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Chattisgarh Gazette - Extraordinary · Government of Chattisgarh

औद्योगिक विकास नीति 2024-30 अंतर्गत ’’जल शुल्क व्यय प्रतिपूर्ति एवं रॉयल्टी प्रतिपूर्ति नियम, 2025 संबंधी

Published 09 March 2026

Department
वाणिज्य और उद्योग विभाग
Type
Extraordinary
Gazette no.
125
Notification no.
GENS-2101/1483/2026-C&I
Identifier
in.gazette.chhattisgarh.eo.2026-03-09.125
Languages
English, Hindi

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 वाणिज्य एवं उद्योग विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर

नवा रायपुर अटल नगर, दिनांक 6 मार्च 2026

अधिसूचना

क्रमांक GENS-2101/1483/2026-C&I. — राज्य शासन, एतद् द्वारा, औद्योगिक विकास नीति 2024-30 की कं डिका 12.5 में वर्णित तालिका के बिन्दु क्रमांक-27 में प्रावधानित "कोर (स्टील) सेक्टर के वृहद उद्यम हेतु औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैके ज" के अंतर्गत अध्याय ब-2 के बिन्दु 6 एवं 7 पर प्रावधानित जल शुल्क व्यय प्रतिपूर्ति एवं रॉयल्टी प्रतिपूर्ति के क्रियान्वयन हेतु नियम निर्मित करता है, अर्थात –

नियम

1. नाम एवं विस्तार:-

(1) ये नियम "जल शुल्क व्यय प्रतिपूर्ति एवं रॉयल्टी प्रतिपूर्ति नियम, 2025" कहे जायेंगे।

(2) ये नियम छत्तीसगढ़ राज्य में प्रवृत्त होंगे।

2. प्रभावी दिनांक:-

ये नियम राजपत्र में प्रकाशन दिनांक से प्रभावशील होंगे।

3. परिभाषाएं:-

(1) इस नियम के क्रियान्वयन हेतु वही परिभाषाएं लागू होंगी जो औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के परिशिष्ट-1 पर उल्लेखित हैं।

(2) नीति से अभिप्रेत है औद्योगिक विकास नीति 2024-30।

4. पात्रता एवं प्रतिपूर्ति की मात्रा:-

इस नियम के अंतर्गत प्रतिपूर्ति की पात्रता एवं मात्रा औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अध्याय ब-2 में जल शुल्क व्यय प्रतिपूर्ति एवं रॉयल्टी प्रतिपूर्ति हेतु उल्लेखित प्रावधानों के अनुसार होगी। इसके अतिरिक नियम के अंतर्गत निम्नांकित पात्रता शर्तें निर्धारित की जाती हैं:

(1) स्टील संयंत्र के भीतर उत्पादन हेतु उपयोग किए गए जल पर ही जल शुल्क व्यय प्रतिपूर्ति की पात्रता होगी। प्रति टन उत्पादित स्टील पर अधिकतम 25 घन मीटर जल पर भुगतान किया गया शुल्क प्रतिपूर्ति हेतु पात्र होगा।

(2) इकाई की राज्य स्थित कै प्टिव खदान से प्राप्त लौह-अयस्क अथवा NMDC/अन्य संस्था से क्रय किए गए लौह अयस्क का उपभोग स्टील संयत्र में उत्पादन हेतु करने पर लौह-अयस्क पर (प्रति टन उत्पादित स्टील पर अधिकतम 1.6 टन लौह-अयस्क) राज्य शासन को भुगतान की गई रॉयल्टी निर्धारित मात्रा में प्रतिपूर्ति हेतु पात्र होगी।

(3) इकाई की राज्य स्थित कै प्टिव खदान से प्राप्त लौह-अयस्क अथवा SECL/अन्य संस्था से क्रय किए गए कोल का उपभोग स्टील संयत्र में उत्पादन हेतु करने पर कोल पर (प्रति टन उत्पादित स्टील पर अधिकतम 1.0 टन कोल) राज्य शासन को भुगतान की गई रॉयल्टी निर्धारित मात्रा में प्रतिपूर्ति हेतु पात्र होगी।

