कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर
नवा रायपुर अटल नगर, दिनांक 7 मार्च 2025
सूचना
क्रमांक/1199/एफ-02/40/2013/14-2.— राज्य सरकार, छत्तीसगढ़ —षि उपज मंडी अधिनियम, 1972 (क. 24 सन् 1973) की धारा 79 द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, "छत्तीसगढ़ —षि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2012 के अंतर्गत मंडी शुल्क छूट नियम, 2014" में संशोधन करना प्रस्तावित करती है। उक्त अधिनियम की धारा 79 की उप-धारा (1) द्वारा अपेक्षित किये गये अनुसार, उन समस्त व्यक्तियों की, जिनके कि उससे प्रभावित होने की संभावना है, जानकारी के लिए एतद्द्वारा प्रकाशित किया जाता है और एतद्द्वारा, सूचित किया जाता है कि इस प्रारूप के राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से पन्द्रह दिवस के अवसान के पश्चात् उक्त प्रारूप पर विचार किया जायेगा।
कोई आपत्ति या सुझाव, जो उक्त प्रारुप के संबंध में किसी व्यक्ति से, विनिर्दिष्ट कालावधि के पूर्व, —षि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, —षि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग, महानदी भवन, मंत्रालय, नवा रायपुर अटल नगर, जिला रायपुर के कार्यालय में कार्यालयीन समय में प्राप्त हों, पर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विचार किया जायेगा।
प्रारूप संशोधन
उक्त नियमों में,-
1. नियम 1 के उप-नियम (1) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-नियम प्रतिस्थापित किया जाए, अर्थात् :-
''(1) ये नियम ''छत्तीसगढ़ कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति, 2019-24 के अंतर्गत मंडी शुल्क से छूट नियम, 2019'' कहलायेगें।'' (ढ) ''विद्यमान उद्योग के विस्तार'' से अभिप्रेत है ऐसे उद्योग, जिन्होंने नियत दिनांक को अथवा उसके पश्चात् विद्यमान उद्योग में वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक तक प्लांट एवं मशीनरी में मान्य निवेशित राशि के न्यूनतम 25 प्रतिशत राशि का अतिरिक्त निवेश किया हो, जिससे उद्योग विभाग में पंजीकृत क्षमता या औसत उत्पादन (जो अधिक हो) में न्यूनतम 25 प्रतिशत की वृद्धि होती हो एवं कुल रोजगार में 10 प्रतिशत की वृद्धि होती हो, इसके अतिरिक्त विस्तारित क्षमता के उत्पादन प्रारंभ करने का दिनांक 01 नवम्बर, 2019 को अथवा उसके पश्चात् से 31 अक्टूबर, 2024 के मध्य हो। ''विस्तारीकरण'' की प्रक्रिया प्रारंभ करने के पूर्व विद्यमान इकाई को सक्षम सक्षम अधिकारी (जिसने इकाई को उत्पादन प्रमाण पत्र जारी किया हो) इस बाबत् सूचना देकर विस्तार हेतु प्रस्तावित निवेश की निर्धारित मात्रा के लिए पूर्वानुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
3. नियम 2 के खण्ड (ध) के पश्चात्, निम्नलिखित खण्ड (न) अतःस्थापित किया जाये,
''(न) अन्य परिभाषाएं औद्योगिक नीति 2019-24 के अनुसार मान्य होगी।''/
4. नियम 3 के खण्ड (1) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाये अर्थात्ः-
''(1) औद्योगिक नीति 2019-24 के अंतर्गत कालावधि 01 नवम्बर, 2019 से 31 अक्टूबर, 2024 तक वाणिज्यिक उत्पादन प्रारम्भ करने वाले कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की श्रेणी में आने वाले (औद्योगिक नीति 2019-24 के परिशिष्ट-4 में वर्णित अपात्र उद्योगों को छोड़कर) समस्त नवीन उद्योगों की स्थापना एवं विद्यमान उद्योगों के विस्तार/प्रतिस्थापन/शवलीकरण अंतर्गत स्थापित औद्योगिक इकाईयों को मण्डी शुल्क से छूट प्राप्त होगी।''
5. नियम 4 के स्थान पर, निम्नलिखित नियम प्रतिस्थापित किया जाये, अर्थात् :-
''4. मण्डी शुल्क से छूट की मात्रा -
4.1 सामान्य वर्ग के उद्यमियों द्वारा राज्य में स्थापित होने वाले नवीन/विद्यमान उद्योगों के विस्तार/प्रतिस्थापन/शवलीकरण अंतर्गत सूक्ष्म, लघु, मध्यम एवं वृहद श्रेणी के कृषि एवं खाद्य उत्पादों के प्रसंस्करण उद्योगों को राज्य की मंडियों/सीधे उत्पादनकर्ता कृषक/इकाई/राज्य के बाहर से कच्चामाल क्रय करने पर मण्डी शुल्क से छूट प्रमाण पत्र जारी होने के दिनांक से 5 वर्ष तक के लिये कृषि उत्पादों (औद्योगिक नीति 2019-24 के परिशिष्ट-4 में वर्णित अपात्र उद्योगों को छोड़कर) पर लगने वाले मंडी शुल्क से पूर्ण छूट, अधिकतम राशि रू. 2.00 करोड़ प्रतिवर्ष की सीमा तक प्रदान की जायेगी, साथ ही छूट की कुल अधिकतम सीमा इकाई द्वारा किये गये स्थायी पूंजी निवेश के 75% से अधिक नहीं होगी।
4.2 अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के उद्यमियों द्वारा राज्य में स्थापित होने वाले नवीन/विद्यमान उद्योगों के विस्तार/प्रतिस्थापन/शवलीकरण के अंतर्गत सूक्ष्म, लघु, मध्यम एवं वृहद श्रेणी के कृषि एवं खाद्य उत्पादों के प्रसंस्करण उद्योगों को राज्य की मंडियों/सीधे उत्पादनकर्ता कृषक/इकाई/राज्य के बाहर से कच्चामाल क्रय करने पर मण्डी शुल्क से छूट प्रमाण पत्र जारी होने के दिनांक से 7 वर्ष तक के लिये कृषि उत्पादों (औद्योगिक नीति 2019-24 के परिशिष्ट-4 में वर्णित अपात्र उद्योगों को छोड़कर) पर लगने वाले मंडी शुल्क से पूर्ण छूट, अधिकतम राशि रू. 3.00 करोड़ प्रतिवर्ष की सीमा तक प्रदान की जायेगी, साथ ही छूट की कुल अधिकतम सीमा इकाई द्वारा किये गये स्थायी पूंजी निवेश के 100% से अधिक नहीं होगी।''