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Chattisgarh Gazette - Extraordinary · Government of Chattisgarh

छत्तीसगढ़ नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2024 (क्रमांक 11 सन् 2024) संबंधी

Published 17 December 2024

Department
छ.ग. विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
816
Notification no.
क्रमांक-14510/वि.स./विधान/2024
Identifier
in.gazette.chhattisgarh.eo.2024-12-17.816
Languages
English, Hindi

00000000000

छत्तीसगढ़शासन

पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़/ दुर्ग/ 09 / 2013-2015 . "

सत्यमेव जयते

"बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान (बिना डाक टिकट) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22- छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई . दिनांक 30-05-2001 . "

छत्तीसगढ़ राजपत्र

(असाधारण)

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक 816]

अग्रहायण 26 , शक 1946

रायपुर, मंगलवार, दिनांक17 दिसम्बर 2024

छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय

रायपुर, मंगलवार, दिनांक 17 दिसम्बर 2024 (अग्रहायण 26, 1946)

क्रमांक-14510 /वि.स. /विधान/ 2024. छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2024 (क्रमांक 11 सन् 2024) जो मंगलवार , दिनांक 17 दिसम्बर, 2024 को पुरःस्थापित हुआ है, को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।

हस्ता./-

(दिनेश शर्मा) सचिव.

1631 1632

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

छत्तीसगढ़ विधेयक

(क्रमांक 11 सन् 2024)

छत्तीसगढ़ नगरपालिका (संशोधन) विधेयक , 2024

छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 (क्र. 37 सन् 1961 ) के अग्रतर संशोधन हेतु विधेयक ।

भारत गणराज्य के पचछतरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधानमंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

1.

(1 ) यह अधिनियम, छत्तीसगढ़ नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम, 2024 कहलायेगा ।

संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारंभ.

(2) इसका विस्तार संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में होगा ।

(3) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा ।

धारा 3 में संशोधन.

2. छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 (क्र. 37 सन् 1961 ) (जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रुप में निर्दिष्ट है) की धारा 3 के खण्ड (25-क) के पश्चात्, निम्नलिखित परंतुक जोड़ा जाये, अर्थात्:- "परन्तु, अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या से अभिप्रेत है, ऐसी जनसंख्या के आंकड़े, जिसका निर्धारण विहित रीति से किया गया हो ।"

3. मूल अधिनियम की धारा 19 में,-

धारा 19 का संशोधन.

(एक) उप- धारा (1 ) के खण्ड (क) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्ः-

" (क) नगरपालिक क्षेत्र से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा निर्वाचित अध्यक्ष अर्थात् सभापतिः" छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1632(1) (दो) उप-धारा (4 ) के स्थान पर, निम्नलिखित उप- धारा प्रतिस्थापित की जाये, अर्थात्ः-

"(4) यदि कोई नगरपालिका क्षेत्र, अध्यक्ष का निर्वाचन करने में असफल रहे या कोई वार्ड पार्षद का निर्वाचन करने में असफल रहे, तो यथास्थिति, ऐसे नगरपालिका क्षेत्र या वार्ड के स्थान को भरने के लिए छः माह के भीतर नई निर्वाचन कार्यवाहियाँ प्रारंभ की जायेंगी और जब तक उस स्थान को भरा नहीं जाता, उसे आकस्मिक रिक्ति समझा जाएगाः

परंतु अधिनियम के अधीन उपाध्यक्ष या किन्हीं समितियों के निर्वाचन की कार्यवाहियाँ, ऐसे स्थान का निर्वाचन लंबित रहते स्थगित नहीं की जायेंगी । "

4.

धारा 20 का संशोधन.

मूल अधिनियम की धारा 20 की उप-धारा (2) के खण्ड (ख) के उप-खण्ड (तीन) के स्थान पर , निम्नलिखित उप-खण्ड प्रतिस्थापित किया जाये , अर्थात्ः-

" (तीन) अध्यक्ष के निर्वाचन की दशा में, नगरपालिका क्षेत्र के किसी मतदाता द्वारा;"

5.

धारा 29-क का संशोधन.