5. प्रक्रिया:-

(1) औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के अंतर्गत उत्पादन प्रमाण पत्र/ उत्पादन निरन्तरता प्रमाण पत्र धारित पात्र इकाइयों को, यथा लागू, निम्नलिखित दस्तावेजों के साथ उद्योग संचालनालय में ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करना होगा:

(क) उपाबंध-1 के अनुसार शपथ पत्र।

(ख) उपाबंध-2/3 (यथा लागू) के अनुसार प्रमाण पत्र।

(2) औद्योगिक इकाई द्वारा वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के उपरांत प्रतिपूर्ति संबंधी आवेदन वाणिज्यिक उत्पादन/सेवा प्रारंभ करने के प्रथम दिनांक के पश्चात छः माही आधार पर उद्योग संचालनालय में प्रस्तुत किया जाएगा। प्रारंभ में प्रस्तुत किया गया प्रथम स्वत्व वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ होने के दिनांक से वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ होने के दिनांक /नियम जारी होने के दिनांक जो पश्चातवर्ती हो, की तिथि को चल रहे वित्तीय वर्ष की अवधि में 30 सितम्बर तक अथवा 31 मार्च तक (जो पहले हो) प्रस्तुत किया जाएगा। पश्चातवर्ती छःमाही क्लेम 01 अप्रैल से 30 सितम्बर तक की अवधि हेतु एवं 01 अक्टूबर से 31 मार्च तक की अवधि के होंगे।

(3) प्रथम स्वत्व पात्र औद्योगिक इकाईयों के वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ होने के दिनांक/नियम जारी होने के दिनांक जो पश्चातवर्ती हो, से 6 माह के भीतर ऑनलाईन प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है। आगामी क्लेम के वल छः माही आधार पर अगले छः माह के ऑनलाईन प्रस्तुत किया जाना आवश्यक होगा। निर्धारित कालावधि के पश्चात प्रस्तुत किये गये स्वत्व सक्षम अधिकारी द्वारा स्वीकृ त नहीं किये जायेंगे। सक्षम अधिकारी आयुक्त/ संचालक उद्योग अथवा उनके द्वारा अधिकृ त अपर/संयुक्त संचालक होंगे।

(4) आवेदन प्राप्त होने पर अपूर्ण प्रकरण प्राप्त होने पर प्रकरण में कमियों को हुए आवेदन प्राप्ति दिनांक से 15 कार्य दिवस के भीतर कमी पूर्ति हेतु वापस किये जायेंगे। इकाई द्वारा 60 दिवसों की अवधि में कमियों की पूर्ति नहीं करने पर अपूर्ण प्रकरण स्वमेव निरस्त मान्य होगा।

(5) आवेदन पत्र प्राप्त होने पर प्रतिपूर्ति की गणना उपाबंध-2/3 (यथा लागू) के अनुसार प्रमाण पत्र एवं भुगतान से संबंधित बिल/वाउचर की प्रति के आधार पर परीक्षणकर्ता अधिकारी द्वारा की जाएगी। विसंगति होने पर परीक्षणकर्ता अधिकारी प्रकरण को संबंधित विभाग के अधिकारी को पुनः परीक्षण हेतू प्रेषित कर सके गा।

(6) प्रत्येक क्लेम के पश्चात इकाई को प्राप्त प्रतिपूर्ति की राशि की प्रविष्टि उद्योग संचालनलय द्वारा निर्धारित प्रारूप में पासबुक में की जाएगी। पासबुक में प्रत्येक छ:माही की गणना के आधार पर भुगतान की गई राशि एवं शेष पात्रता राशि का उल्लेख होगा। (7) प्रतिपूर्ति/ प्रतिपूर्ति स्वीकृ त होने पर उद्योग संचालनालय द्वारा स्वीकृ ति आदेश जारी किया जाएगा। स्वीकृ ति आदेश के प्रारूप का निर्धारण उद्योग संचालनालय द्वारा किया जाएगा।

