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Chattisgarh Gazette - Extraordinary · Government of Chattisgarh

छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2024 (क्रमांक 10 सन् 2024) संबंधी

Published 17 December 2024

Department
छ.ग. विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
815
Notification no.
क्रमांक-14508/वि.स./विधान/2024
Identifier
in.gazette.chhattisgarh.eo.2024-12-17.815
Languages
English, Hindi

00000000000

छत्तीसगढ़शासन

पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़/ दुर्ग/ 09 / 2013-2015 . "

सत्यमेव जयते

"बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान (बिना डाक टिकट) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22-छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई . दिनांक 30-05-2001 . "

छत्तीसगढ़ राजपत्र

(असाधारण)

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक815]

अग्रहायण 26 , शक 1946

रायपुर, मंगलवार, दिनांक17 दिसम्बर 2024

छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय

रायपुर, मंगलवार , दिनांक 17 दिसम्बर 2024 (अग्रहायण 26, 1946)

क्रमांक-14508 /वि.स. /विधान / 2024 . छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ भू- राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2024 (क्रमांक 10 सन् 2024) जो मंगलवार, दिनांक 17 दिसम्बर , 2024 को पुरःस्थापित हुआ है, को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।

हस्ता./-

(दिनेश शर्मा) सचिव.

1629 1630

छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024

छत्तीसगढ़ विधेयक

(क्रमांक 10 सन् 2024 )

छत्तीसगढ़ भू- राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक , 2024 छत्तीसगढ़ भू- राजस्व संहिता, 1959 (क्र. 20 सन् 1959) को अग्रतर संशोधित करने हेतु विधेयक ।

भारत गणराज्य के पचहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो:-

1.

संक्षिप्त नाम

तथा प्रारंभ.

(1 ) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ भू- राजस्व संहिता (संशोधन ) अधिनियम, 2024 कहलायेगा ।

(2) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा ।

2.

धारा 30 का संशोधन

छत्तीसगढ़ भू- राजस्व संहिता, 1959 (क्र . 20 सन् 1959) (जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है) की धारा 30 की उप - धारा (2) के पश्चात्, निम्नलिखित उप - धारा जोड़ी जाये , अर्थात्ः-

" (3 ) इस संहिता के या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति के उपबन्धों के अधीन , राजस्व अधिकारी / राजस्व न्यायालय किसी दस्तावेज , प्रकरण , फाईल इत्यादिं को डिजिटल स्वरूप में ऐसी रीति से मंगवा सकेगा , जैसा कि राज्य शासन विनिश्चित / अधिसूचित करे । "

धारा 33 का

3. मूल अधिनियम की धारा 33 की उप- धारा (4 ) के पश्चात्, निम्नलिखित उप - धारा जोड़ी जाये , अर्थात्ः-

संशोधन

" (5) इस संहिता के प्रावधान के अधीन ऐसे सभी डिजिटल प्लेटफार्म , जिन्हें राज्य सरकार विहित करे , नोटिस / सूचना भेजने हेतु मान्य होंगे । " छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1630(1) 4. मूल अधिनियम की धारा 110 की उप -धारा ( 1 ) के पश्चात् , निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाये , अर्थात्ः-

धारा 110 का संशोधन "परन्तु यह कि , किसी खाते के संबंध में , यदि किसी भी प्रकार का निर्णयादेश किसी सक्षम न्यायालय में लंबित न हो, भू- रिकार्ड अद्यतन हो , उस खाते से संबंधित ग्राम का जियो रिफ्रेन्सिग कार्य पूर्ण कर लिया गया हो तथा ऐसे अधिकार के अर्जन का पंजीयन कर लिया गया हो , ऐसे खाते ऐसी रीति से , जैसा कि राज्य सरकार विहित करे , स्वतः नामांतरित किये जा सकेंगे । "

धारा 165 का संशोधन.

5. मूल अधिनियम की धारा 165 की उप - धारा (7 - ख ) के पश्चात् , निम्नलिखित उप - धारा अन्तःस्थापित की जाये, अर्थात्ः-

"(7 -ग ) उप - धारा (1 ) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , भूमि के अर्जन की प्रक्रिया हेतु अपेक्षक निकाय से किसी प्रस्ताव के प्राप्त होने पर या भू- अर्जन की प्रक्रिया हेतु किसी अधिसूचना के जारी होने पर या खनन के लिए किसी आशय पत्र के जारी होने पर उक्त भूमि का अंतरण नहीं किया जाएगा । "

6. मूल अधिनियम की धारा 172 की उप - धारा (2 ) के पश्चात्, निम्नलिखित उप - धारा अन्तः स्थापित की जाये , अर्थात्ः-

धारा 172 का संशोधन.

