त्तीसगढ़शासन
पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़/दुर्ग/ 09 / 2013-2015. "
सत्यमेव जयते
"बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान (बिना डाक टिकट ) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22-छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई. दिनांक 30-05-2001 . "
छत्तीसगढ़ राजपत्र
(असाधारण)
प्राधिकार से प्रकाशित
आषाढ़ 25 , शक 1947
क्रमांक 541]
नवा रायपुर, बुधवार, दिनांक16 जुलाई 2025-
छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय
रायपुर, बुधवार, दिनांक 16 जुलाई, 2025 (आषाढ़ 25, 1947)
क्रमांक-10401 /वि.स. /विधान / 2025. छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी (संशोधन) विधेयक , 2025 (क्रमांक 16 सन् 2025) जो बुधवार , दिनांक 16 जुलाई , 2025 को पुरःस्थापित हुआ है , को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।
हस्ता./-
(दिनेश शर्मा) सचिव.
1081 1082
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2025
छत्तीसगढ़ विधेयक (क्रमांक 16 सन् 2025)
छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक , 2025
छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी अधिनियम , 1972 (क. 24 सन् 1973 ) को और संशोधित करने हेतु विधेयक ।
भारत गणराज्य के छिहतरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधान मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1.
यह अधिनियम छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी (संशोधन) अधिनियम , 2025 कहलायेगा । (1)
संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारंभ.
(2) इसका विस्तार संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में होगा ।
(3) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा । धारा 31 का संशोधन.
2. छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी अधिनियम , 1972 (क. 24 सन् 1973 ) (जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट है) की धारा 31 में, शब्द "निजी किसान उपभोक्ता प्रांगण" के पश्चात् तथा शब्द " या टर्मिनल मार्केट कॉम्पलेक्स' के पूर्व शब्द " या निजी ई-व्यापार मंच " अन्तःस्थापित किया जाए ।
3.
धारा 32 का संशोधन.
मूल अधिनियम की धारा 32 की उप - धारा (1 ) के परन्तुक में, शब्द " अन्य प्रदेश " के पूर्व , शब्द " इस प्रदेश के एवं" अन्तःस्थापित किया जाए ।
4.
धारा 32-क का संशोधन.
मूल अधिनियम की धारा 32- क. की उप- धारा ( 1 ) के परन्तुक में, शब्द " अन्य प्रदेश " के पूर्व , शब्द " इस प्रदेश के एवं " अन्तःस्थापित किया जाए ।
5.
धारा 32-ख का संशोधन.
(1 ) मूल अधिनियम की धारा 32 -ख के शीर्षक में , शब्द " तथा निजी किसान उपभोक्ता प्रांगण " के स्थान पर, शब्द "निजी किसान उपभोक्ता प्रांगण तथा निजी ई - व्यापार मंच " प्रतिस्थापित किया जाए ।
(2) धारा 32- ख की उप- धारा (1 ) में , शब्द "निजी किसान उपभोक्ता 1082 ( 1)
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 16 जुलाई 2025
प्रांगण " के पश्चात्, शब्द "तथा निजी ई- व्यापार मंच " अन्तःस्थापित किया जाए ।
6.
धारा 33 -क का संशोधन.
(1 ) मूल अधिनियम की धारा 33 - क के शीर्षक में, शब्द "तथा निजी किसान उपभोक्ता प्रांगण " के स्थान पर, शब्द "निजी किसान उपभोक्ता प्रांगण तथा निजी ई- व्यापार मंच " प्रतिस्थापित किया जाए ।
(2) मूल अधिनियम की धारा 33 - क की उप- धारा (1 ) के खण्ड (ग) में, शब्द " किसान उपभोक्ता उप - मंडी प्रांगण " के पश्चात्, शब्द " निजी ई- व्यापार मंच " अन्तःस्थापित किया जाए ।
धारा 34-क का संशोधन.
7. मूल अधिनियम की धारा 34- क की उप- धारा (4) में, शब्द " निजी किसान उपभोक्ता प्रांगण " के पश्चात्, शब्द " या निजी ई- व्यापार मंच " अन्तःस्थापित किया जाए ।
धारा 39 का संशोधन.
8. मूल अधिनियम की धारा 39 के खण्ड (पांच ) के पश्चात्, निम्नलिखित खण्ड अन्तःस्थापित किया जाए , अर्थात्ः-
" (पांच -क ) मंडी समिति में कार्यरत राज्य मंडी बोर्ड सेवा के अधिकारियों एवं सेवकों के वेतन, भत्ते तथा अन्य संदाय का भुगतान । "
9.
