वाणिज्य एवं उद्योग विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर
नवा रायपुर अटल नगर, दिनांक 4 मार्च 2025
अधिसूचना
क्रमांक एफ 20-5/2025/11/6. - चूंकि, राज्य सरकार का यह समाधान हो गया है कि राज्य के औद्योगिक विकास को अधिक गति देने के लिए लोकहित में ऐसा करना आवश्यक है,
अतएव राज्य शासन, एतद् द्वारा, इस विभाग के अधिसूचना क्रमांक एफ 20-21/2016/11/(6) दिनांक 15.03.2015 द्वारा जारी ''छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015'' में, इन नियमों के नियम 3.15 की शक्तियों का प्रयोग करते हुये, निम्नानुसार अग्रतर संशोधन करती है, अर्थात :-
संशोधन
उक्त नियमों में,
1. कंडिका 1.2 के स्थान पर निम्नानुसार प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात् -
''1.2 परिभाषायें -
(1) इन नियमों में जब तक सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, - (एक) ''छत्तीसगढ़ स्टेट इण्डस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड (सी.एस.आई.डी.सी.)'' से अभिप्रेत है, छत्तीसगढ़ शासन, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग का उपक्रम, कम्पनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत गठित एवं निगमित छत्तीसगढ़ स्टेट इण्डस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड (सी.एस.आई.डी.सी.), (दो) ''सूक्ष्म, लघु, मध्यम, वृहद, मेगा/अल्ट्रा मेगा उद्यम/प्रोजेक्ट'' से अभिप्रेत है, राज्य सरकार, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग द्वारा समय-समय पर जारी औद्योगिक नीति के अंतर्गत परिभाषित उद्यम/सेवा उद्यम जिनके संबंध में राज्य के द्वारा उद्यम आकांक्षा अथवा समतुल्य कोई अभिस्वीकृति/प्रमाण पत्र जारी किया गया हो। (तीन) ''औद्योगिक क्षेत्र'' से अभिप्रेत है वाणिज्य एवं उद्योग विभाग अथवा सी.एस.आई.डी.सी. के पूर्णतः स्वामित्व/आधिपत्य की भूमि पर विकसित किये गये/किये जाने वाले औद्योगिक क्षेत्र, चाहे उसे राज्य शासन द्वारा किसी भी नाम से नामित किया जावे, यथा-औद्योगिक विकास केन्द्र, औद्योगिक क्षेत्र/संस्थान, अर्धशहरी औद्योगिक संस्थान, ग्रामीण कर्मशाला, आई.आई.डी.सी., फूड पार्क, अपैरल पार्क, इंजीनियरिंग पार्क, हर्बल मेडिसिनल पार्क, जेम्स एण्ड ज्वैलरी पार्क, स्टोन कटिंग एवं पॉलिशिंग पार्क, मेटल पार्क, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क, जैव प्रौद्योगिकी पार्क, निर्यात पार्क एवं/या अन्य कोई औद्योगिक पार्क जिसमें आबंटन/प्रबंधन उद्योग संचालनालय/ जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र/छत्तीसगढ़ स्टेट इण्डस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन द्वारा किया जाता हो। टीपः- विशेष आर्थिक प्रक्षेत्र (स्पेशल इकॉनोमिक जोन) स्वयं की प्रशासकीय व्यवस्था के अंतर्गत शासित होंगे। (चार) ''लैंड बैंक (औद्योगिक प्रयोजन)'' से अभिप्रेत है, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग अथवा सी.एस.आई.डी.