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Chattisgarh Gazette - Extraordinary · Government of Chattisgarh

छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम (संशोधन) विधेयक, 2024 (क्रमांक 12 सन् 2024) संबंधी

Published 17 December 2024

Department
छ.ग. विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
820
Notification no.
क्रमांक-14562/वि.स./विधान/2024
Identifier
in.gazette.chhattisgarh.eo.2024-12-17.820
Languages
English, Hindi

00000000000

छत्तीसगढ़शासन

पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़/ दुर्ग/ 09 / 2013-2015 . "

सत्यमेव जयते

"बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान (बिना डाक टिकट) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22- छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई . दिनांक 30-05-2001 . "

छत्तीसगढ़ राजपत्र

(असाधारण)

प्राधिकार से प्रकाशित

अग्रहायण 26 , शक 1946

क्रमांक 820]

रायपुर, मंगलवार, दिनांक17 दिसम्बर 2024

छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय

रायपुर, मंगलवार , दिनांक 17 दिसम्बर 2024 (अग्रहायण 26, 1946)

क्रमांक-14562/ वि.स./ विधान/2024. छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम ( संशोधन) विधेयक, 2024 (क्रमांक 12 सन् 2024 ) जो मंगलवार , दिनांक 17 दिसम्बर, 2024 को पुरःस्थापित हुआ है , को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।

हस्ता./-

(दिनेश शर्मा) सचिव.

1639 1640

छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024

छत्तीसगढ़ विधेयक

(क्रमांक 12 सन् 2024)

छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम (संशोधन) विधेयक, 2024 छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम अधिनियम, 1956 (क्र. 23 सन् 1956) के अग्रतर संशोधन हेतु विधेयक ।

भारत गणराज्य के पचहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ के विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो:--

1. (1 ) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम (संशोधन) अधिनियम, 2024 कहलायेगा ।

संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारंभ.

(2) इसका विस्तार संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में होगा ।

(3) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा ।

धारा 5 का संशोधन.

2. छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम अधिनियम, 1956 (क. 23 सन् 1956 ) (जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रुप में निर्दिष्ट है) की धारा 5 में, -

" (एक) खण्ड (34 - क) का लोप किया जाये ।

(दो) खण्ड (43 - क) के पश्चात्, निम्नलिखित परंतुक जोड़ा जाये , अर्थात्: -

" परन्तु, अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या से अभिप्रेत है ऐसी जनसंख्या के आंकड़े , जिसका निर्धारण विहित रीति से किया गया हो। "

3. मूल अधिनियम की धारा 9 में, -

धारा 9 का संशोधन.

(एक) उप-धारा (1 ) के खण्ड (क) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाये , छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1640(1) अर्थात्ः-

"(क) नगरपालिक क्षेत्र से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा निर्वाचित महापौर अर्थात् सभापतिः "

(

दो) उप-धारा (4 ) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित की जाये , अर्थात्: -

" (4) यदि कोई नगरपालिक क्षेत्र, महापौर का निर्वाचन करने में असफल रहता है या कोई वार्ड, पार्षद का निर्वाचन करने में असफल रहता है , यथास्थिति, ऐसे नगरपालिक क्षेत्र या वार्ड के स्थान को भरने के लिये छः माह के भीतर नई निर्वाचन कार्यवाहियां प्रारंभ की जाएंगी और जब तक उस स्थान को भरा नहीं जाता, उसे आकस्मिक रिक्ति समझा जायेगा:

परन्तु अधिनियम के अधीन अध्यक्ष या समिति में से किसी के निर्वाचन की कार्यवाहियाँ , ऐसे स्थान का निर्वाचन लंबित रहते, स्थगित नहीं की जायेंगी ।"

धारा 11 का

संशोधन.

4. मूल अधिनियम की धारा 11 की उप-धारा (2 ) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित की जाये,

अर्थात्ः-

"(2) ऐसे नगरपालिक निगमों में, जहाँ अनुसूचित जातियों तथा / अथवा अनुसूचित जनजातियों के लिए पचास प्रतिशत से कम स्थान आरक्षित किये गये हैं, वहाँ यथासंभव निकटतम रूप से कुल स्थानों की संख्या के पचास प्रतिशत की अधिकतम सीमा के अध्यधीन रहते हुए, शेष छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1640(2)

स्थान, अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए , उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षित किये जाएंगे और ऐसे स्थान भिन्न- भिन्न वार्डो के लिए ऐसी रीति में , जैसा कि विहित किया जाए, चक्रानुक्रम से आवंटित किये जायेंगेः

