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छत्तीसगढ शासन
पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़ /दुर्ग/ 09 / 2013-2015 . " "बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान (बिना डाक टिकट) के प्रेषण हेतु अनुमत . क्रमांक जी.2-22- छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई. दिनांक 30-05-2001 ."
सत्यमेव जयते
छत्तीसगढ़ राजपत्र
(असाधारण)
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 237 ]
नवा रायपुर, गुरूवार , दिनांक 20 मार्च 2025- फाल्गुन 29 , शक 1946
छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय
रायपुर, गुरूवार, दिनांक 20 मार्च, 2025 (फाल्गुन 29, 1946)
क्रमांक-4811 /वि.स. / विधान / 2025.- छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ श्रम कानून संशोधन और विविध प्रावधान विधेयक, 2025 (क्रमांक 10 सन् 2025) जो गुरूवार, दिनांक 20 मार्च, 2025 को पुरःस्थापित हुआ है, को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।
हस्ता./- (दिनेश शर्मा) सचिव.
473 474
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 20 मार्च 2025
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्रमांक 10 सन् 2025)
छत्तीसगढ़ श्रम कानून संशोधन और विविध प्रावधान विधेयक , 2025
विषय-सूची
अध्याय-एक
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त शीर्षक , विस्तार और प्रारंभ ।
अध्याय-दो
कारखाना अधिनियम, 1948 का संशोधन
2. धारा 92 का संशोधन.
3. नवीन धारा 92 क एवं 92 ख का अंतःस्थापन.
4. धारा 106 का संशोधन.
5. नवीन अनुसूची का अंतःस्थापन.
अध्याय-तीन
औद्योगिक विवाद अधिनियम , 1947 का संशोधन
6. धारा 22 का संशोधन.
7. धारा 25 का संशोधन.
अध्याय-चार
ट्रेड यूनियन अधिनियम , 1926 का संशोधन
8. धारा 32 ब का अंतःस्थापन.
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 20 मार्च 2025
474 (1 )
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्रमांक 10 सन् 2025)
छत्तीसगढ़ श्रम कानून संशोधन और विविध प्रावधान विधेयक, 2025
(एक) कारखाना अधिनियम, 1948 ( 1948 का 63)
(दो) औद्योगिक विवाद अधिनियम , 1947 (1947 का 14)
(तीन) व्यवसाय संघ अधिनियम, 1926 (1926 का 16)
को छत्तीसगढ़ राज्य में उनके लागू हुए रूप में अग्रतर संशोधन हेतु तथा प्रकीर्ण उपबंध करने एवं उससे संबंधित अथवा उसके आनुषंगिक अन्य विषयों के लिये उपबंध करने हेतु विधेयक ।
भारत गणराज्य के छिहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो:-
अध्याय- एक
प्रारंभिक
संक्षिप्त नाम, विस्तार 1.
और प्रारंभ (1 ) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ श्रम विधियां संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 2025 कहलायेगा ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में होगा ।
(3 ) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा ।
अध्याय- दो
कारखाना अधिनियम , 1948 का संशोधन
धारा 92 का संशोधन 2.
कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का 63 ) (जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है) में , धारा 92 में , शब्द " उपबंधों में से" के पश्चात् तथा शब्द " या किसी " के पूर्व , शब्द तथा अंक " (धारा 6 या उसके अधीन बनाये गये किसी नियम को छोड़कर) " अन्तःस्थापित किया जाये ।
धारा 92 क तथा 92 3.
