10000
0000
छत्तीसगढ़शासन
पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़/दुर्ग/ 09 / 2013-2015 . "
सत्यमेव जयते
"बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान ( बिना डाक टिकट) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22- छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई. दिनांक 30-05-2001 ."
छत्तीसगढ़ राजपत्र
(असाधारण)
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 964 ]
नवा रायपुर , मंगलवार, दिनांक 16 दिसम्बर 2025- अग्रहायण 25, शक 1947
छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय
रायपुर, मंगलवार, दिनांक 16 दिसम्बर, 2025 (अग्रहायण 25 , 1947)
क्रमांक-16337 / वि.स./ विधान / 2025. छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधो के पालन में छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) ( द्वितीय ) विधेयक, 2025 (क्रमांक 30 सन् 2025 ) जो मंगलवार , दिनांक 16 दिसम्बर, 2025 को पुरःस्थापित हुआ है , को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।
हस्ता./- (दिनेश शर्मा) सचिव.
1927 1928
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्रमांक 30 सन् 2025 )
छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) (द्वितीय) विधेयक , 2025
ईज ऑफ लिविंग एवं ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए विश्वास आधारित शासन को बढ़ावा देने हेतु एवं अपराधों के अपराधमुक्तकरण एवं तर्कसंगतिकरण के लिए कतिपय अधिनियमितियों में संशोधन करने हेतु विधेयक ।
भारत गणराज्य के छिहत्तरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधानमंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो : -
संक्षिप्त नाम 1. ( 1 ) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन)
(द्वितीय ) अधिनियम, 2025 कहलाएगा ।
एवं प्रारंभ.
( 2) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रभावशील होगा।
2. अनुसूची में उल्लिखित अधिनियम , अनुसूची में उल्लिखित विस्तार तक एतद्द्द्वारा संशोधित किया जाता है ।
अधिनियमों में कतिपय संशोधन.
जुर्मानों एवं शास्तियों का पुनरीक्षण .
3. अनुसूची में उल्लिखित अधिनियमों के विभिन्न उपबंधों के अधीन उपबंधित जुर्माना एवं शास्तियों में, इस अधिनियम के प्रारंभ की तारीख से प्रत्येक तीन वर्ष की समाप्ति के पश्चात , यथास्थिति, निर्धारित जुर्माने या शास्ति की न्यूनतम राशि में दस प्रतिशत की वृद्धि हो जाएगी ।
व्यावृत्तियाँ.
4. ( 1 ) इस अधिनियम की अनुसूची में विनिर्दिष्ट विधियों का प्रशासनिक कार्यक्षेत्र, पूर्ववत सम्बंधित विभागों के पास रहेगा । संबंधित विभाग , अपने प्रशासनिक क्षेत्र के भीतरलागू नियमों में आवश्यक संशोधन करेंगे एवं इस अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उचित दिशा निर्देश जारी करेंगे । इसके अतिरिक्त, संबंधित विभाग अनुसूची में विनिर्दिष्ट उद्देश्यों के लिए निर्णायक अधिकारियों, अपीलीय अधिकारियों एवं वसूली तंत्र को ऐसी रीति से एवं ऐसे निबंधनों एवं शर्तों के छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 1) अध्यधीन रहते हुए नियुक्त करेगा , जैसा कि विहित किया जाए ।
(2 ) इस अधिनियम की किसी भी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह इसके प्रवृत्त होने के पूर्व की संस्थित या सम्पन्न किसी विधिक कार्यवाही को अविधिमान्य करेगी एवं न ही उसे किसी अवैधानिक कार्यवाही को विधिमान्य करने वाला समझा जाएगा।
अनुसूची
( धारा 2 देखिए)
संशोधन
क्रमांक
(2)
( 1 )
1. छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर अधिनियम , 2005 ( क्रमांक 2 सन् 2005 ) में ,
( 1 ) धारा 64 की उप - धारा ( 1 ) के खण्ड (ट) के नीचे उप - खण्ड (एक) के पैरा (क) में, शब्द " ऐसे कारावास से, जो छह मास तक का हो सकेगा और ऐसे जुर्माने से " एवं "दो" के स्थान पर , शब्द "शास्ति" एवं " दस " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए । (2 ) धारा 64 की उप - धारा ( 1 ) के खण्ड (ट) के नीचे उप - खण्ड (एक) के पैरा ( ख ) में शब्द " ऐसे कारावास से , जो छह मास तक का हो सकेगा , तथा ऐसे जुर्माने से " एवं "दो" के स्थान पर , शब्द " शास्ति" एवं " दस " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
(3 ) धारा 64 की उप - धारा ( 1 ) के खण्ड (ट) के नीचे उप- खण्ड (दो) में, शब्द "ऐसे कारावास से, जो तीन मास तक का हो सकेगा, या जुर्माने से " एवं " एक " के स्थान पर, शब्द " शास्ति " एवं " पाँच " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
( 4) धारा 64 की उप - धारा ( 1 ) के खण्ड (ट) के नीचे उप - खण्ड (दो) में , शब्द " या दोनों से " का लोप किया जाए ।
( 5 ) धारा 64 की उप - धारा ( 1 ) के खण्ड (ट) के नीचे उप - खण्ड (दो) में, शब्द " जुर्माना " , जहाँ कहीं भी आया हो , के स्थान पर, शब्द " शास्ति" प्रतिस्थापित किया जाए । (6) धारा 64 की उप - धारा ( 2 ) में, निम्नानुसार परंतुक जोड़ा जाए , अर्थात, - " परन्तु आयुक्त, उल्लंघनकर्ता को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर प्रदान करने के पश्चात, उप - धारा ( 1 ) के अनुसार , शास्ति अधिरोपित कर सकेगा। " छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 (2)
2. छत्तीसगढ़ सिनेमा ( विनियमन ) अधिनियम , 1952 (क्रमांक 17 सन् 1952 ) में, धारा 7 में , शब्द " एक हजार " , " अर्थदण्ड " एवं " 100 " के स्थान पर, शब्द " पाँच हजार " , " शास्ति" एवं " पाँच सौ" क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
3. छत्तीसगढ़ राजिम कुंभ (कल्प) मेला अधिनियम , 2006 (क्रमांक 22 सन् 2006 ) में, धारा 10 में, शब्द " साधारण कारावास से जो 3 माह तक हो सकेगा, अथवा जुर्माने से जो रुपये एक हजार तक हो सकेगा अथवा दोनों से, और जहाँ अपराध जारी रहता है , अथवा बार - बार किया जाता है, तो और जुर्माने से जो प्रथम दोषसिद्धि के दिनांक से जिस दौरान अपराधी के द्वारा अपराध किया जाना प्रमाणित हुआ है , प्रतिदिन रु . 100 / - (सौ रुपये मात्र) तक हो सकेगा , दंडित किया जाएगा " के स्थान पर, शब्द " प्रथम अपराध के लिए , दोषसिद्धि पर, पाँच हजार रुपए की शास्ति से, द्वितीय अपराध के लिए दस हजार रुपए की शास्ति से, तृतीय या उससे आगे के निरन्तर अपराध के लिए , साधारण कारावास से, जिसकी अवधि तीन माह तक हो सकेगी या जुर्माने से , जो दस हजार रुपए तक हो सकेगा , या दोनों से दण्डित किया जाएगा " प्रतिस्थापित किया जाए ।
4. छत्तीसगढ़ मत्स्य क्षेत्र अधिनियम , 1948 (क्रमांक 8 सन् 1948 ) में,
धारा 5 में , शब्द " कारावास से , जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी , या जुर्माने से, जो दस हजार रुपये तक हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय " के स्थान पर, शब्द " पच्चीस हजार रुपये तक की शास्ति से दण्डनीय " प्रतिस्थापित किया जाए ।
5. छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना ( नियोजन एवं सेवा शर्तों का विनियमन ) अधिनियम, 2017 (क्रमांक 21 सन् 2018 ) में,
( 1 ) धारा 20 की उप - धारा ( 1 ) में, शब्द " से दण्डित किया जाएगा " एवं " जुर्माने " के स्थान पर , शब्द " का दायी होगा " एवं " शास्ति" क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
( 2 ) धारा 20 की उप - धारा ( 1 ) के परंतुक में , शब्द " जुर्माने " के स्थान पर , शब्द " शास्ति " प्रतिस्थापित किया जाए ।
(3 ) धारा 22 की उप - धारा ( 1 ) में, शब्द " से दण्डित किया जाएगा " एवं " जुर्माने " के स्थान पर , शब्द " का दायी होगा " एवं " शास्ति" क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
(4) धारा 22 की उप - धारा ( 2 ) में, शब्द " से दण्डित किया जाएगा " एवं " जुर्माने " के स्थान पर , शब्द " का दायी होगा " एवं " शास्ति" क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
( 5 ) धारा 22 की उप - धारा ( 2 ) के परंतुक में, शब्द " जुर्माने " के स्थान पर , शब्द " शास्ति " छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 3) प्रतिस्थापित किया जाए ।
6. छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण निधि अधिनियम, 1982 (क्रमांक 36 सन् 1983 ) में ,
( 1 ) धारा 31 की उप - धारा ( 1 ) के खण्ड (क) में, शब्द " कारावास से , जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पाँच सौ रुपये तक का हो सकेगा , या दोनों" के स्थान पर , शब्द " दस हजार रुपये तक की शास्ति" प्रतिस्थापित किया जाए ।
(2) धारा 31 की उप - धारा ( 1 ) के खण्ड (ख) में, शब्द " एक " के स्थान पर, शब्द " बीस " प्रतिस्थापित किया जाए ।
(3) धारा 31 की उप - धारा ( 1 ) के परंतुक में, शब्द " एक सौ " के स्थान पर, शब्द " दस हजार " प्रतिस्थापित किया जाए ।
(4) धारा 31 की उप - धारा ( 2 ) में, शब्द " कारावास से, जो एक वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से , जो दो हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से , दण्डनीय " के स्थान पर , शब्द " प्रथम अपराध के लिए दस हजार रुपये की शास्ति से , एवं पश्चातवर्ती अपराध के लिए एक वर्ष तक की अवधि के कारावास से या पंद्रह हजार रुपये तक के जुर्माने से या दोनों से, दण्डनीय " प्रतिस्थापित किया जाए ।
7. छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 (क्रमांक 1 सन् 1994 ) में,
( 1 ) धारा 55 की उप - धारा (3 - क) में, शब्द " साधारण कारावास से जो छह मास तक का हो सकेगा या जुर्माने से जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से , और अपराध के चालू रहने की दशा में ऐसे और जुर्माने से जो प्रथम दोषसिद्धि की तारीख के पश्चात् प्रत्येक दिन के लिए, जिसको कि अपराध चालू रहता है, दो सौ पचास रुपये तक का हो सकेगा, " के स्थान पर , शब्द " प्रथम अपराध की स्थिति में दस हजार रुपए तक की शास्ति से, तथा द्वितीय अपराध की स्थिति में बीस हजार रुपए तक की शास्ति तथा अपराध जारी रहने की स्थिति में छः माह तक के साधारण कारावास से या बीस हजार रुपए के न्यूनतम जुर्माने से या दोनों से , दण्डित किया जाएगा " प्रतिस्थापित किया जाए । 1 (2 ) धारा 56 की उप - धारा ( 1 ) में, शब्द " जुर्माने ", " एक हजार " एवं "बीस " के स्थान पर , शब्द " शास्ति" , " पाँच हजार " एवं " एक सौ" क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