"(2- क) उप- धाराओं (1 ) एवं (2 ) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, अपेक्षक निकाय से किसी प्रस्ताव के प्राप्त होने पर या भू- अर्जन की प्रक्रिया हेतु किसी अधिसूचना के जारी होने पर या खनन के लिए किसी आशय पत्र के जारी होने पर उक्त भूमि का व्यपवर्तन नहीं किया जाएगा । "

7. मूल अधिनियम की धारा 178 ख की उप- धारा (5) के पश्चात्, निम्नलिखित उप - धारा जोड़ी जाये , अर्थात्ः-

धारा 178-ख का संशोधन.

" (6 ) उपरोक्त उप - धाराओं में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , अपेक्षक निकाय से किसी प्रस्ताव के प्राप्त होने पर या भू-अर्जन की प्रक्रिया हेतु किसी अधिसूचना के जारी होने पर या खनन के लिए किसी आशय पत्र के जारी होने पर उक्त भूमि का खाता विभाजन नहीं किया जाएगा । " छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1630 (2)

उद्देश्यों और कारणों का कथन

और यतः, अर्जन के अधीन भूमि का बटांकन, छोटे टुकड़ों में अंतरण एवं भूमि के प्रयोजन में परिवर्तन के कारण भूमि अर्जन की लागत में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है । इस अप्रत्याशित विकास के परिणाम स्वरूप मूल भूमिस्वामी को समुचित लाभ होने के बजाय भूमि की खरीद - बिक्री में संलिप्त बिचौलियों और भू- माफियाओं द्वारा लाभ अर्जित किया गया है । अतः भूमि - अर्जन प्रक्रिया के बेहतर प्रशासन के लिए तत्काल कार्रवाई किया जाना आवश्यक है ।

और यतः, वर्तमान समय में , प्रौद्योगिकी का प्रयोग कर त्वरित गति से संबंधित व्यक्ति को सूचना भेजना ताकि -

1. प्रकरण व मामलों के संबंध में सही समय पर समुचित जानकारी उपलब्ध हो ।

2. प्रकरण व मामलों के निपटान में त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित होगी ।

और यतः, आम नागरिकों को जमीन की खरीदी व बिक्री के पश्चात् राजस्व रिकार्ड में सुधार कराना सरलीकृत होगा ।

और यतः, भू- अर्जन तथा खनन के लिये प्रस्तावित भूमि के अंतरण को रोकने या विनियमित करने हेतु छत्तीसगढ़ भू- राजस्व संहिता, 1959 ( क्र . 20 सन् 1959) में अग्रतर संशोधन करना आवश्यक हो गया है ।

और यतः, संशोधन के महत्वपूर्ण बिन्दु निम्नानुसार हैं : -

1. अधीनस्थों को तथा उनके पास से मामले अन्तरित करने की शक्ति के संबंध में धारा 30 में नवीन उप - धारा जोड़ा जाना प्रस्तावित है ।

2. सूचना / जानकारी भेजने से संबंधित अन्य विधियों से संबंधित धारा 33 में नवीन उप-धारा जोड़ा जाना प्रस्तावित है ।

3. आम नागरिकों को जमीन की खरीदी तथा बिक्री के पश्चात् राजस्व रिकार्ड में सुधार कराने के सरलीकरण के संबंध में स्वतः नामांतरण हेतु धारा 110 में परन्तुक जोड़ा जाना प्रस्तावित है ।

4. अर्जन की प्रक्रिया के संबंध में अपेक्षक निकाय से प्राप्त प्रस्ताव या अर्जन की प्रक्रिया में जारी किसी अधिसूचना या खनन के लिए जारी किसी आशय पत्र के अधीन भूमि के अंतरण को विनियमित करने के लिए धारा 165 में नवीन उप- धारा जोड़ा जाना प्रस्तावित है ।

5. भूमि के अर्जन तथा खनन हेतु जारी आशय पत्र के अधीन किसी भूमि के व्यपवर्तन को विनियमित करने के लिए धारा 172 में नवीन उप - धारा जोड़ा जाना प्रस्तावित है ।

6. भूमि के अर्जन तथा खनन हेतु आशय पत्र जारी करने हेतु भूमि के विभाजन को विनियमित करने के लिए धारा 178 - ख में परन्तुक जोड़ा जाना प्रस्तावित है ।

अतएव , उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति को दृष्टिगत रखते हुए , छत्तीसगढ़ भू- राजस्व संहिता , 1959 (क. 20 सन् 1959 ) में संशोधन करना आवश्यक है । अतः यह विधेयक प्रस्तुत है ।

टंकराम वर्मा

रायपुर,

दिनांक 13 दिसम्बर, 2024

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री (भारसाधक सदस्य) छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1630(3 )

उपाबंध

छत्तीसगढ़ भू- राजस्व संहिता , 1959 की धारा 30 , 33 , 110 , 165, 172 एवं धारा 178 - ख का उद्धरण-

धारा . 30 अधीनस्थों को तथा उनके पास से मामले अन्तरित करने की शक्ति (1) .....