सी. के स्वामित्व/आधिपत्य की वह भूमि जो किसी भी घोषित औद्योगिक क्षेत्र से बाहर हो तथा जिससे उद्योग की स्थापना हेतु उद्योग की आवश्यकताओं/प्रयोजन की पूर्ति होती हो। (पांच) ''सहायक औद्योगिक प्रयोजन'' से अभिप्रेत है, उद्योगों हेतु सहायक/आवश्यक गतिविधियां जो कि में वर्णित हैंं। (छः) ''आबंटन प्राधिकारी'' से अभिप्रेत है, नियमों में औद्योगिक क्षेत्रों की भूमि, भवन-शेड, प्रकोष्ठ तथा लैंड बैंक (औद्योगिक प्रयोजन) की भूमि आबंटन हेतु के अनुसार अधिकृत प्राधिकारी। (सात) ''पट्टाग्रहिता/पट्टेदार/आबंटी/आबंटिती'' से अभिप्रेत है, भूमि/भवन-शेड/ प्रकोष्ठ का आबंटन प्राप्तकर्ता एवं पट्टा/अनुज्ञप्ति ग्रहिता इकाई जिसने भू-आबंटन की कार्यवाही उपरांत पट्टादाता के साथ पट्टाविलेख निष्पादित कर पंजीकृत करवाया है। (आठ) ''सक्षम प्राधिकारी'' से अभिप्रेत है, छत्तीसगढ़ शासन के विभिन्न विभागों के द्वारा समय-समय पर विभिन्न प्रयोजनों हेतु अधिसूचित सक्षम प्राधिकारी। (नौ) ''औद्योगिक क्षेत्र की भूमि, भवन, शेड एवं प्रकोष्ठ'' से अभिप्रेत है, राज्य शासन के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग अथवा उसके अधीनस्थ निगम सी.एस.आई.डी.सी. के स्वामित्व/ आधिपत्य के औद्योगिक क्षेत्र की भूमि, भवन-शेड, प्रकोष्ठ। (दस) ''औद्योगिक इकाई का विस्तार/शवलीकरण'' से अभिप्रेत है, राज्य शासन द्वारा समय समय पर घोषित औद्योगिक नीतियों की परिभाषाओं अनुसार औद्योगिक इकाई का विस्तार/शवलीकरण। (ग्यारह) ''निर्मित क्षेत्र'' से आशय है उत्पादन से सीधे संबंधित पक्के निर्माण जैसे- फैक्ट्री भवन, गोदाम, कार्यालय भवन, प्रयोगशाला भवन, अनुसंधान भवन, केन्टीन, श्रमिक विश्राम कक्ष, टैंक, साइलोस (कंंटेनर), सिक्यूरिटी कार्यालय, पावर सब-स्टेशन, पम्प हाऊस, पानी की टंकी, विद्युत जनरेटर, सेट/बायलर रूम आदि से है। निर्मित क्षेत्र में बाउण्ड्री वाल, सड़क, नाली, आदि अनुत्पादक निर्माणों को आच्छादित क्षेत्र की गणना हेतु निर्मित क्षेत्र के रूप में मान्य नहीं किये जायेंगे। (2) ऐसी शब्दावली जो इन नियमों में परिभाषित नहीं है उनके संबंध में वही परिभाषाएॅं मान्य होगी जो प्रचलित में परिभाषित है।''
2. कंडिका 1.4 की प्रविष्टि का लोप किया जाये।
3. कंडिका 2.2.3 में शब्द समूह ''परिवार रहित'' एवं ''(भू-तल एवं अधिकतम प्रथम तल तक)'' का लोप किया जाए।
4. कंडिका 2.3.2 (ब) के स्थान पर निम्नानुसार कंडिका प्रतिस्थापित किया जाए,- ''2.3.2 (ब) सामान्यतः आवंटन की जाने वाली भूमि की अधिकतम मात्रा उद्यम की श्रेणी अनुसार निम्नानुसार होगी- (1) सूक्ष्म उद्यम- 1,000 वर्गमीटर तक (2) लघु उद्यम- भूमि की आवश्यकता 1,000 वर्गमीटर से अधिक होने पर यंत्र-संयंत्र मद ୩୬୮ (୧) में प्रत्येक रूपये 25 लाख के निवेश के ब्लक के लिये 500 वर्गमीटर अतिरिक्त भूमि, अधिकतम भूमि 1 (एक) हेक्टेयर तक।
(3) मध्यम उद्यम- भूमि की आवश्यकता 1 (एक) हेक्टेयर से अधिक होने पर यंत्र-संयंत्र मद में प्रत्येक रूपये 1 करोड़ के निवेश के ब्लाक के लिये 0.2 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि, अधिकतम 5 (पांच) हेक्टेयर भूमि तक।