मूल अधिनियम की धारा 29-क की उप-धारा (2) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित की जाये, अर्थात्ः-

"(2) ऐसी नगरपालिका में जहाँ अनुसूचित जातियों तथा/अथवा अनुसूचित जनजातियों के लिए पचास छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1632(2)

प्रतिशत से कम स्थान आरक्षित किये गये है, वहां यथासंभव निकटतम रूप से कुल स्थानों की संख्या के पचास प्रतिशत की अधिकतम सीमा के अध्यधीन रहते हुए , शेष स्थान अन्य पिछड़े वर्गों के लिए , उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षित किये जाएंगे और ऐसे स्थान भिन्न-भिन्न वार्डो के लिए चक्रानुक्रम से ऐसी रीति से आवंटित किए जाएंगे जैसा कि विहित किया जाएः

परंतु यह कि, उप- धारा (1 ) के अधीन अनुसूचित जातियों तथा/अथवा अनुसूचित जनजातियों का कुल आरक्षण पचास प्रतिशत या पचास प्रतिशत से अधिक है , तो अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए स्थान आरक्षित नहीं किया जाएगाः

परन्तु, यह और कि यदि इस प्रकार आरक्षित रखे गए किसी वार्ड से पार्षद के रूप में निर्वाचन के लिए अन्य पिछड़े वर्गों के किसी भी सदस्य द्वारा कोई नामांकन पत्र फाइल नहीं किया जाता है तो, कलेक्टर उस वार्ड को अनारक्षित वार्ड के रूप में घोषित करने के लिए सक्षम होगा । '

6. मूल अधिनियम की धारा 29- ख में, -

धारा 29-ख का संशोधन.

(एक) उप- धारा (2) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्: -

"(2) यथास्थिति, राज्य के नगरपालिका परिषदों

और नगर पंचायतों के अध्यक्ष के पदों की कुल संख्या में अनुसूचित जातियों तथा /अथवा अनुसूचित जनजातियों के लिए पचास प्रतिशत से कम स्थान आरक्षित होने पर यथासंभव निकटतम रूप छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1632(3)

से कुल स्थानों की संख्या के पचास प्रतिशत की अधिकतम सीमा के अधीन रहते हुए शेष स्थान अन्य पिछड़े वर्गों के लिए , उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षित किये जाएंगेः

परन्तु उप -धारा (1 ) के अधीन अनुसूचित जातियों तथा /अथवा अनुसूचित जनजातियों का कुल आरक्षण पचास प्रतिशत या पचास प्रतिशत से अधिक होने की स्थिति में, अन्य पिछड़े वर्गों के लिए स्थान आरक्षित नहीं किया जाएगा । "

(दो) उप-धारा (4-क) का लोप किया जाये ।

धारा 30 का 7. मूल अधिनियम की धारा 30 में.-

संशोधन.

(एक) खंड (ए) का लोप किया जाये ।

(दो) खंड (डी) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड जोड़ा जाये,

अर्थात्ः-

" (ई) यदि राज्य निर्वाचन आयोग या उसके द्वारा नियुक्त किसी प्राधिकारी का, उसको दिये गये आवेदन पर या स्वप्रेरणा से, ऐसी जांच के पश्चात्, जैसा कि वह ठीक समझे, यह समाधान हो जाता है कि किसी परिशद् के वार्ड से संबंधित विधानसभा की प्रचलित निर्वाचक नामावली में पंजीकृत किसी निर्वाचक का नाम, त्रुटिपूर्ण रूप से शामिल नहीं हुआ है, तो वह परिशद् के संबंधित वार्ड की निर्वाचक नामावली में सम्मिलित करेगा । " छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1632(4)

धारा 32 का संशोधन.

8. मूल अधिनियम की धारा 32 की उप-धारा (1 ) एवं (2) में, शब्द " पार्षदों" जहाँ कहीं भी आया हो , के. पूर्व , शब्द " अध्यक्षों तथा" अन्तःस्थापित किया जाये ।

9.

धारा 32 -क का संशोधन.

मूल अधिनियम की धारा 32- क की उप-धारा (1 ) के शीर्षक में, शब्द " पार्षद" के स्थान पर, शब्द " अध्यक्ष" प्रतिस्थापित किया जाये ।

10.

धारा 32-ख का संशोधन.

मूल अधिनियम की धारा 32- ख में, शब्द "पार्षद " के स्थान पर, शब्द " अध्यक्ष " प्रतिस्थापित किया जाये ।

धारा 32- ग का संशोधन.

