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छत्तीसगढ़ शासन
पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़/दुर्ग/ 09 / 2013-2015. "
सत्यमेव जयते
"बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान (बिना डाक टिकट ) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22-छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई. दिनांक 30-05-2001 . "
छत्तीसगढ़ राजपत्र
(असाधारण)
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक243]
नवा रायपुर, शुक्रवार, दिनांक 21 मार्च 2025- फाल्गुन 30 , शक 1946
छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय
रायपुर, शुक्रवार, दिनांक 21 मार्च, 2025 (फाल्गुन 30, 1946)
क्रमांक-5087/वि.स./विधान/2025. छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल विधेयक, 2025 (क्रमांक 13 सन् 2025) जो शुक्रवार, दिनांक 21 मार्च, 2025 को पुरःस्थापित हुआ है, को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।
हस्ता./-
(दिनेश शर्मा) सचिव.
485 486
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 मार्च 2025
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्रमांक 13 सन् 2025)
छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल विधेयक, 2025
विषय -सूची
खण्ड
1. संक्षिप्त नाम , विस्तार और प्रारम्भ.
2. परिभाषाएं .
3. बल का गठन .
4. नामांकित सदस्यों की बल में प्रतिनियुक्ति
5 . बल के सदस्यों के प्रमाण-पत्र .
6. बल का अधीक्षण/ पर्यवेक्षण , नियंत्रण तथा प्रशासन .
7. बल के सदस्यों के कर्तव्य..
8 . बल का परिनियोजन.
9. वारन्ट के बिना गिरफ्तार करने की शक्ति.
10 . वारंट के बिना तलाशी लेने की शक्ति.
11. गिरफ्तारी के पश्चात् अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया.
12. औद्योगिक स्थापनों को सुरक्षा संबंधी तकनीकी परामर्शी सेवाएं देने का उपबंध .
13 . छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल के सदस्यों को पुलिस अधिकारियों के समान विशेषाधिकार तथा दायित्वों का होना .
14. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण.
15. अपराधों का संज्ञान .
16. बल के सदस्यों को सदैव कर्तव्य पर समझा जाना तथा राज्य में तथा राज्य के बाहर कहीं भी नियोजित किया जा सकना .
17 . दण्ड और अपीलें .
18. संगम इत्यादि बनाने के अधिकार के विषय में निर्बंधन .
19 . निलंबन के दौरान बल के सदस्यों के उत्तरदायित्व .
20 . बल का सदस्य न रह गए व्यक्तियों द्वारा प्रमाण पत्र, आयुध आदि का अभ्यर्पण .
21 . बल के सदस्यों को अधिनियम , 1922 का लागू होना.
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 मार्च 2025
486(1) 22. छत्तीसगढ़ विशेष सशस्त्र बल अधिनियम , 1968 , नियम / शर्तों का बल के सदस्यों को लागू होना .
23. कतिपय अधिनियमों का बल के सदस्यों पर लागू न होना .
24. नियम बनाने की शक्ति.
25. कठिनाईयों को दूर करने की शक्ति .
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 मार्च 2025
486(2)
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्रमांक 13 सन् 2025)
छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल विधेयक, 2025 औद्योगिक स्थापनाओं , औद्योगिक उपक्रमों , निजी औद्योगिक उपक्रमों या संस्थाओं , वाणिज्यिक और वित्तीय संस्थाओं, विद्युत् उत्पादन केन्द्रों , रिफायनरियों , धार्मिक महत्व के स्थानों , पुरातात्विक और विरासत स्थलों, हवाई अड्डों और हैलीपैडों , राष्ट्रीय या राज्य राजमार्गों, शासकीय भवनों, मेट्रो नेटवर्क , स्वशासी निकायों , शासकीय संस्थापनाओं , केन्द्रीय तथा राज्य की संस्थाओं को संरक्षण और सुरक्षा प्रदान करने के लिये तथा निजी क्षेत्र की औद्योगिक स्थापनाओं को सुरक्षा संबंधी तकनीकी परामर्शी सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिये राज्य के एक सशस्त्र बल का गठन करने तथा उसका विनियमन करने तथा उससे संसक्त तथा आनुषांगिक विषयों का उपबंध करने हेतु अधिनियम ।
भारत के गणराज्य के छिहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधायिका द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो:-
( 1)
संक्षिप्त नाम , 1.
विस्तार और
यह अधिनियम छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल अधिनियम , 2025 कहलायेगा ।
प्रारंभ .
इसका विस्तार संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य पर होगा ।
यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा ।
23 (2) (3)
परिभाषाएं . 2.