(4) वृहद उद्यम- भूमि की आवश्यकता दो हेक्टेयर से अधिक होने पर यंत्र-संयंत्र मद में प्रत्येक पांच करोड़ के निवेश के ब्लक के लिये 0.4 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि, अधिकतम भूमि 25 (पच्चीस) हेक्टेयर तक।
(5) 100 करोड़ रूपये से अधिक निवेश वाले वृहद उद्यम- भूमि की आवश्यकता 10 हेक्टेयर से अधिक होने पर यंत्र-संयंत्र मद में प्रत्येक पांच करोड़ के निवेश के ब्लक के लिये 0.4 हेक्टयर अतिरिक्त भूमि, अधिकतम भूमि 100 (सौ) हेक्टेयर तक।'' 5. कंडिका 2.3.4 के स्थान पर निम्नानुसार कंडिका प्रतिस्थापित किया जाए,-
''2.3.4 उपरोक्त पात्रता से 150 प्रतिशत अधिक तक भूमि, अनिवार्य होने की स्थिति में, आबंटन करने हेतु विभागीय भार-साधक सचिव सक्षम होंगे।''
6. कंडिका 2.5.2 में शब्द ''नगद'' का लोप किया जाये।
7. कंडिका 2.5.3 में शब्द-समूह ''उपरोक्त (i) की गणनानुसार'' के स्थान पर शब्द ''उपरोक्तानुसार'' प्रतिस्थापित किया जाये।
8. कंडिका 2.5.5 में शब्द-समूह ''उपरोक्त (i) की गणनानुसार'' के स्थान पर शब्द ''उपरोक्तानुसार'' प्रतिस्थापित किया जाये। शब्द-समूह ''उपरोक्त (i) एवं (ii) की गणनानुसार'' के स्थान पर शब्द ''उपरोक्तानुसार'' प्रतिस्थापित किया जाये।
9. कंडिका 2.5.8 की प्रविष्टि का लोप किया जाये।
10. कंडिका 2.7.2 में शब्द-समूह ''आवेदन शुल्क निम्नानुसार'' के पश्चात् शब्द-समूह ''जिसमें आबंटन प्राधिकारी के द्वारा वृद्धि की जा सकेगी,'' जोड़ा जाए।
11. कंडिका 2.9.1 में शब्द ''ब्याज'' के स्थान पर शब्द-समूह ''चक्रवृद्धि ब्याज'' प्रतिस्थापित किया जाये।
12. कंडिका 2.9.2 में शब्द-समूह ''पंजीकृत पावती सहित डाक से अथवा व्यक्तिगत रूप से'' के स्थान पर शब्द-समूह ''पंजीकृत डाक से अथवा डिजीटल माध्यम से'' प्रतिस्थापित किया जाए।
13. कंडिका 2.9.3 के स्थान पर निम्नानुसार कंडिका प्रतिस्थपित किया जाये -
'' - आबंटन आदेश की शर्तों की पूर्ति करने के साथ 30 दिवसों के भीतर आवेदक को निर्धारित प्ररूप में पट्टा निष्पादित कर 07 दिवस में पंजीत करानी होगी। इस समयावधि के पश्चात पंजीयन की स्थिति में प्रब्याजी का 1 प्रतिशत राशि प्रतिमाह की दर से विलंब शुल्क के रूप में लिया जायेगा। लीज डीड निष्पादित एवं पंजीकृत करने की प्रक्रिया हेतु मुख्य महाप्रबंधक/महाप्रबंधक जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र को आबंटन प्राधिकारी अधिकृत कर सकेगा। आवंटी इकाई निष्पादित ୩୬୮ (୨) विलेख पंजीयन उपरांत उसकी पंजीयनकर्ता अधिकारी द्वारा जारी अभिप्रमाणित प्रति आवंटन प्राधिकारी के पास जमा करेगा तथा मूल प्रति अपने पास रख सकेगा।'' 14. कंडिका 2.9.4 की प्रविष्टि का लोप किया जाये।
15. कंडिका 2.9.6 में शब्द-समूह ''उसके आवेदन पत्र में वर्णित पते पर पंजीकृत पावती डाक से'' के स्थान पर शब्द-समूह ''पंजीकृत डाक से अथवा डिजीटल माध्यम से'' प्रतिस्थापित किया जाए।
