10000
0000
छत्तीसगढ़शासन
पंजीयन क्रमांक "छत्तीसगढ़/दुर्ग/ 09 / 2013-2015 . "
सत्यमेव जयते
"बिजनेस पोस्ट के अन्तर्गत डाक शुल्क के नगद भुगतान ( बिना डाक टिकट) के प्रेषण हेतु अनुमत. क्रमांक जी.2-22- छत्तीसगढ़ गजट / 38 सि. से. भिलाई. दिनांक 30-05-2001 ."
छत्तीसगढ़ राजपत्र
(असाधारण)
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 142 ]
नवारायपुर , गुरूवार, दिनांक 19 मार्च 2026- -फाल्गुन 28 , शक 1947
छत्तीसगढ़ विधान सभा सचिवालय
रायपुर , गुरूवार, दिनांक19 मार्च , 2026 (फाल्गुन 28, 1947)
क्रमांक-5105/ वि.स./ विधान/ 2026.- छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 (क्रमांक 7 सन् 2026) जो गुरूवार, दिनांक 19 मार्च , 2026 को पुरःस्थापित हुआ है, को जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है ।
हस्ता./- (दिनेश शर्मा) सचिव.
283 284
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 19 मार्च 2026
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्रमांक 7 सन् 2026)
अनुक्रमणिका
अध्याय-एक
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 . प्रारंभिक
खण्ड
1. संक्षिप्त नाम , विस्तार और प्रारंभ.
2. परिभाषाएँ.
अध्याय-दो
अवैध धर्मांतरण का प्रतिषेध
3. अवैध धर्मांतरण का प्रतिषेध.
अध्याय-तीन
धर्मांतरण की प्रक्रियाएँ
4. आशयित धर्मांतरण की घोषणा.
5. धर्मांतरण पर आपत्ति की प्रक्रिया.
6. जाँच करते समय सक्षम प्राधिकारी की शक्तियाँ .
7. सक्षम प्राधिकारी का निर्णय.
8. सक्षम प्राधिकारी के आदेश के विरुद्ध अपील .
9. धर्मांतरण के बाद की प्रक्रिया.
10. धर्मांतरण का प्रभाव, अवैध धर्मांतरण और धर्मांतरित व्यक्तियों की स्थिति.
11. विधिमान्यता का पर्यवसान.
12. केवल धर्मांतरण के उद्देश्य से किया गया विवाह.
13. धर्मांतरण में सहायक व्यक्तियों द्वारा अनुपालन.
14. प्रत्यावर्तन की सूचना.
अध्याय-चार
अपराध और दंड
15. अवैध धर्मांतरण के पक्षकार.
16. धारा 3 के उपबंधों के उल्लंघन के लिए दंड.
17. अपराधों को करने के प्रयास के लिए दंड.
18. धर्मांतरण में सहायक व्यक्तियों द्वारा अनुपालन न करना.
19. प्रक्रिया का उल्लंघन.
20. पीड़ित का प्रतिकर.
21. अपराध का संज्ञेय और अजमानतीय होना.
22. अन्वेषण.
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2026
284( 1) 23. प्रादेशिक क्षेत्राधिकार.
24. साक्ष्य का भार .
अध्याय-पाँच
विशेष न्यायालय
25. विशेष न्यायालयों का पदाभिदान.
26. विशेष न्यायालयों की प्रक्रिया तथा शक्तियाँ.
27. विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति.
अध्याय-छः
विविध
28. सद्भावनापूर्वक की गई कार्यवाही का संरक्षण.
29. कठिनाइयों का निवारण.
30. नियम बनाने की शक्ति.
31. निरसन और व्यावृत्तियाँ.
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 19 मार्च 2026
284 ( 2)
छत्तीसगढ़ विधेयक
(क्रमांक 7 सन् 2026)
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026
महिमामंडन, दुर्व्यपदेशन, बल, असम्यक प्रभाव , प्रपीड़न, प्रलोभन या किसी कपटपूर्ण तरीके से या विवाह द्वारा , एक आस्था या धर्म से दूसरे धर्म में , जिसमें डिजिटल माध्यम भी शामिल है, अवैध रूप से धर्मांतरण का, विनियमन और प्रतिषेध करने तथा उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों का उपबंध करने हेतु विधेयक ।
भारत गणराज्य के सत्तहतरवें वर्ष में छत्तीसगढ़ विधानमंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो:-
अध्याय- एक
प्रारंभिक
संक्षिप्त नाम , 1.
विस्तार और प्रारंभ .
(1 ) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 कहलायेगा ।
(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य पर होगा ।
(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा , नियत करें और इस अधिनियम के भिन्न- भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी ।
परिभाषाएँ.