ख का अंतःस्थापन मूल अधिनियम की धारा 92 के पश्चात्, निम्नलिखित धारा जोड़ी जाये, अर्थात्:-
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 20 मार्च 2025
474 (2)
" 92क. अपराधों का प्रशमन ( 1) राज्य सरकार , राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, चौथी अनुसूची में विनिर्दिष्ट अपराधों के संबंध में प्रशमन शुल्क निर्धारित कर सकती है , जो धारा 92 के अधीन विनिर्दिष्ट जुर्माने से अधिक नहीं होगा, और मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक , अभियोजन संस्थित करने के पूर्व या पश्चात् में ऐसी राशि के लिए ऐसे अपराध का शमन कर सकता है :
परंतु यह कि, शमन किए जाने वाले अपराध में इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी भी नियम के किसी भी प्रावधान का कोई उल्लंघन शामिल नहीं है, जिसके परिणामस्वरूप दुर्घटना में मृत्यु या गंभीर शारीरिक चोट या खतरनाक घटना होती है ।
(2) जहाँ उप - धारा ( 1 ) के अधीन किसी अपराध का शमन किया गया है,
(एक)अभियोजन संस्थित किये जाने के पूर्व की स्थिति में, अपराधी ऐसे अपराध के संबंध में, अभियोजन के लिए उत्तरदायी नहीं होगा;
(दो) अभियोजन संस्थित किये जाने के पश्चात् की स्थिति में, मुख्य निरीक्षक या निरीक्षक द्वारा ऐसा प्रशमन लिखित रूप में उस न्यायालय के ध्यान में लाया जाएगा, जिसमें अभियोजन लंबित है और अपराध के प्रशमन की ऐसी सूचना दिए जाने पर , अपराधी को दोषमुक्त कर दिया जाएगा.
इस 92ख . धारा 6 के उल्लंघन के लिये जुर्माना. अधिनियम में अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबन्धित के सिवाय और धारा 93 के उपबन्धों के अध्यधीन , यदि किसी कारखाने में या उसके संबंध में, इस अधिनियम की धारा 6 या उसके छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 20 मार्च 2025
474 (3) अधीन बनाए गए किसी नियम के या उसके अधीन दिए गए किसी लिखित आदेश का उल्लंघन किया जाता है , तो कारखाने का अधिभोगी अपराध का दोषी होगा और जुर्माने से दण्डनीय होगा, जो दो लाख रुपये से कम नहीं होगा, परंतु जिसमें तीन लाख रुपये तक की वृद्धि की जा सकती है, और यदि उल्लंघन, दोष सिद्धी के बाद भी जारी रहता है , तो ऐसा उल्लंघन जारी रहने तक प्रत्येक दिन के लिए दो हजार रूपये तक के अतिरिक्त जुर्माने से दंडनीय होगा । "
4.
धारा 106 का संशोधन मूल अधिनियम की धारा 106 में, शब्द 'तीन मास ' के स्थान पर, शब्द ' छह मास ' प्रतिस्थापित किया जाये ।
5.
अनुसूची का अंतःस्थापन मूल अधिनियम से संलग्न तीसरी अनुसूची के पश्चात्, निम्नलिखित अनुसूची अंतःस्थापित की जाये, अर्थात्: -
"चौथी अनुसूची (धारा 92 क देखिये) शमनीय अपराधों की सूची
अपराध की प्रकृति
स. क्र.
इसके अधीन धाराएं और नियम बनाए गए हैं और इसके आदेश जारी किए गए हैं
(3)
(2)
(1)
1 .
प्रावधानों के अनुरूप साफ - सफाई नहीं रखना.
धारा 11 साफ-सफाई
2. धारा 18 पीने का पानी
प्रावधान के अनुरूप पेयजल की व्यवस्था नहीं करना एवं रखरखाव नहीं करना ।
3. धारा 19 शौचालय और मूत्रालय
प्रावधानों के अनुरूप शौचालय एवं मूत्रालय उपलब्ध नहीं कराना ।
4. धारा 20 थूकदान (क) प्रावधानों के अनुसार थूकदान उपलब्ध नहीं छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 20 मार्च 2025
474 (4)
कराना ।
(ख) धारा 20 की उप- धारा (3) का उल्लंघन करते हुए थूकना ।
5.
धारा 42 की सुविधाएँ धुलाई प्रावधान के अनुरूप धुलाई की सुविधा उपलब्ध नहीं कराना एवं रख - रखाव नहीं करना ।
6.