11. मूल अधिनियम की धारा 32 - ग के खण्ड (ख) में, शब्द "पार्षद" के पूर्व, शब्द "अध्यक्ष या" अन्तःस्थापित किया जाये ।

12. मूल अधिनियम की धारा 33 में,-

धारा 33 का संशोधन.

(एक) शब्द "पार्षदों" के पश्चात्, शब्द "या अध्यक्ष " अन्तःस्थापित किया जाये;

(दो) परंतुक के स्थान पर, निम्नलिखित परन्तुक प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्ः- "परंतु कोई भी व्यक्ति, यथास्थिति पार्षदों के किसी निर्वाचन में या अध्यक्ष के निर्वाचन में एक से अधिक बार मतदान नहीं करेगा । "

13.

धारा 34 का संशोधन.

मूल अधिनियम की धारा 34 में,- (एक) उप-धारा (1 ) के खण्ड (क) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्ः-

" (क) यदि वह आयु में 25 वर्ष से कम नहीं है, अध्यक्ष के निर्वाचन हेतु; और"

(दो) उप-धारा (3) के पश्चात्, निम्नलिखित उप-धारा छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1632(5) जोडी जाये, अर्थात्ः-

" (4) यदि कोई व्यक्ति, अध्यक्ष तथा पार्षद दोनों पदों के लिए निर्वाचित हो जाता है, तो उसे निर्वाचित घोषित किए जाने की तारीख से सात दिनों के भीतर किसी एक पद से अपना त्यागपत्र देना होगा । "

14. मूल अधिनियम की धारा 35 में,-

धारा 35 का संशोधन.

(एक) शीर्षक में, शब्द " पार्षद " के पूर्व, शब्द " अध्यक्ष या" अन्तःस्थापित किया जाये ।

(दो) खण्ड (घघ ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्ः-

" (घघ) अध्यक्ष की दशा में, आयु पच्चीस वर्ष से कम हो तथा पार्षद की दशा में, आयु इक्कीस वर्ष से कम हो;" ।

15.

धारा 36 का संशोधन.

मूल अधिनियम की धारा 36 की उप-धारा (4 ) के पश्चात्, निम्नलिखित उप-धारा जोड़ी जाए , अर्थात्:-

:

"(5) यदि उप- धारा (1 ) में वर्णित कालावधि के अवसान होने के पूर्व, नगर पालिका/ नगर पंचायत पुनर्गठित नहीं की जाती है, तो वह उक्त कालावधि के अवसान हो जाने पर विघटित हो जाएगी और धारा 328 के उपबंध, छः मास से अनधिक कालावधि के लिए लागू होंगे, जिसके भीतर नगरपालिका/ नगर पंचायत इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार पुनर्गठित की जाएगी । "

16. मूल अधिनियम की धारा 43 में,-

धारा 43 का संशोधन.

(एक) शीर्षक में, शब्द " उपाध्यक्ष" के पूर्व, शब्द " अध्यक्ष तथा" का लोप किया जाये । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1632(6)

(दो) उप-धारा (1 ) के स्थान पर , निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित की जाये , अर्थात्ः-

" (1) परिषद् के अध्यक्ष तथा निर्वाचित पार्षद, धारा 55 की उप-धारा (1 ) में यथा निर्दिष्ट अपने प्रथम सम्मेलन में निर्वाचित पार्षदों में से विहित रीति में एक उपाध्यक्ष का निर्वाचन करेंगे ।"

(तीन) उप-धारा (3 ) में, शब्द " उपाध्यक्ष " के पूर्व, शब्द "अध्यक्ष तथा" का लोप किया जाये ।

17. मूल अधिनियम की धारा 43- क में,-

धारा 43- क का संशोधन.

(एक) शीर्षक में, शब्द " उपाध्यक्ष " के पूर्व, शब्द "अध्यक्ष या" का लोप किया जाये ।

(दो) उप-धारा (1 ) में, शब्द " उपाध्यक्ष" जहाँ कहीं भी आया हो के पूर्व, शब्द " अध्यक्ष या " का लोप किया जाये ।

(तीन) उप-धारा (2) के खण्ड (दो) में, शब्द "उपाध्यक्ष" का लोप किया जाये ।

धारा 47 का संशोधन.