16. कंडिका 2.11 शब्द समूह ''प्रकरण के गुण-दोष के आधार पर विचार करते हुए आबंटी को'' के स्थान पर शब्द समूह ''शासन की पूर्व अनुमति प्राप्त करने के पश्चात्, केन्द्र शासन, राज्य शासन या शासकीय उपक्रम या स्थानीय स्व-शासी निकाय को'' जोड़ा जाए।
17. कंडिका 2.12 निम्नानुसार परन्तुक जोड़ा जाए,-
''परन्तु पट्टाअवधि के पर्यावसान् के पश्चात् नवीनीकरण की स्थिति में प्रब्याजी का 10 प्रतिशत प्रति विलंब वर्ष की दर से विलंब शुल्क अधिरोपित किया जाएगा।'' 18. कंडिका 3.1.1 के स्थान पर निम्नानुसार प्रतिस्थापित किया जाये -
'' इकाई द्वारा उत्पादन प्रारंभ करना :- प्रत्येक आबंटिती को भूमि/शेड का आधिपत्य प्राप्त कर, पट्टा अंतर्गत दर्शित प्रयोजन एवं भू-आबंटन के समय प्रस्तुत विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन अनुसार अपनी परियोजना क्रियान्वित करनी होगी। इस हेतु सभी आवश्यक प्रभावशील कदम उठाकर, नियमानुसार आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर, भवन-शेड निर्माण कर यंत्र-संयंत्र की स्थापना कर समयावधि में परियोजना में उत्पादन प्रारंभ करना होगा। समयावधि की गणना इकाई द्वारा भूमि/शेड/प्रकोष्ठ का आधिपत्य प्राप्त करने की दिनांक से निम्नानुसार होगी :- (अ) सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के मामले में आधिपत्य दिनांक से दो वर्ष । (ब) मध्यम उद्यमों के प्रकरणों में आधिपत्य दिनांक से तीन वर्ष। (स) 100 करोड़ रूपये तक के निवेश वाले वृहद उद्यमों के प्रकरणों में आधिपत्य दिनांक से चार वर्ष। (द) अधिक निवेश वाले वृहद उद्यमों के प्रकरणों में आधिपत्य दिनांक से पांच वर्ष। परन्तु दिनांक 04 मार्च 2025 के पूर्व के आबंटन के मामले में उत्पादन प्रारंभ करने हेतु समय-सीमा तत्समय प्रचलित प्रावधान अनुसार होगी। ''
19. कंडिका 3.1.1.1 के स्थान पर निम्नानुसार प्रतिस्थापित किया जाये -
''3.1.1.1 (1) उपरोक्त समय-सीमा में उत्पादन प्रारंभ न होने पर, परन्तु प्रस्तावित परियोजना लागत का 25 प्रतिशत अथवा अधिक स्थायी पूँजी निवेश होने की दशा में, उद्योग स्थापना हेतु उठाये गये प्रभावी कदमों की सप्रमाण जानकारी एवं तत्समय देय प्रब्याजी का 10 प्रतिशत शास्ति सहित, उपरोक्त समय-सीमा समाप्त होने के कम-से-कम एक माह पूर्व आवेदन प्रस्तुत करने पर, आबंटन प्राधिकारी द्वारा अवधि में केवल 01 वर्ष की प्रथम वृद्धि की जा सकेगी। (2) उपरोक्त प्रथम वृद्धि सहित समय-सीमा में उत्पादन प्रारंभ न होने पर, परन्तु प्रस्तावित परियोजना लागत का 25 प्रतिशत अथवा अधिक स्थायी पूँजी निवेश होने की दशा में, उद्योग स्थापना हेतु उठाये गये प्रभावी कदमों की सप्रमाण जानकारी एवं तत्समय देय प्रब्याजी का 15 प्रतिशत शास्ति सहित, उपरोक्त समय-सीमा समाप्त होने के ୩୬୮ (୩) कम-से-कम एक माह पूर्व आवेदन प्रस्तुत करने पर, आबंटन प्राधिकारी द्वारा अवधि में केवल 01 वर्ष की द्वितीय वृद्धि की जा सकेगी। (3) समय-सीमा में उत्पादन प्रारंभ नहीं होने पर आबंटन प्राधिकारी द्वारा आबंटन निरस्त किया जा सकेगा।''
