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Chattisgarh Gazette - Extraordinary · Government of Chattisgarh

रजिस्ट्रीकरण (छत्तीसगढ़ संशोधन) विधेयक, 2025 (क्रमांक 9 सन् 2025) संबंधी

Published 19 March 2025

Department
छ.ग. विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
233
Notification no.
क्रमांक-4715/वि.स./विधान/2025
Identifier
in.gazette.chhattisgarh.eo.2025-03-19.233
Languages
English, Hindi

00000000000

छत्तीसगढ़शासन

पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़ /दुर्ग/ 09 / 2013-2015 . " "बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान (बिना डाक टिकट) के प्रेषण हेतु अनुमत . क्रमांक जी.2-22- छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई. दिनांक 30-05-2001 ."

सत्यमेव जयते

छत्तीसगढ़ राजपत्र

(असाधारण)

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक 233 ]

नवा रायपुर, बुधवार, दिनांक19 मार्च 2025- फाल्गुन 28 , शक 1946

छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय

रायपुर, बुधवार, दिनांक19 मार्च, 2025 (फाल्गुन 28, 1946)

क्रमांक-4715 /वि.स. / विधान / 2025.- छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में रजिस्ट्रीकरण ( छत्तीसगढ़ संशोधन) विधेयक , 2025 (क्रमांक 9 सन् 2025) जो बुधवार , दिनांक 19 मार्च, 2025 को पुरःस्थापित हुआ है, को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।

हस्ता./- (दिनेश शर्मा) सचिव.

465 466

छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 19 मार्च 2025

छत्तीसगढ़ विधेयक

(क्रमांक 9 सन् 2025)

रजिस्ट्रीकरण (छत्तीसगढ़ संशोधन) विधेयक , 2025

छत्तीसगढ़ राज्य में लागू हुए रूप में रजिस्ट्रीकरण अधिनियम , 1908 (1908 का सं. 16 ) को अग्रतर संशोधित करने हेतु विधेयक ।

भारत गणराज्य के छिहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

1. (1 ) यह अधिनियम रजिस्ट्रीकरण ( छत्तीसगढ़ संशोधन) अधिनियम, 2025 कहलाएगा ।

संक्षिप्त नाम , विस्तार तथा प्रारंभ

(2) इसका विस्तार संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में होगा ।

(3 ) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत होगा । 2. छत्तीसगढ़ राज्य को लागू हुए रूप में , रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का सं. 16 ) ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है ) को , इसमें इसके पश्चात् उपबंधित रीति में संशोधित किया जाए ।

छत्तीसगढ़ राज्य को लागू हुए रूप में, रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (केन्द्रीय अधिनियम 1908 का सं. 16) का संशोधन

धारा 2 का संशोधन.

3. मूल अधिनियम की धारा 2 के खण्ड (4 ) के पश्चात्, निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किया जाए , अर्थात्ः-

" (4- क ) " इलेक्ट्रॉनिक फार्म" का वही अर्थ होगा जैसा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का सं. 21 ) की धारा 2 की उप - धारा ( 1 ) के खण्ड ( द ) में उसके लिए समनुदेशित किया गया है ;'

(4

-ख ) " इलेक्ट्रॉनिक चिन्हक" का वही अर्थ होगा जैसा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम , 2000 (2000 का सं. 21 ) की धारा 2 की उप - धारा (1 ) के खण्ड (न क) में उसके लिए समनुदेशित किया गया है. "

4. मूल अधिनियम की धारा 17 में, -

धारा 17 का संशोधन.

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2025

466 (1 ) (एक) उप - धारा ( 1 ) के खण्ड (ङ) में, कॉलन चिन्ह " : " के स्थान पर , अर्द्ध विराम चिन्ह " ;" प्रतिस्थापित किया जाए और तत्पश्चात् निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किया जाए , अर्थात्: -

" (च) स्थावर संपत्ति के विक्रय से संबंधित अनुबंध;

(छ) स्थावर संपत्ति के किसी भी रूप में विक्रय से संबंधित मुख्तारनामा;

(ज) कोई अन्य लिखत, जिसका तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा रजिस्ट्रीकृत किया जाना अपेक्षित हो;

(झ ) भूमि स्वामी एवं डेवलपर के मध्य विकास अनुबंध पत्र;

(ञ) हक विलेख के द्वारा बंधक । "

(दो ) उप - धारा (2 ) के खण्ड ( बारह) के पश्चात्, स्पष्टीकरण का लोप किया जाए ।

(तीन ) उप - धारा ( 3 ) में , शब्द " पुत्र " के स्थान पर , शब्द "संतान " प्रतिस्थापित किया जाए ।

5. मूल अधिनियम की धारा 21 में, -

धारा 21 का संशोधन.

(एक) उप - धारा ( 1 ) के स्थान पर , निम्नलिखित उप- धारा प्रतिस्थापित की जाए , अर्थात् : -

" ( 1 ) स्थावर सम्पत्ति से सम्बन्धित कोई भी निर्वसीयती दस्तावेज , रजिस्ट्रीकरण के लिए तब तक प्रतिग्रहीत नहीं किया जाएगा , जब तक कि उसमें ऐसी सम्पत्ति का वर्णन , उसकी अवस्थिति दर्शाने वाले मानचित्र तथा फोटोचित्रों के साथ सम्पत्ति के पहचान के लिए पर्याप्त विवरण अन्तर्विष्ट न हो । "

(दो) उप-धारा (4 ) के पश्चात्, निम्नलिखित उप - धारा जोड़ी की जाए , अर्थात्: -

" (5 ) स्थावर सम्पत्ति से सम्बन्धित कोई भी निर्वसीयती दस्तावेज , रजिस्ट्रीकरण के लिए तब तक प्रतिग्रहीत नहीं किया जाएगा, जब तक कि उसमें समाविष्ट संपत्ति की अवस्थिति दर्शाने वाले अक्षांश और देशांतर अन्तर्विष्ट न हों । " छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2025

466 (2)

धारा 24 का संशोधन.

