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Chattisgarh Gazette - Extraordinary · Government of Chattisgarh

"छत्तीसगढ़ बंद एवं बीमार उद्योगों हेतु विशेष प्रोत्साहन नियम, 2024" संबंधी

Published 23 February 2026

Department
वाणिज्य और उद्योग विभाग
Type
Extraordinary
Gazette no.
95
Notification no.
क्रमांक GENS-2101/1234/2026-C&I
Identifier
in.gazette.chhattisgarh.eo.2026-02-23.95
Languages
English, Hindi

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 वाणिज्य एवं उद्योग विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर

नवा रायपुर अटल नगर, दिनांक 23 फरवरी 2026

अधिसूचना

ंकि, राज्य सरकार का यह समाधान हो गया है कि लोकहित में ऐसा क्रमांक GENS-2101/1234/2026-C&I.—चू

करना आवश्यक है, अतएव राज्य शासन, एतद् द्वारा, राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के कं डिका (12.5) के क्रमांक 39 तथा नीति के अध्याय (द-4) में प्रावधानित ''बंद एवं बीमार उद्यमों हेतु विशेष प्रोत्साहन पैके ज'' के क्रियान्वयन हेतु निम्नानुसार नियम निर्मित करता है, अर्थात -

नियम

1. नाम एवं विस्तार -

(1) यह नियम ''छत्तीसगढ़ बंद एवं बीमार उद्योगों हेतु विशेष प्रोत्साहन नियम, 2024'' कहे जाएंगे।

(2) यह नियम छत्तीसगढ़ राज्य में प्रवृत्त होंगे।

2. प्रभावी दिनांक - यह नियम राजपत्र में प्रकाशन के दिनांक से प्रभावी होंगे।

3. परिभाषाएँ -

(1) नीति से अभिप्रेत है, औद्योगिक विकास नीति 2024-30।

(2) नेटवर्थ का आशय प्रदत्त पू ंजी तथा फ्री-रिजर्व के योग से है। एकल स्वामित्व/भागीदारी/सीमित दायित्व साझेदारी/सहकारी समिति व अन्य के प्रकरणों में नेटवर्थ का आशय एकल स्वामी/भागीदारों/सीमित दायित्व साझेदारी/सहकारी समिति के सदस्यों की कु ल पू ंजी एवं फ्री-रिजर्व के योग से होगा।

(3) फ्री-रिजर्वस से आशय उस जमा पू ंजी से है जो लाभ तथा शेयर प्रीमियम लेखा से प्राप्त हुई हो, परन्तु इसमें एकीकरण प्रावधानों के अंतर्गत आस्तियों के पुनमू

ंजी सम्मिलित नहीं

र्ल्यांकन तथा कम किये गये अवक्षयण (Depreciation) से निर्मित पू

होगी। (4) बैंक से आशय, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अधिसूचित/अनुज्ञा प्राप्त बैंक तथा जिला सहकारी बैंक, शहरी सहकारी बैंक एवं सार्वजनिक क्षेत्र के किसी भी बैंक से है।

(5) वित्तीय संस्था से आशय भारतीय औद्योगिक विकास बैंक, भारतीय औद्योगिक वित्त निगम, भारतीय औद्योगिक क्रे डिट एवं इंवेस्टमेंट निगम, भारतीय औद्योगिक इंवेस्टमेंट बैंक, भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी), जो औद्योगिक इकाईयों को ऋण देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से अधिकृ त है। वित्तीय संस्था से आशय भारत सरकार/राज्य शासन के उस निगम से भी है जिसे ऋण प्रदान करने हेतु भारत सरकार/राज्य शासन की स्वीकृ ति प्राप्त हुई हो।