20. कंडिका 3.1.2.1 के स्थान पर निम्नानुसार प्रतिस्थापित किया जाये-
'' आबंटी को आवंटन हेतु प्रस्तुत विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन के अनुसार संपूर्ण आबंटित भूमि का उपयोग आवंटी द्वारा किए जाने की समय-सीमा के विषय में कंडिका 3.1.1 में उल्लेखित प्रावधान लागू होंगे।''
21. कंडिका 3.1.2.3 की प्रविष्टि का लोप किया जाए।
22. कंडिका 3.2.2 में शब्द-समूह ''कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 4 ए के अंतर्गत घोषित'' के स्थान पर शब्द-समूह ''कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत घोषित'' प्रतिस्थापित किया जाये।
23. कंडिका 3.2.4.6 में निम्नानुसार जोड़ा जाये,-
''अभिहस्तांकन की स्थिति में आवंटिती, बैंक/वित्तीय संस्था एवं आवंटन प्राधिकारी के मध्य त्रिपक्षीय करार निष्पादित किया जाना अनिवार्य होगा।''
24.. कंडिका 3.3.1 में शब्द-समूह ''किसी इकाई को स्वीकृत पट्टाधीन भूखंड से लगी हुई ऐसी कोई भूमि (यदि उपलब्ध है), जो उसे आबंटित भू-खण्ड के क्षेत्रफल से दस (10) प्रतिशत से अधिक न हो एवं जिसमें कोई पृथक पहुंच मार्ग न हो तो'' के स्थान पर शब्द-समूह ''किसी उत्पादनरत् उद्यम के अधिपत्य की भूमि से संलग्न शासकीय भूमि, जिसका क्षेत्रफल उद्यम के अधिपत्य की भूमि से 15 प्रतिशत से अनधिक हो, उपलब्ध हो तो'' प्रतिस्थपित किया जाये तथा परंतुक में शब्द "पट्टेदार" का लोप किया जाए।
25. कंडिका 3.3.2 में शब्द-समूह ''दस (10) प्रतिषत'' के स्थान पर शब्द-समूह ''15 प्रतिशत'' प्रतिस्थपित किया जाये।
26. कंडिका 3.4.1.1 के खण्ड (ब) के स्थान पर निम्नानुसार खण्ड प्रतिस्थापित किया जाये,- ''(ब) आबंटन के समय एकल स्वामित्व के प्रकरणों में एक व्यक्ति, साझेदारी के प्रकरणों में साझेदारी फर्म तथा कंपनी के प्रकरणों में कंपनी ही मूल आबंटिती कहलाएंगे।'' 27. कंडिका 3.4.1.2 के खण्ड (अ) में शब्द-समूह ''हस्तांतरित किये जाने पर'' के पश्चात शब्द-समूह ''एवं प्रवृत्त विधियों की समस्त अपेक्षाओं की पूर्ति किये जाने पर'' जोड़ा जाये। 28. कंडिका 3.4.1.3 के खण्ड (ब) के स्थान पर निम्नानुसार खण्ड प्रतिस्थापित किया जाये,- ''(ब) सभी मर्जर, डी-मर्जर, अमलगमेशन, डी-अमलगमेशन इन नियमों के तहत हस्तांतरण की श्रेणी मेंं होंगे।''
29. कंडिका 3.4.2.8 में शब्द-समूह ''कंडिका 3.1.2.2 अनुसार आवंटित भूमि का आंशिक समर्पण किया जा सकेगा'' के स्थान पर शब्द-समूह ''कंडिका 3.1.2.2, कंडिका 3.5 एवं/या कंडिका 3.6 अनुसार कार्यवाही की जा सकेगी'' प्रतिस्थापित किया जाये। ୩୬୮ (୪) 30. कंडिका 3.5 में शीर्ष के अधीन प्रविष्टि को कंडिका 3.5.1 के रूप में संयोजित करते हुए, (1) शब्द-समूह ''औद्योगिक क्षेत्रों में निजी उद्यमों के प्रकरण में शिकमी/उपपट्टा की अनुमति नहीं होगी'' के स्थान पर शब्द-समूह ''आबंटन की प्रक्रिया मेंं जारी निविदा/नीलामी की शर्तो में स्पष्ट रूप से अनुमति उल्लेखित नहीं होने पर, औद्योगिक क्षेत्रों में निजी उद्यमों के प्रकरण में शिकमी/उपपट्टा की अनुमति नहीं होगी'' प्रतिस्थापित किया जाए। (2) शब्द-समूह ''परंतु औद्योगिक क्षेत्रों में उद्यमों को औद्योगिक प्रयोजन के लिए पट्टाविलेख के आधार पर आबंटित भूमि में शिकमी/उपपट्टे की अनुमति नहीं दी जावेगी'' का लोप किया जाए।