18 . मूल अधिनियम की धारा 47 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाये, अर्थात्ः-

"47. अध्यक्ष का वापस बुलाया जाना.- (1 ) किसी परिषद् के प्रत्येक अध्यक्ष द्वारा अपना पद तत्त्काल रिक्त कर दिया गया समझा जाएगा, यदि उसे ऐसी प्रकिया के अनुसार, जो कि विहित की जाए, नगरपालिका क्षेत्र के मतदाताओं की कुल संख्या के आधे से अधिक मतदाताओं के बहुमत. द्वारा गुप्त मतदान से वापस बुलाया जाएः छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1632(7) * परंतु यह कि वापस बुलाने की ऐसी कोई प्रकिया तब तक आरंभ नहीं की जाएगी , जब तक क़ि निर्वाचित पार्षदों की कुल संख्या के कम से कम तीन चौथाई पार्षदों द्वारा प्रस्ताव पर हस्ताक्षर न कर दिए जाएं और उसे कलेक्टर को प्रस्तुत न कर दिया जाएः

परंतु यह और कि ऐसी कोई प्रकिया,-

(एक) उस तारीख से, जिसको कि ऐसा अध्यक्ष निर्वाचित होता है और अपना पद धारण करता है , दो वर्ष की कालावधि के भीतर आरंभ नहीं की जाएगी;

(दो) यदि उपचुनाव में निर्वाचित अध्यक्ष की आधी कालावधि का अवसान न हो गया हो , आरंभ नहीं की जाएगीः

परंतु यह और भी कि अध्यक्ष को वापस बुलाए जाने की प्रकिया, उसकी संपूर्ण अवधि में एक बार ही आरंभ की जाएगी ।

(2) कलेक्टर, अपना समाधान कर लेने और यह सत्यापन कर लेने के पश्चात् कि उप-धारा (1 ) में विनिर्दिष्ट तीन चौथाई पार्षदों ने वापस बुलाए जाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजेगा और राज्य सरकार उसे राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देशित करेगी ।

(3 ) राज्य निर्वाचन आयोग निर्देश की प्राप्ति पर, वापस बुलाए जाने के प्रस्ताव पर, ऐसी रीति में, जैसा कि विहित की जाए, मतदान करवाने की व्यवस्था करेगा । " छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1632(8)

19.

धारा 55 का संशोधन.

मूल अधिनियम की धारा 55 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाये , अर्थात्ः-

"55. साधारण निर्वाचन के पश्चात् प्रथम सम्मिलन- (1 ) मुख्य नगरपालिका अधिकारी , विहित प्राधिकारी के अनुमोदन से , प्रत्येक साधारण निर्वाचन के आगामी अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से एक मास के भीतर, एक उपाध्यक्ष का निर्वाचन करने के प्रयोजनार्थ निर्वाचित पार्षदों का सम्मिलन बुलाएगा ।

(2) उप-धारा (1 ) के अधीन बुलाए गए परिषद् के प्रथम सम्मिलन की अध्यक्षता, कलेक्टर द्वारा नियुक्त किए गए ऐसे अधिकारी द्वारा , जो नगरपालिका परिषद् के मामले में डिप्टी कलेक्टर के पद श्रेणी से निम्न श्रेणी का न हो तथा नगर पंचायत के मामले में तहसीलदार के पद श्रेणी से निम्न श्रेणी का न हो , की जाएगी और इस अध्याय में अंतर्विष्ट वे समस्त उपबंध, जो परिषद् के सम्मिलनों के संबंध में हैं, यथासंभव ऐसे सम्मिलन के संबंध में लागू होंगेः

परंतु यह कि अध्यक्षता करने वाले अधिकारी को ऐसे सम्मिलन में मत देने का अधिकार नहीं होगा और मतों के बराबर होने की दशा में, परिणाम का विनिश्चय लॉट द्वारा किया जाएगा । " 20.

धारा 56 का संशोधन.

मूल अधिनियम की धारा 56 की उप-धारा (2) में, अंक तथा शब्द "43 - क" के पश्चात्, अंक " 47 " अन्तःस्थापित किया जाये ।

धारा 62 का

21. मूल अधिनियम की धारा 62 की उप -धारा (3 ) के खण्ड छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1632(9)

संशोधन.

(तीन) के परंतुक में, अंक तथा शब्द "43 -क" के पश्चात्, शब्द तथा अंक " या 47" अन्तःस्थापित किया जाये ।

धारा 63 का संशोधन.