परंतु यह कि उप - धारा (1 ) के अधीन अनुसूचित जातियों तथा / अथवा अनुसूचित जनजातियों का कुल आरक्षण पचास प्रतिशत या पचास प्रतिशत से अधिक है , तो अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए स्थान आरक्षित नहीं किया जाएगाः

परन्तु यह और कि यदि इस प्रकार आरक्षित रखे गए किसी वार्ड से पार्षद के रूप में निर्वाचन के लिए अन्य पिछड़े वर्गो के किसी भी सदस्य द्वारा कोई नामांकन पत्र फाइल नहीं किया जाता है तो, कलेक्टर उस वार्ड को अनारक्षित वार्ड के रूप में घोषित करने के लिए सक्षम होगा । "

5. मूल अधिनियम की धारा 11 -क में,-

धारा 11-क का संशोधन.

(एक) उप-धारा (2) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित की जाये , अर्थात्ः-

" (2) राज्य के महापौर के पदों की कुल संख्या

में अनुसूचित जातियों तथा / अथवा अनुसूचित जनजातियों के लिए पचास प्रतिशत से कम स्थान आरक्षित होने पर यथासंभव निकटतम रूप से कुल स्थानों की संख्या के पचास प्रतिशत की छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1640(3) अधिकतम सीमा के अधीन रहते हुए , शेष स्थान, अन्य पिछड़े वर्गों के लिए , उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षित रखे जाएंगेः

परन्तु उप -धारा (1 ) के अधीन अनुसूचित जातियों तथा/अथवा अनुसूचित जनजातियों का कुल आरक्षण पचास प्रतिशत या पचास प्रतिशत से अधिक होने की स्थिति में, अन्य पिछड़े वर्गों के लिए स्थान आरक्षित नहीं किया जाएगा । "

(दो) उप-धारा (4-क) का लोप किया जाये ।

धारा 12 का

6. मूल अधिनियम की धारा 12 में,-

संशोधन.

(एक) खंड (ए) का लोप किया जाये ।

(दो) खंड (डी) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड जोड़ा

जाये, अर्थात्ः-

" (ई) यदि राज्य निर्वाचन आयोग या उसके द्वारा नियुक्त किसी प्राधिकारी का, उसको दिये गये आवेदन पर या स्वप्रेरणा से, ऐसी जांच के पश्चात्, जैसा कि वह ठीक समझे, यह समाधान हो जाता हैं कि निगम के वार्ड से संबंधित विधानसभा की प्रचलित निर्वाचक नामावली में पंजीकृत किसी निर्वाचक का नाम, त्रुटिपूर्ण रूप से शामिल नहीं हुआ है, तो वह निगम के संबंधित वार्ड की निर्वाचक नामावली में सम्मिलित करेगा । " छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1640 ( 4)

धारा 14 का संशोधन.

7. मूल अधिनियम की धारा 14 की उप- धारा (1 ) एवं (2) में, शब्द "पार्षदों" के पश्चात्, शब्द " तथा महापौर " क्रमशः अन्तःस्थापित किया जाये ।

8.

धारा 14-क का संशोधन.

मूल अधिनियम की धारा 14- क की उप - धारा (1 ) में, शब्द "पार्षद " के स्थान पर, शब्द " महापौर " प्रतिस्थापित किया जाये ।

धारा 14-ख का संशोधन.

9. मूल अधिनियम की धारा 14- ख में, शब्द " पार्षद" के स्थान पर, शब्द " महापौर " प्रतिस्थापित किया जाये । धारा 14- ग का संशोधन.

10. मूल अधिनियम की धारा 14 -ग के खण्ड (ख ) में, शब्द " पार्षद " के पश्चात्, शब्द " या महापौर" अन्तःस्थापित किया जाये ।

11. मूल अधिनियम की धारा 15 में,-

धारा 15 का संशोधन.

(एक) शब्द " पार्षदों" के पश्चात्, शब्द " या महापौर" अन्तःस्थापित किया जाये;

(दो) परन्तुक के स्थान पर, निम्नलिखित परन्तुक प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्:- "परन्तु कोई भी व्यक्ति, यथास्थिति, पार्षदों के किसी निर्वाचन में या महापौर के निर्वाचन में, एक से अधिक बार मतदान नहीं करेगा । " 12. मूल अधिनियम की धारा 16 में,-

धारा 16 का संशोधन.