(3 ) धारा 60 की उप - धारा ( 1 ) में, शब्द " जुर्माने " एवं "एक " के स्थान पर , शब्द " शास्ति" एवं " पाँच " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए।
(4) धारा 61 - घ की उप - धारा (3 ) में, शब्द "सादा कारावास से, जो छह मास तक का हो सकेगा या जुर्माने से, जो कम से कम दस हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से , छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 (4)
दण्डित किया जायेगा" के स्थान पर, शब्द " पचास हजार रुपए तक की शास्ति के उत्तरदायी होगा एवं अपराध जारी रहने की स्थिति में, उसे छः माह तक के साधारण कारावास या न्यूनतम पचास हजार रुपए के जुर्माने या दोंनों से दण्डित किया जाएगा " प्रतिस्थापित किया जाए ।
( 5) धारा 61 - घ की उप - धारा (5 ) में, शब्द " सादा कारावास से, जो छह मास तक का हो सकेगा या जुर्माने से , जो कम से कम एक हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा " के स्थान पर , शब्द " पाँच हजार रुपए की शास्ति के लिए उत्तरदायी होगा एवं अपराध जारी रहने की स्थिति में, उसे छः माह तक के साधारण कारावास या न्यूनतम पाँच हजार रुपए के जुर्माने या दीनों से दण्डित किया जाएगा " प्रतिस्थापित किया जाए ।
( 6) धारा 61 - ड. में , शब्द " सादा कारावास से , जो छह मास तक हो सकेगा, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जायेगा " के स्थान पर , शब्द "दस हजार रुपये की शास्ति के लिए उत्तरदायी होगा एवं दूसरे अपराध के मामले में, वह बीस हजार रुपये की शास्ति के लिए उत्तरदायी होगा एवं अपराध चालू रहने के मामले में उसे सादा कारावास से, जो छः माह तक हो सकेगा या बीस हजार रुपये के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा " प्रतिस्थापित किया जाए ।
(7) धारा 95 की उप - धारा ( 5 ) में, शब्द "दो सौ पचास " एवं "पाँच " के स्थान पर , शब्द " दो हजार " एवं " एक सौ" क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
(8 ) धारा 95 की उप - धारा ( 5 ) में, शब्द " जुर्माने " , जहाँ कहीं भी आया हो, के स्थान पर , शब्द "शास्ति" प्रतिस्थापित किया जाए ।
(9 ) धारा 96 की उप - धारा ( 2 ) में, शब्द " दो सौ पचास " , " दोषसिद्धि " एवं " पाँच " के स्थान पर, शब्द " दो हजार " , " अपराध " एवं " एक सौ " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए । ( 10 ) धारा 96 की उप - धारा (2 ) में, शब्द " जुर्माने ", जहाँ कहीं भी आया हो, के स्थान पर, शब्द " शास्ति " प्रतिस्थापित किया जाए ।
(11) धारा 98 की उप - धारा ( 1 ) में, शब्द "दोषसिद्धि पर " विलोपित किया जाए । ( 12 ) धारा 98 की उप - धारा ( 1 ) में, शब्द "जुर्माने " एवं " पचास " के स्थान पर , शब्द " शास्ति" एवं " पाँच सौ" क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
( 13 ) धारा 98 की उप - धारा ( 2 ) में, शब्द एवं चिन्ह " दोषसिद्धि पर, " विलोपित किया जाए । ( 14) धारा 98 की उप - धारा ( 2 ) में, शब्द "जुर्माने " एवं " एक " के स्थान पर, शब्द " शास्ति" एवं " पाँच " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 5) ( 15 ) धारा 98 की उप - धारा (3 ) में, शब्द " जुर्माने " एवं " दो " के स्थान पर, शब्द " शास्ति " एवं " दस " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
( 16 ) धारा 99 में, शब्द एवं चिन्ह " दोषसिद्धि पर, " विलोपित किया जाए ।
( 17) धारा 99 में, शब्द " जुर्माने " एवं " दो सौ पचास " के स्थान पर, शब्द " शास्ति " एवं " दो हजार " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
( 18 ) धारा 102 में, शब्द एवं चिन्ह "दोषसिद्धि पर, " विलोपित किया जाए ।
( 19 ) धारा 102 में, शब्द " जुर्माने " एवं " दो सौ पचास " के स्थान पर , शब्द " शास्ति" एवं " दो हजार " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
(20) धारा 103 में , शब्द एवं चिन्ह " दोषसिद्धि पर, " विलोपित किया जाए ।
(21 ) धारा 103 में, शब्द " जुर्माने " एवं " पचास " के स्थान पर , शब्द " शास्ति" एवं " दो सौ पचास " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
(22) धारा 104 में, शब्द एवं चिन्ह " दोषसिद्धि पर, " विलोपित किया जाए ।
(23 ) धारा 104 में, शब्द "जुर्माने " एवं " दो सौ पचास " के स्थान पर , शब्द " शास्ति" एवं " दो हजार " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
(24 ) धारा 105 की उप - धारा ( 2 ) में, शब्द एवं चिन्ह " दोषसिद्धि पर, " विलोपित किया जाए ।
( 25 ) धारा 105 की उप - धारा ( 2 ) में, शब्द " जुर्माने " एवं "दो सौ पचास " के स्थान पर , शब्द " शास्ति" एवं " दो हजार " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
8. छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अधिनियम, 1972 (क्र. 3 सन् 1972) में,
( 1 ) धारा 77 में, शब्द " कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से , एक हजार रूपये तक का हो सकेगा , या दोनों से, " के स्थान पर, शब्द " प्रथम अपराध के लिए पाँच हजार रुपए की शास्ति से तथा अपराध चालू रहने की स्थिति में, तीन माह तक के साधारण कारावास या दस हजार रुपए के जुर्माने या दोनों से, " प्रतिस्थापित किया जाए ।
(2) धारा 78 में, खण्ड (क) एवं (ख) के स्थान पर , निम्नलिखित खण्ड प्रतिस्थापित किया जाए , अर्थात् -
"(क) प्रथम अपराध के लिए पाँच हजार रुपए की शास्ति;
(ख) द्वितीय अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 6)
सकेगी या दस हजार रुपए के जुर्माने , या दोनों से;
(ग) चालू रहने वाले उल्लंघन की दशा में, शास्ति से, जो प्रथम उल्लंघन के पश्चात प्रत्येक ऐसे दिन के लिए , जिसके दौरान उल्लंघन चालू रहे , पाँच सौ रुपए तक का हो सकेगा । "
9. छत्तीसगढ़ सिंचाई अधिनियम , 1931 (क्र. 3 सन् 1931 ) में,
( 1 ) धारा 75 - एफ की उप - धारा (2 ) में, शब्द " 6 माह तक के कारावास या एक हजार रुपये तक के अर्थदण्ड या दोनों से " के स्थान पर , शब्द "पच्चीस हजार रुपये तक की शास्ति से " प्रतिस्थापित किया जाए ।
(2 ) धारा 92 की उप - धारा ( 5 ) में, शब्द " 250 / - रु. " एवं "रु. 10/ - " के स्थान पर, शब्द "एक हजार रुपये" एवं "पचास रुपये " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
( 3 ) धारा 92 की उप - धारा ( 5 ) में , शब्द " अर्थदण्ड ' , जहाँ कहीं भी आया हो , के स्थान पर , शब्द " शास्ति" , प्रतिस्थापित किया जाए ।
(4) धारा 94 के खण्ड ( एक) में , शब्द " (ए) से (एच) " एवं " बीस " के स्थान पर , शब्द " (ए) से (सी) " एवं "दो सौ " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
( 5 ) धारा 94 के खण्ड ( दो) में, शब्द " ( आई) से (एल) " , " सौ " एवं " कारावास से, जो एक मास तक का हो सकेगा, " के स्थान पर , शब्द " (डी) से ( एल) " , " हजार " एवं "पाँच हजार रुपये के जुर्माने से " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
( 6) धारा 99 की उप - धारा ( 1 ) में, शब्द " दो सौ पचास " के स्थान पर , शब्द " एक हजार " प्रतिस्थापित किया जाए ।
10. छत्तीसगढ़ सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी अधिनियम, 2006 (क्र. 20 सन् 2006) में,
( 1 ) धारा 39 के खण्ड (एक) में, शब्द " कारावास से, जो दो वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से जो एक हजार रूपये से कम का नहीं होगा, किंतु जो पाँच हजार रूपये तक का हो सकेगा, या दोनों में से और जहाँ अपराध चालू रहने वाला अपराध हो, वहाँ ऐसे अतिरिक्त जुर्माने से, जो प्रथम अपराध के पश्चात् प्रत्येक ऐसे दिन के लिए, जिसके की दौरान अपराध जारी रहा हो , बीस रूपये से अधिक न हो, दण्डनीय " के स्थान पर, शब्द " प्रथम अपराध के लिए दस हजार रुपये की शास्ति से एवं द्वितीय अपराध के लिए छः माह तक के कारावास से या पच्चीस हजार रुपये के जुर्माने से या दोनों से एवं अपराध जारी रहने पर प्रतिदिन सौ रुपये से अनधिक की शास्ति से दण्डनीय होगा " प्रतिस्थापित किया जाए ।
( 2 ) धारा 39 के खण्ड ( दो) में, शब्द " जुर्माने " , " पाँच सौ " , " दो हजार " एवं " छह मास " के छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 7) स्थान पर , शब्द " शास्ति", " दो हजार " , " दस हजार " एवं " एक मास " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
छत्तीसगढ़ भू- जल (प्रबंधन एवं विनियमन) अधिनियम , 2022 (क्र. 18 सन् 2022 ) में, 11.
( 1 ) धारा 19'की उप - धारा ( 1 ) में, शब्द " कारावास से, जिसकी अवधि तीन माह से कम नहीं होगी , किन्तु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी अथवा जुर्माने से, जो रु . 5000 / - से कम का नहीं होगा किन्तु जो रु. 10000/- तक का हो सकेगा " , के स्थान पर , शब्द " शास्ति, जो पच्चीस हजार रुपये तक की हो सकेगी किन्तु दस हजार रुपये से कम की नहीं होगी " , प्रतिस्थापित किया जाए ।
(2 ) धारा 19 की उप - धारा ( 1 ) के परंतुक में, शब्द " 10000 / - " एवं " 15000/ - " के स्थान पर , शब्द " पच्चीस हजार " एवं " पचास हजार " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए । (3 ) धारा 19 की उप - धारा ( 2 ) के स्थान पर, निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाए, अर्थात्: - " ( 2 ) उप - धारा ( 1 ) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, यदि खण्ड (क) , खण्ड (ख) , खण्ड (ग) अथवा खण्ड (घ) में वर्णित अपराध , किसी वाणिज्यिक उपयोगकर्ता, औद्योगिक उपयोगकर्ता, अधोसंरचना उपयोगकर्ता या किसी बहुउपयोगकर्ता द्वारा कारित किया गया है, तो वह ऐसी अवधि के कारावास से , जो तीन माह से कम का नहीं होगा , किन्तु जो एक वर्ष तक का हो सकेगा , जुर्माने सहित, जो पच्चीस हजार रूपये से कम का नहीं होगा, किन्तु जो पचास हजार रूपये तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा:
परंतु जब कोई व्यक्ति इस धारा के अधीन किसी अपराध के लिए दूसरी बार या पश्चात्वर्ती दोषसिद्ध किया जाता है, तो वह ऐसे प्रत्येक अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि छः माह से कम नहीं होगी , किन्तु जो दो वर्ष तक का हो सकेगा तथा जुर्माने से , जो पचास हजार रूपये से कम का नहीं होगा किन्तु एक लाख रूपये तक हो सकेगा, दण्डनीय होगा ।
छत्तीसगढ़ प्राथमिक शिक्षा अधिनियम , 1961 (क्र. 33 सन् 1961 ) में,
12.
( 1 ) धारा 22 का लोप किया जाए ।
(2) धारा 23 का लोप किया जाए ।
छत्तीसगढ़ राज्य राजमार्ग अधिनियम , 2003 (क्र. 12 सन् 2003 ) में,
13.
