थिति में ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' प्राप्त करने के लिए राज्य शासन अथवा उसके उपक्रम की अंश पूंजी न्यूनतम 90 प्रतिशत होना आवश्यक होगी एवं हेतु सक्षम अधिकारी द्वारा जारी वैध प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य होगा।
(23) इस नीति के अंर्तगत ''महिला उद्यमी'' से आशय/वर्ग की सुविधाओं के लिए पात्रता हेतु निम्नांकित शर्तों होंगी :-
(अ) राज्य की मूल निवासी ऐसी महिला से है, जिसने उद्यम स्थापित करना प्रस्तावित किया हो/स्थापित किया हो,
(ब) भागीदारी फर्म होने की स्थिति में न्यूनतम 51 प्रतिशत भागीदारी राज्य की महिला/महिलाओं की हाें ,
(स) भारतीय कंपनी अधिनियम के अन्तर्गत गठित कम्पनी होने की दशा में 51 प्रतिशत अंशधारिता राज्य की महिला/महिलाओं की हाें,
(द) सहकारी संस्था होने की स्थिति में न्यूनतम 51 प्रतिशत सदस्य राज्य की महिला /महिलाओं की हाें,
(इ) सोसायटी अधिनियम के अन्तर्गत गठित संस्था होने की स्थिति में न्यूनतम 51 प्रतिशत सदस्य छत्तीसगढ़ राज्य की महिलाएं हों,୧୩୬୦ (୩୩) (फ) उपरोक्त सभी श्रेणियों में यह भी आवश्यक होगा कि उनके उद्यम में प्रबंधकीय, कुशल एवं अकुशल श्रेणी के प्रत्येक श्रेणी में न्यूनतम 50 प्रतिशत (श्रेणीवार पृथक पृथक) महिलाएं कार्यरत हो। साथ ही यदि उद्यम स्वामी महिला है तो उसे महिला श्रम के किसी भी संवर्ग प्रबंधकीय, कुशल, अकुशल श्रेणी में शामिल नहीं किया जावेगा।
(24) ''विनिर्माण उद्यम'' से आशय ऐसे प्रक्रिया से है जो भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम-2006 (समय समय पर यथा संशोधित) के तहत विनिर्माण की श्रेणी में आने वाले उद्यम।
(25) ''दिव्यांग/निःशक्त'' से आशय उस व्यक्ति से है जो भारत सरकार के निःशक्त व्यक्ति (समान अवसर का अधिकार, संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 के तहत आता हो एवं इस प्रयोजन हेतु प्राधिकृत सक्षम अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र धारी हो।
(26) ''सेवानिवृत्त सैनिक'' से आशय है छत्तीसगढ़ राज्य के ऐसे मूल निवासी जो भारत सरकार के अर्द्धसैनिक बलों/सशस्त्र सेनाओं से सेवानिवृत्त हुआ हो एवं इस आशय का संबंधित प्रशासकीय विभाग/कार्यालय से प्रमाण-पत्र धारित करता हो। (27) ''वामपंथी अतिवाद (LWE) से प्रभावित व्यक्ति'' से आशय राज्य के ऐसे मूल निवासी से है जो राज्य में नक्सलवादी गतिविधियों में विकलांग/दिवंगत हुए व्यक्ति अथवा उसके परिवार का सदस्य हो जिसमें संबंधित के माता-पिता, पुत्र-पुत्री अथवा पति-पत्नि हो एवं इस संबंध में संबंधित जिले के कलेक्टर अथवा उनके द्वारा नामांकित अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र धारी हो ।
(28) ''स्व-सहायता समूह'' से आशय है राज्य में पंजीकृत स्व-सहायता समूह। (29) ''परियोजना/योजना'' से आशय है -
(अ) सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यमों के सक्षम अधिकारी के समक्ष दाखिल उद्यम आकांक्षा/आई.ई.एम./आशय पत्र/औद्योगिक लायसेंस/अथवा इसी आशय के अन्य दस्तावेज जो विभाग द्वारा ग्राहयता योग्य हों, प्राप्त करने हेतु आवेदन के साथ संलग्न परियोजना प्रतिवेदन में (कार्यशील पूंजी को छोड़कर) दर्शायी गयी परियोजना लागत। (30) ''निर्यातक उद्यम'' से तात्पर्य ऐसे उद्यम से है जिसे निर्यात हेतु भारत सरकार के सक्षम अधिकारी द्वारा L.O.P. (Letter of Permission) जारी किया गया हो। (31) ''सावधि ऋण'' सावधि ऋण से आशय है भारतीय रिजर्व बैंक से अनुज्ञा प्राप्त अनुसूचित बैंकों एवं कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 4(ए) के अंतर्गत घोषित लोकहित वित्त संस्थाओं अथवा राज्य वित्त अधिनियम 1951 के अंतर्गत गठित वित्त निगम, खादी और ग्रामोद्योग कमीशन/बोर्ड, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम, पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम एवं अन्य वित्त संस्थाओं द्वारा स्वीकृत एवं वितरित ऋण (कार्यशील पूंजी को छोड़कर) । (32) ''परियोजना प्रतिवेदन'' से आशय है कि नवीन उद्यम की स्थापना विस्तारीकरण, शवलीकरण हेतु राज्य के किसी विभाग/उद्यमिता विकास केन्द्र/EDII/ CITCON/ ୧୩୬୦ (୩୪) MSME संस्थान, राष्ट्रीय स्तर की वित्तीय संस्थाओं द्वारा अनुमोदित व्यावसायिक कंसल्टेंट या निजी क्षेत्र के किसी कंसलटेंट, चार्टर्ड अकाउन्टेंट, चार्टर्ड इंजीनियर से तैयार कराया गया, परियोजना प्रतिवेदन जिसमें परियोजना की वित्तीय लागत, विपणन की संभावनाएं, कच्चा माल की उपलब्धता तकनीकी पहलुओं, लाभ-हानि आदि का उल्लेख हो।
(33) ''अकुशल श्रमिक, कुशल श्रमिक एवं प्रबंधकीय पद'' के संबंध में राज्य शासन द्वारा समय-समय पर जारी परिभाषा मान्य होगी।
(34) ''अप्रवासी भारतीय'' के संबंध में भारत सरकार द्वारा जारी परिभाषा मान्य होगी। (35) ''एफडीआई निवेशक'' के संबंध में भारत सरकार द्वारा जारी परिभाषा मान्य होगी। (36) ''विदेशी तकनीक से संबंधित उद्यम'' वे उद्यम होंगे जिन्हें भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में औद्योगिक परियोजना स्थापित करने हेतु सम्मति/सहमति प्रदान की गई हो।
(37) ''राज्य के मूल निवासी'' के संबंध में राज्य शासन द्वारा समय-समय पर जारी परिभाषा में परिभाषित अनुसार तथा इस आशय का सक्षम अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र धारी हो ।
(38) "बंद/बीमार औद्योगिक इकाई" - से आशय उन उद्यमों से है जो कि सक्षम अधिकारी द्वारा जारी उत्पादन प्रमाण-पत्र धारी हो तथा राज्य शासन द्वारा घोषित बंद/बीमार उद्यम नीति के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा समय समय पर इस आशय हेतु पारिभाषित/घोषित की गई हो।
(क) बंद उद्यम से आशय है :- 1. औद्योगिक इकाई के उद्योग के बंद होने के पूर्व न्यूनतम दो वर्ष तक वाणिज्यिक रूप से उत्पादनरत् रही हो, तथा
2. इकाई विगत न्यूनतम लगातार 18 माह से बंद रही हो। बंद होने के कारण विद्युत विच्छेदन हुआ हो अथवा
3. केन्द्रीय उत्पाद शुल्क (जीएसटी) का इस अवधि में भरा गया निर्धारण प्रपत्र निरंक हो, अथवा
4. राज्य स्तरीय पुनर्वास समिति जिस कारण को मान्य करें। (ख) बीमार उद्यम से आशय है :-
1. कोई सूक्ष्म, लघु उद्यम इकाई (एमएसएमई अधिनियम 2006, यथा संशोधित- 2020 के अनुसार) ''बीमार'' तभी समझी जावेगी यदि इकाई के अंकेक्षित लेखों के आधार पर :
इकाई का सबसे अधिक ऋण वाला उधारी लेखा 02 वर्ष से अधिक के लिए एन.पी.ए. (Non Performing Asset) बना रहे।
अथवा୧୩୬୦ (୩୫) इकाई के नेटवर्थ में कमी हुई हो, तथा गत लेखा वर्ष में संचित नगद हानि के कारण नेटवर्थ के 50 प्रतिशत की सीमा तक हो। 2. सूक्ष्म एवं लघु उद्यम से भिन्न प्रकरणों में एक बीमार उद्योग वह कहलायेगा जिसका ऋण खाता 06 माह या उससे अधिक अवधि हेतु एन.पी.ए. (Non Performing Asset) हो गया हो या उद्यम में लगातार हानि (संचित हानि) होने के कारण उद्यम के नेटवर्थ मेें गत वर्ष के अंकेक्षित लेखों के आधार पर 50 प्रतिशत की कमी आ गई हो। (39) उद्यम परिसर - राज्य शासन/उद्यम संचालनालय अथवा सीएसआईडीसी अथवा इस नीति में मान्य की गई किसी एजेंसी द्वारा उद्यम स्थापना हेतु आबंटित औद्योगिक/वाणिज्यिक/अनुषंगिक भूमि, अथवा इस प्रयोजन हेतुु क्रय की गई भूमि की चर्तुसीमा।
टीप :- इस चर्तुसीमा में आवासीय प्रयोजन की भूमि सम्मिलित नहीं होगी। (40) "ग्रामीण क्षेत्र" से अभिप्रेत ऐसे क्षेत्र से है जो राजस्व अभिलेखों में गांव की परिभाषा के तहत आता हो या कोई बसाहट वाला क्षेत्र जो 2011 की जनगणना अथवा केन्द्र सरकार द्वारा समय-समय पर तैयार आंकड़ों के अनुसार जिनकी जनसंख्या 2,000 से अधिक न हो।
(41) "ग्रामोद्योग इकाई" से आशय खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग द्वारा वर्गीकृत इकाई की स्थापना (प्रतिबंधात्मक/नकारात्मक उद्यमों को छोड़कर) ।
(42) ''स्थायी रोजगार'' - उत्पादन प्रमाण-पत्र धारी स्थापित उद्यम में अकुशल/कुशल /प्रबंधन श्रेणी के कार्मिकों को उनकी सेवाओं हेतु उद्यम द्वारा सीधे दिये जाने वाले वेतन/पारिश्रमिक को स्थायी रोजगार में माना जावेगा। ठेकेदारों के द्वारा उपलब्ध कराए गए रोजगार को इसमें सम्मिलित नहीं किया जाएगा।
(43) ''भूमि बैंक'' से आशय है इन परिभाषाओं के बिंदु क्रमांक-3 में वर्णित प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों, औद्योगिक पार्क एवं औद्योगिक संस्थानों से बाहर औद्योगिक परियोजनाओं की स्थापना हेतु अर्जित की जाने वाली शासकीय भूमि एवं निजी भूमि जोकि राज्य शासन/उद्यम संचालनालय अथवा सीएसआईडीसी अथवा इस नीति में मान्य की गई किसी एजेंसी के नाम पर/आधिपत्य में हो।
(44) ''व्हाईट गुड्स'' - से आशय है भारत सरकार द्वारा इस वर्ग हेतु परिभाषित उत्पाद, यथा - टेलीविजन, एयर कंडीशनर, रेफ्रीजरेटर एवं वाशिंग मशीन इत्यादि। (45) ''नेट एसजीएसटी'' - से आशय है केवल छत्तीसगढ़ राज्य में विक्रय की गई वस्तुओं/सेवा के संदर्भ में छत्तीसगढ़ राज्य शासन के कोष में विभिन्न प्रकार के पात्र इनपुट टेक्स क्रेडिट (Eligible Input Tax Credit) के समायोजन के पश्चात वास्तव में जमा की गई एसजीएसटी राशि से होगा। इनमें किसी भी रूप में, किसी भी माध्यम में राज्य के बाहर विक्रय किये गये उत्पाद के विरूद्ध एसजीएसटी/आईजीएसटी राशि सम्मिलित नहीं होगी। इसमें इकाई द्वारा क्रय की गई प्लांट एवं मशीनरी/कच्चा माल/अनुषांगिक वस्तुओं हेतु जमा की गई एसजीएसटी की राशि सम्मिलित नहीं ୧୩୬୦ (୩୬) होगी तथापि जीएसटी अधिनियम के अंतर्गत लागू इनपुट टेक्स क्रेडिट (Input Tax Credit) समायोजन में मान्य होगी।
नेट एसजीएसटी छूट उन्हीं उत्पादों में मान्य होगी, जिनका उपभोग अंतिम उपभोक्ता के रूप में छत्तीसगढ़ राज्य में हो। इस हेतु विस्तृत निर्देश/प्रक्रिया पृथक से जारी किए जावेंगे।
(46) ''फार्मास्यिुटिकल सेक्टर'' से आशय होगा - फार्मास्यिुटिकल सेक्टर के उद्यम, इकाइयों से संबंधित यथा फॉम्र्यूलेशन, एक्टिव फामास्यिुटिकल इनग्रेडियेंस (API), की स्टार्टिग मटेरियल (KSM), ड्रग इंटरमिडियेट्स (DI) तथा भारत सरकार द्वारा फार्मास्यिुटिकल सेक्टर में समय-समय में मान्य किये जाने वाले, घोषित उत्पाद सम्मिलित होंगे।
(47) ''टेक्सटाईल सेक्टर'' से आशय होगा - टेक्सटाईल उद्यम इकाइयों से संबंधित जीनिंग, स्पीनिंग, वीविंग, डाईंग एंड प्रोसेसिंग आफ टेक्सटाईल, अपेरल, एमएमएफ यार्न/फेब्रीक फ्राम रिसाइकिल्ड प्रोडक्ट अपेरल उत्पादन, टेक्नीकल टेक्सटाईल एंड सपोर्ट एक्टीविटीज-बिल्डटेक, जियोटेक, इंडूटेक, मोबाईलटेक, प्रोटेक, ईकोटेक, एग्रोटेक, क्लोथटेक, होमटेक, मेडीटेक, स्पोर्टटेक, पैकटेक (प्लास्टिक पैकेजिंग को छोड़कर)। तथा भारत सरकार एवं राज्य सरकार के द्वारा इस श्रेणी में मान्य किये गये उत्पाद/उद्यम की इकाइयां एवं इस सेक्टर में समय-समय में मान्य किये जाने वाले, घोषित उत्पाद सम्मिलित होंगे।
टीप - इस नीति अंतर्गत ऐसी टेक्सटाईल व गारमेंट निर्माण इकाइयों को अनुदान की पात्रता नहीं होगी, जो कि वैधानिक रूप से प्रतिबंधित उत्पाद का निर्माण करते हों।
(48) कृषि, खाद्य एवं उद्यानिकी उत्पाद प्रसंस्करण सेक्टर से आशय होगा - कृषि, खाद्य एवं उद्यानिकी उत्पाद प्रसंस्करण सेक्टर (एथेनॉल उत्पादक इकाईयों को छोड़कर) में भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा इस श्रेणी में मान्य किये गये उत्पाद/उद्यम की इकाइयां एवं इस सेक्टर में समय-समय में मान्य किये जाने वाले, घोषित उत्पाद सम्मिलित होंगे।
(49) ''इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के उत्पाद'' से आशय होगा - ''इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के उत्पाद'' सेक्टर में भारत सरकार एवं राज्य सरकार के द्वारा इस श्रेणी में मान्य किये गये उत्पाद/उद्यम की इकाइयां एवं इस सेक्टर में समय-समय में मान्य किये जाने वाले, घोषित उत्पाद सम्मिलित होंगे।
(50) ''आईटी/आईटीईएस सेक्टर के उत्पाद'' से आशय होगा - ''आईटी/आईटीईएस सेक्टर के उत्पाद'' सेक्टर में भारत सरकार एवं राज्य सरकार के संबंधित विभाग द्वारा इस श्रेणी में मान्य किये गये उत्पाद/उद्यम की इकाइयां एवं इस सेक्टर में समय-समय में मान्य किये जाने वाले, घोषित उत्पाद सम्मिलित होंगे। (51) प्रभावी कदम - प्रभावी कदम से आशय होगा कि : -
(1) इकाई ने भूमि का वैद्य आधिपत्य प्राप्त कर लिया हो।୧୩୬୦ (୩୭) (2) इकाई ने परियोजना प्रतिवेदन अनुसार शेड/भवन में प्रस्तावित पूंजी निवेश का 10 प्रतिशत व्यय कर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया हो, तथा
(3) इकाई ने प्रोजेक्ट रिर्पोट के अनुसार संयंत्र एवं मशीनरी का अग्रिम राशि के साथ पक्का क्रय आदेश दिया जा चुका हो।
(4) इकाई ने परियोजना के लिये वैधानिक अनुमतियों/सम्मतियों/अनापत्तियों के लिये संबंधित विभाग/कार्यालय में आवेदन यथा स्थापना की अनुमति, भवन निर्माण अनुज्ञा आदि प्रस्तुत कर दिया हो ।
टीप - परिभाषाओं के संबंध में किसी विवाद की स्थिति उत्पन्न होने पर छत्तीसगढ़ शासन, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग का निर्णय अंतिम एवं बंधनकारी होगा ।
------
୧୩୬୦ (୩୮) परिशिष्ट- 2 औद्योगिक विकास नीति 2024-30 अंतर्गत
थ्रस्ट सेक्टर उद्यमों की सूची
| क्र. | विवरण | संयंत्र एवं मशीनरी में पूंजी निवेश की न्यूनतम सीमा (राशि रूपये लाख में) |
| (अ) | फार्मास्यूटिकल एवं मेडिकल डिवाइस सेक्टर | |
| 1 | फार्मास्यूटिकल उद्यम | 500 |
| 2 | मेडिकल एवं लेबोरेटरी इक्यूपमेंट | 70 |
| 3 | मेडिकल ग्रेड आक्सीजन गैस (लिक्विड एवं गैसीयस माध्यम से) | 200 |
| 4 | आक्सीजन गैस सिलेण्डर निर्माण | 1000 |
| 5 | ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटर | 150 |
| 6 | क्रायोजेनिक गैस टेंकर | 70 |
| 7 | फेस मास्क, नॉन रिब्रिदर मास्क, आक्सीजन फ्लो मीटर, नेसल केन्यूला आदि | 50 |
| 8 | नॉन इन्वेसीव वेन्टिलेटर, इन्वेसीव वेन्टिलेटर | 200 |
| 9 | सर्जिकल दस्ताने, पी पी ई किट, ओवर ऑल बॉडी प्रोटेक्टर, संक्रमण की रोकथाम के लिए आवश्यक अन्य उपकरण | 200 |
| 10 | न्यूट्रास्युटिकल उत्पाद/ स्पो र्टस न्यूट्रास्युटिकल उत्पाद | 200 |
| 11 | टीका बनाने के उपकरण, RT-PCR Test, True-not test, Antigen Test, के लिए Reagents. | 500 |
| (ब) | कृषि, खाद्य एवं उद्यानिकी उत्पाद प्रसंस्करण सेक्टर | |
| 1 | फल, फूल, सब्जी एवं अन्य हार्टीकल्चर उत्पाद प्रसंस्करण उद्यम। | 25 |
| 2 | भारत सरकार द्वारा परिभाषित खाद्य प्रसंस्करण एवं कृषि पर आधारित उद्यम (राईस मिल, पेडी परबायलिंग एण्ड क्लीनिंग, हालर मिल तथा राईस ब्रान साल्वे ट एक्सट्रेक्शन प्लांट एवं खाद्य ं तेल की रिफाइनिंग (स्वतंत्र इकाई)/रिफाईनरी को छोड़कर एवं | 70 |
| क्र. | विवरण | संयंत्र एवं मशीनरी में पूंजी निवेश की न्यूनतम सीमा (राशि रूपये लाख में) |
| धान/बहु खाद्यान्न/गन्ना आधारित एथेनॉल उत्पादन इकाईयों को छोड़कर )। | ||
| 3 | ब्रांडेड डेयरी उत्पाद (मिल्क चिलिंग सहित)। | 140 |
| 4 | पोहा, मुरमुरा। | 200 |
| (स) | ऑटोमोबाईल सेक्टर | |
| 1 | आटोमोबाईल, आटो कंपोनेन्ट्स | 150 |
| 2 | इलेक्ट्रिक दो पहिया, तीन पहिया एवं चार पहिया वाहन एवं उनके बैटरी का निर्माण, हाईडोजन फ्यूल सेल व्हीकल | 500 |
| 3 | इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग स्टेशन के उपकरण निर्माण | 50 |
| 4 | भारत सरकार द्वारा अनुमोदित नीति के अनुसार निष्प्रयोज्य वाहनो ं को स्क्रैप किये जाने से संबंधित उद्यम की स्थापना | 200 |
| (स) | डिफे स एवं एयरोस्पेस सेक्टर ं | |
| 1 | ड्रोन निर्माण उद्यम | 500 |
| 2 | एयरोस्पेस, एयरक्राफ्ट रिपेयर (एम आर ओ) | 500 |
| 3 | रक्षा उपकरण | 1000 |
| (द) | सूचना प्रौद्योगिकी (आई टी) हार्डवेयर सेक्टर | |
| 1 | रोबोटिक्स तकनीक के उद्यम, आर्टिफिशियल इंटेलिजे स तकनीक ं के उद्यम, सूचना प्रौद्योगिकी के उद्यम एवं सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवा उद्यम के लिये आवश्यक हार्डवेयर | 100 |
| 2 | जैव प्रौद्योगिकी एवं नैनो प्रौद्योगिकी के अन्तर्गत आने वाले उत्पाद | 100 |
| 3 | व्हाईट गुड्स, इलेक्ट्रानिक एवं इलेक्ट्रिकल उपभोक्ता उत्पाद | 250 |
| (इ) | टेक्सटाईल सेक्टर | |
| 1 | टेक्सटाईल उद्यम (स्पिनिंग, वीविंग, पावरलूम, फेब्रिक्स एवं रेडिमेड गारमेंट्स व अन्य प्रक्रिया) (नॉन वोवन फेब्रिक बैग्स को छोड़कर)। | 150 |
୧୩୬୦ (୪୦)
| क्र. | विवरण | संयंत्र एवं मशीनरी में पूंजी निवेश की न्यूनतम सीमा (राशि रूपये लाख में) |
| 2 | पोलिस्टर स्टेपल फाईबर। | 100 |
| 3 | रेडीमेड गारमेन्ट्स (जिनमें यंत्र एवं संयंत्र में न्यूनतम 50 लाख रूपयों का पूंजी निवेश हो)। | 50 |
| 4 | टेक्निकल टेक्सटाईल | 500 |
| (फ) | इंजीनियरिंग सेक्टर | |
| 1 | रेल्वे, अंतरिक्ष, रक्षा संस्थानों/विभागो , दूरसंचार एवं विमानन ं कंपनियों को आपूर्ति किये जाने वाले उत्पाद/उपकरण/स्पेयर्स | 140 |
| 2 | स्टेनलेस स्टील एवं उसके उत्पाद | 5000 |
| 3 | साइकिल एवं साइकिल निर्माण में प ्रयुक्त होने वाले उत्पाद/उपकरण/स्पेयर्स। प्लांट/मशीनरी/इंजीनियरिंग उत्पाद एवं इनके स्पेयर्स। | 125 |
| 4 | फेरस/नॉन फेरस मेटल पर आधारित डाउन स्ट्रीम उत्पाद, एलॉय स्टील एवं उसके उत्पाद | 250 |
| 5 | एल्युमिनियम पर आधारित डाऊन स्ट्रीम उत्पाद। | 250 |
| 6 | नवीन एवं नवकरणीय स्त्रोतों से विद्युत उत्पादन हेतु लगने वाले प्लांट एवं मशीनरी तथा उपकरण । | 1000 |
| 7 | विद्युत उत्पादन, पारेषण एवं वितरण में लगने वाले प्लांट एवं मशीनरी तथा उपकरण | 150 |
| 8 | ट्रान्समिशन लाईन टावर/मोबाईल टावर एवं उनके स्पेयर्स पाटर््स/उपकरण। | 250 |
| 9 | स्व-चालित कृषि यंत्र, टे्रक्टर आधारित एग्रीकल्चर इम्प्लीमेंट्स/एग्रीकल्चर इम्पलीमेंट्स। | 70 |
| 10 | व ैगन कोच स्पेयर्स एवं फिटिंग। | 150 |
| 11 | हैंड पंप एवं स्पेयर्स का निर्माण। | 100 |
| 12 | सबमर्सिबल पंप एवं स्पेयर्स का निर्माण। | 100 |
| क्र. | विवरण | संयंत्र एवं मशीनरी में पूंजी निवेश की न्यूनतम सीमा (राशि रूपये लाख में) |
| 13 | इलेक्ट्रिक मोटर एवं स्पेयर्स का निर्माण। | 100 |
| 14 | ग्रेन साइलो। | 125 |
| 15 | कटिंग टूल्स डाईज एवं फिक्चर्स का विनिर्माण | 150 |
| (ज) | वनोपज पर आधारित सेक्टर | |
| 1 | हर्बल, वनौषधि तथा लघु वनोपज पर आधारित उद्यम | 100 |
| 2 | बांस पर आधारित उद्यम (जिसमें बांस मुख्य कच्चा माल के रूप में प्रयुक्त हो)। | 50 |
| 3 | लाख पर आधारित उद्यम (जिसमें लाख मुख्य कच्चा माल के रूप में प्रयुक्त हो)। | 25 |
| 4 | वृक्षारोपणो से प्राप्त काष्ठ पर आधारित उद्यम । ं | 100 |
| 5 | कंप्रेस्ड वुड एवं इस पर आधारित उद्यम | 100 |
| (ह) वर्गीकरण के आधारित थ्रस्ट सेक्टर उद्यम | ||
| 1 | जेम्स एवं ज्वेलरी। | 100 |
| 2 | स्पोर्टस गुड्स। | 500 |
| 3 | जैविक खाद, जैविक कीटनाशक एवं बोनमील का निर्माण। | 200 |
| (क) उत्पाद आधारित थ्रस्ट सेक्टर उद्यम | ||
| 1 | मोल्डेड फर्नीचर, कंटेनर्स एवं पी0व्ही0सी0 पाईप्स एवं फिटिंग, हाउस होल्ड प्लास्टिक के आयटम। | 125 |
| 2 | पेन्ट/डिस्टेम्पर। | 125 |
| 3 | नान प्लास्टिक बैग्स (नॉन वोवन बैग्स को छोड़कर) | 25 |
| 4 | फ्लाई एश उत्पाद (सीमेंट को छोड़कर)। | 25 |
| 5 | रिफ्रेक्ट्री आईटम | 100 |
| 6 | फुटवियर एवं इनसे संबंधित उद्यम | 100 |
୧୩୬୦ (୪୨)
| क्र. | विवरण | संयंत्र एवं मशीनरी में पूंजी निवेश की न्यूनतम सीमा (राशि रूपये लाख में) |
| 7 | फर्शी पत्थर की कटिंग एवं पॉलिशिंग, ग्रेनाईट पत्थर की कटिंग एवं पॉलिशिंग, मार्बल पत्थर की कटिंग एवं पॉलिशिंग, अन्य मिनरल रॉक की कटिंग एवं पालिशिंग तथा टाईल्स निर्माण। | 25 |
| 8 | ग्रामोद्योग इकाईयां यथा पेन निर्माण, झालर निर्माण, अगरबत्ती, दोना पत्तल निर्माण, पशु आहार, साबुन एवं वाशिंग पावडर, फिनाईल, स्कूल ब ैग, सी.एफ.एल. बल्ब, स्टील विंडो /डोर/रोलिंग शटर्स एवं अन्य जिनमे प्लांट एवं मशीनरी मे ं ं न्यूनतम पूंजी निवेश 10 लाख रूपये हो। | 10 |
| 9 | सौंदर्य प्रसाधन सामग्री का उत्पादन | 10 |
| 10 | व डन सिजनिंग एवं केमिकल ट्रीटमेंट प्लांट ू | 25 |
| 11 | प ्रीफेब्रीकेटेड बिल्डिंग सामग्री। | 125 |
| (ख) | निवेशक के वर्गीकरण के आधार पर आधारित सेक्टर | |
| 1 | निजी क्षेत्र में विदेशी तकनीक से विदेशी कम्पनी एवं भारतीय कम्पनी के संयुक्त उपक्रम में स्थापित होने वाले उद्यम । | 1000 |
| 2 | ए से अन्य वर्ग के उद्यम जो राज्य शासन द्वारा समय समय पर े अधिसूचित किये जावें। | - |
टीप- 1 थ्रस्ट सेक्टर उद्यमों की पात्रता के लिए संयंत्र एवं मशीनरी मद में राज्य शासन, वाणिज्य एवं उद्यम विभाग द्वारा निर्धारित न्यूनतम सीमा या उससे अधिक का पूंजी निवेश करना आवश्यक होगा ।
2 यदि किसी उद्यम द्वारा थ्रस्ट सेक्टर उद्यमों के उत्पाद के साथ अन्य किसी श्रेणी के उत्पाद का निर्माण किया जाता है तो ऐसी स्थिति में उसे निम्न उत्पाद श्रेणी (दोनों में से जो निम्न हो) के अनुसार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की पात्रता होगी।
-------
୧୩୬୦ (୪୩)परिशिष्ट-3 औद्योगिक विकास नीति 2024-30 अंतर्गत
सम्पूर्ण राज्य हेतु अपात्र उद्यमों की सूची (इस नीति की कंडिका 12.28(2) के अंतर्गत वर्णित परिभाषाओं के बिंदु क्रमांक - 14 के संदर्भ में ) (1) अल्कोहल डिस्टीलरी एवं अल्कोहल आधारित बेवरेजेस निर्माण (गैर वानकी वनोत्पाद पर आधारित अल्कोहल निर्माण को छोड़कर) ।
(2) आरा मिल (सॉ मिल)।
(3) भारत सरकार/राज्य सरकार द्वारा प्रतिबंधित पोलिथिन बेग, प्लास्टिक के डिस्पोजेबल उत्पाद।
(4) पान मसाला, गुटखा, सुपारी एवं तंबाखू आधारित उद्यम। (5) स्लाटर हाउस (बूचड़ खाना)। (6) पैक्ड ड्रिकिंग वाटर। (7) कोल एवं कोक ब्रिकेट, कोल स्क्रीनिंग, कोल वाशरी (8) चूना निर्माण, चूना पाउडर, चूना चिप्स, डोलोमाईट पाउडर। (9) समस्त प्रकार के मिनरल पाउडर, स्लैग ग्राइंडिंग । (10) एस्बेस्टस एवं उस पर आधारित उद्यम (11) लेदर टैनरी। (12) स्पंज आयरन, एकीकृत स्टील प्लांट, तापीय विद्युत उत्पादन संयंत्र
(केवल निम्नलिखित विकासखण्डों के लिए)
| क्र. | जिले का नाम | विकासखण्ड का नाम |
| 1. | बिलासपुर | बिल्हा |
| 2. | रायपुर | धरसींवा |
(13) स्टोन क्रेशर/ गिट्टी निर्माण (केवल समूह-1 एवं 2 के विकासखण्डों के लिए)। (12) राइस मिल एवं परबॉईलिंग (केवल समूह-1 एवं 2 के विकासखण्डों के लिए)। (15) सभी प्रकार के उत्पादों की रिपैकिंग। (16) ऐसे अन्य उद्यम जो राज्य शासन द्वारा अधिसूचित किये जाये।
टीप - अपात्र उद्यम किसी अन्य श्रेणी के उद्यम के साथ स्थापित किये जाने की दशा में संपूर्ण परियोजना में किये गये निवेश में से अपात्र उत्पाद में किये गये निवेश को कम कर शेष निवेश पर औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की पात्रता होगी।
-------
୧୩୬୦ (୪୪) परिशिष्ट-4 औद्योगिक विकास नीति 2024-30 हेतु
विकासखण्ड वर्गीकरण
(इस नीति की कंडिका 12.28(2) के संदर्भ में )
| क्र | जिले का नाम | विकासखण्ड समूह-एक (10) | विकासखण्ड समूह-दो (61) | विकासखण्ड समूह-तीन (75) |
| 1 | रायपुर | धरसींवा, | तिल्दा, आरंग, अभनपुर | - |
| 2 | गरियाबंद | - | गरियाबंद, फिंगेश्वर | छ ुरा, देवभोग, मैनपुर |
| 3 | बलौदाबाजार- भाटापारा | बलौदाबाजार, भाटापारा, सिमगा, | पलारी, कसडोल | - |
| 4 | महासमुंद | - | महासमुंद, सरायपाली, पिथौरा | बागबाहरा, बसना |
| 5 | धमतरी | - | धमतरी, कुरूद | मगरलोड, नगरी |
| 6 | दुर्ग | दुर्ग, धमधा, पाटन | - | - |
| 7 | बालोद | - | बालोद, गुण्डरदेही, गुरूर, डौंडी | डौण्डी-लोहारा, |
| 8 | ब मेतरा े | - | ब मेतरा, साजा, बेरला, े नवागढ़ | - |
| 9 | राजनांदगांव | - | राजनांदगांव, डोंगरगढ़, डोंगरगांव, | छुरिया |
| 10 | खैरागढ़- छुईखदान- गंडई | - | खैरागढ़, छुईखदान | - |
| 11 | मोहला-मानपुर- अंबागढ़ चौकी | - | - | अंबागढ़ चौकी, मानपुर, मोहला |
| 12 कबीरधाम | - | कवर्धा, बोड़ला, सहसपुर, लोहारा | प डरिया, ं | |
| 13 | बिलासपुर | - | बिल्हा, तखतपुर, | - |
| क्र | जिले का नाम | विकासखण्ड समूह-एक (10) | विकासखण्ड समूह-दो (61) | विकासखण्ड समूह-तीन (75) |
| मस्तुरी, कोटा | ||||
| 14 | मुंगेली | - | मुंगेली पथरिया, लोरमी | - |
| 15 | गौरेला-पेण्ड्रा- मरवाही | - | पेण्ड्रा रोड, पेण्ड्रा, | मरवाही |
| 16 | रायगढ़ | रायगढ़, | खरसिया, तमनार, घरघोड़ा, पुसौर, धरमजयगढ़, लैलुंगा | - |