इस अधिनियम में , जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, - (क ) "स्वशासी निकाय " से अभिप्रेत है स्वतंत्र रूप से कार्य करने वाली अथवा उस प्रकार कार्य करने की स्वतंत्रता रखने वाली कोई संस्था;
(ख) "संज्ञेय अपराध " का वही अर्थ होगा, जो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 ( 2023 का सं .46) की धारा 2 के खण्ड ( छ) में इसके समनुदेशित है;
(ग) " पुलिस महानिदेशक " से अभिप्रेत है पुलिस महानिदेशक , छत्तीसगढ़ ;
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 मार्च 2025
486(3) (घ) " बल का भर्ती किया गया सदस्य " से अभिप्रेत है अवर अधिकारी से अनिम्न पद श्रेणी का , बल का कोई अन्य अधीनस्थ अधिकारी , अवर अधिकारी या कोई अन्य सदस्य;
(ङ) " बल " से अभिप्रेत है धारा 3 के अधीन गठित छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल;
(च) " शासन " से अभिप्रेत है छत्तीसगढ़ शासन;
(छ ) " औद्योगिक स्थापना " से अभिप्रेत है कंपनी अधिनियम , 2013 ( 2013 का 18 ) की धारा 3 के अधीन यथापरिभाषित कोई औद्योगिक उपक्रम या कोई कंपनी या भारतीय भागीदारी अधिनियम , 1932 ( 1932 का 9 ) की धारा 59 के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई फर्म , जो कि किसी उद्योग या किसी व्यापार , कारोबार या सेवा में लगी हुई है ;
(ज ) " औद्योगिक उपक्रम " से अभिप्रेत है किसी अनुसूचित उद्योग से संबंधित कोई उपक्रम और इसमें सम्मिलित है कोई उपक्रम , जो किसी ऐसे अन्य उद्योग या किसी व्यापार, कारोबार या सेवा में लगा है , जो कि संसद या राज्य की विधायिका द्वारा बनाई गई विधि द्वारा विनियमित किए जा सकते हों;
(झ) " सार्वजनिक क्षेत्र के औद्योगिक उपक्रम " से अभिप्रेत है ऐसे औद्योगिक उपक्रम जो, - 3
(एक) कंपनी अधिनियम, 2013 ( 2013 का 18) की धारा 2 के खण्ड (45) में यथा परिभाषित किसी सरकारी कंपनी द्वारा ;
(दो) राज्य के किसी अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी ऐसे निगम द्वारा , जो कि सरकार द्वारा नियंत्रित हो तथा जिसका प्रबंध सरकार द्वारा किया जाता हो , धारित , नियंत्रित हो अथवा उनके द्वारा उसका प्रबंध किया जाता हो ।
(ञ ) " संयुक्त उपक्रम " से अभिप्रेत हैं राज्य सरकार द्वारा किसी निजी औद्योगिक उपक्रम के साथ संयुक्त रूप से हाथ में लिया गया कोई उपक्रम;
(ट) " किसी औद्योगिक उपक्रम के संबंध में "प्रबंध निदेशक " से अभिप्रेत है ऐसा व्यक्ति (चाहे वह प्रबंध अभिकर्ता, महाप्रबंधक , प्रबंधक , मुख्य छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 मार्च 2025
486(4)
कार्यपालक अधिकारी या किसी अन्य नाम से ज्ञात हो ) जिसका उस उपक्रम के कार्यों पर नियंत्रण हो;
(ठ) " बल का सदस्य " से अभिप्रेत हैं. इस अधिनियम के अधीन बल में नियुक्त कोई व्यक्ति;
(ड) " परिनियोजन का स्थान " से अभिप्रेत है औद्योगिक स्थापनाएं , औद्योगिक उपक्रम , निजी औद्योगिक उपक्रम या संस्थाएं , वाणिज्यिक और वित्तीय संस्थाएं , विद्युत् उत्पादन केन्द्र , पारेषण और वितरण कंपनी , रिफायनरी , धार्मिक महत्व के स्थान , पुरातात्विक और विरासत स्थल , हवाई अड्डे व हैलीपैड , राष्ट्रीय अथवा राज्य राजमार्ग , सरकारी भवन , मैट्रो नेटवर्क , स्वशासी निकाय , केन्द्र और राज्य की संस्थाएं , सामरिक महत्व के अत्यावश्यक संस्थापन इत्यादि, जिनके संरक्षण और सुरक्षा के लिए इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन बल को परिनियोजित किया जा सकेगा;
(ढ) "विहित " से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित,
(ण) " निजी औद्योगिक उपक्रम " से अभिप्रेत है कोई ऐसा उद्योग , जो केन्द्रीय या राज्य सरकार से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा धारित , नियंत्रित हो या उसके द्वारा उसका प्रबंध किया जाता हो या सार्वजनिक क्षेत्र में का, कोई औद्योगिक उपक्रम;
(त) "अनुसूचित उद्योग " से अभिप्रेत है उद्योग ( विकास और विनियमन) अधिनियम , 1951 (1951 का 65 ) की प्रथम अनुसूची में उल्लिखित वस्तुओं के विनिर्माण या उत्पादन में लगा हुआ कोई उद्योग;
(थ) "सामरिक महत्व के अत्यावश्यक संस्थापन " से अभिप्रेत है विशेष संरक्षण की आवश्यकता वाले समस्त ऐसे अत्यावश्यक और अति संवेदनशील स्थल अथवा क्षेत्र जिन्हें कि समय - समय पर सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ;
(द) " अधीनस्थ अधिकारी " से अभिप्रेत है कंपनी कमाण्डर, प्लाटून कमाण्डर या सहायक प्लाटून कमाण्डर के रूप में बल में नियुक्त किया गया कोई व्यक्ति;
(घ ) " पर्यवेक्षण अधिकारी " से अभिप्रेत है धारा 6 के अधीन नियुक्त कोई अधिकारी और इसमें सम्मिलित है बल के पर्यवेक्षण अधिकारी के रूप में राज्य सरकार द्वारा नियुक्त कोई अन्य अधिकारी;
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 मार्च 2025
486(5) (न) " अवर अधिकारी " से अभिप्रेत है प्रधान आरक्षक या आरक्षक के रूप में बल में नियुक्त किया गया कोई व्यक्ति;
(प ) " भर्ती " से अभिप्रेत है प्रतिनियुक्ति पर बल में नियुक्त किया गया कोई व्यक्ति ।
बल का गठन .