2. (1 ) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो-
(क) " प्रलोभन " से अभिप्रेत है किसी भी रूप में कोई प्रलोभन देना, जिसमें शामिल हैं;
(एक) नकद या वस्तु के रूप में कोई उपहार या परितोषण; या
(दो) मौद्रिक या अन्य कोई भी भौतिक लाभ प्रदान करना; या
(तीन) रोजगार , अनुवृत्ति ( सब्सिडी) , स्कूल में निःशुल्क शिक्षा, चिकित्सा सुविधा; या
(चार) विवाह का वादा; या
(पाँच) बेहतर जीवनशैली; या
(छः) किसी भी धर्म के अभ्यास , रीति रिवाजों और समारोहों या धर्म के किसी भाग को अन्य धर्मों के संबंध में हानिकारक तरीके से प्रस्तुत करना; या छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2026
284( 3) (सात) एक धर्म का दूसरे धर्म के विरुद्ध महिमामंडन करना ।
(ख ) " प्रपीड़न" से अभिप्रेत है किसी व्यक्ति को मनोवैज्ञानिक दबाव या शारीरिक बल का प्रयोग करके , जिससे उसे शारीरिक चोट पहुँचे या उसकी धमकी दी जाये , किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरूद्ध कार्य करने के लिए विवश करना;
(ग) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए " सक्षम प्राधिकारी " से अभिप्रेत है जिला मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा विशेष रूप से प्राधिकृत कोई अधिकारी , जो अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट के पद से निम्न श्रेणी का न हों;
(घ) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए " धर्मांतरण " से अभिप्रेत है किसी व्यक्ति द्वारा अपने आस्था या धर्म का त्याग करना और दूसरा धर्म अपनाना और इसमें शामिल हैं:
(एक) जन्म, विवाह और मृत्यु से संबंधित अनुष्ठानों सहित स्थानीय पारंपरिक प्रथाओं का पालन करना बंद कर देना और उसके स्थान पर किसी अन्य धर्म के अनुष्ठानों को अपनाना; या
(दो) पारंपरिक और/ या पैतृक देवताओं की पूजा का त्याग करना या बंद करना , जिसमें उनकी पूजा से संबंधित प्रार्थनाओं, अनुष्ठानों, त्योहारों या अन्य प्रथागत प्रथाओं को बंद करना और स्वयं की मूल धार्मिक परंपरा से अलग विश्वासों या आस्थाओं को अपनाना और उनका पालन करना शामिल है , जिसके द्वारा जानबूझकर अपनी पारंपरिक प्रथाओं का त्याग करना ; या
(तीन) किसी भिन्न मूल के धर्म को स्वीकार करना, जो अपने धर्मशास्त्र के भाग के रूप में धर्मांतरण या अन्यथा की सुविधा प्रदान करता है; या
(चार) अपने पारंपरिक मान्यताओं का पालन करना बंद करते हुए किसी पराये विश्वास या धर्म का पालन करना और साथ ही गैर - धर्मांतरित रहने का दावा करना;
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 19 मार्च 2026
284(4)
स्पष्टीकरणः- यदि कोई व्यक्ति अपने पैतृक धर्म या आस्था में पुनः वापस आता है, तो ऐसी वापसी इस अधिनियम के अंतर्गत धर्मांतरण के रूप में नहीं मानी जाएगी ।
(ङ) " धर्मांतरण समारोह " से कोई रीति -रिवाज या औपचारिक प्रक्रिया संदर्भित है, जो किसी व्यक्ति को एक आस्था या विश्वास प्रणाली से किसी दूसरे में परिवर्तित या रूपांतरित करती है;
(च) " डिजिटल मोड" से अभिप्रेत है और इसमें शामिल है सोशल मीडिया नेटवर्किंग साइट्स, एप्लिकेशन , वेबसाइट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक मोड;
(छ) " बल " में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का 45) में यथा- परिभाषित बल प्रदर्शन या सामाजिक बहिष्कार की धमकी सहित किसी भी प्रकार की क्षति पहुँचाने की धमकी शामिल होगी;
(ज) " सामूहिक धर्मांतरण " से अभिप्रेत है दो या दो से अधिक व्यक्तियों का एक ही समारोह में एक धर्म या आस्था से दूसरे धर्म में धर्मांतरण ;
(झ) " दुर्व्यपदेशन " से अभिप्रेत है और इसमें शब्दों या कार्यों द्वारा तथ्य का ऐसा कथन शामिल है जो असत्य या भ्रामक हो, जिसे जानबूझकर सत्य होना बताया गया हो, जिसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को अपना धर्म या आस्था परिवर्तित करने के लिए प्रेरित करना हो;
(ञ) " व्यक्ति " में कोई व्यक्ति या कोई कंपनी या संघ या व्यक्तियों का निकाय शामिल होगा, चाहे वह निगमित हो या नहीं और उनके एजेंट , अटॉर्नी, प्रतिनिधि, समनुदेशिती या उनकी ओर से कार्य करने वाला कोई अन्य व्यक्ति शामिल होगा;
(ट) "विहित " से अभिप्रेत है , इस अधिनियम के अधीन निर्मित नियमों के द्वारा विहित तथा अभिव्यक्ति "विहित " का तद्नुसार अर्थ लगाया जाएगा;
(ठ) " धर्म" से अभिप्रेत है तत्समय प्रवृत्त किसी भी विधि या प्रथा के तहत घोषित और परिभाषित धर्म;
(ड) " धर्म परिवर्तक/ धर्मांतरणकर्ता " से अभिप्रेत है किसी भी धर्म या आस्था के किसी व्यक्ति या प्रतिनिधि , जो एक धर्म या आस्था से दूसरे धर्म में धर्मांतरण का कोई कार्य करता है और जो सक्षम प्राधिकारी के समक्ष पंजीकृत है;
छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2026
284( 5) (ढ) " अनुसूचित जनजातियाँ " का वही अर्थ है , जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 366 के खंड (25) में उनके लिए समनुदेशित किया गया है;
(ण) "अनुचित प्रभाव " से अभिप्रेत है, अनुचित लाभ या फायदा प्राप्त करने के आशय से, वैशवासिक संबंध, वास्तविक या प्रत्यक्ष प्राधिकार या अन्य समान परिस्थितियों से उत्पन्न अधिकार, विश्वास या शक्ति की स्थिति का प्रयोग , किसी अन्य व्यक्ति की इच्छा पर हावी होने और ऐसे व्यक्ति को उसकी स्वतंत्र इच्छा या सर्वोत्तम हितों के विपरीत कार्य करने हेतु प्रेरित करने के लिए किया जाये;
(त) " अवैध धर्मांतरण " से अभिप्रेत है ऐसा कोई भी धर्मांतरण , जो इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप नही है ।
(थ) " पीड़ित" से अभिप्रेत है कोई भी व्यक्ति या उसके माता- पिता, भाई- बहन , पति/ पत्नी , बच्चे या रक्त, विवाह या दत्तकग्रहण द्वारा उनसे संबंधित कोई अन्य व्यक्ति, जिसका इस अधिनियम के तहत निर्धारित गैरकानूनी धर्मांतरण किया जा रहा है या किया गया है ।
(2) शब्द और अभिव्यक्तियाँ, जो यहाँ प्रयुक्त हैं तथा परिभाषित नहीं हैं, किन्तु भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का 45) , भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (2023 का 46) तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (1989 का 33 ) , साधारण खण्ड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) और छत्तीसगढ़ राज्य में लागू किसी अन्य विधि में परिभाषित हैं, उनके वही अर्थ होंगे जो क्रमशः उन संहिताओं/ अधिनियमों में उनके लिए समनुदेशित किए गए हैं ।
अध्याय-दो अवैध धर्मांतरण का प्रतिषेध
3.
