महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर
नवा रायपुर अटल नगर, दिनांक 24 मार्च 2025
संशोधित अधिसूचना
क्रमांक एफ 12-1/2022/मबावि/50.— विभागीय समसंख्यक अधिसूचना दिनांक 10 मार्च 2022 द्वारा एकीकृत बाल संरक्षण योजना (मिशन वात्सल्य) के तहत प्रवर्तकता कार्यक्रम के प्रभावी संचालन हेतु''छत्तीसगढ़ राज्य प्रवर्तकता कार्यक्रम क्रियान्वयन दिशा निर्देश, 2022''जारी किये गये थे।
भारत शासन महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा पत्र क्रमांक D.O No. CW-II-22/06/2022 दिनांक 05.07. 2022 द्वारा मिशन वात्सल्य (पूर्ववर्ती एकीकृत बाल संरक्षण योजना) के क्रियान्वयन दिशा-निर्देश जारी किये गये है, जिसके अनुसार मिशन वात्सल्य मानदंड 01 अप्रैल 2022 से लागू है । विभागीय पत्र क्रमांक 7688/मबावि/एससीपीएस दिनांक 22.11.2022 द्वारा 01 अप्रैल 2022 से मिशन वात्सल्य मानदंड लागू होने की स्वीकृति जारी की गई है। अतः उपरोक्त के प्रकाश में राज्य शासन एतद् द्वारा''छत्तीसगढ़ राज्य प्रवर्तकता कार्यक्रम क्रियान्वयन दिशा निर्देश, 2022'' में निम्नलिखित संशोधन किया जाता है-
अर्थात्ः- संशोधन
उक्त दिशा-निर्देश में, -
निर्देश की कंडिका क्रमांक 5.अ.2 को निम्नानुसार प्रतिस्थापित किया जाता है-
भारत शासन द्वारा जारी मिशन वात्सल्य के दिशा-निर्देश दिनांक 05.07.2022 के प्रावधानानुसार प्रवर्तकता हेतु बालकोंं का चयन जिनके परिवार की वार्षिक आय निम्न से अधिक न हो-
(अ) ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 72,000/- रूपये वार्षिक
(ब) अन्य क्षेत्रों के लिए 96,000/- रूपये वार्षिक
निर्देश की कंडिका 6.1 को निम्नानुसार प्रतिस्थापित किया जाता है-
पात्रता की श्रेणी में आने वाले परिवार के बच्चों को प्रति बालक रूपये 4,000/-अथवा तत्समय भारत सरकार द्वारा निर्धारित प्रावधान अनुसार सहायता धनराशि प्रदान की जायेगी। किशोर न्याय बोर्ड, बालक कल्याण समिति या बाल न्यायालय द्वारा लिखित में दर्ज किये जाने वाले कारणों के आधार पर यह सहायता बालक/बालिका की आयु 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक प्रदान की जा सकेगी। प्रवर्तकता सहायता की अवधि मिशन वात्सल्य कार्यक्रम के संचालन की अवधि से अधिक नहीं होगी। प्रवर्तकता की समाप्ति से पूर्व परिवार को बच्चों की देखरेख करने हेतु आर्थिक एवं अन्य रूप से सशक्त बनाये जाने के प्रयास किये जायेगें। प्रवर्तकता एवं पालन पोषण देखरेख अनुमोदन समिति (SFCAC) समय-समय पर प्रवर्तकता प्रकरणों की समीक्षा करेगी।
निर्देश की कंडिका 7 में उल्लेखित प्रवर्तकता एवं पालन पोषण देखरेख अनुमोदन समिति (SFCAC) को
निम्नानुसार प्रतिस्थापित किया जाता है-
| क्र. | सदस्यगण | पदनाम |
| 1. | जिला मजिस्ट्रेट | अध्यक्ष |
| 2. | अध्यक्ष/सदस्य, बाल कल्याण समिति | सदस्य |
| 3. | विशिष्ट दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी (एसएए) के प्रतिनिधि | सदस्य |
| 4. | बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत किसी स्वैच्छिक संगठन के प्रतिनिधि | सदस्य |
| 5. | जिला बाल संरक्षण अधिकारी | सदस्य सचिव |