प्रावधान के अनुरूप सुविधाएं नहीं दे रहे हैं ।
धारा 43 कपड़ों के भंडारण और सुखाने की सुविधाएं
7.
प्रावधान के अनुरूप सुविधाएं नहीं दे रहे हैं ।
धारा 44 बैठने की सुविधा
8.
प्रावधानों के अनुरूप प्राथमिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध नहीं कराना एवं रखरखाव नहीं करना ।
धारा 45 की उप- धारा (1 ), (2) और (3) प्राथमिक चिकित्सा उपकरण
धारा 46 कैंटीन
9.
प्रावधान के अनुरूप कैंटीन उपलब्ध नहीं कराना एवं उसका रखरखाव नहीं करना ।
10. धारा 47 आश्रय , विश्राम कक्ष और दोपहर के भोजन के कक्ष
प्रावधानों के अनुसार आश्रय , विश्राम कक्ष और दोपहर के भोजन कक्ष उपलब्ध नहीं कराना और उनका रखरखाव नहीं करना ।
11. धारा 48
पालनाघर
प्रावधानों के अनुरूप पालना गृह उपलब्ध नहीं कराना एवं रखरखाव नहीं करना ।
12. धारा 53 उप-धारा (2) प्रतिपूरक छुट्टियाँ की नोटिस प्रदर्शित नहीं करना और क्षतिपूर्ति अवकाश के लिए रजिस्टर का रखरखाव नहीं करना ।
13.
निर्धारित रजिस्टरों का संधारण नहीं करना ।
धारा 59 की उप- ओवरटाइम के लिए धारा (5) अतिरिक्त वेतन
14. धारा 60 दोहरे किसी कर्मकार को किसी भी दिन दोहरे रोजगार की छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 20 मार्च 2025
474 (5) रोजगार पर प्रतिबंध
आवश्यकता या अनुमति देना ।
15.
प्रावधानों का अनुपालन नहीं कर रहे हैं ।
धारा 61 वयस्कों के लिए काम की अवधि की सूचना
16. धारा 62 वयस्क कर्मकारों का रजिस्टर
प्रावधानों के अनुरूप रजिस्टर का संधारण नहीं करना ।
17.
प्रावधानों का अनुपालन नहीं कर रहे हैं ।
धारा 63 धारा 61 के अधीन नोटिस के साथ पत्राचार करने के लिए काम के घंटे
18.
प्रावधानों का अनुपालन नहीं कर रहे हैं ।
वेतन धारा 79 सहित वार्षिक अवकाश
19.
प्रावधानों का अनुपालन नहीं कर रहे हैं ।
धारा 80 - छुट्टी की अवधि के दौरान मजदूरी
20.
प्रावधानों का अनुपालन नहीं कर रहे हैं ।
धारा 81 कुछ मामलों में अग्रिम भुगतान
21 . धारा 83 नियम बनाने की शक्ति
नियमानुसार रजिस्टरों का संधारण नहीं करना तथा प्रावधानों का अनुपालन नहीं करना ।
22.
छूट आदेश में निर्दिष्ट शर्तों का अनुपालन नहीं करना ।
धारा 84 कारखानों को छूट देने की शक्ति
23.
उप-धारा (1) और उप-धारा (3 ) के खंड (एक) एवं (छः ) में निहित प्रावधानों का अनुपालन नहीं करना ।
धारा 93 कुछ परिस्थितियों में परिसर के मालिक का दायित्व
24.
प्रावधानों का अनुपालन नहीं कर रहे हैं ।
धारा 97 - कर्मकारों द्वारा अपराध
25.
प्रावधानों का अनुपालन नहीं कर रहे हैं ।
धारा 108 सूचनाओं का प्रदर्शन
26. धारा 110 रिटर्न प्रावधानों का अनुपालन नहीं कर रहे हैं । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 20 मार्च 2025
474(6)
27 .
कर्मकारों के अधिकारों का हनन ।
धारा 111 ए कर्मकारों का अधिकार, इत्यादि ।
28
उपलब्ध किसी सुविधा के लिए कर्मकार से शुल्क की मांग करना। "
धारा 114 सुविधाओं के लिए कोई शुल्क नहीं और उपयुक्तता
अध्याय-तीन औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 का संशोधन
6.