धारा 48 का संशोधन.
(1 ) धारा 48 में , शब्द "वह दोषसिद्ध पर कारावास से , जिसकी अवधि छः मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पांच हजार रूपये तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डित किया जायेगा " के स्थान पर शब्द " उसके दोषसिद्धि पर पांच हजार रूपये की शास्ति से दण्डित किया जायेगा " प्रतिस्थापित किया जाए ।
(2) धारा 48 में परन्तुक का लोप किया जाए ।
10. मूल अधिनियम की धारा 49 में, -
धारा 49 का संशोधन.
(1 ) उप -धारा (1 ) के स्थान पर, निम्नलिखित उप-धारा प्रतिस्थापित किया जाए , अर्थात्ः-
" (1 ) जो कोई, धारा 35 के उपबंधों के उल्लंघन में, कोई अप्राधिकृत व्यापारिक छूट देगा या लेगा, वह दोषसिद्धि पर, दो हजार रूपये की शास्ति से दण्डित किया जायेगा तथा पश्चात्वर्ती उल्लंघन की दशा में, पांच हजार रूपये की शास्ति से दण्डित किया जायेगा । "
(2) उपधारा (2) में , शब्द "जुर्माने " तथा " पांच हजार रूपये तक का 1082 ( 2)
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हो सकेगा " के स्थान पर, क्रमशः शब्द "शास्ति" तथा " पांच हजार रूपये होगा" प्रतिस्थापित किया जाए ।
(3) उप-धारा (2) एवं (3) में, शब्द " जुर्माने " तथा " दो हजार रूपये तक का हो सकेगा " के स्थान पर, क्रमशः शब्द " शास्ति" तथा "दो हजार रूपये होगा " प्रतिस्थापित किया जाए ।
(4) उप-धारा (4) के खण्ड (ख) में, शब्द "जुर्माने " तथा " पांच हजार रूपये तक का हो सकेगा " के स्थान पर, कमशः शब्द "शास्ति" तथा "पांच हजार रूपये होगा" प्रतिस्थापित किया जाए ।
(5) उप-धारा (5 ) में, शब्द " जुर्माने " तथा "दो हजार रूपये तक का हो सकेगा " के स्थान पर, क्रमशः शब्द "शास्ति" तथा " दो हजार रूपये होगा " प्रतिस्थापित किया जाए ।
(6) उप-धारा (6 ) में, शब्द " जुर्माने " , "पांच हजार रूपये तक का हो सकेगा" तथा " एक सौ रूपये तक का हो सकेगा" के स्थान पर, क्रमशः शब्द " शास्ति" , " पांच हजार रूपये होगा " तथा " पांच सौ रूपये होगा " प्रतिस्थापित किया जाए,
(7) उप- धारा (7) में, शब्द " जुर्माने" तथा " दो हजार रूपये तक का हो सकेगा " के स्थान पर, क्रमशः शब्द " शास्ति" तथा " दो हजार रूपये होगा " प्रतिस्थापित किया जाए । 1082 ( 3)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 जुलाई 2025
उद्देश्यों एवं कारणों का कथन
' यतः, राज्य सरकार का दृष्टिकोण है कि विक्रेताओं को उनके अधिसूचित कृषि उपज की अधिकतम कीमत प्राप्त हो, इस दृष्टि से प्रदेश के व्यापारी भी ई - नाम के माध्यम से अधिसूचित कृषि उपज कय कर सके, इसके अतिरिक्त निजी ई- व्यापार मंच तथा व्यापार में सुगमता की दृष्टि से, कारावास के प्रावधानों को हटाया जाना, मंडी कृत्यकारियों के हित में आवश्यक हो गया है;
अतएव , छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1972 (क्र. 24 सन 1973 ) में संशोधन किये जाने का विनिश्चय किया गया है ।
अतः यह विधेयक प्रस्तुत है ।
रायपुर, दिनांक 11 जुलाई , 2025
रामविचार नेताम कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री (भारसाधक सदस्य) 1082 ( 4)
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उपाबंध
छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 (क्रमांक 24 सन् 1973) की धारा 31 , धारा 32 की उपधारा (1 ) के परन्तुक, धारा 32 - क की उपधारा (1 ) के परन्तुक, धारा 32- ख के शीर्षक , धारा 32 - ख की उपधारा (1 ) , धारा 33 - क के शीर्षक एवं उपधारा (1 ) के खण्ड (ग) , धारा 34- क की उपधारा (4) , धारा 39, धारा 48 , धारा 49 की उपधारा (1 ) , (2) , (3) , (4) , (5) , (6) एवं (7) के संबंध में सुसंगत उद्धरण
धारा 31
31. मंडी क्षेत्र में कार्य करने वाले व्यक्तियों का विनियमन - कोई भी व्यक्ति, किसी अधिसूचित कृषि उपज के संबंध में मंडी क्षेत्र में आढ़तिया , व्यापारी , तुलैया, हम्माल , सर्वेक्षक, भाण्डागारिक प्रसंस्करण या विनिर्माण या दबाने (प्रेसिंग) के कारखानों के स्वामी या अधिभोगीया किसान उत्पादक संगठन या निजी मंडी प्रागंण के संचालक या निजी उपमंडी प्रागंण के संचालक या निजी किसान उपभोक्ता प्रागंण या टर्मिनल मार्केट कॉम्पलेक्स के संचालक या ऐसे अन्य मंडी कृत्यकारी के रूप में कार्य इस अधिनियम के तथा उसके अधीन बनाये गये नियमों तथा उपविधियों के उपबंधो के अनुसार ही करेगा अन्यथा नहीं ।
धारा 32 की उपधारा (1 ) -
32. अनुज्ञप्तियाँ मंजूर करने की शक्ति (1 ) धारा 31 में विनिर्दिष्ट किया गया प्रत्येक व्यक्ति , जो मंडी क्षेत्र में कार्य करना चाहता हो, पंजीयन को मंजूरी या उसके नवीकरण के लिए मंडी समिति को ऐसी रीति में तथा ऐसी कालावधि के भीतर, जैसी कि उपविधियों द्वारा विहित की जाये, आवेदन करेगा :
परन्तु अन्य प्रदेश के मंडी बोर्ड / मंडी समिति के एकल पंजीयन / अनुज्ञप्तिधारी व्यापारी /प्रसंस्करणकर्ता / विनिर्माताओं को भारत सरकार द्वारा संचालित ई - नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार ) पोर्टल के माध्यम से अधिसूचित कृषि उपज का कयण तथा कय अधिसूचित कृषि उपज की कीमत, मंडी शुल्क, कृषक कल्याण शुल्क तथा अन्य देय राशियों का भुगतान मंडी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार करने पर , अनुज्ञप्ति/ पंजीयन की आवश्यकता नहीं होगी और इस अधिनियम के शेष प्रावधान यथावत प्रभावी होगें । धारा 32- क की उपधारा (1 ) -
32- क. एक से अधिक मंडी क्षेत्रों के लिए पंजीयन (1 ) धारा 31 में विनिर्दिष्ट किया गया प्रत्येक व्यक्ति जो एक से अधिक मंडी क्षेत्रों में कार्य करना चाहता हो, पंजीयन की मंजूरी या उसके नवीनीकरण के लिए राज्य सरकार द्वारा यथा अधिसूचित ऐसे प्राधिकारी / अधिकारी को ऐसी रीति में तथा ऐसी कालावधि के भीतर और ऐसी शर्तों पर, जैसी की नियमों में विहित किया जाए , आवेदन करेगा :
परन्तु अन्य प्रदेश के मंडी बोर्ड/ मंडी समिति के एकल पंजीयन / अनुज्ञप्तिधारी व्यापारी / प्रसंस्करणकर्ता / विनिर्माताओं को भारत सरकार द्वारा संचालित ई- नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) पोर्टल के माध्यम से अधिसूचित कृषि उपज का कयण तथा कय अधिसूचित कृषि उपज की कीमत , मंडी शुल्क, कृषक कल्याण शुल्क तथा अन्य देय राशियों का भुगतान मंडी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार करने पर, अनुज्ञप्ति/ पंजीयन की आवश्यकता नहीं होगी और इस अधिनियम के शेष प्रावधान यथावत प्रभावी होगें । धारा 32-ख
32.-ख निजी मंडी प्रांगण / निजी उप- मंडी प्रांगण तथा निजी किसान उपभोक्ता प्रांगण की स्थापना के लिए पंजीयन-( 1 ) ऐसा व्यक्ति / संगठन / किसान उत्पादक संगठन, जो मंडी क्षेत्र में निजी मंडी प्रांगण / निजी उप- मंडी प्रांगण / निजी किसान उपभोक्ता प्रांगण स्थापित करना चाहता हो , पंजीयन या उसके नवीनीकरण के लिए बोर्ड को, ऐसी रीति में तथा ऐसी कालावधि के भीतर और ऐसी शर्तों पर , जैसी कि नियमों में विहित किये जायें , आवेदन करेगा । 1082 ( 5)