अवैध धर्मांतरण का प्रतिषेध.
(1 ) कोई भी व्यक्ति, प्रत्यक्षतः या अन्यथा , किसी अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों को एक आस्था या धर्म से दूसरे धर्म में, भौतिक या डिजिटल माध्यम से महिमामंडन, मिथ्या निरूपण , बल, अनुचित प्रभाव, प्रपीड़न, प्रलोभन, के उपयोग या अभ्यास द्वारा , धर्मांतरण या धर्मांतरित करने का दुष्प्रेरण या षड़यंत्र नहीं करेगा । छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2026
284(6)
(2) कोई भी व्यक्ति , उप - धारा (1 ) में निर्दिष्ट किसी भी तरीके से धर्मांतरण करने के प्रयोजनार्थ, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से , किसी विदेशी स्त्रोत या संस्था को कोई मौद्रिक लाभ परिदत्त अथवा उपार्जित या प्राप्तः नहीं करेगा ।
(3) कोई भी व्यक्ति, किसी अन्य व्यक्ति को किसी भिन्न धर्म में धर्मांतरित करने के आशय से,
(एक) उस व्यक्ति के जीवन या संपत्ति को भय में नही डालेगा; या
(दो) अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा , जिसका आशय या यह जानते हुए कि ऐसा कार्य सामान्यतः पूजा स्थल , मानव निवास या संपत्ति की अभिरक्षा के रूप में उपयोग लाए जाने वाले किसी भवन को नष्ट नहीं करेगा; या
(तीन) किसी नाबालिग , महिला या किसी व्यक्ति को प्रलोभन देकर , बलपूर्वक या अन्यथा विक्रय कर उनका अवैध व्यापार नहीं करेगा; या
(चार) धर्मांतरण के प्रयोजन से यहाँ वर्णित किसी भी कार्य को करने का दुष्प्रेरण या षड़यंत्र नहीं करेगा ।
अध्याय -तीन धर्मांतरण के लिए प्रक्रिया
4.
की घोषणा. आशयित धर्मांतरण (1 ) कोई भी व्यक्ति, जो एक आस्था या धर्म से दूसरे धर्म में संपरिवर्तित होना चाहता है, वह निर्धारित प्रारूप के अनुसार घोषणा पत्र, उस सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तुत करेगा, जिसके अधिकार क्षेत्र की स्थानीय सीमाओं के भीतर उक्त धर्मांतरण किया जाना है ।
(2) अनुसूचित जनजाति का कोई भी व्यक्ति जो अन्य धर्म में संपरिवर्तित होना चाहता है, वह निर्धारित प्रारूप के अनुसार घोषणा पत्र उस सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तुत करेगा, जिसके अधिकार क्षेत्र की स्थानीय सीमाओं के भीतर उक्त धर्म परिवर्तन किया जाना है ।
(3) धर्म परिवर्तक या प्रीस्ट या मौलवी , फादर या धर्मांतरण का धार्मिक अनुष्ठान करने वाले व्यक्ति निर्धारित प्रारूप के अनुसार धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति के धर्म परिवर्तन के आशय की घोषणा उस सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तुत करेगा, जिसके अधिकार क्षेत्र की छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2026
284 ( 7) स्थानीय सीमाओं के भीतर उक्त धर्मांतरण किया जाना है ।
(4) सक्षम प्राधिकारी द्वारा उपरोक्त उप - धाराओं के अंतर्गत सभी अपेक्षित सूचनाओं के प्राप्त होने पश्चात्, निर्धारित प्रारूप में संपूर्ण प्रपत्र प्राप्त होने के 7 दिनों के भीतर , प्रस्तावित धर्म परिवर्तन के विवरण को इस अधिनियम के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुरक्षित अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करेगा और तहसीलदार, ग्राम पंचायत और स्थानीय पुलिस थाने के कार्यालयों में प्रस्तावित धर्म परिवर्तन की सूचना प्रदर्शित करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि सूचना में आवेदक का नाम, वर्तमान धर्म या आस्था और प्रस्तावित धर्म शामिल हो ।
(5) उप- धारा (1 ) , (2) एवं (3) का उल्लंघन किये जाने पर प्रस्तावित धर्म संपरिवर्तन किये जाने का प्रभाव अवैध तथा शून्य हो जाएगा ।
धर्मांतरण पर आपत्ति की प्रक्रिया.