धारा 22 का संशोधन औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 ( 1947 का सं. 14 ) (जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है ) में, धारा 22 की उप-धारा (1 ) तथा (2) में, शब्द "लोक उपयोगी सेवा" , जहाँ कहीं भी आया हो, के स्थान पर , शब्द " औद्योगिक प्रतिष्ठान " प्रतिस्थापित किया जाये ।
धारा 25- ट का संशोधन 7. मूल अधिनियम की धारा 25 - ट की उप- धारा ( 1 ) में, शब्द "एक सौ" के स्थान पर , शब्द " तीन सौ " प्रतिस्थापित किया जाये ।
अध्याय-चार व्यवसाय संघ अधिनियम , 1926 का संशोधन
धारा 32ख का अंतःस्थापन 8. व्यवसाय संघ अधिनियम, 1926 (1926 का 16) जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है) में, धारा 32 क के पश्चात्, निम्नलिखित धारा जोड़ी जाये, अर्थात्:-
"32ख . अपराधों का प्रशमन. - (1 ) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा , धारा 31 , 32 और 32 क में निर्दिष्ट अपराधों के संबंध में, ऐसे अधिकारी और प्रशमन शुल्क निर्धारित कर सकती है , जो क्रमशः धारा 31 , 32 और 32क के अधीन निर्दिष्ट जुर्माने से अधिक नहीं होगा तथा अभियोजन संस्थित होने से पूर्व या पश्चात्, ऐसी राशि के लिए, ऐसे अपराध का छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 20 मार्च 2025
474(7) शमन कर सकेगा:
(2) जहाँ उप - धारा (1 ) के अधीन किसी अपराध का शमन किया गया है,
(एक) अभियोजन संस्थित होने से पूर्व की स्थिति में, अपराधी ऐसे अपराध के संबंध में, अभियोजन के लिए उत्तरदायी नहीं होगा;
(दो) अभियोजन संस्थित होने के पश्चात् की स्थिति में , रजिस्ट्रार , ट्रेड यूनियन द्वारा ऐसा प्रशमन लिखित रूप में उस न्यायालय के ध्यान में लाया जाएगा, जिसमें अभियोजन लंबित है और अपराध के प्रशमन की ऐसी सूचना दिए जाने पर, अपराधी को दोषमुक्त कर दिया जाएगा । " छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 20 मार्च 2025
474(8)
उद्देश्यों और कारणों का कथन
यतः, श्रम विभागों का उद्देश्य राज्य में श्रमिकों के कार्य के वातावरण और उनके कल्याण , सामाजिक सुरक्षा एवं कार्य करने की शर्तों का भारतीय संविधान के अधीन यथा आज्ञापित राज्य के नीति - निर्देशक सिद्धांतों के अनुच्छेद 42 एवं 43 के अंतर्गत स्थापित आदर्शों को प्राप्त करने के लिये विनियमन करना है,
और यतः , ईज ऑफ डुईंग बिजनेस को दृष्टिगत रखते हुये , निम्नलिखित श्रम विधानों को संशोधित करने का विनिश्चय किया गया है, -
(एक) कारखाना अधिनियम, 1948 ( 1948 का 63 )
(दो) औद्योगिक विवाद अधिनियम , 1947 (1947 का 14)
(तीन) व्यवसाय संघ अधिनियम, 1926 ( 1926 का 16)
और यतः , ईज ऑफ डुईंग बिजनेस पॉलिसी को दृष्टिगत रखते हुये, उपरोक्त उल्लेखित अधिनियमों के निम्नलिखित उपबंधों को बनाना तथा उनका निगमन करना आवश्यक है, -
(क) सुरक्षित एवं स्वस्थ कार्यदशायें, कौशल विकास एवं नियोजन के औपचारीकरण को बढ़ावा मिले,
(ख ) कानून, नियम - प्रक्रिया को सरल और युक्तिसंगत बनाने, व्यापार करने में आसानी , ईज ऑफ डुईंग बिजनेस , अनुपालन भार में कमी और गैर - अपराधीकरण के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजन की सुविधा प्रदान करना,