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धारा 33-क -
33- क निजी मण्डी प्रांगण / निजी उप- मण्डी प्रांगण तथा निजी किसान उपभोक्ता प्रांगण के पंजीयन रद्द करने या निलंबित करने की शक्ति (1 ) उपधारा ( 3) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए बोर्ड , पंजीयन धारक को लिखित में कारणों को संसूचित करते हुए , पंजीयन को निलंबित या रद्द कर सकेगा- (क) यदि पंजीयन जानबूझकर दुर्व्यपदेशन या कपट द्वारा प्राप्त की गई हो; या
(ख) यदि पंजीयन धारक या कोई सेवक या उसकी (पंजीयन धारक) अभिव्यक्त या विवक्षित अनुज्ञा से उसकी ओर से कार्य करने वाला कोई भी व्यक्ति , पंजीयन के निबंधनों या शर्तों में से किसी का उल्लंघन करता है ; या
(ग) यदि पंजीयन धारक , अन्य पंजीयन धारकों के साथ सहयोजित होकर, अधिसूचित कृषि उपज के विपणन को मंडी प्रांगण / उप- मंडी प्रांगण / विशेष वस्तु मंडी प्रांगण/ किसान उपभोक्ता उप- मंडी प्रांगण में जानबूझकर बाधित करने, निलंबित करने या रोकने के आशय से , मंडी क्षेत्र में कोई कार्य करे या अपना सामान्य करोबार चलाने से प्रविरत रहे और जिसके परिणामस्वरूप किसी अधिसूचित कृषि उपज का विपणन बाधित, निलंबित हो गया हो या रूक गया हो ; या
धारा 34- क की उपधारा (4) -
(4) निजी मंडी प्रांगण या निजी उपमंडी प्रांगण या निजी किसान उपभोक्ता प्रांगण और मंडी समिति के बीच उद्भूत किसी विवाद को, संचालक, बोर्ड के अनुमोदन उपरांत , राज्य शासन को निर्दिष्ट करेगा । राज्य शासन उभयपक्षों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के उपरांत विवाद का निपटारा करेगा ।
धारा 39 के खण्ड (पांच)
(पांच) स्थापना संबंधी प्रभारों की पूर्ति जिनके अंतर्गत उन अधिकारियों तथा सेवकों के, जो कि मंडी समिति द्वारा नियोजित किये गये हो, भविष्य निधि, पेंशन तथा उपदान लेखे किये जाने वाले भुगतान तथा अभिदाय भी आते हैं;
धारा 48-
48. धारा 6 या धारा 31 के उल्लंघन के लिए शास्ति- जो कोई धारा 6 के खण्ड (ख) या धारा 31 या धारा 37 की उपधारा (2) के उपबंधों का उल्लंघन करेगा, वह दोष सिद्ध पर कारावास से, जिसकी अवधि छः मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से , जो पांच हजार रूपये तक का हो सकेगा, या दोनो से, दण्डित किया जायेगा और चालू रहने वाले उल्लंघन की दशा में ऐसे और जुर्माने से दण्डित किया जाएगा जो प्रथम दोष सिद्धि के पश्चात् प्रत्येक ऐसे दिन के लिए , जिसके कि दौरान उल्लंघन चालू रहे, एक सौ रूपये तक का धारा 6 के खण्ड (ख ) के उल्लंघन के मामले में तथा पचास रूपये तक का धारा 31 या धारा 37 की उपधारा (2) के उल्लंघन के मामले में हो सकेगा:
परन्तु न्यायालय के निर्णय में विशेष तथा पर्याप्त प्रतिकूल कारणों के वर्णित न होने पर द्वितीय या किसी पश्चात्वर्ती अपराध के लिए दण्ड तीन मास की अवधि के कारावास तथा पांच हजार रूपये के जुर्माने से कम नहीं होगा ।
धारा 49 की उपधारा (1), (2), (3) , (4), (5) , (6) एवं (7)-
49. अन्य धाराओं के उल्लंघन के लिए शास्ति (1 ) जो कोई धारा 35 के उपबंधों के उल्लंघन में, कोई अप्राधिकृत व्यापारिक छूट देगा या लेगा, वह दोष सिद्धि पर, कारावास से , जो तीन मास तक का हो सकेगा , या जुर्माने से, जो दो हजार रूपये तक का हो सकेगा , या दोनों से दण्डित किया जायेगा तथा 1082 ( 6)