6. मूल अधिनियम की धारा 24 में, शब्द "हर एक निष्पादन" के स्थान पर, शब्द " अंतिम निष्पादन " प्रतिस्थापित किया जाए ।

7. मूल अधिनियम की धारा 25 में ,

धारा 25 का संशोधन.

(एक) उप - धारा ( 1 ) के स्थान पर, निम्नलिखित उप -धारा प्रतिस्थापित की जाए , अर्थात्: -

" (1 ) यदि, तत्काल आवश्यकता या अपरिहार्य दुर्घटना के कारण , भारत में निष्पादित कोई दस्तावेज या की गई डिक्री या आदेश की प्रति , इस निमित्त विहित समयसीमा बीत जाने के पश्चात् तक रजिस्ट्रीकरण करने के लिए प्रस्तुत नहीं की जा सके तो, रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी , उन दशाओं में , जिनमें प्रस्तुति में विलम्ब चार मास से अधिक न हो , ऐसे जुर्माने के संदायं पर, जो कि उचित रजिस्ट्रीकरण फीस की रकम के दस गुने से अधिक न हो, ऐसे दस्तावेजों का रजिस्ट्रीकरण कर सकेगा । " (दो ) उप-धारा (2 ) का लोप किया जाए ।

धारा 32- क का संशोधन.

8. धारा 32 क में , कॉलन चिन्ह " : " के स्थान पर , अर्द्ध विराम चिन्ह "; " प्रतिस्थापित किया जाए और परन्तुक के पूर्व , निम्नलिखित वाक्यांश अंतःस्थापित किया जाए , अर्थात्: -

" दस्तावेज पर पक्षकारों के फोटो, अंगुली छाप अथवा हस्ताक्षर लिये जाने के संबंध में , ऐसी विहित प्रक्रिया के अनुसार कार्यवाही संपादित की जायेगी , जैसा कि राज्य शासन द्वारा समय - समय पर अधिसूचना के माध्यम से राजपत्र में प्रकाशित किया जाए : "

9. मूल अधिनियम की धारा 34 में, -

धारा 34 का संशोधन.

(एक) उप-धारा (1 ) में , अंक और शब्द " और 89 " के स्थान पर, अंक और शब्द ", 89 और 89- क " प्रतिस्थापित किया जाए ।

(दो) उप -धारा (1 ) के परन्तुक के स्थान पर , निम्नलिखित परन्तुक प्रतिस्थापित किया जाए , अर्थात् :-

"परन्तु, जब राज्य सरकार द्वारा यथा अधिसूचित कोई दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक फार्म में उपस्थापित किया जाता है , तो व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति की अपेक्षा नहीं की जाएगी । " छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2025

466 (3 ) (तीन) उप- धारा (2 ) के स्थान पर, निम्नलिखित उप -धारा प्रतिस्थापित की जाए , अर्थात् : -

" (2) उप -धारा ( 1 ) के अधीन उपसंजाति एक ही समय पर होंगी । "

(चार) उप - धारा (3 ) में , खण्ड (क ) के पश्चात्, निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किया जाए , अर्थात्: -

" (क-क) यह जांच करेगा कि क्या ऐसे दस्तावेज भारतीय स्टाम्प अधिनियम , 1899 ( 1899 का सं. 2) के उपबन्धों के अनुसार सम्यक् रूप से स्टाम्पित किए गए हैं या नहीं;"

(पांच) उप -धारा (3 ) के खण्ड (ग) में, पूर्ण विराम चिन्ह " । " के स्थान पर , कॉलन चिन्ह ":" प्रतिस्थापित किया जाए , और तत्पश्चात् निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्: -

" परन्तु, जब ऐसा दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक फार्म में प्रस्तुत किया जाए , तो जांच ऐसी रीति में की जाएगी, जैसा कि विहित किया जाए । "

उप - धारा (4 ) का लोप किया जाए ।

(छः)

धारा 35 का संशोधन.

10. धारा 35 की उपधारा (2 ) में, पूर्ण विराम चिन्ह " ।" के स्थान पर, कॉलन चिन्ह ":" प्रतिस्थापित किया जाए , और तत्पश्चात् निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाए , अर्थात्ः-

"परन्तु, जब दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक फार्म में प्रस्तुत किया जाता है , तो इस निमित्त विहित किए गये नियमों द्वारा अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण किया जाएगा । "

धारा 57 का संशोधन.

11. मूल अधिनियम की धारा 57 की उप - धारा ( 5 ) में, पूर्ण विराम चिन्ह " । " के स्थान पर, कॉलन चिन्ह ": " प्रतिस्थापित किया जाए और तत्पश्चात् निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा जाए , अर्थात् : - छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2025

466 (4)

" परन्तु, जब कोई रजिस्ट्रीकृत दस्तावेज , इलेक्ट्रॉनिक फार्म में हस्ताक्षरित है और सम्बन्धित नियमों के अधीन सरकार द्वारा प्राधिकृत डाटाबेस में स्टोर किया गया है , तो भारतीय साक्ष्य अधिनियम , 2023 (2023 का सं. 47) की धारा 66 के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए , उक्त प्राधिकृत डाटाबेस से उसकी प्रतियां डाउनलोड / जारी की जा सकेंगी । "

धारा 63- क का अंतःस्थापन.

12. मूल अधिनियम की धारा 63 के पश्चात्, निम्नलिखित धारा जोड़ी जाए , अर्थात् :-

"63- क. उपस्थापन आदि, इलेक्ट्रॉनिक फार्म में किए जा सकेंगे .

(1 ) अधिनियम के अधीन अपेक्षित पंजीयन की समस्त कार्यवाही इलेक्ट्रॉनिक रूप से संपादित की जा सकेंगी ।

(2) समस्त पुस्तकें और अनुक्रमणिकाएं , जो सार्वजनिक निरीक्षण के लिए खुली हों , सरकार द्वारा इस प्रयोजन के लिए यथा अधिसूचित शासकीय वेबसाइट या इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रीकरण प्रणाली के माध्यम से निरीक्षण के लिए उपलब्ध करवाई जा सकेंगी । "

धारा 69 का संशोधन.