(एक) उप-धारा (1 ) के खण्ड (क) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्ः-

"(क) यदि वह आयु में 25 वर्ष से कम नहीं है, तो महापौर के निर्वाचन हेतु, और"

(दो) उप -धारा (3 ) के पश्चात्, निम्नलिखित उप-धारा जोड़ी जाये, अर्थात्ः छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1640(5) " (4) यदि कोई व्यक्ति महापौर और पार्षद दोनों के लिए निर्वाचित हो जाता है , तो उसे निर्वाचित घोषित किए जाने की तारीख से सात दिन के भीतर किसी एक पद से अपना त्यागपत्र देना होगा । "

13. मूल अधिनियम की धारा 17 में,-

धारा 17 का संशोधन.

(एक) शीर्षक में, शब्द "पार्षद " के पश्चात्, शब्द "या महापौर" अन्तःस्थापित किया जाये;

(दो) उप - धारा (1 ) में, शब्द "पार्षद " के पश्चात्, शब्द "या महापौर" अन्तःस्थापित किया जाये;

(तीन) उप-धारा (1 ) के खण्ड (ख ख) में, शब्द " पार्षद " के पश्चात्, शब्द " या महापौर" अन्तःस्थापित किया जाये;

(चार) उप-धारा (1 ) के खण्ड (ड.) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाये , अर्थात्ः-

"(ड.) महापौर की दशा में, पच्चीस वर्ष से कम आयु का हो और पार्षद की दशा में, इक्कीस वर्ष से कम आयु का हो"

(पांच) उप-धारा (2 ) में, पार्श्व शीर्षक एवं संलग्न पैरा में, शब्द " पार्षद" जहाँ कहीं आया हो, के पश्चात्, शब्द " या महापौर " अन्तःस्थापित किया जाये;

(छः) उप-धारा (3 ) में, शब्द " पार्षद" जहाँ कहीं आया हो, के पश्चात्, शब्द " या महापौर' , अन्तःस्थापित किया जाये ।

14. मूल अधिनियम की धारा 17 -ख में, -

धारा 17-ख का संशोधन.

(एक) उप-धारा (1 ) में; शब्द " प्रत्येक पार्षद" के पूर्व, छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1640(6)

शब्द " प्रत्येक महापौर तथा अन्तःस्थापित किया जाये;

(दो) उप-धारा (1 ) में, शब्द "अध्यक्ष " के पूर्व, शब्द " महापौर तथा" का लोप किया जाये;

(तीन) उप-धारा (2 ) में, शब्द " पार्षद " जहाँ कहीं आया हो, के पूर्व, शब्द " महापौर या" अन्तःस्थापित की जाये ।

15. मूल अधिनियम की धारा 18 में,-

धारा 18 का संशोधन.

(एक) शीर्षक में, शब्द " अध्यक्ष " के पूर्व, शब्द "महापौर तथा" का लोप किया जाये;

(दो) उप-धारा (1 ) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित की जाये, अर्थात्:-

"(1 ) निगम का महापौर तथा निर्वाचित पार्षद धारा 22 के अधीन निर्वाचन की अधिसूचना की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर, विहित रीति में निर्वाचित पार्षदों में से एक अध्यक्ष निर्वाचित करेंगे । "

(तीन) उप-धारा (3) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्ः-

"(3)उप-धारा (1 ) के अधीन सम्मिलन, कलेक्टर द्वारा बुलाया जाएगा तथा वह उसकी अध्यक्षता करेगा । "

(चार) उप-धारा (4 ) में, शब्द "अध्यक्ष" के पूर्व, शब्द " महापौर तथा " का लोप किया जाये । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1640(7) 16. मूल अधिनियम की धारा 20 में, -

धारा 20 का संशोधन.

(एक) उप-धारा (1 ) के स्पष्टीकरण में, शब्द "अध्यक्ष" के पूर्व, शब्द "महापौर तथा " का लोप किया जाये ।

(दो) उप-धारा (4 ) के पश्चात्, निम्नलिखित उप-धारा

जोड़ी जाए , अर्थात्:-

"(5) यदि उप - धारा (1 ) में वर्णित कालावधि के अवसान होने के पूर्व, नगरपालिक निगम पुनर्गठित नहीं की जाती है, तो वह उक्त कालावधि के अवसान हो जाने पर विघटित हो जाएगी और धारा 423 के उपबंध, छः मास से अनधिक कालावधि के लिए लागू होंगे, जिसके भीतर नगरपालिक निगम, इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार पुनर्गठित की जाएगी । "

17. मूल अधिनियम की धारा 23 - क में, -

धारा 23 -क का संशोधन.