( 1 ) धारा 7 की उप - धारा (2 ) के खण्ड (छ) के उप- खण्ड (तीन ) में, शब्द " अर्थदण्ड ", "पाँच छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 (8)
हजार " एवं "एक हजार " के स्थान पर , शब्द " शास्ति" , " दस हजार " एवं " दो हजार " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
(2 ) धारा 53 में, शब्द " सजा होने पर " विलोपित किया जाए।
(3 ) धारा 53 में, शब्द " अर्थ दण्ड" एवं " दो" के स्थान पर , शब्द " शास्ति" एवं " दस " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
(4 ) धारा 54 में शब्द एवं चिन्ह " सजा होने पर, " विलोपित किया जाए ।
( 5) धारा 54 के खण्ड ( क) में, शब्द "अर्थदण्ड, जो कि पाँच हजार रुपये तक का हो सकता है" के स्थान पर , शब्द " शास्ति से , जो पच्चीस हजार रुपये तक का हो सकेगा " . प्रतिस्थापित किया जाए ।
(6) धारा 54 के खण्ड (ख) में, शब्द " अर्थदण्ड", "एक" एवं "शास्ति" , " पाँच " एवं " दण्ड" क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए । " सजा " के स्थान पर, शब्द ( 7) धारा 55 के खण्ड ( ख) में, शब्द एवं चिन्ह " सजा होने पर, " विलोपित किया जाए। (8) धारा 55 के उप - खण्ड (एक) में, शब्द "अर्थदण्ड" एवं " पाँच " के स्थान पर, शब्द " शास्ति" एवं " पच्चीस " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
(9) धारा 55 के उप - खण्ड (दो) में, शब्द " अर्थदण्ड" एवं " दस " के स्थान पर, शब्द "शास्ति" एवं " पचास " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
(10) धारा 56 में, शब्द एवं चिन्ह " सजा होने पर, " विलोपित किया जाए ।
( 11 ) धारा 56 के खण्ड (क) में, शब्द " अर्थदण्ड " एवं " सौ" के स्थान पर, शब्द " शास्ति" एवं " एक हज़ार " क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
( 12 ) धारा 56 के खण्ड (ख ) में, शब्द " अर्थदण्ड" एवं "सौ " के स्थान पर , शब्द " शास्ति" एवं "हजार" क्रमशः प्रतिस्थापित किया जाए ।
14. छत्तीसगढ़ भूमिगत पाइपलाइन ( भूमि उपयोग के अधिकार का अर्जन ) अधिनियम , 2004 (क्र . 7 सन् 2004) में,
धारा 14 में, शब्द " साधारण कारावास, जिसका विस्तार 6 माह तक हो सकता है या जुर्माने से या दोनों से " के स्थान पर, शब्द " प्रथम अपराध के लिए दस हजार रुपये की शास्ति से, द्वितीय अपराध के मामले में, छः माह तक के साधारण कारावास या जुर्माने या दोनों से" प्रतिस्थापित किया जाए । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 (9)
उद्देश्यों और कारणों का कथन
राज्य में प्रवृत्त विभिन्न विधियों में उनके उल्लंघन की स्थिति.में अधिरोपित जुर्माना या/ और कारावास का प्रावधान किया गया है । यह न्यायिक प्रक्रिया प्रशासन के प्रभावी होने को विलम्बित रखता है । साथ ही, उल्लंघन कर्ता व्यक्ति या निकाय को लम्बे समय के लिए उलझा कर रखता है । ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस और ईज ऑफ़ लिविंग की दिशा में इन विधियों के संशोधन के लिए भारत सरकार द्वारा भी पहल की गई हैं । इन प्रयासों के अनुरूप , राज्य द्वारा पूर्व में 08 अधिनियमों के प्रावधानों में संशोधन हेतु छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन ) अधिनियम , 2025 अधिसूचित किया है । पुनः अन्य 14 अधिनियमों के प्रावधानों में संशोधन हेतु यह विधेयक प्रस्तुत है ।
और यतः , प्रशासकीय शास्ति देकर उल्लंघनकर्ता अभियोजन और संभावित दोषसिद्धि एवं अन्य कानूनी कार्यवाही से बच सकता है । विधियों के उल्लंघनों की स्थिति में गैर - अपराधीकरण करने से जीवन यापन और व्यवसाय करने में सहजता बढ़ेगी । इससे विश्वासमय शासन की स्थापना हो सकेगी ।
और यतः , कई विधियों में , आर्थिक दण्ड की सीमा में लम्बे समय से कोई परिवर्तन नहीं हुआ है । इससे उल्लंघन कर्ता के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही नहीं हो पाती । कई बार दण्ड के शुल्क की प्राप्ति की तुलना में न्यायिक प्रक्रिया में अधिक व्यय कारित हो जाता है ।
अतएव , ऐसे उल्लंघन के विरुद्ध प्रक्रिया के प्रभावी क्रियान्वयन एवं जन सामान्य के लिए ईज ऑफ़ लिविंग बढ़ाने की दृष्टि से यह विधि निर्मित की जा रही है । अतः यह विधेयक प्रस्तुत है ।
लखनलाल देवांगन रायपुर,
वाणिज्य और उद्योग मंत्री दिनांक 10 दिसम्बर , 2025
(भारसाधक सदस्य) छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928( 10)
उपाबंध
वर्तमान प्रावधान
क्र.
1. छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर अधिनियम , 1994 ( क्रमांक 2 सन् 2005 )
( 1 ) कोई भी जो, -
64. अपराध तथा शास्तियां
(क) धारा 11 या धारा 37 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के उल्लंघन में कर के रूप में किसी रकम का संग्रहण करेगा; या
(ख) धारा 13 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के उल्लंघन में आगत क्रूर पर रिबेट का दावा करेगा; या
(ग ) (एक) धारा 16 की उपधारा ( 1 ) या उपधारा (2) द्रद्वारा अपेक्षित किए गए अनुसार स्वयं को रजिस्ट्रीकृत नहीं कराएगा; या
(दो) धारा 16 की उपधारा (8 ) द्वारा अपेक्षित किये गये अनुसार कोई जानकारी देने में उपेक्षा करेगा; या
(घ) धारा 19 की उपधारा ( 1 ) द्वारा अपेक्षित किए गए अनुसार पर्याप्त कारण के बिना कोई विवरणी प्रस्तुत नहीं करेगा या मिथ्या विवरणी प्रस्तुत करेगा या मिथ्या विवरणी देगा; या
(ङ) युक्तियुक्त कारण के बिना शोध्य कर का भुगतान अनुज्ञात समय के भीतर नहीं करेगा; या
(च) धारा 41 के अधीन उससे की गई किन्हीं अपेक्षाओं के अनुसार, विक्रयों या क्रयों के लेखा या अभिलेख नहीं रखेगा , या
(छ) धारा 42 के अधीन अपेक्षित किए गए अनुसार बिल , बीजक या केशमेमों देने अथवा बिल, बीजक या केशमेमों के प्रतिपर्ण रखने या परिरक्षित करने में चूक करेगा या उपेक्षा करेगा; या
(ज) जानते हुए गलत लेखाओं, रजिस्टरों या दस्तावेजों को पेश करेगा या जानते हुए गलत जानकारी देगा; या .
(झ ) धारा 46 या धारा 57 के अधीन उससे की गई किसी अपेक्षा का अनुपालन करने से इंकार करेगा या उसका अनुपालन नहीं करेंगा; या
(ञ) ( एक) धारा 58 के अधीन घोषणा फाइल नहीं करेगा;
(दो) धारा 58 के अधीन किसी यांन की तलाशी रोकेगा या उसमें बाधा डालेगा या किसी माल का निरीक्षण करने में बाधा पहुंचाएगा; या
(तीन) धारा 60 या धारा 61 के अधीन किसी यान की तलाशी रोकेगा या उसमें बाधा डालेगा या किसी भाल का निरीक्षण करने में बाधा पहुंचायेगा; या
(चार ) धारा 62 के अधीन जानकारी नहीं देगा या लेखाओं, रजिस्टरों और दस्तावेजों को प्रस्तुत नहीं करेगा; या
(पांच ) धारा 63 द्वारा अपेक्षित किए गए अनुसार जानकारी नहीं देगा या विवरण प्रस्तुत छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 11) नहीं करेगा; या
(ट) इस अधिनियम के अधीन विहित सत्यापन या घोषणा में ऐसा मिथ्या विवरण देगा जिसके कि मिथ्या होने का या तो उसे ज्ञान है या विश्वास है, या जिसके कि सत्य होने का वह विश्वास नहीं करता है तो वह व्यतिक्रम की दशा में और धारा 67 के उपबंधों के अध्ययीन रहते हुए-
(एक) (क) खण्ड ( ख) या (ङ) के अधीन अपराध के संबंध में ऐसे कारावास से , जो छह मास तक का हो सकेगा और ऐसे जुर्माने से, जो दो हजार रुपये तक का हो सकेगा या जो व्यापारी द्वारा असंदत्त कर की रकम के बराबर हो , इनमें से जो भी अधिक हो;
और
(ख) खण्ड ( घ) , ( ज) या (ट) के अधीन अपराध के संबंध में ऐसे कारावास से, जो छः मास तक का हो सकेगा, तथा ऐसे जुर्माने से, जो दो हजार रुपये तक का हो सकेगा; और
(दो) खण्ड (एक) के अंतर्गत न आने वाले अपराधों के संबंध में ऐसे कारावास से, जो तीन मास तक का हो सकेगा , या जुर्माने से, जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा या दोनों से;
और जहां ऐसा अपराध , जिसकी बाबत् जुर्माना अधिरोपित किया गया है, चालू रहने वाला अपराध है तो अपराध चालू रहने के प्रत्येक दिन के लिए , ऐसे और जुर्माने से जो पचास रुपये तक का हो सकेगा , दण्डनीय होगा ।
स्पष्टीकरण- इस उपधारा के अधीन दण्डित किए जाने के दायित्व के प्रयोजन के लिए , अभिव्यक्ति व्यापारी या व्यक्ति में अभिप्रेरित होगा , -
(क) किसी भागीदारी व्यापार संस्था ( कन्सर्न) के संबंध में भागीदार;
(ख) किसी सहकारी सोसाइटी के संबंध में प्रबंधक निकाय का अध्यक्ष तथा सचिव;
(ग) स्वत्वधारिता वाली किसी व्यापार संस्था (कन्सर्न) के संबंध में स्वत्वधारी;
(घ) किसी हिन्दू अविभक्त कुटुंब के संबंध में कर्ता या प्रबंधक; और
(ङ) कंपनी अधिनियम , 1956 ( 1956 का सं . 1 ) के अधीन निगमित किसी कंपनी के संबंध में सचिव , प्रबंधक तथा निदेशक ।
(2) कोई भी न्यायालय इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम के अधीन दण्डनीय अपराध का संज्ञान , आयुक्त की पूर्व मंजूरी के बिना नहीं करेगा और प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट के न्यायालय से कोई भी अपर न्यायालय किसी ऐसे अपराध का विचारण नहीं करेगा ।
2. छत्तीसगढ़ सिनेमा ( विनियमन ) अधिनियम , 1952 ( क्रमांक 17 सन् 1952)
7. दंड. इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बने नियमों के प्रावधानों अथवा जिन पर या जिनके अध्यधीन कि इस अधिनियम के अंतर्गत अनुज्ञप्ति प्रदान की गई हो, उन शर्तों तथा प्रतिबंधनों के प्रतिकूल यदि, चलक्षेपित्र का स्वामी अथवा उसका प्रभारी व्यक्ति छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 12)
उसका प्रयोग करता है अथवा उसका प्रयुक्त होना स्वीकार करता है अथवा किसी स्थान का स्वामी या अधिभोगी ( कब्जेदार ) उस स्थान के प्रयोग करने की अनुमति देता है तो वह एक हजार रुपए तक के अर्थदंड से तथा निरंतर अपराध की दशा में , ऐसे अतिरिक्त अर्थदंड से जो उस प्रतिदिन के लिए जिसमें अपराध जारी रहता है 100 रूपये तक हो सकता है , दंडनीय होगा ।
3. छत्तीसगढ़ राजिम कुम्भ ( कल्प ) मेला अधिनियम , 2006 ( क्रमांक 22 सन् 2006 ) 10. दंड. कोई व्यक्ति जो -
( 1 ) मेला क्षेत्र में कोई अप्राधिकृत निर्माण करता है , या
(2 ) मेला क्षेत्र में किसी अप्राधिकृत स्थान का उपयोग शौचालय , पेशाबघर अथवा पूरे के रूप में करता है , या
(3) धारा 5 के प्रावधानों के अंतर्गत लाईसेंस प्राप्त किए बिना कोई व्यवसाय या व्यापार करता है अथवा ऐसे लाईसेंस की शर्तों का उल्लंघन करता है, या
(4) इस अधिनियम के उपबंधों या इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों का उल्लंघन करता है , या
(5) इस अधिनियम के अंतर्गत विधिसम्मत तरीके से जारी किसी आदेश अथवा लिखित निर्देश का उल्लंघन करता है ,
तो साधारण कारावास से जो 3 माह तक हो सकेगा, अथवा जुर्माने से जो रुपये एक हजार तक हो सकेगा अथवा दोनों से, और जहां अपराध जारी रहता है, अथवा बार -बार किया जाता है , तो और जुर्माने से जो प्रथम दोषसिद्धि के दिनांक से जिस दौरान अपराधी के द्वारा अपराध किया जाना प्रमाणित हुआ है प्रतिदिन रु. 100/- ( सौ रुपये मात्र) तक हो सकेगा , दंडित किया जाएगा ।
4. छत्तीसगढ़ मत्स्य क्षेत्र अधिनियम , 1948 ( क्रमांक 8 सन् 1948) में,
5. शास्तियां.- यदि कोई व्यक्ति इस अधिनियम या तदाधीन निर्मित नियमों में से किसी का भी उल्लंघन करे तो वह दोषसिद्धि पर, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रूपये तक हो सकेगी, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
5. छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना ( नियोजन तथा सेवा की शर्तों का विनियमन ) अधिनियम , 2017 ( क्रमांक 21 सन् 2018 )
20. इस अधिनियम के प्रावधानों के उलंघन के लिए शास्ति.-
(1 ) जो कोई , इस अधिनियम था इसके अधीन बनाये गये नियमों के प्रावधानों का उल्लंघन करता है , तो उसे ऐसे जुर्माने , जो दो लाख रूपये तक का हो सकेगा और निरंतर उल्लंघन की दशा में , प्रत्येक दिन , जिसके दौरान उल्लंघन जारी रहता है , के लिए अतिरिक्त जुर्माने जो दो हजार रूपये तक का हो सकेगा , से दण्डित किया जायेगा। परंतु जुर्माने की कुल राशि, नियोजित प्रति कर्मकार दो हजार रूपये से अधिक नही होगी। छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 (13) (2) यदि कोई व्यक्ति, जिसे उप - धारा ( 1 ) के अंतर्गत दण्डनीय किसी अपराध का सिद्धदोष ठहराया गया हो , पुनः उसी प्रावधान के उल्लंघन अंतर्वलित अपराध का, या उसके अनुपालन में विफलता का , दोषी पाया जाता है . तो उसे, पश्चातवर्ती दोषसिद्धी पर जुर्माने, जो एक लाख रुपये से कम नहीं होगा किन्तु जो पांच लाख रूपये तक का हो सकेगा , से दण्डित किया जायेगा ।
22. पंजी , आदि उपलब्ध कराने हेतु अवरोध, इंकार हेतु शास्ति.- ( 1 ) जो कोई , इस अधिनियम के अधीन या इसके द्वारा प्रदत्त किसी शक्ति का प्रयोग करने से , फैसिलिटेटर को जानबूझकर बाधा पहुंचाता है या इंकार करता है अथवा फैसिलिटेटर को दुकान या स्थापना के संबंध में इस अधिनियम अधीन या इसके द्वारा प्राधिकृत कोई निरीक्षण , परीक्षण , जांच एव अन्वेषण करने के लिए कोई भी युक्तियुक्त सुविधा उपलब्ध कराने से जानबूझकर उपेक्षा करता है, तो वह जुर्माने , जो दो लाख रूपये तक का हो सकेगा , से दण्डित किया जायेगा ।
(2) जो कोई , इस अधिनियम या इसके अधीन बनाये गये नियमों के अनुसरण में रखे गये कोई पंजी या अन्य दस्तावेज , फैसिलिटेटर द्वारा मांगे जाने पर , प्रस्तुत करने से जानबूझकर इंकार करता है अथवा इस अधिनियम के अन्तर्गत उसके कर्तव्य के अनुसरण में कार्यवाही हेतु फैसिलिटेटर के समक्ष उपस्थित होने से या उसके द्वारा परीक्षा किये जाने से, किसी व्यक्ति को रोकता है या रोकने का प्रयास करता हो या यह विश्वास करने का कारण है कि रोकने हेतु कुछ भी कार्य करता है , तो उसे जुर्माने, जो दो लाख रूपये तक का हो सकेगा , से दण्डित किया जायेगाः
परंतु जुर्माने की कुल राशि, नियोजित प्रति कर्मकार दो हजार रूपये से अधिक नहीं होगी ।
6. छत्तीसगढ श्रम कल्याण निधि अधिनियम , 1982 ( क्रमांक 36 सन् 1983)
31. निरीक्षक को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में बाधा पहुंचाने के लिये या दस्तावेज आदि पेश न करने के लिये शास्ति. ( 1 ) कोई भी व्यक्ति, जो किसी निरीक्षक को इस अधिनियम के अधीन की अपनी शक्तियों का प्रयोग करने में या अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में जानबूझकर बाधा पहुंचायेगा , या किसी निरीक्षक द्वारा मांग की जाने पर किन्हीं ऐसे रजिस्टरों, अभिलेखों या अन्य दस्तावेजों को, जो इस अधिनियम के या उसके अधीन बनाये गये नियमों के उपबंधों के अनुसरण में रखे गये हैं, निरीक्षण के लिये पेश नहीं करेगा, या मांग की जाने पर ऐसे किन्हीं दस्तावेजों की सत्य प्रतिलिपियों का उसे प्रदाय नहीं करेगा , वह दोषसिद्धि पर , -
(क) प्रथम अपराध के लिये , कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से; और
(ख) द्वितीय या पश्चात्वर्ती अपराध के लिये , कारावास से जिसको अबधि छह मास तक की हो सकेगी , या जुर्माने से, जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया जाएगा.