| 17 | सारंगढ़-बिलाईगढ़ | - | सारंगढ़, बरमकेला | बिलाईगढ़ |
| 18 जांजगीर-चांपा | अकलतरा, | बम्हनीडीह, नवागढ बलौदा, पामगढ़ ़ | - | |
| 19 | सक्ती | - | सक्ती, जैजेपुर, मालखरौदा, डभरा | - |
| 20 कोरबा | कोरबा, | कटधोरा, | पाली, करतला, पोड़ी-उपरोड़ा | |
| 21 | सरगुजा | - | अंबिकापुर - | लुण्ड्रा, लखनपुर, सीतापुर, बतौली, उदयपुर, मैनपाट |
| 22 | स रजपुर ू | - | स रजपुर - ू | प ्रतापपुर, प ्र मनगर, े भैयाथान, ओडगी, रामानुजनगर |
| 23 | बलरामपुर | - | - | बलरामपुर, कुसमी, राजपुर, रामचंद्रपुर, शंकरगढ़, वाड्रफनगर |
| 24 जशपुर | - | - | जशपुर, पत्थलगांव कुनकुरी, बगीचा, दुलदुला, मनोरा, कांसाबेल, फरसाबहार | |
| 25 कोरिया | - | - | बैकुंठपुर, सोनहत |
୧୩୬୦ (୪୬)
| क्र | जिले का नाम | विकासखण्ड समूह-एक (10) | विकासखण्ड समूह-दो (61) | विकासखण्ड समूह-तीन (75) |
| 26 | मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी- भरतपुर | - | - | मनेन्द्रगढ़, भरतपुर, खड़गवां |
| 27 | बस्तर | - | जगदलपुर | बकावण्ड, बस्तानार, दरभा, लोहण्डीगुड़ा, बस्तर, तोकापाल |
| 28 | दंतेवाड़ा | - | - | दंतेवाड़ा, गीदम, कटेकल्याण, कुआकोण्डा |
| 29 | स ुकमा | - | - | कोंटा, छिंदगढ़, सुकमा |
| 30 कांकेर | - | कांकेर, चारामा | अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, दुर्गकोण्डल, नरहरपुर, कोयलीबेड़ा | |
| 31 कोण्डागांव | - | कोण्डागांव, | केशकाल बड़ेराजपुर, माकड़ी, फरसगांव | |
| 32 | बीजापुर | - | - | बीजापुर, भैरमगढ़, भोपालपट्टनम, उसुर |
| 33 | नारायणपुर | - | - | नारायणपुर, ओरछा |
---------
୧୩୬୦ (୪୭)परिशिष्ट- 5 औद्योगिक विकास नीति 2024-30 अंतर्गत
कोर सेक्टर उद्यमों की सूची
(इस नीति की कंडिका 12.28(2) के अंतर्गत वर्णित परिभाषाओं के बिंदु क्रमांक - 15 के संदर्भ में ) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंर्तगत ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' की दृृष्टि से निम्नांकित मध्यम एवं वृहद उद्यम कोर सेक्टर में होंगे :-
| क्र. | उद्यम का प्रकार | पात्र विकासखंड |
| 1 | स्टील संयंत्र | समूह-1 के विकासखण्ड (जिला रायपुर के धरसींवा व जिला बिलासपुर के बिल्हा विकासखण्डों को छोड़कर) , समूह-2 एवं समूह-3 |
| 2 | सीमेंट संयंत्र | समूह-1, समूह-2 एवं समूह-3 |
| 3 | एल्युमिनियम संयंत्र | समूह-1, समूह-2 एवं समूह-3 |
| 4 | ताप विद्युत संयंत्र | समूह-1, समूह-2 एवं समूह-3 |
टीप - औद्योगिक विकास नीति 2024-30 की अवधि में विभिन्न विकासखंडों में स्थापित किये जाने वाले कोर सेक्टर के नवीन उद्यमों की स्थापना एवं विद्यमान उद्यम के विस्तारीकरण/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण पर इस नीति में अन्यथा कोई अपात्रता न होने की स्थिति में वृहद उद्यमों के लिए किये गये प्रावधान अनुसार कोर सेक्टर उद्यमों हेतु दर्शाये गये अनुसार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहनों की पात्रता होगी।
-------------
୧୩୬୦ (୪୮) परिशिष्ट-''6'' मान्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम सेवा श्रेणी उद्यमों की सूची औद्योगिक विकास नीति 2024-30 अंतर्गत निम्नांकित तालिका अनुसार सूचीबद्व सेवा श्रेणी/गतिविधियों उद्यमों को परिशिष्ट-6 की तालिका के कॉलम-2 में दर्शित सेवा क्षेत्रों के लिए एवं कॉलम-3 में वर्णित न्यूनतम स्थायी पूंजी निवेश करने पर इस नीति के प्रावधानों में अन्यथा निर्धारित पात्रतानुसार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जा सकेगा । इस प्रयोजन के लिए इस नीति में अन्यथा प्रावधानित अनुसार सेवा गतिविधि प्रमाण पत्र संबंधित जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र द्वारा जारी किये जायेगें, ताकि उन्हें इस नीति में प्रावधानित प्रोत्साहन उपलब्ध हो सके।
| क्र. | सेवा का नाम | न्यूनतम स्थाई पू जी ं निवेश (रूपये लाख में) |
| 1 | 2 | 3 |
| (अ) | लॉजिस्टिक सेवा सेक्टर | |
| 1. | प ैकेजिंग सेवा | 25 |
| 2. | परिवहन सेवा | 50 |
| 3. | व यर हाउस े | 100 |
| 4. | कोल्ड स्टोरेज | 150 |
| 5. | कुरियर सेवा | 100 |
| 6. | फ्र ट परिवहन े | 100 |
| (ब) | आईटी एवं आईटी इनेबल सर्विसेस | |
| 1. | 3डी/एनीमेशन/वीएफएक्स स्टुडियो | 10 |
| 2. | फिल्म स्टुडियो | 50 |
| 3. | बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) | 30 |
| 4. | आईटी कंसलटे ंसी | 30 |
| 5. | डेटा प्रोसेसिंग सेंटर | 25 |
| 6. | आर्टिफिशियल इंटेलीजे स संबंधी रिसर्च एंड डेव्हलपमेंट ं | 10 |
| क्र. | सेवा का नाम | न्यूनतम स्थाई पू जी ं निवेश (रूपये लाख में) |
| 1 | 2 | 3 |
| (स) | इंजीनियरिंग सर्विसेस | |
| 1. | आटो मोबाईल रिपेयरिंग एंड सर्विस सेंटर (समूह-3 के विकासखण्डों मे ) ं | 10 |
| 2. | सामान्य इंजीनियरिंग एंड फेब्रीकेशन सेवा विकासखण्ड समूह-2 एवं 3 हेतु | 10 |
| 3. | सामान्य इंजीनियरिंग एंड फेब्रीकेशन सेवा विकासखण्ड समूह-3 हेतु | 05 |
| 4. | रेल्वे परिवहन उपकरणो का मरम्मत एवं रखरखाव ं | 25 |
| 5. | अन्य सभी प्रकार की औद्योगिक मशीनों के मरम्मत सेवा केन्द्र | 25 |
| 6. | कृषि संबंधी उपकरणो की मरम्मत सेवा केन्द्र ं | 10 |
| (द) | रिसर्च एंड डेव्हलपमे ट सेक्टर ं | |
| 1. | एनएबीएल प्रमाणित इण्डस्ट्रीयल रिसर्च एंड डेव्हलपमेंट लैब | 15 |
| 2. | इण्डस्ट्रीयल टेस्टिंग लैब | 125 |
| 3. | कच्चे माल एवं अंतिम उत्पाद के टेस्टिंग में संलग्न लैब | 25 |
| (इ) | पर्यटन, मनोरंजन एवं अन्य सामाजिक सेवा सेक्टर | |
| 1. | एम्यूजमेंट/वॉटर/एडवेंचर पार्क (भूमि की कीमत को छोड़कर) | 1500 |
| 2. | होटल, रिजॉर्ट एवं कन्वेंशन सं े टर (भूमि की कीमत को छोड़कर) | 1500 |
| 3. | म्यूजियम तथा अन्य सांस्कृतिक सेवाएं | 100 |
| 4. | इ र्को टूरिज्म केन्द्र (समूह 2 एवं 3 के विकासखण्ड हेतु) | 100 |
| 5. | हेल्थ वेलनेस सेटर (भूमि की कीमत को छोड़कर) | 500 |
| 6. | होम स्टे सेवाऐं (सरगुजा एवं बस्तर संभाग तथा राज्य के वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र के 20 कि.मी. की परिधि में) (भूमि की कीमत को छोड़कर) टीप- इस श्रेणी की सेवा इकाईयों को स्थाई लागत पूंजी अनुदान की पात्रता नहीं होगी। ब्याज अनुदान, उस अवधि में भुगतान किये गये नेट एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति की सीमा तक ही देय होगा। | 05 |
୧୩୬୦ (୫୦)
| क्र. | सेवा का नाम | न्यूनतम स्थाई पू जी ं निवेश (रूपये लाख में) |
| 1 | 2 | 3 |
| 7. | वर्किंग वुमन हॉस्टल (भूमि की कीमत को छोड़कर) | 500 |
| 8. | सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) | 500 |
| 9. | एडवे चर टूरिज्म एक्टिविटीज़ से संबंधित सुविधाओं की स्थापना ं | 25 |
| (फ) | बिजनेस सेवा केन्द्र | |
| 1. | हॉलमार्क प्रमाणन सेवा केन्द्र | 10 |
| 2. | प्रिंटिंग, डिजिटल प्रिंटिंग एवं 3डी प्रिंटिंग जॉबवर्क (भूमि की कीमत को छोड़कर) | 15 |
| 3. | इलेक्ट्रिक वाहनों हेतु चार्जिंग स्टेशन सेवा केन्द्र (भूमि की कीमत को छोड़कर) | 25 |
| 4. | पावर लॉण्ड्रीज़ | 25 |
| 5. | मशीन संचालित बीज ग्रेडिंग सेवाएं | 05 |
| (ज) | पर्यावरण संरक्षण से संबंधित सेवाएं | |
| 1. | e-Waste management | 05 |
| 2. | Common Effluent Treatment Plant | 100 |
| 3. | Hazardous and Other Waste Disposal/Management | 50 |
टीप :- (1) उपरोक्त सूची में नवीन सेवा के समावेश/विलोपन/संवर्धन के अधिकार राज्य शासन के संबंधित विभाग को होगें। विभाग द्वारा आवश्यकतानुसार समय-समय पर अथवा अधिकतम 06 माह के अंतराल में सूची को संशोधित किया जा सकेगा। (2) राज्य शासन द्वारा समय-समय पर अधिसूचित अन्य सेवा/गतिविधियॉं/क्षेत्र संशोधन किया जा सकेगा।
------
୧୩୬୦ (୫୧)औद्योगिक विकास नीति 2024-30 अंतर्गत
औद्योगिक
निवेश प्रोत्साहन
( अनुदान, छूट एवं रियायतें ) (इस नीति की कंडिका 12 के अंतर्गत वर्णित प्रावधानों के संदर्भ में ) ୧୩୬୦ (୫୨) औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन
के प्रावधान୧୩୬୦ (୫୩) औद्यागिक निवेश प्रोत्साहन ୧୩୬୦ (୫୪) परिशिष्ट-''7'' एमएसएमई सेवा श्रेणी उद्यमों के लिए औद्यागिक निवेश प्रोत्साहन ( अनुदान, छूट एवं रियायतें )
औद्योगिक विकास नीति 2024-30 की अवधि में राज्य के विभिन्न विकासखंडों में परिशिष्ट-6 में उल्लेखित केवल पात्र नवीन एमएसएमई सेवा उद्यमों की स्थापना पर निवेशक इकाईयों को उनके द्वारा परियोजना में स्थाई पूंजी निवेश की मदों पर निवेश होने वाली राशि पर कुल 150 प्रतिशत तक औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जावेगा।
इस पैकेज में अनुदान/छूट/रियायतें/प्रतिपूर्ति की निम्नानुसार सुविधाएं दी जा सकेंगी :-
(1) नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी ) प्रतिपूर्ति-
राज्य में स्थापित पात्र नवीन सेवा उद्यम के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 10 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) का अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 150 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति की जावेगी।
अथवा
स्थायी पूंजी निवेश अनुदान -
राज्य में स्थापित पात्र नवीन सेवा उद्यम के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को निम्नलिखित विवरण अनुसार स्थायी पूंजी निवेश अनुदान देय होगा -
| उद्यम का स्तर | क्षेत्र की श्रेणी | स्थायी पूंजी निवेश पर अनुदान का प्रतिशत | स्थायी पूंजी निवेश अनुदान की अधिकतम सीमा (राशि रूपये लाख में) |
| सूक्ष्म उद्यम | समूह 1 | 35 | 35 |
| समूह 2 | 40 | 40 | |
| समूह 3 | 45 | 45 | |
| लघु उद्यम | समूह 1 | 35 | 350 |
| समूह 2 | 40 | 450 | |
| समूह 3 | 45 | 550 | |
| मध्यम उद्यम | समूह 1 | 35 | 700 |
| समूह 2 | 40 | 750 | |
| समूह 3 | 45 | 800 |
टीप :- (अ) सूक्ष्म सेवा उद्यम श्रेणी को अनुदान का वितरण एक किश्त में किया जावेगा। (ब) लघु सेवा उद्यम श्रेणी को अनुदान का वितरण तीन वर्षाें में समान किश्तों में किया जावेगा୧୩୬୦ (୫୫) (स) मध्यम सेवा उद्यम श्रेणी को अनुदान का वितरण पांच वर्षाें में समान किश्तों में किया जावेगा। नोटः- (1) बिन्दु क्रमांक 1 में दर्शित नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) प्रतिपूर्ति अथवा स्थायी पूंजी निवेश अनुदान में से कोई एक सुविधा विकल्प चयन के आधार पर ली जा सकेगी। इस हेतु एक बार लिया गया विकल्प अपरिवर्तनीय होगा। विकल्प चयन करने हेतु निवेशक को विभाग द्वारा निर्धारित प्रारूप में विकल्प पत्र शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत किया जाना आवश्यक होगा।
(2) स्थायी पूंजी अनुदान की प्रथम किश्त का भुगतान उत्पादन प्रारंभ करने के पश्चात प्रस्तुत आवेदन पर नियमानुसार स्वीकृति के पश्चात किया जा सकेेगा।
(2) ब्याज अनुदान :-
इस नीति के अंर्तगत राज्य में स्थापित पात्र सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम नवीन सेवा उद्यमों की स्थापना पर उद्यमों के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक से अनुज्ञा प्राप्त वित्तीय संस्थाओं से प्राप्त किये गये सावधि ऋण पर निम्नलिखित अनुसार ब्याज अनुदान प्रदान किया जावेगा : -
| उद्यम का स्तर | क्षेत्र की श्रेणी | अनुदान की अवधि (वर्षो में) | अनुदान का प्रतिशत | अनुदान की वार्षिक अधिकतम सीमा (राशि ₹ लाख मे ) ं |
| सूक्ष्म उद्यम | समूह 1 | 6 | 45 | 20 |
| समूह 2 | 7 | 50 | 25 | |
| समूह 3 | 8 | 55 | 30 | |
| लघु उद्यम | समूह 1 | 6 | 45 | 30 |
| समूह 2 | 7 | 50 | 35 | |
| समूह 3 | 8 | 55 | 40 | |
| मध्यम उद्यम | समूह 1 | 6 | 45 | 40 |
| समूह 2 | 7 | 50 | 45 | |
| समूह 3 | 8 | 55 | 50 |
(3) विद्युत शुल्क छूट :-
इस नीति के अंर्तगत राज्य में स्थापित पात्र सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम नवीन सेवा उद्यमों की स्थापना पर निम्नलिखित विवरण अनुसार विद्युत शुल्क भुगतान से छूट प्रदान की जाएगी :-
| क्षेत्र | अनुदान की अधिकतम अवधि |
| समूह-1 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 06 वर्ष तक पूर्ण छूट |
| समूह-2 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 08 वर्ष तक पूर्ण छूट |
| समूह-3 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 10 वर्ष तक पूर्ण छूट |
୧୩୬୦ (୫୬) (4) स्टाम्प शुल्क से छूट - निवेशकों के वर्ग की दृष्टि से वर्गीकृत समस्त श्रेणियों के उद्यमियों द्वारा स्थापित पात्र सूक्ष्म, लघु, मध्यम की नवीन सेवा उद्यम की स्थापना पर स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट दी जायेगी । औद्योगिक नीति-2024-30 के परिशिष्ट - 6 में वर्णित एमएसएमई सेवा श्रेणी उद्यम हेतु क्रय/पट्टे पर ली गई भूमि/भवन पर बैंक/वित्तीय संस्थाओं द्वारा ऋण से संबंधित विलेखों पर।
(5) परियोजना प्रतिवेदन अनुदान - राज्य में नवीन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के सेवा उद्यम की स्थापना पर परियोजना प्रतिवदेन पर किए गए व्यय की प्रतिपूिर्त, स्थायी पूजीं निवेश का 1 प्रतिशत, अधिकतम ₹ 10.00 लाख।
(6) गुणवत्ता प्रमाणीकरण अनुदान-
राज्य में स्थापित नवीन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के सेवा उद्यमों को आई0एस0ओ0- 9000, आई0एस0ओ0-14000, आई0एस0ओ0 18000, आई.एस.ओ. 22000 श्रेणी, बी.आई.एस. प्रमाणीकरण, जेड (ZED) प्रमाणीकरण उर्जा दक्षता ब्यूरो प्रमाणन (बी.ई.ई), नवीन एवं नवकरणीय उर्जा के क्षेत्र में एल.ई.बी.पी. प्रमाणीकरण, एगमार्क, यूरो मानक या अन्य समान राष्ट्रीय/ अन्र्तराष्ट्रीय प्रमाणीकरण प्राप्त करने पर हुये व्यय की 50 प्रतिशत राशि, अधिकतम ₹ 10 लाख, की प्रतिपूर्ति प्रत्येक प्रमाणीकरण प्राप्त करने पर की जाएगी।
(7) पेटेन्ट अनुदान -
राज्य में स्थापित नवीन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के सेवा उद्यमों को उनके मूल कार्य/अनुसंधान के आधार पर सफलतापूर्वक पंजीकृत एवं स्वीकृत पेटेन्ट के लिए प्रोत्साहित किया जावेगा एवं प्रत्येक पेटेन्ट हेतु किये गये व्यय की 50 प्रतिशत राशि अधिकतम ₹ 20 लाख, की प्रतिपूर्ति की जाएगी। (8) प्रौद्योगिकी क्रय अनुदान - राज्य में स्थापित नवीन सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम की श्रेणी में अपात्र श्रेणी के उद्यमों को छोड़कर इस योजना के अन्तर्गत एन.आर.डी.सी. या अन्य शासकीय अनुसंधान केन्द्राें से प्रौद्योगिकी क्रय के व्यय पर किये गये भुगतान का 50 प्रतिशत अधिकतम ₹ 10 लाख की प्रतिपूर्ति की जावेगी। (9) मार्जिन मनी अनुदान -
अनुसूचित जाति/जनजाति, महिला उद्यमी, सेवानिवृत्त सैनिक, सेवानिवृत अग्निवीर सैनिक, नक्सलवाद से प्रभावित व्यक्ति, तृतीय लिंग एवं निःशक्तजन वर्ग के उद्यमियों द्वारा राज्य में स्थापित नवीन सूक्ष्म एवं लघु सेवा उद्यमों को जिनकी परियोजना लागत ₹ 10 करोड़ तक हो, पूंजीगत लागत के 25 प्रतिशत तक मार्जिन मनी अनुदान दिया जा सकेगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹ 100 लाख होगी।୧୩୬୦ (୫୭) (10) दिव्यांग (निःशक्त), सेवानिवृत्त अग्निवीर व आत्मसमर्पित नक्सली व्यक्ति रोजगार अनुदान -
नवीन पात्र सूक्ष्म एवं लघु, मध्यम सेवा उद्यम को भारत सरकार के दिव्यांग (निःशक्त), (समान अवसर का अधिकार, संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 के तहत् निःशक्तों एवं राज्य के सेवानिवृत्त अग्निवीर व आत्मसमर्पित नक्सली व्यक्ति को स्थायी नौकरी प्रदान करने पर, उनके शुद्ध वेतन/पारिश्रमिक की 40 प्रतिशत अनुदान की राशि की अनुदान प्रतिपूर्ति, 5 वर्ष की अवधि तक अधिकतम रूपये पांच लाख वार्षिक की सीमा तक की जावेगी। (11) प्रशिक्षण वृत्ति प्रतिपूर्ति :-
नवीन पात्र सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम सेवा उद्यम की स्थापना के प्रकरणों में रूपये 50,000/- प्रतिमाह से कम वेतन प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के प्रत्येक मूल निवासी कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के मामले में एक बार प्रशिक्षण पर उनके नियोक्ता द्वारा भुगतान किये जाने वाले एक माह का वेतन या अधिकतम राशि रूपये 15000/- प्रति व्यक्ति, जो कम हो, की दर से उद्यम के व्यावसायिक उत्पादन / गतिविधि आरंभ करने की दिनांक से 05 वर्ष की अवधि हेतु अथवा स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक की सीमा तक व्यय प्रतिपूर्ति की जा सकेगी । इस हेतु प्रत्येक कर्मचारी हेतु क्लेम, कर्मचारी के नियोजन के एक वर्ष पश्चात से देय होगा ।
(12) इनवायरनमेंट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट अनुदान (पर्यावरणीय प्रोजेक्ट प्रबंधन अनुदान)-
17.1 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के सेवा उद्यमों के द्वारा पर्यावरण प्रबंधन की दृष्टि से यदि कोई ऐसी तकनीक अपनाई जाती है, जिससे कार्बन क्रेडिट प्राप्त होता है एवं कार्बन फुटप्रिंट कम होता है तो ऐसे प्रत्येक तकनीक पर मशीनरी लागत का 50 प्रतिशत अधिकतम 25 लाख रूपये अनुदान दिया जायेगा। 17.2 विश्व स्तरीय संस्थानों द्वारा कार्बन क्रेडिट के संबंध में दिये जाने वाले अनुदानों की प्राप्ति हेतु कंस्लटेन्ट्स को सूचीबद्ध किया जायेगा।
(13) जल एवं ऊर्जा दक्षता व्यय प्रतिपूर्ति अनुदान -
राज्य में स्थापित उद्यमों द्वारा अपने उद्यम में जल/ऊर्जा पर होने वाले व्यय को नियंत्रित करने तथा ऊर्जा की खपत कम करने के लिए ''जल अथवा ऊर्जा दक्षता एजेंसी'' की सलाह से किये जाने वाले जल खपत/एनर्जी ऑडिट पर होने वाले व्यय के 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम राशि रूपये 5 लाख तक के व्यय की प्रतिपूर्ति की जा सकेगी।
------00------
୧୩୬୦ (୫୮) सेवा श्रेणी वृहद उद्यमों୧୩୬୦ (୫୯) परिशिष्ट-''8'' सेवा श्रेणी के वृहद उद्यम हेतु औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन औद्योगिक विकास नीति 2024-30 की अवधि में राज्य के विभिन्न विकासखंडों में परिशिष्ट-6 में उल्लेखित केवल पात्र नवीन सेवा श्रेणी के वृहद उद्यमों की स्थापना पर निवेशक इकाईयों को उनके द्वारा परियोजना में स्थाई पूंजी निवेश की मदों पर निवेश होने वाली राशि के 150 प्रतिशत तक औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जावेगा।
इस पैकेज में अनुदान/छूट/रियायतें/प्रतिपूर्ति की निम्नानुसार सुविधाएं दी जा सकेंगी :-
(1) नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी ) प्रतिपूर्ति-
वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 10 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) का अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 150 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति की जावेगी।
अथवा
स्थायी पूंजी निवेश अनुदान -
राज्य में नवीन वृहद सेवा उद्यम को निम्नलिखित विवरण अनुसार स्थायी पूंजी निवेश अनुदान दिया जावेगा-
| यंत्र संयंत्र मे पूंजी निवेश ं (रूपये करोड़ में) | अनुदान का प ्रतिशत | अनुदान की अधिकतम राशि (रूपये करोड़ में) | अनुदान वितरण की समयावधि |
| रू. 50 से अधिक किन्तु रू. 200 से कम | 30 | 50 | 10 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
| रू. 200 से अधिक किन्तु रू. 500 से कम | 30 | 140 | 10 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
नोटः- (1) बिन्दु क्रमांक 1 में दर्शित नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) प्रतिपूर्ति अथवा स्थायी पूंजी निवेश अनुदान में से कोई एक सुविधा विकल्प चयन के आधार पर ली जा सकेगी। इस हेतु एक बार लिया गया विकल्प अपरिवर्तनीय होगा। विकल्प चयन करने हेतु निवेशक को विभाग द्वारा निर्धारित प्रारूप में विकल्प पत्र शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत किया जाना आवश्यक होगा।
(2) स्थायी पूंजी अनुदान की प्रथम किश्त का भुगतान उत्पादन प्रारंभ करने के पश्चात प्रस्तुत आवेदन पर नियमानुसार स्वीकृति के पश्चात किया जा सकेेगा। ୧୩୬୦ (୬୦) (2) विद्युत शुल्क छूट :-
नवीन वृहद सेवा उद्यमों को निम्नलिखित विवरण अनुसार विद्युत शुल्क छूट दी जावेगी :-
| क्र. | यंत्र संयंत्र मे पूंजी निवेश ं (रूपये करोड़ में) | विवरण |
| 1 | रू. 50 से अधिक किन्तु रू. 200 से कम वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 6 वर्ष । | |
| 2 | रू. 200 से अधिक किन्तु रू. 500 से कम | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 7 वर्ष । |
(3) स्टाम्प शुल्क से छूट :-
इस पैकेज के अंर्तगत राज्य में नवीन वृहद सेवा उद्यमों की स्थापना में भूमि, शेड तथा भवनों के क्रय/पट्टे पर लिए जाने के मामले में निष्पादित किये जाने विलेखों पर संबंधित भूमि लीज के विलेखों पर स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान किया जायेगा। (4) पंजीयन शुल्क प्रतिपूर्ति :- केवल पात्र नवीन वृहद सेवा उद्यमों को भूमि पर देय पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति प्रदान किया जायेगा। (5) भू उपयोग में परिवर्तन शुल्क में छूट :- नवीन वृहद सेवा उद्यमों को भू-उपयोग परिवर्तन (औद्योगिक प्रयोजन होने पर) अधिकतम 50 एकड़ भूमि तक के लिए भू-पुर्ननिर्धारण कर (डायवर्सन शुल्क) में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी। (6) दिव्यांग (निःशक्त), सेवानिवृत्त अग्निवीर व आत्मसमर्पित नक्सली व्यक्ति रोजगार अनुदान :- नवीन वृहद सेवा उद्यमों को भारत सरकार के दिव्यांग (निःशक्त), (समान अवसर का अधिकार, संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 के तहत् निःशक्तों एवं राज्य के सेवानिवृत्त अग्निवीर व आत्मसमर्पित नक्सली व्यक्ति को स्थायी नौकरी प्रदान करने पर, उनके शुद्ध वेतन/पारिश्रमिक की 40 प्रतिशत अनुदान की राशि की अनुदान प्रतिपूर्ति, 5 वर्ष की अवधि तक अधिकतम रूपये पांच लाख वार्षिक की सीमा तक की जावेगी। (7) ई.पी.एफ. प्रतिपूर्ति :- छत्तीसगढ़ राज्य के कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के ईपीएफ अंशदान में उत्पादन दिनांक से 05 वर्ष तक की 75 प्रतिशत का प्रतिपूर्ति, अधिकतम रु. 01 करोड़ प्रतिवर्ष की पात्रता होगी। (8) प्रशिक्षण वृत्ति प्रतिपूर्ति :- नवीन पात्र वृहद सेवा उद्यम की स्थापना के प्रकरणों में रूपये 50,000/- प्रतिमाह से कम वेतन प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के प्रत्येक मूल निवासी कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के मामले में एक बार प्रशिक्षण पर उनके नियोक्ता द्वारा भुगतान किये जाने वाले एक माह का वेतन या अधिकतम राशि रूपये 15000/- प्रति व्यक्ति, जो कम हो, की दर से उद्यम के व्यावसायिक उत्पादन / गतिविधि आरंभ करने की दिनांक से 05 वर्ष की अवधि हेतु अथवा स्थायी पूंजी निवेश୧୩୬୦ (୬୧) के 100 प्रतिशत तक की सीमा तक व्यय प्रतिपूर्ति की जा सकेगी । इस हेतु प्रथम क्लेम कर्मचारी के नियोजन के एक वर्ष पश्चात से देय होगा ।
(9) रूपये 1000 करोड़ से अधिक निवेश करने वाली इकाइयों के लिए विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन का प्रावधान :-
औद्योगिक नीति, 2024-30 की अवधि में सेवा श्रेणी के वृहद उद्यमों में स्थायी पूंजी निवेश में रूपये 500 करोड़ या इससे अधिक निवेश करने वाली अथवा 1,000 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करने वाले उद्यमों को औद्योगिक नीति, 2024-30 में घोषित आर्थिक निवेश प्रोत्साहन के अतिरिक्त प्रोत्साहन दिये जाने के प्रस्तावों पर मंत्रिमंडलीय उप समिति विचार कर सकेगी।
------00------
୧୩୬୦ (୬୨) हेतु
के प्रावधान୧୩୬୦ (୬୩) (अ-2) औद्योगिक नीति, 2024-30 के अंतर्गत सामान्य श्रेणी सेक्टर के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के सामान्य एवं थ्रस्ट उद्यमों हेतु ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' पैकेज : -
----- औद्योगिक नीति 2024-30 की अवधि में राज्य के विभिन्न विकासखंडों में स्थापित किये जाने वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के सामान्य एवं थ्रस्ट उद्यमों की नवीन उद्यमों की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण'' पर इस नीति में परिभाषित अंतर्गत के प्रकरणों में निवेशक इकाईयों को उनके द्वारा परियोजना में स्थाई पूंजी निवेश की मदों पर निवेश होने वाली राशि के 100 प्रतिशत तक औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जावेगा। इस पैकेज में अनुदान/छूट/रियायतें/प्रतिपूर्ति की निम्नानुसार सुविधाएं दी जा सकेंगी :-