5. कोई भी व्यक्ति, धारा 4 की उप - धारा (4 ) के अधीन आशयित धर्मांतरण की सूचना प्रकाशित होने की तारीख से तीस दिवस की समाप्ति के पूर्व, प्रस्तावित धर्मांतरण और उसके परिणामों पर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष लिखित में आपत्ति कर सकेगा ।
जाँच करते समय सक्षम प्राधिकारी की शक्तियाँ.
6. इस अधिनियम के अंतर्गत घोषणा, आपत्ति , सूचना, शिकायत या स्वप्रेरणा से की गई किसी भी जाँच के प्रयोजन के लिए , सक्षम प्राधिकारी की शक्तियाँ इस अधिनियम के अंतर्गत किए गए किसी भी अपराध के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (2023 का 46) के प्रावधानों के अंतर्गत पुलिस प्राधिकारी की शक्तियों के अतिरिक्त होंगी , न कि उनके अल्पीकरण में ।
जाँच के प्रयोजन के लिए सक्षम प्राधिकारी के पास निम्नलिखित मामलों के संबंध में जाँच के दौरान सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अंतर्गत एक सिविल न्यायालय में निहित सभी शक्तियाँ होंगी , अर्थातः-
(क) गवाहों को बुलाना और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शपथ पर उनकी परीक्षा करना;
(ख) प्रकटन और निरीक्षण;
(ग) दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए बाध्य करना;
(घ) शपथपत्रों के साक्ष्य प्राप्त करना; और
284 (8)
छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 19 मार्च 2026
(ङ) गवाहों की परीक्षा के लिए कमीशन जारी करना;
और सक्षम प्राधिकारी के समक्ष कोई भी कार्यवाही भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का 45 ) की धारा 229 के अर्थ में न्यायिक कार्यवाही मानी जाएगी ।
7.
सक्षम प्राधिकारी का निर्णय.
(1 ) सक्षम प्राधिकारी , या तो शिकायत पर या स्वप्रेरणा से , आशयित धर्मांतरण की घोषणा एवं आपत्ति पर तथा अवैध धर्मांतरण की सूचना पर जांच करेगा और तीस दिनों की अवधि के भीतर अंतिम आदेश पारित करेगा ।
(2 ) यदि सक्षम प्राधिकारी जाँच के आधार पर यह निष्कर्ष निकालता है कि इस अधिनियम के अंतर्गत कोई अपराध किया गया है, -
(क) वह संबंधित पुलिस प्राधिकारियों को प्रतिवेदन भेजेगा; तथा
(ख) वह घोषणा को निरस्त करेगा ।
(3 ) यदि आवेदन में कोई अवैधता नहीं पाई जाती है , तो सक्षम प्राधिकारी यह निष्कर्ष निकाल सकता है कि आवेदन वैध है ।
सक्षम प्राधिकारी के आदेश
के विरुद्ध अपील.
8. सक्षम प्राधिकारी द्वारा धारा 7 की उप - धारा (1 ) के अधीन जारी आदेश के विरूद्ध कोई भी व्यक्ति, ऐसे आदेश की तारीख से तीस दिनों के भीतर, उस क्षेत्र पर अधिकार क्षेत्र रखने वाले प्रधान जिला न्यायाधीश के समक्ष अपील कर सकता है जहाँ सक्षम प्राधिकारी का कार्यालय स्थित है ।
9.
धर्मांतरण के बाद कीप्रक्रिया.
(1 ) धर्मांतरित व्यक्ति, धर्मांतरण की तारीख से तीस दिवस के भीतर, निर्धारित प्रारूप के अनुसार, एक घोषणा पत्र उस सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तुत करेगा, जिसके समक्ष धारा 4 के अधीन घोषणा प्रस्तुत की गई थी ।
(2) उप-धारा (1 ) का उल्लंघन किये जाने पर प्रस्तावित धर्म संपरिवर्तन किये जाने का प्रभाव अवैध तथा शून्य हो जायेगा ।
(3) सक्षम प्राधिकारी उप -धारा (1 ) में घोषणा प्रस्तुत करने के इक्कीस दिनों के भीतर धर्मांतरित व्यक्ति को अपनी पहचान सत्यापित करने और घोषणा की विषय- वस्तु की पुष्टि करने के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की अपेक्षा करेगा । विधिवत सत्यापन छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2026
284 ( 9) के बाद, सक्षम प्राधिकारी निर्धारित प्रारूप के अनुसार धर्मांतरण प्रमाणपत्र जारी करेगा ।
(4) उप- धारा (3 ) के अंतर्गत जारी धर्मांतरण प्रमाणपत्र, इस बात का निर्णायक प्रमाण माना जाएगा कि धर्मांतरण इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार किया गया था ।
स्पष्टीकरणः- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया धर्मांतरण प्रमाण पत्र, नागरिकता या पहचान का प्रमाण नहीं माना जायेगा ।
10. सक्षम प्राधिकारी इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसरण में धर्मांतरित व्यक्ति को धर्मांतरण प्रमाणपत्र जारी करने पर, अपने आधिकारिक अभिलेखों में ऐसे व्यक्ति की स्थिति को लिखित रूप में अद्यतन करेगा, जैसा की विहित किया जाये ।
धर्मांतरण का प्रभाव, अवैध धर्मांतरण और धर्मांतरित व्यक्तियों की स्थिति.