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 14)
परन्तु जहां अपराधी को केवल जुर्माने से दण्डादिष्ट किया जाता है , वहां जुर्माने को रकम एक सौ रुपये से कम नहीं होगी .
(2) यदि कोई नियोजक , -
(क) ऐसे अभिदाय या किसी ऐसी राशि का , जिसका भुगतान करने के लिये वह इस अधिनियम के अधीन दायी है , भुगतान करने में चूक करता है, या
(ख ) इस अधिनियम की या उसके अधीन बनाये गये नियमों या विनियमों की किन्हों अपेक्षाओं के किसी ऐसे उल्लंघन का या अननुपालन का दोषी है जिसके संबंध में कोई शास्तिउपबंधित नहीं की गई है, तो वह कारावास से , जो एक वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से, जो दो हजार रुपये तक का हो सकेगा , या दोनों से , दण्डनीय होगा .
7. छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम , 1993 (क्रमांक 1 सन् 1994)
55. भवनों के परिनिर्माण पर नियंत्रण. ( 1 ) इस धारा के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए , कोई भी व्यक्ति ग्राम पंचायत की लिखित अनुज्ञा के बिना इस अधिनियम के अधीन इस संबंध में बनाई गई उपविधियों के अनुसार के सिवाय, किसी भवन का परिनिर्माण नहीं करेगा या किसी विद्यमान भवन में कोई परिवर्तन या परिवर्धन नहीं करेगा या किसी भवन का पुनर्निर्माण नहीं करेगा । यदि आवेदन प्राप्त होने की तारीख से पैंतालीस दिन के भीतर ऐसी अनुज्ञा देने से इंकार करने की संसूचना ग्राम पंचायत द्वारा नहीं दी जाती है तो यह उपधारित किया जाएगा कि अनुज्ञा दे दी गई है ।
(1 - क) 1 जनवरी , 2005 के पश्चात् जल वाहित शौचालय के प्रावधान के अभाव में भवन के निर्माण/पुननिर्माण/ मरम्मत कार्य की अनुमति, ग्राम पंचायत द्वारा नहीं दी जाएगी ।
(2) यदि कोई व्यक्ति, ग्राम पंचायत की अनुज्ञा के बिना , और किन्हीं ऐसी शर्तों के, जिनके अधीन अनुज्ञा दी गई है , प्रतिकूल, किसी भवन का परिनिर्माण करता है, उसमें परिवर्तन अथवा परिवर्धन करता है, या उसका पुनर्निर्माण करता है , तो ग्राम पंचायत ऐसे व्यक्ति को लिखित सूचना द्वारा ऐसा निदेश दे सकेगी कि वह ऐसे परिनिर्माण , परिवर्धन या पुनर्निर्माण को रोक दे और सूचना में विनिर्दिष्ट कालावधि के भीतर ऐसे परिनिर्माण , परिवर्तन , परिवर्धन या पुनर्निर्माण को परिवर्तित कर दे या गिरा दे, जैसा कि वह लोक हित में आवश्यक समझे ।
(3) यदि कोई व्यक्ति ग्राम पंचायत द्वारा उपधारा (2 ) के अधीन तामील की गई सूचना में अन्तर्विष्ट निर्देशों का पालन ऐसी सूचना में विनिर्दिष्ट कालावधि के भीतर नहीं करता है तो ग्राम पंचायत स्वयं ऐसी कार्यवाही जो ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाने के लिए अपेक्षित है, ऐसे व्यक्ति के व्यय पर कर सकेगी और ऐसे व्यय का संदाय उस व्यक्ति द्वारा उस तारीख से, जिसको ग्राम पंचायत द्वारा मांग सूचना तामील की गई है, तीस दिन के भीतर किया जाएगा । विनिर्दिष्ट कालावधि के भीतर व्ययों का संदाय न किये जाने पर , उनकी वसूली भू- राजस्व के बकाया के तौर की जावेगी । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 15) (3 -क) उपधारा ( 3 ) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी जो कोई इस धारा के किन्हीं उपबंधों या उसके अधीन बनाए गए नियमों या उपविधियों का या ग्राम पंचायत द्वारा दी गई अनुज्ञा की शर्तों का उल्लंघन करता है या उपरोक्त में से किन्हीं उपबंधों के अधीन दिए गए किन्हीं विधिपूर्ण निदेशों या अध्यपेक्षाओं का पालन करने में असफल रहता है, तो वह ग्राम पंचायत द्वारा या इस प्रयोजन के लिए राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा अभियोजित किया जा सकेगा और दोषसिद्धि पर वह साधारण कारावास से जो छह मास तक का हो सकेगा या जुर्माने से जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से , और अपराध के चालू रहने की दशा में ऐसे और जुर्माने से जो प्रथम दोषसिद्धि की तारीख के पश्चात् प्रत्येक दिन के लिए जिसको कि अपराध चालू रहता है, दो सौ पचास रुपये तक का हो सकेगा , दण्डित किया जाएगा ।
(4) उपधारा (2 ) के अधीन ग्राम पंचायत के किसी निदेश या सूचना के विरुद्ध अपील विहित प्राधिकारी को की जा सकेगी और विहित प्राधिकारी का ऐसी अपील पर विनिश्चय अंतिम होगा।
56. सार्वजनिक मार्गों तथा खुले स्थलों पर रुकावटें, बाधा तथा अधिक्रमण.-
( 1 ) कोई भी जो, ग्राम पंचायत क्षेत्र के भीतर किसी सार्वजनिक मार्ग या खुले स्थलों पर या ऐसे मार्ग पर स्थित किसी नाली पर-
(क) किसी दीवाल , बाइ , जंगले, खम्भे, स्टाल , बरामदे , चबूतरे कुर्सी, सीढ़ी या कोई अन्य संरचना का निर्माण करके या बनाकर; या
(ख ) ग्राम पंचायत की लिखित, अनुज्ञा के बिना या ऐसी अनुज्ञा में अनुज्ञां में उल्लिखित शर्तों के प्रतिकूल कोई बरामदा , छज्जा, कमरा या अन्य किसी संरचना का निर्माण इस प्रकार करके कि जिससे वह किसी सार्वजनिक सड़क पर या ऐसी सड़क पर स्थित किसी नाली पर आगे निकला हुआ प्रलंबित हो; या
(ग) किसी स्थल से मिट्टी , रेत या अन्य सामग्री अपराधिक रूप से हटाकर ; या (घ ) किसी चारागाह या अन्य भूमि में अप्राधिकृत रूप से खेती करके कोई रुकावट, बाधा या अधिक्रमण करेगा ,
जुर्माने से, जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा और चालू रहने वाले अपराध के मामले में ऐसे और जुर्माने से जो ऐसे अपराध के लिये प्रथम दोषसिद्धि की तारीख के पश्चात् ऐसे प्रत्येक दिन के लिये, जिसके दौरान ऐसा अधिक्रमण , बाधा चालू रहती है या आगे निकला हुआ भाग बना रहता है , बीस रुपये तक का हो सकेगा, दण्डित किया जा सकेगा ।
(2 ) उपधारा ( 1 ) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , ग्राम पंचायत की ऐसी किसी बाधा या अधिक्रमण को हटाने और चारागाह या किसी अन्य भूमि पर , जो निर्ण संपत्ति न हो , अप्राधिकृत रूप से उगाई गई फसल को हटाने की शक्ति होगी और उसे कियी ऐसे खुले स्थल में कि, जो निजी संपत्ति न हो चाहे वह स्थल ग्राम पंचायत में निहित ही वया न, उसी प्रकार की किसी अप्राधिकृत बाधा या अधिक्रमण या आगे निकले छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 16)
हुए भाग को हटाने के लिये भी वैसी ही शक्ति होगी , और इस प्रकार हटाये जाने के व्ययों का संदाय उस व्यक्ति द्वारा किया जायेगा जिसने उक्त अधिक्रमण किया है और ऐसे व्ययों का संदाय न किये जाने पर ऐसा व्यय भू- राजस्व के बकाया के तौर पर उस व्यक्ति से वसूल किया जा सकेगा परन्तु उपधारा ( 1 ) तथा इस उपधारा में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, यदि ग्राम पंचायत , राज्य सरकार में निहित किसी भूमि पर से किसी रुकावट , बाधा या अधिक्रमण को हटाने के लिए संकल्प करती है, तो वह ऐसी भूमि से ऐसी रुकावट , बाधा या अधिक्रमण की हटाने के लिए तहसीलदार को संसूचित कर सकेगी और तहसीलदार ऐसा करने के लिए छत्तीसगढ़ भू- राजस्व संहिता , 1959 (क्रमांक 20 सन् 1959 ) के उपबन्धों के अधीन कार्यवाही करेगा।
(3) ग्राम पंचायत , इस धारा में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी त्यौहारों तथा उत्सवों के अवसरों पर, अधिक से अधिक दस दिन के लिये किसी सार्वजनिक स्थान का , ऐसी रीति में जिससे जनता को या किसी व्यक्ति को असुविधा न हो, अस्थायी रूप से अधिभोग किए जाने या उस पर कोई परिनिर्माण किए जाने या आगे निकला हुआ भाग निर्मित करने की अनुज्ञा इस अधिनियम के अधीन बनाई गई उपविधियों के अनुसार दे सकेगी ।
(4) ग्राम पंचायत इस धारा के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए कोई आदेश तब तक पारित नहीं करेगी जब तक कि संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का
युक्तियुक्त अवसर नहीं दे दिया गया है।
60. जनपद पंचायत में निहित सड़कों और भूमियों पर अधिक्रमण.- ( 1 ) जो कोई , जनपद पंचायत में निहित किसी सड़क, मार्ग , भूमि, भवन या संरचना पर कोई परिनिर्माण करेगा या अधिक्रमण करेगा या कोई बाधा खड़ी करेगा, दोषसिद्धि पर, जुर्माने से, जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा , दण्डित किया जाएगा।
(2) मुख्य कार्यपालक अधिकारी को ऐसी बाधा या अधिक्रमण हटाने की शक्ति होगी और इस प्रकार हटाये जाने के व्ययों का संदाय उस व्यक्ति द्वारा किया जाएगा जिसने उक्त बाधा खड़ी की है या अधिक्रमण किया है तथा उसके द्वारा संदाय न किया जाने पर उसे भू- राजस्व के बकाया के तौर पर वसूल किया जा सकेगाः
परन्तु मुख्य कार्यपालक अधिकारी ऐसी बाधा या अधिक्रमण को हटाने की कार्यवाही करने के पूर्व , लिखित सूचना द्वारा , उस व्यक्ति से, जिसने ऐसी बाधा खड़ी की है या अधिक्रमण किया है, यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह सूचना में विनिर्दिष्ट समय के भीतर उसे हटा ले या इस संबंध में कारण दर्शित करे कि उसे क्यों न हटा दिया जाए ।
(3) इस धारा में की कोई बात, किसी जनपद पंचायत को त्यौहारों तथा अवसरों पर ऐसी कालावधि के लिए , जो वह उचित समझे , उपधारा ( 1 ) में उल्लिखित स्थानों का , ऐसी रीति में जिससे जनता को या किसी भी व्यक्ति को असुविधा न हो , अस्थायी रूप से अधिभोग करने या उस पर कोई परिनिर्माण करने की अनुज्ञा देने से निवारित नहीं छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928( 17) करेगा ।
61- घ. अवैध कालोनी निर्माण के लिए दण्ड. ( 1 ) कालोनी निर्माण करने वाला कोई व्यक्ति, जो छत्तीसगढ़ भू- राजस्व संहिता , 1959 ( क्रमांक 20 सन् 1959 ) की धारा 172 के तथा उसके अधीन बनाये गए नियमों के उपबंधों का उल्लंघन करके किसी भूमि या उसके भाग को व्यपवर्तित करता है , वह भूमि के अवैध व्यपवर्तन का अपराध करता है । ( 2 ) कालोनी निर्माण करने वाला कोई व्यक्ति, जो कालोनी स्थापित करने के उद्देश्य से , अपनी भूमि को या किसी अन्य व्यक्ति की भूमि को, इस अधिनियम या इस निमित्त बनाए गए नियमों में अनुध्यात् अपेक्षाओं का भंग करके भू- खण्डों में विभाजित करता है, वह अवैध कालोनी निर्माण का अपराध करता है ।
(3) जो कोई , अवैध व्यपवर्तन का या अवैध कालोनी निर्माण का अपराध करेगा या उसके किये जाने का दुष्प्रेरण करेगा , वह सादा कारावास से, जो छह मास तक का हो सकेंगा या जुर्माने से, जो कम से कम दस हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।
(4) जो कोई अवैध व्यपवर्तन के या अवैध कालोनी निर्माण के किसी क्षेत्र में कोई भवन सन्निर्मित करता है, वह अवैध सन्निर्माण का अपराध करता है ।