परिशिष्ट -(9.1) (1) नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी ) प्रतिपूर्ति -
| क्र. विकासखण्डों की श्रेणी | सूक्ष्म लघु मध्यम उद्यम को नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी ) प ्रतिपूर्ति की सीमा | ||
| सामान्य उद्यम | थ्रस्ट उद्यम | ||
| 1 | समूह-1 | वाणिज्यिक उत्पादन करने के दिनांक से 5 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 75 प्रतिशत तक | वाणिज्यिक उत्पादन करने के दिनांक से 6 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक |
| 2 | समूह-2 | वाणिज्यिक उत्पादन करने के दिनांक से 7 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 75 प्रतिशत तक | वाणिज्यिक उत्पादन करने के दिनांक से 8 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक |
| 3 | समूह-3 | वाणिज्यिक उत्पादन करने के दिनांक से 9 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 75 प्रतिशत तक | वाणिज्यिक उत्पादन करने के दिनांक से 10 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक |
अथवा ୧୩୬୦ (୬୪) स्थायी पूंजी निवेश अनुदान -
सामान्य वर्ग के उद्यमियों द्वारा स्थापित पात्र नवीन उद्यम/विद्यमान उद्यम में विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण'' पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को निम्नलिखित विवरण एवं तालिका विवरण अनुसार स्थायी पूंजी निवेश अनुदान देय होगा - (अ) सूक्ष्म उद्यम श्रेणी को अनुदान का वितरण एक किस्त में किया जावेगा। (ब) लघु उद्यम श्रेणी को अनुदान का वितरण तीन वर्षाें में समान किस्तों में किया जावेगा । (स) मध्यम उद्यम श्रेणी को अनुदान का वितरण पांच वर्षाें में समान किस्तों में किया जावेगा।
| उ द्यम का स्तर | क्षेत्र की श्रेणी | सामान्य उद्यम | थ्रस्ट उद्यम | ||
| स्थायी पूंजी निवेश पर अनुदान का प्रतिशत | स्थायी पूंजी निवेश अनुदान की अधिकतम सीमा (राशि रूपये लाख में) | स्थायी पूंजी निवेश पर अनुदान का प्रतिशत | स्थायी पूंजी निवेश अनुदान की अधिकतम सीमा (राशि रूपये लाख में) | ||
| सूक्ष्म उद्यम | समूह 1 | 30 | 30 | 35 | 35 |
| समूह 2 | 35 | 35 | 40 | 40 | |
| समूह 3 | 40 | 40 | 45 | 45 | |
| लघु उद्यम | समूह 1 | 30 | 250 | 35 | 350 |
| समूह 2 | 35 | 350 | 40 | 450 | |
| समूह 3 | 40 | 450 | 45 | 550 | |
| मध्यम उद्यम | समूह 1 | 30 | 400 | 35 | 700 |
| समूह 2 | 35 | 450 | 40 | 750 | |
| समूह 3 | 40 | 500 | 45 | 800 |
टीप :-
(1) बिन्दु क्रमांक (1) में दर्शित नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) प्रतिपूर्ति अथवा स्थायी पूंजी निवेश अनुदान में से कोई एक सुविधा विकल्प चयन के आधार पर ली जा सकेगी। इस हेतु एक बार लिया गया विकल्प अपरिवर्तनीय होगा। विकल्प चयन करने हेतु निवेशक को विभाग द्वारा निर्धारित प्रारूप में विकल्प पत्र शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत किया जाना आवश्यक होगा।
(2) स्थायी पूंजी अनुदान की प्रथम किश्त का भुगतान उत्पादन प्रारंभ करने के पश्चात प्रस्तुत आवेदन पर निर्धारित स्वीकृति के पश्चात किया जा सकेेगा।୧୩୬୦ (୬୫) परिशिष्ट -(9.2) (2) ब्याज अनुदान :-
इस नीति के अंर्तगत सामान्य वर्ग के उद्यमियों द्वारा स्थापित पात्र सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम नवीन उद्यम/विद्यमान उद्यम में विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण'' को सामान्य/थ्रस्ट उत्पाद के उद्यमों के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक से अनुज्ञा प्राप्त वित्तीय संस्थाओं से प्राप्त किये गये सावधि ऋण पर निम्नलिखित अनुसार ब्याज अनुदान प्रदान किया जावेगा : -
| उद्यम का स्तर | क्षेत्र की श्रेणी | सामान्य उद्यम | थ्रस्ट उद्यम | ||||
| अनुदान की अवधि (वर्षो में) | अनुदान का प्रतिशत | अनुदान की वार्षिक अधिकतम सीमा (राशि ₹ लाख में) | अनुदान की अवधि (वर्षों में) | अनुदान का प्रतिशत | अनुदान की वार्षिक अधिकतम सीमा (राशि ₹ लाख में) | ||
| सूक्ष्म उद्यम | समूह 1 | 5 | 40 | 15 | 6 | 45 | 20 |
| समूह 2 | 6 | 45 | 20 | 7 | 50 | 25 | |
| समूह 3 | 7 | 50 | 25 | 8 | 55 | 30 | |
| लघु उद्यम | समूह 1 | 5 | 40 | 25 | 6 | 45 | 30 |
| समूह 2 | 6 | 45 | 30 | 7 | 50 | 35 | |
| समूह 3 | 7 | 50 | 35 | 8 | 55 | 40 | |
| मध्यम उद्यम | समूह 1 | 5 | 40 | 35 | 6 | 45 | 40 |
| समूह 2 | 6 | 45 | 40 | 7 | 50 | 45 | |
| समूह 3 | 7 | 50 | 45 | 8 | 55 | 50 |
परिशिष्ट -(9.3) (3) विद्युत शुल्क छूट :-
इस नीति के अंर्तगत सामान्य वर्ग के उद्यमियों द्वारा स्थापित मात्र नवीन उद्यम हेतु सामान्य/थ्रस्ट उत्पाद के उद्यमों को पात्रतानुसार से निम्नलिखित विवरण अनुसार विद्युत शुल्क भुगतान से छूट प्रदान की जाएगी :-
| क्षेत्र | सामान्य उद्यम | थ्रस्ट उद्यम |
| समूह-1 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 05 वर्ष तक पूर्ण छूट | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 06 वर्ष तक पूर्ण छूट |
| समूह-2 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 07 वर्ष तक पूर्ण छूट | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 08 वर्ष तक पूर्ण छूट |
୧୩୬୦ (୬୬)
| क्षेत्र | सामान्य उद्यम | थ्रस्ट उद्यम |
| समूह-3 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 09 वर्ष तक पूर्ण छूट | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 10 वर्ष तक पूर्ण छूट |
परिशिष्ट -(9.4) (4) स्टाम्प शुल्क से छूट -
निवेशकों के वर्ग की दृष्टि से वर्गीकृत समस्त श्रेणियों के उद्यमियों द्वारा स्थापित पात्र सूक्ष्म, लघु, मध्यम की ''नवीन उद्यम स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण'' पर निम्नांकित प्रकरणों में स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट दी जायेगी :-
(अ) भूमि, शेड तथा भवनों के क्रय/पट्टे के निष्पादित विलेखों पर संबंधित भूमि लीज के विलेखों पर (माइनिंग लीज की भूमि को छोड़कर)।
(ब) ऋण-अग्रिम से संबंधित विलेखों के निष्पादन पर बैंक/वित्तीय संस्थाओं द्वारा ऋण स्वीकृति दिनांक से तीन वर्ष तक।
परिशिष्ट -(9.5) (5) मंडी शुल्क से छूट -
राज्य में स्थापित होने वाले मात्र नवीन उद्यमों की स्थापना पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के कृषि एवं खाद्य उत्पादों के प्रसंस्करण उद्यमों एवं जैव इंधन/एथेनॉल उद्यमों हेतु राज्य की मंडियों/सीधे उत्पादनकर्ता कृषक/इकाई/प्रथम कच्चा माल क्रय अथवा प्रमाण पत्र जारी होने के दिनांक, जो भी पश्चात् हो, से 5 वर्ष तक के लिये कृषि उत्पादों (परिशिष्ट-3 में वर्णित अपात्र उद्यमोें को छोड़कर) पर लगने वाले मंडी शुल्क से पूर्ण छूट अधिकतम राशि ₹ 5.00 करोड़ प्रतिवर्ष की सीमा तक प्रदान की जायेगी, साथ ही छूट की कुल अधिकतम सीमा इकाई द्वारा किये गये स्थायी पूंजी निवेश के 75 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।
परिशिष्ट -(9.6) (6) भू-उपयोग में परिवर्तन शुल्क में छूट -
निवेशकों के वर्ग की दृष्टि से वर्गीकृत समस्त श्रेणियों के उद्यमियों द्वारा स्थापित ''नवीन उद्यम स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण'' हेतु सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को୧୩୬୦ (୬୭) भू-उपयोग परिवर्तन (औद्योगिक प्रयोजन होने पर) अधिकतम 15 एकड़ भूमि तक के लिए भू-पुर्ननिर्धारण कर (डायवर्सन शुल्क) में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी तथा निजी औद्योगिक क्षेत्रों/औद्योगिक पार्कों को न्यूनतम 15 एकड़ तक भूमि व्यपवर्तित किये जाने पर पुनर्निधारण में 90 प्रतिशत छूट रहेगी।
उपरोक्त परिवर्तन शुल्क में छूट हेतु उद्यम आकांक्षा में दर्शायी गयी भूमि की आवश्यकता के आधार पर संबंधित जिले के जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्रों के कार्यालय प्रमुख द्वारा प्रमाण पत्र जारी किया जायेगा। इस हेतु प्रारूप पृथक से उद्योग संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी किया जायेगा।
परिशिष्ट -(9.7) (7) औद्योगिक क्षेत्रों से बाहर (भूमि बैंक) भू-आवंटन सेवा शुल्क में रियायत :- औद्योगिक प्रयोजनार्थ (भूमि बैंक) हेतु सूक्ष्म उद्यम को छोड़कर अन्य सभी श्रेणी के उद्यमों के लिए निजी भूमि के अर्जन एवं शासकीय भूमि के हस्तांतरण से संबंधित प्रकरणाें में उद्यम विभाग/छत्तीसगढ़ स्टेट इण्डस्ट्रियल डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन द्वारा निजी भूमि के अर्जन/शासकीय भूमि के हस्तांतरण उपरांत आबंटन के लिए प्राप्त किए जाने वाले सेवा शुल्क निम्नानुसार हैं : -
क - औद्योगिक क्षेत्रों सेे बाहर स्थित भूमि आबंटन हेतु :- 1. निजी भूमि के अर्जन के संबंध में भूमि अर्जन के मूल्य पर एवं 2. शासकीय भूमि के मामले में हस्तांतरण से प्राप्त शासकीय भूमि सेे निकटवर्ती निजी भूमि के मूल्य के बराबर की देय राशि पर, उद्योग विभाग/ सी.एस.आई.डी.सी. को देय 10 प्रतिशत भू-आवंटन सेवा शुल्क में पूर्ण रियायत दी जावेगी।
ख - निजी भूमि के अर्जन हेतु जिला प्रशासन को देय भू-अर्जन मूल्य के 5 प्रतिशत राशि पर कोई रियायत नहीं दी जावेगी।
परिशिष्ट -(9.8) (8) परियोजना प्रतिवेदन अनुदान - राज्य में नवीन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के उद्यमों की स्थापना उपरांत परियोजना प्रतिवदेन पर किए गए व्यय की प्रतिपूिर्त, स्थायी पूजीं निवेश का 1 प्रतिशत, अधिकतम ₹ 10.00 लाख। ୧୩୬୦ (୬୮) परिशिष्ट -(9.9) (9) गुणवत्ता प्रमाणीकरण अनुदान-
सामान्य वर्ग के उद्यमियों द्वारा राज्य में स्थापित नवीन एवं विद्यमान सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के उद्यमों को आई0एस0ओ0-9000, आई0एस0ओ0-14000, आई0एस0ओ0 18000, आई.एस.ओ. 22000 श्रेणी, बी.आई.एस. प्रमाणीकरण, जेड (ZED) प्रमाणीकरण उर्जा दक्षता ब्यूरो प्रमाणन (बी.ई.ई), नवीन एवं नवकरणीय उर्जा के क्षेत्र में एल.ई.बी.पी. प्रमाणीकरण, एगमार्क, यूरो मानक या अन्य समान राष्ट्रीय/ अन्र्तराष्ट्रीय प्रमाणीकरण प्राप्त करने पर हुये व्यय की 50 प्रतिशत राशि, अधिकतम ₹ 10 लाख, की प्रतिपूर्ति प्रत्येक प्रमाणीकरण प्राप्त करने पर की जाएगी।
परिशिष्ट -(9.10) (10) तकनीकी पेटेन्ट अनुदान -
सामान्य वर्ग के उद्यमियों द्वारा राज्य में स्थापित नवीन एवं विद्यमान सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के उद्यमों को उनके मूल कार्य/अनुसंधान के आधार पर सफलतापूर्वक पंजीकृत एवं स्वीकृत पेटेन्ट के लिए प्रोत्साहित किया जावेगा एवं प्रत्येक पेटेन्ट हेतु किये गये व्यय की 50 प्रतिशत राशि अधिकतम ₹ 20 लाख, की प्रतिपूर्ति की जाएगी।
परिशिष्ट -(9.11) (11) प्रौद्योगिकी क्रय अनुदान -
सामान्य वर्ग के उद्यमियों द्वारा राज्य में स्थापित नवीन एवं विद्यमान सूक्ष्म, लघु, मध्यम, उद्यम की श्रेणी में संतृप्त श्रेणी के उद्यमों को छोड़कर इस योजना के अन्तर्गत एन.आर.डी.सी. या अन्य शासकीय अनुसंधान केन्द्राें से प्रौद्योगिकी क्रय के व्यय पर किये गये भुगतान का 50 प्रतिशत अधिकतम ₹ 10 लाख की प्रतिपूर्ति की जावेगी।
परिशिष्ट -(9.12) (12) मार्जिन मनी अनुदान -
अनुसूचित जाति/जनजाति, महिला उद्यमी, सेवानिवृत्त सैनिक, नक्सलवाद से प्रभावित व्यक्ति, तृतीय लिंग एवं निःशक्तजन वर्ग के उद्यमियों द्वारा राज्य में स्थापित नवीन सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को ₹ 10 करोड़ के पूंजीगत लागत के 25 प्रतिशत तक मार्जिन मनी अनुदान दिया जा सकेगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹ 100 लाख होगी।୧୩୬୦ (୬୯) परिशिष्ट -(9.13) (13) दिव्यांग (निःशक्त), सेवानिवृत्त अग्निवीर व आत्मसमर्पित नक्सली व्यक्ति रोजगार अनुदान -
निवेशकों के वर्ग की दृष्टि से वर्गीकृत समस्त श्रेणियों के उद्यमियों द्वारा स्थापित नवीन एवं विद्यमान पात्र सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम एवं थ्रस्ट उद्यमों को भारत सरकार के दिव्यांग (निःशक्त), (समान अवसर का अधिकार, संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 के तहत् निःशक्तों एवं राज्य के सेवानिवृत्त अग्निवीर व आत्मसमर्पित नक्सली व्यक्ति को स्थायी नौकरी प्रदान करने पर, उनके शुद्ध वेतन/पारिश्रमिक की 40 प्रतिशत अनुदान की राशि की अनुदान प्रतिपूर्ति, 5 वर्ष की अवधि तक अधिकतम रूपये पांच लाख वार्षिक की सीमा तक की जावेगी।
परिशिष्ट -(9.14) (14) इनवायरनमेंट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट अनुदान (पर्यावरणीय प्रोजेक्ट प्रबंधन अनुदान)-
17.1 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के उद्यमों के द्वारा पर्यावरण प्रबंधन की दृष्टि से यदि कोई ऐसी तकनीक अपनाई जाती है, जिससे कार्बन क्रेडिट प्राप्त होता है एवं कार्बन फुटप्रिंट कम होता है तो ऐसे प्रत्येक तकनीक पर मशीनरी लागत का 50 प्रतिशत अधिकतम 25 लाख रूपये अनुदान दिया जायेगा।
17.2 विश्व स्तरीय संस्थानों द्वारा कार्बन क्रेडिट के संबंध में दिये जाने वाले अनुदानों की प्राप्ति हेतु कंस्लटेन्ट्स को सूचीबद्ध किया जायेगा।
परिशिष्ट -(9.15) (15) जल एवं ऊर्जा दक्षता व्यय प्रतिपूर्ति अनुदान -
राज्य में स्थापित उद्यमों द्वारा अपने उद्यम में जल/ऊर्जा पर होने वाले व्यय को नियंत्रित करने तथा ऊर्जा की खपत कम करने के लिए ''जल अथवा ऊर्जा दक्षता एजेंसी'' की सलाह से किये जाने वाले जल खपत/एनर्जी ऑडिट पर होने वाले व्यय के 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम राशि रूपये 5 लाख तक के व्यय की प्रतिपूर्ति की जा सकेगी। ୧୩୬୦ (୭୦) परिशिष्ट -(9.16) (16) परिवहन अनुदान (केवल निर्यातक उद्यमों हेतु)
औद्योगिक नीति 2024-30 की अवधि में राज्य में स्थापित इकाईयों द्वारा निर्मित उत्पादों (खदान सामग्री को छोड़कर) के निर्यात के लिये निर्माण स्थान से बन्दरगाह एवं विमानपत्तन पोर्ट जहां से वस्तु का निर्यात होना है तक उत्पाद परिवहन हेतु व्यय किये गये वास्तविक भाड़ा (शासकीय शुल्क एवं करों को छोड़कर) के 50 प्रतिशत के बराबर सहायता प्रदान की जायेगी। सहायता की अधिकतम सीमा 50 लाख रूपये प्रतिवर्ष होगी, अधिकतम 05 वर्ष तक होगी। अनुसूचित जनजाति/जाति वर्ग हेतु सहायता की अधिकतम सीमा 60 लाख रूपये प्रतिवर्ष होगी।''
परिशिष्ट -(9.17) (17) औद्योगिक क्षेत्रों/औद्योगिक पार्कों में भू-आबंटन पर भू-प्रीमियम में छूट/रियायत''
सामान्य वर्ग के उद्यमियों द्वारा स्थापित किये जाने वाले पात्र सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को निविदा द्वारा आबंटित होने वाले भू-खण्डों को छोड़कर शेष आबंटन होने वाले उद्योग विभाग/सीएसआईडीसी के औद्योगिक क्षेत्रों में भू आबंटन पर लगने वाले भू-प्रीमियम पर निम्नलिखित तालिका में वर्णित विवरण अनुसार छूट सीधे प्रदान की जायेगीः-
| क्र. | विकासखण्ड | थ्रस्ट सेक्टर उद्यम | सामान्य उद्यम |
| 1 | समूह - 1 | भू-प्रब्याजि में 30 प्रतिशत | निरंक |
| 2 | समूह - 2 | भू-प्रब्याजि में 40 प्रतिशत | भू-प्रब्याजि मे ं 20 प्रतिशत |
| 3 | समूह - 3 | भू-प्रब्याजि में 50 प्रतिशत | भू-प्रब्याजि मे ं 30 प्रतिशत |
परिशिष्ट -(9.18) (18) एस.एम.ई. स्टॉक एक्सचेंज से सूचीबद्धता हेतु किये गये व्यय की प्रतिपूर्ति -
सामान्य वर्ग के उद्यमियों द्वारा स्थापित किये जाने वाले पात्र सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को एस.एम.ई. स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्धता हेतु किये गये व्यय की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति, अधिकतम राशि रु. 10 लाख तक प्रदान की जा सकेगी।
परिशिष्ट -(9.19)୧୩୬୦ (୭୧) (19) एम.एस...एम..ई. थ्रस्ट सेक्टर उद्यम हेतु कर्मचारियों के प्रशिक्षण हेतु किये गये व्यय की प्रतिपूर्ति -
नवीन थ्रस्ट सेक्टर के पात्र उद्यम की स्थापना के प्रकरणों में रूपये 50,000/- प्रतिमाह से कम वेतन प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के प्रत्येक मूल निवासी कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के मामले में एक बार प्रशिक्षण पर उनके नियोक्ता द्वारा भुगतान किये जाने वाले एक माह का वेतन या अधिकतम राशि रूपये 15000/- प्रति व्यक्ति, जो कम हो, की दर से उद्यम के व्यावसायिक उत्पादन / गतिविधि आरंभ करने की दिनांक से 05 वर्ष की अवधि हेतु अथवा स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक की सीमा तक व्यय प्रतिपूर्ति की जा सकेगी । इस हेतु प्रथम क्लेम कर्मचारी के नियोजन के एक वर्ष पश्चात से देय होगा ।
परिशिष्ट -(9.20) (20) अनुसूचित जनजाति/जाति वर्ग के उद्यमियों को औद्योगिक क्षेत्रों में भू-आबंटन पर भू-प्रीमियम में छूट/रियायत :-
(केवल सूक्ष्म, लघु, मध्यम श्रेणी के उद्यमों/सेवा उद्यमों के लिए) -
(1) उद्योग विभाग एवं छत्तीसगढ़ स्टेट इण्डस्ट्रियल डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के औद्योगिक क्षेत्रों में औद्योगिक एवं सेवा उद्यमों की स्थापना हेतु भू-प्रब्याजि में 100 प्रतिशत छूट दी जायेगी एवं भू-भाटक की दर 1 रूपये प्रति एकड़ वार्षिक होगी। संधारण शुल्क, स्ट्रीट लाईट शुल्क, जल शुल्क एवं अन्य कर व उपकर निर्धारित दर पर देय होंगे।
(2) औद्योगिक क्षेत्रों में (उद्यम व सेवा उद्यम में) निःशुल्क प्लाट आबंटन की सुविधा प्राप्त हो सके, इस हेतु राज्य शासन/छत्तीसगढ़ स्टेट इण्डस्ट्रियल डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा संधारित समस्त औद्योगिक क्षेत्रों में समूह-1 एवं समूह-2 के विकासखण्डों में 25 प्रतिशत तक एवं समूह-3 के विकासखण्ड में 50 प्रतिशत तक भू-खण्डों का इन वर्गों के लिए आरक्षित रखा जावेगा । आरक्षण की अवधि नियत दिनांक अथवा औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना दिनांक, जो भी पश्चात् का हो, से दो वर्ष तक रहेगी । (3) अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के उद्यमियों को भूखण्ड/भूमि की मात्रा ''छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि भवन प्रबंधन नियम-2015'' में वर्णित पात्रता के नियम एवं प्रावधानों के अनुसार होगी।
-----------
୧୩୬୦ (୭୨) अध्याय - (ब)
हेतु
औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन୧୩୬୦ (୭୩) पृष्ठभूमि -
(1) राज्य में वृहद उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए औद्योगिक नीति 2024-30 में वृहद उद्यमों को पूंजी निवेश के आधार पर विभाजित किया जाना युक्तियुक्त प्रतीत होता है। (2) इस हेतु विभिन्न सेक्टर में होने वाले निवेश के आधार पर इन उद्यमों में निवेशित होने वाली राशि के आधार पर पैकेज का निर्धारण किया जा रहा है। प्रथमतः राज्य में स्थापित होने वाले कोर सेक्टर के वृहद उद्यमों के लिए सामान्य प्रावधान नीति के अंतर्गत वर्गीकृत विकासखण्डों के आधार पर किये जाने का प्रावधान किया जा रहा है।
(3) उपरोक्त के अतिरिक्त विशिष्ट उत्पादों से जुड़े हुए वृहद उद्यमों को राज्य में दिये जाने वाले औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन के लिए विकासखण्डों के वर्गीकरण के आधार पर पैकेज निर्धारित नहीं किया जा रहा है, क्योंकि वर्तमान में इन विशिष्ट उत्पादों से जुड़े हुए उद्यमों का विकास अब तक नहीं हो सका है। अतः राज्य की यह प्राथमिकता है कि ऐसे उद्यमों को प्रथमतः राज्य में स्थापित कराने हेतु प्रावधान किये जाये ताकि इन उद्यमों की श्रेणी राज्य में विकसित हो सके।
(4) वृहद उद्यमों को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम से भिन्न प्रकृति के औद्योगिक निवेश प्रोत्साहनों की आवश्यकता होती है, अतः ऐसे उद्यमों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इनके लिए प्रोत्साहनों को पृथक से निर्धारित किये जाने की योजना है।
(5) वर्तमान में राज्य में जिन विशिष्ट उत्पादों से जुड़े उद्यमों की स्थापना की आवश्यकता है, उनमें- फार्मास्युटिकल एवं मेडिकल डिवाइस सेक्टर, टेक्सटाईल सेक्टर, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण तथा संरक्षण सेक्टर, रक्षा उत्पाद सेक्टर, आटोमोबाईल सेक्टर, आईटी एवं आईटीईएस उद्यम, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण उद्यम, राज्य के कोर सेक्टर उद्यमों पर आधारित डाउन स्ट्रीम, अप-स्ट्रीम उद्यम परियोजनाएं शामिल हैं। इन उद्यमोें के लिए यह आवश्यक है कि विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की घोषणा की जाये, ताकि इन क्षेत्रों में राज्य में निवेश आकर्षित हो सके। ୧୩୬୦ (୭୪) (ब-1) औद्योगिक नीति, 2024-30 के अंतर्गत सामान्य श्रेणी एवं थ्रस्ट सेक्टर के विनिर्माण वृहद उद्यमों हेतु ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' पैकेज :-
औद्योगिक नीति 2024-30 की अवधि में राज्य के विभिन्न विकासखंडों में स्थापित होने वाले सामान्य श्रेणी एवं थ्रस्ट सेक्टर के विनिर्माण उद्यमों में ''नवीन उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण'' के प्रकरणों पर निवेशक इकाईयों को उनके द्वारा परियोजना में स्थाई पूंजी निवेश की मदों पर निवेश होने वाली राशि के 100 प्रतिशत (अन्यथा प्रावधानित होने पर यह सीमा तद्ानुसार होगी) तक औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जावेगा।
इस पैकेज में अनुदान/छूट/रियायतें/प्रतिपूर्ति की निम्नानुसार सुविधाएं दी जा सकेंगी :-
(1) नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी ) प्रतिपूर्ति -
| क्र. | विकासखण्डो ं की श्रेणी | प ्रतिपूर्ति का विवरण | |
| सामान्य | थ्रस्ट | ||
| 1 | समूह-1 | वाणिज्यिक उत्पादन/कार्य प ्रारंभ करने के दिनांक से 6 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प ्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 60 प्रतिशत तक | वाणिज्यिक उत्पादन/कार्य प्रारंभ करने के दिनांक से 8 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प ्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी प जी ं ू निवेश के 100 प्रतिशत तक |
| 2 | समूह-2 | वाणिज्यिक उत्पादन/कार्य प ्रारंभ करने के दिनांक से 7 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प ्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 80 प्रतिशत तक | वाणिज्यिक उत्पादन/कार्य प्रारंभ करने के दिनांक से 10 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प ्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी प जी ं ू निवेश के 100 प्रतिशत तक |
| 3 | समूह-3 | वाणिज्यिक उत्पादन/कार्य प ्रारंभ करने के दिनांक से 8 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प ्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक | वाणिज्यिक उत्पादन/कार्य प्रारंभ करने के दिनांक से 12 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प ्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी प जी ं ू निवेश के 100 प्रतिशत तक |
अथवा୧୩୬୦ (୭୫) स्थायी पूंजी निवेश अनुदान -
राज्य में सामान्य श्रेणी एवं थ्रस्ट सेक्टर के ''नवीन उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण'' के प्रकरणों पर निम्नलिखित विवरण अनुसार स्थायी पूंजी निवेश अनुदान की पात्रता होगी -
| विकासखण्डों की श्रेणी | सामान्य | थ्रस्ट | ||||
| अनुदान का प्रतिशत | अनुदान की अधिकतम राशि (रूपये करोड़ में) | अनुदान वितरण की समयावधि | अनुदान का प्रतिशत | अनुदान की अधिकतम राशि (रूपये करोड़ में) | अनुदान वितरण की समयावधि | |
| समूह-1 | 15 | 50 | 10 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में | 30 | 100 | 08 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
| समूह-2 | 15 | 60 | 10 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में | 30 | 125 | 08 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