(एक) शीर्षक में, शब्द "महापौर या " " का लोप किया जाये;

(दो) उप-धारा (1 ) में, शब्द "अध्यक्ष " जहाँ कहीं आया हो , के पूर्व शब्द " महापौर या " का लोप किया जाये;

(तीन) उप -धारा (2) के खण्ड (दो ) में , शब्द "महापौर" के पश्चातः चिन्ह एवं शब्द ",अध्यक्ष" का लोप किया जाये ।

18.

धारा 24 का संशोधन.

मूल अधिनियम की धारा 23 क के पश्चात, निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाये , अर्थात्ः -

"24. महापौर का वापस बुलाया जाना. (1 ) किसी निगम के प्रत्येक महापौर द्वारा अपना पद तत्काल रिक्त कर दिया गया समझा जाएगा, छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1640 (8)

यदि उसे ऐसी प्रकिया के अनुसार, जो कि विहित की जाए , निगम क्षेत्र के मतदान करने वाले मतदाताओं की कुल संख्या के आधे से अधिक बहुमत द्वारा गुप्त मतदान से वापस बुलाया जाएः

परंतु वापस बुलाने की ऐसी कोई प्रक्रिया तब तक आरंभ नहीं की जाएगी, जब तक कि निर्वाचित पार्षदों की कुल संख्या के कम से कम तीन चौथाई पार्षदों द्वारा प्रस्ताव पर हस्ताक्षर न कर दिए जाएं और उसे संभागीय आयुक्त को प्रस्तुत न कर दिया जाएः

परंतु यह और कि ऐसी कोई प्रक्रियाः

(एक) उस तारीख से, जब ऐसा महापौर निर्वाचित होता है और अपना पद धारण करता है , दो वर्ष की कालावधि के भीतर आरंभ नहीं की जाएगी;

(दो) किसी उप-चुनाव में निर्वाचित महापौर की आधी कालावधि का अवसान न हो गया हो, आरंभ नहीं की जाएगीः

परंतु यह और भी कि महापौर को वापस बुलाए जाने की प्रकिया उसकी संपूर्ण अवधि में एक बार ही आरंभ की जाएगी ।

(2) संभागीय आयुक्त अपना समाधान कर लेने और यह सत्यापित कर लेने के पश्चात् कि उप-धारा (1) में विनिर्दिष्ट तीन चौथाई पार्षदों ने वापस बुलाए जाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजेगा और राज्य छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1640(9) सरकार उसे राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देशित करेगी ।

(3) राज्य निर्वाचन आयोग निर्देश प्राप्त होने पर, वापस बुलाए जाने के प्रस्ताव पर , ऐसी रीति में, जैसी कि विहित की जाए, मतदान करवाने की व्यवस्था करेगा । ""

धारा 422 का संशोधन.

19. मूल अधिनियम की धारा 422 की उप - धारा ( 1 ) के खण्ड (ख) में, शब्द " अध्यक्ष" के पूर्व. शब्द " महापौर तथा" जहाँ कहीं आया हो, का लोप किया जाये ।

धारा 441 का संशोधन.

20. मूल अधिनियम की धारा 441 की उप- धारा (2) के खण्ड (आ) के उप- खण्ड (तीन) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-खण्ड प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात्ः- "(तीन) महापौर के निर्वाचन की दशा में, नगरपालिक क्षेत्र के किसी मतदाता द्वारा । "

निरसन

21 छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम (संशोधन) अध्यादेश, 2024 (क. 2 सन् 2024) तथा छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम (संशोधन) अध्यादेश , 2024 (क. 5 सन् 2024 ) एतद्वारा, निरसित किया जाता है । छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1640(10)

उद्देश्यों एवं कारणों का कथन

प्रदेश में नगरीय निकाय के चुनावों में नगरपालिक निगम के महापौर का निर्वाचन, निर्वाचित पार्षदों द्वारा किये जाने की वर्तमान व्यवस्था है । शासन को अनेक स्त्रोतों से यह सुझाव प्राप्त हुए है कि इस व्यवस्था से महापौर को निगम में निर्वाचित पार्षदों का समर्थन वापस लेने का दबाव होता है तथा यदा-कदा विश्वास मत प्राप्त करने की स्थिति उत्पन्न होती रहती है । इससे निगम के कार्य- संचालन में स्वाभाविक रूप से अनिश्चिता एवं अवरोध उत्पन्न होता है ।

अतः यह आवश्यक है कि महापौर का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से सीधे शहरी मतदाताओं द्वारा किया जावे, ताकि महापौर को सदन में निर्वाचित पार्षदों का समर्थन वापस लेने का दबाव न हो और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बल मिले ।

माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार अन्य पिछड़ा वर्गो के जनप्रतिनिधियों को भी उनकी जनसंख्या के आधार पर कुल आरक्षण के पचास प्रतिशत सीमा के अध्यधीन रहते हुए आरक्षण लाभ देने का निर्णय लिया गया है । अतः यह आवश्यक है . कि शहरी मतदाताओं द्वारा मतदान अधिकारों का प्रयोग कर लोकतांत्रिक प्रणाली से महापौर का निर्वाचन किया जाये ।

उपरोक्त व्यवस्था सुनिश्चित किये जाने छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम अधिनियम, 1956 (क्र. 23, वर्ष 1956) में संशोधन आवश्यक हो गया था । अतः राज्य विधानमंडल सत्र में नहीं होने के कारण , तथा राज्यपाल को यह समाधान हो जाने पर किं ऐसी परिस्थितियां विद्यमान थीं जिनके कारण यह आवश्यक था कि वे तत्काल कार्रवाई करें , भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के खंड (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए , छत्तीसगढ़ में राज्यपाल द्वारा छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम (संशोधन) अध्यादेश, 2024 (क्र. 2. वर्ष 2024) तथा (क्र. 5 वर्ष 2024) जारी किया गया छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1640(11 ) था । संविधान के अनुच्छेद 213 के खंड (2) के पालन में उपरोक्त अध्यादेश के स्थान पर समय सीमा में विधेयक लाना आवश्यक है ।

प्रस्तावित विधेयक से उपरोक्त उद्देश्यों की पूर्ति आशयित है ।

अतः यह विधेयक प्रस्तुत है ।

अरूण साव

रायपुर,

दिनांक 12 दिसम्बर , 2024

उप मुख्यमंत्री नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (भारसाधक सदस्य) छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1640 (12)

उपाबंध

छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम अधिनियम 1956 (क्रमांक 23 वर्ष 1956) में संशोधन हेतु सुसंगत

धाराओं का उद्धरण

धारा-5 परिभाषा

(34-क) " महापौर " से अभिप्रेत है ऐसा व्यक्ति, जो नगर पालिक क्षेत्र के किसी भी वार्ड से पार्षद निर्वाचित हुआ हो और तत्पश्चात् जो नगर पालिक निगम के निर्वाचित पार्षदों द्वारा महापौर के रूप में निर्वाचित हुआ हो,

(43- क) "जनसंख्या " से अभिप्रेत है ऐसी अन्तिम पूर्ववर्ती जनगणना में अभिनिश्चिंत की गई जनसंख्या जिसके सुसंगत आंकड़े प्रकाशित हो गये है ;

धारा 9 नगरपालिक निगम की संरचना

उपधारा (1 ) नगर पालिक निगम निम्नलिखित से मिलकर बनेगा :

(क) महापौर

उप-धारा (4)

यदि किसी नगरपालिक क्षेत्र का कोई वार्ड, पार्षद का निर्वाचन करने में असफल रहता है, तो ऐसे वार्ड के स्थान को भरने के लिए छः माह के भीतर नई निर्वाचन कार्यवाहियाँ प्रारंभ की जाएंगी और जब तक उस स्थान को भरा नहीं जाता, उसे आकस्मिक रिक्ति समझा जायेगाः परन्तु महापौर, अध्यक्ष, किन्हीं विभागीय समितियों या अन्य समितियों में से किसी के निर्वाचन की कार्यवाहियां ऐसे स्थान का निर्वाचन लंबित रहते, स्थगित नहीं की जायेंगी । धारा 11

उपधारा (2 ) "ऐसे नगर पालिक निगमों में, जहाँ अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए पचास प्रतिशत या कम स्थान आरक्षित रखे गए हैं, वार्डो की कुल संख्या के यथाशक्य निकटतम पच्चीस प्रतिशत स्थान अन्य पिछड़े वर्गो के लिए आरक्षित रखे जाएंगे और ऐसे स्थान भिन्न-भिन्न वार्डों के लिए ऐसी रीति में, जो कि विहित की जाए, चक्रानुक्रम से आवंटित किए जाएंगेः छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1640(13) परन्तु यदि इस प्रकार आरक्षित रखे गए , किसी वार्ड से पार्षद के रूप में निर्वाचन के लिए पिछड़े वर्गों के किसी भी सदस्य द्वारा कोई नामांकन पत्र फाइल नहीं किया जाता है तो कलेक्टर उस वार्ड को अनारक्षित वार्ड के रूप में घोषित करने के लिए सक्षम होगा । धारा 11 -क

महापौर के पद का आरक्षण- उपधारा (2) "महापौर के पदों की कुल संख्या के यथाशक्य निकटतम पच्चीस प्रतिशत स्थान अन्य पिछड़े वर्गो के लिए आरक्षित रखे जाएंगे । "