22. मूल अधिनियम की धारा 63 के परंतुक में, शब्द "किसी समिति" के पूर्व , शब्द " उपाध्यक्ष या" अन्तस्थापित किया जाये ।

धारा 328 का संशोधन.

23. मूल अधिनियम की धारा 328 की उप-धारा (1 ) के खण्ड (ख) में, शब्द " उपाध्यक्ष" जहाँ कहीं भी आये हों, के पूर्व, शब्द " अध्यक्ष तथा" का लोप किया जाये !

निरसन

24. छत्तीसगढ़ नगरपालिका (संशोधन) अध्यादेश, 2024 (क. 1 सन् 2024) तथा छत्तीसगढ़ नगरपालिका (संशोधन) अध्यादेश , 2024 (क. 4 सन् 2024) एतद्वारा, निरसित किया जाता है । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1632 ( 10)

उद्देश्यों एवं कारणों का कथन

प्रदेश में नगरीय निकाय के चुनावों में नगरपालिका / नगर पंचायत के अध्यक्ष का निर्वाचनः निर्वाचित पार्षदों द्वारा किये जाने की वर्तमान व्यवस्था है । शासन को अनेक स्त्रोतों से यह सुझाव प्राप्त हुए है कि इस व्यवस्था से अध्यक्ष को नगरपालिका / नगर पंचायत में निर्वाचित पार्षदों का समर्थन वापस लेने का दबाव होता है तथा यदा- कदा विश्वास मत प्राप्त करने की स्थिति उत्पन्न होती रहती है । इससे नगरपालिका / नगरपंचायत के कार्य-संचालन में स्वाभाविक रूप से अनिश्चिता एवं अवरोध उत्पन्न होता है ।

अतः यह आंवश्यक है कि अध्यक्ष का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से सीधे शहरी मतदाताओं द्वारा किया जावे, ताकि अध्यक्ष को सदन में निर्वाचित पार्षदों का समर्थन वापस लेने का दबाव न हो और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बल मिले ।

माननीय सुप्रीमकोर्ट के निर्देशानुसार अन्य पिछड़ावर्गो के जनप्रतिनिधियों को भी उनकी जनसंख्या के आधार पर कुल आरक्षण के पचास प्रतिशत सीमा के अध्यधीन रहते हुए आरक्षण लाभ देने का निर्णय लिया गया है । अतः यह आवश्यक है कि शहरी मतदाताओं द्वारा मतदान अधिकारों का प्रयोग कर लोकतांत्रिक प्रणाली से अध्यक्ष का निर्वाचन किया जाये ।

उपरोक्त व्यवस्था सुनिश्चित किये जाने छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 (क्र. 37, वर्ष 1961 ) में संशोधन आवश्यक हो गया था । अतः राज्य विधानमंडल सत्र में नहीं होने के कारण , तथा राज्यपाल को यह समाधान हो जाने पर कि ऐसी परिस्थितियां विद्यमान थीं जिनके कारण यह आवश्यक था कि वे तत्काल कार्रवाई करें, भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के खंड (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, छत्तीसगढ़ में राज्यपाल द्वारा छत्तीसगढ़ नगरपालिका (संशोधन) अध्यादेश , 2024 छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1632(11 ) (क्र. 1 , वर्ष 2024) तथा (क्र. 4, वर्ष 2024 ) जारी किया गया था । संविधान के अनुच्छेद 213 के खंड (2 ) के पालन में उपरोक्त अध्यादेश के स्थान पर समय सीमा में विधेयक लाना आवश्यक है ।

प्रस्तावित विधेयक से उपरोक्त उद्देश्यों की पूर्ति आशयित है ।

अतः यह विधेयक प्रस्तुत है ।

अरूण साव

रायपुर, दिनांक 12 दिसम्बर , 2024

उप मुख्यमंत्री नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (भारसाधक सदस्य) छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1632(12)

उपाबंध

छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम 1961 (क्रमांक 37 वर्ष 1961 ) में संशोधन हेतु सुसंगत

धाराओं का उद्धरण

धारा-3 परिभाषा

(25-क) " जनसंख्या " से अभिप्रेत है, ऐसी अन्तिम पूर्ववर्ती जनगणना में, जिसके सुसंगत आंकड़े प्रकाशित किए जा चुके हैं, अभिनिश्चित की गई जनसंख्या ;