(5) जो कोई अवैध सन्निर्माण का अपराध करेगा , वह सादा कारावास से , जो छह मास तक का हो सकेगा या जुर्माने से, जो कम से कम एक हजार रुपये तक का हो सकेगा , या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
61-ङ. अवैध सन्निर्माण के अपराध का दुष्प्रेरण करने के लिए दण्ड, जो कोई अवैध व्यवपर्तन के या अवैध कालोनी निर्माण के या अवैध सन्निर्माण के किसी क्षेत्र में.- (एक) भवन के सन्निर्माण के लिए अभिन्यास (ले-आउट) या नक्शा मंजूर करने की शक्ति रखने वाला अधिकारी होते हुए ऐसा अभिन्यास या नक्शा मंजूर या अनुमोदित करेगा, या
(दो) ऐसा अधिकारी होते हुए जिसका प्राथमिक कर्तव्य ऐसा करना हो, ऐसे किसी क्षेत्र में भूमि के अवैध व्यपवर्तन की या किसी भवन के अवैध सन्निर्माण की रिपोर्ट समुचित प्राधिकारी को करने का जानबूझकर लोप करेगा; या
(तीन ) ऐसा अधिकारी या ऐसा कर्मचारी होते हुए जो ऐसे किसी क्षेत्र में भूमि के अवैध व्यपवर्तन के या अवैध कालोनी निर्माण के या भवन के अवैध सन्निर्माण के विरुद्ध कार्रवाई करने का उत्तरदायी है, कार्रवाई करने में असफल रहता है; या
(चार) विद्युत् या जल प्रदाय संयोजन ( कनेक्शन) मंजूर करने के लिये सक्षम अधिकारी या प्राधिकरण होते हुए , ऐसे किसी क्षेत्र में के किसी भवन के संबंध में ऐसे संयोजन की मंजूरी देगा ; या
(पांच ) पूर्वोक्त अधिकारियों पर , ऐसी मंजूरी देने के लिये या भूमि के ऐसे अवैध व्यपवर्तन की या क्षेत्र में किसी भवन के सन्निर्माण की रिपोर्ट करने का लोप करने के लिये, अवैध रूप से असर डालेगा, छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 18)
वह सादा कारावास से, जो छह मास तक हो सकेगा , या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जायेगा :
परन्तु खण्ड (चार ) में अन्तर्विष्ट कोई बात उन मामलों में लागू नहीं होगी जहां कलक्टर राज्य सरकार के अनुमोदन से प्रमाणित करता है कि अवैध व्यपवर्तन या अवैध कालोनी निर्माण के क्षेत्र में भवन के संबंध में विद्युत् तथा जल प्रदाय का संयोजन देने में लोकहित में कोई आपत्ति नहीं है ।
95. नियम बनाने की शक्ति. ( 1 ) राज्य सरकार , इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी ।
(2) विशिष्टतः और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियमों में उन समस्त या किन्हीं विषयों के लिए उपबन्ध हो सकेंगे जिनके लिए इस अधिनियम के किसी उपबन्ध के अधीन नियमों द्वारा विहित किया जाना या उपबन्धित किया जाना अपेक्षित है ।
(3 ) समस्त नियम पूर्व प्रकाशन की शर्त के अध्यधीन होंगे।
(4) समस्त नियम विधान सभा पटल पर रखे जायेंगे ।
(5 ) कोई नियम बनाते समय, राज्य सरकार यह निर्देश दे सकेगी कि उसका भंग , जुर्माने से, जो दो सौ पचास रुपये तक का हो, कर सकेगा , और चालू रहने वाले भंग की दशा में, अतिरिक्त जुर्माने से , जो प्रथम दोषसिद्धि के पश्चात् से ऐसे प्रत्येक दिन के लिए , जिसके दौरान भंग चालू रहता है, पांच रुपये तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा। 96. उपविधियां.- ( 1 ) पंचायत इस अधिनियम तथा उसके अधीन बनाये गये नियमों से संगत उपविधियां बना सकेगी ।
(2) उपधारा ( 1 ) के अधीन उपविधियां बनाते समय , पंचायत यह निर्देश दे सकेगी कि उसका भंग , जुर्माने से जो दो सौ पचास रुपये तक का हो सकेगा और चालू रहने वाले भंग की दशा में अतिरिक्त जुर्माने से, जो प्रथम दोषसिद्धि के पश्चात् से ऐसे प्रत्येक दिन के लिए , जिसके दौरान भंग चालू रहता है , पांच रुपये तक का हो सकेगा , दण्डनीय होगा।
(3) कोई उपविधि तब तक प्रवृत्त नहीं होगी जब तक कि विहित प्राधिकारी द्वारा उसकी पुष्टि न कर दी जाए ।
(4) उपविधियां बनाने तथा उनके अनुमोदन की रीति ऐसी होगी जो विहित की जाए। 98. निरर्हित हो जाने पर पंच, सदस्य , सरपंच, उप- सरपंच , अध्यक्ष, उपाध्यक्ष की हैसियत में कार्य करने के लिए शास्ति. ( 1 ) जो कोई यह जानते हुए कि वह किसी पंचायत के पंच या सदस्य का पद धारण करने का हकदार नहीं है या उस रूप में पद धारण करने का हकदार नहीं रह गया है ऐसे पंच वा सदस्य की हैसियत से कार्य करेगा दोषसिद्धि पर जुर्माने से, जो ऐसे प्रत्येक दिन के लिए , जिसको वह ऐसे पंच या सदस्य की हैसियत से बैठता है या मत देता है, पचास रुपये तक का हो सकेगा , दण्डित किया जाएगा । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 19) (2) जो कोई यह जानते हुए कि वह सरपंच या उपसरपंच , अध्यक्ष या उपाध्यक्ष, का पद धारण करने का हकदार नहीं है या उस रूप में ऐसा पद धारण करने का हकदार नहीं रह गया है , उस हैसियत से कार्य करेगा , दोषसिद्धि पर , जुर्माने से , जो ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसको वह उस हैसियत में कार्य या कृत्य करेगा, एक सौ रुपये तक का हो सकेगा , दण्डित किया जाएगा।
(3) कोई व्यक्ति, जिसको पदावधि का अवसान हो गया है, या जिसने त्यागपत्र दे दिया है, या जिसके विरुद्ध अविश्वास का प्रस्ताव पारित कर दिया है, या जिसे पंचायत के किसी पद से हटा दिया है, अपने कब्जे या नियंत्रण में के ऐसे किसी अभिलेख , वस्तु या धन , या अन्य सम्पत्ति, जो पंचायत में निहित है, या पंचायत की है, अपने पदोत्तरवर्ती को तत्काल नहीं सौंपेगा, या दोषसिद्धि पर , जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा , दंडित किया जाएगा ।
99. हितबद्ध सदस्यों द्वारा मत दिए जाने के लिए शास्तियां.- जो कोई किसी ऐसे मामले में जो पंचायत के विचाराधीन हो हितबद्ध होते हुए उस मामले में मत देगा, दोषसिद्धि पर , जुर्माने से जो दो सौ पचास रुपये तक का हो सकेगा , दण्डित किया जाएगा।
102. पंचायतों के सदस्य आदि को बाधा पहुंचाने का प्रतिषेध.- कोई भी व्यक्ति जो पंचायत के किसी सदस्य , पदधारी या सेवक को या किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसके साथ किसी पंचायत द्वारा या उसकी ओर से कोई संविदा की गई है , उसके कर्तव्य के निर्वहन में या कोई ऐसी बात करने में जिसे करने के लिए वह सशक्त है, बाधा पहुंचाएगा वह दोषसिद्धि पर , जुर्माने से, जो दो सौ पचास रुपये तक का हो सकेगा , दण्डित किया जाएगा ।
103. सूचना को हटाने या मिटाने का प्रतिषेध. कोई भी व्यक्ति, जो पंचायत या उसके किसी अधिकारी द्वारा या उसके आदेशों के अधीन प्रदर्शित की गई किसी सूचना को या परिनिर्मित किए गए किसी संकेत या चिन्ह को उस निमित्त किसी प्राधिकार के बिना हटाएगा , विनष्ट करेगा या विरूपित करेगा या अन्य प्रकार से मिटायेगा वह दोषसिद्धि पर, जुर्माने से , जो पचास रुपये तक का हो सकेगा , दण्डित किया जाएगा ।
104. जानकारी न देने या मिथ्या जानकारी देने के लिए शास्ति. कोई व्यक्ति जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों द्वारा उसके अधीन जारी की गई किसी सूचना या किसी अन्य आदेशिका द्वारा कोई जानकारी देने के लिए अपेक्षित किया गया है, ऐसी जानकारी देने का लोप करेगा या जानबूझकर मिथ्या जानकारी देगा , दोषसिद्धि पर , जुर्माने से, जो दो सौ पचास रुपये तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा। 105. बोली लगाने का प्रतिषेध. ( 1 ) पंचायत का कोई सदस्य, या सेवक या ऐसा कोई अधिकारी , जिसे इस अधिनियम के अधीन जंगम या स्थावर संपत्ति के विक्रय के संबंध में किसी कर्तव्य का पालन करना है, ऐसे विक्रय में बेची जाने वाली किसी संपत्ति के लिए प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः बोली नहीं लगाएगा या उसमें कोई हित अर्जित नहीं छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 20)
करेगा।
(2 ) कोई व्यक्ति जो उपधारा ( 1 ) के उपबन्धों का उल्लंघन करेगा दोषसिद्धि पर जुर्माने से , जो दो सौ पचास रुपये तक का हो सकेगा , दण्डित किया जाएगा और यदि वह पंचायत का अधिकारी या सेवक है तो वह सेवा से हटाए जाने का भी दायी होगा । 8. छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अधिनियम , 1972 ( क्रमांक 3 सन् 1972 )
77. शास्ति.- यदि कोई व्यक्ति
(क) किसी व्यक्ति का , जिसके कि साथ गृह निर्माण आयुक्त ने मण्डल की ओर से कोई संविदा की हो , ऐसे व्यक्ति द्वारा उसके कर्तव्य या किसी ऐसी ब्रात का, जिसे इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के आधार पर या उसके परिणाम स्वरूप के लिए वह सशक्त किया गया हो या अपेक्षित किया गया हो , पालन किया जाने या निष्पादन किया जाने में बाधा पहुंचायेगा या छेड़ेगा , या
(ख) इस अधिनियम या उसके अधीन बनाये गए किसी नियम या विनियम या मन्जूर को गई किसी स्कीम द्वारा प्राधिकृत संकर्मों के निष्पादन के लिए आवश्यक किसी तल या दिशा को उपदर्शित करने के प्रयोजन के लिए किये गए किसी चिन्ह को हटायेगा, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से , एक हजार रूपये तक का हो सकेगा , या दोनों से, दंडनीय होगा ।
78. इस अधिनियम आदि के उपबन्धों के भंग के लिए शास्ति. जो कोई इस अधिनियम या उसके अधीन बनाये गए किसी नियम या विनियम या उपविधि या मन्जूर की गई किसी स्कीम के उपबन्धों में से किसी उपबन्ध का उल्लंघन करेगा, वह यदि ऐसे उल्लंघन के लिए कोई अन्य शास्ति उपबन्धित न की गई हो -
(क) कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो एक हजार रूपए तक का हो सकेगा , या दोनों से, दण्डनीय होगा, और
(ख) चालू रहने वाले उल्लंघन की दशा में , जुर्माने से, जो प्रथम उल्लंघन के पश्चात प्रत्येक ऐसे दिन के लिए , जिसके दौरान उल्लंघन चालू रहे , पचास रुपए तक का हो सकेगा,
दंडनीय होगा ।
9. छत्तीसगढ़ सिंचाई अधिनियम, 1931 ( क्रमांक 3 सन् 1931 )
75 - एफ. खेत सरणियों में जल के प्रवाह में बाधा या हस्तक्षेप , कतिपय प्रकरणों में निषिद्ध. (1 ) कोई व्यक्ति ऐसे नियमों के अनुसार जैसे कि निर्धारित किया जावे के सिवाय, कोई कार्य नहीं करेगा जो खेत सरणी में जब प्रवाह को बाधा पहुंचाता या हस्तक्षेप करता है, या जिससे बाथा या हस्तक्षेप संभावित है ।
(2) यदि कोई व्यक्ति उपधारा ( 1 ) के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, तो वह 6 माह तक के कारावास या एक हजार रुपये तक के अर्थ दण्ड या दोनों से दंडित किया जा सकता है ।
92. नियमों के बारे में सामान्य प्रावधान. ( 1 ) सभी नियम, जिनके लिये इस अधिनियम छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 21) में प्रावधान किया गया है, राज्य शासन द्वारा इस अधिनियम के अनुरूप निमित किये जाएंगे ।