13. मूल अधिनियम की धारा 69 की उप - धारा (1 ) के खण्ड (ट) पश्चात्, निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किया जाए , अर्थात्: -

" (ठ) जब दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक फार्म में प्रस्तुत किया जाता है , तब दस्तावेज के प्रस्तुत करने से लेकर पंजीयन कार्य पूर्ण होने तक की प्रक्रिया तथा फीस के भुगतान करने के तरीके को विनियमित करना । "

धारा 82- क का संशोधन.

14. मूल अधिनियम की धारा 82 - क की उप - धारा ( 2 ) में , शब्द " दो सौ रूपए " के स्थान पर, शब्द " दस हजार रूपए " प्रतिस्थापित किया जाए ।

धारा 82- ख का अंतःस्थापन.

15. मूल अधिनियम की धारा 82 - क के पश्चात्, निम्नलिखित धारा जोड़ी जाए , अर्थात्ः-

"82-ख. पंजीयन अधिकारी के समक्ष अनाधिकृत व्यक्ति के प्रवेश को विनियमित करने के संबंध में नियम बनाने की शक्ति, -

(क) पंजीयन अधिकारी के समक्ष अनाधिकृत व्यक्ति के प्रवेश को विनियमित करने के संबंध में नियम बनाने की शक्ति राज्य सरकार को होगी;

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छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2025

(ख) इस धारा के अधीन बनाये गये प्रत्येक नियम , इसके बनाये जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र विधानसभा के पटल पर रखे जायेंगे । "

16. मूल अधिनियम की धारा 83 के पश्चात्, निम्नलिखित धारा जोड़ी जाए , अर्थात्: -

धारा 83- क, 83-ख एवं 83- ग का अंतःस्थापन.

"83- क. कतिपय मामलों में पंजीकृत दस्तावेजों का रद्दकरण . यदि पंजीयन विभाग में , उप महानिरीक्षक पंजीयन की श्रेणी से (1 ) अन्यून अधिकारी द्वारा जांच करने पर यह पाया जाता है कि,

(एक) किसी विलेख के पंजीयन में , किसी व्यक्ति ने दूसरे व्यक्ति को गलत तरीके से पेश किया है , उस छद्म व्यक्ति के द्वारा निष्पादन को स्वीकार किया गया है और पंजीकरण अधिकारी द्वारा किसी दस्तावेज़ को पंजीकृत किया गया है और ऐसे दस्तावेज़ का अस्तित्व किसी अन्य व्यक्ति के हित के लिए हानिकारक है ;

(दो) किन्ही अधिनियमों के अन्तर्गत सक्षम प्राधिकारी की अपेक्षित अनुमति के बिना किसी दस्तावेज का पंजीयन हुआ है ;

(तीन) किसी खसरे से संबंधित संपत्ति के दस्तावेज को जिसे राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना के माध्यम से प्रतिबंधित किया गया हो , पंजीकरण अधिकारी द्वारा पंजीकृत किया गया है ,

तो ऐसे पंजीकृत विलेखों को , विहित प्रारूप में समुचित व्यक्ति द्वारा आवेदन किये जाने अथवा लोक प्राधिकारी से सूचना प्राप्त होने पर अथवा स्वप्रेरणा पर, महानिरीक्षक पंजीयन अथवा राज्य शासन द्वारा अधिसूचना के माध्यम से सशक्त किये गये प्राधिकारी द्वारा रद्द किया जा सकेगा ।

(2) ( एक) यदि जिला कलेक्टर द्वारा स्वप्रेरणा से या उनके द्वारा प्राप्त शिकायत के आधार पर की गई जांच में यह पाया जाता है कि किसी सरकारी भूमि या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के स्वामित्व वाली भूमि को निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना पंजीकृत कराये छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2025

466 (6)

गयें किसी दस्तावेज के आधार पर हस्तांतरित किया गया है, तो जिला कलेक्टर ऐसे दस्तावेज़ के पंजीकरण को रद्द करने के लिए महानिरीक्षक पंजीयन अथवा राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना के माध्यम से सशक्त किये गये प्राधिकारी को सिफारिश कर सकता है । (दो) जिला कलेक्टर से ऐसी सिफारिश प्राप्त होने पर, महानिरीक्षक पंजीयन अथवा राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना के माध्यम से सशक्त किये गये प्राधिकारी को ऐसी प्रक्रिया , जो निर्धारित की जाए का पालन करने के पश्चात् ऐसे दस्तावेजों के पंजीकरण को रद्द करने का अधिकार होगा ।

83-ख.

अपील. महानिरीक्षक पंजीयन के आदेश के विरूद्ध शासन को धारा 83 - क के अधीन महानिरीक्षक पंजीयन अथवा राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना के माध्यम से सशक्त किये गये प्राधिकारी के आदेश से व्यथित कोई भी व्यक्ति , ऐसे आदेश की प्राप्ति की तारीख से तीस दिनों के भीतर पंजीयन विभाग के सचिव के समक्ष अपील कर सकता है , और वह जैसा उचित समझे, ऐसे आदेश की पुष्टि, संशोधन या उसे रद्द करने का आदेश पारित कर सकेगा । 83 - ग . पंजीकृत दस्तावेजों का रद्दकरण एवं अपील के प्रावधानों का विनियमन. राज्य सरकार , राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उप - धारा 83 - क एवं 83 - ख के क्रियान्वयन की प्रक्रिया के संबंध में नियम बना सकेगी । "

धारा 89- क एवं 17. मूल अधिनियम की धारा 89 के पश्चात्, निम्नलिखित धारा जोड़ी जाए , अर्थात् : -

89-ख का अंतःस्थापन.

"89- क. राजस्व वसूली अधिनियम , 1890 ( 1890 का सं. 1 ) के अधीन सक्षम प्राधिकारी द्वारा न्यायालयीन डिक्री की प्रतियां , विक्रय प्रमाण - पत्र, कुर्की आदेश, लिखित मांग रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को भेजना और रजिस्टर में फाइल करना.