11.
विधिमान्यता का पर्यवसान.
(1 ) यदि, धारा 7 की उप - धारा (1 ) के अंतर्गत धर्मांतरण के लिए आवेदन , वैध निर्धारित की जाने की तिथि से 90 दिनों की अवधि के भीतर धर्मांतरण नहीं किया जाता है , तो ऐसा आवेदन पर्यवसित माना जायेगा ।
(2) आवेदन के पर्यवसान के बाद किया गया कोई भी धर्मांतरण अवैध माना जाएगा और वह धर्मांतरण , अवैध धर्मांतरण होगा ।
12.
केवल धर्मांतरण के उद्देश्य से किया गया विवाह.
(1 ) जहाँ एक धर्म या आस्था का कोई व्यक्ति किसी अन्य धर्म या आस्था के व्यक्ति के साथ किसी संस्था , धार्मिक स्थान , निजी या सार्वजनिक परिसर में विवाह करता है:-
(एक) फादर, प्रीस्ट, मौलवी या ऐसे विवाह को संपन्न कराने के लिए जिम्मेदार कोई अन्य व्यक्ति; और
(दो) विवाह करने वाला व्यक्ति,
विवाह की प्रस्तावित तिथि से साठ दिवस पूर्व निर्धारित प्रारूप के अनुसार घोषणा पत्र सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगा । सक्षम प्राधिकारी अपने अधिकारिक वेबसाइट में घोषणा को प्रकाशित करेगा ।
(2) सक्षम प्राधिकारी यह जाँच करेगा कि क्या ऐसे विवाह का आशय अवैध संपरिवर्तन है । छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2026
284(10)
( 3 ) उपरोक्त उप - धारा (1 ) के अधीन प्रदत्त सूचना के आधार पर, सक्षम प्राधिकारी इस अधिनियम की धारा 6 के अनुसार, 45 दिनों के भीतर जाँच पूर्ण करेगा ।
(4) जाँच के अनुसरण में सक्षम प्राधिकारी इस अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत उचित कार्यवाही कर सकता है ।
(5) जहाँ एक धर्म या आस्था का कोई व्यक्ति किसी अन्य धर्म या आस्था के व्यक्ति के साथ विवाह करता है और ऐसे विवाह से पहले या बाद में धर्मांतरण करता है , और ऐसा धर्मांतरण केवल विवाह के उद्देश्य से या विवाह धर्मांतरण के उद्देश्य से है, तो धर्मांतरण को अवैध माना जाएगा, यदि यह इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार नहीं है ।
स्पष्टीकरणः- इस अधिनियम के अंतर्गत विवाह स्वतः ही धर्मांतरण का कारण नहीं बनेगा । धर्मांतरण के लिए इस अधिनियम में निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना होगा और केवल विवाह करना ही किसी भी धार्मिक धर्मांतरण को वैध बनाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा ।
13.
धर्मांतरण में सहायक व्यक्तियों द्वारा अनुपालन.
(1 ) कोई भी व्यक्ति, जो धर्मांतरण में सहायता करता है, उसे इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से निर्धारित प्रारूप में, जैसा सक्षम प्राधिकारी द्वारा विहित किया जाये , पंजीयन हेतु अपना विवरण प्रदान करना होगा, जो इस आशय का एक अभिलेख रखेगा ।
(2) धर्मांतरण में सहायता करने वाला कोई भी व्यक्ति, आरंभ किए गए या पूर्ण किए गए प्रत्येक धर्मांतरण के संबंध में सहायक दस्तावेजों के साथ , जैसा कि विहित किया जाये , अभिलेख संधारित करेगा ।
(3) धर्मांतरण में सहायता करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के साठ दिवस के भीतर, सक्षम प्राधिकारी को निर्धारित प्रारूप में एक वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, जिसमें निम्नलिखित जानकारी होगी:-
(क) वित्तीय वर्ष के दौरान शुरू किए गए और पूर्ण किए गए धर्मांतरणों की कुल संख्या, धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति/व्यक्तियों का नाम , आयु, लिंग और पता सहित विवरण; और
(ख) प्राप्त सभी धनराशियों (घरेलू या विदेशी ) का विवरण देने वाली एक प्रमाणित वित्तीय लेखा छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2026
284(11) परीक्षा रिपोर्ट ।
(4 ) ऐसे अभिलेख प्रत्येक धर्मांतरण की तिथि से बनाए रखे जाएँगे और आवश्यकतानुसार सक्षम प्राधिकारी द्वारा निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराए जाएँगे ।
(5 ) सक्षम प्राधिकारी को निम्नलिखित शक्तियाँ होंगीः-
(क) धर्मांतरण की प्रामाणिकता सत्यापित करना और इस अधिनियम के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करना;
(ख ) धर्मांतरण से संबंधित शिकायतों या व्यथाओं की जाँच करना ।
(ग) किसी भी व्यक्ति को अभिलेख की जाँच या प्रस्तुत करने के लिए आहुत करना ।
(6) इस अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने के उद्देश्य से , कोई भी व्यक्ति भारत के भीतर या बाहर से दान, अनुदान या अंशदान स्वीकार नहीं करेगा ।
(7) राज्य सरकार इस अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को ऐसी कोई वित्तीय सहायता, अनुदान या बुनियादी ढाँचा सहायता प्रदान नहीं करने या उसे वापस लेने या रद्द करने के संबंध में समुचित कदम उठायेगा ।
14.
प्रत्यावर्तन की सूचना.