(6) व्यवहार्य बीमार इकाई (Viable Sick Unit) से आशय विनिर्माण क्षेत्र की ऐसी औद्योगिक इकाई से है, जिसमें प्लांट व मशीनरी में 5 लाख रूपये से अधिक का पू ंजी वेष्ठन हो, इस नीति में घोषित पैके ज को देने के पश्चात् वित्तीय संस्थाओं/बैंको के पुनर्रचित ऋण एवं ब्याज का निर्धारित अवधि में भुगतान के साथ-साथ राज्य शासन के वाणिज्यिक कर विभाग, ऊर्जा विभाग, राजस्व विभाग, उद्योग विभाग, जल संसाधन विभाग, खनिज साधन विभाग, आबकारी विभाग अथवा इनकी एजेंसियां/निगम/बोर्ड एवं विभिन्न श्रम कानूनों के तहत् गठित राज्य शासन के निकाय जिन्हें इकाई से देय भुगतान प्राप्त करने के वैधानिक अधिकार प्राप्त हैं, को देय देनदारी का भुगतान भी पैके ज की क्रियान्वयन अवधि में कर सके ।

(7) भुगतान हेतु बकाया राशि से आशय राज्य शासन के वाणिज्यिक कर विभाग, ऊर्जा विभाग, राजस्व विभाग, उद्योग विभाग, जल संसाधन विभाग, खनिज संसाधन विभाग, आबकारी विभाग अथवा इनकी एजेंसियां/निगम/बोर्ड तथा विभिन्न श्रम कानूनों के अंतर्गत गठित राज्य शासन के निकायों जिन्हें इकाई से देय भुगतान प्राप्त करने के वैधानिक अधिकार प्राप्त हैं, की देनदारी से है। (8) अप्रैजल एजेंसी से आशय आई.डी.बी.आई./सिडबी द्वारा सूचीबद्ध औद्योगिक कन्सल्टेंट, सिटकॉन, उद्यमिता विकास के न्द्र, या वाणिज्य एवं उद्योग विभाग द्वारा इस संबंध में निर्धारित एजेंसी से है।

(9) अन्य प्रयुक्त शब्दों हेतु वही परिभाषाएं लागू होंगी जो नीति के परिशिष्ट-1 में उल्लेखित हैं तथा भारतीय रिजर्व बैंक की परिभाषाएं, यथास्थिति जो लागू हों, प्रभावी होंगी।

4. पात्रता-

(1) उद्यम में प्लांट एवं मशीनरी में न्यूनतम पांच लाख रूपये का पू ंजी निवेश हो।

(2) इस नियम के क्रियान्वयन हेतु, अन्य नियम व पात्रता शर्तें नीति के अध्याय (द-4) में वर्णित अनुसार होगी।

(3) नीति के परिशिष्ट-3 में वर्णित अपात्र उद्यम, पैके ज के लाभ हेतु पात्र नहीं होंगे।

5. पात्र आवेदनकर्ता -

इस पैके ज के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति/साझेदारी फर्म/कं पनी/सहकारी समिति/ सीमित दायित्व साझेदारी/औद्योगिक इकाई उपरोक्त कं डिका-4 पात्र बंद/बीमार इकाईयों को पुनः प्रारंभ करने/ पुन:संचालन करने इस पैके ज का लाभ लेने के लिए आवेदन करने हेतु पात्र है।

6. प्रक्रिया -

(1) पात्र आवेदनकर्ता द्वारा पात्र सूक्ष्म तथा लघु बंद/बीमार उद्योगों को पुनःसंचालित करने/पुनर्वास हेतु निर्धारित प्रारूप में आवश्यक दस्तावेजों के साथ, आवेदन संबंधित जिला व्यापार एवं उद्योग के न्द्र में तथा सूक्ष्म तथा लघु से भिन्न उद्योगों के प्रकरण उद्योग संचालनालय में प्रस्तुत करना होगा।