धारा -19 नगरपालिका परिषद् तथा नगर पंचायत की संरचना-

(क) अध्यक्ष , जो नगरपालिका क्षेत्र के किसी भी वार्ड से पार्षद निर्वाचित हुआ हो, और तत्पश्चात , यथास्थिति , नगर पालिका परिषद् या नगर पंचायत के निर्वाचित पार्षदों द्वारा अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित हुआ हो;

(4) यदि किसी नगरपालिक क्षेत्र का कोई वार्ड, पार्षद का निर्वाचन करने में असफल रहता है तो ऐसे वार्ड के स्थान को भरने के लिए छः माह के भीतर नई निर्वाचान कार्यवाहियाँ प्रारंभ की जायेगी और जब तक उस स्थान को भरा नही जाता, उसे आकस्मिक रिक्ति समझा जाएगा:

परन्तु अधिनियम के अधीन अध्यक्ष या उपाध्यक्ष या किन्ही समितियों के निर्वाचन की कार्यवाहियों, ऐसे स्थान का निर्वाचन लंबित रहते , स्थगित नही की जायेंगी ।

धारा-20 निर्वाचन अर्जी

(तीन) अध्यक्ष के निर्वाचन की दशा में, किसी पार्षद द्वाराः

धारा-29- क स्थानो का आरक्षण-

(2) ऐसी नगरपालिका में जहाँ अनूसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए पचास प्रतिशत.या उससे कम स्थान आरक्षित है वहाँ यथासंभव निकटतम रूप से कुल स्थानों की संख्या के पच्चीस प्रतिशत स्थान अन्य पिछड़ें वर्गों के लिए अरक्षित रखे जाएंगे और ऐसे स्थान भिन्न-भिन्न वार्डो के लिए चकानुक्रम से ऐसी रीति में आबंटित किए जाएँगे जैसी कि विहित की जाएः छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1632(13) परंतु यदि इस प्रकार आरक्षित रखे गए किसी वार्ड से पार्षद के रूप में निर्वाचन के लिए पिछड़े वर्गों के किसी भी सदस्य द्वारा कोई नामांकन पत्र फाइल नही किया जाता है तो कलेक्टर उस वार्ड को अनारिक्षत वार्ड के रूप में घोषित करने के लिए सक्षम होगा । धारा-29(ख ) परिषद् के अध्यक्ष पद का आरक्षण-

(2) यथास्थिति नगरपालिका परिषदों और नगर पंचायतों के अध्यक्ष के पदों की कुल संख्या के यथाशक्य निकटतम पच्चीस प्रतिशत स्थान अन्य पिछडें वर्गों के लिये आरक्षित रखे जाएंगे । उप-धारा (4-क)

ऐसी नगरपालिका तथा नगर पंचायत में जहाँ, इस धारा के अनुसार, अध्यक्ष का पद, किसी विशेष प्रवर्ग के उम्मीदवार के लिये आरक्षित किया गया हो, वहाँ ऐसा कोई भी निर्वाचित पार्षद, जो अध्यक्ष पद हेतु आरक्षित प्रवर्ग का हो, अध्यक्ष के पद हेतु प्रत्याशी बन सकेगा, चाहे वह वार्ड, जहाँ से वह निर्वाचित हुआ हो, उस प्रवर्ग के लिए आरक्षित हो या नहीं ।

धारा-30 मतदाताओं की अर्हता तथा उनका नाम दर्ज किया जाना-

खंड (ए)

उस वर्ष की, जिसमें किसी वार्ड के लिए निर्वाचक नामावली तैयार की गई हो या पुनरीक्षित की गई हो, जनवरी के प्रथम दिन अठारह वर्ष से कम आयु का नहीं है ;

(डी) किसी पंचायत या किसी नगर पालिका के नगरपालिक क्षेत्र से संबंधित किसी निर्वाचक नामावली में रस्ट्रिीकृत नहीं है :

उस वार्ड के निर्वाचक नामावली में नाम दर्ज किया जाने का हकदार होगा:

परन्तु-

(एक) कोई भी व्यक्ति एक से अधिक वार्डो की निर्वाचक नामावली में नाम दर्ज किया जाने का हकदार नहीं होगाः