3. (1) राज्य सरकार द्वारा , परिनियोजन के स्थान के संरक्षण और सुरक्षा के लिए तथा ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करने के लिए , जो कि राज्य सरकार द्वारा समय - समय पर उसे सौंपे जाएं , छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल के नाम से ज्ञात एक सशस्त्र बल राज्य शासन द्वारा गठित और संधारित किया जाएगा ।
राज्य शासन या इस सम्बन्ध में शासन द्वारा प्राधिकृत कोई भी अधिकारी-
(क) छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल को दलों में विभक्त कर सकेगा ,
(ख ) प्रत्येक दल को बटालियनों में और प्रत्येक बटालियन को कम्पनियों में तथा प्रत्येक कम्पनी को प्लाटूनों में और प्लाटूनों को अनुभागों में विभक्त कर सकेगा,
(ग) किसी भी दल , बटालियन , कम्पनी , प्लाटून या अनुभाग को ऐसे स्थानों में नियुक्त कर सकेगा , जो राज्य शासन या राज्य शासन द्वारा अधिकृत अधिकारी को उचित प्रतीत हों ।
(2) बल में उतने पर्यवेक्षण अधिकारी अंतर्विष्ट होंगे जितने की विहित किए जाएं और वे ऐसा वेतन और अन्य पारिश्रमिक प्राप्त करेंगे , जो कि विहित किया जाएः
परन्तु इस उप - धारा की कोई भी बात भारतीय पुलिस सेवा के सदस्यों के वेतन , भत्तों तथा अन्य सेवा शर्तों को लागू नहीं होगी ।
(3) बल का मुख्यालय नवा रायपुर अटल नगर में अथवा ऐसे अन्य स्थान पर होगा जिसे कि राज्य सरकार द्वारा समय - समय पर विनिर्दिष्ट किया जाए ।
नामांकित सदस्यों की बल में 4. (1) इस अधिनियम या छत्तीसगढ़ विशेष सशस्त्र बल अधिनियम , 1968 (क्रमांक 29 सन् 1968 ) एवं छत्तीसगढ़ पुलिस अधिनियम , 2007 (क्रमांक 13 सन् 2007) में दी गई किसी बात के होते हुये भी, राज्य छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 मार्च 2025
486(6)
प्रतिनियुक्ति.
शासन या पुलिस महानिदेशक यदि इस सम्बन्ध में उसे राज्य शासन द्वारा ऐसा करने के लिये प्राधिकृत किया जाये , छत्तीसगढ़ विशेष सशस्त्र वल अधिनियम, 1968 (क्रमांक 29 सन् 1968 ) एवं छत्तीसगढ़ पुलिस अधिनियम , 2007 ( क्रमांक 13 सन् 2007) के अन्तर्गत नियुक्त छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल एवं छत्तीसगढ़ पुलिस बल के सदस्यों की प्रतिनियुक्ति छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल में करने के लिये सक्षम होगा ।
(2) छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल में राज्य शासन द्वारा स्वीकृत पद ( सेटअॅप ) से अधिक वल की प्रतिनियुक्ति नहीं की जायेगी ।
(3) बल के किसी भी सदस्य को कभी भी वगैर कारण बताये अपनी मूल इकाई में वापस किया जा सकेगा ।
बल के सदस्यों 5. के प्रमाण-पत्र .
( 1 ) बल का भर्ती किया गया प्रत्येक सदस्य, उसकी नियुक्ति पर, विहित प्रारूप में पुलिस महानिदेशक अथवा ऐसे अन्य पर्यवेक्षण अधिकारी के हस्ताक्षर तथा मुद्रा से , जिसे कि पुलिस महानिदेशक इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे , उसकी नियुक्ति का एक प्रमाण-पत्र प्राप्त करेगा और ऐप्ता प्रमाण- पत्र धारण करने वाले व्यक्ति में बल में भर्ती किए गए सदस्य की शक्तियां निहित हो जाएंगी ।
(2) ऐसे प्रमाण- पत्र का उस स्थिति में स्वतः ही अवसान हो जाएगा जबकि वह व्यक्ति जिसके पक्ष में यह जारी किया गया हो , किसी भी कारण से बल का भर्ती किया गया सदस्य नहीं रह जाता है ।
बल का अधीक्षण/ पर्यवेक्षण तथा प्रशासन .