(1 ) यदि कोई व्यक्ति अपने पैतृक धर्म या आस्था में वापस लौटता है, तो ऐसे प्रत्यावर्तन की सूचना प्रत्यावर्तन से पहले या बाद में निर्धारित प्रारूप , जैसा कि विहित किया जाये, में सक्षम प्राधिकारी को दी जायेगी ।
(2 ) इसके बाद सक्षम प्राधिकारी धर्मांतरण प्रमाणपत्र को रद्द करने का आदेश पारित करेगा; ऐसे मामलों में, जहाँ धर्मांतरण प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया है, सक्षम प्राधिकारी सूचना के अनुसरण में व्यक्ति के अपने पैतृक धर्म या आस्था में वापस लौटने को दर्ज करते हुए एक औपचारिक आदेश पारित कर सकता है और उसके बाद सूचना निर्धारित तरीके से प्रकाशित की जाएगी ।
(3) एक बार जब उप - धारा (1 ) के तहत एक व्यक्ति द्वारा सक्षम प्राधिकारी के समक्ष सूचना प्रस्तुत कर दी जाती है, तो प्रत्यावर्तन सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए वैध माना जाएगा । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 19 मार्च 2026
284( 12)
अध्याय-चार
अपराध और दंड
15.
अवैध धर्मांतरण के पक्षकार.
जब इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किया जाता है, तो निम्नलिखित में से प्रत्येक व्यक्ति उस अपराध में भाग लेने वाला माना जाएगा और उस अपराध का दोषी होगा और उस पर इस प्रकार आरोप लगाया जाएगा, मानो उसने वास्तव में उक्त अपराध किया हो , अर्थातः-
(क) व्यक्ति , जो अपराध कारित करने में किसी दूसरे व्यक्ति को सक्षम बनाने या सहायता करने के उद्देश्य से कोई कार्य करता है या करने का लोप करता है ; या
(ख ) व्यक्ति, जो वास्तव में वह कार्य करता है , जो अपराध का गठन करता है ; या
(ग) व्यक्ति, जो अपराध कारित करने में किसी अन्य व्यक्ति की सहायता करता है , उसे दुष्प्रेरित करता है या उसके साथ षड़यंत्र रचता है; या
(घ ) व्यक्ति, जो किसी अन्य व्यक्ति को अपराध करने के लिए परामर्श देता है, उसे राजी करता या प्राप्त करता है ।
16.
धारा 3 के उपबंधों के उल्लंघन के लिए दंड.
(1 ) कोई भी व्यक्ति जो धारा 3 की उप -धारा (1 ) में निहित प्रावधानों का उल्लंघन करता है, किसी भी सिविल दायित्व पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, किसी भी भांति के कारावास , जिसकी अवधि सात वर्ष से कम नहीं होगी , किंतु जो दस वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माना, जो पाँच लाख रुपये से कम नही होगा , से दण्डित किया जायेगा; परंतु न्यायालय , किन्ही पर्याप्त या विशेष कारणों से , जो निर्णय में अभिलिखित किये जायेंगे , कारावास की अवधि को कम कर सकेगाः
परंतु, यदि उक्त अपराध किसी नाबालिग , विकृत चित्त व्यक्ति या महिला या अन्य पिछड़ा वर्ग या अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित व्यक्ति के संबंध में किया जाता है, तो कारावास , जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नहीं होगी, किंतु जो बीस वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माना, जो दस लाख रूपये से कम नहीं होगा, से दण्डित किया जायेगा, परंतु न्यायालय , किन्ही पर्याप्त या छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2026
284(13) विशेष कारणों से, जो निर्णय में अभिलिखित किये जायेंगे , कारावास की अवधि को कम कर सकेगाः
परंतु यह और भी कि जो कोई सामूहिक धर्म परिवर्तन के संबंध में धारा 3 के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, कठोर कारावास से , जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नहीं होगी , किंतु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, जिसका अर्थ उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवनकाल के लिए कारावास होगा और जुर्माना, जो पच्चीस लाख रुपये से कम नहीं होगा , से दण्डित किया जायेगा, परंतु न्यायालय, किन्ही पर्याप्त या विशेष कारणों से , जो निर्णय में अभिलिखित किये जायेंगे , कारावास की अवधि को कम कर सकेगा ।
(2 ) किसी लोक सेवक द्वारा अधिनियम की धारा 3 की उप - धारा ( 1 ) के उल्लंघन में अपराध किए जाने की स्थिति में , किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नहीं होगी , किंतु जो बीस वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माना , जो दस लाख रुपये से कम नहीं होगा, दण्डित किया जायेगा ।
(3) कोई भी व्यक्ति जो धारा 3 की उप - धारा (2) में अंतर्विष्ट प्रावधानों का उल्लंघन करता है , कठोर कारावास , जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नहीं होगी, किंतु जो बीस वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माना, जो बीस लाख रुपये से कम नहीं होगा, से दंडित किया जाएगा, परंतु न्यायालय , किन्ही पर्याप्त या विशेष कारणों से, जो निर्णय में अभिलिखित किये जायेंगे , कारावास की अवधि को कम कर सकेगा ।
(4) कोई भी व्यक्ति जो धारा 3 की उप - धारा (3 ) में अंतर्विष्ट प्रावधानों का उल्लंघन करता है , कठोर कारावास , जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नही होगी , किंतु जो बीस वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माना, जो तीस लाख रुपये से कम नहीं होगा, से दंडित किया जाएगा, परंतु न्यायालय , किन्ही पर्याप्त या विशेष कारणों से, जो निर्णय में अभिलिखित किये जायेंगे , कारावास की अवधि को कम कर सकेगाः
परंतु, ऐसा जुर्माना, पीड़ित के चिकित्सा व्यय और पुनर्वास हेतु न्यायसंगत और उचित होगा ।
(5) जो कोई, इस अधिनियम के अधीन अपराध के लिए पहले दोषसिद्ध किया गया है, इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध के लिए पुनः दोषसिद्ध किया जाता है , वह ऐसे प्रत्येक पश्चातवर्ती अपराध के छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2026
284(14)
लिए आजीवन कारावास से दण्डित किया जायेगा; जो उस व्यक्ति के शेष प्राकृतिक जीवनकाल के लिए कारावास होगा , परंतु न्यायालय , किन्ही पर्याप्त या विशेष कारणों से, जो निर्णय में अभिलिखित किये जायेंगे , कारावास की अवधि को कम कर सकेगा ।
अपराधों को करने के प्रयास के लिए दंड.