(दो) कोई भी व्यक्ति किसी वार्ड की निर्वाचक नामावली में एक से अधिक बार नाम दर्ज किया जाने का हकदार नहीं होगा । छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1632(14)

धारा-32 निर्वाचक नामावलियों का तैयार किया जाना और निर्वाचनों का संचालन-

(1) नगरपालिका के पार्षदों के सभी निर्वाचनों के लिए निर्वाचक नामावलियों तैयार कराए जाने और पार्षदों के सभी निर्वाचानों के संचालन का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग में निहित होगा ।

(2) राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग के परामर्श से, निर्वाचक नामावलियों तैयार करने के लिए और नगरपालिका के पार्षदों के सभी निर्वाचनों के संचालन के लिए नियम बनाएगी । धारा- 32-क पार्षद के निर्वाचन में निर्वाचन व्ययों का लेखा-

धारा-32- ख निर्वाचन व्यय के लेखे को दाखिल किया जाना-

पार्षद के निर्वाचन में का प्रत्येक निर्वाचन लड़ने वाला अभ्यार्थी निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अंदर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा, जो उस लेखा की सही प्रति होगी जिसे उसने या उसके निर्वाचन अधिकर्ता ने धारा 32 क के अधीन रखा है । राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास, दाखिल करेगा ।

धारा 32- ग निर्वाचन व्ययों का लेखा दायित्वों करने में असफलता के कारण निरर्हता- (ख) उस असफलता के लिए कोई अच्छा कारण या न्योयोचित्य नहीं रखता है, तो निर्वाचन आयोग राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा उसको निरर्हित करेगा और ऐसा व्यक्ति इस प्रकार चुने जाने के लिए तथा यथास्थित्ति, नगर पालिका परिषदों या नगर पंचायत का पार्षद होने के लिये उस आदेश की तारीख से ऐसी कालावधि, जो पाँच वर्ष से अनधिक होगा, के लिये निरर्हित हो ।

धारा 33 मतदान की पात्रता-

ऐसे प्रत्येक मतदाता जो किसी वार्ड में तत्समय प्रवृत्त निर्वाचन नामावली में मतदाता के रूप में रजिस्ट्रीकृत हैं पार्षदों के किसी निर्वाचन में मतदान करने के लिए पात्र होगा और कोई ऐसा व्यक्ति जो इस प्रकार रजिस्ट्रीकृत नही है, मतदान करने के लिए पात्र होगा ।

परन्तु यह कि कोई भी व्यक्ति पार्षदों के किसी भी निर्वाचन में एक से अधिक बार मतदान नही करेगा ।

धारा 34 अध्यक्ष या पार्षद के रूप में निर्वाचन के लिए आर्हता-

(1) के खण्ड (क) ***** छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1632(15) उपधारा (3 ) ऐसा कोई भी व्यक्ति जो अध्यक्ष या पार्षद न रहे यदि उपधारा एक के अधीन अर्ह है, उस रूप में पुनः निर्वाचन के लिए पात्र होगा ।

धारा 35 अभ्यथियों की निरर्हताएँ- कोई भी व्यक्ति पार्षद के रूप में में निर्वाचन या नाम निर्देशन के लिए पात्र नहीं होगा, यदि वह-

(घघ) पार्षदों की दशा में आयु इक्कीस वर्ष से कम हो,

धारा 36 अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष का निर्वाचन तथा पदावधि-

उपधारा (4 ) इस अधिनियम के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए अध्यक्ष तथा प्रत्येक पार्षद की पदावधि परिषद की पदावधि की सहविस्तारी होगी ।

धारा 43 अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष का निर्वाचन तथा पदावधि-

(1 ) राज्य निर्वाचन आयोग , नगरपालिका परिषद् एवं नगर पंचायत के प्रत्येक निर्वाचन के तुरंत पश्चात अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष का निर्वाचन , ऐसी रीति में, जैसा कि विहित किया जाये, करवायेगा । परिषद् के निर्वाचित सदस्य, धारा 55 में यथाविनिर्दिष्टः अपने प्रथम सम्मिलन में निर्वाचित सदस्यों में से , विहित रीति में, एक अध्यक्ष तथा एक उपाध्यक्ष का निर्वाचन करेंगे । (3) अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष की पदावधि परिषद् की पदावधि से सहविस्तारी होगी ।