31. कंडिका 3.5.1 के पश्चात निम्नानुसार कंडिका जोड़ा जाए,-
''3.5.2 (1) औद्योगिक विकास नीति में निजी औद्योगिक क्षेत्र/पार्क हेतु निर्धारित सीमा से अधिक भूमि के प्रकरण विशेष में, जिनमें उप-पट्टा की अनुमति निविदा/नीलामी के शर्ताें में स्पष्ट उल्लेखित हो, राज्य शासन द्वारा औद्योगिक विकास को २ष्टिगत रखते हुए निजी उद्यमों को उप-पट्टा की अनुमति दी जा सकेगी। औद्योगिक नीति में निजी औद्योगिक क्षेत्र/पार्क हेतु निर्धारित सीमा से अधिक भूमि के प्रकरणों में यह लागू होगा। मूल आबंटिती को आबंटित भूमि का 25 प्रतिशत से अन्यून स्वयं द्वारा धारित करना अनिवार्य होगा। (2) उप-पट्टा प्राप्त करने वाले इकाई के द्वारा मूल पट्टाधारी पर अधिरोपित समस्त नियम एवं शर्तों का पालन किया जाना आवश्यक होगा।''
32. कंडिका 3.6.1 के स्थान पर निम्नानुसार प्रतिस्थापित किया जाये -
'' आवंटिती पट्टे पर दी गई भूमि का समर्पण अपने इस अभिप्राय को लिखित रूप में आबंटन प्राधिकारी को कर सकता है। अनुमोदित अभिन्यास में मान्य होने की स्थिति में ही, आंशिक समर्पण किया जा सकेगा। आबंटन प्राधिकारी को समर्पित भूमि के परिसर में पुनः प्रवेश का अधिकार होगा। भूमि आबंटित करते समय आबंटिती द्वारा भुगतान की गई भू-प्रब्याजि की राशि में से निम्नानुसार प्रब्याजि वापस की जायेगी।''
33. कंडिका 3.6.2 के स्थान पर निम्नानुसार प्रतिस्थापित किया जाये -
'' भू प्रब्याजी की 90 प्रतिशत राशि यदि आवंटित भूमि का समर्पण कंडिका 3.1.1 में वर्णित समयावधि के न्यूनतम एक वर्ष पूर्व किया गया हो।''
34. कंडिका 3.6.3 के स्थान पर निम्नानुसार प्रतिस्थापित किया जाये -
'' भू प्रब्याजी की 80 प्रतिशत राशि यदि आवंटित भूमि का समर्पण कंडिका 3.1.1 में वर्णित समयावधि के भीतर किया गया हो।''
35. कंडिका 3.6.4 के स्थान पर निम्नानुसार प्रतिस्थापित किया जाये -
'' भू प्रब्याजी की 70 प्रतिशत राशि यदि आवंटित भूमि का समर्पण कंडिका 3.1.1 में वर्णित समयावधि में प्रथम वृद्धि, यदि किया गया हो, की अवधि के भीतर किया गया हो।'' 36. कंडिका 3.6.5 के स्थान पर निम्नानुसार प्रतिस्थापित किया जाये -
'' भू प्रब्याजी की 50 प्रतिशत राशि यदि आवंटित भूमि का समर्पण कंडिका 3.1.1 में वर्णित समयावधि में द्वितीय वृद्धि, यदि किया गया हो, की अवधि के भीतर किया गया ୩୬୮ (୫) हो।''
37. कंडिका 3.6.6 के स्थान पर निम्नानुसार प्रतिस्थापित किया जाये -
'' उपरोक्त समय अवधि के उपरांत समर्पण करने पर अथवा भूमि के परियोजना प्रतिवेदन अनुसार समय सीमा में उपयोग नहीं करने के अतिरिक्त अन्य किसी अनियमितता अथवा नियम/शर्त के उल्लंघन पर निरस्तीकरण की स्थिति में भू प्रब्याजी की वापसी नहीं होगी।''