(2) सभी नहर प्रणालियों के लिये या सभी नहर प्रणालियां . जो स्पष्ट रूप से इसके प्रवर्तन से मुक्त न की गई हों के लिये एक सामान्य नियम होगा या एक या उससे अधिक प्रणालियों के लिये या उनके भाग के लिये विशेष नियम होगा , जैसा कि राज्य शासन निर्देशित करे ।
(3 ) धारा 21 एवं 22 हेतु और अध्याय आठ- A में प्रावधानित नियमों के अतिरिक्त , सभी नियम पूर्व प्रकाशन की शर्त के अध्यधीन होंगे ।
(4) विलोपित।
(5) किसी भी नियम के निर्माण में राज्य शासन आदेश दे सकेगा कि उसका उल्लंघन, अर्थदण्ड जो 250/- रु. तक होगा से दण्डित होगा , और जहां उल्लंघन निरन्तर जारी है, तो ऐसे अर्थदण्ड से, जो प्रत्येक दिन के लिये रु.10/- तक होगा जबकि ऐसा उल्लंघन प्रथम उल्लंघन के दिन के बाद जितने समय तक जारी रहा ।
(6) इस धारा द्वारा प्रवत्त नियम बनाने की शक्ति में, नियमों को या किसी नियम को भूतलक्षी प्रभाव से लागू करने की शक्ति सम्मिलित है ।
(7) इस अधिनियम के अन्तर्गत निर्मित सारे नियम , विधान सभा के पटल पर रखे जायेंगे ।
94. अपराध और शास्तियां. जो कोई उचित प्राधिकर के बिना , निम्नलिखित कार्यों में से कोई भी कार्य करेगा , अर्थातः-
(ए) किसी नहर को नुकसान पहुंचायेगा , उसे परिवर्तित करेगा या उसे बढ़ायेगा या उसमें बाधा डालेगा;
(बी) किसी नहर में के जल -प्रदाय में जल के उस प्रवाह में जो कि उस नहर से , उस नहर में होकर उस नहर के ऊपर या नीचे होता हो , हस्तक्षेप करेगा , वृद्धि करेगा या कमी करेगा;
(सी) किसी नदी या सरिता में के जल प्रवाह में ऐसा हस्तक्षेप करेगा या ऐसा परिवर्तन करेगा जिससे कि कोई नहर सकटापक्ष हो जाय , उसे नुकसान पहुँच यह कम उपयोगी हो जाय;
(डी) किसी जलधारा के अनुरक्षण के लिये उत्तरादायी होते हुये या उस जलधारा का उपयोग करते हुये , उसके जल की बरबादी को रोकने के लिये उचित पूर्वसावधानी बरतने गें उपेक्षा करेगा या उरा जलधारा में रो पानी के आधिकृत वितरण में हरतक्षेप करेगा या ऐसे जल का अप्राधिकृत रीति में उपयोग करेगा;
(ई) सिंचाई के लिये अपने खेत में जल प्राप्त करते समय , ऐसे जल की बरबादी को रोकने के लिये उचित पूर्वसावधानी बरतने में उपेक्षा करेंगा,
(एफ) किसी नहर के जल को इस प्रकार दूषित करेगा या गंदा करेगा कि जिससे उन प्रयोजनों के लिये , जिनके लिये कि वह सामान्यतः उपयोग में लाया जाता है । उनकी छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 22 )
उपयुक्तता में कमी आ जाए;
(जी) किसी ऐसे ग्राम में , जिसमें धारा 36 के अधीन उद्घोषणा की गई हो . निवास कर रहा स्थायी धारक, अभियोगी, खेतिहर या कृषि श्रमिक होते हुये, नियत किये गये स्थान पर हाजिर होने में उपेक्षा करेगा या उसे आवंटित किये गये कर्तव्यों का पालन करने से इन्कार करेगा या उसकी उपेक्षा करेगा ।
(एच) किसी नहर अधिकारी के प्राधिकार से लगाये गये किसी भूमि चिन्ह, तल- चिन्ह, जलमापी या अन्य साधित्र को नष्ट करेगा, क्षति पहुंचायेगा , विरूपित करेगा या हटायेगा;
(आई) किसी नहर के किन्हीं भी संकर्मों , तटों या जलसरणियों पर से या उनके आर - पार पशुओं या वाहनों को उस दशा में गमन करायेगा जबकि ऐसा गमनाधिकार किसी नहर अधिकारी द्वारा प्रतिषिद्ध कर दिया गया हो;
(जे) किसी नहर के तट या सीमा पर पशुओं को चरवायेगा या रस्सी से बांधकर रखवायेगा या जानते हुये और जानबूझकर उन्हें चरने देगा या रस्सी से बांधकर रखा जाने देगा जब कि ऐसा चरना या रस्सी से बांध कर रखा जाना किसी नहर अधिकारी द्वारा प्रतिषिद्ध कर दिया गया हो;
(के) किसी नहर पर उगे हुए किसी वृक्ष, झाड़ी, घास या अन्य वनस्पति को हटायेगा या क्षति पहुँचायेगा , या
(एल) किसी नहर के तटों पर या उसकी जल सरणी में मल मूत्र करेगा;
वह नहर अधिकारी द्वारा शिकायत की जाने परः-
(i) खण्ड (ए ) से (एच ) तक में वर्णित अपराधों के संबंध में कारावास से, जो छः मास तक हो सकेगा , या जुर्माने से, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा , या दोनों से , और जहां अपराध चालू रहने वाला अपराध हो वहां ऐसे अतिरिक्त जुर्माने से, जो प्रथम अपराध के पश्चात् प्रत्येक ऐसे दिन के लिये जिसके कि दौरान अपराध जारी रहा हो , बीस रुपये से अधिक न हो , दण्डनीय होगा , और
(ii) खण्ड (आई ) से (एल) तक में वर्णित अपराधों के संबंध में जुर्माने से जो एक सौ रुपये तक का हो सकेगा , दण्डनीय होगा और यदि वही व्यक्ति वैसे ही अपराध के लिये बाद में सिद्घोष ठहराया जाय तो यह प्रत्येक ऐसी पश्चातवर्ती दोषसिद्धि के लिए कारावास से, जो एक मास तक का हो सकेगा , दण्डनीय होगा ।
99. अपराधों का शमन. ( 1 ) कोई नहर अधिकारी किसी ऐसे व्यक्ति से जिसके विरुद्ध यह युक्तियुक्त संदेह विद्यमान हो कि उसने इस अधिनियम के या उसके अधीन बनाये गये नियमों के अधीन दण्डनीय कोई अपराध किया है , ऐसे अपराध के शमन के लिये दो सौ पचास से अनधिक धनराशि प्रतिग्रहीत कर सकेगा ।
(2 ) ऐसी राशि का भुगतान करने पर यदि संदेहास्पद व्यक्ति अभिरक्षा में है तो उसे उन्मुक्त कर दिया जायेगा , एवं उसके विरुद्ध ऐसे शमन किये गये अपराध हेतु आगे कार्यवाही नहीं की जाएगी । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 23) ( 3 ) इस अधिनियम के अन्तर्गत , नहर अधिकारियों द्वारा अपराध के शमन हेतु अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के विनियमन हेतु नियम बनाए जा सकेंगे ।
10. छत्तीसगढ़ सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी अधिनियम, 2006 ( क्रमांक 20 सन् 2006)
39. अपराध तथा शास्तियां. जो कोई भी किसी 'विधि पूर्ण प्राधिकार के बिना निम्नलिखित में से कोई कार्य करेगा, अर्थात्: -
(क) किसी नहर को नुकसान पहुंचाएगा , उसे परिवर्तित करेगा या उसे बढ़ाएगा या उसमें बाधा डालेगा;
(ख ) किसी नहर में के जल प्रदाय में जल के उस प्रवाह में, जो कि उस नहर से उस नहर में होकर, उस नहर के ऊपर या नीचे होता हो, हस्तक्षेप करेगा, वृद्धि करेगा या कमी करेगा:
(ग) किसी नदी या सरिता के जल प्रवाह में ऐसा हस्तक्षेप करेगा या ऐसा परिवर्तन करेगा , जिससे कि कोई नहर संकटापन्न हो जाए , उसे नुकसान पहुंचे या वह कम उपयोगी हो जाए:
(घ ) किसी जल धारा के अनुरक्षण के लिए उत्तरदायी होते हुए या उस जलधारा का उपयोग करते हुए , उसके जल की बर्बादी को रोकने के लिए उचित पूर्वावधानी बरतने , में उपेक्षा करेगा या उस जल धारा में से पानी के प्राधिकृत वितरण में हस्तक्षेप करेगा या ऐसे जल का अप्राधिकृत रीति में उपयोग करेगा;
(ङ) सिंचाई के लिए अपने खेत में जल प्राप्त करते समय , ऐसे जल की बर्बादी को रोकने के लिए उचित पूर्वावधानी बरतने में उपेक्षा करेगा;
(च) किसी नहर के जल को इस प्रकार दूषित करेगा या गन्दा करेगा, कि जिससे उन प्रयोजनों के लिए, जिनके लिए वह मामूली तौर से उपयोग में लाया जाता है, उसकी उपयुक्तता में कमी आ जाए;
छ) किसी ऐसे ग्राम में, जिसमें छत्तीसगढ़ सिंचाई अधिनियम 1931 (क्रमांक 3 सन् ( 1931 ) की धारा 36 के अधीन उद्घोषणा की गई हो, निवास कर रहा हो, स्थायी धारक, अधिभागी, खेतिहर या कृषि श्रमिक होते हुए नियत किए गए स्थान पर हाजिर होने में उपेक्षा करेगा या उसे आबंटित किए गए कर्तव्य का पालन करने से इंकार करेगा या उसकी उपेक्षा करेगा;
(जे) किसी नहर अधिकारी के प्राधिकार से लगाए गए किर्सी भूमि चिन्ह, तल- चिन्ह, जलमापी या अन्य साधित्र को नष्ट करेगा, क्षति पहुंचाएगा, विरूपित करेगा या हटाएगा;
(झ) किसी नहर के किन्हीं भी संकर्मों , तटों या जल संरणियों पर से या उसके आर -पार पशुओं या यानों को तस दिशा में गमन कराएगा , जबकि ऐसा गमनाधिकार किसी नहर अधिकारी द्वारा प्रतिबद्ध कर दिया गया हो;
(ञ ) किसी नहर के तट या सीमा पर पशुओं को चरवाएगा या रस्सी से बंधवाकर छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 24)
रखवाएगा या जानते हुए और जानबूझकर उन्हें चरने देगा या रस्सी से बांध कर रखा जाने देगा , जिसे किसी नहर अधिकारी द्वारा प्रतिषिद्ध कर दिया गया हो।
(ट ) किसी नहर पर उगे हुए किसी वृक्ष , झाड़ी, घास या अन्य वनस्पति को हटाएगा या क्षति पहुंचाएगा; या
(ठ) किसी नहर के तटों पर उसकी जलसरणियों में मल - मूत्र करेगा , वह' कृषक संगठन द्वारा शिकायत की जाने पर-
(एक) खंड (क) से (ज) तक में वर्णित अपराधों के संबंध में कारावास से , जो दो वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से जो एक हजार रूपये से कम का नहीं होगा , किंतु जो पांच हजार रूपये तक का हो सकेगा , या दोनों में से और जहां अपराध चालू रहने वाला अपराध हो वहां ऐसे अतिरिक्त जुर्माने से, जो प्रथम अपराध के पश्चात् प्रत्येक ऐसे दिन के लिए जिसके कि दौरान अपराध जारी रहा हो , बीस रूपये से अधिक न हो , दंडनीय होगा और
(दो) न्यूनतम शास्ति- खंड (झ ) से (ठ ) तक वर्णित अपराधों के संबंध में जुर्माने से, जो पांच सौ रूपये से कम का नहीं होगा, किंतु जो दो हजार रूपये तक का हो सकेगा , दंडनीय होगा और यदि वही व्यक्ति वैसे ही अपराध के लिए प्रकरण में पश्चातवर्ती सिद्ध दोष ठहराया जाए , तो वह प्रत्येक ऐसी पश्चातवर्ती दोष सिद्धि के लिए कारावास से, जो छह मास तक का हो सकेगा , दंडनीय होगा।
11. छत्तीसगढ़ भू- जल ( प्रबंधन एवं विनियमन ) अधिनियम , 2022 ( क्रमांक 18 सन् 2022 ) 19. विधि विरुद्ध खनन, भू- जल निकासी , आपूर्ति, विक्रय उपयोग , आदि के लिए अपराध. ( 1 ) जो कोई , इस अधिनियम या उसके अधीन बनाये किसी नियम या जारी की गई किसी अधिसूचना या किये गये किसी आदेश के, या इस अधिनियम के अधीन मंजूर की गई किसी अनुज्ञप्ति या अनुज्ञा-पत्र के उल्लंघन में -
(क) नवीन कुंआ नलकूप खनन करता है; या
(ख) कच्चे असंसाधित अनुपचारित भू- जल का निष्कर्षण विक्रय या आपूर्ति करता है, या
(ग) भू- जल का किसी टैंकर , पात्र इत्यादि से जलापूर्ति करता है: या
(घ) किसी समुचित निकाय , अथवा राज्य शासन वा राज्य भू- जल प्रबंधन एवं नियामक प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति को इस अधिनियम के अधीन दी गई शक्तियों के प्रयोग करने में बाधा डालता है; या
(ङ) किसी असफल, अधूरे अथवा अनुपयोगी कूप , जो उसके स्वामित्व का है . को सुरक्षित करने की इस प्रकार अवहेलना करेगा , जिससे जन अथवा पशु की मृत्यु/उपहति कारित होने की संभावना हो ,
वह उप - धारा ( 2 ) के प्रावधानों के अध्ययीन रहते हुए , प्रत्येक ऐसे अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि तीन माह से कम नहीं होगी , किन्तु जो एक वर्ग तक की हो सकेगी अथवा जुर्माने से , जो रु . 5000 / - से कम का नहीं होगा किन्तु जो रु .