6. (1) पुलिस महानिदेशक, सरकार के सर्वोपरि नियंत्रण के अध्यधीन रहते हुए बल का प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी होगा. वह ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा तथा ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेगा , जो कि विहित किया जाएं ।
(2) उप- धारा ( 1 ) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए बल का प्रशासन , ऐसी स्थानीय सीमाओं के भीतर , जैसी कि विहित की जाएं , विशेष पुलिस महानिदेशक , अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक , पुलिस महानिरीक्षक , उप पुलिस महानिरीक्षक , सहायक पुलिस महानिरीक्षक अथवा कमान्डेंट , डिप्टी कमान्डेंट , और असिस्टेंट कमान्डेंट द्वारा अधिनियम तथा उसके अधीन बनाए गए उपबंधों के अनुसार किया जाएगा और राज्य में बल के परिनियोजन के स्थानों के संरक्षण तथा सुरक्षा के लिए नियुक्त किया गया प्रत्येक पर्यवेक्षण अधिकारी ऐसे निबन्धनों तथा शर्तों पर कार्य करेगा, जो कि विहित किए जाएं और ऐसे निदेशों के अध्यधीन रहते छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 मार्च 2025
486(7) हुए , जैसे के सरकार अथवा पुलिस महानिदेशक द्वारा इस निमित्त दिए जाएं , अपने कृत्यों का निर्वहन , परिनियोजन के ऐसे स्थान के भारसाधक प्राधिकारी के साथ सामंजस्य बना कर करेगा ।
(3) राज्य सरकार , पुलिस महानिदेशक तथा ऐसे अन्य अधिकारियों को , जो कि असिस्टेंट कमान्डेंट से अनिम्न पंक्ति का हो पर्यवेक्षण अधिकारी नियुक्त कर सकेगी , जो ऐसी शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे , जो कि विहित किए जाएं ।
7 .
बल के प्रत्येक अधिकारी तथा सदस्य का यह कर्तव्य होगा कि वह , - बल के सदस्यों के कर्तव्य .
(एक) अपने वरिष्ठ अधिकारी द्वारा उसे जारी किए गए समस्त विधिपूर्ण आदेशों का पालन तथा निष्पादन करे ;
(दो) परिनियोजन के स्थान तथा उससे संलग्न किन्हीं संस्थापनों के परिसरों , उनकी स्थापनाओं तथा आस्तियों का संरक्षण तथा उनकी सुरक्षा करना;
(तीन) खण्ड (दो ) में यथाविनिर्दिष्ट परिनियोजन के स्थान के कर्मचारियों और अधिकारियों का संरक्षण तथा उनकी सुरक्षा करना;
(चार) खण्ड ( दो ) में निर्दिष्ट परिनियोजन के स्थान तथा खण्ड ( तीन) में निर्दिष्ट कर्मचारियों और अधिकारियों के संरक्षण तथा सुरक्षा में सहायक कोई अन्य कार्य करना;
(पांच ) परिनियोजन के स्थान और उसके आसपास कानून और व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो जाने के कारण स्थानीय पुलिस बल को , उसके आने पर सहयोग और सहायता प्रदान करना ।
8. (1)
बल का परिनियोजन .
सरकार के किन्ही सामान्य निदेशों और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर , जैसी कि विहित की जाएं , बल के प्रभारों की वसूली के अध्यधीन रहते हुए , पुलिस महानिदेशक के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह परिनियोजन के स्थान के भारसाधक प्राअधिकारी से , उसकी आवश्यकता को दर्शाते हुए, इस निमित्त अनुरोध प्राप्त होने पर , उतनी संख्या में , जितनी कि पुलिस महानिदेशक उसके तथा उससे संलग्न किन्हीं संस्थापनों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए आवश्यक समझे , बल के सदस्यों को परिनियोजित कर सकेगा और इस प्रकार परिनियोजित बल का सदस्य पुलिस महानिदेशक अथवा उसके निमित्त किसी अन्य अधिकारी द्वारा यथाविनिर्दिष्ट अधिकारी अथवा प्राधिकारी के अधिकार के अधीन रहेगाः 486
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 मार्च 2025
परन्तु उस दशा में , जहां कि कोई स्थापना , संस्था , स्वशासी निकाय , उपक्रम , सामरिक महत्व के या अत्यावश्यक संस्थापन किसी ऐसी कम्पनी द्वारा नियंत्रित हों अथवा उसके द्वारा उनका प्रवन्ध किया जाता हो , जिसमें कि राज्य सरकार का कोई हित न हो , वहां सरकार के पूर्व अनुमोदन के बिना ऐले अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा । (2) यदि पुलिस महानिदेशक का यह मत है कि उप - धारा ( 1 ) के अधीन परिनियोजन के किसी स्थान के सम्बन्ध में बल के सदस्यों के परिनियोजन की आवश्यकता उत्पन्न करने वाली परिस्थितियां समाप्त हो गई हैं , तो संबंधित उपक्रम को 01 माह पूर्व सूचना देकर वह इस प्रकार परिनियोजित बल के सदस्यों को वापस बुला सकेगा ।
(3) बल का प्रत्येक सदस्य, जब वह अपनी परिनियोजन की कालावधि के दौरान किसी ऐसी स्थापना , संस्था, स्वशासी निकाय , उपक्रम, सामरिक महत्व के अथवा अत्यावश्यक संस्थापनों में अपने कृत्यों का निर्वहन कर रहा हो , जो किसी ऐसी कम्पनी द्वारा नियंत्रित हो अथवा उसके द्वारा उनका प्रबन्ध किया जाता हो , जिसमें सरकार का कोई हित न हो , इस अधिनियम के अधीन उन्हीं शक्तियों का प्रयोग करेगा और उन्हीं उत्तरदायित्वों , अनुशासन और शास्तियों के अधीन रहेगा जिनके अधीन वह तब होता जबकि वह सरकार की किसी स्थापना, संस्था , स्वशासी निकाय और औद्योगिक उपक्रम अथवा सामरिक महत्व के तथा अत्यावश्यक संस्थापनों के सम्बन्ध में उन कर्तव्यों का निर्वहन कर रहा होता।
9. ( 1) बल का कोई भी सदस्य वारन्ट के विना, किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकेगा, -
वारन्ट के बिना गिरफ्तार करने कीशक्ति.