| समूह-3 | 15 | 75 | 10 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में | 30 | 150 | 08 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
नोटः- (1) बिन्दु क्रमांक 1 में दर्शित नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) प्रतिपूर्ति अथवा स्थायी पूंजी निवेश अनुदान में से कोई एक सुविधा विकल्प चयन के आधार पर ली जा सकेगी। इस हेतु एक बार लिया गया विकल्प अपरिवर्तनीय होगा। विकल्प चयन करने हेतु निवेशक को विभाग द्वारा निर्धारित प्रारूप में विकल्प पत्र शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत किया जाना आवश्यक होगा।
(2) स्थायी पूंजी अनुदान की प्रथम किश्त का भुगतान उत्पादन प्रारंभ करने के पश्चात प्रस्तुत आवेदन पर निर्धारित स्वीकृति के पश्चात किया जा सकेेगा।
(2) विद्युत शुल्क छूट :-
राज्य में सामान्य श्रेणी एवं थ्रस्ट सेक्टर के केवल नवीन वृहद उद्यमों को निम्नलिखित विवरण अनुसार विद्युत शुल्क छूट दी जावेगी :-
| क्र. | विकासखण्डों की श्रेणी | सामान्य | थ्रस्ट |
| 1 | समूह-1 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 6 वर्ष । | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 8 वर्ष । |
| 2 | समूह-2 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 7 वर्ष । | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 10 वर्ष । |
| 3 | समूह-3 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 8 वर्ष । | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 12 वर्ष । |
(3) स्टाम्प शुल्क से छूट :-
इस पैकेज के अंर्तगत राज्य में सामान्य श्रेणी एवं थ्रस्ट सेक्टर के नवीन वृहद उद्यमों की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में ୧୩୬୦ (୭୬) भूमि, शेड तथा भवनों के क्रय/पट्टे पर लिए जाने के मामले में निष्पादित किये जाने विलेखों पर संबंधित भूमि लीज के विलेखों पर स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान किया जायेगा। (4) पंजीयन शुल्क प्रतिपूर्ति :- सामान्य श्रेणी एवं थ्रस्ट सेक्टर के नवीन वृहद उद्यमों की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में भूमि पर देय पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति प्रदान किया जायेगा। (5) भू उपयोग में परिवर्तन शुल्क में छूट :-
सामान्य श्रेणी एवं थ्रस्ट सेक्टर के नवीन वृहद उद्यमों की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/ आधुनिकीकरण के प्रकरणों में भू-उपयोग परिवर्तन (औद्योगिक प्रयोजन होने पर) अधिकतम 50 एकड़ भूमि तक के लिए भू-पुर्ननिर्धारण कर (डायवर्सन शुल्क) में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी। (6) दिव्यांग (निःशक्त), सेवानिवृत्त अग्निवीर व आत्मसमर्पित नक्सली व्यक्ति रोजगार अनुदान :-
सामान्य श्रेणी एवं थ्रस्ट सेक्टर के नवीन वृहद उद्यमों की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन के प्रकरणों में भारत सरकार के दिव्यांग (निःशक्त), (समान अवसर का अधिकार, संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 के तहत् निःशक्तों एवं राज्य के सेवानिवृत्त अग्निवीर व आत्मसमर्पित नक्सली व्यक्ति को स्थायी नौकरी प्रदान करने पर, उनके शुद्ध वेतन/पारिश्रमिक की 40 प्रतिशत अनुदान की राशि की अनुदान प्रतिपूर्ति, 5 वर्ष की अवधि तक अधिकतम रूपये पांच लाख वार्षिक की सीमा तक की जावेगी।
(7) ई.पी.एफ. प्रतिपूर्ति :-
सामान्य श्रेणी एवं थ्रस्ट सेक्टर के नवीन वृहद उद्यमों की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन के प्रकरणों में छत्तीसगढ़ राज्य के कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के ईपीएफ अंशदान में उत्पादन दिनांक से 05 वर्ष तक की 75 प्रतिशत का प्रतिपूर्ति, अधिकतम रु. 01 करोड़ प्रतिवर्ष की पात्रता होगी।
(8) मंडी शुल्क से छूट :-
राज्य में स्थापित होने वाले मात्र कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के नवीन उद्यमों की स्थापना पर, वृहद श्रेणी के जैव ईंधन/एथेनॉल उद्यमों हेतु राज्य की मंडियों/सीधे उत्पादनकर्ता कृषक/इकाई/प्रथम कच्चा माल क्रय अथवा प्रमाण पत्र जारी होने के दिनांक, जो भी पश्चात् हो, से 5 वर्ष तक के लिये मंडी शुल्क से पूर्ण छूट अधिकतम राशि ₹ 5.00 करोड़ प्रतिवर्ष की सीमा तक प्रदान की जायेगी, साथ ही छूट की कुल अधिकतम सीमा इकाई द्वारा किये गये स्थायी पूंजी निवेश के 75 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।
(9) प्रशिक्षण वृत्ति प्रतिपूर्ति :-
नवीन पात्र उद्यम की स्थापना के प्रकरणों में रूपये 50,000/- प्रतिमाह से कम वेतन प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के प्रत्येक मूल निवासी कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के मामले में एक बार प्रशिक्षण पर उनके नियोक्ता द्वारा भुगतान किये जाने वाले एक माह का वेतन या୧୩୬୦ (୭୭) अधिकतम राशि रूपये 15000/- प्रति व्यक्ति, जो कम हो, की दर से उद्यम के व्यावसायिक उत्पादन / गतिविधि आरंभ करने की दिनांक से 05 वर्ष की अवधि हेतु अथवा स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक की सीमा तक व्यय प्रतिपूर्ति की जा सकेगी । इस हेतु प्रथम क्लेम कर्मचारी के नियोजन के एक वर्ष पश्चात से देय होगा ।
(10) अन्य अनुदान यथा - केवल सामान्य श्रेणी के नवीन वृहद उद्यमों को परियोजना प्रतिवेदन अनुदान, गुणवत्ता प्रमाणीकरण अनुदान, तकनीकी पेटेंट अनुदान, प्रौद्योगिकी क्रय अनुदान, जल एवं ऊर्जा दक्षता व्यय प्रतिपूर्ति अनुदान, परिवहन अनुदान (केवल निर्यातक इकाई को) परिशिष्ट-क्रमशः 9.8, 9.9, 9.10, 9.11, 9.15, 9.16 के अनुसार होगी।
(11) रूपये 1000 करोड़ से अधिक निवेश करने वाली इकाइयों के लिए विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन का प्रावधान :-
औद्योगिक नीति, 2024-30 की अवधि में सामान्य एवं थ्रस्ट सेक्टर के वृहद उद्यमों में स्थायी पूंजी निवेश में रूपये 1,000 करोड़ या इससे अधिक निवेश करने वाली अथवा 1,000 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करने वाले उद्यमों को औद्योगिक नीति, 2024-30 में घोषित आर्थिक निवेश प्रोत्साहन के अतिरिक्त प्रोत्साहन दिये जाने के प्रस्तावों पर मंत्रिमंडलीय उप समिति विचार कर सकेगी।
------00------
୧୩୬୦ (୭୮) (ब-2) औद्योगिक नीति, 2024-30 के अंतर्गत कोर (स्टील) सेक्टर के वृहद उद्यम हेतु ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' पैकेज :-
-----
औद्योगिक नीति 2024-30 की अवधि में राज्य के समूह-1 के पात्र विकासखण्डों, समूह-2 एवं समूह-3 के विकासखंडों में स्थापित होने वाली स्टील सेक्टर के पात्र नवीन वृहद उद्यमों की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में निवेशक इकाईयों को उनके द्वारा परियोजना में किये गये स्थाई पूंजी निवेश का अधिकतम 100 प्रतिशत (अन्यथा प्रावधानित होने पर यह सीमा तद्ानुसार होगी) तक निम्नलिखित अनुसार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जावेगा।
इस पैकेज में अनुदान/छूट/रियायतें/प्रतिपूर्ति की निम्नानुसार सुविधाएं दी जा सकेंगी :-
(1) नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी ) प्रतिपूर्ति -
| क्र. | विकासखण्डों की श्रेणी | प ्रतिपूर्ति का विवरण |
| 1 | समूह-1 (विकासखण्ड बिल्हा एवं धरसींवा को छोड़कर) | वाणिज्यिक उत्पादन/कार्य प्रारंभ करने के दिनांक से 10 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प ्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 80 प्रतिशत तक |
| 2 | समूह-2 | वाणिज्यिक उत्पादन/कार्य प्रारंभ करने के दिनांक से 10 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प ्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 90 प्रतिशत तक |
| 3 | समूह-3 | वाणिज्यिक उत्पादन/कार्य प्रारंभ करने के दिनांक से 15 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प ्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक |
(2) विद्युत शुल्क छूट :-
राज्य में कोर सेक्टर के केवल नवीन उद्यमों को निम्नलिखित विवरण अनुसार विद्युत शुल्क छूट दी जावेगी :-
| क्र. | विकासखण्डो की श्रेणी ं | विवरण |
| 1 | समूह-1 (विकासखण्ड बिल्हा एवं धरसींवा को छोड़कर) | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 10 वर्ष । |
| 2 | समूह-2 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 10 वर्ष । |
| 3 | समूह-3 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 15 वर्ष । |
(3) स्टाम्प शुल्क से छूट :- इस पैकेज के अंर्तगत राज्य में कोर सेक्टर के नवीन उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में भूमि, शेड तथा भवनों के क्रय/पट्टे पर लिए जाने के मामले में निष्पादित किये जाने विलेखों पर संबंधित भूमि लीज के विलेखों पर स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान किया जायेगा। (4) पंजीयन शुल्क प्रतिपूर्ति :- कोर सेक्टर के पात्र नवीन तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के उद्यमों को भूमि पर देय पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति प्रदान किया जायेगा। (5) भू उपयोग में परिवर्तन शुल्क में छूट :- कोर सेक्टर के पात्र नवीन उद्यमों तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में भू-उपयोग परिवर्तन (औद्योगिक प्रयोजन होने पर) अधिकतम 50 एकड़ भूमि तक के लिए भू-पुर्ननिर्धारण कर (डायवर्सन शुल्क) में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी।
(6) जल शुल्क व्यय प्रतिपूर्ति ः- राज्य में कोर (स्टील) सेक्टर के नवीन उद्यम तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन के मामलों में मूल क्षमता से अतिरिक्त विस्तारित क्षमता में उपभोग होने वाली औसत खपत के आधार पर निम्नलिखित विवरण अनुसार जल व्यय प्रतिपूर्ति दी जावेगी :-
| क्र. | विकासखण्डो की श्रेणी ं | विवरण |
| 1 | समूह-1 (विकासखण्ड बिल्हा एवं धरसींवा को छोड़कर) | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 10 वर्ष । |
| 2 | समूह-2 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 10 वर्ष । |
| 3 | समूह-3 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 15 वर्ष । |
(7) रॉयल्टी प्रतिपूर्ति :- राज्य के बस्तर एवं सरगुजा संभाग में कोर (स्टील) सेक्टर के नवीन उद्यम तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के मामलों में मूल क्षमता से अतिरिक्त विस्तारित क्षमता में उपभोग होने वाली औसत खपत के आधार पर को ऑयरन ओर हेतु राज्य सरकार को भुगतान की गई रॉयल्टी की 50 प्रतिशत एवं कोल पर रॉयल्टी एवं राज्य को प्राप्त होने वाले सेस की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति निम्नलिखित विवरण अनुसार की जावेगी :-
| क्र. | विकासखण्डों की श्रेणी | विवरण |
| 1 | समूह-1 (विकासखण्ड बिल्हा एवं धरसींवा को छोड़कर) | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 10 वर्ष |
| 2 | समूह-2 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 10 वर्ष |
| 3 | समूह-3 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 15 वर्ष |
(8) दिव्यांग (निःशक्त), सेवानिवृत्त अग्निवीर व आत्मसमर्पित नक्सली व्यक्ति रोजगार अनुदान :- कोर (स्टील) सेक्टर के नवीन उद्यम तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन को ୧୩୬୦ (୮୦) भारत सरकार के दिव्यांग (निःशक्त), (समान अवसर का अधिकार, संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 के तहत् निःशक्तों एवं राज्य के सेवानिवृत्त अग्निवीर व आत्मसमर्पित नक्सली व्यक्ति को स्थायी नौकरी प्रदान करने पर, उनके शुद्ध वेतन/पारिश्रमिक की 40 प्रतिशत अनुदान की राशि की अनुदान प्रतिपूर्ति, 5 वर्ष की अवधि तक अधिकतम रूपये पांच लाख वार्षिक की सीमा तक की जावेगी।
(9) ई.पी.एफ. प्रतिपूर्ति :-
कोर (स्टील) सेक्टर के नवीन उद्यम तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन के प्रकरणों में छत्तीसगढ़ राज्य के कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के ईपीएफ अंशदान में उत्पादन दिनांक से 05 वर्ष तक की 50 प्रतिशत का प्रतिपूर्ति, अधिकतम रु. 01 करोड़ प्रतिवर्ष की पात्रता होगी।
(10) प्रशिक्षण वृत्ति प्रतिपूर्ति :-
नवीन पात्र उद्यम की स्थापना के प्रकरणों में रूपये 50,000/- प्रतिमाह से कम वेतन प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के प्रत्येक मूल निवासी कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के मामले में एक बार प्रशिक्षण पर उनके नियोक्ता द्वारा भुगतान किये जाने वाले एक माह का वेतन या अधिकतम राशि रूपये 15000/- प्रति व्यक्ति, जो कम हो, की दर से उद्यम के व्यावसायिक उत्पादन / गतिविधि आरंभ करने की दिनांक से 05 वर्ष की अवधि हेतु अथवा स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक की सीमा तक व्यय प्रतिपूर्ति की जा सकेगी । इस हेतु प्रथम क्लेम कर्मचारी के नियोजन के एक वर्ष पश्चात से देय होगा ।
(11) रूपये 1000 करोड़ से अधिक निवेश करने वाली इकाइयों के लिए विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन का प्रावधान :-
औद्योगिक नीति, 2024-30 की अवधि में सामान्य एवं थ्रस्ट सेक्टर के वृहद उद्यमों में स्थायी पूंजी निवेश में रूपये 1,000 करोड़ या इससे अधिक निवेश करने वाली अथवा 1,000 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करने वाले उद्यमों को औद्योगिक नीति, 2024-30 में घोषित आर्थिक निवेश प्रोत्साहन के अतिरिक्त प्रोत्साहन दिये जाने के प्रस्तावों पर मंत्रिमंडलीय उप समिति विचार कर सकेगी।
------00------
୧୩୬୦ (୮୧)(ब-3) औद्योगिक नीति, 2024-30 के अंतर्गत कोर सेक्टर के अन्य वृहद उद्यम (स्टील छोड़कर) एवं सौर उर्जा संयंत्र के लघु, मध्यम एवं वृहद उर्जा संयंत्र हेतु ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' पैकेज :-
-----
(1) औद्योगिक नीति, 2024-30 के अंतर्गत अन्य कोर सेक्टर एवं सौर उर्जा के इस खंड में सम्मिलित उद्यमों को दृृष्टि से विकासखंड समूह-1, समूह-2 एवं समूह-3 निम्नांकित अनुसार उद्यम सम्मिलित होंगे :-
| क्र. | उद्यम का प्रकार |
| 1 | सीमेंट संयंत्र |
| 2 | एल्युमिनियम संयंत्र |
| 3 | ताप विद्युत संयंत्र |
| 4 | सौर उर्जा संयंत्र के लघु, मध्यम एवं वृहद उर्जा संयंत्र |
(2) इस औद्योगिक नीति 2024-30 की अवधि में समूह-1 के पात्र विकासखण्ड, समूह-2 एवं समूह-3 के विकासखंडों में स्थापित किये जाने वाले कोर सेक्टर के नवीन उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में निवेशक इकाईयों को उनके द्वारा परियोजना में किये गये स्थाई पूंजी निवेश का अधिकतम 100 प्रतिशत (अन्यथा प्रावधानित होने पर यह सीमा तद्ानुसार होगी) तक निम्नलिखित अनुसार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जावेगा।
(3) नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी ) प्रतिपूर्ति -
| क्र. | विकासखण्डों की श्रेणी | प ्रतिपूर्ति का विवरण |
| 1 | समूह-1 | वाणिज्यिक उत्पादन/कार्य प्रारंभ करने के दिनांक से 10 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प ्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 80 प्रतिशत तक |
| 2 | समूह-2 | वाणिज्यिक उत्पादन/कार्य प्रारंभ करने के दिनांक से 10 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प ्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 90 प्रतिशत तक |
| 3 | समूह-3 | वाणिज्यिक उत्पादन/कार्य प्रारंभ करने के दिनांक से 15 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प ्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक |
୧୩୬୦ (୮୨) (4) विद्युत शुल्क छूट :-
राज्य में कोर सेक्टर के केवल नवीन उद्यमों को निम्नलिखित विवरण अनुसार विद्युत शुल्क छूट दी जावेगी :-
| क्र. | विकासखण्डो ं की श्रेणी | विवरण |
| 1 | समूह-1 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 10 वर्ष । |
| 2 | समूह-2 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 10 वर्ष । |
| 3 | समूह-3 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 15 वर्ष । |
(5) स्टाम्प शुल्क से छूट :- इस पैकेज के अंर्तगत राज्य में कोर सेक्टर के नवीन उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में भूमि, शेड तथा भवनों के क्रय/पट्टे पर लिए जाने के मामले में निष्पादित किये जाने विलेखों पर संबंधित भूमि लीज के विलेखों पर स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान किया जायेगा।
(6) पंजीयन शुल्क प्रतिपूर्ति :- कोर सेक्टर के पात्र नवीन उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में भूमि पर देय पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति प्रदान किया जायेगा।
(7) भू उपयोग में परिवर्तन शुल्क में छूट :- कोर सेक्टर के पात्र नवीन उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में भू-उपयोग परिवर्तन (औद्योगिक प्रयोजन होने पर) अधिकतम 50 एकड़ भूमि तक के लिए भू-पुर्ननिर्धारण कर (डायवर्सन शुल्क) में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी।
(8) दिव्यांग (निःशक्त), सेवानिवृत्त अग्निवीर व आत्मसमर्पित नक्सली व्यक्ति रोजगार अनुदान :-
कोर सेक्टर के पात्र नवीन उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में भारत सरकार के दिव्यांग (निःशक्त), (समान अवसर का अधिकार, संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 के तहत् निःशक्तों एवं राज्य के सेवानिवृत्त अग्निवीर व आत्मसमर्पित नक्सली व्यक्ति को स्थायी नौकरी प्रदान करने पर, उनके शुद्ध वेतन/पारिश्रमिक की 40 प्रतिशत अनुदान की राशि की अनुदान प्रतिपूर्ति, 5 वर्ष की अवधि तक अधिकतम रूपये पांच लाख वार्षिक की सीमा तक की जावेगी। (9) प्रशिक्षण वृत्ति प्रतिपूर्ति :-
नवीन पात्र उद्यम की स्थापना के प्रकरणों में रूपये 50,000/- प्रतिमाह से कम वेतन प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के प्रत्येक मूल निवासी कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के मामले में एक बार प्रशिक्षण पर उनके नियोक्ता द्वारा भुगतान किये जाने वाले एक माह का वेतन या अधिकतम राशि रूपये 15000/- प्रति व्यक्ति, जो कम हो, की दर से उद्यम के व्यावसायिक୧୩୬୦ (୮୩) उत्पादन / गतिविधि आरंभ करने की दिनांक से 05 वर्ष की अवधि हेतु अथवा स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक की सीमा तक व्यय प्रतिपूर्ति की जा सकेगी । इस हेतु प्रथम क्लेम कर्मचारी के नियोजन के एक वर्ष पश्चात से देय होगा ।
(10) रूपये 1000 करोड़ से अधिक निवेश करने वाली इकाइयों के लिए विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन का प्रावधान :-
औद्योगिक नीति, 2024-30 की अवधि में कोर सेक्टर के अन्य वृहद उद्यम (स्टील छोड़कर) में स्थायी पूंजी निवेश में रूपये 1,000 करोड़ या इससे अधिक निवेश करने वाली अथवा 1,000 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करने वाले उद्यमों को औद्योगिक नीति, 2024-30 में घोषित आर्थिक निवेश प्रोत्साहन के अतिरिक्त प्रोत्साहन दिये जाने के प्रस्तावों पर मंत्रिमंडलीय उप समिति विचार कर सकेगी।
------00------
୧୩୬୦ (୮୪) अध्याय - (स)
औद्योगिक निवेष प्रोत्साहन୧୩୬୦ (୮୫) (स-1) राज्य में फार्मास्युटिकल सेक्टर के वृहद उद्यम हेतु औद्योगिक नीति, 2024-30 के अंतर्गत ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' पैकेज :-
औद्योगिक नीति 2024-30 के अंतर्गत राज्य में निवेश के आधार पर फार्मास्युटिकल क्षेत्र की Formulations, Active Pharmaceutical Ingredients (API), Key Starting Material (KSM), Drug Intermediates (DI) and Medical Devices के उद्यमों एवं भारत सरकार द्वारा इस सेक्टर के अंतर्गत मान्य परिभाषा एवं समय-समय पर किये गयें संशोधनों के अनुसार नवीन उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में निवेशक इकाईयों को उनके द्वारा परियोजना में स्थाई पूंजी निवेश की मदों पर निवेश होने वाली राशि के 100 प्रतिशत (अन्यथा प्रावधानित होने पर यह सीमा तद्ानुसार होगी) तक औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जावेगा।
इस पैकेज में अनुदान/छूट/रियायतें/प्रतिपूर्ति की निम्नानुसार सुविधाएं दी जा सकेंगी :-
(1) नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी ) प्रतिपूर्ति-
वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 12 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी), अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति की जावेगी।
अथवा
स्थायी पूंजी निवेश अनुदान -
राज्य में नवीन फार्मास्युटिकल उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में निम्नलिखित विवरण अनुसार स्थायी पूंजी निवेश अनुदान दिया जावेगा-
| यंत्र संयंत्र मे ं पूंजी निवेश (रूपये करोड़ में) | अनुदान का प ्रतिशत | अनुदान की अधिकतम राशि (रूपये करोड़ में) | अनुदान वितरण की समयावधि |
| रू. 50 से अधिक किन्तु रू. 200 से कम | 35 | 60 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
| रू. 200 से अधिक किन्तु रू. 500 से कम | 35 | 150 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
| रू. 500 से अधिक | 35 | 300 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
नोटः- (1) बिन्दु क्रमांक 1 में दर्शित नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) प्रतिपूर्ति अथवा स्थायी पूंजी निवेश अनुदान में से कोई एक सुविधा विकल्प चयन के आधार पर ली जा सकेगी। इस हेतु एक बार लिया गया विकल्प अपरिवर्तनीय होगा। विकल्प चयन करने हेतु निवेशक को विभाग द्वारा निर्धारित प्रारूप में विकल्प पत्र शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत किया जाना आवश्यक होगा। ୧୩୬୦ (୮୬) (2) स्थायी पूंजी अनुदान की प्रथम किश्त का भुगतान उत्पादन प्रारंभ करने के पश्चात प्रस्तुत आवेदन पर निर्धारित स्वीकृति के पश्चात किया जा सकेेगा।
(2) विद्युत शुल्क छूट ः-राज्य में केवल नवीन फार्मास्युटिकल उद्यम को वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 12 वर्ष तक की विद्युत शुल्क छूट प्रदान की जावेगी। (3) स्टाम्प शुल्क से छूट :-
राज्य में नवीन फार्मास्युटिकल उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में भूमि, शेड तथा भवनों के क्रय/पट्टे पर लिए जाने के मामले में निष्पादित किये जाने विलेखों पर संबंधित भूमि लीज के विलेखों पर स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान किया जायेगा। (4) पंजीयन शुल्क प्रतिपूर्ति :- राज्य में नवीन फार्मास्युटिकल उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में उद्यमों को भूमि पर देय पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति प्रदान किया जायेगा। (5) भू उपयोग में परिवर्तन शुल्क में छूट :-
राज्य में नवीन फार्मास्युटिकल उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में भू-उपयोग परिवर्तन (औद्योगिक प्रयोजन होने पर) अधिकतम 50 एकड़ भूमि तक के लिए भू-पुर्ननिर्धारण कर (डायवर्सन शुल्क) में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी।
(6) नवीन विद्युत कनेक्शन पर देय शुल्क की प्रतिपूर्ति :-
केवल पात्र नवीन उद्यमों को नवीन विद्युत कनेक्शन पर देय शुल्क (सुरक्षा निधि को छोड़कर) की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति किया जायेगा।
(7) अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (ईटीपी) :-
राज्य में अविकसित भूमि पर नवीन फार्मास्युटिकल उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में ईटीपी पर किये गये व्यय पर 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति, अधिकतम सीमा रूपये 1 करोड़ तक (छत्तीसगढ़ प्रदूषण निवारण मंडल द्वारा जारी प्रमाण पत्र के आधार पर)।
(8) जीरो वेस्ट इनसेंटिव :-
नवीन फार्मास्युटिकल उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में जल पुर्नचक्रीकरण/हार्वेस्टिंग की एवं शून्य निस्सरण की तकनीक की स्थापना पर पर्यावरण संरक्षण अधोसंरचना विकास पर लिए जाने वाले ऋण पर 5 वर्ष तक 50 प्रतिशत की दर से अधिकतम राशि रू. 10 लाख तक ब्याज अनुदान प्रदान किया जायेगा। इस हेतु इकाई को छत्तीसगढ़ प्रदूषण निवारण मंडल द्वारा जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।୧୩୬୦ (୮୭) (9) ई.पी.एफ. प्रतिपूर्ति :-