(1 ) प्रत्येक न्यायालय जो ,

(क) किसी व्यक्ति के पक्ष में स्थावर संपत्ति में कोई अधिकार , हक या हित सृजित , घोषित , अंतरित , सीमित या निर्वापित 466

छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2025

करने संबंधी कोई डिक्री या आदेश , या

(ख ) स्थावर संपत्ति की अंतरिम कुर्की या कुर्की के लिए या ऐसी कुर्की से किसी स्थावर संपत्ति की निर्मुक्ति के लिए कोई आदेश , पारित करता है ,

वह, इस निमित्त बनाए गए नियमों के अनुसार ऐसी डिक्री या आदेश की एक प्रति , संपत्ति को वर्णित करने वाले एक ज्ञापन के साथ, यथाशक्य , धारा 21 द्वारा अपेक्षित रीति में उस रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को भेजेगा, जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर ऐसी डिक्री या आदेश में समाविष्ट पूरी स्थावर संपत्ति या उसका कोई भाग अवस्थित है, और ऐसा अधिकारी ज्ञापन की प्रति उसकी पुस्तक क्रमांक 1 में फाईल करेगा : -

परन्तु, जहाँ कोई स्थावर संपत्ति एक से अधिक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के क्षेत्राधिकार की स्थानीय सीमाओं के भीतर अवस्थित है, वहाँ ऐसे अधिकारियों में से प्रत्येक पदाधिकारी के क्षेत्राधिकार के भीतर की संपत्ति के संबंध में, इस उप - धारा में उपदर्शित प्रक्रिया का अनुसरण किया जाएगा ।

(2) राजस्व वसूली अधिनियम , 1890 (1890 का सं. 1 ) को सम्मिलित करते हुए , तत्समय प्रवृत्त राजस्व वसूली से संबंधित किसी विधि के उपबंधों के अधीन व्यतिक्रमी की किसी स्थावर संपत्ति की कुर्की के पूर्व, विक्रय प्रमाण- पत्र या लिखित मांग जारी करने वाला प्रत्येक अधिकारी ,

(क) धारा 21 के उपबंधों के अनुसार, यथाशक्य , संपत्ति के वर्णन करते हुए , ज्ञापन के साथ , ऐसे विक्रय प्रमाण - पत्र या लिखित मांग की एक प्रति प्रस्तुत करेगा ;

(ख ) जहाँ ऐसी लिखित मांग वापस ले ली जाती है या संपत्ति की कुर्की वापस ले ली जाती है या संपत्ति विक्रय कर दी जाती है और विक्रय की पुष्टि हो जाती है, धारा 21 के उपबंधों के अनुसार, यथाशक्य , उस तथ्य को दर्शाते हुए तथा उस संपत्ति को वर्णित करते हुए , उस रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को , जिसके क्षेत्राधिकार की स्थानीय सीमाओं के भीतर वह पूरी स्थावर संपत्ति छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2025

466(8)

या उसका कोई भाग अवस्थिति है , जिसके संबंध में लिखित मांग की गई है , एक ज्ञापन प्रस्तुत करेगा और ऐसा रजिस्ट्रीकरण अधिकारी ऐसी लिखित मांग और ज्ञापन की एक प्रति उसकी पुस्तक क्रमांक 1 में फाइल करेगा :

परन्तु , जहाँ स्थावर संपत्ति एक से अधिक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के क्षेत्राधिकार की स्थानीय सीमाओं के भीतर अवस्थित है, वहाँ ऐसे प्रत्येक अधिकारी के क्षेत्राधिकार के भीतर की संपत्ति के संबंध में उप - धारा (2) के खण्ड (क) और खण्ड (ख ) में विनिर्दिष्ट प्रक्रिया का अनुसार किया जाएगा ।

(1 ) राज्य 89- ख . धारा 89 - क में निर्दिष्ट सूचनाओं की सत्य प्रतियाँ एवं दस्तावेज फाइल करने के लिए नियम बनाने की शक्ति सरकार , राजपत्र में अधिसूचना द्वारा , धारा 89 - क में निर्दिष्ट दस्तावेजों या सूचनाओं को इस अधिनियम के अधीन समुचित पुस्तक में फाइल करने से संबंधति सभी प्रयोजनों के लिए नियम बना सकेगी ।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियमों में निम्नलिखित के लिए उपबंध होगा,-

(क ) ऐसी रीति, जिसमें सूचना या दस्तावेजों की सत्य प्रतियां तैयार की जाएंगी; और

(ख ) सूचनाओं या सत्य प्रतियों को फाईल करने की रीति ।

(3) इस धारा के अधीन बनाए गए सभी नियम इसके बनाए जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र विधानसभा के पटल पर रखे जाएंगे । " छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2025

466(9) उद्देश्यों और कारणों का कथन

रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 ( 1908 का सं. 16) एक केन्द्रीय अधिनियम है । अधिनियम में पारदर्शिता एवं प्रभावोत्पादकता बनाये रखने तथा बदलते समय के साथ अधिनियम के प्रावधानों को संशोधित करना आवश्यक हो गया है । प्रस्तावित संशोधन एवं उनके कारणों का विवरण निम्नानुसार हैः -

(1) पंजीयन में कम्प्यूटरीकृत प्रक्रिया होने के कारण, धारा 2 में शब्द "इलेक्ट्रॉनिक फार्म " और " इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर " को परिभाषित किया जाना है ।

(2) धारा-17 के अधीन दस्तावेज, जिनका अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रीकृत किया जाना अपेक्षित है, उपधारा (1 ) में नवीन खण्ड "च " , "छ " , "ज" , " झ" एवं "ञ " का अंतःस्थापन किया गया है । तथा उक्त नवीन खण्ड "च " के उल्लंघन से बचने के लिए उपधारा (2) के स्पष्टीकरण का लोप किया जाना है ।

(3 ) धारा 17 की उपधारा ( 3 ) मे, शब्द " पुत्र " के स्थान पर, शब्द " संतान " प्रतिस्थापित किया किया गया है ।