(एक) जो धारा 7 के खण्ड (चार) में विनिर्दिष्ट यथास्थिति, किसी कर्मचारी या अधिकारी को या उसे या बल के किसी अन्य सदस्य को उसके ऐसे कर्मचारी के रूप में कर्तव्य के निर्वहन में या ऐसे सदस्य के रूप में उसके कर्तव्य के निष्पादन में, या उसे ऐसे सदस्य के रूप में कर्तव्य के निर्वहन से रोकने या भयभीत करने के आशय से या उसे ऐसे सदस्य के रूप में अपने कर्तव्य के विधिपूर्ण निर्वहन के परिणामस्वरूप किसी कार्य को करने अथवा करने का प्रयास करने में स्वेच्छया उपहति कारित करता है या स्वेच्छया उपहति कारित करने का प्रयास करता है , या सदोष अवरोध करता है , या सदोष अवरोध करने का प्रयास करता छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 मार्च 2025
486(9) है , या हमला करता है या हमला करने की धमकी देता है या आपराधिक बल का उपयोग करता है या उपयोग करने की धमकी देता है या प्रयास करता है ;
(दो) जो, किसी संज्ञेय अपराध को कारित किए जाने में संबद्ध रह चुका हो , अथवा जिसके विरुद्ध इस प्रकार संबद्ध रहने का युक्तियुक्त संदेह विद्यमान हो या जो ऐसी परिस्थितियों के अधीन अपनी उपस्थिति को छिपाने के लिए पूर्वावधानियां बरत रहा है जिससे यह विश्वास करने का कारण हो कि वह ऐसी पूर्वावधानियां किसी संज्ञेय अपराध को कारित करने की दृष्टि से , जिसका संबंध ऐसी संपत्ति से है , जो परिनियोजन के स्थान से संबंधित हो या उसमें विद्यमान हो;
(तीन) जो, कोई ऐसा संज्ञेय अपराध कारित करता है या कारितं करने का प्रयास करता है जिसमें परिनियोजन के स्थान से संबंधित कोई कार्य करने में लगे हुए किसी व्यक्ति के जीवन को खतरा अन्तर्वलित हो या खतरा अन्तर्वलित होने की संभावना हो ।
(2) यदि कोई व्यक्ति , परिनियोजन के स्थान के परिसरों में अतिचार करता हुआ पाया जाए , तो उसे किन्हीं ऐसी अन्य कार्यवाहियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना , जो उसके विरुद्ध की जा सकती हो , बल के किसी सदस्य द्वारा ऐसे परिसरों से हटाया जा सकेगा ।
10. (1
वारंट के विना तलाशी लेने की शक्ति.
) जब भी बल के किसी सदस्य को यह विश्वास करने का कारण हो कि परिनियोजन के स्थान में कोई ऐसा अपराध जो कि धारा 9 में निर्दिष्ट किया गया है , कारित किया गया है या कारित किया जा रहा है और अपराधी को बच निकलने या अपराध के साक्ष्य को छिपाने का अवसर दिए बिना तलाशी वारण्ट प्राप्त नहीं किया जा सकता है तो वह अपराधी को निरुद्ध कर सकेगा और उस व्यक्ति के सामान की तत्काल तलाशी ले सकेगा और यदि वह उचित समझे तो ऐसे किसी व्यक्ति को , जिसके बारे में उसे यह विश्वास करने का कारण हो कि उसने अपराध कारित किया है , गिरफ्तार कर सकेगा ।
(2) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता , 2023 (2023 का सं .46) के तलाशियों से सम्बन्धित उपबंध इस धारा के अधीन तलाशियों को लागू होंगे । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 मार्च 2025
486(10)
गिरफ्तारी के पश्चात्अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया..
11. इस अधिनियम के अधीन गिरफ्तारी करने वाला बल का कोई सदस्य, इस प्रकार गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को तत्काल किसी पुलिस अधिकारी के सुपुर्द करेगा और किसी पुलिस अधिकारी की अनुपस्थिति में, उन परिस्थितियों की रिपोर्ट के साथ जिनके कारण गिरफ्तारी की गई है , ऐसे व्यक्ति को निकटतम पुलिस थाने ले जाएगा या भिजवाएगा . ऐसी गिरफ्तारी पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (2023 का सं . 46) की धारा 58 लागू होगी ।
12.
औद्योगिक स्थापनों को सुरक्षा संबंधी तकनीकी परामर्शी सेवाएं देने का उपबंध .
(1) उन साधारण निर्देशों के अध्यधीन रहते हुए , जो कि सरकार द्वारा जारी किए जाएं , पुलिस महानिदेशक के लिए वह विधिपूर्ण होगा कि वह निजी क्षेत्र के किसी औद्योगिक स्थापन के प्रवन्ध संचालक से या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति से अनुरोध प्राप्त होने पर , ऐसे औद्योगिक स्थापन को , ऐसी रीति में और ऐसी फीस का संदाय करने पर , जो कि विहित की जाए , सुरक्षा से संबंधित तकनीकी परामर्शी सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए बल के सदस्यों को निदेश दे । (2) उप - धारा ( 1 ) के अधीन प्राप्त फीस ऐसी रीति में, जैसी कि विहित कि जाए , संचित निधि में जमा की जाएगी ।
13 .
छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल के सदस्यों को पुलिस अधिकारियों के समान विशेषाधिकार तथा दायित्वों का होना.
छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल का प्रत्येक सदस्य , उसकी नियुक्ति पर तथा जब तक कि वह बल का सदस्य बना रहता है , पुलिस अधिकारी समझा जाएगा और जब वह इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहा.. हो अथवा उसके द्वारा वैसा निर्वहन किया जाना तात्पर्थित हो , तथा उन निबन्धनों , शर्तों तथा निर्बन्धनों के अध्यधीन रहते हुए, जो कि विहित किए जाएं , और जहां तक कि वे इस अधिनियम अथवा उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के किन्हीं उपबंधों से असंगत न हों , उन्हें छत्तीसगढ़ पुलिस अधिनियम , 2007 ( क्रमांक 13 सन् 2007 ) अथवा तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन सम्यक् रूप से नामांकित पुलिस अधिकारी के समस्त विशेषाधिकार तथा संरक्षण प्राप्त होंगे और वे पुलिस अधिकारी के समान समस्त दायित्वों , शास्तियों और दण्ड के अध्यधीन होंगे ।
14.
बल के विरुद्ध या उसके किसी अधिकारी या सदस्य के विरुद्ध या बल सद्भावपूर्वक की छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 मार्च 2025
486(11 )
गई कार्रवाई का संरक्षण.
के अथवा उसके किसी अधिकारी या सदस्य के आदेश या निदेश के अधीन कार्य कर रहे किसी व्यक्ति के विरुद्ध इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के अधीन , सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए तात्पर्थित किसी बात के लिए किसी न्यायालय द्वारा कोई वाद या कार्यवाही ग्रहण नहीं की जायेगी ।
15.
अपराधों का संज्ञान .
कोई भी न्यायालय , शासन की पूर्व मंजूरी के बिना बल के किसी सदस्य के विरुद्ध , अपने कर्तव्यों के निर्वहन में किए गए किसी कार्य के भाग में अथवा किए जाने के लिए तात्पर्यत किसी कृत्य के सम्बन्ध में किसी अपराध का संज्ञान नहीं लेगा ।
16. (1) बल का प्रत्येक सदस्य सदैव कर्तव्य पर समझा जाएगा और छत्तीसगढ़ राज्य के भीतर एवं राज्य के बाहर कहीं भी किसी भी समय , किसी भी स्थान पर नियोजित किया जा सकेगा ।
बल के सदस्यों को सदैव कर्तव्य पर समझा जाना तथा राज्य में तथा राज्य के बाहर कहीं भी नियोजित किया जा सकना .
(2) बल का कोई भी सदस्य स्वयं को इस अधिनियम के अधीन अपने कर्तव्यों से भिन्न किसी नियोजन या कार्यालय में नहीं लगाएगा ।
(3
) छत्तीसगढ़ पुलिस अधिनियम , 2007 (क्रमांक 13 सन् 2007 ) की धारा 22 की उप - धारा (1 ) , (2 ) एवं (3 ) छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल के सदस्यों पर लागू नहीं होगा ।
17 .
दण्ड और अप्रीलें .
संविधान के अनुच्छेद 311 तथा उन नियमों के , जो कि राज्य सरकार इस अधिनियम के अधीन बनाए , उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए , पर्यवेक्षण अधिकारी , -
(
एक ) बल के भर्ती किए गए किसी सदस्य को , जो अपने कर्तव्य का लापरवाहीपूर्ण या उपेक्षापूर्ण रीति में निर्वहन करता है या जो अपने स्वयं के किसी कार्य द्वारा उसके निर्वहन हेतु अनुपयुक्त हो जाता है ,
:
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 मार्च 2025
486(12)
निम्नलिखित में से कोई एक या अधिक दण्ड दे सकेगा , अर्थात्ः- (
क) जुर्माना , जो सात दिन के वेतन से अनधिक किसी भी राशि तक का हो सकेगाः
परन्तु पर्यवेक्षण अधिकारी लिखित में अभिलिखित किए जाने वाले विशेष कारणों से , सात दिन के वेतन से अधिक जुर्माना अधिरोपित कर सकेगा;
) ड्रिल , अतिरिक्त पहरेदारी , असैनिक सेवा या कोई अन्य कार्य ;
(ख
( ग) किसी विशिष्ट पद से हटाना या किसी विशेष परिलाभ से वंचित करना;
(घ) संचयी प्रभाव के बिना वेतनवृद्धि रोकना;
(ङ) पदोन्नति रोकना;
(च) परिनिंदा करना ।
इस धारा के खण्ड ( एक) के अधीन दिए गए किसी आदेश से व्यथित बल का भर्ती किया गया कोई सदस्य उस तारीख से , जिसको कि उसे आदेश संसूचित हुआ है , तीस दिन के भीतर उस आदेश के विरुद्ध ऐसे प्राधिकारी को , जिसे कि विहित किया जाए , अपील प्रस्तुत कर सकेगा. विहित प्राधिकारी , किसी अपील का निराकरण करने में ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करेगा , जैसा कि विहित की जाएः
परन्तु विहित प्राधिकारी , यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी के पास समय - सीमा में अपील प्रस्तुत न किए जाने के पर्याप्त कारण थे , तीस दिन की उक्त कालावधि का अवसान हो जाने के पश्चात् भी अपील ग्रहण कर सकेगा ।
18. ( 1 ) बल का कोई भी सदस्य , शासन या विहित प्राधिकारी की लिखित पूर्व अनुमति के बिना, -
संगम इत्यादि बनाने के अधिकार के विषय में निर्बंधन .