राज्य में नवीन फार्मास्युटिकल उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में छत्तीसगढ़ राज्य के कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के ईपीएफ अंशदान में उत्पादन दिनांक से 05 वर्ष तक की 75 प्रतिशत का प्रतिपूर्ति, अधिकतम रु. 01 करोड़ प्रतिवर्ष की पात्रता होगी।
(10) प्रशिक्षण वृत्ति प्रतिपूर्ति :- नवीन पात्र उद्यम की स्थापना के प्रकरणों में रूपये 50,000/- प्रतिमाह से कम वेतन प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के प्रत्येक मूल निवासी कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के मामले में एक बार प्रशिक्षण पर उनके नियोक्ता द्वारा भुगतान किये जाने वाले एक माह का वेतन या अधिकतम राशि रूपये 15000/- प्रति व्यक्ति, जो कम हो, की दर से उद्यम के व्यावसायिक उत्पादन / गतिविधि आरंभ करने की दिनांक से 05 वर्ष की अवधि हेतु अथवा स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक की सीमा तक व्यय प्रतिपूर्ति की जा सकेगी । इस हेतु प्रथम क्लेम कर्मचारी के नियोजन के एक वर्ष पश्चात से देय होगा ।
(11) एंकर इकाईयों को विशेष अनुदान :-
प्रथम 5 एंकर इकाईयों जिनका निवेश रू. 200 करोड़ से अधिक होगा उन्हें मान्य स्थाई पूंजी निवेश का 5 प्रतिशत अनुदान अधिक एवं अधिकतम सीमा कुल स्थाई पूंजी निवेश के 110 प्रतिशत तक दी जा सकेगी।
(12) अन्य अनुदान :-
अन्य अनुदान यथा - परियोजना प्रतिवेदन अनुदान, गुणवत्ता प्रमाणीकरण अनुदान, तकनीकी पेटेंट अनुदान, प्रौद्योगिकी क्रय अनुदान, जल एवं ऊर्जा दक्षता व्यय प्रतिपूर्ति अनुदान, परिवहन अनुदान (केवल निर्यातक इकाई को) परिशिष्ट-क्रमशः 9.8, 9.9, 9.10, 9.11, 9.15 व 9.16 के अनुसार होगी। (13) विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन ः- राज्य में नवीन फार्मास्युटिकल सेक्टर उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन के प्रकरणों में निम्नानुसार विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जायेगा :-
| क्र. | मद | विवरण |
| 1. अनुसंधान एवं विकास की स्थापना | फार्मास्युटिकल एवं मेडिकल डिवाइस हेतु स्थापित नवीन अनुसंधान एवं विकास हेतु क्रय यंत्र एवं संयंत्र पर व्यय का 20 प ्रतिशत अनुदान, अधिकतम रूपये 3 करोड़। | |
| 2. | क्लिनिकल परीक्षण व्यय प ्रतिपूर्ति | क्लिनिकल ट्रायल पर होने वाले व्यय की 50 प्रतिशत तक प ्रतिपूर्ति, अधिकतम राशि रूपये 1 करोड़ प्रति ट्रायल, अधिकतम 5 क्लिनिकल ट्रायल प्रति इकाई। |
| 3. अनुसंधान एवं विकास हेतु पूर्ण छूट । |
୧୩୬୦ (୮୮)
| क्र. | मद | विवरण |
| क्रय/लीज पर प्राप्त की गयी भूमि एवं भवन पर स्टाम्प शुल्क छूट | ||
| 5. | निर्यात हेतु प्रमाण पत्र प ्राप्ति | एपीआई/फार्मूलेशन से संबंधित विषय मे निर्यात यूएसएफडीए, ं डब्ल्यूएचओ, प्री-क्वालीफिकेशन, ईडीक्यूएम, एमएचआरए या अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणन/ अनुमोदन प्राप्त किये जाने के अन्य प्रकरण में प्रति प्रकरण राशि रूपये 15 लाख प्रति उत्पाद, अधिकतम 10 उत्पादों हेतु आवेदन शुल्क की अधिकतम 50 प्रतिशत की प ्रतिपूर्ति की जा सकेगी, किन्तु इस हेतु इकाई को प्रति उत्पाद रूपये 50 करोड़ अथवा इससे अधिक व्यावसायिक निर्यात का प ्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। इस नीति की अवधि में किये जाने वाले पेटेंट पंजीकरण संबंधी आयुष एवं फाइटोमेडिसिन से संबंधित उत्पादों के पेटेंट दर्ज कराने संबंधी मामले में पेटे ट प्रमाण पत्र प्राप्त होने की ं स्थिति में व्यय की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति की जा सकेगी। |
(14) रूपये 1000 करोड़ से अधिक निवेश करने वाली इकाइयों के लिए विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन का प्रावधान :-
औद्योगिक नीति, 2024-30 की अवधि में फार्मास्युटिकल सेक्टर में स्थायी पूंजी निवेश में रूपये 1,000 करोड़ या इससे अधिक निवेश करने वाली अथवा 1,000 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करने वाले उद्यमों को औद्योगिक नीति, 2024-30 में घोषित आर्थिक निवेश प्रोत्साहन के अतिरिक्त प्रोत्साहन दिये जाने के प्रस्तावों पर मंत्रिमंडलीय उप समिति विचार कर सकेगी।
------00------
୧୩୬୦ (୮୯)(स-2) औद्योगिक नीति, 2024-30 के अंतर्गत टेक्सटाईल सेक्टर के वृहद उद्यम हेतु ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' पैकेज :-
औद्योगिक नीति 2024-30 के अंतर्गत राज्य में निवेश के आधार पर टेक्सटाईल सेक्टर (जीनिंग, स्पीनिंग, वीविंग, डाईंग एंड प्रोसेसिंग आफ टेक्सटाईल, अपेरल, एमएमएफ यार्न/फेब्रीक फ्राम रिसाइकिल्ड प्रोडक्ट अपेरल उत्पादन, टेक्नीकल टेक्सटाईल एंड सपोर्ट एक्टीविटीज) के नवीन उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में निवेशक इकाईयों को उनके द्वारा परियोजना में स्थाई पूंजी निवेश की मदों पर निवेश होने वाली राशि के 100 प्रतिशत तक (अन्यथा प्रावधानित होने पर यह सीमा तद्ानुसार होगी) औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जावेगा।
इस पैकेज में अनुदान/छूट/रियायतें/प्रतिपूर्ति की निम्नानुसार सुविधाएं दी जा सकेंगी :-
(1) नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी ) प्रतिपूर्ति-
वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 12 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी), अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति की जावेगी।
अथवा
स्थायी पूंजी निवेश अनुदान -
राज्य में नवीन टेक्सटाईल उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में निम्नलिखित विवरण अनुसार स्थायी पूंजी निवेश अनुदान दिया जावेगा-
| यंत्र संयंत्र मे पूंजी निवेश ं (रूपये करोड़ में) | अनुदान का प ्रतिशत | अनुदान की अधिकतम राशि (रूपये करोड़ में) | अनुदान वितरण की समयावधि |
| रू. 50 से अधिक किन्तु रू. 200 से कम | 35 | 60 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
| रू. 200 से अधिक किन्तु रू. 500 से कम | 35 | 150 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
| रू. 500 से अधिक | 35 | 300 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
नोटः- (1) बिन्दु क्रमांक 1 में दर्शित नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) प्रतिपूर्ति अथवा स्थायी पूंजी निवेश अनुदान में से कोई एक सुविधा विकल्प चयन के आधार पर ली जा सकेगी। इस हेतु एक बार लिया गया विकल्प अपरिवर्तनीय होगा। विकल्प चयन करने हेतु निवेशक को विभाग द्वारा निर्धारित प्रारूप में विकल्प पत्र शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत किया जाना आवश्यक होगा। ୧୩୬୦ (୯୦) (2) स्थायी पूंजी अनुदान की प्रथम किश्त का भुगतान उत्पादन प्रारंभ करने के पश्चात प्रस्तुत आवेदन पर निर्धारित स्वीकृति के पश्चात किया जा सकेेगा। (2) विद्युत शुल्क छूट :-
राज्य में केवल नवीन टेक्सटाईल सेक्टर उद्यम को वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 12 वर्ष तक की विद्युत शुल्क छूट दी जावेगी।
(3) स्टाम्प शुल्क से छूट :-
राज्य में नवीन टेक्सटाईल सेक्टर उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में भूमि, शेड तथा भवनों के क्रय/पट्टे पर लिए जाने के मामले में निष्पादित किये जाने विलेखों पर संबंधित भूमि लीज के विलेखों पर स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान किया जायेगा। (4) पंजीयन शुल्क प्रतिपूर्ति :- राज्य में नवीन टेक्सटाईल सेक्टर उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में भूमि पर देय पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति प्रदान किया जायेगा। (5) भू उपयोग में परिवर्तन शुल्क में छूट :-
राज्य में नवीन टेक्सटाईल सेक्टर उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में भू-उपयोग परिवर्तन (औद्योगिक प्रयोजन होने पर) अधिकतम 50 एकड़ भूमि तक के लिए भू-पुर्ननिर्धारण कर (डायवर्सन शुल्क) में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी।
(6) नवीन विद्युत कनेक्शन पर देय शुल्क की प्रतिपूर्ति :-
केवल पात्र नवीन उद्यमों को नवीन विद्युत कनेक्शन पर देय शुल्क (सुरक्षा निधि को छोड़कर) की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति किया जायेगा।
(7) अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (ईटीपी) :-
राज्य में नवीन टेक्सटाईल सेक्टर उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में अविकसित भूमि पर स्थापित उद्यम द्वारा ईटीपी पर किये गये व्यय पर 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति, अधिकतम सीमा रूपये 1 करोड़ तक (छत्तीसगढ़ प्रदूषण निवारण मंडल द्वारा जारी प्रमाण पत्र के आधार पर)।
(8) जीरो वेस्ट इनसेंटिव :-
राज्य में नवीन टेक्सटाईल सेक्टर उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में जल पुर्नचक्रीकरण/हार्वेस्टिंग की एवं शून्य निस्सरण की तकनीक की स्थापना पर पर्यावरण संरक्षण अधोसंरचना विकास पर लिए जाने वाले ऋण पर 5 वर्ष तक 50 प्रतिशत की दर से अधिकतम राशि रू. 10 लाख तक ब्याज୧୩୬୦ (୯୧) अनुदान प्रदान किया जायेगा। इस हेतु इकाई को छत्तीसगढ़ प्रदूषण निवारण मंडल द्वारा जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।
(9) ई.पी.एफ. प्रतिपूर्ति :-
राज्य में नवीन टेक्सटाईल सेक्टर उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में छत्तीसगढ़ राज्य के कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के ईपीएफ अंशदान में उत्पादन दिनांक से 05 वर्ष तक की 75 प्रतिशत का प्रतिपूर्ति, अधिकतम रु. 01 करोड़ प्रतिवर्ष की पात्रता होगी।
(10) प्रशिक्षण वृत्ति प्रतिपूर्ति :- नवीन पात्र उद्यम की स्थापना के प्रकरणों में रूपये 50,000/- प्रतिमाह से कम वेतन प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के प्रत्येक मूल निवासी कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के मामले में एक बार प्रशिक्षण पर उनके नियोक्ता द्वारा भुगतान किये जाने वाले एक माह का वेतन या अधिकतम राशि रूपये 15000/- प्रति व्यक्ति, जो कम हो, की दर से उद्यम के व्यावसायिक उत्पादन / गतिविधि आरंभ करने की दिनांक से 05 वर्ष की अवधि हेतु अथवा स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक की सीमा तक व्यय प्रतिपूर्ति की जा सकेगी । इस हेतु प्रथम क्लेम कर्मचारी के नियोजन के एक वर्ष पश्चात से देय होगा ।
(11) एंकर इकाईयों को विशेष अनुदान :- प्रथम 5 एंकर इकाईयों जिनका निवेश रू. 200 करोड से अधिक होगा उन्हें मान्य स्थाई पूंजी निवेश का 5 प्रतिशत अनुदान अधिक एवं अधिकतम सीमा कुल स्थाई पूंजी निवेश के 110 प्रतिशत तक दी जा सकेगी।
(12) अन्य अनुदान :-
अन्य अनुदान यथा - परियोजना प्रतिवेदन अनुदान, गुणवत्ता प्रमाणीकरण अनुदान, तकनीकी पेटेंट अनुदान, प्रौद्योगिकी क्रय अनुदान, जल एवं ऊर्जा दक्षता व्यय प्रतिपूर्ति अनुदान, परिवहन अनुदान (केवल निर्यातक इकाई को), परिशिष्ट-क्रमशः 9.8, 9.9, 9.10, 9.11, 9.15 व 9.16 के अनुसार होगी। (13) विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन :-
राज्य में नवीन टेक्सटाईल सेक्टर उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन के प्रकरणों में निम्नानुसार विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जायेगा :-
| क्र. | मद | विवरण |
| 1. | अनुसंधान एवं विकास की स्थापना | 1- टेक्सटाईल उद्यम अंतर्गत अनुसंधान एवं विकास हेतु क्रय/लीज पर प्राप्त की गयी भूमि एवं भवन पर स्टाम्प शुल्क से प र्ण छूट। ू 2- इकाई द्वारा अनुसंधान एवं विकास अंतर्गत स्थापित टेस्ंिटग |
୧୩୬୦ (୯୨)
| क्र. | मद | विवरण |
| लेब, गुणवत्ता प्रमाणीकरण लेब हेतु क्रय किये गये उपकरण पर व्यय का 25 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रूपये 1 करोड़। | ||
| 2. | निर्यात व्यय प्रतिपूर्ति | राज्य में इस नीति की अवधि में स्थापित टेक्सटाईल उद्यम को व्यवसायिक उत्पादन दिनांक से उद्यम के उत्पादन स्थल से निर्यात किये जाने वाले बंदरगाह तक सामग्री परिवहन किये जाने पर निर्यात हेतु की गई व्यय राशि का अधिकतम 75 प्रतिशत की प ्रतिपूर्ति 10 वर्ष तक की जा सकेगी, अधिकतम स्थाई पूंजी निवेश का 35 प्रतिशत। इस हेतु इकाई को व्यावसायिक निर्यात का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। |
(14) रूपये 1000 करोड़ से अधिक निवेश करने वाली इकाइयों के लिए विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन का प्रावधान :-
औद्योगिक नीति, 2024-30 की अवधि में टेक्सटाईल सेक्टर में स्थायी पूंजी निवेश में रूपये 1,000 करोड़ या इससे अधिक निवेश करने वाली अथवा 1,000 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करने वाले उद्यमों को औद्योगिक नीति, 2024-30 में घोषित आर्थिक निवेश प्रोत्साहन के अतिरिक्त प्रोत्साहन दिये जाने के प्रस्तावों पर मंत्रिमंडलीय उप समिति विचार कर सकेगी।
------00------
୧୩୬୦ (୯୩)(स-3) औद्योगिक विकास नीति, 2024-30 के अंतर्गत कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण (जैव र्इंधन / एथेनॉल उद्यमों को छोड़कर), डेयरी उत्पादों का प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोंपज प्रसंस्करण एवं कम्प्रेस्ड बॉयो गैस सेक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र के वृहद उद्यम हेतु ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' पैकेज :-
औद्योगिक नीति 2024-30 के अंतर्गत राज्य में निवेश के आधार पर कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी उत्पादों का प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोपज प्रसंस्करण एवं कम्प्रेस्ड बॉयो गैस सेक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र के नवीन उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/ प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में निवेशक इकाईयों को उनके द्वारा परियोजना में स्थाई पूंजी निवेश की मदों पर निवेश होने वाली राशि के 100 प्रतिशत तक (अन्यथा प्रावधानित होने पर यह सीमा तद्ानुसार होगी) औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जावेगा। इस पैकेज में अनुदान/छूट/रियायतें/प्रतिपूर्ति की निम्नानुसार सुविधाएं दी जा सकेंगी :-
(1) नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी ) प्रतिपूर्ति-
वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 12 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी), अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति की जावेगी।
अथवा
स्थायी पूंजी निवेश अनुदान -
राज्य में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी उत्पादों का प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोपज प्रसंस्करण एवं कम्प्रेस्ड बॉयो गैस सेक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र के नवीन उद्यम की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/ शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में निम्नलिखित विवरण अनुसार स्थायी पूंजी निवेश अनुदान दिया जावेगा -
| यंत्र संयंत्र मे ं पूंजी निवेश (रूपये करोड़ में) | अनुदान का प ्रतिशत | अनुदान की अधिकतम राशि (रूपये करोड़ मे ं ) | अनुदान वितरण की समयावधि |
| रू. 50 से अधिक किन्तु रू. 200 से कम | 30 | 50 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
| रू. 200 से अधिक किन्तु रू. 500 से कम | 30 | 120 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
| रू. 500 से अधिक | 30 | 200 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
नोटः- (1) बिन्दु क्रमांक 1 में दर्शित नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) प्रतिपूर्ति अथवा स्थायी पूंजी निवेश अनुदान में से कोई एक सुविधा विकल्प चयन के आधार पर ली ୧୩୬୦ (୯୪) जा सकेगी। इस हेतु एक बार लिया गया विकल्प अपरिवर्तनीय होगा। विकल्प चयन करने हेतु निवेशक को विभाग द्वारा निर्धारित प्रारूप में विकल्प पत्र शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत किया जाना आवश्यक होगा।
(2) स्थायी पूंजी अनुदान की प्रथम किश्त का भुगतान उत्पादन प्रारंभ करने के पश्चात प्रस्तुत आवेदन पर निर्धारित स्वीकृति के पश्चात किया जा सकेेगा।
(2) विद्युत शुल्क छूट :-
राज्य में केवल नवीन कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी उत्पादों का प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोपज प्रसंस्करण एवं कम्प्रेस्ड बॉयो गैस सेक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र के उद्यमों को वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 12 वर्ष तक की विद्युत शुल्क छूट दी जावेगी। (3) स्टाम्प शुल्क से छूट :-
राज्य में नवीन कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी उत्पादों का प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोपज प्रसंस्करण एवं कम्प्रेस्ड बॉयो गैस सेक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में भूमि, शेड तथा भवनों के क्रय/पट्टे पर लिए जाने के मामले में निष्पादित किये जाने विलेखों पर संबंधित भूमि लीज के विलेखों पर स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान किया जायेगा। (4) पंजीयन शुल्क प्रतिपूर्ति :- राज्य में नवीन कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी उत्पादों का प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोपज प्रसंस्करण एवं कम्प्रेस्ड बॉयो गैस सेक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में भूमि पर देय पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति प्रदान किया जायेगा। (5) भू उपयोग में परिवर्तन शुल्क में छूट :-
राज्य में नवीन कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी उत्पादों का प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोपज प्रसंस्करण एवं कम्प्रेस्ड बॉयो गैस सेक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में भू-उपयोग परिवर्तन (औद्योगिक प्रयोजन होने पर) अधिकतम 50 एकड़ भूमि तक के लिए भू-पुर्ननिर्धारण कर (डायवर्सन शुल्क) में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी।
(6) नवीन विद्युत कनेक्शन पर देय शुल्क की प्रतिपूर्ति :-
केवल पात्र नवीन उद्यमों को नवीन विद्युत कनेक्शन पर देय शुल्क (सुरक्षा निधि को छोड़कर) की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति किया जायेगा।
(7) अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (ईटीपी) :-
राज्य में नवीन कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी उत्पादों का प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोपज प्रसंस्करण एवं कम्प्रेस्ड बॉयो गैस सेक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में अविकसित भूमि पर୧୩୬୦ (୯୫) स्थापित उद्यम द्वारा ईटीपी पर किये गये व्यय पर 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति, अधिकतम सीमा रूपये 1 करोड़ तक (छत्तीसगढ़ प्रदूषण निवारण मंडल द्वारा जारी प्रमाण पत्र के आधार पर)। (8) जीरो वेस्ट इनसेंटिव :-
राज्य में नवीन कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी उत्पादों का प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोपज प्रसंस्करण एवं कम्प्रेस्ड बॉयो गैस सेक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में जल पुर्नचक्रीकरण/हार्वेस्टिंग की एवं शून्य निस्सरण की तकनीक की स्थापना पर पर्यावरण संरक्षण अधोसंरचना विकास पर लिए जाने वाले ऋण पर 5 वर्ष तक 50 प्रतिशत की दर से अधिकतम राशि रू. 10 लाख तक ब्याज अनुदान प्रदान किया जायेगा। इस हेतु इकाई को छत्तीसगढ़ प्रदूषण निवारण मंडल द्वारा जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।
(9) ई.पी.एफ. प्रतिपूर्ति :-
राज्य में नवीन कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी उत्पादों का प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोंपज प्रसंस्करण एवं कम्प्रेस्ड बॉयो गैस सेक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र, की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में छत्तीसगढ़ राज्य के कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के ईपीएफ अंशदान में उत्पादन दिनांक से 05 वर्ष तक की 75 प्रतिशत का प्रतिपूर्ति, अधिकतम रु. 01 करोड़ प्रतिवर्ष की पात्रता होगी।
(10) प्रशिक्षण वृत्ति प्रतिपूर्ति :- नवीन पात्र उद्यम की स्थापना के प्रकरणों में रूपये 50,000/- प्रतिमाह से कम वेतन प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के प्रत्येक मूल निवासी कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के मामले में एक बार प्रशिक्षण पर उनके नियोक्ता द्वारा भुगतान किये जाने वाले एक माह का वेतन या अधिकतम राशि रूपये 15000/- प्रति व्यक्ति, जो कम हो, की दर से उद्यम के व्यावसायिक उत्पादन / गतिविधि आरंभ करने की दिनांक से 05 वर्ष की अवधि हेतु अथवा स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक की सीमा तक व्यय प्रतिपूर्ति की जा सकेगी । इस हेतु प्रथम क्लेम कर्मचारी के नियोजन के एक वर्ष पश्चात से देय होगा ।
(11) मंडी शुल्क से छूट -
राज्य में स्थापित होने वाले केवल नवीन कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी उत्पादों का प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोपज प्रसंस्करण एवं कम्प्रेस्ड बॉयो गैस सेक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र के उद्यमों को राज्य की मंडियों/सीधे उत्पादनकर्ता कृषक/इकाई/प्रथम कच्चा माल क्रय करने के दिनांक से 5 वर्ष तक के लिये कृषि उत्पादों (परिशिष्ट-3 में वर्णित अपात्र उद्यमोें को छोड़कर) पर लगने वाले मंडी शुल्क से पूर्ण छूट व्यय की प्रतिपूर्ति अधिकतम राशि ₹ 5.00 करोड़ प्रतिवर्ष की सीमा तक प्रदान की जायेगी, साथ ही छूट की कुल अधिकतम सीमा इकाई द्वारा किये गये स्थायी पूंजी निवेश के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। ୧୩୬୦ (୯୬) (12) एंकर इकाईयों को विशेष अनुदान :-
प्रथम 5 एंकर इकाईयों जिनका निवेश रू. 200 करोड़ से अधिक होगा उन्हें मान्य स्थाई पूंजी निवेश का 5 प्रतिशत अनुदान अधिक एवं अधिकतम सीमा कुल स्थाई पूंजी निवेश के 110 प्रतिशत तक दी जा सकेगी। (13) अन्य अनुदान :- अन्य अनुदान यथा - परियोजना प्रतिवेदन अनुदान, गुणवत्ता प्रमाणीकरण अनुदान, तकनीकी पेटेंट अनुदान, प्रौद्योगिकी क्रय अनुदान, जल एवं ऊर्जा दक्षता व्यय प्रतिपूर्ति अनुदान, परिशिष्ट-क्रमशः 9.8, 9.9, 9.10, 9.11 व 9.15 के अनुसार होगी। (14) विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन ः- राज्य में नवीन कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी उत्पादों का प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोपज प्रसंस्करण एवं कम्प्रेस्ड बॉयो गैस सेक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन के प्रकरणों में निम्नानुसार विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जायेगा :- क्र. मद 1. अनुसंधान एवं विकास की स्थापना
| क्र. | मद | विवरण |
| 1. | अनुसंधान एवं विकास की स्थापना | 1- कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण सेक्टर अंतर्गत अनुसंधान एवं विकास हेतु क्रय/लीज पर प्राप्त की गयी भूमि एवं भवन पर स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट। 2- इकाई द्वारा अनुसंधान एवं विकास अंतर्गत स्थापित टेस्ंिटग लेब, गुणवत्ता प्रमाणीकरण लेब हेतु क्रय किये गये उपकरण पर व्यय का 25 प ्रतिशत अनुदान, अधिकतम रूपये 1 करोड़। |