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 25) 10000/- तक का हो सकेगा , से दण्डनीय होगा ,
परन्तु जब कोई व्यक्ति इस धारा के अधीन किसी अपराध के लिए दूसरी बार या पश्चातवर्ती समय पर सिद्धदोष ठहराया जाता है तो वह प्रत्येक ऐसे. अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि छः माह से कम की नहीं होगी किन्तु जो. एक वर्ष तक की हो सकेगी तथा जुर्माने से, जो रु0 10000/- से कम नहीं होगी और जो रु0 15,000/- तक की हो सकेगी , से दण्डनीय होगा।
(2) उप - धारा ( 1 ) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, यदि, उप - धारा ( 1 ) के खण्ड (क) , ( ख) , (ग) अथवा (घ) के अंतर्गत आने वाले कोई अपराध किसी वाणिज्यिक उपयोगकर्ता , औद्यागिक उपयोगकर्ता , अवसंरचनात्मक उपयोगकर्ता एवं बहुउपपयोगकर्ता के द्वारा कारित किया जाता है , तो वह कारावास से, जिसकी अवधि छः माह से कम नहीं होगी , किन्तु जो दो वर्ष तक की हो सकेगी अथवा जुर्माने से, जो रु . 10000/- से कम का नहीं होगा किन्तु जो रु. 25000/- तक का हो सकेगा , से दण्डनीय होगाः
परन्तु जब कोई व्यक्ति इस धारा के अधीन किसी अपराध के लिए दूसरी बार या पश्चातवर्ति समय पर सिद्धदोष ठहराया जाता है तो यह प्रत्येक ऐसे अपराध के लिए कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नही होगी किन्तु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी तथा जुर्माने से , जो रु0 20000/- से कम नहीं होगी और जो रु 0 50,000/- तक की हो सकेगी , से दण्डनीय होगा;
(3 ) जब उप- धारा ( 1 ) या (2) के अंतर्गत आने वाले किसी अपराध के लिए दूसरी बार या पश्चातवर्ती समय पर सिद्धदोष ठहराया जाता है , तो भू- जल निष्कर्षण हेतु जारी की गई अनुमति/ अनुज्ञप्ति, तत्काल प्रभाव से निरस्त किये जा सकेंगे। (4) जब यह विश्वास करने का कारण हो कि इस अधिनियन के अधीन कोई अपराध किया गया है तो सहायक अभियंता की श्रेणी से अनिम्न अधिकारी या इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी , इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन इस प्रकार अपराध कारित करने में प्रयुक्त मशीन, उपकरण, औजार , वाहन, पात्र या कोई अन्य वस्तु को जप्त कर सकेगा ।
(5) इस धारा के अधीन किसी सम्पति का अभिग्रहण करने वाला कोई अधिकारी , ऐसी सभी सम्पत्ति पर उपदर्शित करने वाला चिन्ह लगाएगा कि उत्तका इस प्रकार अभिग्रहण किया गया है और सम्पत्ति की अभिग्रहण रिपोर्ट यथाशक्य शीघ्र जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता के समक्ष प्रस्तुत करेगा । छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 26)
( 6 ) ( एक) जब कार्यपालन अभियंता के समक्ष ऐसा कोई अधिग्रहण रिपोर्ट , प्रकरण की जांच के दौरान किन्तु, न्यायालय में परिवाद दाखिले के पूर्व , प्रस्तुत किया जाता है , तो कार्यपालन अभियंता, ऐसी अभिग्रहित संम्पत्ति की उचित अभिरक्षा हेतु प्रकरण की जांच अथवा विचारण की लंबित अवधि तक के लिए ऐसा समुचित आदेश कर सकेगा , जैसा कि उचित समझे । तथापि , यदि कार्यपालन अभियंता की राय हो कि ऐसी संपत्ति की अंतरिम अभिरक्षा के लिए आदेश किया जाना उपयुक्त नहीं है तो यह ऐसी संपत्ति के राजसात के देश के लिये कलेक्टर के समक्ष रिपोर्ट को निर्दिष्ट कर सकेगा;
(दो) यदि कार्यपालन अभियंता या इस हेतु प्राधिकृत, किसी अन्य अधिकारी ने मजिस्ट्रेट के समक्ष लिखित परिवाद प्रस्तुत कर दिया हो तो ऐसी स्थिती में सम्पत्ति के व्ययन के संबंध में दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 ( 1974 का 2) की अध्याय-चौतीस के प्रावधान लागू होंगे ।
12. छत्तीसगढ़ प्राथमिक शिक्षा अधिनियम , 1961 ( क्रमांक 33 सन् 1961 )
19. उपस्थिति आदेश. ( 1 ) जब भी उपस्थिति प्राधिकारी को यह मानने का कारण हो कि बच्चे के अभिभावक बच्चे को किसी अनुमोदित स्कूल में नहीं भेज पाए हैं और धारा 16 के तहत बच्चे के न आने का कोई वाजिब कारण नहीं है , तो वह तय तरीके से जांच करेगी।
(2) अगर जांच के नतीजे में उपस्थिति प्राधिकारी को यह यकीन हो जाता है कि बच्चा इस धारा के तहत किसी अनुमोदित स्कूल में जा सकता है और धारा 16 के तहत उसके न आने का कोई वाजिब कारण नहीं है, तो वह तय प्रपत्र में एक उपस्थिति आदेश पास करेगी जिसमें अभिभावक को आदेश में बताई गई तारीख से बच्चे को अनुमोदित स्कूल में भेजने का निर्देश दिया जाएगा ।
(3) इस धारा के तहत किसी अभिभावक के खिलाफ उसके बच्चे के संबंध में जारी किया गया उपस्थिति आदेश , उप - धारा (6) के प्रावधान के तहत, तब तक लागू रहेगा जब तक यह अधिनियम बच्चे पर लागू होता रहेगा ।
(4) अगर कोई अभिभावक, जिसके खिलाफ उप - धारा (2) के तहत उसके बच्चे के लिए उपस्थिति आदेश पास किया गया है , उस समय के दौरान बच्चे का संरक्षण किसी दूसरे व्यक्ति को अंतरण करता है , जब उपस्थिति आदेश लागू है, तो ऐसे अभिभावक को तुरंत उपस्थिति प्राधिकारी को लिखकर इस अंतरण के बारे में बताना होगा।
(5) जहां इस धारा के तहत किसी अभिभावक के खिलाफ उसके बच्चे के लिए उपस्थिति आदेश पास किया गया है, तो ऐसा आदेश हर दूसरे व्यक्ति पर लागू होगा , जिसे बच्चे का संरक्षण उस समय के दौरान अंतरण की जा सकती है, जब उपस्थिति आदेश लागू है, जैसा कि उस व्यक्ति पर लागू होता है जिसके खिलाफ यह जारी किया गया है । (6) कोई अभिभावक किसी भी समय उपस्थिति आदेश को निरस्त करने के लिए छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 27) उपस्थिति प्राधिकारी को इस आधार पर आवेदन कर सकता है-
(i ) कि वह अब बच्चे का अभिभावक नहीं है; या
(ii) कि ऐसे हालात निर्मित हो गए हैं जो अनुपस्थिति के लिए सही कारण देते हैं; और इसके बाद उपस्थिति प्राधिकारी , इस तय तरीके से जांच करने के बाद, उपस्थिति आदेश को निरस्त या परिवर्तित कर सकती है ।
20. बच्चों को इस तरह काम पर न रखा जाए कि वे स्कूल न जा सकें. कोई भी व्यक्ति किसी बच्चे को इस तरह से काम पर नहीं रखेगा जिससे वह किसी अनुमोदित स्कूल में जाने से रोके।
22. धारा 19 के उल्लंघन के लिए दंड. ( 1 ) यदि कोई अभिभावक धारा 19 के अधीन पारित उपस्थिति आदेश का अनुपालन करने में असफल रहता है तो वह दो रुपए से अनधिक जुर्माने से दण्डनीय होगा , तथा उल्लंघन जारी रहने की स्थिति में ऐसे उल्लंघन के प्रथम दोषसिद्धि के पश्चात् प्रत्येक दिन के लिए पचास नए पैसे से अनधिक अतिरिक्त जुर्माने से दण्डनीय होगा, जिसके दौरान ऐसा उल्लंघन जारी रहता है:
परन्तु किसी एक व्यक्ति द्वारा किसी बालक के संबंध में किसी एक वर्ष में देय जुर्माने की राशि पचास रुपए से अधिक नहीं होगी ।
(2) यदि कोई व्यक्ति धारा 19 की उपधारा (4 ) के अनुसार अपेक्षित सूचना देने में असफल रहता है तो उसे जुर्माने से दण्डित किया जा सकेगा जो पच्चीस रुपये तक हो सकेगा ।
23. धारा 20 के उल्लंघन के लिए दंड. यदि कोई व्यक्ति धारा 20 के उपबंधों का उल्लंघन करता है तो वह जुर्माने से, जो पच्चीस रुपए तक का हो सकेगा , दण्डनीय होगा और उल्लंघन जारी रहने की स्थिति में , ऐसे उल्लंघनों में से प्रथम उल्लंघन के लिए दोषसिद्धि के पश्चात् प्रत्येक दिन के लिए , जिसके दौरान उल्लंघन जारी रहता है , एक रुपए से अनधिक अतिरिक्त जुर्माने से दण्डनीय होगा ।
13. छत्तीसगढ़ राज्य राजमार्ग अधिनियम , 2003 ( क्रमांक 12 सन् 2003)
7. राजमार्ग हेतु विकास योजनाओं को तैयार करना.- ( 1 ) राजमार्ग प्राधिकारी स्वयं के विवेकानुसार अथवा यदि सक्षम प्राधिकारी द्वारा व्यक्त रूप से निवेदन किया गया हो तो, इस अधिनियम के अधीनस्त रहते हुए तथा राज्य शासन द्वारा इस उद्देश्य हेतु रचित उन नियमों के अधीन रहते हुए एक नये राजमार्ग निर्माण अथवा एक पूर्व से अस्तित्व युक्त राजमार्ग के विकास अथवा सुधार कार्यों की विस्तृत योजना बनाकर सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदनार्थ प्रस्तुत करेगा ।
(2) उक्त योजना प्रावधान कर सकती है:-
(क) किसी भूमि का अर्जन, जो कि राजमार्ग प्राधिकारी के अभिमत में उसके क्रियान्वयन हेतु आवश्यक समझा गया है , छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 28)
( ख ) सीमांकन तथा विभिन्न उद्देश्यों हेतु अधिग्रहित सभी अथवा किन्हीं भूमियों के ले- आउट्स / निर्माण नक्शों को तैयार किये जाने बाबत,
( ग ) किसी अस्तित्व युक्त राजमार्ग अथवा उसके किसी काद/ सेक्शन के भू- परिवर्तन अथवा बंद किये जाने बाबत्,
(घ ) सडकमार्ग निर्माण अथवा पुनर्निर्माण के जिसमें उसका चौड़ीकरण , समतलीकरण , सतहीकरण , पुलों के निर्माण की प्रक्रिया , पानी के निकासी की प्रक्रिया, नालीकरण , जल की आपूर्ति तथा मार्ग में प्रकाश की व्यवस्था तथा मार्ग के किनारों पर वृक्षों का रोपाकरण शामिल है, बाबत