(ग) कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा -92 प्रयोज्यत को बाहर रखना, जो कारखाना अधिनियम , 1948 की धारा -6 के अंतर्गत अपराधों के लिये सामान्य दण्ड से संबंधित है ,
( घ) राज्य सरकार को कारखाना अधिनियम, 1948 में अपराधों के शमन की अनुसूची और विहित जुर्माने से संबंधित उपबंधों की शक्ति प्रदान करना,
(ड. ) दण्ड के रूप में कारावास के स्थान पर, बढ़े हुये जुर्माने को लागू करके प्रावधानों को शिथिल करना,
अतः यह विधेयक प्रस्तुत है ।
रायपुर,
लखनलाल देवांगन श्रम मंत्री दिनांक 04 मार्च, 2025
(भारसाधक सदस्य) छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 20 मार्च 2025
474 (9 ) प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में ज्ञापन
छत्तीसगढ़ श्रम कानून संशोधन और विविध प्रावधान विधेयक 2025 में विधि निर्माण संबंधी राज्य सरकार को विधायनी शक्तियों का प्रत्यायोजन किया जा रहा है , वह सामान्य स्वरूप का है । जिन श्रम विधियों में नियम बनाने की शक्ति का प्रावधान है, का विवरण निम्नानुसार है -
(एक) कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का 63 )
(दो) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14)
(तीन) व्यवसाय संघ अधिनियम, 1926 (1926 का 16) छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 20 मार्च 2025
474 ( 10 )
उपाबंध
कारखाना अधिनियम , 1948 (1948 का कमांक 63 ) की धारा 92, धारा 106 ।
औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का कमांक 14) की धारा 22 की उपधारा (1 ) व (2) तथा धारा 25 - ट की उपधारा ( 1 ) ।
व्यवसाय संघ अधिनियम , 1926 (1926 का कमांक 16) की धारा 32- क का सुसंगत उद्धरण । कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का कमांक 63)
अपराधों के लिए सामान्य शास्ति :
मूल अधिनियम की धारा 92 इस अधिनियम में अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबंधित के सिवाय और धारा 93 के उपबंधों के अध्यधीन यह है कि यदि किसी कारखाने में या उसके संबंध में, इस अधिनियम के या तद्धीन बनाये गये किसी नियम के या तद्धीन दिए गये किसी लिखित आदेश के उपबंधों में से या किसी का उल्लंघन होगा तो कारखाने का अधिष्ठाता और प्रबंधक प्रत्येक अपराध का दोषी होगा और कारावास से , जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जोएक लाख रुपये तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से और यदि उल्लंघन दोषसिद्धि के पश्चात् जारी रहता है, तो अतिरिक्त जुर्माने से, जो प्रत्येक दिन के लिए , जिसमें उल्लंघन इन प्रकार जारी रहता है, एक हजार रुपये तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा:
परन्तु जहाँ अध्याय 4 के या उसके अधीन या धारा 87 के अधीन बनाये गये किसी नियम के किसी उपबंध के उल्लंघन से कोई ऐसी दुर्घटना हुई है, जिससे मृत्यु या गंभीर शारीरिक क्षति हुई है वहां जुर्माना ऐसी दुर्घटना की दशा में जिससे मृत्यु हुई हैं, पच्चीस हजार रुपये से और ऐसी दुर्घटना की दशा में जिससे गंभीर शारीरिक क्षति हुई है, पांच हजार रुपये से कम नहीं होगा ।
अभियोजनों के लिए परिसीमा –