(4) संपत्ति के पहचान के लिए मानचित्र तथा फोटोचित्र का प्रस्तुत किया जाना आवश्यक होने से, धारा 21 की उपधारा (1 ) का संशोधन आवश्यक है ।

(5 ) संपत्ति की सही स्थिति अवसस्थिति ज्ञात करने के लिए धारा 21 में उप- धारा (5) जोड़ी जाकर. संपत्ति के अक्षांश एवं देशांतर दर्ज करने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है ।

(6 ) विभिन्न समयों पर कई व्यक्तियों द्वारा दस्तावेज निष्पादित किये जाने पर उपस्थापन हेतु चार माह समयावधि की गणना के लिए स्पष्ट प्रावधान जोडे जाने हेतु धारा 24 का संशोधन आवश्यक है ।

(7 ) इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रीकरण प्रणाली में शास्ति लेते हुए विलंबित उपस्थापित दस्तावेज को पंजीयन हेतु उप पंजीयक को अधिकृत किये जाने हेतु धारा 25 में संशोधन आवश्यक है । (8 ) पक्षकारों को अपना फोटो तथा अंगुली छाप लिये जाने के साथ ही हस्ताक्षर लिये जाने का प्रावधान करने हेतु धारा 32 - क में संशोधन आवश्यक है ।

(9) इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रीकरण के कारण , रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी के समक्ष सभी निष्पादकों की उपस्थिति एक ही समय होगी , के लिए धारा 34 की उपधारा (2 ) में संशोधन आवश्यक है । छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2025

466 ( 10)

(10 ) उप पंजीयक के समक्ष उपस्थित पक्षकारों की पहचान इलेक्ट्रॉनिक फार्म में दस्तावेजों को प्रस्तुत किये जाने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया हेतु धारा 35 की उपधारा (2 ) के परन्तुक में संशोधन किया गया है ।

( 11 ) इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रीकरण प्रणाली में डाउनलोड किये गए दस्तावेजों की प्रति को विधिक अस्तित्व प्रदान करने के लिए धारा 57 की उपधारा (5 ) में संशोधन किया गया है ।

(12 ) इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रीकरण प्रणाली के संदर्भ में उपस्थापन, पृष्ठांकन, प्रमाणन, इलेक्ट्रॉनिक फार्म मे संधारित करने हेतु धारा 63 - क का अंतःस्थापन आवश्यक है ।

(13 ) दस्तावेज प्रस्तुत करने तथा पंजीयन की समस्त कार्यवाही के संबंध में नियम बनाने का प्रावधान धारा 69 की उपधारा ( 1 ) के खण्ड (ठ) का अंतःस्थापन प्रस्तावित किया गया है । (14) धारा 82 - क में जुर्माने की राशि को बढ़ाया जाना प्रावधानित है ।

(15) पंजीयन कार्यालय में अनाधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश को विनियमित करने के संबंध में नियम बनाये जाने हेतु धारा 82 - ख का अंतःस्थापन किया गया है ।

(16 ) छद्म व्यक्ति के द्वारा निष्पादन या गलत व्यक्ति की उपस्थिति अथवा सक्षम प्राधिकारी के अनुमति के बिना अथवा प्रतिबंधित भूमि के पंजीबद्ध हो चुके दस्तावेजों के निरस्तीकरण का अधिकार महानिरीक्षक पंजीयन को दिये जाने संबंधी प्रावधान करने हेतु धारा 83 के उपरान्त नया खण्ड 83 - क जोड़ा गया है । इसी के अन्तर्गत 83 - ख में महानिरीक्षक के आदेश के विरूद्ध अपील का प्रावधान तथा धारा 83 - ग में उपरोक्त के क्रियान्वयन के संबंध में नियम बनाया जाना प्रस्तावित है ।

(17) धारा 89 - क के अंतःस्थापन सक्षम प्राधिकारी द्वारा न्यायालय डिक्री की प्रतियां, विक्रय प्रमाण पत्र , कुर्की आदेश आदि रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को भेजे जाने और रजिस्टर में फाईल किये जाने का प्रावधान किया गया है ।

( 18 ) पूर्वोक्त धारा 89 - क से संबंधित नियमों को बनाने हेतु धारा 89 - ख का अंतःस्थापन आवश्यक है ।

अतः यह विधेयक प्रस्तुत है ।

ओ. पी . चौधरी रायपुर,

दिनांक 05 मार्च , 2025

वाणिज्यिक कर मंत्री (भारसाधक सदस्य) "संविधान के अनुच्छेद 207 (1 ) के अधीन राज्यपाल द्वारा अनुशंसित " छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2025

466(11 )

उपाबंध

रजिस्ट्रीकरण अधिनियम , 1908 ( 1908 का सं. 16) की धारा-2 , धारा -17 , धारा -21 , धारा -24 , धारा -25 , धारा -32 , धारा -34 , धारा-35, धारा-57 , धारा -63 , धारा 69 , धारा -82 , धारा -83 एवं धारा -89 का सुसंगत उद्यरण : - धारा 2. परिभाषाएं :- इस अधिनियम में जब तक कि विषय या संदर्भ में कोई बात विरूद्ध न हो -

उपधारा (4 ) "जिला न्यायालय " के अन्तर्गत अपनी मामूली प्रारम्भिक सिविल अधिकारिता में काम करता हुआ उच्च न्यायालय आता है;

धारा 17 . दस्तावेज जिनका रजिस्ट्रीकरण अनिवार्य हैं: -

उपधारा (1 ) (ड. ) न्यायालय की किसी डिक्री या आदेश का , या किसी पंचाट का अन्तरण या समनुदेशन करने वाली निर्वसीयती लिखत जबकि ऐसी डिक्री या आदेश , या पंचाट से यह तात्पर्थित हो या उसका प्रवर्तन ऐसा हो कि वह स्थावर सम्पत्ति पर या स्थावर सम्पत्ति में एक सौ रुपए या उससे अधिक मूल्य का कोई अधिकार , हक या हित , चाहे वह निहित चाहे समाश्रित हो, चाहे वर्तमान में चाहे भविष्य में, सृष्ट, पोषित , समनुदेशित, परिसीमित या निर्वाचित करता हो