(क) किसी भी व्यापार संघ , मजदूर संघ, राजनैतिक दल अथवा व्यापार संघों, मजदूर संघों अथवा राजनैतिक दलों के महासंघ का सदस्य नहीं होगा अथवा उनसे किसी भी रूप में सहयुक्त नहीं होगा; या छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 मार्च 2025
486(13) (ख ) किसी अन्य सोसाइटी , संस्था, संगम या संगठन का , जो कि बल के भाग के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है या जो विशुद्ध रूप से सामाजिक , आमोद प्रमोद संबंधी या धार्मिक प्रकृति का नहीं है , सदस्य नहीं बन सकेगा या उससे किसी अन्य प्रकार से सहयुक्त नहीं हो सकेगा; या स्पष्टीकरण.- यदि इस संबंध में कोई प्रश्न उद्भूत होता है कि कोई सोसाइटी , संस्था , संगम या संगठन इस उप - धारा के खण्ड (ख) के अधीन विशुद्ध रूप से सामाजिक , आमोद प्रमोद संबंधी या धार्मिक प्रकृति का है या नहीं , तो ऐसी दशा में शासन का विनिश्चय उस पर अंतिम होगा ।
(ग ) किसी भी प्रेस से संपर्क नहीं करेगा या कोई भी पुस्तक , पत्र या अन्य दस्तावेज प्रकाशित नहीं करेगा या प्रकाशित नहीं करवाएगा , सिवाय तब के जबकि ऐसी संसूचना या प्रकाशन उसके वास्तविक कर्तव्य के निर्वहन के लिए हो , या वह बिल्कुल साहित्यिक , कलात्मक या वैज्ञानिक प्रकृति कीहो ।
(2) बल का कोई भी सदस्य किसी भी राजनैतिक प्रयोजन के लिए किसी सम्मिलन या प्रदर्शन में भाग नहीं लेगा या उसे संबोधित नहीं करेगा ।
19.
निलंबन के दौरान बल के सदस्यों के उत्तरदायित्व .
बल के किसी सदस्य की , उसके पद से निलंबित हो जाने के कारण सदस्यता समाप्त नहीं होगी और वह उस कालावधि के दौरान भी उन्हीं उत्तरदायित्वों , अनुशासन और शास्तियों के अध्यधीन होगा जिनके अध्यधीन वह कर्तव्यारूढ़ होने की दशा में होता ।
20.
बल का सदस्य न रह गए व्यक्तियों द्वारा प्रमाण-पत्र, आयुध आदि का अभ्यर्पण .
(1 ) प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो , किसी कारण से भर्ती किया गया बल का सदस्य नहीं रह जाता है , अपना नियुक्ति प्रमाण- पत्र, आयुध , साजसज्जा , वस्त्र तथा अन्य वस्तुएं , जो उसे बल के सदस्य के रूप में कर्तव्यों का पालन करने के लिए दी गई हों, किसी ऐसे पर्यवेक्षक अधिकारी को तत्काल अभ्यर्पित कर देगा , जो उन्हें प्राप्त करने के लिए सशक्त हो ।
(2 ) कोई व्यक्ति जो , उप - धारा (1 ) में यथा अपेक्षित वस्तुओं का अभ्यर्पण करने में जानबूझकर उपेक्षा करता है अथवा अभ्यर्पण करने से इंकार करता है , आर्थिक फायदों के समपहरण और विधि के अधीन अभियोजन का दायी होगा ।
(3) इस धारा में की कोई भी बात किसी ऐसी वस्तु को लागू नहीं समझी जाएगी जो कि पुलिस महानिदेशक के आदेशों के अधीन , उस व्यक्ति छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 मार्च 2025
486(14)
की , जिसे वह दी गई हो , संपत्ति हो गई हो ।
21.
पुलिस ( अप्रीति उद्दीपन) अधिनियम , 1922 ( 1922 का 22) बल के सदस्यों को उसी प्रकार लागू होगा जैसा कि वह पुलिस बल के सदस्यों को लागू होता है ।
बल के सदस्यों को अधिनियम , 1922 का लागू होना.
22.
छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल के सदस्यों पर छत्तीसगढ़ विशेष सशस्त्र बल अधिनियम, 1968 , नियम /शर्तें लागू होगीं ।
छत्तीसगढ़ विशेष सशस्त्र बल अधिनियम , 1968 , नियम / शर्तों का बल के सदस्यों को लागू होना.
23 .
कतिपय अधिनियमों का बल के सदस्यों पर लागू न होना.
मजदूरी संदाय अधिनियम , 1936 ( 1936 का 4 ) अथवा औद्योगिक विवाद अधिनियम , 1947 ( 1947 का 14 ) अथवा कारखाना अधिनियम , 1948 ( 1948 का 63 ) में अंतर्विष्ट कोई भी बात, स्वास्थ्य और सुरक्षा से संबंधित उसके उपबंधों के सिवाय बल के सदस्यों को लागू नहीं होगी ।
24. (1)
नियम बनाने कीं शक्ति.