(2) आवेदन के साथ-साथ बंद/बीमार उद्यम को पुनःसंचालन/पुनर्वास हेतु विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें उद्यम के बीमार/बंद रहने की तथ्यात्मक स्थिति, उद्यम के बीमार/बंद होने के कारण, पुनःसंचालन हेतु किये जा रहे प्रयास, बैंक/वित्तीय संस्थाओं द्वारा ऋण स्वीकृ ति, स्वयं का अंशदान, विगत वित्तीय वर्षो की अंके क्षित बैलेंस शीट, बी.आई.एफ.आर./शासकीय समापक की टीप एवं उद्योग को पुनःसंचालित करने/पुनः प्रारंभ करने की अवधि भी होगी। (3) आवेदक द्वारा प्रस्तुत पुनर्वास योजना का अनुमोदन अप्रैजल एजेंसी से करवाना होगा। अप्रैजल एजेन्सी अपने प्रतिवेदन में उद्यम के बंद/बीमार होने के कारणों की व्याख्या करते हुए अपने सुझाव देगी व अभिमत में यह स्पष्ट अनुशंसा करेगी कि उद्यम बीमार/बंद उद्यम की परिभाषा के तहत् आता है अथवा नहीं, इकाई व्यवहार्य बीमार इकाई है या नहीं तथा बीमार/बंद उद्यम का पुनःसंचालन/पुनर्वास संभव है अथवा नहीं। एजेंसी अपने सुझाव भी दे सके गी।

(4) बीमार/बंद सूक्ष्म तथा लघु उद्योगों के पुनर्वास तथा पुनःसंचालन हेतु प्राप्त आवेदनों, आवेदनों की प्रस्तावित योजना एवं अप्रैजल एजेंसी की रिपोर्ट का परीक्षण मुख्य महाप्रबंधक/महाप्रबंधक जिला व्यापार एवं उद्योग के न्द्र द्वारा किया जाएगा तथा सूक्ष्म एवं लघु उद्यामों से भिन्न आवेदनों, आवेदनों की प्रस्तावित योजना एवं अप्रैजल एजेंसी की रिपोर्ट का परीक्षण उद्योग आयुक्त/संचालक उद्योग द्वारा किया जाएगा।

(5) बीमार/बंद उद्योगों के पुनर्वास/ पुन: संचालन हेतु प्राप्त आवेदनों के परीक्षण उपरान्त निम्नानुसार समितियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा:-

(क) जिला स्तरीय समिति (सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों हेतु) -

(i) आयुक्त/संचालक, उद्योग संचालनालय द्वारा नामांकित अपर संचालक/ संयुक्त संचालक - अध्यक्ष

(ii) क्षेत्रीय संचालक, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास संस्थान अथवा उनके प्रतिनिधि - सदस्य

(iii) अग्रणी बैंक के अधिकारी - सदस्य

(iv) उपायुक्त, वाणिज्यिक कर विभाग - सदस्य

(v) खनिज अधिकारी/कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन विभाग - विशेष आमंत्रित सदस्य (यथा आवश्यकता)

(vi) मुख्य महाप्रबंधक/महाप्रबंधक, छत्तीसगढ़ स्टेट इण्डस्ट्रीयल डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन लिमि. (जो राज्य शासन उद्योग विभाग के न्यूनतम उप संचालक स्तर के अधिकारी हो) - सदस्य

(vii) मुख्य महाप्रबंधक/महाप्रबंधक, जिला व्यापार एवं उद्योग के न्द्र - सदस्य सचिव

(ख) राज्य स्तरीय समिति (सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों से भिन्न प्रकरणों हेतु) -

(i) आयुक्त/संचालक, उद्योग संचालनालय - अध्यक्ष

(ii) अपर आयुक्त, वाणिज्यिक कर विभाग - सदस्य

(iii) प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ़ स्टेट इण्डस्ट्रीयल डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन लिमि. या उनके द्वारा नामांकित अधिकारी, जो मुख्य महाप्रबंधक स्तर का हो - सदस्य

(iv) महाप्रबंधक/उप महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक आंचलिक कार्यालय - सदस्य

(v) संयुक्त संचालक(वित्त), उद्योग संचालनालय - सदस्य

(vi) अपर संचालक/संयुक्त संचालक उद्योग, उद्योग संचालनालय, रायपुर - सदस्य सचिव

(6) जिला स्तरीय समिति के लिये गणपूर्ति 5 तथा राज्य स्तरीय समिति हेतु गणपूर्ति 4 से होगी। जिला स्तरीय समिति सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के प्रकरणों में एवं राज्य स्तरीय समिति सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों से भिन्न उद्योगों के प्रकरणों में बंद/बीमार उद्योगों के संबंध में निर्णय लेगी।