धारा 43- क अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के विरूद्ध अविश्वास प्रस्ताव-

(1) अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के विरूद्ध अविश्वास का प्रस्ताव उपधारा (2) के अधीन उस प्रयोजन के लिए विशेष रूप से बुलाये गये सम्मिलन में निर्वाचित किसी पार्षद द्वारा प्रस्तुत किया जा सकेगा और यदि प्रस्ताव सम्मिलन में उपस्थित तथा मतदान करने वाले निर्वाचित पार्षदों के दो -तिहाई बहुमत से स्वीकृत हो जाये और यदि ऐसा बहुमत उस समय परिषद् का गठन करने वाले निर्वाचित पार्षदों की कुल संख्या के आधे से अधिक हो तो अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद तत्काल रिक्त हुआ समझा जायेगा । ऐसे प्रस्ताव की एक प्रति मुख्य नगरपालिका अधिकारी द्वारा कलेक्टर को तत्काल रिक्ति को भरने के लिये भेजी जायेगी :

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1632( 16)

धारा 47 (***** ) में प्रतिस्थापित किया जाना है ।

धारा 55 साधारण निर्वाचन के पश्चात् प्रथम सम्मिलन (1 ) राज्य निर्वाचन आंयोग , धारा 45 के अधीन निर्वाचन की अधिसूचना की तारीख से 15 दिन के भीतर, अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष के निर्वाचन के प्रयोजन के लिए निर्वाचित पार्षदों का सम्मिलन बुलाएगा ।

(2) उपधारा (1 ) के अधीन सम्मिलन, ऐसी रीति में बुलाया जायेगा, जैसा कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अवधारित किया जायेगा , जिसकी अध्यक्षता राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा की जायेगी । अध्यक्षता करने वाले अधिकारी को मत देने का अधिकार नहीं होगा और मत बराबर होने की दशा में, परिणाम लाट द्वारा विनिश्चित किया जाएगा ।

धारा 56 सम्मिलन का संयोजन -

(2) धारा 43 , 43- क, 55, या 71 में निर्दिष्ट सम्मिलन के सिवाय प्रत्येक सम्मिलन की तारीख, अध्यक्ष द्वारा या उसके कार्य करने में असमर्थ होने की दशा में, उपाध्यक्ष द्वारा नियत की जाएगी :

परन्तु यदि अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के द्वारा सम्मिलन की तारीख नियम नहीं की जाती हो, तो कलेक्टर, राज्य सरकार को सूचना के अधीन सम्मिलन की तारीख नियत करेगा ।

धारा 62 कार्यवाहियो के कार्यवृत्त

परन्तु धारा 43 - क के अधीन सम्मिलन के मामले में पार्षदों के नाम अभिलिखित करने से संबंधी उपबन्ध , प्रश्न के पक्ष में तथा उसे विरूद्ध मत (वोटिंग) देने के लिए लागू नहीं होगा ।

धारा 63 बहुमत द्वारा प्रश्नों का विनिश्चय

परन्तु किसी समिति के सभापति के निर्वाचित में मतों की समानता की दशा में अध्यक्षता करने वाला प्राधिकारी अपने निर्णायक मत का प्रयोग नहीं करेगा और परिणाम का विनश्चिय लाट द्वारा किया जायेगा । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1632(17) धारा 328 परिषद को विघटित करने की शक्ति

(1 ) (ख ) धारा 43 की उपधारा (1) के अधीन पार्षदों के प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पश्चात राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा राजपत्र में पार्षदों के निर्वाचन के प्रकाशन की तारीख से एक मास के भीतर या (अध्यक्ष तथा) उपाध्यक्ष की पदावधि की समाप्ति के एक मास के भीतर, नगरपालिका के (अध्यक्ष तथा) उपाध्यक्ष का निर्वाचन न करे; या

दिनेश शर्मा सचिव छत्तीसगढ़ विधान सभा संचालक , मुद्रण तथा लेखन सामग्री , छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय , नवा रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित - 2024 .

Cite this issue. Chattisgarh Gazette - Extraordinary, Government of Chattisgarh, 17 December 2024. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.chhattisgarh.eo.2024-12-17.816/. Archive identifier in.gazette.chhattisgarh.eo.2024-12-17.816.