(8) प्रकरण यदि निरस्तीकरण योग्य है तो इकाई को अपना पक्ष रखने का एक अवसर प्रदान करते हुए प्रकरण पर निर्णय लिया जाएगा। (9) बजट आबंटन उपलब्ध होने पर प्रतिपूर्ति का वितरण ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से इकाई के सावधि ऋण खाते में किया जाएगा। सावधि ऋण खाता बंद हो जाने की स्थिति में वितरण कै श क्रे डिट खाते/चालू खाते में किया जा सके गा। स्ववित्त पोषी इकाइयों के प्रकरण में प्रतिपूर्ति वितरण चालू कहते में किया जाएगा। प्रतिपूर्ति की राशि नगद में नहीं दी जायेगी। प्रतिपूर्ति का वितरण औद्योगिक इकाईयों को प्रतिपूर्ति स्वीकृ ति के दिनांक के क्रम में किया जाएगा।

6. प्रतिपूर्ति की वसूली:-

(1) प्रतिपूर्ति की राशि औद्योगिक इकाई के ऋण खाते में जमा हो जाने के पश्चात् भी यदि यह पाया जाता है कि औद्योगिक इकाई/बैंक/वित्तीय संस्था द्वारा कोई तथ्य छु पाये गए हैं, तथ्यों को गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया है या सही जानकारी प्रस्तुत नहीं की गयी है व इस प्रकार गलत तरीके से प्रतिपूर्ति प्राप्त किया गया है तो प्रतिपूर्ति की राशि मय 12.5 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की दर से वसूल की जा सके गी अथवा आगामी क्लेम/ अन्य अनुदानों में समायोजित की जा सके गी।

(2) उपरोक्तानुसार वसूली राशि भू-राजस्व के बकाया की वसूली की भांति की जा सके गी।

(3) सक्षम अधिकारी को यह अधिकार होगा कि प्रतिपूर्ति का स्वत्व स्वीकृ त होने के पश्चात भी नियमानुसार नहीं पाये जाने अथवा किसी त्रुटिपूर्ण अभिलेख के आधार पर की गयी स्वीकृ ति आदेश, निरस्त कर सकें एवं यदि प्रतिपूर्ति की राशि संबंधित वित्तीय संस्था/बैंक को भुगतान कर दी गई हो तो वसूली आदेश जारी कर सकें गे।

(4) औद्योगिक इकाई द्वारा राज्य के मूल निवासियों को नीति द्वारा निर्धारित प्रतिशत में रोजगार उपलब्ध कराने के पश्चात् यदि बाद में स्वत्वों की अवधि के दौरान रोजगार से वंचित किया जाता है व इस कारण अकु शल, कु शल व प्रबंधकीय वर्ग में रोजगार नीति में निर्धारित प्रतिशत से कम हो जाता है तो ऐसी अवधि में प्रतिपूर्ति की पात्रता नहीं होगी तथा प्रतिपूर्ति की राशि संबंधित स्वत्व को निरस्त कर 12.5 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की दर से वापस प्राप्त की जा सके गी, भविष्य के क्लेमों में समायोजित की जा सके गी।

(5) यदि औद्योगिक इकाई द्वारा प्रस्तुत निवेशक के वर्ग से संबंधित प्रमाण-पत्र/तथ्य गलत पाये जाते हैं तो इस वर्ग के उद्यमियों को दी गई अतिरिक्त प्रतिपूर्ति की राशि 12.5 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की दर से वसूली योग्य होगी अथवा भविष्य के क्लेमों में समायोजित की जा सके गी।