परन्तु राज्य सरकार किसी भी जिले या जिले के भाग में निष्पादित किन्हीं भी पट्टों को, जिनके द्वारा अनुदत्त पट्टा अवधियां पांच वर्ष से अनधिक हैं और जिनके द्वारा आरक्षित वार्षिक भाटक पचास रुपए से अनधिक हैं शासकीय राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा इस उपधारा के प्रवर्तन से छूट दे सकेगी ।

उपधारा (2 ) स्पष्टीकरण - जिस दस्तावेज से यह तात्पर्पित हो या जिसका प्रवर्तन ऐसा हो कि उससे स्थावर संपत्ति के विक्रया की संविदा हो जाती है उसके बारे में इसी तथ्य के कारण कि उसमें किसी अग्रिम धन या पूरे क्रयधन या उसके किसी भाग के संदाय का कथन अन्तर्विष्ट है यह न समझा जायेगा कि उसका रजिस्ट्रीकरण अपेक्षित है या कभी भी अपेक्षित था ।

उपधारा (3 ) पुत्र के दन्तकग्रहण के लिए जो प्राधिकार पहली जनवरी , 1872 के पश्चात् निष्पादित हुए हैं और वसीयत द्वारा प्रदत्त नहीं है, उनका भी रजिस्ट्रीकरण किया जाएगा ।

** धारा 21 . संपत्ति का वर्णन और मानचित्र या रेखांक

उपधारा (1 ) स्थावर सम्पत्ति से सम्बन्धित कोई भी निर्वसीयती दस्तावेज , जब तक कि उसमें ऐसी सम्पत्ति की पहचान के लिए पर्याप्त, ऐसी सम्पत्ति का वर्णन अन्तर्विष्ट न हो , रजिस्ट्रीकरण के लिए प्रतिग्रहीत न की जाएगी । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 19 मार्च 2025

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उपधारा (4 ) कोई भी निर्वसीयती दस्तावेज , जिसमें उस सम्पत्ति का जो उसमें समाविष्ट है, मानचित्र या रेखांक अन्तर्विष्ट है , रजिस्ट्रीकरण के लिए तब तक प्रतिगृहीत न की जाएगी जब तक कि उस दस्तावेज के साथ मानचित्र या रेखांक की सही प्रति न हो या उस दशा में जबकि ऐसी सम्पत्ति कई जिलो में स्थित है मानचित्र या रेखांक की उतनी सही प्रतियां न हों जितनी कि ऐसे जिलों की संख्या है ।

धारा 24 . जहां कि विभिन्न समयों पर कई व्यक्तियों द्वारा निष्पादित दस्तावेज दस्तावेज को विभिन्न समयों पर निष्पादित करने वाले कई व्यक्ति हैं वहां ऐसी दस्तावेज हर एक निष्पादन की तारीख से , चार मास के भीतर रजिस्ट्रीकरण और पुनः रजिस्ट्रीकरण के लिए उपस्थापित की जा सकेगी ।

धारा 25 . जिस दशा में उपस्थापित करने में विलम्ब अपरिवर्जनीय है उस दशा के लिए उपबन्ध

उपधारा ( 1 ) यदि अर्जेंट आवश्यकता या अपरिवर्जनीय दुर्घटना के कारण भारत में निष्पादित कोई दस्तावेज या की गई डिक्री या आदेश की प्रति इस निमित्त एतस्मिन्पूर्व विहित समय का अवसान हो जाने के पश्चात् तक रजिस्ट्रीकरण करने के लिए उपस्थापित नहीं की जा सके तो रजिस्ट्रार उन दशाओं में , जिनमें उपस्थान में विलम्ब चार मास से अधिक न हो, निर्देश दे सकेगा कि उस जुर्माने के संदाय पर, जो कि उचित रजिस्ट्रीकरण फीस की रकम के दस गुने से अधिक न हो ऐसी दस्तोवज रजिस्ट्रीकरण करने के लिए प्रतिगृहीत कर ली जाएगी ।

*** उपधारा (2 ) ऐसे निर्देश के लिए कोई भी आवेदन उप - रजिस्ट्रार के पास निविष्ट किया जा सकेगा जो उसे तत्क्षण उस रजिस्ट्रार को अग्रेषित करेगा जिसके वह अधीनस्थ है ।

धारा 32 - क. फोटो चित्र आदि का अनिवार्यतः लगाया जाना- धारा 32 के अधीन समुचित रजिस्ट्रीकरण कार्यालय में कोई दस्तावेज उपस्थपित करने वाला प्रत्येक व्यक्ति उस दस्तावेज पर अपना पासपोर्ट आकार का फोटो चित्र और अंगुली छाप लगाएगा;

परन्तु जहां ऐसा दस्तावेज स्थावर सम्पत्ति के स्वामित्व के अंतरण से सम्बन्धित है, वहां दस्तावेज में वर्णित ऐसी सम्पत्ति के प्रत्येक क्रेता एवं विक्रेता के पासपोर्ट आकार का फोटो चित्र और अंगुली छाप भी दस्तावेज पर लगाया जाएगा । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 19 मार्च 2025

466 (13 ) धारा 34 . रजिस्ट्रीकर्ता आफिसर द्वारा रजिस्ट्रीकरण के पूर्व जांच-

उपधारा ( 1 ) इस भाग में और धाराओं 41 , 43, 45, 69, 75 , 77, 88, और 89 में अन्तर्विष्ट उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए कोई भी दस्तावेज इस अधिनियम के अधीन तब तक रजिस्ट्रीकृत न की जाएगी , जब तक कि उसको निष्पादित करने वाले व्यक्ति या उनके प्रतिनिधि , समनुदेशिती या पूर्वोक्त जैसे रूप में प्राधिकृत अभिकर्ता धाराओं 23 , 24 , 25 और 26 के अधीन उसे उपस्थापित करने के लिए अनुज्ञात समय के अन्दर रजिस्ट्रीकृत आफिसर के समक्ष उपसंजात न हों:

परन्तु यदि सब ऐसे व्यक्ति अर्जेट आवश्यकता या अपरिवर्जनीय घटना के कारण ऐसे उपसंजात नहीं होते हैं तो रजिस्ट्रार उन दशाओं में , जिनमें कि उपसंजाति होने में विलम्ब चार मास से अधिक नहीं है यह निर्देश दे सकेगा कि समुचित रजिस्ट्रीकरण फीस की रकम के दस गुने से अनधिक जुर्माने के उस जुर्माने के अतिरिक्त, यदि कोई हो, जो धारा 25 के अधीन संदेह है , संदाय पर उस दस्तावेज का रजिस्ट्रीकरण किया जा सकेगा ।

उपधारा (2) उपधारा ( 1 ) के अधीन उपसंजाति एक ही समय पर या विभिन्न समयों पर हो सकेगी ।

उपधारा (3 ) रजिस्ट्रीकर्ता ऑफिसर तदुपरि (क) यह जांच करेगा कि ऐसी दस्तावेज उन व्यक्तियों द्वारा निष्पादित की गई थी या नहीं जिनके द्वारा उसका निष्पादित किया जाना तात्पर्यत है;

उपधारा (3 ) (ग ) जबकि कोई व्यक्ति, प्रतिनिधि के समनुदेशिती के या अभिकर्ता के रूप में उपसंजात हो रहा है, तब ऐसे व्यक्ति के ऐसे उपसंजात होने के अधिकार के बारे में अपना समाधान करेगा ।

उपधारा (4 ) उपधारा ( 1 ) के परन्तुक के अधीन निर्देश के लिए कोई भी आवेदन उपरजिस्ट्रार के पास निर्विष्ट किया जा सकेगा जो तत्क्षण उसे उस रजिस्ट्रार के पास भेजेगा जिसके वह अधीनस्थ है ।

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धारा 35 . निष्पादन की क्रमशः स्वीकृति एवं प्रत्याख्यान पर प्रक्रिया : -

उपधारा (2 ) रजिस्ट्रीकर्ता आफिसर , इस उद्देश्य से कि वह अपना समाधान कर ले कि उसके समक्ष उपसंजात होने वाले व्यक्ति वही व्यक्ति हैं जो व्यक्ति होने का वे अपनी बाबत व्यपदेश करते हैं या इस अधिनियम द्वारा अनुध्यात किसी भी अन्य प्रयोजन के लिए अपने कार्यालय में उपस्थित किसी भी व्यक्ति की परीक्षा कर सकेगा ।

*** छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2025

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धारा 67 रजिस्ट्रीकर्ता आफिसर कुछ पुस्तकों और अनुक्रमणिकाओं का निरीक्षण करने देंगे और प्रविष्टियों की प्रमाणित प्रतियां देंगे : - उपधारा (5) इस धारा के अधीन दी गई सब प्रतियां रजिस्टीकर्ता ऑफिसर द्वारा हस्ताक्षरित और मुद्रांकित की जाएगी और मूल दस्तावेजों की अन्तर्वस्तुओं को साबित करने के प्रयोजन के लिए ग्राह्य होंगी ।

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धारा 63 . शपथ दिलाने और कथनों के सार को अभिलिखित करने की शक्तिः- उपधारा ( 1 ) हर रजिस्ट्रीकर्ता आफिसर इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन अपने द्वारा परीक्षित किसी भी व्यक्ति को स्वविवेक में शपथ दिला सकेगा ।

उपधारा (2 ) हर ऐसा आफिसर हर ऐसे व्यक्ति द्वारा किए गए कथन के सार का टिप्पण स्वविवेक में अभिलिखित कर सकेगा । और ऐसा कथन उसे पढ़कर सुनाया जाएगा या (यदि वह ऐसी भाषा में लिखा गया हो जिससे ऐसा व्यक्ति परिचित नहीं है तो) उसका भाषान्तरण उससे ऐसी भाषा में किया जाएगा जिससे वह परिचित है और यदि वह ऐसे टिप्पण की शुद्धता को स्वीकृत करे तो वह रजिस्ट्रीकर्ता आफिसर द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा ।

उपधारा (3 ) ऐसे हस्ताक्षरित ऐसा हर टिप्पण यह साबित करने के प्रयोजन के लिए ग्राहय होगा कि उसमें अभिलिखित कथन उन व्यक्तियों द्वारा और उन परिस्थितियों में अभिलिखित किए गए थे जो उसमें कथित है ।

धारा 69 . रजिस्ट्रीकरण कार्यालयों का अधीक्षण करने और नियम बनाने की महानिरीक्षक की शक्ति: -

उपधारा ( 1 ) ( ट) उस रीति को जिसमें तथा निबन्धन जिनके अध्यधीन रहते हुए रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी को उपस्थापन के लिए दस्तावेजों को लिखने वाले व्यक्तियों को अनुज्ञप्तियाँ दी जा सकती है तथा ऐसी अनुज्ञप्तियों के लिए संदत्त की जाने वाली फीस विहित करने वाले,

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धारा 82 - क. अनुज्ञप्ति के बिना दस्तावेज लेखन के लिए शास्ति: -

उपधारा ( 1 ) ऐसी तारीख पर या से जैसी राज्य सरकार इस निमित्त नियम करें, सिवाय इत अधिनियम के अधीन बनाए गये नियमों के अनुसार स्वीकृत की गई अनुज्ञप्ति के अधीन कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के लिए किसी रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी को उपस्थापित करने के लिए कोई दस्तावेज नहीं लिखेगा ;

परन्तु इस धारा के अधीन कोई बात वहां लागू नहीं होगी जहां कि ऐसे दस्तावेज का लेखक किसी निष्पादी का प्राधिकृत अभिकर्ता हो या दस्तावेज लेखबद्ध करने के लिए निष्पादी द्वारा लगाया गया प्लीडर हो या ऐसे प्लीडर का छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2025

466(15 ) उपधारा (2 ) जो भी उपधारा (1 ) के उपबंधों का उल्लंघन करेगा, वह जुर्माने से जो कि दो सौ रूपये तक हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।

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धारा 83 . रजिस्ट्रीकर्ता आफिसर अभियोजन प्रारम्भं कर सकेगा : -