उप-धारा (4 -क) ऐसी नगरपालिक निगमों में जहां, इस धारा के अनुसार, महापौर का पद, किसी विशेष प्रवर्ग के उम्मीदवार के लिए आरक्षित किया गया हो, वहां ऐसा कोई भी निर्वाचित पार्षद , जो महापौर पद हेतु आरक्षित प्रवर्ग का हो , महापौर के पद हेतु प्रत्याशी बन सकेगा, चाहे वह वार्ड , जहां से वह निर्वाचित हुआ हो , उस प्रवर्ग के लिए आरक्षित हो या नहीं । धारा-12 (ए)

मूल अधिनियम में धारा-12 (ए ) " उस वर्ष की, जिसमें किसी वार्ड के लिए निर्वाचक नामावली तैयार की गई हो या पुनरीक्षित की गई हो , जनवरी के प्रथम दिन 18 वर्ष से कम आयु का नहीं है" ।

धारा -12 (डी) किसी पंचायत या किसी नगर पालिका के नगरपालिक क्षेत्र से संबंधित किसी निर्वाचक नामावली में रजिस्ट्रीकृत नहीं है,

धारा 14

निर्वाचक नामावलियों का तैयार किया जाना तथा निर्वाचनों का संचालन (1 ) नगरपालिक निगमों के पार्षदों के सभी निर्वाचनों के लिए निर्वाचक नामावलियाँ तैयार करायें जाने और सभी निर्वाचनों के संचालन का अधीक्षण , निर्देशन और नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग में निहित होगा ।

(2) राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग के परामर्श से , निर्वाचक नामावलियाँ तैयारं करने के लिए और नगरपालिक निगमों के पार्षदों के सभी निर्वाचनों के संचालन के लिए नियम बनाएगी । छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1640(14)

धारा 14-क

निर्वाचन व्ययों का लेखा (1 ) पार्षद के निर्वाचन में प्रत्येक अभ्यर्थी निर्वाचन संबंधी उपगत उस सब व्यय का जो, उस तारीख के जिसको वह नामनिर्दिष्ट किया गया है और उस निर्वाचन के परिणामों की घोषणा की तारीख के, जिनके अन्तर्गत ये दोनो तारीखें आती है, बीच स्वयं द्वारा या उसके निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा उपगत या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया गया है , पृथक और सही लेखा या तो वह स्वयं रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा ।

(2) उक्त व्यय का जोड़ उस रकम से अधिक नहीं होगा जो राज्य सरकार द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग के परामर्श से विहित की जाए ।

धारा 14-ख

निर्वाचन व्यय के लेखे को दाखिल किया जाना- पार्षद के निर्वाचन में का प्रत्येक निर्वाचन लड़ने वाला अभ्यर्थी निर्वाचन की तारीख से तीस दिन के अंदर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जो उस लेखा की सही प्रति होगी जिसे उसने या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने धारा 14- क के अधीन रखा है राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा । धारा 14 - ग

निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल करने में असफलता के कारण निरर्हता- यदि निर्वाचन आयोग का समाधान हो जाता है कि कोई व्यक्ति-

(ख) उस असफलता के लिए कोई अच्छा कारण या न्यायोचित नहीं रखता है, तो निर्वाचन आयोग शासकीय राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा उसको निरर्हित घोषित करेगा और ऐसा व्यक्ति इस प्रकार चुने जाने के लिए तथा निगम का पार्षद होने के लिए उस आदेश की तारीख से पांच वर्ष से अनाधिक की कालावधि के लिए निरर्हित होगा ।

धारा 15 मतदाता की पात्रता-

ऐसा प्रत्येक मतदाता जो किसी वार्ड में तत्समय प्रवृत्त निर्वाचन नामावली में मतदाता के रूप में रजिस्ट्रीकृत है, पार्षदों के किसी निर्वाचन में मतदान करने के लिए पात्र होगा और कोई ऐसा व्यक्ति, जो इस प्रकार रजिस्ट्रीकृत नहीं है मतदान करने के लिए पात्र नहीं होगा :

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1640(15) परन्तु कोई भी व्यक्ति पार्षदों के किसी भी निर्वाचन में से एक से अधिक बार मतदान नहीं करेगा ।

धारा 16 महापौर या पार्षद के रूप में निर्वाचन के लिए अर्हता-

उप-धारा (1 ) के खण्ड (क) के स्थान पर, नवीन शब्द प्रतिस्थापित किया जाये ।

उप-धारा (3 ) ऐसा कोई भी व्यक्ति , जो महापौर या पार्षद न रहे, यदि उपधारा (1 ) के अधीन अर्ह है, उस रूप में पुनः निर्वाचन के लिए पात्र होगा ।