(6) उद्योग संचालनालय/जिला व्यापार एवं उद्योग के न्द्र द्वारा नियम से संबंधित या कोई जानकारी/ अभिलेख मांगे जाने पर औद्योगिक इकाई द्वारा न दी जाये तो सक्षम अधिकारी प्रकरण पर पुनर्विचार कर उसे निरस्त कर 12.5 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की दर के साथ वसूली आदेश जारी कर सके गा।

(7) यदि औद्योगिक इकाई को पात्रता से अधिक प्रतिपूर्ति की प्राप्ति हो गयी हो अंतर की राशि वसूली योग्य होगी अथवा भविष्य के क्लेमों/अन्य अनुदानों में समायोजित की जा सके गी।

(8) उपरोक्त बिंदुओं के अनुसार यथास्थिति निरस्तीकरण/संशोधन/अधिक दिये गये प्रतिपूर्ति की राशि की वसूली के आदेश सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किये जायेंगे।

7. अपील:-

(1) सक्षम अधिकारी के द्वारा जारी किसी आदेश के विरूद्ध अपील भारसाधक सचिव, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के समक्ष की जा सके गी।

(2) अपील शुल्क रुपये 5000 का भुगतान कर चालान की प्रति प्रस्तुत करने पर ही अपील स्वीकार होगी। अनुसूचित जाति/जनजाति, निःशक्त (दिव्यांग), तृतीय लिंग, राज्य के सेवानिवृत्त सैनिक, राज्य के सेवानिवृत्त अग्निवीर सैनिक, नक्सलवाद से प्रभावित व्यक्ति, आत्म समर्पित नक्सली के द्वारा स्थापित उद्यमों के प्रकरणों में अपील शुल्क रुपये 2500 का भुगतान होगा। (3) अपील शुल्क का भुगतान विविध प्राप्तियों के तहत स्वीकार करते हुए चालान के द्वारा स्वत्व निरस्तीकरण अधिकारी/अपीलीय अधिकारी के कार्यालय में प्राप्त किया जाएगा/जमा किया जाएगा। (4) अपीलीय अधिकारी को अपील करने में हुए विलंब तथा प्रतिपूर्ति हेतु आवेदन प्रस्तुत करने में हुये विलंब एवं नियम के अधीन किसी अन्य बिन्दु पर प्रकरण के गुण-दोष के आधार पर विचार कर निर्णय लेने का अधिकार होगा। अपीलीय अधिकारी द्वारा तथ्यों के आधार पर तथा प्रभावित पक्षकार को अवसर प्रदान करते हुये अपील प्रकरण का निराकरण किया जाएगा। 8. प्रतिपूर्ति प्राप्त औद्योगिक इकाई का दायित्व:-

(1) प्रतिपूर्ति प्राप्त इकाइयों को जिला व्यापार एवं उद्योग के न्द्र में प्रतिपूर्ति प्राप्त होने के वर्ष से 05 वर्ष तक स्वप्रमाणित लेखे व उत्पादन/विक्रय विवरण प्रस्तुत करने होंगे।

(2) औद्योगिक इकाई को वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 05 वर्ष अथवा अंतिम प्रतिपूर्ति स्वीकृ ति दिनांक तक, जो पश्चातवर्ती हो तक उत्पादनरत रहते हुए नीति में उल्लेखित प्रतिशत अनुसार अकु शल, कु शल तथा प्रबंधकीय वर्ग में राज्य के मूल निवासियों को रोजगार प्रदान किया जाना अनिवार्य होगा।

(3) वाणिज्यिक उत्पादन/सेवा प्रारंभ करने के दिनांक से 05 वर्ष अथवा अंतिम प्रतिपूर्ति स्वीकृ ति दिनांक, जो पश्चातवर्ती हो तक आयुक्त/संचालक उद्योग की लिखित पूर्वानुमति के बिना इकाई के फै क्ट्री स्थल में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा, फै क्ट्री का कोई भाग अन्यत्र स्थानांतरित नहीं किया जा सके गा तथा ना ही स्वामित्व परिवर्तन किया जा सके गा तथा फै क्ट्री के अधोसंरचना तथा स्थायी परिसम्पतियों में कोई सारवान परिर्वतन नहीं किया जाएगा। आयुक्त/संचालक उद्योग को प्रकरण के गुण-दोष के आधार पर इन बिन्दुओं पर निर्णय लेने का अधिकार होगा।