उपधारा ( 1 ) इस अधिनियम के अधीन के किसी ऐसे अपराध के लिए , जो रजिस्ट्रीकर्ता आफिसर के ज्ञान में उसकी अपनी पदीय हैसियत में आया है, अभियोजन उस महानिरीक्षक, रजिस्ट्रार या उपरजिस्ट्रार द्वारा या उसकी अनुज्ञा में प्रारम्भ किया जा सकेगा जिसके, यथास्थिति क्षेत्र, जिले या उप - जिले में अपराध किया गया है ।

उपधारा ( 2 ) इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय अपराध द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट की शक्तियों से अन्यून शक्तियां प्रयोग करने वाले ऐसे किसी भी न्यायालय या आफिसर द्वारा विचारणीय होंगे ।

*** धारा 89. कुछ आदेशों , प्रमाण - पत्रों ओर लिखतों की प्रतियों का रजिस्ट्रीकर्ता आफिसरों को भेजा जाना और फाइल किया जाना: -

उपधारा (1 ) भूमि अभिवृद्धि उधार अधिनियम 1883 के अधीन उधार अनुदत्त करने वाला हर आफिसर अपने आदेश की प्रति उस रजिस्ट्रीकर्ता आफिसर को भेजेगा जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के अन्दर अभिवृद्धि की जाने वाली पूरी भूमि या उसका कोई भाग या सांपाश्विक प्रतिभूति के रूप में अनुदत्त की जाने वाली भूमि स्थित है और ऐसा रजिस्ट्रीकर्ता आफिसर उस प्रति को अपनी पुस्तक संख्यांक 1 में फाइल करेगा ।

उपधारा (2 ) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अधीन स्थावर सम्पत्ति के विक्रय का प्रमाण पत्र अनुदत्त करने वाला हर न्यायालय ऐसे प्रमाणपत्र की प्रति उस रजिस्ट्रीकर्ता आफिसर को भेजेगा जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के अन्दर ऐसे प्रमाणपत्र में समाविष्ट पूरी स्थावर सम्पत्ति या उसका कोई भाग स्थित है और ऐसा आफिसर उस प्रति को अपनी पुस्तक संख्यांक 1 में फाइल करेगा ।

उपधारा (3 ) कृषक उधार अधिनियम , 1884 के अधीन उधार अनुदत्त करने वाला हर आफिसर किसी भी ऐसी लिखत की प्रति , जिसके द्वारा स्थावर सम्पत्ति उधार के प्रति संदाय को प्रतिभूति करने के लिए बन्धक की गई है और यदि ऐसी कोई सम्पत्ति उधार अनुदत्त करने वाले आदेश में उसी प्रयोजन के लिए बन्धक की गई है तो उस आदेश की प्रति भी उस रजिस्ट्रीकर्ता आफिसर को भेजेगा , जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के अन्दर वह पूरी सम्पत्ति , जिसका बन्धक किया गया है , या उसका कोई भाग स्थित है और ऐसा रजिस्ट्रीकर्ता आफिसर, यथास्थिति उस प्रति या उन प्रतियों को अपनी पस्तक संख्यांक 1 में फाइल छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2025

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उपधारा (4) लोक नीलाम द्वारा बेची गई स्थावर सम्पत्ति के क्रेता को विक्रय प्रमाणपत्र अनुदत्त करने वाला हर राजस्व आफिसर प्रमाणपत्र की प्रति उस रजिस्ट्रीकर्ता आफिसर को भेजेगा जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के अन्दर प्रमाणपत्र में समाविष्ट पूरी सम्पत्ति या उसका कोई भाग स्थित है और ऐसा आफिसर उस प्रति को अपनी पुस्तक संख्यांक 1 में फाइल करेगा ।

उपधारा (5 ) मध्यप्रदेश को - ओपरेटिव लैंड मार्टगेज बैंक्स एक्ट 1937 (मध्यप्रदेश सहकारी भूमि बन्धक बैंक अधिनियम 1937) (क्रमांक 1 सन् 1937) की धारा 20 के अधीन या मध्यप्रदेश कोआपरेटिव सोसाइटीज एक्ट, 1960 (मध्यप्रदेश सहकारी संस्था अधिनियम , 1960 ) क्रमांक ( 17 सन् 1961 ) की धारा 85 के खण्ड (सी ) या उसके अधीन बनाये गये नियमों के अधीन स्थावर सम्पत्ति के विक्रय का प्रमाण- पत्र अनुदत्त करने वाला प्रत्येक पदाधिकारी ऐसे प्रमाण - पत्र की प्रतिलिपि उस रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी को भेजेगा जिसके कि क्षेत्राधिकार की स्थानीय सीमाओं के भीतर ऐसे प्रमाण - पत्र में समाविष्ट सम्पूर्ण स्थावर सम्पत्ति या उसका कोई भाग स्थित हो और ऐसी रजिस्ट्री करने वाला पदाधिकारी उस प्रतिलिपि को अपनी पुस्तक क्रमांक 1 में फाईल कर लेगा।

उपधारा (6 ) मध्यप्रदेश चकबन्दी अधिनियम , 1928 की धारा 22 की उपधारा (1 ) के अधीन आदेश पारित करने वाला हर चकबन्दी आफिसर ऐसे आदेश की प्रति उस रजिस्ट्रीकर्ता आफिसर को भेजेगा जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के अन्दर ऐसे आदेश में निर्दिष्ट पूरी स्थावर सम्पत्ति या उसका कोई भाग स्थित है और ऐसा आफिसर उस प्रति को अपनी पुस्तक संख्यांक 1 में फाइल करेगा ।

दिनेश शर्मा , सचिव, छत्तीसगढ़ विधान सभा संचालक , मुद्रण तथा लेखन सामग्री , छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय , रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित - 2025.

Cite this issue. Chattisgarh Gazette - Extraordinary, Government of Chattisgarh, 19 March 2025. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.chhattisgarh.eo.2025-03-19.233/. Archive identifier in.gazette.chhattisgarh.eo.2025-03-19.233.