राज्य सरकार , राजपत्र में , अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता प्र प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, इन नियमों में निम्नलिखित के लिए उपबंध हो सकेंगे, - (क) बल के सदस्यों के वर्गों, पंक्तियों , श्रेणियों , तमगों , वेतन और पारिश्रमिक का तथा बल में उनकी सेवा शर्तों का विनियमन;
(ख) इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन कोई कृत्य करने के लिए प्राधिकृत बल के सदस्यों की शक्तियों और कर्तव्यों का विनियमन;
(ग) बल के सदस्यों के लिए सेवा की कालावधि नियत करना ;
(घ) बल के सदस्यों को दिए जाने वाले आयुध , साजसज्जा , वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का प्रकार और उनकी मात्रा विहित करना;
(ङ) बल के सदस्यों के निवास स्थान विहित करना;
(च) बल के प्रशासन से संबद्ध किसी प्रयोजन के लिए , किसी निधि की छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 21 मार्च 2025
486(15) संस्थापना, उसका प्रबंध और विनियमन;
(छ) दण्डों का विनियमन और वे प्राधिकारी विहित करना जिन्हें दण्ड के , अथवा जुर्माने या अन्य दण्ड के परिहार के आदेशों से अपीलें की जाएंगी और ऐसी अपीलों को निपटाने के लिए अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया;
(ज) वे निबंधन तथा शर्तें जिनके कि अध्यधीन रहते हुए बल के सदस्यों को धारा 8 के अधीन परिनियोजित किया जा सकेगा और उसके लिए प्रभार;
(झ) अग्न्यायुधों का उपयोग करने के लिए दिशानिर्देश विहित करना;
(ञ) किराए पर लेने वाली संस्थाओं के साथ संबंध बनाए रखने के लिए मानक विहित करना ।
(3) इस धारा के अधीन बनाये गये प्रत्येक नियम उसके बनाए जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र राज्य की विधानसभा के समक्ष रखा जाएगा.
25.
कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति.
यदि इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने में कोई कठिनाई उद्भूत होती है , तो राज्य सरकार , इस अधिनियम के उपबंधों से अनअसंगत आदेश द्वारा कठिनाई दूर कर सकेगीः
परन्तु ऐसा कोई भी आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तारीख से दो वर्ष की कालावधि का अवसान हो जाने के पश्चात् नहीं किया जाएंगा । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 मार्च 2025
486(16)
उद्देश्य एवं कारणों का कथन
बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों को लगातार सुरक्षा प्रदाय करने एवं औद्यागिक गतिविधियों से होने वाले कानून व्यवस्था में होने वाले गतिरोधों को विधिपूर्वक सुरक्षा प्रदाय करने के लिए विशिष्ट सुरक्षा प्रदाय करने हेतु । राज्य में औद्योगिक एवं व्यवसायिक वातावरण अनुकुल बनाने हेतु विशिष्ट बल की आवश्यकता । औद्योगिक सुरक्षा परिसरों में विशिष्ट रूप से प्रशिक्षित बलों की तैनाती की जावेगी जो रासायनिक , रेडियोलॉजिकल , बॉयोलॉजिकल , एवं नाभिकीय आपदाओं से निपटने हेतु सक्षम होगें । आंतकवाद एवं वॉमपंथी उग्रवाद जैसे खतरों से उद्योगों को सुरक्षा प्रदाय करना । औद्योगिक संस्थाओं में होने वाली आगजनी एवं तोड़ फोड़ से निफ्टने के लिए प्रशिक्षित बल ।
औद्योगिक परिसंपत्तियां एवं सुगम संचालन की सुरक्षा व्यवस्था हेतु । राज्य में खनन एवं उर्जा सम्बन्धी उद्योगों को विशिष्ट सुरक्षा प्रदाय करने हेतु । किसी प्रकार की औद्योगिक सुरक्षा प्रदाय करने हेतु, प्रदाय की जाने वाली संस्था से उसके खर्चे की भुगतान का प्रावधान । सुरक्षा प्रदान किये जाने से होने वाली आय , राज्य शासन की संचित निधि में जमा होगी , जिससे राज्य शासन को वित्तीय लाभ होगा । राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल की स्थापना से जिला पुलिस बल पर कार्य का दबाव कम होगा जिससे मूल कार्य क्षमता में वृद्धि होगी ।
विजय शर्मा रायपुर,
उप मुख्यमंत्री (गृह ) दिनांक 18 मार्च, 2025
(भारसाधक सदस्य) छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 21 मार्च 2025
486(17) "संविधान के अनुच्छेद 207 (1 ) के अधीन राज्यपाल द्वारा अनुशंसित "
वित्तीय ज्ञापन
प्रस्तावित छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल विधेयक 2025 , में राज्य की संचित निधि से राशि रूपये 11,78,90,000 / - (रूपये ग्यारह करोड़ अठहत्तर लाख नब्बे हजार मात्र ) व्यय अनुमानित है ।
प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में ज्ञापन
छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल विधेयक 2025 के खंड-6 में विधायनी शक्ति के प्रत्यायोजन की संस्थापनायें है, जो सामान्य स्वरूप की है ।
दिनेश शर्मा, सचिव , छत्तीसगढ़ विधान सभा संचालक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री , छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय, नवा रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित - 2025.