धारा 17 पार्षद होने के लिए व्यापक निरर्हताएं- (1) कोई भी ऐसा व्यक्ति पार्षद नहीं होगा जो-

(ख ख) पार्षद के रूपमें और आगे निर्वाचित किए जाने या नामनिर्दिष्ट किए जाने के लिए धारा 17-ए के अधीन निरर्हित कर दिया गया हो, जब तक कि वह ऐसी निरर्हता से राज्य सरकार द्वारा मुक्त न कर दिया गया हो ,

(ङ) पार्षद की दशा में इक्कीस वर्ष से कम आयु का हो,

(2) पार्षद बने रहने के लिये आयोग्यता-

(3 ) यह निर्णय करने की शक्ति कि क्या कोई रिक्ति हुई है- यह निर्णय देने के लिए कि क्या इस धारा के अधीन कोई स्थान रिक्त हुआ है सक्षम प्राधिकारी शासन होगा । यह निर्णय या तो किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत किये गये आवेदन पत्र पर या स्वयं को प्रेरणा कर दिया जा सकेगा । जब तक शासन यह निर्णय न कर दे कि स्थान रिक्त हुआ है, वह पार्षद उपधारा (2) के. अधीन पार्षद के रूप में बने रहने के लिए अयोग्य नहीं होगा:

किन्तु प्रतिबंध यह है कि इस उपधारा के अधीन कोई भी आज्ञा किसी भी पार्षद के विरूध्द उसे सुने जाने का यथोचित अवसर दिए बिना नहीं दी जाएगी ।

धारा 17-ख महापौर तथा पार्षद द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान-

उप-धारा (1 ) प्रत्येक महापौर तथा प्रत्येक पार्षद, यथास्थिति, निगम के प्रथम सम्मिलन में अध्यक्ष (स्पीकर) के चुनाव में भाग लेने के पूर्व या अपना पद ग्रहण करने के पूर्व कलेक्टर के समक्ष निम्नलिखित प्ररूप में शपथ या प्रतिज्ञान पर हस्ताक्षर करेगा :-

छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1640(16)

मैं महापौर / निर्वाचित पार्षद / नामनिर्दिष्ट पार्षद नगरपालिक निगम ईश्वर की शपथ लेता हूँ सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूँ कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा अक्षुण्ण बनाए रखूंगा तथा मैं ईमानदारी पूर्वक तथा निष्पक्षता पूर्ण अपने कर्तव्यों का निर्वहन करूंगा ।

(2) यदि महापौर या पार्षद उपधारा (1 ) के अधीन शपथ नहीं लेता है तो यह समझा जाएगा कि यथास्थिति, ऐसे महापौर या पार्षद ने अपना पद ग्रहण नहीं किया है :

परन्तु यदि यथास्थिति, महापौर या पार्षद संभागीय आयुक्त की अनुमति के सिवालय, यथास्थिति, निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट होने की तारीख से तीन मास के भीतर शपथ नहीं लेता है तो उसका स्थान स्वयमेव ही रिक्त हुआ समझा जाएगा ।

धारा 18 महापौर तथा अध्यक्ष (स्पीकर) का निर्वाचन-

उप-धारा (1 ) राज्य निर्वाचन आयोग , धारा 22 के अधीन निर्वाचन की अधिसूचना के पन्द्रह दिवस के भीतर , अध्यक्ष तथा महापौर के निर्वाचन के प्रयोजन के लिए निर्वाचित पार्षदों, का सम्मिलिन बुलाएगा:

परंतु यह कि यदि किसी भी कारण से महापौर तथा/ या अध्यक्ष का चुनाव एक ही बैठक में पंद्रह दिनों के भीतर पूर्ण नहीं हो सका हो, तो यह दो या अधिक बैठकों में पूर्ण किया जा सकेगा, किन्तु संपूर्ण प्रक्रिया धारा 22 के अधीन चुनाव की अधिसूचना के तीस दिनों की कालावधि के भीतर पूर्ण करना होगा ।

(3 ) उप-धारा (1 ) के अधीन सम्मिलन , ऐसी रीति में बुलाया जायेगा, जैसा कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अवधारित किया जयेगा, जिसकी अध्यक्षता राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा की जाएगी । अध्यक्षता करने वाले अधिकारी को मत देने का अधिकार नहीं होगा और मत बराबर होने की दशा में , परिणाम लाट द्वारा विनिश्चित किया जायेगा । होगी । उप-धारा (4 ) महापौर तथा अध्यक्ष की पदावधि निगम की पदावधि की सह-विस्तारी धारा 20 नगरपालिक निगम की अवधि-