9. स्वप्रेरणा से निर्णय-

राज्य शासन, भारसाधक सचिव, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग, आयुक्त/संचालक उद्योग किसी भी अभिलेख को बुला सकें गे तथा ऐसे आदेश पारित कर सकें गे जैसा कि वे नियमानुसार उचित समझें, परन्तु प्रतिपूर्ति को निरस्त करने या उसमें परिवर्तन के पूर्व प्रभावित पक्ष को सुनवाई का एक अवसर अवश्य दिया जाएगा। स्वयं के निर्णय/आदेश की समीक्षा भी राज्य शासन, भारसाधक सचिव, उद्यम आयुक्त/संचालक उद्योग कर सकें गे।

10. क्रियान्वयन:-

(1) इन नियमों के अन्तर्गत कार्यकारी निर्देश जारी करने, आवेदन पत्र, निरीक्षण/ परीक्षण प्रतिवेदन के प्ररूप में संशोधन हेतु आयुक्त/संचालक उद्योग सक्षम होंगे एवं क्रियान्वयन से संबंधित किसी मुद्दे पर जिला व्यापार एवं उद्योग के न्द्रों द्वारा मार्गदर्शन मांगे जाने पर आयुक्त/संचालक उद्योग द्वारा मार्गदर्शन दिया जाएगा।

(2) इन नियमों की व्याख्या, प्रतिपूर्ति की पात्रता या अन्य विवाद की दशा में राज्य शासन का निर्णय अंतिम एवं बंधनकारी होगा।

(3) इस नियम के अंतर्गत आवेदन, निरीक्षण प्रतिवेदन एवं प्रमाण पत्र के प्रारूप निर्धारित करने हेतु संचालक उद्योग सक्षम होंगे।

(4) राज्य शासन द्वारा नीति में संशोधन किए जाने की स्थिति में उक्त संशोधन इस नियम में यथास्थिति लागू होंगे। 11. विविध:-

(1) इन नियमों के अलग-अलग भाषाओं में संस्करण जारी करने हेतु आयुक्त/संचालक उद्योग सक्षम होंगे। विभिन्न भाषाओं के संस्करण में किसी विवाद की स्थिति में हिन्दी संस्करण मान्य होगा।

(2) इन नियमों के अन्तर्गत राज्य के न्यायालय में ही कोई वाद दायर किया जा सके गा।

(3) इन नियमों का क्रियान्वयन उद्योग संचालनालय एवं उनके अधीनस्थ जिला व्यापार एवं उद्योग के न्द्रों द्वारा किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,

रजत कुमार, सचिव.

उपाबंध-1

[नियम 5(1)(क) देखें ]

//शपथ पत्र//

1- यह शपथपूर्वक घोषित किया जाता है कि:-

1.1 औद्योगिक विकास नीति 2024-30 एवं जल शुल्क व्यय प्रतिपूर्ति एवं रॉयल्टी प्रतिपूर्ति नियम, 2024 का पूर्णतः अध्ययन कर लिया है एवं इसके सभी प्रावधानों का पालन औद्योगिक इकाई द्वारा किया जाएगा।

1.2 आवेदन पत्र में दी गई जानकारी एवं आवेदन पत्र के साथ संलग्न अभिलेख पूर्ण रूप से सही है।