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पश्चात्वर्ती उल्लंघन की दशा में कारावास से, जो छः मास तक का हो सकेगा , या जुर्माने से, जो पांच हजार रूपये तक का हो सकेगा , या दोनों से, दण्डित किया जायेगा ।
(2) जो कोई मण्डी समिति द्वारा मंजूर की गई अनुज्ञप्ति की किसी शर्त का उल्लंघन करेगा , वह दोष सिद्धि पर , जुर्माने से , जो पांच हजार रूपये तक का हो सकेगा दण्डित किया जायेगा ।
(3) जो कोई किसी अधिकारी को, लेखाओं का निरीक्षण करने में या मण्डी समिति के कार्यकलापों की जॉच करने में बाधा पहुँचायेगा का धारा 54 की उपधारा (1 ) के खण्ड (घ) के अधीन जारी किये गये किसी आदेश का अनुपालन नहीं करेगा वह, दोषसिद्धि पर, जुर्माने से दण्डित किया जायेगा जो प्रत्येक ऐसे दिन के लिए जिसके कि दौरान अपराध चालू रहे , दो हजार रूपये तक का हो सकेगा ।
(4) यदि मण्डी समिति का कोई अधिकारी , सेवक या सदस्य, जब कि वह मण्डी समिति के कार्यकलापों या कार्यवाहियों के बारे में जानकारी देने के लिए धारा 54 की उपधारा (1 ) के खण्ड (क) के अधीन अपेक्षित किया जाय-
(क) कोई जानकारी देने में जानबूझकर उपेक्षा करेगा या कोई जानकारी देने से इन्कार करेगा; या (ख) जानबूझकर मिथ्या जानकारी देगा, तो वह दोष सिद्धि पर, जुर्माने से, जो पांच हजार रूपये तक का हो सकेगा , दण्डित किया जायेगा ।
(5) जो कोई धारा 54 की उपधारा (3 ) के उपबंधों के उल्लंघन में किसी प्राधिकृत व्यक्ति को मण्डी समिति की किन्हीं पुस्तकों , अभिलेखों, निधियों या सम्पति का अभिग्रहण करने या कब्जा लेने में बाधा पहुँचायेगा या ऐसे व्यक्ति को उसका परिदान देने में चूक करेगा , वह, दोष सिद्धि पर , जुर्माने से, जो दो हजार रूपये तक का हो सकेगा , दण्डित किया जायेगा ।
(6) कोई भी व्यक्ति, जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाये गये नियमों या उपविधियों के उपबंधों के अधीन मण्डी समिति को शोध्य किसी फीस या अन्य राशि के भुगतान में कपटपूर्वक अपवंचन करेगा या किन्हीं तुलैयों या हम्माल को पारिश्रमिक लेखे शोध्य भुगतान करने में अपवंचन करेगा या अपने नियोजन के लिए पारिश्रमिक की मांग विक्रेता अथवा केता के प्राधिकार के बिना करेगा या इस अधिनियम के अधीन बनाये गये नियमों और उपविधियों के अनुसार न माँगकर अन्य प्रकार से पारिश्रमिक की मांग करेगा, वह, दोष सिद्धि पर , जुर्माने से, जो पांच हजार रूपये तक का हो सकेगा, दण्डित किया जायेगा और चालू रहने वाले अपराध की दशा में ऐसे और जुर्माने से दण्डित किया जायेगा जो उसके लिए दोष सिद्धि के पश्चात् प्रत्येक ऐसे दिन के लिए, जिसके कि दौरान ऐसा अपराध चालू रहे, एक सौ रूपये तक का हो सकेगा ।
(7) जो कोई इस अधिनियम के या उसके अधीन बनाये गये नियमों या उपविधियों में से किसी भी नियम या उपविधि के किसी उपबंध का उल्लंघन करेगा, वह, यदि उस अपराध के लिए कोई अन्य शास्ति उपबंधित न की गई हो , जुर्माने से, जो दो हजार रूपये तक का हो सकेगा , दण्डित किया जायेगा ।
दिनेश शर्मा सचिव
छत्तीसगढ़ विधान सभा संचालक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय , नवा रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित - 2025 .