(1 ) प्रत्येक नगर पालिक निगम, यदि पहले ही विघटित नहीं कर दिया जाता है तो अपने प्रथम सम्मिलन के लिए नियत तारीख से पांच वर्ष तक बना रहेगा, इससे अधिक नहीं । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 17 दिसम्बर 2024

1640(17) स्पष्टीकरण - महापौर तथा अध्यक्ष को निर्वाचन करने के लिए धारा 18 की उप धारा (1 ) के अधीन किये गये सम्मिलन के बारे में यह समझा जायेगा कि वह इस उपधारा के प्रयोजन के लिए प्रथम सम्मिलन है ।

धारा-20 की उपधारा (4 ) इस अधिनियम के उपबंधों के अध्ययाधीन रहते हुए महापौर तथा प्रत्येक पार्षद की पदावधि निगम की पदावधि की सहविस्तारी होगी ।

धारा 23- क महापौर या अध्यक्ष के विरूद्ध अविश्वास का प्रस्ताव-

(1) महापौर या अध्यक्ष के विरूध्द अविश्वास प्रस्ताव उपधारा (2) के अधीन उस प्रयोजन के लिए विशेष रूप से बुलाए गए सम्मिलन में किसी निर्वाचित पार्षद द्वारा प्रस्तुत किया जा सकेगा और यदि प्रस्ताव सम्मिलन में उपस्थित तथा मतदान करने वाले निर्वाचित पार्षदों के दो-तिहाई बहुमत से स्वीकृत हो जाए और यदि ऐसा बहुमत निगम का गठन करने वाले निर्वाचित पार्षदों की कुल संख्या आधे से अधिक हो , तो महापौर या अध्यक्ष का पद तत्काल रिक्त हुआ समझा जाएगा:

परन्तु महापौर या अध्यक्ष के विरूध्द ऐसा कोई प्रस्ताव-

(एक) उस तारीख से जिससे कि महापौर या अध्यक्ष अपना पद ग्रहण करे, दो वर्ष की कालावधि के भीतर,

(दो) उस तारीख से , जिस पर कि पूर्व अवश्विास प्रस्ताव अस्वीकृत किया गया था, एक वर्ष की कालावधि के भीतर नहीं होगा ।

उपधारा (2) के खण्ड (दो) ऐसे सम्मिलन की सूचना, तारीख समय तथा स्थान विनिर्दिष्ट करते हुए महापौर, अध्यक्ष तथा प्रत्येक पार्षद को सम्मिलन के दस पूर्ण दिन पूर्व भेजी जाएगी-

(एक) तत्समय निगम का गठन करने वाले निर्वाचित पार्षदों की कुल संख्या के कम से कम एक तिहाई द्वारा हस्ताक्षरित अध्यपेक्षा पर तत्काल सम्मिलन बुलाया जायेगा ।

(दो) ऐसे सम्मिलन की सूचना, तारीख समय तथा स्थान विनिर्दिष्ट करते हुए महापौर, अध्यक्ष तथा प्रत्येक पार्षद को सम्मिलन के दस पूर्ण दिन पूर्व भेजी जाएगी:

(तीन) इस धारा के अधीन लाए गए अविश्वास के प्रस्ताव का विनिश्चय गुप्त मतदान द्वारा किया जाएगा ।

धारा 422 निगम का विघटन- उप - धारा (1 ) के खण्ड (ख) धारा 23 की उप- धारा (1 ) के अधीन पार्षदों के प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पश्चात् राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा राजपत्र में पार्षदों के निर्वाचन के प्रकाशन की तारीख से एक मास के भीतर या महापौर तथा अध्यक्ष की पदावधि की समाप्ति के एक मास के भीतर, निगम महापौर तथा अध्यक्ष का निर्वाचन नहीं करता हैं , या

धारा 441 निर्वाचन याचिकाएँ- धारा 441 की उप - धारा (2) के खण्ड (आ) के उप - खण्ड " (तीन) महापौर के निर्वाचन की दशा में , किसी निर्वाचित पार्षद द्वारा । "

दिनेश शर्मा

सचिव

छत्तीसगढ़ विधान सभा संचालक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय , नवा रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित - 2024.

Cite this issue. Chattisgarh Gazette - Extraordinary, Government of Chattisgarh, 17 December 2024. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.chhattisgarh.eo.2024-12-17.820/. Archive identifier in.gazette.chhattisgarh.eo.2024-12-17.820.