2- यह भी कि उद्योग में अकु शल, कु शल एवं प्रबंधकीय/प्रशासकीय वर्ग में क्रमशः न्यूनतम 100 प्रतिशत, 70 प्रतिशत एवं 40 प्रतिशत रोजगार वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से न्यूनतम पांच वर्षों तक अनुदान/प्राप्ति दिनांक तक (जो पश्चातवर्ती हो) राज्य के मूल निवासियों को दिया जाता रहेगा।

3- यह भी कि भारत सरकार/राज्य शासन के किसी अन्य विभाग / निगम/ बोर्ड/ मंडल/ आयोग/ वित्तीय संस्थाओं/ बैंक को जल शुल्क व्यय प्रतिपूर्ति एवं रॉयल्टी प्रतिपूर्तिहेतु कोई आवेदन नहीं किया है एवं न ही अनुदान स्वीकृ त है/वितरित है ।

या

यह भी कि भारत सरकार/ राज्य शासन के किसी अन्य विभाग / निगम/ बोर्ड/ मंडल/ आयोग/ वित्तीय संस्थाओं/ बैंक को जल शुल्क व्यय प्रतिपूर्ति एवं रॉयल्टी प्रतिपूर्ति हेतु आवेदन किया है /अनुदान स्वीकृ त है/वितरित है।

4- यह भी कि इकाई उत्पादनरत् व कार्यरत् है।

5- यह भी कि मेरी/हमारी इकाई की स्थापना/संचालन हेतु के न्द्र सरकार/ राज्य शासन के द्वारा लागू किये गये नियम/दिशा- निर्देश (जो लागू हो) के अनुसार आवश्यकता होने पर वांछित अनुज्ञप्ति/सम्मति/अनापत्ति संबंधित विभाग/संस्था/निकाय के सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त कर लिये गये हैं।

6- यह भी कि उपरोक्त जानकारी गलत /त्रुटिपूर्ण / मिथ्या पाये जाने पर, अन्यथा किसी भी शपथ का उल्लंघन पाये जाने पर स्वीकृ तकर्ता अधिकारी द्वारा अनुदान/प्रतिपूर्ति राशि की वसूली मांग पत्र पर प्राप्त अनुदान/प्रतिपूर्ति की राशि नियमानुसार निर्धारित ब्याज के साथ 30 दिवसों की अवधि में वापस कर दी जावेगी।

औद्योगिक इकाई के अधिकृ त व्यक्ति के हस्ताक्षर

नाम

पद

औद्योगिक इकाई का नाम व पताउपाबंध-2

[नियम 5(2)(क)देखें ]

// प्रमाण पत्र//

प्रमाणित किया जाता है कि इकाई ................ जिसका उत्पादन प्रमाण पत्र क्र ……………………… है द्वारा क्लेम अवधि …………. से ……………. में निम्नानुसार रॉयल्टी का भुगतान किया गया है।

माह आयरन ओर पर भुगतान रॉयल्टी कोल पर भुगतान रॉयल्टी
क ु ल

यह राशि रॉयल्टी प्रतिपूर्ति की गणना के लिए सत्यापित की जाती है।

संयुक्त संचालक

संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्मउपाबंध-3

[नियम 5(2)(क) देखें ]

// प्रमाण पत्र//

प्रमाणित किया जाता है कि इकाई ................ जिसका उत्पादन प्रमाण पत्र क्र ……………………… है द्वारा क्लेम अवधि …………. से ……………. में निम्नानुसार जल शुल्क का भुगतान किया गया है।

माह जल शुल्क
क ु ल

यह राशि जल शुल्क प्रतिपूर्ति की गणना के लिए सत्यापित की जाती है।

अधीक्षक अभियंता, जल संसाधन विभाग

अथवा

मुख्य महाप्रबंधक, सीएसआईडीसी

(यथा लागू)

Cite this issue. Chattisgarh Gazette - Extraordinary, Government of Chattisgarh, 09 March 2026. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.chhattisgarh.eo.2026-03-09.125/. Archive identifier in.gazette.chhattisgarh.eo.2026-03-09.125.