17. जो कोई , इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध को करने का प्रयत्न करेगा, वह उस अपराध के लिए उपबन्धित कारावास के आधे तक या ऐसे अर्थदण्ड से , जो उस अपराध के लिए उपबन्धित है , या यथास्थिति , दोनों से दण्डित किया जाएगा ।
18.
धर्मांतरण में सहायक व्यक्तियों द्वारा अनुपालन न करना.
(1 ) कोई भी व्यक्ति , जो धारा 12 के प्रावधानों का अनुपालन करने में विफल रहता है , वह किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छः माह से कम की नहीं होगी किंतु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माना, जो दो लाख रुपये तक का हो सकेगा, से दण्डित किया जायेगा ।
(2) कोई भी व्यक्ति, जो धारा 13 के प्रावधानों का अनुपालन करने में विफल रहता है, वह किसी भी भांति के कारावास से , जिसकी अवधि छः माह से कम की नहीं होगी किंतु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माना, जो एक लाख रुपये तक का हो सकेगा, से दण्डित किया जायेगा ।
19.
प्रक्रिया का उल्लंघन.
जो कोई धारा 4 एवं 9 के प्रावधानों का उल्लंघन करेगा वह ऐसी अवधि के लिए कारावास से, जिसकी अवधि छः माह से कम नहीं होगी किंतु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माना जो दस हजार रूपये से कम नहीं होगी, से दंडित किया जायेगा ।
पीड़ित का प्रतिकर .
20. न्यायालय , इस अधिनियम के अधीन अधिरोपित किये गए किसी भी दंड के अतिरिक्त, अभियुक्त को, अवैध धर्मांतरण के पीड़ित को उचित प्रतिकर देने का निर्देश देगा , जो अधिकतम दस लाख रुपये तक हो सकेगा ।
21. (1 ) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (2023 का 46) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भीः-
अपराध का संज्ञेय और अजमानतीय होना.
(क) इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय प्रत्येक अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होगा;
(ख) धारा 16, 17 और 18 के अंतर्गत दंडनीय अपराध के अभियुक्त किसी भी व्यक्ति को, जमानत या उसके स्वयं के बंधपत्र पर रिहा छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2026
284 ( 15) नहीं किया जायेगा, जब तक कि-
(एक) विशेष लोक अभियोजक को ऐसी रिहाई के लिए आवेदन पर सुनवाई का अवसर दिया गया हो ; और
(दो) जहाँ, विशेष लोक अभियोजक आवेदन का विरोध करता है , वहां न्यायालय इस बात से संतुष्ट है कि विश्वास करने के लिए उचित आधार है कि अभियुक्त ऐसे अपराध का दोषी नहीं है और जमानत पर रहते हुए उसके द्वारा कोई अपराध किए जाने की संभावना नहीं है ।
(2) उप -धारा ( 1 ) के खंड ( ख ) में निर्दिष्ट जमानत देने पर प्रतिबंध, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (2023 का 46) या जमानत प्रदान करने से संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के प्रावधानों के अतिरिक्त होंगे , न कि उनके अल्पीकरण में ।
(3 ) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (2023 का 46) की धारा 482 की कोई बात, इस अधिनियम के अधीन अपराध करने के आरोप में किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी से संबंधित किसी मामले में लागू नहीं होगी ।
अन्वेषण.
22. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (2023 का 46) में अंतर्विष्ट किसी भी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का अन्वेषण, पुलिस उप - निरीक्षक से अनिम्न श्रेणी के अधिकारी द्वारा नहीं किया जायेगा ।
23.
प्रादेशिक क्षेत्राधिकार.
इस अधिनियम के अधीन प्रत्येक अपराध की जाँच और विचारण, अनन्य रूप से विशेष न्यायालय द्वारा किया जाएगा, जिसकी स्थानीय सीमाओं के भीतर अपराध किया गया हो ।
सबूत का भार.
24. इस तथ्य के सबूत का भार कि कोई धर्मांतरण , दुर्व्यपदेशन , बल , असम्यक असर, प्रपीडन, प्रलोभन के माध्यम से या किसी कपटपूर्ण साधन द्वारा या विवाह द्वारा प्रभावित नहीं है , उस व्यक्ति पर, जिसने धर्मांतरण कराया है और जहां ऐसा धर्मांतरण किसी व्यक्ति द्वारा सुकर बनाया गया हो वहां ऐसे अन्य व्यक्ति पर होगा । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 19 मार्च 2026
284( 16)
अध्याय-पाँच
विशेष न्यायालय
25.