| 6. | संरक्षण अधिकारी (गैर-संस्थागत देखभाल) | सदस्य |
निर्देश की कंडिका 8.अ.5 को निम्नानुसार प्रतिस्थापित किया जाता है-
8.अ.5 गृह अध्ययन प्रतिवेदन प्राप्ति के पश्चात जिला बाल संरक्षण अधिकारी प्रवर्तकता एवं पालन-पोषण देखरेख अनुमोदन समिति (SFCAC) की मासिक बैठक में प्रकरणों को विचारार्थ रखेगा। प्रकरण से संबंधित सभी दस्तावेजों यथा बालक का जीवन वृत, व्यक्तिगत देखरेख योजना, सामाजिक जांच रिपोर्ट/सामाजिक पृष्ठ भूमि रिपोर्ट, गृह अध्ययन रिपोर्ट आदि की संवीक्षा/जांच उपरांत यदि बालक का प्रकरण प्रवर्तकता हेतु उपयुक्त पाया जाता है तो समिति तदनुसार अपनी अनुशंसा करेगी। समिति (SFCAC) द्वारा अनुशंसित प्रवर्तकता प्रकरण जिला बाल संरक्षण अधिकारी के माध्यम सेजिला मजिस्ट्रेट को प्रस्तुत किये जायेंगें। जिला मजिस्ट्रेट द्वारा उपरोक्तानुसार अनुशंसित प्रवर्तकता प्रकरण बाल कल्याण समिति/किशोर न्याय बोर्ड बाल न्यायालय को प्रेषित किये जावेंगे। जिला मजिस्ट्रेट बालक कल्याण समिति/किशोर न्याय बोर्ड/बाल न्यायालय की अनुशंसा के आधार पर अनुमोदनदेंगे या प्रकरण की समीक्षा के लिए संदर्भित करेंगे। समिति जिला मजिस्ट्रेट द्वारा की गई टिप्पणियों की समीक्षा कर उनके प्रतिक्रिया दे सकती है। जिला मजिस्ट्रेट अनुशंसा को स्वीकार या अस्वीकार कर सकते है।
निर्देश की कंडिका 8.ब.4 को निम्नानुसार प्रतिस्थापित किया जाता है-
8.ब.4 गृह अध्ययन प्रतिवेदन प्राप्ति के पश्चात जिला बाल संरक्षण अधिकारी प्रवर्तकता एवं पालन-पोषण देखरेख अनुमोदन समिति (SFCAC) की मासिक बैठक में प्रकरणों को विचारार्थ रखेगा। प्रकरण से संबंधित सभी दस्तावेजों यथा बालक का जीवन वृत, व्यक्तिगत देखरेख योजना, सामाजिक जांच रिपोर्ट/सामाजिक पृष्ठभूमि रिपोर्ट, गृह अध्ययन रिपोर्ट आदि की संवीक्षा/जांच उपरांत यदि बालक का प्रकरण प्रवर्तकता हेतु उपयुक्त पाया जाता है तो समिति तदनुसार अपनी अनुशंसा करेगी। समिति (SFCAC) द्वारा अनुशंसित प्रवर्तकता प्रकरण जिला बाल संरक्षण अधिकारी के माध्यम से जिला मजिस्ट्रेट को प्रस्तुत किये जायेंगें। जिला मजिस्ट्रेट द्वारा उपरोक्ता नुसार अनुशंसित प्रवर्तकता प्रकरण बाल कल्याण समिति/किशोर न्याय बोर्ड बाल न्यायालय को प्रेषित किये जावेंगे। जिला मजिस्ट्रेट बालक कल्याण समिति/किशोर न्याय बोर्ड/बाल न्यायालय की अनुशंसा के आधार पर अनुमोदन देंगे या प्रकरण की समीक्षा के लिए संदर्भित करेंगे। समिति जिला मजिस्ट्रेट द्वारा की गई टिप्पणियों की समीक्षा कर प्रतिक्रिया दे सकती है। जिला मजिस्ट्रेट अनुशंसा को स्वीकार या अस्वीकार कर सकते है।
कंडिका- 11.3 निम्नानुसार प्रतिस्थापित की जाती है :-
बच्चे ने स्कूल अथवा आंगनबाड़ी अथवा प्रशिक्षण संस्था में जाना बंद कर दिया हो। (केवल उन विशेष परिस्थितियों में जब कि बच्चा बीमार हो/निःशक्त हो, निरस्तीकरण नहीं किया जाएगा, जिसका जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा सत्यापन कराया जाएगा तथा मेडिकल रिपोर्ट प्राप्त की जावेगी।)
उक्त संशोधन दिनांक 01.04.2022 से लागू होंगे।
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
शम्मी आबिदी, सचिव.