(7) उक्त समितियां यह निश्चित करेंगी कि आवेदक उद्योग बीमार/बंद की श्रेणी में आता है अथवा नहीं तथा इसके पुनर्वास/ पुन:संचालन की क्या संभावना है। समितियां संबंधित उद्यम से/आवेदक से योजना का प्रस्तुतिकरण भी प्राप्त कर सके गी, आवश्यक होने पर उद्यम विशेष से संबंधित तकनीकी कं सल्टेंट/सलाहकार, अप्रैजल एजेंसी से परामर्श भी प्राप्त कर सके गी। समितियां किसी विशेषज्ञ को भी आमंत्रित कर सके गी। (8) जिला एवं राज्य स्तरीय समितियों द्वारा यदि यह निर्णय लिया जाता है कि बीमार/बंद उद्यम के पुनर्वास/ पुन:संचालन संभव है, तो सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के प्रकरणों में मुख्य महाप्रबंधक/महाप्रबंधक, जिला व्यापार एवं उद्योग के न्द्रों द्वारा एवं सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों से भिन्न प्रकरणों में उद्योग संचालनालय द्वारा संबंधित उद्योग को बीमार/बंद घोषित किये जाने बाबत् आदेश जारी किए जाएंगे।

7. बंद/बीमार उद्योगों के लिए पैके ज -

बंद/बीमार उद्यम के पुनर्वास/ पुन:संचालन करने पर, नीति के अध्याय (द–4) में वर्णित अनुसार पैके ज की पात्रता होगी। 8. बंद/बीमार घोषित उद्योग के दायित्व -

(1) बंद/बीमार घोषित उद्यम का दायित्व होगा कि पैके ज की प्राप्ति उपरांत 5 वर्ष की अवधि तक चार्टर्ड एकाउन्टेंट से अंके क्षित लेखे व बैलेंस शीट उद्योग संचालनालय/ जिला व्यापार एवं उद्योग के न्द्र को उपलब्ध कराएं। बंद/बीमार उद्यम को प्रतिवर्ष उत्पादन, लाभ, राज्य शासन को देय करों का भुगतान व रोजगार से संबंधित जानकारी भी प्रदान करनी होगी।

(2) बंद/बीमार घोषित अवधि तक उपक्रम द्वारा न तो लाभांश की घोषणा की जावेगी तथा न ही लाभांश का भुगतान किया जाएगा।

(3) बंद/बीमार उद्यम का संचालन प्रभावी ढंग से करना होगा।

(4) बंद/बीमार उद्यम को छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल द्वारा निर्धारित समस्त प्रदूषण निवारण यंत्रों की स्थापना करनी होगी, इनका सतत् संचालन करना होगा तथा प्रदूषण निवारण के निर्धारित मापदंड का पालन करना होगा।

9. क्रियान्वयन -

(1) राज्य शासन, भारसाधक सचिव, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग, उद्योग आयुक्त/संचालक उद्योग किसी भी अभिलेख को बुला सकें गे तथा नियमानुसार उचित आदेश पारित कर सकें गे, परन्तु प्रमाण पत्र/पैके ज को निरस्त करने या उसमें परिवर्तन के पूर्व प्रभावित पक्ष को सुनवाई का अवसर अवश्य दिया जाएगा। स्वयं के निर्णय की समीक्षा भी राज्य शासन, भारसाधक सचिव, उद्योग आयुक्त/संचालक उद्योग कर सकें गे।

(2) इन नियमों के अन्तर्गत कार्यकारी निर्देश जारी करने, आवेदन पत्र, निरीक्षण/परीक्षण प्रतिवेदन के प्रारूप में संशोधन हेतु उद्योग आयुक्त/संचालक उद्योग सक्षम होंगे एवं अनुदान से संबंधित किसी मुद्दे पर जिला व्यापार एवं उद्योग के न्द्रों द्वारा मार्गदर्शन मांगे जाने पर उद्योग आयुक्त/संचालक उद्योग द्वारा मार्गदर्शन दिया जाएगा।