38. कंडिका 3.7.2 में शब्द-समूह ''पंजीत डाक से अभीस्वीति/पावती सहित'' के स्थान पर शब्द-समूह ''पंजीत डाक से अथवा डिजिटल माध्यम से'' प्रतिस्थापित किया जाए। 39. कंडिका 3.7.3 में शब्द-समूह ''पंजीत डाक द्वारा'' के पश्चात शब्द-समूह ''अथवा डिजिटल माध्यम से'' जोड़ा जाए।
40. कंडिका 3.8 के स्थान पर निम्नानुसार कंडिका प्रतिस्थापित किया जाये, - ''3.8 - 3.8.1 आबंटन प्राधिकारी के किसी भी आदेश के विरुद्ध, असंतुष्ट पक्षकार द्वारा अभ्यावेदन, उक्त आदेश दिनांक से 30 दिवस की समयावधि के भीतर, आवंटन प्राधिकारी को पुनर्विलोकन हेतु प्रस्तुत किया जा सकेगा। 3.8.2 की कंडिका (स) में उल्लेखित आबंटन प्राधिकारी के अधीनस्थ किसी अधिकारी के किसी आदेश के विरुद्ध, असंतुष्ट पक्षकार द्वारा अपील, उक्त आदेश दिनांक से 30 दिवस की समयावधि के भीतर, संबंधित आबंटन प्राधिकारी को प्रस्तुत किया जा सकेगा। 3.8.3 आबंटन प्राधिकारी के रूप में संचालक/आयुक्त उद्योग के किसी आदेश के विरुद्ध प्रबंध संचालक, सी.एस.आई.डी.सी. को एवं आबंटन प्राधिकारी के रूप में प्रबंध संचालक, सी.एस.आई.डी.सी. के किसी आदेश के विरुद्ध संचालक/आयुक्त उद्योग को, असंतुष्ट पक्षकार द्वारा अपील, उक्त आदेश दिनांक से 30 दिवस की समयावधि के भीतर, प्रस्तुत किया जा सकेगा। 3.8.4 राज्य शासन के द्वारा पारित किसी आदेश के विरूद्व कोई अपील नहीं होगी। 3.8.5 किसी भी आदेश के विरूद्व द्वितीय अपील नहीं हो सकेगी। 3.8.6 उपरोक्त हेतु सूक्ष्म/लघु उद्यम के मामलों में 2000 रुपए एवं अन्य मामलों में 10,000 रुपए का शुल्क अभ्यावेदन/याचिका के साथ प्रस्तुत करना होगा।''
41. कंडिका 3.9.1 में शब्द-समूह ''निरस्तीकरण उपरांत'' के पश्चात शब्द-समूह ''अपील अवधि की समाप्ति पर'' तथा शब्द-समूह ''पंजीत पत्र द्वारा'' के पश्चात शब्द-समूह ''अथवा डिजिटल माध्यम से'' जोड़ा जाए।
42. कंडिका 3.9.4 में शब्द-समूह ''पंजीत डाक से'' के पश्चात शब्द-समूह ''अथवा डिजिटल माध्यम से'' जोड़ा जाए।
43. कंडिका 3.9.5 में शब्द-समूह ''पंजीत पत्र से'' के पश्चात शब्द-समूह ''अथवा डिजिटल माध्यम से'' जोड़ा जाए। ୩୬୮ (୬) 44. कंडिका 3.9.7 में शब्द-समूह ''पंजीत डाक से'' के पश्चात शब्द-समूह ''अथवा डिजिटल माध्यम से'' जोड़ा जाए।
45. कंडिका 3.11.2 के खण्ड (ब) में शब्द-समूह ''प्रचलित वार्षिक बैंक ब्याज की दर'' के स्थान पर शब्द-समूह ''10 प्रतिशत वार्षिक दर'' प्रतिस्थापित किया जाये।
46. कंडिका 3.11.4 में शब्द-समूह ''पंजीत डाक से'' के पश्चात शब्द-समूह ''अथवा डिजिटल माध्यम से'' जोड़ा जाए।
47. अध्याय 4 के परिशिष्ट-1 की कंडिका 2 के खंड (अ), (ब) एवं (स) अंतर्गत सारणी में तीसरे कलम "भू-आबंटन की अधिकारिता (क्षेत्राधिकार अनुसार)" का लोप किया जाए। 48. अध्याय 4 में परिशिष्ट-6 की कंडिका (अ) एवं (ब) का लोप किया जाए।
49. अध्याय 4 में परिशिष्ट-6 की कंडिका (स) (i) में शब्द-समूह ''4 हेक्टेयर भूमि से अधिक मात्रा में'' का लोप किया जाये।