मूल अधिनियम कीधारा 106 कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान तब के सिवाय नहीं करेगा जब कि उसके लिए परिवाद उस तारीख से तीन मास के अन्दर कर दिया जाता है जिसको कि अभिकथित अपराध के किए जाने की जानकारी निरीक्षक को हुई है :
परन्तु जहां अपराध किसी निरीक्षक द्वारा किए गए लिखित आदेश की अवज्ञा है वहां उसके लिए परिवाद उस तारीक्ष से छह मास के अन्दर किया जा सकेगा जिसको उस अपराध का किया जाना अभिकथित है । स्पष्टीकरण इस धारा के प्रयोजनों के लिए
(क) किसी चालू रहने वाले अपराध की दशा में परिसीमा काल की संगणना उसी समय से की जाएगी जिस समय से अपराध चालू रहता है;
(ख) जहां कोई कार्य किये जाने के लिए कारखाने के अधिष्ठाता या प्रबन्धक द्वारा किए गए आवेदन पर समय दिया जाता है या बढ़ाया जाता है वहां परिसीमा काल की संगणना उस तारीख से की जाएगी जिसको इस प्रकार दिया गया या बढ़ाया गया समय समाप्त होता है । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 20 मार्च 2025
474 (11) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14)
हड़तालों और तालाबन्दियों का प्रतिषेध
लोक उपयोगी सेवा में नियोजित कोई भी व्यक्ति
मूल अधिनियम की धारा 22 की उपधारा (1 ) (क) हड़ताल करने से पूर्व के छह सप्ताह के भीतर हड़ताल की सूचना नियोजक को इसमें इसके पश्चात् उपबंधित रूप में दिए गए बिना, अथवा
(ख ) ऐसी सूचना देने के 14 दिन के भीतर , अथवा
(ग) किसी यथापूर्वोक्त सुचना में विनिर्दिष्ट हड़ताल की तारीख के अवसान से पूर्व , अथवा
(घ) सुलह अधिकारी के समक्ष की किन्हीं सुलह कार्रवाहियों के लंबित रहने के और ऐसे कार्यवाहियों की समाप्ति के पश्चात् 7 दिन के दौरान ,
संविदा - भंगकारी हड़ताल न करेगा ।
किसी लोक उपयोगी सेवा को चलाने वाला कोई भी नियोजक
मूल अधिनियम की धारा 22 की उपधारा (2)
(क) तालाबंदी करने से पूर्व के छह सप्ताह के भीतर तालाबंदी की सूचना संबध कर्मकार को इसमें इसके पश्चात् उपबंधित रूप में दिए बिना, अथवा
(ख) ऐसी सूचना देने के चौदह दिन के भीतर अथवा
(ग) किसी यथापूर्वोक्त सूचना में विनिर्दिष्ट तालाबंदी की तारीख के अवसान से पूर्व, अथवा
(घ) सुलह अधिकारी के समक्ष की किन्हीं सुलह कार्यवाहियों के लंबित रहने के और ऐसे कार्यवाहियों की समाप्ति के पश्चात् 7 दिन के दौरान, अपने किन्हीं भी कर्मकार के प्रति तालाबंदी नहीं करेगा ।
अध्याय 5 (ख ) का लागू होना-
मूल अधिनियम की धारा 25- ट की उपधारा (1 )
इस अध्याय के उपबंध ऐसे औद्योगिक स्थापन को, (जो मौसमी प्रकार का नहीं है या ऐसा स्थापन नहीं है, जिसमें काम केवल आन्तरायिक रूप से होता है) लागू होंगे जिसमें पूर्ववर्ती बारह मास में प्रति कार्य- दिवस को औसतन कम से कम एक सौ कर्मकार नियोजित थे ।
व्यवसाय संघ अधिनियम, 1926 (1926 का 16)
मूल अधिनियम कीधारा 32-क
धारा 28 - झ के उल्लघंन के लिये शास्ति - कोई नियोजक जो धारा 28- झ के प्रावधानों का उल्लघंन करता है ऐसे जुर्माने से जो पांच सौ रूपये तक हो सकेगा, दंडनीय होगा ।
दिनेश शर्मा, सचिव, छत्तीसगढ़ विधान सभा संचालक , मुद्रण तथा लेखन सामग्री , छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय, रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित - 2025 .