(3) इन नियमों की व्याख्या, पैके ज की पात्रता या अन्य विवाद की दशा में राज्य शासन का निर्णय अंतिम एवं बंधनकारी होगा।

10. विविध -

(1) नीति में संशोधन किये जाने की स्थिति में उक्त संशोधन इन नियमों में यथास्थिति लागू होंगे।

(2) इन नियमों के अलग-अलग भाषाओं में संस्करण जारी करने हेतु उद्योग आयुक्त/संचालक उद्योग सक्षम होंगे। इस नियम के तहत जारी हिंदी संस्करण मुख्य संस्करण होगी, जो अलग-अलग भाषाओं में जारी संस्करणों के बीच विसंगति होने पर प्रभावी रहेगा।

(3) इन नियमों के अन्तर्गत राज्य के न्यायालय में ही वाद दायर किया जा सके गा।

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,

रजत कुमार, सचिव.

उपाबंध-1

[नियम 6(1) देखें]

शपथ-पत्र

(न्यूनतम 50 रू. के नान-ज्युडिशियल स्टाम्प पर नोटराईज्ड)

1. यह शपथपूर्वक घोषित किया जाता है कि:-

1.1 औद्योगिक विकास नीति 2024-30 एवं छत्तीसगढ राज्य बंद एवं बीमार उद्यमों हेतु विशेष प्रोत्साहन पैके ज'' नियम का पूर्णतः अध्ययन कर लिया है एवं इसके सभी प्रावधानों का पालन औद्योगिक इकाई द्वारा किया जावेगा । 1.2 आवेदन पत्र में दी गई जानकारी एवं आवेदन पत्र के साथ संलग्न स्व-प्रमाणित अभिलेख पूर्ण रूप से सही है। 1.3 औद्योगिक इकाई के संचालन हेतु के न्द्र/राज्य के संबंधित विभागों से अनुमति/सम्मति/अनुज्ञा प्राप्त कर लिया गया है।

2. यह भी कि बंद/बीमार उद्यम के पुनर्वास/पुनःसंचालन अंतर्गत वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 05 वर्ष अथवा अंतिम अनुदान स्वीकृ ति दिनांक, जो पश्चात्वर्ती हो तक, उत्पादनरत् रहते हुए अकु शल, कु शल एवं प्रबंधकीय/प्रशासकीय वर्ग में न्यूनतम क्रमश: 100 प्रतिशत, 70 प्रतिशत एवं 40 प्रतिशत रोजगार राज्य के मूल निवासियों को दिया जाता रहेगा। 3. यह भी कि बंद/बीमार उद्यमों हेतु घोषित पैके ज की प्राप्ति उपरांत 5 वर्ष की अवधि तक चार्टर्ड एकाउन्टेंट से अंके क्षित लेखे व बैलेंस शीट उद्योग संचालनालय/ जिला व्यापार एवं उद्योग के न्द्र को उपलब्ध करायेंगें तथा प्रतिवर्ष उत्पादन, लाभ, राज्य शासन को देय करों का भुगतान व रोजगार से संबंधित जानकारी भी प्रदान करनी होगी।

4. यह भी कि उपरोक्त जानकारी गलत/त्रुटिपूर्ण/मिथ्या पाये जाने पर अन्यथा किसी भी घोषणा का उल्लंघन पाये जाने पर स्वीकृ तकर्ता अधिकारी द्वारा अनुदान राशि की वसूली मय 12.5 प्रतिशत साधारण ब्याज के मांग पत्र पर प्राप्त अनुदान की राशि मय निर्धारित ब्याज के साथ 30 दिवसों की अवधि में वापस की जाएगी ।

औद्योगिक इकाई के अधिकृ त व्यक्ति के हस्ताक्षर

नाम

पद

औद्योगिक इकाई का नाम व पता

दिनांक

Cite this issue. Chattisgarh Gazette - Extraordinary, Government of Chattisgarh, 23 February 2026. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.chhattisgarh.eo.2026-02-23.95/. Archive identifier in.gazette.chhattisgarh.eo.2026-02-23.95.