| 2. | निर्यात व्यय प्रतिपूर्ति (केवल निर्यातक इकाई को) | राज्य में इस नीति की अवधि में स्थापित कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण सेक्टर को व्यवसायिक उत्पादन दिनांक से उद्यम के उत्पादन स्थल से निर्यात किये जाने वाले बंदरगाह तक सामग्री परिवहन किये जाने पर निर्यात हेतु की गई व्यय राशि का अधिकतम 75 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति 10 वर्ष तक की जा सकेगी, अधिकतम स्थाई पूंजी निवेश का 35 प्रतिशत। इस हेतु इकाई को व्यावसायिक निर्यात का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। |
(15) रूपये 1,000 करोड़ से अधिक निवेश करने वाली इकाइयों के लिए विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन का प्रावधान :-
औद्योगिक नीति, 2024-30 की अवधि में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी उत्पादों का प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोपज प्रसंस्करण एवं कम्प्रेस्ड बॉयो गैस सेक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र में स्थायी पूंजी निवेश में रूपये 1,000 करोड़ या इससे अधिक निवेश करने वाली अथवा 1,000 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करने वाले उद्यमों को औद्योगिक नीति, 2024-30 में घोषित आर्थिक निवेश प्रोत्साहन के अतिरिक्त प्रोत्साहन दिये जाने के प्रस्तावों पर मंत्रिमंडलीय उप समिति विचार कर सकेगी।
-----00-------
୧୩୬୦ (୯୭)(स-4) औद्योगिक विकास नीति, 2024-30 के अंतर्गत इलेिक्ट्रकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की इकाई के वृहद उद्यम हेतु ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' पैकेज :-
औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत राज्य में निवेश के आधार पर इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रानिक्स सेक्टर के नीति में परिभाषित नवीन उद्यमों की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में निवेशक इकाईयों को उनके द्वारा परियोजना में स्थाई पूंजी निवेश की मदों पर निवेश होने वाली राशि के 100 प्रतिशत तक (अन्यथा प्रावधानित होने पर यह सीमा तद्ानुसार होगी) औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जावेगा। इस पैकेज में अनुदान/छूट/रियायतें/प्रतिपूर्ति की निम्नानुसार सुविधाएं दी जा सकेंगी :-
(1) नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी ) प्रतिपूर्ति -
वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 12 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी), अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति की जावेगी।
अथवा
स्थायी पूंजी निवेश अनुदान -
राज्य में इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रानिक्स सेक्टर के नवीन उद्यमों की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में उद्यमों को निम्नलिखित विवरण अनुसार स्थायी पूंजी निवेश अनुदान दिया जावेगा -
| यंत्र संयंत्र मे पूंजी निवेश ं (रूपये करोड़ में) | अनुदान का प ्रतिशत | अनुदान की अधिकतम राशि (रूपये करोड़ में) | अनुदान वितरण की समयावधि |
| रू. 50 से अधिक किन्तु रू. 200 से कम | 35 | 60 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
| रू. 200 से अधिक किन्तु रू. 500 से कम | 35 | 150 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
| रू. 500 से अधिक | 35 | 300 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
नोटः- (1) बिन्दु क्रमांक 1 में दर्शित नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) प्रतिपूर्ति अथवा स्थायी पूंजी निवेश अनुदान में से कोई एक सुविधा विकल्प चयन के आधार पर ली जा सकेगी। इस हेतु एक बार लिया गया विकल्प अपरिवर्तनीय होगा। विकल्प चयन करने हेतु निवेशक को विभाग द्वारा निर्धारित प्रारूप में विकल्प पत्र शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत किया जाना आवश्यक होगा। ୧୩୬୦ (୯୮) (2) स्थायी पूंजी अनुदान की प्रथम किश्त का भुगतान उत्पादन प्रारंभ करने के पश्चात प्रस्तुत आवेदन पर निर्धारित स्वीकृति के पश्चात किया जा सकेेगा।
(2) विद्युत शुल्क छूट :-
राज्य में केवल नवीन इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रानिक्स सेक्टर के नीति में परिभाषित उद्यमों को वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 12 वर्ष तक की विद्युत शुल्क छूट दी जावेगी। (3) स्टाम्प शुल्क से छूट :-
राज्य में नवीन इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रानिक्स सेक्टर के नीति में परिभाषित उद्यमों की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में भूमि, शेड तथा भवनों के क्रय/पट्टे पर लिए जाने के मामले में निष्पादित किये जाने विलेखों पर संबंधित भूमि लीज के विलेखों पर स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान किया जायेगा। (4) पंजीयन शुल्क प्रतिपूर्ति :- राज्य में नवीन इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रानिक्स सेक्टर के नीति में परिभाषित उद्यमों की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में भूमि पर देय पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति प्रदान किया जायेगा। (5) भू उपयोग में परिवर्तन शुल्क में छूट :-
राज्य में नवीन इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रानिक्स सेक्टर के नीति में परिभाषित उद्यमों की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में भू-उपयोग परिवर्तन (औद्योगिक प्रयोजन होने पर) अधिकतम 50 एकड़ भूमि तक के लिए भू-पुर्ननिर्धारण कर (डायवर्सन शुल्क) में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी।
(6) नवीन विद्युत कनेक्शन पर देय शुल्क की प्रतिपूर्ति :-
केवल पात्र नवीन उद्यमों को नवीन विद्युत कनेक्शन पर देय शुल्क (सुरक्षा निधि को छोड़कर) की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति किया जायेगा।
(7) ई.पी.एफ. प्रतिपूर्ति :-
राज्य में नवीन इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रानिक्स सेक्टर के नीति में परिभाषित उद्यमों की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन/आधुनिकीकरण के प्रकरणों में छत्तीसगढ़ राज्य के कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के ईपीएफ अंशदान में उत्पादन दिनांक से 05 वर्ष तक की 75 प्रतिशत का प्रतिपूर्ति, अधिकतम रु. 01 करोड़ प्रतिवर्ष की पात्रता होगी। (8) प्रशिक्षण वृत्ति प्रतिपूर्ति :- नवीन पात्र उद्यम की स्थापना के प्रकरणों में रूपये 50,000/- प्रतिमाह से कम वेतन प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के प्रत्येक मूल निवासी कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के मामले में एक बार प्रशिक्षण पर उनके नियोक्ता द्वारा भुगतान किये जाने वाले एक माह का वेतन या अधिकतम राशि रूपये 15000/- प्रति व्यक्ति, जो कम हो, की दर से उद्यम के व्यावसायिक उत्पादन / गतिविधि आरंभ करने की दिनांक से 05 वर्ष की अवधि हेतु अथवा स्थायी पूंजी निवेश୧୩୬୦ (୯୯) के 100 प्रतिशत तक की सीमा तक व्यय प्रतिपूर्ति की जा सकेगी । इस हेतु प्रथम क्लेम कर्मचारी के नियोजन के एक वर्ष पश्चात से देय होगा ।
(9) एंकर इकाईयों को विशेष अनुदान :- प्रथम 5 एंकर इकाईयों जिनका निवेश रू. 200 करोड से अधिक होगा उन्हें मान्य स्थाई पूंजी निवेश का 5 प्रतिशत अनुदान अधिक एवं अधिकतम सीमा कुल स्थाई पूंजी निवेश के 110 प्रतिशत तक दी जा सकेगी।
(10) अन्य अनुदान :-
अन्य अनुदान यथा - परियोजना प्रतिवेदन अनुदान, गुणवत्ता प्रमाणीकरण अनुदान, तकनीकी पेटेंट अनुदान, प्रौद्योगिकी क्रय अनुदान, जल एवं ऊर्जा दक्षता व्यय प्रतिपूर्ति अनुदान, परिवहन अनुदान (केवल निर्यातक इकाई को), परिशिष्ट-क्रमशः 9.8, 9.9, 9.10, 9.11, 9.15 व 9.16 के अनुसार होगी।
(11) विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन :- राज्य में नवीन इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रानिक्स सेक्टर के नीति में परिभाषित उद्यमों की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण/प्रतिस्थापन के प्रकरणों में निम्नानुसार विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जायेगा :-
| क्र. | मद | विवरण |
| 1. अनुसंधान एवं विकास की स्थापना | इलेक्ट्रानिक्स सेक्टर हेतु स्थापित नवीन अनुसंधान एवं विकास हेतु क्रय यंत्र एवं संयंत्र पर व्यय का 20 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रूपये 3 करोड़। | |
| 2. अनुसंधान एवं विकास हेतु क्रय/लीज पर प्राप्त की गयी भूमि एवं भवन पर स्टाम्प शुल्क छूट | प र्ण छूट । ू | |
| 3. | निर्यात हेतु प्रमाण पत्र प ्राप्ति | निर्यात हेतु उत्पादों के अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणन/अनुमोदन प्राप्त किये जाने के अन्य प्रकरण में प्रति प्रकरण राशि रूपये 15 लाख प्रति उत्पाद, अधिकतम 10 उत्पादों हेतु आवेदन शुल्क की अधिकतम 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति की जा सकेगी, किन्तु इस हेतु इकाई को प्रति उत्पाद रूपये 50 करोड़ अथवा इससे अधिक व्यावसायिक निर्यात का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। इस नीति की अवधि में किये जाने वाले पेटेंट पंजीकरण के संबंध में भारत सरकार के MeitY मंत्रालय संबंधित उत्पादों के पेटेंट दर्ज कराने संबंधी मामले में पेटेंट प्रमाण पत्र प्राप्त होने की स्थिति में व्यय की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति की जा सकेगी। |
(12) रूपये 1,000 करोड़ से अधिक निवेश करने वाली इकाइयों के लिए विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन का प्रावधान :-
औद्योगिक नीति, 2024-30 की अवधि में इलेक्ट्रानिक्स सेक्टर में स्थायी पूंजी निवेश में रूपये 1,000 करोड़ या इससे अधिक निवेश करने वाली अथवा 1,000 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करने वाले उद्यमों को औद्योगिक नीति, 2024-30 में घोषित आर्थिक निवेश प्रोत्साहन के अतिरिक्त प्रोत्साहन दिये जाने के प्रस्तावों पर मंत्रिमंडलीय उप समिति विचार कर सकेगी।
ेे
------00------
୧୩୬୦ (୧୦୧)(स-5) औद्योगिक विकास नीति, 2024-30 के अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई), रोबोटिक्स एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी.यू) से संबंधित क्षेत्र के वृहद उद्यम हेतु ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' पैकेज :-
औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत राज्य में निवेश के आधार पर आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई), रोबोटिक्स, एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी.यू) से संबंधित उद्यमों के नवीन उद्यमों की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में निवेशक इकाईयों को उनके द्वारा परियोजना में स्थाई पूंजी निवेश की मदों पर निवेश होने वाली राशि के 150 प्रतिशत तक (अन्यथा प्रावधानित होने पर यह सीमा तद्ानुसार होगी) औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जावेगा। इस पैकेज में अनुदान/छूट/रियायतें/प्रतिपूर्ति की निम्नानुसार सुविधाएं दी जा सकेगी :-
(1) नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी ) प्रतिपूर्ति -
वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 12 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी), अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति की जावेगी।
अथवा
स्थायी पूंजी निवेश अनुदान -
राज्य में नवीन आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई) रोबोटिक्स, एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी.यू) से संबंधित नवीन उद्यमों की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में निम्नलिखित विवरण अनुसार स्थायी पूंजी निवेश अनुदान दिया जावेगा-
| यंत्र संयंत्र मे पूंजी निवेश ं (रूपये करोड़ में) | अनुदान का प ्रतिशत | अनुदान की अधिकतम राशि (रूपये करोड़ में) | अनुदान वितरण की समयावधि |
| रू. 50 से अधिक किन्तु रू. 200 से कम | 50 | 90 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
| रू. 200 से अधिक किन्तु रू. 500 से कम | 50 | 230 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
| रू. 500 से अधिक | 50 | 450 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
नोटः- (1) बिन्दु क्रमांक 1 में दर्शित नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) प्रतिपूर्ति अथवा स्थायी पूंजी निवेश अनुदान में से कोई एक सुविधा विकल्प चयन के आधार पर ली जा सकेगी। इस हेतु एक बार लिया गया विकल्प अपरिवर्तनीय होगा। विकल्प चयन करने हेतु निवेशक को विभाग द्वारा निर्धारित प्रारूप में विकल्प पत्र शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत किया जाना आवश्यक होगा।୧୩୬୦ (୧୦୨) (2) स्थायी पूंजी अनुदान की प्रथम किश्त का भुगतान उत्पादन प्रारंभ करने के पश्चात प्रस्तुत आवेदन पर निर्धारित स्वीकृति के पश्चात किया जा सकेेगा।
(2) विद्युत शुल्क छूट :-
राज्य में केवल नवीन आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई), रोबोटिक्स, एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी. यू) से संबंधित उद्यमों को वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 12 वर्ष तक की विद्युत शुल्क छूट दी जावेगी।
(3) स्टाम्प शुल्क से छूट :-
राज्य में नवीन आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई), रोबोटिक्स, एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी.यू) की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में भूमि, शेड तथा भवनों के क्रय/पट्टे पर लिए जाने के मामले में निष्पादित किये जाने विलेखों पर संबंधित भूमि लीज के विलेखों पर स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान किया जायेगा। (4) पंजीयन शुल्क प्रतिपूर्ति :- राज्य में नवीन आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई), रोबोटिक्स, एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी.यू) की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में भूमि पर देय पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति प्रदान किया जायेगा। (5) भू उपयोग में परिवर्तन शुल्क में छूट :-
राज्य में नवीन आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई), रोबोटिक्स, एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी.यू) की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में भू-उपयोग परिवर्तन (औद्योगिक प्रयोजन होने पर) अधिकतम 50 एकड़ भूमि तक के लिए भू-पुर्ननिर्धारण कर (डायवर्सन शुल्क) में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी।
(6) नवीन विद्युत कनेक्शन पर देय शुल्क की प्रतिपूर्ति :-
केवल पात्र नवीन उद्यमों को नवीन विद्युत कनेक्शन पर देय शुल्क (सुरक्षा निधि को छोड़कर) की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति किया जायेगा।
(7) ई.पी.एफ. प्रतिपूर्ति :-
राज्य में नवीन आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई), रोबोटिक्स, एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी.यू) की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में छत्तीसगढ़ राज्य के कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के ईपीएफ अंशदान में उत्पादन दिनांक से 05 वर्ष तक की 75 प्रतिशत का प्रतिपूर्ति, अधिकतम रु. 01 करोड़ प्रतिवर्ष की पात्रता होगी।
(8) प्रशिक्षण वृत्ति प्रतिपूर्ति :- नवीन पात्र उद्यम की स्थापना के प्रकरणों में रूपये 50,000/- प्रतिमाह से कम वेतन प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के प्रत्येक मूल निवासी कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के मामले में एक बार प्रशिक्षण पर उनके नियोक्ता द्वारा भुगतान किये जाने वाले एक माह का वेतन या୧୩୬୦ (୧୦୩) अधिकतम राशि रूपये 15000/- प्रति व्यक्ति, जो कम हो, की दर से उद्यम के व्यावसायिक उत्पादन / गतिविधि आरंभ करने की दिनांक से 05 वर्ष की अवधि हेतु अथवा स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक की सीमा तक व्यय प्रतिपूर्ति की जा सकेगी । इस हेतु प्रथम क्लेम कर्मचारी के नियोजन के एक वर्ष पश्चात से देय होगा ।
(9) एंकर इकाईयों को विशेष अनुदान :- प्रथम 5 एंकर इकाईयों जिनका निवेश रू. 200 करोड से अधिक होगा उन्हें मान्य स्थाई पूंजी निवेश का 5 प्रतिशत अनुदान अधिक एवं अधिकतम सीमा कुल स्थाई पूंजी निवेश के 110 प्रतिशत तक दी जा सकेगी।
(10) अन्य अनुदान :-
अन्य अनुदान यथा - परियोजना प्रतिवेदन अनुदान, गुणवत्ता प्रमाणीकरण अनुदान, तकनीकी पेटेंट अनुदान, प्रौद्योगिकी क्रय अनुदान, जल एवं ऊर्जा दक्षता व्यय प्रतिपूर्ति अनुदान, परिवहन अनुदान (केवल निर्यातक इकाई को), परिशिष्ट-क्रमशः 9.8, 9.9, 9.10, 9.11, 9.15 व 9.16 के अनुसार होगी।
(11) विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन ः- राज्य में नवीन आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई), रोबोटिक्स, एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी.यू) की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में निम्नानुसार विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जायेगा :-
| क्र. | मद | विवरण |
| 1. अनुसंधान एवं विकास की स्थापना | आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई), रोबोटिक्स, एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी.यू) हेतु स्थापित नवीन अनुसंधान एवं विकास हेतु क्रय यंत्र एवं संयंत्र पर व्यय का 20 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रूपये 3 करोड़। | |
| 2. अनुसंधान एवं विकास हेतु क्रय/लीज पर प्राप्त की गयी भूमि एवं भवन पर स्टाम्प शुल्क छूट | प र्ण छूट । ू | |
| 3. | निर्यात हेतु प्रमाण पत्र प ्राप्ति | आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई), रोबोटिक्स, एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी.यू) उत्पादों के निर्यात हेतु अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणन/अनुमोदन प ्राप्त किये जाने के अन्य प्रकरण में प्रति प्रकरण राशि रूपये 15 लाख प्रति उत्पाद, अधिकतम 10 उत्पादो हेतु आवेदन शुल्क की ं अधिकतम 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति की जा सकेगी, किन्तु इस हेतु इकाई को प्रति उत्पाद रूपये 50 करोड़ अथवा इससे अधिक व्यावसायिक निर्यात का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। इस नीति की अवधि में किये जाने वाले पेटेंट पंजीकरण |
| के संबंध में भारत सरकार के संबंधित मंत्रालय संबंधित उत्पादो ं के पेटेंट दर्ज कराने संबंधी मामले में पेटेंट प्रमाण पत्र प्राप्त होने की स्थिति में व्यय की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति की जा सकेगी। |
(12) रूपये 1,000 करोड़ से अधिक निवेश करने वाली इकाइयों के लिए विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन का प्रावधान :-
औद्योगिक नीति, 2024-30 की अवधि में आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई), रोबोटिक्स, एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी.यू) में स्थायी पूंजी निवेश में रूपये 1,000 करोड़ या इससे अधिक निवेश करने वाली अथवा 500 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करने वाले उद्यमों को औद्योगिक नीति, 2024-30 में घोषित आर्थिक निवेश प्रोत्साहन के अतिरिक्त प्रोत्साहन दिये जाने के प्रस्तावों पर मंत्रिमंडलीय उप समिति विचार कर सकेगी।
------00------
୧୩୬୦ (୧୦୫)(स-6) औद्योगिक विकास नीति, 2024-30 के अंतर्गत सूचना प्रोद्यौगिकी (आई.टी.) से संबंधित क्षेत्र के वृहद उद्यम हेतु ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' पैकेज :-
औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत राज्य में निवेश के आधार पर नवीन सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में निवेशक इकाईयों को उनके द्वारा परियोजना में स्थाई पूंजी निवेश की मदों पर निवेश होने वाली राशि के 150 प्रतिशत तक (अन्यथा प्रावधानित होने पर यह सीमा तद्ानुसार होगी) औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जावेगा। इस पैकेज में अनुदान/छूट/रियायतें/प्रतिपूर्ति की निम्नानुसार सुविधाएं दी जा सकेंगी :-
(1) नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी ) प्रतिपूर्ति -
वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 12 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी), अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति की जावेगी।
अथवा
स्थायी पूंजी निवेश अनुदान -
राज्य में नवीन सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में निम्नलिखित विवरण अनुसार स्थायी पूंजी निवेश अनुदान दिया जावेगा-
| यंत्र संयंत्र मे ं पूंजी निवेश (रूपये करोड़ में) | अनुदान का प ्रतिशत | अनुदान की अधिकतम राशि (रूपये करोड़ में) | अनुदान वितरण की समयावधि |
| रू. 50 से अधिक किन्तु रू. 200 से कम | 35 | 60 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
| रू. 200 से अधिक किन्तु रू. 500 से कम | 35 | 150 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
| रू. 500 से अधिक | 35 | 300 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
नोटः- (1) बिन्दु क्रमांक 1 में दर्शित नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) प्रतिपूर्ति अथवा स्थायी पूंजी निवेश अनुदान में से कोई एक सुविधा विकल्प चयन के आधार पर ली जा सकेगी। इस हेतु एक बार लिया गया विकल्प अपरिवर्तनीय होगा। विकल्प चयन करने हेतु निवेशक को विभाग द्वारा निर्धारित प्रारूप में विकल्प पत्र शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत किया जाना आवश्यक होगा।
(2) स्थायी पूंजी अनुदान की प्रथम किश्त का भुगतान उत्पादन प्रारंभ करने के पश्चात प्रस्तुत आवेदन पर निर्धारित स्वीकृति के पश्चात किया जा सकेेगा।୧୩୬୦ (୧୦୬) (2) विद्युत शुल्क छूट :-
राज्य में केवल नवीन सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) से संबंधित उद्यमों को वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 12 वर्ष तक की विद्युत शुल्क छूट दी जावेगी।
(3) स्टाम्प शुल्क से छूट :-
इस पैकेज के अंर्तगत राज्य में नवीन सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में भूमि, शेड तथा भवनों के क्रय/पट्टे पर लिए जाने के मामले में निष्पादित किये जाने विलेखों पर संबंधित भूमि लीज के विलेखों पर स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान किया जायेगा। (4) पंजीयन शुल्क प्रतिपूर्ति :- राज्य में नवीन सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में भूमि पर देय पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति प्रदान किया जायेगा। (5) भू उपयोग में परिवर्तन शुल्क में छूट :-
राज्य में नवीन सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में भू-उपयोग परिवर्तन (औद्योगिक प्रयोजन होने पर) अधिकतम 50 एकड़ भूमि तक के लिए भू-पुर्ननिर्धारण कर (डायवर्सन शुल्क) में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी। (6) नवीन विद्युत कनेक्शन पर देय शुल्क की प्रतिपूर्ति :-
केवल पात्र नवीन उद्यमों को नवीन विद्युत कनेक्शन पर देय शुल्क (सुरक्षा निधि को छोड़कर) की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति किया जायेगा। (7) ई.पी.एफ. प्रतिपूर्ति :-
राज्य में नवीन सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में छत्तीसगढ़ राज्य के कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के ईपीएफ अंशदान में उत्पादन दिनांक से 05 वर्ष तक की 75 प्रतिशत का प्रतिपूर्ति, अधिकतम रु. 01 करोड़ प्रतिवर्ष की पात्रता होगी।