(2) '[ आयुक्त ] , कलेक्टर, उपखण्ड अधिकारी या तहसीलदार, इस संहिता के या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनिपयमिति के उपबंधों के अधीन उद्भूत होने वाले किसी मामले को या किसी वर्ग के मामलों को अपनी फाइल से अपने अधीनस्थ किसी राजस्व अधिकारी को जाँच तथा रिपोर्ट के लिये सौंप सकेगा ।

धारा. 33 व्यक्तियों के हाजिर होने तथा दस्तावेजें पेश किये जाने की अपेक्षा करने तथा साक्ष्य लेने की राजस्व किारियों की शक्तियाँ- (1 ) ..

(2) .

(क)

(ख )

(3 )..

(4) प्रत्येक व्यक्ति ऐसे राजस्व अधिकारी को यह शक्ति होगी कि वह किसी भी ऐसे व्यक्ति की, जिसे न्यायालय में हाजिर होने से छूट मिली हुई हैं या जिसे स्वयं हाजिर होने के लिए आदिष्ट नहीं किया जा सकता हैं या जो रूग्णता या अंगशैथिल्य के कारण हाजिर होने में असमर्थ है , परीक्षा करने के लिए कमीशन जारी करें ।

धारा . 110 भू- अभिलेखों में अधिकार अर्जन बाबत् नामांतरण ( 1 ) पटवारी , अधिकार के प्रत्येक ऐसे अर्जन को, जिसकी रिपोर्ट उसे धारा 109 के अधीन की गई हो या जो ऑनलाइन माध्यम या किसी अन्य स्त्रोत से प्राप्त सूचना पर उसकी जानकारी में आये , उस ऑनलाइन ई - नामांतरण पोर्टल में दर्ज करेगा, जो कि उस प्रयोजन के लिए विहित किया गया है । धारा . 165 अन्तरण के अधिकार-(7) .

(7 - ख) उपधारा (1 ) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कोई भी ऐसा व्यक्ति, जो कोई भूमि राज्य सरकार से धारण करता है, या जो धारा 158 (3 ) के अधीन भूमिस्वामी अधिकार में भूमि धारण करता है अथवा जिसे कोई भूमि सरकारी पट्टेदार के रूप में दखल में रखने का अधिकार राज्य सरकार या कलेक्टर द्वारा दिया जाता है और जो तत्पश्चात ऐसी भूमि का छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1630(4)

भूमिस्वामी बन जाता है , ऐसी भूमि का अंतरण कलेक्टर की पदश्रेणी से अनिम्न किसी राजस्व अधिकारी की अनुज्ञा, जो लेखबद्ध कारणों से दी जाएगी , के बिना नहीं करेगा ।

" परन्तु धारा 158 की उप - धारा (4) के अंतर्गत भूमिस्वामी अधिकार प्रमाण-पत्र या उप - धारा ( 5 ) के अंतर्गत फ्री- होल्ड अधिकार धार करने वाले भूमिस्वामी या उसके विधि वारिस को, उस भूमि के अंतरण हेतु, इस धारा में उल्लिखित अनुज्ञा की आवश्यकता नहीं होगी । " धारा . 172 भूमि का व्यपवर्तन-(1 )..

(2 ) व्यपवर्तित करने की अनुज्ञा देने से '[ सक्षम प्राधिकारी ] , द्वारा केवल इन आधरों पर इंकार किया जा सकेगा कि उस व्यपवर्तन से लोक न्यूसेंस होना संभाव्य है. या यह कि भूमिस्वामी उन शर्तों का , जो कि उपधारा (3 ) के अधीन अधिरोपित की जायें, अनुपालन करने में असमर्थ है या अनुपालन करने के लिये राजी नहीं है ।

धारा . 178- ख खाते हेतु प्राप्त आवेदनों का निराकरण- (5 ) इस धारा के अधीन समस्त कार्यवाहियों, विहित समयावधि के भीतर पूर्ण की जायेगी । उस दशा में, जहाँ मामले, विनिर्दिष्ट कालावधि के भीतर निराकृत नहीं किय जाते हैं, तो तहसीलदार, लंबित मामलों की जानकारी की रिपोर्ट, ऐसे प्रारूप तथा रीति मे, जैसा कि विहित किया जाये, कलेक्टर को देगा ।

दिनेश शर्मा सचिव छत्तीसगढ़ विधान सभा संचालक , मुद्रण तथा लेखन सामग्री , छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय , नवा रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित - 2024.

Cite this issue. Chattisgarh Gazette - Extraordinary, Government of Chattisgarh, 17 December 2024. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.chhattisgarh.eo.2024-12-17.815/. Archive identifier in.gazette.chhattisgarh.eo.2024-12-17.815.