विशेष न्यायालयों का पदाभिदान.
(1 ) इस अधिनियम के अधीन अपराधों के शीघ्र विचारण हेतु, राज्य सरकार, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से , राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अधीन अपराधों के विचारण के लिए प्रत्येक जिले के लिए एक सत्र न्यायालय को विशेष न्यायालय के रूप में पदाभिहित करेगा ।
(2 ) जहाँ किसी क्षेत्र के लिए कोई विशेष न्यायालय पदाभिहित नहीं है, वहाँ प्रादेशिक अधिकारिता वाले सत्र न्यायालय , ऐसे पदाभिदान तक विशेष न्यायालय की शक्तियों का प्रयोग करेगा ।
26.
विशेष न्यायालयों की प्रक्रिया तथा शक्तियाँ.
(1 ) विशेष न्यायालय किसी अपराध का संज्ञान, अभियुक्त को विचारण के लिए उसके समक्ष उपार्पित किये बिना, ऐसे अपराध का गठन करने वाले तथ्यों की शिकायत प्राप्त होने पर या ऐसे तथ्यों की पुलिस रिपोर्ट पर ले सकता है ।
(2) विशेष न्यायालय में प्रत्येक विचारण में कार्यवाहियाँ , सभी उपस्थित साक्षियों की परीक्षा हो जाने तक दिन - प्रतिदिन जारी रखी जाएगी, जब तक कि ऐसे कारणों से , जो लेखबद्ध किये जाएंगे, न्यायालय उन्हें अगले दिन के आगे स्थगित करना आवश्यक न समझेः
परन्तु, जब विचारण इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध से संबंधित हो, तो सुनवाई, जहाँ तक संभव हो, अंतिम प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की तारीख से छः माह के कालावधि के भीतर पूरी की जाएगी ।
विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति.
27 . प्रत्येक विशेष न्यायालय के लिए , राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा , एक विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करेगी । छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2026
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अध्याय-छः
विविध
सद्भावनापूर्वक की गई कार्यवाही के लिए संरक्षण .
28. राज्य सरकार द्वारा सम्यक् रूप से प्राधिकृत अधिकारियों के विरूद्ध , इस अधिनियम के अधीन शक्तियों या कृत्यों के प्रयोग में सद्भावनापूर्वक किए गए या किए जाने हेतु आशयित किसी कार्य के लिए कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं की जाएगी ।
29.
कठिनाइयों का निवारण.
(1 ) यदि इस अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो राज्य सरकार, ऐसे आदेश द्वारा ऐसे उपबंध कर सकेगी या ऐसे निदेश दे सकेगी , जो इस अधिनियम के प्रावधानों से असंगत न हो और जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत होः
परन्तु , ऐसी किसी शक्ति का प्रयोग , इस अधिनियम के प्रारंभ से दो वर्ष की अवधि के पश्चात् नहीं किया जायेगा ।
(
2) उप -धारा (1 ) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, उसके बनाए जाने के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र, विधानसभा के पटल पर रखे जायेंगे ।
30.
नियम बनाने की शक्ति.
(1 ) राज्य सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को क्रियान्वित करने के प्रयोजनार्थ नियम बना सकेगी ।
(2) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए सभी नियम, उनके बनाये जाने के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र, विधानसभा के पटल पर रखे जायेंगे ।
31.
निरसन और व्यावृत्तियाँ.
(1 ) छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968 (क्र. 27 सन् 1968 ) एतद्वारा निरसित किया जाता है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968 (क्र. 27 सन् 1968 ) के अधीन किया गया कोई कार्य या की गई कोई कार्यवाही, इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन किया गया या की गई समझी जायेगी । छत्तीसगढ़ राजपत्र, दिनांक 19 मार्च 2026
284( 18)
उद्देश्य और कारणों का कथन
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 छत्तीसगढ़ राज्य में वर्तमान में लागू छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्रय अधिनियम , 1968 का स्थान लेगा । छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्रय अधिनियम, 1968 में धर्मांतरण उपरांत मात्र जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देना प्रावधानित है । छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्रय अधिनियम , 1968 में जबरन धर्मांतरण को एक संज्ञेय एवं जमानतीय अपराध बनाया गया है । जबरन धर्मांतरण हेतु साधारण दण्ड का प्रावधान है । छ.ग. की भौगौलिक स्थिति , सामाजिक , आर्थिक परिस्थिति एवं समय बीतने के साथ समाज में प्रौद्योगिकी तथा संचार के साधनों के विकास के कारण एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए बल प्रयोग, लालच , कपटपूर्ण रीति को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए प्रचलित छत्तीसगढ़ धर्म स्वातन्त्रय अधिनियम 1968 के प्रावधान वर्तमान परिदृश्य में अपर्याप्त हो जाने से एक व्यापक कानून बनाना आवश्यक हो गया है । रायपुर,
दिनांक 13 मार्च , 2026
विजय शर्मा उप मुख्यमंत्री (गृह) (भारसाधक सदस्य ) छत्तीसगढ़ राजपत्र , दिनांक 19 मार्च 2026
284 (19) प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में ज्ञापन
प्रस्तावित " छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 के खंड-30 में विधायनी शक्ति के प्रत्यायोजन की संस्थापनायें है, जो सामान्य स्वरूप की है ।
दिनेश शर्मा , सचिव, छत्तीसगढ़ विधान सभा संचालक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री , छत्तीसगढ़ द्वारा शासकीय मुद्रणालय, रायपुर से मुद्रित तथा प्रकाशित - 2026.