(8) प्रशिक्षण वृत्ति प्रतिपूर्ति :- नवीन पात्र उद्यम की स्थापना के प्रकरणों में रूपये 50,000/- प्रतिमाह से कम वेतन प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के प्रत्येक मूल निवासी कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के मामले में एक बार प्रशिक्षण पर उनके नियोक्ता द्वारा भुगतान किये जाने वाले एक माह का वेतन या अधिकतम राशि रूपये 15000/- प्रति व्यक्ति, जो कम हो, की दर से उद्यम के व्यावसायिक उत्पादन / गतिविधि आरंभ करने की दिनांक से 05 वर्ष की अवधि हेतु अथवा स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक की सीमा तक व्यय प्रतिपूर्ति की जा सकेगी । इस हेतु प्रथम क्लेम कर्मचारी के नियोजन के एक वर्ष पश्चात से देय होगा ।୧୩୬୦ (୧୦୭) (9) किराया अनुदान - केवल पात्र नवीन उद्यमों को 05 वर्षों तक, किराए के भवन में इकाई स्थापित करने की दशा में, भुगतान किये गये मासिक किराये का 40 प्रतिशत (अधिकतम 20,000 वर्गफुट तक), जो भी न्यूनतम हो, प्रति माह अधिकतम राशि रू. 50,000/- की प्रतिपूर्ति प्रत्येक तिमाही में अनुदान के रूप में की जायेगी। (10) एंकर इकाईयों को विशेष अनुदान :-
प्रथम 5 एंकर इकाईयों जिनका निवेश रू. 200 करोड से अधिक होगा उन्हें मान्य स्थाई पूंजी निवेश का 5 प्रतिशत अनुदान अधिक एवं अधिकतम सीमा कुल स्थाई पूंजी निवेश के 110 प्रतिशत तक दी जा सकेगी।
(11) अन्य अनुदान :-
अन्य अनुदान यथा - परियोजना प्रतिवेदन अनुदान, गुणवत्ता प्रमाणीकरण अनुदान, तकनीकी पेटेंट अनुदान, प्रौद्योगिकी क्रय अनुदान, जल एवं ऊर्जा दक्षता व्यय प्रतिपूर्ति अनुदान, परिवहन अनुदान (केवल निर्यातक इकाई को) व्यय की प्रतिपूर्ति, परिशिष्ट - क्रमशः 9.8, 9.9, 9.10, 9.11, 9.15 व 9.16 के अनुसार होगी।
(12) विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन ः- राज्य में नवीन सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में निम्नानुसार विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जायेगा :-
| क्र. | मद | विवरण |
| 1. अनुसंधान एवं विकास की स्थापना | सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) हेतु स्थापित नवीन अनुसंधान एवं विकास हेतु क्रय यंत्र एवं संयंत्र पर व्यय का 20 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रूपये 3 करोड़। | |
| 2. अनुसंधान एवं विकास हेतु क्रय/लीज पर प ्राप्त की गयी भूमि एवं भवन पर स्टाम्प शुल्क छूट | प र्ण छूट । ू | |
| 3. | निर्यात हेतु प्रमाण पत्र प ्राप्ति | सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.)उत्पादों के निर्यात हेतु अंतर्राष्ट्रीय प ्रमाणन/अनुमोदन प्राप्त किये जाने के अन्य प्रकरण में प्रति प्रकरण राशि रूपये 15 लाख प्रति उत्पाद, अधिकतम 10 उत्पादों हेतु आवेदन शुल्क की अधिकतम 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति की जा सकेगी, किन्तु इस हेतु इकाई को प्रति उत्पाद रूपये 50 करोड़ अथवा इससे अधिक व्यावसायिक निर्यात का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। इस नीति की अवधि में किये जाने वाले पेटेंट पंजीकरण के |
| क्र. | मद | विवरण |
| संबंध में भारत सरकार के संबंधित मंत्रालय संबंधित उत्पादों के प टेंट दर्ज कराने संबंधी मामले में पेटेंट प्रमाण पत्र प्राप्त होने की े स्थिति में व्यय की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति की जा सकेगी। |
(13) रूपये 500 करोड़ से अधिक निवेश करने वाली इकाइयों के लिए विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन का प्रावधान :-
औद्योगिक नीति, 2024-30 की अवधि में सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) में स्थायी पूंजी निवेश में रूपये 500 करोड़ या इससे अधिक निवेश करने वाली अथवा 1,000 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करने वाले उद्यमों को औद्योगिक नीति, 2024-30 में घोषित आर्थिक निवेश प्रोत्साहन के अतिरिक्त प्रोत्साहन दिये जाने के प्रस्तावों पर मंत्रिमंडलीय उप समिति विचार कर सकेगी।
------00------
୧୩୬୦ (୧୦୯)(स-7) औद्योगिक विकास नीति, 2024-30 के अंतर्गत आई.टी. इनेबल्ड सर्विसेज (आई.टी.ई.एस.)/डेटा सेंटर से संबंधित क्षेत्र के वृहद उद्यम हेतु ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' पैकेज :-
औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत राज्य में निवेश के आधार पर नवीन आई.टी. इनेबल्ड सर्विसेज (आई.टी. ई. एस.)/डेटा सेंटर से संबंधित उद्यमों की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में निवेशक इकाईयों को उनके द्वारा परियोजना में स्थाई पूंजी निवेश की मदों पर निवेश होने वाली राशि के 150 प्रतिशत तक (अन्यथा प्रावधानित होने पर यह सीमा तद्ानुसार होगी) औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जावेगा।
इस पैकेज में अनुदान/छूट/रियायतें/प्रतिपूर्ति की निम्नानुसार सुविधाएं दी जा सकेंगी :-
(1) नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी ) प्रतिपूर्ति -
वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 12 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी), अधिकतम स्थायी पूंजी निवेश के 150 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति की जावेगी।
अथवा
स्थायी पूंजी निवेश अनुदान -
राज्य में राज्य में नवीन आई.टी. इनेबल्ड सर्विसेज (आई.टी. ई. एस.)/डेटा सेंटर से संबंधित उद्यमों की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण से संबंधित उद्यमों को निम्नलिखित विवरण अनुसार स्थायी पूंजी निवेश अनुदान दिया जावेगा-
| यंत्र संयंत्र मे ं पूंजी निवेश (रूपये करोड़ में) | अनुदान का प ्रतिशत | अनुदान की अधिकतम राशि (रूपये करोड़ में) | अनुदान वितरण की समयावधि |
| रू. 50 से अधिक किन्तु रू. 200 से कम | 35 | 60 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
| रू. 200 से अधिक किन्तु रू. 500 से कम | 35 | 150 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
| रू. 500 से अधिक | 35 | 300 | 06 वर्ष, समान वार्षिक किश्तों में |
नोटः- (1) बिन्दु क्रमांक 1 में दर्शित नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) प्रतिपूर्ति अथवा स्थायी पूंजी निवेश अनुदान में से कोई एक सुविधा विकल्प चयन के आधार पर ली जा सकेगी। इस हेतु एक बार लिया गया विकल्प अपरिवर्तनीय होगा। विकल्प चयन करने हेतु निवेशक को विभाग द्वारा निर्धारित प्रारूप में विकल्प पत्र शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत किया जाना आवश्यक होगा।୧୩୬୦ (୧୧୦) (2) स्थायी पूंजी अनुदान की प्रथम किश्त का भुगतान उत्पादन प्रारंभ करने के पश्चात प्रस्तुत आवेदन पर निर्धारित स्वीकृति के पश्चात किया जा सकेेगा।
(2) विद्युत शुल्क छूट :-
राज्य में केवल नवीन आई.टी. इनेबल्ड सर्विसेज (आई.टी.ई.एस.)/डेटा सेंटर से संबंधित उद्यमों को वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 12 वर्ष तक की विद्युत शुल्क छूट दी जावेगी।
(3) स्टाम्प शुल्क से छूट :-
राज्य में नवीन आई.टी. इनेबल्ड सर्विसेज (आई.टी.ई.एस.)/डेटा सेंटर की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में भूमि, शेड तथा भवनों के क्रय/पट्टे पर लिए जाने के मामले में निष्पादित किये जाने विलेखों पर संबंधित भूमि लीज के विलेखों पर स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान किया जायेगा। (4) पंजीयन शुल्क प्रतिपूर्ति :- राज्य में नवीन आई.टी. इनेबल्ड सर्विसेज (आई.टी.ई.एस.)/डेटा सेंटर की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में भूमि पर देय पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति प्रदान किया जायेगा। (5) भू उपयोग में परिवर्तन शुल्क में छूट :-
राज्य में नवीन आई.टी. इनेबल्ड सर्विसेज (आई.टी.ई.एस.)/डेटा सेंटर की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में भू-उपयोग परिवर्तन (औद्योगिक प्रयोजन होने पर) अधिकतम 50 एकड़ भूमि तक के लिए भू-पुर्ननिर्धारण कर (डायवर्सन शुल्क) में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी।
(6) नवीन विद्युत कनेक्शन पर देय शुल्क की प्रतिपूर्ति :-
केवल पात्र नवीन उद्यमों को नवीन विद्युत कनेक्शन पर देय शुल्क (सुरक्षा निधि को छोड़कर) की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति किया जायेगा।
(7) ई.पी.एफ. प्रतिपूर्ति -
राज्य में नवीन आई.टी. इनेबल्ड सर्विसेज (आई.टी.ई.एस.)/डेटा सेंटर की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में छत्तीसगढ़ राज्य के कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के ईपीएफ अंशदान में उत्पादन दिनांक से 05 वर्ष तक की 75 प्रतिशत का प्रतिपूर्ति, अधिकतम रु. 01 करोड़ प्रतिवर्ष की पात्रता होगी।
(8) प्रशिक्षण वृत्ति प्रतिपूर्ति :- नवीन पात्र उद्यम की स्थापना के प्रकरणों में रूपये 50,000/- प्रतिमाह से कम वेतन प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के प्रत्येक मूल निवासी कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के मामले में एक बार प्रशिक्षण पर उनके नियोक्ता द्वारा भुगतान किये जाने वाले एक माह का वेतन या୧୩୬୦ (୧୧୧) अधिकतम राशि रूपये 15000/- प्रति व्यक्ति, जो कम हो, की दर से उद्यम के व्यावसायिक उत्पादन / गतिविधि आरंभ करने की दिनांक से 05 वर्ष की अवधि हेतु अथवा स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक की सीमा तक व्यय प्रतिपूर्ति की जा सकेगी । इस हेतु प्रथम क्लेम कर्मचारी के नियोजन के एक वर्ष पश्चात से देय होगा ।
(9) किराया अनुदान - केवल पात्र नवीन उद्यमों को 05 वर्षों तक, किराए के भवन में इकाई स्थापित करने की दशा में, भुगतान किये गये मासिक किराये का 40 प्रतिशत (अधिकतम 20,000 वर्गफुट तक), जो भी न्यूनतम हो, प्रति माह अधिकतम राशि रू. 50,000/- की प्रतिपूर्ति प्रत्येक तिमाही में अनुदान के रूप में की जायेगी।
(10) एंकर इकाईयों को विशेष अनुदान -
प्रथम 5 एंकर इकाईयों जिनका निवेश रू. 200 करोड से अधिक होगा उन्हें मान्य स्थाई पूंजी निवेश का 5 प्रतिशत अनुदान अधिक एवं अधिकतम सीमा कुल स्थाई पूंजी निवेश के 110 प्रतिशत तक दी जा सकेगी।
(11) अन्य अनुदान :-
अन्य अनुदान यथा - परियोजना प्रतिवेदन अनुदान, गुणवत्ता प्रमाणीकरण अनुदान, तकनीकी पेटेंट अनुदान, प्रौद्योगिकी क्रय अनुदान, जल एवं ऊर्जा दक्षता व्यय प्रतिपूर्ति अनुदान, परिवहन अनुदान (केवल निर्यातक इकाई को) व्यय की प्रतिपूर्ति, परिशिष्ट-क्रमशः 9.8, 9.9, 9.10, 9.11, 9.15 व 9.16 के अनुसार होगी।
(12) विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन :- राज्य में नवीन आई.टी. इनेबल्ड सर्विसेज (आई.टी.ई. एस.)/डेटा सेंटर की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में निम्नानुसार विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जायेगा :-
| क्र. | मद | विवरण |
| 1. अनुसंधान एवं विकास की स्थापना | आई.टी. इनेबल्ड सर्विसेज (आई.टी.ई.एस.)/डेटा सेंटर हेतु स्थापित नवीन अनुसंधान एवं विकास हेतु क्रय यंत्र एवं संयंत्र पर व्यय का 20 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रूपये 3 करोड़। | |
| 2. अनुसंधान | एवं विकास हेतु क्रय/लीज पर प्राप्त की गयी भूमि एवं भवन पर स्टाम्प शुल्क छूट | प र्ण छूट । ू |
| 3. | निर्यात ह तु े प ्रमाण पत्र प्राप्ति | आई.टी. इनेबल्ड सर्विसेज (आई.टी.ई.एस.)/डेटा सेंटर उत्पादों के निर्यात हेतु अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणन/अनुमोदन प्राप्त किये जाने के अन्य प्रकरण में प्रति प्रकरण राशि रूपये 15 लाख प्रति उत्पाद, अधिकतम |
| क्र. | मद | विवरण |
| 10 उत्पादों हेतु आवेदन शुल्क की अधिकतम 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति की जा सकेगी, किन्तु इस हेतु इकाई को प्रति उत्पाद रूपये 50 करोड़ अथवा इससे अधिक व्यावसायिक निर्यात का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। इस नीति की अवधि में किये जाने वाले पेटेंट पंजीकरण के संबंध में भारत सरकार के संबंधित मंत्रालय संबंधित उत्पादों के पेटेंट दर्ज कराने संबंधी मामले में पेटेंट प्रमाण पत्र प्राप्त होने की स्थिति में व्यय की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति की जा सकेगी। |
(13) रूपये 500 करोड़ से अधिक निवेश करने वाली इकाइयों के लिए विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन का प्रावधान :-
औद्योगिक नीति, 2024-30 की अवधि में आई.टी. इनेबल्ड सर्विसेज (आई.टी.ई.एस.) /डेटा सेंटर में स्थायी पूंजी निवेश में रूपये 500 करोड़ या इससे अधिक निवेश करने वाली अथवा 1,000 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करने वाले उद्यमों को औद्योगिक नीति, 2024-30 में घोषित आर्थिक निवेश प्रोत्साहन के अतिरिक्त प्रोत्साहन दिये जाने के प्रस्तावों पर मंत्रिमंडलीय उप समिति विचार कर सकेगी।
------00------
୧୩୬୦ (୧୧୩)अध्याय - (द)
विविध प्रोत्साहन पैकेज
विषेश प्रकार के उद्यमों
प्रोत्साहन पैकेज)୧୩୬୦ (୧୧୪) (द-1) अनुसूचित जनजाति/जाति वर्ग हेतु विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज
------------
(1) स्थायी पूंजी निवेश अनुदान -
अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के उद्यमियों द्वारा स्थापित पात्र नवीन उद्यम/विद्यमान उद्यम में विस्तार/शवलीकरण, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को निम्नलिखित विवरण अनुसार स्थायी पूंजी निवेश अनुदान प्रदान किया जा सकेगा -
| उद्यम का स्तर | विकासखंड की श्रेणी | सामान्य उद्यम | थ्रस्ट उद्यम | ||
| स्थायी पूंजी निवेश पर अनुदान का प्रतिशत | स्थायी पूंजी निवेश अनुदान की अधिकतम सीमा (राशि रूपये लाख में) | स्थायी पूंजी निवेश पर अनुदान का प्रतिशत | स्थायी पूंजी निवेश अनुदान की अधिकतम सीमा (राशि रूपये लाख में) | ||
| सूक्ष्म उद्यम | समूह 1 | 35 | 35 | 40 | 40 |
| समूह 2 | 40 | 40 | 45 | 45 | |
| समूह 3 | 45 | 45 | 50 | 50 | |
| लघु उद्यम | समूह 1 | 35 | 255 | 40 | 355 |
| समूह 2 | 40 | 355 | 45 | 455 | |
| समूह 3 | 45 | 455 | 50 | 555 | |
| मध्यम उद्यम | समूह 1 | 35 | 450 | 40 | 700 |
| समूह 2 | 40 | 455 | 45 | 750 | |
| समूह 3 | 45 | 550 | 50 | 800 |
टीप :-
(अ) सूक्ष्म उद्यम श्रेणी को अनुदान का वितरण एक किस्त में किया जावेगा। (ब) लघु उद्यम श्रेणी को अनुदान का वितरण दो वर्षाें में समान किस्तों में किया जावेगा । (स) मध्यम उद्यम श्रेणी को अनुदान का वितरण चार वर्षाें में समान किस्तों में किया जावेगा।୧୩୬୦ (୧୧୫) (2) ब्याज अनुदान :-
| उद्यम का स्तर | क्षेत्र की श्रेणी | सामान्य उद्योग | थ्रस्ट उद्योग | ||||
| अनुदान की अवधि (वर्षो में) | अनुदान का प्रतिशत | अनुदान की वार्षिक अधिकतम सीमा (राशि ₹ लाख मे ) ं | अनुदान की अवधि (वर्षों में) | अनुदान का प्रतिशत | अनुदान की वार्षिक अधिकतम सीमा (राशि ₹ लाख मे ) ं | ||
| सूक्ष्म उद्योग | समूह 1 | 6 | 45 | 20 | 6 | 50 | 25 |
| समूह 2 | 7 | 50 | 25 | 7 | 55 | 30 | |
| समूह 3 | 8 | 55 | 30 | 8 | 60 | 35 | |
| लघु उद्योग | समूह 1 | 6 | 45 | 30 | 6 | 50 | 35 |
| समूह 2 | 7 | 50 | 35 | 7 | 55 | 40 | |
| समूह 3 | 8 | 55 | 40 | 8 | 60 | 45 | |
| मध्यम उद्योग | समूह 1 | 6 | 45 | 40 | 6 | 50 | 45 |
| समूह 2 | 7 | 50 | 45 | 7 | 55 | 50 | |
| समूह 3 | 8 | 55 | 50 | 8 | 60 | 55 |
(3) विद्युत शुल्क छूट :-
अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के उद्यमियों द्वारा स्थापित पात्र सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नवीन उद्यमों की स्थापना पर विद्युत शुल्क भुगतान से निम्नलिखित विवरण अनुसार छूट दी जाएगी ः-
| क्षेत्र | सामान्य उद्योग | थ्रस्ट उद्योग |
| समूह-1 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 6 वर्ष तक पूर्ण छूट | वाणिज्यिक उत्पादन प ्रारंभ करने के दिनांक से 7 वर्ष तक पूर्ण छूट |
| समूह-2 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 8 वर्ष तक पूर्ण छूट | वाणिज्यिक उत्पादन प ्रारंभ करने के दिनांक से 9 वर्ष तक पूर्ण छूट |
| समूह-3 | वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 10 वर्ष तक पूर्ण छूट | वाणिज्यिक उत्पादन प ्रारंभ करने के दिनांक से 11 वर्ष तक पूर्ण छूट |
(4) स्टाम्प शुल्क से छूट -
निवेशकों के वर्ग की दृष्टि से वर्गीकृत समस्त श्रेणियों के उद्यमियों द्वारा स्थापित पात्र सूक्ष्म, लघु, मध्यम की ''नवीन उद्यम स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण'' को निम्नांकित प्रकरणों में स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट दी जा
सकेगी :-
(अ) भूमि, शेड तथा भवनों के क्रय/पट्टे के निष्पादित विलेखों पर संबंधित भूमि लीज के विलेखों पर (माइनिंग लीज की भूमि को छोड़कर)। (ब) ऋण-अग्रिम से संबंधित विलेखों के निष्पादन पर बैंक/वित्तीय संस्थाओं द्वारा ऋण स्वीकृति दिनांक से तीन वर्ष तक।
(5) मार्जिन मनी अनुदान -
अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के उद्यमियों द्वारा राज्य में स्थापित नवीन सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को ₹ 10 करोड़ के पूंजीगत लागत के 25 प्रतिशत तक मार्जिन मनी अनुदान दिया जा सकेगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹ 100 लाख होगी।
(6) परिवहन अनुदान (केवल निर्यातक उद्यमों हेतु)
औद्योगिक नीति 2024-30 की अवधि में राज्य में स्थापित इकाईयों द्वारा निर्मित उत्पादों (खदान सामग्री को छोड़कर) के निर्यात के लिये निर्माण स्थान से बन्दरगाह एवं विमानपत्तन पोर्ट जहां से वस्तु का निर्यात होना है तक उत्पाद परिवहन हेतु व्यय किये गये वास्तविक भाड़ा (शासकीय शुल्क एवं करों को छोड़कर) के 50 प्रतिशत के बराबर सहायता प्रदान की जायेगी। सहायता की अधिकतम सीमा 60 लाख रूपये प्रतिवर्ष होगी, अधिकतम 05 वर्ष तक होगी।
(7) अनुसूचित जनजाति/जाति वर्ग के उद्यमियों को औद्योगिक क्षेत्रों में भू-आबंटन पर भू-प्रीमियम में छूट/रियायत :-
(केवल सूक्ष्म, लघु, मध्यम श्रेणी के उद्यमों/सेवा उद्यमों तक के लिए) -
(7.1) उद्यम विभाग एवं छत्तीसगढ़ स्टेट इण्डस्ट्रियल डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के औद्योगिक क्षेत्रों में औद्योगिक एवं सेवा उद्यमों की स्थापना हेतु भू-प्रब्याजि में 100 प्रतिशत छूट दी जायेगी एवं भू-भाटक की दर 1 रूपये प्रति एकड़ वार्षिक होगी। संधारण शुल्क, स्ट्रीट लाईट शुल्क, जल शुल्क एवं अन्य कर व उपकर निर्धारित दर पर देय होंगे।
(7.2) औद्योगिक क्षेत्रों में (उद्यम व सेवा उद्यम में) निःशुल्क प्लाट आबंटन की सुविधा प्राप्त हो सके, इस हेतु राज्य शासन/छत्तीसगढ़ स्टेट इण्डस्ट्रियल डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा संधारित समस्त औद्योगिक क्षेत्रों में समूह-1 एवं समूह-2 के विकासखण्डों में 25 प्रतिशत तक एवं समूह-3 के विकासखण्ड में 50 प्रतिशत तक୧୩୬୦ (୧୧୭) भू-खण्डों का इन वर्गों के लिए आरक्षित रखा जावेगा । आरक्षण की अवधि नियत दिनांक अथवा औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना दिनांक, जो भी पश्चात् का हो, से दो वर्ष तक रहेगी ।
(7.3) अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के उद्यमियों को भूखण्ड/भूमि की मात्रा ''छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि भवन प्रबंधन नियम-2015'' में वर्णित पात्रता के नियम एवं प्रावधानों के अनुसार होगी।
(8) अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के उद्यमियों को इस नीति के अंतर्गत वर्णित अन्य सभी ''औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन'' यथा पंजीयन शुल्क छूट प्रतिपूर्ति, भू-उपयोग में परिवर्तन शुल्क में छूट, परियोजना प्रतिवेदन अनुदान, गुणवत्ता प्रमाणीकरण अनुदान, तकनीकी पेटेंट अनुदान, प्रौद्योगिकी क्रय अनुदान, दिव्यांग (निःशक्त) रोजगार अनुदान, पर्यावरणीय परियोजना प्रबंधन अनुदान (इन्वायरमेंट प्रोजेक्ट मैनेजमेंट अनुदान), जल एवं उर्जा दक्षता (एनर्जी ऑडिट) व्यय प्रतिपूर्ति, एम.एस..एम.ई. थ्रस्ट सेक्टर एवं सूचना प्रौद्योगिकी उद्यमों हेतु कर्मचारियों के प्रशिक्षण हेतु किये गये व्यय की प्रतिपूर्ति, संबंधित प्रावधान के अंतर्गत वर्णित सूक्ष्म, लघु, मध्यम श्रेणी के उद्योगों/सेवा उद्यमों की सामान्य श्रेणी को दिये जाने वाले अनुदान से 10 प्रतिशत अधिक अनुदान एवं अधिकतम सीमा भी 10 प्रतिशत अधिक अनुसार अनुदान देय होगा।
---------
୧୩୬୦ (୧୧୮)लॉजिस्टिक्स उद्यम पैकेज୧୩୬୦ (୧୧୯) (द-2) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत ''छत्तीसगढ़ राज्य लॉजिस्टिक्स पैकेज'' -
-----
औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत राज्य में निवेश के आधार पर लॉजिस्टिक से संबंधित उद्यमों की स्थापना तथा विद्यमान उद्यमों के विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में निवेशक इकाईयों को उनके द्वारा परियोजना में स्थाई पूंजी निवेश की मदों पर निवेश होने वाली राशि के 150 प्रतिशत तक (अन्यथा प्रावधानित होने पर यह सीमा तद्ानुसार होगी) औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किया जावेगा। लॉजिस्टिक्स सेवाओं की परिभाषा निम्नलिखित अनुसार होगी :- (अ) लॉजिस्टिक्स सेक्टर - लॉजिस्टिक्स सेक्टर से आशय उत्पादन और उपभोग बिन्दुओं के बीच माल के परिवहन, हैंडलिंग, भण्डारण, मूल्य संवर्धन एवं अन्य सम्बन्धित सेवाओं से है। लॉजिस्टिक्स के अन्तर्गत सामान एवं वस्तुओं के परिवहन की व्यवस्था, वेयर हाउस/कोल्ड स्टोरेज द्वारा भण्डारण, लिफ्टिंग, मटेरियल हैंडलिंग, वेव्रिज, ग्रेडिंग, छंटाई, पैकेजिंग तथा वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था शामिल है।
(ब) लॉजिस्टिक हब - लॉजिस्टिक हब से आशय है वेयर हाउसिंग/गोदाम के साथ साथ रेल/वायु/ सड़क परिवहन से सम्बन्धित विकसित की गई नई अधोसंरचना को सम्मिलित करते हुए निर्मित लॉजिस्टिक हब सुविधा।
टीप ः- परिशिष्ट- 6(1) में वर्णित लॉजिस्टिक्स सेवा सेक्टर को इस पैकेज के अंर्तगत औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन की पात्रता होगी।
इस पैकेज में अनुदान/छूट/रियायतें/प्रतिपूर्ति की निम्नानुसार सुविधाएं दी जा सकेंगी :-
(1) नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी ) प्रतिपूर्ति -
| क्र. विकासखण्डों की श्रेणी | सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम सेवा उद्यम को नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी ) प्रतिपूर्ति की सीमा | |
| 1 | समूह-1 | वाणिज्यिक उत्पादन करने के दिनांक से 5 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी प जी निवेश के 75 प्रतिशत तक ं ू |
| 2 | समूह-2 | वाणिज्यिक उत्पादन करने के दिनांक से 7 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी प जी निवेश के 75 प्रतिशत तक ं ू |
| 3 | समूह-3 | वाणिज्यिक उत्पादन करने के दिनांक से 9 वर्ष तक भुगतान किये गये नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) की प्रतिपूर्ति, अधिकतम स्थायी प जी निवेश के 75 प्रतिशत तक ं ू |
अथवा
स्थायी पूंजी निवेश अनुदान :-
उद्यमियों द्वारा स्थापित पात्र सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम सेवा उद्यमों को नवीन उद्यम/विद्यमान उद्यम में विस्तार/शवलीकरण के लिए निम्नलिखित विवरण अनुसार स्थायी पूंजी निवेश अनुदान प्रदान किया जा सकेगा -
(अ) सूक्ष्म लॉजिस्टिक्स उद्यमों/विद्यमान सेवा उद्यम श्रेणी को अनुदान का वितरण एक किस्त में किया जावेगा। (ब) लघु लॉजिस्टिक्स उद्यमों/विद्यमान सेवा श्रेणी को अनुदान का वितरण तीन वर्षाें में समान किस्तों में किया जावेगा । (स) मध्यम लॉजिस्टिक्स उद्यमों/विद्यमान सेवा श्रेणी को अनुदान का वितरण पांच वर्षाें में समान किस्तों में किया जावेगा।
| क्षेत्र का प्रकार | सूक्ष्म सेवा उद्यम | लघु सेवा उद्यम | मध्यम सेवा उद्यम | |||
| अनुदान का प्रतिशत | अनुदान की अधिकतम सीमा (राशि करोड़ रूपये मे ं | अनुदान का ) प्रतिशत | अनुदान की अधिकतम सीमा (राशि करोड़ रूपये मे ) ं | अनुदान का प्रतिशत | अनुदान की अधिकतम सीमा (राशि करोड़ रूपये मे ) ं | |
| समूह-1 | 35 | 1.00 | 45 | 2.50 | 45 | 5.00 |
| समूह-2 | 40 | 1.50 | 50 | 3.50 | 50 | 7.00 |
| समूह-3 | 45 | 2.00 | 55 | 4.50 | 55 | 10.00 |
टीप :-