(ङ) फुटपाथों/ पदयात्री मार्ग , सायकल रखने की जगहें और किसी भी प्रकार अथवा श्रेणी के वाहनों बाबत् विशेष यातायात कतारों के प्रावधान नक्शे बाहनों के ठहरने के किनारों की रेखाचित्र एवं व्यवस्था करने तथा पेट्रोल भरने एवं सर्विस स्टेशन्स एवं अन्य मार्ग के किनारों की उपयोगी आवश्यकताएँ, विज्ञापन खंभों एवं बिल फलकों के स्थानीय व्यवस्था बाबत् और
(च) राजमार्ग अथवा प्रस्तावित राजमार्ग से उपयुक्त दूरियों पर लगी हुई सम्पत्तियों को जोड़ने वाले पहुँच मार्गों का रेखाचित्र
(छ) राजमार्ग के दोनों ओर वृक्षारोपण का प्रावधान किया जाये -
(i ) लगाये गये पौधों के रख -रखाव के लिए विभाग/ स्थानीय व्यक्तियों/ समितियों को दायित्व दिया जाये ।
(ii) किसी भी व्यक्ति के द्वारा सड़क सीमा के अन्दर लगाये गये पौधों/ वृक्षों को काटना या जड़ से उखाड़ने पर रोक लगाई जायें ।
(iii ) यदि किसी के द्वारा इन प्रावधानों का उल्लंघन किया जाता है, तो राज्य शासन द्वारा घोषित सक्षम अधिकारी के द्वारा अर्थदण्ड दिया जा सकता है, जो प्रति वृक्ष के लिए पाँच हजार रुपये तक या कम से कम एक हजार रुपये प्रति वृक्ष होगा । वृक्षों को काटकर ले जाने वाले वाहन को जप्त किया जाकर राजसात किया जा सकता है । ( iv ) यदि किसी स्थानीय व्यक्ति अथवा समिति द्वारा वृक्ष लगाया जाता है, एवं उनका रख - रखाव किया जाता है , तो उस स्थानीय व्यक्ति/ समिति को भोगबंधक का अधिकार होगा ।
53. आदेशों, अनुदेशों अवहेलना तथा जानकारी देने से इंकार किया जाना.- जो कोई भी, किसी व्यक्ति अथवा प्राधिकारी कि इस अधिनियम के अंतर्गत निर्देश देने हेतु शक्ति प्रदत्त् है के द्वारा विधिवत् दिये गये निर्देशों को स-आशय उल्लंघन करता है अथवा किसी व्यक्ति अधवा प्राधिकारी जो कि इस अधिनियम के अंतर्गत किन्ही कार्यों को सम्पन्न करने के लिये वांछित एवं शक्ति प्रदत्त है , उन कार्यों में बाधा उत्पन्न करता है अथवा इस अधिनियम के द्वारा अथवा इसके अंतर्गत किसी जानकारी को प्रदान करने हेतु है अपेक्षा किया जा रहा है ऐसी जानकारी को नहीं देता है अथवा ऐसी जानकारी देता है जो वह जानता है कि असत्य है अथवा जिसे वह सत्य होने का विश्वास नहीं करता छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 29 ) है, सजा होने पर अर्थ दण्ड से जो कि दो हजार रुपये तक हो सकता है , दण्डित किया जा सकेगा ।
54. किसी भवन के निर्माण अथवा पहुंच मार्ग से संबंधित पाबंदियों का उल्लंघन.- जो कोई भी किसी भवन को खड़ा करता है, परिवर्तित करता है अथवा बढ़ाता है अथवा कोई खुदाई करता है अथवा एक राजमार्ग को अथवा से पहुंच मार्ग अथवा माध्यम का निर्माण करता है अथवा धारा 14 के प्रावधानों के उल्लंघन में कोई अन्य कार्य करता है , सजा होने पर , दण्डित किया जा सकेगा-
(क) अर्थदण्ड से जो कि पांच हजार रुपये तक हो सकता है , तथा
(ख ) आगामी अर्थदण्ड से जो कि उक्त सजा के पश्चात् प्रत्येक दिन के लिये एक हजार रुपये तक हो सकता है , उस अवधि में जबकि अपराधिक संरचना अथवा कार्य को हटाया , गिराया अथवा साफ किया नहीं गया है तथा उक्त स्थान को उसकी मूल स्थिति में नहीं लाया गया है ।
55. राजमार्ग पर अनाधिकृत आधिपत्य. जो कोई भी
(क) किसी राजमार्ग पर कब्जा करता है अथवा किसी अतिक्रमण को बनाता है जोकि धारा 32 की उप- धारा ( 1 ) के प्रावधानों के उल्लघन में है , अथवा
(ख) धारा 33 की उपधारा ( 1 ) के अतर्गत प्रेषित की गई सूचना कर बिना किसी वैघ कारण के पालन करने में चूक करता है , सजा होने पर दण्डित किये जाने योग्य है- (एक) प्रथम अपराध के लिये अर्थदण्ड जो कि पांच हजार रुपये तक बढ़ सकताहै , तथा (दो) एक पश्चातवर्ती अपराध के लिये जो कि उसी अतिक्रमण से संबंधित हो , अर्थदण्ड जो कि दस हजार रुपये तक बढ़ सकता है . तथा
(तीन) निरन्तर अतिक्रमण के लिये, कारावास दो माह तक साथ ही एक अतिरिक्त अर्थदण्ड जो पाँच हजार रुपये प्रत्येक दिन से अधिक न होगा जिस पर उक्त राजमार्ग का अधिभोग अथवा अतिक्रमण निरन्तर बना रहता है ।
स्पष्टीकरण- " निरन्तर " अतिक्रमण का अर्थ होगा निरन्तर अथवा राजमार्ग के उसी भाग अथवा स्थान का अतिक्रमण किसी व्यक्ति द्वारा किया जाना जिस बाबत उसे उप- कंडिका ( ब) में पूर्व में सजा दी जा चुकी है।
56. आपराधों के दंड के लिए सामान्य प्रावधान. जो कोई भी इस अधिनियम के प्रावधानों अथवा किसी नियम अथवा आदेश जो कि उसके अंतर्गत किये गये है, का उल्लघन करता है , यदि अन्य कोई शास्ति उक्त अपराध हेतु प्रावधान न की गयी हो तो सजा होने पर , दण्डित किया जा सकेगा-
(क) प्रथम अपराध के लिये, अर्थदण्ड से , जो कि सौ रुपये तक बढ़ सकता है तथा (ख) एक पश्चातवर्ती अपराध के लिये , अर्थदण्ड से जो कि पांच सौ रुपये तक बढ़ सकता है । छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928( 30)
14. छत्तीसगढ़ भूमिगत पाइपलाइन ( भूमि में उपयोग के अधिकार का अर्जन ) अधिनियम , 2004 ( क्रमांक 7 सन् 2004)
5. भूमि में प्रवेश , सर्वेक्षण इत्यादि की शक्तियाँ.- धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के अधीन उद्घोषणा के प्रकाशन होने पर राज्य सरकार या निगम द्वारा अधिकृत, किसी व्यक्ति और उसके सेवकों एवं कार्यकर्ताओं के लिए यह विधिपूर्वत् होगा किः-
(क) अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किसी भूमि में प्रवेश करे और सर्वेक्षण करे एवं उसका तलमापन करे;
(ख) अधोमृदा में खुदाई या उत्खनन;
(ग) कार्य की आशयित दिशा का निर्धारण;
( घ ) चिन्हांकित एवं गड्ढे की खुदाई करके ऐसी ऊंचाईंयाँ, घेराबन्दियाँ एवं लकीर चिन्हित करना;
(ङ) जहाँ अन्यथा सर्वेक्षण पूर्ण नहीं किया जा सका है और तलमापन नहीं किया गया है एवं घेराबन्दियाँ तथा लकीर चिन्हित नहीं किया जा सका है वहाँ किसी खड़ी फसल , झाड़ी या जंगल के किसी भाग की कटाई एवं सफाई , और
(च) ऐसे समस्त अन्य आवश्यक कार्य , जिससे भूमि के नीचे पाइपलाईन डाला जाना सुनिश्चित किया जा सके ।
परन्तु जब इस धारा के अधीन किसी शक्ति का प्रयोग करते हुए ऐसा व्यक्ति या उसका कोई सेवक ऐसी भूमि को यथासंभव कम से कम क्षति या नुकसान कारित करेगा।
6. राज्य सरकार या निगम के द्वारा पाइपलाईन्स डालना.- ( 1 ) जहाँ, धारा 4 के अधीन किसी भूमि में उपयोग के अधिकार , राज्य सरकार या निगम में निहित हो गया है, वहाँ: - (एक) राज्य सरकार या निगम , जैसा कि प्रकरण हो , द्वारा अधिकृत किसी व्यक्ति और उसके सेवकों के लिए यह विधिपूर्वक होगा कि ऐसी भूमि में प्रवेश करे और पाइपलाईन्स डाले और पाइपलाईन्स डालने के लिए कोई अन्य आवश्यक कार्य करे ;
परन्तु कोई पाइपलाईन नीचे नहीं डाली जाएगी: -
(क) कोई भूमि, जो धारा 3 की उपधारा ( 1 ) के अधीन अधिसूचना प्रकाशित होने की तारीख के ठीक पूर्व आवासीय प्रयोजनों के लिए उपयोग में लाई जाती थी;
( ख) कोई भूमि जो निवास गृह के संलग्नक है।
(दो) ऐसी भूमि केवल भूमिगत पाइपलाईन्स डालने के लिए और ऐसी पाइपलाईन्स के संधारण , परीक्षण , सुधार, बदलने या हटाने या उपर्युक्त प्रयोजनों के लिए कोई अन्य आवश्यक कार्य करने के लिए उपयोग में लायी जावेगी
(2) उपधारा ( 1 ) की कंडिका (एक ) के परन्तुक के संबंध में यदि कोई विवाद उत्पन्न होता है तो विवाद सक्षम प्राधिकारी को भेजा जाएगा , जिसका उस पर निर्णय अन्तिम होगा। 7. निरीक्षण के लिए भूमि में प्रवेश करने की शक्ति.- किसी पाइपलाईन के संधारण , छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 16 दिसम्बर 2025
1928 ( 31) परीक्षण , सुधार, बदलने या हटाने के लिए या उपर्युक्त किन्हीं प्रयोजनों के लिए नाप - जोख या कोई निरीक्षण करने के लिए राज्य सरकार या निगम , द्वारा इस संबंध में प्राधिकृत कोई व्यक्ति ऐसी भूमि के अधिभोगी को सकारण सूचना देने के पश्चात्, ऐसे कार्य करने वाले और सहायकों के साथ उसमें प्रवेश कर सकेगा जैसा कि आवश्यक हो .।
परन्तु जहाँ कोई आपात स्थिति मौजूद है तो ऐसी सूचना आवश्यक नहीं होगी । 14. शास्ति.- जो कोई व्यक्ति घारा 5 , धारा 6 , धारा 7 के द्वारा अधिकृत किसी कार्य को करने में जान - बूझकर अवरोध करता है या धारा 5 के अधीन निर्मित किसी गड्ढे या चिन्ह को जान- बूझकर भरता है , नष्ट, क्षति या स्थानान्तरित करता है या धारा 6 के अधीन डाली गई पाइपलाईन को जान - बूझकर हटाता है , क्षति पहुंचाता है या नष्ट करता है या धारा 8 के अधीन प्रतिबंधित कोई कार्य जानबूझकर करता है , वह साधारण कारावास जिसका विस्तार 6 माह तक हो सकता है या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जा सकेगा ।
दिनेश शर्मा , सचिव, छत्तीसगढ़ विधान सभा संचालक , मुद्रण तथा लेखन सामग्री , छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय , रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित - 2025.