(1) बिन्दु क्रमांक (1) में दर्शित नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) प्रतिपूर्ति अथवा स्थायी पूंजी निवेश अनुदान में से कोई एक सुविधा विकल्प चयन के आधार पर ली जा सकेगी। इस हेतु एक बार लिया गया विकल्प अपरिवर्तनीय होगा। विकल्प चयन करने हेतु निवेशक को विभाग द्वारा निर्धारित प्रारूप में विकल्प पत्र शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत किया जाना आवश्यक होगा।
(2) स्थायी पूंजी अनुदान की प्रथम किश्त का भुगतान उत्पादन प्रारंभ करने के पश्चात प्रस्तुत आवेदन पर निर्धारित स्वीकृति के पश्चात किया जा सकेेगा।୧୩୬୦ (୧୨୧) (2) ब्याज अनुदान :-
| क्षेत्र का प्रकार | सूक्ष्म सेवा उद्यम | लघु सेवा उद्यम | मध्यम सेवा उद्यम | ||||||
| अनुदान का प्रतिशत | वार्षिक अधिकतम सीमा (राशि लाख रूपये में) | अवधि (वर्षो में) | अनुदान का प्रतिशत | वार्षिक अधिकतम सीमा (राशि लाख रूपये में) | अवधि (वर्षो में) | अनुदान का प्रतिशत | वार्षिक अधिकतम सीमा (राशि लाख रूपये में) | अवधि (वर्षो में) | |
| समूह-1 | 50 | 30 | 06 | 50 | 35 | 06 | 60 | 45 | 09 |
| समूह-2 | 55 | 35 | 07 | 55 | 40 | 07 | 65 | 50 | 10 |
| समूह-3 | 60 | 40 | 08 | 60 | 45 | 08 | 70 | 55 | 11 |
(3) विद्युत शुल्क से छूट :-
इस नीति के अंर्तगत नवीन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम लॉजिस्टिक्स उद्यम/विद्यमान उद्यम में विस्तार/शवलीकरण, के प्रकरणों में निम्नलिखित विवरण अनुसार विद्युत शुल्क भुगतान से छूट प्रदान की जा सकेगी :-
| विकासखंड की श्रेणी | छूट की अवधि/मात्रा |
| समूह-1 | वाणिज्यिक गतिविधि प्रारंभ करने के दिनांक से 06 वर्ष तक पूर्ण छूट |
| समूह-2 | वाणिज्यिक गतिविधि प्रारंभ करने के दिनांक से 08 वर्ष तक पूर्ण छूट |
| समूह-3 | वाणिज्यिक गतिविधि प्रारंभ करने के दिनांक से 10 वर्ष तक पूर्ण छूट |
(4) स्टाम्प शुल्क से छूट -
इस नीति के अंर्तगत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम नवीन लॉजिस्टिक्स उद्यम/विद्यमान उद्यम में विस्तार/शवलीकरण के प्रकरणों में निम्नांकित अनुसार स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट दी जा सकेेगी :-
(4.1) (अ) भूमि, शेड तथा भवनों के क्रय/पट्टे के निष्पादित विलेखों पर संबंधित भूमि लीज के विलेखों पर (माइनिंग लीज की भूमि को छोड़कर)। (ब) ऋण-अग्रिम से संबंधित विलेखों के निष्पादन पर बैंक/वित्तीय संस्थाओं द्वारा ऋण स्वीकृति दिनांक से तीन वर्ष तक।୧୩୬୦ (୧୨୨) (4.2) भारत सरकार/राज्य शासन द्वारा स्वीकृत/अनुमोदित निजी क्षेत्र में स्थापित होने वाले औद्योगिक लॉजिस्टिक पार्क की स्थापना हेतु क्रय/पट्टे पर ली जाने वाली भूमि पर एवं इनमें स्थापित होने वाले उद्योग।
(4.3) औद्योगिक विकास नीति-2024-30 के अंर्तगत घोषित बंद/बीमार औद्योगिक के क्रय पर क्रय-विक्रय से संबंधित विलेखों पर।
(5) परिवहन वाहन अनुदान :-
लॉजिस्टिक एवं लॉजिस्टिक हब अंतर्गत कोल्ड स्टोरेज हेतु क्रय किये जाने वाले रेफ्रिजरेटेड वाहन (न्यूनतम क्षमता 9 मिट्रिक टन) पर 50 प्रतिशत अधिकतम 35 लाख रूपये प्रति वाहन तथा लॉजिस्टिक सेवाएं हेतु क्रय किये जाने वाले वाहन (न्यूनतम क्षमता 9 मिट्रिक टन) को 50 प्रतिशत अधिकतम 25 लाख रू. प्रति वाहन का अनुदान प्रदान किया जायेगा।
(6) वाहन पंजीयन शुल्क एवं नेशनल परमिट शुल्क प्रतिपूर्ति :-
(6.1) ऐसे वाहन जिनकी क्षमता 30 मिट्रिक टन से कम है, को पंजीयन शुल्क में 100 प्रतिशत तथा नेशनल परमिट शुल्क में 100 प्रतिशत का अनुदान दिया जायेगा। (6.2) ऐसे वाहन जिनकी क्षमता 30 मिट्रिक टन से अधिक है, को पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत तथा नेशनल परमिट शुल्क में 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जायेगा। (7) निम्नानुसार व्यवस्थाएं उद्यम में स्थापित किये जाने पर नीति में प्रावधानित अनुदान से 5 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान प्रदान की जावेगी -
(7.1) लॉजिस्टिक्स में डिजीटिलाईजेशन को प्रोत्साहित करने हेतु सिक्योर्ड लॉजिस्टिक डाक्यूमेंट एक्सचेंज प्लेटफार्म की व्यवस्था किये जाने पर। (7.2) अपशिष्ट के समुचित प्रबंधन हेतु पृथक से व्यवस्था किये जाने पर। (7.3) विद्युत की व्यवस्था नवीन/नवकरणीय स्त्रोत से किये जाने पर।
(8) राज्य से निर्यात को प्रोत्साहित करने हेतु निर्यात से संबंधित उत्पादों के पैकेजिंग केन्द्र को लॉजिस्टिक नीति में प्रावधानित अनुदान/छूट/रियायत प्रदान किया जावेगा। इस हेतु पैकेजिंग केन्द्र को निर्यात से संबंधित माल के लिए न्यूनतम 70 प्रतिशत पैकेजिंग किया जाना अनिवार्य होगा। (9) प्रशिक्षण वृत्ति प्रतिपूर्ति :- नवीन पात्र सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम सेवा उद्यम की स्थापना के प्रकरणों में रूपये 50,000/- प्रतिमाह से कम वेतन प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के प्रत्येक मूल निवासी कुशल एवं अर्धकुशल कर्मचारियों के मामले में एक बार प्रशिक्षण पर उनके नियोक्ता द्वारा भुगतान किये जाने वाले एक माह का वेतन या अधिकतम राशि रूपये 15000/- प्रति व्यक्ति, जो कम हो, की दर से उद्यम के व्यावसायिक उत्पादन / गतिविधि आरंभ करने की दिनांक से 05 वर्ष की अवधि हेतु अथवा स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक की सीमा तक व्यय प्रतिपूर्ति की जा सकेगी । इस हेतु प्रथम क्लेम कर्मचारी के नियोजन के एक वर्ष पश्चात से देय होगा ।୧୩୬୦ (୧୨୩) (10) गैर वित्तीय अनुदान :-
(1) राष्ट्रीय भवन संहिता के प्रावधानों के अनुसार अग्नि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऊंचाई प्रतिबंधों में छूट दी जायेगी, भवन की ऊंचाई 24 मीटर तक स्वीकार्य होगी। (2) वित्तीय प्रोत्साहन, ग्रेडिंग प्रणाली, रेटिंग और उत्कृष्टता प्रमाणीकरण के आधार पर उत्कृष्ट लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदान करने वाले उद्यमों को पुरस्कार प्रदान किया जावेगा।
--------
୧୩୬୦ (୧୨୪)(द-3) स्टार्ट अप पैकेज୧୩୬୦ (୧୨୫) (द-3) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत ''छत्तीसगढ़ स्टार्टअप पैकेज'' -
औद्योगिक नीति 2024-30 में औद्योगिक निवेश हेतु आर्थिक प्रोत्साहन के तहत् ''स्टार्टअप पैकेज'' को निम्नानुसार होगा :-
(1) परिभाषाएं :- इस नीति के अंर्तगत इकाई को औद्योगिक निवेश प्रौत्साहन पात्रता के लिए स्टार्टअप के रूप में मान्य करने के लिए निम्नांकित शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा :-
(1.1) भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्यम मंत्रालय के उद्यम संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा जारी वैद्य स्टार्टअप प्रमाण पत्र धारित करता हो एवं कंडिका क्रमांक 1.2 में वर्णित सीमा में आती हो। (1.2) निगमीकरण/पंजीकरण के समय से किसी भी वित्तीय वर्ष में इकाई का कुल कारोबार विनिर्माण इकाई के प्रकरणों में 25 करोड़ एवं सेवा गतिविधि के प्रकरणों में 10 करोड़़ रूपए से अधिक न हो।
(1.3) इकाई नवाचार/विद्यमान तकनीक में सुधार/विद्यमान प्रक्रियाआें का सरलीकरण का कार्य करती हो तथा अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करती हो।
(1.4) इकाई औद्योगिक नीति 2024-2030 के परिशिष्ट - 3 के अपात्र एवं परिशिष्ट - 5 कोर उद्यमों/सेवाओं की सूची में शामिल न हो।
(1.5) पूर्व से विद्यमान किसी व्यवसाय के विभाजन या उसके पुनर्निर्माण के माध्यम से बनाई गई किसी इकाई को 'स्टार्टअप' नहीं माना जाएगा।
(1.6) कोई इकाई अपने निगमीकरण/पंजीकरण की तिथि से दस वर्ष पूरे होने पर ''स्टार्ट अप'' के रूप में नहीं माना जाएगा।
(2) पात्रता की शर्तें :-
(2.1) स्टार्टअप हेतु प्राप्त समस्त आवेदनो को राज्य स्तरीय स्टार्टअप संवर्धन समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जावेगा एवं समिति द्वारा अनुमोदित प्रकरणों में ही पैकेज का लाभ उपलब्ध कराया जायेगा।
(2.2) औद्योगिक नीति 2024-30 में दिए गये प्रावधान अनुसार राज्य की स्टार्टअप इकाइयों को अनुदान/छूट का लाभ प्राप्त करने के पूर्व छत्तीसगढ़ स्टार्टअप पोर्टल में दर्ज कर अभिस्वीकृति प्राप्त किया जाना अनिवार्य है। स्टार्टअप इकाई उक्त अभिस्वीकृति जारी दिनांक से 5 वर्ष की अवधि के लिए वैध होगा।୧୩୬୦ (୧୨୬) (3) राज्य स्तरीय स्टार्टअप संवर्धन समिति -
(3.1) समिति की संरचना -
1- संचालक उद्योग - अध्यक्ष 2- निदेशक, एमएसएमई-डीएफओ के प्रतिनिधि(आवश्यकतानुसार)- सदस्य 3- संयुक्त संचालक (वित्त) उद्योग संचालनालय - सदस्य 4- संयुक्त संचालक, उद्योग संचालनालय - सदस्य सचिव 5- चिप्स के प्रतिनिधि (आवश्यकतानुसार) - सदस्य 6- दो विषय विशेषज्ञ (आवश्यकतानुसार) - सदस्य उपरोक्त समिति का कोरम 4 सदस्यों का होगा
(3.2) राज्य स्तरीय स्टार्टअप संवर्धन समिति के कार्य एवं दायित्व -
1- समिति की बैठक प्रत्येक माह में कम से कम एक बार आयोजित की जायेगी। समिति द्वारा स्टार्टअप अंतर्गत प्राप्त आवेदनों का परीक्षण/विचार उपरांत स्टार्टअप मान्य किया जावेगा।
2- इन्क्यूबेशन सेंटर की प्रगति रिपोर्ट पर विचार कर सुझाव व निर्देश प्रदान करना।
3- स्टार्टअप्स को अनुदान की स्वीकृति प्रदान करना।
4- समिति, स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के संबंध में अन्य निर्णय लेने हेतु सक्षम होंगे।
(4) निवेश प्रोत्साहन :-
(अ) वित्तीय अनुदान -
(4.1) कार्पस फंड - राज्य में स्थापित होने वाले मान्यता प्राप्त स्टार्टअप इकाईयों को बढ़ावा देने हेतु पृथक से राज्य शासन द्वारा राशि रू. 50 करोड़ के कार्पस फंड का निर्माण किया जावेगा। साथ ही सीएसआर के माध्यम से भी स्टार्टअप के विकास हेतु कार्पस फंड एकत्रित किया जायेगा। उक्त कार्पस फंड से स्टार्टअप्स इकाईयों को निम्नानुसार सहायता प्रदान किया जावेगा -
(4.2) स्टार्टअप इकाइयों को प्रारंभिक चरण में इन्क्यूबेशन सेंटर की अनुशंसा के आधार पर सीड फंडिंग के रूप में राशि रू. 05 लाख प्रदान किया जावेगा। (4.3) उत्पादन/कार्य प्रारम्भ के 06 माह पश्चात संचालन हेतु राशि रू. 03 लाख की सहायता प्रदान की जावेगी।
(4.4) स्टार्टअप इकाईयों द्वारा उत्पादन/कार्य प्रारम्भ के 18 माह पश्चात निरंतर संचालन एवं विकास हेतु राशि रू. 3 लाख की सहायता प्रदान की जावेगी।୧୩୬୦ (୧୨୭) (4.5) क्रेडिट रिस्क फंड - राज्य में स्थापित होने वाले मान्यता प्राप्त स्टार्टअप इकाईयों को बढ़ावा देने हेतु पृथक से राज्य शासन द्वारा राशि रू. 50 करोड़ के क्रेडिट रिस्क फंड का निर्माण किया जावेगा।
(4.6) किराया अनुदान - छत्तीसगढ़ में स्थापित होने वाले वैध स्टार्टअप इकाइयों को, 03 वर्षों तक, किराए के भवन में/इन्क्यूबेशन सेंटर में स्टार्टअप इकाई स्थापित करने की दशा में, भुगतान किये गये मासिक किराये का 40 प्रतिशत, प्रति माह अधिकतम राशि रू. 15000/- की प्रतिपूर्ति प्रत्येक तिमाही में अनुदान के रूप में की जायेगी। (4.7) स्टाम्प शुल्क से छूट-
(1) भूमि के क्रय/न्यूनतम 5 वर्ष की लीज पर स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट। (2) सावधि ऋण पर तीन वर्ष तक स्टाम्प शुल्क से छूट।
(4.8) परियोजना प्रतिवेदन अनुदान - मान्य स्थायी पूंजी निवेश का एक प्रतिशत, अधिकतम रूपये 5.00 लाख।
(4.9) गुणवत्ता प्रमाणीकरण अनुदान- प्रमाणीकरण प्राप्त करने हेतु किये गये व्यय का 80 प्रतिशत, अधिकतम रूपये 10.00 लाख।
(4.10) तकनीकी पेटेंट अनुदान- पेटेंट प्राप्त करने हेतु किये गये व्यय का 50 प्रतिशत अधिकतम रूपये 10 लाख ।
(4.11) प्रौद्योगिकी क्रय अनुदान- प्रौद्योगिकी क्रय हेतु किये गये व्यय का 50 प्रतिशत अधिकतम रूपये 10 लाख ।
(4.12) स्टार्टअप पैकेज के अंतर्गत प्राप्त होने वाले सुविधाओं के अतिरिक्त औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में प्रावधानित अन्य अनुदान, छूट एवं रियायतों की नियमानुसार पात्रता होगी।
(4.13) इस पैकेज का लाभ लेने पर स्टार्टअप को राज्य शासन से अन्य समान प्रकृति (चाहे वह किसी भी नाम से जाना जाता हो) के लाभ प्राप्त नहीं होंगे। इसी प्रकार से भारत शासन से समान प्रकृति (चाहे वह किसी भी नाम से जाना जाता हो) को लाभ प्राप्त है तो वह लाभ राज्य शासन से प्राप्त नहीं होंगे।
(4.14) राज्य के अनुसूचित जनजाति/जाति वर्ग के उद्यमी, महिला उद्यमी, भारतीय सेना से सेवानिवृत्त राज्य के सैनिक एवं नक्सलवाद से प्रभावित व्यक्ति/परिवार एवं निःशक्तों द्वारा स्थापित स्टार्टअप को 10 प्रतिशत अधिक अनुदान तथा छूट से संबंधित प्रकरणों में 01 वर्ष अधिक की छूट दी जायेगी ।୧୩୬୦ (୧୨୮) (ब) गैर वित्तीय सुविधाएं -
(4.15) छत्तीसगढ़ में लगने वाले स्टार्टअप कोे प्रारंभिक वर्षो के लिये श्रम कानूनों में स्व-प्रमाणन (Self Certification) के आधार पर निम्नांकित नियमों में छूट प्रदान की जायेगी-
1. फैक्ट्री एक्ट, 1948
2. शॉप एंड स्टेबलिशमेंट एक्ट
3. ठेका श्रम (विनिमय एवं उन्मूलन) अधिनियम, 1970
4. न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948
5. मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961
(4.16) स्टार्टअप इकाइयों को तीनों पालियों में कार्य करने की अनुमति प्रदान की जायेगी, जिसमें महिला कर्मचारी भी कार्य कर सकेंगी, किन्तु इस हेतु स्टार्टअप इकाइयों द्वारा सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य होगा।
(4.17) प्रदेश में स्टार्टअप इकाइयों के चयन एवं विकास के लिए समय-समय पर स्टार्ट अप फेस्ट (मेले) आयोजित किए जायेंगे, जिसमें नवागंतुक स्टार्टअप उद्यमी एवं इच्छुक निवेशकों को एक प्लेटफार्म प्राप्त हो।
(4.18) प्रदेश की शैक्षणिक संस्थाओं से समन्वय कर स्टार्टअप इकाईयों हेतु आवश्यक मार्गदर्शन की व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जायेगा।
(4.19) भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्यम मंत्रालय के औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग में पंजीकृत एवं राज्य स्तरीय स्टार्टअप संवर्धन समिति द्वारा मान्य स्टार्टअप इकाई को अनुमोदन के पश्चात् सिंगल विण्डो सुविधा के माध्यम से ऑनलाईन उद्यम आकांक्षा में पंजीयन प्राप्त किया जावेगा, जिससे उन्हें राज्य शासन के अन्य विभागों से लगने वाली अनुमतियां एवं सम्मतियों की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
(5) इन्क्यूबेटर्स :-
(5.1) इस औद्योगिक नीति के समयावधि में राज्य में स्थापित होने वाले इन्क्यूबेटर्स को स्थापना हेतु किये गये व्यय का 40 प्रतिशत अधिकतम 40 लाख अनुदान प्रदान किया जावेगा।
(5.2) संभाग मुख्यालय में इन्क्यूबेटर्स की स्थापना पश्चात् संचालन हेतु 5 वर्ष तक राशि रूपये 5 लाख प्रतिवर्ष एवं शेष जिलों में स्थापित इन्क्यूबेटर्स को अधिकतम राशि रूपये 3 लाख प्रतिवर्ष प्रदान किया जायेगा।୧୩୬୦ (୧୨୯) (6) इन्क्यूबेटर्स के दायित्व -
(6.1) संभाग मुख्यालय के प्रत्येक इन्क्यूबेटर्स को न्यूनतम 10 स्टार्टअप एवं जिले के इन्क्यूबेटर्स को न्यूनतम 05 स्टार्टअप इकाईयों को इन्क्यूबेट करना अनिवार्य होगा। (6.2) संभाग मुख्यालय के प्रत्येक इन्क्यूबेटर्स को न्यूनतम 15 स्टार्टअप एवं शेष जिले के इन्क्यूबेटर्स को 10 स्टार्टअप के लिए बैठक व्यवस्था किया जाना अनिवार्य होगा। (6.3) प्रत्येक इन्क्यूबेटर्स को प्रति 6 माह में राज्य स्तरीय स्टार्टअप संवर्धन समिति को अपना प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करना होगा।
(6.4) इन्क्यूबेटर्स द्वारा स्टार्टअप इकाइयों को प्रदान किये जाने वाले अनुदान/सुविधा हेतु अनुशंसा प्रदान किया जायेगा।
(6.5) किसी जिले विशेष में इन्क्यूबेशन सेंटर के अभाव में अन्य जिलों के इन्क्यूबेशन सेंटर द्वारा अन्य जिलों के स्टार्टअप इकाइयों को इन्क्यूबेट किया जा सकेगा। इस पैकेज के अंतर्गत दिए जाने वाले अनुदान एवं छूट औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत जारी विभिन्न अधिसूचनाओं में उल्लेखित प्रक्रियाओं एवं शर्तों के अधीन नियमन किया जावेगा।
---------
୧୩୬୦ (୧୩୦)विशेष प्रोत्साहन पैकेज୧୩୬୦ (୧୩୧) (द-4) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत ''बंद एवं बीमार उद्यमों हेतु विशेष प्रोत्साहन पैकेज''-
राज्य में स्थापित किंतु बंद, बीमार एवं अवरुद्ध निवेश उद्यम जिनकी परिसंपत्ति को किसी अन्य उद्यमी/फर्म/कंपनी द्वारा एन.सी.एल.टी. (National Company Law Tribunal), सरफेसी एक्ट एवं वित्तीय संस्थानों के द्वारा विभिन्न नियमों के तहत अधिग्रहित कर लिये जाने के कारण अकार्यशील हो जाती है, ऐसे उद्यमों में निवेशित अवरूद्व राशि के राज्य हित में सदुपयोग की दृष्टि से बंद, बीमार उद्यम के पुर्नवास हेतु इस नीति में प्रावधानित पैकेज के माध्यम से पुर्नसंचालित, क्रियाशील किये जाने निम्नानुसार पैकेज का प्रावधान किया जा रहा है।
(क) परिभाषा :- "बंद/बीमार औद्योगिक इकाई" - से आशय उन उद्योगों से है जो कि इस नीति के परिशिष्ट -1 के बिन्दु क्रमांक 38 (क) व (ख) में परिभाषित की गई है। (ख) अन्य परिभाषाएं : - इस नीति के क्रियान्वयन हेतु जो परिभाषाएं इस नीति में नहीं है, उनके संबंध में प्रचलित औद्योगिक नीति 2024-30/भारतीय रिजर्व बैंक की परिभाषाएं यथास्थिति जो लागू हो, प्रभावी होंगी।
(ग) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 की कंडिका (12.27) के प्रावधान अनुसार ''बंद, बीमार उद्यम हेतु विशेष प्रोत्साहन पैकेज'' निम्नानुसार होगा :-
(1) बंद उद्योगाें के पुनः संचालन/बीमार उद्योगों के पुनर्वास हेतु पैकेज :-
(1.1) किसी भी बंद/बीमार घोषित उद्योग का क्रय करने पर निम्नांकित छूट दी जावेगी :-
(i) स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट
(ii) पंजीयन शुल्क से पूर्ण छूट
(iii) औद्योगिक क्षेत्रो/लैण्ड बैंक में उद्यम स्थापित होने की दशा में भू-प्रब्याजी की 5 प्रतिशत की दर से भू-हस्तांतरण शुल्क लिया जावेगा ।
(1.2) औद्योगिक नीति 2024-30 के औद्योगिक निवेश प्रोत्साहनों की पात्रता को आधार मानकर बंद/बीमार उद्योग के स्वामी या क्रेता को (यथा स्थिति जो लागू हो) निम्नानुसार पूर्णतः/शेष बची अनुदान, छूट एवं रियायत दी जावेगी, जिसका उपयोग बंद उद्योग ने अपने उद्योग के संचालित रहने की अवधि में नहीं किया हो/आंशिक किया हो :-
1.2.1 ब्याज अनुदान
1.2.2 स्थायी पूंजी निवेश अनुदान
1.2.3 नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर (नेट एसजीएसटी) प्रतिपूर्ति
1.2.4 विद्युत शुल्क से छूट
1.2.5 मंडी शुल्क से छूट୧୩୬୦ (୧୩୨) 1.2.6 परियोजना प्रतिवेदन अनुदान
1.2.7 गुणवत्ता प्रमाणीकरण अनुदान
1.2.8 तकनीकी पेटेन्ट अनुदान
1.2.9 प्रौद्योगिकी क्रय अनुदान
1.2.10 दिव्यांग (निःशक्त), सेवानिवृत्त अग्निवीर व आत्मसमर्पित नक्सली व्यक्ति रोजगार अनुदान
1.2.11 परिवहन अनुदान (केवल निर्यातोन्मुख उद्योगों हेतु)
1.2.12 प्रशिक्षण वृत्ति प्रतिपूर्ति -
1.2.13 ई.पी.एफ. प्रतिपूर्ति -
1.2.14 एम.एस..एम.ई. थ्रस्ट सेक्टर एवं सूचना प्रौद्योगिकी उद्यमों हेतु कर्मचारियों के प्रशिक्षण हेतु किये गये व्यय की प्रतिपूर्ति,
(1.3) ऐसे बीमार एवं बंद उद्योग जिनके द्वारा पूर्व में अनुदान नहीं लिया गया है उनके पुनर्वास/पुर्नजीवन के उपरांत औद्योगिक नीति 2024-30 के तहत् प्रदान किए जाने वाले सभी प्रकार के छूट/अनुदान की पात्रता होगी।
उदाहरणार्थ :-
(अ) यदि किसी उद्यम ने औद्योगिक नीति 2014-19 के अंतर्गत एक सामान्य उद्यम 01 नवम्बर 2015 को स्थापित किया है व दो वर्ष की अवधि हेतु निर्धारित 40 प्रतिशत की दर से ब्याज अनुदान प्राप्त किया है व औद्योगिक विकास नीति 2024-30 की अवधि में बीमार उद्यम घोषित होता है, तो शेष तीन वर्ष की अवधि हेतु ब्याज अनुदान की पात्रता औद्योगिक नीति 2024-30 के अधीन निर्धारित दर पर व अधिकतम सीमा के अधीन होगी।
(ब) यदि कोई उद्यम औद्योगिक नीति 2014-19 के अधीन अनुदान, छूट एवं रियायतों हेतु अपात्र उद्योगो की श्रेणी में था एवं औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में पात्र है, तो पुनः उत्पादन प्रारंभ करने पर औद्योगिक विकास नीति 2024-30 की शेष अवधि (उद्यम के प्रारंभ होने से बीमार घोषित होने तक की अवधि को पात्रता अवधि से कम करने के पश्चात् बची शेष अवधि) हेतु ब्याज अनुदान की पात्रता होगी। (स) उद्यम स्थापना के पश्चात् दिये जाने वाले अन्य अनुदान (जैसेः- स्थायी पूंजी निवेश अनुदान, परियोजना प्रतिवेदन अनुदान, गुणवत्ता प्रमाणीकरण अनुदान, तकनीकी पेटेन्ट अनुदान, प्रौद्योगिकी क्रय अनुदान, निःशक्त अनुदान आदि ) यदि प्राप्त नहीं हुए हैं/ आंशिक प्राप्त हुए हैं तो बीमार उद्यम के क्रेता को पूर्ण/शेष बची राशि की पात्रता होगी।୧୩୬୦ (୧୩୩) (द) उपरोक्तानुसार स्थिति उद्यम स्थापना के पश्चात् दिये जाने वाले छूट के प्रकरणों (विद्युत शुल्क से छूट ) में भी लागू होगी।
(2) बीमार घोषित उद्यम की भुगतान हेतु बकाया राशि को भुगतान करने हेतु 36 समान मासिक किश्तों/12 त्रैमासिक किश्ताें में मूल राशि संपूर्ण पेनाल्टी/ब्याज/ अधिभार सहित भुगतान की सुविधा दी जावेगी, इस निर्धारित अवधि में भुगतान न होने पर भारतीय स्टेट बैंक द्वारा निर्धारित बेस रेट पर ब्याज का भुगतान करना होगा। परन्तु, यह प्रावधान इस हेतु संबंधित विभागों के नियमों/अधिनियमों में संशोधन उपरांत अधिसूचना जारी होने पर पश्चातवर्ती प्रभाव से ही लागू होगा। तथापि विद्युत देयकों के मामले में भारतीय स्टेट बैंक द्वारा निर्धारित बेस रेट पर ब्याज का भुगतान के स्थान पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा अधिसूचित सप्लाई कोड में दिये गये प्रावधानों के अनुरूप नियमानुसार अधिभार देय होगा। (3) बीमार उद्यम के क्रेता के पक्ष में विद्युत कनेक्शन, जल कनेक्शन, कन्सेंट टू ऑपरेट, राज्य शासन द्वारा दिये जाने वाले फॉरेस्ट क्लीयरेंस, स्थानीय निकायों द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र इत्यादि हस्तांतरित हो जावेंगे। परन्तु इसके लिए संबंधित विभागों के नियमों/अधिनियमों में वर्णित प्रकिया के अनुसार आवेदन प्रस्तुत करना होगा। (4) बंद उद्यम में प्लांट एवं मशीनरी में न्यूनतम रूपये 5.00 करोड अथवा उत्पादनरत विद्यमान उद्यम में वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने की दिनांक तक प्लांट एवं मशीनरी मद में मान्य निवेशित पूंजी के न्यूनतम 25 प्रतिशत, जो भी अधिक हो, का अतिरिक्त पूंजी निवेश करने पर, तथा उद्यम विभाग में पंजी—त मूल क्षमता या औसत उत्पादन, जो भी अधिक हो, में न्यूनतम 25 प्रतिशत की वृद्धि होती हो एवं कुल रोजगार में भी 10 प्रतिशत, की वृद्धि हो तथा विस्तारित वाणिज्यिक उत्पादन इस नीति की कालावधि में प्रारंभ हो, तो किये गये अतिरिक्त पूंजी निवेश पर औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में घोषित अनुदान, छूट एवं रियायतें प्राप्त होगी (विस्तार/डायवर्सीफिकेशन आदि पर) किन्तु इसकी अधिकतम सीमा बंद उद्यम को देय शेष अनुदान एवं इस अतिरिक्त पूंजी निवेश पर देय अनुदान की अधिकतम सीमा औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में घोषित अनुदान की सीमा से अधिक नहीं होगी।
(5) नये उद्यम को जल उपलब्धता की स्थिति में पुनः जल स्वी—ति देते समय कोई अतिरिक्त चार्जेस/सुरक्षा निधि नहीं ली जावेगी।
(6) बंद उद्यम के क्रेता के पक्ष में विद्युत कनेक्शन, जल कनेक्शन, कन्सेंट टू ऑपरेट, राज्य शासन द्वारा दिये जाने वाले फॉरेस्ट क्लीयरेंस, स्थानीय निकायों द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र इत्यादि हस्तांतरित हो जावेंगे।
परन्तु, यह प्रावधान संबंधित विभाग द्वारा नियमानुसार जारी अधिसूचना की तिथि से पश्चातवर्ती प्रभाव से ही लागू होगा।୧୩୬୦ (୧୩୪) टीपः-(1) उपरोक्त पैकेज के लिए आवश्यक है कि उद्यम को बंद उद्यम घोषित करने हेतु आवेदन की तिथि को आवेदक के उद्यम में प्लांट एवं मशीनरी में न्यूनतम 100 लाख रू. का पूंजी निवेश हो व फैक्टरी परिसर में मशीनरी स्थापित भी हो।
(2) किसी इकाई को बंद उद्यमों के पुनः संचालन हेतु पैकेज केवल एक बार दिया जावेगा।
(7) गैर वित्तीय सुविधाएं
1. बंद/बीमार घोषित उद्योग के श्रम विवादों का निपटारा श्रम विभाग द्वारा तत्परता से किया जाकर उसे हर संभव सहायता दी जावेगी ताकि उद्योग का संचालन सुचारू रूप से प्रारंभ होकर संचालित हो सके।
2. उद्योग विभाग द्वारा सिंगल विण्डो प्रणाली के माध्यम से समस्त प्रकरणों का निराकरण किया जावेगा।
---------00----------